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Incest फूफी और उसकी बेटी से शादी

अगले दिन सुबह मैं होटल जाने के लिए तैयार होने लगा। हम सब बहुत खुश थे खास करके शाजिया। क्योंकी कल उसकी और मेरी शादी थी। मैं थोड़ा नर्वस था, क्योंकी मुझे तो दो-दो शादियां करनी थी।

फूफी थोड़ा दुखी थी क्योंकी उनकी शादी की तारीख तीन दिन बाद की थी इसलिए मैं होटल जाने के लिए तैयार हो रहा था। शाजिया बाथरूम में थी। वो इतनी उत्तेजित थी अपनी शादी के लिए की उसने एक हफ्ते स्कूल ना जाने का फैसला किया। फूफी किचेन में थी वो थोड़ी दुखी थी तो मैंने सोचा उनका मूड थोड़ा बना दूं। तो मैं किचेन में गया ।

फूफी मुझे देखकर बोली- “टिफिन तैयार है लेकर जाना....

मैं- “मैं यहां कुछ और बात करने आया हूँ.

फूफी- "कौन सी बात?"

मैं- “तुम इतना दुखी क्यों लग रही हो? मुझे बताओ। मैं तुम्हारा होने वाला पति हूँ। मैं तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश करूँगा..."

फूफी- "रहने दीजिए। आप नहीं मानेगे ."

मैं- “तुम कहकर तो देखो मेरी रानी..."

फूफी- "ऐसे बात है तो सुनिए। मैं नहीं चाहती की आपकी और शाजिया की शादी हो..."

मुझे ये सुनकर झटका लगा। अभी तक तो सब कुछ अच्छा चल रहा था अचानक ये फूफी को क्या हुआ?" मैं ये सोच रहा था की शायद फूफी और शाजिया की शादी की वजह से दुखी हैं।

मैंने पूछा- "क्यों तुम तो खुश थी हम सबकी शादी हैं, पर ये तो मेरी सोच से उल्टा हो रहा है

फूफी- "हाँ मैं खुश थी मेरी बेटी की शादी हो रही है, वो भी उससे जिसे वो प्यार करती है। पर थोड़ी देर बाद मुझे एहसास हुआ की अगर मेरी बेटी की शादी मुझसे पहले आपसे हो गई तो बाद में मैं उसकी सौतन कहलाऊँगी। अब आप ही बताइए कैसा लगेगा जब माँ ही बेटी की सौतन हो। हमारा रिश्ता माँ बेटी का है और अब हम दोनों सौतनें कहलाएंगी। बस यही सोचकर मुझे बुरा लग रहा है..."

मैं- "मेरी रानी, तुम्हारी बात तो ठीक है। पर हम तीनों की शादी के बारे में किसी को पता ही नहीं चलेगा, तब तुम्हें सौतन कौन बुलाएगा?"

फूफी- "अरे... पर मेरा मन तो ये जानता है ना और मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा की मैं किसी की सौतन बनूं। जबकी आपकी और मेरी शादी की बात पहले से हो रही थी..."

मैं- “तो तुम क्या चाहती हो साफ-साफ बताओ?"

फूफी- "मैं यही चाहती हूँ की आप पहले मुझसे शादी करें शाजिया से बाद में करें..."

मैं- "नहीं-नहीं, ये नहीं हो सकता। तुम जानती हो शाजिया बहुत दिनों के बाद मानी है। हमारा रिश्ता इतने दिनों बाद ठीक हुआ है और अगर मैंने उससे शादी अभी नहीं की तो वो हमेशा के लिए नाराज हो जाएगी..."

इन दोनों से शादी की बात से वैसे ही मैं बहुत नर्वस था। ऊपर से फूफी नौटंकी कर रही थीं। मुझे गुस्सा आ गया।

मैंने फूफी से कहा- "तुम दोनों मुझसे प्यार करती हो और मैं दोनों से शादी के लिए तैयार भी हूँ। पर जो तुम कर रही हो उससे मुझे और टेन्शन हो रही है। अगर तुम चाहती हो की मैं तुमसे शादी करूं तो तुम मेरी और शाजिया की शादी अच्छे से हो जाने दो। नहीं तो मैं किसी से शादी नहीं करूँगा। मुझे इतनी टेन्शन चाहिए ही नहीं..."

फूफी- "नाराज ना होइए राजा जी मैं बस अपना दुख आपको सुना रही थी बस और कुछ नहीं। शादी जैसे तय हुई है वैसे ही होगी। आप इतना टेन्शन ना लो...”

