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Kamukta हाए मम्मी मेरी लुल्ली

"मैंने कहा ना मम्मी, मैं आपसे नाराज़ नहीं हूँ, आप खामखाह परेशान हो रही हैं", सलोनी जैसे ही अपनी बात कहनी चालू करती है, राहुल उसे एकदम से काट देता है | उसके खुशक स्वर से मालूम चलता था वो थोडा नहीं बहुत नाराज़ था | राहुल छत की और घूर रहा था जबकि सलोनी पिल्लो पर कोहनी के सहारे ऊपर उठी हुई थी और राहुल की और देख रही थी |

कमरे में चुप्पी छा जाती है | सलोनी को समझ नहीं आता वो उसे कैसे मनाये? कमरे का माहोल कुछ ऐसा बन चूका था कि वो सीधे जाकर राहुल से लिपट नहीं सकती थी | वो बहुत ही अटपटा होता |

सलोनी उसी तरह लेटे हुए कोहनी के बल अपना सर उठाए राहुल को घूर रही थी जो अपने माथे पर अपनी बांह रखे छत को घूर रहा था | उसका लंड अब पूरी तरह से नर्म पड़ चूका था |

बेटे को घूरती सलोनी अचानक महसूस करती है कि उनके रिश्ते ने एक दिन में क्या से क्या मोड़ ले लिया था | कहाँ वो एक माँ थी, एक पवित्र माँ, जिसके लिए बेटे से बढ़कर कुछ भी नहीं था | शायद अब भी उसकी ममता में कुछ फर्क नहीं पड़ा था, बस अब उनके रिश्ते में वो पवित्रता नहीं रही थी |

सुबह की उस छोटी सी घटना के बाद सब कुछ जैसे एकदम से बिखर गया था | वो उसके लंड को सहलाती किस तरह अपने पर काबू खो देती है और उसके लंड को चुस्ती है और उसके वीर्य को पी जाती है | 'उफ्फ्फ' जबकि उसे वीर्य पीना कभी अच्छा नहीं लगता था | वो कभी कभी अपने पति की ख़ुशी के लिए उसके वीर्य को पीती थी | मगर उसे यह कतई पसंद नही था | मगर आज तो वो किस तरह अपने बेटे के लंड से वीर्य पी गई थी, उसने एक पल के लिए भी नहीं सोचा था कि इस सबका नतीजा क्या होगा?

नहीं बाद में अपने कमरे की तन्हाई में उसने यह जरूर सोचा था बल्कि फैसला किया था कि वो फिर कभी भी इस तरह की वाहियात हरकत नहीं करेगी | मगर उसका फैसला 'रेत का महल' साबित हुआ था जो हवा का पहला झोंका आते ही ढह गया था | उसने खुद दोपहर को अपने बेटे के साथ ड्राइंग रूम में क्या किया था? किस तरह वो उसके लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर सहलाने लगी थी और जब उसके बेटे ने उसके मुम्मे को टीशर्ट के ऊपर से मसलना चालू किया था तो उसने खुद उसको बढ़ावा दिया था | किस तरह राहुल ने उसके पायजामे में हाथ डालकर उसकी चूत को कच्छी के ऊपर से सहलाया था और जब उसने उसकी चूत को अपनी मुट्ठी में भरा था | वो खुद अपनी चूत उसके हाथ में उछाल रही थी और फिर उसका सख्लन हो गया था | यह शायद जिंदगी में पहली बार हुआ था कि सलोनी ने बिना चुदवाए सख्लन हासिल कर लिया था मात्र अपने बेटे के स्पर्श से और वो भी कच्छी के ऊपर से |
 
"हाँ हम ठीक हैं, राहुल भी ठीक है, पूरी मस्ती कर रहा है, बहुत शरारती बन गया है आजकल, ऐसी ऐसी शरारतें करता है कि क्या बतायुं आपको, आप सुनाइए आप कैसे हैं? आपकी तबीअत तो ठीक है ना"

दूसरी तरफ से : ....................

"और काम काज कैसा चल रहा है?" सलोनी राहुल की और घूर रही थी | जिसने फिर से अपना चेहरा मोड़कर ऊपर की और कर लिया था और अपनी आँखों पर फिर से बांह रख ली थी |

दूसरी तरफ से : ....................

