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अजय अपनी बहन की टांगो के बीच में आ गया और उसकी नाइटी को उपर सरका दिया जिससे उसकी जांघें पूरी तरह से नंगी हो गई और अजय ने आगे बढ़ते हुए सौंदर्या की जांघो पर अपना मुंह टिका दिया और सूघने लगा। सौंदर्या मचल उठी और बोली:"
" आह भाई, बस हट जा, उफ्फ मेरी पेंटी गीली हो गई है, आह। नहीं मान जा मेरे अच्छे भाइं।
अजय ने उसकी जांघो को खोल दिया और जांघों पर लगे चूत रस पर अपनी जीभ फिरा दी और बोला:" आह दीदी ये क्या अच्छी अच्छी खुशबू हैं उफ्फ। आपकी जांघो से भी रस निकल रहा है
सौंदर्या अपनी जांघो पर जीभ फेरते ही मचल उठी और सिसक उठी:" आह भाई, मेरी पेंटी गीली गई है पूरी तरह।
अजय:" हाय दीदी, कितनी ज्यादा गीली होती है आपकी पेंटी, हाय जांघो को भी गीला कर दिया आपकी।
सौंदर्या मस्ती से सिसक उठी और अपनी चूचियों को खुद ही मसलने लगी और बोली:"
" आह भाई बहुत ज्यादा गीली होती है, उफ्फ बिल्कुल गीली,
अजय ने अपनी बहन को अपनी चुचियों को मसलते हुए देखा तो सिसक उठा:"
आह दीदी, उफ्फ गीली हो गई है तभी तो अच्छे से खुशबू आएगी मेरी प्यारी बहना। हाय उतार दूं क्या दीदी आपकी गीली पेंटी?
सौंदर्या ने शर्म के मारे अपनी जांघो को कस लिया और सिसक उठी:" आह भाई नहीं, पेंटी मत उतार देना मेरी, आह नहीं भाई।
अजय का लंड तो फटने के लिए तैयार था और अजय ने धीरे से फिर से अपनी दीदी को जांघो को खोल दिया और उसके घुटनो के उपर अपना हल्का सा वजन टिकाते हुए अपने लंड को उसके घुटनो के बीच में सरका दिया और बोला:"
" आह दीदी नहीं उतारूंगा आपकी पेंटी।
इतना कहते हुए अजय ने अपनी नाक को पेंटी के के पास किया तो सौंदर्या उसकी गर्म गर्म सांसे महसूस करके मचल उठी और उसकी चूत अपने आप उपर की तरफ उठ गई और अजय से नाक से टकरा गई।
अजय:" हाय मेरी सौंदर्या, उफ्फ कितनी तड़प रही है तेरी पेंटी, हाय खुद ही उछल उछल उछल पड़ रही है ।
सौंदर्या अब दीदी से जान बन गई थी और उसने अपने घुटनों का दबाव लंड पर बढ़ा दिया तो अजय ने धीरे से डिल्डो को सौंदर्या की गांड़ के नीचे सरका दिया बिल्कुल उसकी गांड़ के छेद के एकदम नीचे और सौंदर्या के रहा सहा धैर्य भी जवाब दे गया और वो सिसक उठी
" आह भाई, ये क्या कर दिया, उफ्फ आज तो मेरी जान ही ले लेगा, हाय मा मैं पागल हो जाऊंगी ऐसे तो।
अजय ने अपनी नाक को सौंदर्या की पेंटी पर टिका दिया तो उसकी चूत से कुछ बूंदे और छलक उठी मानो उसकी चूत ने अजय का स्वागत किया हो। सौंदर्या की जालीदार पेंटी से रस की बूंदे अजय की नाक में समा गई और अजय ने सौंदर्या की दोनो जांघो को पकड़ कर डिल्डो पर दबा दिया और बोला:'
" हाय दीदी अच्छा ना लग रहा है तो निकाल लू क्या ?
