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"मैं तुझे यर्फीन नहीं दिलाऊंगा...जानता हैं क्यों...?" राज सपाट स्वर में बोला-"इसलिए कि मरने के बाद तुझे यकीन हो जाएगा।"
"न...न...नहीं।" भय से उसकी आंखें फैल गईं।
"पेशेवर हत्यारा है न तू?"
"नहीं-नहीं...मुझे मत मारो। मैं मरना नहीं चाहता" लम्बोतरे चेहरे वाले की हालत उस बकरे जैसी थी जो कसाई के सामने पहुंच चुका था।
"मौत से डर लग रहा है...लग रहा है न?"
"म...मैं हाथ जोड़ता हूं"
"तू इतना क्रूर है कि न जाने कितने लोगों को तूने हाथ जोड़ने का अवसर भी नहीं दिया होगा। मैंने तुझे वो अवसर दे दिया...अब तू गोली का दर्द । सहकर देख...देख कितना दर्द होता है।" राज ने माउजर का ट्रेगर दबाया। गोली उसके पेट में लगी। वह आर्तनाद कर उठा। उसके दोनों हाथ अपने पेट के घाव पर जा पहुंचे।
"दर्द होता है?"
.
.
दूसरा फायर हुआ...गोली इस बार सीने के आसपास लगी।
इसी बीच पुलिस का कर्कश सायरन गूंज उठा। राज चौंक पड़ा।
उसने तेजी से नीचे छलांग लगाई और फिर वह दौड़ता हुआ निर्माणाधीन इमारत के पिछले भाग में होता हुआ दूसरी इमारत की ओर और अन्त में पहली इमारत की ओर निकल गया जिसमें कि निर्माण कार्य जारी था।
वह सुरक्षित भाग था, इस कारण उधर से निकलने में उसे कोई कठिनाई नहीं हुई।
__ पुलिस निर्माणधीन इमारत में होने वाले कांड की तफ्तीश में लगी रही। डाक्टर यही इंतजार करता रहा कि अब कोई पुलिस इंस्पेक्टर उसके नर्सिंग होम मैं दाखिल हो...तब दाखिल हो...लेकिन कुछ नहीं हुआ। कामरेड करीम को होश भी आ गया। मगर उसका स्टेटमेंट लेने कोई भाई पुलिसिया वहां नहीं पहुंचा।
अन्त में...।
राज ने करीम को जय के हवाले कर दिया। जय को उसने आदेश दिया था कि करीम को ऐसी जगह ले जाकर रख दे जिस जगह सावन्त के आदमी न पहुंच सकें। जय ने वैसा ही किया।
राज डॉली के साथ चैम्बूर सिंधी कॉलोनी वापस लौट आया।
डिनर से पहले उसने तीन-चार पैग लगा लिए थे। डॉली का मूड बदलने की गरज से उसने थस्मअप में व्हिस्की मिलाकर उसे पिला दी थी। डिनर के बाद नशा रफ्तार पकड़ने लगा। फ्लैट में मौजूद टी. वी. में केबल का कनैक्शन था। राज ने जो चैनल लगाया उस पर डांस का प्रोग्राम चल रहा था।
डॉली ने भी उठकर डांस करना आरंभ कर दिया। उस समय उसने नीले रंग की सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी। बाल खुले थे और खुले बालों में सफेद बेला के फूलों का गजरा बंधा हुआ था। उसकी आखों में कामिनी जैसे भाव थे। नशे में उसे संगीत बेहद प्यारा लग रहा था। नृत्य करती उसकी छवि राज की आंखें में वासना की चिंगारियों का समावेश करती जा रही थी।
___ पहले तो वह डॉली के अंग-प्रत्यंगों को थिरकता हुआ देखता रहा। मन ही मन उसने डॉली के नृत्य की सराहना की। सचमुच वह बहुत अच्छा डांस कर रही थी।
अंत में नशे ने उसे एक ही झटके में डॉली के पास पहुंचा दिया और अगले ही पल वह उसकी बांहों में थी।
"ऐ जी..." डॉली उसके गले में बांहों का हार पहनाती हुई आसक्त मुद्रा में मुस्कराई-"क्या इरादा है
"इरादा नेक है तूफाने हमदम।" राज उसके अधरों पर चुम्बन अंकित करता हुआ बोला, साथ ही उसने अपने कदम बैडरूम की ओर बढ़ा दिए।
"कुछ पिला दिया है तुमने मुझे...मेरा सर घूम रहा है।"
"अभी सब ठीक हो जाएगा।"
"कसे?"
"बताता हूं...।"
"ऐई।"
"क्या है?"
.
"मुझे त म्हारी नीयत ठीक यहीं लग रही है...यू नाटी।"
राज ने उसे ऊपर से ही बैड पर छोड़ दिया।
"उई मां...मरी! मेरी कमर...!" वह चिल्लाई। उसने प्रतिरोध स्वरूप टांगें चलायीं तो साड़ी ऊपर उठती चली गई। उसकी गोरी पिंडलियों को वस्त्रविहीन हो जाना पड़ा। ऐसा वह क्रोध में कर रही थी, इसलिए हो रहा था या जान-बूझकर अपने सुडौल अंगों का प्रदर्शन कर राज को अधिक रिझाना चाह रही थी मालूम न हो सका।
"न...न...नहीं।" भय से उसकी आंखें फैल गईं।
"पेशेवर हत्यारा है न तू?"
