शिल्पा जतिन और राघव भागदौड़ करके की डॉक्टरों से सलाह लेकर एक ही नतीजे पहुँचते कि जितनी जल्दी हो सके उनका ऑपरेशन हो जाना चाहिए।
मयंक भी ऑपरेशन के लिए तैयार हो गया था, डॉक्टर ने मयंक के कुछ नयी रिपोर्ट निकाली थीं।वही रिपोर्ट लेकर राघव आया था।
मयंक दो दिन तुम्हारा ऑपरेशन है। फाइनल डेट आ गई है।मैं ठीक तो हो जाऊँगा ना शिल्पा..? हाँ मयंक तुम बिल्कुल ठीक हो जाओगे।
चिंता मत करो हम सब की दुआएं तुम्हारे साथ है।सब अच्छा होगा भगवान पर भरोसा रखो। पापा आपको अभी डर लगता है..?
मैं हूँ ना..! देखो मुझे डर नहीं लगता मैं तुरंत डॉक्टर से सुई लगवा लेता हूँ वंश मासूमियत से बोला।नहीं बेटा पहले डर लगता था।
पर अब बिल्कुल डर नहीं लगता क्योंकि मेरा बहादुर बेटा जो मेरे पास है। शिल्पा एक बात बोलूँ..? क्या यह दो दिन मैं वंश के साथ रह सकता हूँ।
मैं उसे जी भरके प्यार करना चाहता हूँ, दिन-रात उसके साथ रहना चाहता हूँ । क्या हम सब लोग दो दिन साथ रह सकते हैं।
क्या पता दो दिन बाद क्या हो..? इस बात पर शिल्पा चुप हो जाती है। और जतिन देखने लगती है। हाँ बेटा क्यों नहीं, हम सब लोग कल सुबह ही तुम्हारे घर आते।
दो दिन कोई काम नहीं होगा।हम सब तुम्हारे साथ ही रहेंगे। बहुत दिन हो गए सब ने मिलकर कोई मस्ती भी नहीं की।
यह दो दिन फुल एंजॉय..! सच्ची पापा शिल्पा खुश होकर बोली। हाँ बेटा इन चार सालों में हम लोग खुशियाँ मनाना ही भूल गए।
हम कल आ रहे हैं। मयंक खुश हो जाता है। ठीक है फिर मैं कल के लिए तैयारी शुरू करता हूँ,हम फुल मस्ती करेंगे जतिन फोन रख देता है।
मयंक राघव को फोन करता है। हैलो राघव मैं चाहता हूँ,दो दिन हम सब लोग साथ रहे। वैसे भी तुम्हारी शादी में मैं आ नहीं पाऊँगा।
क्यों न हम गीत संगीत से भरी मस्ती करें। शिल्पा भी आ रही है, मम्मी पापा को भी बुलाया है । तुम और अंशु भी दो दिन के लिए आ जाओ, हम सब साथ रहेंगे।
ठीक है मयंक..जैसा तुम चाहो। हम लोग आते हैं, शिल्पा अपनी फैमिली के साथ मयंक के घर पहुँच जाते हैं।
राघव की और से शिल्पा, चिंटू संध्या और मौसी जी लड़के , वाले बन जाते हैं। अंशु की और से मयंक,वंश, जतिन और रेवती।सब मिलकर बहुत मस्ती करते हैं।
शिल्पा और अंशु ने किचन संभाल लिया था।दो दिन कब बीत गए पता ही नहीं चला। मम्मा इंडिया में कितना मज़ा आता है।अब हम वापस नहीं जाएंगे।
हाँ बेटा अब हम वापस नहीं जाएंगे। यहीं रहेंगे अपनों के बीच अपनों के साथ।अब आप दादी के साथ खेलो, मैं और नानू पापा को हॉस्पिटल ले जाते हैं।
शिल्पा जाने से पहले मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। क्या तुम मेरे साथ आ सकती हो..? ऐसी क्या बात है मयंक.. शिल्पा ने पूछा? अच्छा चलो। शिल्पा मयंक के साथ कमरे में चली जाती है।
