इस बार ज्योति बाइक पर दोनो तरफ पैर करके बैठती है अभी कॉलेज काफ़ी दूर था
राज ..ज्योति सही में तू ठीक है ना
ज्योति राज की तरफ और सरककर अपने दोनो हाथ राज के कंधे पर रख देती है
ज्योति ..मेरे प्यारे भैया में 100% ठीक हू ...
राज के दिल में अपने लिए इतनी अपनापन देखकर ज्योति को अपने भाई पर बड़ा ही गर्व महसूस हो रहा था
ज्योति राज की तरफ चुंबक की माफिक चिपकती जा रही थी
ज्योति के छोटे छोटे निप्पल राज की कमर में चुभने लगे थे
मगर ज्योति राज से और ज़्यादा चिपके जा रही थी
राज को भी अब ज्योति के निप्पल की चुभन महसूस होने लगी थी इस छुअन ने राज को खामोश कर दिया था
और अचानक ही राज की स्पीड बढ़ने लगी
80-90 की रफ़्तार 5 मिंट में कॉलेज आ जाता है ...
कॉलेज के गेट पर ज्योति के क्लास की लड़कियाँ दोनो को देखती है
राज ज्योति की फीस जमा कर ऑफीस के लिए निकल जाता है
ज्योति की क्लास में एक लड़की थी नेहा ...जिसने ज्योति को राज के साथ देख लिया था
नेहा ...ज्योति कहाँ से मारा ऐसा हॅंडसम लड़का
ज्योति ...क्या बकवास कर रही है वो मेरे भैया है
नेहा.. ओह्ह्ह सॉरी यार में समझी तेरा कोई बाय्फ्रेंड होगा
ज्योति ...तू ना कुछ बोलने से पहले पूछ लिया कर
नेहा ...अब तू अपने भाई के साथ इतना चिपक के बैठेगी तो इसमें मेरी क्या ग़लती है ...वैसे अच्छा हुआ जो तेरा भाई निकला क्यूँकी मेरा दिल आ गया तेरे भाई पर बड़ा हाई हॅंडसम और स्मार्ट है ..यार मेरी फ्रेंडशिप करा दे अपने भाई से
ज्योति ...तू चुप कर और पढ़ाई पर ध्यान दे
नेहा ... अब तो तेरे भाई संग प्यार के पढ़ाई पढ़ूंगी
ज्योति ...देख अगर तू अबकी बार बोली तो में उठकर टीना के पास चली जाउन्गी
नेहा ...अच्छा बाबा नही बोलती कुछ मगर यार तेरा भाई मेरे दिल को एक नज़र में भा गया है ...और ये कहकर नेहा चुप हो जाती है ....
कॉलेज की छुट्टी के बाद ज्योति घर जाने के लिए बस का वेट कर रही थी
तभी उसके सामने नेहा अपनी कार रोकती है
नेहा..आ बैठ ज्योति आज में तुझे घर छोड़ देती हू
ज्योति ...क्या बात है आज से पहले तो तूने कभी लिफ्ट नही दी
नेहा ...बैठ ना ज्योति क्यूँ नखरे दिखा रही है ..
ज्योति नेहा की कार में बैठ जाती है
नेहा ..ज्योति तुम्हारे घर में कौन कौन है
ज्योति ..मम्मी है पापा है .और डॉली दीदी
नेहा ..और
ज्योति ..बस
नेहा ..भाई का क्या नाम है
ज्योति ..राज
नेहा ...क्या करते है तुम्हारे भैया
ज्योति ...नेहा आज तुझे क्या हो गया है जबसे भैया को देखा है बस उनके बारे में ही बात कर रही हो
नेहा ...पता नही यार तेरे भाई ने क्या ज़ादू सा कर दिया मुझपर लगता है तेरे भाई से प्यार हो गया मुझे ...
