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मांगलिक बहन

सौंदर्या की कमर अजय की छाती से चिपक जाने से सौंदर्या को पहली बाद मर्द की छुवन का एहसास हुआ तो उसके जिस्म के तार झनझना उठे और बोली:"

" निकाल ना भाई, क्या कर रहा है इतनी देर से ?

अजय थोड़ा सा आगे को हुआ और उसकी जांघें अब पूरी तरह से सौंदर्या की टांगो में पीछे से चिपक गई और अजय अब बिल्कुल अपने पंजो पर खड़े होते हुए जितना हो सकता था आगे कि तरफ झुक गया जिससे उसे सौंदर्या की चूचियां पूरी नजर आ रही थी। बस निप्पल ही अंदर कैद थे और पूरी चूचियां बाहर।

अजय ने चूचियों को देखते हुए बालो को खोलना शुरू कर दिया। सौंदर्या के गर्म जिस्म की आंच पाकर उसका लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा जिसका एहसास अब सौंदर्या को हो रहा था। अजय की सांसे तेज हो गई थी और सीधे सौंदर्या की गर्दन पर पड़कर उसकी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी जिससे उसकी सांसे तेज गति से चलने लगी और उसकी चुचियों में कम्पन होने लगा और उसके जिस्म में चिंगारी सी उठने लगी और सौंदर्या मचलते हुए बोली:"

" आह भाई, तुम भी ना बस, एक क्लिप नहीं खुल रही तुमसे, इतने बड़े हो गए हो।

अजय:" दीदी देखो ना कितनी बुरी तरह से आपके बाल फंसे हुए हैं, थोड़ा जोर लगाता हूं तो आपको दर्द होता है।

सौंदर्या:" आह लगा दे जोर, लेकिन थोड़ा ध्यान से करना, कहीं मेरे बाल ही ना फाड़ दो।

अजय ने अपने एक हाथ को सौंदर्या के कंधे पर रखकर उसकी गर्दन को पीछे की तरफ किया तो सौंदर्या अपने पंजों के बल खड़ी हो गई और जिससे उसकी कमर उसकी छाती में घुस सी गई और अजय थोड़ा आगे को हुआ और तेजी से जोर से क्लिप को बाहर खींचा तो उसका पूरी तरह से खड़ा हो चुका लंड सौंदर्या की गांड़ में टकराया।

क्लिप के साथ कुछ बाल भी खींच गए और सौंदर्या को अपने पिछवाड़े में कुछ बहुत सख्त सा टकराता महसूस हुआ और सौंदर्या के मुंह से एक आह निकल गई। ये आह बालो में हुए दर्द की वजह से कम और पीछे लंड टकराने की वज़ह से ज्यादा निकली थी। झटके की वजह से क्लिप निकल गई लेकिन हाथ से छूट कर वहीं गिर पड़ी छत पर।

सौंदर्या पलटी और उसने थोड़ा नाराजगी से अजय के सीने में कुछ घुस्से जमा दिए और शिकायती लहजे में बोली:"

" अज्जु भाई, पूरे ज़ालिम हो तुम, हर काम ताकत से नही होता, थोड़ा दिमाग भी लगाया करो। आज तो तुम मेरी जान ही निकाल देते। चलो लाओ मेरी क्लिप दो जल्दी।

अजय ने अपने हाथ में देखा तो क्लिप नहीं थीं। सौंदर्या ने उधर उधर देखा तो पाया कि क्लिप वहीं निकल कर गिर गई है तो वो क्लिप झुकाने के लिए जैसे ही नीचे झकी तो उसकी चूचियां काबू से बाहर होकर उछल पड़ी मानो अपनी आजादी चाहती हो।

अजय अपनी बहन के इस कामुक अंदाज को देख कर सम्मोहित सा हो गया और उसकी नजर एक बार फिर से अपनी बहन की चुचियों के उभार पर ठहर गई। सौंदर्या ने क्लिप को पकड़ना चाहा लेकिन छत पर बह रहे पानी के साथ वो थोड़ी आगे पहुंच गई और ठीक अजय के सामने पहुंच गई जिसका लंड अब पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो गया था। सौंदर्या ने तेजी से आगे होते हुए उसे पकड़ लिया और क्लिप हाथ में लेकर सौंदर्या जैसे ही उपर उठी तो उसका माथा अपने भाई के तम्बू से टकराया और उसके मुंह से फिर से आह निकल पड़ी। लंड पर अपनी बहन का माथा लगते ही अजय की नजरे उसकी चुचियों से हट गई और सौंदर्या ने एक बार खड़ी होते हुए उपर की तरफ देखा तो उसे एहसास हुआ कि उसके माथे पर क्या लगा था तो उसकी आंखे शर्म से झुक गई। हे भगवान उफ्फ ये क्या हो गया।

सौंदर्या तेजी से पलटी और नीचे की तरफ भागती हुई चली गई। वहीं अजय को जैसे कुछ समझ ही नहीं आया। उफ्फ ये मुझसे क्या पाप हो गया, पता नहीं दीदी अब मेरे बारे में क्या सोचेगी।

अजय भी अपनी बहन के पीछे पीछे ही नीचे की तरफ आ गया। नीचे लाइट आ गई थी और सौंदर्या तेजी से चलती हुई अपने कमरे में घुस गई और अपने कपड़े बदलने का सोचने लगी। उसने अपनी अलमारी को खोलना चाहा लेकिन वो नहीं खुल पाई क्योंकि उसका लॉक बुरी तरह से फंस गया था।

सौंदर्या को लगा कि अजय उसकी मदद कर सकता है लेकिन वो अपने भाई की नजरो का सामना कैसे कर पाएगी। छत पर जो हुआ उसके बाद अभी तक उसकी सांसे उखड़ी हुई थी और उसके जिस्म के रोम रोम में एक अजीब सी मस्ती छाई हुई थी।

सौंदर्या को जब कोई उपाय समझ नही आया तो उसने बेड के नीचे रखे हुए संदूक से अपने कपड़े निकालने की सोची लेकिन संदूक तो भारी था। मतलब उसे दोनो ही हालत में अजय की मदद लेनी होगी लेकिन अगर अलमारी नहीं खुल पाई तो आज रात के उसके प्लान का क्या होगा क्योंकि डिल्डो तो अलमारी में ही बंद हैं। डिल्डो के बारे में सोचते ही उसके मन में मस्ती भरी तरंगे उठने लगी और वो बिना कुछ समझे बाहर की तरफ आई तो उसकी नजर अजय पर पड़ गई। अजय को देखते ही उसकी हालत फिर से खराब हो गई गर्दन अपने आप शर्म से नीचे झुक गई। लेकिन सौंदर्या शर्मीली जरूर थी पर हिम्मत की कोई कमी नहीं थी। उसने अपनी नजरे नीचे ही रखी और बोली:"

" भाई मेरे सारे कपड़े भीग गए हैं और मम्मी आ गई तो मुझे डांट पड़ेगी। क्या तुम मेरा संदूक निकाल सकते हो ? भारी हैं वो मुझसे बाहर नहीं आ रहा।

अजय अपनी बहन की बात सुनकर थोड़ा अच्छा महसूस किया और बोला:'

" ठीक है दीदी। मैं निकाल देता हूं इसमें कौन सी बड़ी बात हैं।

अजय उसके कमरे में घुस गया और बेड के नीचे रखे हुए संदूक को अपनी तरफ़ खींचने लगा लेकिन संदूक खड़ा हो गया था जिससे पुरा बेड हिल रहा था और सब कुछ उल्टा पुल्टा होने का खतरा था इसलिए सौंदर्या बोली:"

" भाई बस वहीं सीधा कर दो, कहीं बेड ही ना खींच जाए, मैं निकाल लुगी अंदर से ही।

अजय ने अपनी दीदी की बात मानते हुए संदूक को वहीं सीधा कर दिया और खड़ा हो गया तो सौंदर्या नीचे फर्श पर अपने घुटनों के बल झुक गई और अंदर झांकने लगी। सौंदर्या के झुकने से उसकी गांड़ पूरी तरह से उसकी गीली नाइटी में चिपक गई और पूरी तरह से खुल कर बाहर की तरफ उठ गई।
 
सौंदर्या थोड़ा आगे को हुई और बेड के नीचे झांकने लगी। नाइटी उसके कंधो से हल्की सी खिसक गई और उसके दूधिया गोरे कंधे संगमरमर की तरह चमक उठे और उसके खुले हुए बाल उसकी कमर पर फैल गए। अजय ये नजारा देखकर अपनी पलके तक झपकाना भूल गया। उसे आज समझ में आ रहा था कि उसकी बहन क्या चीज हैं। उसकी उठी हुई मोटी मोटी गांड़, बाहर की तरफ निकली हुई बिल्कुल जानलेवा, एकदम किसी स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा की तरह या उससे भी कहीं बेहतर।

