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लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस) complete

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अपनी माँ की बात सुनकर खुशी का धैर्य जबाब दे गया और वो पूरी ताक़त लगाकर चीखते हुए बोली – ये क्या बकवास है, कुछ तो शर्म करो मम्मी ! अपनी बेटी पर इतना घिनौना इल्ज़ाम लगाने से पहले एक बार भी नही सोचा कि आख़िर मेने वो क्यों किया…?

गुप्ता जी – तुम कहना क्या चाहती हो बेटी ? सच्चाई क्या है…?

खुशी – सच्चाई जानना चाहते है डेडी ! तो सुनिए...! पुछो इनसे मुझे ये ज़बरदस्ती कॉलेज भेजती रहती थी, बाबजूद इसके कि मेने इनसे कहा था कि मुझे कॉलेज में कुच्छ गुंडे परेशान करते है…पुछिये अपने लाड़ले बेटे से, इनको भी बोला था, लेकिन कुच्छ करना तो दूर ये उन लड़कों से बात करने से भी डरते थे…

फिर वकील भैया ने मेरी परेशानी का कारण पुछा, मे इन्हें नही बताना चाहती थी, लेकिन मेरी परेशानी देखकर इन्होने कहा – तू मुझे अपना भाई समझकर बोल..क्या प्राब्लम है… तो मेने इन्हें वो बात बताई, और जानते हैं डेडी उसके बाद क्या हुआ…?

इससे पहले कि खुशी कुच्छ बोले, मेने बीच में आते हुए कहा – अरे छोड़ ना खुशी, इतनी छोटी सी बात के लिए क्यों इतना बखेड़ा कर रही है…

मेने प्रिन्सिपल से शिकायत करके उन लड़कों को समझा दिया है, बस इतनी सी बात के लिए तू इतना एक्शिटेड हो गयी कि मेरे गले से लगकर मुझे थॅंक्स करने लगी…

अब इसमें सेठानी जी की भी क्या ग़लती है, उन्हें लगा कि तुम पता नही क्यों ऐसा कर रही हो…!

गुप्ता जी संकेत को डाँटते हुए बोले – ये काम तू नही कर सकता था, प्रिन्सिपल से शिकायत तो तू भी कर सकता था ना…!

संकेत नीची नज़र झुकाए हुए बोला – मेने कहा था उनसे, लेकिन वो लड़के बहुत बदमाश थे, नही माने बदले में उनकी हरकतें और बढ़ गयी…

गुप्तजी – तो फिर अब कैसे मान गये…?

खुशी भभक्ते हुए स्वर में बोल पड़ी – क्योंकि इस नौकर ने उन लड़कों की हड्डियाँ तोड़ के रख दी हैं, जिससे उसके मालिक की बेटी सकुन से कॉलेज जा सके..

सभी के मूह से एक साथ निकाला – क्य्ाआ……?????

खुशी – हां ! और इस काम में इनको भी कुच्छ हो सकता था, लेकिन इन्होने इस बात की परवाह ना करके, एक पराई लड़की के लिए ये ख़तरा मोल लिया, और मेरा सगा भाई, दुम दबाए रहा…

इसलिए मेने सच्चे दिल से इन्हें अपना भाई माना है, और अपने भाई के गले लगकर उसके गाल पर किस करना कॉन्सा गुनाह है डेडी… आप ही बताओ, सही मायने में भाई का फ़र्ज़ किसने निभाया है…

ये कहते कहते खुशी.. हिचकियाँ ले-लेकर रोने लगी… शांति देवी लज्जा के मारे अपना सर झुकाए खड़ी थी…

गुप्ता जी का पारा अपनी बेटी को रोते हुए देख कर चढ़ गया, और शायद जिंदगी में पहली बार उन्होने शांति के गाल पर एक तमाचा जड़ दिया…

शांति देवी को इस बात की कतयि आशा नही थी, कि उनका चूहा पति, एक शेरनी को तमाचा भी मार सकता है, सो वो गुर्राते हुए बोली – तुम्हारी इतनी हिम्मत्त….

तडाक्क्क…वो अपनी बात पूरी भी नही कर पाई, की एक और तमाचा पड़ा…और इसी के साथ गुप्ता जी किसी सोए हुए शेर के जागने के बाद वाले स्वर में बोले-

अब और एक शब्द नही…, बिना सोचे समझे इतना बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया तुमने, एक भले आदमी को ना जाने क्या-क्या बोलती रही…,

इस घर की मालकिन हो तो इसका ये मतलव तो नही कि किसी के साथ जैसा चाहो बर्ताव करो, और एक ये हैं जिन्होने हमारे उपर अनगिनत एहसान किए हैं,

आज हमारी बेटी की इज़्ज़त बचा कर तो इन्होने वो काम किया है जो तुम्हारे इस लाड़ले बेटे को करना चाहिए था,

उसका एहसान मानने की वजाय ना जाने क्या-2 बोलती रही..इन्हें जॅलील करती रही तुम..

फिर भी इनकी भलमांसाहत देखो, तुम्हें ग़लत नही ठहराया – अरे अब तो सुधर जाओ, और हरेक के साथ एक जैसा व्यवहार करना बंद करो…!

फिर वो मेरे सामने हाथ जोड़कर बोले – इसके व्यवहार के लिए हम तुमसे माफी माँगते हैं अंकुश…

मेने उनके हाथ पकड़ लिए और कहा – ये क्या कर रहे हैं आप, ये उनसे अंजाने में हुआ है, और इसमें उनकी अपनी बेटी की चिंता ही दिखाई देती है… प्लीज़ सर, आप माफी मत मांगिए, सेठानी जी के लिए मेरे मन में कोई ग़लत विचार नही हैं…

शायद शांति देवी को बात समझ आगयि थी, सो चुप चाप किसी मुजरिम की तरह सर झुकाए खड़ी रही,

दोनो बच्चे उन्हें उसी अवस्था में खड़ा छोड़ कर वहाँ से चले गये…

 
Happy Republic Day 2018:

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गुप्ता जी भी भुन-भुनाते हुए अपने काम में लग गये, तो फिर मेने भी वहाँ से सरकने में ही अपनी भलाई समझी…

और बिना किसी से कुच्छ कहे सुने मे बाहर की तरफ चल दिया…,

मेरे मुड़ते ही शांति देवी मेरे सामने आई, और हाथ जोड़कर बोली – अंकुश बेटा ! हो सके तो मुझे माफ़ कर देना…!

उनकी आँखों में पश्चाताप के आँसू थे, रुँधे गले से बोली – मे सच में बहुत बुरी हूँ, लेकिन मे भी क्या करूँ,

कोई समझाने वाला था ही नही, इन्होने कभी मुझे रोका-टोका नही, अपने पैसा कमाने में ही लगे रहे, तो जैसा मेरे मन में आया करती रही..!

मेने उनके हाथ पकड़ लिए और कहा – मे समझता हूँ, आंटी जी, आप बिल्कुल ग़लत नही हैं, बस स्वभाव थोड़ा तीखा है, इसलिए सबको ग़लत लगता है…!

सच मानिए मुझे आपकी बात का बुरा नही लगा, और इसमें थोड़ी सी ग़लती खुशी की भी है, उसे अपनी भावनाओं पर कंट्रोल नही रहा…!

शांति – नही बेटा ! वो तो बच्ची है, उसके मन में जो आया उसने कर दिया, लेकिन मे तो इतनी उमर गुजर चुकी हूँ, अभी तक अपने बच्चों को नही समझ पाई…!

पर अब बेटा मेरी एक विनती है, भगवान के लिए इसी तरह मेरे बच्चों का ख्याल बनाए रखना, मेरी वजह से हमें छोड़ मत जाना…!

मे – आप चिंता मत करो ! मे हमेशा इस परिवार के साथ खड़ा हूँ…!

बहुत – बहुत धन्यवाद बेटा, तुम सच में बहुत अच्छे इंसान हो, ये कहते हुए उनकी रुलाई फुट पड़ी और वो मेरे सीने से लग कर रोने लगी…..!

