चॅप्टर 946
दिवाली के वो मस्ती वाले 5 दिन तो बीत गये
पर कॉलेज शुरू होने मे टाइम था
दीवाली की छुट्टियाँ और कुछ दिन चलने वाली थी
सबको छुट्टियाँ होने से दिन भर मस्ती कर रहे थे
ऐसे एक दिन सब कुछ नॉर्मल चल रहा था कि पूजा बुआ के घर पे मेहमान आ गये
रोहन और सोहन के माता पिता और संगीता आ गयी
उनके साथ एक और आदमी था जो पंडितजी टाइप का था
अचानक रोहन की फॅमिली के आ जाने से पूजा बुआ को अजीब सा लगा
बिना बताए , रोहन का भी स्वेता दीदी को कॉल नही आया ,ऐसे मे उनके आने से पूजा बुआ हड़बड़ा गयी
पूजा बुआ ने राज को सबको बुला कर लाने को कहा
राज भाग भाग कर सबको बुलाने लगा
पूजा बुआ को कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या करे
स्वेता दीदी ने रोहन के माता पिता को मूह हाथ धोने के लिए पानी दिया
सीतल दीदी सोहन को कॉल कर रही थी कि ये अचानक विज़िट किस वजह से हो रही है
सोहन को भी इस के बारे मे पता नही था , वो भी सबकी तरह शॉक्ड था
स्वेता दीदी अपने होने वाले सास ससुर का स्वागत कर रही थी
सीतल दीदी टी नाश्ते का इंतज़ाम करने लगी
राज ने पहले नेहा बुआ को बताया फिर नीता बुआ को
बुआ अपना हाथ का काम छोड़ कर कर पूजा बुआ के घर चली गयी , पीछे का गेट खुला था
कोमल कविता लीना भी स्वेता दीदी की मदद करने के लिए आ गयी
और राज हमारे यहाँ आ गया
राज हमारे यहाँ आते हुए हाँफने लगा
सी चाची- राज क्या हुआ ऐसे भागते हुए क्यूँ आया
राज- मामी वो घर पे
ब चाची- पहले पानी पी फिर बता आराम से
राज- घर पे रोहन जीजू की माँ और पापा आए है
म चाची- ऐसे अचानक , पूजा दीदी ने हमे तो कुछ नही बताया कि वो आ रहे है
राज- माँ को भी नही पता था ,
सी चाची- ऐसे अचानक आने के पीछे कोई बात होगी
ब चाची- हमे चलना चाहिए
म चाची- मैं यही रुकु
सी चाची-समधी आए है तो शाम तक रोकना होगा , खातिर दारी करनी होगी ,
म चाची- तो
सी चाची-आप भी चलिए , कोमल के पास रुकना ताकि हम बच्चो को दूध पिलाने आ सके
ब चाची- मीना ने सही कह रही है , वो तो शाम को जाएँगे
विद्या- चाची आप जाइए हम आराम से पीछे पीछे आते है
ब चाची- चल मीना , उनके ऐसे अचानक आने से पूजा दीदी घबरा गयी होगी
सी चाची- राज तू अपनी मामी की मदद कर फिर आना
राज- जी मामी
और बड़ी चाची और सीमा चाची पूजा बुआ के घर गयी ,
मैं भी तैयार होके सीमा चाची के साथ नेहा बुआ के घर जाने लगा ,
चाचा खेत मे थे तो मैं अकेला मर्द होने से मुझे वहाँ तैयार होके जाना था
पूजा बुआ नेहा बुआ मेहमानो को टी नाश्ता देने लगी
मैं पीछे के गेट से अंदर आया तो नीता बुआ मुझे पे चिल्लाने लगी
नीता बुआ- कहाँ था , जल्दी नही आ सकता था
अवी- वो मैं तैयार हो रहा था
ब चाची- अवी जा , वहाँ जाकर बैठ जा , उनके साथ बातें कर,
सी चाची- बच्चों जैसे बातें मत करना , जो भी बोलना सोच समझ कर बोलना
नीता बुआ- तेरे चाचा आने तक उनसे बातें कर , जा अब
अवी- जी
ये क्या मुसीबत है
जेंटलमॅन बन कर रहना होगा उनके सामने
रोहन की माँ = मधुबाला
रोहन की भाभी =संगीता
और रोहन की भाभी संगीता के साथ तो पूजा बुआ नेहा बुआ और बड़ी चाची बात करने लगी
रोहन के पापा और उस पंडित के साथ मुझे बातें करनी पड़ी
ये मेरे लिए एक टेस्ट था ,
लड़की वाले होने से सोच समझ कर बात करनी पड़ती है
