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वो लाल बॅग वाली

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थोड़ी देर बाद उसने दरवाजा खोला और बाहर खड़े मयूर को अन्दर आने का इशारा किया |

सामने कुर्सी पर सफेद नेता की यूनिफार्म में एक 40 साल का आदमी बैठा था उसने मयूर को गौर से देखा और कहा – तुम रामदयाल जी को धुंध रहे हो ?

मयूर ने हा में सर हिलाया |

सुने कहा – तुम कोई रिश्तेदार हो उनके ?

नही मयूर ने न में सर हिलाया और बोला – मुझे उनकी लडकी से काम है, उसने मुझे यहाँ मिलने बुलाया था |

उसने अपना वजन अपनी कुर्सी के पीछे डाल दिया और गौर से मयूर को देखने लगा – कितने दिन पहले बुलाया था ?

मयूर ने कहा – लगभग 3 दिन पहले |

उसने मयूर को देखा और कहा – सीधे बाये जाओ और तीन गली छोड़ कर फिर बाये मुड़ जाना उस गली में तुमको 144 नम्बर मिल जायेगा, वापिस मेरे पास आना तुमसे कुछ बात करनी है |

मयूर उठा और सकरी गलियों में से होता हुआ नेताजी की बताई गली में पहुचा और अपनी साइकिल में आयल दे रहे एक आदमी से पूछा – इधर 144 नम्बर मकान कौन सा है |

उसने अपने कच्चे बने मकान की तरफ इशारा कर के कहा - ये 140 न. है, आगे 144 |

मयूर उसके मकान से आगे बढ़ा तीसरे मकान पर लिखा था – 143, सिनेमा रोड, और वो आगे बढ़ा, और उसने देखा वो एक खाली पड़े छोटे से प्लाट के सामने खड़ा था अगले मकान पर 145 लिखा था |

वो वापिस गया और उसने पूछा – ये 144 तो प्लाट है |

हा ये रामदयाल जी का प्लाट है – अब वो इस दुनिया मैं नही रहे |

और उनकी लडकी – रागिनी मयूर ने पूछा ,

उसने जवाब दिया दोनों बाप बेटी की मौत 3 साल पहले एक एक्सीडेंट में हो गई, तब से इस प्लाट का कोई मालिक नही है, और इसपर शराब माफिया का कब्जा है |

मयूर झोपड़ पट्टी की सकरी गलियों में से मेंन रोड पर आया और एक टैक्सी में बैठा और बोला – एअरपोर्ट

वही हुआ जिसका मुझे डर था – रागिन – रागिनी का असली नाम नही है, उसने तीन साल पहले मरी एक लडकी की आई डी यूज़ की और गायब हो गई, उसका कही कोई फोटो भी नहीं है, आखिर में उसको ढूंढू तो कहा ? – वाकई में एक पहेली थी ये नकली रागिनी |

अपनी जिद्द का पक्का मयूर आसानी से हार मानने वाला नहीं था, और ये तो फिर दिल का मामला था, वो अपनी मर्जी से मुझे छोड़ कर नहीं गई है, रही होगी उसकी कोई मज़बूरी, और फिर उसकी आखो के सामने रागिनी का डरा हुआ चेहरा आ गया, और उसका निश्चय पक्का हो गया की कुछ भी हो वो उसे ढूढ़ कर ही रहेगा |

अगले दिन वो मसूरी डिलाइट रेस्तरा मैं पहुचा जहा उसने और रागिनी ने साथ में हेर्बेल टी और फ्रूट सलाद का नाश्ता किया था, जिसका मालिक उसको अच्छी तरह से जनता था, मयूर को देखते ही बोला – आओ मेरे दोस्त आजकल तो बहुत हैडलाइन बना रहे हो न्यूज़ पेपर में ?

मयूर ने कहा – नहीं ऐसा कुछ नही है, पुलिस को कुछ कनफूसन हो गया था, बाद में उन्होंने अपनी गलती मान ली |

कहो आज हम जैसे लोगो की कैसे याद आ गई ?

मुझे तुम्हारे रेस्तरा के 4 तारीख शाम के सीसीटीवी फुटेज देखने है – मयूर ने उसकी टेबल के सामने पड़ी स्क्रीन की और इशारा करते हुए कहा |

वो फ़ौरन राजी हो गया, उसने 4 तारीख लिखी सीडी निकली और कंप्यूटर के ड्राइव में डाली |

कुछ देर फॉरवर्ड के बाद उसका और रागिनी की रेस्तरा में एंट्री वाला सीन आया |

और उसने अविश्वास से देखा कैमरे के सामने रागिनी ने अपना लाल पर्स अपने मुंह के आगे कर रखा था और उसकी सब आशाओ पे पानी फिर गया, उसको अपना दिल डूबता हुआ महसूस किया |

चालाकी की भी हद्द होती है, हर जगह उसने अपना चेहरा अपने लाल बेग से ढँक रखा था, इस प्रकार की सावधानी तो कोई क्रिमिनल ही करता है |

और उसने एक भी जगह कोई क्लू नही छोड़ा था – आखिर वो छुप किससे रही थी ?

वो भारी कदमो से अपने घर की और लौट रहा था, मॉल रोड पे कुछ पर्यटक चहलकदमी कर रहे थे, वो वहा रखी एक खाली बेंच पर बैठ गया तभी उसकी नजर सामने बैठे एक स्केच आर्टिस्ट पर गई, जो कुछ रूपये लेकर लोगो के पोर्टेड बनाता था, वो वह बहुत महशूर था, और स्केच आर्ट मैं उसका बहुत नाम था, उसको एक ख्याल आया और वो स्केच आर्टिस्ट के पास गया –

क्या तुम बिना देखे भी किसी का स्केच बना सकते हो, गोपाल ?

उसने कहा – हेल्लो मयूर – हा बोलो किसका बनाना है ?

में बोलता हूँ तुम बनाना चालू करो –

वो एक लडकी है, उसका चेहरा अंडाकार है, उसकी नाक छोटी, आँखे काली और वो दुनिया की सबसे खूबसूरत लडकी है |

स्केच बनाने वाले ने उसका मुंह देखा और आखरी बात पे ध्यान दिया बिना अपना काम जारी रखा, मयूर के बताये अनुसार उसकी कलम एक सफेद कागज पे तेजी से चल रही थी |

कुछ घंटे गुजर गये – आर्टिस्ट उससे सवाल पूछता जा रहा था और स्केच बनता जा रहा था |
 
काफी देर के प्रयासों के बाद जब उसके सफेद कोरे कागज पे एक लडकी का चेहरा पूरी तरह से बन गया तो उसने स्केच मयूर की और बढ़ा दिया |

मयूर ने देखा – वो स्वर्ग की कोई सुन्दर अप्सरा जैसी थी, पर वो रागिनी नही थी |

उसने स्केच वाले को पैसे दिए और अपने घर की और चल दिया |

कोई तरीका, कोई रास्ता कोई मार्ग ऐसा दिखाई नही दे रहा था जो उसको रागिनी की तरफ ले कर जाये |

उसको समझ नही आ रही थी की वो अपनी हालत पे हंसे या रोये, अपने अँधेरे कमरे में से बाहर जा रही मेन रोड पर आते जाते इक्का दुक्का लोगो और वाहनों को देखते हुए वो सोच रहा था – उसके साथ इतना बड़ा मजाक हो गया और उसे पता ही नही चला, अजीब उलझन है क्या उसे जीवन भर इसी उलझन के साथ जीना पड़ेगा, क्या वो कभी पता नही लगा पायेगा की जिसको वो हद से ज्यादा चाहता था वो कौन थी ?

कुछ देर ऐसे ही बेठे बेठे गुजर गये और उसके मुंह से आवाज निकली – यस – और उसके दिमाग में बिजली कौंधी |

सुबह उठते ही उसने होटल एसोसिएशन की लिस्ट निकली, लिस्ट में उस इलाके की हर होटल का नाम और पता, फ़ोन नम्बर था | उसने खुद ही जाकर एक एक होटल में पूछताछ करने का मन बनाया, कुल जमा 75 होटल में उसको जाना था |

एक एक करके वो 22 होटल में गया, सारे होटल और उनका स्टाफ से वो अच्छी तरह से वाकिफ था और हर जगह उसने एक ही प्रश्न, और हर जगह उसे इंकार में ही जवाब मिला सुबह 8 बजे का निकला दोपहर 2 बजे तक उसे निराशा हाथ लगी, उसका अगला पड़ाव टुलिप एन रोज होटल था जहा उसने लंच करने का निर्णय लिया |

वो सीधा मेनेजर के रूम में दाखिल हुआ, जहा लगभग 60 साल का एक बुजुर्ग मेनेजर की सीट पर बैठा था |

उसने मयूर को देखते ही पहचान लिया और खड़े हो कर अपना हाथ आगे कर दिया, जिसे उसने फ़ौरन थाम लिया |

बुजुर्ग मयूर का जुडो मास्टर था, काली पेंट और सफेद शर्ट वाले गुंडों पे जो हाथ उसने आजमाया था वो सब इन्ही बुजुर्गे मिस्टर राघवेन्द्र का कमाल था, इन्ही ने मयूर को सिखाया था की कैसे किसी भी जानलेवा हमला होने की स्थिति में एक जुडो मास्टर को अपने हमलावर के सबसे नाजुक अंगो पर वार करना चाहिए और उसको किस तरह पंगु बनाकर अपनी जान बचानी चाहिए |

मयूर हर रोज पहाड़ो पर जॉगिंग के लिए जाता था, और वही उसकी उसने मिस्टर राघवेन्द्र को जुडो की प्रैक्टिस करते देखा, और उनका शिष्य बन गया, प्रतिदिन 6 बजे उसकी क्लास चलती जो की 10 बजे तक उसको पूरी तरह से तोड़ कर रख देती थी, पर जुडो की बदोलत ही उसने रागिनी के हाथ खून में लाल नही होने दिए थे |

और सुनाओ मयूर कैसा चल रहा था ? – बुजुर्ग ने बातचीत की शुरुआत की

एक्चुली में कुछ जानकारी हासिल करने आया था |

जानकारी ! किस तरह की ?

