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Guest
वो चार लोग थे… दो ने मुझे दोनो बाजुओं से जकड़ा हुआ था, एक अभी भी जीप में ही बैठा रहा, और चौथा आदमी चाकू हाथ में लिए मेरी ओर बढ़ने लगा….!
मेने लगभग चीखते हुए कहा – कॉन हो तुम लोग, और क्यों मारना चाहते हो मुझे..?
वो चाकू वाला गुर्राया… तेरी वजह से हमारे मालिक को बड़ा धक्का लगा है.. इसलिए अब तुझे तो मरना ही होगा…
मे – कॉन हैं तुम्हारा मलिक..?
वो – ये जानना तेरे लिए ज़रूरी नही है.. और वैसे भी मरने के बाद तू करेगा भी क्या जान कर…!
मे समझ गया कि ये ऐसे बताने वाला नही है…, अब मेने इनसे निपटने का मन ही मन फ़ैसला कर लिया था, …
वो मेरे पास आकर मुझसे दो फुट दूर रुक गया और अपने चाकू को संभाल कर वो अपना हाथ पीछे को ले गया…
इससे पहले की वो अपना चाकू वाला हाथ, मुझे मारने के लिए आगे लता… मेने अपनी बॉडी को उन दोनो गुण्डों की पकड़ के सहारे बॅलेन्स किया और उच्छल कर भड़ाक से अपने पैर की किक उसकी नाक पर जड़ दी…
किक इतनी सटीक और जोरदार थी… की वो अपनी जगह से 10 फुट दूर पीछे जाकर गिरा.. उसकी नाक बुरी तरह से फट गयी,… और उसका पूरा चेहरा उसीके खून से लाल होने लगा.
उसके गिरते ही वो दोनो कुछ हड़बड़ा गये… और उनकी पकड़ कुछ समय के लिए ढीली पड़ गयी, उसी का फ़ायदा उठाकर मेने अपने बाजुओं को ज़ोर से झटका दिया.. और अपने को उन दोनो की पकड़ से आज़ाद कर लिया…
वो मुझे दोबारा पकड़ने के लिए झप्टे… तो मेने दो कदम पीछे हट कर एक की कनपटी पर घूँसा जड़ दिया और दूसरे को एक लात जमा दी..
एक साथ हुए हमले से वो दोनो लड़खड़ा गये… इससे पहले की वो सम्भल पाते मेने उन दोनो की गर्दन अपने बाजुओं में कस ली…
आज मेरी भाभी के डिसिप्लिन द्वारा कराई गयी कशारत मेरे काम आरहि थी..
मेरे बाजुओं की पकड़ उनकी गर्दन पर इतनी मजबूत थी कि उनके गले की नसें फूलने लगी, उन्हें अपनी साँस अटकती सी महसूस हो रही थी.., दोनो के चेहरे लाल पड़ चुके थे…
मेने दाँत पीसते हुए कहा… बोलो.. क्यों मारना चाहते थे मुझे…
इससे पहले कि वो कोई जबाब दे पाते.. जीप में बैठा चौथा आदमी रिवॉल्वार लहराता हुआ मेरी तरफ आने लगा….…!
वो चौथा आदमी मेरी तरफ आते हुए गुर्राया – मे नही चाहता था, कि मुझे तेरे खून से हाथ रंगने पड़ें.. ये लोग ही तुझे संभाल लेंगे.. लेकिन तू तो कुछ ज़्यादा ही शातिर निकला…
वो चाकू वाला जिसकी नाक फट गयी थी… कराहते हुए बोला… अब बातों में समय बर्बाद मत करो जग्गा भाई.. उड़ा दो साले को, वरना कोई आ निकलेगा इधर, और सब गड़बड़ हो जाएगी....
उसने उसकी बात मानते हुए मुझे निशाना बना कर गोली चला दी… उसी क्षण मेने उनमें से एक को उसके निशाने के आगे कर दिया और गोली ने उसका भेजा उड़ा दिया…
वो रिवॉल्वार वाला हक्का-बक्का सा खड़ा अपने मारे हुए साथी को देख ही रहा था कि मेने दूसरे को उसके उपेर धकेल दिया… और वो दोनो एक दूसरे से उलझ गये…
इसी चक्कर में उसकी रिवॉल्वार का लीवर फिरसे दब गया और गोली उस दूसरे आदमी के पेट में घुस गयी… और वो भी ज़मीन पर पड़ा तड़फड़ाने लगा..
