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फेडेड ब्लू डेनिम और सफेद शर्ट पे दोसा कबाना के गॉगल्स चढ़ाये राज भैय्या ने जब, कॉलेज के अन्दर बाईक पे एन्ट्री मारी तो बिल्कुल धूम वाला समा बान्ध दिया,
लड़कों की आंखों मे जलन थी,तो लड़कियों की आंखों में तारीफ और उत्सुकता कि आखिर इतना हैंडसम बंदा मिलने ,
किससे आया है।।
प्रेम उस कॉलेज का ना होकर भी कॉलेज के चप्पे चप्पे से वाकिफ था,वो पार्किंग में गाड़ी खड़ी करवा कर भैय्या जी को लिये कैन्टीन में आ गया।।
निरमा के मामा जी को नाना जी की बीमारी के कारण वापस जाना पड़ा,और निरमा एक बार फिर प्रिया के साथ कॉलेज आने जाने लगी थी,पर कॉलेज के अलावा कहीं भी निकलने की मनाही के कारण निरमा जिम नही जा पा रही थी।।
एक तयशुदा समय पर निरमा और प्रिया कैन्टीन आते थे,पहले कैन्टीन में भकाभक समोसे आलू गुंडे पेलने वाली प्रिया आजकल सिर्फ वर्जिन मोइतो ( नीम्बू पानी) से काम चला रही थी,आज भी दोनो अपने तय समय पर कैन्टीन को चल दी।।
इन्तजार का फल मीठा होता है,ये राज को अपने जीवन मे उस दिन पहली बार समझ आया।।पूरे तीन दिन के बाद उसे प्रिया दिखाई दी थी,दूर से पीले कुर्ते पे गुलाबी दुपट्टा ओढ़े नीचे सर किये चुपचाप आती प्रिया को देख पहले पहल तो राज को ज़ोर का गुस्सा आ गया__" कॉलेज आने का समय है,इधर उधर जा सकती हैं मैडम पर जिम आने का समय नही . अरे कुछ काम है ना आओ! पर एक फ़ोन करने में भी महारानी जी का हाथ दुख गया।"
पर प्रकट में राज ने ऐसा कुछ नही कहा,हाँ ध्यान से देखने पर उसे प्रिया बहुत थकी सी दुखी सी लगी।।
प्रिया और निरमा के वहाँ पहुंचते में प्रेम कूद कर निरमा तक पहुंच गया,दोनो आंखों ही आंखों मे मुस्कुरा उठे,उन्हें सादर अपनी सीट तक लाकर निरमा के लिये एक कुर्सी खींच प्रेम उसके बाजू वाली कुर्सी पर बैठ गया,तब जाकर कहीं प्रिया ने राज को देखा__" अरे राज तुम यहाँ कैसे??कॉलेज में कुछ काम था क्या?"
" अरे कहाँ?? भैय्या जी तो तुम्हे ही . " प्रिंस की बात को आधे मे ही काट कर राज ने अपनी बात प्रिया के सामने रख दी।।
" हाँ वो एक लड़के के एडमिशन की बात करने आये थे,तो सोचा तुम्हारा भी हाल चाल ले लें ।कैसी हो प्रिया ??"
राज के "कैसी हो प्रिया "पे जाने क्यों प्रिया की आंखें छलक आईं जो राज के सिवा कोई ना देख सका।।
जब कोई रोता होता है तब उस समय अगर कोई सांत्वना से भरा हाथ कंधे पर रखे और चुप कराने की कोशिश करे तो आंसू और भी ज्यादा ज़ोर शोर से बहने लगते हैं,वैसे ही जब कोई सबसे बड़ा शुभचिंतक हितैषी ऐसे समय पर हाल पूछे जब वाकई हाल अच्छा ना हो तो दिल का दर्द आंखों के रास्ते बहना लाजिमी है।।बस वही बन्सी के साथ हुआ।।
पर प्रिया दिल की कच्ची लड़की नही थी,उसे अपना दुख दुनिया को दिखाना सख्त नापसंद था,इसिलिए उसने निरमा से भी अपने दिल का हाल नही बताया था,पर आज राज को एकबारगी सब कुछ बताने को वो व्याकुल हो उठी,पर यहाँ ,
कैन्टीन में सबके सामने उसके लिये कुछ भी बोलना बताना बहुत कठिन था,उसने एक पूरी नज़र राज पे डाली, राज ने आंखों से ही बन्सी के मन की बात पढ़ ली,वो समझ गया कि प्रिया उसे कुछ बताना चाह रही है।।
