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Kamukta हाए मम्मी मेरी लुल्ली

"राहुल तू जा, यह बैग गाड़ी में रख और मैं आती हूँ.... बस एक बैंगन रह गये हैं ... इधर नही मिले... किसी दूसरी दुकान पर देखती हूँ" सलोनी राहुल के हाथों में बैग थमाती बोलती है |

"नही मम्मी, आप बैंगन खरीद लीजिए, हम इकट्ठे चलते हैं" राहुल अपनी मम्मी को उन भूखे भेड़ियों के बीच छोड़ कर नही जाना चाहता था |

"अरे तो क्या इतना भार उठाए मेरे साथ घूमता रहेगा ... तू जा इसे गाड़ी में रख .... मैं अभी आती हूँ"

"रहने दीजिए मम्मी, छोड़िए बैंगन लेने को.... मुझे वैसे भी बैंगन की सब्ज़ी पसंद नही है" राहुल अपनी मम्मी को वहाँ हरगिज़ भी अकेला नही छोड़ना चाहता था |

"मगर मुझे बहुत पसंद है ...... और अब कोई स्वाल ज्वाब नही ........ अभी समान गाड़ी की डिक्की में रखो मैं आती हूँ" सलोनी राहुल को हुक्म देती है | राहुल के पास अब अपनी मम्मी की बात मानने के सिवा कोई और चारा नही था | वो तेज़ तेज़ कदमो से गाड़ी की और बढ़ता है जो कुछ दूरी पर खड़ी थी | राहुल गाड़ी की और जाता पीछे मुड़ मुड़ कर सलोनी की और देख रहा था | सलोनी कुछ देर एक जगह खड़ी दुकानों का जायजा लेती है और फिर उसे एक कोने में एक दुकान दिखाई देती है जो और दुकानों से थोड़ा सा हटकर थी | सलोनी उस दुकान की और बढ़ जाती है |

राहुल जब पीछे मुड़कर अपनी मम्मी को एक तरफ़ बढ़ते हुए देखता है तो वो चलना छोड़ भागना शुरू कर देता है | सब्जियों के बैग बहुत पतली प्लास्टिक के बने हुए थे जो उसके भागने और ज़्यादा वजन के कारण कभी भी फट सकते थे और सब्जियाँ बिखर सकती थी मगर इस बार राहुल की किस्मत ने उसे धोखा नही दिया और वो गाड़ी तक बिना कुछ गिराए पहुँच गया | राहुल कार की डिक्की खोल कर उसमें तेज़ी से सब्जियाँ डालने लगता है |

उधर सलोनी उस दुकान पर जाती है जो थोड़ा सा हट कर थी और उस पर कोई और ग्राहक भी नही था | दुकानदार कोई 40-45 साल का हट्टा कट्टा मर्द था | सलोनी को अपनी दुकान की और बढ़ता देख वो उठ कर खड़ा हो जाता है और सलोनी को आवाज़ देने लगता है |

"आइए बहनजी .... आइए.... बिल्कुल ताज़ी सब्जियाँ हैं.... देखिए पूरी मंडी में से आपको ऐसी सब्जियाँ नही मिलेंगी" | सलोनी जैसे जैसे सब्ज़ी वाले के पास पहुँच रही थी उसकी आँखो की चमक उतनी ही बढ़ती जा रही थी | जैसे जैसे सलोनी की मादक काया और उसके कामुक उभार और कटाव सब्ज़ीवाले की आँखो के पास आ रहे थे उसके चेहर की मुस्कान, आँखो की लाली बढ़ती जा रही थी |
 
सड़क पर रश बढ़ता जा रहा था | "तुम अच्छे से सीधे होकर बैठो.... हम लोग अब मंडी में हैं" सलोनी राहुल को सीधे होकर बैठने के लिए कहती है और खुद भी सीधी होकर सामने देखती ध्यान से गाड़ी चलाने लगती है |

"माद्रचोद ......अपनी साली किस्मत ही खराब है" राहुल अपनी किस्मत को कोसता है | कार मंडी के सामने पहुँच चुकी थी और सलोनी उसे बिल्कुल कम स्पीड पर चलाती किसी सेफ पार्किंग को तलाश रही थी | कार पार्क करने के पशचात सलोनी अपना पर्स बाहर निकालती है और अपना दुपट्टा कार में ही छोड़ देती है | राहुल भी अपनी मम्मी के पीछे निकल पड़ता है | वो जैसे ही सलोनी के पीछे जाने लगता है, सलोनी उसे रोक देती है और उसे कार की कीस देती कहती है,

"इस तरह जाओगे मंडी में, हालत देखी है अपनी" राहुल अपनी मम्मी की बात समझ नही पाता और उसे स्वालिया नज़रों से देखता है | "अपनी पेंट में बने तंबू को तो देखो ....... लोग हँसेंगे तुम पर" राहुल मायूस सा होकर अपनी मम्मी के हाथ से चाभी ले लेता है और कार की तरफ मुड़ जाता है | वो खुद जानता था इस हालत में वो मंडी नही जा सकता |

"अब यह चेहरा मत लटकाओ .... जब यह शैतान बैठ जायेगा तो आ जाना" सलोनी की बात से राहुल को थोड़ी हिम्मत बंधती है | असल में सलोनी के दुपट्टा ना पहनने से वो थोड़ा सा परेशान हो उठा था | हालांकि सलोनी ने दुपट्टा नही पहना था और उसका कुर्ता भी थोड़ा ढीला सा था मगर सलोनी के मुम्मे इतने मोटे और तने हुए थे कि कुर्ते में से उनका रूप छलक रहा था | उसकी गोरी रंगत शाम की हल्की धूप में चमक रही थी और उपर से उसने बाल भी खुले रख छोड़े थे |