ये राजेश कहाँ चला गया , वो साथ मे होता तो मेरे कॉन्फिडेन्स बढ़ जाता
पूजा बुआ- सफ़र मे कोई परेशानी तो नही हुई
मधुबाला-आपका गाँव बहुत दूर है , थोड़ी परेशानी हुई
बड़ी चाची- परेशानी के लिए क्षमा चाहते है
संगीता- इस मे आप क्यूँ क्षमा माँग रही है ,
मधुबाला- रिश्ता निभाना है तो ये तो करना पड़ता है
पूजा बुआ- जी
संगीता- सीतल दिखाई नही दे रही ,, वो बाहर गयी है
नेहा बुआ- वो अंदर है ,नाश्ता बना रही है
ब चाची- आप इतनी सुबह सुबह आ गये , कोई खबर नही की
संगीता- हम यहाँ से जा रहे थे तो सोचा आप सब से मिल लिया जाए
पूजा बुआ- मिलते रहने से रिश्ते मज़बूत होते है
मधुबाला-वो आप पर डिपंड करता है कि आप खातिरदारी कैसे करती है, अब तक तो जूस भी नही दिया
सी चाची- ये लीजिए जूस , स्वेता ने अपने हाथो से बनाया है
मधुबाला (रोहन की माँ )थोड़ी खाड़ुस टाइप की है
पर छोटी चाची ने सही समय पे एंट्री मारी
नीता बुआ- स्वेता सबको जूस दो
संगीता - स्वेता के हाथ की टी मुझे पसंद है , उसकी जैसी टी कोई बना नही सकती
पूजा बुआ- अभी टी बनाने को कहती हूँ
मधुबाला- हर चीज़ बोलनी पड़ रही है , पता नही आगे क्या होगा
नीता बुआ- टी भी तैयार है , आपने जूस कहा तो जूस आ गया , टी कहती तो टी आ जाती
नीता बुआ भी कुछ कम नही थी
पर ऐसे जवाब देना ठीक नही था
पूजा बुआ- नीता तुम अंदर देखो खाने पीने का
बातों बातों मे बात ना बढ़ जाए उस लिए पूजा बुआ ने नीता बुआ को अंदर भेज दिया
नीता बुआ- देखा तुम ने कितनी खाड़ुस है वो
सी चाची- उस से दूर रहना होगा , बस हाँ मे गर्दन घुमाना उनके सामने
नीता बुआ- शादी के बाद तो स्वेता सीतल पे ऑर्डर चलाती फ़िरेगी
सी चाची- स्वेता सब संभाल लेगी , उसको अच्छे बुरे की समझ है ,
संगीता - आप सब हमारे ऐसे आने से परेशान होंगे
नेहा बुआ -इसमे परेशानी की कोई बात नही है , हमे अच्छा लगा कि दीवाली पे आप हमारे यहाँ आए है
मधुबाला- हम बिना वजह कहीं नही जाते,और ऐसी जगह तो बिल्कुल ही नही जाते
पूजा बुआ- आप कोई ज़रूरी काम से आए थे
संगीता - ज़रूरी काम से एक जगह गये थे , वही से यहाँ आए है
ब चाची- कोई खास काम था
संगीता- उनको देख रही है वो हमारे फॅमिली के पंडित जी है , उनके पास गये थे
पंडित का नाम सुनते ही पूजा बुआ ने सबकी तरफ देखा
बड़ी चाची ने पूजा बुआ का हाथ दबा कर शांत रहने को कहा
इधर मैं बात कर रहा था रोहन के पापा के साथ
अवी- नमस्ते
रोहन के पापा - नमस्ते , पंडितजी ये अवी है , उसको तो आप जानते होंगे
पंडितजी- इसको तो उस ज़िल्ले मे , इस रेगोइन मे हर कोई जानता है , मेले मे इस साल पूजा इसी ने की थी
अवी- जी , पर आप से पहले मुलाकात नही हुई
रोहन के पापा - ये तो घूमते रहते है , अब जाके हमे मिले है , 3 महीने बाद
पंडितजी- ऐसी कोई बात नही है , वो तो पूजा ,पाठ की वजह से जाना पड़ता है बहुत सी जगहों पे
अवी- वो तो है , पर आपका चेहरा किसी से काफ़ी मिलता है , जिसको मैं जानता हूँ
पंडितजी- मेरी बहन की तुम्हारे गाँव के मंदिर के पंडित के साथ शादी हुई है ,
अवी- (ये पंडिताइन का भाई है ) उनको मैं अच्छे से जानता हूँ , मेले मे पूजा करने मे मेरी बहुत मदद की , आपकी बहन मंदिर का ध्यान अच्छे से रखती है , उनके वजह से भक्तों को ज़्यादा परेशानी नही होती