क्या आपके होटल मैं कुछ 4 से 6 अगस्त के बीच दो गुंडे टाइप के लोग ठहरे थे जिन्होंने एक जैसे यूनिफार्म काली पेंट और सफेद शर्ट पहना हो ?

यस ऑफ कोर्स – मिस्टर राघवेन्द्र का चेहरा जिज्ञासा से भर गया – वो दोनों मेरे ही होटल में ठहरे थे पर एक दिन वो गये और वापिस ही नहीं आये, मेरा एक दिन का रेंट बाकि था तो मेने अपना रूम खाली करके उनका सामान लाकर रूम में रख दिया है, पर तुम उन दोनों को क्यों ढूढ़ रहे हो ?

मेरा भी उनसे कुछ हिसाब किताब बाकि है – उसने कहा – क्या आप मुझे उनका पता या फ़ोन नम्बर दे सकते है |

कोई फायदा नहीं – मैंने खुद कई बार उनको कॉल किया पर कॉल किसी और ने उठाया और उठाने वाले ने कसम खाई की वो अपने जीवन में कभी मसूरी नही आया है, और तो और जो पता उन्होंने लिखाया है वो भी उसी मोबाइल नम्बर वाले का है, लगता है उसके आधार कार्ड का भरपूर इस्तेमाल किया दोनों ने, सूरत शक्ल से ही गुंडे दिख रहे थे अगर अभी ऑफ सीजन नही होता तो मैं उनको कभी रूम नहीं देता |

मयूर ने बैचेनी से पहलू बदला और फिर मिस्टर राघवेन्द्र से पूछा – क्या आपके सीसीटीवी कैमरे चालू है ?

बारिश की वजह से सीसीटीवी का पूरा सिस्टम ही खराब पड़ा है, आज ठीक हो कर लग जायेगा

मयूर ने पूछा क्या आपने उनका बेग खोल कर देखा ?

चार जोड़ी काली पेंट और चार जोड़ी वाइट शर्ट, और कुछ नही |

मयूर समझ गया, यहाँ से उसे कुछ मिलने वाला नही है, शायद मिस्टर राघवेन्द्र इस उम्र में पुलिस और गुंडों के लफड़े से अपने आपको दूर रखना चाहते थे |

वो बाहर निकला, सूरज बदलो के पीछे ढँक गया था, मौसम पहले ही सुहाना था अब तो रोमांटिक हो गया था, और होटल के रिसेप्शन पर उसकी बचपन की सहेली कोमल, कंप्यूटर पर कुछ काम करने का अभिनय कर रही थी |

मयूर उसके पास सधे हुए कदमो से पहुचा और उसने सर उठा कर चिढाते हुए कहा – कहिये सर, मैं आपकी क्या सहायता कर सकती हूँ ?

सुबह से मुझे लग रहा था की आज कुछ अनहोनी होने वाली है और तुमसे मुलाकात हो गई, अब इससे बुरा क्या होगा ?

अच्छा, अब मैं इतनी भी बुरी नही हु, जितना तुम समझते हो |

अब तक शादी नही की तुमने ? – मयूर ने कोमल से पूछा

तुम हाँ ही कहा बोल रहे हो, मैं तो तम्हारी हाँ का ही इंतजार कर रही हूँ – उसने हँसते हुए कहा

मेरी हाँ की क्या जरूरत है – तुम्हारे मम्मी – पापा की हाँ ही बहुत है, वैसे आज रात को क्या कर रही हो – उसने अपनी फिरंगी माँ जैसी नीली आँखों का जादू कोमल पर चलते हुए बोला |

अगर अब तुम्हे मुझसे रात में मिलना है तो पहले शादी करनी होगी, पहले के अनुभव अच्छे नही है, – उसने मयूर को चिढाते हुए कहा- वैसे तो मुझे यहाँ डेट पर ले जाने तो आये नही हो ये तो मैं भी जानती हु, बताओ क्या काम है

मयूर की बहुत इच्छा हो रही थी की वो सीधे पॉइंट पर आ जाये और उन दोनों गुंडों की सीसीटीवी पिक्चर सीधे ही मांग ले पर उसमे रिस्क था, अगर वो मुकर गयी तो, उम्मीद की आखरी किरण भी उसके हाथ से चली जाएगी, पर उसने बात जमाते हुए कहा – 4 अगस्त को यहाँ दो टूरिस्ट आये थे, काली पेंट और सफेद शर्ट वाले, याद है तुमको ?

उसके चेहरे पर बल पड गये – वो दोनों इस होटल में घुसने के भी लायक नही थे, पर उन्होंने कैसे यहाँ का इतना भारी किराया भर दिया मुझे विश्वास नही हुआ, और वो मुझे घूरे जा रहे थे, मेरा बस चलता तो उनको निकाल के बाहर कर देती, पर वो खुद ही लौट कर नही आये |

मयूर ने अपनी आवाज को धीमी करते हुए कहा – तुम मुझे उनका पता दो मैं उन दोनों को सबक सिखा दूंगा, क्या तुमको पता है वो दोनों मेरे रेस्तरा मैं भी आये थे और मुझे नकली चेक पकड़ा कर चले गये, सूरत से ही उठाई गिरे लग रहे थे, तुमने उनका आई डी तो लिया होगा न स्वीट हार्ट ?

ऑफ़ कोर्स, उनका आई डी कार्ड की फोटो कॉपी मेरे पास है, मैं देती हु तुम्हे, पर मेरी डेट का क्या होगा ?

आज रात की पक्की – पर शादी की बात मत करना अभी तो मेरी जिन्दगी का सिर्फ एक ही मकसद है उन दोनों को सबक सिखाना - उसने हँसते हुए कहा, इस तरह की हंसी मजाक उनमे बचपन से ही होती आ रही थी, कोमल एक सुन्दर पहाड़ी लडकी थी जिसके पिता वही किसी होटल में मेनेजर थे, दोनों एक साथ एक ही स्कूल में एक ही क्लास में पढ़ते थे वो स्कूल से छुटने के बाद उसके होटल पर ही आ जाती थी, और उसकी मम्मी से बोलती थी – में तो मयूर से ही शादी करूंगी, वो बचपन के दिन थे पर अभी तक वो एक दुसरे को ऐसे ही चिढाते थे |

वो उठी और उसने दराज खोली और एक फाइल निकालकर उसमे तारीखवार लगी फोटो कॉपी में से एक निकाल कर मयूर को दी और कहा – अगली बार आओ तो कुछ अच्छी चीज मांगना, ये गुंडों की आई डी भी कोई मांगने की चीज है ?

मयूर ने कहा अगली बार तुमसे तुम्हारा दिल मागूंगा बस उनकी फोटो की एक प्रिंट भी मिल जाती तो मेरा काम आसान हो जाता |

वो कंप्यूटर की और झुकी और उसने 4 अगस्त की पूरी रिकॉर्डिंग एक खाली सीडी में डाल कर मयूर को दे दी, - एक फोटो क्या तुम पूरी सीडी ही ले लोऔर कुछ ?

मयूर ने कहा – दोस्त हो तो ऐसी, आज शाम मिलो गोल्डन पाम रेस्तरा में रात 8 बजे ?

ठीक है, पर तुम समय पे आ जाना – उसने हस्ते हुए कहा

मयूर ने एक जोर की साँस ली और कहा – थैंक यू कोमल, मिलते है आज रात को, बाय

और वो बाहर निकल आया |

कोमल और उसके बीच ऐसी बाते होती रहती थी क्योकि दोनों एक दुसरे से बहुत खुले हुए थे, उसके चेहरे पे अब एक मुस्कान थी – कम से कम कुछ तो उसके पास था जो उसको रागिनी तक ले जा सकता था, एक ठंडी हवा के झोंका उससे टकराया और उसकी आँखों के सामने रागिनी का चेहरा उभर आया, और वो गुनगुनाया चाहे कितने भी तू कर ले सितम हंस हंस के सहेंगे हम ये प्यार न होगा कम, सनम तेरी कसम |

वो अपनी होटल के ऑफिस में गया, अपने कंप्यूटर में 4 अगस्त की सीडी डाली और विडिओ देखने लगा, उसने देखा लगभग रात के 8 बजे उन दोनों ने होटल में एंट्री ली, कैमरा होटल के एंट्री गेट के ऊपर लगा था जो सीधे रिसेप्शन पे फोकस कर रहा था, इसमें इनकी पीठ ही दिख रही थी, उन्होंने किराये का एडवांस नगद जमा किया और रिसेप्शन के पास ऊपर जाने की सीढियों पे चढ़ गये, वो दोनों पानी में भीगे नही थे |
 