सौंदर्या संदूक को खोलने की कोशिश करने लगी जिससे उसका जिस्म इधर उधर लहराने लगा और तो पूरी तरह से अपने होश खो चुका था और उसका एक हाथ अपने लंड पर अपने आप ही पहुंच गया।

सौंदर्या के हाथ ठीक से संदूक तक नहीं पहुंच पा रहे थे जिससे वो थोड़ा ज्यादा आगे को हुई और उसकी नाइटी बेड के साथ फंस गई और सौंदर्या की। कमर पर खिसक गई जिसका नतीजा ये हुआ कि पीछे से सौंदर्या की गांड़ पूरी तरह से नंगी हो गई।

अपनी बहन के मात्र सफेद रंग की पतली से पेंटी में कैद गोरे गोरे गांड़ के पटो को देखते ही अजय के मुंह से एक आह निकल पड़ी। सौंदर्या इस बात से पूरी तरह से बेखबर थी कि उसकी नाइटी गांड़ पर से खिसक गई है। वो संदूक को खोल चुकी थी और अपने कपड़े निकाल रही थी जिससे उसकी गांड़ बार बार इधर उधर उछल रही थी। अजय का मन कर रहा था कि वो आगे बढ़ कर गांड़ को अपने दोनो हाथो में थाम कर रगड़ रगड़ कर मसल डाले। लेकिन अपनी सगी बहन पर हाथ डालने की हिम्मत उसके अंदर नहीं थी।

सौंदर्या ने अपने कपड़े निकाल लिए और संदूक बंद करने के लिए जैसे ही हल्की सी आगे हो हुई तो उसकी गांड़ थोड़ा और अच्छे से खुल गई और अजय अपने होशो हवास खो बैठा और बिल्कुल सौंदर्या की गांड़ के पास बैठ गया और अपने कड़क लंड को बाहर निकाल लिया और सहलाने लगा। सौंदर्या ने संदूक को बंद किया और धीरे धीरे पीछे को हटने लगी। अजय सौंदर्या की गांड़ को देखते हुए पूरी तरह से मदहोश होकर पागल हो गया था और सौंदर्या के पीछे हटने से उसकी गांड़ लंड के करीब होती जा रही थी लेकिन मदहोश अजय ये सब होते देख कर तेजी से अपना लंड सहला रहा था। सौंदर्या जैसे ही एक झटके से पीछे हुई तो बेड में फंसी हुई नाइटी पीछे उसकी गान्ड पर आ गई लेकिन उसकी गांड़ अपने भाई के लंड से जोर से टकराई।

सौंदर्या के मुंह से फिर से दर्द भरी आह निकल पड़ी और अजय ने तेजी से अपने लंड को पैंट के अंदर किया और सौंदर्या बाहर निकल गई। सौंदर्या के चेहरे का रंग एक बार फिर से उड़ गया था और उसने एक तिरछी नजर अजय की पेंट में बने हुए उभार पर डाली तो उसे समझ में आ गया कि उसकी गांड़ पर क्या टकराया था। हाय राम, कितना बड़ा उभार बना हुआ है इसकी पेंट में,इंसान है या घोड़ा ये मेरा भाई भी।

सौंदर्या के जिस्म में रोमांचक लहर दौड़ रही थी। लंड को देखते ही उसे फिर से डिल्डो याद आ गया लेकिन वो तो अलमारी में बंद हैं और आज उससे अलमारी तो नहीं खुल सकती।

उसने जोश में आकर एक फैसला लिया और अजय से बोली:"

" भाई तुम मेरी ये अलमारी भी खोल दो, मुझसे तो नहीं खुल रही हैं ये।

अजय बिना किसी बोले अलमारी के पास पहुंच गया और उसे खोलने लगा लेकिन उससे नहीं खुल रही थी। सौंदर्या तिरछी नजरों से बार बार उसके पेंट में बने हुए उभार को देख रही थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इतना बड़ा उभार क्या सच में लंड का हो सकता हैं।

अजय से अलमारी नहीं खुल रही थी तो वो बोला:"

" दीदी कल दिन में खोल दू क्या ? अभी तो नहीं खुल रही है।

सौंदर्या उदास सी हो गई और बोली:" भाई प्लीज़ आज ही खोल दो ना आप, इतनी ताकत हैं मेरे भाई के अंदर।

अजय ने थोड़ा अच्छे से अलमारी को पकड़ा और खोलने की कोशिश करते हुए बोला:"

" उफ्फ कितनी टाइट हैं,ऐसा क्या है दीदी इस अलमारी में जो आपको अभी चाहिए ?

सौंदर्या एक पल के लिए तो सकपका सी गई क्योंकि उसे तो अलमारी से डिल्डो चाहिए था लेकिन अपने भाई से कैसे बोल सकती हैं। फिर स्माइल करते हुए बोली:"

" भाई मेरे कुछ प्रोजेक्ट हैं जो आज रात मुझे देखने हैं, कल मुझे उसकी क्लास लेनी होगी।

अजय ने अलमारी के लॉक को अच्छे से पकड़ा और उसे पूरी ताकत से अपनी तरफ खींचा तो एक जोरदार झटके के साथ अलमारी खुल गई और सारा सामान बेड पर गिर पड़ा। पैकेट से बाहर निकल कर डिल्डो गिरा और अजय की आंखो के ठीक सामने। सौंदर्या को काटो तो खून नहीं, उसके चेहरे का रंग पूरी तरह से उड़ गया।

अजय ने आगे बढ़कर डिल्डो को हाथ में उठा लिया और एक बार अपनी बहन की तरफ देखा जो सूखे पत्ते की कांप रही थी। अजय की नजरो का सामना करते ही सौंदर्या बेहोश हो गई और नीचे हवा में गिरने लगीं लेकिन अजय ने अपनी मजबूत बांहों में थाम लिया और बेड पर लिटा दिया। तभी बाहर दरवाजा खुला और वो समझ गया कि उसकी मम्मी वापिस लौट आई हैं। उसने तेजी से सारा सामान अलमारी में भरा और डिल्डो को भी वापिस अलमारी में रख दिया और एक नजर अपने बहन के चेहरे पर डालकर अपने कमरे में घुस गया।

कमला नीचे आ गई और वो भी बारिश में काफी भीग गई थी इसलिए नीचे कमरे में घुस गई और अपने कपड़े बदलने लगीं।

अजय को अपनी आंखो पर यकीन नहीं हो रहा था। उसकी सीधी साधी सी दिखने वाली संस्कारी दीदी के पास डिल्डो भी होगा ये उसे सपने में भी उम्मीद नहीं थी।

अपनी मा की तरफ से बेफिक्र होकर वो फिर से अपनी बहन के कमरे में घुस गया। सौंदर्या अभी तक बिस्तर पर ऐसे ही बेहोश पड़ी हुई थी। अजय ने एक नजर अपनी बहन पर डाली और उसके मन में एक विचार आया। उसने अलमारी को खोला और डिल्डो बाहर निकाल लिया।

अलमारी खुलने की आवाज से सौंदर्या की आंखे खुल गई लेकिन अपने भाई के हाथ में डिल्डो देखकर उसने आंखे बंद रखने में ही भलाई समझी। अजय डिल्डो को अपनी नाक के पास लाया और सूंघने लगा।

सौंदर्या बिस्तर पर पड़ी पड़ी ही फिर से कांप उठी क्योंकि वो समझ गई थी कि उसका भाई डिल्डो इसलिए सूंघ रहा है कि वो उसकी चूत के रस की गंध महसूस कर सके। सौंदर्या के बदन में फिर से उत्तेजना दौड़ने लगी लेकिन उसने अपनी आंखो को बंद ही रखा और धीरे धीरे उसे बीच बीच में देख रही थी।

अजय को डिल्डो से उठती हुई खुशबू मदहोश कर रही थी इसलिए उसने अपनी आंखे बंद कर ली और जोर जोर से उसे सूंघने लगा। अजय ने मस्ती में अपना एक हाथ अपने लंड पर रख दिया और उपर से ही सहलाने लगा। सौंदर्या ये सब देखते ही मचल उठी और अपने जांघो को आपस में रगड़ना शुरू कर दिया। तभी अजय के दिमाग में एक विचार आया कि उसकी बहन तो बेहोश हैं तो डिल्डो से क्यों खुशबू सूंघना, क्यों ना सीधे अपनी बहन की पेंटी से ही सूंघ लू। सौंदर्या को कुछ पता भी नही चलेगा और उसके मजे हो जाएंगे। ये विचार मन में आते ही उसने एक बार सौंदर्या की तरफ देखा और सौंदर्या फिर से अपनी आंखे बंद कर ली। अजय धीरे धीरे अपनी बहन के पास बैठ गया और उसे प्यार से आवाज लगाई