ज्योति ..ऐसे होता है प्यार
नेहा ..हा ऐसे ही होता है प्यार..अपने भाई का नंबर दे ना प्लीज़
ज्योति ...तू पागल मत बन .. देख मेरा घर आ गया मुझे यही उतार दे
नेहा गाड़ी रोकती है
ज्योति ...थॅंक आ लॉट
नेहा ..अपने घर नही बुलाएगी
ज्योति ...मेंने कब मना किया है आ जा चाय पीकर जाना
नेहा ...फिर कभी पीउँगी जब तेरा भाई होगा घर पर
नेहा ज्योति को छोड़ वहाँ से चली जाती है
ज्योति अंदर पहुचती है
डॉली ...ज्योति गाड़ी में कौन था तेरे साथ
ज्योति ...मेरे कॉलेज की फ्रेंड नेहा
डॉली ..बाहर से क्यूँ जाने दिया अंदर चाय तो पीला कर भेजती
ज्योति ...दीदी उसको देर हो रही थी ना
डॉली ...चल तू फ्रेश हो जा में खाना लगाती हू
ज्योति अपने रूम में पहुच अपने कपड़े उतार कर देखती है एक घुटने में हल्की सी खरॉच आई हुई थी ...
ज्योति फ्रेश होकर बाहर आती है मगर ज्योति डॉली को अपनी चोट के बारे में कुछ नही बताती दोनो बहने साथ खाना खाते है
डॉली ...ज्योति पता नही राज ने अपने बॉस से बात की होगी या नही
ज्योति ...दीदी राज भैया जो कहते है वो करते है तुम देखना कल से जॉब पर जाओगी
डॉली ... काश ऐसा ही हो ...
शाम के 7 बज चुके थे मगर राज अभी तक घर नही आया था
आज डॉली राज की राह देख रही थी बार बार घड़ी की तरफ नज़र पहुचती थी
करीब 8 बजे राज घर पहुचता है डॉली किचिन में खाना बना रही थी
ज्योति बिस्तर से उठकर किचिन में चाय बनाने पहुचती है
जेसे ही चाय बनाने की लिए दूध का भगोना उठाती है ज्योति का मन बदल जाता है और ज्योति दूध गरम कर दो ग्लास में करती है और दोनो ग्लास लेकर राज के रूम में पहुचती है ...
राज लोवर बनियान पहने अपने बॅड पर लेटा मोबाइल चला रहा था ...
ज्योति ..भैया लो गरमा गरम दूध पीजिए ...
राज ...क्या बात है ज्योति तुझे पता था में जाग रहा हू ...
ज्योति ...हा मुझे पता था तुम मेरा वेट कर रहे होंगे
राज ज्योति के हाथ से दूध का ग्लास ले लेता है और दोनो दूध पीने लगते है
दूध पीकर राज ज्योति को बैटाडिन ट्यूब देता है
राज ... में लगा दूँ ट्यूब
ज्योति ..ठीक है भैया आप ही लगा दीजिए
ज्योति ठीक से बॅड के ऊपर बैठ जाती है और अपना लोवर ऊपर करती है
राज अपनी उंगली में थोड़ी सी ट्यूब निकालकर ज्योति की खरॉच पर लगता है ....
ज्योति ...भैया एक बात पुछु अगर बुरा ना मानो तो
राज...मेंने कभी तेरी बात का बुरा माना है क्या पूछ क्या बात है
ज्योति ..भैया आपकी कोई फ्रेड नही है ..
ज्योति के इस सवाल से राज चौंकता है
राज ..नही में इन चक्करो में नही पड़ता
ज्योति ..क्यूँ भैया आप तो इतने स्मार्ट हो आपको तो कोई भी मिल जाएगी
राज ...क्या करना है फ्रेड्सीप करके में ऐसे ही खुश हू ज्योति
ज्योति ...फिर भी कोई तो होना चाहिए जिससे अपने दिल के बाते कर सके
राज ...तू है ना बाते करने के लिए
ज्योति ...फिर तो भैया आप मुझसे ही फ्रेंडशिप कर लो
राज ...तू ना बिल्कुल पागल है भला भाई बहन में भी कोई फ्रेंडशिप होती है ...
ज्योति ..क्यूँ नही हो सकती आज से में तो तुमको फ्रेड बुलाउंगी ...
राज ...चल अब जाकर सो जा बहुत रात हो गई
ज्योति ..कैसे जाओ मेरा घुटना बहुत दर्द कर रहा है
राज ..अब ज़्यादा नाटक मत कर अपने रूम में जाकर सो जा
ज्योति ..सच में भैया बहुत दर्द हो रहा है या तो मुझे गोद में उठा कर छोड़ आओ नही तो में यही सो जाती हू ...
