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Romance प्रेम कहानी डॉली और राज की

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Guest
प्रेम कहानी डॉली और राज की

आज सुबह से ही बस्ती में भगदड़ मची हुई थी,ठीक से कुछ समझ मे भी नही आ रहा था,कि हो क्या रहा है,पुलिस यु अचानक इस तरह से आकर बस्ती क्यों खाली कराने लगी

जबकि सैकडों लोग सालों से यहाँ रहते आ रहे है,

लगभग 700 से 800 लोग,यही कुछ 10,12 साल पहले से

इस बस्ती में रह रहे थे,,,,,,

ये जमीन किसकी है ,कैसी है ,किसी को कुछ पता नहीं था बस एक के बाद एक ,दो से चार और चार से छह इस तरह बढ़ते बढ़ते ढाई से 300 झुग्गी झोपड़ियां यहां बनाई जा चुकी थी ,और लोग अपने परिवार सहित उनमें रहने लगे थे

एक एक ईंट की बनी कच्ची दीवार ,उसके ऊपर डाली हुई सीमेंट शीट ,और मेन लाइन से ली गई तारों की उलझी हुई लाइने इसी में लोग अपने परिवार के साथ रहकर अपना पेट पालते थे,, कुछ मजदूरी करते, कुछ औरतें बड़े लोगों के यहाँ जाकर बर्तन और झाडू पोछे का काम करती थी,,, तो कुछ दुकानों और होटलों पर छोटे-मोटे काम करते थे,

इन्हीं में एक परिवार था डॉली का, जो अपनी सौतेली मां ,माँ का पियक्कड़ भाई और दो सौतेली बहनो के साथ रहती थी,

आज से 8 साल पहले जब डॉली सिर्फ आठ साल की थी

एक अच्छी बस्ती में अपनी माँ और पिता के साथ रहती थी

जहाँ डॉली के पिता एक फैक्ट्री में चौकीदारी करते थे,वही माँ बाकि सारे कामो को संभालती थी ,चाहे वह बाजार का काम हो, घर का काम हो ,या ,डॉली के स्कूल का,कुल मिलाकर उनका परिवार एक छोटा और सुखी परिवार था

सब कुछ अच्छा ही चल रहा था,,,,,

पर एक दिन अचानक बाजार से आते हुए डॉली की माँ एक सड़क हादसे में चल बसीं ,,,बस फिर क्या था धीरे धीरे सबकुछ बदलने लगा,,,

लोगों के कहने पर उसके पिता ने एक्सीडेंट का केस दर्ज करवाया केस चला पर कुछ महीनों तक नतीजा ना निकलने पर कुछ लोगों ने सलाह दी की सामने वाले से सला मशहिरा करके केस वापस ले लो और हर्जाना लेकर इस झंझट से अलग हो , अगर जीत भी गया तो कौन सा तेरी बीवी वापस आ जाएगी,,,, इंसान तो इंसान ही होता है कहीं ना कहीं मन में लालच आ ही जाता है ,जैसे ही इस बात की चर्चा सामने बाली पार्टी के वकील से की,वह भी तुरंत हर्जाना देने के लिए तैयार हो गया आखिरकार 2 लाख लेकर केस वापस करने को बोला और डॉली के पिता ने ऐसा ही किया जब ₹2लाख उसके हाथ में आए तो जिंदगी में पहली बार इतना सारा पैसा देखकर उसकी आदतें भी बिगड़ने लगी, शुरु शुरु में तो उसने डॉली का खूब ध्यान रखा उसे नए कपड़े दिलाए अच्छा खाना पीना खिलाया ,जिससे वह अपनी मां की याद को भूल सके ,पर धीरे-धीरे डॉली की तरफ उसका ध्यान कम होता गया ,,,,,ध्यान जो कहीं और लग गया था ,पास में ही एक और बस्ती थी ,,,जहां से उम्मी नाम की एक औरत रोज डॉली के बगल वाले घर में झाड़ू पोछा करने आती थी ,,,

बस फिर क्या स्थिति को देखते हुए धीरे-धीरे उसने नीले के पिता को अपने जाल में फंसा लिया ,,और कहते हैं ना कि औरत के बिना आदमी ,,बिना घोड़े की लगाम की तरह हो जाता है ,,कोई रोकने टोकने वाला था नहीं तो बस जैसा उम्मी कहती वैसा वह करता , कुछ महीनों बाद बिना जांच-पड़ताल किए ही एक दिन किसी मंदिर से बरमाला पहनाकर उसे अपनी पत्नी बना कर घर ले आया,तब डॉली चौथी कक्षा में थी,वह पड़ने में काफी अच्छी थी ,,,जिस दिन से सौतेली मां घर में आई डॉली के दिन बदलने शुरू हो गए ,,

पहले 1 दिन,फिर 2 दिन,,, 5,और फिर हमेशा के लिए डॉली का स्कूल बंद कर दिया गया ,,, और धीरे-धीरे उससे घर के काम करवाने लगे ,,, जब घर के काम करके अपनी बची खुची किताबो को लेकर वह नन्ही

सी बच्ची कॉपी पेंसिल लेकर घर में ही पढ़ने बैठ जाती ,,,पर सौतेली मां उसे ये भी नहीं करने देती ,और एकदिन गुस्से में आकर उसने सारी किताबें और कॉपियां जलती आग के हवाले कर दीं,,

कहते हैं जब माँ दूसरी आती है तो ,बाप तो तीसरा हो ही जाता है,,,, उसका बाप तो जैसे दूसरी औरत और दारू के नशे में अंधा हो चुका था ,,,धीरे-धीरे उसकी दारू की लत बढ़ती ही जा रही थी,,, और जब वह कमजोर होकर अपने सारे पैसे और जो थोड़ी बहुत डॉली के मां के गहने थे उम्मी के हवाले कर चुका तो 1 दिन उम्मी अपनी दोनों बेटियों को अचानक इस घर में ले आई और जब डॉली के पिता ने इस बारे में उससे कुछ कहना चाहा तो पीछे से उसका पियक्कड़ भाई भी उसके साथ आ गया ,,

अब उनके घर पर पूरी तरह से उसकी सौतेली मां उसके मामा और उनकी दोनों बेटियों का कब्जा हो चुका था ,,,कुछ महीनों बाद डॉली के पिता की हालत बहुत खराब हो चुकी थी,जब सरकारी अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टर ने सिर्फ 4 या 6 दिन का मेहमान बताकर उसे वापस घर भेज दिया ,,,

उसकी मां और मामा अच्छी तरह से समझ रहे थे कि ये इतने ही दिन का मेहमान है ,,,अब बस उन्हें एक ही चिंता थी डॉली के वो दो कमरों का मकान जो खुद ब खुद डॉली के 18 साल होने के बाद उसे मिल जाता उसको कैसे हड़पा जाए तो बस पिता की बेहोशी की हालत में उनशे अंगूठे का निशान ले लिया और दस्तखत भी करवा लिए और इससे पहले कि कोई लफड़ा खड़ा

हो,, लगे हाथ उसको 7 लाख में बेच दिया ,,,

पर इस बात के 2 महीने बाद ही डॉली के पिता भी 1 दिन भगवान के पास चले गये अब इस दुनिया में डॉली बिल्कुल अकेली थी ,,वह 8 साल की मासूम बच्ची जो अपनी मां के कलेजे का टुकड़ा थी जिसके डॉली आंखों को देखते हुए उसकी मां ने बड़े ही प्यार से उसका नाम डॉली रख दिया था ,, अपनी मां के जाने के बाद कुछ ही महीनों में बिल्कुल मुरझा चुकी थी ,डॉली का मकान भी बिक चुका था ,,जब तक डॉली के पिता थे तो मकान खरीदने वालो ने इन पर दया दिखाते हुए इन्हें यहां से जाने के लिए नहीं कहा था ,,,पर जैसे ही पिता चल बसे तो दूसरे दिन ही आकर उसने अपना रंग दिखाना शुरू किया और साफ शब्दों में कह दिया कि 8 दिन के अंदर उन्हें अपना मकान खाली चाहिए ,नहीं तो फिर वे अपने तरीके से खाली करवाएंगे ,,,उसकी मां और पियक्कड़ मामा ने डरते हुए आनन-फानन में अपना सामान बाधा और उसी गंदी बस्ती में चले गए जहां से वह आए थे ,,,वे चाहते तो डॉली को यहीं छोड़कर भी जा सकते थे,, पर उन्हें तो साथ ले जाने में फायदा ही था,,,

लड़की जात थी पता था घर के चार काम करेगी और जैसे ही थोड़ी बड़ी होगी तो 4 घरों में भी काम करके पैसे कमा लेगी ,,सो उसे भी अपने साथ ले गए ,,

फिर क्या था ऐसी बस्तियों में ऐसे परिवार में जो होता है वही होता था ,डॉली अपनी सौतेली मां मामा और दोनों बहनों का पूरा काम करती ,खाना बनाती ,,,और जैसे ही वह ^^^^^ साल की हुई तो उसकी मां अपने साथ उसे भी काम पर ले जाने लगी ,,,,और धीरे-धीरे तीन से चार घरों का झाड़ू कटका और साफ सफाई करने के लिए उसे लगा दिया,, अब डॉली को काम करते-करते 4 साल बीत गए थे ,,,पर डॉली के संस्कार जो बचपन में उसकी मां ने उसे दिए थे आज भी उसके साथ थे ,,,,वह ना किसी से कुछ बोलती ना कहीं बस्ती में घूमती ,,सीधा काम पर जाती और काम से सीधे घर आती पर एक दिन जब इसी तरह शाम को 6 7 बजे के करीब डॉली काम से घर लौटी तो अंदर कुछ आवाजें सुनकर उसके कदम दरवाजे पर ही ठिठक गए ,,,

उसके घर मेंकुछ तीन चार लोग बैठे हुए थे ,,जो कुछ अजीब सी बातें कर रहे थे बीच-बीच में पैसों की भी बात हो रही थी ,,वह भी लाखों में पहले तो डॉली की कुछ समझ में नहीं आया ,,

पर जब धीरे-धीरे उसने उनके बीच होने वाली बातें सुनी तो वह जान गई ,,कि उसकी मां और मामा डॉली का ही सौदा किसी से करने वाले हैं,,,जहां यह कहते हुए मामा 10 लाख पर अड़ा था ,,,कि डॉली,,,,,डॉली नही किसी फिल्मी हीरोइन से कम नहीं है,,, अगर उसे किसी अच्छी जगह जाकर उसका सौदा किया जाए तो 10 नहीं 20 लाख मिलेंगे वहीं दूसरी तरफ खरीदने वाला 8 लाख पर सौदा पक्का करना चाहता था,,,पर आखिरकार 10 लाख में ही बात हो गई यह सुनकर डॉली के पैरों तले से तो जैसे जमीन ही खिसक गई थी 17 साल की वह मासूम बच्ची बुरी तरह घबरा गई ,,

जहां वह रह रही थी ,यह जगह भी किसी नर्क से कम न थी ,,,जो उसे दूसरे नरक में भेजना चाहते थे,, कुछ भी हो पर अभी तक डॉली ने अपनी इज्जत को सुरक्षित रखा था ,बस्ती में कभी किसी की हिम्मत नहीं हुई जो उसे आंख उठाकर भी देख सकें,,, पर अब उसे बचाने वाला कौन था,,,जैसे ही डॉली ने सोचा कि मैं अभी यहां से भाग जाऊ,, जहां काम करती है उनके यहाँ चली जाए तो शायद वह डॉली की कोई मदद कर पाए ,,,,पर जैसे ही जाने को हुई उसके दुपट्टे में उलझ कर फटाक से दरवाजे की आवाज आई,,, इससे पहले वह भागती उसके मां और मामा ने आकर उसे दबोच लियाऔर अंदर के कमरे में बंद कर दिया,,,,
 