राहुल का परेशान होना बिल्कुल वाजिब था | जिसकी भी नज़र सलोनी पर पडती वो पहले उसके चेहरे और फिर उसके सिने को घूर कर देखता | सलोनी अपनी और घूरती निगाहों से बाखूवी वाकिफ़ थी, उसे इन निगाहों की कॉलेज के दिनों से आदत थी | वो एक एक दुकान पर जाकर सब्जियाँ खरीदने लगी | दुकान वाले सलोनी के रूप पर मोहित उसकी कामुक काया को अपनी आँखो से नंगी करके चोद रहे थे | जब भी वो झुकती उसकी गांड पर उसका कुर्ता उँचा हो जाता और टाइट जीन्स से छलक कर बाहर आने को बेताब उसके गोल मटोल नितंब देख लोगो की साँस रुक जाती | ऊपर से उसके दमकते चेहरे पर उसकी नाक की बाली उसकी देह की कामुकता को कई गुना बढ़ा रही थी | सलोनी के पास आठ दस बैग भर चुके थे, तभी उसे राहुल अपनी और आता दिखाई दिया | वो अपनी मम्मी पर पड़नी वाली नज़रों को देख रहा था | सलोनी अपने पर्स से पैसे निकाल रही थी और दुकान वाला उसे घूर रहा था | जब राहुल सलोनी के पास आ गया तो पहले तो दुकान वाले ने उसकी और कोई ध्यान नही दिया मगर जब सलोनी ने राहुल को "आ गये बेटा" कहकर बोला तो दुकान वाले ने उसकी और देखा | राहुल के गुस्से से जलती लाल आँखे देख कर दुकान वाले ने तुरन्त अपनी नज़रें फेर ली और फिर दोबारा सलोनी को घूर कर नही देखा | वो राहुल की आँखो से बरसते अंगारों से बाखूबी अंदाज़ा लगा सकता था कि वो छोकरा उसे क्यों घूर रहा था |
 
"अच्छा अब मान भी जाओ ......." सलोनी के स्वर में मादकता भरती जा रही थी | "घर चल कर खूब मज़े से दूँगी........टाँगे उठाकर........उउउंम्म चाहो तो अपनी टाँगे तुम्हारे कंधे पर रखकर दूँगी........." सलोनी बात नही कर रही थी बल्कि बड़े ही मादक और कामुक स्वर में फुसफुसा रही थी और उसके हाथ की उंगलियाँ बार बार लंड से टकरा रही थी | राहुल चाहे अपनी मम्मी से बहुत नाराज़ था मगर उसकी अशलील भड़कायु बातों और हरकतों के कारण अपने तेज़ी से सखत हो रहे लौड़े को नही रोक सकता था | उसकी पेंट में टेंट बनाना शुरू हो चुका था |
"और अगर चाहो तो........तो मुझे घोड़ी बना लेना....... आज रात अपनी मम्मी को घोड़ी बना कर फिर मेरी ...... मेरी.......... हाइईए ..... पीछे से ......... पीछे से......." सलोनी राहुल के लंड को पेंट के उपर से मुठ्ठी में भर कर उसे मसलते हुए बोलती है |

अपने होंठो पर जीभ फेरते हुए जितनी कामुक आवाज़ में वो बोल रही थी उससे कहीं ज़्यादा कामुक उसके चेहरे के भाव थे | राहुल के दिल की धड़कने बढ़ चुकी थी | उसकी साँसे उखड़ी हुई थी | पेंट में उसका लौड़ा पूरा तन कर झटके खा रहा था |
"पीछे से......पीछे से क्या मम्मी?" राहुल बिल्कुल धीमे से स्वर में बोलता है | वो भूल भी चुका था कि वो अपनी मम्मी से नाराज़ भी था |
"पीछे से....पीछे से......वो तू अपना मेरी मेरी उसमे......डाल कर.....और फिर......हाए अंदर-बाहर.....अंदर-बाहर.....ज़ोर से.......कस्स कस्स कर.....हाए मैं नही बोल सकती मुझे शरम आती है" सलोनी सचमुच ऐसे शरमाती है जैसे उसे बहुत शरम आ रही हो | उसका हाथ अभी भी राहुल के लंड को मसल रहा था |
"बताओ ना मम्मी......प्लीज़ मम्मी बताओ ना......" राहुल फुसफुसा कर बोलता है | उसके कान अपनी माँ के मुँह से वो अल्फ़ाज़ सुनने को तरस रहे थे |
"वो......वो....तू अपना अपना वो.....मेरी....मेरी इसमें डाल कर......हुमच हुमच कर.....हाए जब कस कस कर............अंदर बाहर.....अंदर बाहर........" अचानक सलोनी राहुल के लंड से हाथ हटा लेती है | वो सब्ज़ी मंड़ी के पास पहुँच गये थे |
 
राहुल कार में साइड सीट पर बैठा बाहर की और घूर रहा था जबकि सलोनी कार चला रही थी | सलोनी के होंठो पर हल्की सी मुस्कान बनी हुई थी और वो ड्राइव करती बार बार राहुल की और देख रही थी |

"नाराज़ हो?" सलोनी के पूछने पर राहुल कोई ज्वाब नही देता |

"इतनी नाराज़गी कि बात भी नही करोगे अपनी मम्मी से?" जब राहुल कोई ज्वाब नही देता तो सलोनी उसे फिर से बुलाती है मगर राहुल पहले की तरह बाहर देखता रहता है और अपनी मम्मी को कोई ज्वाब नही देता | सलोनी के होंठो की मुस्कराहट और भी बढ़ जाती है |

"अच्छा बताओ तुम्हे क्या चाहिए? किस चीज़ से तुम्हारी नाराज़गी दूर होगी?" सलोनी बेटे को मनाने का प्रयास करती बोलती है |

