S
StoryPublisher
Guest
* अपडेट - 31
संगीता- तो आपने हमे क्यो नहीं बताया..
मै- मुझे भी वहाँ जाकर पता चला...
दौनो बच्चिया भी कपड़े देखकर खुश हो गई, मुझे गले लगा लिया...
मैने सब बच्चों को चॉकलेट दी, सभी खुश हो गये...
फिर मै बाहर चला गया घुमने, कुछ देर बाद वापिस आया फिर बनाकर फ्रेश हुआ, और बड़े ताऊजी के घर चला गया...
वहां पर पंकज भाभी नहीं दिख रही थीं,
मैने खाना खाया और मेरे रूम मे आ गया, मैने कपड़े निकाल दिये, मै सिर्फ अंडरवीयर मे था, मै लैपटॉप लेके बैठ गया.
तभी बाहर का गेट खुलने की आवाज आई, दो मिनट बाद पंकज भाभी अंदर आई...
मै- भाभी आप यहाँ पर, कुछ काम था...
पंकज भाभी- आपके लिए हलवा बनाया था, मै तो वो देने आई हूँ,
आप खाना खा कर जल्दी आ गये, मै थी मुझे पता ही नहीं चला
मै - हलवा! मेरे लिए क्यूँ
पंकज भाभी- आपने मेरे लिए इतना किया है, मै आपके लिए इतना तो कर सकती हूँ.
मै- तो आप अहसान ऊतारा रही है... मैने आप पर कोई अहसान नहीं किया है,
पंकज भाभी - नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, मेरा मन किया आपके लिए बनाने का तो बना दिया.
भाभी ने हलवा मुझे दे दिया, मै हलवा खाने लगा, हलवे मे भाभी ने बहुत ज्यादा ड्राई फ्रूट डाल रखे थे...
मै- भाभी हलवा बहुत अच्छा बना है, बहुत स्वादिष्ट है...
मुझे मेरी खरीदी हुई साड़ी की याद आई मै बेड से खड़ा हुआ और वो साड़ी का पैकेट ले आया.
पंकज भाभी - ये क्या है
मै- ये मेरी तरफ से आपके लिए
पंकज भाभी - क्या है इसमे.
मै- साड़ी
भाभी- इतने तो कपड़े दिलाये आपने, फिर ये क्यों.
मै- ये मेरी पसंद की है.
भाभी साड़ी देखने लगी और मै हलवा खाने लगा.
मै- कैसी है साड़ी भाभी.
पंकज भाभी - बहुत ही ज्यादा अच्छी और सुंदर है.
मंहगी भी ज्यादा लग रही है.
मै- आपसे ज्यादा कीमती थोड़ी है.
भाभी मेरी तरफ देखने लगी.. भाभी को मेरी तरफ देखता पाकर मै भाभी से बोला क्या देख रही हो भाभी
पंकज भाभी - आप कितने अच्छे है, आपको मेरी कितनी फिक्र है. उनको तो बिल्कुल नहीं है
मै- आप सब बातें छोड़ो और लो हलवा खाओ.
मैने भाभी को हलवा खिला दिया.
भाभी मेरे गले लग गई, उनकी चुचीया मेरे नंगे सीने मे चुभने लगी... आआह.. मजा आ गया.
मैने भी भाभी को गले लगा लिया, फिर भाभी चली गई.
कुछ देर तक मै लैपटॉप पर लगा रहा, हलवा खाने से पेट थोड़ा भारी हो गया था तो टहलने के लिए छत पर चला गया... मै सिर्फ अंडरवीयर मे ही ऊपर आ गया...
मै टहल रहा था कि अनिल भाईजी की आवाज आई. वहां पर बल्ब की रोशनी कम थी जिससे मुझे ठीक से दिखा नहीं...
मै उस तरफ गया, तो देखा कि वो पंकज भाभी को पिट रहे थे.
भाभी नीचे गिरी हुई थीं और वो उन्हें हाथों से मार रहे थे...
