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Kamukta हाए मम्मी मेरी लुल्ली

रेस्तराँ एक आलीशान होटल के ग्राउंड फ्लोर पर बना हुआ था | सामने एक बहुत बड़ी पार्किंग थी | सलोनी का पति महीने में एक दो बार उसे वहाँ लाया करता था |

"मुझे थोड़ा मेकअप सेट करना है, फिर चलते हैं ... तू भी अपने शेर को अपनी पेंट में घुसा ले और इसे अच्छी तरह से समझा दे कि रेस्तराँ के अंदर ज़्यादा उछल कूद ना मचाए" सलोनी बैग से छोटा आईना निकालकर होंठो पर लिपस्टिक लगाने लगती है |

कोई दस मिनिट बाद सलोनी और राहुल रेस्तराँ के अंदर बैठे थे | किस्मत से रेस्तराँ में ज़्यादा भीड़ नही थी | इसलिए सलोनी को खाली टेबल्स में से अपनी पसंद की टेबल मिल गयी | वो कॉर्नर की टेबल थी | सलोनी की पीठ दीवार की तरफ़ थी जबकि राहुल उसके सामने बैठा था और उसकी पीठ पीछे काउंटर की तरफ़ थी | अब सलोनी दीवार के पास बैठे होने के कारण रेस्तराँ का पूरा नज़ारा देख सकती थी जबकि राहुल रेस्तराँ के बाहर का | टेबल पर बैठते ही सलोनी ने और राहुल ने पानी पिया | सलोनी ने अपना बैग टेबल पर रखा और राहुल की और देखकर बहुत ही भोलेपन से मुसकराई | राहुल के कान खड़े हो गये | उसे लगने लगा कि उसकी मम्मी जहाँ भी कोई ना कोई शरारत करेगी |

राहुल का शक़ बिल्कुल सही निकला | अभी उन्हें टेबल पर बैठे कुछ पल भी नही गुज़रे थे कि राहुल को अपनी टांग से सलोनी का पाँव घिसता हुआ महसूस हुआ | सलोनी अपने पाँव से उसके घुटने तक उसकी टांग को सहला रही थी, बड़े ही मादक अंदाज़ में उसका अंगूठा बेटे की टांग पर रेखाएँ खींच रहा था | राहुल सलोनी की तरफ़ देखता है उसकी नज़र में चेतावनी थी | सलोनी ज्वाब में अपने कंधे झटका देती है | राहुल आस पास देखता है |

"अपनी कुर्सी आगे खीँचो ... पूरी जितनी आगे तक खींच सकते हो" सलोनी का पाँव राहुल के घुटने को सहला रहा था |

"मम्ममम्मी......." राहुल अपनी मम्मी से एतराज़ जताना चाहता था |

"मैने कहा अपनी कुर्सी आगे खीँचो" सलोनी का पाँव अब घुटने के उपर राहुल की जाँघ को सहला रहा था | राहुल का लंड आधा सख्त भी हो चुका था |
 
"उफफफफफफ्फ़ ..... आदमी की जगह घोड़े का लंड लगा कर घूमेगा तो वो पेंट में कैसे घुसेगा ...... दर्द तो होगा ही ना ........ उपर से अकड़ा कैसे रखा है ....... ऐसा लंड किसी लड़की की चूत में डालेगा तो बेचारी मर ही जाएगी ........ तुझे किसने कहा था इसे इतना लंबा मोटा करने के लिए ........."

सलोनी के चेहरे पर ऐसे भाव थे कि राहुल को पता लग रहा था कि वो मज़ाक कर रही है जा गंभीरता से बोल रही है | बहरहाल चाहे उसने वो अल्फ़ाज़ मज़ाक में कहे थे मगर राहुल के लंड को बहुत अच्छे लगे थे जो खुशी से थोड़ा और फूल गया था | वो कुछ कहना चाहता था मगर उसे सुझ नही रहा था वो कहे भी तो क्या कहे | अंत-तहा उसनें चुप रहना ही बेहतर समझा | सलोनी गाड़ी को पार्किंग से निकालने लगती है | राहुल फिर से मैगज़ीन को वापस अपनी जाँघो पर दबा लेता है | गेट के पास अभी भी थोड़ा रश था मगर उन्हे वहाँ से बाहर निकालने में ज़्यादा समय नही लगा |