शांति देवी उपर से जितनी कड़क दिखती थी, आज मेरे सीने से लग कर रोते हुए देखकर मुझे लगा कि वो अंदर से कितनी कोमल हैं, उन्होने सच ही कहा था,

उनके इस स्वाभाव का मूल कारण भी कहीं ना कहीं गुप्ता जी की पैसे कमाने की धुन ही थी, जिसकी वजह से उन्होने अपने परिवार पर कोई ध्यान नही दिया…

मेने उन्हें चुप करते हुए कहा – आप शांत हो जाइए आंटी जी, प्लीज़ रोइए मत..

वजाय चुप होने के उन्होने मुझे और ज़ोर्से कस लिया और बोली - नही बेटा ! मुझे आज जी भरके रो लेने दो,

आज तक मे अपने इन आँसुओं को मुद्दत से अपने अंदर समेटे हुए थी, इन्हें बह जाने दो,

क्योंकि मेरे इस घर में आने के बाद से आज तक कोई मजबूत कंधा मिला ही नही जिसका सहारा पा कर मे अपने अंदर के गुबार को निकाल पाती…!

आज तुमने जो खुशी के लिए किया है, उसे देखकर मुझे लगने लगा कि मेरे अलावा भी कोई तो है, जो मेरे बच्चों का साथ दे सकता है…!

शांति देवी सीने से लगी मेरे कंधे को अपने आँसुओं से तर करती रही, मेने भी उन्हें अलग करने की कोशिश नही की, अच्छा है, आज इनके मन का गुबार जितना हो सके निकल जाए….

उनके अंदर का डर, गुस्सा, चिंता सब आज उनके आँसुओं के माध्यम से बाहर निकल रहे थे…

लेकिन…! अब उनके 38” के खरबूजे मुझे परेशान करने लगे थे, जो कि बुरी तरह से मेरे सीने में दबे हुए थे...,

उनको सांत्वना स्वरूप पीठ सहलाता हुआ मेरा हाथ अनायास ही उनकी कमर तक चला गया, मांसल जांघें मेरी जांघों से सटाती जा रही थी…!

मुझे लगने लगा कि ये एमोशन्स कोई दूसरा ही रूप लेते जा रहे हैं, इससे पहले कि मेरी पॅंट में क़ैद मेरा शेर जाग जाए, मेने उनके कंधे पकड़ कर अपने से अलग कर दिया,

उनके आँसू पोन्छे, और सांत्वना देकर मे वहाँ से चला आया ……........................!

अपने ऑफीस में आकर एक केस स्टडी करने लगा, तभी मेरे फोन की बेल बजने लगी, मेने कॉल करने वाले का नाम देखा, तो मेरे चहरे पर मुस्कान आगयि…

मेने कॉल पिक की और बोला – हेलो ! डॉक्टर. वीना, कैसी हैं आप ?

वो – ओ..हाई हॅंडसम ! तुम सूनाओ… लगता है जनाब हमें तो भूल ही गये…

मे – आप जैसी स्वपन सुंदरी भूलने वाली चीज़ थोड़ी है… मे तो आपके बुलावे के इंतेज़ार में ही था…

वो – हहहे….तो अब में चीज़ हो गयी… चलो कोई बात नही… इस चीज़ के बारे में क्या ख़याल है…

मे – हुकुम कीजिए मालिको…. बंदा हाजिर हो जाएगा….

वो – वैसे अभी फ्री हो क्या..?

मे – नही हैं, तो भी हो जाएँगे…. बोलिए कब और कहाँ आना है..?

वो – अभी आ जाओ मेरे घर… अकेली हूँ…

मे – क्यों ! आपके डॉक्टर साब कहाँ गये.. ? और आज हॉस्पिटल नही गयी…?

वो – मेरे हज़्बेंड फॉरिन गये हैं… किसी काम से एक हफ्ते में लौटेंगे… और आज हॉस्पिटल बंद रहेगा… कोई एमर्जेन्सी होगी तो ही खुलेगा…,

बस पुराने मरीज़ों को ही देखा जाएगा…, जो नर्सस संभाल लेंगी…

मे – ठीक है.. मे एक घंटे में हाज़िर हो जाता हूँ, आप अड्रेस बताइए…

वो – मे अभी मेसेज कर देती हूँ…जल्दी आना…

मे एक घंटे के बाद डॉक्टर. वीना के बंग्लॉ के सामने खड़ा था,

वाउ ! क्या शानदार बंग्लॉ था, लगता है काफ़ी दौलत कमाई है, दोनो ने मिलकर…

मेने मैन गेट की बेल बजाई…कुच्छ देर में एक मोटी सी अधेड़ औरत ने आकर गेट खोला, उसकी पहाड़ जैसी चुचिया… उसके गाउन को फाडे दे रहे थे…

मुझे देख कर वो बोली… किसकू मिलना है… ?

तभी पीछे से डॉक्टर. वीना की आवाज़ आई, जुली कॉन है…?

वो – पता नही मेम्साब ! कोई छोकरा सा है….

तब तक वीना ने अपने हॉल के गेट से ही मुझे देख लिया… और बोली – आने दो जली… इन्हें मेने ही बुलाया है…

वो मुझे अंदर लेकर वापस जाने को पलटी,… बाप रे…. इतनी बड़ी गान्ड…, ऐसा लगता था मानो दो बड़े-2 मटके उल्टे करके कमर से बाँध दिए हों…

वो उन्हें हिलाते हुए मेरे आगे – आगे चल दी… मेरी नज़र उसकी हिलती हुई भारी भरकम गान्ड पर ही टिकी थी…

मुझे देख कर डॉक्टर. वीना, वहीं खड़ी – 2 मुस्करा रही थी, जुली दूसरी तरफ चली गयी और मे वीना के साथ हॉल में आगया….

वीना चुटकी लेते हुए हस्कर बोली – क्या देख रहे थे..?

मे – बाप रे ! क्या गान्ड है इसकी… कैसे संभालती होगी इतने वजन को, उपर से इतनी भारी चुचियाँ….

वो मेरी बात सुन कर ठहाका लगा कर हँसने लगी… और बोली – लगता है… जूली की गान्ड पर मन आगया है तुम्हारा….!

मे हँसते हुए कहा – कोई पागल ही होगा… जो ऐसे माँस के लोथडे पर अपनी एनर्जी वेस्ट करेगा…

 
कुच्छ देर हम दोनो हँसते रहे.. फिर वो बोली – क्या लोगे, ठंडा, गरम…, कोई हार्ड या सॉफ्ट ड्रिंक…

मे – मुझे तो बस एक ही चीज़ की प्यास है इस समय…

वो मेरी बात को समझते हुए बोली – क्या…?

यहाँ हर चीज़ मौजूद है… तो मेने खड़े-2 ही, उसके चहरे को अपने हाथों में लेकर उसके होठों को चूम लिया…

इन रसीले होठों को छोड़ कर भला और रस पीना क्यों चाहेगा कोई…

वो – ये भी मिलेगा… थोड़ा बैठो, जल्दी तो नही है ना…, और ये कहकर उसने हाथ पकड़ कर सोफे पर बिठा लिया…

वैसे अब तक तुमने ये नही बताया कि तुम काम क्या करते हो..? उसने सवाल किया.

मे आड्वोकेट हूँ, और यहीं डिस्टिक कोर्ट में प्रॅक्टीस कर रहा हूँ…मेने कहा.

हम दोनो हॉल में पड़े मास्टर सोफे पर एक दूसरे से सटे हुए ही बैठे थे, उसने मेरी जाँघ सहला कर पुछा...

ओह्ह्ह…! तो वकील साब कैसी चल रही है आपकी वकालत…?