मयंक के साथ कमरे में पहुँच के शिल्पा बोली, मयंक हम लेट हो रहे हैं।कहो क्या कहना है। मैं तुम्हें एक बार गले लगाना चाहता हूँ।
मयंक की आँखों से आँसू बरस पड़े। मुझे बहुत डर लग रहा है शिल्पा,सब छूट रहा है। तुम माँ वंश पता नहीं फिर मिल पाऊँगा।
बस एक बार गले लग जाओ मेरे.. मयंक बाहें फैलाकर बोला।कल मैं लौट पाऊँगा या नहीं, नहीं जानता।पर शायद तुम्हारा अहसान मुझे मौत से लड़ने की ताकत देता रहेगा।
मयंक.!! शिल्पा रोते हुए मयंक से लिपट गई। तुम्हें कुछ नहीं होगा मयंक,दोनों एक-दूजे से अलग नहीं होना चाहते थे। , मयंक चलो बेटा देर हो रही है जतिन आवाज लगाते हैं।
मयंक चलें..? शिल्पा खुद को सयंत करती है। मयंक हामी भर देता है। बाहर आकर संध्या को गले लगाकर, चलता हूँ माँ।बेटा सब अच्छा होगा,मेरा विश्वास कहता है।
बाय पापा..!!लव यू .. वंश मयंक के पास आकर बोला।लव यू टू माई डियर, मैं जल्दी वापस आऊँगा। ओके पापा।
शिल्पा, राघव जतिन और मयंक अस्पताल के लिए निकल गए। संध्या की आँखों से आँसू बह निकले। संभालिए आँटी अंशु संध्या को संभालते हुए बोली।
सर बिल्कुल ठीक हो जाएंगे। बेटा मेरा दिल अभी से बैठा जा रहा है।तू एक काम कर मुझे भी वहाँ ले चल।पर आँटी सर ने आपको आने से साफ मना किया है।
वो तो जिद्दी है..कभी बात नहीं मानता।पर अब मैं नहीं रुक सकती.. मुझे भी मेरे बेटे के पास जाना है। दीदी मैं भी चलूँ..? नहीं छोटी तू रेवती जी के साथ रुक।
अंशु संध्या जी सही कह रही हैं,वो माँ हैं,भला कैसे घर बैठ सकती हैं। फिर यहाँ रहकर तो और बेचैन हो जाएंगी। तुम उन्हें ले जाओ।
जी आप ठीक रही हैं। चलिए आँटी मैं आपको अस्पताल ले चलती हूँ। अंशु संध्या को लेकर चली जाती है। रेवती वंश को लेकर वहीं रुक जाती है।
संध्या जी अस्पताल पहुँची तो मयंक ऑपरेशन के लिए जा रहा था।माँ आप..? मैंने मना किया था ना..? फिर भी आप , आ गई।
बहुत जिद्दी हैं आप.. तेरी माँ हूँ कैसे रुक सकती थी तुझे यहाँ छोड़कर.. संध्या डॉक्टर से हाथ जोड़कर,प्लीज मेरे बेटे को ठीक कर देना डॉक्टर।
आप लोग ऊपर वाले से प्रार्थना कीजिए,हम लोग अपना काम करते हैं। कोशिश करेंगे सब अच्छा हो।
तीन घंटे ऑपरेशन चला, डॉक्टर आकर बताते हैं। बधाई हो ऑपरेशन तो सफलता पूर्वक हो गया ।पर सही मायने में सफलता मिली है या नहीं..?यह मयंक के होश आने पर पता चलेगा।
मतलब..? शिल्पा ने परेशान होते हुए पूछा। मतलब यह ट्यूमर बहुत डीप था। मयंक के दिमाग पर उसका कितना गंभीर असर पड़ा है...वह चिंताजनक है.? कहीं वो अपनी याददाश्त न खो बैठे..?
