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Romance शादी का मन्त्र

ऐसी ही एक दोपहर अपने कमरे में एक किताब में सर झुकाये पढ़ते में ऐसी तीव्र पीड़ा उठी की कराह के रह गया,बड़े भैय्या परेशान से उसे लिये डॉक्टर के पास भागे

भागे गये थे।।

सी टी स्कैन,एम आर आई और भी जाने कितनी जांचे हुई थी,और डॉक्टर साहब की बात ने घर भर को कितना डरा दिया था__सर्वाइकल में ब्लैक पैच दिख रहे हैं,या तो टी बी हो सकता है या फिर . कैन्सर .

अम्मा तो सुनते ही महामृत्युन्जय जाप मे बैठ गयी थी,दादी का रो रो के बुरा हाल था,भैया रात दिन एक कर मुम्बई के सबसे बड़े अस्पताल का अपोइंटमेंट जुगाड लिये थे .

कैसा बुरा समय था,जैसे हर तरफ सिर्फ और सिर्फ अन्धेरा ही अन्धेरा छा गया था।।

उस समय भी एक मन कहता था कि काश प्रिया वापस आ जाये पर दूसरा मन कहता कि अच्छा ही हुआ जो वो पहले ही चली गयी क्योंकि अगर जिंदगी इतनी छोटी ही थी तो उसके साथ गुजारने के बाद उसे छोड़ कर मरना भी कहाँ आसान होता।।

ऐसे ही बुरे वक्त में तो लोगों की पहचान होती है, कोई ऐसा दोस्त नही बचा था,जो गले लग के ना रोया हो,वो तो बड़े भैया ने डपट के रोक दिया था वरना प्रेम प्रिंस के साथ साथ लगभग मोहल्ले के 40 लड़के खड़े थे मुम्बई तक साथ जाने के लिये।।

इतना सब होने पर भी क्या प्रिया के घर वालों को कोई खबर नही पहुंची थी,और अगर पहुंची भी तो क्या वो लोग इतने निर्दयी थे कि उसे कुछ बताया तक नही!! और अगर इस सब के बाद उन लोगों ने उसे सब बता दिया तो फिर वो ,

इतनी निष्ठुर कैसे हो गयी।।

तीन दिन की लगातार एक के पीछे एक हो रही जांचों ने कितना थका दिया था उसे,पर बड़े भैय्या किसी पहाड़ की तरह अडिग उसे संभाले खड़े रहे थे, हर जांच की रिपोर्ट के लिये एक जगह से दूसरी जगह भागते भैया का खुद का वजन एक हफ्ते में गिर गया था,पर उनके चेहरे पे उसने कोई खीज कोई झुन्झलाहट नही देखी थी।।

कहीं जांच में कैन्सर आ गया तो इस बात से वो खुद कांप रहा था पर भैया का चेहरा आत्मविश्वास से दमक रहा था जैसे उसे बार बार आंखो ही आंखो मे दिलासा दे रहे हों__" छोटे तुझे कुछ नही होने दूंगा, यमराज की गोद से भी तुझे संजीवनी चखा के खींच लाऊँगा।।"

आखिर भैया के विश्वास की ही जीत हुई,रिपोर्ट्स में बोन टी बी ही निकला।।घर के लोगों ने राहत की सांस ली .

डॉक्टर की छै महीने की दवा के साथ ही अम्मा जाने कहाँ कहाँ के मन्नत के धागे भभूत क्या क्या नही ले आयी।।

ऐसा लगने लगा था घर का बेटा नही पूरा घर बीमार है।।

सभी की साधना सफल हुई,छै महीने की दवा के बाद एक बार फिर सारी जांच हुई और सब कुछ सामान्य आ गया।।

पर इस पूरे समय अन्तराल में क्या कोई भी एक दिन एक क्षण ऐसा गया जब उसने प्रिया को याद ना किया हो,,घर वालों के अपार प्रेम के सामने वैसे प्रिया का कोई मह्त्व नही बचता था पर पागल मन को ये छोटी सी बात सम्झानी बड़ी मुश्किल थी,वो तो अपने पर ही अड़ा था।।

पढ़ाई और किताबों में उसे दिन रात घुसे देख युवराज भैया ने ही बैंक की तैयारी को कहा और फॉर्म भी भर डाला ।।

पता नही प्रिया के जाने के बाद ऐसा क्या हुआ जो वो जब कभी कोई भी इम्तहान देने बैठता ऐसा लगता जैसे प्रिया का साया उसके ऊपर सवार है, पेपर हाथ में आते ही प्रिया की आत्मा जैसे उसके अन्दर समा जाती और वो सारे प्रश्न बड़ी आसानी से हल कर जाता,पूरे आत्मविश्वास के साथ।।

ये आत्मविश्वास असल मे प्रिया का नही उसका खुद का था,उसके प्रेम का था।।

उसे खुद को भी नही पता था की अपने आप को रात दिन किताबों में डूबा कर उसने अपने लिये प्रतियोगी परीक्षाओं को कितना आसान कर लिया था।

ग्रेड बी निकालने के बाद उसे युवराज भैया से उसके मह्त्व का पता चला था।।

अपनी बिमारी से उठने के बाद उसने कभी प्रिया के बारे मे पता करने की ज़रूरत नही समझी थी,।।

बस उसे इतना ही पता था की वो महाराष्ट्र मे कहीं रहती है।।

पुणे के लिये निकलते समय उसे भैया ने एक बार याद भी दिलाया था__ " राज तुम्हारी बिमारी के समय सिद्धिविनायक मन्दिर में नारियल रख आये थे हम कि अब ,

जब भी इधर आयेंगे उनके दर्शन को ज़रूर जायेंगे,अब जब पुणे तक जा ही रहे हो तो एक बार मुम्बई जाकर गणपति बप्पा को धन्यवाद भी बोलते आना।।"

भैया की बात पहले भी उसके लिये पत्थर की लकीर थी पर अब जैसे उन्होनें उसे अपने बेटे की तरह संभाला था उनकी किसी बात को काटने का सवाल ही नही उठता था।।

वैसे भी 5 दिन की कार्यशाला में दो दिन ऑडिट और तीन दिन ट्रेनिंग के थे,उसके बाद अगले दिन मुम्बई मे दर्शन कर वही से लौटने के लिये फ्लाईट की टिकट उसने करा रखी थी।।

आज सिद्धार्थ के मुहँ से उसके और प्रिया के रिश्ते के बारे में सुन अनजाने ही उसे अपने बीते साल याद हो आये थे ।।

भले ही प्रिया उसे छोड़ कर बहुत आगे बढ़ गयी थी पर क्या आज भी वो वहीं उसी मोड़ पर खड़ा उसका इन्तजार नही कर रहा था।।

ये साथ गुज़ारे हुए लम्हात की दौलत

जज़्बात की दौलत ये ख़यालात की दौलत

कुछ पास न हो पास ये सौगात तो होगी बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी .

यही गाना तो था जो जब कभी रेडियो पर बजता झट अम्मा आकर बन्द कर दिया करती थी,जैसे इस गाने को बन्द कर ,

देने से राज उन सभी लम्हों से बाहर निकल आयेगा।।

खैर उसके नौकरी में आते ही घर वालों को लगने लगा था कि वो सामान्य होने लगा है .

उनका सोचना किसी हद तक सही भी था,वो सामान्य हो चला था ऐसा तो उसे खुद को तब तक लगता रहा जब तक उसने प्रिया को देखा नही था।

पहले दिन जब वो दरवाजा खोल के अन्दर आकर खड़ी हुई,उसे देखने के बाद क्या चाह कर भी वो उससे नजरें हटा पा रहा था .

उसे देखते ही सारी रंजिशे कैसे छू मंतर हो चली थी,अपना खुद का हृदय भी अदृश्य रूप से उसीके चरणों में जा बैठा था,,कितनी प्यारी लग रही थी और उतनी ही मासूम!! उसे देख लगा ही नही कि राज की कोई भी तकलीफ उसे पता थी,क्योंकि अगर उसकी एक भी तकलीफ का पता प्रिया को होता तो वो कभी उसे छोड़ कर नही जाती ।।

लंच में उसे दूर अपने दोस्तों के साथ बैठा देख कैसे मन मसोस के रह गया था,कैसी जलन सी उठ रही थी हृदय मे,लग रहा था एक बार गले से लगा लूँ तो सारी जलन दूर हो जाये,ठन्डक पड़ जाये कलेजे में ।।

पर हाय रे मन . होता भले अपना है पर सोचता दुनिया के बारे मे है।।

अगर मैंने ऐसा किया तो लोग क्या सोचेंगे ,दुनिया क्या सोचेगी ।।और हम रह जाते हैं अपने विचारों के साथ ,

अकेले,एक शून्य में!!

जिस शून्य से हमें उबारने उसी दुनिया से कोई नही आता जिसके बारे में सोच कर हम अकेले पड़ जाते हैं।
 
सिद्धार्थ के जाते ही नायर सर से बात कर उसने प्रिया का नाम भी लिस्ट में जोड़ दिया।।

ट्रेनिंग शुरु हुई,,नारायण सर के लेक्चर के बाद उसे ही वैश्विक अर्थव्यवस्था और मुद्रा के स्थिरीकरण के बारे में बोलना था।।

बोलना शुरु करने के पहले उसने अपनी वॉलेट में एक बार झांक के उसमें लगी तस्वीर को देखा और राज से वापस आर के बन अपनी स्पीच बोलने में लग गया।।

लगातार 3 घन्टे बोलने के बाद वो वापस अपनी सीट पर आ गया,लंच के बाद के सेशन में लोग अपनी क़्वेरीस पूछने वाले थे।।

लंच में कैन्टीन में माला और राहुल के साथ बैठी प्रिया की निगाहें दरवाजे पर ही टिकी थी कि कब राज आयेगा,,,उसकी टीम के सद्स्य एक एक कर आते गये,पर वो नही आया क्रमश

"मल्टीनेशनल बैन्क्स की तर्ज पर खालिस देसी बैंक भी अपने कर्मचारियों को इस तरह की पार्टी और आयोजन का झुनझुना पकड़ा कर अत्यधिक परिश्रम कार्य से होने वाली मानसिक और शारीरिक थकान को दूर करने का सरल उपाय सिखाने की आड़ में उन पर क्षमता से अधिक कार्य थोप रहे हैं," उस विषय पर प्रस्तावित अन्तिम दिन की कार्यशाला में सारे आयोजन उसी हिसाब से रखे गये थे।।

पांचवे दिन के ट्रेनिंग सेशन के अंत में सभी की डिनर की व्यवस्था पास के ही एक फाईव स्टार होटल में की गयी थी,हल्की फुल्की साज सज्जा के साथ ही बैंक कर्मियों में से कुछ एक द्वारा गीत संगीत पेश करने की भी तैयारी थी,इसके अलावा सवेरे के विषय को अनुपूरक करने कुछ एक छोटे मोटे सहभागिता गेम्स का भी आयोजन किया गया था।।

ये पार्टी पूरी तरह से पारिवारिक थी जिसमे कर्मचारी चाहें तो अपने परिवार को भी लेकर आ सकते थे।

तीसरे दिन के अपने सेशन के बाद लंच किये बिना ही राज जो गया था वो चौथे दिन भी प्रिया को नही दिखा था,ये कैसा बदला ले रहा था वो,जब तक लिस्ट मे प्रिया का नाम नही था वो मौजूद था और उसका नाम जोड़ने के बाद खुद गायब हो गया था।।

पर अन्तिम दिन सारी टीम की उपस्थिति अनिवार्य थी,इसीसे प्रिया को उम्मीद थी,कि आज तो वो आयेगा और हुआ भी वही,राज आ गया।।

ऐश ग्रे साड़ी में धागे से बने गुलाबी बूटे बहुत सुंदर लग रहे थे,और उस साड़ी में संवरी प्रिया भी।।

माला और प्रिया साथ ही बैठे थे कि माईक हाथ में लिये सिद्धार्थ ने गाना शुरु कर दिया

कब कहाँ सब खो गयी

जितनी भी थी परछाईयाँ

उठ गयी यारों की महफ़िल

हो गयी तन्हाईयाँ

क्या किया शायद कोई

पर्दा गिराया आपने

दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-जिगर

दिल में जगाया आपने

हर एक अंतरे पर प्रिया को निहारता सिद्धार्थ बडे लय में अंदाज में गा रहा था .

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प्रिया सोच ही रही थी कि अच्छा है राज नही है,वरना सिद्धार्थ की इस बेशर्मी पर जाने उसके बारे में क्या कुछ सोच बैठता,अभी ऐसा सोच के उसने अपने बालों को पीछे किया ही था कि उसके पीछे थोड़ा हट के एक टेबल से टिक के खड़े राज पर उसकी नज़र पड़ गयी।।

गहरे ग्रे रंग की शर्ट और काली पैंट में खड़े राज पर से उसकी आंखें एकाएक हट नही पायीं।।

तब तक में राज ने भी उसे देख लिया लेकिन तुरंत ही दुसरी तरफ मुहँ फेर किसी से बातों मे लग गया।।

पहले दूसरे दिन तो ऐसी निर्लिप्तता नही दिखा रहा था,अचानक ऐसा क्या हो गया .

आज अन्तिम दिन था,आज के बाद राज वापस चला जायेगा,आज ही का दिन है और यही कुछ पलछिन जिनमें वो अपनी बिगडी बना सकती है,पर क्या करे?? कैसे कहे?? कि राज आज भी हमे फर्क नही पड़ता कि तुम बैंक अधिकारी हो गये!! तुम्हारी नौकरी लग गयी!!

हमारे लिये तो आज भी तुम हमारे कानपुर के हमारी गलियों के वही राज हो,कभी जिसकी ज़ुल्फों के साथ हमारी सांसे ऊपर नीचे होती थी।।

अपनी सोच मे गुम प्रिया को अचानक स्टेज की तरफ जाते राज दिखा और तभी सिद्धार्थ ने राज को गाने के लिये माईक थमा दिया,थोड़ी ना नुकुर के बाद राज ने माईक संभाल लिया__

,

बावरा मन राह ताके तरसे रे

नैना भी मल्हार बन के बरसे रे

आधे से अधूरे से, बिन तेरे हम हुए

फीका लगे है मुझको सारा जहां

बावरा मन राह ताके

ये कैसी ख़ुशी है, जो मोम सी है

आँखों के रस्ते हँस के पिघलने लगी

मन्नत के धागे, ऐसे हैं बाँधे

टूटे ना रिश्ता जुड़ के तुझसे कभी

सौ बलाएँ ले गया तू सर, से रे

नैना ये मल्हार .

गाने के प्रवाह में खोयी प्रिया की नज़र राज पर से हट ही नही पा रही थी,और वो था कि गाते समय उसने एक बार भी उसकी तरफ देखना ज़रूरी नही समझा।।

डिनर के लिये कर्मियों के परिवारों का भी निमन्त्रण था,बहुत से कर्मचारी अपने बीवी बच्चों के साथ आये हुए थे।।

राज ने अपना गीत समाप्त किया और स्टेज पर से उतर ही रहा था कि उसकी नज़र सिद्धार्थ पर पड़ गयी और एक बार फिर उसके मुहँ मे एक कड़वाहट घुल गयी,सिद्धार्थ अपनी माँ को सबसे मिलवाते हुए प्रिया की तरफ ही बढ रहा था।

दक्षिण भारतीय पोचमपल्ली साड़ी में एक साधारण सा जूड़ा बनाई हुई सिद्धार्थ की माँ चेहरे से ही बेहद सुलझी हुई ,

समझदार गृहिणी लग रही थी, अकेले ही ज़माने की ठोकरें खाती बेटे की अकेले परवरिश ने उनके चेहरे को एक दिव्य तेज़ से रंग दिया था।।

प्रिया स्टेज के दूसरी तरफ अकेली ही खड़ी थी कि सिद्धार्थ वहाँ पहुंच गया__

सिद्धार्थ- प्रिया इनसे मिलो,ये मेरी मॉम है,and mom she is bansuri ,I've already told u about her..

