"आईईईईईईईए...........आउच.......आआउच ............हे भगवान.........उफफ्फ्फ्फ़ शैतान................. हाएएएए.......मार डालेगा क्या"
"मम्मी........ मम्मी..........ओह्ह्ह्ह गॉड............म्म्म्मम्म्म्ममम्मी.... हाए...." राहुल भी जलती हुई चूत में लंड पेल कर उस पीड़ादायक आनंद की परिसीमा महसूस करता है |
सलोनी अपनी जाँघों के बीच देख रही थी यहाँ उसके बेटे के लंड उसकी चूत में पूरा घुस चूका था | चूत के होंठो ने लंड को चारों तरफ से कस लिया था और उसके बेटे के लंड को सहला रहे थे |
"उफफ्फ्फ्फ़....मम्मी कितनी टाइट है तुम्हारी और कितनी गर्म भी... अन्दर से... उफ़... मेरा जल रहा है मम्मी" राहुल चूत की तपिश से लंड को जलता हुआ महसूस कर रहा था |
"यह गर्मी तेरे लंड को ही नहीं मुझे भी दिन रात जलाती है... दिन रात मेरी पूरी देह इस आग में झुलसती है... अब तुम्हे ही इस आग को बुझाना है मेरे बेटे....अब तुझे ही इस आग को बुझाना है" कहकर सलोनी पीछे को लेट जाती है और राहुल की तरफ अर्थपूर्ण नज़रों से देखती है | राहुल फिर से अपनी माँ की कमर थाम लेता है और लंड को पीछे खींचता है और फिर से अन्दर डालता है |
"आअह्ह्ह्ह........आराम से .......बेटा.......आराम से ..." सलोनी पहले ही धक्के पर कराह उठती है और जब उसके बेटे के लंड उसकी चूत को पूरा रगड़ता हुआ वापिस अन्दर तक घुस जाता है | वो शुक्र मना रही थी कि उसकी चूत इतनी गीली थी वरना उसके बेटे का मोटा लंड उसे खूब तकलीफ देने वाला था |
राहुल अपनी माँ की नाज़ुक चूत में लंड पेलने के उस अनोखे मज़े से गदगद हो उठा था | यह आनंद उसकी कल्पनायों से कहीं बढ़कर था | वो फिर से अपना लंड बाहर निकालता है और वापिस अन्दर घुसेड देता है | सलोनी फिर से सीत्कार भरती है, फिर तीसरा, चौथा , पांचवा, छठा ...राहुल चूत से लगभग आधा लंड बाहर निकालता और उसे अपनी माँ की चूत में पेल देता | हर धक्के के साथ उसका जोश दौगना होता जा रहा था | कुछ समय आराम से धक्के मारने के बाद वो लंड को खींच जोर से पेलता है |
"आआआअउच... आउच........ आउच" राहुल माँ की सिसकियों से और भी जोश में आ जाता है और वो और भी जोर जोर से लंड पेलने लगता है |
"आईईईईए...बेटा......आआराम से ...आराम से...." सलोनी चीखती है और राहुल माँ की चीखो पुकार के जवाब में खींच कर ऐसा धक्का मारता है कि सलोनी की सांस अटक जाती है |
"मम्मी........ मम्मी..........ओह्ह्ह्ह गॉड............म्म्म्मम्म्म्ममम्मी.... हाए...." राहुल भी जलती हुई चूत में लंड पेल कर उस पीड़ादायक आनंद की परिसीमा महसूस करता है |
सलोनी अपनी जाँघों के बीच देख रही थी यहाँ उसके बेटे के लंड उसकी चूत में पूरा घुस चूका था | चूत के होंठो ने लंड को चारों तरफ से कस लिया था और उसके बेटे के लंड को सहला रहे थे |
"उफफ्फ्फ्फ़....मम्मी कितनी टाइट है तुम्हारी और कितनी गर्म भी... अन्दर से... उफ़... मेरा जल रहा है मम्मी" राहुल चूत की तपिश से लंड को जलता हुआ महसूस कर रहा था |
"यह गर्मी तेरे लंड को ही नहीं मुझे भी दिन रात जलाती है... दिन रात मेरी पूरी देह इस आग में झुलसती है... अब तुम्हे ही इस आग को बुझाना है मेरे बेटे....अब तुझे ही इस आग को बुझाना है" कहकर सलोनी पीछे को लेट जाती है और राहुल की तरफ अर्थपूर्ण नज़रों से देखती है | राहुल फिर से अपनी माँ की कमर थाम लेता है और लंड को पीछे खींचता है और फिर से अन्दर डालता है |
"आअह्ह्ह्ह........आराम से .......बेटा.......आराम से ..." सलोनी पहले ही धक्के पर कराह उठती है और जब उसके बेटे के लंड उसकी चूत को पूरा रगड़ता हुआ वापिस अन्दर तक घुस जाता है | वो शुक्र मना रही थी कि उसकी चूत इतनी गीली थी वरना उसके बेटे का मोटा लंड उसे खूब तकलीफ देने वाला था |
राहुल अपनी माँ की नाज़ुक चूत में लंड पेलने के उस अनोखे मज़े से गदगद हो उठा था | यह आनंद उसकी कल्पनायों से कहीं बढ़कर था | वो फिर से अपना लंड बाहर निकालता है और वापिस अन्दर घुसेड देता है | सलोनी फिर से सीत्कार भरती है, फिर तीसरा, चौथा , पांचवा, छठा ...राहुल चूत से लगभग आधा लंड बाहर निकालता और उसे अपनी माँ की चूत में पेल देता | हर धक्के के साथ उसका जोश दौगना होता जा रहा था | कुछ समय आराम से धक्के मारने के बाद वो लंड को खींच जोर से पेलता है |
"आआआअउच... आउच........ आउच" राहुल माँ की सिसकियों से और भी जोश में आ जाता है और वो और भी जोर जोर से लंड पेलने लगता है |
"आईईईईए...बेटा......आआराम से ...आराम से...." सलोनी चीखती है और राहुल माँ की चीखो पुकार के जवाब में खींच कर ऐसा धक्का मारता है कि सलोनी की सांस अटक जाती है |