"मुझे कुछ नही चाहिए और ना ही मैं नाराज़ हूँ ... आपको जो चाहिए था वो आपको मिल गया, आप खुश हैं ना बस........... आप मेरी चिंता मत कीजिए" राहुल गुस्से से तीखे स्वर में ज्वाब देता है |

"ओह तो यह बात है........तो तुम सोचते हो कि मुझे जो चाहिए था वो मुझे मिल गया इसीलिए मैं खुश हूँ और जो तुम्हे चाहिए था वो तुम्हे नही मिला और शायद इसीलिए तुम नाराज़ हो? है ना?" सलोनी एक हाथ से आराम से ड्राइव करती राहुल की जाँघ को सहला रही थी |

"नही आप ग़लत सोचती हैं, मैने आपसे कहा ना मुझे आपसे कुछ नही चाहिए और ना ही मैं आपसे नाराज़ हूँ" इस बार राहुल का स्वर और भी तीखा था |

"मैं अच्छी तरह से जानती हूँ तुम क्यों नाराज़ हो, मगर तुमने कौनसा कहा था कि तुम मेरी लेना चाहते हो? तुमने कहा एक बार भी? नही कहा.... मैने सोचा जितना मज़ा मुझे आया होगा तुम्हारे चाटने से उतना ही तुम्हे भी आया होगा इसीलिए मैने सोचा कि बाकी का मज़ा अब रात को कर लेंगे.... अगर मुझे मालूम होता कि तुम इस तरह नाराज़ हो जाओगे तो मैं तुम्हे देती ना!......पहले भी तो दी है ना.........तुमने मारी है ना मेरी......." सलोनी का हाथ राहुल की जाँघ पर उसके लौड़े की तरफ धीरे धीरे बढ़ता जा रहा था |
 
सलोनी बेटे के होंठ को काटति उसके मुंह में सिसकती है। राहुल एक और ऊँगली उसकी चुत में घूसा देता है और अपना हाथ आगे पीछे करता उसे चोदने लगता है। सलोनी बेटे को चुमना भूल खुले होंठो से सिसकने लगती है। राहुल कुछ लम्हे यूँ ही उसके होंठो को चूसता है और फिर अपना चेहरा निचे झुकता उसके सीने पर अपनी जीव्हा घुमाने लगता है।

सलोनी उसके बालों में हाथ फेरती है जबके वो उसके मुम्मो को चूमता चाटता है, फिर से एक बार दोनों निप्पलों को कुछ समय के लिए चूसता है। मगर इस बार राहुल ज्यादा देर नहीं लगाता उसकी जीव्हा तेज़ी से निचे जाती है, वो अपनी मुम्म के एकदम सपाट पेट् को चूमता उसकी नाभि में जीभ घुमता है और उसे अपने होंठो में भरकर चूसता है।

"मुम्मी तुम्हारे बदन से कितनी प्यारी मेहक आ रही है ऎसी सुन्दर महक तोह किसी फूल से भी नहीं आति" सलोनी बेटे की बात पर हवस में बुरी तरह दुबे होने के बावजूद मुसकरा देती है। राहुल के होंठ निचे जाते हैं जहान उसकी मम्मी की चूत थी। मगर अभी भी उसकी चुत और राहुल के होंटो के बिच हल्का सा फ़ासला था। राहुल चुत के ऊपर बिलकुल तिकोनी आकार में कटे छोटे छोटे बालों को चूमता उन पर अपना चेहरा रगडता है। उन कोमल बालों की रगढ का एह्सास उसे बहुत प्यारा लग्ग रहा था। अखिरकार राहुल अपना चेहरा और निचे ले जाता है, उसके होंठ अपनी मम्मी की चुत के होंठो के उपरी हिस्से को चुमते हैं राहुल पूछ पूछ करता उन्हें ऊपर से चूमता है।

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चुत से आती तीखी तेज़ सुंगंध उसे एहसास दिला रही थी के उसकी मम्मी कितनी उत्तेजित है।
राहुल की जीव्हा बाहर आती है और वो चुत की लकीर में अपनी जीभ की सिर्फ हलकी सी नोंक घुसाता है और उसे लकीर में ऊपर से निचे फेरने लगता है।
आहः........राहुलल......मेरे लाल......ऊफ......." इतनी देर से अपनी सिसकि दबाये सलोनी से बर्दाशत नहीं होता और वो सिसक पड़ती है।

राहुल अपनी जीव्हा की नोंक चुत में आगे पीछे घुमाता जैसे सलोनी को तडपा रहा था। वो सिर्फ नोंक के अग्रभाग से चुत के होंठो के अंदरूनी हिस्से को रगड रहा था, चाट रहा था। वो अपने हाथों से चुत के होंठो को फैला देता है और अपनी जीव्हा की नोंक से अपनी मम्मी की चुत को कुरेदता है।

"राहुललललल.......गुड़ड़........

।हहहहहययययीीीे.....
क्यों तडपा रहा है मुझे इस तेरह।आआआअह्ह्ह्हह्ह्........बर्दाशत नहीं होता मुझसे.........
" सलोनी अपने निप्पलों को खींचती बोलती है।

मागर राहुल अपनी माँ की सीत्कारों की और कोई ध्यान नहीं देता और वो उसकी चुत के डेन को काफी देर तक कुरेदते रहता है। उसे जैसे कोई जल्दबाज़ी नहीं थी। अखिरकार राहुल अपनी जीव्हा चुत के अंदर गहरायी तक्क सलोनी की मीठी चुत के मिठे रस्स को चखने लगता है। सलोनी की आहें कराहें और भी ऊँची होने लगी थी। उसका बदन फिर से झटके खाने लगा था। कोमल मुलायम चुत के अंदर बेटे की खुर्दरी जीव्हा की रगढ उससे झेलि नहीं जा रही थी। वो अपने मुम्मो को मसल रही थी, कबी अपनी चुत पर अपने बेटे के सर को दबाने लगती थी।
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बेटा......हैय्यी.......हयई......वहा मत काट.....उउउउफ्फ्फ्फ्फ़ दाँतो से मत काट...
आआह्ह्ह्ह राहुल मान जा..." जब्ब राहुल चुत के डेन को अपने होंठो में भर लेता है और उसे हल्का सा अपने दाँतो से काटता है तोह सलोनी चीख़ ही पड़ती है। वो बेड की चादर को अपनी मुट्ठियों में भींच रही थी। चुदाई में ऐंसी पीड़ा और आनंद का जबरदस्त एहसास उसे पहली बार हो रहा था। सलोनी अपने हाथ बेड पर रख एकदम से उठ जाती है और अपनी चुत से बेटे का मुंह हटा देती है।