रोड पर गाड़ी चलाते हुए सलोनी बीच बीच में राहुल को देख रही थी और मुस्करा रही थी | राहुल ने अपनी तरफ़ से गाड़ी का शीशा थोड़ा नीचे कर लिया था जिससे ठंडी हवा के झोंके अंदर आ रहे थे और राहुल मैगज़ीन को थोड़ा सा उपर उठाकर अपने लंड को ठंडी हवा लगवा रहा था जैसे उसकी अकड़ाहट कम पड़ने लगी थी और वो नरम पड़ने लगा था | राहुल ने वैसे तो अभी भी लंड को थोड़ा उपर करके मैगज़ीन रखी हुई थी मगर उसको अब गाड़ी चलती होने की वजह से किसी द्वारा देखे जाने का डर नही था |

तकरीबन बीस मिनिट की ड्राइव के बाद सलोनी ने गाड़ी को एक महँगे रेस्तराँ के सामने रोका | राहुल अपनी मम्मी की तरफ़ देखता है |

"अब इस वक़्त घर जाकर मुझसे तो खाना पकाया नही जाएगा वैसे भी मुझे भूख बहुत लगी है, तुझे भी लगी होगी ना" सलोनी के पूछने पर राहुल सहमति में सर हिलाता है | सच में उसे बहुत भूख लगी थी | पहले उसे खड़े लंड ने परेशान करके रखा था इसलिए उसका ध्यान भूख की तरफ़ नही था मगर अब जब लंड ढीला पड़ गया था तो उसे भी भूख महसुस होने लगी थी |
 
"बाहर, जहाँ ... कोई भी देख सकता है मम्मी" राहुल इधर उधर देख कर बोलता है |

"तो क्या हुआ" सलोनी एक ड्रॉयर को खोलती है | उसमें से एक मैगज़ीन निकाल कर राहुल की और फेंकती है | "इससे ढँक लेना"

राहुल को यह स्कीम पसंद आती है | वो मैगज़ीन पेंट के उभार के उपर रखकर अपनी ज़िपर खोलता है और अपना लंड बाहर निकालता है | लंड के बाहर निकलते ही राहुल "ओह" करके चैन की साँस लेता है | उसके चेहरे से फ़ौरन राहत झलकती है | सलोनी उसे देखकर मुस्करा उठती है |

"ज़रा दिखा तो मुझे."
"अभी जहाँ ... नही-नही मम्मी" राहुल घबराता सा बोल उठता है |
"क्यों, अभी कौनसा इसे कोई देख लेगा? ज़रा मेरी और से थोड़ी सी मैगज़ीन उठा दे, मैं देख लूँगी" सलोनी राहुल को ज़ोर देते हुए कहती है |
"ठीक है मैं दिखाता हूँ, लेकिन पहले आपको वायदा करना होगा आप इसे टच नही करोगे और ना ही कोई ऐसी वैसी हरकत करोगे, आपने पहले ही मेरी हालत बहुत खराब कर दी है" राहुल अपनी मम्मी के आगे शर्त रखता है |

"ओह ......... तू तो लड़कियों की तरह नखरे दिखा रहा है ... उउन्न्नह मैं नही दिखायुंगी, सिर्फ देखना छूना नही ........ धीरे धीरे करो ना ... दर्द होता है ....... राहुल तू भी बस किसी नयी लड़की की तरह है ... अगर मैं कुछ करती हूँ तो तुझे प्राब्लम है अगर नही करती हूँ तो तुझे प्राब्लम है, मुझे तो यही समझ में नही आता तू चाहता क्या है"

सलोनी राहुल को तीखी नज़रों से घूरती है, राहुल अपनी मम्मी को आहत भाव से देखता है |

"चल ठीक है बाबा मैं कोई ऐसी वैसी हरकत नही करूँगी ...... अब दिखा भी दे" सलोनी थोड़ा मुस्करा कर कहती है |

