नेहा से राज की दूरी बर्दास्त नही हो रही थी...नेहा के मेसेज का राज कोई रिप्लाइ नही दे रहा था ...इससे नेहा और भी तड़प जाती है... और फिर नेहा राज को कॉल करती है ....
राज ... हेलो नेहा केसी हो
नेहा ... मत पूछो राज पता नही केसी आग लगा दी तुमने. तुम्हारे बिना बिल्कुल दिल नही लग रहा ....
राज .... तो आ जाओ मेरे पास तुम्हारी सारी
आग बुझा दूँगा
नेहा ... मेरा दिल तो चाह रहा है अभी सबको छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए तुम्हारे पास आ जाऊ. मम्मी पापा से हमारी शादी की कब बात करोगे राज ...
राज ... ऊवू हो नेहा तुम्हे शादी की इतनी जल्दी क्यूँ है पहले दीदी की शादी तो हो जाने दो उसके बाद देखते है ...
नेहा ... तुम क्या जानो मुझपर क्या गुजर रही है एक पल जेसे बरसो समान लगता है
नेहा अपने दिल का हाल राज को सुनाती है
..........
राज के प्यार में पागल नेहा रात भर अपनी शादी के सपने देख रही थी ...
सुबह ज्योति से पहले डॉली की आँखे खुलती है..
ज्योति गहरी नींद में सोई थी डॉली ज्योति के चेहरे को देखते हुए सोचती है ..
कितनी मासूम है हमारी ज्योति अभी इसकी उमर ही क्या है इस उमर में ये किस रास्ते चल चुकी है
...उफफफ्फ़ कैसे समझाऊं इसको ये रास्ता सही नही है ग़लत है ...
बड़ी बहन होने के नाते डॉली का फर्ज़ भी बनता है अपनी छोटी बहन को ग़लत रास्ते पर चलने से रोके ...
डॉली हिम्मत कर ज्योति को समझाने का फेसला करती है और ज्योति का उठने का इंतज़ार करती है ... थोड़ी देर बाद जेसे ही ज्योति नींद से जागते हुए अपनी आँखे खोलती है सामने अपनी दीदी को मुस्कुराते हुए देखती है ...
ज्योति ...हेलो दीदी गुड मॉर्निंग
डॉली...गुड मॉर्निंग ज्योति
डॉली बिल्कुल ज्योति के बराबर में बैठते हुए
डॉली... और बता ज्योति केसा चल रहा है सब कुछ... जब से मेरी जॉब लगी है तुझसे बाते करने का टाइम ही नही मिलता ...
ज्योति ...दीदी मेरा तो सब कुछ फॅंटॅस्टिक चल रहा है ...
डॉली... ज्योति मुझे तुझसे कुछ कहना है ...
ज्योति ... कहो दीदी क्या बात है
डॉली... मुझे तेरी बड़ी फिकर हो रही है और बड़ी बहन होने के नाते मेरा फ़र्ज़ बनता है तुझे ग़लत रास्ते पर चलने से रोकू...
ज्योति समझ तो गई थी दीदी राज के मॅटर पर बात कर रही है ...
ज्योति ...क्या बात है दीदी आपको ऐसा क्यूँ लग रहा है में ग़लत रास्ते चल रही हू ..
ज्योति प्लीज़ मेरी बात को समझने की कोशिश कर तेरी उमर अभी ये सब करने की नही है...
(ज्योति को अपनी दीदी की बाते ऐसे लग थी जेसे सो चूहे खाकर बिली हज को चली कहावत)
ज्योति ... ऊहह दीदी में अब बच्ची नही हू
अपना अच्छा बुरा सब समझती हू आप ज़्यादा टेंशन ना लो..
ज्योति के ऐसे रूखे जवाब सुन डॉली की आँखे भर आती है...
और डॉली भावुक हो जाती है
डॉली... हा अब तो तू बहुत बड़ी हो गई है
अपने सारे फेसले खुद कर सकती है अब मेरा तुझपर कोई अधिकार नही में तेरी अब कुछ नही लगती ....
ये बात कहते हुए डॉली की आँखो से झार झार आँसू बहने लगते है ....
ज्योति जब अपनी दीदी को रोता देखती है
उससे अपनी ग़लती का अहसास होता है ...