"क्या मम्मी......इतना मज़ा आ रहा था.......चाटने दो न......." राहुल नाराज़ सा होता बोलता है।
 
मूममे चुसते चुसते राहुल शरारत से निप्पलों को अपने दाँतो से काटने लगता है। पहले तोह सलोनी उसे कुछ नहीं कहती मगर जब्ब वो कुछ जयादा ही ज़ोर से काटता है तोह सलोनी उसके कंधे पर चपट लगाती है।
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"क्यों इतना ज़ोर ज़ोर से काट रहा है खून निकल आएगा तेरे बाप ने भी वापस आकर इन्हे चुसना है, उसे क्या जवाब दूंगी?" राहुल हंस पढता है।

चल अब बस कर।" सलोनी हल्का सा राहुल की और घुमति है और उसके खड़े लुंड को अपने हाथ में भर लेती है। "बस कर अब्ब बहुत दुधु पि लिया अपनी मम्मी का तूने..." सलोनी राहुल का लंड सहलाती केहती है मगर राहुल उसके मुम्मे से मुंह हटाकर दूसरे पर अपने होंठ जमा देता है और उसे अपने होंठो से और दाँतो से कुरेदने लगता है। अखिरकार जब्ब राहुल अपनी मम्मी के मुम्मो से मुंह उठाता है तोह उसके दूधिया मुम्मे लाल हो चुके थे, निप्पल और भी अकड चुके थे।

राहुल अपना चेहरा ऊपर उठाता है। उसके और सलोनी के होंठो के बिच कुछ ही फ़ासला था। सलोनी धीरे से अपना चेहरा राहुल के चेहरे पर झुकाती है और दोनों के होंठ मिल जाते है। दोनों पहले बड़े ही प्यार और कोमलता से एक दूसरे के होंठो को चुमते हैं मगर जलद ही दोनों एक दूसरे के होंठो को अपने होंठो में भरकर चुस्ने लगते है। वो भीगा चुम्बन लगातार लम्बा होता जाता है और दोनों की जीभे एक दूसरे के मुंह में घुस कर कोहराम मचाने लगती है। दोनों की उखड़ी साँसे पूरे कमरे में गूँज रही थी। अखिरकार सांस लेने के लिए दोनों के होंठ जुदा होते है। एक दो पल बाद फिर से उनके होंठ जूड्ड जाते है। वो दोनों एक दूसरे का मुखरस चख रहे थे। सलोनी का हाथ उत्तेजना बढ्ने के साथ साथ अपने बेटे के लौडे पर कस्ते जा रहा था।

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राहुल का हाथ भी अपनी मम्मी के मुम्मे से निचे उसके पेट् पर फिसलता उसकी चूत तक्क पहुँच जाता है। वो अपनी मम्मी के मुंह में जीभ घुमाता अपनी ऊँगली उसकी चुत के होंठो पर घुमाता है तोह सलोनी के जिसम को झटका सा लगता है। राहुल तरुंत अपनी ऊँगली उसकी चुत के अंदर ढकेलता है। सलोनी की चुत इतना रस्स बहा चुकी थी के ऊँगली फ़िसलती हुई उसकी चुत में घुस जाती
 
राहुल दूध का गिलास पीकर बेड के साथ छोटे टेबल पर रख देता है जबके सलोनी अभी भी दूध पि रही थी। राहुल पलट कर वापस अपनी मम्मी के साथ चिपक जाता है। दोनों का रुख टीवी की और था। राहुल अपनी मम्मी की बाँह उठकर अपने सर के पीछे से घुमकर अपने काँधे पर रख देता है और उसके बदन पर हल्का सा झुक जाता है।

राहुल का मुंह अपनी मम्मी के मुम्मे के बिलकुल पास में था। वो अपनी उँगलियों से उसके भरे फुले मुम्मे को प्यार से सहलाता है, बड़ी ही नाज़ुकता से उसके निप्पल से छेडछाड करता है। सलोनी उसके कांधे पर अपना हाथ फिराती अपना दूध पिती है और वो जो भी करता है उसे करने देती है। राहुल कुछ समय तक्क मुम्मे और निप्पल से यूँ ही खेलता रहता है। उसके खेल्ने से निप्पल कुछ ज्यादा ही सखत होकर तन गए थे। वो लम्बा गुलाबी निप्पल जैसे राहुल को पुकार रहा था जैसे उसे केह रहा हो मुझे अपने होंठो में भर लो।

राहुल अपने होंठो पर जीभ फेरते हुये ऊपर अपनी मम्मी की तरफ देखता है जो दूध पीकर अपना गिलास बेड पर रख चुकी थी। राहुल की नज़रों में वो इल्तेजाः देखकर वो अपना सर इंकार में हिला देती है। राहुल थोड़ा निराश सा होकर फिर से एक नज़र उस कड़क गुलाबी निप्पल पर ड़ालता है और सर उठाकर बड़े ही मासूम चेहरे के साथ आँखों में याचना का भाव लिए अपनी मम्मी की और देखता है। उसे देखकर सलोनी की हँसी निकल जाती है। उसने अपना चेहरा यूँ बना रखा था जैसे कोई छोटा सा पप्पी बनाता है। सलोनी राहुल के सर के पीछे वाले हाथ से उसके गाल को सेहलाती है और अपनी पल्कों को बंद करके उसे मौन सहमति दे देती है।