राहुल एक बार आस पास नज़र डालता है खास करके अपनी मम्मी की तरफ़ | फिर वो अपनी तरफ़ से मैगज़ीन दबाकर सलोनी की तरफ़ वाला हिस्सा उपर उठाता है | सलोनी की नज़र राहुल के लंड पर पड़ती है, वो कुछ लम्हे लंड को बड़े ध्यान से देखती है | लंड इस कदर अकड़ा हुआ था कि वो झटका भी नही खा रहा था, एकदम पत्थर की तरह सख्त था | उसके उपर नसें उभर आई थी, सूपाड़ा इतना गहरा सुर्ख लाल दिख रहा था जैसे खून में डुबोया हो | एक तो लंड की लंबाई चौड़ाई पहले से ही ज़्यादा थी और उपर से वो इस कदर सख्त हो चुका था कि वो विकराल लंड देखने में ही बहुत भयानक दिख रहा था | यही लंड जब उसकी चूत में घुसेगा तो क्या धमाल मचाएगा ..... यह सोचते ही एक बार फिर से सलोनी की चूत गीली हो जाती है |
 
एग्ज़िट से बाहर जाते समय राहुल बार बार दाएँ बाएँ देख रहा था | सलोनी उसकी साइड में चल रही थी, भीड़ ज़्यादा होने की वजह से लोगों के आपस में कंधे से कंधे टकरा रहे थे | सलोनी की नज़र अपने बेटे पर जाती है, वो कुछ परेशान सा इधर उधर देख रहा था | जब दोनो माँ बेटे की आँखे मिलती हैं तो सलोनी भवें उठाकर "क्या हुआ?" पूछती है | राहुल अपनी आँखे झुकाकर नीचे की और इशारा करता है | सलोनी की नज़र नीची होती है तो वो देखती है कि राहुल का लंड अकड़ा होने के कारण उसकी पेंट के सामने एक बड़ा सा तंबू बन गया था |

सलोनी लोगों के बीच से होती हुई राहुल के आगे चली जाती है | राहुल के एकदम सामने पहुँचकर वो पीछे मुड़कर राहुल को पास आने का इशारा करती है | राहुल समझ जाता है और अपनी मम्मी के पीछे लगभग चिपक जाता है | अब उसका लंड दिखाई नही दे रहा था बल्कि सलोनी की गांड को उसकी जीन्स के उपर से रगड़ रहा था | हालांकि इतनी भीड़ में यह बहुत मुश्किल था कि किसी का ध्यान राहुल की तरफ़ चला जाता मगर फिर भी बेटे का मज़ाक बनने का रिस्क वो नही लेना चाहती थी, सिनेमा में तरह तरह के लोग आते हैं खास कर शाम के शो पर | खैर इसी तरह चलते चलते वो गेट के पास पहुँच गये जहाँ कार पार्किंग थी | वहाँ भीड़ नही थी, इसलिए राहुल अपनी मम्मी के पीछे छिपकर नही चल सकता था | मगर उसकी किस्मत अच्छी थी उनकी कार गेट के पास ही में पार्क थी | राहुल लगभग भागता हुआ गाड़ी के पास पहुँचा, सलोनी ने हंसते हुए गाड़ी को दूर से रिमोट से अनलॉक कर दिया | राहुल गाड़ी के अंदर बैठ चैन की साँस लेता है | सलोनी गाड़ी में बैठ उसे स्टार्ट करती है |

शो अभी खत्म होने के कारण पार्किंग से रोड तक जाम लगा हुआ था | गाड़ियों के हॉर्न का शोर चारों तरफ़ से आ रहा था | सलोनी ने कुछ देर वेट करना उचित समझा |

"अभी पाँच मिनिट रुक कर चलते हैं, थोड़ा ट्रैफिक कम हो जाएगा" सलोनी राहुल की और मुड़ कर कहती है मगर राहुल को देखने से लग रहा था जैसे वो अभी भी परेशानी में था |

"अब क्या बात है?"

