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Guest
बाजी ने ओके कहा और बेड पे आराम से लेट गई। मैं घर से निकला और मकान के पिछली तरफ चल दिया जिस तरफ सारा जंगल था और मकान के पीछे चलते हुये उस जगह पे पहुँच गया, जहाँ मैंने अम्मी को जाते हुये देखा था। लेकिन अब समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं? तभी मेरी नजर किचेन की खिड़की पे पड़ी जो कि हल्की सी खुली हुई थी। मैंने इधर-उधर देखा तो मुझे जंगल के इलावा कुछ भी दिखाई ना दिया तो मैंने । खिड़की को थोड़ा सा पुश किया तो वो बिना आवाज के खुल गई। मैं झट से खिड़की को पकड़कर ऊपर उठा और अंदर घुस गया।
अंदर घुसते ही मैंने अपने आपको किचेन में पाया तो अपने माथे पे आ जाने वाला पशीना साफ करते हुये मैं लरजते कदमों से किचेन से बाहर हाल में झाँका। लेकिन वहाँ मुझे कोई नजर नहीं आया तो मैं किचेन से हाल में आ गया। उस वक़्त मेरी इर के मारे हालत काफी खराब हो रही थी। साथ बने दोनों कमरों की तरफ देखा। जिनमें से एक का दरवाजा खुला हुआ था लेकिन दूसरा दरवाजा बंद था और यहाँ एक खास बात ये थी कि ये मकान भी हमारे मकान की तरह ही बना हुआ था कोई फर्क नहीं था दोनों में।
अब मैंने अपने आपको थोड़ा होसला दिया और थोड़ा झुके हुये आगे बढ़ा और उस रूम के पास जा पहुँचा, जिसका दरवाजा खुला हुआ था। वहाँ से मैं हल्का सा रूम में झाँका तो वहाँ भी मुझे कोई नजर नहीं आया, तो।
मैं दूसरे रूम के पास चला गया। लेकिन यहाँ से मुझे कोई भी ऐसी जगह नजर नहीं आ रही थी जहाँ से मैं अंदर झाँक सकता। तभी मुझे बाथरूम की याद आई तो झट से मैं साथ वाले रूम में गया, जहाँ मैं देख चुका था कि कोई भी नहीं है, घुस गया और ये देखकर मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा कि उस रूम की तरफ से बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था।
अब मैं आगे बढ़ा और काँपते हाथ पांव से बाथरूम में झाँक के देखा और खाली पाकर अंदर घुस गया और साथ वाले रूम की तरफ जो दरवाजा खुलता था उसे भी हल्का सा खुला पाकर में झट से वहाँ गया और रूम में झाँकने लगा। जैसे ही मेरी नजर रूम में बेड पे लेटी अपनी अम्मी पे गई तो मुझे जोर का एक झटका लगा। क्योंकी मैं अम्मी के बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकता था कि कभी उनको किसी और के मकान में ऐसी हालत में देखूँगा।।
अभी मैं ये सब देख और सोच ही रहा था कि ये सब आखिर हो क्या रहा है? तभी मुझे अम्मी की आवाज सुनाई दी जो कि कह रही थीं- “सफदर अब और कितना इंतजार करवाओगे? बच्चे भी वापिस आने वाले हैं...”
अम्मी की बात खतम होते ही मुझे रूम में से किसी मर्द के बोलने की आवाज सुनाई दी, जो अम्मी से बोल रहा था- “जान जी, जब मैं यहाँ तुम्हारी ही खातिर आया हूँ तो क्या तुम अपने बच्चों को भी नहीं बहला सकती?” ।
अम्मी ने कहा- “अब वो बड़े हो चुके हैं, उनको बहलना इतना आसान नहीं है...”
उस सफदर नामी शख्स ने, जिसे मैं अभी तक देख नहीं पाया था, कहा- “अच्छा बाबा, अब तुम अपने कपड़े उतारो, मैं तब कोई मूवी तो लगा लूं। ऐसे मजा नहीं आता तुम जानती हो ना?” अम्मी ने उसकी बात सुनी और झट से अपने बाकी के कपड़े भी उतार फेंके और अपनी कमर मेरी तरफ कर दी और साथ ही अपनी पैंटी को भी घुटनों तक नीचे खिसका दिया और लेट गई।
अम्मी को इस तरह नजारा करते देखकर मुझे जो गुस्सा आ रहा था, अब उसकी जगह मजे ने ले ली थी जिससे मेरा लण्ड भी अकड़ गया था। तभी एक आदमी बेड के पास आ गया जिसे देखकर मुझे अपनी आँखों पे यकीन नहीं आया, क्योंकी वो कोई और नहीं मेरे मुँह बोले मामू थे जो कि अक्सर हमारे घर आया करते थे और अम्मी को बाजी बाजी बोलते नहीं थका करते थे। इस वक़्त वो अपनी उसी बहन के पास नंगे खड़े थे।
तभी अम्मी की आवाज सुनाई दी, जो बोल रही थी- “सफदर अब क्या ड्रामा है तुम्हारा? आ भी जाओ..”