इतनी देर में एक दूसरे में खोये प्रेम और निरमा अपनी बातों में लगे थे,निरमा अपने घर पर उसके ऊपर हो रहे अत्याचारों को बढ़ा चढ़ा कर प्रेम से बता रही थी,कि कैसे वो जब भी शाम को छत पर प्रेम की एक झलक पाने के लिये चढ़ती है तो पीछे से उसकी अम्मा ठीक उसी वक्त सूखे कपड़े निकालने छत पर पहुंच जाती है,कैसे जब निरमा रेडीयो पर__
" आते जाते हँसते गाते सोचा था मैंने मन में कई बार,वो पहली नज़र हल्का सा असर करता है क्यों इस दिल को बेकरार . " सुनते हुए प्रेम को याद कर कर के मुस्कुराती है तो उसकी अम्मा आ कर रेडियो पे भजन वाला चैनल सेट कर जाती है__
" राधे राधे रटो चले आयेंगे बिहारी।।"
कैसे जब निरमा खिलती चांदनी में खिड़की पर खड़ी होकर चांद मे अपने प्रेम का चेहरा देख देख शर्माती है तब उसकी अम्मा आ कर खट से खिड़की बन्द कर जाती है, कैसे जब लौकी और तोरी की सब्जियों को देख कर निरमा मुहँ बनाती है तो अम्मा ताना मार जाती है कि ' हाँ अब हमरे हाथ का कुछु काहे भाये,जो बना रहे चुपचाप खा लो,जब अपना घर ,
अपनी गिरस्ती होगी तो पका लेना अपने मन का।।"इसी तरह के तानों उलाहनो के बीच जीवन कैसा कठिन हुआ पड़ा है और अब प्रेम ही है जो निरमा के जीवन के बिखरे रंग समेट कर उसके जीवन के कैनवास को एक खूबसुरत तस्वीर मे बदल सकता है।।
ये प्रेमी जोड़ा अपने में लीन, दीन दुनिया से बेखबर था,राज भैय्या ने ये नोटिस कर लिया ,उन्होनें प्रिंस को पानी की बोतल, लाने भेजा और अपनी कुर्सी प्रिया की तरफ खींच ली।।
" अब बताओ क्या हुआ?? जिम क्यों नही आ रही आजकल??"
राज की गहरी आवाज़ और उससे भी गहरी ये बात सुन कर प्रिया विहल हो गई
" यहाँ नही बता पायेंगे।।"
" फिर कहाँ?? बोलो,, कहीं बाहर मिलना चाहती हो।"
प्रिया ने आंखें उठा कर राज को देखा और हाँ मे सर हिला दिया
" कहाँ?? रॉयल पैलेस आ जाओगी अकेले??
प्रिया ने फिर हाँ में सर हिला दिया।।प्रिया की चुप्प्पी ने ,
राज के मन मे हाहाकार मचा दिया,आखिर ऐसी कौन सी गुम चोट खा ली जो इतनी चुपचाप सी हो गई,कहाँ तो प्रिया को अधिक बोलने पर टोकना पड़ता था और कहाँ आज हाँ भी बोलने के लिये मुहँ नही खोल रही।।
राज का मन ऐसे कचोटने लगा कि कुछ भी कर के प्रिया के दुख को दूर करना ही है,उसे ऐसी गुमसुम नही देख सकता।।प्रिंस के पानी की बोतल लेकर आते ही राज उठ गया।
" ठीक है फिर हम चलते हैं अभी!! अपना ध्यान रखना प्रिया ।।"
" अरे जिस काम से आये थे,वो तो कर लो।।एडमिशन ऑफिस उधर है।" प्रिया ने एक तरफ को इशारा कर दिया,उसकी उंगली की दिशा में देखने के बाद मुस्कुराते हुए राज ने प्रिया को देखा_
" हम जिस काम से आये थे,वो हो गया प्रिया,कल शाम 4 बजे मिलतें हैं फिर,,आ तो जाओगी ना।।"
हाँ मे सर हिला के प्रिया चुपचाप खड़ी राज को जाते देखती रही।।
रात में राज अपने कमरे की खिड़की पे खड़ा बाहर खुले आसमान में चमकते चांद को देख सोच रहा था,हो सकता है प्रिया भी इस वक्त अपनी खिड़की पे खड़ी चांद देख रही हो,चलो अच्छा है इसी चांद के बहाने ही सही निगाहें तो मिल ,
रही हैं ।।
कहीं दूर एक गाना बज रहा था_
" सुनो किसी शायर ने ये कहा बहुत खूब ,
मना करे दुनिया लेकिन मेरे मेहबूब