सिद्धार्थ की माँ ने मुस्कुरा कर प्रिया का अभिवादन किया कि अपने उत्तर भारतीय संस्कारों में लिपटी प्रिया ने झट आगे बढ कर उनके पैर छू लिये।।

प्रिया का लपक के इस तरह पैर छूना उन्हें मोहित कर गया,उन्होँने आगे बढ़ कर उसे गले से लगा लिया,अपनी टूटी फूटी अन्ग्रेजी मिश्रित हिन्दी में उन्होनें अगले दिन सुबह के सह्भोज पर उसे भी आमन्त्रित कर लिया।।

अगले दिन महीने का दूसरा शनिवार होने से बैंक की छुट्टी थी,इसीसे टीम की वापसी के पहले जितने लोग आज रात की फ्लाईट से नही वापस हो रहे थे उन सब को बड़े इसरार के साथ सिद्धार्थ ने अपने घर सुबह के खाने पर बुला लिया था।।

राज ने सिद्धार्थ के आग्रह को सिरे से नकार कर अपने आने की असमर्थता प्रकट कर दी थी।।

कभी किसी आयोजन का हिस्सा ना बनने वाली सिद्धार्थ की माँ एक तरह से टीम को स्वयं आमंत्रण देने ही आयी

थी।।

प्रिया से जब तक उनकी बातें होती रही,राज उन्हें ही देखता रहा,पर जब उसने देखा की वो प्रिया को साथ लिये उसी की तरफ आ रही हैं, तो वो एकाएक पलट कर दूसरी ओर देखने लगा।।

" हेलो ,कैसे हैं आप??"

राज- जी नमस्कार . मैं ठीक हूँ,आप कैसी हैं।

" देखिए आप हमारे घर आये बिना नही जा सकते, मैं स्पेशली आप को इन्वाईट करने ही यहाँ तक आयी हूँ ,कल का लंच आपको हमारे घर पर ही लेना है।"

पता नही ये उनका स्नेह भरा आग्रह था या आश्चर्यजनक रूप से उनके व्यक्तित्व की अम्मा से समानता पर उस भद्र महिला के आग्रह को फिर राज ठुकरा नही पाया, आखिर उसने भी झुक कर उनके पैर छू ही लिये।।

तभी माला हाथ में स्टार्टर की प्लेट थामे वहाँ चली आयी,चार लोगों के बीच अकेली प्लेट पकड़ी खड़ी खुद को देख उसे अपनी भूल का आभास हुआ,और उसने अपनी प्लेट राज की तरफ बढ़ा दी__

" सर लिजिये ना,आप कुछ ले ही नही रहे।"

" आप इतने प्यार से देंगी तो कोई लेने से कैसे मना कर ,सकता है।"

प्रिया एक बार फिर बुझ के रह गयी,आखिर हुआ क्या है राज को।।

पर प्रिया को अब हर पल यही लग रहा था कि कैसे भी करके इस गलतफहमी को दूर करना ही पड़ेगा,चाहे इसके लिये उसे किसी भी हद तक जाना पड़े ।।

माला ने उसी समय माईक प्रिया के हाथ थमा दिया,बहुत सहम के आखिर उसने गाना शुरु किया

मैं कागज़ की कश्ती, तू बारिश का पानी

ऐसा है तुझसे अब ये रिश्ता मेरा

तू है तो मैं हूँ, तू आए तो बह लूँ

आधी है दुनिया मेरी तेरे बिना

जी उठी सौ बार तुझपे मर के रे

नैना भी मल्हार .

प्रिया ने बहुत मन से राज के गाये हुए गाने को ही आगे बढ़ाया,पर उसके गीत को समाप्त करते में राज वहाँ से जा चुका था।।

राज के जाने के बाद फिर प्रिया का मन भी उस पार्टी से उचाट हो गया,जैसे तैसे समय काटती आखिर वो भी सर दर्द का बहाना बनाये वहाँ से निकल पड़ी ।।
 
पार्टी हॉल में नेटवर्क ना होने से कैब बुक नही हो पा रही थी,इसीसे पैदल मेन रोड पर आगे बढ़ती प्रिया अपने मोबाइल पर सर झुकाये कैब बुक करने में ही लगी हुई थी__

" अरे सम्भल के,ऐसे चलोगी तो गिर पड़ोगी!!

राज की आवाज़ सुन प्रिया ने झटके से ऊपर देखा,सामने से उसीकी तरफ आते राज को देख उसका चेहरा खिल उठा__

प्रिया-- ऐसे बीच में पार्टी छोड़ कर कहाँ निकल गये।।

राज-- बहुत बेचैनी सी लगने लगी थी अन्दर, इसिलिए बाहर खुली हवा में सांस लेने निकल गया।

राज-- तुम यहाँ कैसे?? पार्टी तो अभी चल ही रही होगी।।

प्रिया-- हाँ हमें भी थोड़ा अच्छा सा नही लग रहा था,इतनी भीड़ भाड़,हल्ला गुल्ला रास नही आ रहा था।तुमने खाना खाया राज ??

राज -- खा लेंगे4 Full, stopतुम्हें अचानक हमारी फिक्र कैसे होने लगी।।

प्रिया-- अरे ऐसे क्यों बात कर रहे ,,हम फिक्र नही करेंगे तो और कौन करेगा तुम्हारी??

,

राज -- जो हमारे लिये बनी होगी वो करेगी।।

प्रिया-- अच्छा . कौन है वो ज़रा हम भी सुनें,तुमने बताया ही नही कि शादी के लिये लड़की भी ढूँढ लिये।।

राज-- हाँ जैसे तुमने तो मिलते साथ ही सब बता दिया।।

प्रिया-- क्या बोल रहे हो तुम?? हमे समझ नही आ रहा,कभी भी साफ साफ बोलने की आदत भी तो नही है तुम्हारी।।

राज-- जैसे तुम सब साफ साफ बोलती हो,जब इतनी ही सफाई है बातो में तो अब तक बताई काहे नही कि उससे शादी करने जा रही हो।।

प्रिया-- पगला गये हो क्या?? किससे शादी करने जा रहे हम??

राज -- बनो मत प्रिया!! सिद्धार्थ ने हमे सब कुछ बता दिया है।।

प्रिया-- अरे बाबा क्या बता दिया उसने,,हमें भी तो बताओ।।

राज-- यही कि तुम दोनों शादी करने वाले हो।।

प्रिया-- पगला गये हो क्या तुम?? एक बात बोले चाहे तुम ,

कितने बड़े ऑफीसर बन जाओ ,

रहोगे गधे के गधे ,, उसने कहा और तुमने मान लिया,अरे एक बार हमसे पूछना तो था।।

राज -- सवाल पूछने और जवाब देने का कोई रस्ता पीछे छोड़ गयी थी क्या ,जो हम कुछ पूछ पाते।।

प्रिया-- तुमने भी तो आवाज़ नही दी पीछे से . क्या इतनी सी बात पे कोई ऐसा जीवन भर का बैर मोल लेता है।।कहते कहते प्रिया की आंखें भीग गयी

राज ने आगे बढ़कर प्रिया के दोनो हाथ अपने हाथों में ले लिये एक हाथ से उसके बहते आँसूं पोंछ उसकी आंखों में झांकते हुए उसने कहा__

राज-- आज भी तुमसे उतना ही प्यार करते हैं प्रिया, कभी भूल ही नही पाये तुम्हें ।।

हमारे अनपढ़ होने से हमे छोड़ गयी यही सोच सोच कर पागल हो गये,और तुम्हारे जाने के बाद पढ़ने की ऐसी लत लगी की पागलों के समान किताबों में ही घुसे रहने लगे,किताबें ही जीवन हो गयी थी हमारे लिये . तुम्हारे बिन सब कुछ कितना फीका हो गया था ,कितना बेरंग !! चाय भी अच्छी नही लगती थी, फिर भी पीते थे,सिर्फ और सिर्फ तुम्हें याद करने के लिये . जिम छूट गया!! दोस्त छूट गये!! यहाँ तक की हमारी खुद की तबीयत हमसे रूठ गयी पर तुम नही छूटी,कितना याद किया ये कैसे बताएँ क्योंकि तुम तो हमारे अन्दर ही समा गयी थी,इस कदर हमसे जुड़ गयी थी कि सोते ,

जागते दिमाग में एक ही नाम चलता था . प्रिया!!

प्रिया के आँसू रूकने के बजाय बहते चले जा रहे थे,और अब राज के आँसू भी उसका साथ दे रहे थे।।

प्रिया-- तुम्हें क्या लगता है,हम यहाँ बहुत खुश थे,किसी से तुम्हारे बारे में पूछ नही पाते थे,प्रिंस प्रेम सबने हमसे बात करना बन्द कर दिया,यहाँ तक की निरमा ने भी,,बस बुआ की चिट्ठी में कभी कोई हाल तुम्हारा मिला तो मिला,वर्ना कुछ नही।।

राज-- एक बार फोन भी तो कर सकती थी ना, राज जिंदा है या मर गया,जानने की भी इच्छा नही हुई तुम्हारी ।।

प्रिया--तुम तो फिर भी अपने अम्मा बाऊजी के साथ थे युवराज भैय्या के साथ थे,,हम तो यहाँ एकदम अकेले हो गये थे!! कभी तुम्हें नही लगा कि अकेले क्या कर रही कैसे जी रही एक बार फोन ही कर लूँ ।।

कभी कहीं से गुजरते और तुम्हारे पर्फ्यूम की खुशबू आ जाती तो पागलों जैसे इधर से उधर भटकते फिरते,तुम्हें ढूंढते रहते थे,जबकि जानते थे की तुम यहाँ नही हो।।

हमारे पागलपन की हद बताएँ राज,तुम्हें हमेशा अपने पास महसूस करने के लिये लड़की होते हुए भी तुम्हारा जेंट्स पर्फ्यूम लगाते हैं,माला जाने कितनी बार इस बात पर हमारा मजाक भी बना चुकी है,पर हमे अपने कपडों से आने वाली तुम्हारी खुशबू ही भाती है ,क्या करें।।

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दोनो एक दूसरे का हाथ थामे एक दूसरे की आंखों में इतने सालों के अपने पलछिन देखते हुए सवाल जवाब में लगे थे कि अचानक राज प्रिया के चेहरे पे झुकने लगा__

प्रिया-- क्या कर रहे हो ये राज ??

राज-- उस शाम एक काम अधूरा रह गया था प्रिया . आज वही पूरा करने जा रहे .

मुस्कुराते हुए प्रिया ने राज को पीछे धकेल दिया

प्रिया-- इतनी सारी शिकायतें जमा कर रखी है हमने,उन्हें सुनने की फुरसत नही है?? आये बड़े प्यार करने वाले .

राज-- कर लेना बाबा, शिकायतें भी कर लेना,,सब सुन लूंगा .

राज ने अपने दोनो हाथों में बड़े प्यार से प्रिया का चेहरा पकड़ा और .

" पहले उस रात का हिसाब तो पूरा कर लेने दो।"

प्रिया-- नही ,पहले हमारी बात सुनो!! क्या कह रहे थे सिद्धार्थ सर ,मुझसे शादी करेंगे,हो चुकी तब तो।।तुमने कहा नही उनसे कि प्रिया सिर्फ और सिर्फ राज की है,और राज से ही प्रिया की शादी होगी।।

राज-- नही कहा!! लेकिन कल उनके घर जायेंगे ना तब कह देंगे,,अब खुश!!

प्रिया-- हाँ बहुत बहुत खुश ।।

राज-- तो फिर आओ, इधर।

प्रिया-- कब से देख रहे हैं,घूम फिर के एक ही जगह तुम्हारा कांटा अटक जा रहा

राज-- इत्ते साल से इन्तजार भी तो किया है तुम्हारा बन्सी .

मुस्कुराती हुई प्रिया आगे बढ़ कर राज के गले से लग गयी,और राज उसके चेहरे पे झुकता चला गया।।

प्रिया-- नही ,पहले हमारी बात सुनो!! क्या कह रहे थे सिद्धार्थ सर ,मुझसे शादी करेंगे,हो चुकी तब तो।।तुमने कहा नही उनसे कि प्रिया सिर्फ और सिर्फ राज की है,और राज से ही प्रिया की शादी होगी।।

राज-- नही कहा!! लेकिन कल उनके घर जायेंगे ना तब कह देंगे,,अब खुश!!

प्रिया-- हाँ बहुत बहुत खुश ।।

राज-- तो फिर आओ इधर।

प्रिया-- कब से देख रहे हैं,घूम फिर के एक ही जगह तुम्हारा कांटा अटक जा रहा

राज-- इत्ते साल से इन्तजार भी तो किया है तुम्हारा बन्सी .

मुस्कुराती हुई प्रिया आगे बढ़ कर राज के गले से लग गयी,और राज उसके चेहरे पे झुकता चला गया।।

राज--

आंखो में खो जाये आंखे

बोले हाथों से हाथ

बाहों में छिप कर

सांसों से जैसे डोले रात

उंगलियों को उंगलियों से

मौसमों को शोखियों से बात करने दो

चुप तुम रहो,चुप हम रहें

खामोशी को खामोशी से

जिंदगी को जिंदगी से बात करने दो।।

प्रिया में धीरे से राज को अपने से अलग कर दिया

राज-- क्या हुआ बन्सी??

प्रिया -- कुछ नही बस ऐसे ही।।

अच्छा सुनो तुमने यहां पर कुछ भी नहीं देखा है ना 4 दिन से तो सिर्फ काम में ही भिडे हो बैंक से होटल होटल से बैंक।। चलो तुम्हें पुणे घूमाती हूं यहां ऐतिहासिक महत्व की बहुत सी चीजें हैं पुराने अंग्रेजों के जमाने के स्मारक हैं शिवाजी महाराज के जमाने के किले हैं बाजीराव मूवी देखी थी ना ,उसमें दिखाया काशीबाई का महल भी यही है शनिवार वाडा में।। पांच नदियां हैं कई ब्रिज है बहुत बड़े-बड़े कॉलेजेस हैं चलो सब तुम्हें दिखाऊं।

राज-- हम जो देखने आए थे वह तो देख लिया प्रिया

प्रिया राज की बात सुन मुस्कुराने लगी।।

राज-- सुनो अब देखना वेखना छोड़ो यार जोर की भूख लगी है चार-पांच दिन से कुछ ढंग से खाया नहीं कुछ अच्छा सा खिलाओ तो कोई बात बने।।

प्रिया-- कानपुर सी कचौड़ीयां और पकौड़ीयां तो यहां मिलने से रहीं फिर भी एक अच्छी जगह है एफसी रोड पर वहां चलते हैं वहां की चाट खिलाती हूं तुम्हें।।

राज-- यहां की चाट से तो तौबा कर ली प्रिया हमने। उस दिन तुम्हारे सिद्धार्थ सर तुम्हारी कैंटीन में बड़ी शान से हमारे सामने लेकर आए कहा सर यह चख कर देखिए हमारे यहां का रगड़ा पेटिस आपके कानपुर की चाट ना भूल गए तो हमारा नाम बदल दीजिएगा।

वो चाट खाकर जो जबान का स्वाद बिगड़ा है तो आज जाकर सुधरा है,, अब तब से हम सोच रहे हैं कि तुम्हारे सिद्धार्थ सर को क्या नया नाम दें।।
 
प्रिया-- तुम नही सुधर सकते।।

राज-- हाँ तो सुधरे भी क्यों,,जैसे हैं अच्छे हैं ।।

प्रिया-- राज हम चाहते हैं ,यह रात कभी खत्म ना हो बस ऐसे ही चलती रहे और हम दोनों एक दूसरे का हाथ हाथ थामे आगे बढ़ते रहें।

,

राज-- प्रिया हम तो अब तुम्हें एक पल के लिए नहीं खोना चाहते ।।हम तो चाहते हैं __हम कल जल्दी से घर पहुंचे और सबसे, तुरंत अपनी शादी की बात कर ले, और बस एक हफ्ता बीतते बीतते तुम हमारी दुल्हन बनकर हमारे घर आ जाओ हमेशा के लिए।।

प्रिया-- बड़े बेसबर हो रहे तुम तो।

राज-- हां तो क्यों ना हो?? इतने साल इंतजार भी तो किया है तुम्हारा . हमारा बस चले तो अभी यहीं फेरे ले ले तुम्हारे साथ।।

हम तो कहते हैं प्रिया तुम भी हमारे साथ कानपुर चलो ,तुम तुम्हारे घर बात कर लेना . हम हमारे घर और सब मान गए तो अगले दिन ही शादी कर लेंगे।।

प्रिया-- अरे इतनी शॉर्ट नोटिस पर छुट्टी कहां मिलेगी राज ऐसे कहां जा पाएंगे हम,, ऐसा करो अभी तुम ही जाओ दो-तीन दिन में सर से बात करके छुट्टियां लेकर हम भी आ जाएंगे और जैसा तुम चाहते हो . भगवान ने चाहा तो 1 हफ्ते में ही तुम्हारी दुल्हन बनकर तुम्हारे घर आ जाएंगे।।

राज-- सोच लो अब हमारे बिना रह पाओगी??

