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Kamukta हाए मम्मी मेरी लुल्ली

"जाओ जाकर नहा धोकर तैयार हो जाओ...शौपिंग के बाद कहीं घूमने चलेंगे" सलोनी खाना खत्म होते ही टेबल से प्लेट्स उठाती राहुल को बोलती है | राहुल जिसका सर खाने के पुरे समय झुका रहा था, वैसे ही सर झुकाए जी मम्मी बोलकर सीढ़ियाँ चढ़ता अपने कमरे की और लौट जाता है | सलोनी प्लेट धोती कुछ गुनगुनाने लगती है | बेटे के चेहरे पर इतनी निराशा देखकर जहाँ एक तरफ़ उसे उस पर, उसकी मासूमियत पर दया आती थी, प्यार आता था, वहीं उसे राहुल को परेशान करने में अत्यधिक मज़ा भी आता था |
राहुल तैयार होकर नीचे अपनी मम्मी डैडी के बेडरूम में आता है | सलोनी अभी बाथरूम में नहा रही थी | राहुल टीवी का स्विच ओंन कर कुछ देर ऐसे ही चैनल चेंज करने लगता है | तभी बाथरूम का दरवाजा खुलता है और सलोनी अपने बदन पर तौलिया लपेटे बाहर आती है |

"हाययययययय................ सेक्सी.....सेक्सी..........क्या बात है.....आज तो बहुत सेक्सी सेक्सी दिख रहा है...... क्या इरादा है जानेमन........." सलोनी राहुल से मज़ाक करती है मगर राहुल का चेहरा लाल हो गया | वो शरमाता सा मुँह दूसरी तरफ फेर लेता है | सलोनी उसके पास आती है और उसके चेहरे को अपने हाथों में थाम उपर उठाती है |
"हायय.... ईई......मर जायूं तेरी इस कातिल अदा पर..... क्या बात है......... आज तो लगता है मेरी जान ही निकाल लोगे......." सलोनी राहुल को आँख मारती बोलती है |
"मम्मय्ययययययी.........." राहुल का चेहरा और भी सुरख हो गया था | "अगर आप इस तरह से पेश आएँगी तो मैं कहीं नही जा रहा आपके साथ .... कह देता हूँ आपको अभी से...." राहुल अपनी मम्मी के मज़ाक से तंग होकर बोलता है | मगर असल में वो मदहोश सा हो रहा था | सलोनी अभी अभी नहाकर बाथरूम से निकली थी | वो उसके इतने पास खड़ी थी कि राहुल को उसके मादक बदन की सुगंध दीवाना बना रही थी | उसका लंड पेंट में सर उठाने लगा था |

सलोनी बेटे की बात पर हँसती है मगर फिर वो वहाँ से ड्रेसिंग टेबल की और रुख़ करती है | आईने के सामने हेयर ड्रायर से बाल सुखाती सलोनी कुछ देर चुप रहने के पश्चात राहुल की और देखती है और उसे कहती है |

"बेटा ज़रा दराज में से मेरी ब्रा और कच्छी तो निकाल दे, इतनी तो हेल्प करदे अपनी मम्मी की" |

राहुल अपनी मम्मी को घूरता है | उसे लगता है जैसे उसने कुछ ग़लत सुना है |
 
राहुल को अपने कानो पर विश्वास नही हुआ | वो कभी अपनी मम्मी को तो कभी अपने लोहे के जैसे सख्त लौड़े को देख रहा था |

"मम्मी मगर मेरा........मेरा......मम्मी आप ने कहा था........सुबह ...अगर मैं पढ़ुंगा तो.........आपने प्रॉमिस किया था...." राहुल रुआंसी आवाज़ में बोलता है |

"हाँ वायदा किया था तो........मैं मुकरी हूँ अपने वायदे से...........अभी तुमने मज़ा किया ना........." सलोनी अपनी शर्ट पहनते बोलती है |

"अब कहाँ........अभी तो सिर्फ़ आप.......मैने तो अंदर डाल कर.......मम्मी प्लीज़ करने दो ना..." राहुल हकलाती सी आवाज़ में बोला |

"अभी बिल्कुल भी टाइम नही है बेटा........जल्दी कपड़े पहनो......... बाद में अंदर डाल कर मज़ा ले लेना......मैं मना थोड़े कर रही हूँ........"