"वो मम्मी दुख रहा है?" राहुल उभार के ऊपर से अपने लंड को सहलाता हुआ बोला |

"तो तेरे को कौन कहता है इसको हर वक़त अकड़ा कर रखने के लिए .... जब देखो खंबे की तरह खड़ा कर लेता है .... ऐसा कर तू इसे बाहर निकाल ले"
 
"मम्मी ..... मम्मम्म्ममी ..... प्लीज़ ...... ओह गॉड ...... बस कीजये ..... देखिए ...... सब लोग ...... उउउफफफ्फ़ ........." राहुल सिसक पड़ता है | सलोनी लंड को मुँह में लिए उस पर तेज़ी से अपना मुख उपर नीचे करने लगती है |
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पुरे हॉल में कपड़े सरकने का शोर सा होने लगता है | सब लोग अपने कपड़े सेट कर रहे थे | लगता था लाइट कभी भी जलने वाली थी |

"मम्मी प्लीज़ .... लाइट ओन होने वाली है" राहुल आसपास देखता हुआ बोला | मगर सलोनी मुँह हटाने की वजाए और भी तेज़ी से अपना मुँह लंड पर उपर नीचे करने लगी | तभी उनके दूसरे सिरे की एक लाइट ओन हो गयी | सलोनी ने बिजली की रफ़्तार से अपना मुँह लंड से हटा लिया | उसने अपना दुपट्टा उठाकर राहुल की गोद में डाल दिया जो लंड को जल्दी से अंदर डालने के लिए कशमकश कर रहा था | लंड के अकड़ा होने के कारण वो ज़िपर से अंदर नही घुस रहा था | स्क्रीन पर अभी फिल्म का आख़िरी सीन चल रहा था |

"आराम से अंदर करो ... देखना कहीं फिर से ज़िपर में ना फँसा देना" सलोनी मुस्कराते हुए कहती है | राहुल आख़िरकार अपनी पेंट की हुक खोलता है और अपने लंड को अंदर करके उस पर पेंट की हुक वापस लगा देता है | वो ज़िपर को पकड़ता है जबकि उनकी तरफ़ की लाइट्स भी जलने लगती है | सामने बैठे लड़का लड़की भी अपने कपड़े दरुस्त कर रहे थे बल्कि कई जोड़े लाइट जलने के बाद ही होश में आए थे मगर किसी को कोई परवाह नही थी | लोग उठकर सिनेमा से बाहर जाने लगे थे |

"चलो उठो, फिल्म खत्म हो गयी" सलोनी मुस्कराते हुए उठती है | राहुल भी अपनी मम्मी के पीछे पीछे एग्ज़िट की और बढ़ता है |
 
राहुल ने कुर्ते के अंदर हाथ घुसा सलोनी की ब्रा को खींचकर वापस उसके मुम्मे पर चढ़ा दिया | ब्रा को मुम्मे के उपर सही तरह करके उसने सलोनी के कुर्ते के बटन बंद कर दिए | कुर्ते को सही करने के पशचात राहुल ने अपनी पॉकेट से रुमाल निकाला और सालों की जाँघों और चूत को साफ करने लगा | उसकी चूत ने इतना रस बहाया था कि उसको साफ करते करते पूरा रुमाल भीग गया | राहुल ने उसकी कच्छी को वापस चूत के उपर रखा और पेंट के दोनो सिरों को पकड़ कर उसका बटन बंद करने लगा | ज़िपर लगाकर जब उसने सलोनी की और देखा तो वो उसे पहले की तरह अपलक देखे जा रही थी | राहुल अपनी मम्मी की और देखकर मुस्कराता है तो वो भी फीकी सी मुस्कान देती है | राहुल अपने खड़े लंड को पेंट के अंदर घुसाने का प्रयत्न करता है मगर तभी सलोनी उसके हाथ पर हाथ रख उसे रोक देती है | राहुल अपनी मम्मी की और देखता है |
"ज़रा रूको बेटा.......मैं अभी आती हूँ" सलोनी उठने लगती है |

"मगर मम्मी क्लाइमैक्स होने वाला है ... फिल्म जल्द ही खत्म हो जाएगी" राहुल घड़ी देखता बोलता है |

"मैं अभी बस पाँच मिनिट में आई" कहकर सलोनी उठकर काँपती टांगों से बाहर जाने लगती है | वो अपना पर्स और राहुल के हाथ से रुमाल भी ले लेती है | उसे चलने में परेशानी हो रही थी | अभी भी उसकी टाँगे कांप रही थी |

