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बैरिस्टर, रमन और शहजाद राय ने लपककर फ़र्श से उठने की कोशिश कर रहे अक्षय को दबोच लिया और फिर कमरे में दाखिल हुआ वह शख्स जिसने एक ही घूंसे में अक्षय को उछालकर हॉल में फेंक दिया था-उसे देखते ही किरन के अलावा सबके हलक से चीखे निकल गई है !!!
बुंदू की तो घिग्घी बंध गई ।
यह लाश थी गुलाब चन्द की लाश ।
"य-यही है?" बुंदू चीखा-----" व-वह लाश यही है मेमशाव, जिसने अपनी गर्दन दबाने की कोशिश की थी ।"
लाश आहिस्ता-आहिस्ता हाल में आ गई ।
तेजी से धड़कते दिलों के साथ सभी आँखों में खौफ लिए लाश को देख रहे थे-------सबसे ज्यादा आश्चर्य के भाव अक्षय की आंखों में थे --------वैरिस्टर रमन और शहजाद राय के बंधनों में कैद वह गुलाब चन्द की ताश को इस तरह देख रहा था जैसे दुनिया के बड़े अजूबे को देख रहा हो जबकि अजूबा किरन के नजदीक पहुंचकर कुछ देर सीधा खडा रहा फिर अपना _सड़ा-गला हाथ पेट पर रखकर इस तरह झुका जैसे करोड़पति का ड्राइवर गाडी का दरवाजा खोलते वक्त झुकती है ।।।।
"यहां खडे़ हो जाओ ।" किरन ने उसे आदेश दिया ।
"अजूबा ठीक वहां खड़ा हो गया जहाँ किरन ने कहा था ।"
बैरिस्टर सहित सभी लोग चकितं हुए किरन की तरफ देख रहे थे, उसने कहा------ सब लोग अपनी-अपनी कुर्सी पर बैठ जाए-केवल बुंदू और रमन इंस्पेक्टर को पकड़े रखेंगे, तुम हॉल का दरवाजा अन्दर से बन्द कर दो कमल ।"
सबने मशीनी अन्दाज से उसके आदेश का पालन किया ।
अक्षय भी अब किसी किस्म का विरोध करता नजर नहीं जा रहा था ।
आंखों में खौफ लिए बुंदू उस वक्त भी गुलाब चन्द की लाश को घूर रहा था, जब एकाएक किरन ने हाथ बढाकर लाश के चेहरे पर चढा सड़ा, गला और जला हुआ-सा नजर जाने वाला फेसमास्क नोंच लिया ।
"न-निवकू ..... ?" बुन्दू के हलक से चीख निकल गई-------शाब की लाश तू बना था निवकू ?"
आश्चर्य से परिपूर्ण चीखे़ वेड पर पड़े शेखर मल्होत्रा से लेकर अतर जैन एण्ड फैमिली तक के हलक से निकली थी, मगर सबसे बुरा हाल बुंदू का था जबकि निवकू इस तरह मुस्कुरा रहा था जैसे स्टेज पर उसे "बेस्ट एक्टर' का एवार्ड मिलने वाला हो-जज साहब, बैरिस्टर और शहजाद राय चक्ति निगाहों से निक्कू को देख रहे थे।।।।
हाँल में छाई मुक्मल सनसनी का आनन्द लूटने के बाद किरन ने बताया--"इस वक्त गुलाब चन्द की लाश निवक्रू ज़रूर बना हुआ है बुंदू मगर वह निवकू नहीं था, जिसने तुम्हारी गर्दन दबाने की कोशिश की थी ।"
“तो वह कौन था मेमशाब ?"
"वही जिसकी गर्दन इस वक्त तुम्हारे हाथों में है ।"
"तो इस वक्त ताश का-सा चेहरा निवकू क्यों वना हुआ है मे-मसाहब-----ये लाश का-सा चेहरा, ये मालिक के अधजले कपड़े और अंगूठियां निवकू पर कहाँ से आ गयी ?"
"मैंने दिए थे ?"
" अापने---क्यों ?"
"ताकि भागने की कोशिश करते इंस्पेक्टर को रोके उसे देखकर इसके रहे सहे हौंसले भी पस्त हो जाये !"
कहने के साथ किरन ने फेसमास्क के वने गले-सड़े से नजर अाने बाले ग्लब्स निक्कू के दोनों हाथों से जुदा किए----ग्लब्स कोहनियों तक थे और-अंगुठियां ग्लब्स की अंगुलियों के ऊपर चढी हुई थी ।
बैरिस्टर ने पूछा------" “यह सारा" सामान तुम्हारे पास कहां से अाया ?"
" ब्रेक शु-के साथ इंस्पेक्टर अक्षय के घर से चुराया था----अाप देख रहे हैं न जज साहब, फेसमास्क और ग्लबज कितने शानदार बने हुए हैं-इन्हें बनाने वाला कारीगर कोर्ट को बताएगा कि उसने अक्षय के लिए बनाये थे ।"
"तुम्हें यह कैसे पता लगा कि अक्षय सुब्रत जैन का लडका है?"