मैं- “ठीक है। मैं होटल जा रहा हूँ। अगर कोई सामान चाहिए होगा तो मुझे फोन करना...
 
जब मैं किचेन से निकला तो मैंने देखा शाजिया दरवाजे के पास छुपकर सब सुन रही थी। जैसे ही उसने मुझे देखा वो रोते-रोते वहां से चली गई।

यार अब कौन सी मुसीबत आ गई? मैं भी शाजिया के पीछे-पीछे गया तो वो गार्डन में खड़े होकर रो रही थी।

मैंने पूछा- "क्या हुआ शाजिया क्यों रो रही हो?"

शाजिया- "मैंने आपकी और अम्मी की सारी बातें सुनी। मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है की मेरी अम्मी मुझसे इतना जलती है। वो आपकी और मेरी शादी रोकना चाहती है। मुझे उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी "

मैं- “रो मत शाजिया... फूफी बस इस बात से दुखी है की शादी के बाद तुम उनसे रिश्ते में बड़ी हो जाओगी और वो तुम्हारी सौतन कहलाएगी..."

शाजिया- मैंने सब सुना, पर मैंने ये उम्मीद नहीं की थी की वो मेरी शादी तोड़ना चाहेगी। मैं उन्हें कभी माफ नहीं करूँगी..."

मैं- "नहीं शाजिया, तुम गलत समझ रही हो..."

फिर शाजिया को थोड़ा समझाने के बाद वो फूफी से नाराजगी खतम कर लेती है।

मैं- “अच्छा शाजिया, अब मैं होटल जा रहा हूँ..”

शाजिया- "ठीक है जाइए..."

पर मुझे किस देने के बाद इतनी देर बाद ये सुनकर मेरा मूड ठीक हो गया।

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आज की सुबह कुछ ज्यादा ही टेन्शन और कन्फ्यूजन से भरी थी। शाजिया की किस पाकर सब कुछ ठीक हो गया। अब में जोश के साथ होटल जा सकता हूँ। मैं शाजिया से किस लेने के बाद होटल निकला। थोड़ी देर बाद होटल पहुँच गया। वहां मेम मेरा इंतजार कर रही थी।

मेम- "क्या करते हो वसीम इतनी देर लगा दी होटल आने में?"

मैं- “सारी मेम, वो कुछ घर के काम में फँस गया था...*

मेम- "तुम जानते हो मुझे तुम्हारा सारी कहना पसंद नहीं है फिर भी तुम क्यों बोलते रहते हो? तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो, मैं तुमसे नाराज नहीं हो सकती। चलो हमें आज कानपुर जाना है। हमारी होटल की एक और ब्रांच खुल रही है वहां, तो मीटिंग है कानपुर में..."

मैं- "ठीक है मेम, चलिए..."

…………………………….

थोड़ी देर बाद मेम और मेरे साथ दो और लोग कानपुर के लिए निकले। कानपुर रास्ता बस दो घंटे का है। इसलिए हमारा काम एक दिन में ही पूरा हो गया, उस दिन मैंने और मेम ने खूब एंजाय किया। रात के 8:00 बजे मैं अपने घर पहुँच भी गया। मेम और मेरे बीच कुछ तो है की हम दोनों एक दूसरे के कुछ ज्यादा ही करीब आ रहे थे। पता नहीं क्या है, पर कुछ तो था हम दोनों के बीच मेरी और उनकी दोस्ती आगे बढ़ रही थी।

रात भर हम लोग बहुत उत्तेजित थे। क्योंकी कल मेरी और शाजिया की शादी थी। बस फूफी थोड़ी अपसेट थी शादी की बात सोचकर तो हमें नींद भी नहीं आ रही थी। देर रात तक हम लोग एक दूसरे से बातें करते रहे। शादी के बारे में बातें करते-करते हम लोग सो गये।

……………………………………
 
शादी के दिन सुबह हम तीनों जल्दी उठ गये। शाजिया बहुत खुश थी और मैं भी शादी हमारे घर से दूर एक मस्जिद में थी।

3:00 बजे तक शादी की सारी तैयारी हम लोग कर चुके थे। मैंने मेम से एक हफ्ते की छुट्टी भी ले ली थी। सब कुछ पर्फेक्ट चल रहा था। शाजिया ने कल फूफी के साथ मिलकर मेहन्दी भी लगवा ली थी, और आज वो फूफी के साथ पार्लर भी जा रही थी। ऐसा लग रहा था की टाइम बहुत धीमे-धीमे बीत रहा है। 11:00 बजे शाजिया और फूफी पार्लर चली गई।

