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Guest
संजू का दूसरा हाथ अब उसकी पीठ पर रेंगने लगा था.., उसका लंड शकीला की छोटी लेकिन मुलायम गान्ड की गर्मी पाकर नीचे पाजामा में सिर उठाने लगा था जिसे शकीला अपनी गान्ड के नीचे खूब अच्छी तरह से फील कर रही रही थी..,
संजू अब उसकी दूसरी जाँघ को सहलाते हुए बोला – तुमने जबाब नही दिया…?
शकीला – किस बात का..?
संजू – क्यों दूर भागती हो मुझसे.., क्या मे इतना बुरा लगता हूँ तुम्हें..?
शकीला की हिरनी जैसी आँखें संजू के चेहरे पर गढ़ गयी.., संजू ने भी उसकी सुरमुई आँखों में झाँका…, दोनो की नज़रों ने एक दूसरे के दिल में उतरने की कोशिश शुरू कर दी…!
शकीला ज़्यादा देर तक उसकी उन मदहोश कर देने वाली नज़रों का सामना नही कर पाई और शर्म से अपनी पलकें झुका कर बोली – हमने कब कहा कि आप बुरे लगते हो…?
संजू – तो फिर क्यों नही आना चाहती मेरे पास..?
शकीला ने शरारत करते हुए कहा – और कितने पास आयें..? आज हम दोनो को मिले हुए दूसरा दिन ही तो हुआ है.., और दूसरे दिन ही हम आपकी गोद तक पहुँच गये…!
शकीला के मूह से ये शब्द सुनकर संजू के मन की मुराद पूरी हो गयी.., वो समझ गया कि मछली अब पूरी तरह से जाल में फँस चुकी है…,
अब बेधड़क उसके होठ फिरसे शकीला के नाज़ुक पतले पतले होंठो पर टिक गये और वो उन्हें अपने होठों से तर करने लगा…!
जिंदगी का पहला मर्दाना किस पाकर शकीला अपनी बकरियों को भुला बैठी.., वो तो जैसे दूसरी दुनिया में पहुँच चुकी थी…!
किस करते हुए संजू के एक हाथ ने उसके कच्चे अनारों को टटोलना शुरू कर दिया और उसकी कुरती के कमजोर पुराने से कपड़े के उपर से उन्हें सहलाने लगा…!
शकीला के वक्ष अभी इतने विकसित नही थे.., वो संजू के हाथ में पूरी तरह समा रहे थे.., किस करते हुए संजू ने उसकी टिकोले जैसी एक चुचि को अपने हाथ में भर कर ज़ोर्से भींच दिया…!
शकीला ने किस तोड़ते हुए उसके मूह से एक मादक दर्द भरी कराह निकली… सस्सिईई…आअहह…संजू जी.. ज़ोर्से नही..प्लीज़…दर्द होता है…,
लेकिन अब वो अपने आप को भूलती जा रही थी.., इश्स नयी नवेली कच्ची कली पर संजू ने चारों तरफ से हमला बोल रखा था..,
दोनो बॉल जैसी गान्ड की घाटी में उसका मस्ताना लंड नीचे से उसकी कोरी मुनिया के इतने करीब बुरी तरह ठोकरें दे रहा था, तो उसका एक हाथ उसके कच्चे टिकॉलों को बारी-बारी से सहला रहा था.., जिनके छोटे छोटे नीम की निबौरि जैसे निपल एकदम कड़क कन्चे के माफिक उसके कुर्ते में तन चुके थे…!
संजू का दूसरा हाथ चोरी-चोरी…चुपके-चुपके उसकी चिकनी जांघों को सहलाते हुए धीरे धीरे उसकी दोनो जांघों के संगम की तरफ बढ़ रहा था जहाँ उस कच्ची कली के लिए जन्नत का दरवाजा था जो फिलहाल तो बंद था…, और संजू उसे खोलने की पूरी जुगत में…, तन मन से लगा हुआ था…….!!!!
संजू अब उसकी दूसरी जाँघ को सहलाते हुए बोला – तुमने जबाब नही दिया…?
शकीला – किस बात का..?
संजू – क्यों दूर भागती हो मुझसे.., क्या मे इतना बुरा लगता हूँ तुम्हें..?
शकीला की हिरनी जैसी आँखें संजू के चेहरे पर गढ़ गयी.., संजू ने भी उसकी सुरमुई आँखों में झाँका…, दोनो की नज़रों ने एक दूसरे के दिल में उतरने की कोशिश शुरू कर दी…!
शकीला ज़्यादा देर तक उसकी उन मदहोश कर देने वाली नज़रों का सामना नही कर पाई और शर्म से अपनी पलकें झुका कर बोली – हमने कब कहा कि आप बुरे लगते हो…?
संजू – तो फिर क्यों नही आना चाहती मेरे पास..?
शकीला ने शरारत करते हुए कहा – और कितने पास आयें..? आज हम दोनो को मिले हुए दूसरा दिन ही तो हुआ है.., और दूसरे दिन ही हम आपकी गोद तक पहुँच गये…!
शकीला के मूह से ये शब्द सुनकर संजू के मन की मुराद पूरी हो गयी.., वो समझ गया कि मछली अब पूरी तरह से जाल में फँस चुकी है…,
अब बेधड़क उसके होठ फिरसे शकीला के नाज़ुक पतले पतले होंठो पर टिक गये और वो उन्हें अपने होठों से तर करने लगा…!
जिंदगी का पहला मर्दाना किस पाकर शकीला अपनी बकरियों को भुला बैठी.., वो तो जैसे दूसरी दुनिया में पहुँच चुकी थी…!
किस करते हुए संजू के एक हाथ ने उसके कच्चे अनारों को टटोलना शुरू कर दिया और उसकी कुरती के कमजोर पुराने से कपड़े के उपर से उन्हें सहलाने लगा…!
शकीला के वक्ष अभी इतने विकसित नही थे.., वो संजू के हाथ में पूरी तरह समा रहे थे.., किस करते हुए संजू ने उसकी टिकोले जैसी एक चुचि को अपने हाथ में भर कर ज़ोर्से भींच दिया…!
शकीला ने किस तोड़ते हुए उसके मूह से एक मादक दर्द भरी कराह निकली… सस्सिईई…आअहह…संजू जी.. ज़ोर्से नही..प्लीज़…दर्द होता है…,
लेकिन अब वो अपने आप को भूलती जा रही थी.., इश्स नयी नवेली कच्ची कली पर संजू ने चारों तरफ से हमला बोल रखा था..,
दोनो बॉल जैसी गान्ड की घाटी में उसका मस्ताना लंड नीचे से उसकी कोरी मुनिया के इतने करीब बुरी तरह ठोकरें दे रहा था, तो उसका एक हाथ उसके कच्चे टिकॉलों को बारी-बारी से सहला रहा था.., जिनके छोटे छोटे नीम की निबौरि जैसे निपल एकदम कड़क कन्चे के माफिक उसके कुर्ते में तन चुके थे…!
संजू का दूसरा हाथ चोरी-चोरी…चुपके-चुपके उसकी चिकनी जांघों को सहलाते हुए धीरे धीरे उसकी दोनो जांघों के संगम की तरफ बढ़ रहा था जहाँ उस कच्ची कली के लिए जन्नत का दरवाजा था जो फिलहाल तो बंद था…, और संजू उसे खोलने की पूरी जुगत में…, तन मन से लगा हुआ था…….!!!!