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“तुम मिस्टर रामनाथन को ब्लैक मेल कर रही थी ?”
“आपको किसने बताया ?”
“उन्होंने खुद बोला है । तुम उन्हें ब्लैक मेल कर रही हो । तुम्हें पता ही है, मैं उसकी तलाश में था जिसने तुम्हें ड्रग्स केस में फँसाने की कोशिश की है । मेरी छानबीन से पता चला कि शनिवार दोपहर को 1 बजे मिस्टर रामनाथन जी तुम्हारे फ्लैट में गए थे ।” कहते हुए मैं एक पल के लिए रुका फिर आगे बोला, “पर वहाँ वह तुम्हें फँसाने के लिए तुम्हारे कमरे में ड्रग्स रखने के लिए नहीं गए थे, बल्कि तुम्हारे साथ मुकर्रर हुई ब्लैकमेलिंग की फ़ाइनल किस्त, जो कि 8 लाख रुपए थी, वह देने के लिए गए थे । बोलो, मैंने कुछ गलत कहा क्या ?”
“नहीं, तुमने सही कहा ।”
“तो तुमने मुझसे ये बात क्यों छुपाई कि तुम उन्हें ब्लैक मेल कर रही हों । मैंने सोचा भी नहीं था कि तुम इस तरह से ऐसा काम भी करती हो ।”
“क्योंकि इसमें बताने जैसा कुछ नहीं था । वैसे भी मैंने नहीं सोचा था कि वह मुझे इस तरह से फँसाने की कोशिश करेंगे ।”
“तुम भूल रही हो कि तुम उन्हें ब्लैक मेल कर रही थी । तुमसे छुटकारा पाने के लिए उसने ऐसा किया होगा ।”
“पर इस तरह से भी वह मुझसे छुटकारा तो नहीं पा सकते थे ना । वैसे आपने एक बार भी ये नहीं सोचा होगा कि मैंने ऐसा क्यों किया था । मैं रामनाथन जी को ब्लैक मेल क्यों कर रही थी, कुछ बताया उन्होंने ?”
“हाँ ! बताया था । तुम अक्सर उन्हें लाइन देती थी और जब वह तुम्हारे जाल में फँसकर एक दिन तुम्हारे फ्लैट में गए, तुम बाथरूम से जानबूझकर उन्हें उकसाने के लिए सिर्फ एक तौलिए में बाहर निकली तो उन्होंने तुम्हारे साथ... ।” कहते हुए मैंने अपनी बात अधूरी छोड़ दी और आगे कहा, “तुमने उस घटना का वीडियो बनाया और फिर वीडियो को पुलिस में देने की धमकी देकर तुम हर महीने उनसे 20 हजार देने की माँग की । तब से ये ब्लैकमेलिंग का सिलसिला चल रहा था, जिसको खत्म करने के लिए तुमने एकमुश्त 8 लाख रुपए की माँग की थी ।”
“अगर आप बुरा ना मानो तो मैं एक बात पूछ सकती हूँ ?” उसने कहा ।
“हाँ, पूछो ।”
“आप मर्दों को ऐसा क्यों लगता है कि लड़की अगर छोटे कपड़े पहनती है, आप लोगों से हँस-हँसकर बात करती है, तो आप लोगों को लाइन दे रही है ? बोलो ।”
‘मैंने ऐसा कब कहा ?” मैं उसके इस सवाल से हड़बड़ा गया था ।
“क्यों ? अभी थोड़ी देर पहले तो आपने ही कहा ना कि मैं उन्हें लाइन देती थी और इस तरह से मैंने उन्हें अपने जाल में फाँस लिया ।”
“मैं...” मैं फिर हड़बड़ाया, फिर बात को संभालते हुए कहा, “ये मैंने नहीं, उसने कहा था ।”
“मुझे पता है सर, आप मेरे बारे में ऐसा नहीं सोचते ।”
‘तुझे क्या पता, मैं क्या सोचता हूँ ?’