मैंने सोचा काजी को एक बार फोन कर लूँ। वैसे मैंने कल होटल से आते वक्त ही काजी को अपनी शादी के लिए कह दिया था।

सब ठीक था। थोड़ी देर बाद मैं तैयार होने लगा। दो घंटे बाद शाजिया सज-धज के आ गई। उसके साथ फूफी भी थी उन्होंने भी हल्का फुल्का मेकप किया था। अब शाजिया अपनी शादी का जोड़ा पहनने चली गई।

शाजिया दो बजे पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी। जब मैंने उसे देखा तो देखता ही रह गया। वो बहुत खूबसूरत लग रही थी। एक तो शाजिया वैसे ही सुंदर है, ऊपर से मेकप में और शादी के जोड़े में वो क्यामत लग रही थी।

मैंने शाजिया से कहा- "बहुत सुंदर लग रही हो..."

शाजिया ये सुनकर शर्माने लगी, और कहा- “आज आप भी कुछ ज्यादा ही हैंडसम दिख रहे हैं..."

थोड़ी देर बाद टैक्सी आ गई जो मैंने बुक करा रखी थी। हम तीनों उसमें बैठकर मस्जिद पहुँच गये। वहां पे पहले से काजी ने शादी की सारी तैयारी कर रखी थी। मुहूरत का टाइम हो चुका था।

टाइम ना वेस्ट करते हुए हम दोनों मंडप में बैठ गये, और काजी ने शादी की खुतबा-ए-निकाह पढ़ना शुरू कर दिया। करीब-करीब एक घंटे में हमारी शादी हो गई। मैंने शाजिया के साथ सूरह अल-अहजाब सुनी और उसके बाद और फिर मेहर तय की गई और हमारा निकाह पूरा हो गया ।

शाजिया और मैं बहुत खुश थे की आखीरकार, हमारी शादी हो ही गई। फूफी हमारे साथ ही थी, वो भी खुश थी की उनकी बेटी की शादी हो गई। पर वो अंदर ही अंदर दुखी थी की उनकी शादी बाद में होगी।

हम लोग उसी टैक्सी से घर पहुँचे। फूफी पहले घर के अंदर गई, कलश लेने के लिए। शाजिया ने अपने पैरों से कलश को गिरा के गृस प्रवेश किया। सुबह से इतनी भाग-दौड़ करके हम लोग थक चुके थे, तो हम लोग आराम करने लगे।

मैंने खाना आर्डर दे दिया। थोड़ी देर में खाना आ भी गया और सबने खाना खा भी लिया। लगभग शाम हो चुकी थी। मैं तो बस शाम होने का ही इंतजार कर रहा था। क्योंकी अब टाइम था सुहागरात का ।

मैंने शाजिया से कहा- “शाम हो गई, तुम तैयार हो ?"

फूफी किचेन में कुछ कर रही थी।

तभी शाजिया ने कहा- "सुनिए जी... मुझे

मैं- “हाँ बताओ क्या कहना चाहती हो?"

शाजिया- "वो मुझे अम्मी के सामने वो सब करते अच्छा नहीं लगेगा..."

मैं- "इसमें शर्माने की क्या बात है? दो दिन बाद तुम भी उन्हें पूरा नंगी देखोगी "

शाजिया- "मैं सुबह से देख रही हूँ की वो ज्यादा खुश नहीं है हमारी शादी से। उन्होंने तो मेरी शादी तोड़ने की कोशिश भी की थी। मैं अपनी इतनी इंपार्टेंट रात उनके यहां रहते हुए नहीं बिताना चाहती हूँ."

मैं- "तुमने तो कहा था की तुमने उन्हें माफ कर दिया है और छोड़ो भी गुस्सा चलो हम तीनों मिल के मजे

करते हैं..."

शाजिया- "नहीं बिल्कुल नहीं, उनके साथ तो कभी नहीं। ये मेरी पहली शादी की रात है और मैं इसे किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहती खासकर अम्मी के साथ प्लीज... उन्हें आज हमारे बीच ना आने दीजिए "

मुझे लग रहा था की समय के साथ इन दोनों का गुस्सा शांत हो जाएंगा। पर यहां तो इन दोनों का रिश्ता और खराब होता जा रहा है।

मैं- "ठीक है मेरी जान... जैसा तुम कहो। फूफी हमारे बीच में नहीं आएंगी...' "

मैंने फूफी को बुलाया और सब कुछ बता दिया- “की शाजिया को अच्छा नहीं लग रहा की तुम आज हमारी सुहागरात में शामिल हो..."

फूफी उदास होकर बोली- "क्यों?"