" सौंदर्या दीदी। मेरी प्यारी दीदी उठ जाओ आप।

लेकिन सौंदर्या ने शर्म के मारे कोई जवाब नहीं दिया तो अजय समझ गया कि उसकी बहन अभी तक बेहोश ही हैं तो उसने धीरे से सौंदर्या की नाइटी ऊपर की तरफ सरका दी और सौंदर्या की हालत पूरी तरह से खराब हो गई। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि उसका भाई क्या करने जा रहा है और वो कुछ बोल पाने की स्थिति में भी नहीं थी इसलिए चुप लेती रही।

नाइटी के उपर जाते ही अजय ने एक नजर अपनी बहन की दूध की गोरी, केले के तने के समान चिकनी जांघों पर डाली और अगले ही पल उसकी जांघो के बीच में अपना मुंह घुसा दिया। सौंदर्या का समूचा वजूद कांप उठा और उसकी सांसे तेजी से चलने लगी। अजय ने अपने मुंह को आगे किया और सीधे उसकी जांघो के जोड़ पर पेंटी के उपर से सूंघने लगा। अपनी भाई की गर्म गर्म सांसे अपनी पेंटी के ऊपर पड़ते ही सौंदर्या के मुंह से आह निकलते निकलते बची। उसने अपने एक हाथ से बेड शीट को दबोच लिया और दूसरे से अपने मुंह को कस कर बंद कर लिया।

सौंदर्या की पेंटी उसके चूत रस से पूरी तरह से भीगी हुई थी और अजय ने अपनी नाक को पेंटी के उपर टिका दिया और सूंघने लगा। सौंदर्या की टांगे अपने आप ही थोड़ी सी खुल गई। तभी सीढ़ियों से कमला के आने की आहट हुई और अजय फुर्ती से उठा और उसने सौंदर्या की नाइटी को ठीक किया और उसके ऊपर एक चादर डाल कर वहीं बेड पर बैठ गया और मोबाइल में वीडियो देखने लगा।

कमला अंदर आ गई और बोली:"

" अरे मैं तुम दोनों को नीचे देख रही थी और तुम दोनों यहां हो।

अजय:" मम्मी मैं उपर ही आ गया खाना खाकर और दीदी से बात करने लगा। ये बात करते करते ही सो गई।

कमला:" ओह बेचारी, थक गई होंगी, दिन भर काम किया इसने आज सीमा की मम्मी बता रही थी मुझे। अरे ये बेड शीट गीली क्यों हो रही है?

बेड पर बैठते ही कमला को शीट के गीले होने का एहसास हुआ। सौंदर्या समझ गई कि अब उसे बोलना ही पड़ेगा क्योंकि उसकी चादर के नीचे डिल्डो भी पड़ा हुआ था। भाई की नजरो में तो वो गिर ही गई और मा की नजरो में बचना चाहती थी इसलिए सौंदर्या के धीरे से अपनी आंखे खोल दी और बोली:"

" मम्मी आप कब आई ? वो मैं छत पर भीग गई थी इसलिए गीली हो गई।

कमला ने एक झटके के साथ चादर को हटा दिया और बोली:"

" पागल लड़की गीले कपड़ों के साथ सोएगी तो बीमार पड़ जाएगी।

चादर के हटते ही डिल्डो बाहर आ गया लेकिन इससे पहले कि कमला की नजर पड़ती अजय ने उसे अपनी टांग के नीचे दबा लिया और सौंदर्या ने राहत की सांस ली।

कमला:" चलो जल्दी दे खड़ी होकर अपने कपड़े बदल लो और फिर आराम से सो जाना।

इतना बोलकर कमला उठी और चादर लेकर बाहर की तरफ निकल गई। सौंदर्या ने अजय की देखा और अजय ने बिना कुछ कहे डिल्डो को अपनी दीदी के हाथ में थमा दिया।
 
सौंदर्या का मुंह शर्म से लाल हो गया और बोली:"

" भाई मुझे क्यों दे रहे हो? मैं क्या करू इसका ?

अजय:" अब दीदी आपका हैं तो आपको ही दूंगा। आप खुद समझो क्या करना है।

सौंदर्या को अपनी गलती का एहसास हुआ कि उसके मुंह से क्या निकल गया। वो फिर से हड़बड़ा गई और बोली:"

" भाई मेरा वो मतलब नहीं था। भाई मैं सच कहती हूं ये मेरा नहीं है। मेरा यकीन करो।

अजय:" दीदी मुझसे इससे कोई मतलब नहीं है। आप अपने तरीके से अपनी ज़िन्दगी जियो। लेकिन आगे से इसे संभाल कर रखना, मा ने देख लिया तो आपको बहुत दिक्कत होगी।

इतना कहकर अजय बाहर निकल गया और पीछे हताश, उदास सी खड़ी सौंदर्या उसे आवाज देती रह गई।

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सौंदर्या अपने कमरे में बुत सी बनी खड़ी रह गई। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। उसकी सारी इज्ज़त, मान सम्मान सब कुछ आज मिट्टी में मिल गया था इस डिल्डो के कारण।

उसकी नजर हाथ में पकड़े हुए डिल्डो पर गई और उसे ऐसा लग रहा था मानो उसने कोई काला ज़हरीला सांप पकड़ रख हैं। एक झटके के साथ उसके हाथ से डिल्डो नीचे गिर गया।

सौंदर्या ने एक बार बेड पर पड़े हुए डिल्डो को नफरत से देखा मानो अपने जानी दुश्मन को देख रही हो। तभी उसे उपर किसी के आने की आहट हुई तो उसने तेजी से फिर से ना चाहते हुए भी डिल्डो को उठा लिया और अपने तकिए के नीचे छुपा दिया।

उसकी मम्मी उपर आई थी और उसे देखते ही थोड़ा नाराजगी से बोली:"

" क्या बेटी, अभी तक गीले कपड़े पहन रखे हैं तूने, चल जल्दी से कपड़े बदल ले नहीं तो बीमार पड़ जाएगी।

कमला बेड पर बैठी तो उसके हाथ गीली चादर पर पड़ गए और वो बोली :"

" हाय राम, ये तो चादर भी गीली हैं, इसको भी बदलना पड़ेगा। तुम जल्दी से बाथरूम जाओ तब तक मैं चादर बदल देती हूं।

अपनी मम्मी की बात सुनकर सौंदर्या को उसकी सांसे रुकती हुई सी महसूस हुई। ये भगवान मैं कैसे जाऊ, मम्मी ने चादर बदलते हुए अगर डिल्डो देख लिया तो उनकी नजरो में भी गिर जाऊंगी। डर में मारे सौंदर्या का पसीना छूट गया और बोली:"

" मम्मी आप आराम कीजिए, मैं खुद कर लूंगी।

कमला:" ज्यादा बाते मत बना तू, अगर खुद करना हो तो अब तक कर नहीं लेती। चल हट मुझे काम करने दे और जल्दी से आ।

डर के मारे उसका दिल बैठ सा गया और सौंदर्या ने अपने मम्मी के हाथ पकड़ बोली:"

" मम्मी आप रहने दीजिए। मैं कर लूगी मेरी प्यारी माता जी। आप क्यों परेशान हो रही हैं ?