"मम्मी प्लीज़........प्लीज़......बस थोड़ा सा....." राहुल मिन्नत कर रहा था |

"कहा ना अभी नही........बाद में.....तू तो ऐसे कर रहा है जैसे मैं बाद में तुझे दूँगी नही.......भूल गया कल रात को.....आज सुबह को.......... तीन बार ले चुका है मेरी ...... बस अब चल खाना खाना है और फिर बाज़ार जाना है........"

राहुल बुझे मन से कपड़े पहनता है जबकि सलोनी किचन में खाना गरम करने लगती है | रहल चुपचाप, निराश, किचन में आकर बैठ जाता है | सलोनी टेबल पर खाना लगाती है और राहुल के सामने वाली कुर्सी पर टेबल के दूसरी तरफ बैठ कर खाना खाने लगती है | राहुल की रही सही उम्मीद भी टूट जाती है | उसे लगा था शायद वो सुबह की तरह किचन में उसके लौड़े पर स्वारी करेगी मगर नही, सलोनी ने ऐसा कुछ भी नही किया | दोनो ने चुपचाप खाना खाया | राहुल की तो जैसे भूख ही मर गयी थी मगर वो अपनी मम्मी को जानता था कि अगर वो नही खाएगा तो उसे शायद बाद में कुछ नही मिलने वाला था | अभी कम से कम उसे इतनी उम्मीद तो थी कि बाद में उसे मौका मिल जाएगा |
 
राहुल सलोनी के कंधे और कमर पर हाथ रखकर उसे धीरे धीरे करवट दिलाकर पीठ के बल कर देता है |
सलोनी की आँखे बंद थी | उसके चेहरे पर जबर्दस्त शांति और संतुष्टि थी और उसका चेहरा इतना प्यारा लग रहा था
कि राहुल अपना चेहरा उसके चेहरे पर झुका कर उसके चेहरे पर चुंबनो की बौछार करने लग जाता है |
सलोनी धीरे से अपनी पलके खोलती है और अधमुंदी आँखो से बेटे को देखती है |
वो कुछ बोलने के लिए होंठ खोलती है मगर उसके होंठो से लफ्ज़ निकल नही पाते | वो अपनी बाहें उपर को उठाती है |
राहुल सलोनी की बाहें थाम लेता है और उसे उठाकर अपनी गोद में बिठा लेता है |
वो दीवानो की तरह अपनी माँ को बहुत ही कोमलता से चूमता रहता है |
सलोनी की आशा के विपरीत इस बार वो अपने बदन में कुछ उर्जा महसूस करने लगी थी, शायद राहुल के चुम्बनों का कमाल था |
आखिरकार जब वो अपनी बाहें उसके गले में डाल उसके चुंबनो का ज्वाब देने लगती है तब राहुल उसके मुँह में अपनी जीभ घुसा देता है |

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कुछ देर चुमाचाटी का यह दौर चलता रहता है | अचानक राहुल अपनी मम्मी को चूमना बंद कर देता है
और बेड पर उठ कर खड़ा हो जाता है | वो अपना पयज़ामा नीचे करता है |
उसका लोहे की तरह सख्त लंड हवा में सीधा तना खड़ा था और वाकई में बहुत भयानक जान पड़ता था |

उधर राहुल अपना पयज़ामा नीचे करता है उधर सलोनी बेड के सिरहने पड़े अपने पयज़ामे को उठाती है |
राहुल एक टांग अपने पयज़ामे से निकाल चुका था जब वो देखता है कि उसकी मम्मी अपना पयज़ामा पहन रही है |
राहुल एक पाँव पयज़ामे से निकलाता है जबकि सलोनी एक पाँव पयज़ामे में डाल चुकी थी |
राहुल ज़माने भर की हैरत लिए अपनी मम्मी के चेहरे की और देखता है |