मेने भी उसकी एक चुचि को मसलते हुए जबाब दिया – ठीक ही है, धीरे – 2 गाड़ी पटरी पर आती जा रही है…

बातों – 2 में ही हम दोनो एक दूसरे के बदन को छेड़ते हुए गरम होने लगे…

उसने मेरा पॅंट खोल कर लंड बाहर निकाल लिया, और अपनी मुट्ठी में लेकर बोली – जब से तुम्हारा ये हथियार देखा है, सपने में भी मुझे यही दिखाई देता है…

ना जाने कितनी बार इसे सोच-सोच कर अपनी पुसी में फिंगरिंग कर चुकी हूँ… आज नही छोड़ूँगी इसे… आज तो इसका रस पीकर ही रहूंगी…

इतना बोलकर उसने उसे अपने मूह में ले लिया, और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी…

वीना एक झीने कपड़े की शॉर्ट मिडी पहने थी, जो उसके घुटनों तक ही थी…

सोफे पर बैठी वो झुक कर मेरा लॉडा चूस रही थी… मेने उसकी मिडी को उसकी गान्ड के उपर तक कर दिया और उसकी गद्देदार गान्ड को मसल्ने लगा…

उसकी छोटी सी पेंटी गान्ड की दरार में घुसी पड़ी थी…जिसे मेने साइड में करके.. उसकी गान्ड के सुराख में उंगली डाल दी…

वो अपनी गान्ड को इधर-उधर हिलाकर अपनी गान्ड के छेद से मेरी उंगली को निकालने की कोशिश करने लगी, लेकिन लंड मूह से नही निकलने दिया…

मेने उसकी मिडी को और उपर करके उसके सर के उपर से निकाल दिया… उतने समय के लिए मेरा लंड उसके मूह से बाहर आया…

वो अब ब्रा और पेंटी में थी……

मेने उसे पुछा – बेड रूम में चलें.. तो वो इठलाकर बोली – मुझे गोद में उठाकर ले चलो, तो ही जाउन्गि…

वो थोड़ी सी भारी तो थी, लेकिन मेने उसे आराम से उठा लिया और उसके बेडरूम में ले जाकर बेड पर पटक दिया…

सॉफ्ट गद्दे के उपर वो दो-तीन बार उपर-नीचे जंप हुई…

मेने भी अपने सारे कपड़े निकाल दिए और उसकी ब्रा और पेंटी को निकाल कर, पलंग पर लेट गया…

वो अपनी धरा सी गान्ड लेकर मेरे मूह पर बैठ गयी, फिर मेरे उपर लेट कर मेरा लंड फिर से मूह में ले लिया…

अब हम 69 की पोज़िशन में थे, वो मेरा लंड चूस रही थी, और मे उसकी चूत की खुदाई अपनी जीभ घुसा-घुसा कर करने लगा…

कभी उसकी चूत को दाँतों से काट लेता तो वो अपनी गान्ड को और ज़ोर से हिला-हिला कर मेरे मूह पर रगड़ देती…

10-15 मिनिट में ही हम दोनो एक दूसरे के मूह में झड गये…और अगल-बगल में लेट कर लंबी- 2 साँस भरने लगे…

मूह एक दूसरे के रस से सना हुआ था, तो फिरसे किस्सिंग में जुट गये… और अपने-2 रस का स्वाद बाँट लिया….

कुच्छ देर बाद हम फिरसे एक दूसरे से लिपट गये,

डॉक्टर वीना, जल्दी ही कमतूर होकर मेरा लंड लेने को बाबली सी हो गयी…

मेने उसकी गान्ड के नीचे दो पिल्लो रखे, और उसकी रसीली चूत में अपना मूसल पेल दिया…

शुरू-शुरू में उसे मेरा लंड अड्जस्ट करने में थोड़ी तकलीफ़ हुई, लेकिन फिर जल्दी ही मज़े लेकर चुदने लगी…

शाम तक मेने डॉक्टर. वीना के दोनो छेदो की जम कर खुदाई की… वो मेरे लंड की दीवानी हो गयी,…

सच में बहुत मज़ा देते हो तुम, किसी औरत को सॅटिस्फाइ करने की कला अच्छे से आती है तुम्हें.. वो मेरे बालों में अपनी उंगलिया घूमाते हुए बोली…

मेने कहा – मज़ा तो आया ना मेरे साथ सेक्स करके….?

बहुत…! मेरे हज़्बेंड ने कभी मुझे इतनी देर तक नही छोड़ा… और वैसे भी उनका लंड तुम्हारे से छोटा भी है,

इसलिए शुरू में थोड़ा हार्ड लगा मुझे इसे अपनी पुसी में लेने में…, वो मेरे लंड से खेलते हुए बोली..

हम दोनो अभी भी नंगे उसके बिस्तेर पर पड़े हुए थे… फिर वो उठी, बाथ रूम से फ्रेश होकर कॉफी बनाने चली गयी… इतने में मेने भी अपने कपड़े पहन लिए थे…

कॉफी का मग मुझे पकड़ते हुए वो बोली – अरे यार अंकुश !

एक बेचारी लड़की मेरे हॉस्पिटल में है, उसके साथ गॅंग रेप हुआ है, अब रेप करने वाले लड़के बड़े-2 घरों से हैं.. तो पोलीस भी उसकी कंप्लेंट नही ले रही…

तुम लॉयर हो, कुच्छ करो ना यार.. बेचारी के घरवाले भी बड़ी मुसीबत में हैं…

उनको धमकी भी मिल रही हैं लगातार.. कि अगर उन्होने पोलीस में रिपोर्ट करने की कोशिश की तो सारे परिवार को ख़तम करवा देंगे…

मेने कहा – चलो चलके देखते हैं, क्या हो सकता है…?

कॉफी ख़तम करके वो भी रेडी हो गयी… वो अपनी कार से और मे अपनी बुलेट से उसके हॉस्पिटल की तरफ चल दिए…!

 
राम लाल, मुनिसिपल कॉर्पोरेशन में चपरासी है, अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ, दो कमरों एक के छोटे से मकान में अपनी जिंदगी बसर कर रहा था…

बड़ी बेटी रेखा, कॉलेज में पढ़ती है, इस समय वो सेकेंड एअर की स्टूडेंट है, उमर अभी 20 पूरा ही किया था…

दूसरी बेटी प्राची 12थ में है, और सबसे छोटा एक बेटा, सुनील जो 9थ में पढ़ता है…

पाँच प्राणियों का ये परिवार राम लाल की छोटी सी पगार से ही चलता है, और इसी में सब लोग हसी खुशी जिंदगी बसर कर लेते थे…

गुणी पत्नी सरला देवी, अपने पति की आमदनी को सही ढंग से इस्तेमाल करके घर का खर्चा पूरा कर लेती थी, थोड़ा बहुत बचत करके घर के लोन की ईएमआई भी भर जाती थी…

बड़ी बेटी रेखा, पड़ोस के ही दो चार बच्चों को ट्यूशन देकर थोड़ा बहुत सहारा दे रही थी… सहारा भी क्या, बस समझ लो अपने कॉलेज का खर्चा निकाल लेती थी…

रेखा, मध्यम कद काठी, गोरे रंग और अच्छे नयन नक्स वाली एक आवरेज सी लड़की थी,

32-24-32 के फिगर के साथ उसमें इतना आकर्षण तो था, कि कॉलेज के लड़के उससे नज़दीकी रखने की कोशिश करते रहते थे…

लेकिन सरल स्वभाव और संस्कारी रेखा, अपने काम से काम रखती, घर से कॉलेज, कॉलेज से घर, बस यही उसका रुटीन रहता… ,

कॉलेज में उसकी ज़्यादा फ्रेंड्स भी नही थी…बस दो-चार लड़कियों से जस्ट हाई-हेलो हो जाती थी…

इसका बहुत बड़ा कारण था, उसका अपना घरेलू स्टेटस, जो उन दूसरी लड़कियों से मेल नही ख़ाता था…

शहर का नामी गिरामी गुंडा… नाम है उष्मान ख़ान… सभी उसे उस्मान भाई कह कर बुलाते हैं… ऐसा कोई ग़लत काम नही है, जो उसने अपने जीवन में ना किया हो…

किसी जमाने का एक टुच्छा सा गली का गुंडा, आज शहर का ड्रग माफ़िया था, शुरू- 2 में उसने पॉकेट मारी से लेकर छोटी- मोटी चोरियाँ करना, ऐसे कामों से शुरुआत की…

फिर वो लोगों को लूटने लगा, धीरे -2 और छोटे-मोटे गुंडे उससे जुड़ते गये और उसने देखते-2 एक बड़ा सा गॅंग खड़ा कर दिया…

पॉल्टिकल मर्डर, ज़मीन हथियाना ऐसे कामों से आगे बढ़ते हुए उसने ड्रग का धंधा, गैर क़ानूनी शराब और यहाँ तक की हथियारों की तस्करी भी करने लगा…

अब तो शहर के जाने माने पॉलिटीशियन, बुरॉकरटेस और बिल्डर्स भी उसकी मदद लेने लगे, और वक़्त आने पर वो उनकी मदद से अपने को बचाए भी रखता था…

जिस कॉलेज में रेखा पढ़ रही थी, उसी में उस्मान का बेटा असलम भी पढ़ता था…

वो गाहे बगाहे लड़कियों को छेड़ना, किसी को भी मारना पीटना उसके लिए आम सी बात थी..