माता जी शब्द सुनकर कमला को अपनी बेटी पर बहुत प्यार आया और उसके वो उसका माथा सहलाती हुई बोली:"

" मेरी प्यारी बेटी, मैं कर दूंगी, तुम जल्दी से बाथरूम जाओ। अरे तुम्हे तो पसीना आ रहा है बहुत।

तभी सौंदर्या को जोर से छींक आई और वो कमला के गले लग गई तो कमला बोली:"

" पागल कहीं की, तुझे पसीना भी आ गया और छींख भी आ गई, चल अब जल्दी से बाथरूम जा नहीं तो एक हफ्ते तक बेड पर पड़ी रहेगी।

सौंदर्या पूरी तरह से फंस गई थी और समझ नहीं पा रही थी कि क्या किया जाए। तभी उसे अपने भाई की याद आई और उसने अपनी मा को तेजी से अपने बांहों में कस लिया और दूसरे हाथ से अपना फोन निकाल लिया।

कमला अपनी बेटी की इस हरकत पर आत्म विभोर हो गई और उसकी पीठ थपथपाने लगी और बोली:"

" इतनी बड़ी हो गई है लेकिन अभी तक छोटे बच्चे की तरह मा से चिपकती हैं मेरी बेटी।

सौंदर्या ने अपने मोबाइल का पैटर्न खोला और अजय को मेसेज टाइप करते हुए बोली:"

" मम्मी मैं चाहे कितनी भी बड़ी हो जाऊ आप तो मेरे लिए मेरी मम्मी ही रहेगी और बच्चे मा के सीने से हमेशा चिपकते ही है।

सौंदर्या ने अजय को मेसेज टाइप किया:"

" भाई प्लीज़ मुझे मा की नजरो में गिरने से बचा लो। मा मुझे बाथरूम जाने के लिए कह रही हैं और तकिए के नीचे दिलदो पड़ा हुआ है, मम्मी गीला चादर बदलेगी, अज्जु भाई मेरी मदद करो। बचाओ मुझे तुम्हे मेरी राखी की कसम।

अजय ने अपने कमरे ने मेसेज पढ़ा और इसके होंठो पर स्माइल आ गई। फिर अगले ही पल हो परेशान हो गया और बाहर की तरफ दौड़ पड़ा। कमरे में गया तो उसने अपनी दीदी को अपनी मा से लिपटे हुए देखा तो सारी कहानी समझ गया।

अजय:" क्या बात है बड़ा प्यार हो रहा है मा बेटी में।

कमला मुस्कुरा उठी और बोली:"

" अरे इसे बाथरूम जाकर गीले पकड़े बदलने के लिए कह रही हूं और ये मुझसे लिपटी हुई हैं। अब तू ही समझा इसे बेटा।

अजय:" क्यों मम्मी को परेशान कर रही हो आप दीदी? जाओ गीले कपड़े बदल लो ना आप।

अजय ने सौंदर्या को कुछ इशारा किया और वो अपनी मम्मी के साथ पलट गई और अब अजय की तरफ कमला की पीठ थीं। अजय ने तेजी से अपना हाथ आगे बढाया और डिल्डो को बाहर निकाल लिया। सौंदर्या ये सब देख रही थी और जैसे ही उसकी नजरे अजय से टकराई तो सौंदर्या पहले तो शर्म से लाल हो गई लेकिन अजय को स्माइल देखते हुए उसने उसे स्माइल दी और अजय ने डिल्डो अपनी जेब में डाल लिया। सौंदर्या ने राहत की सांस ली और अपनी मम्मी से बोली:"

" मम्मी जब आप इतनी जिद कर रही हो और भाई भी बोल रहा है तो मैं कपडे बदल ही लेती हूं।

इतना कहकर सौंदर्या अपनी मम्मी से अलग हुई और सेफ से अपने कपड़े निकालने लगी।

कमला ने राहत की सांस ली और बोली:" चलो किसी तरह ये बेचारी मान तो गई। अजय बेटा तेरी ही बात मान ली इसने।

अजय:" हाँ मम्मी। बहुत समझदार और संस्कारी हैं मेरी दीदी। फिर बात कैसे नहीं मानती।

सौंदर्या ने अपने कपड़े लिए और बाहर निकल गई। उसे समझ नहीं आया कि अजय ने इसकी तारीफ की है या उसके उपर तीखा कॉमेंट किया है। खैर वो नहाई और एक नाइटी पहनकर बाहर आ गई। उसने हल्के गीले खुले हुए बालो से पानी की बूंदे टपक रही थी और अजय को अपनी दीदी इस रूप में बहुत सुंदर लगी।

कमला:" अच्छा बेटा अजय सीमा की मम्मी बता रही थी कि अगले हफ्ते आचार्य तुलसी दास जी पास के ही गांव में आ रहे है तो मैं उनसे मिल भी लूंगी। तुम और सौंदर्या भी मेरे साथ चलना। कोई उपाय निकल ही जाएगा।

अजय:" ठीक हैं मम्मी, ये तो बहुत अच्छी बात हैं।

कमला:" अच्छा अब तुम दोनो आराम करो। रात बहुत हो गई है। मैं भी सो जाती हूं।

इतना कहकर कमला बाहर आ गई तो अजय भी उसके साथ साथ ही पीछे आ गया और अपने कमरे में चला गया। सौंदर्या चुपचाप अपने बेड पर पड़ी हुई सोच रही थी कि आज उसने अपनी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी गलती कर दी है और ये सब इस कमीने डिल्डो के चलते हुआ है इसलिए इसे तोड़ दूंगी। इसके टुकड़े टुकड़े कर दूंगी।

सौंदर्या डिल्डो इधर उधर देखने लगी लेकिन कहीं मिला नहीं। तभी उसे याद आया कि वो तो अजय ने अपनी जेब में डाल लिया था और मैं यहां ढूंढ रही हूं। क्या करू अजय से मांग कर तोड़ दू क्या ?

उफ्फ मै ये क्या सोच रही हूं, अजय पता नहीं पहले से ही क्या क्या सोच रहा होगा, अगर मांगा तो फिर से यहीं सोचेगा कि कहीं मैं इसे अपने अंदर अंदर घुसाने के लिए तो नहीं मांग रही। ये भगवान मैं क्या क्या सोच रही हूं, कितनी बिगड़ गई हूं मैं।
 
सौंदर्या अपने विचारो में डूबी हुई थी और वहीं अजय सोच रहा था कि उसकी बहन कितनी चालू निकली, कहां तो अपने सीने से पल्लू तक नीचे नहीं आने देती और कहां डिल्डो इस्तेमाल करती हैं। अजय ने डिल्डो को अपनी जेब से बाहर निकाल लिया और उसे गौर से देखने लगा। देखने में तो ठीक था काफी मोटा और लंबा भी। उफ्फ जब मैं इसे सूंघ रहा था तो इसमें से कितनी अच्छी खुशबू आ रही थी। शायद मेरी दीदी की चूत की खुशबू होगी। अगर मम्मी नहीं आई होती तो मैं सीधे ही सूंघ लेता आज। ये सब सोचते सोचते अजय उत्तेजित हो गया और उसने डिल्डो को अपनी नाक के पास रख लिया और सूंघने लगा। एक अजीब सी खुशबू उसकी नाक से होती हुई उसके दिमाग में समा गई और लंड ने फिर से हुंकार भरी और तनकर खड़ा हो गया। अजय का एक हाथ अपने आप लंड पर पहुंच गया और उसे पेंट के उपर से ही सहलाने लगा।

दूसरी तरफ सौंदर्या को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे, कैसे अपने भाई को विश्वास दिलाए कि ये डिल्डो उसका नहीं हैं और वो ऐसी लड़की नहीं हैं।कुछ विचार मन में करके सौंदर्या खड़ी हुई और उसने धड़कते दिल के साथ अपने कमरे से बाहर निकल गई।

उसने एक पल के लिए सोचा कि क्या उसका अपने भाई के रूम में ऐसे जाना ठीक होगा ? उसका भाई उसके बारे में क्या सोचेगा ? लेकिन उसने इन सभी बातों को मन से निकाल दिया क्योंकि वो सच्ची थी और खुद को किसी भी कीमत पर अपने भाई की नजरो में सही साबित करना चाहती थी। सौंदर्या के पांव कांप रहे थे और दिल धाड धाड करके धड़क रहा था लेकिन फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और जल्दी ही वो अपने भाई के कमरे के सामने पहुंच गई। अजय एक बहुत हिम्मत वाला लड़का था और उसने कभी अपने कमरे के गेट बंद किए थे और सौंदर्या जैसे ही उसके कमरे से सामने आई तो उसकी नजर अंदर पड़ी और उसका मुंह खुला का खुला रह गया।

अजय सिर्फ अंडर वियर पहने हुए था और उसकी आंखे बंद थी और वो डिल्डो को अपनी नाक के पास करके सूंघते हुए अपने लंड को सहला रहा था। उसके चेहरे पर असीम आनन्द के भाव फैले हुए थे।

सौंदर्या की सांसे बहुत तेजी से चलने लगी और उसका गीला सूखता चला गया। ये राम, ये दिन में तो ऐसे ही कर रहा और अब भी। ये क्या सूंघ रहा है इसमें से ? सौंदर्या को याद आया कि उसने पढ़ा था कि सबकी चूत से एक भीनी भीनी खुशबू निकलती हैं। उफ्फ क्या ये मेरी चूत की खुशबू समझकर इसे सूंघ रहा है!!

