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अंजाने में बहन ने ही चुदवाया पूरा परिवार complete

बाजी की बात खतम होते ही मैंने बाजी के होंठों को चूमा और बोला- “अरे नहीं बाजी मैं जानता हूँ कि आप मेरी बड़ी बहन हो और आपको इतनी जल्दी कुछ नहीं हो सकता, और बाकी आज का दिन गुजर जाने दें फिर बताना के इसमें मजा आया है या नहीं? क्योंकी अभी तो आपको दर्द होगा...”

मेरी बात ने बाजी को और भी गुस्सा दिला दिया, जिससे उनका चेहरा लाल हो गया और वो मुझे खा जाने वाली नजरों से घूरने लगी, लेकिन बोली कुछ नहीं। मैं भी खामोश पड़ा रहा और अंकल के बाथरूम से निकलने का इंतेजार करता रहा, और जैसे ही अंकल बाहर निकले मैंने बाजी से कहा- “आप पहले बाथरूम हो आओ...”

बाजी ने कहा- “कमीने इंसान, क्या तुम अब भी समझते हो कि में खुद से बाथरूम जा पाऊँगी?”

अंकल बाजी की बात सुनकर हँस दिए और बोले- “यार सन्नी, कुछ तो दिमाग से भी काम लिया करो। जो कुछ तुमने किया है अपनी इस बेचारी बहन के साथ, अब इसे सहारा देकर बाथरूम खुद ले जाओ इससे अकेले नहीं जाया जाएगा..."

अंकल की बात से मुझे एहसास हुआ कि मैंने सच में बाजी के साथ कुछ ज्यादा ही ज्यादती कर डाली है। ये सोच आते ही मैं उठा और फरी बाजी को सहारा देकर बेड से उतारा और अपने साथ बाथरूम की तरफ ले गया। लेकिन बाजी से ठीक तरह से चला भी नहीं जा रहा था। बाजी को मैं बड़ी मुश्किल से बाथरूम में ले गया, जहाँ बाजी को मैंने पेशाब करवाया, उसके बाद शावर के नीचे खड़ा कर दिया और खुद ही अच्छी तरह साबुन लगाकर बाजी का पूरा जिम साफ किया और उसके बाद खुद को भी साफ करके बाजी को रूम में वापिस ले आया।

 
हमारे रूम में वापिस आने तक अंकल ने बेडशीट चेंज कर डाली थी और खुद भी एक पाजामा पहन लिया था। मैंने बाजी को बेड पे बिठा दिया लेकिन उन्हें गाण्ड में काफी जलन हो रही थी, तो वो लेट गई। मैंने बाजी के कपड़े उठाकर उनके पास ले आया और बोला- “चलो बाजी कपड़े पहन लो...”

बाजी ने कहा- “नहीं भाई, अभी मुझमें इतनी हिम्मत नहीं है। अभी रहने दे बाद में पहन लँगी..." तो मैंने भी जिद नहीं की क्योंकी अब हमारे बीच बचा ही क्या था छुपाने लायक?

बाजी के कपड़े वहीं बेड पे रखकर मैंने अपनी पैंट उठाकर पहन ली और वहीं करीब एक चेयर पे बैठ गया। बाजी को कोई दो घंटे आराम के बाद थोड़ा आराम मिला, तो बाजी ने उठकर कपड़े पहन लिए और तैयार हो गई। मैं भी तैयार होकर अंकल से बोला- “ठीक है अंकल, अब हम चलते हैं..." और उनके घर से निकल आए। लेकिन बाजी से अब भी ठीक से नहीं चला जा रहा था।

हम दोनों जब घर पहुँचे तो देखा कि अम्मी और निदा आ चुकी हैं और बैठी टीवी देख रही हैं। अम्मी ने हमें घर में आते हुये बड़े ही गौर से देखा, लेकिन बोली कुछ नहीं। मैं फरी बाजी को जल्दी से उनके रूम में ले गया और बेड पे लिटा दिया।