"नहीं-नहीं...मुझे मत मारो। मैं मरना नहीं चाहता" लम्बोतरे चेहरे वाले की हालत उस बकरे जैसी थी जो कसाई के सामने पहुंच चुका था।
"मौत से डर लग रहा है...लग रहा है न?"
"म...मैं हाथ जोड़ता हूं"
"तू इतना क्रूर है कि न जाने कितने लोगों को तूने हाथ जोड़ने का अवसर भी नहीं दिया होगा। मैंने तुझे वो अवसर दे दिया...अब तू गोली का दर्द । सहकर देख...देख कितना दर्द होता है।" राज ने माउजर का ट्रेगर दबाया। गोली उसके पेट में लगी। वह आर्तनाद कर उठा। उसके दोनों हाथ अपने पेट के घाव पर जा पहुंचे।
"दर्द होता है?"
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दूसरा फायर हुआ...गोली इस बार सीने के आसपास लगी।
इसी बीच पुलिस का कर्कश सायरन गूंज उठा। राज चौंक पड़ा।
उसने तेजी से नीचे छलांग लगाई और फिर वह दौड़ता हुआ निर्माणाधीन इमारत के पिछले भाग में होता हुआ दूसरी इमारत की ओर और अन्त में पहली इमारत की ओर निकल गया जिसमें कि निर्माण कार्य जारी था।
वह सुरक्षित भाग था, इस कारण उधर से निकलने में उसे कोई कठिनाई नहीं हुई।
__ पुलिस निर्माणधीन इमारत में होने वाले कांड की तफ्तीश में लगी रही। डाक्टर यही इंतजार करता रहा कि अब कोई पुलिस इंस्पेक्टर उसके नर्सिंग होम मैं दाखिल हो...तब दाखिल हो...लेकिन कुछ नहीं हुआ। कामरेड करीम को होश भी आ गया। मगर उसका स्टेटमेंट लेने कोई भाई पुलिसिया वहां नहीं पहुंचा।
अन्त में...।
राज ने करीम को जय के हवाले कर दिया। जय को उसने आदेश दिया था कि करीम को ऐसी जगह ले जाकर रख दे जिस जगह सावन्त के आदमी न पहुंच सकें। जय ने वैसा ही किया।
राज डॉली के साथ चैम्बूर सिंधी कॉलोनी वापस लौट आया।
डिनर से पहले उसने तीन-चार पैग लगा लिए थे। डॉली का मूड बदलने की गरज से उसने थस्मअप में व्हिस्की मिलाकर उसे पिला दी थी। डिनर के बाद नशा रफ्तार पकड़ने लगा। फ्लैट में मौजूद टी. वी. में केबल का कनैक्शन था। राज ने जो चैनल लगाया उस पर डांस का प्रोग्राम चल रहा था।
डॉली ने भी उठकर डांस करना आरंभ कर दिया। उस समय उसने नीले रंग की सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी। बाल खुले थे और खुले बालों में सफेद बेला के फूलों का गजरा बंधा हुआ था। उसकी आखों में कामिनी जैसे भाव थे। नशे में उसे संगीत बेहद प्यारा लग रहा था। नृत्य करती उसकी छवि राज की आंखें में वासना की चिंगारियों का समावेश करती जा रही थी।
___ पहले तो वह डॉली के अंग-प्रत्यंगों को थिरकता हुआ देखता रहा। मन ही मन उसने डॉली के नृत्य की सराहना की। सचमुच वह बहुत अच्छा डांस कर रही थी।
अंत में नशे ने उसे एक ही झटके में डॉली के पास पहुंचा दिया और अगले ही पल वह उसकी बांहों में थी।
"ऐ जी..." डॉली उसके गले में बांहों का हार पहनाती हुई आसक्त मुद्रा में मुस्कराई-"क्या इरादा है
"इरादा नेक है तूफाने हमदम।" राज उसके अधरों पर चुम्बन अंकित करता हुआ बोला, साथ ही उसने अपने कदम बैडरूम की ओर बढ़ा दिए।
"कुछ पिला दिया है तुमने मुझे...मेरा सर घूम रहा है।"
"अभी सब ठीक हो जाएगा।"
"कसे?"
"बताता हूं...।"
"ऐई।"
"क्या है?"
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"मुझे त म्हारी नीयत ठीक यहीं लग रही है...यू नाटी।"
राज ने उसे ऊपर से ही बैड पर छोड़ दिया।
"उई मां...मरी! मेरी कमर...!" वह चिल्लाई। उसने प्रतिरोध स्वरूप टांगें चलायीं तो साड़ी ऊपर उठती चली गई। उसकी गोरी पिंडलियों को वस्त्रविहीन हो जाना पड़ा। ऐसा वह क्रोध में कर रही थी, इसलिए हो रहा था या जान-बूझकर अपने सुडौल अंगों का प्रदर्शन कर राज को अधिक रिझाना चाह रही थी मालूम न हो सका।