मयूर को 4 अगस्त की शाम की याद ताजा हो गई, कैसे रागिनी ने बस के दरवाजे में अपना लाल बेग फसा दिया था, और उसका बेग, किताब और वो दोनों पानी में पूरी तरह भीग गये थे, और उसने उसे शाम 7:30 बजे हॉस्टल तक छोड़ा था, उसके दिमाग में कुछ खटक गया, उन दोनों ने जब होटल में चेक इन क्या तब भी 7:30 बजे थे मतलब ये दोनों रागिनी का पिछा कर रहे थे और जब उसने उसे हॉस्टल में छोड़ा उसके बाद ही इन्होने होटल में चेक इन किया, वो दोनों पानी में भीगे नही थे, उसके दिमाग में कुछ सवाल घूम गये, और उसके सवाल के जवाब कोमल ही दे सकती थी, और तभी उसे ख्याल आया उसने कोमल के साथ डेट फिक्स की थी, अभी 7:30 बजे थे |

वो जल्दी से उठा तेयार हुआ और अपनी गाड़ी गोल्डन पाम रेस्तरा की और मोड़ ली |

उसकी गाड़ी के निकलते ही उसके होटल के ऑफिस में जहा वो बैठ कर कोमल से ली सीडी देख रहा था, समन्था घुसी, वो मयूर की माँ थी, उसने सीडी चालू की, पर उसे कुछ समझ में नही आया, उसने किसी को फ़ोन लगाया, और कुछ देर बाद वो उस आदमी के साथ थी, जिसे उसने पिछले कुछ दिनों से मयूर के पीछे लगाया था, वो उसी इलाके का निवासी था, उसने भी पूरी सीडी देखी और जब वो दोनों गुंडे उसे सीढियों से उतरते हुए दिखे तो उसने समन्था को कुछ कहा, समन्था ने दोनों को गौर से देखा और एक गहरी साँस ली, मयूर अब इन दोनों को ढूंड रहा है – उसने मन ही मन कहा, वो एक अंग्रेज महिला थी और अपने बेटे की हर गतिविधि पर नजर रख रही थी |

गोल्डन पाम रेस्तरा मॉल रोड पर एक हिल टॉप रेस्तरा था, जो पहाड़ी स्वाद के लिए जाना जाता था, वहां पहाड़ी देशी शराब भी परोसी जाती थी, मयूर समय से पहले ही वहां मौजूद था, जब कोमल आई तब तक वो भोजन का आर्डर कर चूका था, वो कोमल की पसंद जानता था और उसे पूरा भरोसा था की कोमल जरुर आएगी और वो आई भी, उसने टेबल पे अपनी पसंद की डिश बाबरु देखी ख़ुशी से बोली – वाह तुमको अब तक याद है मुझे क्या खाना पसंद है, आज का दिन मेरे लिए बहुत लकी है, जो भी मुझे पसंद है सब मिल रहा है |

अच्छा – इस बाबरु के अलवा तुमको और क्या मिल गया आज ?

तुम और बबरू दोनों मुझे बहुत पसंद हो – उसने कचोरी जैसी दाल की बनी उस डिश को अपने मुंह में डालते हुए बोला पर अब लगता है, कुछ नया पसंद करना पड़ेगा, क्योकि तुमको तो फुर्सत ही नही है – उसने शिकायती लहजे में कहा

हाँ करो न इटालियन, कॉन्टिनेंटल नई – नई डिशेस पसंद करो रोका किसने है – मयूर ने उसे चिढाते हुए कहा |

कर लुंगी और तुम पछताओगे – उसने मयूर की आखो में आखे डालते हुए बोला

बस एक काम बाकी है, फिर पूरा ध्यान तुम्हारे ऊपर ही दूंगा, प्रॉमिस |

और वो मुझसे भी ज्यादा जरूरी काम कौन सा है ?

उन दोनों गुंडों को ढूँढना – मयूर ने अपने मतलब की बात पर आते हुए कहा

उनको तो में भी बहुत मारती – उसने अपने हाथ का मुक्का बनाते हुए कहा

कुछ मिला तुमको उस सीडी में से ? कोमल ने पूछा

बहुत कुछ मिला है, एक बात बताओ जब वो दोनो पहली बार 4 अगस्त को तुम्हारे होटल में पहली बार आये थे, उस समय बारिश हो रही थी ?

हाँ – कोमल ने सोचते हुए कहा

तो वो दोनों बारिश में भीगे क्यों नही थे ?

सिंपल, वो अपनी कार में आये थे – कोमल ने सोचते हुए कहा

तुमने देखी थी उनकी कार ? मयूर ने बाबरु अपने मुंह में रखते हुए पूछा, उसका मुंह नमकीन हो गया |

वो एक सफेद कलर की आल्टो गाड़ी थी बस इतना ही याद है मुझे |

क्या तुम्हारे होटल के बाहर पार्किंग भी कैमरा लगा है ?

नही, वहा का कैमरा खराब पड़ा है |

एक बात तो साफ हो गई की वो खुद की गाड़ी मैं यहाँ तक आये थे, रागिनी की तरह बस से नही, अगर उनकी गाड़ी का नम्बर मिल जाये तो उन तक पहुचना आसन रहेगा – उसने सोचा

कौन है वो – कोमल ने उससे पूछा

मयूर ने चौक कर कहा – कौन ?

वही जिसने तुमको मुझसे छीन लिया – उसने मुंह बनाते हुए कहा |

मुझे नहीं मालूम वो कौन है, पर वो कही न कही तो है, बस यही पता करने की कोशिश कर रहा हूँ की वो कौन थी, कहा से आई थी, और कहा चली गई, मुझे बिना गुड बाय बोले |

ये गुंडे भी उसी कहानी का हिस्सा है क्या ? – कोमल के चेहरे पर उदासी साफ झलक रही थी, वो मयूर को बचपन से चाहती थी, और अब वो किसी और को चाहता था |

हा, ये दोनों उसको मारने उसके पीछे पीछे यहाँ तक आये थे – और उसने रागिनी की पूरी कहानी कोमल को बताई |

देखो मयूर – तुम आंटी के इकलोते लडके हो, सोचो अगर तुम्हे कुछ हो गया तो उनका क्या होगा, और मेरा क्या होगा – मयूर को लगा बस अब वो रो पड़ेगी, पर वो सम्भल गयी और मुस्कुराते हुए बोली – फिर मुझे तुम्हारे जैसा कोई और कहा मिलेगा |

मयूर ने कहा – आई ऍम सॉरी कोमल लेकिन में तुमको धोखे में नही रखना चाहता, मैं उसको ढूंड कर ही रहूँगा, चाहे कुछ भी हो जाये, क्योकि वो मुझसे प्यार तो करती है, लेकिन किसी मज़बूरी के कारण मुझे छोड़ के चली गयी, उसकी मजबूरी तो अब उससे मिलने के बाद ही पता चलेगी |

बातो बातो में रात गहरा गई थी, मयूर ने कहा – चलो तुमको घर तक छोड़ देता हु |

कार में एक सन्नाटा छाया रहा, दोनों में से कोई कुछ भी नही बोला, मयूर उसका दर्द समझ सकता था, वो भी रागिनी से बिछड़ने के बाद इसी दर्द के साये में जी रहा था |

कोमल का घर आया और वो बिना कुछ बोले अपने घर के बाहर लगे गार्डन का दरवाजा खोलकर अन्दर चली गयी |

मयूर ने एक जोर की साँस ली, मन ही मन कहा – आई ऍम सॉरी कोमल तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो, उसने अपनी गाड़ी स्टार्ट की और अपने घर की तरफ मोड़ ली |

अपने होटल पहुच कर वो फिर अपने ऑफिस में घुसा और उसने आगे की सीडी चलाई, उसको अब उन दोनों के फोटो की सख्त दरकार थी |

उसने सीडी चलाई और देखा - वो सुबह 8 बजे सीढियों से निचे उतरे, मयूर की सांसे रुक गई, , उस समय भी उन्होंने अपनी यूनिफार्म काली पेंट, सफेद शर्ट पहन रखी थी, दोनों एक के पीछे एक चल रहे थे, उसने कैमरा पॉज किया, पहले वाले गुंडे का चेहरा साफ दिखाई दे रहा था, उसने ज़ूम किया, और प्रिंट का बटन दबा दिया, पहले उतरने वाले का चेहरा उसके ऑफिस में लगे प्रिंटर में से निकल कर बाहर आ गया, दुसरे का चेहर अब भी केमरे की जद में नही आया था |
 
दोनों 4 अगस्त की शाम को होटल में घुसे और सीधे ऊपर की सीढ़िया चढ़ गये - वो कई घंटे तक विडिओ को फ़ास्ट फॉरवर्ड करता रहा - वो दोनों अगली बार 5 अगस्त की सुबह 10 बजे दिखाई दिए, इस दिन रागिनी और वो दोनों मेले में गये थे, मयूर को अच्छी तरह से याद था, वही पहले उतरा जिसका फोटो मयूर के पास आल रेडी था, और दूसरा गुंडा उसके पीछे था |

दोनों साथ साथ एक के पीछे एक चल रहे थे, जैसे बॉस के पीछे मुलाजिम चल रहा हो, तभी पीछे वाले ने घूम कर रिसेप्शन पर बेठी कोमल की तरफ एक भद्दा इशारा किया, कोमल ने अपने हाथ का मुक्का बना कर उसको दिखाया, वो थोडा धीमे हुआ, और एक सेकंड के लिए उसका चेहरा भी कैमरे में साफ हो गया, मयूर ने फ़ौरन पॉज का बटन दबा कर विडिओ को रोका और प्रिंट का बटन दबा कर प्रिंट लिया और एक लम्बी चैन की साँस ली, उसके पास उन दोनों के फोटो थे, उसकी पूरी कहानी में कुछ था जिसका सबूत उसके पास था |