अब रोने के अलावा उसके पास कोई दूसरा चारा नहीं था,,, वह मां और मामा से रो-रोकर मिन्नतें करने लगी बुरी तरह चीखने चिल्लाने लगी पर उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था,,

अब तो उसका एक ही सहारा था उसके कान्हा जी, उसके लड्डू गोपाल जिनकी पूजा वह बचपन से करती आ रही थी उसे अच्छी तरह से याद है ,जब एक बार बाजार गई तो दूसरे बच्चों की तरह वह भी राखी खरीदने की जिद करने लगी तब उसकी मां ने कहा कि डॉली तेरा तो कोई भाई ही नहीं है किसे राखी बांधेगी। तब दुकान पर रखी हुई एक बड़ी सी कान्हा जी की मूर्ति (लड्डू गोपाल ) पर निधि की निगाह गई और डॉली ने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया,,, मां मैं कान्हा जी को अपना भाई बनाऊंगी और इन्हें ही राखी इन्हें ही राखी बांधूगी ,,,यह देख कर डॉली की मां की आंखों में भी

खुशी के आंसू आ गए थे,,, उन्होंने झट से कान्हा जी की की निछावर के पैसे दुकानबाले को दिए,,,और उनके लिए एक सुंदर सी रेशम की राखी भी खरीदी ,,,बस तब से हमेशा डॉली कान्हा जी को ही अपना भाई मानने लगी थी ,,, और मां के जाने के बाद तो जो भी सुख दुख की बातें होती वह कान्हा जी से ही कहती ,,,तो बस अब उसका सहारा एक यही थे

जिनके आगे हाथ जोड़कर वह आंसुओं से अपनी सारी बातों को कहती जा रही थी ,, डॉली को रोते रोते हुए बहुत रात हो गई थी और उसे पता भी नहीं चला कि कब उसकी आंख लग गई थी,,,,और उसके बाद सच में चमत्कार हो गया दूसरे दिन जब सुबह डॉली की आंख खुली तो सुबह-सुबह ही बस्ती में भगदड़ मची हुई थी,,, पुलिस का छापा पड़ रहा था माइक से अनाउंसमेंट की जा रही थी ,कि बस्ती को जल्द से जल्द खाली किया जाए,,, लोग अपना सामान निकाल निकाल कर घरों से बाहर निकल रहे थे,,, बस्ती में क्रेन भी आ चुकी थी ,जो लोग नहीं निकल ले उन्हें जबरदस्ती निकालकर उनके सामान के साथ ही उस पर चलाया जा रहा था ,,मरता क्या न करता ,,इस भगदड़ में डॉली की मां और मामा भी अपना सामान समेटने लगे ,,पर फिर भी बह डॉली को अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहते थे,,,,तो उन्होंने सोचा क्यों न डॉली के हाथ पैर बांधकर एक बक्से में बंद करके इस बस्ती से से निकाल ले ,,और जाकर अपने काम को अंजाम दे ,,,,पर यह सब करने से पहले ही उनके दरवाजे पर

पुलिस की दस्तक होने लगी ,,और जब दरवाजा नहीं खूला तो दरवाजा तोड़कर पुलिस अंदर आ गई ,,,

तब डॉली ने इस बात का फायदा उठाकर बिना कुछ सोचे समझे अपनी कान्हा जी की मूर्ति ली और इसी भगदड़ में बेतहाशा दौड़ पड़ी ,,,,,वह सबको पीछे छोड़ते हुए बस्ती से करीब चार-पांच किलोमीटर दूर निकल आई थी,,,,,,

डॉली उस बस्ती से दूर यहां आ तो गई ,पर दौड़ते दौड़ते एक ऐसी जगह पहुंची , जहां दूर-दूर तक किसी घर या मकान का कोई नाम नहीं था ,हां एक लाइन में कुछ छोटे ट्रक खड़े हुए थे और पास के ही खेतों से कुछ चार पांच लोग सब्जियों के बोरे ट्रकों में लाद रहे थे,, डॉली ने कुछ देर अपने आपको यहां छुपा रखा था ,,,बह सोच नहीं पा रही थी, कि अब यहां से जाए कहां ,,,फिर जो लोग हैं वह भी पता नहीं कैसे हैं किसी को देखकर उसके अच्छा या बुरा होने का अंदाजा कैसे लगा सकते हैं, तो बस अपने कान्हा जी को गोदी में लेकर बैठकर उनका ही नाम जप रही थी,,, तभी ट्रक की ओट से उसे अपनी मां और मामा इसी तरफ आते हुए दिखे डॉली ने अपना मुंह बंद कर लिया नही तो शायद उसकी चीज ही निकल जाती,,,, और तभी उसे उसी ट्रक के स्टार्ट होने की आवाज आई ,,जिसके पीछे वह छुपी हुई थी ,,अब उसके पास सिर्फ एक ही चारा था कि वह उस ट्रक में बैठ जाए वर्ना ट्रक जाने के बाद वह आसानी से डॉली को पकड़ लेते ,,उसने सब कुछ कान्हा जी के हवाले छोड़ते हुए खुद को ट्रक में रखी हुई बोरियों के बीच छुपा लिया,, अब ट्रक स्टार्ट होकर आगे

बढ़ने लगा था ,,,अब वह कहां जा रही है, क्या कर रही है उसने कुछ भी नहीं सोचा था ,बस इस वक्त वह अपनी मां और मामा से अपनी जान बचाना चाहती थी, वरना तो शायद डॉली का यही सबसे बुरा समय था ,जब उसे उस नर्क में झोंक दिया जाता ,,उसे तो सबसे बड़ा सहारा अपने कान्हा जीका था और उसे विश्वास था ,कि उसके कान्हा जी उसकी रक्षा जरूर करेंगे ,,,1 घंटे बाद एक ढाबे पर जाकर ट्रक रुक गया ,,तभी कुछ लोग जैसे ही बोरियां उतारने के लिए हुए तो ट्रक मालिक की आवाज आई ,,कि अभी तुम सब जाकर खाना खा लो ,थोड़ा आराम कर लो, उसके बाद बोरियां उतार कर अंदर रख देना ,,,और इतना समय डॉली के लिए काफी था कि वह उतरकर कहीं और चली जाए ,,,जब उसे किसी की आवाज नहीं सुनाई दी और वह समझ गई कि सब लोग जा चुके हैं ,,,तो धीरे से खड़े होकर ट्रक में से इधर उधर झांकने लगी कि आस-पास क्या है ,उसने देखा कि यहां भी दूर-दूर तक बस्ती नजर नहीं आ रही है ,यह एक मेंन रोड था जो सीधा शहर के लिए जाता था ,और यहाँ एक ढाबा बना हुआ था ,,,और शायद उसी ढाबे के लिए यह सब्जियां लाई गई थी

सबसे आगे ढाबा था,बगल में काफी जगह पड़ी हुई थी जहां 10 बारह खटिया बिछी थी ,कुछ प्लास्टिक की

कुर्सियां और दूसरी तरफ एक बढ़ी सी हौदी

(पानी का टैंक) बना था जिसमे लोग हाथ मुँह धो रहे थे, ढाबे के पीछे काफी जगह छूटी हुई थी ,जिसके अंदर दो ट्रैक्टर दो लोडिंग ,,और एक खुली हुई जीप रखी थी ,,बगल में एक बड़ा सा सेड भी डला था,,,, जिसके नीचे 5,,,6 भैंसे बंधी हुई थी और अंदर एक बड़ा सा मकान भी बना था ,,,पर मकान के अंदर या बाहर कोई भी नजर नहीं आ रहा था ,,दावे के पीछे वाली जगह में काफी बड़े-बड़े पेड़ पौधे, फूल पत्तियां ,और सब्जियां लगी हुई थी ,,अमरूद का एक बड़ा सा पेड़ भी लगा

था ,,,, जिसमें अमरुद लदे हुए थे ,,,डॉली ने अच्छी तरह से सारी जगह का मुआयना कर लिया,ढाबे में काफी चहल-पहल थी ,,सर्दियों के दिन थे तो ऊपर से धूप भी अच्छी लग रही थी,,,पर डॉली को भूख भी बहुत तेज थी ,,उस बेचारी ने तो कल रात से ही कुछ नहीं खाया ,, जब सब्जी की बोरियो में झांका तो एक मे टमाटर और दूसरी में मटर दिखी भूख में तो इंसान कुछ भी खा लेता है, ये तो फिर भी ताज़ी और हरी सब्जियां थी जो अभी खेत से तोड़कर लाइ गई थी,,,फिर क्या डॉली ने जल्दी से 6,7 टमाटर और कुछ कुछ मटर की फलियां निकाली ,और वही बैठ कर खाने लगी

जब जी भर गया और धूप से बदन सिका तो नींद भी आने लगी और कुछ ही देर में कान्हा जी को गोद मे लेकर वही ढेर हो गई,,,,आखिर थी तो 16 साल की बच्ची ही ,ये बात और है कि भगवान ने जिम्मेदारिया

कुछ ज्यादा ही देदी थी,,,

शाम के 500 बज चुके थे और सर्दियों में तो 500 ही धूप लौटने लगती है जैसे ही धूप ने मुंह फेरा तो ठंड की वजह से डॉली की आंख खुल गई ,,और देखा कि कुछ लोग इसी तरफ आ रहे थे ,,,शायद सब्जियों के बोर उतारने,,, कुछ ठंड से और कुछ डर से डॉली किसी सूखे पत्ते की तरह कांपने लगी ,,,,जैसे ही बोरियां उतरना शुरू हुई धीरे धीरे वह पीछे की तरफ जा रही थी ,,,पर कितना छुपती आखिरकार जब आखिरी बोरी उतरी तो बोरी उतारने वाले लोगों ने चिल्लाते हुए कहा ! भैया जी यह देखिए जरा ,,,,

और वहां से आवाज आई ,,अभी देखना क्या है जो भी बोरी बची हैं नीचे लेकर आ ,,,

तभी यहां से एक आदमी ने फिर आवाज़ लगाई ,,,भैया जी बोरी तो सारी उतर चुकी है ,पर अपनी लोडिंग में एक छोरी बैठी हुई है !