ये विचार मन में आते ही उसके जिस्म के रोम रोम लहरा उठा और उसने अपनी जांघो को कस लिया मानो वो डिल्डो से नहीं बल्कि उसकी जांघो के बीच से खुशबू सूंघ रहा हो।

तभी अजय ने अपने हाथ को अपनी अंडर वियर के अंदर घुसा दिया और उसे नीचे करते हुए अपने लंड को बाहर निकाल लिया

सौंदर्या की नजरे जैसे ही अपने भाई के हाहाकारी लंड पर पड़ी तो डर के मारे उसके मुंह से एक घुटी घुटी सी चींखं निकल गई। उसने अपने मुंह पर हाथ रखा लेकिन जब तक देर हो चुकी थी। वो तेजी से चलती हुई अपने कमरे में घुस गई। अजय ने फुर्ती से अपने लंड को अंदर किया और बाहर की तरफ दौड़ा कि कोई दिक्कत तो नहीं हो गई।

बाहर आकर देखा तो उसे कुछ दिखाई नहीं दिया और उसने एक नजर अपनी बहन के कमरे में दौड़ाई तो उसे बेड पर लेटी सौंदर्या दिखाई दी। अजय को समझ नहीं आया कि आवाज कहां से आई थी और उसकी दीदी के कमरे की लाइट अभी तक क्यों जली हुई है।

अजय फिर से अपने कमरे में आ गया और बिस्तर पर लेट गया। उसका लंड अभी तक खड़ा हुआ था और उसने फिर से डिल्डो को हाथ में पकड़ लिया। अजय ने डिल्डो को अपनी नाक के पास रखा और सूंघने लगा। तभी उसके दिमाग में दूसरा विचार आया कि दीदी तो अभी सोई हुई है तो क्यों ना मैं सीधे ही सूंघ लू।

लंड खड़ा हो तो दिमाग काम नहीं करता और यही अजय के साथ हुआ। उसने दीदी में लिया और मात्र अंडर वियर पहने हुए अपने खड़े लंड के साथ अपनी दीदी के रूम में घुस गया।

एक बार अपनी दीदी की पक्की नींद जानने के लिए उसने अपनी दीदी के पास जाकर धीरे से आवाज लगाई:"

" दीदी सो गई क्या आप ?

सौंदर्या जागी हुई थी और अभी तक लंड को देखकर डरी सहमी हुई थी और अपने भाई की आवाज सुनते ही वो पलटी और बोली:"

" नहीं भाई। नींद नहीं आ रही थी मुझे बिल्कुल भी।

अपनी दीदी को जागते हुए पाकर अजय के होश उड़ गए और समझ में नहीं आया कि क्या करे। फिर दिमाग से काम लेते हुए बोला:"

" ओह दीदी मैं समझ गया कि आपकों नींद क्यों नहीं आ रही है, देखो मैं आपके लिए आपकी पसंदीदा चीज लाया हूं !!

इतना कहकर अजय ने डिल्डो को आगे बढ़ा दिया। डिल्डो देखते ही सौंदर्या का मुंह फिर से शर्म से लाल हो गया।

अजय: दीदी के लो, शरमाओ मत नहीं तो आपकी इसके बिना नींद नहीं आएगी।

सौंदर्या अपने भाई की बात सुनकर रोने ये लिए तैयार सी हो गई। अजय ने डिल्डो उसके पास रखा और अपनी दीदी को स्माइल देते हुए बाहर की तरफ चल पड़ा।
 
जैसे ही वो कमरे के गेट पर आया तो पीछे से सौंदर्या की आवाज सुनकर रुक गया

" अजय तुम मुझे गलत समझ रहे हो भाई। ये मेरा नहीं है। मेरी बात का यकीन करो तुम।

अजय:" दीदी आप शायद मुझे गलत समझ रही हैं। मैं आपके जज़्बात समझता हूं और आपकी जरूरत भी।

सौंदर्या अपने भाई की बात सुनकर खड़ी हुई और तेजी से आगे बढ़ कर उसकी कमर से चिपक गई और बोली:"

" भाई तेरी कसम, मेरा यकीन करो, ये मेरा नहीं हैं, सपना का हैं मैं तो आज ही इसे उसके घर से लाई थी।

अजय अपनी नंगी पीठ पर अपनी दीदी के चिपकने से उत्तेजना से भर उठा और बोला:"

" दीदी आपका हो या सपना दीदी का, मुझे इससे क्या? आप आराम कीजिए रात बहुत ज्यादा हो गई है। वैसे भी आपको कुछ जरूरी प्रोजेक्ट पूरा करना होगा।

सौंदर्या का मन किया कि वो रो पड़े। उसने और ज्यादा जोर से अपनी भाई की अपनी बांहों में कस लिया और बोली:"

" भाई क्या तुम्हे मेरी कसम पर भी यकीन नहीं है ? मैं सच में पहली बार आज इसे लाई थी। वो सीमा की सुहागरात की बात सुनकर मस्ती करने के लिए।

अजय को लगा कि उसकी बहन सच बोल रही है क्योंकि सच में सीमा की शादी अभी तो हुई हैं और आज वो आई भी थी। अजय पलट गया और अपनी दीदी के सुंदर से चेहरे को अपने हाथ में भर लिया और बोला:"

" अच्छा चलो आपकी बात पर यकीन किया कि आपने सीमा की सुहागरात के किस्से सुने।

सौंदर्या समझ गई कि उसका भाई उसका यकीन कर रहा है इसलिए जल्दी से पुरा यकीन दिलाने के लिए बोली:"

"भाई नहीं सुन पाई। दिन भर काम में लगी रही और वो तीनो अंदर बाते करती रही। मैंने सब कुछ मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। आज दिन में सपना बोल रही थी कि उसके पास डिल्डो हैं। इसलिए मैं घर जाने के बहाने उसके घर में घुस गई और घर में कोई नहीं था। इसलिए मैं ये निकाल लाई थी।

अजय समझ गया था कि उसकी बहन सच बोल रही है लेकिन उसके खड़े लंड ने कुछ और ही सोचा और अजय बोला:"

" दीदी इसका मतलब आपके पास उनकी रिकॉर्डिंग होनी चाहिए अगर आप सच बोल रही है तो।

सौंदर्या तपाक से बोली:" हाँ भाई मेरे फोन में होनी चाहिए। मैंने भी नहीं सुनी।

अजय:" अच्छा चलाओ तो जरा, मैं भी तो सुनो। क्या सच में ऐसा कुछ हुआ था ?

सौंदर्या अपने भाई की बात सुनते ही शर्म से पानी पानी हो गई और उसका मुंह लाल हो गया। अपने भाई के सामने मै कैसे ये सब सुन सकती हूं।

अजय:" क्या हुआ दीदी? उसका मतलब आप झूठ बोल रही थी। मेरी कसम भी आप झूठी खा रही थी।

सौंदर्या अपने भाई की बात सुनकर तड़प उठी और बोली:"

" भाई झूठ नहीं बोल रही। मेरा यकीन करो।

इतना कहकर सौंदर्या ने अपने मोबाइल का लॉक खोल दिया और कांपते हाथो से फाइल देखने लगी। उसकी सांसे तेज हो गई और उसकी चूचियां खुले लगे से अपना आकार दिखा रही थी। अजय की हालात ये सब देख कर खराब हो गई और अपना थूक गटकने लगा।

सौंदर्या ने फाइल तो खोल दी लेकिन चालू कर पाने की हिम्मत उसमे नहीं थी। उसने एक बार अपनी नजरे उपर उठाई और फोन को अपने भाई के हाथ में बढ़ा दिया और बोली:"

" भाई मुझसे नहीं हो पाएगा। तुम खुद ही सुन लो। शायद इसे सुनकर ही तुम मेरा यकीन करो।

इतना कहते हुए सौंदर्या ने मोबाइल अजय के हाथ में पकड़ा दिया और अपनी नजरे झुका ली। सारे ज़माने की हया उसकी चेहरे पर सिमट आई थी और उसकी सांसे अब पहले से ज्यादा तेजी से चल रही थी जिससे उसकी चूचियां उछल कूद कर रही थी। उसके सारे जिस्म में अजीब सी उत्तेजना छाई हुई थी।
 
अजय:" दीदी आप पर मुझे पूरा यकीन है लेकिन हालात ही इस तरह एक बन गए हैं।

इतना कहते हुए अजय ने रिकॉर्डिंग को शुरू कर दिया।

मोबाइल पर सबसे पहले सपना कि आवाज आई:"

" बोल ना सीमा क्यों शर्मा रही है, क्या हुआ तेरे साथ ? सुना ना अपनी सुहागरात की कहानी ?