"मैं क्या करूंगी वही कर रही थी जो पूरा दिन करती हूँ, बस आपको याद कर रही थी"

दूसरी तरफ से : ....................

"नींद किसे आती है जान, यहाँ तो पूरी पूरी रात करवटें बदलते बदलते निकल जाती है, ना दिन को चैन, ना रात को, बस किसी तरह दिन काट रहे हैं आपकी राह देखते"

दूसरी तरफ से : ....................

"इतनी याद आती है तो फिर छोड़ कर क्यों गए थे.... यह भी नही सोचा मैं किसके सहारे दिन काटूँगी.... इतनी लम्बी लम्बी रातें बिना आपके कैसे काटूं"

दूसरी तरफ से : ....................

"राहुल? वो अपने कमरे में सोया हुआ है उसकी आप चिंता मत कीजिये , जो भी बात करनी है, खुल कर कीजिये", सलोनी थोडा ऊँचे स्वर में बोलती है |

दूसरी तरफ से : ....................

"उफफ्फ्फ्फ़.... मेरी कौन सी हालत आपसे कम बुरी है, आपको कैसे बताऊं, सारा दिन गीली रहती है बेचारी, हर पल आपके लंड के लिए तरसती है", सलोनी का स्वर कामुक होता जा रहा था |
 
और फिर......... और फिर बाथरूम में वो कैसी बेशर्म बन गई थी | सलोनी को बाथरूम की याद आती है जब उसका बेटा उसे कपड़े देने आया था तो उसे मात्र एक भीगी हुई कच्छी में देखकर उसकी क्या हालत हो गई थी, सलोनी के होंठो पर मुस्कराहट फ़ैल जाती है | किस तरह वो उसकी गांड में अपना लंड ठोक देता है और जब सलोनी उसकी और घूमी थी तो किस तरह उसका मुंह खुला रह गया था | बेचारा पलक भी ना झपका रहा था अपनी माँ को अपने सामने एक कच्छी में देखकर उसकी क्या हालत हो गई थी? किस तरह वो उसके नंगे मुम्मो को घूर रहा था, जैसे अभी आगे बढ़कर उन्हें मुंह में भर लेगा | सलोनी दिन की घटनाओं को याद करती करती गर्म हो रही थी | उसकी चूत से रस बहना चालू हो गया था

और अब उसने क्या किया था, किस तरह तपाक से उसके लंड पर जाकर बैठ गई थी | किस तरह उसके लंड को अपनी गांड से मसल रही थी और जब राहुल की उँगलियाँ अंडरवियर के होल से उसकी चूत से टकराई थीं ...... हाएएएएएए .. और फिर उसने अपना हाथ ही उसके अंडरवियर में घुसाकर पहली बार उसकी नंगी चूत को अपनी हथेली में भर लिया था...... ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़.... वो फिर से सख्लन के करीब पहुँच गई थी ...... वो महसूस कर सकती थी..... उसके बेटे के स्पर्श में जादू था.... या शायद उनके रिश्ते की पवित्रता उनके इस पाप से हासिल होने वाले आनंद को कई गुणा बढ़ा रही थी कि वो अपने बेटे के हल्के से स्पर्श से ही भड़क उठती थी... और यही हालत शायद राहुल की भी थी.... वो भी शायद अपनी माँ के स्पर्श से बहुत ज्यादा उत्तेजित हो जाता था..... शायद मेरे जैसे वो भी खुद पर काबू खो देता है.... और इसीलिए मैंने उसे वहीँ रोक दिया था.... जिस तरह उसका लंड मेरी गांड के निचे झटके मार रहा था और वो जिस तरह सिसक रहा था वो ज्यादा देर टिकने वाला नहीं था..... वो जल्द ही सखलित हो जाता .. फिर मेरा क्या होता... अगर वो इतना उत्तेजित ना होता तो मैं उसे ना रोकती.. उससे वहीँ चुदवा लेती.. मगर वो उस समय शायद ही मेंरी चूत में लंड घुसा पाता.. हो सकता है वो यह सब पहली बार कर रहा हो.. नहीं लगभग तै था कि वो पहली बार किसी औरत के साथ का आनंद प्राप्त कर रहा था .........

मगर अब क्या... अब वो उससे नाराज़ हो गया था.. अब वो उसे मनाए कैसे .. सलोनी सोचती है.... उसे समझ नहीं आ रहा था वो अपनी बात की शुरुआत कहाँ से करे...