असलम के दोस्तों की फेहरिस्त में भी अच्छे-2 परिवार के लड़के ही थे, जो कहीं ना कहीं उसके बाप के कारोबार में उसके सहभागी थे…

रेखा के बयान के मुतविक असलम ने कई बार उसको भी छेड़ा, पर वो बेचारी लहू का सा घूँट पीकर बस उस जैसे गुण्डों से किसी तरह अपने आपको बचाती रही…

एक दिन कॉलेज में फंक्षन था, सब उसमें बिज़ी थे…रेखा भी उस वक़्त कॉलेज में ही थी…साथ में एक रूबिया नाम की लड़की बैठी थी…

अचानक से रूबिया उससे बोली – चल रेखा कॅंटीन में चल कर कुच्छ ठंडा गरम पीते हैं…

रेखा ने बहुत मना किया, लेकिन वो नही मानी और उसे जबर्जस्ति खींच ले गयी…

रेखा को कॅंटीन की ब्रेंच पर बिठाकर वो रिसेप्षन से दो ठंडे की बॉटल ले आई, एक रेखा को दी और दूसरी उसने खुद ले ली…

ठंडा पीने के कुच्छ देर बाद ही रेखा का सर चकराने लगा…, जब उसने रूबिया को ये बात बताई.. तो वो बोली –

हो सकता है, तुझे कॉलेज के शोर शराबे की वजह से ऐसा फील हो रहा हो, चल में तुझे घर छोड़ देती हूँ…

उसने रेखा को रिक्शा में बिठाया और वहाँ से निकल गयी… रिक्शा में बैठने के कुछ देर बाद ही रेखा की आँखें बंद हो गयी और वो रूबिया की गोद में लुढ़क गयी….

जब उसे होश आया, तो उसने अपने आप को किसी फार्म हाउस के एक बड़े से कमरे में बेड पर लेटे हुए पाया…

उसका सर अभी भी चकरा रहा था, लेकिन शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना भरती जा रही थी….

अभी वो उस बेड से उतर कर खड़ी ही हुई थी…, कि उसने असलम को कमरे के अंदर आते हुए देखा…

रेखा असलम को देखकर चोंक पड़ी, और बोली – त्त्त्त्तुम्म्म…., मे यहाँ कैसे पहुँच गयी…?

असलम – हम लेकर आए हैं मेरी जान तुम्हें यहाँ…! चिंता मत करो.. यहाँ तुम्हें कोई तकलीफ़, नही होगी… बस थोड़ा सा हमें खुश कर देना…

इतना कह कर वो एक दरिंदगी वाली हँसी हँसते हुए उसके नज़दीक आया, और उसके बदन के साथ छेड़ खानी करने लगा…

रेखा ने अपने हाथ से उसका हाथ अपने बदन से दूर झटक दिया और बोली – मुझे जाने दो … मे ये सब नही कर सकती…

तब तक कमरे में उसके तीन साथी और आगये, जिनमें एक एमएलए रस बिहारी का भतीजा भी था.

वाकई दो को वो नही पहचानती थी…

 
उन चारों ने मिल कर उसे घेर लिया…, और उसके साथ ज़ोर जबर्जस्ती करने लगे…

वो उनसे बचने की कोशिश करती रही, लेकिन बच नही पा रही थी, कभी एक से बचती, तो दूसरा उसे पकड़कर उसके नाज़ुक अंगों से छेड़-छाड़ कर देता…

एक पल को वो भी उन्माद से भर जाती, शायद ये उसको दी गयी दवा का असर था, लेकिन दूसरे ही पल वो उनसे फिर बच निकलने के प्रयास करने लगती…

वो चीखती रही चिल्लाति रही… लेकिन उन दरिंदों ने उसकी एक ना सुनी, और उसके बदन से एक-एक करके सारे कपड़े नोच डाले…

फिर खेल शुरू हुआ दरिंदगी भरा…और वो चारों मिलकर उसे नोचते- खसोटते रहे.. उसके बदन पर कई जगह दाँतों के काटने से घाव बन गये, जो उसके गाल, थोड़ी, गले पर साफ साफ दिख रहे थे…

उन चारों ने उसको जी भर कर मसला, बुरी तरह से रौंदा, इस दौरान वो कई बार अपनी चेतना भी खो चुकी थी…

लेकिन वो नरभक्षी भेड़िए उसके बदन को तब तक भभोड़ते रहे, जब तक उनकी खुद की उत्तेजना शांत नही हो गयी…

फिर उन्होने उसके बेदम हो चुके शरीर को गाड़ी में डाला और हॉस्पिटल के सामने फूटपाथ पर फेंक कर भाग गये…!

फुटपाथ पर भी ना जाने वो कितनी देर तक पड़ी रही, फिर एक राह चलते आदमी ने हॉस्पिटल में आकर बताया, तब कहीं जाकर उसे अंदर लाए और उसका ट्रीटमेनेट शुरू किया…

उसकी दुख भरी कहानी सुन कर मेरे शरीर के रौंय खड़े हो गये…गुस्से से मेरा शरीर काँपने लगा……..!

मे उसके चेहरे और गर्दन के घावों को ही देख रहा था, कि तभी डॉक्टर. वीना

बोली – क्या देख रहे हो अंकुश… ये तो कुच्छ भी नही हैं…

इसके वाकी के शरीर के घावों को तो तुम देख भी नही सकोगे… इसके वक्षों को तो इस कदर दाँतों से काटकर घायल किया है.. कि बस क्या कहूँ…? बता भी नही सकती मे..

इसके निपल्स को तो बिल्कुल खा ही लिया है उन हराम्जादो ने…

पिच्छले 48 घंटों से ये इसी तरह दर्द से तड़प उठती है… अभी भी ज़्यादा हिलने डुलने की कोशिश में इसकी यौनी से खून बहने लगता है…

मेने वीना से कहा – इसकी रिपोर्ट मिल सकती है मुझे…?

उसने मुझे रिपोर्ट लाकर दी, जिसे मेने एक बार पढ़ा और फिर कृष्णा भैया को फोन लगा दिया…….!

कॉल पिक होते ही मेने कहा – मे आइ टॉक टू एसपी कृष्ण कांत शर्मा…?

वो – यस ! एसपी कृष्ण कांत हियर …

मे अंकुश बोल रहा हूँ भैया, क्या आप अभी सहयोग हॉस्पिटल आ सकते हैं…इट्स आन अर्जेन्सी …

वो – ईज़ सम थिंग सीरीयस…?

मे – यस ! मोर दॅन सीरीयस…

वो – ओके, आइ विल बी देयर, विदिन अवर…

एक घंटे के बाद भैया अपने दल-बल के साथ हॉस्पिटल पहुँच गये… मेने उन्हें सारी वस्तु स्थिति से अवगत कराया…

उन्होने रेखा का स्टेट्मेंट दर्ज कराया, फिर उसके पिता से बोले – राम लाल जी ! आपने कॉन से थाने में फरियाद की थी…

उसने उस थाने का नाम बताया, तो भैया ने उस थाने का नंबर लगाया, और उस इनस्पेक्टर को इम्मीडियेट तलब किया…

उसके आते ही उन्होने उसे बुरी तरह से लताड़ा… और वहीं खड़े-2 लाइन हाज़िर कर दिया… वो गिड गीडाता रहा… और बड़े – 2 नाम होने की वजह से रिपोर्ट ना लिखने का कारण बताया…

लेकिन उन्होने उसकी एक ना सुनी… वहाँ से हम सीधे कमिशनर ऑफीस पहुँचे…

जब उन दो लड़कों के नाम बताए, तो वो हड़बड़ा गये और बोले – जानते हो एसपी उन चार लड़कों में एक हमारा भी बेटा है…!

एसपी – क्या कह रहे हैं सर ! आपका लड़का रेपिस्ट में शामिल है…?