राहुल का चेहरा तरुंत ख़ुशी से खील उठता है। वो फ़ौरन आपना चेहरा निचे झुका कर अपनी मम्मी के कड़क गुलाबी निप्पल पर अपनी जिव्हा फेरता है। उसे अपनी जीव्हा की नोक से सेहलता है।
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"म्मममहहहह्म्मम्........उउउउउम्मम्मम्म........." सलोनी के होंठो से मादक सिसकि फूट पड़ती है।

राहुल निप्पल को अपने होंठो में भर उसे चुस्ने लगता है। वो बड़े प्यार से अपनी मम्मी के मुम्मे को चुस चुस कर उसका रस्स पि रहा था। सलोनी उसके बालों में हाथ फेरती गहरी साँसे ले रही थी। राहुल का हाथ दूसरे मुम्मे को सेहलाने लगता है। वो मुम्मे को चूसता बिच बिच में नज़र उठाकर अपनी मम्मी के चेहरे को भी देख लेता था। सलोनी के चेहरे पर कामुकता के साथ उस पर सनेह और ममता की भी जबरदस्त छाप थी जो सिर्फ एक माँ के चेहरे पर अपने बेटे को अपना दूध पिलाते समय हो सकती है। सलोनी के लिए वो सिर्फ और सिर्फ उसका बेटा था, बड़ा छोटा, इससे उसे कोई फरक नहीं पढता था। उसे लगता था के एक बेटा होने के नाते राहुल को उसके जिसम के हर आंग पर पूरा अधिकार था, आखिरकार वो भी उसी जिसम का एक हिस्सा था।
 
राहुल अपने सामने अपनी मम्मी की छूट और उसकी गण्ड का छेद साफ़ साफ़ देख सकता था।
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हालाँकि उसकी चुत के होंठ बंद थे मगर चुत का यूँ बेपरदा होना ही उसको तडपा देणे के लिए काफी था। मगर सलोनी ज्यादा समय तक्क झुकि नहीं रही और ड्रावर से हेयर ड्रायर निकाल कर अपने बाल सुखाने लगती है। राहुल के सामने अपनी माँ के गोल मटोल नितम्ब थे। बिलकुल कसी करारी गण्ड थी सलोनी कि, किसी भी मरद का देखते ही पाणी निकल जाए। उसकी गोरी पीठ से जेहा उसके नितम्ब सुरु होते थे बिलकुल वहा को गोलाकार कर्व में उसके नितम्ब उभरे हुए थे। राहुल उन्हें देखते याद करता है के उसके मम्मी ने कोकोनट आयल भी ख़रीदा है ताकि वो राहुल का लम्बा मोटा लौडा अपनी टाइट गण्ड में आसानी से ले सक। राहुल के दिमाग में जैसे ही वो विचार आता है और वो अपने मन में अपनी माँ की गण्ड में अपना लौडा घुसाने की कल्पना करता है तो उसका लौडा तकिये के निचे एक ज़ोरदार झटका मरता है। राहुल उत्तेजना में अपने लंड पर तकिया दबाकर उसे हलके से मसलता है।

सलोनी आईने में से बेड पर बैठे राहुल की हरकतों को देख रही थी। जब्ब वो ड्रायर उठाने के लिए निचे झुकि थी उसने सर उठकर राहुल को उसकी जंगो के बिच झाँकते देखा था। अब भी जब्ब वो इतने समय से उसके दूधिया नितम्बो को घूर रहा था और जब्ब राहुल लौडे पर तकिया दबाकर उसे मसलता है तोह सलोनी के होंठो पर मुस्कान खेल जाती है। उसके निप्पल्स में कुछ तनाव आने लगता है और वो अपनी चूत को भीगते महसूस करती है। वो समज सकती थी के तकिये के निचे राहुल का लंड कैसे फुंकार रहा होगा।

सलोनी ड्रायर को वापस ड्रावर में डाल अपने बालों पर एक रबड़ बांद डालती है और बेड पर चढ़ अपने बेटे के पास चलि जाती है। उसके बदन पर उस रबड़ बंद के शिव सके कानो के झुम्के और नाक की बलि थी। सारा सामान यूँ का यूँ पड़ा हुआ था। राहूल ने किसी चीज़ को हाथ तक्क नहीं लगया था। सलोनी भी बेड से पुशत लगाकर राहुल से एकदम सट कर बैठ जाती है। राहुल का लंड अपनी मम्मी के बदन की गर्मी और उसके जिसम से नहाने के बाद आ रही ताज़ी मेहक से और भी ज़ोरों से फड़कने लगता है। सलोनी हाथ आगे बढाकर खाने के सामान को अपने पास खींच लेती है।

" मैंने तुझे केहा था तू गरमा गरम सैंडविच खा लेना?"