"हुन्न्नह......बहुत भूख लगी है..... सच में बहुत भूख लगी है... टाइम भी कितना हो चुका है...
चलो कुछ खाते हैं और फिर बाज़ार भी जाना है... कुछ शॉपिंग करनी है...." सलोनी बेटे की स्वालिया नज़रो को पढ़ कर उसे ज्वाब देती है |
 
"नही...बेटा....नही ........मत करो..............प्लीस और नही सह सकती .........आआअहह....." मगर राहुल उसकी बिनती की और कोई ध्यान नही देता |
चूत के दाने को चूस्ता वो कभी अपनी जीभ से उसकी चूत को चोदता है तो कभी उसके दाने पे रगड़ता है |
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सलोनी की हालत पहले ही पतली हो चुकी थी | वो चूत के दाने की अतिसंवेदनशील त्वचा पर जीभ का खुरदारपन बर्दाशत नही कर पाती |
वो काँपने लगती है | उसकी चूत से रस बाहर आने लगता है |
राहुल दाने को और भी कस कर होंठो में दबाता उस पर अपनी जीभ का दबाब बढ़ाता उसे सहलाता है, रगड़ता है |

"नही राहुल.......रुक जाओ....रुक जाओ बेटा..........प्लीज़ राहुल.........." सलोनी का बदन झटके खा रहा था |
राहुल के इस हमले को बर्दाशत करना उसके लिए हर पल मुश्किल हो रहा था और
राहुल था जैसे उसने ठान रखी थी कि आज अपनी मम्मी की बिल्कुल नही सुनेगा |
राहुल अगला हमला करता है और दाने को होंठो में दबाए वो उस पर अपने दाँत से बिल्कुल हल्के से काटता है |
सलोनी इस हमले को झेल नही पाती |

"राहुल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल,................ओह गॉ...ड...........आअहह..." इस बार सलोनी के मुँह से तीखी सिसकी निकली थी |
उसका बदन अपने बेटे की बाहों में झटके खा रहा था और वो सिसकती हुई झड़ रही थी |

सलोनी को आज ऐसा आनंद आया था जैसा उसने पहले कभी महसूस नही किया था | उसे यकीन नही हो रहा था कि वो इतने बड़े स्खलन के बाद फिर से कुछ ही मिंटो के अंतराल के बाद इतनी जल्दी दोबारा सखलित हो सकती थी वो भी मात्र चूत चुसाई से |

जब तक सलोनी बिल्कुल शान्त नही पड़ गयी राहुल उसे अपनी बाहों के सिकंजे में कसे उसकी चूत से बहते अमृत की एक एक बूँद को पीता रहा |

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सखलन के बाद भी जब तक उसने चूत को चूस चाट कर पूरी तरह सॉफ नही कर दिया उसने चूत से मुँह नही हटाया | सलोनी का जिस्म शान्त पड़ चुका था | वो बेटे की बाहों में एकदम बेहोश सी होकर गिर गयी थी | राहुल ने उसके पेट के नीचे से अपने पाँव निकाले और उसकी कमर को वापस बेड पर रखकर उसे अपनी क़ैद से आज़ाद कर दिया | सलोनी के बदन में कोई हरकत नही थी | राहुल उठकर अपनी मम्मी के सर के पास चला जाता है |
 
"उउउन्न्ह ...... तो तूने किया ना मज़ा ..... हाए मेरी निप्पल को ऐसे ना खीँचो .... थोड़ा धीरे से .... आज दोपहर को मेरे दूधु नही चूसे तुने ...... मेरी आगे से और पीछे से चाटी भी थी तुमने ...... आअहह धीरे से करो ना" सलोनी लंड के उपर कोमलता से हाथ फेरते बोलती है | वो बीच बीच में लगातार राहुल के गाल और उसके होंठो को चूम रही थी |

"मगर आपने पूरा नही करने दिया .... अपने अपना मज़ा ले लिया और मुझे......" राहुल अभी भी नाराज़ था | सलोनी उससे इतने प्यार से चिपकी हुई थी और उससे ऐसे बात कर रही थी, इस तरह उसका लंड प्यार से सहला रही थी जैसे वो उसकी मम्मी नही थी बल्कि प्रेयसी थी | उसकी माशुका थी | इसीलिए राहुल जो दोपहर को कुछ बोल नही पाया था अब अपनी नाराज़गी जाहिर कर रहा था |