दोनों इसी तरह हंसते बोलते एक दूसरे का हाथ थामे रास्ते के किनारे किनारे चलते रहे।। इतने सालों के ताने उलाहने,

प्यार भरी मीठी झिड़कियां,, सवाल जवाब और ढेर सारी बातें . न सुलझने वाली समस्याएं और उलझने वाली मीठी-मीठी बातें करते करते दोनों जाने कहां तक चलते चले गए जब कहीं थक जाते तो रास्ते के किनारे पड़ी बेंच पर बैठ जाते हैं जो ठेला मिला उससे कुछ खा लिया कहीं चाय मिली वहां पी ली8 Full stop एक पानी की बोतल पकड़े दोनों सारी रात पूरे शहर की खाक छानते रहे।।

रात के अंधियारे से सुबह हल्की हल्की सी उगने लगी।।। तब राज ने प्रिया को उसके फ्लैट पर छोड़ा और अपने होटल चला गया दोनों ने विदा होते समय सिद्धार्थ के घर एक ही समय में पहुंचने का वक्त तय कर लिया।।।

माला-- प्रिया अरे उठ जा कब तक सोती रहेगी सुबह का 10:00 बज गया है तू कल रात पार्टी में अचानक गायब हो गई रात भर पता नहीं कहां भटकती रही किस समय फ्लैट पर आई मुझे तो कुछ पता ही नहीं चला ??यार यह चल क्या रहा है ??

प्रिया-- सब बता देंगे थोड़ा तो धैर्य रखो पहले 1 कप प्यारी सी चाय पिला दो।।

माला-- जो आज्ञा मैडम जी मैं जा रही हूं ,आपके लिए चाय चढ़ाने . आप ऐसा कीजिए हाथ मुंह धो लीजिए।।

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प्रिया उठ कर बाथरुम में घुसने ही वाली थी कि दरवाजे पर किसी ने घंटी बजाई, दूध वाला दूध दे चुका,पेपर वाला आ चुका,फिर ये कौन आ गया,,सर को झटक कर प्रिया बाथरूम में घुस गयी।।

नहा धोकर निकलकर बालों को झटकते हुए प्रिया जब बैठक में आई तो वहाँ राज को बैठे देख आश्चर्यचकित रह गई।।

प्रिया-- अरे तुम!! तुम यहाँ कैसे??

माला-- सर बस अभी कुछ देर पहले ही यहां आए हैं प्रिया,, तुम यहां बैठो मैं सर के लिए कॉफी बना कर लाती हूं।।

राज-- माला जी अगर आपको तकलीफ ना हो तो चाय बना दीजिए कॉफी हमें जरा कम पसंद है।।

माला-- हाँ बिल्कुल!! तकलीफ क्यों होगी मैं चाय ही बनाकर ले आती हूं।।

माला अन्दर जाते जाते प्रिया को भी साथ में खींच ले गयी।।

माला-- चल क्या रहा है मैडम कुछ बताइन्गी आप?? यह आरके सर आखिर हैं कौन?? तुम्हें कैसे जानते हैं?? यह सुबह-सुबह हमारे घर पर क्या कर रहे हैं ??

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और सुन यार तू कॉफी फेंट ले तब तक मैं थोड़ा चेहरे का रंग रोगन कर लूँ वरना बंदा सोचेगा कैसी वाहियात लड़की है भूतनी बनी घूम रही है घर पर।। सारा इंप्रेशन खराब हो जाएगा।।

प्रिया-- तुमने सुना नहीं उन्हें कॉफी नहीं चाय पीनी है तुम जाओ आराम से तैयार हो जाओ हम तब तक चाय चढ़ातें हैं ।।

दस मिनट में माला तैयार होकर आ गयी,प्रिया चाय चढ़ा कर राज के साथ बैठी बातें कर रही थी और चाय खौल खौल कर काढ़ा बन चुकी थी।।

माला-- प्रिया चाय को छान दूं या थोड़ी और जलानी है।।

प्रिया माला की आवाज सुन भागती हुई रसोई में आई और चाय को झांक कर देख हंस पड़ी।।

" कुछ ज्यादा ही खौल गई ना" उसने हंस के माला से पूछा

माला-- चाय तो जो पकी सो पकी ,,, तुम दोनों के बीच क्या पक रहा है ??अब तो सब सच सच बता दे।

प्रिया ने तीन कप में चाय छानी एक प्लेट में कुकीज निकाली और माला को साथ लिए बैठक में चली आई।।

प्रिया-- राज इनसे मिलो यह है हमारी प्यारी सहेली माला।।

राज -- अच्छे से जानते हैं हम।।

मुस्कुराते हुए प्रिया ने राज को देखा और कहा

प्रिया-- माला हमारे बारे में सब जानना चाहती है।

राज-- क्यों तुमने आज तक कुछ बताया नहीं चलो कोई बात नहीं . आइए माला जी आपको हम ही बता देते हैं हमारी और प्रिया की कहानी।।

माला-- कुछ कुछ समझ तो आने लग गया है कि प्रिया की अलमारी का वह स्पेशल कोना आप ही हैं।।

जहां कुछ अजीबोगरीब सामान रखती है ये ।।

राज-- अच्छा!! जैसे क्या क्या रखती है??

माला-- एक रुद्राक्ष की माला,एक जेंट्स परफ्यूम,, एक टूटी से पैन रखी हुई है, एक छोटी सी नोटबुक पड़ी है, एक टी-शर्ट भी है ।।।रुद्राक्ष की माला को कभी-कभी निकाल कर अपने हाथ में लपेट लेती है और फिर वापस निकाल कर वही रख देती है।

राज-- टी-शर्ट कौन सी रखी है तुमने??

ऐसा बोलते में उसके हाथ से छलक कर चाय उसकी शर्ट पर गिर गयी।।

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प्रिया-- वाह टी शर्ट रखी है,ये सुनते ही शर्ट खराब कर ली।।लायो उतार कर हमे दो,हम साफ करके ले आते हैं ।।

राज-- क्या बात है प्रिया !! हमें शर्ट लेस देखने की बड़ी जल्दी है तुम्हें ।।

प्रिया-- बकवास बन्द करो ,और लाओ इधर दो

राज-- पर ये टी शर्ट तुम्हें मिली कहां से??

प्रिया-- और कहां से मिलेगी तुम्हारी जिम से।। जिस दिन हम जॉइनिंग के लिए निकल रहे थे उस दिन जिम गए थे तब प्रिंस से बोलकर तुम्हारे लॉकर से तुम्हारी यह टीशर्ट निकलवा ली थी हमने,, और अपने साथ ले आए इसमें तुम्हारी खुशबू बसी है आज तक वैसी की वैसी रखी है।।

राज-- छी फिर मैं नहीं पहनूंगा बिना धुली गंदी टीशर्ट।।

प्रिया-- अरे अपने कपड़ों के साथ इसे भी धोते थे बाबा !! और फिर से तुम्हारा परफ्यूम डालकर आयरन करके वापस रख देते थे,साफ है पहन लो।

राज ने हंसते हुए कपड़े बदले और माला को अपनी कहानी सुनाने बैठ गया।

प्रिंस प्रेम और निरमा, पिंकी और रतन, बंटी और रानी,रेखा और लल्लन युवराज भैया रूपा भाभी अम्मा ,

बाबूजी दादी बुआ जी जितने लोग उनकी प्रेम कहानी का हिस्सा थे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सबको दोनों ने याद किया।।। पूरी कहानी में दोनों जाने कितनी बार पागलों की तरह हंसे और बहुत बार दोनों की आंखें भीग गई।।

प्रिया-- प्रिंस कैसा है राज?? कानपुर छोड़ने के बाद से तो उसने हमसे कभी बात ही नहीं की!!

राज-- तुम से सब नाराज जो हो गए थे,, तुम उनके हीरो को छोड़कर जो चली आई थी।।

प्रिया मुस्कुरा कर रह गयी__" बात तो करी जा सकती थी ना!!"

राज-- हां बात तो करी जा सकती थी पर एक-एक कर ऐसी छोटी-छोटी बातें जुड़ती चली गई कि सब का गुस्सा बढ़ता ही चला गया।। उस दिन तुम्हारे जाने के बाद तुम्हारे एग्जाम वाले दिन हमने चिट्ठी लेकर प्रेम को तुम्हारे सेंटर भेजा था तुमने कोई जवाब नहीं दिया बल्कि उल्टे पैरों उसे बिना हमारी चिट्ठी पढ़े ही वापस भेज दिया . इस बात के बाद से हमें तेज बुखार आ गया हमें बुखार में पड़े देखकर अम्मा पसीज गई और तुम्हारे घर गई बंटी को लेकर तुम्हारे और हमारे बारे में बात करने चली गयी।। तुम्हारी बुआ ने हमारी अम्मा को भी खोटे सिक्के सा वापस भेज दिया।।उसके बाद हम बीमार पड़ गए बहुत बीमार पड़ गए थे प्रिया !!इतने बीमार कि हमें लेकर युवराज भैया को मुंबई तक दौड़ लगाना पड़ा पर इसके बाद भी तुमने हमारी कोई खोज खबर नहीं ली इस घटना के

बाद घर में सब टूट गए हर किसी ने अलग-अलग हमें कसम दे दी कि हम अब तुमसे कोई संबंध ना रखें तुम्हें भूल जाए पर क्या हमारे लिए यह संभव था कि हम तुम्हें भूल जाते ।।

अविश्वास से राज को देखती प्रिया की आंखों से आंसुओं की अविरल धारा बहती रही जिसे पोंछने की उसने कोई कोशिश नहीं की उसने बहुत धीमी सी आवाज में राज से पूछा "क्या अम्मा जी खुद हमारे घर आई थी"?

राज-- हाँ अम्मा खुद गयी थी।।

प्रिया-- राज हमारा विश्वास करो किसी ने इस बारे में हमें कुछ नहीं बताया !!हमें समझ नहीं आ रहा कि हमारी मम्मी तक ने हमें कुछ क्यों नहीं बताया।। हमसे सच में बहुत भूल हुई हमें दोबारा तुम्हें फोन करना चाहिए था,, कानपुर से निकलने के बाद जब हम पहली बार ज्वाइन करने गए तो हमने एक ही बार तुम्हें फोन किया रूपा भाभी से थोड़ी बहस हो गई . और फिर हमारा दिमाग गरम हो गया उसके बाद कई बार सोचा और फोन भी उठाया लेकिन हिम्मत ही नहीं पड़ी तुमसे बात करने की .

हमें माफ कर दो राज अब तुम रूपा भाभी अम्मा जी कोई हमें कुछ भी कह ले कितना भी सुना ले हम अब तुम्हें छोड़कर कभी नहीं जाएंगे।।

प्रिया सर झुकाए रोती रही राज अपनी जगह से उठकर प्रिया के पास आया और उसने उसे गले से लगा लिया।। इन दोनों को अपने आंसुओं में भीगा देख माला वहां से

उठकर चुपचाप चली गई कुछ देर बाद एक ट्रे में दो गिलास में पानी और तीन कप चाय लिए वह वापस चली आई।

माला-- मुझे लगता है अब हमारे लव बर्ड्स की सारी शिकायतें दूर हो गई होंगी,अब ऐसा करो आंसू पोछो ,चाय पियो और प्रिया तैयार हो जाओ ,सिद्धार्थ सर के घर भी तो जाना है।।

प्रिया आंखें पोंछ कर तैयार होने अंदर चली गई माला ने रेडियो पर एक गाना ट्यून किया और फोन पर कैब बुक करने दरवाजा खोलकर बाहर निकल गई राज वहीं सोफे पर दोनों हाथ सीने पर रखें आंख बंद करके लेट गया__

मोहे लगे प्यारे सभी रंग तिहारे

सुख दुख में हर पल रहूं संग तिहारे

मगन अपनी धुन में रहे मोरा सैयां

पग पग लिए जाऊं मैं तोहरी बलैया।।

राज आंखें बन्द किये लेटा रहा और प्रिया वही खड़ी उसे देखती रही।।गाना खतम होते ही राज ने आंखें बन्द किये हुए ही कहा__

राज-- मन भर कर निहार लिया हो हमें तो अब जाकर तैयार भी हो जाओ वरना तुम्हारे सिद्धार्थ सर गोली मार देंगे हमें ।।

प्रिया लजा कर तुरंत अन्दर चली गयी।।

कुछ देर बाद तीनो कैब में सवार सिद्धार्थ के घर की ओर ,

निकल पड़े,,रास्ते मे प्रिया को अचानक कुछ याद आ गया__

प्रिया-- राज एक बात बोलूं नाराज तो नहीं होंगे

राज-- हां बोलो

प्रिया-- यहां एक गणपति मंदिर है बहुत मानता ( मान्यता) है उनकी!! बहुत दिनों से हमारी इच्छा थी की कभी जब हमारे बीच सब सुलझ जाए तब तुम्हारे साथ हम उनके दर्शन को जाएंगे क्या हम वहां चल सकते हैं??

राज-- इसमें पूछने की क्या बात है प्रिया उन्हीं के कारण तो आज हम एक हो पाए हैं।। हमने भी बड़े हनुमान जी के पास अर्जी लगा रखी थी,, अब जब तुम कानपुर आओगी ना ,तो तुम्हें वहां भी लेकर जाना है।।
 
कुछ आगे जाकर उन्होनें कैब छोड़ दी और तीनों मन्दिर के लिये मुड़ गये। तीन चार छोटी छोटी गलियां पार करने के बाद आखिरी गली के छोर पर बड़ा सा गणपति मंदिर था।। तीनों ने वहां के सदर दरवाजे से अंदर प्रवेश किया ,,प्रांगण को पार करते जब वह मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचे तभी पंडित जी ने आगे बढ़कर कपाट बंद कर दिया।।

माला-- अरे यह क्या हो गया यह तो अच्छा नहीं माना जाता है।। मंदिर पहुंचो और दर्शन भी ना मिले।। है ना प्रिया अपशकुन होता है ना यह।।

प्रिया-- पंडित जी थोड़ा सा कपाट खोल दीजिए ना हम बस झांक कर, ही दर्शन कर लेंगे और तुरंत चले जाएंगे।

प्रिया की बात पर पंडित जी ने कान तक नहीं दिए और अपने काम में लगे रहे। भीड़ एक-एक कर प्रसाद और फूल समेटे छन्टने लगी ।।

तीनों बहुत देर तक इधर-उधर कोशिश में रहे कि शायद कोई पंडित कपाट खोल दे पर वह बंद कपाट फिर नहीं खुले।।

ना चाहते हुए भी प्रिया के मन में अजीब सा संशय घर कर गया,, उसे वह अपशगुन वाली बात अच्छी नहीं लगी।। बार-बार उसके मन में यह डर बैठने लगा कि कहीं फिर से वह राज को खो ना दे।।

तीनों वहां से निकल कैब बुक कर सिद्धार्थ के घर पहुंच गए।।

उनके वहां पहुंचने तक में लगभग सभी मेहमान आ चुके थे ।।अपने साथ के लोगों के साथ राज भी बातचीत में व्यस्त हो गया।।

नायर-- क्या बात है आरके!! तुम तो बहुत पंक्चुअल हो आज कैसे लेट हो गए??

राज-- सर हम निकल तो टाइम पर गए थे पर एक बिल्ली रास्ता काट गई।।

हँसते हुए राज ने प्रिया को देखा और वापस अपने ,

साथियों के साथ बातों में लग गया।।

बनावटी गुस्सा दिखाते हुए प्रिया भी माला के साथ रसोई में सिद्धार्थ की माँ की मदद करने चली गयी।।

रसोई मे तीनों औरते खाने की तैयारियों मे लग गयी,वहीं बातों बातों मे माला ने सिद्धार्थ की माँ को मन्दिर वाला किस्सा भी कह सुनाया जिसे सुन उन्होनें भी माला की अपशगुन वाली बात पर अपनी मोहर लगा दी,इस सब को सुन कर प्रिया का मन और बुझ गया,अब वो किसी भी हाल में राज से अलग नही होना चाहती थी . आखिरकार उसने सोच लिया कि किसी तरह आज राज रुक जाये,क्योंकि ऐसे अपशगुन के साथ यात्रा करना कहीं से भी सही नही रहेगा,,अगर दो दिन राज रुक जाये तो वो भी छुट्टी लेकर उसके साथ ही कानपुर चली जायेगी।।

ऐसा सोचने के बाद उसके मन को तसल्ली मिली और एक बार फिर वो पूरे उत्साह से अपने काम में लग गयी।

सिद्धार्थ की मां को प्रिया पहली ही नजर में बहुत भा गई थी वो रसोई में बहुत उत्साह से हर एक दक्षिण भारतीय व्यंजन की रेसिपी और उसके पोषक तत्वों की व्याख्या संदर्भ सहित प्रिया को समझाती रही।

सिद्धार्थ को कब क्या खाना पसंद है ,कब ब्लैक कॉफ़ी पीता है कब दूध वाली ,ये सब कुछ सिलसिलेवार प्रिया को महा उत्साह से बताती उसकी माँ चह्कती रहीं।।प्रिया के अपने मन में राज चल रहा था,आगे के दो दिन राज के साथ कैसे गुजरेंगे उसी खुशी में अपने में मगन प्रिया भी पूरी लगन से उनकी बातें सुनती रही और कहीं उन्हे ये ना लगे की ,

वो कहीं और खोयी है इसलिये बीच बीच मे अपनी तरफ से सवाल भी करती गयी।।

जब सारे लोग बैठक में खाने पीने में लगे हुए थे प्रिया ने इशारे से राज को बालकनी मे बुलाया और अपनी घबराहट, और उसके दो दिन बाद साथ साथ निकलने वाला प्रस्ताव भी रख दिया, जिसे राज ने सहर्ष स्वीकार कर लिया__

राज-- बस इतनी सी बात !! राज ने मोबाईल निकाल और अपनी शाम की फ्लाइट कैन्सिल कर दी ।।

राज-- अब आज रात को सुकून से बैठ कर दो दिन बाद की तुम्हारी हमारी टिकट बुक कर लेंगे।।अब खुश!!

