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“अरे जुगल, वह बन्दा कहाँ है जिसे तुम गाजियवाद से लाए थे ?”–आरिफ ने पूछा।
“कौन ? मामा ? उन्हें तो कमरे में सेट किया हुआ है। उन्हें सब समझा दिया है कि जान की सलामती चाहिए तो जब तक केस चल रहा है चुपचाप आराम करो।”
“नहीं, यहाँ क्या दिक्कत है। अगर फार्म हाउस में घूमना चाहे तो घूमने दो।”
“ठीक है सर। अब आप कह रहे हो, तो सुबह शाम घुमा दिया करेंगे।”
“और सबसे बोल देना कि नाश्ता कर के ठीक दस बजे ऑफिस में आ जाए।
“जी।” ठीक दस बजे सभी लोग ऑफिस नुमा कमरे में मौजूद थे। सिर्फ देशराज और कर्नल साहब मौजूद नहीं थे। कर्नल साहब अपने दिल्ली स्थित घर चले गए थे, और देशराज की उपस्थिति आवश्यक नहीं थी। जैसा कि आप सभी लोगों को पता है कि हमारा ऑपरेशन क्लीन अब अपने आख़िरी चरण में है। सब कुछ शांतिपूर्वक निपट जाए और पर्फ़ेक्ट टाइमिंग से हो इसके लिए हमें हर चीज़ कई बार दोहरा लेनी चाहिए।”–आरिफ गंभीरता पूर्वक बोला।
सबने सहमति में सिर हिलाया।
“डॉक्टर प्रीति, इसमें आपका सबसे महत्वपूर्ण रोल है।” प्रीति ने सहमति में सिर हिलाया।
“प्रीति जी वर्तमान हालात में ये ज़रूरी है कि उसकी मौत पर कोई हल्ला गुल्ला ना हो। अब ये आपके ऊपर है। क्योंकि एक बार आगे कदम बढ़ाने के बाद, मारेंगे तो हम उसे हर हाल में। अगर आपने उसे सतर्क किया, या और कोई घपला किया तो फिर हम उसके साथ आपको भी ठोक देंगे।”
“मैं कोई गड़बड़ नहीं करूँगी।”–डॉक्टर प्रीति भयभीत स्वर में बोली।
“फिर तो आपका फ़ायदा ही फ़ायदा है। उसकी सारी जायदाद, फैक्ट्री, बैंक बैलेन्स सब आपका। आनंद लूटिएगा ज़िंदगी का। वरना मुर्गे के साथ आपका भी अंतिम संस्कार हो जाएगा।”–आरिफ चेतावनीपूर्ण लहजे में बोला।
“मुझे हर हाल में ज़िंदा रहना है।”–वह दृढ़ स्वर में बोली।
“बढ़िया। तो अब अच्छी तरह एक बार फिर दोबारा से समझ लीजिए कि क्या और कैसे करना है।”–आरिफ बोला।
डॉक्टर प्रीति ने सिर हिलाया और ध्यान उसकी तरफ़ लगा दिया। आरिफ उसे समझाता रहा और पहले भी कई बार समझ चुकी प्रीति फिर एक बार समझने लगी।
“सब समझ गईं आप ?”–अपनी बात पूरी करके आरिफ ने पूछा।
“समझ गई। अच्छी तरह समझ गई।”–डॉक्टर प्रीति बोली।
“बाकी अपनी बहन राजेश्वरी देवी से आप मिल ही चुकी हैं। रणविजय से आपकी चैट चार दिन से चल ही रही है। वह लगातार आपसे अपनी ज़िंदगी में आने की विनती कर रहा है, तो आज शाम आप पिघल जाओ और उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लो। इजी।”
प्रीति ने सहमति में सिर हिलाया।