सलोनी के जाने के बाद राहुल अपनी आँखे बंद कर लेता है | आज उन दोनो ने सारी हदें पार कर दी थी | इतने लोगों के बीच उसने अपनी माँ के मुम्मे चूसे थे उसकी चूत को अपनी उंगलियों से चोदा था और उसे इतना ज़बरदस्त स्खलन करवाया था | अभी भी उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था जब उसे याद आता है कि किस तरह उसकी साँस टूट रही थी और वो अपनी मम्मी की सिसकियों को दबाने का प्रयत्न कर रहा था | उफ़फ्फ़ अगर कुछ पल वो खुद पर कंट्रोल ना कर पाता तो सारे सिनेमा हॉल में सलोनी की सिसकियाँ गूँज रहीं होतीं | तब क्या होता ...... यह सोचकर अभी उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था |

सलोनी ने सच में पाँच मिनिट से ज़्यादा वक़्त नही लगाया | वो आते ही राहुल के पास बैठ गयी और उसके लंड को मुट्ठी में भर लिया |
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"मम्मी टाइम बिल्कुल भी नही है.......बस किसी भी समय लाइट्स ओन होने ही वाली हैं"

"बस एक बार .... थोड़ा सा स्वाद लेना है ..... देख ना उन्हे" सलोनी सामने की और इशारा करती है | राहुल की नज़र अपने सामने बैठे जोड़े पर जाती है जिसे वो लगभग भूल ही चुका था | लड़की लड़के की गोद में सर झुकाए कुछ कर रही थी | उसका सर उपर नीचे हो रहा था और लड़के ने उसके बाल पकड़े हुए थे | राहुल समझ गया कि लड़की लड़के का लंड चूस रही है मगर तभी उसे अपने लंड पर मुलायम सा एहसास होता है, फिर गीलेपन का और फिर उसके लंड को गर्माहट का एहसास होता है | वो अपना सर नीचे झुकाता है और देखता है उसकी मम्मी ने उसके लंड को मुँह में भर लिया था |

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वो उसके सुपाड़े को अपनी जीभ से रगड़ते उसके लंड को चूस रही थी |
 