प्रिया-- बहुत बहुत खुश!!

बैठक में धीमी धीमी आवाज़ में बजते गाने को सुन अपने धड़कते दिलों को काबू करते दोनों ही अलग अलग जाकर बैठ गये।।

ख़्वाब है तू, नींद हूं मैं

दोनों मिले रात बने

रोज़ यही मांगूं दुआ

तेरी मेरी बात बने, बात बने

मैं रंग शर्बतों का

तू मीठे घाट का पानी

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मैं रंग शर्बतों का

तू मीठे घाट का पानी

मुझे खुद में घोल दे तो

मेरे यार बात बन जानी

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खाना खा कर सब एक साथ बैठे गप्पे मारते रहे ,इसी बीच सिद्धार्थ की माँ सबके लिये दक्षिण भारतीय फिल्टर कॉफ़ी बना कर ले आईं ।

स्टील की छोटी छोटी ग्लास में सबको सर्व करती वो जब राज के सामने पहुंची तब प्रिया अचानक कह उठी__

प्रिया-- आँटी ये कॉफ़ी नही पीते।।

प्रिया की बात सुन उन्होनें मुस्कुरा कर कॉफ़ी का गिलास राज के हाथ मे थमा दिया __" ये कोई ऐसा वैसा कॉफ़ी नही है बेटा ये हमारा साऊथ का स्पेशल फिल्टर कॉफ़ी,,एक बार पी कर तो देखो,,अमृत है अमृत ।सिड के नाना (पिता) तो डेली सुबह एक बड़ा गिलास भर के पीते थे।।

प्रिया-- अंकल को क्या हुआ था आंटी हमारा मतलब क्या उनकी तबीयत खराब थी।।

प्रिया की बात सुन सिद्धार्थ की मां मुस्कुराते हुए प्रिया की

तरफ देखने लगी उसे देखते हुए उन्होंने ना में सिर हिलाते हुए कहा

"ओह नो नो उनका तबीयत ठीक है वह दिल्ली में अपना प्रैक्टिस कर रहे हैं वकालत की।।

एक्चुली हम सेपरेट हो गए।। सिड के होने के बाद मुझे और सिड को उनकी जितनी जरूरत थी वह उतना समय हम दोनों को नहीं दे पाते थे उनका सारा समय उनके केस और अदालत ही ले जाते थे घर पर आने के बाद भी सारा समय केस से जुड़ी फाइलें पढ़ना उस पर काम करना यही उनका काम था।।

मैं अकेले घर और बच्चे को संभालते हुए फ्रस्ट्रेट होने लगी थी इसीलिए हमारे बीच झगड़े बढ़ने लगे और लड़ झगड़ के साथ रहने से हमने अलग हो जाना ज्यादा सही समझा।। वह वहां रहते हैं ,, मंथ में कभी एक दो बार हमसे मिलने आते हैं अभी भी लीगली हम हस्बैंड वाइफ ही हैं।।।

उनकी बात सुन प्रिया झेंप के रह गई क्योंकि अब तक वो यह सोचा करती थी कि सिद्धार्थ के पिता किसी रोग या बीमारी के कारण चल बसे हैं।। आज सिद्धार्थ की मां से यह सच्चाई सुनकर उसे अपने उतावले पन पर शरम सी आ गई इस शर्मिंदगी से बचने के लिए उसने घड़ी की तरफ देखा और सिद्धार्थ की मां से घर वापस जाने की गुजारिश कर दी।।

शाम के 5:00 बज रहे थे राज प्रिया और माला सिद्धार्थ से विदा लेकर उसके घर से निकल पड़े घर से निकलने के पहले प्रिया ने जैसे ही सिद्धार्थ की मां के पैर छूने चाहे उसी समय राज भी उनके पैर छूने को झुका दोनों को एक साथ ,

ही अपने दोनों हाथ से आशीर्वाद देते हुए सिद्धार्थ की मां ने कहा "हमेशा खुश रहो"

वहां से निकलने के बाद माला का विचार फ्लैट पर वापस जाने का था लेकिन प्रिया ने उसे भी अपने साथ ले लिया तीनो के तीनो वहां से कैब बुक करके फिनिक्स मॉल के लिए निकल गए।

मॉल में एक जगह से दूसरी जगह घूमते ,हर दुकान के चक्कर लगाते और गप्पे लड़ाते तीनों घूमते रहे माला ने उन दोनों से कहा कि "जब हम मॉल आए ही हैं तो तुम दोनों अपनी शादी की शॉपिंग भी क्यों नहीं कर लेते,, माला का यह आइडिया राज को भी जँच गया और दोनों के दोनों मान्यवर और मोहि में घुस गए।।

हालांकि वहां अंदर जाने से पहले प्रिया ने एक बार राज से कहा भी कि तारीख तय होने के पहले हमारे यहां कोई भी तैयारी नहीं की जाती तब राज ने हंसकर कहा__" शादी तो हम दोनों की तय हो चुकी है एकदम पक्की ही समझो !!और तारीख 2 दिन बाद निकलने ही वाली है तो शॉपिंग करने में कोई बुराई तो नहीं ।।"

राज की बात पर प्रिया मुस्कुरा कर रह गई ।।
 
राज के बहुत इसरार करने के बाद भी प्रिया ने शादी का जोड़ा नहीं खरीदा और ना ही राज को शेरवानी लेने दी,, पर उसकी जिद मानकर तीन-चार भारी भरकम साड़ियां और राज के लिए कुछ कपड़े जरूर खरीद लिए।। उसने एक ,

बहुत सुंदर गुलाबी सी साड़ी माला के लिए भी खरीद ली।।

इतना सब दिलवा कर भी राज का तो जैसे मन ही नहीं मान रहा था यहां से निकल कर जूते चप्पलों की दुकान में वह प्रिया को लिए घुस गया।।

कई जोड़े फुटवियर्स दिलवा कर भी उसे चैन नहीं मिला।।

एक-एक कर ब्राइडल खरीदारी की सभी दुकानों पर राज बारी-बारी से प्रिया को ले जाता गया और शॉपिंग करवाता गया।।

हर एक साड़ी से मैचिंग सैंडल बालों में लगाने का क्लच, चूड़ियां ,कंगन ,झुमके और भी बहुत कुछ।।

और सबसे आखिर में वह प्रिया को लिए गहनों की सबसे बड़ी दुकान में घुस गया प्रिया के लाख मना करने पर भी उसने एक बहुत सुंदर जड़ाऊ कंगन खरीद लिया1 . और तभी उसकी नज़र माणिक की एक अँगूठी पर चली गयी,,छोटे छोटे माणिको से सजा एक मोर अँगूठी मे बना था,राज ने उसे भी लपक के प्रिया के लिये खरीद लिया।।

प्रिया ने भी एक सॉलिटियर राज के लिये खरीद लिया।।

राज तो वो अँगूठी वहीं प्रिया को पहना देना चाहता था,पर अपने राशिरत्न को बिना सिद्ध किये पहनने को प्रिया का मन नही माना।।

राज ने अपने लिये प्रिया द्वारा ली गयी अंगूठी भी उसके ,

ही सामान में रखवा दी।।

राज --प्रिया अब घूम घूम के बहुत थक गये हैं,कहीं बैठ के कुछ खा लिया जाये।।

माला -- गुड आइडिया!! वैसे भी तुम दोनों तो अपनी शादी की तैयारी कर रहे और मेरे पैर बिना मतलब को कबड्डी कबड्डी खेल रहे हैं,यहाँ घुसो वहाँ निकलो बस।।

माला की बात पर दोनो हंसने लगे।।तीनो वही नीचे बने एक कैफे में चले गये,उसी मे एक तरफ म्युज़िकल नाइट चल रही थी,जिसमें कोई भी जाकर गाना गा सकता था,,एक एक कर वहाँ बैठे लोग उठ के जाते और कुछ भी आड़ा टेढा गा कर आ जाते,,आखिर इन सब को देखने के बाद प्रिया ने राज से भी गाना गाने की गुजारिश कर ही दी__

प्रिया-- जाओ ना राज,प्लीज़ गाओ ना।।देखो कोई भी मख्खीमार यहाँ गा ले रहा है तुम तो सच में बहुत ही अच्छा गाते हो,,जाओ ना ।।

प्रिया की बात पर मुस्कुराते हुए राज उस तरफ बढ गया।।

चाहे बना दो,चाहे मिटा दो,

मर भी गये तो देंगे दुआयें ।

उड़ उड़ के कहेगी खाक सनम

ये दर्द ए मुहब्बत सहने दो

मुझे तुमसे मुहब्बत हो गयी है

,

मुझे पलकों की छाँव में रहने दो

एहसान तेरा होगा मुझ पर

दिल चाहता है जो कहने दो .

राज के गाने को खतम करते ही लोगों की तालियाँ गूँज उठी पर प्रिया का मन जाने कैसा तो हो गया__

प्रिया-- ये मरने जीने वाला गाने की क्या ज़रूरत थी,कुछ और ढंग का नही गा सकते थे।।

राज-- अरे बुद्धू गाने मे प्यार छिपा है वो नज़र नही आया ,बस एक शब्द पकड़ के बैठ जाओगी! वहमी औरत!! अच्छा तुम्हारे लिये कुछ और भी गा देते हैं,, रुको।।

सांसो की सरगम ,धड़कन की वीणा

सपनों की गीतांजली तू

मन की गली में महके जो हरदम

ऐसी जुही की कलि तू

छोटा सफर हो लम्बा सफर हो

सूनी डगर हो या मेला।।

याद तू आये मन हो जाये

भीड़ के बीच अकेला

बादल बिजली चंदन पानी जैसा अपना प्यार

लेना होगा जनम हमें कई कई बार .

इतना मदिर इतना मधुर तेरा मेरा प्यार..

,

अलग अलग बैग्स में ढ़ेर सारा सामान समेटे तीनों वहाँ से निकल गये।।

मॉल से बाहर निकलते ही माला फ्लैट में जाने के लिये कैब बुक करने लगी__

माला-- गाईस मैं बहुत थक गयी हूँ , तुम दोनों का मन तो भरा नहीं होगा . तो ऐसा करो तुम दोनों साथ साथ घूमो मैं यह सारा सामान लेकर फ्लैट पर जाती हूं, जब तुम लोग घूम कर थक जाओगे तब फ्लैट पर आ जाना।।

राज और प्रिया माला की बात सुनकर मुस्कुराने लगे राज ने माला को मुस्कुरा कर हामी भर दी।।

उन दोनों को वहीं छोड़ माला सारा सामान समेटे कैब लेकर फ्लैट के लिए निकल गई राज और प्रिया एक बार फिर पिछली रात की तरह हाथों में हाथ डाले सड़क के किनारे किनारे चलते रहे . उनके पास दुनिया जहान की बातें थी जो इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाली थी ,,अभी वह दोनों चल ही रहे थे कि बाजू से दो बाइक पर तीन लड़के गुजरे उन्होंने आगे जाकर बाइक घुमाकर राज और प्रिया के सामने लाकर रोक दी।

उनमें से एक लड़के ने कड़क के उनसे कहा जो जो सामान तुम्हारे पास है जल्दी से निकालो,, तब तक में बाकी दोनों लड़के भी बाइक से उतर के उनके पास चले आए ।। एक तरह से राज और प्रिया को तीनों तरफ से उन तीनों मुस्टंडो ने घेर लिया राज ने चुपचाप अपने जेब में हाथ डाला वॉलेट निकाला और उन लड़कों के हाथ में रख दिया।

,

उनमें से एक लड़के ने प्रिया की तरफ देखा और उससे कहा

"तुझे समझाने के लिए क्या अंग्रेजी में बोले जो जो है पर्स में निकाल गले की चेन कानों के टॉप्स अंगूठी सब कुछ हमारे हवाले कर दे।"

" भाई तमीज से भी तो बोल सकते हो हम तो वैसे ही सब कुछ तुम्हारे हवाले कर रहे हैं प्रिया दे दो यह जो मांग रहे हैं ,"।।

उसकी बात सुन राज ने प्रिया की तरफ देख कर कहा।

प्रिया ने राज की तरफ देखा राज ने आंखें झुका के उसे वैसा ही करने के लिए कहा प्रिया ने एक-एक कर अपने कान के टॉप्स अंगूठी यहां तक की अपनी घड़ी भी उतार कर राज के हाथ में रख दी।।

राज ने सारा का सारा सामान उनमें से एक लड़के के हवाले कर दिया सामान लेते समय उस लड़के ने राज का हाथ पकड़ लिया __

"वाह बच्चू सबसे कीमती सामान छुपा ले गए यह घड़ी भी हमारे हवाले करो जो तुमने अपने हाथ में बांध रखी है।"

राज ने अपनी घड़ी की तरफ देखा और बालों को झटका देकर घड़ी निकालने लगा पर प्रिया ने राज का हाथ पकड़ कर रोक दिया __

"नहीं राज यह घड़ी तुम नहीं दोगे"

,

" अरे ओ मैडम बैंडिट क्वीन जब राज जी खुद अपना खजाना लुटाने को तैयार हैं तो आपको मिर्ची काहे लग रही है जब इतना कुछ दे दिया तो एक घड़ी भी दे दो।"

उनमें से एक बदमाश ने प्रिया से कहा।

" राज हम कह रहे हैं ना तुम किसी भी कीमत पर इस घड़ी को नहीं दोगे। और हां हम हैं बैंडिट क्वीन बोलो क्या करोगे दे तो दिया इतना कुछ,, काफी नहीं है क्या ??चुपचाप लो और रफा दफा हो जाओ वरना तुम जानते नहीं कि हम कौन हैं??

प्रिया की बात पर उनमें से एक बदमाश आगे बढ़कर आ गया और डरने के हावभाव दिखाते हुए हाथ जोड़कर प्रिया से कहने लगा__

" मैं तो डर गया मैडम!! बहुत डर गया अब क्या करूं भाग जाऊं? या तुम्हें भगा के ले जाऊं??

जब तक वह अपनी बात पूरी करता एक जोर का झन्नाटेदार तमाचा उसके गाल पर पड़ा ।। वो जब तक अपने गाल को सहलाता तब तक में दूसरे बदमाश के पेट पर एक जोर का घूंसा पड़ा और तीसरे बदमाश के पैर में प्रिया की हील वाली सैंडल।।
 
अभी तीनों लड़खड़ा कर उठ पाते की प्रिया ने उनके हाथ से जमीन पर गिरा अपना पर्स उठाया और उसमें से एक स्प्रे निकालकर तीनों की आंखों पर जोर से मार दिया तीनों अपनी-अपनी आंखों को मलते जैसे तैसे उठे और बाकी का ,

सारा का सारा सामान वहां पर पटक कर अपनी अपनी बाइक पर सवार होकर भाग निकले।।

प्रिया ने मुड़कर राज को देखा राज हाथ बांधे खड़े प्रिया को मुस्कुराते हुए देख रहा था।।

प्रिया-- तुमने उन बदमाशों को मारा क्यों नहीं ऐसे तो खुद कानपुर के ईतने बड़े गुंडे हो,, यहां पुणे में आकर सारी हेकड़ी निकल गई।।

राज-- हम झगड़ा करना ही नहीं चाहते थे बन्सी इसीलिए।।

हम खुश थे,तुम्हारे साथ8 Full stop इसीलिए लगा वो तीनों भी खुश हो लें ।।अरे हमारा सामान ले जाकर हमें कौन सा गरीब कर जाएंगे पर उन गरीबों का ही थोड़ा भला हो जाता यह सोचकर हम चुप रहे।। पर तुम्हें अचानक क्या हो गया?? इस घड़ी के लिए इतना काहे इमोशनल हो गई??