"मैने अपना मज़ा लिया और तुझे मज़ा लेने नही दिया?...... इसका मतलब तुझे अपनी मम्मी के दूधु दबाने और चूसने में कोई मज़ा नही आता ...... तुझे मेरी चाटने में भी मज़ा नही आता ...... इसका मतलब तू मजबूरी में करता है यह सब ....... बस मुझे खुश करने के लिए ....." सलोनी फिर से राहुल के कान की लौ चुभलाती धीरे धीरे बोलती है |

"उउउन्न्ह मम्मी आप बात को बदल क्यों रही है ........ आपको मालूम है ना मूझे कितना मज़ा आता है आपके ...... आपके दूधु चूसने में और आपकी चाटने में" राहुल निप्पल को अपने अंगूठे और उंगली के बीच में रोल करता है |

"आआहह ........ तुझे मेरी चाटने में मज़ा आता है, सच कह रहा है ना" सलोनी राहुल के निप्पल की छेड़छाड़ से बीच बीच में सिसक पड़ती थी | राहुल जब भी उसके निप्पल को मसलता जा उसे खींचता तो उसके पुरे जिस्म में करेंट सा दौड़ने लग जाता | निप्पल से आनंद की लहरें उसके पुरे जिस्म में फैलने लग जाती |

"सच में मुझे बहुत मज़ा आता है मम्मी..........तुम्हारी वो......उसका रस.....बहुत टेस्टी होता है......." राहुल अपनी मम्मी की चूत के स्वाद को याद करता अपने होंठो पर जिव्हा फेरता है |

"तो फिर जब तुझे इतना मज़ा आया था तो कंप्लेंट किस बात की कर रहा है" सलोनी अपने होंठ राहुल के होंठो पर रखते हुए बोली |

"मगर मुझे.....मुझे.....वो करना था......वो अपना.....डालना था.... तुम्हारी ...... तुम्हारी......उसमे......" राहुल ने सलोनी के होंठ हटते ही कहा | पेंट में उसका लौड़ा इस तरह तना हुआ था कि उसे फिर से दर्द होने लगा था |

"क्या डालना था तुझे......" सलोनी राहुल के गाल को चाटती हुई बोली | राहुल अपनी मम्मी के हाथ में अपनी कमर उठा अपना लौड़ा पेल देता है | स्लोनी जान कर कि उसका बेटा कितना उत्तेजित है उसके लौड़े को अपनी मुट्ठी में भर ज़ोर से दबाती है | राहुल 'आअहह' करके एक सिसकी भर कर रह जाता है मगर कुछ बोल नही पाता |

"क्या डालना था तुझे.....हाए बता ना........कहाँ डालना था......" सलोनी राहुल के होंठो को काटते हुए बोली | राहुल उसके मुम्मे को कस कर दबा देता है | वो और भी ज़ोर से उसके लौड़े को दबा देती है | दोनो माँ बेटा एक दूसरे के मुँह में अपनी जीभ पेल एक दूसरे के होंठ सील कर देते हैं |
 
राहुल अपना हाथ जब अपनी मम्मी के मुम्मे पर हल्का सा कस कर उसे हल्का सा दबाता है तो सलोनी के मुँह से 'उन्ह' करके हल्की सी सिसकी निकल जाती है | राहुल मुम्मे की कोमलता सलोनी की ब्रा और कुर्ते के उपर से महसूस कर सकता था | उसके मुम्मे उसके जिस्म का सबसे खूबसूरत गहना थे | जितना स्पर्श करने पर वो कोमल और नरम महसूस होते थे, दबाने पर उतने ही कठोर महसूस होते थे | राहुल पंजा फैला कर सलोनी के ज़्यादा से ज़्यादा मुम्मे को हाथ में समेटने का प्रयतन करता है | स्लोनी का कड़ा निप्पल बार बार उसकी हथेली को रगड़ रहा था | अकड़े हुए निप्पल की वो रगड़ माँ-बेटे दोनो के जिस्मो में सिहरन पैदा कर रही थी |