कमिश्नर- हां ! और इसलिए हम तुम्हें ये सलाह देंगे, कि तुम इस मामले को जैसे भी हो रफ़ा दफ़ा करो, लड़की के परिवार को हम संभाल लेंगे…

 
अब मेरा माथा ठनका, क्यों ये पोलीस इनस्पेक्टर रिपोर्ट नही लिख रहा था, बेचारे की इतनी औकात नही थी कि कमिशनर के बेटे को ही अरेस्ट कर सके…

मेने कहा - कमिशनर साब आप क़ानून के रखवाले हैं, और आप ही ऐसा करेंगे मुजरिमों को बचाने की कोशिश करेंगे, ये तो अपने पद के साथ गद्दारी हुई ना…

वो भड़क कर बोले – हू आर यू..? मुझे मत सिख़ाओ क़ानून के साथ क्या करना है क्या नही…!

मेने कहा – मे भी क़ानून का मुहाफ़िज़ हूँ, और क़ानून की इज़्ज़त करना मेरा धर्म है..!

कमिश्नर – हम इस मामले में तुम लोगों के साथ कोई बहस नही करना चाहते, बस एक बात हमारी सुन लो एसपी, इस केस में आगे बढ़ाने के लिए हम तुम्हें पेर्मिशन नही दे सकते…

मेने सीट से उठते हुए कहा - कोई बात नही सर, हम सीधे कोर्ट से ही अरेस्ट वॉरेंट निकलवा लेते हैं, चलो एसपी साब…

मेरी बात सुनकर कमिशनर चड्डा भड़क गया, और भैया को धमकाने लगा…

लुक एसपी, अगर तुमने मेरे बेटे या उसके दोस्तों को हाथ भी लगाया, तो समझ सकते हो तुम्हारा क्या हाल होगा…

मे – ज़्यादा से ज़्यादा ट्रान्स्फर ही कर सकते हैं आप, इससे ज़्यादा आपके हाथ में कुच्छ नही है..

इतना बोलकर हम उसकी और कोई बात बिना सुने वहाँ से निकल आए, मे भैया को लेकर सीधा जस्टीस ढीनगरा के पास पहुँचा….!

उनको सारी बात बताई, मेडिकल सर्टिफिकेट की बिना पर उन्होने तुरंत अरेस्ट वॉरेंट इश्यू कर दिया….

आनन फानन में उन तीन लड़कों को अरेस्ट कर लिया गया, चौथे का नाम उनसे उगलवा कर, उसे भी दबोच लिया, जो योगराज बिल्डर का बेटा था…

चार्ज शीट बना कर उन्हें दूसरे दिन ही कोर्ट में पेश किया गया…और पोलीस कस्टडी ले ली…

भैया ने अपने तौर पर तो अपना काम कर दिया था… जिसके लिए उन्हें कमिशनर से काफ़ी लताड़ भी सुननी पड़ी….!

लेकिन हवालात में उन लड़कों के साथ मुजरिमों जैसा वार्तब कतयि नही किया गया, हमारे निकलते ही पोलीस वाले किसी मेहमान की तरह उन हराम्जादो की सेवा में लग गये….

इस दौरान राम लाल पर काफ़ी दबाब भी डाला, यहाँ तक कि, उसको खरीदने की भी कोशिश की गयी…

लेकिन रेखा ने अपने बाप को साफ-2 बोल दिया, कि अगर उसने ऐसा कुच्छ भी करने का सोचा भी तो वो मौत को अपने गले लगा लेगी… लेकिन अपने जीते जी, उन कुत्तों को माफ़ नही करेगी…!

दो दिन बाद रेखा को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गयी, और वो लोग अपने घर आगये…

8 दिन की पोलीस रेमंड के दौरान उन लोगों ने जी तोड़ कोशिश की… वो कहावत है ना ! कि पैसों से यहाँ सब कुच्छ खरीदा जा सकता है…!

वही सब हुआ, राम लाल 10 लाख लेकर कोर्ट में मुकर गया… उसने रेखा को भी सच्चाई बयान नही करने दी,

पैसों के दम पर उन्होने सुनवाई भी अपने फेवर के जड्ज के यहाँ करा ली…जो उनका ही आदमी था…

सारे सबूत झूठे साबित कर दिए गये…, यहाँ तक कि मेडिकल रिपोर्ट भी बदलवा दी गयी, और उन चारों को बा-इज़्ज़त रिहा कर दिया गया…जिन्होने कभी किसी की इज़्ज़त नही की.

उसके दो दिन बाद ही रेखा ने अपने आपको पंखे से लटका लिया… और वो इस लालच से भरी दुनिया को छोड़ कर चली गयी…!

पैसों के वजन के आगे, राम लाल को बेटी का गम भी हल्का महसूस हुआ… जो उन लोगों ने बाद में और बढ़ा दिया था, और उसने इस मामले में अपनी चुप्पी साध ली….!

इस घटना के बाद भैया के संबंध उनकी ससुराल से और ज़्यादा खराब हो गये, और कामिनी भाभी उनका बंगला छोड़ कर अपने पिता के घर रहने चली गयी….

खैर ये तो अच्छा ही हुआ, क्योंकि वो भी उनसे छुटकारा पाना चाहते थे, सो उन्होने अपनी तरफ से पहल करते हुए, डाइवोर्स केस फाइल कर दिया….!

मेने उनके यहाँ कोर्ट के थ्रू उसका नोटीस भिजवा दिया…

राजनीति का एक नेगेटिव पहलू भी होता है, ये साले नेता लोग परिवारिक प्रतिष्ठा को हर हालत में बचाए रखने का यता संभव प्रयास करते हैं..

सो जैसे ही डाइवोर्स नोटीस उन्हें मिला… वो लोग हड़बड़ा गये, दौड़े-दौड़े भैया के पास आए… और अपनी इज़्ज़त की दुहाई देने लगे.

भैया ने कहा – कि पहल तो तुम्हरी तरफ से हुई है… मे तो इस बेमानी रिस्ते से निजात ही दिला रहा हूँ… तुम भी खुश और मे भी चैन से रह सकूँगा…

जब वो ज़्यादा मिन्नतें करने लगे तो भैया ने दो टुक जबाब देते हुए बोल दिया… कि अब जो भी बात करनी हो, मेरे लॉयर से करो…,

मेरे ऑफीस का अड्रेस तो मेरे लेटरहेड में था ही, सो दूसरे ही दिन कामिनी मेरे ऑफीस आ धमकी….!

मुझे सामने देख कर वो चोंक गयी… और बोली – अरे देवेर जी ! आप और यहाँ..?

मेने पहले उनको नमस्ते किया फिर आराम से बैठने को कहा… जब वो मेरे सामने बैठ गयी तो मेने कहा – हां ! ये मेरा ही ऑफीस है… कहिए क्या सेवा करूँ आपकी…

वो मायूसी वाले स्वर में बोली – आप तो हमसे इतने ज़्यादा नाराज़ हैं, कि घर पर भी आपने ऐसा व्यवहार किया… जैसे मे आपकी भाभी ना होकर कोई दुश्मन थी…

मे – अपने उस व्यवहार के लिए मे माफी भी माँग चुका था, और आपको वादा भी किया की आइन्दा आपको टच भी नही करूँगा…,

वो – वही तो रोना है, मे तो चाहती थी, कि आप मेरे साथ वो बार – बार करो… थोड़े से दर्द के बाद मज़ा भी तो था उसमें,

पर आपने मुझे कुच्छ कहने का मौका ही नही दिया…

मे – क्या…? क्या सच में आप उस बात से नाराज़ नही थी…?

वो – ऑफ कोर्स नोट !

मे – ओह.. सच में मेने कितनी बड़ी भूल करदी, जो आप जैसी मस्त हॉट भाभी से दूर हो गया…

कामिनी को लगा कि उसका तीर चल गया है, वो उसकी धार और बढ़ाने के लिए अपनी चेयर से उठकर मेरे पास आगयि और पीछे से मेरे गले में बाहें डाल कर बोली –

अभी भी कोन्सि देर हुई है देवेर जी, मे तो आप जैसे मर्द के लिए कुच्छ भी सहने को तैयार हूँ… प्लीज़ मुझे वो तकलीफ़ एक बार फिर से दो ना..!