और इतना सारा फाइटिंग वाइटिंग कहां से सीख गई??

प्रिया-- काहे तुम भूल गए क्या ये घड़ी तुम्हें कब मिला था?? यह घड़ी तुम्हारे बाबूजी लेकर आए थे जिस साल तुम 12वीं पास किए थे,,, याद है, तुम जिम में कितने खुशी के साथ आए थे ये घड़ी हमें दिखाने।।

हमें याद है जब तुम हमें ये घड़ी दिखा रहे थे तुम्हारी आंखों में आंसू आ गए थे हमको पता है राज तुमको घड़ियों का कलेक्शन करने का शौक है और तुम्हारे पास नहीं नहीं में 26 घड़ियां तो होंगी ही,, लेकिन इस घड़ी की कीमत तुम्हारे लिए क्या है यह हम से ज्यादा कौन समझ सकता है??

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राज-- क्या बात है!! हमारी प्रिया को तो हम से जुड़ी सारी बातें याद है।

प्रिया-- भूला तो उन्हें जाता है जो कोई याद हो!! तुम तो हमारे अंदर ही बसे हुए हो राज हमसे अलग थोड़े ही हो कि तुम्हें भूल जाएं हमें तो अपने आप को देख कर भी तुम्हारी ही याद आती थी।।।

और यह फाइटिंग भी तुम्हारे ही चक्कर में सब सीखे।। जब से पुणे आए जिम जाना 1 दिन भी नहीं छोड़ा, रोज नई कसरत करते थे . कभी किक बॉक्सिंग कभी वजन उठाना,, और यही सब की प्रैक्टिस करते करते हमारा हाथ साफ हो गया।।। हालांकि आज तक किसी गुंडे मवाली के ऊपर अपना हाथ साफ किया नहीं,, लेकिन आज तुम्हारी इस घड़ी के लिए हमारे अंदर की पुरानी वाली लड़ाकू प्रिया बाहर निकल आई।।

राज प्रिया की बात सुनकर जोर जोर से हंसने लगा उसे देख प्रिया भी खिलखिलाने लगी दोनों हंसते खिलखिलाते वापस आगे बढ़ गये।।

दोनों ने कुछ आगे पहुंच कर टैक्सी ली और प्रिया के फ्लैट की ओर निकल गये,थोड़ा आगे ही बढ़े थे कि राज का फ़ोन घनघना उठा__

राज-- हेलो कौन??

" राज हम बोल रहे हैं युवराज!! कहाँ हो तुम?? बॉम्बे पहुंच ,

गये होगे ना?? अभी एक घन्टे बाद की तो तुम्हारी फ्लाईट होगी ना?"

युवराज की आवाज़ सुन राज ने एक बार फिर फोन की स्क्रीन देखी,पर वहाँ भैया का नम्बर तो नही दिखा रहा था__

" भैय्या ये किसके नम्बर से बोल रहे हैं आप?"

" वो सब हम बाद में बताएंगे,पहले तुम बताओ बॉम्बे एयरपोर्ट मे हो ना।"

" नही भैया !! हम वो पुणे ही रुक गये थे ,असल मे कुछ काम आ गया था,दो दिन बाद यहाँ से निकलेंगे, हम आप को फ़ोन करने ही जा रहे थे कि आपका फोन आ गया।।"

" अरे ऐसे कैसे! ऐसा कौन ज़रूरी काम आ गया? खैर वो सब छोड़ो तुम अभी के अभी बॉम्बे पहुँचो और वहाँ से दिल्ली की फ्लाईट पकड़ कर चले आओ।।हम भी दिल्ली पहुंच गये हैं ।।

" भैया का बात हो गयी,कुछ तो बताइये ।"

" बस इतना समझ लो,कुछ बहुते जरुरी काम है, अभी किसी को कुच्छो बोलने बतियाने का ज़रूरत नही है,तुरंत जहां हो वहाँ से गाड़ी लो और बाम्बे भागो।"

" पर भैया . "

,

" राज समझो बात को ,तुरंत निकलो !अभी और कुछ नही बता पायेंगे ,,बॉम्बे निकलते ही इसी नम्बर पे हमे फोन कर लेना।"

प्रिया को भी भैया की कुछ कुछ आवाज़ आ तो रही थी लेकिन कुछ समझ नही आ रहा था,उसने राज की तरफ देखा__" क्या हो गया।"

" पता नही प्रिया !! पर भैया बोले हैं तो हमे अभी के अभी निकलना पड़ेगा,कुछ समझ नही आ रहा कि हुआ क्या है।।"

" सबकी तबीयत तो ठीक है ना??"

" पता नही प्रिया पर भैया ने किसी से भी बात करने मना किया है अभी ,तो हम घर पे भी नही पूछ सकते,और तुम तो जानती हो बड़के भैय्या का आदेश हमारे लिये सबसे बड़ा है,तुमको तुम्हारे फ्लैट में उतार कर हमको बॉम्बे निकलना पड़ेगा प्रिया ।"

" हमारा दिल बहुत घबरा रहा है राज !! आज मत जाओ!!"

" अब नही रुक सकते प्रिया ,,भैया का कहा किसी हाल मे नही टाल सकते।"

" पर राज सुबह गणपति मन्दिर मे भी दर्शन नही हुआ ,फिर ,

सोचे थे की परसो मुम्बई में सिद्धिविनायक के दर्शन कर लेंगे उसके बाद फ्लाईट पकड़ेंगे पर तुम अभी निकलोगे तो वो भी नही हो पायेगा।।"

" अरे यार !! तुम भी कहाँ की बात कहाँ जोड़ने लगती हो ।।सुनो निश्चिंत रहो,सिर्फ दर्शन ना कर पाने से भगवान हमसे गुस्सा होके अपने पास नही बुला लेंगे।"

" फिर बकवास शुरु कर दिये,,तुमको मना किये हैं ना राज ऐसी मरने वरने की बात ना किया करो,,अच्छा सुनो मुम्बई पहुंचते तक पूरे रास्ते हमसे बात करते हुए जाना और जब फ्लाईट पकड़ लोगे तब भी बताना जब दिल्ली मे उतर जाओगे तब भी बताना, समझ गये।"

" हाँ समझ गये प्रिया !! इत्ता परेशान ना हो !! तुम तो यार अभी से बिवियों जैसे जासूसी करने लगी।।"

" हाँ तो!! बस फेरे होने से ही बीवी बनूँगी क्या ,मन से तो पति मान ही लिया तुम्हें ।"

तेरे संग संग राह सारी कट जानी ए

मै ता तेरे नाल रहना, मान इन्ना मेरा कहना

मेरी अखियो से होना कदी दूर ना

तेरे बिन …….तेरे बिन …….

तेरे बिन नई लगदा दिल मेरा ढोलना

तेरे बिन नई लगदा दिल मेरा ढोलना

सब छड जाये तू ना मेनू छोडना

,

तेरे बिन नई लगदा दिल मेरा ढोलना .

टैक्सी में बजते गाने के साथ ही प्रिया की आंखों से आंसू भी बहते रहे,,उसके फ्लैट के नीचे उसे उतारने के बाद राज ने उसे एक बार फिर अपनी बाहों मे भर लिया,,,कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद राज ने प्रिया को खुद से अलग किया और वापस टैक्सी में बैठने मुड ही रहा था कि प्रिया ने उसका हाथ पकड़ उसे रोक लिया__" मत जाओ राज!! अब तुमसे अलग होकर जी नही पायेंगे।"

राज ने अपने आंसू छिपाते हुए प्रिया का चेहरा अपने हाथों मे भर लिया__" हम जल्दी वापस आ जायेंगे प्रिया ,हमारा रस्ता देखना।।"

राज ने एक बार प्रिया के माथे को चूमा और वापस टैक्सी में बैठ गया।।

प्रिया तब तक वहाँ खड़ी रही,जब तक टैक्सी उसकी आंखों से ओझल नही हो गयी।।

जब इन्सान के मन में कोई संशय घर कर जाता है तब वो अपने जीवन मे उस समय घटित हर घटना को किसी ना किसी रूप में अपने उसी संशय से जोड़ के देखने लगता है।।

प्रिया ना तो अन्धविश्वासी थी और ना ही लकीर की फकीर . हर एक क्यों? को अपने तथ्यों पे नाप तौल कर ही निर्णय लेती थी पर ये भी सत्य है कि बहुत बार प्रेम इन्सान को कमजोर बना देता है।।

प्रेम में पड़ा इन्सान वो सब करने को बाध्य हो जाता है जिसका पहले कभी उसके व्यक्तित्व से कोई संबंध भी ना रहा हो।।

पहले की तेज़ तर्राट,बात बात पर अपनी ज़बान से आग उगलने वाली प्रिया राज से प्रेम और वियोग के बाद एक अलग ही प्रिया बन चुकी थी,उसकी धीरता, सहिष्णुता उसकी उम्र से कहीं अधिक थी।।

माला का उसके इसी एकमात्र रूप से परिचय था,,माला की नज़र में प्रिया एक धीर गम्भीर शान्ति प्रिय लड़की थी,जो ऑफिस में भी सिर्फ उतना ही बोलती जितना आवश्यक ,

होता था,,पर अब राज के साथ प्रिया को देख माला को उसके और राज के रिश्ते की गहराई का आभास हो गया था।।

प्रिया तब तक वहां खड़ी रही जब तक राज की टैक्सी धूल उड़ाती आंखों से ओझल ना हो गई , उसके बाद भारी मन और भारी कदमों से प्रिया अपने फ्लैट की ओर बढ़ चली।।।

रूम का दरवाजा खोलते ही प्रिया को अकेले सामने खड़े देख माला के माथे पर सवालिया निशान उभर आए उसने तुरंत पूछा _" सर कहां चले गए?"

प्रिया-- युवराज भैया का अचानक फोन आ गया और उन्हें तुरंत दिल्ली के लिए निकलना पड़ा अभी तो टैक्सी से मुंबई जा रहे हैं वहां से फ्लाइट लेकर दिल्ली जाएंगे।

इतना कहते ही प्रिया सोफे पर निढाल होकर गिर पड़ी और रोते-रोते उसकी हिचकियां बन्ध गई।। माला ने तुरंत उसे संभाला दौड़ कर पानी का गिलास ले आई और प्रिया को पकड़कर उसे शांत कराते हुए उसके पास बैठी रही।।

माला-- अरे इतना रोने की क्या बात है प्रिया । संभालो अपने आप को अब आजकल फोन इंटरनेट के जमाने में कोई दूरी तो बीच में रह नहीं गई है ,फोन लगा लो ना सर को।।

प्रिया- जब से टैक्सी में बैठे हैं उसके 10 मिनट बाद से ,

लगातार उन्हें फोन लगा रही हूं उनका फोन लग ही नहीं रहा।।

माला-- अरे नेटवर्क नहीं होगा यार तुम तो जबरदस्ती परेशान हो रही हो।। चलो चल कर कुछ खा लो।।

प्रिया-- अभी तो हमसे कुछ खाया नहीं जाएगा माला,, जब तक राज मुंबई पहुंच कर हमें एक बार फोन नहीं कर लेते।।

तुम परेशान मत हो,, तुम सो जाओ हम अपने कमरे में जा रहे हैं।।

प्रिया जैसे ही अपने कमरे में गई पलंग पर रखें सुबह के सारे शॉपिंग के सामान को देखकर उसका दिल एक बार फिर से डूबने लगा।

उसने सारा सामान उठाकर अलमारी में सलीके से रख दिया और दोनों अंगूठियों को अपनी अलमारी के लॉकर में रख कर उसे लॉक कर दिया।।

कपड़े बदल कर ,हाथ मुंह धोकर अपने बेड पर बैठ कर उसने एक बार फिर राज को फोन मिलाया,, राज का फोन नहीं लगा!!

इधर टैक्सी में बैठने के बाद राज ने तुरंत युवराज भैया को फोन लगाया।।

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भैया ने जो कुछ भी उसे बताया उसके बाद उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।।
 
प्रिंस इधर कुछ समय से जमीन की दलाली का काम कर रहा था।। इसी सिलसिले में अक्सर उसका कई तरह के लोगों से मिलना जुलना हुआ करता था शहर में जमीन का कारोबार धीरे-धीरे बहुत ज्यादा पांव पसार चुका था। यह काम देखने में जितना सीधा साधा था अंदर से उतना ही काला था जमीन माफिया एक तरह से पूरे शहर को अपने अंदर समेट चुका था।।

हर नए व्यक्ति को यही लगता की भूमि क्रय विक्रय करने वाले अपना स्वतंत्र कारोबार कर रहे हैं ऐसे एकाध नहीं कई बिल्डर कई ठेकेदार शहर में अपना अपना ऑफिस डाले पड़े थे।।

प्रिंस के रिश्ते के मामा भी इसी तरह जमीन की ठेकेदारी का काम किया करते थे उन्हीं की संगत में प्रिंस ने इस काम को शुरू किया था।। शुरू शुरू में उसे यह काम बहुत आसान लगा,, कोई भी अच्छी जमीन देख कर उसके लिए ग्राहक जुगाड़ना और फिर जमीन के मालिक से ग्राहक की अच्छी डील करवा कर जो बीच में फायदा मिलता उसका पूरा पूरा लाभ उठाना।।

इस काम में मेहनत तो जरूर थी लेकिन पैसा भी उतना ही था,, दूसरा शिक्षा दीक्षा और डिग्री कि इस काम को करने के लिए कोई आवश्यकता नहीं थी ।इसलिए भी प्रिंस को यह काम बहुत भा गया था

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शुरू में जितने उत्साह से वह इस काम से जुड़ा था उतने ही उत्साह से वह आगे बढ़ता जा रहा था।।

प्रिंस के उत्साह को हवा देने में मामा जी पूरी तरह आगे थे हालांकि मामा जी को भी इस व्यवसाय से जुड़ी बड़ी कठिनाइयों का उतना पता नहीं था ,,पर फिर भी इतना समझते थे कि तालाब में रहते हुए मगरमच्छों से बैर नहीं किया जा सकता।। इसलिए वह अपने ऊपर काम कर रहे हैं भूमि ठेकेदारों को गाहे-बगाहे तोहफे के रूप में कुछ ना कुछ भेंट चढ़ाते रहते थे और खुश रखते थे।।

राज नौकरी लगने के बाद से अपने बैंक में व्यस्त था इसलिए प्रिंस के कामों का लेखा-जोखा उसे भी कुछ अधिक मालूम नहीं था।।। इधर अचानक एक दिन मामा जी ने प्रिंस को एक जमीन का टुकड़ा दिखाया जो एक किसी पुरानी बनी कॉलोनी के बीचों-बीच स्थित था,, उसके आजू-बाजू दो घर थे और वह जमीन का टुकड़ा लगभग 40- 50 साल से अनाथ की तरह पड़ा हुआ था।।

पटवारी कार्यालय से लेकर जिन जिन कार्यालयों में जो जो जानकारियां मिल सकती थी प्रिंस ने उस जमीन के बारे में सारी जानकारियां निकलवाई , और उस जमीन का कोई भी अधिपति पकड़ में नहीं आया इस प्रकार उस बेनामी जमीन को प्रिंस ने अपने मामा के कहने पर एक फर्जी नाम से रजिस्टर करवा कर उस नाम को उस जमीन का मालिक साबित कर दिया।।

और फिर उस मालिक से खुद जमीन खरीदने के फर्जी पेपर तैयार करके उस जमीन को अच्छी ऊंची कीमतों पर किसी दूसरे व्यक्ति के हाथों बेच दिया।।

इस पूरे वाकये में राज का नाम इस प्रकार दाखिल हुआ ,

की जमीन को पहले मालिक से खरीदने और बाद में दूसरे व्यक्ति को बेचने के लिए जहां पर गवाहों की जरूरत थी वहां पर राज ने भी दस्तखत किए थे ,,हालांकि कुछ गलती राज की भी थी क्योंकि उसने दस्तखत करते समय ना तो पेपर की तफ्तीश की और ना ही इस फर्जीवाड़े के बारे में कोई भी पूछताछ की, उसे बातों बातों में प्रिंस ने बस यह कहा कि यह उसके मामा की एक पुरानी जमीन थी जिसे वह उनसे खरीद कर किसी दूसरे को बेच रहा है।। बात प्रिंस की थी इसलिए राज ने कोई अविश्वास नहीं किया और अपना सील साइन कर दिया।।

प्रिंस को भी अपने मामा जी के ऊपर पूरा भरोसा था उसे लगा कि यह वाकई चारों तरफ की नाप जोख में छूटी हुई बची जमीन का टुकड़ा है जिसका असल में कोई भी स्वामी नहीं है और इसीलिए उसने भी राज को कुछ ज्यादा बताने की जरूरत नहीं समझी और उससे दस्तखत ले लिए।।