“उन्होंने आपको ये तो बताया कि मैं उन्हें लाइन देती थी, पर ये नहीं बताया कि मैं उन्हें अंकल कहती हूँ । और शायद उनको पता नहीं हो तो बता देना कि अंकल उन्हें कहते हैं जो बाप की उम्र का होता है । मैं मिनी ड्रेस पहनती हूँ, उनसे हाय-हैलो करती हूँ, इसका मतलब ये तो नहीं कि मैं उन्हें लाइन देती हूँ । उनकी बेटी जो मेरी ही हमउम्र है, वह भी तो ऐसे ही कपड़े पहनती है । सबसे हँस-हँस कर बात करती है । इसका मतलब ये तो नहीं कि वह भी सबको लाइन देती फिरती है ।” वह गुस्से में बोली ।
“तुम ठीक कह रही हो ।”
“आपको उन्होंने ये तो बताया कि हम एक दिन लिफ्ट में मिले थे । मैंने उनसे हँसकर बात की थी और अपने घर आने का निमंत्रण दिया था । पर मुझे ये नहीं मालूम था कि वह बुड्ढा ठरकी थोड़ी देर बाद ही फ्लैट में आ जाएगा, वरना मैं उस समय नहाने के लिए नहीं जाती । और देखो, अंदर आने के लिए उसने कोई बेल नहीं बजाई, बल्कि उसने फ्लैट की उस चाबी का गलत इस्तेमाल किया जो मैंने उन्हें किसी आपातकालीन स्थिति के लिए दी थी । बिना कोई आवाज किए वह मेरे कमरे में घुस गया । मैं बाथरूम से निकली ही थी कि मेरे कुछ समझने से पहले ही वह मुझ पर टूट पड़े थे । मेरे विरोध करने पर और ये बोलने पर कि मैं चिल्ला पड़ूँगी, तब कहीं जाकर उन्होंने मुझे छोड़ा था । और वह सब रिकॉर्ड हुआ उस कैमरे में जो मैंने सेफ़्टी के लिए अपने रूम में लगाकर रखा हुआ था ।” कहते हुए वह रुकी फिर उसने आगे कहा, “फिर भी मैंने उनको कुछ नहीं बोला और माफ कर दिया था, इसलिए उनकी हिम्मत और भी बढ़ गई थी । दो दिन बाद उन्होंने फिर से मेरे साथ बदतमीजी करने की कोशिश की थी । वह मुझसे मिलने मेरे फ्लैट में आए थे । उस समय भी मैं अकेली थी । मुझे लगा कि वह मुझसे उस दिन के लिए माफी माँगने आए है, पर उन्होंने तो मेरा हाथ पकड़ लिया था और फिर से जबरदस्ती करने लग गए । तब कहीं जाकर मैंने उनको धमकी दी थी, अगर उन्होंने फिर कभी मेरे साथ कुछ गलत करने की कोशिश की तो मैं उस दिन का रिकॉर्डेड वीडियो पुलिस को सौंप दूँगी । मेरी बात सुनकर उनके होश उड़ गए थे और मेरे बिना कुछ कहे, खुद आगे आकर उन्होंने मुझे 20 हजार रुपए दिये थे । तब मुझे उनसे बचने का यही आइडिया आया कि मैं हर महीने उनसे पैसे माँगती रहूँ, आखिर फ्री के पैसे किसको बुरे लगते हैं ?”
‘साला, बुड्ढा ठरकी ।’
“ओह्ह, तो ये बात थी ।”
“हम्म । राज जी, मैं आज के जमाने की लड़की हूँ, पर इसका मतलब ये नहीं है कि एक 60 साल के बुड्ढे के साथ इश्क़ लड़ाने चल पड़ूँ । अगर कोई जवान लड़का भी है, तो इसका भी ये मतलब नहीं कि वह मेरी मर्जी के बिना मुझे छूने की हिम्मत कर सके । बोलिए राज जी, मैंने कुछ गलत कहा क्या ?”