“सबसे पहले मैं अक्षय को डाक बंगले में पहचानी ।” किरन ने कहना शुरू किया-----"और यह सुनकर शायद अाप हँसेंगे कि पहचाना कैसे-दरअसल इसने चेहरे पर सफेद नकाब पहन रखा था, आंखों में कान्टेक्ट लेस लगा रखे ये यानि अपनी तरफ़ से पूरी तरह से सावधान था कि इसे कोई न पहचान सके मगर अपनी जुबान को क्या करता यह-आमतोर पर लोग कहते हैं कि पुलिस वाले गालियां इतने फर्राटे से देते हैं जैसे इन्हें ट्रेनिंग में में सिखाई जाती हों-------
--------सफेद नकाबपोश की गालियां सुनकर मुझे लोगों का यह कथन याद आ गया और दिमाग में विचार उभरा कि कहीं यह कोई पुलिस वाला ही तो नहीं ? दिमाग में यह ख्याल उभरते ही अक्षय का ख्याल आया क्योंकि संगीता मर्डर केस से अक्षय ही कनैक्टिड था--------
--------;डाक बंगले में श्योर नहीं हो पाई थी, केवल शक था या यूं कहा जाना चाहिए कि दिमाग में एक सम्भावना हुई थी, सम्भावना में कितना दम हे--- है भी या नहीं-यह जांचने में उस वक्त उसके रेजीड़ेस पर पहुची पापा, जव आप एम्बुलेंस में बैठे अस्पताल जा रहे ये-------
------जानती थी कि इस वक्त पर अक्षय घर पर नहीं है----बहीं उसकी पत्नी और दोनों बच्चे मिले--पत्नी का नाम कमला है, लड़की का स्वीटी और लड़के का बीशु--दोंनो बच्चे सोये हुए थे--कमला को मैंने अपना नाम . शकुन्तला बताया और कहा कि किसी अावश्यक काम से इंस्पेक्टर साहब से मिलना चाहती हु--उसके यह कहने पर कि इंस्पैक्टर साहब घर पर नहीं हैं, मैंने कहां, अाप ही से बात कर लूगी
अगर कोई मर्द होता तो रात के उस वक्त कमला कभी उसे घर के अन्दर अाने की इजाजत न देती मगर लेडीज होने का लाभ मिला-कमला मुझे ड्राइंगरूम में ले गई------
------वहां, दो जोडी के फोटो लगे हुए और दोनों ही पर मालाएं चढी हुई थीं जो इस बात का द्योतक थी कि दोनों जोड़े स्वर्गीय ---एक फोटो के नीचे लिखा था मिस्टर . एण्ड मिसेज राजेश श्रीवास्तव तथा दूसरे के नीचे लिखा था---मिस्टर एन्ड मिसेज सुब्रत जैन----इस नाम को पड़ते ही बिजली की तरह यह बात दिमाग में कौंध गई कि सुब्रत जैन, अतर जैन और गुलाब चन्द का भाई था-----
-------एक लिंक और मिल गया था मुझे अत: बातों-ही-बातों में कमला से पूछा--"ये फोटों किसके हैं है"'
"इनके माता-पिता के ?"
"हां ।"'
ऐसा कैसे हो सकता है, इनमें से एक ही जोडी तो इंस्पेक्टर साहब के माता-पिता होंगे ?"
कमला अजीब अन्दाज में मुस्करा: बोली-नी दोनों ही जोडे 'इनके' मां बाप हैं---ठीक उसी तरह जैसे कृष्णा के दो मां-बाप थे यानि एक जोडे ने इन्हें जन्म दिया दूसरे ने पाला ।"
जन्म किसने दिया ? मैंने पूछा---“और पाला किसने ?"'
"जन्म देने वाले मां-बाप वे है ।" कमला ने सुब्रत जैन की तरफ इशारा दिया और फिर दूसरे फोटो की तरफ इशारा करके बोली---'"पालने वाले वे ।"
"क्या मतलब ?"