राहुल और सलोनी दोनो एक दूसरे की तरफ़ झुके हुए थे और उनके सर आपस में जुड़े हुए थे, इसलिए पीछे से सिर्फ उनके जिस्म की हलचल दिखाई देती थी मगर वो कर क्या रहे थे यह मालूम नही चलता था | सलोनी का हाथ धीरे धीरे पेंट के उपर से राहुल के पुरे लंड को सहला रहा था |

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वो दोनो एक दुसरे के साथ का मज़ा ले रहे थे ना कि सामने वाले जोड़े की तरह किसी जल्दबाज़ी में थे | राहुल मुम्मे को सहलाता हुआ एक बार उसे कस कर दबा देता है तो सलोनी 'हाए' कर सिसक उठती है |

"इतना ज़ोर से मत मस्लो बेटा ...... मेरी चीख निकल जाएगी ...... घर जाकर जितना मर्ज़ी मसल लेना" सलोनी राहुल के कान में सरगोशी करती है |

"आप अभी ऐसा कह रही हो .......... घर जाकर कुछ और कहने लगोगी" राहुल मुम्मे को प्यार से पुचकारते हुआ कहता है |

"शर्म नही आती इस तरह झूठ बोलते हुए .......... कितना मसला है तुमने मेरे दुधो को ..... भूल गये कल रात दो बार ली थी तुमने मेरी ....... और .... और आज सुबह सुबह फिर से मुझे अपने लौड़े पर बैठा लिया ...... भूल गये ..... आज सुबह किस तरह किचन में मुझे अपने खंबे पर उपर नीचे उठक बैठक लगवा रहे थे ...... इतना कुछ करने के बाद कहते हो कि मैं कुछ करने नही देती ......" सलोनी राहुल के गाल को चूमती उससे एतराज़ जताती है |

"आज आपने सुबह वायदा किया था कि पढ़ाई के बाद आप मुझे मज़ा करने देंगी ........ मगर बाद में आप मुकर गयी ... मैने पाँच घंटे से ज़्यादा पढ़ाई की मगर अपने अपना वायदा पूरा नही किया" राहुल कुर्ते के उपर से निप्पल को पकड़ कर उसे अपनी उंगलियों में मसलता है, उसे हल्का हल्का खींचता है |
 
"नही सच में हिल रहा है ..... उपर नीचे हो रहा है" राहुल धीमे से बोल उठता है | उसका लंड इतना अकड़ चुका था कि उसे पेंट में बुरी तरह फसे होने के कारण वो दर्द कर रहा था |

"उपर नीचे .... ज़रूर उसका लंड सहला रही है ...... है ना ....." सलोनी राहुल के कान में सरगोशी करती बोलती है |

"हूँ मम्मी" वो बस इतना ही बोल पाता है |

"पेंट के उपर से मसल रही है जा बाहर निकाला हुआ है" सलोनी राहुल की जान निकालने पर तुली हुई थी |

"बाहर निकाला हुआ है ...... पूरा बाहर है" राहुल के गले से भरभराती सी आवाज़ निकलती है |

"देख तो कैसे वो उसका मुम्मा चूस रहा है और दूसरे हाथ से मसल भी रहा है ....... और वो कैसे उसके लंड को मसल रही है .... हाययययईई ........ कितना मज़ा कर रहे हैं दोनो" सलोनी एक लंबी सिसकी राहुल के कानो में लेती है और फिर अपना हाथ पेंट में उसके उभार पर रख देती है |

"उफफफफ्फ़ तेरा तो बहुत अकड़ा हुआ है ........ लगता है तुझे उन दोनो को देख कर बहुत मज़ा आ रहा है" सलोनी एक हाथ से राहुल के लंड को सहलाती

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उसके कान की लौ चुभलाती है और दूसरे हाथ में उसका हाथ पकड़ अपने मोटे तने मुम्मे पर रख देती है और उसे दबाती है | राहुल अपने हाथ में सलोनी के कड़े निप्पल की चुभन को महसूस कर सकता था |

"सारा मज़ा अकेले अकेले ही ले रहे हो ...... मेरा ख़याल कौन करेगा"
 