तभी अम्मी भी हमारे पीछे ही रूम में आ गई और बोली- “सन्नी जरा मेरे रूम में आओ...” और इतना बोलते हुये अम्मी रूम से निकल गई।

अम्मी की इस बात से मैं थोड़ा परेशान हो गया था, क्योंकी अम्मी की आवाज में गुस्सा साफ महसोस हो रहा था। अम्मी के जाते ही मैंने बाजी की तरफ देखा तो बाजी ने मुझे आँख के इशारे से ही पुरसकून रहने की हिदायत की और जाने को कहा, तो मैं अम्मी के रूम की तरफ चल दिया।

 
मैं रूम में से निकला और अम्मी के रूम के बाहर खड़ा हो गया, क्योंकी अंदर से मुझे निदा की आवाज सुनाई दे रही थी, जिसपे मुझे थोड़ी परेशानी भी हुई कि आखिर ऐसी क्या बात है जो निदा की मौजूदगी में तो अम्मी कर सकती हैं, लेकिन फरी बाजी के सामने उनसे बात नहीं हो पा रही?

खैर में रूम में इन हुआ तो अम्मी ने मुझे देखकर निदा से कहा- “तुम अपनी बड़ी बहन के पास जाओ मैंने सन्नी से कुछ बात करना है...”

निदा खामोशी से उठी और रूम से निकल गई। तब अम्मी ने कहा- “दरवाजा बंद करके यहाँ आ जाओ...”

मैंने ऐसे ही किया और अम्मी के पास चला गया।

अम्मी उस वक़्त बेड के करीब ही खड़ी थीं और मैं भी उनके पास ही जाकर खड़ा हो गया, तो अम्मी कुछ देर तक मुझे घूरती रही तो मैंने भी बिना डरे अम्मी की आँखों में झाँकना शुरू कर दिया, जिससे अम्मी को गुस्सा

आ गया और अम्मी ने अचानक ही मुझे जोर का थप्पड़ जड़ दिया।

मुझे अम्मी की तरफ से कोई इस तरह के रिएक्सन की उम्मीद नहीं थी क्योंकी मुझे अभी पता भी नहीं था कि अम्मी आखिर किस बात पे गुस्सा हैं, और ऊपर से ये थप्पड़? मेरी तो गाण्ड ही फट गई थी कि तभी अम्मी। धीरे आवाज में गुर्राते हुये बोली- “सन्नी मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी...”

मैं हकलाते हुये बोला- “लेकिन हुआ क्या अम्मी? बात क्या है? आखिर मैंने ऐसा क्या कर दिया है?”

 
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मैं हकलाते हुये बोला- “लेकिन हुआ क्या अम्मी? बात क्या है? आखिर मैंने ऐसा क्या कर दिया है?”

अम्मी- “अभी तुम सफदर के घर पे फरी को क्यों लेकर गये थे, बता सकते हो मुझे? तुम्हें शर्म नहीं आई? बहन है वो तुम्हारी और तुम उसी के साथ ये सब करते हो। कब से चल रहा है ये सब?”

अम्मी की बात सुनकर मैं समझ गया कि सफदर अंकल अम्मी को सब कुछ बता चुके हैं, और अभी अम्मी जो गुस्से में आग उगल रही हैं उसकी वजह ही ये है, तो मैं सोच में पड़ गया कि अब क्या करूं? किस तरह अम्मी का गुस्सा ठंडा करूं? तभी अंकल की एक बात मुझे याद आ गई और मैं अम्मी की तरफ देखकर बोला- “अम्मी प्लीज़... आप गुस्सा ना हों, और आराम से बैठ जाओ। मैं आपको सब कुछ बताता हूँ..” और अपने हाथ अम्मी

के कंधों पे रखकर उन्हें बिठा दिया।

अम्मी को बेड पे बिठाकर मैं खुद उनके पैरों में बैठ गया और अम्मी की आँखों में देखते हुये बोला- “अम्मी ये सब आपके लिए कोई नया तो नहीं, है ना? क्या आप अंकल सफदर और उनकी बेटी इरम के साथ मिलकर सेक्स नहीं करती रही हो? और अगर मैंने अपनी बहन के साथ सेक्स कर लिया है तो कौन सी ऐसी कयामत आ गई है दुनियां में? और अम्मी मैं आपको अपने दोस्त से भी मिलवा सकता हूँ जो अपनी बहनों के साथ सेक्स करता है, और भी कई होंगे दुनियां में?”