आ ही जाता है जिस पे दिल आना होता है
हर खुशी से हर गम से बेगाना होता है।
प्यार दीवाना होता है मस्ताना होता है . "
लड़कों की आंखों मे जलन थी,तो लड़कियों की आंखों में तारीफ और उत्सुकता कि आखिर इतना हैंडसम बंदा मिलने ,
किससे आया है।।
प्रेम उस कॉलेज का ना होकर भी कॉलेज के चप्पे चप्पे से वाकिफ था,वो पार्किंग में गाड़ी खड़ी करवा कर भैय्या जी को लिये कैन्टीन में आ गया।।
निरमा के मामा जी को नाना जी की बीमारी के कारण वापस जाना पड़ा,और निरमा एक बार फिर प्रिया के साथ कॉलेज आने जाने लगी थी,पर कॉलेज के अलावा कहीं भी निकलने की मनाही के कारण निरमा जिम नही जा पा रही थी।।
एक तयशुदा समय पर निरमा और प्रिया कैन्टीन आते थे,पहले कैन्टीन में भकाभक समोसे आलू गुंडे पेलने वाली प्रिया आजकल सिर्फ वर्जिन मोइतो ( नीम्बू पानी) से काम चला रही थी,आज भी दोनो अपने तय समय पर कैन्टीन को चल दी।।
इन्तजार का फल मीठा होता है,ये राज को अपने जीवन मे उस दिन पहली बार समझ आया।।पूरे तीन दिन के बाद उसे प्रिया दिखाई दी थी,दूर से पीले कुर्ते पे गुलाबी दुपट्टा ओढ़े नीचे सर किये चुपचाप आती प्रिया को देख पहले पहल तो राज को ज़ोर का गुस्सा आ गया__" कॉलेज आने का समय है,इधर उधर जा सकती हैं मैडम पर जिम आने का समय नही . अरे कुछ काम है ना आओ! पर एक फ़ोन करने में भी महारानी जी का हाथ दुख गया।"
पर प्रकट में राज ने ऐसा कुछ नही कहा,हाँ ध्यान से देखने पर उसे प्रिया बहुत थकी सी दुखी सी लगी।।
प्रिया और निरमा के वहाँ पहुंचते में प्रेम कूद कर निरमा तक पहुंच गया,दोनो आंखों ही आंखों मे मुस्कुरा उठे,उन्हें सादर अपनी सीट तक लाकर निरमा के लिये एक कुर्सी खींच प्रेम उसके बाजू वाली कुर्सी पर बैठ गया,तब जाकर कहीं प्रिया ने राज को देखा__" अरे राज तुम यहाँ कैसे??कॉलेज में कुछ काम था क्या?"
" अरे कहाँ?? भैय्या जी तो तुम्हे ही . " प्रिंस की बात को आधे मे ही काट कर राज ने अपनी बात प्रिया के सामने रख दी।।
" हाँ वो एक लड़के के एडमिशन की बात करने आये थे,तो सोचा तुम्हारा भी हाल चाल ले लें ।कैसी हो प्रिया ??"
राज के "कैसी हो प्रिया "पे जाने क्यों प्रिया की आंखें छलक आईं जो राज के सिवा कोई ना देख सका।।
जब कोई रोता होता है तब उस समय अगर कोई सांत्वना से भरा हाथ कंधे पर रखे और चुप कराने की कोशिश करे तो आंसू और भी ज्यादा ज़ोर शोर से बहने लगते हैं,वैसे ही जब कोई सबसे बड़ा शुभचिंतक हितैषी ऐसे समय पर हाल पूछे जब वाकई हाल अच्छा ना हो तो दिल का दर्द आंखों के रास्ते बहना लाजिमी है।।बस वही बन्सी के साथ हुआ।।
पर प्रिया दिल की कच्ची लड़की नही थी,उसे अपना दुख दुनिया को दिखाना सख्त नापसंद था,इसिलिए उसने निरमा से भी अपने दिल का हाल नही बताया था,पर आज राज को एकबारगी सब कुछ बताने को वो व्याकुल हो उठी,पर यहाँ ,
कैन्टीन में सबके सामने उसके लिये कुछ भी बोलना बताना बहुत कठिन था,उसने एक पूरी नज़र राज पे डाली, राज ने आंखों से ही बन्सी के मन की बात पढ़ ली,वो समझ गया कि प्रिया उसे कुछ बताना चाह रही है।।