राधा:" उफ्फ मेरी बन्नो, बोल भी कहीं लंड मुंह में घुसा कर तेरी आवाज तो नहीं भगा दी ?

राधा की बात सुनकर सौंदर्या शर्म से दोहरी हो गई। सौंदर्या ने शर्म के मारे अपना मुंह अपने दोनो को हाथों में छुपा लिया।

अजय ने अपनी दीदी की तरफ एक नजर देखा और फिर से मोबाइल पर ध्यान लगा दिया।

सीमा:" चुप हो जाओ तुम दोनों, मैं अपने पति का इंतजार कर रही थी और रात के करीब 11 बजे वो आए तो मेरी सांसे अपने आप तेज हो गई। उसने धीरे से कमरे को बंद किया और मेरे पूरे जिस्म में उत्तेजना दौड़ गई।

वो धीरे धीरे आगे बढ़ा और बेड पर मेरे पास बैठ गए और मेरा मुंह देखने के बाद मुझे गिफ्ट दिया और उसके बाद उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया। मैं भी प्यासी और मेरे जिस्म का अंग अंग सेक्स के लिए तड़प रहा था इसलिए मैं खुद ही उससे लिपट गई। उसने मुझे देखा और अपने जलते हुए होंठ मेरे होंठो पर रख दिए और हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसने और देखते ही देखते मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई।

अजय इतनी सेक्सी बाते सुनकर उत्तेजित हो गया और उसकी आंखे लाल हो गई थी। वहीं सौंदर्या तो जैसे ये सब सुनकर पूरी तरह से बेताब हो गई थी और उसके पूरे जिस्म में मस्ती छाई हुई थी। अजय के एक हाथ में डिल्डो और दूसरे में मोबाइल था।

आगे फिर सीमा की आवाज उभरी:" फिर उसने मेरी जीभ को चूसना शुरू कर दिया और उसके हाथ मेरी गांड़ पर आ गए और ज़ालिम ने पूरी ताकत से मेरी गांड़ को मसलना शुरु कर दिया। मेरे मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी और किस टूट गई। फिर उसने मेरी साड़ी को खोलकर एक तरफ कर दिया और एक के बाद एक उसने मेरे जिस्म पर से कपडे उतार दिए और मैं अब सिर्फ ब्रा पेंटी में रह गई। आने वाले हसीन पलो को सोचकर मेरी चूत पहले से ही गीली हो गई थी और उसने पेंटी के उपर से ही मेरी चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया तो मैं सिसकती हुई उससे लिपट गई और उसकी उंगलिया मेरे चूत से निकल रहे रस से भीग गई तो उसने उंगली को अपनी नाक के पास किया और सूंघने लगा और फिर अपने मुंह में भर लिया और चूस कर बोला वाह मेरी जान तेरी चूत की खुशबू सच में मजा आ गया। क्या टेस्ट हैं।

सौंदर्या की हालत पूरी तरह से बिगड़ गई थी और वो अपने पैर के पंजों को एक दूसरे से मसलने लगी। वहीं अजय का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था और उसकी अंडर वियर में एक बहुत बड़ा तम्बू बन गया था और अजय के ठीक सामने एक शीशा लगा हुआ था जहां से उसे सौंदर्या साफ दिखाई दे रही है।

भाई बहन दोनो पूरी तरह से गर्म हो गए थे और उनके अंदर जिस्म की आग पल पल बढ़ती ही जा रही थी। अजय ने रिकॉर्डिंग बंद नहीं करी और सौंदर्या तो इस कदर मदहोश हो गई थी कि कुछ बोल पाने की हिम्मत उसमे नहीं रह गई थी।

सीमा की आवाज फिर से उभरी" जैसे ही उसने अपनी उंगली को मुंह में दिया तो मेरी जांघें अपने आप कसती चली गई। उफ्फ ज़ालिम ने देखते ही देखते मेरी ब्रा को उतार दिया और मेरी गोल गोल चूचियां बाहर की तरफ छलक पड़ी। हाय उसने अगले ही पल मेरी चुचियों को अपने हाथो में भर लिया और जोर जोर से मसलने लगा तो मेरे मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी।

सौंदर्या की हालत पूरी तरह से बिगड़ गई थी और उसकी चुचियों में बहुत तेजी से कम्पन हो रहा था मानो उसकी नाईटी को फाड़कर बाहर आना चाहती हो। सौंदर्या की पेंटी में उसे कुछ गीलापन महसूस हुआ और सौंदर्या के जिस्म में तेज झनझनहट सी उठने लगी और उसने अजय की नजरो से बचते हुए अपने एक हाथ को अपनी जांघ पर रख दिया और खुद ही सहलाने लगी। अजय शीशे में ये देख कर मस्त हो गया और उसने भी अपने एक हाथ को अपने लंड के पास रख दिया और धीरे धीरे सहलाने लगी।

सीमा की फिर से आवाज आई " जैसे ही उसने मेरी चूचियों को अपने मुंह में भरा तो मेरे जिस्म से रस टपकना शुरू हो गया और मैं उसके ऊपर गिरती चली गई।

अजय ने धीरे से अपनी बहन की तरफ देखा जिसकी आंखे अब मस्ती से बंद हो गई थी और अजय ने एक नजर उसकी चूचियों पर डाली जो उपर नीचे हो रही थी और बस निप्पल ही अंदर रह गया था। अजय को एक समय अपनी बहन सिर्फ एक काम देवी नजर आ रही थी।

सीमा की आवाज:" जैसे ही मैं उसके ऊपर गिरी तो मेरा हाथ अपने आप उसके लंड पर चला गया और मेरे मुंह से आह निकल गई। उफ्फ ये ही वो लंड था जिसके लिए मैं तड़प रही थी। उफ्फ 7 इंच। मैंने सारी शर्म हया छोड़कर उसे अपनी मुट्ठी में भर लिया।
 
सौंदर्या पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसने एक नजर डिल्डो पर डाली और उसकी आंखे लाल हो गई। अपनी भाई की नजरो से बचते हुए उसने एक बार उसके लंड की तरफ देखा तो उसे एहसास हुआ कि अजय अपने लंड को अंडर वियर के उपर से ही सहला रहा था। सौंदर्या के मुंह से एक आह निकल पड़ी और उसके पैर जवाब दे गए और वो बेड पर गिरती चली गई। अजय ने अपनी बहन की तरफ देखा तो उसने देखा कि सौंदर्या की दोनो आंखे मस्ती में बंद हो गई थी और वो अपनी एक टांग को दूसरी पर रगड़ रही थी जिससे उसकी नाइटी उसकी घुटनो से उपर सरक गई थी और उसकी गोरी गोरी टांगे साफ नजर आ रही थी। सौंदर्या की आंखे मदहोशी में बंद हो गई थी और उसकी चुचियों और ज्यादा तेजी से उछल कूद कर रही थी।

अजय समझ गया कि उसकी बहन पूरी तरह से बहक गई है तो उसने मासूम बनते हुए कहा:"

" दीदी क्या हुआ आप ठीक तो हैं ? अगर आप कहे तो मैं रिकॉर्डिंग बंद कर दू?

सौंदर्या की नेट वाली पेंटी पूरी तरह से भीग गई थी और उसकी जांघ तक चूत रस से भीगी हुई पड़ी थी।

सौंदर्या तो बेचारी कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं थी और जैसे ही चुप लेती हुई अपनी टांगो को एक दूसरे से रगड़ती रही। अजय भी आराम से सौंदर्या के पास ही लेट गया लेकिन उससे थोड़ी दूरी पर और बोला:"

" दीदी जब भी आपको लगे कि ज्यादा हो रहा है और बंद करना हैं तो मुझे बता देना। मै बंद कर दूंगा रिकॉर्डिंग।

सौंदर्या के मुंह को छोड़कर आज उसका सारा जिस्म खुलकर बोल रहा था कि ये रिकॉर्डिंग चलने दे भाई। ऐसे ही चलने दे बस।

तभी अचानक से लाइट चली तू और कमरे में अंधेरा हो गया। उफ्फ इससे सौंदर्या को बड़ी राहत मिली क्योंकि उसे लाइट की वजह से बहुत ज्यादा शर्म महसूस हो रही थी।

सीमा की आवाज:" उफ्फ कितना मोटा और अच्छा लग रहा था उसका लंड। वो फिर से मेरी जांघो के बीच में आ गया और मेरी जांघो को चूमने लगा तो मेरी चूत से चिंगारी सी निकलने लगी।