क्या तेज आवाज के साथ वह दौड़ता हुआ ट्रक के पीछे खड़ा हो गया,, ,,,,लंबा ऊंचा कद , धूप में दबा हुआ सांवला रंग ,चुस्त तंदुरुस्त शरीर ,टाइट जीन्स ,सुर्ख रेड बनियान पर जैकेट और ,माथे पर बंधी हुई ,चौड़ी पट्टी,,,,अच्छी शक्ल पर आँखों मे एक ज़िद और गुस्सा,,,जो पता नही किसके लिए था,,,, एक उड़ती सी निगाहे से डॉली को देखा और कहा ए चल उतर नीचे ,,,,जब डॉली ने उसकी तरफ देखकर कुछ कहने की हिम्मत की तो,,, उसकी आंखों से बुरी तरह डर गई और बिना कुछ कहे पलट कर खड़ी हो गई,,,,

ओए क्या तू ऊँचा सुनती है रे ,,चल फटाफट से नीचे आजा डॉली ने जब भी कोई जवाब नहीं दिया,,

तब उसके हाथ में जो डंडा था उसको जोर से ट्रक के ऊपर बजाते हुए तीसरी बार उसने गुस्से में आवाज लगाई देख तू अपुन का भेजा खराब मत कर, मैं तेरे को 2 मिनट देता हूं नीचे आ जा वरना तेरी तो,,,,,,,

इस बार डॉली पलटी और दौड़कर ट्रक के किनारे खड़ी हो गई ,,,,,वह फिर बोला तू मेरे को क्या देख रही है ऊपर नीचे,, तब डॉली बहुत मुश्किल से बोल पाई ,,,

मैं यहां से कूदूंगी तो गिर जाऊंगी,,, आप इसके नीचे कुछ रखा दीजिए ,,,,

देख ट्रक इतना भी ऊंचा नहीं है कि तू गिरे और तेरी हड्डी पसली चूर हो जाए ,,,चल अब ज्यादा नौटंकी करने का नई,,,,,

जी मैं सच में नहीं उतर पाऊंगी आप इसके नीचे कुछ रख दीजिए ,,,,,,तब उसने आसपास नजर दौड़ाई तभी वहां मटर की कुछ बोरियां रखी थी ,,,,बगल वाले लड़के को आवाज देते हुए कहा वह तुम दोनों आकर यह मटर की बोरी ट्रक के नीचे बिछा दो उस पर कूद जाएगी ,,,

डॉली ने कोशिश की पर उसे अब भी डर लग रहा था ,,,

जी इसके ऊपर एक बोरी और रख दीजिए वरना मैं गिर जाऊंगी ,,,,,

तब उसने थोड़ा परेशान होकर डॉली की तरफ देखा और कहा ,,,,,ओ,ओ,ओ,, महारानी चल फटाफट से

कूद जा कि मैं ऊपर आकर धक्का दे दूं तुझे ,,,,

तब डॉली डर गई और कान्हा जी को वही बिठाकर मटर की बोरी के ऊपर छलांग लगा दी ,,,,लंबा सा स्कर्ट ढीला ढाला टॉप बंधी हुई दो चोटी और ठंड से कांपते हुए डॉली उसके सामने जा खड़ी हुई ,,,,उसने ऊपर से नीचे तक नहीं डॉली को देखा ,,डॉली के पैरों में चप्पल नहीं थी ,,और इतनी ठंड में एक भी स्वेटर उसके बदन पर नहीं था,,, जब उसने डॉली से पूछा ,,,,तू है कौन और अपन की लोडिंग में कैसे आई,,

डॉली ने कुछ कहना चाहा पर ठंड के मारे उसके होंठ और पूरा शरीर थरथर कांप रहे थे ,,, ठंड सच में काफी बढ़ती जा रही थी ,,,

तब उसने कुछ ना कहते हुए वहीं खड़े होकर ज़ोर से आवाज लगाई काकी यहां आओ,,,, और तभी अंदर से 50 ,,55 साल की एक औरत भागती हुई बाहरर आई क्या हुआ काहे घर सर पर उठा रहा है,,,,,

तब उसने डॉली की तरफ इशारा किया,,,

उस औरत ने डॉली के चेहरे को देखा, जिसमे डर और घबराहट साफ दिख रहे थे ,,,वह थोड़ी देर डॉली को देखती रही ,उसका मासूम चेहरा ,,और बड़ी बड़ी आंखें जो इस वक्त किसी का सहारा चाह रही थी,,,, बह कुछ देर डॉली को देखती रही ,,,,

तभी उसने फिर आवाज लगाई ,,,काकी देख क्या रही है पूछ जरा इससे कहां से आई है ,कौन है ,,और इसको यहां से बाहर निकालो ,,,,,

उसके मुंह से ऐसी बात सुनकर बह औरत उस पर बुरी

तरह बरस पड़ी,,, तू इंसान है या राक्षस जरा भी दया धर्म है तेरे मन में ,,,,अरे देख ये मासूम ठंड से कैसे कांप रही है अपनी बकवास बंद कर और जल्दी से अंदर से इक साल लेकर आ इसके लिए,,,, पर वह कुछ कहता इससे पहले ही काकी ने अपना उड़ा हुआ साल डॉली के चारों तरफ लपेट दिया और उसे पकड़ कर अंदर ले जाने लगी ,,,तभी डॉली पीछे आती हुई बोली ,,,,, पर मेरे कान्हा जी बैठे हैं उनको भी अंदर ले चलो ,,,,,तब उस औरत ने डॉली की तरफ देखा और पूछा तेरे कान्हा जी हां मेरे कान्हा जी ट्रक में ही है जब मैं उतर रही थी तो उन्हें ट्रक में बिठा दिया था ,जिससे उन्हें चोट ना आए ,,,,उसकी इस बात पर वह बहुत जोर से हंस पड़ा था तब उस औरत ने डांटते हुए कहा,,, अभी हंसना बंद कर और ट्रक में से इसके कान्हा जी इसे देदे,,,,

और एक ही झटके में वह ट्रक के ऊपर छलांग लगाते हुए ट्रक में खड़ा था ,,,हां सच में कपड़े में लिपटी हुई एक लड्डू गोपाल की बड़ी सी मूर्ति रखी थी ,,उसने हाथ में लड्डू गोपाल को पकड़ा और आकर उस लड़की के हाथ में मूर्ति पकड़ा दी ,,,,अब काकी डॉली को लेकर अंदर जा चुकी थी,,,

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राज ने हाथ मुंह धोये और नजर इधर उधर डालते हुए रसोई में आ गया,,,थोड़ा रुक कर काफी से पूछा काकी वह कहां गई

काकी उसकी बात का जवाब दिए बिना ही राज के खाने की तैयारी में लगी रही, राज काकी के पीछे रसोई में गया और फिर पूछा लगता है चली गई, अच्छा ही हुआ एक और आफत अपने गले पड़ जाती, अपुन को वैसे भी कुछ सरकी हुई लग रही थी वह ,काकी ने थाली लगाकर राज के हाथ में पकड़ाई और अपनी थाली लेकर बाहर बड़े कमरे में आकर जमीन पर बैठकर खाना खाने लगी, राज को उन्होंने किसी बात का जबाब नही दिया था ,,,,,बस खाना शुरू करने के लिए बोला रात के 1030 बज चुके थे ,,रोज की तरह काकी बोलती जा रही थी, और राज चुपचाप रोटियां खत्म करने में लगा था,

ढाबे में चाहे लाख तरह के अच्छे व्यंजन बनते थे, पर जब तक काकी के हाथ की रोटी न खा ले उसका पेट नहीं भरता ,,,, काकी ने देखा जब राज खाना खत्म कर चुका है ,और सोने की तैयारी में था, उससे पहले ही काकी ने डॉली के बारे में चर्चा छेड़ दी,,,, डॉली पर तरस खाते हुए उसकी कहानी राज को बताने लगी,, जब राज ने सारी बात सुन ली,,,

तो बड़े गौर से काकी के चेहरे को देखते हुए उसने सवाल किया

काकी तू भी बड़ी भोली है तुझसे कोई कुछ भी कहेगा तो मान लेगी ,अरे क्या भरोसा उसके साथ कोई हो कुछ ऐसा जो हमें नहीं दिख रहा हो ,,आजकल लोगों को लूटने के और नए नए तरीके के बहाने बनाने में देर नहीं लगती,,, देख अपुन का सीधा साधा काम है ढाबे का ,,,अपना ढाबा ,,,

ठरकी द ढावा

के नाम से वर्ल्ड फेमस है और अपुन नहीं चाहता कि उस पर कोई भी उंगली उठाए,,, अपुन किसी लफड़े में पढ़ने वाला नहीं है, अरे छोरी के पीछे क्या लफड़ा है ,साला कुछ समझ में नहीं आ रहा,,,, काकी तू इतनी जल्दी किसी की बात पर विश्वास कैसे कर सकती है,,, अगर कहीं वह लड़की झूठी निकली तो साला पुलिस का लफड़ा बहुत ही खतरनाक होता है ,,,,तू जेल जाएगी और साथ-साथ मेरे को भी ले। जाएंगी,,,

काकी ने राज की पीठ पर एक चपत लगाते हुए कहा !!!तू जैसे उल्टी खोपडी का है ,,,वैसे ही उल्टे

खयाल तेरे दिमाग में आते हैं ,,,,अरे तूने कभी किसी की आंखों में ठीक से देखा है,,,, राज मेरी बूढ़ी आंखें किसी की आंखों में देखकर धोखा कभी नहीं खा सकती ,,,

वह मासूम इतना में भरोसे के साथ कह सकती हूं, कि उसने जो भी कहा वह सच है लेकिन फिर भी तू अपनी तसल्ली के लिए एक बार जाकर बस्ती में पता लगा,,, तेरे मन की तसल्ली हो जाएगी तो अच्छा ही होगा ,,,,बात तो तू किसी की मानने वाला है नहीं,,,,,

ठीक है कल मुझे वेसे भी बस्ती मैं जाना है कुछ काम है ,,तो इस बारे में भी पता कर लूंगा ,लेकिन तू यह बता कि अभी वह छोरी है कहा,,,,

राज अभी वह मेरे कमरे में सोई हुई है और तू उससे कुछ नहीं कहेगा,,, कितनी भूखी थी बेचारी अरे इतना तो सोचो उसके कान्हा जी उसके साथ है ,,और चाहे कुछ भी हो भगवान जी झूठ का साथ कभी नहीं दे सकते, तू अभी जाकर आराम कर सुबह अपनी तसल्ली के लिए पता कर लेना,

पर सच कहूं मुझे तो उसमें अपनी बेटी ही दिख रही है ,मैं छोरी को घर से जाने के लिए कभी नहीं कहूंगी,, पर एक बात अच्छी तरह से सोच ले अगर उसकी बताई हुई सारी बात सही निकली ,और तुझे उस बात से तसल्ली हो गई तो फिर तू उसको इस घर में रहने से मना नहीं करेगा,,,

क्या !!!!कहते हुए राज इस बात पर बुरी तरह से चौक गया था , इस घर में रहेगी क्या मतलब छोरी

यहां क्यों रहेगी अरे अगर सारी बात सही हुई तो उसकी मदद करके पुलिस स्टेशन में बता देंगे,,, फिर उनकी जो मर्जी वो करें ,,,,अरे गरीब लड़कियों के लिए तमाम अनाथ आश्रम खुले रहते हैं ,,,सरकार उनकी मदद करती हैं ,तो फिर वो यहां क्यों रहेगी,,,,

देख राज एक बात अच्छी तरह से सुन ले अगर सच्चाई जानने के बाद तूने डॉली को घर से निकाला तो तेरी काकी भी उसके साथ जाएगी, अब तुझे जो हो मंजूर हो तू बता देना ,,,,,

काकी तेरा दिमाग सटक गया है क्या

अरे 1 दिन की आई छोरी के लिए तू मुझे छोड़कर जाएगी ,,,,अरे 20 साल से तू मेरे साथ रह रही है,, हां राज मैं तेरे साथ रह रही हूं ,और इसी अधिकार से तुझसे कह रही हूं ,,,एक अनाथ बच्ची को हम अपने घर में पनाह देंगे तो पूण्य का काम भी होगा और फिर हो सकता भगवान ने उसे इसीलिए आज तेरे ट्रक में भेजा हो ,कि उसे हमारे घर पर आसरा मिल जाए ,,,अरे तेरी ढावे में रोज 5,,,10 गरीब खाना खाते हैं ,,अगर ये बच्ची दो टाइम की रोटी खा लेगी तो तेरे यहां किसी चीज की कमी नहीं हो जाएगी,,,और फिर तुझे क्या तू तो सुबह से लेकर रात तक ढाबे में रहता है, मैं यहां अकेली घर पर दीवारों से बातें करूं क्या, अरे अब बुढ़ापे में इतना काम भी नहीं होता,,, बच्ची के रहने से घर में रौनक हो जाएगी और काम में भी मेरा हाथ बटा दिया करेंगी, अगर बुढ़ापे में मुझे थोड़ी सी खुशी मिल जाएगी तेरा क्या चला जाएगा अब तू जा,,,,,