ज्योति ... ओह आई एम सॉरी दीदी मुझे माफ़ कर दो मेंने आपका दिल दुखाया है...आज के बाद आपको मुझसे कोई शिकायत नही मिलेगी ...
ये कहते हुए दोनो बहने गले लग जाती है ...
ज्योति ने शायद ये बाते दीदी का दिल रखने
के लिए कही थी मगर ज्योति के अंदर जो
आग लग चुकी थी उसे तो राज का लंड ही बुझा सकता था ...
ज्योति को बस एक मोके का इंतज़ार है ....
थोड़ी देर बाद ज्योति और डॉली फ्रेश होकर
रूम से बाहर निकलती है ...
डॉली राज के साथ ऑफीस के लिए निकल जाती है और ज्योति को लेने आज भी नेहा आती है ....
रास्ते में ज्योति नेहा से उसके सेक्स वाला टॉपिक छेड़ देती है ...
ज्योति ...नेहा एक बात पुछु पहली बार सेक्स करने में केसा लगता है ...
नेहा ... ओह्ह्ह्ह लगता है तेरा मन भी सेक्स करने को उतावला हो रहा है ...
ज्योति ...बता ना कैसे होता है पहली बार
नेहा ... मेरी जान इसके लिए बिल्कुल टेंशन ना लेना बस बेखौफ़ होकर मैदान मे कूद जाना और जितना हो सके सेक्स करने से पहले एंजाय करना उसके बाद जब लगे पूरी तरह भट्टी गरम है ....बिना झिझक हथौड़ा घुस्वा लेना ज़रा सी तकलीफ़ फिर
ज़िंदगी भर आनंद ही आनंद....
ज्योति ... तू तो ऐसे एक्सप्लेन कर रही जेसे तूने सेक्स की डिग्री हासिल कर ली हो ...
नेहा ... और नही तो क्या मेरे पास आगे पीछे ऊपर नीचे सब तरफ की डिग्री है ....
ज्योति ...ऊहह माइ गॉड इसका मतलब तूने पीछे से भी करवा लिया
नेहा ...इतना पॅनिक क्यूँ हो रही है
अनल सेक्स का भी अपना अलग मज़ा है ... ज्योति .... ऊहह नेहा मुझे मालूम नही था तू इतना आगे बढ़ चुकी है ....
यू ही बाते करते करते दोनो फ्रेड कॉलेज पहुच जाती है ....
डॉली और ज्योति के आपसी डीसक़स के कारण
घर में दोनो बहने राज से थोड़ी दूरी बना लेती है ....
राज अपनी दीदी से डेली कहता रात को मेरे पास आ जाना .. मगर डॉली कोई ना कोई बनाना बना देती ...
सुबह राज के पूछने पर डॉली राज से कहती ज्योति के जागते हुए भला कैसे आ सकती थी और बेचारा राज कुछ कह ना पाता ...
ज्योति के लिए तो वैसे भी राज के दिल में कोई ग़लत भावना नही थी... राज ने कभी ज्योति को इस नज़र से देखा भी नही था राज तो अभी तक ज्योति को एक छोटी सी गुड़िया ही समझता था ....
उधर नेहा से जाने क्यूँ राज खुद ही दूरी बनाए हुए था शायद डॉली के प्यार की वजह से नेहा जब भी राज से मिलने के लिए कहती राज अपने आप को बिज़ी बताते हुए टाल देता और नेहा से कहता सनडे को तुम्हारे घर पर मिलते है ना ....
नेहा बेचारी सनडे के इंतज़ार में दिल मासूस कर रह जाती .....
यू ही दिन गुज़रते चले जाते है
सॅटर्डे को डिन्नर के वक़्त मम्मी पापा से कहती है ...
सुषमा...सुनो जी आज भैया का फोन आया था..मम्मी की तबीयत कुछ ठीक नही चल रही बुलाने के लिए बहुत रिक्वेस्ट कर रहे थे ...
पंकज... ये बात है तो फिर चलते है सुबह 4 बजे की ट्रेन से जयपुर निकल जाएँगे....
मम्मी डॉली ज्योति से भी चलने के लिए पूछती है
सुषमा...डॉली ज्योति तुम भी चल रही हो ना हमारे साथ ....
राज एक दम डॉली के चेहरे को देखता है..मगर उससे पहले डॉली खुद ही मना कर देती है ...