अपने दो दो साथियों का हश्र देख कर वो बुरी तरह भिन्ना गया, अपनी ही गोली से घायल साथी जो लगभग अंतिम साँसें गिन रहा था को एक तरफ धकेला, और गुस्से से भन्नाते हुए एक बार फिर मेरी तरफ पलटा…
लेकिन तब तक मे उसके सर पर पहुँच चुका था.. और उसकी रिवॉल्वार वाली कलाई थाम ली… उसकी कलाई पर मेरे हाथ की मजबूत पकड़ के आगे उसकी एक ना चली… और उसकी कलाई को मोड़ कर रिवॉल्वार की नाल उसकी कनपटी की तरफ कर दी…
मे गुर्राया – अब चला गोली हरामी…, फिरसे मे उसके कान के पास इतनी ज़ोर से चिल्लाया… चलाआ…नाअ…, डर के मारे उसकी उंगली ट्रिग्गर पर दब गयी… और रिवॉल्वार की गोली ने उसके सर के परखच्चे उड़ा दिए….
अब रिवॉल्वार मेरे हाथ में था… वो फटी नाक वाला अपने खून से सने सुर्ख चेहरे को लिए, सूखे पत्ते की तरह काँपते हुए मुझे ऐसे देख रहा था मानो उसके सामने कोई इंसान नही, भूत खड़ा हो…
वो बुरी तरह मिमियाते हुए बोला – म.म.म्मूँहेछोड़ दो…
मेने गुर्राते हुए सवाल किया – तो फिर बता किसने भेजा है तुम लोगों को…?
व.वउूओ… भानु प्रताप ने…,
मेने फिर सवाल किया… इस समय कहाँ मिलेगा वो..?
वो – ये मुझे नही पता… प्लीज़ मुझे छोड़ दो, मे तुम्हारे पाँव पड़ता हूँ.. ये कहते हुए वो सचमुच मेरे पैरों में लेट गया….
मेने उसे जीवित छोड़ना ही उचित समझा… जिससे वो उस हरामी के पिल्ले को जाकर सब कुछ बता सके…
रिवॉल्वार अपनी बेल्ट में खोंसा, बयके उठाई और किक मार कर बुलेट घर की ओर दौड़ा दी…!
घर पहुँचते – 2 मुझे अंधेरा हो चुका था,.. मेरे ज़मीन पर घिसटने से कपड़े जगह -2 से फट गये थे, और बदन पर भी कयि जगह खरौन्च आ गयी थी…
मेने उन गुण्डों की रिवॉल्वार को बुलेट की डिकी में डाला, और घर के अंदर चला गया….!
मेने लगभग चीखते हुए कहा – कॉन हो तुम लोग, और क्यों मारना चाहते हो मुझे..?
वो चाकू वाला गुर्राया… तेरी वजह से हमारे मालिक को बड़ा धक्का लगा है.. इसलिए अब तुझे तो मरना ही होगा…
मे – कॉन हैं तुम्हारा मलिक..?
वो – ये जानना तेरे लिए ज़रूरी नही है.. और वैसे भी मरने के बाद तू करेगा भी क्या जान कर…!
मे समझ गया कि ये ऐसे बताने वाला नही है…, अब मेने इनसे निपटने का मन ही मन फ़ैसला कर लिया था, …
वो मेरे पास आकर मुझसे दो फुट दूर रुक गया और अपने चाकू को संभाल कर वो अपना हाथ पीछे को ले गया…
इससे पहले की वो अपना चाकू वाला हाथ, मुझे मारने के लिए आगे लता… मेने अपनी बॉडी को उन दोनो गुण्डों की पकड़ के सहारे बॅलेन्स किया और उच्छल कर भड़ाक से अपने पैर की किक उसकी नाक पर जड़ दी…
किक इतनी सटीक और जोरदार थी… की वो अपनी जगह से 10 फुट दूर पीछे जाकर गिरा.. उसकी नाक बुरी तरह से फट गयी,… और उसका पूरा चेहरा उसीके खून से लाल होने लगा.
उसके गिरते ही वो दोनो कुछ हड़बड़ा गये… और उनकी पकड़ कुछ समय के लिए ढीली पड़ गयी, उसी का फ़ायदा उठाकर मेने अपने बाजुओं को ज़ोर से झटका दिया.. और अपने को उन दोनो की पकड़ से आज़ाद कर लिया…
वो मुझे दोबारा पकड़ने के लिए झप्टे… तो मेने दो कदम पीछे हट कर एक की कनपटी पर घूँसा जड़ दिया और दूसरे को एक लात जमा दी..
एक साथ हुए हमले से वो दोनो लड़खड़ा गये… इससे पहले की वो सम्भल पाते मेने उन दोनो की गर्दन अपने बाजुओं में कस ली…
आज मेरी भाभी के डिसिप्लिन द्वारा कराई गयी कशारत मेरे काम आरहि थी..