मेरे मूह से अपने बहन की तारीफ सुनकर पंडित खुश हो गया , चाची ने मुझे अंगूठा दिखा कर ऐसे बात करने को कहा
रोहन के पापा - ये हमारे फॅमिली मेंबर जैसे है , हम सब शुभ काम इनकी मर्ज़ी से करते है
अवी- शादी की बात करने गये थे आप
रोहन के पापा - तुम स्मार्ट हो , कौन सी क्लास मे पढ़ते हो
अवी- कॉलेज जाना शुरू किया है एक साल से ,
रोहन के पापा - फिर भी काफ़ी मेच्यूर लगते हो ,
अवी- कसरत करने का असर है
रोहन के पापा - गाँव की बात ही अलग होती है , मैं भी बचपन मे कसरत करता था
अवी- आपका बचपन गाँव मे बीता है , ये सुनकर अच्छा लगा
रोहन के पापा - अब तो गाँव जाने का समय ही नही मिलता , शहर की हवा जाने नही देती
अवी- शादी होते ही आप अपनी ज़िम्मेदारी से मुक्त हो जाओगे , तो आराम के साथ गाँव घूमते रहना ,
रोहन के पापा - तुम्हारी बात पे सोचूँगा ज़रूर
अवी- नाश्ता किया कि नही आपने मैं तो बातों बातों मे पूछना भूल गया
रोहन के पापा - हमारे आते ही नाश्ता स्वेता बेटी ने खिला दिया , बड़ी प्यारी बेटी है
अवी- जल्दी वो आपकी बेटी बनके आपके घर आएगी
रोहन के पापा - वो दिन तय कर लिया
अवी- पंडितजी ने डेट फिक्स की है
रोहन के पापा - हाँ उसी के सिलसिले मे पंडितजी के पास गये थे , और उनको यहाँ लेकर आए हैं
अवी- आप जूस पीजिए मैं एक मिनिट मे आता हूँ
और मैं किचेन मे चला गया
सी चाची- क्या बातें हुई , रोहन के पापा बहुत धीरे बात करते है सुनाई नही दिया
अवी- वो शादी की बात करने आए है , शादी की डेट फिक्स करने आए है ,
नीता बुआ- अभी तो स्वेता की पढ़ाई पूरी नही हुई है
अवी- अभी से बात करके डेट फिक्स कर रहे होंगे
सी चाची- दीदी को ये बात बतानी होगी
नीता बुआ- तेरे चाचा कहाँ रह गये
अवी- वो खेत मे है , आ रहे होंगे
नीता बुआ- ये राजेश भी फोन नही उठा रहा है , मेहमानों के लिए खाना बनाना होगा , नॉनवेज भी नही है
अवी- बुआ वो पंडित है
सी चाची - बाकी का सामना नही है , राजेश को बोल देते शहर से लाने को
अवी- मैं फोन करता हूँ
नीता बुआ- मैं ने दस बार फोन किया है
अवी- बुआ मैं उसका भाई हूँ , वो मेरा फोन ज़रूर उठाएगा
मैं ने राजेश को फोन किया
राजेश ने मेरा फोन उठा लिया , नीता बुआ ये देख कर शॉक्ड हुई
अवी- कहाँ है तू
राजेश- घर2 पे हूँ, धक्के मार रहा हूँ
अवी- वो बंद कर और जल्दी घर आ
राजेश- क्या हुआ भैया
अवी- घर पे मेहमान आए है और बुआ से बात कर उनको कुछ समान चाहिए
मैं ने नीता बुआ से राजेश की बात करवाई
और रोहन के पापा के पास आ गया
और उनसे इधर उधर की , रोहन सोहन की बातें करने लगा
पूजा बुआ- आपने बताया नही आपके आने का कारण
संगीता- पंडितजी को साथ लाए है
ब चाची- मैं तो समझ गयी पर आप एक बार बता देती तो क्लियर हो जाता
मधुबाला- पता नही ये रिश्ता क्यूँ कर रहे है , बच्चों की खुशी के लिए झुकना पड़ता है
संगीता- मम्मी प्लीज़ फिर से वही बात शुरू मत कीजिए
मधुबाला - मेरी तो कोई सुनता ही नही , बाद मे कुछ हुआ तो तेरी खैर नही
पूजा बुआ चुप चाप बात सुन रही थी
उनको पता था कि मधुबाला को ये रिश्ता ज़्यादा पसंद नही है
पर रोहन और सोहन की वजह से उनको हाँ करनी पड़ी और स्वेता दीदी सीतल दीदी के वजह से पूजा बुआ को हाँ बोलना पड़ा
संगीता- हम शादी की बात करने आए है