इतना कह कर वो मेरी गोद में आकर बैठ गयी… और मेरे गाल को किस कर लिया…

 
मेने उसे गोद से उठने का इशारा किया, तो वो थोड़ी नाराज़ सी दिखी,…

मेने कहा – एक मिनिट उठिए तो सही, एकदम से कोई आगया तो लेने के देने पड़ जाएँगे…

मेरा तो अभी धंधा ठीक से जमा भी नही है, उससे पहले ही बंद हो जाएगा…

वो मेरी बात का मतलव समझ कर गोद से उतर गयी, मेने जाकर गेट लॉक किया और फिरसे उसे अपनी गोद में लेकर अपनी सीट पर बैठ गया….

वो इस समय एक लाल रंग का टॉप और लोंग स्कर्ट में थी, गोद में आते ही वो मेरे होठों पर टूट पड़ी…मे उसकी बड़ी-2 चुचियों को मसल्ने लगा…

अभी भी कामिनी ने अपने फिगर को अच्छे से मेनटेन किया हुआ था, शायद जिम वगैरह जाती होगी,.

चुचियों में वही सुडौलता, कड़क टाइट गान्ड, सपाट पेट…भैया शायद अच्छे से उसकी मस्ती को मिटा नही पाते होंगे ड्यूटी के बोझ की वजह से…

बहुत गर्मी चढ़ि थी उसको… वो किसी भूखी कुतिया की तरह मेरे होठों को खाए जा रही थी….

मेने भी उसकी चुचियों को मसल्ने में अपनी पूरी ताक़त लगा दी, मस्ती से उसका चेहरा लाल भबुका हो गया था…

मेने उसकी स्कर्ट में हाथ डालकर उसकी चूत को जैसे ही मसाला…, वो मेरा हाथ झटक कर मेरी गोद से उतर गयी…

मे आश्चर्य से उसको देखने लगा, सोचा- साली इसको अचानक से क्या हो गया..?

मेने उसे पुछा – क्या हुआ भाभी मेरे साथ मज़ा नही करना है…?

वो एक नशीली सी स्माइल करते हुए बोली – करना है ना ! लेकिन ज़रा खुलकर..

अच्छा तो ये बात है, ये कहकर मेने उसकी स्कर्ट को खींच दिया, अब वो टॉप और पैंटी में आ गयी…

मेने उसे फिरसे अपनी गोद में खींच लिया, और उसकी चूत को पैंटी के उपर से अपनी मुट्ठी में लेकर मसल दिया…

वो मस्ती से सिसकने लगी…, हइईई…मेरे...रजाआ…. तुम्हारे हाथों में तो जादू है….

थोड़ा सा ज्ञान अपने भाई को दे देते तो कितना अच्छा रहता… उूउउफफफ्फ़……उन्हें तो बस अपनी ड्यूटी ही दिखाई देती है.. अपनी बीवी की तो कोई परवाह ही नही…. आअहह….ससिईईई…

मेने उसकी पेंटी को एक ओर करके अपनी दो उंगलिया उसकी गीली चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा….

उसने लपक कर मेरा हाथ पकड़ा और अपनी चूत से हटा दिया, खड़े होकर एक मिनिट में ही अपने वाकी के सारे कपड़े निकाल फेंके, और फिर मेरे कपड़ों पर टूट पड़ी…

उसकी व्याकुलता देख कर मेने मन ही मन कहा… लगता है साली जाने कब्से लंड की भूखी है…

जब मेरे भी सारे कपड़े निकल गये तो मेने उसे टेबल के उपर लिटा दिया, और उसकी टाँगों को उठाकर उसकी गीली चूत में अपना सोटा सा लंड पेल दिया…

सर्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर………….से एक ही झटके में मेरा तीन-चौथाई लंड उसकी चूत में सरक गया… उसकी आँखें बंद हो गयी…. और एक मीठी सी कराह उसके होठों से फुट पड़ी…

आहह….भाभी…क्या टाइट चूत है तेरी…. अभी भी एकदम कसी कसी है….

तुम्हें अच्छी लगी….आअहह….फिर फाडो…. राजा….. बना दो इसका भोसड़ा…अब देर मत करो, आहह…. डाल दो पूरा…

उसकी उत्तेजक बातें सुनते ही मुझे जोश आ गया… और पूरी ताक़त से धक्का लगा दिया….

ढपाक से मेरे अंडे उसकी गान्ड से जा टकराए… जड़ तक मेरा लंड उसकी चूत में था, जो उसकी बच्चेदानी तक पहुँच चुका था….

आईईईईईई……….माआअ……थोड़ा धीरे ..देवरजीीइईईईई….आअहह…मज़ा आगया…मेरी जानन्न…

उसके होठ चूस्ते हुए मे उसकी चुचियों को मसल्ने लगा… और धक्के भी लगाता रहा….

मेरे तीन तरफ़ा हमले को वो ज़्यादा देर झेल नही पाई और उसकी चूत भल भला कर झड़ने लगी…, उसकी एडीया मेरी गान्ड के उपर कस गयीं….

मेने अब उसको नीचे खींच लिया और टेबल पर हाथ टिका कर उसको घोड़ी बना दिया..

उसकी चौड़ी गान्ड देख कर मेरा मन फिर ललचा गया…

भाभी ! गान्ड दोगि ?

वो – नही नही… ! तुम बहुत बेदर्दी से मारते हो… ऊस्दिन का दर्द अभी भी याद आजाता है…

मे – लेकिन अभी कुच्छ देर पहले तो आप बोली थी, वैसी ही तकलीफ़ दो मुझे.. फिर अब क्या हुआ…?

वो हँसते हुए बोली – हहहे… वो तो मेने वैसे ही तुम्हें उकसाने के लिए बोला था, और फिर मुझे घर भी तो जाना है,

लंगड़ी घोड़ी की तरह चलूंगी तो कोई भी पहचान लेगा कि छिनाल कहीं गान्ड मरा कर आई है…

मे भी इस समय उसे नाराज़ नही करना चाहता था, सो उसकी चूत में फिरसे लंड पेल कर ढका-धक चुदाई शुरू कर दी…

आधे घंटे में वो तीसरी बार झड रही थी, उसके साथ ही मेरा भी नल खुल गया और अपने वीर्य से उसकी चूत को भर दिया…

वो कुच्छ देर टेबल पर गाल टिकाए पड़ी रही, फिर अपनी पैंटी से ही अपनी चूत और मेरे लंड को सॉफ किया…, चिपचिपी पैंटी को अपने बॅग में डाल लिया, फिर हमने अपने -2 कपड़े पहन लिए….

उसके बाद मेने गेट अनलॉक किया, और फिर अपनी-2 सीट पर बैठ कर बातें करने लगे..

मे – हां भाभी ! अब कहिए… कैसे आना हुआ…?

वो कोर्ट के थ्रू मिले डाइवोर्स का नोटीस टेबल पर रखते हुए बोली – ये क्या है देवेर जी…?

मे – डाइवोर्स का नोटीस है, साइन कीजिए और अलग हो जाइए आप दोनो,

वैसे भी शुरुआत तो आपकी तरफ से हो ही चुकी है, भैया तो उस बेमानी रिस्ते से आपको आज़ाद ही कर रहे हैं बस…

वो – मेरे अपने डॅड के घर चले जाने से ही उन्होने ये सोच लिया कि हमारा रिस्ता ऐसे ही ख़तम हो जाएगा..?

मे – और भी बहुत सी बातें हैं, जो आपकी और उनकी सोच से मेल नही खाती…

अब यही ले लीजिए… आपकी शादी को इतने साल हो गये, अभी तक आप माँ नही बनना चाहती, ये भी एक बहुत बड़ी वजह है, जो दिखती है कि आप इस बंधन से आज़ादी चाहती हैं…

दूसरी वजह… जो चीज़ें उनको हर्ट करती हैं, आप जान बुझ कर वही काम करती हैं…

इन सबके बावजूद, अब आप बिना उनसे कुच्छ कहे सुने अपने पिता के घर जाकर रहने लगी…

तो इससे अच्छा है कि ये रिस्ता ही ख़तम करिए…और जी लीजिए अपनी –अपनी लाइफ, जैसे जीना चाहते हो…

वो कुच्छ देर चुप रही, फिर कुच्छ सोचकर बोली – मे मानती हूँ, कि मुझसे कुच्छ ग़लतियाँ हुई हैं… और हो रही हैं…

अब में तुम्हें अश्यूर करना चाहती हूँ.. कि आगे से उन्हें सुधारने की कोशिश ज़रूर करूँगी …मुझे बस एक मौका दिला दो…

और रही बात डॅड के पास जाकर रहने की, तो ये जानते हुए कि सन्नी मेरा चचेरा भाई है, उन्होने उसे अरेस्ट करवा दिया…

डेडी की इज़्ज़त का भी कोई ख्याल नही किया…

मे – तो आपका मतलव है कि वो बेगुनाह है,…?