राहुल को एक पल के लिए चिंता होने लगी | उसने अपनी एक बाँह सलोनी के गले में डाल उसे अपनी तरफ़ खींच लिया और अपने होंठ पुरे ज़ोर से उसके होंठो पर दबा दिए ताकि कहीं वो ज़ोर से कराह ना उठे,
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उसकी सिसकियाँ लगातार उँची होती जा रही थी | सलोनी ने भी राहुल के चेहरे को थाम लिया और अपने होंठ उस पर दबा दिए दोनो की जिव्हा आपस में लड़ने लगी | अब राहुल थोड़ा निशचिंत था | उसने फिर से पूरी स्पीड पकड़ ली बल्कि पहले से भी ज़्यादा तेज़ी से वो अपनी मम्मी की चूत को अपनी उंगलियों से चोदने लगा | उसका अंगूठा अब सलोनी की चूत के दाने को सहला नही बल्कि रगड़ रहा था | सलोनी राहुल के हमले के बाद उसके चेहरे को और भी ज़ोर से अपनी तरफ़ खींचती है और उसकी जीभ को चुस्ती है | उसके जिस्म को लगने वाले झटके बहुत तेज़ हो चुके थे | चूत संकुचित होना शुरू हो चुकी थी | वो अपनी गांड उपर को उठा ज़्यादा से ज़्यादा राहुल की उंगलियाँ अपनी चूत में लेने का प्रयास करती है | बेटे की जिव्हा चूस्ते हुए वो उसके मुँह में सिसक रही थी | राहुल का अंगूठा दाने को पुरी तेज़ी से रगड़ रहा था | अचानक सलोनी ने अपनी पूरी गांड कुर्सी से एक दो इंच उपर उठा दी | उसने अपना मुँह अपने बेटे के मुँह पर इतने ज़ोर से दबाया कि राहुल को दर्द होने लगा | अगले ही पल सलोनी की गांड वापस कुर्सी पर गिर पड़ी | उसके हाथ अपने बेटे के चेहरे पर ढीले पड़ने लगे | राहुल ने तुरन्त भाँप लिया और इससे पहले कि सलोनी के होंठ राहुल के होंठो से जुदा होते और पुरे हॉल में उसकी सिसकियाँ सुनाई देने लगती, राहुल ने अपनी बाँह पूरी मज़बूती से उसकी गर्दन के पीछे बाँह रखकर वापस उसके चेहरे को अपने चेहरे पर दबा दिया | सलोनी बेटे के मुँह में उुउन्न्ञननननननगगगगगघ करते कराह रही थी, सिसक रही थी | उसकी सिसकियाँ, उसकी कराहें राहुल के मुँह में ही दम तोड़ रही थी | सलोनी की चूत से रस बहता उसकी जाँघो को गीला कर रहा था | वो अपना जिस्म ऐंठ रही थी | राहुल अब भी उसकी चूत में उंगलियाँ पेलता जा रहा था
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और उसके दाने को रगड़ता जा रहा था | वो चाहता था जल्द से जल्द सलोनी का सखलन समाप्त हो जाए क्योंकि अब उसकी साँस टूटने लगी थी | वो अपनी मम्मी के होंठ सील किए उसकी सिकियाँ रोकने में तो कामयाब हो गया मगर इतने समय से साँस ना लेने के कारण उसकी साँस फूलने लगी | वो ज़्यादा देर अपनी साँस रोके नही रख सकता था | उधर सलोनी का सखलन कुछ ज़्यादा ही लंबा हो गया था, लगता था जैसे वो हद से ज़्यादा कामौत्तेजित हो चुकी थी | और जब राहुल को लगा कि अब वो और ज़्यादा अपनी साँस रोक नही सकता तो सलोनी का बदन मंद पड़ने लगा | राहुल खुद को तसल्ली देने लगा | आख़िरकार सलोनी के बदन ने झटके खाने बंद कर दिए | हालांकि उसकी चूत में हल्का हल्का संकुचन अभी भी हो रहा था, मगर अब वो अपना बदन नही ऐंठ रही थी | उसका जिस्म शान्त पड़ता जा रहा था | आख़िरकार राहुल से जब बर्दाशत नही हुआ तो उसने धड़कते दिल के साथ अपने होंठ अपनी मम्मी के होंठो से हटा लिए | राहुल ने एक गहरी साँस खींची | उसे खाँसी आ रही थी जिसे वो किसी तरह कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था | वो नही चाहता था किसी और का ध्यान उनकी और जाए |

सलोनी ने भी होंठो के हटते ही एक तीखी साँस अंदर खींची मगर उसने कोई सीत्कार नही भरी जैसा राहुल को डर था | स्खलन की तीव्ररता से गहरी साँसे लेती वो बेसूध सी हो गयी थी | राहुल भी खुद को संभालने में लगा था | आख़िरकार जब राहुल की साँस कुछ ठिकाने आई तो उसने सलोनी की और देखा | वो अभी भी आँखे बंद किए गहरी साँसे ले रही थी | राहुल ने अपना चेहरा झुक कर उसके होंठो पर एक गहरा चुंबन लिया और फिर उसके कुर्ते के गले में हाथ डाल दिया | सलोनी ने अपनी आँखे खोल दी | वो राहुल की और देख रही थी मगर उसके जिस्म में कोई हरकत नही थी |
 
"अगर आज जहाँ कुछ हो गया तो तू ज़िम्मेदार है, तेरा ही कसूर है जो तूने मेरा यह हाल कर दिया है ........." सलोनी सिसक सिसक कर बोल रही थी | जब भी राहुल का हाथ गति पकड़ता, उसकी उंगलियाँ तेज़ी से चूत के अंदर बाहर होने लगती और वो उसके मुम्मे को काटता तो सलोनी का बदन काँपने लगता | वो कुछ पलों के लिए सब कुछ भूल जाती, राहुल के लंड पर उसकी पकड़ ढीली पड़ जाती | राहुल भी अपने हाथ और मुँह का कमाल सलोनी की चूत और मुम्मों पर इतनी खूबसूरती से कर रहा था जैसे उसे औरतों के साथ का बहुत अनुभव रहा हो | जा फिर शायदद बेटा होने के कारण इस अनैतिक रिश्ते में सलोनी को कुछ ज़्यादा ही आनंद मिलता था |