अंधेरा होने से मेरा शरीर उन्हें सही दिखा नहीं...
मैने अनिल भाई का हाथ पकड़ लिया...
मै- ये आप क्या कर रहे है, आज फिर से इनको क्यो मार रहें हो...
अब क्या हुआ...
अनिल - कितने कपड़े लेके आयी है,2500 मे इतने कपड़े कैसे आये...
मै- इतनी सी बात के लिए आप इनको मार रहे हो...
मैने उनको भी वही बता दिया जो भाभियो को बताया था...
अनिल - अच्छा तो ये बात है, मुझे बता नहीं सकती थी.
पंकज भाभी - अापने सुना ही नहीं.
अनिल - तु चुप कर लो उनको मारने लगे, मैने उनका हाथ पकड़ लिया
मै- ये आपकी पत्नी है भाईजी कोई जानवर नहीं जो ऐसे पीट रहे हो. गलत किया आपने...
वो नीचे जाने लगे...
मै- कहाँ जा रहे हो भाई..
अनिल - खेत मे जा रह हू, आज रात मे 2 बजे से पानी है तो वही रहना होगा, कल सुबह आऊंगा 9-10 बजे तक आऊंगा. मै- ठीक है मै भी सोने जा रहा हू
फिर वो चले गये और मै भाभी के पास आया, वो रो रही थी
मै भाभी के पास नीचे बैठ गया.
मै- भाभी चुप हो जाईये रोईए मत, चलिए रूम मे चलिए.
मैने उनको दौनो हाथों से पकड़ा...
भाभी मेरे गले लग गई और रोने लगी...
आआह... मेरे शरीर मे झुरझुरी सी दौड़ गई... मै उनको चुप कराने की कोशिश करने लगा...
पंकज भाभी - वो मेरे साथ ऐसा क्यों करते है...
उन्होंने मुझे कसके गले लगा लिया, मैने भी उनको बांहों मे भर लिया.
मै- चलिए रूम मे चलते है
मै उनको गले लगाए ही खड़े होने लगा.. उनके पैर मे दर्द हो रहा था वो खड़ी नही हो पाई. उनके हाथो ने मुझे कस लिया.
मै नीचे बैठ गया और अपने हाथ उनके दौनो चुतडो पर रख दिये और उनको उठाकर अपनी गोदी मे बैठा लिया.
उनके पैर अपने आप मेरी कमर पर लिपट गये...
मै खडा हुआ तो उन्होंने मुझे कस लिया,वो ऐसे लिपटी हुई थी जैसे एक बच्चा लिपटा हो...
हमारे बीच मे हवा गुजरने जितनी भी जगह नहीं थी, मै उनके रूम की तरफ आ गया. और उनको बैड पर बैठाने लगा, पर वो मुझे छोड़ ही नहीं रही थीं..
मै उनको बैठाने लगा तो उन्होंने जोर से मुझे पकड़ लिया, हार मानकर मै बैड पर बैठ गया...
वो मुझसे लिपटी हुई थी, वो अब धीरे -2 रो रही थी...
मैने उनका सिर अपने हाथों मे लिया... उनको आंसुओ को अपनी उंगलियों से पोछा...
मै- भाभी रोईए मत प्लीज चुप हो जाईए...
अगर आराम कर लीजिए...
लेकिन वो मुझे छोड़ ही नहीं रही थी...
मै उनको अपने से लिपटाए हुए ही बेड के ऊपर आ गया... मैने उनको लेटा दिया अब मै उनके ऊपर था... कुछ देर मै ऐसे रहा फिर मैने धीरे -2 उनके हाथ अपने कंधो से हटाए और पैरो को भी अलग किया...
मैने उनको बेड पर लेटा दिया...
मै खडा होकर बाहर अपने रूम मे जाने लगा... तो पीछे से भाभी की रुआंसी सी आवाज़ आई - आप तो मुझे छोडकर मत जाईये, आपको मेरी कसम है...