“गुड इसके बाद जब आप भली भाँति कोठी में सेट हो जाएँ तो उसे कोई ऐसी दवाई दें, जिससे उसका गला ख़राब हो जाये और हल्का बुख़ार भी आ जाए। फिर आपको उस पर कोरोना का शक ज़ाहिर करके उसका कोरोना टेस्ट करवाना है। रिज़ल्ट नेगेटिव आए या पॉजिटिव आपके पास रिपोर्ट पॉज़िटिव की ही पहुँचेगी। फिर वह अपना इलाज कोठी के ही एक कमरे में कॉरेनटाइन होकर कराएगा और उस कमरे में केवल डॉक्टर आरिफ, कम्पाउण्डर अमित और आनंद, बतौर नर्स आहना ही जाएँगे और वह भी पी०पी०ई० किट पहन कर। पी०पी०ई० किट में कौन पहचानेगा किसी को ? और दो दिन बाद वह कोरोना से मर जाएगा। उसका मृत शरीर किट में पैक होगा। कोई उसे नहीं देख पाएगा और ऐसे ही पैक पैक उसका अंतिम संस्कार हो जाएगा। घरवालों के नाम पर कोई है नहीं। तो सब कुछ पत्नी डॉक्टर प्रीति को ही करना है, या बेटी डॉली को। और वैसे भी कोरोना के डर से कोई लाश के पास तक नहीं फटकेगा।”–आरिफ बोला। सबने सहमति में सिर हिलाया। डॉक्टर प्रीति ने भी।
“लेकिन मैं पत्नी कैसे सिद्ध होऊँगी।”–प्रीति झिझकते हुए बोली।
“वैसे तो मुर्गा ही शादी को कहेगा, तो जाकर मंदिर में कर लेना शादी और ना भी हो, तो भी हम बैठे हैं। हम बनवा कर देंगे काग़ज़। और वैसे भी डॉली इकलौती वारिस है। इसलिए जो आपसे कहा है, वह आपको ही मिलेगा। ये हमारा वादा है आपसे।”
“मुझे आप लोगों पर विश्वास है।”–प्रीति अनमने भाव से बोली।
“डॉक्टर प्रीति मैं आपसे कहती हूँ कि मैं और भाई सिर्फ अपने मम्मी-पापा का हिस्सा ही लेंगे। उस राक्षस का सारा पैसा आपका ही होगा।”–डॉली बोली।
“ठीक तो है ना मम्मी। हो जाएगा सब। मैं हूँ ना। मैं सब ठीक कर दूँगा।”–जुगल बोला।
डॉक्टर प्रीति ने उसकी तरफ़ देखकर बुरा सा मुँह बनाया।
“कौन ? मामा ? उन्हें तो कमरे में सेट किया हुआ है। उन्हें सब समझा दिया है कि जान की सलामती चाहिए तो जब तक केस चल रहा है चुपचाप आराम करो।”
“नहीं, यहाँ क्या दिक्कत है। अगर फार्म हाउस में घूमना चाहे तो घूमने दो।”
“ठीक है सर। अब आप कह रहे हो, तो सुबह शाम घुमा दिया करेंगे।”
“और सबसे बोल देना कि नाश्ता कर के ठीक दस बजे ऑफिस में आ जाए।
“जी।” ठीक दस बजे सभी लोग ऑफिस नुमा कमरे में मौजूद थे। सिर्फ देशराज और कर्नल साहब मौजूद नहीं थे। कर्नल साहब अपने दिल्ली स्थित घर चले गए थे, और देशराज की उपस्थिति आवश्यक नहीं थी। जैसा कि आप सभी लोगों को पता है कि हमारा ऑपरेशन क्लीन अब अपने आख़िरी चरण में है। सब कुछ शांतिपूर्वक निपट जाए और पर्फ़ेक्ट टाइमिंग से हो इसके लिए हमें हर चीज़ कई बार दोहरा लेनी चाहिए।”–आरिफ गंभीरता पूर्वक बोला।
सबने सहमति में सिर हिलाया।
“डॉक्टर प्रीति, इसमें आपका सबसे महत्वपूर्ण रोल है।” प्रीति ने सहमति में सिर हिलाया।
“प्रीति जी वर्तमान हालात में ये ज़रूरी है कि उसकी मौत पर कोई हल्ला गुल्ला ना हो। अब ये आपके ऊपर है। क्योंकि एक बार आगे कदम बढ़ाने के बाद, मारेंगे तो हम उसे हर हाल में। अगर आपने उसे सतर्क किया, या और कोई घपला किया तो फिर हम उसके साथ आपको भी ठोक देंगे।”