मुझसे सुबह बात करना,,,, इतना कहकर काकि आई और डॉली के बगल में उसको अच्छे से रजाई उड़ाते हुए उसके ऊपर हाथ रख कर सोने लगी,,, काकी को ना जाने क्यों उसके भोले चेहरे से एक दिन में ही बड़ा प्रेम हो गया था उधर राज अपने कमरे में जाकर यही सोच रहा था कि ये काकी भी ना जिद पर आ जाए तो अपनी बात मनवा के ही रहती है ,,और बस रोज की तरह घोड़े बेच के सो गया,,,,

सुबह जब उठा उसके दिमाग में एक ही बात घूम रही थी, कि वह बस्ती जाए और जाकर पता करें कि यह बात सच है या झूठ और सच कहूं तो उसके मन में यही चल रहा था कि काश यह लड़की झूठ बोल रही हो तो इससे पीछा छूटे,,,उठकर हाथ मुँह धोया चाय पी और जीप लेकर चल पड़ा बस्ती की तरफ़,,, 1 दिन बाद ही बस्ती पूरी तरह से उजड़ी हुई लग रही थी, पुलिस ने बहुत सारी कच्ची झोपड़ियां क्रेन से तूड़वा दी थी, कुछ लोग कहीं बैठकर नारेबाजी कर रहे थे, तो कुछ अपॉजिट पार्टी के लोग उनके खिलाफ लड़ रहे थे,, पुलिस का पहरा अब भी वहां पर सख्त था,,, कुल मिलाकर पूरी बस्ती उजड़ी और वीरान लग रही थी, जब उसने कुछ लोगों से जाकर पूछा की बस्ती में रहने वाले लोग कहां है ,,,,तो सब ने यही जवाब दिया कि अब कुछ नहीं पता ,,,अचानक से जिसको जहां जगह मिली, जो जैसे भाग पाया भाग गया वहीं पास में 8,10

औरते बैठी थी ,जो बस्ती की लग रही थी ,,,राज ने

उनके पास जाकर ,,,डॉली का नाम लेकर डॉली के बारे में जानना चाहा ,,,पहले तो वो चुप हो गई ,लेकिन फिर उल्टा राज से सवाल किया,,, आप उसके बारे में क्यों पूछ रहे हैं ,,,,राज ने कहा कि वह मेरे यहां सफाई का काम करती थी ,और 2 दिन से आई नहीं बस इसलिए पता करने आया हूं,, तो एक औरत ने डॉली के बारे में दया दिखाते हुए उसकी परेशानी बताइ,,,,,

आप तो जानते ही होंगे कि वह अपनी सौतेली मां के साथ रहती थी मैं तो कहती हूं अच्छा ही हुआ वह आजाद हो गई , तो अच्छा है अरे उसके जैसी गन्दी औरत तो कोई दूसरी नहीं होगी,,, सुनने में तो यह भी आया था कि वह डॉली का सौदा करना चाहती थी,,,पर आगे का भगवान जाने उसके साथ क्या हुआ कहां गई हम कुछ नहीं जानते,,,, राज ने यही बात वहां पर तीन चार जगह जाकर पता कि ,,और हर जगह उसे यही उत्तर मिला,, एक जगह तो उसने डॉली की फोटो तक दिखाइ जो मोबाइल में खींचकर लाया था,,, यही जवाब मिला और उसे पूरा यकीन हो गया कि जो भी कह रही है वह सच है,,,, जब घर गया और काकी ने पूछा लगा लिया पता क्या हुआ ,,,

तव वह कुछ बोल नहीं पाया लेकिन आज उसकी आंखों में उस लड़की के लिए दया और , उसकी मां के लिए गुस्सा साफ झलक रहा था ,,,,उसने गाली देते हुए कहा साली अपन को उसकी मां मिल जाए तो अभी के अभी उसको जेल की चक्की पिसवा दूं,,,, काकी ने

राज को शांत करते हुए उसे पानी पिलाया ,,,,और हंस कर बोली राज अब इसको रहने की इजाजत है कि नहीं,,,

राज ने कहा कि क्यों तू अपन को शर्मिंदा करती है,,,,

अपन अपनी हरकत के लिए पहल ही बहुत ,,,,,,,

काकी जैसा तू चाहती है वैसे ही होगा पर कल के दिन अगर पुलिस आकर पूछती है यह पता करती है उसके बारे में तो हम क्या कहेंगे ,कि कौन है लड़की कहां से आई है,,, बेटा इसकी चिंता तू मत कर, बस तूने हां कह दी है ,,

डॉली को कैसे अपने पास रखना है यह मैंने अच्छी तरह से सोच लिया है ,,,अरे वह जो महिला मोर्चा की बहन जी है ना ,अपने यहां कभी-कभी आती रहती हैं,, तो आज सुबह ही वह हमारे घर पर आई थी ,और मैंने उन्हें डॉली की सारी कहानी बता दी ,,डॉली के बारे में सब कुछ बता दिया, और उन्होंने कहा है कि हमें पुलिस में जाकर सब बताना होगा सारी सच्चाई जो भी है ,,और फिर हमें डॉली को अपने पास रखने की इच्छा बताकर हम इसकी जिम्मेदारी ले लेंगे,,,,,
 
महिला मोर्चा की महिलाएं इसकी गवाह होगी समय-समय पर आकर डॉली को देखेंगे ,कि उसे यहां किसी बात की दिक्कत तो नहीं है ,,,और जब डॉली 18 साल की हो जाएगी तब खुद ही फैसला करेगी उसे यहां रहना है या कहीं और जाना है ,,,जो भी करना है फिर बह उसके ही हाथ में होगा,, बेटा एक बेटी की तरह मैं डॉली को अपने पास रखूंगी, और एक मां

बनकर इसकी जिम्मेदारी लूंगी ,,,,

ठीक है काकी !!!! बस मुझे यही बात आपसे कहनी थी ,,,बाकी जैसा कि तुझे ठीक लगे तू बैसा कर,,,,

दूसरे दिन सुबह सवेरे ही काकी और राज

डॉली को पुलिस स्टेशन ले जाने की तैयारी कर रहे थे ,बस महिला मोर्चा टीम आने की ही देर थी कुछ देर में जैसे ही वह लोग आ गई राज ने जीप निकाली और सबको साथ लेकर पुलिस स्टेशन पहुंच गया,,,, वहां पर एक एप्लीकेशन दी जिसमें डॉली के बारे में सब कुछ साफ-साफ लिखा हुआ था ,और काकी ने उसे गोद लेने की इच्छा भी जाहिर की कि वह डॉली को अपनी बेटी की तरह ही रखेंगी,,,,

काकी महिला मोर्चा से पहले से ही अच्छी तरह परिचित थी, उन्होंने बताया कि डॉली इनके यहां सुरक्षित रहेगी ,,तो उन सभी ने भी अपने दस्तखत पेपर पर कर दीये,और उनने खुद भी इस बात की जिम्मेदारी ली कि वह समय-समय पर जाकर डॉली की खबर लेती रहेगी ,,,और उन्हें इस बात का पूरा भरोसा है कि काकी के साथ डॉली सुरक्षित रहेगी,,

बस यही कुछ आज 8,10 दिन लगे कोर्ट से भी कुछ औपचारिकताएं हुई और उसके बाद डॉली की देखरेख की जिम्मेदारी काकी को सौंप दी गई ,,,,,इन 8 दिनों में डॉली देख चुकी थी कि काकी डॉली के लिए कितना

कर रही है, और फिर हर इंसान प्यार का ही भूखा होता है अगर प्यार मिले तो कोई अजनबी भी अपना बन जाता है ,और अगर नफरत तो अपने भी हम से कितने दूर हो जाते हैं,,,

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बस फिर क्या था डॉली एक सदस्य के रूप में राज के घर आकर रहने लगी एक तरफ जहां काफी के साथ अच्छे से घुलमिल कर रहती घर का सारा काम करवाती क्योंकि उसे तो बचपन से ही अच्छी तरह से काम करने की आदत थी ,,वह काफी बड़े बड़े घरों में साफ-सफाई का काम करती थी तो उसे तौर तरीके ,कैसे रहना है ,किस सामान को कहां रखना है चाय बनाना, खाना बनाना उसको तरीके से टेबल पर सजाना,, डस्टिंग उसको एक अच्छे परिवार की तरह सारे काम बखूबी आते थे ,,,तो वह धीरे-धीरे काफी के साथ भी घुलती मिलती जा रही थी

,,,,, पर अब भी राज की आंखों से उसे डर ही लगता था ,,वैसे तो सुबह सुबह निकलता और रात को आता पर जैसे ही राज आता बह चुपचाप अपने कमरे में चली जाती ,और सुबह भी जब राज ढाबे पर निकलता उसके बाद ही बाहर आती,,,,

हालांकि काकी देखकर समझ गई थी और राज के सामने ही डॉली से कहती ,,,डॉली तुझे से डरने की जरूरत नहीं है मैं हूं तेरे साथ और वह काकी कि इस बात पर चुप ही रह जाती,,, डॉली को सारे तौर-तरीके

तो आते ही थे कि शहरों में किस तरह से घर को व्यवस्थित किया जाता कैसे वहां पर सब के बेडरूम, किचन, स्टोर रूम और,, हॉल को सजाया जाता है और अलग किया जाता है,,,,, राज का घर तो बड़ा था और पक्का बना हुआ था,,,, पर घर में था कौन एक काकी और दूसरा राज दोनों को ही सामान कहां कैसे रखना है,,, इस बात की कोई समझ नहीं थी ,,जहां काकी अपने बुढ़ापे के कारण बिचारी उतना ही कर पाती थी कि बस घर का काम चलता रहे ,,,वही राज ने बचपन से देखा ही क्या,,,वह तो अनाथ बच्चा था जो काफी को रोता हुआ मिला था पर उसने अपनी मेहनत और लगन के दम पर इतना सब कुछ हासिल कर लिया था,,, तो मां लक्ष्मी ने तो अपना स्थान बना लिया था इनके यहां पर,,,,,,

लेकिन सामान व्यवस्थित कुछ भी नहीं था ऐसे लगता था जैसे आज ही इस घर में आए हो और उठापटक करते हुए सामान यहां से वहां बेतरतीबी से फैला दिया हो ,,,

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डॉली को रहते-रहते तकरीबन 3 से 4 महीने हो गए थे और वह इसे अपना घर समझने लगी, जब उसने देखा कि वह अपने हिसाब से भी यहां कुछ भी कर सकती है ,,कोई उसे रोकने टोकने वाला नहीं है ,,,,,

तो उसने धीरे-धीरे घर की व्यवस्था जमानी शुरू की, सबसे पहले ऊपर जो तीन चार कमरे खाली पड़े हुए थे

उन्हें तरीके से साफ करवाया, अच्छे से कमरे को धोया और फिर ऊपर के कमरे में व्यवस्थित तरीके से स्टोर रूम बना दिया ,यह सारा काम वह धीरे-धीरे ही कर रही थी, नीचे बड़े कमरे में जो बहुत सारे तेल के कनस्तर रखे हुए थे, उन सब को ले जाकर ऊपर स्टोर रूम में रखा गया जगह-जगह पड़ी हुई गेहूं की बोरियों को भी ऊपर ही एक लाइन से रखकर उनको एक कपड़े से ढक दिया, दाल ,चावल ,,घी के कनस्तर जो ढाबे के लिए लाए गये है सारा सामान स्टोर रूम में तरीके से रखा ,और बाहर से दरवाजा बंद कर दिया,,,,, जब भी किसी सामान की जरूरत होती तो डॉली खुद जाकर ऊपर से वह सामान निकलवा देती शुरू शुरू में राज को डॉली की इन हरकतों पर खीजन हुई ,,,,उसे पसंद नहीं था कि उसके काम में कोई दखलंदाजी करें,,,