"मम्मी मेरा अकेला खाने का मनन नहीं किया मैने सोचा आप आ जायो फिर एक्कठे खाते हैं।"

राहुल की बात पर सलोनी झटके से राहुल की गोद से तकिया पकड़ कर खींचती है और उसे अपनी पीथ पीछे लगा लेती है। सामने राहुल का लौडा पत्थर की तरह सखत होकर आसमाँ की तरफ मुंह उठाये खडा था। राहुल "मम्मी" कहकर अपना विरोध जताता है।
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"मइने तुझे खाने के लिए कहा था और तू इसे फिर से खडा करने में लगा है?" सलोनी राहूल को डाँटती है।

"मइने कब्ब इसे खडा किया अब आप हो ही इतनी सुन्दर और ऊपर से यूँ नंगी होकर आगे पीछे घूमोगी तोह खडा ही होगा ना" राहुल भोलेपन से केहता है।

"बाते बहुत बनाने लगा है तु" सलोनी राहुल की और सैंडविच बढाती केहती है।

"यह मम्मी बातें नाहि, आप सच में इतनी सुन्दर हो के मेरा बैठने का नाम ही नहीं लेता" रहल सैंडविच लेकर खाने लगता है।

"चल चल, ज्यादा माखन न लगा। मझे मालूम है कितनी सुन्दर हुन मैं!" सलोनी मुस्कराते हुए खुद भी सैंडविच खाने लगती है। सैंडविच ख़तम होते ही वो दोनों गिलास में दूध डाल कर राहुल की और बढा देती है। राहुल गिलास पकड़ तेज़ी से दूध पिने लगता है। वो फ़टाफ़ट खाना ख़तम करने की कोशिश में था ताकि अपनी मम्मी के रसीले बदन का रस्स पि सके जिसके लिए वो तरसा हुआ था
 
Saloni us samay kisi high class randi ki terah dikh rehi thee. Rahul ek pal ke liye apni mummy ko dekhta hai aur phir aage badh kar uski kamar ko tham leta hai aur use thodha sa bahar kheenchta hai phir apna lauda uski choot ke khule ched parr lagakar apne dant bheench kar poora lauda ek hi jhatke main andar ghusa deta hai.
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Saloni ki rasili choot ko cheerta huya lauda jadd takk uski choot main sama jata hai
aur uske tatte gand ke ched se takrate hain.

"Aaaaaiiieee.........maar daala jaalim.........ooohhhhhhggioodd...........ab dekh kaya reha hai......
.chod chod.......chod apni mummy ko..........." Saloni cheekh bhi rehi the aur lund bhi mang rehi thee
aur uska beta use dene ke liye bilkul tyyar thaa.
Rahul ke liye ab kamar ko thaam tez tarrar ghasse marne bahut asan ho gaye the.
Wo kamar ko thaam apna lauda nikaal itne zor zor se andar thelne laga ke do minute main hi Slaoni ka jisam jatke khane laga.
Uski choot main tufan uthna suru ho geya.

"Rahuull....beetttaaa..........chodta reh........hayyyeee..........chodta reh..........uuuffffffff.............haaayyyeeee meeerii chhoooootttt.............uuufffffff.........main chutne wali hun.......chod daal mujhe.......beta.......chod daal......chod de apni mummy ko........" Saloni tadpati huyi siskati hai.

Rahul dant bheenche zor lag reha thaa.
Lagatar uska poora dhayan poore zor se lund ko choot main thokne ka thaa
aur wo isme poora safal bhi ho reha thaa.

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Kuch hi dhakkon ke baad Saloni ka badan aur bhi zor se jhatke khane lagta hai. Wo apni tange choddh deti hai aur apne mummo ko maslane lagti hai, apne nipplon ko kheenchne umethane lagti hai. Uski choot se uske rass ni fuhare nikal rehi thee. Wo apna badan ainth rehi thee aur uski choot main us waqat bavanadar utha huya thaa.

"Rahuullll.....Rahuuuuullll.....beetttttaa...........bbbeetttaa....ruuukkkkkkkkk....jaaaaaaa...." Saloni se ab laude ki jbardasat thokre bardahat nahi ho rehi thee. Magar Rahul nahi rukta, wo ruk bhi nahi sakta thaa wo toh balke apne dant bheenche jitna fast ho sakta thaa apna lauda pele ja reha thaa. Abhi Saloni ki choot ne rass bahana band nahi kiya thaa ke Rahul ke laude ne pichkariyan marni suru kardi.

"Mummmmmmyyyyyyyyyyy..........." Teen char dhakke laga kar Rahul apni mummy ke upar dheh jata hai jabke uska lauda lagaatar Saloni ki choot main veerya ki nadiyan bahata ja reha thaa.

"Aajjaaa mere laal......mera bachcha......mera munna...." Saloni Rahul ki pith ko sehlati use dularati hai. Dono kafi samay takk santh padhe rehte hain.

"Beta........Rahulllll......." Das pandreh minto baad Saloni Rahul ko hilati hai. Rahul uth jata hai aur phir apni mummy ko uthne main madad karta hai. Saloni uth kar table par baith jati hai aur jhuk kar apni choot ko dekhti hai jisme abhi bhi Rahul ka lund dhansa padha thaa. Lund ke sath sath uski janghe par uski choot se nikalata veeraya beh reha thaa.

"Dekh toh kitna maal nikala hai tune........ Pehle cinema main bhi ab phirse.......Kitna jama karke rakha huya hai andar" Saloni sach main ascharyachakit thee.

"Ooohhh.....mummy tumhari choot ka kamal hai sara........aaj sach main bahut maza aaya....... Itna maza ke bare main kabhi socha bhi nahi thaa......" Rahul bahut khush thaa apni mummy ko chodkar. Uske chehre se jaan padhta thaa.

"Chalo....tumhe maza toh aaya. Ab toh sikayat nahi karoge na ke main tumhe apni choot nahi marne deti." Saloni uske chehre par pyar bhari chapat lagati kehti hai.

"Kahunga na.......ab siraf ek baar senmera pet thodhe na bhar jayega.... Main toh har roz subeh, sham, raat ko bhi lunga."

"Badmash......." Saloni use marne ke liye hath uthati hai toh Rahul hans padhta hai. Saloni bhi muskra padhti hai. "Tum marad bhi na......."