अचानक बेड की पुश्त पर रखे मोबाइल की घंटी बज उठी, सलोनी और राहुल दोनों एकदम से चौंक उठते हैं | राहुल अपना बाजू अपनी आँखों से हटाकर अपनी माँ की और मुख घुमाकर देखता है | सलोनी बेड की पुश्त से मोबाइल उठाती है और जैसी उसने उम्मीद की थी , फ़ोन उसके घरवाले का ही था | सलोनी ओके का स्विच दबाकर मोबाइल को कान से लगाती है | वो अब भी पहले की तरह सिरहाने पर कोहनी के बल उचककर राहुल की और देख रही थी और अब राहुल भी उसकी और देख रहा था |

"हेल्लो.... हाँ जान कैसे हो?" सलोनी राहुल की आँखों में झांकती मोबाइल के माइक्रोफोन में बोलती है |

दूसरी तरफ से : ....................
 
दूसरी तरफ से : ....................

"आपका खड़ा है तो मेरी चूत भी रस टपका रही है, मेरी कच्छी पूरी भीग गई है"' सलोनी की नज़र राहुल के चेहरे से बदलकर अब उसकी पेंट पर थी | यहाँ जिपर के स्थान पर एक तम्बू बनना शुरू हो गया था |

दूसरी तरफ से : ....................

"हाए जानू, क्या बतायुं जितना मैं तुम्हे याद करती हूँ, उससे बढ़कर मेरी चूत तुम्हारे लंड को याद करती है, इसीलिए सारा दिन मेरी कच्छी भीगी रहती है"

दूसरी तरफ से : ....................

"मुझे तो आपकी हर बात याद आती है, जब आप मेरे मुम्मे निचोड़- निचोड़ कर चूसते थे.. जब आप मेरी चूत चाटते थे.. उफफ्फ्फ्फ़.. जब भी आपकी जीभ की याद आती है तो चूत में सनसनी होने लगती है.... किस तरह आप अपनी जीभ मेरी चूत में घुसा कर अन्दर तक चाटते थे.... और जब आप उसे मेरे दाने पे रगड़ते थे.... जब आप पूरी-पूरी रात मुझे चोदते थे.... हाए..... जब आप अपने मोटे लम्बे मुसल से मेरी चूत को पेलते थे.... आआह्ह्ह्ह.... कभी घोड़ी बनाकर .. कभी डौगी स्टाइल में..... उफ्फ्फ्फ़" सलोनी एक हाथ सर के निचे टिकाए और दुसरे हाथ से मोबाइल कान को लगाए बेटे की पेंट में मचल रहे तूफ़ान को देख रही थी |
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दूसरी तरफ से : ....................

"उफफ्फ्फ्फ़.. मैं भी चूत में ऊँगली कर रही हूँ, जान.... तुमने मेरी चूत में आग लगा दी है .... हाए मेरी चूत.... मेरा मुंह.... मेरी गांड... आपके लंड के लिए तड़प रही है", सलोनी सिसकियाँ भरकर बोल रही थी |

दूसरी तरफ से : ....................

"हाए आपको मेरी चूत की याद में दिन में एक बार मुट्ठ मारनी पड़ती है, मगर मैं नाजाने कितनी बार आपके लंड को याद करके चूत में ऊँगली करती हूँ"

दूसरी तरफ से : ....................

"हाएएए... मुझे भी आपके जाने से पहले बाली रात का एक एक पल याद है.. हाए... पूरी रात आपने सोने नही दिया था, जैसे दो महीने की कसर एक ही रात में पूरी करनी हो...... किस तरह आपने आधे घंटे तक मेरी चूत चाट चाट कर झाड़ी थी, फिर आपने जब मेरे मुंह को चोदा था...... उफ्फ्फ्फ़... मेरी तो सांस ही बंद हो गई थी... गले तक घुसा दिया था आपने ... एक एक पल याद है मुझे, उस रात का... आपने जब मुझे खड़े खड़े अपनी गोद में उठा लिया था और फिर अपने लंड पर उछाल उछाल कर पूरे कमरे में घूमते हुए मुझे चोदा था.. इस कोने से उस कोने तक... और फिर सुबह जब आपने मुझे घोड़ी बनाकर मेरी गांड मारी थी..... हाए आपने मेरी तंग गांड में अपना मुसल पेल पेल कर मेरी गांड सुझा दी थी.. मुझसे दो दिन ठीक से चला नहीं गया था.." सलोनी अब बोल नहीं रही थी केवल सिसकियाँ भर रही थी |

दूसरी तरफ से : ....................