राज ...ओह्ह्ह गॉड केसी ज़िद्दी लड़की है ज्योति प्लीज़ मान जा सोने दे
ज्योति ...भैया मेंने कब मना किया है गोद में उठा कर छोड़ आओ ना
राज ...ज्योति दीदी क्या सोचेगी
ज्योति ..भैया दीदी तो कब की सो चुकी है
राज बॅड से उठता है और ज्योति को उठाने के लिए अपने हाथ बढ़ाता है
ज्योति अपने दोनो हाथ राज के गले में डालती है और राज ज्योति के कूल्हे पकड़कर अपनी गोद में उठा लेता है और ज्योति को लेकर अपने रूम से निकलता है
राज को बड़ा अज़ीब लग रहा था मगर ज्योति की ज़िद के आगे बेबस था ...
ज्योति को बड़ा मज़ा आ रहा था अपने भैया को परेशान करने में
राज ज्योति के रूम में पहुचता है डॉली गहरी नींद में सोई थी राज आहिस्ता से ज्योति को बॅड पर लिटाता है और जल्दी से रूम से बाहर निकल जाता है ......
राज मन में बड़बड़ाता है
राज ....ओह थॅंक्स गॉड ये लड़की मरवैईयगी एक दिन
सुबह डॉली जींस टॉप पहन कर राज के साथ निकल जाती है और ज्योति बेचारी अकेली कॉलेज के लिए बस का वेट कर रही थी
आज ज्योति को बस से कॉलेज जाना अच्छा नही लग रहा था..
बार बार राज भैया का ही ख़याल आ रहा था ..
राज के साथ कैसे बाइक पर कॉलेज जाती थी .. शायद अब ज्योति को राज का साथ नसीब ना हो ..
तभी एक बस ज्योति के सामने रुकती है बस में बहुत भीड़ थी ज्योति मोबाइल में टाइम देखती है कॉलेज को देर हो रही थी
बस पूरी खचाखच भरी हुई थी ज्योति चारो तरफ से भींच गई थी ...
ज्योति अपने मन में बड़बढ़ाती है
उफफफ्फ़ कहाँ फस गई में आज
तभी ज्योति को अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस होता है ज्योति पलट कर देखती है एक 50-55 साल का आदमी खड़ा था
आदमी ...बेटा इधर खड़ी हो जो यहाँ थोड़ी जगह है
ज्योति बड़ी मुश्किल से खिसकती हुई उस आदमी के पास खड़ी हो जाती है
ज्योति को खड़े हुए कुछ पल ही हुए थे अचानक ज्योति के कूल्हे पर कुछ चुभने लगा ज्योति एक दम पलट कर देखती है
वही आदमी था ज्योति उस आदमी को अपनी आँखे दिखाते हुए गुस्से से देखती है ..
वो आदमी बेचारा अपनी नज़र झुका लेता है और धीरे से बोलता है
आदमी ...बेटा अगर कोई परेशान है तो अगले स्टॉप पर तुझे शीट मिल जाएगी ..
ज्योति मन ही मन बड़बढ़ाती है ...
साला ठर्की बुड्ढ़ा
शायद ज्योति के जिस्म की गर्मी थी जिसने बुड्ढे का लंड को खड़ा कर दिया था और भीड़ की वजह से ज्योति के चूतड़ बार बार लंड से रगड खा रहे थे जिस वजह से बुड्ढे का लंड खड़ा हो गया था और ज्योति आगे भी नही खिसक सकती थी भीड़ बहुत थी खड़े लंड का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था ..उस आदमी का लंड भी शायद अब उसके बस में नही था क्या करता बेचारा ..
तभी लंड ने ज्योति की दरार में अपनी जगह बना ली ज्योति को हल्का सा दर्द महसूस हुआ ज्योति पलटने की कोशिश करने लगी ..तभी अचानक ज्योति के पीछे से दबाव हट जाता है वो आदमी एक साइड होकर खड़ा हो गया था ...