“हम्म, तुम बिलकुल सही बोल रही हो । ये तुम्हारी खुद की मर्जी है, तुम्हें किसके साथ रहना है, किसके साथ नहीं ।”
“अच्छा राज जी ! आप ये सब छोड़िए और ये बताइये कि आपने वकील से बात की क्या ? कोर्ट ने पुलिस को मेरा 10 दिन का रिमांड दिया है । मैं इतने दिन तक यहाँ नहीं रह सकती ।”
“हाँ, मैंने वकील से बात की है । उसका कहना है कि वह कल आपको जमानत दिला देंगे । उनको इस बात पर पूरा यकीन है कि आपको किसी ने फँसाया है ।”
“थैंक यू राज जी । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । बिना किसी जान-पहचान के आप मेरे लिए इतना कुछ कर रहे हैं । जबकि मेरे दोस्त इस समय भी अपना टाइम एंजॉय कर रहे हैं । कोई शॉपिंग कर रहा है, तो कोई मूवी जा रहा है ।” वह दुखी होते हुए बोली ।
“इतना अपसेट होने की जरूरत नहीं है डॉली ! मुसीबत में ही दोस्तों की पहचान होती है ।”
“आप सही कह रहे हैं ।” कहते हुए उसने अपने हाथों से मेरे हाथों को थाम लिया । उसके हाथों का स्पर्श होते ही मेरे हाथों में जैसे करंट दौड़ गया था ।
“मैं कल तक उसका पता लगा लूँगा, जिसने तुम्हें फँसाने की कोशिश की है । तुम बिलकुल भी चिंता मत करो ।” मैंने उसके हाथों को प्यार से सहलाते हुए कहा । भला मैं ऐसा सुनहरा मौका कैसे छोड़ सकता था ?
“अच्छा सुनो ! अब मैं जो पूछूँ, उसका सही-सही जवाब देना । ये मुझे तुम्हें फँसाने वाले को ढूँढने में जल्दी मदद करेगा ।” फिर मैंने उससे कहा ।
“पूछिये, आप क्या पूछना चाहते हैं ?
“जैसे रामनाथन के बारे में तुमने मुझसे छुपाया था; ऐसा किसी और के बारे में तो नहीं है ना, जो तुम मुझसे छुपा रही हो ।”
“नहीं यार, क्या तुम मुझे प्रोफेशनल ब्लैक मेलर समझ रहे हो ?”
‘सीधा ‘यार’ पर !’
“अरे, नहीं-नहीं ! तुम मुझे गलत समझ रही हो । मेरा कहने का ये मतलब नहीं था । चलो, मैं अपना सवाल दूसरे तरीके से पूछता हूँ । क्या कोई और ऐसा है जिसके साथ तुमने कभी जाने अनजाने में गलत कहा हो या किया हो ।”
“एक मिनट ।” वह थोड़ा सोचते हुए बोली, “एक बार मैं उदय के साथ डेट पर गई थी और वहाँ उसने मुझे प्रपोज किया था ।”
“हाँ, ये बात मुझे उदय ने बताई थी । तुमने उसे मना कर दिया था और फिर तुम कभी डेट पर नहीं गए ।”
“बस उसने इतना ही बताया था क्या ?”
“हाँ, क्यों कुछ और भी हुआ था क्या ?”
“हुआ तो था ।”
“क्या ?”
“उसने डेट पर मुझे प्रपोज किया था और मैंने उसे एक बार तो हाँ बोल दिया था, फिर हम डांस करने लगे । पर डांस के दौरान वह बार-बार अपने हाथ मेरे बदन पर इधर-उधर फिराने लगा । शुरू में मुझे लगा, वह ये सब अनजाने में कर रहा है । पर बाद में वह मेरे अंगों पर ज़ोर से दबाव डालने लगा । मैं बहुत ज्यादा अनकम्फ़र्ट फील कर रही थी । फिर जब उसने मेरे यहाँ... ।” उसने अपने सीने की ओर इशारा करते हुए कहा, “छूने की कोशिश की तो मैंने उसे धक्का दे दिया और उस पर चिल्ला पड़ी थी । सब लोग हमें ही देख रहे थे । फिर मैं वहाँ से चली आई थी । दूसरे दिन वह मेरे फ्लैट में आया और मुझसे कहने लगा कि मेरी जैसी सैकड़ों लड़कियाँ उसके आगे-पीछे डोलती है । और भी बहुत कुछ उल्टा-सीधा बोल रहा था । मैंने उसे गुस्से में बाहर निकलने के लिए कहा, जो उस समय अंदर आ रही अंजलि और संध्या ने भी सुना था । उसने मुझे देख लेने की धमकी दी थी । पर धीरे-धीरे सब शांत हो गया था और हम फिर से दोस्त बन गए थे ।”
“ये कब की बात है ?”