मैं- "शाजिया आज की रात सिर्फ मेरे साथ बिताना चाहती है...

फूफी- ठीक है।

मैं- "तो आप अपना बिस्तर छत पे ले जाइए आज रात के लिये..."

फूफी अपना बिस्तर ले गई छत पे अब हम दोनों अकेले थे कमरे में। मैंने सोचा कार्यकर्म शुरू करने से पहले थोड़ा फ्रेश हो जाऊँ तो आगे के लिए अच्छा होगा।
 
फूफी अपना बिस्तर ले गई छत पे अब हम दोनों अकेले थे कमरे में। मैंने सोचा कार्यकर्म शुरू करने से पहले थोड़ा फ्रेश हो जाऊँ तो आगे के लिए अच्छा होगा।

जब मैं बाथरूम से आया तो शाजिया अपनी सुहागरात की सेज के पास खड़ी थी। वो कुछ सोच रही थी।

मैंने उसे पीछे से बाहों में पकड़कर पूछा- “क्या सोच रही हो?"

शाजिया- "इस रात का मुझे कब से इंतजार था। जब से मुझे आपसे प्यार हुआ है तब से मैं आपके साथ शादी करने के सपने देख रही थी। आज जाकर मेरा सपना पूरा हुआ..."

मैं- "मैं भी कब से तुम्हें अपनी बनाना चाहता था। मैं कितना लकी हूँ तुम जैसी पत्नी पाकर...

………………………..

हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब थे तो मैं उसके और करीब जाने लगा उसके और मेरे होठ करीब आ चुके थे। हम दोनों अब एक दूसरे को किस करने लगे। थोड़ी देर बाद मैं वाइल्ड हो गया। मैं उसे पागलों की तरह किस किए जा रहा था। किस करने के बाद मैंने उसे बिस्तर पे लेटा दिया और उसकी नाभि के पास किस करने लगा। मैं पूरी तरह से पागल हो चुका था, इतनी सेक्सी लड़की जो मेरे सामने चुदने को तैयार बैठी थी। चूमते-घूमते मैंने उसकी साड़ी खोल दी, मेरे दोनों हाथ उसकी चूचियों पे थे, और मैं उसे कस कस के दबाए जा रहा था, उसके पूरे बदन को चूम रहा था, और वो अंगड़ाइयां ले रही थी।

शाजिया का बदन अकड़ता जा रहा था। मुझे तो इतना सेक्सी फिगर देखकर ही मस्ती छा रही थी। मैंने तुरंत अपने कपड़े खोल दिए। अब मैं केवल अंडरवेर में था। मैं उसकी साड़ी खोलने की कोशिश कर रहा था। लेकिन उसे शर्म आ रही थी तो वो मेरा हाथ पकड़ने लगी। मैंने उसका हाथ हटाया तो वो पैरों से मुझे रोकने लगी।

मैंने उसके कहा- “शर्म छोड़ो भी जानेमन... हम दोनों अब पति पत्नी हैं..” कहकर उसका पैर हटाया और उसे पूरा नंगी कर दिया।

उसका शरीर एकदम दूध जैसा सफेद था। उसकी चूत को देखकर मैं पागल हो गया और उसके पूरे बदन को फिर से किस करने लगा। पहले उसकी छोटी-छोटी चूचियों को किस करने लगा, और उसे कस के दबाने लगा। फिर धीरे-धीरे उसकी चूत पे आ गया। चूत देखकर मुझसे रहा नहीं गया मैंने तुरंत उसकी चूत पे अपना मुँह रख दिया और उसे चूसने लगा।

शाजिया- "ये क्या कर रहे हैं आप?"

मैं- तुमको नहीं पता ? आज के जमाने में बहुत कुछ नया-नया आ गया है। आज मैं तुमको सब दिखाऊँगा। वैसे तुमको सेक्स के बारे में किसने बताया?"

शाजिया- "मेरी गाँव की सहेलियों ने...

मैं- “अच्छा चलो तुमको कुछ तो पता है नहीं तो आज मुझे तुम्हें टीचिंग क्लासेस देनी पड़ेगी, और मैं आज ज्यादा कुछ बोलने के मूड में नहीं हूँ.."

शाजिया- "क्यों?"

मैं- "क्योंकी जिसके सामने इतनी खूबसूरत लड़की नंगी लेटी हो, वो बातें करने में टाइम क्यों वेस्ट करेगा?"