अगर ये दोनों गुंडे मुझे मिल जाये तो मैं रागिनी तक आसानी से पहुच सकता हूँ, क्योकि ये दोनों शौक में आकर रागिनी को ऊपर पहुचने यहाँ नही आये होंगे, या तो ये पहले से उसे जानते है, या किसी ने रागिनी को मारने की सुपारी दी होगी, दोनों ही सूरत मैं वो रागिनी तक पहुच जायेगा और उसके जीवन की ये अनबुझ पहेली बुझ जाएगी |

अभी तक जो उसे पता था उसके अनुसार वो दोनों अपनी पर्सनल कार से मसूरी तक आये थे, अगर वो किसी तरह से उस कार का नम्बर पता कर ले तो उसे उसके मालिक का पता चल जाएगा |

उसने गूगल पर पुलिस आई डी कार्ड सर्च किया और उसे एक आई डी कार्ड फोटो ऑनलाइन मिल गई जिसको उसने अपने कंप्यूटर पे डाउनलोड की, सॉफ्टवेर पे उस आई डी के फोटो की जगह अपना फोटो लगाया और बड़ी सफाई से अपना नाम उस जगह लिख दिया जहा उस असली पुलिस वाले का लिखा था, नकली आई डी का प्रिंट निकाला और कैची से उसको बिलकुल आई डी की साइज़ में काटा, अब उसके पास एक आई डी कार्ड का प्रिंट था, उसने अपने होटल के वेटर को बुलाकर कहा - मॉल रोड पे जो फोटोग्राफर की दुकान है वह से एक लेमिनेशन की मशीन खरीद के ला, |

कुछ देर बाद उसके पास लेमिनेशन करने की मशीन थी, उसने अपने नकली आई डी का लेमिनेशन किया और अब वो हुबहू असली पुलिस के आई डी कार्ड की तरह लग रहा था |

उसने अपना मिशन कल सुबह होने तक के लिए मुल्तवी कर दिया, और अपने रूम की तरफ सोने चला गया |

मयूर के जाने के बाद समंथा ने ऑफिस में एंट्री ली और मयूर के निकाले दोनों गुंडों के फोटो की एक एक फोटो कॉपी और निकाली अपनी फाइल में लगा ली |

सुबह मौसम साफ था और धुप कड़क निकली थी, वो रेडी हुआ और अपने मिशन पर निकल पडा, उसे पता था उसे क्या करना है, उसकी गाड़ी सीधी टोल नाके पर वहा रुकी जहा मेनेजर लिखा था, वो केबिन में गया और उसे हमउम्र लड़का टेबल पर दिखाई दिया, उसने हाथ बढ़ाया और बोला – हेल्लो आई ऍम मयूर |

मेनेजर ने भी अपना हाथ बढ़ाया और बोला – कहिये आपकी क्या सेवा कर सकता हु |

मयूर ने कहा – एक्चुली मैं एक गाड़ी को ढूंड रहा हूँ जो चार तारीख को इस टोल नाके पर क्रॉस हुई थी, और उसने अपनी जेब में से नकली आई डी कार्ड निकाल कर मेनेजर को दिखाया और वापिस रख लिया |

पहले आपको देखा नहीं – हमारे टोल नाके से सारी गाड़िया निकलती है, सारे पुलिस वालो को मैं पर्सनली जानता हूँ |

मैं अभी ट्रान्सफर होकर मंडी से यहाँ आया हु और साहब ने मुझे ये काम सौप दिया |

उसने कुछ देर मयूर को देखा, मयूर की धडकने तेज धडकने लगी क्या उसको शक हो गया है कि मैं पुलिस वाला नहीं हूँ ?

तो आपको 4 तारीख की सीडी चाहिए ?

हा मैं एक सफेद आल्टो को ढूंड रहा हु जो लगभग 5 बजे यहाँ से क्रॉस हुई थी, उसका नंबर चाहिए |

आप यहाँ रुकिए मैं अभी लेकर आता हु ? – मेनेजर उठा और अपने केबिन से बाहर चला गया

मयूर की सांसे तेजी से धड़क रही थी – वो चाहता तो अपने सामने पड़े फ़ोन से भी अपने अर्दली को बुला कर सीडी मंगवा सकता था फिर वो गया क्यों – उसे खतरा महसूस हो गया था, वो फिर पुलिस के लफड़े में नही पड़ना चाहता था, वो उठा और केबिन के बाहर जाने के दरवाजे को खोला और उसने देखा दरवाजे के दूसरी तरफ उसके सामने मेनेजर खड़ा था |

आइये मिस्टर मयूर कुछ बाते करते है – मेनेजर ने कहा

तो आपको वो सीडी चाहिए, पर आप पुलिस में नहीं है, मैंने अभी पुलिस डिपार्टमेंट में मेरे दोस्त को फ़ोन करके आपके बारे में पूछा और उसने कहा की कोई पुलिस वाला मयूर के नाम से यहाँ नही है |

अचुली में दून से हूँ वहाँ के थाने मैं हूँ इसी लिए आपका दोस्त मुझे नहीं जनता – उसने बात बनाते हुए कहा, उसे अपने आपको संयत रखने में कठिनाई महसूस हो रही थी, पहली बार में वो पकड़ा गया था, मेनेजर कुछ ज्यादा ही चालक निकला |

बाते मत बनाओ – मैं दावे के साथ कह सकता हु की तुम पुलिस वाले नही हो, सच सच बताओ माजरा क्या है |

उसको जैसे सांप सूंघ गया – उसने बड़ी मुश्किल से कहा – मैं एक प्राइवेट जासूस हूँ, कुछ दिन पहले एक लडकी घर से भाग गयी थी, और अभी तक घर नही पहुची है, मुझे ये पता करना है की वो अभी कहा है, उसके पिता नही चाहते की पुलिस की मदद ले और घर की इज्जत बाजार में उछले |

उसने घुर कर मयूर को देखा – वो तन्यल साहेब वाला केस जिस चक्कर मैं उनका तबादला हो गया |

मयूर ने अपने कंधे उचकाए पर बोला कुछ नही |

तो तुम उस लडकी को ढूंड रहे हो, कितना पैसा मिलेगा तुमको उसे ढूंडने के लिए, वो जरुर कोई मालदार पार्टी थी, तभी उसके पीछे वो इंस्पेक्टर पागल हुआ जा रहा था उस रात को

आप सही बोल रहे है – अब मयूर समझ रहा था बात किस दिशा में जा रही है, उसे नया पत्ता चलना पड़ेगा – लडकी बहुत मालदार पार्टी है, मुझे कहा गया है की चाहे जितना भी पैसा लगे उसका पता लगाना ही है, मयूर ने अपना पर्स जेब में से निकला और दो दो हजार के पाच गुलाबी नोट अपने हाथ में निकाल लिए, और आराम से कुर्सी से सर टिका कर उनको गिनने लगा |

उसने दो तीन बार दो दो हजार के पाच नोट गिने और फिर मेनेजर की तरफ देखकर बोला – इनमे से कितने नोट में चार अगस्त की सीडी की कॉपी मुझे मिल जाएगी ?

मेनेजर की आखो में गुलाबी नोटों की चमक साफ देखि जा सकती थी – उसने कहा, ये सारे लगेगे |

मयूर ने अपना नोट वाला हाथ उसकी तरफ बढ़ाया और बोला – मेरे पास ज्यादा समय नहीं है, जरा जल्दी काम कर दो |

कुछ बीस मिनट में वो 4 अगस्त की सीडी के साथ अपनी होटल की और जा रहा था, पॉवर ऑफ़ मनी – उसने सोचा

होटल में उसने फिर सीडी डाली और लगभग 4 अगस्त शाम 6 बजे तक फॉरवर्ड किया, लगभग 6:20 पर बस टोल नाके पर आई, ड्राईवर ने टोल टैक्स चुकाया और बस आगे बढ़ी, और बस के पीछे – पीछे सफेद आल्टो कार आ कर रुकी, मयूर ने विडिओ पॉज किया – कार में वो दोनों गुंडे साफ दिखाई दे रहे थे, गाड़ी थोड़ी और आगे हुई और आल्टो की नंबर प्लेट साफ दिखाई दी,

DA-07 451* स्टेट कोड – डिएगो, सिटी कोड – डिएगो, सीधा अर्थ था वो गाड़ी डिएगो की थी, उसने डिएगो आर.टी.ओ. की वेबसाइट खोली और नम्बर डाला पर इस नम्बर से कोई गाड़ी रजिस्टर नही थी |

उसे पता था डिएगो समुद्र के किनारे बसा एक छोटा सा राज्य था, जहाँ का मुख्य व्यापार समुद्र और पर्यटन पर टिका था |

और उसे एकाएक कुछ खटक गया – मयूर मैं यहाँ मूवी देखने नही आई थो वो तो में डिएगो में बहुत देख सकती थी, मैं यहाँ पहाड़ो की सुन्दरता देखने आई हूँ चलो मेला देखने चलते है मैं कल तुम्हारा बस स्टैंड के पास वाली शॉप पे मिलूंगी सुबह 11 बजे, सी यू बाय – ये वही मेसेज था जो रागिनी ने उसे तब भेजा था जब पहली बार उसने उसे मूवी जाने का प्रस्ताव दिया था |