राज इन सभी बातों से अनजान था अपनी नौकरी में व्यस्त राज को जब पुणे एक टीम के साथ भेजे जाने का प्रस्ताव आया तो वह उस टीम का हिस्सा बनने के लिए पुणे के लिए निकल गया इसी बीच में एक दुर्घटना घट गई।।

राज के मोहल्ले के दूसरी तरफ एक और मोहल्ला था जहां निरमा रहा करती थी वहां पर चौक की पंचायत को पूरा करने के लिए जो पंचों की सभा थी गुड्डा उनका सरदार था।। गुड्डा सालों से मन ही मन राज से जला करता था ।।बहुत पहले जब निरमा और प्रेम के बारे में पता चला था तब गुड्डा अपनी फौज के साथ जिम चला आया था राज से लड़ने . ,

और राज के हाथों एक झापड़ खा कर ही उसे सौ आसमानो के दर्शन हो गए थे और उसके बाद से ही उसने मन ही मन कसम खा ली थी कि कैसे भी हो वो राज की हस्ती मिटा कर रहेगा।।

समय बीतता गया राज की मित्र मंडली भी कहीं ना कहीं किसी न किसी काम में व्यस्त हो गई,, राज खुद अपनी पढ़ाई लिखाई के बाद बैंक में व्यस्त हो गया।।।

गुड्डा और उसकी मित्र मंडली भू माफिया के साथ मिलकर काम करने लग गए गुड्डा खुद भी जमीन की ठेकेदारी के काम और शराब के ठेके से जुड़ गया अपने सारे व्यसनों को पूरा करते हुए भी उसने अपने मन से राज के प्रति बैर को मिटने नहीं दिया . बल्कि पाल पोस कर अपने मन में पलती दुश्मनी को उसने तिल से ताड़ बना लिया।।।।

प्रिंस की बेगानी जमीन की खरीद-फरोख्त वाली बात नहीं खुलती अगर प्रिंस खुद पी पिलाकर गफलत में किसी दिन अनजाने में गुड्डा के किसी दोस्त से सब कुछ बोल ना बैठता,, पर कहते हैं ना विनाश काले विपरीत बुद्धि प्रिंस के साथ भी वैसा ही कुछ हुआ।।

काम के अतिरिक्त दबाव और मिलने वाली अति अतिरिक्त पैसों की गर्मी से प्रिंस ने अपने व्यक्तित्व को भुला दिया।। किसी शाम गुड्डा के किसी चेले के साथ ठेके के बाहर पी पिलाकर उसने वह सब बातें भी बक दी जो उसे कभी नहीं बोलनी चाहिए थी।।

गुड्डा शुरू से ऐसे ही किसी मौके के इंतजार में था गुड्डा के ,

चेले ने जैसे ही गुड्डा को सारी बातें बताई वह खुशी से झूम उठा इस सारे कारनामे में राज का हस्ताक्षर होना ही बहुत था।। रिजर्व बैंक के पदाधिकारी का इतना गैरज़िम्मेदाराना व्यवहार सहज में क्षम्य नही था।।

गुड्डा ने उस जमीन की खरीद-फरोख्त से संबंधित दस्तावेजों के खिलाफ पटवारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कर दी .

और यह शिकायत मुख्य रूप से की गई थी रिजर्व बैंक के ऑफिसर राज शर्मा के खिलाफ।।

पटवारी कार्यालय में रोज-रोज के मिलने जुलने के कारण प्रिंस के कई गुर्गे भी थे जिन्होंने प्रिंस को इस बाबत तुरंत ही सूचना दे दी प्रिंस ने जैसे ही यह सब सुना अपना सिर धुन के रह गया ।

. वह तुरंत भागा भागा युवराज भैया के पास गया और उन्हें सब कुछ बता दिया युवराज ने अपने व्यापारिक और छुटपुट नेताओं से संधि संबंधों का फायदा उठाते हुए पटवारी कार्यालय पर दबाव डलवा कर कुछ समय के लिये उस शिकायत की फाइल को दबवा दिया,लेकिन भविश्य में इस समस्या का समाधान क्या हो सकता है इससे आशन्कित प्रिंस रातों रात अपने घर से गायब हो गया।

दो दिन तक भी जब प्रिंस घर नही पहुंचा तब उसकी खोज मचनी शुरु हुई,, राज तो तब वहां था नहीं, प्रेम भागा भागा युवराज भैया के पास ही पहुंचा और प्रिंस के गायब होने की खबर दी युवराज तुरंत प्रेम के लिए प्रिंस को ढूंढने निकल पड़ा।।

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युवराज का भी असल काम तो ब्याज का ही धंधा था जिसकी वसूली के लिये भी उसके पास कुछ दो तीन लोग अलग से मौजूद थे,, यह ऐसे लोग थे जिन्हें पूरे शहर के चप्पे-चप्पे की खबर थी युवराज को इस चीज का फायदा मिला दो से तीन फोन करते में ही उसे प्रिंस कहां है इस बात की खबर मिल गई वह प्रेम को लिए शहर से बाहर की पुरानी सी खंडहर हवेली में पहुंच गया ।।प्रिंस लगभग 2 दिन से वहां बिना खाए पिए छुपा बैठा था उसकी यह हालत देख युवराज को उस पर तरस आ गया।।

युवराज को शुरू से ही प्रिंस की कोई गलती नहीं लगी थी लेकिन अपने ही मन में सोच सोच कर प्रिंस ने स्वयं को गुनाहगार मान लिया था उसे यह लगने लग गया था कि उसके कारण ही राज के बने बनाए कैरियर पर धब्बा लग सकता है ।।

अपने ही मन से परेशान अपने आप से दुखी प्रिंस अपने आप को सजा दे रहा था युवराज और प्रेम को एक साथ आते देख उसे लगा यह लोग उसे पकड़कर मारेंगे पीटेंगे डरा धमकाएन्गे, और फिर पुलिस के हवाले कर देंगे . इन सब से बचने के लिए वह वहां से उठकर भागने लगा युवराज ने उसे आवाज दी और लगातार समझाने की कोशिश की कि वह उसे माफ कर चुका है और वह इस प्रकरण में प्रिंस कि कहीं पर भी गलती महसूस नहीं करता,, और भागकर आखिरकार प्रेम और युवराज ने प्रिंस को पकड़ लिया रोते-रोते प्रिंस ने युवराज के पैर पकड़ लिये और माफी मांगने लगा।।

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युवराज ने अपने संबंधों का हवाला देते हुए प्रिंस को किसी से भी ना घबराने की सलाह दी और घर वापस लौट जाने को कहा।। बहुत देर बाद रो धोकर अपने मन का बोझ उतारने के बाद, प्रिंस भी घर वापसी के लिए तैयार हो गया ।।प्रिंस प्रेम और युवराज वहां से निकले ही थे कि गुड्डा अपने कुछ गुंडों के साथ उधर से निकला और युवराज और प्रिंस प्रेम को देखकर वहीं रुक गया , युवराज को उसने वहीं खड़े-खड़े धमकी दे डाली __

" कान खोल कर सुन लो प्रिंस जो कांड किए हो ना तुम बहुते बढ़िया किए हो ,,,अब इसके बाद तुम्हारे राज भैया को तुम्हारे युवराज भैया क्या ब्रह्मा भी नहीं बचा सकते अभी भले केस को दबा दिया तो क्या हुआ,, क्या हम बहरे गूंगे हैं जो कुछ ना कर सकेंगे ।।2 दिन के अंदर अंदर उ केस हम फिर नहीं खुलवा दिए तो हमारा नाम गुड्डा नहीं,, समझे ""

प्रिंस शुरू से ही कमजोर दिल था उसने हमेशा से ही अपना सहारा राज में ही ढूंढा था।। उसकी हर कमजोरी को राज ने संबल बनकर सहारा दिया था।। और आज पहली बार उसके कारण उसके प्रिय नायक के व्यक्तित्व पर करारी चोट लग रही थी प्रिंस ये सब सह नहीं पाया ,उसने गुड्डा की शर्ट में छिपा कर रखी कटार छीनी और उस से अपनी गरदन की नस काट ली।।

यह सब इतना अकस्मात हुआ कि किसी को कुछ सोचने का अवसर ही नहीं मिला गुड्डा और उसके साथी यह सब ,

देखते ही वहां से अपनी-अपनी गाड़ियों में भाग खड़े हुए।। शहर से इतनी बाहर युवराज और प्रेम अकेले प्रिंस को तड़पता देख परेशान हो गए,, उन्होंने उसे तुरंत युवराज की गाड़ी में लादा और अस्पताल की ओर भाग चले प्राइवेट अस्पताल में उसे भर्ती करने से मना करते हुए तुरंत ही मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।। वहां से युवराज और प्रेम उसे ले एक सरकारी हॉस्पिटल की तरफ भाग चलें, सरकारी हॉस्पिटल में डॉक्टर सर्जन सब ने तुरंत ही प्रिंस को भर्ती कर लिया और गहन शल्य चिकित्सा कक्ष में उसकी शल्य चिकित्सा प्रारंभ कर दी,, लेकिन बाहर आकर यह भी कह दिया की स्थिति गम्भीर है इसलिए अभी कुछ भी कह पाना मुश्किल है ।।प्रिंस के घर पर उस वक्त कोई नही था,सभी किसी शादी में सम्मिलित होने गांव गये हुए थे इसलिए प्रेम ने युवराज भैया से गुजारिश की कि अभी कुछ समय तक उसके घर पर कुछ नहीं कहा जाए ।।।2 घंटे की मशक्कत के बाद डॉक्टर बाहर आए और कहा कि खून बहना तो बंद हो गया है, ऑपरेशन भी सफलतापूर्वक हो गया है लेकिन फिर भी एक बार अगर दिल्ली एम्स में दिखा दिया जाए तो बेहतर होगा क्योंकि अभी भी, कभी अचानक आंतरिक रक्तस्त्राव शुरू हो सकता है जो मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है यहां पर सुविधाओं का अभाव होने से इसे दिल्ली एम्स में दिखाना बेहतर होगा।। अगले 72 घंटे बहुत ही क्रिटिकल है लेकिन इन्हीं घंटों में उसका एम्स पहुंचना भी जरूरी था युवराज ने बिना समय गंवाये प्रेम और एक डॉक्टर को साथ लिये दिल्ली की ओर प्रस्थान कर दिया ।।

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सब कुछ इतना आनन-फानन हुआ कि युवराज ने अपने घर पर भी किसी को कुछ भी नहीं बताया सबको बस यह कह कर कि दिल्ली कुछ आवश्यक कार्य से जा रहा हूं ,,पैसे एटीएम और चेक बुक लेकर प्रेम के साथ दिल्ली के लिए निकल गया दिल्ली पहुंचने के बाद उसने राज को फोन किया।।

युवराज को यह मालूम था कि राज का पुणे में 5 दिन का काम है और छठवें दिन वह मुंबई से रात की फ्लाइट लेने वाला है उसी समय पर युवराज ने राज को फोन किया और यह कहा कि कानपुर की जगह वह दिल्ली चला आये।। फोन पर प्रिंस की हालत बताना युवराज को सही नहीं लगा इसलिए उसने राज से अधिक कुछ भी नहीं कहा।।

पुणे से टैक्सी में बैठने के बाद राज ने जब युवराज को फोन किया और उससे यह सारी बातें और प्रिंस की गंभीर अवस्था के बारे में पता चला तो राज के पैरों तले जमीन खिसक गई।।।

राज ने प्रिंस को सदैव एक छोटे भाई की तरह ही प्रेम किया था।। अभी भी उसे अपना नाम जमीन में फंसने से कहीं ज्यादा चिंता प्रिंस के स्वास्थ्य को लेकर थी ,भगवान से बार-बार यही मनाते हुए कि किसी भी तरह प्रिंस की जान बच जाये वो मुंबई की ओर कूच कर गया ।।

युवराज भैया से बात करने के बाद थोड़ी देर तक राज को किसी बात का होश ही नही रहा,,उसे पता ही नही चला की भैया से बातें करते कब वो रोने लग गया।।

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बचपन से लेकर अभी तक की सारी बातें राज की आंखों के सामने से घूम गई।।

प्रिंस का हर बात में राज की तरफदारी करना, हमेशा उस का साथ देना, उसके हर कष्ट से स्वयं दुखी होना,, राज की आंखे भिगो गया।।

बचपन में भी कभी जब राज अपने पिता के कोप का भाजन बनता था तो अनिवार्य दंड स्वरूप मिलने वाले चप्पलों के प्रसाद में राज के साथ प्रिंस का भी बराबर का हिस्सा होता था।।

प्रिंस का निस्वार्थ अबाध प्रेम राज की आंखों से अविरल बहता चला गया।।

सारी बातें सोचते सोचते उसे प्रिंस की उन बातों की भी याद आने लगी जब वह जिम में आने वाली प्रिया का पूरा पूरा सहयोग किया करता था।। असल में तो प्रिंस ही था जिसने शुरू से प्रिया को सम्मान की दृष्टि से देखा था . राज तो बहुत बाद में प्रिया का मित्र बना पर जिम में आने के बाद प्रिया और प्रिंस की दोस्ती ही पहले हुई थी ।।

यह सब सोचते ही अचानक उसे प्रिया की याद आ गई उसे याद आया कि उसने टैक्सी में बैठने के बाद से प्रिया से बात ही नहीं की,, ऐसा ध्यान आते ही उसने सीट में पड़े अपने मोबाइल की तरफ देखा और प्रिया को फोन लगाने के लिए मोबाइल उठा लिया।।

सुबह से घूमते फिरते इधर-उधर उधर डोलते उसे फोन को चार्ज करना याद ही नहीं रहा था।। फोन पूरी तरह से ,

डिस्चार्ज होकर बंद पड़ा था ,,उसे बैटरी बैंक का ध्यान आया अपने बैग में उसने बैटरी बैंक को ढूंढा पर वह मिला नहीं ,,उसे समझ आ गया एक रात पहले उसके होटल के कमरे में ही चार्जिंग प्लग में लगा पड़ा बैटरी बैंक छूट गया है।।।

टैक्सी वाले से फोन मांग कर प्रिया को फोन करना उसे सही नहीं लगा ।।अब तो एक ही उपाय था मुंबई के एयरपोर्ट में पहुंचने के बाद ही फोन को चार्ज किया जा सकता था,, और फोन के चार्ज होने के बाद ही प्रिया से बात की जा सकती थी।।

फिलहाल और कोई उपाय ना देख राज ने सीट में पीछे सिर टिकाया और आंखें बंद करके प्रिंस को याद करने लगा।

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मैं तो ना चला था दो कदम भी तुम बिन

फिर भी मेरा बचपन यही समझा हर दिन

छोड़कर मुझे भला अब कहां जाओगे तुम

ये ना सोचा था कभी इतने याद आयोगे तुम

रूठ के हमसे कभी जब चले जाओगे तुम .