पर काकी हर बार राज को डांटते हुए चुप करा देती,,,,

और उसे बताती की,,, कितना परेशान थी जगह-जगह तेरा सामान पड़ा था चूहे आते थे सामान की बर्बादी भी होती थी,,,

अब ऊपर के कमरे में चूहे भी नहीं जाते और सामान भी साफ सफाई व सुरक्षा में रखा है ,तो तुझे क्या परेशानी है,, बच्ची को करने दे जो भी करना है उसका भी मन लगा रहेगा ,,,,,

जब डॉली को काकी सा का इतना सहारा मिलता तो वह मन ही मन खुश हो जाती पर राज के सामने कुछ बोलने की कुछ कहने की हिम्मत उसकी कभी भी नहीं

होती,,,

जब नीचे का बड़ा कमरा खाली हो गया तो डॉली ने उस कमरे को भी अच्छे से साफ किया कमरा खाली तो हो ही गया था तो उसमें रंगाई पुताई भी करवा दी उसके बाद दोनों तखत को एक साथ डाल कर उसे डबल बेड का रूप दे दिया गया ,,सोफे की दो कुर्सियां और सोफा जो पूरे कमरे में फैले थे उनको एक जगह रखकर बीच में टेबल रखी गई और उस पर एक अच्छा सा टेबल कवर भी बिछा दिया गया,,,, राज का मकान यही कोई 3 साल पहले ही बना था ,तो उसमें किचन भी नए तरीके से ही बनी हुई थी,,, पर काकी से ना तो ज्यादा खड़े होते बनता था और ना ही वह खड़े होकर काम कर पाती थी,,,,तो उसने सारा सामान नीचे ही फैला रखा था ,,एक कोने में गैस ,,,नीचे फैली हुई डिब्बिया,,,,, जब भी किसी सामान की जरूरत होती तो ढाबे से ले आती और उसी तरह पननियों में या पैकेट में वहीं कोने में सरका देती ,,,,आखिर इस उम्र में उनसे होता भी कितना ,,,डॉली ने किचन की भी एक-एक डिब्बी शीशे की तरह चमका दी थी जो खराब डिबबिया थी उन सब को फेंका और ,काकी के साथ बाजार जा कर किचन के डिब्बों का एक सुंदर सा सेट लाकर किचन में सजा दिया, जिसमें सारा सामान तरीके से भरा हुआ था, जीरा, हल्दी ,मिर्ची धनिया ,लॉन्ग ,इलायची जो भी सामान था सब कुछ अच्छे से डिब्बों में भरकर रखा और गैस को ऊपर स्लैप पर शिफ्ट किया ,,,क्योंकि अब डॉली भी काकी के

साथ काम करवा लेती थी ,,,और जब काकी को इतना सहारा मिला तो,,,किचिन भी चमक गई ,,,,अपना और काकी का कमरा तो डॉली बहुत पहले ही साफ कर चुकी थी,,,

अब बचा राज का कमरा उसमें जाने की हिम्मत तो डॉली ने कभी की भी नहीं ,,

एक या दो बार बहुत जरूरी किसी काम से वह उसके कमरे में गई, लेकिन डर के मारे उसने नजर उठाकर भी यहां से वहां नहीं देखा और जल्दी से बाहर आ गई,,,,
 
राज घर के अंदर आता और चारों तरफ देखता कि क्या यह उसका ही घर है जिसमें उसे खुद ही अपनी चीजों का कुछ अता पता नहीं रहता था ,,,कोई भी चीज कहीं भी पढ़ी हुई मिल जाती थी,,, और कई बार तो ढूंढने के बाद भी उसका अता-पता नहीं होता, पर अब सारा सामान इतनी व्यवस्था से रखा हुआ था कि अगर एक सुई भी ढूंढना है तो रात के अंधेरे में वह भी मिल जाए,,, डॉली की आदत थी कि वह जब भी काकी के साथ बाजार जाती ,,कुछ सामान खरीदती या घर में कुछ भी करती तो ,एक कॉपी पेन उठाकर उस पर नोट जरूर करती थी,,,, क्योंकि अपनी मां के सामने डॉली चौथी कक्षा तक पढ़ी थी तो लिखना पढ़ना तो उसे आ ही गया था ,,,और अपने शौक के चलते वह जहां काम करती ,वहां जाकर भी उसकी कॉपी पेन और कुछ किताबें जो उसे मिल जाती, काम से फ्री होकर वह हमेशा पढ़ती रहती थी ,,,,घर में कौन सा सामान कब आया कितनी तारीख को सिलेंडर भरा दूध का

हिसाब ,,,यह सब लिखना डॉली की आदत में शुमार था ,,,,,

तो यहां भी वह इन सब को एक कॉपी पेन पर अच्छे से मैनेज कर रही थी,,, एक बार डॉली की कॉपी हॉल में छूट गई थी और जब राज ने आकर वह कॉपी देखी तो यही करीब आठ से 10 पन्ने उस में लिखे हुए थे जब राज ने देखा कि डॉली की राइटिंग अच्छी है ,,और सब कुछ सही सही लिखा है तो उसने खाना खाते वक्त काकी से इस बारे में बात की और पूछा कि अगर वह इतना जानती है ,,,और अगर वह चाहती है तो स्कूल जाना शुरु कर सकती है,,,

काकी राज कि इस बात पर बहुत खुश हो गई थी ,,,उसे अच्छा लग रहा था कि कम से कम राज ने डॉली के बारे में इतना सोचा काकी ने जल्द से डॉली को आवाज दी डॉली बेटा इधर आ तुझसे कुछ बात करनी है,, डॉली को पता था कि राज खाना खा रहा है पहले तो वह डर गई थी,,, पता नहीं उसने क्या गलती कर दी ,,, लेकिन बहां काकी थी और उसे पता था काकी के सामने राज से डरने की जरूरत नई है, तो चुपचाप आकर काकी के बगल में बैठ गई ,,,काकी ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा ,,,,

डॉली बेटा तू स्कूल जाना चाहती है,, डॉली के लिए यह सब से बड़ी खुशी थी,,, उसने झट से हां में सिर हिला दिया,,,,,

राज ने रोटी का टुकड़ा मुंह में डालते हुए पूछा

देख महारानी तू सोच समझकर बता मेरे को अच्छे से

तू स्कूल जाकर अपनी पढ़ाई कर पाएगी ,,,मन लगाकर पड़ेगी,,, देख अपन की इज्जत का सवाल है अगर स्कूल में तुझे भर्ती करवाता हूं ,,तो परीक्षा पास करनी होगी ,,,,,,

राज की इस हिदायत पर डॉली थोड़ी सहम गई ,,,,काकी ने राज को डांटते हुए कहा,,, तू बच्ची से पढ़ाई की पूछ रहा है या उसे डरा रहा है ,,,,अरे कोशिश करेगी तो पास क्यों नहीं होगी ,,,,अगर नहीं भी हुई तो न सही पहले तू उसे स्कूल भेज तो सही ,,,

ठीक है काफी पास में ही जो स्कूल है मैं कल वहां जाकर पता करता हूं,, वैसे भी स्कूल जाएगी पढ़ाई लिखाई करेगी तो ठीक रहेगा इसके लिए दिन भर घर के ही काम करती रहती है, उल्टे सीधे,,,,

इतना कहते हुए राज अपने कमरे में चला गया और काकी खुशी से डॉली को बांहों में भरते हुए उससे स्कूल जाने की बातें करने लगी,, और पूछा डॉली बेटा तेरा मन तो है ना स्कूल जाने का ,,,डॉली ने भी हां में सर हिलाया हां काकी मैं स्कूल जाऊंगी और खूब पढूगी,, स्कूल जाना तो मुझे सबसे अच्छा लगता था ,,पर अब पता नहीं क्यों थोड़ा सा डर लग रहा है मैं ठीक से कर भी पाऊंगी या नहीं ,,,,,

काकी ने उसे फिर समझाया देख बेटा कोशिश करना हमारे हाथ में होता है फल देना तो भगवान के ऊपर छोड़ दे,,,

अरे अगर एक बार फेल हो भी गई तो दूसरी बार पास

हो जाएगी कौन सा तेरी उमर निकल गई है,,,,

काकी और निली ने सामान समेटा रसोई में सफाई की और स्कूल की बातें करते हुए सो गए,,,,,

डॉली को पता था कि आज स्कूल में उसके एडमिशन की बात होने वाली है ,तो वह बहुत ज्यादा खुश थी सुबह सवेरे उठकर जल्दी से काकी के साथ सारे काम करवाएं और तैयार हो गई, जैसे कि वह आज ही स्कूल जाने वाली हो ,सुबह राज भी आज थोड़ा जल्दी उठ गया था, वैसे तो रोज सुबह 900 बजे तक ही उसका उठना होता था पर उसे पता था कि अगर वह स्कूल में लेट पहुंचेगा तो फिर सभी अपने काम में लग जाएंगे और उसकी बात ठीक से मैडम जी से नहीं हो पाएगी,,,

राज ने उठकर ही काकी को कमरे से ही चाय के लिए आवाज लगाई ,काकी शायद पूजा कर रही थी तो डॉली ने जल्दी से चाय बनाई और राज को चाय देने उसके कमरे में चली गई ,अभी तो राज की आंखें भी ठीक से नहीं खुली थी उसने लेटे-लेटे ही चाय का कप हाथ में लिया और कहने लगा,,,

काकी उस महारानी से भी कह दे कि वह तैयार हो जाए मैडम जी सबसे पहले तो उसी से मिलना चाहेंगी और हां उससे कह देना कि वहाँ मुंह लटका कर बैठना नहीं है ,अगर मैडम जी कुछ पूछेंगी तो उस बात का ठीक-ठीक और सही सही जवाब देना है, और उसे जो

भी लिखना पढ़ना आता है,

तो वहां जाकर अच्छी तरह से बता दे,,,

डॉली चुपचाप सुनती रही और जब राज का कहना बन्द हुआ तो वापस रसोई में आ गई ,वह अपने आपको तैयार करने लगी थी उसने तो सोचा ही नहीं था कि स्कूल जाकर उसे यह सब भी करना पड़ेगा ,, जल्दी-जल्दी उसने कुछ कठिन शब्दों की स्पेलिंग लिखी उन्हें याद किया ,और एक पर किताब उठाकर फर्राटे के साथ पड़ने लगी ,अब तक राज भी नहा धोकर तैयार होकर बाहर आ चुका था,, और काकी भी पूजा से निबट गई थी ,,,
 
आज डॉली सलवार सूट पर दुपट्टा डालकर तैयार हुई उसने अपने धुले हुए बालों की पीछे एक चोटी बनाई ,और पैरों में जूतियां पहनी हुई थी ,,,,

जब राज ने उसको इस तरह से तैयार देखा तो उसके हंसी छूट गई ,,,,काकी ने नीले के पास जाते हुए राज को डांट कर कहा कितनी अच्छी लग रही है मेरी डॉली ,क्यों हंस रहा है उसे देखकर ,,,

काकी यह कैसी तैयार हो गई है

किसी कॉलेज में नहीं जाना है इसको ,अरे स्कूल के लिए तैयार हुई है यह सूट और दुपट्टा स्कूल में यह सब नहीं चलेगा जैसी रहती है वैसे ही ठीक है ,,,काकी ने राज की बात को अनसुना किया और डॉली का हाथ पकड़ कर बाहर निकलने लगी और राज को भी पीछे से आवाज दी,,,