माय गॉड – पछतावे के भाव ने उसके मन को घेर लिया – उसने गलती से ही सही पर जब उसने रागिनी को मूवी जाने का मेसेज भेजा था, उसी समय रागिनी ने जवाब में मेसेज करके पहले ही बता दिया था कि वो कहा से आई है, मैंने ही ध्यान नही दिया |

फिर उसे ख़ुशी हुई – वो कुछ कदम आगे बढ़ा था, अब उसको पता था की रागिनी कहा से आई थी, अब पता ये करना था की वो कौन थी, और उसे छोड़कर क्यों चली गई ?, और इन सवालों के जवाब ये दोनों गुंडे देंगे, उसने काली पेंट और सफेद शर्ट वाले दोनों गुंडों की फोटो को देखते हुए कहा |

उसने अपना लैपटॉप खोला और सुबह की डिएगो की फ्लाइट बुक की, अगर अभी की फ्लाइट होती तो वो अभी निकल जाता पर, उसे सुबह तक रुकना पड़ेगा |

उसके ऑफिस से जाने के बाद, समन्था मयूर की माँ ऑफिस में घुसी और उसने वो नंबर देखा फिर वही सब नेट पर सर्च किया जो थोड़ी देर पहले मयूर ने किया था, और फिर एक नम्बर डायल किया और बोली – सुनो तुमको कल सुबह डिएगो जाना है |

जब उसकी फ्लाइट ने समुद्र तटीय इलाके पर बसे डिएगो के एअरपोर्ट पर लैंडिंग की मौसम खुश्क हो रहा था, समुद्री इलाको मैं बारिश के मौसम में नमी और उमस कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है, पर उसका मन बहुत खुश था, क्योकि धीरे धीरे वो रागिनी के करीब जा रहा था, समुद्र से उठी ठंडी हवा का झोका उस से टकराया और उसे रागिनी महसूस हुई, शायद ये हवा उसे ही छु कर आ रही है – उसने मन ही मन सोचा और मुस्कुराया |
 
एअरपोर्ट से बाहर निकलकर उसने एक टैक्सी की और इशारा किया, और टैक्सी के उसके पास रुकते ही उसने उन दो गुंडों का फोटो निकल कर बताया – क्या तुम इसे जानते हो ?

ड्राईवर ने गौर से फोटो देखे और मयूर का चेहरा देखा फिर इंकार से अपना सर हिला दिया |

मयूर को थोड़ी मायूसी हुई – मतलब ये यहाँ के चर्चित गुंडे नही है, कोई बात नही फिर भी मैं हार नही मानुगा – उसने सोचा

होटल पहुचते ही मयूर ने अपना सामान रखा और सोचा – जैसे रागिनी वह मूवीज देखने नही आई थी वैसे ही मैं भी यहाँ घुमने नही आया हूँ जल्दी से जल्दी उसे ढूंडना ही मेरा लक्ष्य है और वो होटल से निकल कर सड़क पर आ गया |

साफ सुथरी सड़के, किनारों पर पड़ी बालुरेत और समुद्र से आती उमसभरी हवा के बीच वो सोच रहा था की कैसे वो उन दोनों को ढूंढे |

वो एक पान की दुकान पर गया और उसने दोनों फोटो पानवाले के आगे किये – क्या आप इनको जानते है ?

पानवाले ने गौर से फोटो देखा, उसके चेहरे पर भय के भाव साफ दिखाई दे रहे थे, उसने उन दोनों को पहचान लिया था, उसने मयूर की तरफ देखा और अपना सर इंकार में हिला दिया |

ये सिलसिला दिन भर चलता रहा, रात को लगभग 8 बजे तक मयूर उन दोनों का फोटो लिए घूम रहा था, इस दुकान से उस दुकान इस रिक्शा वाले से उस रिक्शा वाले तक, पर उसे कोई जानकारी नही दे रहा था, कई बार उसे लगा की जिसे उसने फोटो बताया है उसने उनकी पहचान कर ली है, और वो कुछ बताने ही वाले है पर उनके चेहरे पर छाया भय का भाव और सन्नाटा साफ बता रहा था की वो कोई मुसीबत मोल नही लेना चाहते थे |

रात के दस बजे मयूर एक गोवा स्टाइल में बांस से बने बार के सामने रुका, जो पूरी तरह से ओपन था, बांस की छत और आस पास बांस की बनी टेबल की हाइट की बौऊन्डरी से उस बार का आर्किटेक्ट शानदार लग रहा था, हलकी रोशनी और म्यूजिक से समा सुहाना लग रहा था वैसे वो शराब नही पिता था पर आज वो दिनभर घूमते घूमते बहुत थक गया था, और वैसे भी टोस्ट के नाम पर कभी कभी एक आध पेग उसकी अंग्रेज माँ समन्था के कल्चर में था

बार पूरी तरह से लोकल लोगो से भरा पड़ा था, वो एक खाली टेबल की और बढ़ा जहा पहले से एक बीमार सा दिखने वाला बुढा आदमी बैठा था |

वेटर को उसमे कोई दिलचस्पी नही थी, मयूर ने कहा – एमबी वाइन ?

उसने इंकार से सर हिलाया – फिर मयूर ने कुछ और महंगी वाइन के नाम बोले, फिर वेटर ने इंकार से सर हिलाया और बोला – यहाँ ये महंगी वाइन नही मिलती है, अगर आप डिएगो में आये हो तो यहाँ की मशहूर शराब चैनी पी कर देखो, हमारे यहाँ वही ताजी और असली अंजीर से बनी हुए चैनी मिलती है |

मयूर राजी हो गया तभी उसके सामने बैठे आदमी ने वेटर की तरफ इशारा किया और बोला मेरा एक और डबल ले कर आ |

उस पर हल्का हल्का नशा चढ़ रहा था, मयूर अनजान लोगो के साथ शराब नही पिता था, पर अभी उसकी मज़बूरी थी, बार में और कोई टेबल खाली नहीं थी |

थोड़ी देर में वेटर उन दोनों के आर्डर ले कर आ गया, मयूर ने फोटो निकाले और वेटर के आगे कर दिए – इनको जानते हो ?

वेटर ने फोटो देखा और बिना कुछ बोले आगे बढ़ गया, उसे ऐसे सवालों में कोई रूचि नही थी |

मयूर ने वेटर के लाये चैनी के गिलास में से एक तगड़ा घुट लिया और एक अजीब सी मस्ती उसके दिमाग पे छाने लगी, उसके मुह से निकला – बहुत तेज है ये |

सामने बैठे आदमी ने कहा – यहाँ का असली मॉल है ये, एक पेग में तो तुमको जन्नत का मजा मिल जायेगा, कहा से आये हो ?

मयूर उससे दोस्ती नही करना चाहता पर जवाब तो देना ही था – हिमाचल से चाचा |

किसको ढूंढ रहे हो ? – वो आदमी मयूर में दिलचस्पी ले रहा था |

मयूर ने दोनों गुंडों के फोटो निकले और उस आदमी के आगे कर दिए – उसने फोटो देखे और उसको सांप सूंघ गया – क्यों ढूंढ रहे हो तुम इनको ?

ऐसे ही कुछ काम था, कुछ हिसाब चुकता करना था, आप इनको जानते हो – मयूर ने अधीरता से पूछा

देखो बेटे – तुम जितना जल्दी हो सके यहाँ से निकल जाओ – अगर तुम इनसे कोई हिसाब चुकता करने आये हो तो तुमको बता देता हु, तुम्हारी लाश समुद्री मछलियों का भोजन बन जाएगी |

मयूर कुछ नही बोला, बुढ्ढा हैवी ड्रिंकर था, उसने एक साँस में ही पूरा गिलास खाली कर दिया था, मयूर ने वेटर को इशारा किया – और कहा हम दोनों के लिए एक एक टोस्ट और लाओ |

बुढ्ढा अपनी जगह से उठा और बोला – नही मुझे नही पीनी, में जा रहा हु, और तेजी से बाहर निकल गया |

मयूर ने तेज साँस ली – अजब डर था इन दोनों का, कोई कुछ बताने को ही तेयार नही था, ऐसे डर रहे थे जैसे फोटो नही कोई कोबरा सांप दिखा दिया हो, पर एक बात तो अब तय थी की वो बुढ्ढा इनको पहचानता था, मतलब वो दोनों यही कही थे |

उसने वेटर को फिर बुलाया अपना बिल दिया और फिर से फोटो दिखाते हुए कहा – तुम इनको जानते हो तो बता दो मुंह मांगी कीमत दूंगा |

जान है तो जहाँ है – मालिक ने बोला है आज के बाद आप इस बार में मत आना – उसने बिल के पैसे उठाते हुए कहा |

थोडा भय थोड़ी ख़ुशी से उसका सीना भरा गया, भय इस बात का की सब इन दोनों से डरते थे, ख़ुशी इस बात की कि वो दोनों यही के रहने वाले थे हर कोई उन्हें पहचानता था, बस बताने से डर रहा था, उसकी रागिनी नाम की पहेली अब बहुत जल्द सुलझने वाली थी |

उसने टैक्सी की और होटल में जा कर सो गया |

अगले दिन वो दोपहर तक सोता रहा, शाम 6 बजे वो तैयार हुआ और कल वाले बार के सामने एक चने की रेहड़ी वाले के पास जा कर खड़ा हो गया, उसे इंतजार था उस बेवडे चाचा का जो कल उसे यहाँ से चले जाने की सलाह दे रहा था |

उसकी कमजोरी मयूर जानता था, और उसकी कमजोरी थी शराब, चाचा अपने नियत समय पर आता हुआ दिखाई दिया, वो एक गली में से निकल कर धीरे धीरे बार की तरफ बढ़ रहा था, वो ठेले वाले के पास से निकला और सीधा चाचा के सामने जा कर खड़ा हो गया – कहा जा रहे हो चाचा ?

