S
StoryPublisher
Guest
अपनी माँ की बात सुनकर खुशी का धैर्य जबाब दे गया और वो पूरी ताक़त लगाकर चीखते हुए बोली – ये क्या बकवास है, कुछ तो शर्म करो मम्मी ! अपनी बेटी पर इतना घिनौना इल्ज़ाम लगाने से पहले एक बार भी नही सोचा कि आख़िर मेने वो क्यों किया…?
गुप्ता जी – तुम कहना क्या चाहती हो बेटी ? सच्चाई क्या है…?
खुशी – सच्चाई जानना चाहते है डेडी ! तो सुनिए...! पुछो इनसे मुझे ये ज़बरदस्ती कॉलेज भेजती रहती थी, बाबजूद इसके कि मेने इनसे कहा था कि मुझे कॉलेज में कुच्छ गुंडे परेशान करते है…पुछिये अपने लाड़ले बेटे से, इनको भी बोला था, लेकिन कुच्छ करना तो दूर ये उन लड़कों से बात करने से भी डरते थे…
फिर वकील भैया ने मेरी परेशानी का कारण पुछा, मे इन्हें नही बताना चाहती थी, लेकिन मेरी परेशानी देखकर इन्होने कहा – तू मुझे अपना भाई समझकर बोल..क्या प्राब्लम है… तो मेने इन्हें वो बात बताई, और जानते हैं डेडी उसके बाद क्या हुआ…?
इससे पहले कि खुशी कुच्छ बोले, मेने बीच में आते हुए कहा – अरे छोड़ ना खुशी, इतनी छोटी सी बात के लिए क्यों इतना बखेड़ा कर रही है…
मेने प्रिन्सिपल से शिकायत करके उन लड़कों को समझा दिया है, बस इतनी सी बात के लिए तू इतना एक्शिटेड हो गयी कि मेरे गले से लगकर मुझे थॅंक्स करने लगी…
अब इसमें सेठानी जी की भी क्या ग़लती है, उन्हें लगा कि तुम पता नही क्यों ऐसा कर रही हो…!
गुप्ता जी संकेत को डाँटते हुए बोले – ये काम तू नही कर सकता था, प्रिन्सिपल से शिकायत तो तू भी कर सकता था ना…!
संकेत नीची नज़र झुकाए हुए बोला – मेने कहा था उनसे, लेकिन वो लड़के बहुत बदमाश थे, नही माने बदले में उनकी हरकतें और बढ़ गयी…
गुप्तजी – तो फिर अब कैसे मान गये…?
खुशी भभक्ते हुए स्वर में बोल पड़ी – क्योंकि इस नौकर ने उन लड़कों की हड्डियाँ तोड़ के रख दी हैं, जिससे उसके मालिक की बेटी सकुन से कॉलेज जा सके..
सभी के मूह से एक साथ निकाला – क्य्ाआ……?????
खुशी – हां ! और इस काम में इनको भी कुच्छ हो सकता था, लेकिन इन्होने इस बात की परवाह ना करके, एक पराई लड़की के लिए ये ख़तरा मोल लिया, और मेरा सगा भाई, दुम दबाए रहा…
इसलिए मेने सच्चे दिल से इन्हें अपना भाई माना है, और अपने भाई के गले लगकर उसके गाल पर किस करना कॉन्सा गुनाह है डेडी… आप ही बताओ, सही मायने में भाई का फ़र्ज़ किसने निभाया है…
ये कहते कहते खुशी.. हिचकियाँ ले-लेकर रोने लगी… शांति देवी लज्जा के मारे अपना सर झुकाए खड़ी थी…
गुप्ता जी का पारा अपनी बेटी को रोते हुए देख कर चढ़ गया, और शायद जिंदगी में पहली बार उन्होने शांति के गाल पर एक तमाचा जड़ दिया…
शांति देवी को इस बात की कतयि आशा नही थी, कि उनका चूहा पति, एक शेरनी को तमाचा भी मार सकता है, सो वो गुर्राते हुए बोली – तुम्हारी इतनी हिम्मत्त….
तडाक्क्क…वो अपनी बात पूरी भी नही कर पाई, की एक और तमाचा पड़ा…और इसी के साथ गुप्ता जी किसी सोए हुए शेर के जागने के बाद वाले स्वर में बोले-
अब और एक शब्द नही…, बिना सोचे समझे इतना बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया तुमने, एक भले आदमी को ना जाने क्या-क्या बोलती रही…,
इस घर की मालकिन हो तो इसका ये मतलव तो नही कि किसी के साथ जैसा चाहो बर्ताव करो, और एक ये हैं जिन्होने हमारे उपर अनगिनत एहसान किए हैं,
आज हमारी बेटी की इज़्ज़त बचा कर तो इन्होने वो काम किया है जो तुम्हारे इस लाड़ले बेटे को करना चाहिए था,
उसका एहसान मानने की वजाय ना जाने क्या-2 बोलती रही..इन्हें जॅलील करती रही तुम..
फिर भी इनकी भलमांसाहत देखो, तुम्हें ग़लत नही ठहराया – अरे अब तो सुधर जाओ, और हरेक के साथ एक जैसा व्यवहार करना बंद करो…!
फिर वो मेरे सामने हाथ जोड़कर बोले – इसके व्यवहार के लिए हम तुमसे माफी माँगते हैं अंकुश…
मेने उनके हाथ पकड़ लिए और कहा – ये क्या कर रहे हैं आप, ये उनसे अंजाने में हुआ है, और इसमें उनकी अपनी बेटी की चिंता ही दिखाई देती है… प्लीज़ सर, आप माफी मत मांगिए, सेठानी जी के लिए मेरे मन में कोई ग़लत विचार नही हैं…
शायद शांति देवी को बात समझ आगयि थी, सो चुप चाप किसी मुजरिम की तरह सर झुकाए खड़ी रही,
दोनो बच्चे उन्हें उसी अवस्था में खड़ा छोड़ कर वहाँ से चले गये…
गुप्ता जी – तुम कहना क्या चाहती हो बेटी ? सच्चाई क्या है…?