सौंदर्या से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अंधेरे का फायदा उठाते हुए अपने एक हाथ को अपनी जांघो में घुसा दिया तो उसके मुंह से खुद ही एक आह निकल पड़ी। अजय धीरे से आगे हुआ और उसने सौंदर्या का हाथ हिलता हुआ देखा तो उसका जिस्म अपने आप थोड़ा सा आगे सरक गया और वो सौंदर्या के बिल्कुल करीब पहुंच गया।

सीमा की आवाज:" फिर से उसने मेरी चूत के आस पास सूंघना शुरू कर दिया और मेरी आंखे मस्ती से बंद हो गई। मेरी जांघें अपने आप खुलती चली गई और देखते ही देखते उसने अपनी नाक को मेरी पेंटी पर रख दिया तो मेरे मुंह से आह निकल पड़ी।

सौंदर्या की जांघें अपने आप थोड़ा सा खुली जिससे वो थोड़ा सा पीछे को सरक गई और उसकी कमर में अपने भाई का लंड टकराया तो उसके जिस्म के रोंगटे खड़े हो गए। उसे एहसास ही नहीं हुआ कि कब उसका भाई उसके पास लेट गया था।

वो एक झटके के साथ पीछे हुई और अगले ही पल उसे अफसोस हुआ। अजय की हिम्मत बढ रही थी और वो धीरे धीरे आगे होता रहा और सौंदर्या के हिलने से उसके पैर अजय के पैरो से टकरा रहे थे। अजय ने एक चाल चलने की तैयारी करी और अपने लंड को बाहर निकाल लिया और धीरे से बिल्कुल उसके करीब हो गया और कान में फुसफुसाया

:" आप सच बोल रही थी, मुझे आप पर पूरा यकीन हो गया है ये रेकॉर्डिंग सुनकर।

अजय की बात सुनकर सौंदर्या खुश हो गई और वो खुशी से पलटी और अपने भाई के सीने से लिपट गई। अजय का प्लान कामयाब रहा।

उसकी चूचियां अजय के सीने में घुस गई और लंड उसकी जांघो में घुसता चला गया। सौंदर्या को अपनी गलती का एहसास हुआ लेकिन जब तक देर हो गई थी क्योंकि अजय ने उसे पूरी तरह से अपनी मजबूत बांहों में कस लिया था और उसके पैर पर अपने पैर रगड़ रहा था।

सीमा की आवाज:" उफ्फ जैसे ही उसने मेरी पैंटी को सूंघना शुरू किया तो मेरी सांसे अटक सी गई और मेरे हाथ अपने आप उसके सिर पर पहुंच गए।
 
सौंदर्या की हालत बद से बदतर होती जा रही थी और उसकी पेंटी पूरी तरह से भीग गई थी। अजय ने अपनी कमर को आगे की तरफ किया जिससे उसका लंड सौंदर्या को चूत पर जा लगा तो सौंदर्या दीवानी सी होकर उससे लिपट गई ।

अजय ने अपने एक हाथ को उसके पेट पर रख दिया और हल्का सा सहलाते हुए बोला:"

" दीदी आपने दिन में जरूर ये रिकॉर्डिंग सुनी होगी।

इतना कहते हुए अजय ने अपने लंड का दबाव बढ़ाया तो सौंदर्या मचल गई और उसकी जांघ खुल गई और बोली:"

:" आह भाई, थोड़ी सी सुनी थी बस, मैं बेचैन हो गई और बंद कर दी कि रात को सुन लुगी आराम से भाई।

अजय ने अपने मुंह को सौंदर्या की गर्दन पर रखा और गर्म गर्म सांसे छोड़ते हुए बोला:"

" आह दीदी, बेचैन होकर आपने जरूर डिल्डो हाथ में लिया होगा, हैं ना मेरी प्यारी दीदी।

सौंदर्या अपनी भाई की गर्म सांसों से पिघल गई और सिसकते हुए बोली:" उफ्फ मेरे भाई, लिया था हाथ में ये मैंने।

अजय ने धीरे से अपनी जीभ को हल्का सा उसकी गर्दन पर फिरा दिया और लंड का दबाव बढ़ाते हुए बोला:"

" हाय मेरी दीदी, क्या लिया था हाथ में बेचैन होकर?

सौंदर्या ने हाथ आगे बढाया तो उसके हाथ में डिल्डो आ गया और उसने उसे उठाया और अजय के हाथ में थमा दिया तो अजय ने डिल्डो को सौंदर्या के पेट पर रगड़ दिया और बोला:"

" हाय मेरी सौंदर्या दीदी, इसे क्या बोलते हैं ?

सौंदर्या अपने भाई की इस हरकत पर तड़प उठी और हल्की सी पीछे होते हुए बोली

" हाय उफ्फ इसे डिल्डो कहते हैं। हाय राम उफ्फ मेरी मां।

सौंदर्या के पीछे हटने से अजय तड़प उठा और उसे फिर से अपनी तरफ खींचा और अपनी पूरी जीभ उसकी गर्दन पर फिरा दी और सिसका:"

" हाय दीदी सिर्फ हाथ में लिया था और वहां भी लगाया ये डिल्डो ।

इतना कहते हुए अजय ने सौंदर्या के हाथ में डिल्डो को दबा दिया और अपने दूसरे हाथ को उसकी जांघो पर टिका दिया तो सौंदर्या की उंगलियां अपने आप उस पर कस गई और सिसकी:"

" आह भाई नहीं, वहां नहीं लगाया था मैंने इसे ?

अजय:" उफ्फ फिर इसमें से इतनी अच्छी खुशबू कैसे आ सकती हैं? हाय कितना अच्छा लग रहा है इसे सूंघकर

अजय ने सौंदर्या का हाथ पकड़ा और डिल्डो सहित अपनी नाक के पास ले आया और सूंघने लगा। सौंदर्या को अपने भाई को सपना की चूत की खुशबू की तारीफ करना पसंद नहीं आया और सौंदर्या ने अपने पैर के अंगूठे को अजय के पैर के दबा दिया और बोली:"

" उफ्फ बेशर्म, सपना ने किया होगा जरूर, उसकी ही खुशबू होगी इसमें। पता नहीं तुझे क्यों अच्छी लग रही है इतनी।

अजय:" नहीं दीदी, आपने किया होगा पक्का, यकीन नहीं आता कि उसकी खुशबू इतनी अच्छी कैसे हो सकती हैं, आप खुद ही सूंघ लिजिएं ।

रिकॉर्डिंग पर किसी का ध्यान नहीं था और सौंदर्या अपने भाई की बात सुनकर फिर से सिसकी:"

" उफ्फ भाई, मेरा नहीं हैं, आह मुझे मत सूंघा ये सब। हाय भाई

अजय ने डिल्डो को अपने और अपनी दीदी के चेहरे के बीच कर दिया और सूंघने लगा। सौंदर्या खुद एक बार सूंघना चाहती थी लेकिन बोल नहीं पाई लेकिन अजय ने खुद ही ये काम कर दिया। डिल्डो से उठ रही खुशबू सौंदर्या को महसूस हुई तो वो पागल सी हो गई और बोली:"

" आह भाई, मत कर उफ्फ, ये कैसी खुशबू आ रही है, इसमें से उफ्फ। मुझे तो इतनी ज्यादा अच्छी नहीं लगती ये। ये मेरी नहीं हो सकती है।

अजय:" दीदी आपकी ही तो खुशबू हैं , देखो ना।

इतना हुए अजय ने सौंदर्या की गांड़ को हल्का सा मसल दिया तो सौंदर्या तड़प उठी:"

" आह भाई मेरी नहीं हैं, उफ्फ मेरी तो इससे बहुत ज्यादा अच्छी होगी सच में।

नारी ईर्ष्या के कारण सौंदर्या के मुंह से जैसे ही ये निकला तो अजय तपाक से बोल पड़ा:"

" आह दीदी क्या सच में ? उफ्फ अगर ये अच्छी नहीं है तो फिर आपकी कितनी अच्छी होगी, हाय मेरी दीदी , एक बार सूंघा दो ना, सच भी पता चल जाएगा।
 
सौंदर्या की चूत मचल उठी और उसने अपनी जांघो को कस लिया और बोली:"

" आह नहीं, नहीं भाई। मैं कैसे सूंघा सकती हूं, हाय मुझसे नहीं ये होगा ये काम, उफ्फ भाई तुम।

अजय ने डिल्डो से अपनी दीदी के पेट पर सहलाना शुरू कर दिया और अपने लंड का दबाव बढ़ा कर बोला:"

" हाय दीदी फिर मुझे कैसे पता चलेगा कि आपकी अच्छी है या सपना की खुशबू, डिल्डो से तो बहुत अच्छी खुशबू आ रही है। उफ्फ कितना मादक लग रहा है मुझे सच में।