"मैं भी तड़प रही हूँ जान, कुछ कीजिए ना जान, प्लीज कुछ कीजिये"

दूसरी तरफ से : ....................

"हाँ हाँ मुझे भी आपसे चुदवाना है जान.... प्लीज चोद दीजिये ना..."

दूसरी तरफ से : ....................

"हाए क्यों तरसा रहे हो, डाल दो ना अन्दर.... पेल दो अपना लंड मेरी चूत में"

"आआईईईईए .. हाए रे जालिम, एक ही झटके में पूरा घुसा दिया..... उफफ्फ्फ्फ़ मेरी जान निकाल दी"

दूसरी तरफ से : ....................

"पेलते रहे जान .. पेलते रहो..... बस ऐसे ही ... उफफ्फ्फ्फ़... आह्ह्हह्ह .. जड़ तक पेलते रहो..."

दूसरी तरफ से : ....................

"हाँ... हाँ... ऐसे ही.... ऐसे ही... चोदो अपनी जान को... उफ्फ्फ्फ़.... एक मिनट ... एक मिनट.. रुकिए मेरी टाँगे उठाकर अपने कंधे पर रखिये.. हाँ अब चोदो मुझे ... अब मेरी चूत में पेलो....."

दूसरी तरफ से : ....................

"मारो..... मारो.... और जोर से ... और जोर से .. उफ्फ्फ... मेरे मुम्मे पकड़ो... मेरे मुम्मे मसल मसलकर अपना लंड पेलो मेरी चूत में......"

दूसरी तरफ से : ....................

"आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह्ह..... हाए....... आअह्ह्ह्ह.... चोद दीजिये.. जोर से ... पेलो ... और जोर से ... उफफ्फ्फ्फ़ मेरा भी निकलने वाला है... हाए मारिये मेरी चूत .......... मार मार कर सुजा दीजिये ... आगे से भी और पीछे से भी... ऐसे ही.... ऐसे ही हाँ मार मार कर आगे पीछे से सुजा दीजिये...."

दूसरी तरफ से : ....................

"आआआअह्हह्हह्हह्ह्ह्हह्ह्हह..... मेरा भी निकल रहा है... मेरा भी निकल रहा है...... हे भगवान..... इसे मेरे मुंह में डाल दीजिये ... मुझे आपकी मलाई खानी है"

दूसरी तरफ से : ....................

"लीजिये आपका लंड बिलकुल साफ़ कर दिया है..... देखिये कैसे चमक रहा है....."

दूसरी तरफ से : ....................

"उफफ्फ्फ्फ़.... मैं आपको क्या बतायुं मुझे कितना मज़ा आया, आपने तो फ़ोन पर ही मेरी ऐसी हालत कर दी, घर आकर क्या करेंगे..."

दूसरी तरफ से : ....................

"मैं इंतज़ार करुँगी बेसब्री से "

दूसरी तरफ से : ....................

"राहुल की आप चिंता मत कीजिये, मैं उसका पूरा ख्याल रख रही हूँ, बल्कि अब तो वो मेरा ख्याल रखने लगा है"

दूसरी तरफ से : ....................

"फिर बतायुंगी, अब मुझे नहाने जाना है, आपने मेरी हालत ख़राब कर दी है, पूरी पसीने से भीग गई हूँ"

दूसरी तरफ से : ....................