शाजिया हँसने लगी और मैं उसकी चूत को देखने लगा। क्या चूत है एकदम चिकनी। अब मैं उसे चाटने लगा । उसकी चूत चाटने में बहुत मजा आ रहा था। ऐसा मस्त स्वाद तो फूफी की चूत का भी नहीं था। चाटते-चाटते जुबान उसकी चूत की लाइन में डाल देता।

शाजिया बड़ी जोर-जोर से सिसकियां ले रही थी “आह्ह... आअहह्ह... ऊह्ह... अया आअसशह..."

मैं 15 मिनट चूत चाटने के बाद खड़ा हुआ और उससे अपना लण्ड चूसने को कहा। उसने बिना कुछ कहे मेरे लण्ड को पकड़ लिया। अब वो भी वाइल्ड हो चुकी थी। लण्ड को धीरे-धीरे अपने मुँह में लेने लगी। शाजिया लण्ड ऐसे चूस रही थी जैसे कोई लड़की पहली बार लालिपोप चूस रही हो। उसने केवल 10 मिनट ही मेरा लण्ड चूसा। वो पहली बार कर रही थी इसलिए ज्यादा नहीं चूस पाई।

मैंने उसे सीधा लेटा दिया और खुद उसके बगल में जाकर लेट गया। अब मैंने उसकी चूत पे लण्ड सेट किया और धीरे-धीरे रगड़ने लगा। उसे बहुत मजा आ रहा था। रगड़ते रगड़ते मैंने अपना थोड़ा सा लण्ड उसकी चूत में घुसेड़ दिया।

शाजिया चीख पड़ी- "आअह्ह... आहह.... प्लीज... धीमे करिए..."

मैं थोड़ी देर वैसे ही रहने के बाद लण्ड धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा। वो अभी भी चीख रही थी।

मैंने उससे कहा- “थोड़ा दर्द तो होगा, दर्द के बिना सेक्स नहीं हो सकता..." कहकर अब लण्ड और अंदर डालने

लगा।

शाजिया तो बस "आअह्ह... ऊहह.... आहह.... इस्स्स.... आहह..." करके चीख रही थी। आखिर कुँवारी जो थी।
 
मैं 15 मिनट चूत मारने के बाद उसे थोड़ा रेस्ट दिया। 5 मिनट बाद मैं फिर उसकी चूत मारने लगा। इस बार अपना पूरा 7 इंच का लण्ड उसकी चूत में डाल दिया। उसकी चूत से खून निकल रहा था। पर मैंने उसकी चूत मारना चालू रखा। थोड़ी देर बाद जब मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला तो वो खून से सना हुआ था। मुझे बहुत मजा आ रहा था शाजिया की टाइट चूत मारकर उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे।

मैंने पूछा- "कैसा लगा? शाजिया मजा आया की नहीं?"

शाजिया- “मजा तो आया पर दर्द बहुत हो रहा है..."

मैं- “वो तो होगा ही... पहली बार जो तुमने सेक्स किया है..” फिर 5 मिनट आराम करने के बाद मैंने उससे पलटने के लिए कहा, मतलब पेट के बल लेटने को कहा।

शाजिया पेट के बल लेट गई। उसे भी मजा आ रहा था। इस रात को वो हमेशा याद रखना चाहती थी। इसलिए बिना कुछ बोले मेरी बात मान रही थी। उसके पलटने के बाद मैंने पीछे से धीरे से अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया और आगे-पीछे करने लगा। वो दर्द के मारे बहुत जोर से चिल्ला रही थी। पर मैं नहीं रुका क्योंकी अगर मैं रुक जाता तो मजा खराब हो जाता।

मैं 10 मिनट इस तरह उसकी चूत मारने के बाद उसकी चूत में ही झड़ गया। जब मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला तो वो फिर से खून से लथपथ था। हम दोनों हाँफ रहे थे।

मैं- “अब बताओ शाजिया कैसा लगा?"

शाजिया- "बहुत मजा आया.

हम दोनों एक दूसरे की बाहों में बांहें डालकर आराम कर रहे थे। थोड़ी देर बाद हम लोग साफ सफाई करने के लिए उठे। क्योंकी मेरे लण्ड पे और शाजिया की चूत पे खून ही खून था। बाथरूम में जाकर मैंने देखा की शाजिया धीरे-धीरे चल रही थी, उसकी चूत फूल चुकी थी। मैंने उसकी चूत और अपना लण्ड साफ किया। उसे चलने में प्राब्लम हो रही थी तो मैं उसे बिस्तर तक ले गया। हम दोनों थोड़ी देर बाद सो गये, क्योंकी शाजिया इसके आगे और कुछ करने को तैयार नहीं थी। उसकी चूत में बहुत दर्द हो रहा था इसलिए।

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शादी के दूसरे दिन सुबह-सुबह शाजिया और मैं देरी से उठे। पहले मेरी आँख खुली। उस समय 8:00 बज रहे थे। शाजिया मुझसे लिपट के लेटी हुई थी। हम दोनों पूरे नंगे थे। मैंने शाजिया को उठाया तो वो बहुत थकी हुई थी सुहागरात की वजह से।

मैंने उससे कहा- “उठो शाजिया, बहुत देर हो चुकी है। जाकर नहा लो..."