कि बात ना बनाते हुए जल्दी चल, हमें देर हो गई तो

आज बात ना हो पाएगी,,,

राज के आने से पहले ही डॉली और काकी जीप में बैठ चुके थे ,,,स्कूल की बात सुनकर डॉली खुशी से फूली नहीं समा रही थी उसके चेहरे की खुशी बता रही थी उसको स्कूल जाना कितना अच्छा लगता है,,,

राज ने जीप स्टार्ट की और बस 10 मिनट में वह स्कूल के सामने थे ,,,,

आसपास के सभी लोग राज को और काकी को अच्छी तरह से जानते थे ,स्कूल की टीचर जी भी काकी को पहचानती थी, जैसे ही स्कूल के अंदर गए और प्रिंसिपल साहिबा से मिलने की बात कही तो तुरंत ही उन्हें अंदर जाने दिया ,,,,स्कूल छोटा ही था पर दसवीं कक्षा तक था और आसपास के छोटे-छोटे गांव के सारे बच्चे इसी स्कूल में पढ़ने आते थे, आठ

बारह, चौदह लोगों का स्टाफ था, एक

प्रिंसिपल,10,11टीचर, और 2 चपरासी इस स्कूल में काम करते थे ,जैसे ही अंदर गए तो प्रिंसिपल साहिबा ने हंसते हुए काकी और राज को अंदर बुला कर बैठने के लिए कहा,,, डॉली को आये हुई अभी कुछ ही महीने हुए थे इस बात की खबर तो प्रिंसिपल साहिवा को लगी थी ,कि कोई लड़की आकर काकी के साथ रहने लगी हैं ,पर कौन है, क्या है, इस बात के बारे में उन्हें ज्यादा कुछ पता नहीं था,,,

काकी ने वहां जाकर प्रिंसीपल साहिबा को डॉली के बारे में सारी बातें बताई और उसकी जो स्कूल आने की इच्छा थी, पढ़ने की इच्छा थी ,उसकी विनती प्रिंसिपल साहिबा से की प्रिंसिपल साहिबा ने इनकी सारी बात बहुत ध्यान से सुनी,,,,, पर असमर्थता जताते हुए कहा सॉरी,,,, आप लोग लेट हो गए हैं हमारे एडमिशन तो जुलाई या अगस्त तक ही चलते हैं ,अब शायद आपको अगले साल ही एडमिशन मिल पाएगा ,यह बात सुनकर डॉली का हंसता हुआ चेहरा उदास हो गया था ,,,वह जितनी खुशी के साथ यहां आई थी एक पल में उतनी ही निराश हो गई, जब काकी ने प्रिंसिपल साहिबा से कहा कि आप कोई तो रास्ता निकाल ले हमारी डॉली का बहुत मन है पढ़ने का ,अगर अगले साल का इंतजार करेंगे तो बहुत सारा समय बर्बाद हो जाएगा ,,,,

अब कुछ सोचते हुए उन्होंने स्कूल के क्लर्क को बुलवाया और उनसे इस बारे में बात की कि क्या कुछ हो पाएगा

हम क्या कर सकते हैं

तब उन्होंने कहा मैडम जी एक रास्ता है हमारे पास अथॉरिटी रहती है कि इस कंडीशन में अगर कोई बच्चा हमारे यहां आता है तो हम किन्हीं भी तीन बच्चों को एडमिशन दे सकते हैं ,जो परीक्षा के 4 महीने पहले तक लागू रहता है, और इस नियम के चलते हम इस बच्ची को एडमिशन दे सकते हैं ,,,पर हां इसके लिए सरपंच के साथ-साथ गांव के किन्हीं भी 5 लोगों के दस्तखत की जरूरत रहती है,,

कागज का फॉर्मेट में बता देता हूं अगर आप कंप्लीट करा कर लाते हैं तो डॉली को एडमिशन मिल सकता है,, पर आप सोच लीजिए आपके पास सिर्फ 4 महीने हैं इनमें पढ़ाई करके अगर पास हो सकती हैं तो मैं आपके लिए एक कोशिश कर सकता हूं,,, यह बात सुनकर डॉली को तो , डूबते को तिनके का सहारा मिला हो, ऐसे लगा था उसने झट से हां कह दी कि वह पूरी कोशिश करेगी ,,,राज ने भी डॉली के चेहरे को देखा कि वह कितनी उत्साहित है,, उसने भी कहा कि ठीक है आप कागज तैयार करवाये, मैं सब के दस्तखत ले आऊंगा,, फिर क्या प्रिंसिपल साहब ने एक टीचर को बुलाया और उनसे डॉली का इंटरव्यू लेने के लिए कहा ,,,

,कि डॉली का इंटरव्यू लेकर देखते हैं कि इसका एडमिशन किस कक्षा के लिए कर सकते हैं,,,, और डॉली उस टीचर के साथ चली गई ,,,लगभग आधे घंटे बैठने के बाद क्लर्क ने आकर राज को कागज बना कर दे दिया ,और उस पर 5 लोगों के दस्तखत कराने के

लिए कहा ,,,,

राज और काकी का व्यवहार तो बहुत अच्छा था ही ,तो कोई बड़ी बात नहीं थी उनके लिए तो सारा गांव ही तैयार रहता था राज दस्तखत करवाने गांव में चला गया,,, और काकी बाहर बैठकर डॉली और राज का इंतजार करने लगी,,,,

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लगभग 1 घंटे बाद डॉली टीचर के साथ जब बाहर आई तो वह काफी खुश दिख रही थी टीचर सीधी प्रिंसिपल के रूम में गई और प्रिंसिपल साहब ,से डॉली और काकी को अंदर बुलाया और कहा ,कि देखिए हमें पूरा भरोसा है कि आपकी डॉली अच्छे से पढ़ पाएगी ,,इसे जो भी आता हो पर इसकी लगन और मेहनत देखकर मैं कह सकती हूं मेरा मतलब मेरे टीचर ने जो बताया कि यह बच्ची परीक्षा पास जरूर कर लेगी,,, बस आपको उसका साथ देना होगा और इसकी लिखावट और इसकी समझ को देखते हुए हम कक्षा आठवीं में इसका एडमिशन कर रहे हैं ,,, और डॉली को अपने पास बुला कर टीचर ने उसकी पीठ ठोकते हुए कहा!! डॉली तुम्हें कर दिखाना है कि तुम कर सकती हो, तुम कल से स्कूल आ सकती हो यह सुनकर तो डॉली आंखों में आंसू ही आ गए थे ,,,खुशी के मारे वह टीचर से कुछ बोल भी नहीं पा रही थी,,, और तभी कुछ ही देर में राज भी वह पेपर लेकर आ चुका था उसने प्रिंसिपल साहिबा को पेपर दिया और उनका शुक्रिया

अदा किया ,,,काम इतनी जल्दी हो जाएगा उनने सोचा भी नहीं था और शायद अब डॉली की किस्मत उसका साथ दे रही थी ,,, अगर वक्त ने उसको रुलाया था ,तो अब शायद उसके साथ सब कुछ अच्छा ही होने वाला था ,डॉली से जब मैडम जी ने उनके माता-पिता का नाम पूछा तो उसने काकी की तरफ देखा,,,,

पर काकी ने डॉली के असली माता पिता का नाम ही वहां बताया ,क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि डॉली की मां जो उसको इतना प्यार करती थी ,,उसकी जगह कोई और ले ,जब डॉली ने बताया था कि उसके पिता पास ही किसी फैक्ट्री में काम करते थे, तो एक दिन राज ने वहां जाकर सारा पता किया और उनके पिता के जो भी कागजात थे,डॉली को साथ ले जाकर सारे निकलवा लिए थे,, जिसमें उनका राशन कार्ड ,आधार कार्ड डॉली का बर्थ सर्टिफिकेट ,सब कुछ था ,

और वह सारे कागज डॉली के पास आ चुके थे ,,,तो बस उसी बेस पर डॉली का एडमिशन आसानी से हो गया ,,, यह सभी जब वापस घर आने लगे तो राज ने , जीप घर की तरफ ना लेकर बाजार की तरफ ले ली और थोड़ी ही देर में जाकर किताबों की दुकान के सामने जीप रोक दी,, जीप से उतरने से पहले ही आवाज लगाई होए,,,, छोटू अपन को आठवीं की कक्षा का एक पूरा सेट दे दे किताबों का,,, राज तो पहले से सभी को जानता था ,,,तो उसकी तो एक आवाज पर ही उसका काम हो जाता था,,

दुकान वाला हंसा और बोला क्यों राज भैया स्कूल

जाने का इरादा कर लिया है क्या आपने ,,,,,

राज ने गाड़ी की चाबी निकाली और उंगली में चाबी को घुमाता हुआ दुकान पर खड़ा हो गया ,,,अभी तक डॉली काकी के साथ जीप

में ही बैठी हुई थी,,,,

राज ने आवाज लगाई ओओ महारानी तू वही बैठी रहेगी, कि अपनी किताबों और कॉपियों को लेने यहां आएगी ,,,

देखता हूं तू इन किताबों को उठा भी पाती है कि नहीं ,,,,

डॉली जल्दी से जीप से उतरी और दुकान पर जाकर राज के बगल में खड़ी हो गई ,,दुकान वाले ने जब कक्षा आठवीं की नई नई किताबें निकालना शुरू की तो वह एकटक उनको देखे जा रही थी ,,,जैसे सालों से बिछड़ी हुई कोई चीज उसके आगे सामने आकर खड़ी हो गई हो ,,,, किताब को छू कर देख रही थी जब दुकान वाले ने सारी किताबें निकाल दी और फिर राज की तरफ देखते हुए बोला भैया जी कॉपियां भी देनी है क्या

इसके साथ राज ने उसे आंखे दिखाते हुए कहा !!! अबे साले अपन को क्या पता कि क्या क्या आता है उसके साथ ! जो भी आता है बस सब डाल दे फटाफट ,अपुन कभी स्कूल गया है क्या जो उसके बारे में कुछ पता होगा,,,,,

पास खड़ी डॉली को भी डांटते हुए बोला महारानी तू भी अपना मुह खुलेगी कि नहीं अरे तू तो पहले भी

स्कूल गई है, कुछ तो जानती होगी कि क्या-क्या लगता है,,

कि अपुन की इज्जत का कचरा करवाएगी सबके सामने !!!!

अब डॉली ने कहना शुरू किया ,भैया जी!!

कॉपियां निकाल दीजिए ,पेंसिल भी दे देना और हां कॉपियों पर चढ़ाने के लिए कबर और टेप भी दे देना ,और कलर भी दे देना!!!