बुढ्ढे ने उसको देखा और उसकी अनुभवी आखो ने फ़ौरन ताड लिया वो उसके सामने क्यों खड़ा था बोला – तुम नही मानोगे मतलब |
 
मयूर ने कहा – चलो आज कही दूसरी जगह चलते है, में अकेले नही पिता, मुझे एक साथ की जरूरत है |

बुढ्ढा उसके पीछे हो लिया – दोनों टैक्सी से शहर की एक महंगी बार में पहुचे, बुढ्ढा पहले इतनी महंगी होटल में कभी नही आया था, दरबान ने दरवाजा खोला और दोनों एक चमचमाते हाल में एक आलिशान बार में लगी कुर्सियों पर बैठ गये, बार के काउंटर पे सैकड़ो तरह की अलग अलग डिजाईन की बोतेल्स लगी थी, जिनमे रंग बिरंगी शराब भरी पड़ी थी, बुढ्ढा बार बार उन बोतलों को ललचाई नजर से देख रहा था, मयूर ने कहा – बोलो चाचा कौन सी लोगे ?

बुढ्ढे ने कहा – अब बेटा तुम बोल ही रहे हो तो आज तुम्हारी वाली इंग्लिश ही पी लूँगा |

मयूर ने वेटर को आर्डर किया, और बार के ऊपर लगे टीवी देखने लगा |

एक के बाद एक पेग बुढ्डे पर हावी होते जा रहे थे, चार पेग के बाद उस पर शराब पूरी तरह हावी हो चुकी थी और वो तरंग में बोला – वो जो फोटो तुमने दिखाया था कल उसको देखने के बाद मैंने तुमसे कभी बात नही करने की कसम खाई थी, पर क्या करू में इतना डरपोक भी नही हूँ – शराब अपना कमाल दिखा रही थी और उसका डर अब कम पड़ने लगा था |

मयूर ने वेटर को एक और पेग का इशारा किया |

नही नहीं बेटा, अब बस और नही | - कहते कहते उसने वेटर के हाथ से शराब का गिलास झपट लिया |

मयूर ने देखा बुजुर्ग फुल टुन्न हो चूका है, इसी समय का वो इंतजार कर रहा था – उसने कहा – वो दोनों से आप इतना डरते क्यों हो, मेरे शहर में तो मैंने उनकी नाक तोड़ दी थी |

बुढ्ढे ने नशे में लडखडाते हुए अपने दोनों हाथ हवा में उठाए – में किसी से नही डरता, एक समय था जब ये सब मेरे नाम से कापते थे, और अभी भी वो मेरे ही पठ्ठे है, उनको चाकू पकड़ना मैंने सिखाया है, पर अब शरीर साथ नही देता है |

एक पेग और चलेगा – कहते हुए मयूर ने वेटर की और इशारा किया |

बुढ्ढे को अपनी किस्मत पर भरोसा नही हो रहा था, अब वो पूरी तरह से खुल चूका था, शराब के तेज नशे ने उसका सारा डर ख़त्म कर दिया था |

तो आपने उनको चाकू पकड़ना सिखाया – मयूर के सामने अब भी वेटर द्वारा लाया पहला गिलास पड़ा था, उसकी सांसे तेज हो रही थी, ये बुढ्ढा अब किसी भी वक्त उसे उन दोनों की जानकारी दे सकता था |

और नही तो क्या – चड्डी पहन के आये थे मेरे सामने और आज बोनी के खास बने बैठे है, दोनों, ये शराब की लत के कारण अब मेरा शरीर चलता नही तो मुझे कोई पूछता भी नहीं पर तुम जैसे लोगो की बदोलत मेरी जिन्दगी आराम से कट रही है – बूढ़े ने एक सास में फिर अपना गिलास खाली करते हुए कहा, आज उसे मजा आ गया था, कई दिनों के बाद जी भर के विदेशी महंगी शराब पिने को मिली थी |

मयूर ने फिर वेटर की और इशारा किया – और बुढा समझ गया – बस अब ये आखरी है, इसके बाद में नही पियूँगा और खुद से बद्बदाने लगा |

मयूर ने वेटर को कुछ खाने का लाने को कहा, अब बूढ़े को खाने के बाद ही पूछताछ करनी चाहिए |

कुछ देर में टेबल पर आमलेट, टूना और मिक्स वेज आ गई, बूढ़े ने रोटी का एक टुकड़ा तोड़ते हुए कहा – तो तुम उनको मारने आये हो ?

मयूर ने कहा – ऐसा ही समझ लो, क्या आपकी भी उनसे कुछ दुश्मनी है ?

हाँ उन दोनों को छोड़ना मत, में उनको इस धंधे में लाया और उन्होंने मुझे ही दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर बाहर फेंक दिया |

कौन सा धंधा ? - मयूर ने बहुत धीमी आवाज में दूसरी और देखते हुए पूछा

देखो वो दोनों अंडरवर्ल्ड डॉन बोनी के लिए काम करते है, बोनी एक खतरनाक गैंगस्टर है जिसका दबदबा इस पुरे इलाके में चलता है, और ये दोनों उसके शार्प शूटर है, जब भी कोई बोनी से दुश्मनी लेने की गलती करता है, ये दोनों उसका ऊपर जाने का इंतजाम करते है, बस इतनी सी कहानी है |

तो बोनी की रागिनी से क्या दुश्मनी हो सकती है ? – मयूर ने मन ही मन सोचा

आप किसी रागिनी नाम की लडकी को जानते है ? – मयूर ने बूढ़े से पूछा

नहीं में किसी रागिनी को नही जनता, पर तुम क्यों पूछ रहे हो – बूढ़े ने प्लेट में रखा सारा खाना लगभग अपने पेट में डाल लिया था, और वेटर के लाये आखरी पेग को अपने होठो तक लगाने की कोशिश कर रहा था |

और मयूर ने कहा – ये दोनों रागिनी नाम की एक लडकी को जान से मारना चाहते थे, मैं उसी लडकी को ढूंडते यहाँ आया हूँ |

मुझे इस लडकी के बारे में कुछ नही पता, पर ये बात निश्चित है ये दोनों हथियार सिर्फ बोनी के लिए उठाते है, और अगर बोनी चाहता है की उस लडकी का टिगिट कट जाये तो ये मान लो वो अब इस दुनिया में नहीं है, और तुम भी चुपचाप इस इलाके से बाहर निकल जाओ, क्योकि अब तक निश्चित ही बोनी को खबर लग गई होगी की तुम उसके दोनों पठ्ठो को ढूंड रहे हो |

मयूर का मन भारी हो गया – डर का हल्का भाव उसके मन में आया – वो गैंगस्टर से भिड़ने जा रहा था, फिर उसने सोचा अब जो हो सो हो, वो पीछे नही हटेगा |

ये दोनों गुंडे कहा मिलेगे – मयूर ने पूछा

देखो तुम इन सबमे मुझे मत घसीटना और हा आज के बाद मुझसे मिलने की कोशिश भी मत करना, वो दोनों तुमको बे एंड बेब्स बार एंड डांस क्लब में मिलेंगे दोनों वहा रोज जाते है, वो डांस क्लब इन दोनों का ही है |

मयूर को अपनी जानकारी मिल चुकी थी, उसने एक 500 का हरा नोट निकला और बूढ़े को देते हुए बोला, आप बाहर से टैक्सी लेकर अपने घर चले जाओ, में थोड़ी देर यहीं रुकुंगा |

बूढ़े ने कुछ देर मयूर को देखा और बोला – देखो बेटा, तुम भले घर के लगते हो, ऊपर वाले ने तुमको सबकुछ दिया है, खूबसूरत हो, जवान हो पूरी जिन्दगी पड़ी है, इन चक्करों में मत पड़ो, वो बहुत खतरनाक लोग है, खामखा क्यों मछलियों का भोजन बनना चाहते हो, मेरी सलाह मानो अभी इसी समय इस इलाके से दूर चले जाओ, अभी भी सबकुछ तुम्हारे हाथ में है |

मयूर ने बैचेनी से पहलू बदला – पिछले दो दिनों में उसने अनगिनत लोगो को उन दोनों गुंडों के फोटो दिखाई थी और उनकी आँखे भय से पिली होते देखी थी, कुछ तो सर इंकार में हिलाने का साहस भी नहीं कर पाए थे |

उसने बूढ़े के हाथ पर हाथ रखा और बोला – आप मेरी चिंता मत करो चाचा आपकी सलाह के लिए शुक्रिया |

बूढ़े के चेहरे पर एक मुस्कान उभर आई – जवानी में जान से ज्यादा लडकी प्यारी होती है, मैं भी तुम्हारी तरह ही था |

मयूर मुस्कुराया – फिर कभी आपकी भी कहानी सुनेगे

बे एंड बेब्स बार, अंडरवर्ल्ड, बोनी डॉन ये सब उसने सोचा नही था, आखिर पहाड़ो के एक होटलइएर लडके और रागिनी जैसे मासूम लड़की को एक डॉन से क्या लेना देना, पर किस्मत ने उसे इस खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया था, और वो अपने कदम वापिस नही ले सकता था, अब जो हो सो हो, मौत तो मौत, जीवन तो जीवन, वैसे भी रागिनी के बिना जीना भी कोई जीना होगा |

फिर उसने सोचा – आखिर उस सादी सी दिखने वाली लडकी का किसी पावरफुल डॉन से क्या कनेक्शन हो सकता है, कोई बात नही मंजिल अब बहुत करीब है, कल रात 8 बजे मोनी सोनी बोनी जो भी नाम है इनके, मिलकर दिमाग क्लियर करना ही पड़ेगा की आखिर ये माजरा क्या है ?, फिर उसे बूढ़े के कहे शब्द याद आ गये – वो बहुत खतरनाक लोग है ?