"आप भी अपना ख्याल रखना घर की चिंता मत कीजिये, आपने काम और सेहत का ध्यान रखना, अच्छा रखती हूँ, ओके बाये ... स्वीट ड्रीम्स जान.. मुवाआआआअह्ह्ह्हह"
 
सलोनी फ़ोन रख देती है | अपने पति से पूरे वार्तालाप में उसकी नज़र राहुल से नहीं हटी थी | दोनों माँ बेटे उसी हालत में लेटे हुए थे जैसे फ़ोन आने से पहले लेटे थे | सलोनी अब भी कोहनी पर सर टिकाए राहुल की और झांक रही थी | जबकि राहुल छत को घूर रहा था | उसके लंड की क्या हालत थी वो सलोनी पेंट में बने तम्बू से देख सकती थी और उसने जब अपने पति से खुले लफ़्ज़ों में बात करनी शुरु की थी तो उसने साफ़ साफ़ देखा था कि राहुल का बदन कांप रहा था | अब भी उसमें हल्के हल्के कम्पन को वो महसूस कर सकती थी |

'लोहा पूरा गर्म है... अब चोट करने का वक़्त आ गया है' सलोनी खुद को बोलती है |

"राहुल..... बेटा..." सलोनी धीमे से फुसफुसाती है |

"हाँ मम्मी", इस बार राहुल तुरंत जवाब देता है | उसकी आवाज़ से पहले वाली नाराज़गी पूरी तरह से गायब थी |

"सोये नहीं क्या अब तक?"

"नींद.... नींद नहीं आ रही मम्मी" |

"नींद क्यों नहीं आ रहा बेटा... कोई दिक्कत तो नहीं" |

"नहीं मम्मी बस मालूम नहीं क्यों..." |

राहुल किसी तरह से बात को उस तरफ ले जाना चाहता था | मगर कैसे? उसे सूझ नहीं रहा था |

"बेटा कहीं तुम्हे दर्द तो नहीं हो रहा .... वो सुबह की तरह........." सलोनी बेटे को मुसीबत से निकालने में मदद करती है |
 
"नहीं मम्मी... अब दर्द नहीं है" राहुल अचानक अपने होंठ काटता है | उसने उत्तेजना में अपने ख्यालों में गुम अपनी माँ की बात सुने बिना जवाब दे दिया था और उसके हाथ से सुनहरी मौका निकल गया था |

"ठीक है बेटा.... सोने की कोशिश करो... नींद आ जाएगी... मुझे भी नींद आ रही है... अगर कुछ प्रॉब्लम हो तो जगा लेना बेटा... ओके" सलोनी कहकर पीठ के बल बिस्तर पर लेट जाती है | कोहनी पर इतनी देर से बल डालने के कारण बांह में दर्द होने लगा था | राहुल ने जल्दबाज़ी में उसकी बात नहीं पकड़ी थी और अब उसे खुद कुछ उपाए करना होगा |

राहुल पछतावे से भर उठता है | उसकी माँ ने उसे इतना अच्छा मौका दिया था और उस बेवकूफ ने ... अब वो क्या करे... वो सोने जा रही थी.. अगर वो सच में सो गई तो .... नहीं... नहीं.. उसे कुछ सोचना होगा.. उसे कुछ करना होगा |

राहुल हालाँकि ड्राइंग रूम में अपनी माँ के एक दम से भाग आने के कारण उससे बहुत नाराज़ हो गया था क्योंकि वो चरम पर पहुँच चूका था और उस समय वो आगे बढ़ना चाहता था | वो समझ नहीं सकता था कि सलोनी एकदम से क्यों उठ गई थी | गुस्से से उसका लंड भी मुरझा गया था और उसकी सेक्स की इच्छा भी कम हो गई थी | मगर जब उसकी माँ ने बेशर्मी की सारी ह्द्दें पार करते हुए जब उसके सामने जानबूझकर दिखावा करते हुए अपने पति से फ़ोन सेक्स किया था तो राहुल की कामाग्नि इस तरह भड़की थी कि वो जल उठा था |

उसकी माँ के मुख से निकला एक एक लफ्ज़ उसे जला रहा था | उसने खुद को इतना उत्तेजित कभी नहीं पाया था | उत्तेजना से उसका बदन कांपने लगा था | वो जानता था, उसकी माँ उसके बाप को नहीं बल्कि उसे सुना रही थी | वो उसे कह रही थी वो चूत में ऊँगली कर रही थी जबकि उसने तो चूत को छुआ तक नहीं था |