दुकानदार ने डॉली से कहा तुम्हारी पढ़ाई का तो सारा सामान हो गया है ,पर स्कूल में एक्स्ट्रा एक्टिविटीज भी चलती है जिसके लिए ड्राइंग बुक और कलर भी रहते हैं अगर आप कहो तो आपको अच्छे से आयल पेंट कलर और ब्रश भी निकाल दूँ,,,, डॉली ने धीरे से कहा नहीं भैया जी रहने दीजिए बहुत महंगे होते हैं वह कलर,,,,मेरा सारा सामान हो चुका है ,तब दुकान वाले ने हंसते हुये ,,,, राज की तरफ देखा और कहा ,,,,

अरे जब राज भैया आपके साथ हैं तो आपको सस्ते और महंगे सोचने की क्या जरूरत ,,,और डॉली को अच्छी सी ड्राइंग बुक ,ब्रश और सारे पेंट कलर दे दिए,, जब सारा सामान पैक हो गया, तो राज ने पूछा कि सारा सामान हो गया की अब चलें कुछ और भी लेना है,,, डॉली ने सिर झुकाते हुए हां में जवाब दिया सब कुछ हो गया ,,,

राज फिर अपना सिर खुजलाता हुआ डॉली से बोला,,, महारानी तुझे कुछ याद भी रहता है कि नहीं

अरे सारी किताबों को स्कूल सर पर लेकर जाएगी क्या

उसके लिए बैग भी तो चाहिए और हां क्या यह सलवार सूट दुपट्टा पहन के स्कूल जाएगी मैडम जी ने स्कूल ड्रेस के लिए भी बोला था तो वह भी सामने दुकान पर ही मिल जाएगी,, तीनों सामने की दुकान पर गए जहां वाइट सर्ट, ब्लू स्कर्ट ,जूते और साथ ही लंच बॉक्स और बोतल ,,, सारा सामान पैक करवा लिया ,,,और जीप में रखकर तीनों घर की तरफ आ गए ,,,,
 
,डॉली के लिए यह दिन किसी सपने से कम नहीं था,, उसने सोचा भी नहीं था कि वह स्कूल जाएगी और वह भी नई नई किताबें और नई ड्रेस पहनकर,,, आज से 8 साल पहले ही उससे ऐ सब कुछ छीन लिया गया था ,,और जब दोबारा उसका मुहूर्त आया तो बहुत लंबा वक्त बीत चुका था पर आज वह बहुत खुश थी ,,सारा काम करके तीनों शाम तक ही घर वापस आ पाए थे ,,,,आकर हल्का सा अंधेरा होने लगा था आते ही राज ढाबे पर निकल गया और काकी दिया बत्ती करने लगी,,,,

डॉली ने अपनी सारी कॉपी किताबें खोली और उन पर कवर चढ़ाने लगी,,,

† //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svgडॉली के स्कूल का पहला दिन //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f490.svg

डॉली को रात भर स्कूल जाने की खुशी में नींद ही नहीं आई थी,वह उठकर धीरे से लाइट जलाटी और अपनी कॉपी किताबों को अच्छी तरह से निहार लेती , और लाइट बंद करके फिर सोने की कोशिश करती लेकिन उसकी आंखों में नींद का नाम नहीं था, पूरी रात ऐसे ही निकल गई डॉली को सुबह 800 बजे स्कूल के लिए निकलना था वह सुबह 500 बजे ही उठ गई जल्दी से नहा धोकर नाश्ता बनाने लगी, तभी काकी भी उठकर डॉली के पास आ गई ,वैसे तो काकी को डॉली को देखकर कर बहुत खुशी हो रही थी कि वह स्कूल जाने के लिए काफी उत्साहित है ,पर प्यार से एक हल्की सी झिड़की लगाते हुए कहा ! तुझे क्या जरूरत थी इतनी जल्दी उठकर नाश्ता बनाने की अरे आज तेरे स्कूल का पहला दिन है ,तेरे लिए मैं अच्छा सा नाश्ता बनाऊंगी, जब देखा तो आलू उबल चुके थे ,और आटा भी गूंथ दिया था, आटे की परात अपनी तरफ खींचते हुए काकी ने डॉली से कहा ,,,तू अपनी कॉपी किताबें अच्छे से जमा ले ,जब तक मैं तेरे लिए गरम-गरम आलू के पराठे

सेकती हूं तेरा डब्बा भी लगा दूंगी, और हां तेरे लिए हलवा भी बना देती हूं आज तेरे स्कूल का पहला दिन है तो कुछ मीठा खा कर जाना,, फिर हलुआ राज को भी बहुत पसंद है तो वह भी खा लेगा ,,, डॉली ने जल्दी से एक तरफ चाय चढ़ा दी ,और हरा धनिया टमाटर की चटनी भी बना कर रख दी थी ,जिससे काकी को ज्यादा काम ना पड़े, उसके बाद काकी गरम-गरम आलू के पराठे सेकने लगी,, और डॉली जाकर स्कूल के लिए तैयार होने लगी पहला दिन था तो उसके मन में जितना उत्साह था उतना डर भी था, कि कहीं कोई चीज छूट न जाए उससे,, कोई गलती ना हो जाए ,, डॉली तैयार हुई उसने अपनी नई स्कूल ड्रेस पहनी रिबन से दो चोटियां बनाई और बैग में सारी कॉपी किताबों को सजाकर करीने से रखा ,,अब तक काकी उसके लिए एक प्लेट में गर्म चाय और पराठे के साथ चटनी ले आई थी,, डॉली देखते ही कहने लगी का कितना सारा ,मैं नहीं आ पाऊंगी,, काकी ने भी डांटते हुए कहा चुपचाप खा ले वहां पता नहीं कितनी देर में तुझे खाने को मिलेगा ,पता चला भूख से तेरा मन पढ़ाई में ही नहीं लग रहा ,,जैसे ही डॉली ने पराठे का पहला कौर तोड़ा कि पीछे से राज भी आ गया, उसने एक उड़ती सी निगाह से डॉली को देखा और बोला ,,,,

देख महारानी तेरे स्कूल का पहला दिन है और तेरे चक्कर में अपुन को भी रात भर साला नींद नहीं आई ,,सुबह ही उठ गया हूं अब तू स्कूल जा रही है ,,,,,

तो ठीक से पढ़ाई करने का, अपुन की इज्जत का फालूदा मत बना देना , जाकर पूरा मन लगाकर पढ़ाई करना और पास हो कर दिखाना,,, जिससे अपन भी छाती चौड़ी करके वो तेरे स्कूल मास्टर के सामने जा सके और हां अपुन को स्कूल के मामले में लेटलतीफी बिल्कुल पसंद नहीं है,,,

देख मैं रोज बस्ती में सब्जी लेने तो जाता ही हूं रास्ते में ही तेरा स्कूल पड़ता है, तो तुझे छोड़ दिया करूंगा, बस तू सुबह टाइम पर अपुन को बाहर खड़ी मिलाकर,,,

डॉली राज की बात सुनते हुए सिर नीचा करके चुपचाप पराठे का कौर निगलती जा रही थी ,,,क्योंकि राज के सामने तो उसकी बोलती वैसे भी बंद हो जाती थी, और वह जब भी कोई लेक्चर देता, तब तो जैसे डॉली की जान हलक में ही अटक जाती थी,, उसने काकी का दिया हुआ एक पराठा खत्म किया , जल्दी-जल्दी प्लेट से चाय पीकर अपना खाने का डिब्बा बैग में रखा और जाकर कान्हा जी के सामने हाथ जोड़कर कुछ कहने लगी, आते-आते एक बार फिर लड्डू गोपाल के सामने सिर झुकाया और जल्दी से बाहर आ गई ,

यह देखकर राज बोलने लगा ओ ,,,,सहजादी अपुन ने तेरे कान्हा जी का एडमिशन नहीं करवाया है स्कूल में ,तो खाली तेरे ही जाने का है , उनसे जो भी बात हो बाद में आकर कर लेना बता देना उनको बराबर के

स्कूल में क्या हुआ है ,,,,,काकी डॉली को छोड़ने बाहर तक आई थी और जब डॉली गाड़ी में बैठी तो काकी ने प्यार से उसका माथा चूमा और उसके भविष्य के लिए उसे शुभकामनाएं दी, साथ ही राज को एक हल्की सी फटकार भी लगाई खबरदार जो रास्ते में डॉली को तूने डांटा ,अरे वह स्कूल जा रही है 2 शब्द प्यार से भी बोल दिया कर ,,,राज ने चुपचाप गाड़ी स्टार्ट की और स्कूल की तरफ बढ़ा दी गाड़ी स्कूल के बाहर पहुंच चुकी थी,, डॉली गाड़ी से उतरी और राज के सामने खड़ी हो होकर उसकी तरफ देखने लगे लगी, कि शायद वह उससे कुछ कहे ,,, राज ने गाड़ी बंद की और डॉली की तरफ देख कर कहा देख तुझे किसी से स्कूल में डरने की जरूरत नहीं है ,अगर तुझसे कोई भी कुछ भी कहता है तो बिंदास अपुन को आकर बता ,,,,बस तू पढ़ाई में अपना मन लगा ,,,,,

अब जा ,,,,,,जैसे ही डॉली जाने लगी तो राज ने फिर उसे आबाज़ दी,,,

महारानी सुन !!!!!!!डॉली जैसे ही पलटी तो राज उससे बोला ,,,जब वह कुछ अच्छा काम करते हैं ना ,तो कहते हैं ना,,

कि बेस्ट ऑफ लक

तो वह अपन तेरे से भी बोलता है की बेस्ट ऑफ लक ,,राज ने अपने सिर में खुजली करते हुए हंसकर डॉली से कहा ,,

डॉली ने भी राज को थैंक्यू बोला और स्कूल के अंदर चली गई ,,
 
डॉली जब स्कूल के अंदर पहुंची तो बच्चे स्कूल में आते ही जा रहे थे स्कूल में प्रेयर का टाइम 900 से 915 तक रहता था उसके बाद क्लास लगना शुरू होती थी ,डॉली आज टाइम से पहले ही स्कूल पहुंच गई थी और शायद यह उसके लिए अच्छा भी था, डॉली ने वहां कुछ बच्चों से पूछा की कक्षा आठवीं किस तरफ है जैसे ही बच्चों ने सुना कि डॉली कक्षा आठवीं के लिए आई है तो हंसना शुरू कर दिया,, डॉली कुछ आगे बढ़ गई फिर उसने दूसरे बच्चे से पूछा उसने भी कुछ ऐसा ही किया तभी एक मैडम पास से गुजरी और उन्होंने डॉली की स्थिति को समझते हुए बच्चे को डांटा और डॉली को कक्षा आठवीं की तरफ इशारा किया ,बेटा वहां पर क्लास है आप उसमें

जाकर बैठो,,,

डॉली कक्षा की तरफ बढ़ते हुए अंदर जा चुकी थी ,और जब कक्षा में जाकर देखा तो सभी बच्चे डॉली से छोटे थे, जैसे ही क्लास में गई एक बार तो सभी बच्चे ठहाका लगाकर जोर से हंस पड़े ,तभी मैडम जी क्लास में आ गई और बच्चों को डांटते हुए चुपचाप बैठने के लिए कहा ,,उसके बाद डॉली का सबसे परिचय करवाया ,डॉली ने मुस्कुराते हुए सबको अपना नाम बताया और बच्चों से दोस्ती करने की इच्छा जाहिर की उसके बाद सभी प्रेयर की लाइन लगाने लगे डॉली क्लास में सबसे बड़ी दिख रही थी तो उसको सबसे पीछे लगाया गया ,,धीरे-धीरे बच्चों की लाइन ग्राउंड में आने लगीं,

प्रेयर खत्म हुई और बच्चे वापस लाइन लगाकर अपनी

क्लास में चले गए,,,

टीचर ने सबसे पहले सभी बच्चों के नाम बोलकर उनकी अटेंडेंस ली और फिर सबसे पहले हिंदी पढ़ाना शुरू किया ,क्लास टीचर एक-एक करके 5 बच्चों को खड़ा कर चुकी थी ,टीचर ने डॉली की तरफ देखा जब उन्हें लगा ,कि वह भी किताब पढ़ना चाहती है तो उन्होंने सीधे डॉली से ना कह कर बच्चों की राय जानी चाही,,,