बचपन से पहाड़ो पर उसने बहुत खतरे देखे थे, खतरों से वो डरता नही था, खतरे को सूंघ लेता था, और उसका अनुभव बोल रहा था, खतरा बड़ा है |

उस दिन पूरा वो अपने होटल के रूम से बाहर नही निकला, शाम 7 बजे वो बे एंड बेबस डांस बार में पहुचा, वो बाहर से किसी छोटे मोटे महल की तरह दिख रहा था, वो लाउन्ज पार करता हुआ बार के मेन गेट के बाहर खड़े दरबान ने उसे सलाम किया और बोला –

क्या आपके पास बार का इन्विटेशन कार्ड है ?

उसे नही पता वो किस कार्ड की बात कर रहा था, उसने इंकार से ,मुंह हिलाया

फिर आप अन्दर नही जा सकते – गुंडे जैसे दिखने वाले दरबान ने कहा – या तो आपके पास किसी गेस्ट का आई डी कार्ड होना चाहिए या आप बार के रेगुलर मेम्बर होने चाहिए तभी आप अन्दर जा सकते है |

मयूर अजीब उलझन में फंस गया उसके मुंह से खिसियानी आवाज निकली – मैंने तुम्हारी बार बहुत तारीफ सुनी थी, इसलिए सारे बार छोड़कर इतनी दूर तुम्हारे बार तक आया हूँ, अब मेम्बर बनने के लिए कभी न कभी तो पहली बार आना ही पड़ेगा न |

पर दरबान उसकी बातो से संतुष्ट नही हुआ – सॉरी सर आप अन्दर नही जा सकते |

और उसने कहा – देखो मुझे तुम्हारे बॉस ने बुलाया है उनका नाम मोनी है |
 
दरबान के चेहरे पर तुरंत सम्मान के भाव आये – वो मुस्कुराता हुआ बोला – ठीक है अगर आपको मौनी भाई ने बुलाया है तो आपको पहले बताना था और दरवाजा खोल दिया |

अन्दर बहुत कम रौशनी में लाल रंग के सोफे लगे थे, जिनपे कुछ लोग बैठे थे, एक बड़ा सा बार काउंटर था, जिसपर दो लोग बैठे शराब और सिगरेट का धुआ उड़ा रहे थे, दो जवान लडकिया एक स्टेजनुमा खम्बे के आसपास अश्लील मुद्रा में डांस कर रही थी |

वो धीरे धीरे चलता हुआ एक सोफे पर बैठ गया, और वेटर को ब्लू मार्टीनी का एक पेग आर्डर किया |

वेटर पेग ले कर आया और मयूर ने उसको कहा – ये सोनी मोनी कहा मिलेगे, उनको बोलना मसूरी से उनका दोस्त आया है |

वेटर ने आश्चर्य से कहा – कौन रोनी मोनी आप हमारे भाई की बात कर रहे है ?

हा वो ही तुम्हारे मालिक की बात कर रहा हूँ, कहा मिलते है वो ?

पीछे ऑफिस है, पर अभी आये नही है |

मयूर ने गिलास उठाया और वेटर की तरफ चियर्स का इशारा किया, और वो तुरन्त वहां से हट गया |

उसने गिलास खाली किया, टेबल पे रखा बिल के पैसे रखे और वाशरूम की तरफ बढ़ गया |

रोनी और मोनी उस दिन थोड़े लेट हो गये थे, उनकी गाड़ी जब होटल में इंटर हुई, और उन्होंने अपनी पॉकेट संभाली, रागिनी के हाथ उस दिन मरते मरते बचने के बाद दोनों ने डीसाईंड किया था की अब उनका चाकू पुराना पड़ चूका है, अब तो उनके धंधे की लडकिया भी तमंचे ले कर घुमने लग गई है |

अपने इलाके में आने के बाद सबसे पहले उन्होंने दो विदेशी पिस्टल का आर्डर किया और दोनों ने अपनी जेब में फुल्ली लोडेड पिस्टल रखना शुरू कर दी |

वो गेट पर पहुचे और दरबान ने कहा – मोनी भाई आपका एक गेस्ट आया है, जिसको आपने इनवाइट किया था, अन्दर आपका इंतजार कर रहा है |

दोनों ने एक दुसरे देखा और दरबान से बोला – कोई भी बोलेगा की हमने बुलाया है तो क्या अन्दर जाने देगा – गुस्से से उसका काला मुंह और भद्दा दिखने लगा था |

दरबान ने घिघियाते हुए कहा – मुझे क्या पता, मैंने सोचा कही आप नाराज न हो जाये, इसलिए मैंने उसे अन्दर जाने दिया |

रोनी जिसकी नाक पर हल्का सा प्लास्टर लगा था, वाकई में भद्दा और भयानक लग रहा था, तेजी से दरवाजा खोल कर रिसेप्शन पर पहुचा – क्या मेरा पूछने कोई आया था ?

रिसेप्शन पर बेठी लड़की फ़ौरन खड़ी हो गई – नही सर यहाँ तो कोई नही आया अभी तक आपका पूछने |

सुनो अगर कोई आये तो फ़ौरन मुझे फ़ोन करना |

वो किचन की और बढ़ा और वहाँ खड़े सारे वेटर पे चिल्लाया – क्या कोई मेरा आज पूछ रहा था

सबने एक दुसरे को देखा और एक वेटर आगे आया – एक जवान लड़का था, जिसने कहा वो आपका दोस्त है और मिलने आया है |

बेवकूफ – जवान तो बहुत लडके है, वो दिखता कैसा था |

उसकी आखे नीली थी – वेटर ने कहा

रोनी ने मोनी की तरफ देखा एक ने अपनी नाक और दुसरे ने अपनी आखो के निचे पड़े काले धब्बो पर हाथ रखा और दोनों बदहवास हो गये – वो यहाँ तक आ गया, उसकी इतनी हिम्मत ढूंढो उसे, उसको तंदूर में भून कर चिल कव्वों का लंच बनाना है आज |

दोनों तेजी से बार में आये और वहा खड़े दो बाउंसर से रोनी ने चिल्ला कर कहा – एक नीली आखो वाला, गौरा लम्बा लड़का बार में घुसा है, साउंड बंद करो, बार से बाहर जाने का रास्ता बंद कर दो, वो हमे चाहिए जिन्दा .... चाहे मरा हुआ, और उसने अपनी नाक पे हाथ रखा जो अभी भी दुःख रही थी |

तुरंत म्यूजिक बंद हो गया, लगभग 15 से ज्यादा गुंडे और बाउंसर मिला कर पुरे बार में मयूर को खोज रहे थे, और उनके साथ रोनी मोनी भी इधर उधर दौड़ रहे थे |

उन्होंने बार का चप्पा चप्पा छान मारा पर नीली आखो वाला लड़का उन्हें कही नही मिला |

दरबान ने कहा – मैंने उसे बाहर जाते नही देखा, जब वो अन्दर नही था, बाहर जाते नही देखा तो वो गया कहा मोनी ने गुस्से से कहा |

कुछ देर बाद सबने निष्कर्ष निकला की जरुर वो यहाँ से निकलने में कामियाब हो गया था |

रोनी मोनी दोनों का मूड खराब हो चूका था, रोनी जिसकी आख फूटी थी मटन काटने का छुरा ले कर पागल सांड की तरह इधर से उधर घूम रहा था, उसे शराब की तीव्र तलब लगी और वो बार की तरफ बढ़ा, बार टेंडर ने उसका पसंदीदा ब्रांड की बोतल उसके आगे कर दी |

मोनी अपनी नाक को बार बार सम्भाल रहा था, गुस्सा उसे भी आ रहा था पर वो डर भी रहा था, वो लड़का निश्चित ही जुडो के किसी ब्लैक आर्ट का जानकार था, तभी उसने उसको और रोनी को ऐसे नाजुक अंगो पर चोट पहुचाई थी जहाँ तेज दर्द उठता है, और वाकई में उस रात का दर्द वो जीवन भर नही भूल सकता |

सोचते सोचते वो अपने ऑफिस में घुसा, उसने लाइट का स्विच ओन किया और पूरा ऑफिस सफेद रौशनी में नहा गया, उसने अपनी कुर्सी की और देखा, और उसकी आखे डर से काली पड़ गई, उसकी कुर्सी पर बैठा एक शख्श नीली आखो से उसकी और देख रहा था |

तुम, तुम्हारी इतनी हिम्मत – कहते हुए मोनी ने अपने जेब में हाथ डाला और एक सिल्वर क्लर की खिलोने जेसी पिस्तौल उसके हाथ में आ गई उसने पिस्तौल मयूर की और लहराई और कहा –आया तो अपने पांव पे है पर जायेगा नही |

मयूर के चेहरे पर इत्मिनान के भाव थे उसने अपना हाथ हवा में उठाया और रुकने का इशारा करते हुए कहा – मोनी भाई मैं यहाँ फाइट करने नही आया हूँ, तुमसे कुछ बात करने आया हूँ |