“इस बात को 56 महीने हो गए होंगे ।”
“अच्छा, फिर तो हो सकता है, उदय ने ही तुम्हें फँसाने के लिए तुम्हारे रूम में ड्रग्स रखी हो । तुमने तो हो सकता है सबकुछ भुला दिया हो, पर वह अपना अपमान नहीं भुला पाया हो ।”
“हो सकता है । पर उसके व्यवहार से मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि वो ऐसा कर सकता है ।”
“हम्म, उससे शाम को फिर पूछताछ करूँगा । तुम्हें और कुछ कहना है ।”
“एक बात और भी है ।”
“क्या ?”
“पर पता नहीं तुम वह सुनकर मेरे बारे में क्या सोचोगे ?”
‘आप से ‘यार’ और ‘तुम’ पर... मामला सेट है ।’
“अरे, तुम बोलो तो सही ।”
“माना मैं आज की मॉडर्न लड़की हूँ और मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन पहले किसका बॉयफ्रेंड था । मुझे इस बात से भी कोई एतराज नहीं कि कोई शादी से पहले संबंध बनाता है । पर मैं किसी से संबंध बनाऊँगी तो मेरी मर्जी से बनाऊँगी । कोई मेरी मर्जी के खिलाफ छूए तो मुझसे सहन नहीं होता ।” कहते हुए वह साँस लेने के लिए रुकी ।
‘मैं तो छू सकता हूँ ना तुम्हें ?’
“बिलकुल सही कहा तुमने, पर इसमें मेरे सोचने वाली क्या बात है ।”
“बात ये है कि राजीव से ब्रेकअप के बाद जब मेरे साथ ऐसे इंसिडेंट हुए कि लोग मेरी मर्जी के बिना मुझे छू रहे हैं तो उस समय मुझे राजीव की बहुत याद आई । उसने कभी भी मेरी मर्जी के बिना मुझे नहीं छूआ था । हमेशा मेरी केयर की थी । तो फिर मैंने उससे वापस से फ्रेंडशिप करनी चाही तो मैंने उसे प्रपोज किया था । राजीव ने सोचने के लिए टाइम माँगा । मुझे लगा था, वह मान जाएगा । क्योंकि मुझसे ब्रेकअप के बाद वह बहुत समय तक अपसेट रहा था । पर ना जाने कैसे ये बात अंजलि को पता चल गई और उसने मुझे राजीव से दूर रहने के लिए कहा । राजीव ने भी अंजलि की बातों में आकर मुझे मना कर दिया था । मैंने फिर भी राजीव को प्रपोज किया तो अंजलि ने भी गुस्से में मुझे देख लेने की धमकी दी थी ।”
“हम्म ! फिर तो जरूर अंजलि और राजीव ने मिलकर ही तुम्हें फँसाया हो सकता है । मैं इस एंगल से भी जाँच करूँगा । अच्छा, तुमने पुलिस को उदय और अंजलि की धमकी के बारे में बताया या नहीं ।” रामनाथन के बारे में मैंने इसलिए नहीं पूछा, क्योंकि वह ब्लैक मेल की बात नहीं बता सकती थी ।
“बताया था, पर वह इंस्पेक्टर तो मेरे सख्त खिलाफ जान पड़ता है । मेरी कुछ भी बात सुनने को तैयार ही नहीं है ।”
“अच्छा !” कहकर मैं सोच में डूब गया ।
“ओके, ठीक है । मैं बात करता हूँ उससे अभी ।” मैं सामने से आते हवलदार को देखते हुए खड़ा हो गया था ।
“अपना ख्याल रखना ।” वह भी खड़ी हो गई ।
“तुम भी ।” मैंने मुस्कराते हुए कहा और मुलाक़ात कक्ष से बाहर आ गया ।
“आपको किसने बताया ?”