"Mummy tumhe bhi poor maza aaya na..." Rahul janne ko adheer thaa. Saloni samagh sakti thee. Use is baat ki chinta thee ke wo apni mummy ko utna khush kar paya bhi thaa jitna wo usse ummeed rakhti thee.

are mere bete bahut maza diya hai tune ,,
tune to meri choot jaise chodi hai itni to tere baap ne bhi nahi chodi kabhi
ek randi ki tarah choda hai tune mujhe,,
ja jakar naha le,, or rahul nahane chala jata hai ,,

राहुल नहाकर बाथरूम से बाहर आता है और रिमोट उठाकर टीवी चैनल चेंज करने लगता है। एक म्यूजिक चैनल लगाकर वो आईने के सामने अपने बाल सँवारने लगता है। उसने कमर पर तौलिया लपेटा हुआ था। वो अभी सोच ही रहा था के के ऊपर जाकर अपने पहनने के लिए कपडे ले आये के तभी कमरे के दरवाजे पर नोकिंग होती है। राहुल दरवाजा खोलता है तोह सामने सलोनी दोनों हाथों में ढेर सारा सामान पकडे खड़ी थी। एक हाथ में गिलास और दूध और दूसरे में एक प्लेट में सैंडविच रखे हुए थे वो अभी भी पूरी नंगी थी।

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"नहा लिया तुमने?" सलोनी बेड पर सामान रखते पूछती है। दोनों प्लेट्स और गिलास रखने के लिए उसे हल्का सा झुकना पढता है और राहुल जो उसके पीछे खड़ा था तरुंत अपनी निगाह सलोनी की हलकी सी चौड़ी टांगों के बिच उसकी चुत पर मारता है। सलोनी की चुत के होंठ एकदम बंद थे और उसकी चुत से उसका वीर्य बेहता हुआ निचे उसकी जांघो तक चला गया था। सलोनी ने अभी तक उसका वीर्य भी साफ़ नहीं किया था।

"मैंने केहा नाहा लिया तुमने" सलोनी सामान रखकर पीछे घुमति है और राहुल के चेहरे को देखकर उसे माजरा समज में आ जाता है।

"तुम मरद लोग भी न बस चुत के सिवा तुम्हे कुछ और नज़र ही नहीं आता" सलोनी रहल को डांटने के स्वर में केहती है और हाथ आगे बढाकर उसका तौलिया कमर से खींच लेती है। राहुल पूरा नंगा हो जाता है। उसका लौडा आधा सखत हो भी चुका था। सलोनी बेटे के लंड को देखति हताशा में सर घुमाति है।

"मैं नहाकर आती हुण। तुम सैंडविच खाओ गरमा गरम" सलोनी तेज़ी से बाथरूम की और बढ जाती है और राहुल की नज़र अपनी मम्मी की गण्ड का तब तक पीछा करती है जब तक के वो बाथरूम के अंदर दाखिल नहीं हो जाती। वो अपने तेज़ी से सखत हो रहे लंड को पकढ़ कर झटका देता है। उसे अब सैंडविच की भूख नहीं थी, उसे तोह अब बास एक ही चीज़ चाहिए थी जिससे उसकी भूख मिटने वाली थी और वो थी अपनी मम्मी की चुत।

सलोनी को बहुत ज्यादा समय नहीं लगा नहाने में। कोई दस् मिनट बाद वो बाथरूम से अपने बाल तौलीये से सुखाते हुए निकलती है। वो अब भी पूरी नंगी थी।
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वो रहल की और देखति है जो अपनी जांघो पर तकिया रखे बेड की पुशत से टेक लागए बैठा टीवी देख रहा था या फिर टीवी देखने की कोशिश कर रहा था। सलोनी के अंदर घुसते ही उसकी नज़र फिर से अपनी मम्मी के दूधिया, गुदाज़ बदन पर घुमने लग्ग जाती है। सलोनी बाहें ऊपर उठाये अपने बालों को तौलीये से रगढ रही थी, इस्लिये उसके मोठे मुम्मे भी कुछ ऊपर उठे हुए थे। और उसकी बाहें हिलने के कारन तेज़ी से ऊपर निचे उछाल रहे थे। राहुल अपनी मम्मी के उन रसीले मुम्मो को को यूँ उचलते देखता है तोह उसके मुंह में पाणी भर जाता है। सलोनी अपना मुख आईंने की और मोड कर खड़ी हो जाती है और झुक कर ड्रावर को खोलती है।
 
"उउउन्न्नन्ग्घह ............ आआहह ...... राआहहुउल्ल्ल्ल्ल ......बस कर.....बस कर..............उउफ़फ्फ़ सहा नही जाता........हाए मर जायूंगी मेरे लाल" सलोनी कराहने लगती है | राहुल चूत चोदना छोड़ सलोनी के भांगकुर को अपने होंठो में दबा लेता है और उस पर अपनी जिव्हा रगड़ता है | राहुल के इस वार को सलोनी झेल नही पाती वो कांपने लगती है |

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"राहुल बेटा ...... बस कर ...... बस कर ........ हहाअययइईई ......... बस कर..." इस बार राहुल सलोनी की बात मान कर उठ जाता है और उसके उठते ही सलोनी नीचे बैठ जाती है, मुँह (फटने की हालत तक) खोल कर वो बेटे का लौड़ा मुँह में डाल लेती है | राहुल भी कुछ ज़्यादा ही उत्तेजित था |

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उधर सलोनी लंड को मुँह में डाल कर चुस्ती है तो राहुल अपना लौड़ा आगे पीछे करता उसका मुँह चोदने लग जाता है | सलोनी के लिए मुश्किल था मगर वो किसी तरह सुपाड़े पर जिव्हा घूमाती उसके लौड़े को अपने मुख की गर्माहट दे रही थी | राहुल का लौड़ा तेज़ी से सलोनी का मुँह चोदने लग जाता है | अचानक सलोनी राहुल की जाँघो पर हाथ रखकर उसके लंड को मुँह से निकाल देती है और खड़ी हो जाती है |