शाजिया जैसे ही उठकर बैठने लगी, उसके मुँह से आआह्ह... की चीख निकली।

मैंने पूछा- क्या हुआ?

उसने अपनी चूत की तरफ इशारा किया, तो उसकी चूत से थोड़ा खून निकल रहा था।

मैंने कहा- "तुम्हें डरने की जरूरत नहीं। ये दर्द जल्द ही खतम हो जाएगा। और अगर दर्द नहीं गया तो तुम्हें इस दर्द की दवाई लाकर दे दूँगा, उससे ये जल्दी चला जाएगा. "

शाजिया उठकर बाथरूम में चली गई फ्रेश होने ।

मैंने सोचा- "तब तक फूफी से मिल लिया जाए। फूफी छत पे थी, गीले कपड़े डालने गई थी।

मैं भी छत पे गया और उनसे पूछा- "रुखसाना, तुम्हें बुरा तो नहीं लगा शाजिया के बिहेवियर से?"

रुखसाना ने कोई जवाब नहीं दिया।

मैं- “क्या हुआ तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही हो?"

रुखसाना - मुझे बहुत बुरा लगा। मैं तो शाजिया से अपना रिश्ता सुधारना चाहती थी। पर वो हर वक़्त अपनी मर्ज़ी चलाती है और आप उसका ही साथ देते हैं..."

मैं- "मैं क्या करूं? कल उसकी शादी की पहली रात थी और उसने मुझे यही माँगा था की हम दोनों अकेले ही रात बिताएं। तुम्ही बताओ मैं कैसे मना कर सकता था?"

रुखसाना- “हाँ। मैं जानती हूँ। लेकिन आगे से आप उसे समझा दीजिएगा की वो ही अकेले आपकी बीवी नहीं मैं भी आपकी होने वाली बीवी हूँ, और आप पे मेरा भी पूरा हक है...'

मैं- “ठीक है मेरी जान.. मैं उसे समझा दूँगा। अब तो नाराज नहीं हो?"

रुखसाना- "नहीं। मैं आपसे नाराज नहीं हूँ पर उसे मैं कभी माफ नहीं करूँगी..." ‘’

मैं- "अब गुस्सा छोड़ो भी। परसों हमारी शादी है। तुम उसके बारे में सोचो.”

रुखसाना के चेहरे पे ये सुनते ही स्माइल आ गई। थोड़ी देर बातें करने के बाद हम दोनों नीचे गये। शाजिया अभी भी बाथरूम में थी, तो मैं बाहर अपने घर के गार्डन में चला गया अखबार पढ़ने ।
 
शाजिया के निकलने के बाद मैं भी फ्रेश होने चला गया। फ्रेश होने के बाद में घर के लिए राशन लेने निकल गया। मार्केट से आते-आते दोपहर हो गई थी। मैंने रास्ते में दवाई के दुकान से शाजिया के लिए दर्द की दवाई भी ले थी। फूफी बिस्तर पे बैठकर आराम कर रही थी, और शाजिया टीवी देख रही थी। शाजिया ने साड़ी पहन रखी थी। उसे उस साड़ी में देखकर मुझे अपनी और उसकी सुहागरात की याद आ गई।

मैंने कहा- "क्या बात है शाजिया तुम तो हमेशा सलवार सूट पहनती थी, आज ये साड़ी कैसे पहन ली?"

शाजिया- “अब मेरी शादी हो गई है और मैं हमेशा साड़ी ही पहनूंगी..."

मैं- “पर मुझे तो तुम सलवार सूट और जीन्स टाप में ही अच्छी लगती हो ...

शाजिया- "ठीक है। आप जो कहेंगे, मैं वही पहनूंगी आगे से..."

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मैं- "अच्छा ये लो, मैं तुम्हारे लिए दर्द की दवाई लाया हूँ। इसे अभी खा लो। क्योंकी मेरा मन तुम्हारे साथ फिर से सुहागरात मनाने को कर रहा है..."