डॉली...नही मम्मी ज्योति चली जाएगी आपके साथ मुझे तो अपनी तबीयत कुछ ठीक नही लग रही ....
मम्मी ज्योति की तरफ देखती है ...
ज्योति को लगता है दीदी जान बूझकर रुकना चाहती है तबीयत का तो सिर्फ़ बहाना है.
फिर कुछ सोचकर ज्योति चलने के लिए हा कर देती है ....
ज्योति के हा करते ही राज की खुशी का ठिकाना नही रहता राज का दिल बाघ बाघ हो रहा था ...दीदी ने आज खुद ही रुकने की हाँ कर दी थी ....
डॉली एक दम ज्योति का हाथ पकड़ते हुए उससे उठाने लगती है ...मगर जेसे ही ज्योति खड़ी होती है
ज्योति .... हााईयईईई मर गइइ दीदी मेरा पर मूड गया मुझसे तो चला भी नही जा रहा ....
सुषमा...उफ़फ्फ़ ज्योति तुझसे भी देखकर नही चला जाता .... ओह्ह्ह्ह गॉड अब कैसे करे इसका
पंकज... सुषमा वैसे ही देर हो रही है ऐसा करो ज्योति की बजाय डॉली को अपने साथ ले चलो ....
ऐसे हालत होने पर डॉली को मना करते हुए भी डर लगता है कही पापा को गुस्सा आ गया तो ... ये सोचकर डॉली जल्दी से अपने रूम में पहुचती है और ज्योति के कपड़े बेग से निकाल फटाफट अपने कपड़े रख लेती है ...
और फिर तीनो घर से निकल जाते है ..
मम्मी पापा और दीदी के जाते ही ज्योति मुस्कुराते हुए अपने पैरों पर खड़ी हो जाती है जेसे उसने कोई वर्ल्डकप जीत लिया हो ....
राज अभी तक अपने रूम में सोया हुआ था
और ज्योति आज अपने भैया के साथ कुछ कर गुजरने के बारे में सोचने लगी थी ....
ज्योति ...क्या करूँ में कुछ समझ नही आ रहा कैसे कहूँ भैया से अपनी आग बुझाने को....क्या भैया तैयार हो जाएँगे मेरे साथ करने को ...
ज्योति को कुछ समझ नही आ रहा था
ऐसा क्या करे की खुद ही भैया मान जाय
ये सोचते सोचते ज्योति को 6 बज जाते है ...
तभी ज्योति के दिमाग़ में एक आइडिया आता है
और ज्योति खड़ी होकर अपनी दीदी के कपड़े पहन कर राज के रूम के पास पहूचकर राज को देखती है...राज अभी तक सोया हुआ था..
ज्योति अपना फेस बचाते हुए दरवाज़े पर थोड़ी आहट करती है जिससे राज की आँखे खुल जाती है और राज की नज़रे सीधी दरवाज़े पर डॉली के कपड़े पहने ज्योति पर पड़ती है ..
राज एक दम उतावला होकर बिस्तर से उठ जाता है....
ज्योति भी फटाफट वहाँ से निकालकर सीधी बाथरूम में घुस जाती है और जल्दी जल्दी अपने सारे कपड़े उतार कर शावर के नीचे खड़ी हो जाती है ...
राज अपनी दीदी को देखकर जिस हालत में सोया था... सिर्फ़ अंडरवेर पहने ही अपने रूम से निकलकर दीदी के रूम में पहुचता है ..
मगर दीदी रूम में नही थी तभी राज को बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आती है ...
राज मुस्कुराते हुए ... ओह्ह्ह लगता है दीदी सुबह सुबह मेरे लिए ही नहा कर फ्रेश हो रही है... ये सोचकर राज का लंड खड़ा हो जाता है और राज आहिस्ता से बाथरूम के दरवाजे पर हाथ रखता है ..दरवाज़ा अंदर से लॉक नही था ..राज के हाथ लगते ही दरवाज़ा खुलता चला जाता है...
सामने शावर के नीचे खड़ी ज्योति को डॉली समझ ..राज पीछे से अपनी बाँहो में भरते हुए अपने दोनो हाथ आगे लेजाकर ज्योति की दोनो चुचियाँ मसल देता है ....
