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Guest
अगले दिन सुबह मैं होटल जाने के लिए तैयार होने लगा। हम सब बहुत खुश थे खास करके शाजिया। क्योंकी कल उसकी और मेरी शादी थी। मैं थोड़ा नर्वस था, क्योंकी मुझे तो दो-दो शादियां करनी थी।
फूफी थोड़ा दुखी थी क्योंकी उनकी शादी की तारीख तीन दिन बाद की थी इसलिए मैं होटल जाने के लिए तैयार हो रहा था। शाजिया बाथरूम में थी। वो इतनी उत्तेजित थी अपनी शादी के लिए की उसने एक हफ्ते स्कूल ना जाने का फैसला किया। फूफी किचेन में थी वो थोड़ी दुखी थी तो मैंने सोचा उनका मूड थोड़ा बना दूं। तो मैं किचेन में गया ।
फूफी मुझे देखकर बोली- “टिफिन तैयार है लेकर जाना....
मैं- “मैं यहां कुछ और बात करने आया हूँ.
फूफी- "कौन सी बात?"
मैं- “तुम इतना दुखी क्यों लग रही हो? मुझे बताओ। मैं तुम्हारा होने वाला पति हूँ। मैं तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश करूँगा..."
फूफी- "रहने दीजिए। आप नहीं मानेगे ."
मैं- “तुम कहकर तो देखो मेरी रानी..."
फूफी- "ऐसे बात है तो सुनिए। मैं नहीं चाहती की आपकी और शाजिया की शादी हो..."
मुझे ये सुनकर झटका लगा। अभी तक तो सब कुछ अच्छा चल रहा था अचानक ये फूफी को क्या हुआ?" मैं ये सोच रहा था की शायद फूफी और शाजिया की शादी की वजह से दुखी हैं।
मैंने पूछा- "क्यों तुम तो खुश थी हम सबकी शादी हैं, पर ये तो मेरी सोच से उल्टा हो रहा है
फूफी- "हाँ मैं खुश थी मेरी बेटी की शादी हो रही है, वो भी उससे जिसे वो प्यार करती है। पर थोड़ी देर बाद मुझे एहसास हुआ की अगर मेरी बेटी की शादी मुझसे पहले आपसे हो गई तो बाद में मैं उसकी सौतन कहलाऊँगी। अब आप ही बताइए कैसा लगेगा जब माँ ही बेटी की सौतन हो। हमारा रिश्ता माँ बेटी का है और अब हम दोनों सौतनें कहलाएंगी। बस यही सोचकर मुझे बुरा लग रहा है..."
मैं- "मेरी रानी, तुम्हारी बात तो ठीक है। पर हम तीनों की शादी के बारे में किसी को पता ही नहीं चलेगा, तब तुम्हें सौतन कौन बुलाएगा?"
फूफी- "अरे... पर मेरा मन तो ये जानता है ना और मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा की मैं किसी की सौतन बनूं। जबकी आपकी और मेरी शादी की बात पहले से हो रही थी..."
मैं- “तो तुम क्या चाहती हो साफ-साफ बताओ?"
फूफी- "मैं यही चाहती हूँ की आप पहले मुझसे शादी करें शाजिया से बाद में करें..."
मैं- "नहीं-नहीं, ये नहीं हो सकता। तुम जानती हो शाजिया बहुत दिनों के बाद मानी है। हमारा रिश्ता इतने दिनों बाद ठीक हुआ है और अगर मैंने उससे शादी अभी नहीं की तो वो हमेशा के लिए नाराज हो जाएगी..."
इन दोनों से शादी की बात से वैसे ही मैं बहुत नर्वस था। ऊपर से फूफी नौटंकी कर रही थीं। मुझे गुस्सा आ गया।
मैंने फूफी से कहा- "तुम दोनों मुझसे प्यार करती हो और मैं दोनों से शादी के लिए तैयार भी हूँ। पर जो तुम कर रही हो उससे मुझे और टेन्शन हो रही है। अगर तुम चाहती हो की मैं तुमसे शादी करूं तो तुम मेरी और शाजिया की शादी अच्छे से हो जाने दो। नहीं तो मैं किसी से शादी नहीं करूँगा। मुझे इतनी टेन्शन चाहिए ही नहीं..."
फूफी- "नाराज ना होइए राजा जी मैं बस अपना दुख आपको सुना रही थी बस और कुछ नहीं। शादी जैसे तय हुई है वैसे ही होगी। आप इतना टेन्शन ना लो...”