क्या आप में से कोई किताब की रीडिंग करना चाहता है

डरते डरते डॉली ने धीरे से हाथों ऊपर किया हालांकि प्रिंसिपल मैडम पहले ही सभी टीचर्स को बता चुकी थी कि डॉली को किस कंडीशन में एडमिशन दिया जा रहा है तो यह हमारी जिम्मेदारी बनती है कि उसको सपोर्ट करें और उस को आगे बढ़ाएं ,, वैसे भी राज का व्यवहार काफी अच्छा था सभी से तो यही सोचते हुए टीचर ने डॉली को किताब पढ़ने का मौका दिया ,,,हालांकि हिंदी तो डॉली को काफी अच्छी तरह से आती थी वह खड़ी हुई और साफ और शुद्ध शब्दों के साथ पूरा पाठ पढ़कर बच्चों के सामने सुना दिया क्लास के सभी बच्चे किताब बहुत अच्छे से पढ़ना जानते थे,, पर नीले की कंडीशन इन सब से कुछ अलग थी तो टीचर ने जाकर डॉली कि पीठ थपथपा कर उसका हौसला भी बढ़ाया ,और डॉली को आगे बढ़ाने के लिए इतना काफी था ,उसके बाद फिर विज्ञान ,गड़ित और एक एक करके सारे सब्जेक्ट के

पीरियड लगाए गए,, डॉली को कुछ चीजें समझ में आई तो कुछ उसके ऊपर से भी निकल चुकी थी,, पर हां इतना जरूर था कि पूरे दिन में 1 मिनट के लिए भी उसकी कोशिश कम नहीं हुई थी ,,टीचर का लेक्चर हो चाहे बोर्ड पर लिखी हुई कोई बात हो डॉली ने सभी बातों को बहुत ध्यान से सुना और समझा था,, दोपहर का एक बज चुका था,और बस छुट्टी होने ही वाली थी जैसे ही घंटी बजी बच्चे बैग लेकर दौड़ते हुए क्लास से बाहर जाने लगे ,डॉली ने भी अपना बैग लगाया और धीरे धीरे चलती हुई बाहर आ गई ,,,जहां उसे राज की जीप खड़ी हुई दिखी , राज आसपास नहीं दिख रहा था ,

पर उसने जब नजर घुमाई तो राज स्कूल के अंदर जाता हुआ दिखा, वह शायद डॉली को लेने ही जा रहा था ,,और डॉली जाकर जीप के पास खड़ी हो गई ,,,, पर शायद मैडम जी ने अंदर से ही देख लिया था कि राज डॉली को लेने आ गया है, तो डॉली को स्कूल से बाहर जाने की परमिशन दे दी थी, हां यह टीचर की ही रिस्पांसिबिलिटी रहती थी कि जब तक बच्चों के अभिभावक उन्हें लेने ना आए या उनकी तरफ से कोई सूचना ना दी गई हो बच्चों को स्कूल से बाहर नहीं निकाला जाता था, गाड़ी में पीछे सामान भरा हुआ था,तो डॉली राज के बगल में आगे वाली सीट पर ही बैठ गई बैग को कंधे से उतारते हुए अपनी गोदी में रखा और बोतल से पानी पीने लगी,, राज ने गाड़ी

स्टार्ट करके आगे बढ़ाई और डॉली से पूछा !

महारानी कैसा लगा तेरे को स्कूल में

डॉली जब स्कूल से आकर राज की जीप में बैठी और राज ने घर जाने के लिए जीप स्टार्ट की तो रास्ते में डॉली से पूछा

महारानी कैसा लगा तुझे स्कूल में ,डॉली कुछ देर चुप रही उसे तो राज की किसी भी बात का जवाब देने में वैसे ही डर लगता था और आज तो वह वैसे ही थोड़ी घबराई हुई थी ,उसे खुद ठीक से समझ में नहीं आ रहा था कि उसका यह दिन कैसा रहा इसको वह अच्छा कहे या बुरा, फिर उसे डर था कि वह राज से कुछ भी कहेगी पर उसे डांट जरूर पड़ने वाली है,,

स्टेरिंग पर हाथ रखते हुए राज ने दोबारा डॉली की तरफ देखकर पूछा, तू अपुन के सामने गूंगी क्यों बन जाती है , जो पूछ रहा हूं उसका सीधा सीधा जवाब क्यों नहीं देती, तेरे को स्कूल में कोई प्रॉब्लम तो नहीं हुई ना मेरा मतलब ,किसी तरह की कोई परेशानी तूने पढ़ाई वढ़ाई तो कि स्कूल में,,,

या फिर साला अपनी इज्जत का कचरा करने के वास्ते इतनी उठापटक करवाई,, डॉली कुछ जवाब देती इससे पहले ही वह दोनों घर पहुंच चुके थे ,डॉली ने नीचे उतरने के लिए जब गेट खोलना चाहा तो वह कहीं

अटक गया था ,वह बार-बार गेट खोलने की कोशिश करने लगी, जब राज ने देखा कि डॉली से गेट भी नहीं खोला जा रहा है ,,तो दूसरी तरफ आकर गेट खोला और डॉली के उतरने के बाद उसमें से बैग बोतल निकालकर डॉली को पकड़ा दिए,, जल्दी से गाड़ी की चाबी निकाली और भागता हुआ डॉली से पहले ही अंदर पहुंच गया ,अंदर जाते साथ ही काकी को जोर से आवाज लगाई ,काकी ,काकी ,,,,,
 
काकी कुछ काम करते हुए बाहर निकली राज के पीछे हुई खड़ी हुई डॉली को उन्होंने देखा और जाकर जल्दी से डॉली का बैग उतार कर पास में रखी हुई टेबल पर रखा और प्यार से पुचकारते हुए उससे पूछने लगी,,,

डॉली बेटा कैसा रहा तेरे स्कूल का पहला दिन ,,,,राज ने पानी का ग्लास भरा और गटागट पीते हुए डॉली और काकी को देखे जा रहा था ,,की काकी के पूछने पर डॉली क्या जवाब देती है ,,पर जब तक राज उसके सामने था ,उसके मुंह से शब्द नहीं निकल रहे थे ,,,काकी ने दोबारा पूछा तो डॉली ने कहा! अच्छा ही था!!!!!

राज पानी पीते पीते अचानक रुक गया और ग्लास रखकर काकी के पास आकर डॉली की तरफ देखते हुए बोला काकी तू महारानी के कहने का मतलब समझ गई है ना ,अच्छा ही था ,मतलब जरूर कुछ लफड़ा करके आई है स्कूल में ,,अरे अच्छा ही था क्या मतलब होता है,,,

या तो अच्छा था ,या बुरा ,,,,

अब मेरे को सीधा सीधा बता दे के स्कूल में हुआ क्या है ,,,,

तभी अपूण सोच रहा था कि अपन को कायको कुछ बताया नहीं ,, सीधा गाड़ी में बैठी और गाड़ी के रुकते ही बैग उठाकर अंदर चली आई ,,,, काकी ने फिर राज को डांट लगाई ,,,राज तू उसे सांस भी लेने देगा कि वह कुछ बताए ,,,

डॉली ने बैग बोतल नीचे रखा, जूते उतारकर बाहर रखें ,और फिर काकी के पास आकर बैठते हुए बोली काकी ठीक था,,, का मतलब कि अच्छा रहा ,,मैं स्कूल गई ,बच्चों से मिली मैडम जी से मिली,,, मैडम जी ने बच्चों से मेरी जान पहचान भी करवाई ,,और हां वहां पर हर विषय की पढ़ाई अलग-अलग मैडम अलग-अलग समय पर करवाती है, तो वह भी की ,,और हिंदी की किताब भी मैडम जी ने मुझसे पढ़ने के लिए बोला था जो मैंने फटाफट बहुत अच्छे से पढ दी,,,,

हाय मेरी बच्ची मैं जानती थी कि तू अच्छा ही करेगी ! काकी ने डॉली के का माथा चूमते हुए नीले से कहा ,,पर मेरी बच्ची जब सब कुछ अच्छा रहा तो तू ऐसे उदास क्यों लग रही है ,,,

काकी बस एक ही बात मुझे परेशान कर रही है कि मैं अपनी क्लास में सबसे बड़ी लगती हूं ,और इसलिए बच्चे मुझ पर हँसते है,,,,,,

काकी ने बड़े प्यार से डॉली को समझाया बेटा यह तो

बहुत छोटी मोटी बात है, आगे बढ़ने के लिए हमें क्या-क्या नहीं देखना पड़ता ,हमें लोगों के सामने शर्मिंदा होना पड़ता है ,लोगों की बातें सुनना पड़ती है ,बातों को सहन करना भी सीखना पड़ता है ,,,जब राज ने देखा कि काकी और डॉली स्कूल की बातों में व्यस्त हो गई है और स्कूल का दिन अच्छा ही रहा ,तो वह निश्चिंत होकर ढाबे पर निकल गया ,,,

काकी ने समझाया ,,,देख डॉली अगर तू सिर्फ इतनी सी बात से उदास हो जाएगी तो आगे कुछ भी नहीं कर पाएगी,,,,

डॉली अभी तक मैंने तुझे राज के बारे में कुछ भी नहीं बताया, क्योंकि कभी कुछ कहने का मौका ही नहीं पड़ा, बेटा तू जानती है जब राज मुझे मिला था पूरे 5 साल का था ,और उस वक्त मेरे ब्याह को भी 10 बरस बीत गए थे मैं 30 साल की हो चुकी थी इन 30 सालों में ना मैंने पति का सुख देखा था, और ना ही भगवान ने मुझे औलाद का सुख दिया था ,दारु पीने की वजह से मेरे आदमी के दोनों फेफड़े खराब हो गए जब मैं 30 साल की थी तभी वह इस दुनिया को छोड़ कर चला गया ,मेरे घर में सास ससुर और जेठ थे घर में थोड़ी सी खेती बाड़ी और एक बड़ा सा मकान भी था ,,पर उन लोगों को लगा कि अगर मैं इस घर में रुक गई तो मुझे जमीन जायदाद में हिस्सा देना पड़ेगा इसलिए मुझ पर झूठे लांछन लगाकर मुझसे बदचलन कहके मुझे अपने घर से निकाल दिया ,,,मेरे मां-बाप बचपन में में चले गए थे रिश्तेदार कौन है कहा है ,मुझे खुद ना पता था ,जब

ससुराल से निकाली गई तो ना मेरे सर पर छात थी , ना पहनने को दूसरे कपड़े थे ,उसी रात जब मैं किसी का सहारा पाने के लिए भटक रही थी ,,तो रोता हुआ राज भी मुझे बीच सड़क पर ही मिल गया ,पहली बार में ही उसने मुझे काकी कह के पुकारा यह शब्द अपने जीवन में शायद मैं पहली बार सुन रही थी,,, पूरी रात हम दोनों यहां से वहां घूमते रहे भूखे प्यासे कि कुछ खाने को मिल जाए पर एक निवाला भी ना मिला,, जब सुबह ही तो एक मंदिर के द्वारे जाकर बैठ गए, पेट भर गया और कुछ पैसे भी मिले लेकिन सिवा ऐसा ना था,, उस वक्त तो उसने खाना खा लिया क्योंकि वह भूखा था पर उसे पैसे लेना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा ,आखिरकार मंदिर के बाहर ही रहकर हमने पूरा एक महीना बिताया अब राज का और मेरा पक्का साथ हो चुका था ,हम दोनों एक दूसरे का सहारा बन चुके थे ,राज को इस तरह से मंदिर के बाहर भीख मांग कर गुजारा करना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था ,,,धीरे-धीरे उसने एक ढाबे पर काम करना शुरू कर दिया जहां हम दोनों को दोनों टाइम का खाना और रोज कुछ पैसे भी मिल जाते थे ,रात होती तो ढाबे के अंदर ही दोनों सो जाते,, ढाबा मालिक के यहाँ में और राज कुछ ज्यादा काम भी कर देते थे तो ने हमारे वहां रहने से कोई परेशानी ना थी, जब ग्राहक आते तो राज अपनी मीठी मीठी बातों से सबका मन बहलाता और चाय पानी दे दिया करता था मैं ,ढावे की साफ-सफाई सब्जी काटना ,और खाने बनाने में मदद करवाना ,यह सब काम देख लेती थी
 
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