ज्योति को डॉली समझ राज ने अपनी आगोश में लिया हुआ था राज का लंड भी अंडरवेर फाड़ कर गान्ड में घुसने को बेताब था.. ज्योति की तो जेसे दिल की तमन्ना पूरी हो गई थी ज्योति को अपना प्लान पूरी तरह कामयाब होता दिख रहा था ..
ज्योति का दिल तो चाह रहा था काश ये पल यही थम जाय ...
मगर फिर ज्योति सोचती है ..
ज्योति...(इससे पहले की भैया की मालूम पड़ जाय में डॉली नही ज्योति हू कुछ करना चाहिए )...
ज्योति अपने प्लान के मुताबिक एक दम ज़ोर से चिल्ला पड़ती है ...
ज्योति ....भैय्ाआआआ ईए तुउउउम्म्म्म
क्याआआआआअ कार्रर्ररर रहीए हूऊऊओ ....
जेसे ही राज को पता चलता है उसकी बाँहो में डॉली दीदी नही ज्योति है राज के तो पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है और राज एक झटके के साथ ज्योति को अपनी बाँहो से अलग कर जेसे ही बाहर जाने के लिए पलट ता है ..
ज्योति को एक दम छोड़ने के कारण ज्योति अपने आप को संभाल नही पाती और धडाम से फर्श पर गिर जाती है ...
ज्योति ...उईईई माआआअ मर गईईईईईईई ..
इस बार ज्योति सच में गिर जाती है और ज्योति को चोट भी लग जाती है...
ज्योति के कराहने के कारण राज पलट कर ज्योति की तरफ देखता है ...
ज्योति बिल्कुल नंगी राज के सामने फर्श पर पड़ी दर्द से कराह रही थी ...
उफ़फ्फ़ राज की तो बिल्कुल समझ नही आ रहा था क्या करे..
ज्योति को नंगी हालत में देखते हुए राज को बड़ी शरम आ रही थी ... मगर फिर भी राज ज्योति को ऐसे तो छोड़कर नही जा सकता था ...
तभी राज को हॅंगर पर टंगा टवल नज़र आता है और राज टवल उतार कर ज्योति के जिस्म को कवर करते हुए .....
राज ....क्या हो गया ज्योति
ज्योति .... आआहह भैया लगता है मेरा पैर मूड गया उउईईई आअहह बहुत दर्द हो रहा है ....
ज्योति को चोट तो लगी थी मगर इतनी भी नही की बर्दास्त ना कर सके ...
ज्योति राज को दिखाने के लिए ही ज़्यादा दर्द से कराह रही थी ....
राज को लगता है ज्योति के साथ जो कुछ हुआ उसका ज़िम्मेदार वो है ...
और खुद को कसूरवार समझकर राज ज्योति से सॉरी बोलता है ..
राज ...आई एम सॉरी ज्योति ये सब मेरी वजह से हुआ है मुझे माफ़ कर दे ....
मगर ज्योति को राज की बातो से कोई फ़र्क नही पड़ता ...बल्कि ज्योति लगातार कराह र्ती रहती है ..ज्योति के लगातार कराहने से राज को बड़ी फिकर होने लगती है. और राज सोचने लगता है कही ज्योति के पर में फ्लेचर तो नही हो गया....
ये सोचते ही राज घबरा जाता है और
ज्योति का हाथ पकड़ कर उसे उठाने की कोशिश करता है ...
राज ... ज्योति खड़ी हो में तुझे रूम तक ले चलता हू ....
ज्योति ... आआहह भैयाअ मुझसे तो खड़ा भी नही होया जा रहा...
राज ... उफफफफ्फ़ ये सब क्या हो गया ......
राज कुछ सोचकर ज्योति को गोद में उठाने की कोशिश करता है और अपने हाथ ज्योति की जाँघो के नीचे लेता है ...
जेसे ही राज के हाथ ज्योति की नंगी जाँघो से टच होते है राज के जिस्म में कंपन सी दौड़ जाती है ....
मगर फिर भी राज ज्योति को अपनी गोद में उठा ही लेता है और ज्योति भी खुद को संभालती हुई अपना एक हाथ जेसे ही राज की गर्दन में लाती है. ज्योति के जिस्म से टवल नीचे गिर जाता है ..
ज्योति फिर से बिल्कुल नंगी हो जाती है..