शिल्पा की खुशी काफूर हो गई। कहीं मयंक मुझे और वंश को भूल गया तो यह सोचकर उसकी आँखों में आँसू आ गए।अब तो वंश भी उससे दूर नहीं रह सकता।
सब ठीक होगा बेटा तू चिंता मत कर.. संध्या बोली।हाँ सब अच्छा होगा बेटा जतिन शिल्पा से बोले।
राघव, अंशु तुम लोगों को शादी के कई काम हैं, तुम दोनों जाओ अपने काम देखो।
नहीं ठीक है हम रुकते हैं ना राघव ने कहा। नहीं राघव अब बहुत समय हो गया तुम लोग जाओ, आराम करो। अंशु के , घर पर सब चिंता कर रहे होंगे।
हम्म ठीक है,हम चलते हैं,अपना ध्यान रखना, कोई काम हो फोन करना ।राघव और अंशु भी चले गए। पापा आप माँजी को लेकर घर चले जाओ,थोड़ा आराम कर लो।
नहीं बेटा जब-तक मयंक को होश नहीं आता, संध्या जी का रुकना जरूरी है। क्या पता सही में वो हमें भूल गया तो..?अपनी माँ को तो पहचान लेगा।
हम्म सही कहा पापा..! शिल्पा का मन हो रहा था,वो जोर-जोर से रोने लगे।हे भगवान ये कैसी परीक्षा ले रहो हो मेरी। मयंक को पाने की खुशी देते-देते, उसके दूर होने का डर देने लगे।
अब जब मैं फिर से मयंक को खोना नहीं चाहती तो उसके भूलने का डर सताने लगा।तभी नर्स डॉक्टर को बुलाने भागी। यह देख सभी घबरा गए।
क्या हुआ सिस्टर..?आप इतनी जल्दी में? सब ठीक तो है..? मयंक ठीक है ना, उसको कुछ हुआ तो नहीं..? शिल्पा ने घबराकर पूछा।
नर्स बोली, चिंता मत कीजिए सब बढ़िया है। मयंक सर को होश आ रहा है। इसलिए डॉक्टर को बुलाने जा रही हूँ। नर्स डॉक्टर को लेकर वापस रूम में चली गई।
शिल्पा की घबराहट बढ़ती जा रही थी।बैठ जा बेटा,क्यों चिंता कर रही है..?सब अच्छा होगा।
डॉक्टर सिन्हा आकर कहते हैं,सब बढ़िया है, मयंक अपनी , माँ से मिलना चाहता है।आप सभी एक-एक करके उससे मिल सकते हैं।
संध्या तेजी से मयंक के पास चली जाती हैं।मेरा बेटा तू ठीक है न..?हाँ माँ मैं ठीक हूँ। तेरे आशीर्वाद ने मुझे नयी ज़िंदगी दी है माँ।
चल अभी बातें नहीं आराम कर.. संध्या ने प्यार से डपटते हुए कहा।बाहर शिल्पा मन ही मन,पक्का मुझे भूल गया है मयंक.तभी मुझसे मिलने को नहीं कहा।
तभी संध्या बाहर आकर कहतीं हैं।जा बेटा तू भी मिल ले मयंक से।माँजी मयंक ने कहा..? नहीं उसने नहीं कहा, मैं कह रही हूँ।
शिल्पा का दिल बैठ गया। जिसका डर था वहीं हुआ उसने एक बार भी मेरा नाम नहीं लिया।शिल्पा डरते-डरते मयंक के पास पहुँच गई।
कैसे हो मयंक..हम्म ठीक हूँ। मयंक का रूखा-रूखा-सा जवाब सुनकर शिल्पा का दिल टूट गया।ठीक है आप रेस्ट करो मैं चलती हूँ।
शिल्पा उठकर जाने के लिए मुड़ी तो आँसू छलके गए। मुझे भूल गए मयंक शिल्पा दरवाजे की ओर आँसू पोछते हुए जाने लगी।
बस इतना ही प्यार करती हो मुझसे..? मयंक पीछे से बोला। शिल्पा चौंककर मुड़ी तो मयंक उसे देखकर मुस्कुरा उठा।
मयंक..!!! तो आपको ऐसी हालत में भी मजाक सूझ रहा , था। आपको क्या पता मैं आपसे कितना प्यार करती हूँ। आपने तो मेरी जान ही निकाल दी, कहते हुए शिल्पा रोने लगी।
तुम्हारे मुँह से यही सुनना चाहता था शिल्पा। इसलिए छोटा-सा झूठ बोल दिया। सॉरी माफ़ कर दे यार.. आपको इतनी आसानी से माफी नहीं मिलने वाली।
शिल्पा रोते हुए बोली।बस भी करो शिल्पा बहुत दर्द दिया है तुम्हें,रोक दो बहने से इस दर्द के सैलाब को। अब एक भी आँसू बर्दाश्त नहीं है मुझे।