इतनी देर में एक दूसरे में खोये प्रेम और निरमा अपनी बातों में लगे थे,निरमा अपने घर पर उसके ऊपर हो रहे अत्याचारों को बढ़ा चढ़ा कर प्रेम से बता रही थी,कि कैसे वो जब भी शाम को छत पर प्रेम की एक झलक पाने के लिये चढ़ती है तो पीछे से उसकी अम्मा ठीक उसी वक्त सूखे कपड़े निकालने छत पर पहुंच जाती है,कैसे जब निरमा रेडीयो पर__
" आते जाते हँसते गाते सोचा था मैंने मन में कई बार,वो पहली नज़र हल्का सा असर करता है क्यों इस दिल को बेकरार . " सुनते हुए प्रेम को याद कर कर के मुस्कुराती है तो उसकी अम्मा आ कर रेडियो पे भजन वाला चैनल सेट कर जाती है__
" राधे राधे रटो चले आयेंगे बिहारी।।"
कैसे जब निरमा खिलती चांदनी में खिड़की पर खड़ी होकर चांद मे अपने प्रेम का चेहरा देख देख शर्माती है तब उसकी अम्मा आ कर खट से खिड़की बन्द कर जाती है, कैसे जब लौकी और तोरी की सब्जियों को देख कर निरमा मुहँ बनाती है तो अम्मा ताना मार जाती है कि ' हाँ अब हमरे हाथ का कुछु काहे भाये,जो बना रहे चुपचाप खा लो,जब अपना घर ,
अपनी गिरस्ती होगी तो पका लेना अपने मन का।।"इसी तरह के तानों उलाहनो के बीच जीवन कैसा कठिन हुआ पड़ा है और अब प्रेम ही है जो निरमा के जीवन के बिखरे रंग समेट कर उसके जीवन के कैनवास को एक खूबसुरत तस्वीर मे बदल सकता है।।
ये प्रेमी जोड़ा अपने में लीन, दीन दुनिया से बेखबर था,राज भैय्या ने ये नोटिस कर लिया ,उन्होनें प्रिंस को पानी की बोतल, लाने भेजा और अपनी कुर्सी प्रिया की तरफ खींच ली।।
" अब बताओ क्या हुआ?? जिम क्यों नही आ रही आजकल??"
राज की गहरी आवाज़ और उससे भी गहरी ये बात सुन कर प्रिया विहल हो गई
" यहाँ नही बता पायेंगे।।"
" फिर कहाँ?? बोलो,, कहीं बाहर मिलना चाहती हो।"
प्रिया ने आंखें उठा कर राज को देखा और हाँ मे सर हिला दिया
" कहाँ?? रॉयल पैलेस आ जाओगी अकेले??
प्रिया ने फिर हाँ में सर हिला दिया।।प्रिया की चुप्प्पी ने ,
राज के मन मे हाहाकार मचा दिया,आखिर ऐसी कौन सी गुम चोट खा ली जो इतनी चुपचाप सी हो गई,कहाँ तो प्रिया को अधिक बोलने पर टोकना पड़ता था और कहाँ आज हाँ भी बोलने के लिये मुहँ नही खोल रही।।
राज का मन ऐसे कचोटने लगा कि कुछ भी कर के प्रिया के दुख को दूर करना ही है,उसे ऐसी गुमसुम नही देख सकता।।प्रिंस के पानी की बोतल लेकर आते ही राज उठ गया।
" ठीक है फिर हम चलते हैं अभी!! अपना ध्यान रखना प्रिया ।।"
" अरे जिस काम से आये थे,वो तो कर लो।।एडमिशन ऑफिस उधर है।" प्रिया ने एक तरफ को इशारा कर दिया,उसकी उंगली की दिशा में देखने के बाद मुस्कुराते हुए राज ने प्रिया को देखा_
" हम जिस काम से आये थे,वो हो गया प्रिया,कल शाम 4 बजे मिलतें हैं फिर,,आ तो जाओगी ना।।"
हाँ मे सर हिला के प्रिया चुपचाप खड़ी राज को जाते देखती रही।।
रात में राज अपने कमरे की खिड़की पे खड़ा बाहर खुले आसमान में चमकते चांद को देख सोच रहा था,हो सकता है प्रिया भी इस वक्त अपनी खिड़की पे खड़ी चांद देख रही हो,चलो अच्छा है इसी चांद के बहाने ही सही निगाहें तो मिल ,
रही हैं ।।
कहीं दूर एक गाना बज रहा था_
" सुनो किसी शायर ने ये कहा बहुत खूब ,
मना करे दुनिया लेकिन मेरे मेहबूब
आ ही जाता है जिस पे दिल आना होता है
हर खुशी से हर गम से बेगाना होता है।
प्यार दीवाना होता है मस्ताना होता है . "