मेरे बाजुओं की पकड़ उनकी गर्दन पर इतनी मजबूत थी कि उनके गले की नसें फूलने लगी, उन्हें अपनी साँस अटकती सी महसूस हो रही थी.., दोनो के चेहरे लाल पड़ चुके थे…
मेने दाँत पीसते हुए कहा… बोलो.. क्यों मारना चाहते थे मुझे…
इससे पहले कि वो कोई जबाब दे पाते.. जीप में बैठा चौथा आदमी रिवॉल्वार लहराता हुआ मेरी तरफ आने लगा….…!
वो चौथा आदमी मेरी तरफ आते हुए गुर्राया – मे नही चाहता था, कि मुझे तेरे खून से हाथ रंगने पड़ें.. ये लोग ही तुझे संभाल लेंगे.. लेकिन तू तो कुछ ज़्यादा ही शातिर निकला…
वो चाकू वाला जिसकी नाक फट गयी थी… कराहते हुए बोला… अब बातों में समय बर्बाद मत करो जग्गा भाई.. उड़ा दो साले को, वरना कोई आ निकलेगा इधर, और सब गड़बड़ हो जाएगी....
उसने उसकी बात मानते हुए मुझे निशाना बना कर गोली चला दी… उसी क्षण मेने उनमें से एक को उसके निशाने के आगे कर दिया और गोली ने उसका भेजा उड़ा दिया…
वो रिवॉल्वार वाला हक्का-बक्का सा खड़ा अपने मारे हुए साथी को देख ही रहा था कि मेने दूसरे को उसके उपेर धकेल दिया… और वो दोनो एक दूसरे से उलझ गये…
इसी चक्कर में उसकी रिवॉल्वार का लीवर फिरसे दब गया और गोली उस दूसरे आदमी के पेट में घुस गयी… और वो भी ज़मीन पर पड़ा तड़फड़ाने लगा..
अपने दो दो साथियों का हश्र देख कर वो बुरी तरह भिन्ना गया, अपनी ही गोली से घायल साथी जो लगभग अंतिम साँसें गिन रहा था को एक तरफ धकेला, और गुस्से से भन्नाते हुए एक बार फिर मेरी तरफ पलटा…
लेकिन तब तक मे उसके सर पर पहुँच चुका था.. और उसकी रिवॉल्वार वाली कलाई थाम ली… उसकी कलाई पर मेरे हाथ की मजबूत पकड़ के आगे उसकी एक ना चली… और उसकी कलाई को मोड़ कर रिवॉल्वार की नाल उसकी कनपटी की तरफ कर दी…
मे गुर्राया – अब चला गोली हरामी…, फिरसे मे उसके कान के पास इतनी ज़ोर से चिल्लाया… चलाआ…नाअ…, डर के मारे उसकी उंगली ट्रिग्गर पर दब गयी… और रिवॉल्वार की गोली ने उसके सर के परखच्चे उड़ा दिए….
अब रिवॉल्वार मेरे हाथ में था… वो फटी नाक वाला अपने खून से सने सुर्ख चेहरे को लिए, सूखे पत्ते की तरह काँपते हुए मुझे ऐसे देख रहा था मानो उसके सामने कोई इंसान नही, भूत खड़ा हो…
वो बुरी तरह मिमियाते हुए बोला – म.म.म्मूँहेछोड़ दो…
मेने गुर्राते हुए सवाल किया – तो फिर बता किसने भेजा है तुम लोगों को…?
व.वउूओ… भानु प्रताप ने…,
मेने फिर सवाल किया… इस समय कहाँ मिलेगा वो..?
वो – ये मुझे नही पता… प्लीज़ मुझे छोड़ दो, मे तुम्हारे पाँव पड़ता हूँ.. ये कहते हुए वो सचमुच मेरे पैरों में लेट गया….
मेने उसे जीवित छोड़ना ही उचित समझा… जिससे वो उस हरामी के पिल्ले को जाकर सब कुछ बता सके…
रिवॉल्वार अपनी बेल्ट में खोंसा, बयके उठाई और किक मार कर बुलेट घर की ओर दौड़ा दी…!
घर पहुँचते – 2 मुझे अंधेरा हो चुका था,.. मेरे ज़मीन पर घिसटने से कपड़े जगह -2 से फट गये थे, और बदन पर भी कयि जगह खरौन्च आ गयी थी…
मेने उन गुण्डों की रिवॉल्वार को बुलेट की डिकी में डाला, और घर के अंदर चला गया….!