मगर अब समस्या यह थी कि अब वो क्या करे? उसकी माँ सोने जा रही थी | हालाँकि उसके हिलने डुलने से साफ़ ज़ाहिर था वो अभी जाग रही थी | मगर वो सच में सो सकती थी... अब उसके पास एक ही रास्ता था | वो अपनी हिम्मत बांधने लगा | 'मुझे कहना ही होगा' वो खुद को समझा रहा था | उसके होंठ कांप रहे थे, मुंह सुख रहा था, एक मिनट ... दो मिनट .. तीन... चार... आखिरकार दस मिनट बीत गए मगर उसकी बात होंठो तक नहीं आई | अचानक उसकी माँ उसकी तरफ पीठ करके करवट लेने लगी | वो एकदम से घबरा उठा |
 
"मम्मी.. मम्मी"

"हाँ बेटा ... क्या हुआ .. कुछ चाहिए क्या" सलोनी के होंठो पर मुस्कान दौड़ गई थी, वो तो अब तक निराश हो चली थी |

"मम्मी वो मुझे ... वो मुझे..."

"क्या हुआ बता ना..."

"मम्मी वो मुझे ... मुझे मुझे वहां दर्द हो रहा है" राहुल ने अपनी हिम्मत जुटाकर आखिर कह दिया |

"दर्द हो रहा है... कहाँ दर्द हो रहा है..." सलोनी ने भोले बनते हुए पूछा |

"वो यहाँ सुबह...सुबह..जब आपने चूसा था"

"सुबह ...उफ्फ्फ्फ़... यह क्या पहेलियाँ बुझा रहा है... बोल ना दर्द कहाँ हो रहा है" |

"वो मम्मी वो मेरी लू... वो सुबह जब पेंट की ज़िपर में ...वो मेरी...मेरी लुल्ली में मम्मी" राहुल का दिल इस कदर धड़क रहा था कि जैसे वो फटने वाला हो |

"ओह्ह तो यह बात है... तो बोला क्यों नहीं पहले...इधर आ" सलोनी बेड से उठ खड़ी होती है |

राहुल भी उठ कर खड़ा हो जाता है | सलोनी मुडकर दीवार से स्विच ओन करती है और पूर कमरा रौशनी से भर उठता है | राहुल एक पल के लिए शर्मा उठता है | सलोनी आगे हो कर बेड से निचे उतरती है और राहुल को बेड के सिरे पर आने का इशारा करती है | राहुल आगे आता है तो सलोनी उसे बेड के किनारे पर घुटनों के बल खड़ा होने का इशारा करती है | दोनों माँ बेटे के दिल की धडकनें पूरी रफ़्तार से चल रही थीं | कमरे में दोनों की सांसों की आवाजें गूँज रही थी |

सलोनी फर्श पर खड़ी थी और राहुल बेड पर घुटनों के बल | सलोनी राहुल की टीशर्ट को पकडती है और उसे ऊपर उठाती है | राहुल की बाहें खुद बा खुद ऊपर उठ जाती हैं | सलोनी उसकी टीशर्ट निकाल फर्श पर फेंक देती है और फिर उसकी पेंट को निचे खिसकाने लगती है मगर फूला हुआ लंड उसे निचे नहीं जाने दे रहा था | सलोनी पेंट की इलास्टिक से अन्दर हाथ डालती है

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और लंड को राहुल के पेट से दबाती है और फिर दुसरे हाथ से उसकी पेंट निचे खींचती है | इस दौरान उसकी नज़र कई बार राहुल से टकरा जाती है जो उत्तेजना के चरम पर होने के बाबजूद भी शर्मा उठता है | राहुल की पेंट निकलते ही वो उसे फिर से घुटनों के बल खड़ा होने को कहती है | सलोनी पेंट को भी फर्श पर दूर फेंक देती है | अब बेटा अपनी माँ के सामने पूरी तरह नंगा था | उसका लंड तना हुआ था और इस कदर अकड़ा हुआ था कि उस ज़बरदस्त अकड़ाहट के कारण वो झटके भी नहीं मार सकता था | लंड मांसपेशियों का ना होकर लोहे की रोड लग रहा था | लंड के उस भयंकर रूप को देख कर एक बार तो सलोनी भी सिहर उठी थी |
 
"उफफ्फ्फ्फ़ ... यह तूने इसका क्या हाल बना रखा है ...देख तो..और तू इसे अब भी लुल्ली कहता है...
उफ्फ्फ... मैंने तुझे सुबह ही कहा था ना.. कि तेरी लुल्ली अब लौड़ा बन गई है"
सलोनी की बात का राहुल कोई जवाब नहीं देता
| सलोनी उसके लंड को सहलाती है