"उउउफफफफ्फ़ ...... बेटा......... मेरे लाल ............. आआहह .... मैं मैं ......... राहुल्ल्ल्ल्ल्ल्ल ........" सलोनी किसी तरह अपनी सिसकिओं को धीमे रखने का प्रयास कर रही थी |

"बोलो मम्मी ....... बोलो क्या चाहिए ........" राहुल मुम्मे से मुँह उठाकर बोला |

"मुझे .... मुझे ...... उउउफफफफफफफफ्फ़ ..... चूदना है ............. मुझे तुम्हारे लौड़े से चूदना है ....... हाययययए .......... मुझे तुम्हारी लुल्ली अपनी चूत में चाहिए ......." सलोनी बेटे के लंड को मसलते हुए बोली | वो अत्यधिक गरम हो चुकी थी | चूत से पानी बह बहकर बाहर आ रहा था |

"यहाँ चूदोगी .......... इन सब लोगों के बीच ........ इतने लोगों के बीच अपने बेटे का लंड अपनी चूत में लोगी ........." गरम सलोनी ही नही राहुल भी हो चुका था | राहुल चूत में उंगलियाँ पेलते हुए अपना उंगूठा भग्नासे पर रख देता है | जैसे ही वो उंगलियाँ पेलते हुए अपनी मम्मी की चूत के दाने को अंगूठे से सहलाता है तो सलोनी का बदन कांपने लग जाता है |

"आआहह .......... आआहह ..... राहुउऊउल्ल्ल्ल्ल्ल्ल ........" सलोनी राहुल के कंधे पर दाँत गड़ती सिसकती है | "हाँ हाँ मुझे यहीं चूदना है........यहीं चूदना है ...... इन सबके बीच ........ चोद मुझे ........ चोद ना बेटा ........ चोद अपनी मम्मी को ......... पेल दे अपनी लुल्ली अपनी मम्मी की चूत में" सलोनी मदहोश सी हो गयी थी | उसका जिस्म हल्के हल्के झटके खा रहा था |
 
"ले खोल दी पेंट कमीने ........ करले अपनी मनमानी........" राहुल तुरन्त चूत पर चारों और अपना हाथ रगड़ता है | हालांकि सलोनी की जीन्स काफ़ी टाइट थी मगर खुलने के बाद राहुल को कुछ आसानी हो गयी थी अब वो कुछ आराम से अपनी मम्मी की चूत के साथ खेल सकता था | राहुल अपनी उंगली को गीली कच्छी के उपर से चूत के होंठो की लकीर पर फेरता है | उसके होंठो के बीच दबाता है |
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"अब जब पेंट खोल ही दी है तो अपनी टाँगे भी थोड़ी चौड़ी करलो मम्मी.......... मुझे चूत के अंदर उंगली घुसानी है" राहुल चूत के होंठो के बीच उंगली घुसाते हुए बोलता है | सलोनी कुर्सी के अंदर जितना संभव था अपनी टाँगे चौड़ी कर लेती है |

"अच्छा .... मम्मी तुम कितनी अच्छी हो ............." राहुल कच्छी को सामने से एक तरफ़ को खिसका कर सलोनी की चूत नंगी कर देता है |

"हूँ ........... अब तो अच्छी ही कहोगे ............ तुम्हे मनमानी जो करने दे रही हूँ ........... हहायय इतने लोगों के बीच तुम्हें मेरे दुधु चूसने को मिल रहे हैं, मेरी चूत खेलने को मिल रही है .... अब तो मम्मी अच्छी ही लगेगी ना ...." सलोनी राहुल के लंड को फिर से पकड़ लेती है | राहुल गीली चूत के अंदर उंगली डाल देता है |
"आअहह ........ उउफफफफफफफफफ्फ़" सलोनी सिसक उठती है | राहुल चूत के अंदर उंगली आगे पीछे करता है तो सलोनी को होंठ भींचने पड़ते हैं |