शाजिया शर्माने लगी। वो दवाई खा लेती है। थोड़ी देर बाद सब लोग खाना खा लेते हैं फूफी और शाजिया में अभी भी मनमुटाव था। वो दोनों एक दूसरे से ज्यादा बातें नहीं कर रहे थे। मैं बिस्तर पे सो रहा था। फूफी और शाजिया नीचे बिस्तर बिछाकर सो रहे थे।

मैंने शाजिया से कहा- "वहां क्या कर रही हो? यहां आओ अपने पति के पास....

वो तुरंत ऊपर मेरे पास गई।

मैंने पूछा- “अब दर्द कैसा है?"

शाजिया- "ठीक है, अब ज्यादा नहीं हो रहा है....

मैं तुम्हें कल की रात कैसी लगी?

"

शाजिया- बहुत अच्छी। मैं वो रात कभी नहीं भूल सकती।

मैं- क्या फिर से वैसा मजा करना चाहती हो?

शाजिया शर्माने लगी और धीमे-धीमे स्माइल करने लगी। मैं समझ गया की शाजिया को फिर से सेक्स करना है।

फिर क्या था में फौरन उसके शरीर के ऊपर चढ़ गया और उसे किस करने लगा।

फूफी अपना मुँह घुमाकर सो रही थी। कल रात शाजिया के बिहेवियर की वजह से वो हमारे साथ जाय्न नहीं होना

चाहती थी।

मेरे ऊपर चुदाई का भूत सावर हो गया था। मैं शाजिया को किस किए जा रहा था। उसके बाद मैंने उसके सारे कपड़े खोल दिए, और खुद भी पूरा नंगा हो गया। मेरा लण्ड उसके नंगे शरीर को देखकर पूरा खड़ा हो चुका था। उसकी चूचियां देखकर मैं उसे कस कसकर दबाने लगा और चूसने लगा। 10 मिनट चूसने के बाद मैंने उसके मुँह मैं अपना लण्ड घुसेड़ दिया, और चूसने को कहा।

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वो चूसने लगी। बहुत मजा आ रहा था। वो तो फूफी से भी अच्छा लण्ड चूसती थी। मन कर रहा लण्ड उसके मुँह से कभी बाहर ना निकालूं। 15 मिनट तक उससे अपना लण्ड चुसवाता रहा। फिर मैंने सोचा अब इसकी चूत को चूसा जाए, पर आज दूसरे तरीके से। तो मैंने उसे अपने मुँह पे बैठने को कहा। मैं बिस्तर पे लेट गया और शाजिया मेरे मुँह के ऊपर बैठ गई। मैं उसकी चूत चाटने लगा ।

शाजिया मजा और दर्द के मारे सिसकियां ले रही थी- "आअह्ह... ऊह्ह... आअह्ह... आअह्ह... आहह..."
 
मैं 10 मिनट उसकी चूत चाटने के बाद उसे अपने ऊपर से उठाया और लेटा दिया। उसकी टांगें ऊपर की और उसकी चूत में अपने लण्ड का ऊपरी हिस्सा घुसेड़ दिया।

वो चीख पड़ी “आअह्ह..."

मैंने दो मिनट वैसे ही अपना लण्ड उसकी चूत में घुसेड़े रखा। फिर उसके बाद अपना लण्ड आगे-पीछे करने लगा। उसके मुँह से लगातार चीखें निकल रही थीं। पर मैं लण्ड आगे-पीछे करता रहा। थोड़ी देर बाद मैंने अपना लण्ड पूरा उसकी चूत में घुसेड़ दिया और उसे चोदने लगा, और 15 मिनट लगातार चोदता रहा। फिर उसकी चूत में ही झड़ गया। अपना माल उसकी चूत में डालकर बहुत मजा आ रहा था। उसके चेहरे पे बहुत बड़ी स्माइल थी जिससे ये पता लग रहा था की उसे भी खूब मजा आया। हम लोग रोज रात में दोपहर में मजा करते।
 
मैंने दो मिनट वैसे ही अपना लण्ड उसकी चूत में घुसेड़े रखा। फिर उसके बाद अपना लण्ड आगे-पीछे करने लगा। उसके मुँह से लगातार चीखें निकल रही थीं। पर मैं लण्ड आगे-पीछे करता रहा। थोड़ी देर बाद मैंने अपना लण्ड पूरा उसकी चूत में घुसेड़ दिया और उसे चोदने लगा, और 15 मिनट लगातार चोदता रहा। फिर उसकी चूत में ही झड़ गया। अपना माल उसकी चूत में डालकर बहुत मजा आ रहा था। उसके चेहरे पे बहुत बड़ी स्माइल थी जिससे ये पता लग रहा था की उसे भी खूब मजा आया। हम लोग रोज रात में दोपहर में मजा करते।