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तो राहुल की सिसकी निकल जाती है | लंड और भी अकड़ने लगा था और
उसकी इस अकड़न से राहुल को दर्द होने लगा था |

"अब बोल मैं क्या करूँ इसके साथ... बता ना... तेरा दर्द कैसे कम होगा"
सलोनी अपने बेटे की आँखों में झांकती होंठ काटती बोलती है |

"मम्मी वो सुबह जैसे आपने ... अपने मुंह से... किया था.. वैसे ही अब भी" राहुल हकलाते हुए बोलता है |

"ओह.. तो तू चाहता है.. मैं तेरे लौड़े को मुंह में लेकर चुसू...
यही कहना चाहता है ना तू" सलोनी अपने बेटे से सुनना चाहती थी |
राहुल कुछ झिझकता है तो सलोनी अपना मुंह थोडा निचे करती है और
उसकी छाती पर छोटे से निप्पल को अपनी जिव्हा से सहलाने लगती है और दुसरे को अपने नाख़ून से कुरेदती है |

"हाँ मम्मी... हाँ"

"तो बोल ना... जब तक तू बोलेगा नहीं.. मुझे क्या पता चलेगा.. तू क्या चाहता है"
सलोनी उस छोटे से निप्पल को दांतों में दबाते बोलती है, दुसरे को नाख़ून पहले की तरह कुरेदता है |
उधर उसके हाथ राहुल के लंड और उसके अन्डकोशों को सहला रहे थे |

"मम्मी मेरा .. मेरा लौड़ा चुसो" राहुल उत्तेजना में डूबा बोल उठता है |

"फिर से बोल ना एक बार ..." सलोनी उसकी छाती से मुंह हटाती बोलती है और
बेड पर निचे टाँगे लटकाकर बैठने का इशारा करती है | राहुल बेड के किनारे टाँगे लटका कर बैठ जाता है |

"मम्मी मेरा लौड़ा चुसो ना" राहुल इस बार सहजता से बोलता है | सलोनी उसकी और देखकर मुस्कराती है और उसके सामने घुटनों के बल बैठ जाती है और लंड को अपने हाथ में पकड़ लेती है |
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"एक बार और" सोलोनी अपने बेटे की और याचना करती बोलती है |

"मम्मी मेरा लौड़ा चुसो ना" इस बार राहुल कामौत्तेजना में खुद ही बोल उठता है और अपनी माँ के सर को अपने हाथों में थाम अपने लौड़े पर झुका देता है | सलोनी लंड के लाल सुपाड़े पर होंठ रख देती है |
 
सलोनी घुटनों के बल बैठी अपने बेटे की जांघो पर हाथ रखकर अपना मुंह बेटे के लंड के सामने लाती है |

"माँ मेरा लौड़ा चुसो ना" इस बार राहुल बिना किसी उकसावे के खुद बोल उठता है |
वो अपनी माँ के सर पर हाथ रखकर उसे अपने लंड पर झुकाता है |

सलोनी बेटे की आँखों में झांकते अपना चेहरा लंड पर झुकाती चली जाती है |
जैसे ही सलोनी के होंठ लंड की अति संवेदनशील त्वचा पर स्पर्श करते हैं,
राहुल के मुंह से आह निकल जाती है | सलोनी बिलकुल धीमे-धीमे से, बिलकुल कोमलता से लंड के सुपाड़े को जगह जगह चूमती है |

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सुपाड़े पर खूब चुम्बन अंकित करने के बाद उसके होंठ लंड के पिछले भाग की और बढ़ने लगे थे |
सलोनी के तपते होंठ लंड को जला रहे थे |
अचानक सलोनी चुम्बन लेना रोक देती है और चेहरा पीछे खींच लेती है |

"थोडा सा आगे आ जाओ...ऐसे मुझसे सही से नहीं हो रहा", सलोनी चेहरा हटाकर राहुल से बोलती है |

राहुल आगे को होता है | अब उसके कूल्हों का ज्यादातर हिस्सा बेड से बाहर था |
वो एकदम किनारे पर बैठा था | सलोनी ने इशारा किया तो राहुल ने अपनी टाँगे चौडी कर ली
और सलोनी घुटनों के बल उसकी टांगो के बीच खड़ी हो गई |
उसने राहुल की जांघो पर हाथ रखे और चेहरा आगे बढ़ाया | उसकी लपलपाती जिव्हा बाहर आई |