सौंदर्या अपने भाई की बात सुनकर तड़प उठी और अपनी जांघो को थोड़ा सा खोल दिया और उसके हाथ को पकड़ लिया जिसमें डिल्डो था। अजय ने अपनी बहन की सहमति पाकर अपनी जीभ से उसकी कान की लौ को सहलाना शुरू कर दिया और सौंदर्या के मुंह से आह निकल पड़ी और उसका पेट अन्दर की तरफ सिकुड़ा और उसने खुद ही अपने भाई के हाथ को अपनी नाइटी में घुसा दिया।

हाथ के घुसते ही अजय ने पहली बार अपने दूसरे हाथ से उसकी गांड़ को कसकर मसल दिया और सौंदर्या के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। सौंदर्या का पूरा जिस्म अपने भाई की बांहों में मचल रहा था और अजय का हाथ जरूर सौंदर्या ने पकड़ा था लेकिन डिल्डो अब अजय अपनी मर्जी से सौंदर्या की जांघो पर रगड़ रहा था जिससे सौंदर्या की चूत में रस का तूफान सा आया हुआ था। अजय ने अपने दांतो से सौंदर्या की कान की लौ को हल्का सा काटा और डिल्डो को उसकी पेंटी के साइड से अंदर घुसा दिया। सौंदर्या की चूत पर जैसे ही डिल्डो छुआ तो उसके बदन ने एक तेज झटका खाया और उसके मुंह से फिर से आह निकल पड़ी। अजय ने डिल्डो को अपनी बहन की चूत पर अच्छे से घुमाया और जैसे ही वो चूत के छेद पर पहुंचा तो सौंदर्या पागल सी हो गईं और उसकी चूचियों के निप्पल पूरी तरह से कड़क होकर अजय के सीने में चुभने लगे और सौंदर्या ने अपने जिस्म को अपने भाई की बांहों में पूरी तरह से ढीला छोड़ दिया।

अजय डिल्डो पर जैसे ही दबाव बढ़ाता तो सौंदर्या की चूत की दीवारें झनझना जाती और सौंदर्या के मुंह से आह निकल रही थी और उसने अपने भाई की पीठ को सहला शुरू कर दिया। डिल्डो पूरी तरह से चूत रस से भीग गया था और रस की बूंदे चूत पर टपक रही थी तो सौंदर्या से बर्दास्त नहीं हुआ और आंहें भरते हुए बोली:"

" आह भाई, उफ्फ पूरा डिल्डो रस से भीग गया है, हाय मत कर अब, उफ्फ निकाल ले बाहर इसे।

अजय ने सौंदर्या की कान की लौ को हल्के हल्के चबाते हुए कहा:"

" हाय मेरी दीदी, डिल्डो किसके रस से पूरा भीग गया है, हाय बताओ ना मेरी प्यारी दीदी

इतना कहते हुए अजय ने अपने दूसरे हाथ को सौंदर्या की नाइटी के अंदर घुसा दी और उसकी गांड़ को दबोच लिया तो सौंदर्या बावली सी हो गई और उसने सब शर्म लिहाज छोड़ते हुए डिल्डो को अपनी चूत पर रगड़ दिया और अपनी चूचियों को उसके सीने पर रगड़ते हुए सिसक उठी

" हाय भाई इसके रस से भीग गया है, बिल्कुल पूरा भीग गया है, देख ना कैसे रस टपक रहा है

अजय अपनी बहन के इस कामुक अंदाज पर पूरी तरह से बहक गया और अपनी उंगली को उसकी गांड़ के पर दबाते हुए डिल्डो को चूत की क्लिट पर रगड़ दिया और बोला:"

" हाय दीदी, सच में पूरा भीग गया है, उफ्फ नाम क्या है इसका दीदी?

सौंदर्या के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी और सिसकते हुई अपनी चूत को उपर उठाते हुए डिल्डो पर रगड़ दिया और अपने जीभ को उसके गाल पर रगड़ते हुए कानो में बहुत ही कामुक अंदाज में सिसक उठी

" आह भाई, इसके, हाय जिस पर तू डिल्डो रगड़ रहा है, हाय जिसे मैं डिल्डो पर रगड़ रही हूं। तू समझ गया ना भाई।

अजय:" हाय आह उफ्फ मैं सब समझ गया दीदी।

सौंदर्या:" भाई उफ्फ, हाय निकाल ले इसे बाहर अब, उफ्फ नहीं तो तेरी दीदी मर जाएगी।

अजय पेंटी के उपर से उसकी गांड़ के छेद को सहला कर तड़प उठा:"

" हाय मेरी दीदी, तुम तो मेरी जान हो सौंदर्या। तुम्हे कैसे मरने दे सकता हूं।

अजय ने डिल्डो को खूब अच्छे से गीला किया और बाहर निकाल लिया। सौंदर्या तड़प उठी और उसने अपनी जांघो को फिर से कस लिया। अजय ने डिल्डो को फिर से अपने और सौंदर्या के चेहरे के बीच किया और उससे उठ रही मद मस्त खुशबू उसकी नाक में समा गई। उफ्फ अजय पागल सा हो गया और सौंदर्या की जांघो को अपने दूसरे हाथ से खोलते हुए लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा। अपनी चूत की खुशबू सूंघकर सौंदर्या भी पागल सी हो गई और गहरी गहरी सांस लेते हुए जोर जोर से सूंघने लगी।

अजय सिसकते बोला: हाय दीदी कितनी अच्छी खुशबू हैं आपकी, सपना तो इसके आगे बिल्कुल बेकार है। हाय मेरी दीदी कितनी अच्छी हो आप।

सौंदर्या ने राहत की सांस ली और फिर से सूंघते हुए बोली:"

" हाय भाई, सच में तुझे बहुत अच्छी लगी। उफ्फ मुझे भी अच्छी लग रही है।

अजय:" हाय दीदी सच में धन्य हो गया मैं, लेकिन इसमें से आपकी खुशबू के साथ साथ सपना की बदबू भी आ रही हैं। उफ्फ दीदी अगर सिर्फ आपकी ही खुशबू होती तो हाय मेरी प्यारी दीदी।

सौंदर्या सपना की बदबू सुनकर खुश हो गई और बोली:"

" हाय भाई, मेरी खुशबू कैसी आएगी इसमें अब ?

तभी सीमा की आवाज:" मेरे पति ने अपनी नाक को मेरी पेंटी में दबा दिया और मेरी चूत में चीटियां सी दौड़ गई। मेरा जिस्म मस्ती से भर उठा और मेरी सिसकियां कमरे में गूंज उठी।उसकी गर्म गर्म सांसे मेरी चूत पर कमाल कर रही थी हाय राधा, इतना मजा कभी नहीं आया।

अजय:" हाय दीदी उफ्फ क्या मैं भी सीमा के पति की तरह सीधे ही सूंघ लू क्या? उफ्फ मेरी दीदी आपकी खुशबू

अजय ने सौंदर्या के जिस्म की आग को इस कदर भड़का दिया था कि वो पूरी तरह से अपने भाई के काबू में थी। सौंदर्या झूठा बहाना बनाते हुए बोली:"

" उफ्फ भाई किसी को पता चल गया तो क्या होगा? हाय भाई नहीं, मैं नहीं सूंघा सकती। क्या पता तू किसी को बता दे।

अजय ने सीमा को मसलते हुए अपनी तरफ खींचा और लंड का तगड़ा धक्का उसकी चूत पर पड़ा तो वो सिसक उठी। अजय बोला:"

" हाय दीदी किसी को पता नहीं चलेगा, मैं नहीं बताऊंगा आपकी कसम दीदी, बस एक बार सूंघने दो ना, हाय मेरी दीदी। आह दीदी देखो ना, सीमा का पति भी सूंघ रहा है, उफ्फ कितना अच्छा लग रहा है सीमा को ? दीदी करने दो ना, एक बार बस, नहीं तो मैं मर जाऊंगा आह।

सौंदर्या अजय से लिपट गई और सिसक उठी:" हाय भाई तू तो मेरी जान हैं, तुझे कैसे मरने दे सकती हूं, आह भाई सूंघ ले जी भर कर।

सौंदर्या मस्ती से भर उठी और अपने भाई को बांहों में तेजी से कस लिया। अजय सब समझ गया और उसने अपनी दीदी को सीधा बेड पर लिटा दिया। वो अपनी आंखे बंद किए पड़ी थी और टांगे अपने आप खुल गई। सौंदर्या के चेहरे पर मस्ती के लहरे दौड़ गई थी और वो मचल रही थी
 
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