"उउउफफफफफफफफफफ्फ़......... मम्‍म्मी तुम्हारी चूत कितनी गरम है ........ कैसे तप रही है ...." राहुल एक पल के लिए रुकता है और फिर दूसरी उंगल भी चूत में घुसा देता है |
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"उउउन्न्नह......" सलोनी चिहुंक पड़ती है | उसका खुद पर कंट्रोल खत्म होता जा रहा था | वो राहुल के मुँह को अपनी और खींचती है और उसके होंठो पर अपने होंठ रख देती है | माँ-बेटा एक गहरे कभी ना खत्म होने वाले चुंबन में डूब जाते हैं और आखिरकार जब उनके होंठ जुदा होते है तो सलोनी फट से राहुल का मुँह अपने मुम्मे पर झुका देती है | राहुल कुर्ते के खुले गले से जितना मुम्मा मुँह में भर सकता था भर लेता है और चूसने लगता है | उसका हाथ भी तेज़ी से अपनी मम्मी की चूत के उपर हिल रहा था | उसकी उंगलियाँ अपनी पूरी लंबाई तक चूत के अंदर घुस रही थीं | सलोनी राहुल के सर को अपने मुम्मे पर दबा रही थी और उसके लौड़े को ज़ोर ज़ोर से मसल रही थी |
 
"उन्न्नह ..... नही बेटा ..... यह मत करो ........ प्लीज़ यहाँ नही ....." सलोनी राहुल को रोकने का प्रयत्न करती है | मगर राहुल नही सुनता वो निप्पल को चूस्ता अपने हाथ से ज़िपर को खोलता है मगर सलोनी फिर से राहुल का हाथ पकड़ लेती है |

"प्लीज़ बेटा मान जाओ ........ उउन्न्नघह" राहुल सलोनी का ध्यान भटकाने के लिए उसके निप्पल को ज़ोरों से चूस्ता है | अपने हाथ से मुम्मे को दबाता है |
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"ओह ...... बेटाआ....... आआआहह....." सलोनी अपने अकड़े हुए निप्पल पर राहुल की जीभ, उसके दांतों के प्रहार से मदहोश सी हो उठती है, राहुल के हाथ पर उसके हाथ की पकड़ ढीली पड़ जाती है | राहुल को इसी मौके का इंतज़ार था, वो एक झटके में बाकी की ज़िपर खोल देता है | सलोनी को होश आता है और वो अपने बेटे को रोकने का प्रयत्न करती है मगर इससे पहले कि वो उसके हाथ को रोक पाती राहुल अपना हाथ उसकी पेंट के खुली ज़िपर से अंदर घुसा चुका था |

"बेटा...... बेटाआ ............." जैसे ही राहुल का हाथ सलोनी की कच्छी के उपर से उसकी चूत पर पड़ता है वो सिसक पड़ती है | राहुल तुरन्त पूरी चूत को अपने हाथों में भरकर मसलने लगता है | सलोनी दो तरफा प्रहार से और भी उत्तेजित हो जाती है |

"मम्मी तुम्हारी कच्छी तो पूरी गीली है, लगता है तुम्हारी चूत को मेरी लुल्ली चाहिए" राहुल चूत को मसलते अपना मुँह उसके निप्पल से उठा कर बोला |

"बदमाश.......सब तेरी करनी का नतीजा है .... जहाँ देखता है शुरू हो जाता है ... मेरे इतने मना करने के बावजूद भी मेरी पेंट खोल ही दी ना" सलोनी राहुल के कंधे पर मुक्का मारती है तो वो हंस पड़ता है |

"तो क्या हुआ मम्मी, यहाँ कौनसा कोई हमें देख रहा है .... सब अपनी अपनी मस्ती में मस्त है ... और मैनें तुम्हारी पेंट कहाँ खोली है सिर्फ ज़िपर खोली है" राहुल चूत को फिर से मसलता बोलता है |

सालनी एक मिनिट के लिए इधर उधर को देखती है जैसे सुनिशचीत करना चाहती थी कि कोई उनकी और देख तो नही रहा | वाकई में राहुल की बात सच थी, सब अपनी अपनी मस्ती में मस्त थे, कोई किसी को नही देख रहा था | सलोनी निश्चिंत हो गयी और उसने राहुल के लंड से हाथ हटा लिया | राहुल एक पल के लिए अपनी मम्मी को देखता है कि वो क्या करने वाली है | सलोनी अपने हाथ नीचे लाती है और अपनी जीन्स के बटन को खोलती है | राहुल का दिल धक्क से रह जाता है |
 
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