अम्मी मेरी बात सुनकर बोली- “हाँ, मैं जानती हूँ कि आजकल इस दुनियां में ये सब होता है। लेकिन सन्नी तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। आखिरकार, ये मुअशरा क्या कहेगा हमारे बारे में?”

अब मैंने अम्मी का हाथ पकड़कर उनको चूमा और बोला- “देखो अम्मी हमें किसी को कुछ बताना ही नहीं है तो कोई कुछ क्यों बोलेगा? और यहाँ हम लोग आए भी तो इसीलिए हैं ना कि एंजाय कर सकें? यहाँ हमें कोई नहीं जानता है तो फिर आप इतना डर क्यों रही हैं?”

अम्मी ने एक अह' भरी और बोलि- “ठीक है सन्नी, जैसा तुम लोगों को अच्छा लगे। मैं क्या कह सकती हूँ? लेकिन क्या इस सबका निदा को भी पता है?"

तो मैंने हाँ में सिर हिला दिया और बोला- “जी अम्मी। लेकिन उसे सिर्फ मेरा और बाजी का ही पता है और कुछ पता नहीं है.”

अम्मी हैरानी से बोली- “तो क्या उसने कभी तुम्हें मना नहीं किया?”

मैंने हँसते हुये कहा- “नहीं अम्मी, बल्की वो तो हमें खुद टाइम देती है मस्ती करने के लिए, और खुद भी हमारा सेक्स देखकर मजा करती है...”

अम्मी- “ठीक है सन्नी बेटा। लेकिन अब फरी को मेरे और अपने बारे में कुछ मत बताना, मैं उसका सामना नहीं कर पाऊँगी प्लीज़्ज़..."

 
अम्मी की बात सुनकर में हँस दिया और बोला- “अम्मी आप क्या समझती हो कि उसे कुछ पता नहीं है? अरे अम्मी जान सच तो ये है कि मैंने जब आपको और अंकल को सेक्स करते देखा था तो तभी फरी को बता दिया था और उसी के कहने से ही तो मैंने आपके साथ मस्ती की थी। और तो और उसे सफदर अंकल और इरम के सेक्स का भी पता है, अब उससे कुछ भी छुपा हुआ नहीं है...” ।

मेरी इस बात से अम्मी थोड़ा परेशान हो गई, लेकिन कुछ बोली नहीं।

मैंने अम्मी के हाथों को हल्का सा दबा दिया और बोला- “अम्मी आप परेशान ना हों। फरी बाजी बहुत अच्छी हैं,

आपको उससे कुछ परेशानी नहीं होना चाहिए..." और उठते हुये अम्मी के गालों पे चुम्मा देकर रूम से निकल आया।

मैं अम्मी के रूम से निकलकर सीधा अपने वाले रूम में आ गया, जहाँ बाजी अभी तक बेड पे लेटी हुई थी, और निदा बाजी के करीब ही चेयर रखकर बैठी उनसे बातें कर रही थी।

मुझे रूम में आता देखकर निदा ने आँखें मटकाई और बोली- “क्या बात है भाई जान, क्या बात करनी थी हमारी अम्मी जान ने आपसे?"

मैं हँसता हुआ बोला- “अरे कुछ नहीं यार, बस ऐसे ही वापसी का पूछच रही थीं कि कब जाना है?”