राज-- दोस्त ज़रा गाने को बन्द कर दो यार!! मन नही कर रहा,अभी कुछ सुनने का।।

हाऊ शाहेब बोल कर ड्राईवर ने टैक्सी में चलते गाने को बन्द कर दिया।।

"काय पुणे चा नही हे का तुमि" ड्राईवर बातुनी था उसके इस सवाल का जवाब देना मतलब उसके अगले सवाल के लिये तैयार होना था।।

राज ने धीरे से ना बस बोल दिया ,पर तभी ड्राईवर ने कुछ और राग छेड़ दिया।।

किसी सूरत में बचने की राह ना देख राज ने आखिर उसे

गाना चलाने के लिए बोल ही दिया।।

"बजा ले भाई गाना ही बजा ले।।"

एफएम रेडियो को ट्यून कर गाने में मगन ड्राइवर गाड़ी चलाता रहा, मुंबई पुणे हाईवे पर टैक्सी भागती रही ,,दो रातों से जगे राज को धीरे-धीरे ठंडी हवा ने थपकी देकर सुला दिया।।।

नींद में सोए राज ने प्रिंस को लेकर कोई भयानक सपना देखा,,, कहते हैं ना दिमाग में जो चल रहा होता है अक्सर कच्ची नींद में वही सपने के रूप में नजर आता है . पुणे में टैक्सी में बैठने के साथ ही राज प्रिंस के बारे में ही सोच रहा था इसीलिए उसे ही सपने में देखा और घबरा कर उसकी नींद खुल गई तभी गाड़ी एक झटके के साथ ब्रेक के लगते ही मुंबई एयरपोर्ट के सामने रुक गई।।

टैक्सी में बैठने के बाद और युवराज भैया से बात होते ही राज ने अपने टिकट बुक कर ली थी किस्मत की बात थी कि मुंबई एयरपोर्ट में उतरते ही आधे घंटे में उसकी चेक-इन, थी टैक्सी वाले को पेमेंट देकर राज अपना सामान लेकर तुरंत अंदर की ओर भागा।

सिक्योरिटी चेक के बाद राज को अपना फोन चार्ज करना याद आया लेकिन आसपास उस वक्त उसे कोई चार्जिंग पॉइंट नहीं मिला उसकी फ्लाइट का अनाउंसमेंट हुआ और राज अपनी फ्लाइट में सवार दिल्ली के लिए उड़ गया।।

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एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही राज को प्रेम मिल गया प्रेम उसे लिए तुरंत अस्पताल की ओर निकल गया।।

इतनी देर से खुद को संभाले हुए राज ने जैसे ही युवराज भैया से मिलने के बाद आईसीयू में बेहोश पड़े प्रिंस को देखा उसकी आंखों से आंसू बहने लग गए,,, उसके लिए खुद को संभालना मुश्किल हो रहा था प्रिंस को देखकर उसे प्रिंस का हंसता मुस्कुराता चेहरा सताने लगा।।

राज वहां काफी देर तक प्रिंस का हाथ अपने हाथों में थामे बैठा रहा,, उसे पता भी नहीं चला कि कब मिनट घंटों में बदल गये लगभग तीन-चार घंटे बीतने के बाद युवराज भैया आए और उसे उठाकर बाहर ले गए, वैसे इस तरह प्रिंस के साथ किसी को बैठने की चिकित्सकीय अनुमति नहीं थी परंतु क्योंकि प्रिंस का प्राइवेट आईसीयू वार्ड था और दूसरा राज की हालत देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बिना कुछ कहे चुपचाप बैठने के लिए अनुमति दे दी थी।।

जब राज प्रिंस के पास बैठा था तभी प्रिंस के फोन पर किसी का कॉल आया,,प्रिंस का फोन प्रेम के पास ही था,अनजाने नंबर से फोन आने पर प्रेम फोन लिए बाहर चला गया लगभग 10 मिनट बाहर बात करने के बाद प्रेम वापस आकर चुपचाप खड़ा हो गया।

उस वक्त ना उसे किसी ने पूछा कि किसका फोन था और ना ही उसने किसी को बताया।।

डॉक्टर से पता चला कि कुछ मात्रा में आंतरिक रक्तस्त्राव ,

फिर से शुरू हो गया था तथा दिमाग को जाने वाली रक्त वाही नलिका में रक्त की आपूर्ति नहीं होने के कारण दिमाग का एक हिस्सा काम नही कर पा रहा था,, डॉक्टर अपनी तरफ से प्रयासरत थे लेकिन प्रिंस कब तक होश में आएगा?? और उसका दिमाग वापस कब तक दुरुस्त हो पाएगा, यह कहना डॉक्टरों के लिए अभी फिलहाल असंभव था।।

युवराज ने धीरे से राज को उठाया और अपने साथ लिए आईसीयू से बाहर आ गया।। सब आईसीयू के बाहर थे, तभी युवराज के फोन पर किसी नंबर से फोन आया युवराज ने नंबर देखा और उसकी आंखों मे एक क्षण को चमक आ गयी,वो फ़ोन उठाये वहां से बाहर निकल गया कुछ देर बाद वापस आ कर उसने राज और प्रेम से सारी बातें बताई__

" राज तुम्हें अपनी भाभी की मौसी याद है जिन्होंने बचपन में रेखा को गोद लिया था हीरे जवाहरात वाली मौसी, हमारी शादी में भी आई रही।"

" हां भैया याद है हमें, अभी पिंकी की शादी में भी तो आई थी"

" हां हां वही उनके सगे देवर पास के शहर के नेता जी हैं,, हमें पता तो पहले से था लेकिन कभी ध्यान नहीं दिया ।।अभी जब तुम्हारा यह केस हुआ तब हमें अचानक उनका ध्यान आया हमने सबसे पहले उन्हीं को फोन लगाया पर उनके सेक्रेटरी ने बताया कि नेता जी सपरिवार विदेश घूमने गए हुए हैं . तब हमने अपने और बाकी के जान पहचान वालों से तुम्हारे केस की फाइल को दबवा दिया, हमने ,

नेताजी के सेक्रेटरी को यह नहीं बताया था कि हम नेताजी के रिश्ते में क्या लगते हैं।। अभी नेताजी जब वापस आए तब उन्हें उनके सेक्रेटरी ने हमारे फोन के बारे में बताया।।

बड़प्पन देखो उनका हमारा नाम सुनते ही पहचान गए और तुरंत हमें फोन लगा लिया,, अभी हमारे फोन उठाते ही कहने लगे राधेश्याम जी के लड़के बोल रहे हो ना!! हमने जैसे ही कहा हां तो कहते हैं,, अरे दामाद बाबू सेक्रेटरी से बोले काहे नहीं कि आप फोन किए हैं हमको विदेश में ही नंबर मिला देते हुआं ही आप से बात हो जाती कुछ हमारे लायक सेवा हो तो बताइए,, हम तुम्हारे नाम से थोड़ा बहुत बता ही रहे थे की तुम्हे भी चीन्ह डाले ,कहते हैं तुम्हरा वही भाई ऑफीसर बन गया क्या जो हीरो टाईप दिखता है,,हम बोले हाँ एक ही तो भाई है हमारा!! कहते हैं दामाद बाबू तुरंते चले आओ, आमने सामने बैठ के सब बात कर लेंगे,आपके भाई को हम कुछ ना होने देंगे।।

युवराज के चेहरे की प्रसन्नता देख प्रेम और राज के मन से भी एक बोझ उतर गया वैसे प्रिंस की हालत को देखते हुए राज का ध्यान अपने केस की तरफ गया ही नहीं था,,, पर युवराज तो 2 दिन से इसी उधेड़बुन में व्यस्त था आज राज को वहां देखते ही उसे थोड़ी तसल्ली हुई उसने राज और प्रेम को हॉस्पिटल में सब संभाल लेने को कह कर अपने पास पड़े कुछ रुपये और चेक बुक राज के हाथ में रख दी, और अपनी वापसी की टिकट देखने लगा।।

" राज तुम्हारा फोन देना हमारे फोन पर नेट नहीं चल रहा है।"

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युवराज के ऐसा कहते ही राज को अपने फोन का होश आया उसने जेब में से फोन निकाला जो कब से बंद पड़ा था तुरंत प्रेम से चार्जर लेकर वही हॉस्पिटल में चार्जिंग पिन में लगा दिया।। युवराज वापस अपने टिकट के लिए कोशिश करने लगा 2 मिनट बाद फोन के थोड़ा चार्ज होते ही राज ने फोन को जैसे ही ऑन किया एक साथ कई बीप बजने लगी

"इतना किसका मैसेज आ रहा है राज ??"

"मैसेज नहीं भैया यह तो मिस कॉल अलर्ट आ रहा है" प्रेम के ऐसा बोलते ही राज को एकदम से प्रिया का होश आया,उसने तुरंत फ़ोन उठाया उसमें प्रिया की 70 मिस्ड कॉल थी।।

एक ही रात में कितना कुछ बदल गया था कल की रात जहां वह और प्रिया साथ-साथ अपने भविष्य को लेकर सपने बुन रहे थे वही आज सुबह से दोपहर हो गई थी और उसकी प्रिया से बात तक नहीं हो पाई थी उसने समय देखा दोपहर के 3 बज गए थे तभी युवराज भैया ने उसे और प्रेम को कैंटीन में खाना खाने के लिए भेज दिया वो और प्रेम उठकर जा ही रहे थे कि उसके फोन पर रिंग बजने लगी . एक बार फिर प्रिया का फोन था,,, उसने जैसे ही फोन उठाया__

" राज कहां हो?? कल रात से फोन लगा लगा कर परेशान हो गए,, तुम्हारा कोई अता पता ही नहीं है!! दिल्ली पहुंच गए कि नहीं, हमें बताने तक की जरूरत नहीं समझी,,, हम यहां रो-रोकर हलकान हुए जा रहे हैं तुम हो कहां अभी??"

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" अरे बाबा सब बताते हैं ,रुको तो सही!! कल फोन डिस्चार्ज हो गया था, और जब हम होटल से सामान लेकर निकले तो जल्दी में फोन का चार्जर और बैटरी बैंक रूम पर ही भूल गये,, बस उसके बाद अभी तो फोन चार्ज हुआ है और बस तुम्हारा फोन आ गया।।"

" कैसे अचानक दिल्ली जाना पड़ा?? क्यों किया था भैया ने फोन?? अभी तुम हो कहां पर??"

" अरे मेरी मां इतने सारे सवाल ??सब बताते हैं एक-एक करके,,, हम अभी दिल्ली एम्स में है।

" एम्स में कहां हो?"

" पूछ तो ऐसे रही हो जैसे पलक झपक के हमारे सामने खड़ी हो जाओगी कैंटीन में है।"

" फिर झपको अपनी पलकें।।"

" क्या बोल रही हो यार प्रिया मूड थोड़ा ऑफ है हमारा।"

" तो ठीक है पीछे पलटो फिर तुम्हारा मूड ठीक कर देते हैं।।"

राज ने जैसे ही पलट के देखा सामने कंधे पर बैग पैक टांगे प्रिया मुस्कुराती खड़ी थी।

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" अरे तुम यहां कैसे प्रकट हो गई?? कोई जादू चमत्कार जानती हो क्या??

" तुम्हारा नंबर बंद आ रहा था तुम्हें बार-बार फोन लगाने पर भी जब तुम्हारा फोन नहीं लगा तब हमने युवराज भैया के नंबर पर फोन लगाया पर उनका भी फोन बंद आ रहा था ।।तब हमारा एकमात्र सहारा हमारा सबसे प्यारा दोस्त प्रिंस!! हमने उसके नंबर पर फोन लगाया।।

आज सुबह प्रिंस का फोन लग गया फोन उठाया प्रेम ने ।। हमारे पूछने की देर थी कि प्रेम ने हमको प्रिंस की सारी परिस्थिति बता दी हम समझ गए कि युवराज भैया ने इसीलिए तुम्हें अचानक बुलाया है तुम्हारा फोन नहीं लग रहा था इसिलिए हम भी सुबह-सुबह मुंबई पहुंच गये थे,रास्ते से ही पन्द्रह दिन की छुट्टी का मेल सिद्दार्थ सर को भेज दिया।। हमें तो दिल्ली निकलना ही था प्रेम से बात होते ही हमने अपनी टिकट बुक की और हम यहां पहुंच गए।।

प्रिया मुस्कुराने लगी उसे मुस्कुराते देखकर राज के चेहरे पर भी मुस्कुराहट वापस लौट आई "तुम चिंता मत करो राज तुम्हारे प्रिंस को कुछ नहीं होगा हम सब मिलकर उसे बचा लेंगे।"

" प्रिया तुम आ तो गई हो पर तुम यहां रुकोगी कहां?"

राज के इस सवाल का जवाब दिया प्रेम ने "भैया जी आपका फ्लैट तो है ही,, हम और युवराज भैया भी वही तो , Page, In

रुके हैं ।।वही आप और प्रिया भी रुक जाइएगा ।"

" तुम कह तो ठीक रहे हो प्रेम, लेकिन प्रिया का ऐसे अकेले हम तीनों के साथ रहना हमें कुछ सही नहीं लगता।। प्रिया अब तुम मिल चुकी हो हमसे,, शाम की फ्लाइट से वापस लौट जाओ।"

"हम तुम्हें यहां ऐसे अकेले छोड़कर अब नहीं जाएंगे"

" अरे पर भैया क्या सोचेंगे तुम समझती क्यों नहीं?"

" कौन क्या सोचेगा राज किसकी बात कर रहे हो भाई?? अरे प्रिया तुम?? तुम कब चली आई?? कहां रहती हो आजकल और क्या चल रहा है ??तुम तो बड़ी दुबला गई हो भाई??

युवराज को अचानक कैंटीन में देखकर तीनों के तीनों चौक गए।।

" नमस्ते भैया!! हम पुणे में रहते हैं, वही बैंक में नौकरी कर रहे हैं।। राज अभी पुणे आए थे तब उनसे मिलना हुआ था फिर यह अचानक आपके फोन से यहां चले आए ,,तो हमें थोड़ी घबराहट हुई प्रिंस के फोन पर कॉल किया तो प्रेम से सारी बात पता चली प्रिंस की ऐसी हालत सुनकर हम से रहा नहीं गया और हम भी उसे देखने चले आए,, क्या हम कुछ दिन आप लोगों के साथ यहां रह सकते हैं।"

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"हां-हां क्यों नहीं बन्सी!! बचपन से तुम्हें देखा है हमारे लिए तो छोटी बहन जैसी हो,, हमारी बहन मतलब इन लोगों की भी बहन!!बिल्कुल आराम से रह सकती हो लेकिन अपनी अम्मा को बता देना कि तुम दिल्ली आई हुई हो।"

युवराज की बहन वाली बात सुनते ही राज के गले में चाय अटक गई और उसे हल्की खांसी आ गई, और वह उठकर वहां से बाहर चला गया।।

राज ने चुपके से प्रिया को समझा दिया कि घर पे सिर्फ युवराज भैय्या ही थे जिन्हे उन दोनों के बारे में कुछ भी नही पता था।।

कैंटीन से निकलकर सब एक बार फिर प्रिंस के पास चले आए प्रिंस की हालत में कोई सुधार नहीं था वह अब भी बेहोश था उसे देखते ही एक बार फिर राज का चेहरा मुरझा गया राज वही आईसीयू के बाहर लगी कुर्सी पर बैठ गया उसके पास ही प्रिया भी बैठ गयी,युवराज अपना फ़ोन लिये बाहर निकल गया।।

युवराज की रात की टिकट हो गई थी, आईसीयू में मरीज के साथ किसी को भी रुकने की अनुमति नहीं थी,प्रिंस को वैसे भी सारी दवा आई वी चढाई जा रही थी,इसलिये वो सभी लोग एक बार प्रिंस को देख कर घर के लिये निकल गये।।।

राज का प्रिंस को इस तरह अकेले छोड़कर घर जाने का बिल्कुल मन नहीं कर रहा था लेकिन प्रिया के कारण ,

अस्पताल में दोनों का रुकना भी सही नही था।। इसिलिए वह सभी लोग वहाँ से निकल गये और युवराज भैया को एयरपोर्ट में उतारते हुए फ्लैट के लिए निकल गए।।

राज और युवराज का अक्सर दिल्ली में काम पड़ता रहता था जिसके लिए दोनों ही अक्सर दिल्ली आया करते थे,,इसीलिए युवराज ने कभी बहुत पहले एक फ्लैट लेकर यहां पर डाल दिया था अभी उसी फ्लैट में इन लोगों ने अपने रुकने की व्यवस्था कर रखी थी रसोई में एक-दो ब्रैड के पैकेट और मैगी के पैकेट पड़े थे काम चलाऊ दो चार बर्तन थे और चाय और कॉफी बनाने की सामग्री पड़ी हुई थी।।

उन लोगों के वहां पहुंचते ही प्रेम ने घर की थोड़ी बहुत सफाई की और राज नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया नहाकर निकलते ही राज प्रेम को लिए कुछ जरूरी सामान लेने घर से निकल गया।।। जाते-जाते दरवाजे को अंदर से लॉक करने के लिए प्रिया को कह गया,उन लोगों के वापस लौट कर आने तक में प्रिया ने एक बार फिर से पूरे घर की साफ-सफाई करी और नहा कर चाय चढ़ा दी।।

राज बाहर से ही आलू के पराठे पैक करवा कर ले आया था,तीनों ने चाय और पराठे खाये,पर खाते हुए एक बार फिर राज को प्रिंस की याद ने भावुक कर दिया।।

खाने के बाद तीनों साथ ही हॉल मे बैठे प्रिंस को और अपने पुराने समय को याद करते रहे,,प्रेम ने भी उन बातों को याद करते समय प्रिया से अपनी गलती की माफ़ी मांग ली।।

राज जब रसोई में पानी की बोतल भरने गया हुआ ,

था,तभी प्रेम ने प्रिया को यह सच्चाई भी बता दी कि वो राज का पत्र लेकर प्रिया के पास गया ही नही था,और वापस आ कर राज से सब कुछ झूठ बोल गया था।

प्रिंस की हालत देख कर सभी भावुक हो गये थे, सभी को अचानक ही आभास हो गया था की ज़िदगी कितनी क्षणभंगुर है,इसी सब में प्रेम को भी अपने किये का पश्चाताप हो रहा था,,वो पहली बार प्रिया को राज के साथ देख कर प्रसन्न था।। उसे अपनी गलती का एहसास था और इसिलिए उसने सच्चे दिल से प्रिया से माफी मांग ली थी।।

रात गहराती चली गयी पर बातों में भिड़े तीनो दोस्तों की आंखों से नींद गायब थी।।आधी रात बीत जाने पर राज ने प्रिया को अन्दर के कमरे में सोने भेज दिया और खुद प्रेम के साथ बाहर हॉल मे ही लेट गया।।

दूसरे दिन सुबह सुबह ही तीनो वापस अस्पताल पहुंच गये,,पूरा दिन तीनों का वहीं बीत गया,शाम होते होते राज को वापस प्रिया की चिंता सताने लगी,उसे प्रिया का इस तरह उनके फ्लैट पर रुकना पसंद नही आ रहा था,आखिर उसने एक उपाय निकाल ही लिया।।उसने बन्टी से बात की,बन्टी की एक पुरानी दोस्त दिल्ली में रहती थी ,राज ने बन्टी से कह कर प्रिया के रहने का इन्तेजाम उसकी दोस्त के घर पर करा दिया।।

शाम मे राज प्रिया को छोड़ने निकल गया,अभी दोनो आधे रास्ते भी नही पहुँचे थे कि प्रेम का फोन आ गया" भैय्या जी तुरंत वापस आ जाइये प्रिंस को होश आ गया है।।"

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खुशी से राज ने टैक्सी को वापस घुमवा लिया।।

राज और प्रिया भागे भागे प्रिंस के कमरे में पहुँचे,, उन दोनों को साथ देख प्रिंस इतनी पीड़ा में भी हल्के से मुस्कुरा दिया,,राज ने दौड़ कर प्रिंस का हाथ पकड़ लिया__" पगला गये थे क्या?? क्या ज़रूरत थी इत्ता बड़ा कदम उठाने की . आइंदा ऐसा किया ना जान ले लेंगे साले तुम्हारी।।"
 
राज प्रिंस के गले से लग के रो पड़ा,प्रिया राज के पीछे खड़ी उसके कंधे पर हाथ रखे उसे ढाँढस बंधाती रही,,कुछ समय बाद डॉक्टर ने उन लोगों को बाहर इन्तजार करने कह कर बाहर भेज दिया।।

" राज ,सुनो!!"