“उन्होंने खुद बोला है । तुम उन्हें ब्लैक मेल कर रही हो । तुम्हें पता ही है, मैं उसकी तलाश में था जिसने तुम्हें ड्रग्स केस में फँसाने की कोशिश की है । मेरी छानबीन से पता चला कि शनिवार दोपहर को 1 बजे मिस्टर रामनाथन जी तुम्हारे फ्लैट में गए थे ।” कहते हुए मैं एक पल के लिए रुका फिर आगे बोला, “पर वहाँ वह तुम्हें फँसाने के लिए तुम्हारे कमरे में ड्रग्स रखने के लिए नहीं गए थे, बल्कि तुम्हारे साथ मुकर्रर हुई ब्लैकमेलिंग की फ़ाइनल किस्त, जो कि 8 लाख रुपए थी, वह देने के लिए गए थे । बोलो, मैंने कुछ गलत कहा क्या ?”
“नहीं, तुमने सही कहा ।”
“तो तुमने मुझसे ये बात क्यों छुपाई कि तुम उन्हें ब्लैक मेल कर रही हों । मैंने सोचा भी नहीं था कि तुम इस तरह से ऐसा काम भी करती हो ।”
“क्योंकि इसमें बताने जैसा कुछ नहीं था । वैसे भी मैंने नहीं सोचा था कि वह मुझे इस तरह से फँसाने की कोशिश करेंगे ।”
“तुम भूल रही हो कि तुम उन्हें ब्लैक मेल कर रही थी । तुमसे छुटकारा पाने के लिए उसने ऐसा किया होगा ।”
“पर इस तरह से भी वह मुझसे छुटकारा तो नहीं पा सकते थे ना । वैसे आपने एक बार भी ये नहीं सोचा होगा कि मैंने ऐसा क्यों किया था । मैं रामनाथन जी को ब्लैक मेल क्यों कर रही थी, कुछ बताया उन्होंने ?”
“हाँ ! बताया था । तुम अक्सर उन्हें लाइन देती थी और जब वह तुम्हारे जाल में फँसकर एक दिन तुम्हारे फ्लैट में गए, तुम बाथरूम से जानबूझकर उन्हें उकसाने के लिए सिर्फ एक तौलिए में बाहर निकली तो उन्होंने तुम्हारे साथ... ।” कहते हुए मैंने अपनी बात अधूरी छोड़ दी और आगे कहा, “तुमने उस घटना का वीडियो बनाया और फिर वीडियो को पुलिस में देने की धमकी देकर तुम हर महीने उनसे 20 हजार देने की माँग की । तब से ये ब्लैकमेलिंग का सिलसिला चल रहा था, जिसको खत्म करने के लिए तुमने एकमुश्त 8 लाख रुपए की माँग की थी ।”
“अगर आप बुरा ना मानो तो मैं एक बात पूछ सकती हूँ ?” उसने कहा ।
“हाँ, पूछो ।”
“आप मर्दों को ऐसा क्यों लगता है कि लड़की अगर छोटे कपड़े पहनती है, आप लोगों से हँस-हँसकर बात करती है, तो आप लोगों को लाइन दे रही है ? बोलो ।”
‘मैंने ऐसा कब कहा ?” मैं उसके इस सवाल से हड़बड़ा गया था ।
“क्यों ? अभी थोड़ी देर पहले तो आपने ही कहा ना कि मैं उन्हें लाइन देती थी और इस तरह से मैंने उन्हें अपने जाल में फाँस लिया ।”
“मैं...” मैं फिर हड़बड़ाया, फिर बात को संभालते हुए कहा, “ये मैंने नहीं, उसने कहा था ।”
“मुझे पता है सर, आप मेरे बारे में ऐसा नहीं सोचते ।”
‘तुझे क्या पता, मैं क्या सोचता हूँ ?’