और इतना बोलते हुये निदा की चेयर के पीछे का खड़ा हो गया, और निदा की तरफ देखने लगा, तो मेरा पूरा जिश्म सनसना गया था।

 
उस वक़्त निदा एक जीन्स और ढीली सी टी-शर्ट में थी। लेकिन जैसे ही मैंने नीचे झुक के देखा तो मेरी नजर सीधी निदा की शर्ट में चली गई जहाँ मेरी बहन की बिना ब्रा की चूचियां नजर आ रही थीं। मेरी तो नजर ही जैसे उसी जगह पे टिकी रह गई थी।

जिसे फरी बाजी ने देख लिया और बोली- “सन्नी कहाँ गुम हो गये हो?”

मैं झट से बोला- “नऽनहीं तो, कहीं भी नहीं। यहीं हूँ मैं तो...”

बाजी- मुझे तो लगा कि तुम कहीं और ही सैर पे चले गये हो मुझे यहाँ छोड़कर।

निदा- “नहीं बाजी, आपने भाई को बड़ी मजबूती से बाँध रखा है, ये कहीं नहीं जाएगा हेहेहेहे...”

मैं- “फन्नी... इसमें हँसने की भला क्या बात है?” और निदा के पास से हटकर बाजी के पास ही बेड पे जा बैठा..."

निदा- अच्छा तो भाई आप ने क्या जवाब दिया अम्मी को?

मैं- यार अब भला मैं क्या बोलता अम्मी को? मैंने कह दिया है कि जब आप चाहो हम वापिस चल देंगे।

निदा रोनी शकल बनाकर बोली- “भाई अभी यहाँ दिन ही कितने हुये हैं आए हुये, और अभी से वापसी? नहीं भाई प्लीज़... आप अम्मी को समझाओ ना कि कुछ दिन और रुकने के लिए यहाँ...”

फरी- क्या निदा, तुम भी बच्चों की तरह रोने लग जाती हो? मजाक कर रहा है ये कमीना तुमसे, और तुमने रोना शुरू कर दिया है। ये पहले ही अम्मी को बोल आया होगा कि अभी कुछ दिन रुकना है।

निदा बाजी की बात सुनकर खुश हो गई और बोली- “तो ठीक है लोव बर्डस, इस खुशी में मैं अब तुम लोगों के सिर पे सवार नहीं रहती और थोड़ा टाइम तुम्हें दे रही हूँ अकेले एंजाय करो...” और हेहेहेहे करती हुई रूम से निकल भागी।

निदा को रूम से जाते हुये मैं पीछे से उसको घूरता रहा। क्या प्यारी लग रही थी उसकी गाण्ड टाइट जीन्स में कसी हुई और चलने से ऐसे लग रहा था कि दिल ही निकालकर ले जाएगी। मुझे इस तरह अपनी छोटी बहन को पीछे से घूरता पाकर बाजी हल्का सा खाँसी, तो मैंने बाजी की तरफ देखा।

 
बाजी मुश्कुरा रही थी और बोली- लगता है अब निदा की खैर नहीं है।

मैं- बाजी सच पूछो तो बड़ा दिल करता है, लेकिन मैं कोई भी काम उसकी मर्जी के बिना नहीं करूंगा।

बाजी- अच्छा अब क्या प्रोग्राम है?

मैं- यार प्रोग्राम तो आपने बताना है जब बोलोगी।

बाजी- अरे भाई आज तो हिम्मत ही नहीं है मुझमें। तुम आज की रात अम्मी को अपने साथ ले जाओ सफदर अंकल की तरफ।

मैं- “क्यों जी, क्या तुम ये चाहती हो कि जिस तरह तुम्हें दर्द उठाना पड़ा है, अम्मी की भी ये हालत हो? तो ये बात अपने दिमाग से निकल दो, क्योंकी अम्मी तो इसमें ज्यादा एंजाय करेंगी..."