"वो लड़का क्या शर्ट के ऊपर से उसके मुम्मे चूस रहा है ?" अचानक उसके कान के पास सलोनी धीरे से सरगोशी करती है | राहुल को झटका सा लगता है | उसकी साँस कुछ पलों के लिए जैसे थम सी जाती है | वो कुछ बोल नही पाता |

"मुझे लगता है जैसे वो उसके मुम्मे को नंगा करके चूस रहा है .... मगर लड़की की शर्ट तो उसके बदन पर पूरी मोजूद है" सलोनी राहुल के कान में फुसफुसा कर बोलती है | उसके होंठ राहुल के कान की लौ को चूम रहे थे |

"वो ... उसने शर्ट को उपर नही उठाया है बल्कि उसके सामने का बटन खोलकर उसकी शर्ट को उसके ...... उसके दूध की तरफ़ खींचा है और जहाँ से बटन खोला है वहाँ से मुँह लगाकर चूस रहा है" इस बार राहुल बोल उठता है | वो बहुत गरम हो चुका था | एक तो सामने उस लड़के और लड़की की प्रेमलीला का असर था और उपर से उसके कान, उसके गालों से टकराती उसकी मम्मी की गरम महकती साँसे उसका बुरा हाल कर रही थी | उसके लंड ने पेंट में तूफान खड़ा कर दिया था |

"लड़की ने ब्रा नही पहनी या उसने निकाल दी है जा फिर ब्रा के उपर से चूस रहा है .... यहाँ से साफ साफ नज़र नही आ रहा" सलोनी फिर से फुसफुसाती है |

"नही वो उसने निकाली नही है, उपर चढ़ा दी है और उसके दूध को नंगा करके चूस रहा है" राहुल धीरे से बोलता है | उसकी साँस बहुत गहरी हो चुकी थी | सलोनी एक तरफ़ से उसकी और मुड़कर उसके उपर झुकी हुई थी और उसका एक भारी मुम्मा राहुल के कंधे में चुभ रहा था | राहुल अपने हाथों को आपस में बाँध कर रखे हुए था क्योंकि उसे खुद पर भरोसा नही था कब उसका हाथ उठ कर अपनी मम्मी के मुम्मे को दबोच ले और वो नही जानता था सिनेमा में उसकी किसी ऐसी वैसी हरकत को वो कैसे लेगी | काफ़ी देर दोनो चुप रहते हैं | सामने लड़का बदस्तूर लड़की के मुम्मों को चूसे जा रहा था |

"मुझे वहम हो रहा है जा उस लड़की का हाथ सच में हिल रहा है" सलोनी फिर से फुसफुसाती है |
 
तभी अचानक स्क्रीन पर एक तेज़ रोशनी का सीन आता है और तेज़ रोशनी में अचानक राहुल का ध्यान अपने से नीचे बैठे जोड़े पर चला जाता है | लड़का अपना हाथ लड़की की गर्दन में लपेटे हुए था और उसका वो हाथ हल्का हल्का हिल रहा था | शायद वो उसके मुम्मे को मसल रहा होगा, राहुल सोचता है | उसकी पेंट में उसका लंड नाज़ाने कब का सख्त हो चुका था और उसकी गोद में बड़ा सा टेंट बना हुआ था |

राहुल ध्यान लगाकर अपने सामने बैठे लड़के लड़की को देखने लगता है | कुछ पलों तक तो उसे खास नज़र नही आता मगर जब उसकी आँखे अंधेरे में सेट हो जाती हैं तो वो उन्हे और उनकी हरकतों को बड़े अच्छे से देख और समझ सकता था | मगर इसके लिए अब उसे स्क्रीन से ध्यान हटाना था क्योंकि स्क्रीन पर नज़र मारने के बाद फिर से काफ़ी समय बाद जाकर उसकी आँखे अंधेरे में देखने काबिल होती थी |