ज्योति को उस आदमी का ऐसा करना अब लगता है जेसे वो जान बुझे कर ये सब नही कर रहा था ...
ज्योति सोचती है बिना ग़लती के अपने बाप समान आदमी पर गुस्सा हो गई ...
ज्योति पलट कर उस आदमी को देखती है जेसे ही उस आदमी से ज्योति की नज़र मिलती है ..
आदमी ..बेटा अभी आगे वाली शीट खाली हो जाएगी तुम वहाँ बैठ जाना...
ज्योति अब थोड़ा रिलॅक्स लग रही थी
थोड़ी देर बाद ज्योति का कॉलेज आ जाता है और ज्योति बस से उतर जाती है ..और मुस्कुराते हुए कॉलेज में एंटर हो जाती है
...
दूसरी तरफ डॉली भी राज के साथ ऑफीस पहुच चुकी थी...
राज और डॉली इस वक़्त बॉस के सामने खड़े थे
बॉस ..अच्छा तुम्हारा नाम है डॉली
डॉली ...जी सर
बॉस ... तुम्हे कोई एक्सपीरियेन्स है इस जॉब का
डॉली ... सर में फर्स्ट टाइम जॉब कर रही हू मगर मुझे अपने ऊपर पूरा कॉन्फिडेंट है में ये जॉब बहुत अच्छे से कर सकती हू ..आपको कोई शिकायत नही मिलेगी ..
बॉस... गुड डॉली मुझे ऐसा ही कॉन्फिडेंट वाली लड़कियाँ पसंद है.. तुम अभी से ये जॉब जाय्न कर सकती हो ...
डॉली ...थॅंक यू सर
बॉस ... वेलकम डॉली
बॉस ..राज डॉली को सब रूल्स समझा देना
राज ...जी सर ठीक है ...
और दोनो बॉस के रूम से बाहर निकलते है डॉली को यक़ीन नही आ रहा था इतनी आसानी से जॉब मिल गई बाहर निकलते ही डॉली खुशी के मारे राज के गले लग जाती है .....
राज ...दीदी क्या कर रही हो ये ऑफीस है कोई देखेगा तो क्या समझेगा
डॉली ...राज इतनी आसानी से मुझे जॉब मिल गई खुशी के मारे में पागल हो जाउन्गी थॅंक यू राज ..
राज ..बस बस दीदी अपनी खुशी घर पर जाहिर कर लेना
राज डॉली को ऑफीस के सब रूल्स समझाता है कैसे रेसेप्सनिस्ट की जॉब डॉली को करनी है ...
उधर दूसरी तरफ ज्योति के कॉलेज में हाफ प्राइड ख़तम हो चुका था ..
ज्योति और नेहा केंटीन में साथ आइसक्रीम खा रही थी
नेहा ...ज्योति सनडे को मेरे मम्मी पापा की 25 वी आनिवर्सरी है ..इस खुशी में मेरे घर पार्टी है और तू ज़रूर आयगी
ज्योति ..ठीक है नेहा में ज़रूर आउन्गी
नेहा ...और हा अपने भाई राज को भी साथ लेकर आना
ज्योति ...अकेली तो आ नही सकती भाई को तो लाना ही पड़ेगा ...
नेहा ज्योति की बात सुन मुस्कुरा देती है
जेसे नेहा के मन की मुराद पूरी हो गई ..
कॉलेज के बाद ज्योति घर जाने के लिए फिर से बस का वेट कर रही थी ...
नेहा आज भी अपनी कार लाकर ज्योति के सामने रोकती है
नेहा ...बैठ ज्योति में ड्रॉप करती हू तुझे
ज्योति ..क्यूँ परेशान होती है नेहा में चली जाउन्गी
नेहा ... बैठ ना क्यूँ नखरे कर रही है ..
ज्योति नेहा की कार में बैठ जाती है
ज्योति ... नेहा मुझे घर छोड़ने में तुझे देर हो जाती है
नेहा ...तो क्या हुआ मेरी जान अब तो तुझसे मेरा रिस्ता बहुत कुछ ख़ास् बन गया है ...
यू ही बाते करते हुए ज्योति का घर आ जाता है नेहा गाड़ी रोकती है
ज्योति ..नेहा आ कुछ चाय ठंडा पीकर जाना..