मजा करते-करते दो दिन बीत गये और दूसरी शादी का दिन आ गया। अब बारी थी फूफी से शादी करने की। शादी का दिन शादी का मुहूर्त रात के 8:00 बजे का था तो हम आराम से सब तैयारियां कर रहे थे। फूफी इतने दिनों बाद पहली बार खुश लग रही थी। वो बहुत उत्तेजित थी और मैं भी शाजिया नार्मल बिहेव कर रही थी, पर अंदर से वो दुखी थी। क्योंकी वो जानती थी की आज से उसे अपना पति बांटना पड़ेगा। 8:00 बजने वाले थे।

फूफी पार्लर से तैयार होकर आ चुकी थी। मैं भी तैयार था तो हम लोग मस्जिद के लिए निकल पड़े। मस्जिद में हम दोनों की शादी रीति रिवाज से हुई। मैंने उसके साथ सात फेरे लिए, मंगलसूत्र पहनाया, और उसकी माँग में सिंदूर भरा। जो गाड़ी जाने के लिए बुक कराई थी उसी गाड़ी से हम लोग रात में शादी के बाद घर आए ।

शाजिया जानती थी आज उसकी अम्मी और मेरी सुहागरात है और उसकी अम्मी उसकी सुहागरात के दिन का बदला लेगी, तो उसने पहले से अपनी अम्मी को नीचा दिखाने का प्लान बनाकर रखा था। जब हम घर में घुसने लगे तो शाजिया ने हम दोनों को रुकने को कहा।

मैं- “क्या हुआ शाजिया ?"

शाजिया- "कुछ नहीं बस एक रिवाज बाकी है। कलश को पैर से गिरने वाला। अब मैं इस घर की बहू हूँ और मेरा पति दूसरी शादी करके सौतन लाया है तो मेरा फर्ज बनता है की मैं मेरी सौतन का स्वागत करू...'

मैं समझ गया की शाजिया रुखसाना को नीचा दिखा रही है की वो मेरी पहली पत्नी है, और वो उसकी सौतन है।

रुखसाना को बुरा लग रहा था। पर वो इतनी जल्दी हार मानने वालों में से नहीं थी। वो भी आगे चल के कुछ ना कुछ करके बदला ले लेगी। कलश वाली रसम पूरी हो गई। अब बारी थी सुहागरात की ।

मैंने रुखसाना से पूछा- "क्या तुम चाहती हो? शाजिया हमारे साथ जाय्न करे?"

रुखसाना- "नहीं मैं नहीं चाहती..."

मैं- “तो मैं उसे ऊपर भेज दूं?"

रुखसाना- "नहीं, उसे यही रहने दो..."

मैं- "ठीक है..." शायद वो शाजिया को इसलिए नहीं ऊपरभेबेजना चाहती थी की शाजिया अपने पति को किसी और

औरत के साथ चुदते हुए देख सके।

थोड़ी देर बाद रुखसाना बिस्तर पे नई नवेली दुल्हन की तरह बैठी थी। घूँघट डालकर मैं उसके पास गया, उसका घूंघट हटाया और उसे किस करने लगा। वो पूरे मूड में थी और मैं भी। मैंने उसे बिस्तर पे लेटा दिया और उसके पूरे बदन को किस लार्न लगा पहले उसके गली को उसके पेट को फिर उसकी टांगों को उसके पूरे बदन को किस करने के बाद मैंने उसकी ब्लाउज़ और ब्रा को खोल दिया और उसकी चूचियों को चूसने लगा।

शाजिया नीचे लेटकर सोने की आक्टिंग कर रही थी। पर वो जानती थी की उसे नींद नहीं आने वाली।

रुखसाना की चूचियों को चूसने के बाद मैंने उसकी पूरी साड़ी खोल दी, और खुद के भी पूरे कपड़े खोल दिए। इतने दिनों बाद मैं रुखसाना को चोदने जा रहा था। इसलिए हम दोनों ही उत्तेजित थे। मैंने रुखसाना की चूत पे अपना मुँह रखा और उसे चूसने लगा। उसके मुँह से तेज सिसकियां निकल रही थी। थोड़ी देर बाद हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गये और एक दूसरे को चूसने लगे। बहुत मजा आ रहा था। 20 मिनट एक दूसरे को चूसने के बाद मैंने अपना लण्ड रुखसाना की चूत पे रखा और एक झटके में अंदर घुसेड़ दिया।
 
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