“मैं कोई गड़बड़ नहीं करूँगी।”–डॉक्टर प्रीति भयभीत स्वर में बोली।
“फिर तो आपका फ़ायदा ही फ़ायदा है। उसकी सारी जायदाद, फैक्ट्री, बैंक बैलेन्स सब आपका। आनंद लूटिएगा ज़िंदगी का। वरना मुर्गे के साथ आपका भी अंतिम संस्कार हो जाएगा।”–आरिफ चेतावनीपूर्ण लहजे में बोला।
“मुझे हर हाल में ज़िंदा रहना है।”–वह दृढ़ स्वर में बोली।
“बढ़िया। तो अब अच्छी तरह एक बार फिर दोबारा से समझ लीजिए कि क्या और कैसे करना है।”–आरिफ बोला।
डॉक्टर प्रीति ने सिर हिलाया और ध्यान उसकी तरफ़ लगा दिया। आरिफ उसे समझाता रहा और पहले भी कई बार समझ चुकी प्रीति फिर एक बार समझने लगी।
“सब समझ गईं आप ?”–अपनी बात पूरी करके आरिफ ने पूछा।
“समझ गई। अच्छी तरह समझ गई।”–डॉक्टर प्रीति बोली।
“बाकी अपनी बहन राजेश्वरी देवी से आप मिल ही चुकी हैं। रणविजय से आपकी चैट चार दिन से चल ही रही है। वह लगातार आपसे अपनी ज़िंदगी में आने की विनती कर रहा है, तो आज शाम आप पिघल जाओ और उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लो। इजी।”
प्रीति ने सहमति में सिर हिलाया।
“गुड इसके बाद जब आप भली भाँति कोठी में सेट हो जाएँ तो उसे कोई ऐसी दवाई दें, जिससे उसका गला ख़राब हो जाये और हल्का बुख़ार भी आ जाए। फिर आपको उस पर कोरोना का शक ज़ाहिर करके उसका कोरोना टेस्ट करवाना है। रिज़ल्ट नेगेटिव आए या पॉजिटिव आपके पास रिपोर्ट पॉज़िटिव की ही पहुँचेगी। फिर वह अपना इलाज कोठी के ही एक कमरे में कॉरेनटाइन होकर कराएगा और उस कमरे में केवल डॉक्टर आरिफ, कम्पाउण्डर अमित और आनंद, बतौर नर्स आहना ही जाएँगे और वह भी पी०पी०ई० किट पहन कर। पी०पी०ई० किट में कौन पहचानेगा किसी को ? और दो दिन बाद वह कोरोना से मर जाएगा। उसका मृत शरीर किट में पैक होगा। कोई उसे नहीं देख पाएगा और ऐसे ही पैक पैक उसका अंतिम संस्कार हो जाएगा। घरवालों के नाम पर कोई है नहीं। तो सब कुछ पत्नी डॉक्टर प्रीति को ही करना है, या बेटी डॉली को। और वैसे भी कोरोना के डर से कोई लाश के पास तक नहीं फटकेगा।”–आरिफ बोला। सबने सहमति में सिर हिलाया। डॉक्टर प्रीति ने भी।
“लेकिन मैं पत्नी कैसे सिद्ध होऊँगी।”–प्रीति झिझकते हुए बोली।
“वैसे तो मुर्गा ही शादी को कहेगा, तो जाकर मंदिर में कर लेना शादी और ना भी हो, तो भी हम बैठे हैं। हम बनवा कर देंगे काग़ज़। और वैसे भी डॉली इकलौती वारिस है। इसलिए जो आपसे कहा है, वह आपको ही मिलेगा। ये हमारा वादा है आपसे।”
“मुझे आप लोगों पर विश्वास है।”–प्रीति अनमने भाव से बोली।
“डॉक्टर प्रीति मैं आपसे कहती हूँ कि मैं और भाई सिर्फ अपने मम्मी-पापा का हिस्सा ही लेंगे। उस राक्षस का सारा पैसा आपका ही होगा।”–डॉली बोली।
“ठीक तो है ना मम्मी। हो जाएगा सब। मैं हूँ ना। मैं सब ठीक कर दूँगा।”–जुगल बोला।
डॉक्टर प्रीति ने उसकी तरफ़ देखकर बुरा सा मुँह बनाया।