नेहा ..खाली चाय ठंडे से काम नही चलेगा जब आउन्गी तो खाना खाकर भी जाउन्गी ...
और नेहा ज्योति को छोड़कर चली जाती है ...
सुषमा ...आ गई ज्योति बेटा खाना लगाऊ तेरे लिए
ज्योति ...मम्मी पहले में नहा कर फ्रेश हो जाती हू
सुषमा ...ठीक है बेटा
ज्योति अपने रूम में पहुच कर कंधे से बेग उतार टेबल पर रखती है
और अपनी ड्रेस वही रूम में उतार देती है ज्योति पर जवानी फूटने लगी थी चुचियाँ अब सेब का आकर ले चुकी थी ड्रेस उतारकर ज्योति की नज़र अपने जिस्म की गोलाइयाँ पर पड़ती है ज्योति की चुचि पर निप्पल बिल्कुल तन कर खड़े थे जिन्हे देखकर आज तो ज्योति भी खुद से शरमा जाती है ...
डॉली मुस्कुरा देती है कितना प्यार करता है राज अपनी बहनो से किसी भी बात को फॉरन मान जाता है ... ...
और फिर दोनो घर की तरफ निकल पड़ते है ..
घर पहूचकर राज फ्रेश होने अपने रूम में चला जाता है ..
डॉली वही मम्मी पापा ज्योति से अपनी जॉब की तारीफ़ करती है और सबको अपने हाथो से मिठाई का डब्बा खोलती है और एक मिठाई मम्मी को खिलाती है ...
सुषमा ...चलो अच्छा है डॉली बेटा तू खुश तो है ना
डॉली ..मम्मी में बहुत खुस हू
फिर डॉली एक मिठाई अपने पापा के मूह में रखती है
पंकज भी डॉली की खुशी देखकर ...
बेटा हम भी तेरी खुशी में खुश है जी भरकर जी ले अपनी ज़िंदगी...
फिर डॉली ज्योति को खिलाती है
ज्योति ...दीदी राज भैया को तो खिलाओ पहले उनकी वजह से मिली है तुम्हे इतनी खुशियाँ
और डॉली मिठाई लेकर राज के रूम में पहुचती है ...
राज अभी बाथरूम से फ्रेश होकर बाहर निकला था राज सिर्फ़ अंडरवेर पहने हुए था
डॉली रूम में आ जाती है
डॉली ...लो राज तुम भी मिठाई खाओ
राज ...अर्रे दीदी आप में तो अभी फ्रेश होकर बाहर ही आ रहा था ...
डॉली ...में आ गई तो क्या हुआ लो मूह खोलो और डॉली एक टूकड़ा राज के मूह में रखती है
राज आधी मिठाई खाकर बाकी अपनी दीदी को खाने के लिए कहता है ..
डॉली ..तुम खा लो राज में बाद में खा लूँगी
राज ...अच्छा दीदी तुमको मेरी झुटि मिठाई नही खानी
और डॉली राज की बात सुन हस पड़ती है
डॉली...मेरी बात मुझी पर मार दी
डॉली राज के बिल्कुल करीब पहुचती है
और डॉली अपना मूह खोल देती है राज बाकी मिठाई का टुकड़ा डॉली के मूह में रख देता है ...डॉली को राज पर इतना प्यार आया की एक दम डॉली ने राज के गालो को चूम लिया ...और जल्दी जल्दी में पलट कर जाने के चक्कर में पर फिसल गया डॉली धडाम से नीचे गिर गई ...
डॉली ...उूउउइईईई मररररर गई राज अब देखता रहेगा या मुझे उठाएगा भी
राज जल्दी से दीदी का हाथ पकड़कर उठाता है
राज... दीदी आप शैतानी कर रही थी ना इसलिए आपको लगी है
डॉली ..में क्या शैतानी कर रही थी
राज .. बताऊं दीदी
डॉली...हू बता क्या है
और राज नीचे झुकते हुए अपने होंटो से डॉली के गाल चूम लेता है डॉली नीचे पड़ी पड़ी भोचकी सी राज को देखती रह जाती है राज कपड़े पहन कर बाहर आ जाता है ....