इतना कहते हुए उसने अपने हाथ को डिल्डो की तरफ बढ़ा दिया और सिसक रही सौंदर्या ने बिना कुछ बोले उसका हाथ पकड़ लिया। अजय ने अपनी नाक को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया और सौंदर्या का बदन झटके पर झटके खाने लगा। अजय के लंड में तनाव बढ़ता जा रहा था और सौंदर्या उसके लंड को अपने घुटनों के बीच रगड़ सा रही थी।
पागल से हो चुके लालची अजय ने अपनी नाक के साथ साथ जीभ को भी बाहर निकाल लिया और जैसे ही उसने सौंदर्या की जालीदार पेंटी पर अपनी जीभ फिराई तो सौंदर्या के मुंह से एक एक जोरदार सिसकी निकल पड़ी और उसने अपने भाई के सिर को अपनी जांघो के बीच कस लिया और उसकी चूत से निकलती हुई रस की बूंदे अजय के मुंह को भिगोती चली गई। अजय भी ये बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसके लंड ने अपनी बारिश से अपनी बहन के घुटनो को तर कर दिया।
सौंदर्या की ज़िन्दगी का पहला स्खलन इतना जबरदस्त रहा कि मदहोशी में उसकी चूत के साथ साथ उसकी आंखो से भी खुशी के आंसू छलक उठे।तूफान गुजर जाने के बाद जैसे ही सौंदर्या को होश आया तो उसने अपनी जांघो को ढीला किया तो अजय को कुछ सुकून मिला और लाइट भी आईं मानो सौंदर्या ने लाइट को अपनी जांघो में बंद कर रखा था। लाइट में शर्म की वजह से सौंदर्या की आंखे फिर से बंद हो गई और अजय ने अपनी दीदी के खूबसूरत चेहरे को अपने हाथ में भर लिया और धीरे से बोला:"
" मेरी दीदी से अच्छी संस्कारी और सुशील लड़की दुनिया में दूसरी कोई हो ही नहीं सकती। मुझे आप पर खुद से और उस भगवान से भी ज्यादा यकीन है मेरी प्यारी दीदी।
इतना कहकर अजय ने अपनी दीदी को गले लगा लिया और सौंदर्या भी उससे लिपट गई। अपने भाई का प्यार देखकर उसकी चूत के साथ साथ अब उसकी आंखे भी भर आईं अजय ने अपनी दीदी के आंसू को अपनी जीभ से चाट लिया और सौंदर्या एक बार फिर अपने भाई का प्यार देखकर उससे लिपट पड़ी।
अपनी दीदी से अजय बिना कुछ बोले चुपचापअपने कमरे की तरफ चल पड़ा।
दोनो के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे थे लेकिन थके होने के कारण दोनो को जल्दी ही नींद आ गई
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" आह भाई, बस हट जा, उफ्फ मेरी पेंटी गीली हो गई है, आह। नहीं मान जा मेरे अच्छे भाइं।
अजय ने उसकी जांघो को खोल दिया और जांघों पर लगे चूत रस पर अपनी जीभ फिरा दी और बोला:" आह दीदी ये क्या अच्छी अच्छी खुशबू हैं उफ्फ। आपकी जांघो से भी रस निकल रहा है
सौंदर्या अपनी जांघो पर जीभ फेरते ही मचल उठी और सिसक उठी:" आह भाई, मेरी पेंटी गीली गई है पूरी तरह।
अजय:" हाय दीदी, कितनी ज्यादा गीली होती है आपकी पेंटी, हाय जांघो को भी गीला कर दिया आपकी।
सौंदर्या मस्ती से सिसक उठी और अपनी चूचियों को खुद ही मसलने लगी और बोली:"
" आह भाई बहुत ज्यादा गीली होती है, उफ्फ बिल्कुल गीली,
अजय ने अपनी बहन को अपनी चुचियों को मसलते हुए देखा तो सिसक उठा:"
आह दीदी, उफ्फ गीली हो गई है तभी तो अच्छे से खुशबू आएगी मेरी प्यारी बहना। हाय उतार दूं क्या दीदी आपकी गीली पेंटी?