संगीता- तो आपने हमे क्यो नहीं बताया..
मै- मुझे भी वहाँ जाकर पता चला...
दौनो बच्चिया भी कपड़े देखकर खुश हो गई, मुझे गले लगा लिया...
मैने सब बच्चों को चॉकलेट दी, सभी खुश हो गये...
फिर मै बाहर चला गया घुमने, कुछ देर बाद वापिस आया फिर बनाकर फ्रेश हुआ, और बड़े ताऊजी के घर चला गया...
वहां पर पंकज भाभी नहीं दिख रही थीं,
मैने खाना खाया और मेरे रूम मे आ गया, मैने कपड़े निकाल दिये, मै सिर्फ अंडरवीयर मे था, मै लैपटॉप लेके बैठ गया.
तभी बाहर का गेट खुलने की आवाज आई, दो मिनट बाद पंकज भाभी अंदर आई...
मै- भाभी आप यहाँ पर, कुछ काम था...
पंकज भाभी- आपके लिए हलवा बनाया था, मै तो वो देने आई हूँ,
आप खाना खा कर जल्दी आ गये, मै थी मुझे पता ही नहीं चला
मै - हलवा! मेरे लिए क्यूँ
पंकज भाभी- आपने मेरे लिए इतना किया है, मै आपके लिए इतना तो कर सकती हूँ.
मै- तो आप अहसान ऊतारा रही है... मैने आप पर कोई अहसान नहीं किया है,
पंकज भाभी - नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, मेरा मन किया आपके लिए बनाने का तो बना दिया.
भाभी ने हलवा मुझे दे दिया, मै हलवा खाने लगा, हलवे मे भाभी ने बहुत ज्यादा ड्राई फ्रूट डाल रखे थे...
मै- भाभी हलवा बहुत अच्छा बना है, बहुत स्वादिष्ट है...
मुझे मेरी खरीदी हुई साड़ी की याद आई मै बेड से खड़ा हुआ और वो साड़ी का पैकेट ले आया.
पंकज भाभी - ये क्या है
मै- ये मेरी तरफ से आपके लिए
पंकज भाभी - क्या है इसमे.
मै- साड़ी
भाभी- इतने तो कपड़े दिलाये आपने, फिर ये क्यों.
मै- ये मेरी पसंद की है.
भाभी साड़ी देखने लगी और मै हलवा खाने लगा.
मै- कैसी है साड़ी भाभी.
पंकज भाभी - बहुत ही ज्यादा अच्छी और सुंदर है.
मंहगी भी ज्यादा लग रही है.
मै- आपसे ज्यादा कीमती थोड़ी है.
भाभी मेरी तरफ देखने लगी.. भाभी को मेरी तरफ देखता पाकर मै भाभी से बोला क्या देख रही हो भाभी
पंकज भाभी - आप कितने अच्छे है, आपको मेरी कितनी फिक्र है. उनको तो बिल्कुल नहीं है
मै- आप सब बातें छोड़ो और लो हलवा खाओ.
मैने भाभी को हलवा खिला दिया.
भाभी मेरे गले लग गई, उनकी चुचीया मेरे नंगे सीने मे चुभने लगी... आआह.. मजा आ गया.
मैने भी भाभी को गले लगा लिया, फिर भाभी चली गई.
कुछ देर तक मै लैपटॉप पर लगा रहा, हलवा खाने से पेट थोड़ा भारी हो गया था तो टहलने के लिए छत पर चला गया... मै सिर्फ अंडरवीयर मे ही ऊपर आ गया...
मै टहल रहा था कि अनिल भाईजी की आवाज आई. वहां पर बल्ब की रोशनी कम थी जिससे मुझे ठीक से दिखा नहीं...
मै उस तरफ गया, तो देखा कि वो पंकज भाभी को पिट रहे थे.
भाभी नीचे गिरी हुई थीं और वो उन्हें हाथों से मार रहे थे...