राज की आँखो के सामने ज्योति की छोटी छोटी चुचियाँ राज के जिस्म को झकज़ोर रही थी ...
राज फिर से टवल उठाने की कोशिश करता है ..
मगर ज्योति को अपने जिस्म पर टवल रखने की बिल्कुल मर्ज़ी नही थी ...
राज का ध्यान टवल हटाने के लिए ज्योति फिर से कराहने लगती है ....
ज्योति .... आअहह म्म्मरररर गग्गीइिईईईईई
ऊओह आऐईयईईईईईईईई उूउउइईईई म्म्म्मिईिइ आआआहह ...
ज्योति की हालत देख राज का ध्यान फॉरन टवल से हट जाता है..और राज ज्योति को ऐसे ही नंगे जिस्म के साथ रूम की तरफ ले चलता है ...
राज ने कभी ज्योति को ग़लत नज़र से नही देखा था मगर आज ऐसे हालत बन जाएँगे राज ने सोचा ना था ...
बाथरूम से रूम तक का सफ़र राज के लिए किसी इम्तिहान से कम नही था...
इतने से सफ़र ने राज के जिस्म को डगमगा दिया था...
राज का लंड पूरी उत्तेजना के साथ खड़ा होकर ज्योति की चूत पर दस्तक देने लगा था .. ज्योति को भी अपनी चूत पर लंड सॉफ महसूस होने लगा था ...
मानो ज्योति की खुशी का कोई ठिकाना नही ज्योति के सारे अरमान आज पूरे होने वाले थे ..ज्योति भी अपना पूरा भार राज के लंड पर डालने लगती है ...
जिससे राज की हालत और खराब हो जाती है ना चाहते हुए भी राज की नज़र बार बार ज्योति के छोटे छोटे बूब्स पर चली जाती है .... ...
कब रूम में आकर राज ज्योति को बॅड के पास ले आता है ज्योति को पता ही नही चलता ...
राज ज्योति को बॅड पर लिटा देता है और बॅड पर पड़ी चादर से ज्योति का जिस्म ढकता है ....
राज ज्योति के पैर को अपने हाथ में लेकर देखता है चोट कहाँ लगी है ...
राज ... ज्योति चोट कहाँ लगी है ...
ज्योति ...भैया बस यही लगी है बहुत दर्द हो रहा है ..
राज .. ठीक है में अभी स्टोर से आयोडेक्स लेकर आता हू तुझे एक दम आराम मिल जायगा ....
ज्योति ... भैया देखो शायद बॅड की दराज़ में मूव रखी है वही लगा दो ...
राज उठकर बॅड की दराज़ में देखता है उसे मूव रखी मिल जाती है ...
और राज मूव लेकर ठीक ज्योति के पैरों के पास बैठ जाता है...थोड़ी सी मूव हाथो में लेकर ज्योति के पैर पर मलते हुए राज ज्योति से कहता है ....
राज ... ज्योति आज जो भी हमारे साथ हुआ प्लीज़ किसी से कहोगी तो नही ...
ज्योति ... ठीक है भैया नही कहूँगी मगर मुझे बताना होगा आपने ऐसा क्यूँ किया ...
ज्योति का ये सवाल सुनकर राज एक दम खामोश हो जाता है ..भला ज्योति से कैसे कहे की ये सब दीदी समझकर तेरे साथ हो गया ....
राज को खामोश देख .....
ज्योति ... भैया कभी आपने किसी लड़की को नंगा देखा है ...
राज ... नही ज्योति
ज्योति ... ओह्ह्ह तो इसका मतलब तुम्हारा दिल किसी लड़की को नंगा देखना चाहता था. यही बात है ना भैया .... .
राज सोचता है दीदी की बात बताने से अच्छा तो ज्योति की हाँ मिलाने में ही भलाई है ..
राज ... हाँ ज्योति तू ठीक कह रही है यही बात है ....
ज्योति .... ओह्ह्ह भैया फिर तो मेरी भी आप जैसी चाहत है मेरा दिल भी किसी लड़के को नंगा देखना चाहता है ...
और ज्योति एक झटके से अपने ऊपर पड़ी चादर उतारकर दूर फेंक देती है ...
ज्योति ... लो भैया देख लो जी भरकर मेरा नंगा जिस्म में किसी से नही कहूँगी ....