बस अब बातें नहीं आराम करो। मैं मांँ और पापा को घर भेज देती हूँ। मैं यहीं बाहर बैठी हूँ।
शिल्पा बाहर आकर पापा के गले लग गई।पापा मयंक ठीक है,वो कुछ नहीं भूला। यह देख जतिन समझ गए शिल्पा के दिल में क्या है।
यह तो बहुत खुशी की बात है। जतिन मयंक के पास जाकर जेब से पैसे निकालकर मयंक के सिर पर घुमाकर वार्ड बॉय को देते हैं।पूरे स्टॉप को मिठाई बांट दो।
चलिए संध्या जी अब आप घर चलिए। शिल्पा मयंक की देखभाल में दिन-रात एक कर देती है।आज मयंक को छुट्टी मिलने वाली थी।
राघव और चिंटू दोनों अस्पताल में मौजूद थे।वंश घर पर अपने पापा का इंतजार कर रहा था। डॉक्टर से सलाह-मशवरा करने के बाद तीनों घर निकल गए।
, रेवती जी जरूर आपसे पिछले जन्म का कोई रिश्ता है मेरा। इतनी बड़ी विपदा में आप लोगों के साथ और प्यार हमें सहारा देता रहा।
नहीं संध्या जी!!यह ऊपर वाले की मर्जी थी। मयंक इतनी बड़ी तकलीफ़ से जूझ रहा था।यह उसकी मर्जी थी तभी तो शिल्पा यहाँ आई और समय पर मयंक को इलाज मिला,आज वो ठीक है।
सही कहा रेवती जी..!! नहीं तो मयंक इस बीमारी को कभी किसी पर जाहिर नहीं करता।लो आ गया मेरा बेटा..!छोटी आरती की थाली लेकर आ।
पापा की आरती मैं उतारूँगा दादी..! अबे तू इतना छोटू-सा है,तू रहने दें चिंटू ने वंश को छेड़ते हुए कहा। जतिन ने वंश को गोद में उठा लिया।
अब वंश सबसे बड़ा हो गया।लाओ भाई वंश को देदो आरती की थाली।वंश खुश होकर मयंक की आरती उतारने लगता है।
संध्या ने रीता से मयंक की देखभाल के लिए बात करली थी। उन्हें मालूम था, शिल्पा मयंक के घर आने के बाद यहाँ नहीं रुकेगी।
शिल्पा इससे मिलो यह रीता है। मेरी बेटी ही समझो इसे, इसके कारण आज मैं चल-फिर रही हूँ। बहुत सेवा की है इसने मेरी,मयंक को भी भाई की तरह संभाला है।
तुम तो अब अपने घर चली जाओगी। रीता को सब समझा , देना, कैसे और कब कौनसी दवा लेनी है । जी माँजी.!!
मयंक अब मुझे चलना चाहिए शिल्पा मयंक से बोली।यहीं रुक जाओ ना शिल्पा..? मयंक हम अलग हो चुके हैं,ऐसे में यहाँ रुकना शोभा नहीं देता।
तुम अभी भी नाराज हो..?मत जाओ शिल्पा। मुझे फिर से छोड़कर नहीं जाओ मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।
तुम चाहते हो मैं यहाँ रुकूँ..? उसके लिए तुम्हें माँ-पापा से अनुमति लेनी होगी। उसके लिए तुम्हें ठीक होना पड़ेगा मयंक।हम बिना शादी किए साथ नहीं रह सकते।
चलती हूँ.. शिल्पा चली जाती है।माँजी कोई भी जरूरत हो तो फोन करना। दो-तीन मैं बहुत व्यस्त हूँ, राघव की शादी है फिर हम लोग मिलने आते हैं।
शिल्पा और शिल्पा की फैमिली राघव की शादी में व्यस्त हो गए।राघव अकेला था इसलिए जतिन ने उसकी शादी की सभी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली थी।
वंश को शादी के फंक्शन देखकर बहुत मजा आया। उसने चिंटू के साथ मिलकर खूब मस्ती की। शादी की मस्ती में वंश मयंक को भूला था।
राघव और अंशु विवाह बंधन में बंध गए थे। एक दिन वंश सुबह-सुबह जिद्द करने लगा। मम्मा मुझे पापा के पास जाना है।
हम्म किसी दिन चलेंगे बेटा.!पर मुझे अभी जाना है।अब तो पापा ठीक हो गए होंगे।
, हम ऐसे नहीं जा सकते बेटा..! आपके पापा जब हमें लेने आएंगे तभी हम उनके यहाँ जाएंगे अभी आप खेलो।शिल्पा वंश को बहला फुसलाकर कर भेज देती है।