राहुल का सारा ध्यान अपने सामने वाले जोड़े पर ही था | लड़का लड़की के मुँह को अपनी और खींच कर उसके होंठो को चूमने लगता है | कुछ देर बाद लड़की भी अपने आशिक़ के गले में बाहें डाल उसके चुंबन का ज्वाब ज़ोर शोर से देने लगती है |
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क्योंकि अब दोनो का रुख़ आमने सामने की और था इसलिए राहुल उनके बीच में देख सकता था | जब दोनो के मुँह अलग होते हैं तो राहुल साफ तौर पर लड़के को लड़की के दोनो मुम्मों को मसलते देख सकता था | जिस तरह वो दोनो किसी द्वारा देखे जाने की परवाह किए बगैर एक दूसरे को चूम चाट रहे थे लगता था वो काफ़ी समय से वहाँ आ रहे थे | बल्कि वहाँ लगभग सभी जोड़े ऐसे ही आपस में गुथमगुथा थे | शायद फिल्म देखना उनके लिए बहाना भर था | राहुल खुद भी उस जोड़े को बड़े गौर से देख रहा था, अंधेरे में उनकी एक एक हरकत को पड़ने की कोशिश कर रहा था |

लड़का लड़की काफ़ी देर ऐसे ही चूमा चाटी करते रहे | जब भी उनके चेहरे अलग होते तो लड़का लड़की के मुम्मों को मसलने लगता | इस बार जब उनका चुंबन टूटा तो लड़के ने लड़की का हाथ पकड़ा और उसे अपने लंड पर रख दिया | लड़की तुरन्त उसे पेंट के ऊपर से सहलाने लगी | दोनो के बीच इसी तरह चूमा चाटी और एक दूसरे के अंगो को सहलाने का दौर चालू था | तभी राहुल देखता है लड़का लड़की के सीने पर सर झुकाता है और उसके मुम्मों को कपड़े के ऊपर से चूसने लगता है | राहुल अपनी आँखो का पूरा ध्यान लगा देता है और वो लड़की की शर्ट में लड़के का हाथ घुसता देख लेता है | शायद वो उसके मुम्मे को बाहर निकालने वाला था, नही नही वो ऐसा नही कर सकता था जा फिर उसे उसकी ब्रा के अंदर मसलने वाला था जा फिर हो सकता है उसकी ब्रा हटाकर उसके मुम्मे को चूसने वाला था | इससे उसके होंठो और लड़की के मुम्मों के बीच सिर्फ उसकी शर्ट का ही परदा रह जाता | खैर इससे पहले कि राहुल देख पता कि आगे क्या होने वाला है और वो जोड़ा क्या गुल खिलाने वाला है, सस्पेंस फिल्म की तरह सिनेमा की लाइट्स जल उठती हैं, इंटर्वल हो गया था | लड़का लड़की झटके से अलग होकर सामने को मुँह करके बैठ जाते हैं | सिनेमा में शोर मचने लग जाता है | राहुल बहुत निराश हो जाता है | वो देखना चाहता था कि लड़का लड़की आगे क्या करते हैं |

उसे सब्र नही हो रहा था मगर अब उसे इंतेज़ार करना ही था, जब तक इंटरवल खत्म ना हो जाता और सिनेमा की बत्तियां फिर से बुझ ना जाती | राहुल ठंडी आह भरता अपना सर घूमाता है |

उसकी नज़र सीधी सलोनी के चेहरे पर पड़ती है | वो कुर्सी की पीठ पर अपनी कुहनी रखकर उसकी तरफ़ मूडी हुई थी और बड़े गौर से बिना पल्क झपकाए उसे ही देख रही थी | राहुल को झटका सा लगता है | वो उस जोड़े की हरकतों में इस कदर खो गया था कि उसे अपनी मम्मी की मौजूदगी का एहसास ही नही रहा था | उसे यकीन नही हो रहा था कि वो भूल गया कि वो अपनी माँ के साथ आया था | सलोनी राहुल को देखती अपनी भवें नचाती है जैसे पूछ रही थी कि क्या हो रहा है | राहुल को कोई ज्वाब नही सूझता | तभी सलोनी की नज़र उसके चेहरे से होते हुए नीचे उसकी गोद में जाती है और वो अपना सर हिलाती है | राहुल तुरन्त अपनी गोद में देखता है | उसकी आँखे फैल जाती हैं | उसने अपने हाथ में अपना लंड पकड़ा हुआ था और उसे पेंट के उपर से मसल रहा था | राहुल का चेहरा शर्म से लाल हो जाता है | वो तुरन्त अपने लंड से अपना हाथ हटा लेता है |
 