“उन्होंने आपको ये तो बताया कि मैं उन्हें लाइन देती थी, पर ये नहीं बताया कि मैं उन्हें अंकल कहती हूँ । और शायद उनको पता नहीं हो तो बता देना कि अंकल उन्हें कहते हैं जो बाप की उम्र का होता है । मैं मिनी ड्रेस पहनती हूँ, उनसे हाय-हैलो करती हूँ, इसका मतलब ये तो नहीं कि मैं उन्हें लाइन देती हूँ । उनकी बेटी जो मेरी ही हमउम्र है, वह भी तो ऐसे ही कपड़े पहनती है । सबसे हँस-हँस कर बात करती है । इसका मतलब ये तो नहीं कि वह भी सबको लाइन देती फिरती है ।” वह गुस्से में बोली ।
“तुम ठीक कह रही हो ।”
“आपको उन्होंने ये तो बताया कि हम एक दिन लिफ्ट में मिले थे । मैंने उनसे हँसकर बात की थी और अपने घर आने का निमंत्रण दिया था । पर मुझे ये नहीं मालूम था कि वह बुड्ढा ठरकी थोड़ी देर बाद ही फ्लैट में आ जाएगा, वरना मैं उस समय नहाने के लिए नहीं जाती । और देखो, अंदर आने के लिए उसने कोई बेल नहीं बजाई, बल्कि उसने फ्लैट की उस चाबी का गलत इस्तेमाल किया जो मैंने उन्हें किसी आपातकालीन स्थिति के लिए दी थी । बिना कोई आवाज किए वह मेरे कमरे में घुस गया । मैं बाथरूम से निकली ही थी कि मेरे कुछ समझने से पहले ही वह मुझ पर टूट पड़े थे । मेरे विरोध करने पर और ये बोलने पर कि मैं चिल्ला पड़ूँगी, तब कहीं जाकर उन्होंने मुझे छोड़ा था । और वह सब रिकॉर्ड हुआ उस कैमरे में जो मैंने सेफ़्टी के लिए अपने रूम में लगाकर रखा हुआ था ।” कहते हुए वह रुकी फिर उसने आगे कहा, “फिर भी मैंने उनको कुछ नहीं बोला और माफ कर दिया था, इसलिए उनकी हिम्मत और भी बढ़ गई थी । दो दिन बाद उन्होंने फिर से मेरे साथ बदतमीजी करने की कोशिश की थी । वह मुझसे मिलने मेरे फ्लैट में आए थे । उस समय भी मैं अकेली थी । मुझे लगा कि वह मुझसे उस दिन के लिए माफी माँगने आए है, पर उन्होंने तो मेरा हाथ पकड़ लिया था और फिर से जबरदस्ती करने लग गए । तब कहीं जाकर मैंने उनको धमकी दी थी, अगर उन्होंने फिर कभी मेरे साथ कुछ गलत करने की कोशिश की तो मैं उस दिन का रिकॉर्डेड वीडियो पुलिस को सौंप दूँगी । मेरी बात सुनकर उनके होश उड़ गए थे और मेरे बिना कुछ कहे, खुद आगे आकर उन्होंने मुझे 20 हजार रुपए दिये थे । तब मुझे उनसे बचने का यही आइडिया आया कि मैं हर महीने उनसे पैसे माँगती रहूँ, आखिर फ्री के पैसे किसको बुरे लगते हैं ?”
‘साला, बुड्ढा ठरकी ।’
“ओह्ह, तो ये बात थी ।”
“हम्म । राज जी, मैं आज के जमाने की लड़की हूँ, पर इसका मतलब ये नहीं है कि एक 60 साल के बुड्ढे के साथ इश्क़ लड़ाने चल पड़ूँ । अगर कोई जवान लड़का भी है, तो इसका भी ये मतलब नहीं कि वह मेरी मर्जी के बिना मुझे छूने की हिम्मत कर सके । बोलिए राज जी, मैंने कुछ गलत कहा क्या ?”