मयंक शिल्पा के लिए बहुत बेचैन हो रहा था। उसने जतिन को बुलाया था। मयंक क्या हुआ.? तुमने मुझे यहाँ अकेले क्यों बुलाया है।
पापा में अपने किए पर बहुत शर्मिंदा हूँ।भगवान ने मुझे मेरी गलतियों के लिए माफ़ कर दिया, इसलिए मुझे दूसरी ज़िंदगी देदी।
अब मुझे मेरी ज़िंदगी सौंपकर मुझे माफ़ करदो पापा। मुझे मेरी शिल्पा और वंश देदो ।पर बेटा मैं कौन होता हूँ शिल्पा की ज़िंदगी का फैसला लेने वाला।
एक बार फैसला लिया वो ग़लत साबित हो गया।।अब शिल्पा जो चाहे जैसा चाहे,हम उसके फैसले में शामिल हैं। चलता हूँ, शिल्पा से बात करता हूँ।
जतिन शिल्पा से बात करते हैं।तेरा क्या फैसला है बेटा..? पापा अगर मयंक सम्मान के साथ मुझे अपनी पत्नी बनाकर ले जाए,तो मैं उसके घर जाऊँगी।
ऐसे वहाँ बार-बार जाना मुझे पसंद नहीं है।अभी जाती हूँ तो आसपास के लोग कैसी-कैसी नजरों से देखते हैं। मुझसे सहन नहीं होता।
आँटी अब मयंक सर बिल्कुल ठीक हैं रीता बोली।अब मेरी जरूरत नहीं है मैं कल से नहीं आऊँगी। मयंक सर को सिर्फ , यह दवा और एक महीने तक लेनी है।
रीता चली जाती है।माँ मैं शादी करना चाहता हूँ..? मयंक ने सुबह-सुबह संध्या को झटका दिया। शादी..!! किससे और क्यों..? अभी तो शिल्पा वापस आ गई है।
शिल्पा ने तुझे माफ़ कर दिया.. इतना सुंदर बेटा है तेरा..? फिर अचानक यह शादी..? संध्या ने परेशान होते हुए पूछा।हाँ माँ शिल्पा ने मुझे माफ़ कर दिया।
पर अब वो मेरी पत्नी नहीं है,वो यहाँ नहीं रह सकती।यह बात मेरे दिमाग से कैसे निकल गई। मैं खुशी में इतना पागल हो गई कि इतनी बड़ी बात भूल ही गई।
मैं अभी ही रेवती जी और जतिन जी से बात करती हूँ। दोनों की मँजूरी पाकर शादी की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं।राघव और अंशु शादी की सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लेते हैं।
शिल्पा और मयंक एक बार फिर विवाह के बंधन में बंध जाते हैं। शिल्पा दुल्हन बनकर फिर उसी घर में गृह प्रवेश कर रही थी।
जहाँ से कभी बेइज्जत होकर निकली थी।पूरे सम्मान के साथ मयंक के साथ अपने घर में कदम रखते हुए खुशी के आँसू छलक पड़े।
सबकी ज़िंदगी में खुशियाँ लौट आई थीं। संध्या जी मंदिर में दिए जला रही थी। भगवान से प्रार्थना कर रही थी। अब मेरे बच्चों की ज़िंदगी में भरपूर खुशियाँ देना प्रभू।
दोनों की आँखों से बहुत दर्द का सैलाब बहा है।अब खुशी भरे , सपने सजा देना।चल छोटी आज बहुत दिनों बाद चैन की नींद आएगी।
तुम दोनों भी आराम करो।वंश आज दादी के पास कहानी सुनेगा है ना वंश..?हाँ वो मंकी वाली अधूरी रह गई थी दादी। गुड नाईट मम्मा-पापा वंश संध्या के साथ उनके रूम में चला गया ।
मयंक अब तो कोई पारुल हमारे रिश्ते को तबाह नहीं करेगी..? शिल्पा ने मयंक के गले लगते हुए पूछा।हम्म कह नहीं सकता.. मयंक उसे छेड़ते हुए बोला।
मयंक!! शिल्पा गुस्से से तिलमिलाई।अरे बाबा मजाक कर रहा हूँ।अब तो मैंने मेरी भी पॉवर ऑफ अटॉर्नी तुम्हारे हाथ में सौंप दी है शिल्पा।
यह सब करके मरना है क्या..? मयंक हँसते हुए बोला।हम्म यह बात तो सही कही मयंक अब मैं चुपचाप रोकर नहीं बैठने वाली,तो बचके रहना मुझसे, दोनों इस बात पर खिलखिलाकर हँस पड़े
समाप्त