" हाँ कहो ना प्रिया !!"

" हमें अपने से दूर मत भेजो ना,हम बन्टी भैया की उन दोस्त को जानते तक नही,,हम तुम्हे बिल्कुल परेशान नही करेंगे,,सच्ची!!

" अरे यार !! तुम समझती नही हो ना,,यही तो मुसीबत है।।कल जब हमारे या तुम्हारे घर पे पता चलेगा तब ?? सब क्या सोचेंगे तुम्हारे बारे मे।

" वो सब हम नही जानते,हमे बस इतना पता है कि हम इस मुसीबत के समय तुम्हें अकेले नही छोड़ सकते,,प्लीज़ राज,,मान जाओ ना।।"

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तभी नर्स ने इशारे से उन लोगों को बुलाकर घर से प्रिंस के लिये दाल का पानी और पतले फुल्के लाने को कहा,वैसे तो सभी मरीजों के लिये अस्पताल से ही खाना आता था,पर आई सी यू के मरीज़ों के लिये अलग से खाने की विशेष व्यवस्था नही हो पाने के कारण ही प्रिंस के लिये घर से खाना लाने कहा गया था।।

' देखा भगवान भी यही चाहतें हैं हम तुम्हारे साथ रहें,चलो अब हमारे साथ घर चलो ,हम जल्दी से खाना बना लेंगे।"

राज प्रेम को वहाँ छोड़ कर प्रिया के साथ फ्लैट पर वापस आ गया।।

हाथ पैर धोकर प्रिया रसोई में आ गयी,,एक दिन पहले ही राज ने कुछ तीन चार तरह की दालें,कुछ मसाले ,थोड़े चावल ,आटा, आलू सब्जियां और तेल वगैरह खरीद लिया था।।

वो जब रसोई मे आया तो सारा सामान फैलाये प्रिया कभी किसी तो कभी किसी दाल को उठा कर देख रही थी।।

" क्या हुआ? अब तक तुम्हारी दाल चढ़ी नही??"

" हम बस देख रहे थे राज की कौन सी दाल बनानी है।"

" ऐसा करो बन्सी मूँग की दाल बना लो।"

राज को कुछ कुछ समझ तो आ गया था पर जान बूझ कर ,

अंजान बनते हुए उसने प्रिया को भर नज़र देखा और बाहर जाते जाते उसे चाय भी बनाने कहता गया।

" क्या हुआ बन्सी जी!! आपके कुकर की तो सिटी ही नही बज रही ??"

प्रिया ने राज की बात सुनी और बाहर चली आयी

" क्यों तुम्हारे घर मे चाय कुकर में पकाते हैं??"

अपने रेशमी बालों को बेतरतीबी से क्लच किये सामने के बालों को हाथो से हटाती हैरान परेशान प्रिया को देख राज की हँसी छूट गयी।।

" मैडम जी चाय तो पतिली में ही बनाते हैं,पर हाँ हमारे यहाँ दाल कूकर में बनाई जाती है, अब तक तो चढ़ा दी होगी ना।"

प्रिया को समझ ही नही आ रहा था कि वो अपनी बात कैसे कहे,बडे संकोच से उसने राज से कहा__ राज बस एक छोटी सी मदद कर दो,हमें ना दाल बनानी नही आती,बस वो बनाना बता दो प्लीज़।"

" अभी तो बड़ी बड़ी डीँगे हांक रही थी हॉस्पिटल में,,,और हाँ एक मिनट,पुणे में तो तुम्हे देख बिल्कुल ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत सुव्यवस्थित गृहिणी हो,वहाँ तो रसोई में बहुत कुछ कर रही थी।"

" हम कहाँ कुछ कर रहे थे राज,इन दो दिनों में याद कर के ,बताओ,हमने अपने हाथ से चाय के अलावा और क्या खिलाया पिलाया।"

" हां यार!! चाय बस तो पिलाई तुमने ,,तो तुम तीन साल से पुणे मे क्या खा के जिंदा थी मेरी माँ??"

" पुलाव" प्रिया खिलखिला उठी।।

" बस " राज की आंखे फटी रह गयी,तभी ऐसी कमज़ोर हो गयी

" नही , कभी कभी मैगी और ब्रेड भी खा लेते थे,और हाँ पोहा भी। असल मे तुम्हारे साथ साथ हमारा खाना पीना भी छूट गया राज,,बस तुम्हे याद करते और चाय बना बना के पीते रहते।

" वाह इससे अच्छा तो हमे याद कर कर के कचौड़ियाँ बनाना सीख लेतीं कम से कम हमें बना के तो खिला पाती।।"

" वो अब तुम सीखा देना।।"

" हम्म चलो हटो,अब तुम ऐसा करो चाय चढाओ तब तक हम दाल पका लेते हैं,,वैसे दाल बनाना कोई रॉकेट साईंस भी नही है यार।

" हमें पता है राज पर हमारे साथ एक छोटी सी समस्या है,,जैसे लोगो के साथ होता है ना किसी एक रंग को नही देख ,

पाते,या सीधी और आड़ी रेखाओं को एक साथ नही समझ पाते,बस वैसा ही कुछ, हमारे साथ है।।"

" मतलब क्या बन्सी??

" मतलब हम मूँग की दाल और उरद की दाल मे अन्तर नही कर पाते।"

राज का हँस हँस के बुरा हाल था,उसने पूछा तुअर दाल तो पहचानती हो, हाँ मे सर हिलाते हुए प्रिया अन्दर गयी और अपने हाथ मे कुछ पकड़े बाहर ले आयी,राज के सामने आकर उसने अपनी मुट्ठी खोल दी __" ये देखो !! ये रही तुअर दाल।"

राज पेट पकड़ के हँसते हँसते प्रिया के सामने हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया__ " ये चने की दाल है मैडम।।"

उसे हँसते देख प्रिया भी हंसने लगी,तभी कूकर ने सीटी दे दी।।

चाय छान कर प्रिया दो कप में ढाल कर ले आई ।।

" चाय पीकर रोटियाँ बना ली जायेँ ।"

" जो हुक्म मेरे आका ।" प्रिया के ऐसा कहते ही एक बार फिर राज हंसने लगा।।

चाय पीने के बाद राज रसोई में चला गया उसने बर्तन में आटा निकाला और प्रिया की तरफ बढ़ा दिया __ प्रिया तुम आटा लगाओ तब तक हम तवा चढ़ाते हैं और दाल को घोट के छौंक लगा देते हैं।।

" वाह जी वाह ऐसा क्यों!! खुद आसान काम ले लिया और हमें कठिन काम दे दिया आटा तुम लगाओ हम बाकी के काम करते हैं।।"

" समझ गया मतलब तुम्हें आटा लगाना भी नहीं आता।"

प्रिया ने चुपके से हां में सर हिला दिया हंसते हुए राज ने आटा लगाया फटाफट फुलके सेंके,,दाल और फुलकों को पैक किया,,, और प्रिया को लिए अस्पताल के लिए निकल गया।।

प्रिंस को अपने हाथों से खाना खिलाते हुए राज की आंखें बार-बार छलक आ रही थी ,, इसके पहले जब भी कुछ

किया प्रिंस ने ही किया था राज के लिए . अपने जीवन में पहली बार राज को मौका लगा था प्रिंस के लिए कुछ करने का, इसीलिए वह किसी तरह की कोई कमी नहीं चाहता था . प्रिंस को खिला पिला कर उसके पास थोड़ी देर समय गुजार कर वो तीनों वापस फ्लैट के लिए निकल गए..

अगली सुबह प्रिया सबसे पहले जाग गयी,नहा धो कर उसने चाय चढ़ाने के लिये बरतन गैस पर चढ़ाया पर उससे गैस जली नही,हैरान परेशान उसने जाकर राज को जगाया__ राज उठो ना !! गैस खतम हो गयी है!!"

राज आंखे मलते उठ कर बैठ गया__क्या कहा?? गैस खतम हो गयी,अरे ऐसे कैसे?"

" हमने सोचा तुम्हें चाय बनाकर जगाएंगे बिल्कुल फिल्मी स्टाइल में!! पर हमारी किस्मत ,,गैस खतम हो गयी,और सिलेंडर लगाना हमे आता नही।।"

राज जम्भाई लेते रसोई में पहुंचा ,उसने जैसे ही सिलिंडर के नॉब पर नज़र डाली उसे एक बार फिर हँसी का दौरा पड़ गया।।

" प्रिया ! बहुत बड़ी वाली लपड़ झपड़ हो यार तुम भी, गैस नीचे से बन्द थी,कम से कम देख तो लेना था।।हमारी नींद खराब कर दी,,हम तो सोच रहे कैसे निभेगी तुम्हारी हमारी अम्मा के साथ,,कहाँ हमारी अम्मा सुपर पर्फेक्ट और कहाँ हमारी प्रिया ।।"

" पर्फेक्टली इम्पर्फेक्ट!! यही कहना चाहते हो ना।" हँसते हुए प्रिया ने कहा तो हाँ में सर हिलाते हुए राज वापस हॉल ,

में जाकर अपने बिस्तर में घुस गया।।

दोपहर जब तीनों अस्पताल में थे तभी युवराज भैया भी वहां चले आए।। युवराज भैया के साथ रेखा का छोटा भाई नाहर भी था।। नाहर ने भी अपने पिता के समान वकालत पढ़ी हुई थी और अपने पिता के मार्गदर्शन में केस लड़ना शुरू कर रहा था।।

युवराज नाहर के साथ ही नेता जी से मिलने गया था और वहां से राज के केस के बारे में कुछ जरूरी तैयारियां करके वापस लौटा था।

शाम को फ्लैट में आने के बाद नाहर और युवराज एक साथ बैठकर राज को कुछ समझाने लगे प्रेम और प्रिया भी वहीं बैठे थे नाहर बार-बार इस बात पर जोर दे रहा था कि राज इस बात से इनकार कर दे कि उसने उन कागजातों पर साइन किए हैं और पूरा का पूरा मामला प्रिंस के ऊपर डाल दें कि प्रिंस ने फर्जी और जाली दस्तखत करके यह सारा कांड किया है।।

नाहर-- देखो राज तुम सरकारी नौकरी में हो अगर तुम इस सब केस में फंसते हो तो नौकरी तो जाएगी ही,, जिंदगी भर के लिए तुम्हारे चरित्र पर जो धब्बा लगेगा उसे भी मिटाना मुश्किल होगा।।

प्रिंस का ऐसा कुछ तो है नहीं,,, व्यापारी आदमी है उसे तो जिंदगी भर यह सब झेलना ही है, तुम विश्वास करो हमारा हम उसे भी फसने नहीं देंगे वह अपने ऊपर सब कुछ ले लेगा कुछ थोड़ा बहुत मुचलका देकर उसे जमानत मिल जाएगी।। ,

पर अगर तुम इस केस में फंसते हो तो तुम्हारी जमानत भी मुश्किल हो जाएगी।।

युवराज-- नाहर सही कह रहा है राज!! अब हमारे पास यही रास्ता है,, नेताजी ने भी यही सलाह दी थी।। उन्होंने यही कहा है कि आप पहले अपने भाई को बचा लो ,,उसके बाद प्रिंस को इस केस से निकाल लिया जाएगा तुम प्रिंस की बिल्कुल चिंता मत करो हम उसे कुछ नहीं होने देंगे।।

नाहर और युवराज घंटों बैठकर राज को इस बारे में समझाते रहे राज चुपचाप सर झुकाए बैठे सब कुछ सुनता रहा।।

थोड़ा और समय बीत जाने पर नाहर वहां से अपने दोस्त के फ्लैट पर रात में रुकने के लिए चला गया जाते-जाते राज को रात भर सोच के सुबह जवाब देने को कह गया,, राज के जवाब के हिसाब से ही नाहर को सारे कागजात तैयार करने थे।।

युवराज भैया भी नाहर के साथ निकल गए थे,, उनके पीछे से फ्लैट में राज प्रेम और प्रिया रह गए थे प्रेम भी लगातार राज को वही समझा रहा था कि जो भी नाहर ने कहा उसे मान लेने में ही राज की भलाई है,,,राज क्या करूं क्या ना करूं के पसोपेश में पड़ा हुआ था उसने प्रिया की तरफ देखा__

" हमारा मन नहीं मान रहा प्रिया हम प्रिंस को ऐसे धोखा नहीं दे सकते कल को कहीं ऐसा हुआ कि यह लोग प्रिंस को नहीं ,

बचा पाए तो उसे जेल हो जाएगी।"

"हम समझ रहे हैं राज तुम परेशान मत हो कुछ सोचते हैं।।"

" अरे ओ करम चंद की अम्मा तुम तो कुछ आईडिया ना ही दो तो अच्छा है तुम्हारे आईडिया कुछ संभालने के लिए नहीं सिर्फ बिगाड़ने के लिए होते हैं और ये हम से ज्यादा कौन जान सकता है??"

प्रेम के ऐसा कहते ही प्रिया और राज ने प्रेम को देखा और दोनों को वापस हंसी आ गयी।।

" अब आपका हंसना हो गया हो तो कुछ खाना भी बना लिया जाए" राज के ऐसा बोलते ही प्रिया ने राज को देखा __" देखो राज हम आज तुम्हें सब सच सच बता देना चाहते हैं . हमें ना दाल बनानी आती है ना सब्जियां बनानी आती है,, और ना ही रोटियां . आटा लगाना तो हमारे लिए बहुत टेढ़ी खीर है,, यह सब बस तुम सिखा देना फिर हम सब कुछ कर लेंगे।।।

" तो बचा क्या देवी जी जब यह सब भैया जी ही सिखाएंगे तो इससे अच्छा खाना भी वही बना लेंगे।।"

" अबे प्रेम ,हमे बहुत कुछ सिखाना पड़ेगा यार तुम्हारी भौजी को, बस किताबी ज्ञान भर है बाकी सब में बौड़म है।।"

" आपकी किस्मते खराब है भैया जी ,का करोगे?"

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प्रेम की बात पर हंसते हुए राज ने प्रिया को देखा और बोला "अभी शादी तय बस हुई कि तुमने अपनी कमियां एक-एक कर बतानी शुरू कर दी,,, पता नहीं शादी के दिन तक में क्या क्या पता चलेगा हमें ।।"

" भैया जी एक बार और सोच लीजिए शादी प्रिया से ही करना है या कोई और अच्छी लड़की ढूंढे आपके लिए।"
 
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