"कुछ दिन पहले तक मैं खुद नहीं जानती थीं कि इनके मां-बाप दो हैं ।" कमला कहती चली गई---", तो इन्हें श्रीवास्तव साहब का बेटा ही समझती थी-मेरे पिता ने शादी भी यही सोचकर की थी कि ये श्रीवास्तव हैं---------
मगर कुछ ही दिन पहले मेरे हाथ इन्की पर्सनल डायरी लग गई
उसमें जैन दम्पति का फोटो रखा था और इनके पर्सनल जीवन की बोहत-सी बातें लिखी थीं-अन्य बातों के साथ-साथ डायरी में यह भी लिखा था कि करीब बारह वर्ष पूर्व 'ये’ अपने मां-बाप यानि जैन दम्पति के साथ ट्रेन में यात्रा कर रहे थे-इनके सामने वाली सीट पर श्रीवास्तव दम्पत्ति बैठे थे जो कि निःसन्तान थे और उन्हें 'इनकी' शरारत बहुत लुभा रही थीं अचानक उस ट्रेन का एक्सीडेंट हुआ जैन-दम्पत्ति मारे गये-------
---------श्रीवास्तव दम्पत्ति के हाथ ये लगे और उस घटना के बाद उन्होंने इन्हें अपना बेटा वना लिया-श्रीवास्तव दम्पती नितांत नये शहर में जाकर बस गये-बहां उन्हे कोई नहीं जानता था-कि ये उनके बेटे नहीं हैं-यह रहस्य किसी को न बताने के लिए श्रीवास्तव दम्पत्ति ने इन्हें भी समझा दिया-उन्होंने इनका नाम वही यानि अक्षय रखा केवल कास्ट चेंज कर दी यानि जैन की जगह श्रीवास्तव कहने लगे ।"
"ओह ।"
एक दिन इनका मूड देखकर यह बात कह दी कि मैंने डायरी पढ़ ली है-पहले तो ये "सन्न' रह गये मगर जब मैंने प्यार से पूछा कि यह बात आपने मुझसे छुपा क्यों रखी थी तो बोले, 'डरता था कि कहीं हकीकत जानने के बाद तुम मुझसे नफरत न करने लगो,-----मैंने कहा----इसमें भला नफरत करने की क्या बात है, भगवान् श्री कृष्ण के मां-बाप भी तो दो थे ।।"
"यानि इंस्पेक्टर साहब ने कुबूल कर लिया कि वे वास्तव में जैन हैं?"
"हां ।" कमला ने बताया----" तब मैंने यह फोटो डायरी से निकालकर खुद यहा, उतने ही सम्मान के साथ लगाया,जितने सम्मान साथ श्रीवास्तव दम्पत्ति का लगाया था, उस दिन यह इतने भावुक हो उठे कि रो पडे ।"
"यह जानकारी मेरे लिए धमाकेदार थी ।किरन कहती चली गई---"'बल्कि अगर यह कहा जाये तो गलत न होगा कि इस जानकारी ने मुझे हत्यारे का नाम साफ-साफ बता दिया था-अब तो जरूरत केवल यह जानने की थी कि अक्षय जैन ने क्या, कैसे किया है और जो किया है उसे साबित कैसे किया जा सकता है----बातों-ही-बातों में मैंने कमाला से यह पता लगा लिया था कि अक्षय का पर्सनल कमरा कौन -सा है----- बच्चे दूसरे कमरे में सोये हुए थे, सो मैं समझ गई कि मेरे जाने और अक्षय के अाने तक कमला उसी में बच्चों के पास सोयेगी------जानती ही थी कि डाक बंगले वाले केस में उलझा अक्षय तीन चार घन्टे से पहले घर अाने वाला नहीं है-----तीस मिनट तक कमला के सो जाने का इंतजार करके पाईप के जरिये छत पर पहुंची, वहाँ से आंगन में और आंगन से दवे पांव खाली पड़े अक्षय के कमरे में-दूसरे कमरे में बच्चों के साथ मौजूद कमला तब तक सो चुकी हो या न सो चुकी हो, मगर यह सच है कि मैं अपना काम मुकम्मल करके स्थान से निकल गई और कमाला को मेरे आने-जाने की भनक तक न लगी ।
"वहां क्या किया तुमने ?
“कमरे की तलाशी ली------इत्तनी सावधानी के साथ कि बाद में किसी को भनक तक न लगे कि कोई चीज छेडी गई है-कमरे में एक सेफ थी-उसकी चाबियों का गुच्छा वेड पर गद्दे के नीचे रखा मिल गया-सेफ़ का लॉकर तक खंगाल लिया मैंने किन्तु काम की कोई भी चीज हाथ न लगी । हर जगह की तलाशी लेने के बाद निराश-भी हो गई मैं-----अब नजर केवल राइटिंग टेबल पर जो एक कोने में दीवार से सटी रखी थी'----तीन दराजें थीं उसमें तीनों में ताले---- चाबी कमरे में कहीं न थी और इसलिए लग रहा था कि मेरे काम की वस्तु उसमें होगी---- चुंकि एक बार कमला उनकी पर्सनल डायरी पढ़ चुकी थी----अब वह डायरी को ऐसे स्थान पर नहीं रखता होगा--- जहां कमला के हाथों पहुच जाए, दराज की चाबी निश्चित रूप से किसी ऐसे स्थान पर होगी जहाँ से कमला को न मिल सके----"तलाश करते-करते जब दांतों तले पसीना अा गया मगर चाबी न मिली तो मैंने दूसरी तरकीब इस्तेमाल की ।"
“क्या ?"'