वो – हम कॉन होते हैं, किसी को गुनेहगर या बेगुनाह कहने वाले, ये तो अदालत में ही साबित होना है, और हुआ भी… देखलो वो बेगुनाह साबित हुआ भी…

मे – देखिए भाभी हम यहाँ कॉन बेगुनाह है, या कॉन गुनहगार, इस विषय पर बहस करने नही बैठे,

बस मे यही कहना चाहता हूँ, कि उन्होने सिर्फ़ अपनी ड्यूटी की है…, अगर आप यही सब कहने आई हैं, तो सॉरी ! इस मामले में मे आपकी कोई मदद नही कर सकता…

और वैसे भी एक अच्छी पत्नी का कर्तव्य है, कि वो हर परिस्थिति में अपने पति के फ़ैसले के साथ खड़ी रहे… जो आपने कभी नही किया…

वो – चलो मान लिया कि मेने ग़लती की है, पर आगे से कोशिश करूँगी अपने को अच्छी पत्नी साबित कर सकूँ… बस इस बार किसी तरह से उनको समझाओ, और ये केस वापस लेलो…

मे – इसके लिए मे आपकी मदद कर सकता हूँ… लेकिन फिलहाल मामला गरम है, कुच्छ दिन और इंतेज़ार करो, सब ठीक हो जाएगा…

ये वादा करता हूँ, कि आप दोनो को फिरसे मिलने का भरसक प्रयास करूँगा…अगर आपने अच्छा बनके साबित कर दिखाया तो…

इसी तरह की कुछ और बातों के बाद वो फिर मिलते रहने का वादा करके चली गयी… और मे अपने अगले कदम को सोच कर मुस्करा उठा….!

मे किसी भी तरह से इन लोगों के बीच घुसना चाहता था, कोई रास्ता मुझे दिखाई नही दे रहा था, लेकिन अब ये सामने से ही मौका मेरे हाथ आता दिखाई देने लगा.

 
मे ठान चुका था, कि रेखा के क़ातिलों को उनके किए की सज़ा तो देकर ही रहूँगा, जो रास्ता मुझे अब तक नही मिल पा रहा था, वो कामिनी के द्वारा मिलता दिखाई दे रहा था…

मेने उसे भैया से दोबारा संबंध सुधारने का आश्वासन देकर अपने जाल में फँसा लिया था, अब वो मेरे खिलाफ कभी सोच भी नही सकेगी…

उसका मुख्य कारण था, अपने बाप की पोलिटिकल इमेज बचाना….!

मेने अपने एक आदमी को उसके पीछे लगा दिया, वो कहाँ जाती है, क्या करती है, किसके साथ उठना बैठना है…!

वो ग़लत कामों में लिप्त है, ये मुझे हिंट मिल चुकी थी…, अब कितनी अंदर तक है ये जानना ज़रूरी था…

मेने अपना आदमी उसके पीछे लगा तो दिया था, लेकिन इतनी बड़ी हस्ती के अंदर तक घुसकर ऐसे सीक्रेट निकाल पाना बड़ा मुश्किल काम था…

लेकिन कहते हैं ना कि जहाँ चाह होती है, वहाँ कोई ना कोई राह अवश्य निकल आती है, और ऐसी ही एक राह मुझे जल्दी ही मिलने वाली थी….

कुच्छ दिन रेखा वाले रेप केस में, मे इतना उलझ गया, की गुप्ता जी का एक टॅक्सेशन का मामला ही भूल गया,

वैसे तो वो अपना बिज़्नेस पूरी ईमानदारी से करते थे, समय पर टॅक्स भरना वो कभी नही भूलते थे,

लेकिन फिर भी एक घूसखोर बाबू ने जाली पेपर बनाकर कमिशनर की सील और फ़र्ज़ी साइन करके उनके ऑफीस में 25 लाख टॅक्स वकाया का नोटीस भिजवा दिया..!

गुप्ता जी ने ये मामला हल करने के लिए मुझे बोला, सारे पेपर चेक करने के बाद मे समझ गया कि ये सब फर्ज़ीबाड़ा है, तो मेने बाद में मिलने का सोच कर पेंडिंग रखा…

इसी बीच डॉक्टर. वीना से मुलाकात के बाद रेखा वाले रेप केस में बिज़ी हो गया, जिसमें उस बेचारी को इंसाफ़ तो नही मिला, उल्टे अपनी जान देनी पड़ गयी…

इस मामले से मे थोड़ा अपसेट भी था, कि इसी बीच उस बाबू का फोन भी गुप्ता जी के ऑफीस में आगया, उन्होने मुझे फोन करके याद दिलाया…

तब मुझे याद आया और उन्हें आज के आज ही ये मामला हल करने का आश्वासन देकर मे उस बाबू से मिलने उसके ऑफीस चल दिया…

स्मार्ट फोन मेरी जेब में ही था जिसे मेने उसके ऑफीस में एंटर होने से पहले ही वीडियो रेकॉर्डिंग मोड पर सेट कर दिया, अब बस ओके करने की देर थी और रेकॉर्डिंग स्टार्ट हो जानी थी,

मेने उसको सारे डीटेल समझाए, इतनी इनकम हुई, इतना पर्चेस हुआ, इतना ओवरहेड्स हुए, इतना इनकम टॅक्स जमा हुआ, इतना सेल्स टॅक्स जमा हुआ वो सारी वर्क शीट सील साइन के साथ उसको दिखाई…

उसने वो सारे पेपर एक साइड को सरका दिए, मे समझ गया, अब ये अपनी औकात पर आनेवाला है, सो चुपके से ओके बटन दबा दिया, रेकॉर्डिंग शुरू हो गयी…

वो बोला – देखिए वकील साब, अब इस बाबू की नौकरी से तो दो जून की रोटी ही हो पाती है, मे ये सब जानता हूँ कि गुप्ता जी जैसा क्लाइंट कभी धोखा धड़ी नही करता..

लेकिन कुच्छ अपना भी तो भला सोचिए, ये 25 लाख की रिकवरी का नोटीस है, कुच्छ आप भी कमा लो, और एक-दो % हमें भी दिलवा दो, मामला यहीं रफ़ा दफ़ा हो जाएगा…

वरना आप तो जानते ही हैं, एक बार मामला कोर्ट के हाथ में चला गया, तो हमारे ऑफीस को सारे ओरिजिनल डॉक्युमेंट्स चेंज करने में कितना वक़्त लगेगा…

आप लाख सबूत पेश करते रहिए कोई सुनने वाला नही है, 25 लाख खम्खा सरकार की तिजोरी में जमा करना ही पड़ेगा…, ना हमें कुच्छ हासिल होगा और ना आपको…

मे शांत होकर उसका सारा भाषण सुनता रहा, फिर वो आगे बोला – बोलिए, फिर क्या विचार है…!

उसे लाइन पर लाने के लिए इतना सबूत काफ़ी था, सो चुपके से मोबाइल की रेकॉर्डिंग ऑफ करते हुए कहा – देखिए साब मेरा उसूल है,

मे जिसके लिए भी काम करता हूँ, उसके साथ पूरी ईमानदारी निभाता हूँ, तो मे तो ये अलाउ नही करूँगा कि आपकी बात मान ली जाए…

रही बात केस करने की तो उसके लिए आप फ्री हैं, देख लेंगे अगर 25 लाख देना ही पड़ा तो सरकार को ही देंगे, कम से कम हमारा पैसा विकास के कामों तो लगेगा…

मेरी बात सुनकर वो चिड गया और झूठी गीदड़ भभकी देते हुए बोला – जुम्मा- जुम्मा चार दिन हुए हैं आपको वकालत शुरू किए हुए… ज़्यादा ईमानदारी मत दिखाओ, वरना लेने के देने पड़ सकते हैं…

हम जैसे बाबुओं के चक्कर में पड़कर अच्छे-अच्छे अपनी वकालत भूल जाते हैं…! मे फिर कहता हूँ, मेरी बात मानिए और आप भी थोड़ा बहुत कमा लीजिए…

गुप्ता जैसी मोटी मुर्गी से दो-चार अंडे ले भी लोगे तो भी उसको कोई फरक नही पड़ने वाला…!