“हम्म, तुम बिलकुल सही बोल रही हो । ये तुम्हारी खुद की मर्जी है, तुम्हें किसके साथ रहना है, किसके साथ नहीं ।”
“अच्छा राज जी ! आप ये सब छोड़िए और ये बताइये कि आपने वकील से बात की क्या ? कोर्ट ने पुलिस को मेरा 10 दिन का रिमांड दिया है । मैं इतने दिन तक यहाँ नहीं रह सकती ।”
“हाँ, मैंने वकील से बात की है । उसका कहना है कि वह कल आपको जमानत दिला देंगे । उनको इस बात पर पूरा यकीन है कि आपको किसी ने फँसाया है ।”
“थैंक यू राज जी । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । बिना किसी जान-पहचान के आप मेरे लिए इतना कुछ कर रहे हैं । जबकि मेरे दोस्त इस समय भी अपना टाइम एंजॉय कर रहे हैं । कोई शॉपिंग कर रहा है, तो कोई मूवी जा रहा है ।” वह दुखी होते हुए बोली ।
“इतना अपसेट होने की जरूरत नहीं है डॉली ! मुसीबत में ही दोस्तों की पहचान होती है ।”
“आप सही कह रहे हैं ।” कहते हुए उसने अपने हाथों से मेरे हाथों को थाम लिया । उसके हाथों का स्पर्श होते ही मेरे हाथों में जैसे करंट दौड़ गया था ।
“मैं कल तक उसका पता लगा लूँगा, जिसने तुम्हें फँसाने की कोशिश की है । तुम बिलकुल भी चिंता मत करो ।” मैंने उसके हाथों को प्यार से सहलाते हुए कहा । भला मैं ऐसा सुनहरा मौका कैसे छोड़ सकता था ?
“अच्छा सुनो ! अब मैं जो पूछूँ, उसका सही-सही जवाब देना । ये मुझे तुम्हें फँसाने वाले को ढूँढने में जल्दी मदद करेगा ।” फिर मैंने उससे कहा ।
“पूछिये, आप क्या पूछना चाहते हैं ?
“जैसे रामनाथन के बारे में तुमने मुझसे छुपाया था; ऐसा किसी और के बारे में तो नहीं है ना, जो तुम मुझसे छुपा रही हो ।”
“नहीं यार, क्या तुम मुझे प्रोफेशनल ब्लैक मेलर समझ रहे हो ?”
‘सीधा ‘यार’ पर !’
“अरे, नहीं-नहीं ! तुम मुझे गलत समझ रही हो । मेरा कहने का ये मतलब नहीं था । चलो, मैं अपना सवाल दूसरे तरीके से पूछता हूँ । क्या कोई और ऐसा है जिसके साथ तुमने कभी जाने अनजाने में गलत कहा हो या किया हो ।”
“एक मिनट ।” वह थोड़ा सोचते हुए बोली, “एक बार मैं उदय के साथ डेट पर गई थी और वहाँ उसने मुझे प्रपोज किया था ।”
“हाँ, ये बात मुझे उदय ने बताई थी । तुमने उसे मना कर दिया था और फिर तुम कभी डेट पर नहीं गए ।”
“बस उसने इतना ही बताया था क्या ?”
“हाँ, क्यों कुछ और भी हुआ था क्या ?”
“हुआ तो था ।”
“क्या ?”
“उसने डेट पर मुझे प्रपोज किया था और मैंने उसे एक बार तो हाँ बोल दिया था, फिर हम डांस करने लगे । पर डांस के दौरान वह बार-बार अपने हाथ मेरे बदन पर इधर-उधर फिराने लगा । शुरू में मुझे लगा, वह ये सब अनजाने में कर रहा है । पर बाद में वह मेरे अंगों पर ज़ोर से दबाव डालने लगा । मैं बहुत ज्यादा अनकम्फ़र्ट फील कर रही थी । फिर जब उसने मेरे यहाँ... ।” उसने अपने सीने की ओर इशारा करते हुए कहा, “छूने की कोशिश की तो मैंने उसे धक्का दे दिया और उस पर चिल्ला पड़ी थी । सब लोग हमें ही देख रहे थे । फिर मैं वहाँ से चली आई थी । दूसरे दिन वह मेरे फ्लैट में आया और मुझसे कहने लगा कि मेरी जैसी सैकड़ों लड़कियाँ उसके आगे-पीछे डोलती है । और भी बहुत कुछ उल्टा-सीधा बोल रहा था । मैंने उसे गुस्से में बाहर निकलने के लिए कहा, जो उस समय अंदर आ रही अंजलि और संध्या ने भी सुना था । उसने मुझे देख लेने की धमकी दी थी । पर धीरे-धीरे सब शांत हो गया था और हम फिर से दोस्त बन गए थे ।”
“ये कब की बात है ?”