खुशी – सच्चाई जानना चाहते है डेडी ! तो सुनिए...! पुछो इनसे मुझे ये ज़बरदस्ती कॉलेज भेजती रहती थी, बाबजूद इसके कि मेने इनसे कहा था कि मुझे कॉलेज में कुच्छ गुंडे परेशान करते है…पुछिये अपने लाड़ले बेटे से, इनको भी बोला था, लेकिन कुच्छ करना तो दूर ये उन लड़कों से बात करने से भी डरते थे…
फिर वकील भैया ने मेरी परेशानी का कारण पुछा, मे इन्हें नही बताना चाहती थी, लेकिन मेरी परेशानी देखकर इन्होने कहा – तू मुझे अपना भाई समझकर बोल..क्या प्राब्लम है… तो मेने इन्हें वो बात बताई, और जानते हैं डेडी उसके बाद क्या हुआ…?
इससे पहले कि खुशी कुच्छ बोले, मेने बीच में आते हुए कहा – अरे छोड़ ना खुशी, इतनी छोटी सी बात के लिए क्यों इतना बखेड़ा कर रही है…
मेने प्रिन्सिपल से शिकायत करके उन लड़कों को समझा दिया है, बस इतनी सी बात के लिए तू इतना एक्शिटेड हो गयी कि मेरे गले से लगकर मुझे थॅंक्स करने लगी…
अब इसमें सेठानी जी की भी क्या ग़लती है, उन्हें लगा कि तुम पता नही क्यों ऐसा कर रही हो…!
गुप्ता जी संकेत को डाँटते हुए बोले – ये काम तू नही कर सकता था, प्रिन्सिपल से शिकायत तो तू भी कर सकता था ना…!
संकेत नीची नज़र झुकाए हुए बोला – मेने कहा था उनसे, लेकिन वो लड़के बहुत बदमाश थे, नही माने बदले में उनकी हरकतें और बढ़ गयी…
गुप्तजी – तो फिर अब कैसे मान गये…?
खुशी भभक्ते हुए स्वर में बोल पड़ी – क्योंकि इस नौकर ने उन लड़कों की हड्डियाँ तोड़ के रख दी हैं, जिससे उसके मालिक की बेटी सकुन से कॉलेज जा सके..
सभी के मूह से एक साथ निकाला – क्य्ाआ……?????
खुशी – हां ! और इस काम में इनको भी कुच्छ हो सकता था, लेकिन इन्होने इस बात की परवाह ना करके, एक पराई लड़की के लिए ये ख़तरा मोल लिया, और मेरा सगा भाई, दुम दबाए रहा…
इसलिए मेने सच्चे दिल से इन्हें अपना भाई माना है, और अपने भाई के गले लगकर उसके गाल पर किस करना कॉन्सा गुनाह है डेडी… आप ही बताओ, सही मायने में भाई का फ़र्ज़ किसने निभाया है…
ये कहते कहते खुशी.. हिचकियाँ ले-लेकर रोने लगी… शांति देवी लज्जा के मारे अपना सर झुकाए खड़ी थी…
गुप्ता जी का पारा अपनी बेटी को रोते हुए देख कर चढ़ गया, और शायद जिंदगी में पहली बार उन्होने शांति के गाल पर एक तमाचा जड़ दिया…
शांति देवी को इस बात की कतयि आशा नही थी, कि उनका चूहा पति, एक शेरनी को तमाचा भी मार सकता है, सो वो गुर्राते हुए बोली – तुम्हारी इतनी हिम्मत्त….
तडाक्क्क…वो अपनी बात पूरी भी नही कर पाई, की एक और तमाचा पड़ा…और इसी के साथ गुप्ता जी किसी सोए हुए शेर के जागने के बाद वाले स्वर में बोले-
अब और एक शब्द नही…, बिना सोचे समझे इतना बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया तुमने, एक भले आदमी को ना जाने क्या-क्या बोलती रही…,
इस घर की मालकिन हो तो इसका ये मतलव तो नही कि किसी के साथ जैसा चाहो बर्ताव करो, और एक ये हैं जिन्होने हमारे उपर अनगिनत एहसान किए हैं,
आज हमारी बेटी की इज़्ज़त बचा कर तो इन्होने वो काम किया है जो तुम्हारे इस लाड़ले बेटे को करना चाहिए था,
उसका एहसान मानने की वजाय ना जाने क्या-2 बोलती रही..इन्हें जॅलील करती रही तुम..
फिर भी इनकी भलमांसाहत देखो, तुम्हें ग़लत नही ठहराया – अरे अब तो सुधर जाओ, और हरेक के साथ एक जैसा व्यवहार करना बंद करो…!
फिर वो मेरे सामने हाथ जोड़कर बोले – इसके व्यवहार के लिए हम तुमसे माफी माँगते हैं अंकुश…
मेने उनके हाथ पकड़ लिए और कहा – ये क्या कर रहे हैं आप, ये उनसे अंजाने में हुआ है, और इसमें उनकी अपनी बेटी की चिंता ही दिखाई देती है… प्लीज़ सर, आप माफी मत मांगिए, सेठानी जी के लिए मेरे मन में कोई ग़लत विचार नही हैं…
शायद शांति देवी को बात समझ आगयि थी, सो चुप चाप किसी मुजरिम की तरह सर झुकाए खड़ी रही,
दोनो बच्चे उन्हें उसी अवस्था में खड़ा छोड़ कर वहाँ से चले गये…