"आआह्ह्ह्ह... मम्म्म्ममी" सुपाड़े की कोमल त्वचा पर खुरदरी जीभ का एहसास पाकर राहुल सीत्कार भरने लगता है |

सलोनी की जिव्हा लंड के पूरे सुपाड़े पर घूमने लगती है |
उसे चाटते हुए वो जैसे सुपाड़े को अपनी जीभ से रगड़ रही थी |

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सलोनी ने अपना एक हाथ राहुल की जांघ से हटा कर उसका लंड पकड़ लिया और उसे ऊपर की और उठाकर वो लंड के पूरे निचले हिस्से को चाटने लगी | जल्द ही उसका हाथ लंड को ऊपर-निचे , दायें-बाएं घुमाने लगा और वो पूरे लंड को चाटने लगी | जब भी सलोनी की जीभ सुपाड़े पर पहुँचती तो राहुल आअह्ह्ह्ह.... उफफ्फ्फ्फ़... करने लग जाता |
 
लंड को खूब चाट-चाट कर सलोनी ने अपना मुख एक पल के लिए हटाया और
फिर अपने होंठ सुपाड़े के गिर्द कस दिए और उस पर अपनी जीभ चलाते हुए उसे चूसने लगी |
राहुल से यह दो तरफा प्रहार बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने सिसकते हुए अपने हाथ फिर से अपनी मम्मी के सर पर रख दिए |
सलोनी ने अपने होंठ लंड की जड़ की तरफ बढ़ाते हुए उसे चुसना चालू रखा

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और साथ ही साथ अपनी जीभ से सुपाड़े को सहलाती रही |

"मम्म्म्ममी.......आअह्ह्ह्ह..." सलोनी अपने एक हाथ से उसके अन्डकोशों को पकड़ लेती है
और उन्हें सहलाने लगती है और दुसरे हाथ से उसकी जांघो को सहलाती धीरे-धीरे अपना मुंह लंड पर आगे पीछे करने लगी |

"मम्मम्मम्मम्मम्मी..........मम्मम्मम्मम्मम्मी.......... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़..." राहुल से अब बर्दाश्त करना मुश्किल था |
सलोनी के मुख की गर्माहट, मुखरस के कारण उसके लंड की फिसलन, मुख की कोमलता के साथ-साथ
जीभ के खुरदरेपन ने उसे कुछ ज्यादा ही जोश दिला दिया था और
उसने अपनी माँ के बालों को मुट्ठियों में भर लिया और
अपना लंड सलोनी के मुंह में पेलने लगा |
कुछ पलों तक सलोनी ने बेटे की जाँघों पर हाथ रखकर उसे अपना मुंह चोदने दिया

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और फिर अचानक से जाँघों पर हाथों से दवाब डालकर जोर से अपना मुख वापिस पीछे को खींचा |
लंड उसके मुंह से बाहर निकल गया |
लंड उसके मुखरस से भीगा चमक रहा था |
सुपाड़े से मानो खून छलक रहा हो |
लंड इतना हार्ड था कि बिलकुल भी हिलडुल नहीं रहा था |

"क्या हुआ मम्मी... आओ ना प्लीज..." राहुल आग को बढ़कर अपनी माँ का सर थामने की कोशिश करता है |
मगर सलोनी उसके हाथों को झटक देती है और उठ कर खड़ी हो जाती है |
वो भी उठकर खड़ा हो गया था |
अब दोनों माँ बेटा एक दुसरे के सामने थे और दोनों में इतनी दूरी थी कि सलोनी के मुम्मे राहुल के सीने में चुभ रहे थे |
"मम्मी कीजिये ना प्लीज ...चूसिये ना..." राहुल इस बार रुआंसी आवाज़ में बोलता है |

"तू चूसने दे तब ना.... तू तो झट से मेरे मुंह में धक्के मारने लग जाता है...
जैसे यह मेरा मुंह नहीं.. मेरी चूत हो" सलोनी ने पहली बार बेटे से बात करते हुए सीधे चूत शब्द का इस्तेमाल किया था |

"नहीं मम्मी.. अब नहीं मारूँगा धक्के ...प्लीज..आओ ना मम्मी"
 
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