“इस बात को 56 महीने हो गए होंगे ।”
“अच्छा, फिर तो हो सकता है, उदय ने ही तुम्हें फँसाने के लिए तुम्हारे रूम में ड्रग्स रखी हो । तुमने तो हो सकता है सबकुछ भुला दिया हो, पर वह अपना अपमान नहीं भुला पाया हो ।”
“हो सकता है । पर उसके व्यवहार से मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि वो ऐसा कर सकता है ।”
“हम्म, उससे शाम को फिर पूछताछ करूँगा । तुम्हें और कुछ कहना है ।”
“एक बात और भी है ।”
“क्या ?”
“पर पता नहीं तुम वह सुनकर मेरे बारे में क्या सोचोगे ?”
‘आप से ‘यार’ और ‘तुम’ पर... मामला सेट है ।’
“अरे, तुम बोलो तो सही ।”
“माना मैं आज की मॉडर्न लड़की हूँ और मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन पहले किसका बॉयफ्रेंड था । मुझे इस बात से भी कोई एतराज नहीं कि कोई शादी से पहले संबंध बनाता है । पर मैं किसी से संबंध बनाऊँगी तो मेरी मर्जी से बनाऊँगी । कोई मेरी मर्जी के खिलाफ छूए तो मुझसे सहन नहीं होता ।” कहते हुए वह साँस लेने के लिए रुकी ।
‘मैं तो छू सकता हूँ ना तुम्हें ?’
“बिलकुल सही कहा तुमने, पर इसमें मेरे सोचने वाली क्या बात है ।”
“बात ये है कि राजीव से ब्रेकअप के बाद जब मेरे साथ ऐसे इंसिडेंट हुए कि लोग मेरी मर्जी के बिना मुझे छू रहे हैं तो उस समय मुझे राजीव की बहुत याद आई । उसने कभी भी मेरी मर्जी के बिना मुझे नहीं छूआ था । हमेशा मेरी केयर की थी । तो फिर मैंने उससे वापस से फ्रेंडशिप करनी चाही तो मैंने उसे प्रपोज किया था । राजीव ने सोचने के लिए टाइम माँगा । मुझे लगा था, वह मान जाएगा । क्योंकि मुझसे ब्रेकअप के बाद वह बहुत समय तक अपसेट रहा था । पर ना जाने कैसे ये बात अंजलि को पता चल गई और उसने मुझे राजीव से दूर रहने के लिए कहा । राजीव ने भी अंजलि की बातों में आकर मुझे मना कर दिया था । मैंने फिर भी राजीव को प्रपोज किया तो अंजलि ने भी गुस्से में मुझे देख लेने की धमकी दी थी ।”
“हम्म ! फिर तो जरूर अंजलि और राजीव ने मिलकर ही तुम्हें फँसाया हो सकता है । मैं इस एंगल से भी जाँच करूँगा । अच्छा, तुमने पुलिस को उदय और अंजलि की धमकी के बारे में बताया या नहीं ।” रामनाथन के बारे में मैंने इसलिए नहीं पूछा, क्योंकि वह ब्लैक मेल की बात नहीं बता सकती थी ।
“बताया था, पर वह इंस्पेक्टर तो मेरे सख्त खिलाफ जान पड़ता है । मेरी कुछ भी बात सुनने को तैयार ही नहीं है ।”
“अच्छा !” कहकर मैं सोच में डूब गया ।
“ओके, ठीक है । मैं बात करता हूँ उससे अभी ।” मैं सामने से आते हवलदार को देखते हुए खड़ा हो गया था ।
“अपना ख्याल रखना ।” वह भी खड़ी हो गई ।
“तुम भी ।” मैंने मुस्कराते हुए कहा और मुलाक़ात कक्ष से बाहर आ गया ।