"यकीन नही होता .... मुझे लगता है तुम झूठ बोल रहे हों .... तुम बहुत चलाक हो राहुल ... अगर तुम मुझ पर नही चढ़ोगे तो ज़रूर तुम मुझे अपने ऊपर चढ़ा लोगे .... घर जाते ही अपने खड़े खंबे पर मुझे बैठाकर मुझसे उठक बैठक लगवाओगे ........ क्यों सच कह रही हूँ ना"

"आप सिनेमा ही चलिए ........ वैसे भी आपने फ़ैसला कर ही लिया है तो बदलेंगी थोड़े ना"

"नाराज़ क्यों होता है ....... अभी घर जाकर क्या करना है ...... और आज मेरा मूड भी नही है खाना बनाने का ...... पूरी रात पड़ी है जितना चाहे मज़ा लूट लेना मेरे बलमा ....... "

सलोनी राहुल को बलमा कह कर पुकरती है तो वो उसकी और देखता है | सलोनी भी उसकी और देख कर उसे आँख मारती है | राहुल के लाख रोकने पर भी उसके होंठो पर मुस्कराहट लौट आती है | वो अपना चेहरा घुमा कर कार की विंडो से बाहर देखने लग जाता है | सलोनी हंस पड़ती है |

"हायईई ........... क्या अदाएँ हैं जालिम की" सलोनी हँसती हुई कहती है |

जब सलोनी और राहुल सिनेमा पहुँचते हैं तो फिल्म स्टार्ट होने ही वाली थी | दोनो टिकेट्स लेकर बाल्कनी में जाते हैं | एक आक्षन फिल्म थी और उसका भी लास्ट वीक चल रहा था इसलिए सिनेमा में कुछ खास रश नही था | राहुल अपनी मम्मी के पीछे पीछे पोप कॉर्न पकड़े चल रहा था | रह रह कर उसका ध्यान अपनी मम्मी की गांड पर चला जाता जिसके उभरे होने के कारण सलोनी का कुर्ता पीछे से उपर को उठा हुआ था | सिनेमा में ज़्यादातर लोग बैठ चुके थे | ज़्यादातर जोड़े थे और सब एक दुसरे से दूर दूर ही बैठे थे | टिकेट चेकर ने उनसे कहा कि क्योंकि सिनेमा में रश नही है वो कहीं भी बैठ सकते हैं | सलोनी सर घूमा कर चारों और चेक करती है तो उसे एक तरफ़ कुछ सीट्स खाली दिखाई देती हैं | उन दोनो के बीच में बैठने के बाद भी दोनो तरफ की काफ़ी सीट्स खाली पड़ी थी | उनसे उपर की कतार में एक जोड़ा उनसे काफ़ी दूर दाएं और बैठा था जबकि उनसे दो कतार नीचे एक जोड़ा बाईं और को बैठा था और लगभग उनके सामने था |

हॉल में अंधेरा छा जाता है और फिल्म शुरू हो जाती है | कुछ ही पलों बाद जब सब कुछ सेट हो जाता है तो राहुल पोप कॉर्न का पैकेट खोल लेता है और उसे अपनी मम्मी की और बढ़ा देता है | दोनो माँ-बेटा पॉपकॉर्न खाते फिल्म देखने लगते हैं | फिल्म शुरू हुए अभी पाँच मिनिट ही बीते थे कि हॉल से कपड़ों की सरसराहट आने लगती है | चारों तरफ से, बिल्कुल धीमी धीमी आवाज़ें आनी लगती हैं | कुछ आवाज़ों को सुनकर राहुल को लगा जैसे कोई अपनी ज़िपर खोल रहा था | राहुल के दिल की धड़कने बढ़ने लगी थी | वो अच्छी तरह से जानता था कि हॉल सुरू कपड़ों के सरसराने, ज़िपर खुलने की आवाज़ों और फुसफुसाती आवाज़ों का क्या मतलब था | उसके जिस्म सुरू सिहरन सी दौड़ रही थी |
 
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