मे - लेकिन मुझे तो फ़र्क पड़ता है, मे अपने जमीर को नही मार सकता, और रही बात पैसे कमाने की, तो गुप्ता जी मुझे बिना माँगे ही इतना दे देते हैं, कि मुझे ऐसे कामों की ज़रूरत ही नही पड़ती…

मेरी बात से वो और ज़्यादा चिढ़ गया और ठंडे से लहजे में बोला – तो नही मानेंगे आप, ठीक है फिर कोर्ट में ही मिलते हैं…!

मे – शायद मुझे इतनी दूर जाने की ज़रूरत ही ना पड़े, हो सकता है कमिशनर साब के ऑफीस में ही बात बन जाए…!

मेरी बात सुनकर वो चोंक गया…, मेने टेबल पर अपने दोनो हाथ रख कर उसकी तरफ झुकते हुए बोला – वैसे कितने बच्चे हैं आपके…?

बाबू – बच्चों से क्या मतलव है तुम्हारा…?

मे – उनका भविश्य सुरक्षित कर लिया है या उसी के लिए रिश्वत माँग-माँग कर पैसे जमा कर रहे हो…!

ऐसा ना हो नौकरी चले जाने पर बेचारे दर-दर भटकते फिरें…

बाबू – धमकी दे रहे हो, जाओ जाकर कमिशनर साब से शिकायत करदो, कोई सबूत नही है कि मेने तुमसे पैसे माँगे हैं…

मे – जानते हो मे कमिशनर साब के ही पास क्यों जा रहा हूँ..?

उसने सवालिया नज़रों से मुझे घूरा…जैसे पूछना चाहता हो कि क्यों..?

मेने आगे कहा – क्योंकि मे तुम्हारे बच्चों का बुरा नही चाहता, कमिशनर साब ज़्यादा से ज़्यादा तुम्हें कुच्छ दिनों के लिए सस्पेंड ही करेंगे…

लेकिन अगर मामला कोर्ट में चला गया ना, तो हो सकता है, रिश्वत माँगने के जुर्म में हमेशा के लिए नौकरी चली जाए और साथ में जैल भी हो सकती है…

वो भड़कते हुए बोला – क्या सबूत है तुम्हारे पास कि मेने तुमसे रिश्वत माँगी है…!

 
मेने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा – लो देखो, ये कहकर मेने मोबाइल की क्लिप उसके सामने चला दी…!

देखते ही उसका शरीर डर से थर-थर काँपने लगा, गिरगिट की तरह फ़ौरन रंग बदलते हुए मेरे पैर पकड़ लिए और गिडगिडाकर बोला –

मुझे माफ़ करदो वकील साब, प्लीज़ ये सबूत किसी को मत दिखाना वरना मेरे बच्चे भूखे मार जाएँगे… रहम करो मुझ पर…!

मे – वादा करो, आइन्दा कोई ग़लत रास्ते से पैसा कमाने की कोशिश नही करोगे…

वो – मे वादा करता हूँ, आइन्दा ऐसा काम कभी नही करूँगा…!

उसने वो सारे फर्जी पेपर मेरे सामने फाड़कर डस्टविन में डाल दिए, मे उसे सबक सिखाकर उसके ऑफीस से बाहर आ गया….!

करने को तो और बहुत कुच्छ हो सकता था, लेकिन उसके बाल-बच्चों का सोचकर मेने उसे धमका कर ईमानदारी पर चलने के लिए मजबूर कर दिया था…

और ये मेरा उसूल रहा है, कि पापी को मत मारो, हो सके तो उसके अंदर के पाप को ख़तम करो, जिससे वो पाप करे ही नही..

वहाँ से सीधा गुप्ता जी के ऑफीस पहुँचा, पता चला वो किसी साइट विज़िट को निकल गये थे, उन्हें फोन करके बता दिया कि मामला निपट गया है, कल घर आकर मिलता हूँ..…!

दूसरे दिन जब सुबह मे उनके घर पहुँचा, हमेशा की तरह वो पूजा में ही थे, हॉल में सेठानी नज़र आई, जो मुझे देखकर खुश हो गयी, और बड़े अपनत्व भाव से मेरी आव-भगत की…

सेठानी – सेठ जी तो अभी पूजा में है, तब तक तुम खुशी से मिल लो, बहुत याद करती रहती है तुम्हें, हर समय तुम्हारी ही बातें रहती हैं उसकी ज़ुबान पर…

मे – अभी वो कॉलेज नही गयी…

सेठानी – नही, अभी वो अपने रूम में तैयार ही हो रही होगी, जाकर मिल लो…

मे खुशी के रूम में जाने के लिए सीडीयों की तरफ बढ़ गया, मेरे पीछे सेठानी के चेहरे पर एक गहरी मुस्कान तार उठी, जिसे मे नही देख पाया…!

खुशी के रूम का दरवाजा ढलका हुआ ही था…मेरे हल्के से दबाब से वो खुल गया, उसके बेड पर उसके नाइट के कपड़े बिखरे पड़े थे, लेकिन वो कहीं नज़र नही आ रही थी…

मेने धीरे से उसे आवाज़ दी, लेकिन कोई जबाब नही आया, सोचा शायद बाथरूम में होगी, बाद में मिल लूँगा, ये सोच कर मे जैसे ही पलटा की बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज़ आई…

मेने पलटकर बाथरूम की तरफ देखा, वो नहा कर बाथरूम से बाहर ही आ रही थी, इस समय उसके मांसल बदन पर मात्र एक टॉवेल लिपटा हुआ था..…

उसकी तरफ ज़्यादा ध्यान ना देकर मे वहाँ से निकलने लगा, तो पीछे से खुशी की आवाज़ सुनाई दी…!

अरे अंकुश भैया आप, आओ ना, चल क्यों दिए…?

मे – नही ! तू तैयार होज़ा मे नीचे ही हूँ, इतना कहकर मे फिर से कमरे के गेट की तरफ बढ़ा, तब तक वो मेरे पास तक आगयि, और पीछे से मेरा हाथ पकड़ कर बोली…

आप थोड़ी देर बैठो तो सही, मे दो मिनिट में तैयार हो जाउन्गि, फिर बात करते हैं… मुझे आपसे बहुत ज़रूरी काम है…

उसके हाथ पकड़ते ही मे उसकी तरफ पलटा, अब वो अपने मांसल बदन पर मात्र एक तौलिया लपेटे हुए, मेरे एकदम नज़दीक ठीक मेरी नज़रों के सामने थी…,

ना चाहते हुए मेरी नज़र उसके महकते बदन पर ठहर गयी…, मुझे यूँ अपने बदन को निहारते देख वो मंद-मंद मुस्करा रही थी…!

उसके गोल, सुडौल उमर से बड़ी चुचिया 1/3 से ज़्यादा तौलिया के बाहर थी, जिनपर उसके गीले बालों से टपकते पानी की बूँदें मोतियों के समान चमक रही थी..

उसके दूधिया उभारों को देख कर मेरे मन में हलचल सी होने लगी, मुझे लगा कि अगर एक पल और मे इन्हें देखता रहा, तो कहीं अपना संयम खोकर इन मोतियों जैसी चमाति पानी की बूँदों को चाट ना लूँ…!

सो फ़ौरन मेने अपनी नज़र नीचे झुका ली, लेकिन कहते हैं ना कि, आसमान से टपके और खजूर में अटके…!

जैसे ही मेरी नज़र नीचे को हुई, कि उसकी मोटी-मोटी केले के तने जैसी एकदम चिकनी गोरी जांघों पर जा टिकी, जो तौलिया से मात्र उसके यौनी प्रदेश को ढकने के बाद मुश्किल से 4-6” नीचे तक ही धकि हुई थी…,

एकदम गोलाई लिए उसकी जांघें इतनी सुडौल थी, क़ी फट की वजह से उसके घुटनों की डिस्क भी पता नही चल रही थी कि हैं भी या नही…! एकदम कॉनिकल उसकी टाँगें..

देखकर ही मेरा लंड खड़ा होने लगा…,

 
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