पूजा बुआ- इतनी जल्दी अभी तो स्वेता की पढ़ाई ख़तम नही हुई
मधुबाला- कॉलेज जाने वाली कैसे घर संभालेगी
संगीता - मम्मी जी मुझे बात करने दीजिए
.संगीता बहुत अच्छी है उनकी वजह से ये रिश्ता हो सका है
संगीता- शादी पढ़ाई पूरी होने के बाद होगी , पर अभी से सब फिक्स हो जाएगा तो अच्छा रहेगा जिस से आपको समय मिलेगा शादी की तैयारी करने को
पूजा बुआ- जी आपकी बात भी सही है
संगीता - तो हम बात शुरू करे
पूजा बुआ- स्वेता के पापा अभी तक आए नही है वो आ जाते तो अच्छा होता
संगीता- शादी की बात हम उनके आने के बाद करेंगे
नेहा बुआ - हम समझे नही
संगीता - शादी मे लेन देन की बात बाद मे मे करेंगे , अभी तो हम सगाई की बात करने आए है
पूजा बुआ- सगाई
संगीता - अभी सगाई कर देते है और शादी बाद मे कर लेंगे
हम.भी यही चाहते थे
सगाई हो गयी तो आधी टेंशन ख़तम.हो जाएगी
वरना शादी होगी कि नही उसकी वजह से बुआ परेशान रहेगी
हम भी तो यही चाहते थे
सब खुश थे सगाई का नाम सुनते ही
ब चाची- सगाई हो जाएगी तो हम भी तैयारी मे लग सकते है
पूजा बुआ- सगाई की डेट कब निकाली है
रोहन के पापा - वो पंडितजी को पता है
पूजा बुआ - फिर भी स्वेता के पापा होते तो
मधुबाला- हम लड़के वाले है
ब चाची- जी हम कुछ करते है
नेहा बुआ- मैं अभी आती हूँ
और नेहा बुआ छोटी चाची को बताने के लिए किचेन मे चली गयी
छोटी चाची को पता चलते ही वो हॉल मे आ गयी
सी चाची- नमस्ते
संगीता- नमस्ते , तो मैं कह रही थी सगाई कर देते है
पूजा बुआ -मीना
सब छोटी चाची की तरफ देखने लगे
रोहन की भाभी को लगा कि छोटी चाची फ़ैसला लेगी
सी चाची- आप तो जल्दी जल्दी मे लग रही है , पहले कुछ खातिरदारी करने दीजिए फिर आराम से बात करते है , हमे मेहमान नवाज़ी को मौका तो दीजिए
संगीता-दे दिया
सी चाची- तब तक एक दूसरे से मिल लेते है , ठाकुरजी आ जाएँगे
ठाकुरजी का नाम सुनते ही पूजा बुआ रिलॅक्स हो गयी
मधुबाला - कौन ठाकुर
सी चाची- आप ठाकुरजी को नही जानते , पूरा एरिया उनका है ,इस रीजन मे हर कोई उनको जानता है
रोहन के पापा - कहीं आप , अरे हाँ , ये उन्ही का तो गाँव है , मेले मे देखा था , उनके बारे मे बहुत सुना है ,
रोहन के पापा की बात सुनते ही मधुबाला को पता लग गया कि हम मामूली नही है
मधुबाला- वो भी यहाँ आएँगे
पूजा बुआ - वो मुझे अपनी बेटी मानते है , उनको बुलाना होगा तभी बात आगे बढ़ेगी
छोटी चाची ने सही गेम खेला
इसी लिए सब छोटी चाची के लास्ट फ़ैसला का इंतज़ार करते थे
एक बॉल पे सबको आउट कर दिया छोटी चाची
ठाकुरजी के आने से रोहन की माँ का मूह बंद रहेगा
संगीता - ये अच्छा रहेगा , उनके आने तक आप ख़ातिरदारी मे लग जाइए
सी चाची-जी , वैसे नॉनवेज या वेज
मधुबाला- ये क्या पूछना पड़ता है जिसे जो लगेगा वो खा लेगा , या फिर आपके यहाँ इतना खाना बनाया नही जाता
ब चाची- पंडितजी की वजह से पूछा था
संगीता - आपको जो अच्छा लगे वो बना लीजिए
सी चाची- मैं नही बनाने वाली , स्वेता और सीतल बनाएँगी
संगीता- ये तो और अच्छा रहेगा ,
और हमारी बातें फिर से शुरू हो गयी
और चाची बुआ खाने की तैयारी करने लगी
नेहा बुआ ने ठाकुरजी को फोन कर दिया
ठाकुरजी कुछ देर मे आ जाएँगे
राजेश के आते ही वो मेरे साथ मेहमानो से बातें करने लगा
चाचा भी आ गये जिस से बातें लंबी चलने लगी