मैं- “ठीक है। मैं होटल जा रहा हूँ। अगर कोई सामान चाहिए होगा तो मुझे फोन करना...
फूफी थोड़ा दुखी थी क्योंकी उनकी शादी की तारीख तीन दिन बाद की थी इसलिए मैं होटल जाने के लिए तैयार हो रहा था। शाजिया बाथरूम में थी। वो इतनी उत्तेजित थी अपनी शादी के लिए की उसने एक हफ्ते स्कूल ना जाने का फैसला किया। फूफी किचेन में थी वो थोड़ी दुखी थी तो मैंने सोचा उनका मूड थोड़ा बना दूं। तो मैं किचेन में गया ।
फूफी मुझे देखकर बोली- “टिफिन तैयार है लेकर जाना....
मैं- “मैं यहां कुछ और बात करने आया हूँ.
फूफी- "कौन सी बात?"
मैं- “तुम इतना दुखी क्यों लग रही हो? मुझे बताओ। मैं तुम्हारा होने वाला पति हूँ। मैं तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करने की कोशिश करूँगा..."
फूफी- "रहने दीजिए। आप नहीं मानेगे ."
मैं- “तुम कहकर तो देखो मेरी रानी..."
फूफी- "ऐसे बात है तो सुनिए। मैं नहीं चाहती की आपकी और शाजिया की शादी हो..."
मुझे ये सुनकर झटका लगा। अभी तक तो सब कुछ अच्छा चल रहा था अचानक ये फूफी को क्या हुआ?" मैं ये सोच रहा था की शायद फूफी और शाजिया की शादी की वजह से दुखी हैं।
मैंने पूछा- "क्यों तुम तो खुश थी हम सबकी शादी हैं, पर ये तो मेरी सोच से उल्टा हो रहा है
फूफी- "हाँ मैं खुश थी मेरी बेटी की शादी हो रही है, वो भी उससे जिसे वो प्यार करती है। पर थोड़ी देर बाद मुझे एहसास हुआ की अगर मेरी बेटी की शादी मुझसे पहले आपसे हो गई तो बाद में मैं उसकी सौतन कहलाऊँगी। अब आप ही बताइए कैसा लगेगा जब माँ ही बेटी की सौतन हो। हमारा रिश्ता माँ बेटी का है और अब हम दोनों सौतनें कहलाएंगी। बस यही सोचकर मुझे बुरा लग रहा है..."
मैं- "मेरी रानी, तुम्हारी बात तो ठीक है। पर हम तीनों की शादी के बारे में किसी को पता ही नहीं चलेगा, तब तुम्हें सौतन कौन बुलाएगा?"
फूफी- "अरे... पर मेरा मन तो ये जानता है ना और मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा की मैं किसी की सौतन बनूं। जबकी आपकी और मेरी शादी की बात पहले से हो रही थी..."
मैं- “तो तुम क्या चाहती हो साफ-साफ बताओ?"
फूफी- "मैं यही चाहती हूँ की आप पहले मुझसे शादी करें शाजिया से बाद में करें..."
मैं- "नहीं-नहीं, ये नहीं हो सकता। तुम जानती हो शाजिया बहुत दिनों के बाद मानी है। हमारा रिश्ता इतने दिनों बाद ठीक हुआ है और अगर मैंने उससे शादी अभी नहीं की तो वो हमेशा के लिए नाराज हो जाएगी..."
इन दोनों से शादी की बात से वैसे ही मैं बहुत नर्वस था। ऊपर से फूफी नौटंकी कर रही थीं। मुझे गुस्सा आ गया।
मैंने फूफी से कहा- "तुम दोनों मुझसे प्यार करती हो और मैं दोनों से शादी के लिए तैयार भी हूँ। पर जो तुम कर रही हो उससे मुझे और टेन्शन हो रही है। अगर तुम चाहती हो की मैं तुमसे शादी करूं तो तुम मेरी और शाजिया की शादी अच्छे से हो जाने दो। नहीं तो मैं किसी से शादी नहीं करूँगा। मुझे इतनी टेन्शन चाहिए ही नहीं..."
फूफी- "नाराज ना होइए राजा जी मैं बस अपना दुख आपको सुना रही थी बस और कुछ नहीं। शादी जैसे तय हुई है वैसे ही होगी। आप इतना टेन्शन ना लो...”
मैं- “ठीक है। मैं होटल जा रहा हूँ। अगर कोई सामान चाहिए होगा तो मुझे फोन करना...