बाजी हैरानी से बोली- “वो किस तरह? क्या अम्मी एक साथ दो लण्ड अपने अंदर ले सकती हैं? क्या अम्मी ने खुद बताया तुम्हें?”

मैं- “नहीं, बताया तो नहीं। लेकिन मुझे अंदाजा है कि अम्मी एक साथ दो का मजा ले चुकी हैं और वो भी कई बार..” अभी हम ये बातें ही कर रहे थे के मुझे बाथरूम में पानी गिरने की आवाज सुनाई दी तो मैंने बाजी की। तरफ देखा।

तो बाजी मुश्कुरा दी और बोली- “मेरा खयाल है कि अगर तुम निदा को बिना कपड़ों के देखना चाहते हो तो ये अच्छा मोका है, क्योंकी इस तरफ का दरवाजा खुला है...”

मैंने बाजी की तरफ देखा जो कि मुझे ही देख रही थी और हल्का-हल्का मुश्कुरा रही थी, तो मैंने धीरे से कहा

कहीं नाराज ही ना हो जाए?”

बाजी ने कहा- “यार तुम बोल देना कि पता नहीं था कि कोई बाथरूम में है भी या नहीं?”

मैं उठा और बाथरूम की तरफ चल दिया, जहाँ से अब पानी गिरने की आवाज भी सुनाई नहीं दे रही थी। मैं बाथरूम के दरवाजे के बाहर खड़ा हो गया जाकर और एक बार बाजी की तरफ देखा जो कि अभी भी मेरी तरफ ही देख रही थी।

बाजी ने मुझे इशारे से हौसला दिया तो मैंने एक झटके से बाथरूम का दरवाजा खोला तो देखा की मेरी छोटी बहन निदा बाथरूम में नंगी खड़ी अपना जिम मल रही थी।

 
जैसे ही दरवाजा खुलने की आवाज सुनी निदा ने और बाथरूम में मुझे खड़ा देखा, तो सीधी खड़ी हो गई और अपने हाथ अपने पीछे करके दीवार से लग गई और बोली- “भाई यहाँ मैं नहा रही हूँ आपको दरवाजा नाक करके

आना चाहिए था..."

मैंने एक बार सिर से पाओं तक निदा को बड़े प्यार से देखा और बोला- “सारी यार, मुझे पता नहीं था कि तुम नहा रही हो...” और इतना बोलकर मैंने दरवाजे को बंद कर दिया और बाजी के पास वापिस आ गया।

बाजी मेरी तरफ देखकर मुश्कुराए जा रही थी, तो मैंने कहा- “क्या हुआ इतना खुश क्यों हो रही हो?”

बाजी ने कहा- “तुम्हें देखकर लग रहा है कि अगर तुम्हारा बस चल जाए तो तुम बेचारी निदा को अभी चीर के रख दो...”

मैं- यार क्यों मजाक उड़ा रही हो? अब ऐसा भी कुछ नहीं है।

बाजी- अच्छा जी, तो फिर जरा बताओ तो कैसा कुछ है?

मैं- बाजी की बातों से झुंझला सा गया और बोला- “बाजी आप क्यों इतना तंग कर रही हो? सीधी तरह बोलो ना के इस वक़्त मैं चला जाऊँ यहाँ से..”

बाजी- यार मैंने ऐसा तो कुछ नहीं कहा है, जिससे तुम इतना गुस्सा कर रहे हो? मैं तो बस ये पूछ रही थी कि क्या इरादा है?

मैं बाजी के पास से उठा और रूम से बाहर निकला और अम्मी के रूम की तरफ चल दिया। लेकिन फिर पता नहीं क्या दिल में आई कि बाहर निकला और रात 8:00 बजे तक यूं ही आवारा फिरता रहा। खाना भी मैंने बाहर से ही खा लिया और 8:00 बजे घर वापिस आया तो देखा कि अम्मी बाजी और निदा के साथ-साथ सफदर अंकल भी घर पे ही थे, और काफी परेशान लग रहे थे।

 
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