राज आँखे फाडे ज्योति के जिस्म को देखने लगता है ज्योति की चुचियाँ राज को उकसा रही थी राज का ऐसा दिल कर रहा था अभी अपने हाथो में लेकर मसल डाले ...
फिर भी राज को लगता है ये ग़लत है ...
राज .... ओह्ह्ह नही ज्योति ये सब ठीक नही है
ये ग़लत है ...
ज्योति ... ओह्ह्ह कम ओंन भैया यहाँ सही ग़लत कहने वाला कौन है ....
राज को और उकसाने के लिए ज्योति अपने हाथ से अपनी एक चुचि मसलने लगती है...
ज्योति के ऐसा करने से राज के सबर का बाँध टूट जाता है...और राज एक झटके से ज्योति के ऊपर आ जाता है और अपने हाथ में ज्योति की दोनो चुचियाँ पकड़कर उन्हे मसलने लगता है ....
अब तो राज खुद भी अपना लंड ज्योति की चूत में डालने को बेताब हो रहा था ...
राज ...ज्योति ये एक मॅजिक है जेसे तुम्हे मेरा लंड बड़ा दिखाई रहा है वैसे तुम्हारी चूत भी अंदर से बहुत बड़ी है देखना चाहोगी ये मॅजिक ....
ज्योति ... ठीक है भैया मगर कुछ होगा तो नही ...
राज ...ज्योति अपने भाई पे भरोसा नही है
ज्योति ...ठीक है भैया.. मुझे आप पर भरोसा है दिखाओ अपना जादू में भी देखना चाहूँगी ..
राज ज्योति के ऊपर आते हुए ज्योति की चूत को अपनी उंगली से देखता है चूत पहले से काफ़ी गीली थी राज फिर भी अपने मूह से ढेर सारा थूक निकालकर ज्योति की चूत पर मलता है और थोड़ा अपने लंड पर भी .. फिर लंड को चूत की फांको में धीरे धीर्रे रगड़ने लगता है ज्योति की साँसे बड़ी तेज़ चल रही थी बस किसी भी पल में उसकी वर्जिनिटी भंग होने वाली थी ....
राज लंड को पूरी तरह चूत में सेट करते हुए ज्योति से कहता है ....
राज ... देख ज्योति हो सकता है पहले झटके में तुझे थोड़ा दर्द हो तू बर्दास्त कर लेना उसके बाद देखना कितना मज़ा आयेगा ...
ज्योति ...जी भैया ठीक है आप झटका मारो ...
ज्योति के कहते ही राज एक जोर्का झटका मार देता है ....
लंड चूत को चीरता हुआ अंदर घुसता चला जाता है ...
ज्योति को इतना दर्द होता है बर्दास्त करते हुए भी ज्योति की चीख निकल जाती है ...
ज्योति .... आअहह मर गईईईई भैय्ाआआ आआहंंननणणन्
ज्योति की चूत बहुत ही कसी हुई थी
राज का लंड भी जेसे चूत में फस ही गया था बिल्कुल आगे पीछे नही हो रहा था ...
राज जहा था वही रुक जाता है और ज्योति के होंटो को चूसने लगता है ...
ज्योति दर्द से बिलबिला रही थी...
काफ़ी देर बाद राज को ज्योति कुछ रिलॅक्स सी लगती है और राज को भी अपने लंड में जगह सी मिलती है ...राज अपने होंटो को ज्योति से जोड़े
हुए ही अपना लंड चूत से थोड़ा सा बाहर
खिचकर धक्के पर धक्के लगाने लगता है ...
ज्योति की वर्जिनिटी टूट चुकी थी ...
ज्योति कली से फूल बन गई थी
राज के लगातार धक्को से ज्योति को भी
अब आनंद आने लगा था ...
ज़रा सी देर बाद ज्योति का जिस्म अकड़ने लगता है ...
ज्योति ... आआआहह ऊहह
सस्स्स्स्स्स्स्स्सीईए उूुुुुुुउउम्म्म्मम
और ज्योति ठंडी सांस लेती हुई झड़ने लगती है ....
राज भी जब झड़ने के करीब पहुचता है फॉरन अपना लंड ज्योति की चूत से बाहर निकाल देता है..अगले ही पल लंड से गाढ़ा गाढ़ा लिक्विड ज्योति के पेट पर गिरने लगता है ...