अंधेरा होने से मेरा शरीर उन्हें सही दिखा नहीं...
मैने अनिल भाई का हाथ पकड़ लिया...
मै- ये आप क्या कर रहे है, आज फिर से इनको क्यो मार रहें हो...
अब क्या हुआ...
अनिल - कितने कपड़े लेके आयी है,2500 मे इतने कपड़े कैसे आये...
मै- इतनी सी बात के लिए आप इनको मार रहे हो...
मैने उनको भी वही बता दिया जो भाभियो को बताया था...
अनिल - अच्छा तो ये बात है, मुझे बता नहीं सकती थी.
पंकज भाभी - अापने सुना ही नहीं.
अनिल - तु चुप कर लो उनको मारने लगे, मैने उनका हाथ पकड़ लिया
मै- ये आपकी पत्नी है भाईजी कोई जानवर नहीं जो ऐसे पीट रहे हो. गलत किया आपने...
वो नीचे जाने लगे...
मै- कहाँ जा रहे हो भाई..
अनिल - खेत मे जा रह हू, आज रात मे 2 बजे से पानी है तो वही रहना होगा, कल सुबह आऊंगा 9-10 बजे तक आऊंगा. मै- ठीक है मै भी सोने जा रहा हू
फिर वो चले गये और मै भाभी के पास आया, वो रो रही थी
मै भाभी के पास नीचे बैठ गया.
मै- भाभी चुप हो जाईये रोईए मत, चलिए रूम मे चलिए.
मैने उनको दौनो हाथों से पकड़ा...
भाभी मेरे गले लग गई और रोने लगी...
आआह... मेरे शरीर मे झुरझुरी सी दौड़ गई... मै उनको चुप कराने की कोशिश करने लगा...
पंकज भाभी - वो मेरे साथ ऐसा क्यों करते है...
उन्होंने मुझे कसके गले लगा लिया, मैने भी उनको बांहों मे भर लिया.
मै- चलिए रूम मे चलते है
मै उनको गले लगाए ही खड़े होने लगा.. उनके पैर मे दर्द हो रहा था वो खड़ी नही हो पाई. उनके हाथो ने मुझे कस लिया.
मै नीचे बैठ गया और अपने हाथ उनके दौनो चुतडो पर रख दिये और उनको उठाकर अपनी गोदी मे बैठा लिया.
उनके पैर अपने आप मेरी कमर पर लिपट गये...
मै खडा हुआ तो उन्होंने मुझे कस लिया,वो ऐसे लिपटी हुई थी जैसे एक बच्चा लिपटा हो...
हमारे बीच मे हवा गुजरने जितनी भी जगह नहीं थी, मै उनके रूम की तरफ आ गया. और उनको बैड पर बैठाने लगा, पर वो मुझे छोड़ ही नहीं रही थीं..
मै उनको बैठाने लगा तो उन्होंने जोर से मुझे पकड़ लिया, हार मानकर मै बैड पर बैठ गया...
वो मुझसे लिपटी हुई थी, वो अब धीरे -2 रो रही थी...
मैने उनका सिर अपने हाथों मे लिया... उनको आंसुओ को अपनी उंगलियों से पोछा...
मै- भाभी रोईए मत प्लीज चुप हो जाईए...
अगर आराम कर लीजिए...
लेकिन वो मुझे छोड़ ही नहीं रही थी...
मै उनको अपने से लिपटाए हुए ही बेड के ऊपर आ गया... मैने उनको लेटा दिया अब मै उनके ऊपर था... कुछ देर मै ऐसे रहा फिर मैने धीरे -2 उनके हाथ अपने कंधो से हटाए और पैरो को भी अलग किया...
मैने उनको बेड पर लेटा दिया...
मै खडा होकर बाहर अपने रूम मे जाने लगा... तो पीछे से भाभी की रुआंसी सी आवाज़ आई - आप तो मुझे छोडकर मत जाईये, आपको मेरी कसम है...