सफदर अंकल हँसते हुये अम्मी के पास बेड पे लेट गये और उन्हें किस करने लगे और अम्मी की चूचियां दबाने लगे। अम्मी भी सफदर अंकल के साथ लिपटी जा रही थीं और उन्हें अपने साथ भींचती हुई किस कर रही थीं। कुछ देर तक ये सब ही चलता रहा।
फिर अंकल ने अम्मी को बोला- “चलो मेरी जान, अब तैयार हो जाओ चुदाई के लिए..."
अम्मी ने अंकल की तरफ देखा और मुश्कुराती हुई उल्टी होकर लेट गई।
अंदर घुसते ही मैंने अपने आपको किचेन में पाया तो अपने माथे पे आ जाने वाला पशीना साफ करते हुये मैं लरजते कदमों से किचेन से बाहर हाल में झाँका। लेकिन वहाँ मुझे कोई नजर नहीं आया तो मैं किचेन से हाल में आ गया। उस वक़्त मेरी इर के मारे हालत काफी खराब हो रही थी। साथ बने दोनों कमरों की तरफ देखा। जिनमें से एक का दरवाजा खुला हुआ था लेकिन दूसरा दरवाजा बंद था और यहाँ एक खास बात ये थी कि ये मकान भी हमारे मकान की तरह ही बना हुआ था कोई फर्क नहीं था दोनों में।
अब मैंने अपने आपको थोड़ा होसला दिया और थोड़ा झुके हुये आगे बढ़ा और उस रूम के पास जा पहुँचा, जिसका दरवाजा खुला हुआ था। वहाँ से मैं हल्का सा रूम में झाँका तो वहाँ भी मुझे कोई नजर नहीं आया, तो।
मैं दूसरे रूम के पास चला गया। लेकिन यहाँ से मुझे कोई भी ऐसी जगह नजर नहीं आ रही थी जहाँ से मैं अंदर झाँक सकता। तभी मुझे बाथरूम की याद आई तो झट से मैं साथ वाले रूम में गया, जहाँ मैं देख चुका था कि कोई भी नहीं है, घुस गया और ये देखकर मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा कि उस रूम की तरफ से बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था।
अब मैं आगे बढ़ा और काँपते हाथ पांव से बाथरूम में झाँक के देखा और खाली पाकर अंदर घुस गया और साथ वाले रूम की तरफ जो दरवाजा खुलता था उसे भी हल्का सा खुला पाकर में झट से वहाँ गया और रूम में झाँकने लगा। जैसे ही मेरी नजर रूम में बेड पे लेटी अपनी अम्मी पे गई तो मुझे जोर का एक झटका लगा। क्योंकी मैं अम्मी के बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकता था कि कभी उनको किसी और के मकान में ऐसी हालत में देखूँगा।।
अभी मैं ये सब देख और सोच ही रहा था कि ये सब आखिर हो क्या रहा है? तभी मुझे अम्मी की आवाज सुनाई दी जो कि कह रही थीं- “सफदर अब और कितना इंतजार करवाओगे? बच्चे भी वापिस आने वाले हैं...”
अम्मी की बात खतम होते ही मुझे रूम में से किसी मर्द के बोलने की आवाज सुनाई दी, जो अम्मी से बोल रहा था- “जान जी, जब मैं यहाँ तुम्हारी ही खातिर आया हूँ तो क्या तुम अपने बच्चों को भी नहीं बहला सकती?” ।
अम्मी ने कहा- “अब वो बड़े हो चुके हैं, उनको बहलना इतना आसान नहीं है...”
उस सफदर नामी शख्स ने, जिसे मैं अभी तक देख नहीं पाया था, कहा- “अच्छा बाबा, अब तुम अपने कपड़े उतारो, मैं तब कोई मूवी तो लगा लूं। ऐसे मजा नहीं आता तुम जानती हो ना?” अम्मी ने उसकी बात सुनी और झट से अपने बाकी के कपड़े भी उतार फेंके और अपनी कमर मेरी तरफ कर दी और साथ ही अपनी पैंटी को भी घुटनों तक नीचे खिसका दिया और लेट गई।
अम्मी को इस तरह नजारा करते देखकर मुझे जो गुस्सा आ रहा था, अब उसकी जगह मजे ने ले ली थी जिससे मेरा लण्ड भी अकड़ गया था। तभी एक आदमी बेड के पास आ गया जिसे देखकर मुझे अपनी आँखों पे यकीन नहीं आया, क्योंकी वो कोई और नहीं मेरे मुँह बोले मामू थे जो कि अक्सर हमारे घर आया करते थे और अम्मी को बाजी बाजी बोलते नहीं थका करते थे। इस वक़्त वो अपनी उसी बहन के पास नंगे खड़े थे।
तभी अम्मी की आवाज सुनाई दी, जो बोल रही थी- “सफदर अब क्या ड्रामा है तुम्हारा? आ भी जाओ..”
सफदर अंकल हँसते हुये अम्मी के पास बेड पे लेट गये और उन्हें किस करने लगे और अम्मी की चूचियां दबाने लगे। अम्मी भी सफदर अंकल के साथ लिपटी जा रही थीं और उन्हें अपने साथ भींचती हुई किस कर रही थीं। कुछ देर तक ये सब ही चलता रहा।
फिर अंकल ने अम्मी को बोला- “चलो मेरी जान, अब तैयार हो जाओ चुदाई के लिए..."
अम्मी ने अंकल की तरफ देखा और मुश्कुराती हुई उल्टी होकर लेट गई।