सौंदर्या ने शर्म के मारे अपनी जांघो को कस लिया और सिसक उठी:" आह भाई नहीं, पेंटी मत उतार देना मेरी, आह नहीं भाई।
अजय का लंड तो फटने के लिए तैयार था और अजय ने धीरे से फिर से अपनी दीदी को जांघो को खोल दिया और उसके घुटनो के उपर अपना हल्का सा वजन टिकाते हुए अपने लंड को उसके घुटनो के बीच में सरका दिया और बोला:"
" आह दीदी नहीं उतारूंगा आपकी पेंटी।
इतना कहते हुए अजय ने अपनी नाक को पेंटी के के पास किया तो सौंदर्या उसकी गर्म गर्म सांसे महसूस करके मचल उठी और उसकी चूत अपने आप उपर की तरफ उठ गई और अजय से नाक से टकरा गई।
अजय:" हाय मेरी सौंदर्या, उफ्फ कितनी तड़प रही है तेरी पेंटी, हाय खुद ही उछल उछल उछल पड़ रही है ।
सौंदर्या अब दीदी से जान बन गई थी और उसने अपने घुटनों का दबाव लंड पर बढ़ा दिया तो अजय ने धीरे से डिल्डो को सौंदर्या की गांड़ के नीचे सरका दिया बिल्कुल उसकी गांड़ के छेद के एकदम नीचे और सौंदर्या के रहा सहा धैर्य भी जवाब दे गया और वो सिसक उठी
" आह भाई, ये क्या कर दिया, उफ्फ आज तो मेरी जान ही ले लेगा, हाय मा मैं पागल हो जाऊंगी ऐसे तो।
अजय ने अपनी नाक को सौंदर्या की पेंटी पर टिका दिया तो उसकी चूत से कुछ बूंदे और छलक उठी मानो उसकी चूत ने अजय का स्वागत किया हो। सौंदर्या की जालीदार पेंटी से रस की बूंदे अजय की नाक में समा गई और अजय ने सौंदर्या की दोनो जांघो को पकड़ कर डिल्डो पर दबा दिया और बोला:'
" हाय दीदी अच्छा ना लग रहा है तो निकाल लू क्या ?
इतना कहते हुए उसने अपने हाथ को डिल्डो की तरफ बढ़ा दिया और सिसक रही सौंदर्या ने बिना कुछ बोले उसका हाथ पकड़ लिया। अजय ने अपनी नाक को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया और सौंदर्या का बदन झटके पर झटके खाने लगा। अजय के लंड में तनाव बढ़ता जा रहा था और सौंदर्या उसके लंड को अपने घुटनों के बीच रगड़ सा रही थी।
पागल से हो चुके लालची अजय ने अपनी नाक के साथ साथ जीभ को भी बाहर निकाल लिया और जैसे ही उसने सौंदर्या की जालीदार पेंटी पर अपनी जीभ फिराई तो सौंदर्या के मुंह से एक एक जोरदार सिसकी निकल पड़ी और उसने अपने भाई के सिर को अपनी जांघो के बीच कस लिया और उसकी चूत से निकलती हुई रस की बूंदे अजय के मुंह को भिगोती चली गई। अजय भी ये बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसके लंड ने अपनी बारिश से अपनी बहन के घुटनो को तर कर दिया।
सौंदर्या की ज़िन्दगी का पहला स्खलन इतना जबरदस्त रहा कि मदहोशी में उसकी चूत के साथ साथ उसकी आंखो से भी खुशी के आंसू छलक उठे।तूफान गुजर जाने के बाद जैसे ही सौंदर्या को होश आया तो उसने अपनी जांघो को ढीला किया तो अजय को कुछ सुकून मिला और लाइट भी आईं मानो सौंदर्या ने लाइट को अपनी जांघो में बंद कर रखा था। लाइट में शर्म की वजह से सौंदर्या की आंखे फिर से बंद हो गई और अजय ने अपनी दीदी के खूबसूरत चेहरे को अपने हाथ में भर लिया और धीरे से बोला:"
" मेरी दीदी से अच्छी संस्कारी और सुशील लड़की दुनिया में दूसरी कोई हो ही नहीं सकती। मुझे आप पर खुद से और उस भगवान से भी ज्यादा यकीन है मेरी प्यारी दीदी।
इतना कहकर अजय ने अपनी दीदी को गले लगा लिया और सौंदर्या भी उससे लिपट गई। अपने भाई का प्यार देखकर उसकी चूत के साथ साथ अब उसकी आंखे भी भर आईं अजय ने अपनी दीदी के आंसू को अपनी जीभ से चाट लिया और सौंदर्या एक बार फिर अपने भाई का प्यार देखकर उससे लिपट पड़ी।
अपनी दीदी से अजय बिना कुछ बोले चुपचापअपने कमरे की तरफ चल पड़ा।
दोनो के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे थे लेकिन थके होने के कारण दोनो को जल्दी ही नींद आ गई
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