रात को डॉली ज्योति को बताती है अपनी जॉब का पहला दिन कैसे बॉस उसकी बातों से इंप्रेस हो गया था और एक ही पल में जॉब ऑफर कर दी थी ...
डॉली को बड़ी खुशी हो रही थी बताने में मगर आज ज्योति कॉलेज फिर किचिन में खाना बनाकर थक गई थी डॉली की बाते सुनते सुनते कब नींद आ गई पता ही नही चला ....
ज्योति को सोते देखकर डॉली के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है और डॉली भी लाइट बंद कर ज्योति के बराबर में लेट जाती है
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सुबह सबसे पहले ज्योति की आँख खुलती है
ज्योति की नज़र घड़ी की तरफ जाती है सुबह के 6 बजने वाले थे ज्योति उठकर राज के रूम में पहुचती है...
मगर राज रूम में नही था
ज्योति ..ये राज भैया सुबह सुबह कहा चले गये
ज्योति ..(बाथरूम में आवाज़ लगाती है) भैया क्या तुम बाथरूम में हो
मगर अंदर से कोई आवाज़ नही आई
ज्योति राज किचिन में जाकर देखती है वहाँ भी राज नही था
ज्योति परेशान सी हो जाती है ....ये सुबह सुबह भैया कहा चले गये
तभी सूचती है कही छत पर तो नही चले गये और ज्योति राज को देखने छत पर पहुचती है ...
राज छत पर ही था एक्सरसाइज़ कर रहा था राज का नंगा बदन पसीने से नहाया हुआ था ..
ज्योति पीछे खड़ी चुपचाप राज को पुश अप करते हुए देखने लगती है ..
ज्योति को बड़ा मज़ा सा आ रहा था राज को देखने में
ज्योति मन में राज की पुश अप काउंट करने लगती है
12345......15 ......28.......35.....55.....
तभी ज्योति के मूह से काउंटिंग की आवाज़ बाहर आ जाती है 65. 66 .67
और राज ज्योति की आवाज़ सुन बैठते हुए पलटकर पीछे देखता है ...
राज ...अर्ररे ज्योति तू क्या कर रही है
ज्योति ...अपने भैया को एक्सरसाइज़ करते देख रही हू ..
भैया आप कैसे कर लेते हो इतनी पुश अप मुझसे एक भी नही होगी
राज ...डेली करते हुए आदत हो जाती है ..
ज्योति ...भैया क्या में भी कर सकती हू पुश अप
राज ... क्यूँ नही कर सकती ...मगर पुश अप करके तुझे कौन सा WWF खेलनी है ...
ज्योति ..भैया पता नही कब काम आ जाये..
राज ...अच्छा चल पहले अपने दोनो हाथ ज़मीन पर टीका
ज्योति नीचे झुकते हुए दोनो हाथ ज़मीन पर रखती है
ओह माइ गॉड झुकने के कारण ज्योति का टॉप आगे से पूरा राज की आँखो के सामने आ जाता है राज एक दम अपनी नज़र वहाँ से हटा लेता है और खड़े होकर ज्योति के पर एक जगह मिलकर...
राज ...ज्योति अब अपनी पूरी बॉडी का वजन हाथो में लेकर पुश अप करो
ज्योति एक बार पुश अप करती है मगर दूसरी बार में ही धम से गिर जाती है
ज्योति ....ऊवू भैया ये मुझसे नही होगा
पता नही तुम कैसे कर लेते हो
राज ...चल कोई नही फिर कभी ट्राइ करना
ज्योति ...भैया मुझे तुमसे बात करनी थी
राज ..हा बता
ज्योति ...मेरी फ्रेड है नेहा सनडे को पार्टी है उसके यहाँ आपको मेरे साथ चलना है ...
राज ...तेरी फ्रेड के यहाँ मेरा क्या काम तू चली जाना
ज्योति ...भैया प्लीज़ वैसे भी सनडे है उस दिन मेरी खातिर चलना
राज ...अच्छा बाबा इतनी रेक्वेस्ट ना किया कर
दोनो बहनो की ज़रा सी ज़िद से ही राज मान जाता है ..