"मुझे मालूम है तू चोदने के लिए तडप रहा है ......... आजा मेरे लाल ...... इधर आ......" सलोनी राहुल को अपने बदन से सटा लेती है | दोनो एक छोटा सा मगर भीगा हुआ चुंबन करते हैं | सलोनी अपनी दाहिनी टांग उठाकर राहुल की जाँघ से लिपटा देती है और राहुल का हाथ पकड़ उस पर रख देती है | राहुल उसकी टांग को एक हाथ से संभाल लेता है | सलोनी बेटे के गले में एक बाँह डाल कर पंजो के बल उपर उठती है और दूसरे हाथ से उसका लौड़ा थाम लेती है |

"आजा मेरे लाल....देख तेरी मम्मी तेरा लंड अपनी चूत में ले रही है ......... बहुत तरसाया है ना मैने तुझे मेरे लाल ....अब नही तरसायूंगी ......... अपनी लुल्ली अपनी मम्मी की चूत में डाल दे और चोद दे अपनी मम्मी को......... चोद ले अपनी मम्मी को दिल भर कर... चोद ले मेरे लाल" सलोनी राहुल के लंड को अपनी चूत के मुहाने पर फिट कर देती है

Aaja mere laal....dekh teri mummy tera lund apni hoot main le rehi hai.........bahut tarsaya hai na maine tujhe mere laal....ab nahi tarsayungi.........apni lulli apni mummy ki choot main daal de aur chod de apni mummy ko.........chod le apni mummy ko dil bhar kar...chod le mere laal" Saloni Rahul ke lund ko apni choot ke muhane par fitt kar deti hai.
"Ghusha de beta......ghusa de......apni mummy ki choot main beta......" Saloni kampti si awaz main boli.
Rahul thodha sa niche ko hota hai aur vaapas upar ko uthate huye apna lauda Saloni ki choot main ghusane lagta hai. Dono ke khadhe hone ka karan aur ghusane ka angle sahi na hone ke karan uska lauda upar ko khiskane lagta hai magar Saloni ne isi kaam ke liye use apne hath main thame rakha thaa. Wo use ball poorvak apni choot ke ched se hatne nahi deti aur Rahul ke zor lagane ke karan choot ka ched khulne lagta hi aur supada ched ko phailata andar dakhil hone lagta hai.

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"Cccccceeeeeee.......uuuuuuufffff...........ghusata jah........ghusata jah" Saloni hontho ko beench sisakati hai. Supada uske dane ko ragadata uski choot main dakhil ho jata hai aur wo lund se hath hata leti hai aur dusra hath bhi Rahul ki gardan main lapet deti hai ab wo uski gardan main bahen daale jhool rehi thee.

"Ghusha de beta......ghusa de poora aur chod le apni mummy ko" Salaoni Rahul ko josh diati hai. Rahul ka lund jaise jaise choot main andar ja reha thaa vaise vaise use mehsoos ho reha thaa ke choot kitni garam hai. Uska lauda lagbhag jall reha thaa. Magar aaj use ghusane main koyi dikkat nahi ho rehi thee. Saloni ki choot ne itna rass bahaya thaa ke lauda andar ki aur fisalata ja reha thaa aur Saloni ki siskiyan tez hoti ja rehi thee.

"Oooofffff.......Rahul abhi kitna baki hai.........uuufff ek toh tumhara lauda itna bada hai ke lagta hai mere gale takk pahunch jayega"

"Bass ho geya......ghush geya poora mummy.........uufff mummy tumhari choot kitni garam hai andar se" Rahul sisakata bolta ai.

" Teri vajeh se garam hai tu chodega nahi toh garam hi hogi na........tere ko nahi mallum teri mummy ki choot kitni pyasi hai...............tujhe nahi pata teri mummy ki choot ko tera mota lamba lauda chahiye...........aur tu hai ke mummy ko chodta hi nahi hai......."

"Main...toh....har......waqat.......chodne ke ........liye tyyar......hun par tum......deti hi nahi ho mummy...." Rahul apna lauda upar niche karta Saloni ko chodne lagta hai.

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"Ab de rehi hun na...........chudwa rehi hun na.......ab chod.......chod .......... Poore zor se chod apni mummy ko..........uuuuufff....aaaahhhhhhhh.......aaaahhhh......."

Rahul ko aur kaya chahiye thaa.
Wo josh main aakar danadan lauda pelne lagg jata hai.
Jalad hi Saloni bhi apni choot laude par patkane lagti hai.

"Haaayyyeeee............Sabash mere laal............chod........aaaaaaiiieeee........ouchchch....aur zor se........maar......maar.....haaaayyeeee..........maar apni mummy ki choot.
.............aaaaaaiiieeeeee.......uuuffffffffffff......pel de apna poora lauda........pel de"

Rahul aur bhi josh main aa jata hai.
Wo pehle hi choot marne ke liye tarsa huya thaa aur upar se uttejit bhi bahut thaa.
Ab toh uske munh se "uuunnhh......uuunnnhhhh" karke har dhakke par awazen nikl rehi thee jbb wo apna lauda poore zor se choot main thoos reha thaa.

"Ruk.....rukkkkk...ayyyeeeeee....ruk na....... Saloni Rahul ko rokne ki koshish karti hai jo ab rukne ke liye tyar nahi thaa. Use lagg reha thaa wo jyada der theharane wala nahi hai.

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"Ruk beta.......ooofffooo ruk bhi.....mujhe table par laitne deh phir chodna mujhe........tabb jayada maza ayega......" Table ka naam sunte hi Rahul ruk jata hai. Saloni phat se Rahul se juda hoti hai aur table ke kinare khadhi hokar us par pith ke bal letne lagg jati hai. Uske nitamb ekdum table ke sire par the. Saloni table par lait apne ghutne pakadh apne mummo par dabati hai aur tange khol deti hai. Uski choot jisme abhi abhi Rahul ka mota lamb lauda ghusa huya thaa khul kar andar se gulabipan dikha rehi thee.
 
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