बात भी करेंगे, मुलाक़ात भी करेंगे पर पहले पुराना हिसाब तो चुकता कर ले – मोनी ने अपना हाथ अपनी नाक तक ले जाते हुए कहा और मयूर की दिशा में फायर कर दिया |

उसने बहुत फुर्ती से अपने आप को एक तरफ झुकाया और गोली उसके पास से होती हुए पीछे दीवाल के पास रखे एक गुलदस्ते को जा लगी, जो टुकडे – टुकडे हो कर फर्श पर बिखर गया |

एक तरफ 40 के आस पास पहुच चूका शराब, और सिगरेट का आदि मोनी और दूसरी तरफ पहाड़ी, कसरती, फुर्तीला मयूर |

एक गोली चलाने के बाद मोनी के हाथ कांप रहे थे, वो तो चाकू का खिलाडी था, उसने गोली पहली बार चलाई थी और वो भी निशाने पर नही लगी थी, वो अपने आप को कमजोर महसूस कर रहा था |

मयूर तेजी से उठा और उसने चीते की फुर्ती से मोनी के बिलकुल पास पहुच गया, उसने मोनी का रिवाल्वर वाला हाथ पकड़ा और बोला – मोनी भाई मैंने तुम्हारी जान बचाई है, अगर उस दिन मैं रागिनी का हाथ ऊपर नही करता तो तुम उसी मेला ग्राउंड के बाहर मरे पड़े होते |

उसने बड़ी मुश्किल से कहा – कौन रागिनी, तुम किसकी बात कर रहे हो ?
 
मोनी हकलाने लगा था, उसका हाथ अब मयूर के हाथ में था, और पहले भी वो मयूर के हाथ से अपनी नाक तुडवा चूका था, वो अपने आप को बहुत अशक्त महसूस कर रहा था – काश इस रिवाल्वर में साइलेंसर नही लगा होता तो अभी तक रोनी और उनके पालतू बाउंसर उसकी मदद के लिया आ चुके होते |

वो ही लडकी जिसको तुम उस दिन मेले में जान से मारने आये थे, और लडकी ने रिवाल्वर निकल ली थी |

उसका नाम रागिन नहीं है, उसका नाम मोना मलिक है, तुम जानते हो कबीर मलिक को, वो यहाँ का सबसे बड़ा डॉन है, वो उसी की लडकी है, तुम उसको ढूंडते हुए यहाँ तक आ गये, पर तुमको मालूम नही तुम आग से खेल रहे हो, जब मलिक को पता चलेगा की तुम उसकी लडकी के पीछे यहाँ तक आ पहुचे हो, तुम्हारी मौत को ऊपर वाला भी नहीं टाल सकेगा |

तुम उसको मारना क्यों चाहते थे ?

हम नही हमारा बॉस बोनी उसको मरना चाहता था, दस साल पहले हमारे बॉस बोनी की पत्नी की हत्या तुम्हारी महबूबा के बाप मालिक ने कर दी थी, तब बोनी ने कसम खाई थी की मलिक के परिवार में किसी को जिन्दा नही छोड़ेंगे, कुछ साल पहले मलिक की माँ को भी हमने टपका दिया था, और अब उसकी इकलौटी बेटी, मोना मलिक हमारे निशाने पर है, और उसका काम तमाम हम बहुत जल्दी कर देंगे |

उसके मन में रोनी का मुह तोड़ने की तीव्र इच्छा हो रही थी, आखिर वो उसकी रागिनी की जान का दुश्मन बना बैठा था, पर इस काले, गुंडे को और मार कर वो अपने हाथ गंदे नही करना चाहता था, उसने रोनी की कलाई पर अपनी मजबूत पकड़ को और बढाई और रिवाल्वर उसके हाथ से छुट कर जमीन पर गिर गई, उसने कलाई को पकड़े पकड़े निचे झुक कर रिवाल्वर उठाई और रोनी की और तान दी – देख रोनी में यहाँ तुझसे फालतू झगड़ा करने नहीं आया हु, मुझे जो जानकारी चाहिए थी वो मिल चुकी है, अब तुम मुझे यहाँ से बाहर निकलना तेरी जवाबदारी है, मेरा अब तुझसे कोई वास्ता नही, मैंने तेरी जान बचाई थी, और लडकी की जान बचाना भी मेरा फर्ज था, तू समझ रहा है न मैं क्या बोल रहा हूँ |

मोनी का ध्यान रिवाल्वर की तरफ था, वो धीरे से फुसफुसाया – यहाँ एक चोर रास्ता है, जो हमने किसी इमरजेंसी के समय भागने के लिए बनवाया था, तुम उस रास्ते से बाहर निकल जाओ, और हाँ किसी को बोलना मत की तुमने मुझे दो बार मारा है |

मयूर ने सहमती से सर हिलाया – चलो बाहर का रास्ता दिखाओ |

उसने एक बटन दबाया और ऑफिस के फर्श पर एक सुरंगनुमा रास्ता दिखाई देने लगा, मयूर तेजी से सुरंग में उतर गया, कुछ ही देर में वो बे एंड बेबस बार के बाहर खड़ा था |

मोना मलिक तो ये असली नाम था रागिनी का |

पहेली लगभग सुलझ गई थी, रागिनी उर्फ़ मोना अंडरवर्ल्ड डॉन की लडकी थी, गेंगवार में उसकी जान पर बन आई थी, संभवतः वो इस घुटन भरे डरावने माहौल से दूर जाना चाहती हो और हिमाचल में आई हो, पर वो दूर जा न सकी, उसका अतीत परछाई की तरह उसका पीछा करता हुआ हिमाचल तक आ पहुचा, और वो उसे बताये बिना वापस अपनी अपराध और भय की दुनिया में लौट आई, ताकि वो सुरक्षित रह सके |

वो तैयार होकर ठीक 6 बजे बार के सामने वापिस उसी चने की रेहड़ी के पास खड़ा था, और बूढ़े का इंतजार कर रहा था, अभी कुछ सवाल बाकि थे, जो उसे रागिनी से पूछने थे, एक बार वो तैयार हो जाये तो वो रागिनी के साथ किसी ऐसी जगह जाने को तैयार था जहाँ उन्हें कोई नही पहचाने |

बुढा धीरे धीरे चलता हुआ गली के किनारे तक बढ़ता हुआ दिखाई दिया, शायद वो गली में ही कही रहता है, घर भी उसने बार के पास ही बनाया था, ताकि दूर नही जाना पड़े, वो तेजी से रेहड़ी के पास से निकला और बूढ़े के सामने रास्ता रोक कर खड़ा हो गया |

उसे देखते ही बूढ़े की आखो में चमक उभर आई वो फिर बोला – तुम नही मानोगे, पर आज में तुम्हारे साथ नही चलूँगा तुम्हारे साथ मेरी भी जान पे बन आएगी |

मयूर ने बोला – आज आपसे कुछ पूछना नही है, बस अकेले पीने के मन नहीं कर रहा है |

बूढ़े ने आस पास देखा, कही कोई देख तो नही रहा, पूरी तरह से आश्वस्त होने के बाद वो बोला – वही चलना है जहा कल गये थे ?

उसने हां में सर हिलाया, और दोनों सामने खड़ी टैक्सी की और बढ़ गये |

फिर वही होटल वही माहौल वही शराब – वेटर ने दोनों को पहचान लिया और फ़ौरन उनकी टेबल पे आ कर खड़ा हो गया |

मयूर ने कहा कल वाला आर्डर रिपीट कर दो, और वेटर फुर्ती से बार टेंडर की और चल पड़ा |

मिल आये रोनी, मोनी से – बूढ़े ने पूछा

नहीं बाबा – कल मेरी फ्लाइट है, आपने सही कहा था, मुझे इस खतरनाक चक्कर में नही उलझना चाहिए |
 
बुढा संतुष्ट दिख रहा था, बोला – बेटा, ये तुम्हारे बस की बात नही है, तुम कल चले जाओ, और फिर कभी यहाँ मत आना, तभी वेटर दोनों के गिलास ले आया |

फिर चोथा पेग और बूढ़े की जुबान लड़खड़ाने लगी, उसने मौका देख कर पूछा – ये मलिक कहा रहता है ?

बूढ़े के मुह से शराब का गिलास छलक गया, उसने खांसते हुए गिलास टेबल पर रख दिया – तुमने तो मेरी पूरी दारू उतार दी, मलिक इस शहर का सबसे बड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन है, अब उससे क्या काम है तुम्हे |

मयूर ने कहा – उसकी लडकी मोना और में एक दुसरे को प्यार करते है |

बूढ़े को जैसे सांप सूंघ गया – मजाक मत करो, वो दोनों रोनी, सोनी सड़कछाप गुंडे है जो मलिक से दुश्मनी की वजह से उसके बराबर वजूद बना बैठे, असली डॉन तो मलिक ही है, और मलिक इतना जल्लाद है, जिसकी कोई हद नही है, तुम्हारी फ्लाइट कब है कल ?

सुबह 7 बजे में यहाँ से निकल जाऊंगा – उसने झूठ बोला, वो बूढ़े को डराना नही चाहता था |

फिर मलिक का क्यों पूछ रहे हो ?

ऐसे ही, जाने से पहले उसके बारे में जिज्ञासा बढ़ गई है, जाते जाते पता तो करू कि मेरी माशूका का बाप है किस खेत की मुली |

दोनों के बीच सन्नाटा छा गया, फिर मयूर ने पूछा – मलिक कहा रहता है |

वेटर कल के अनुभव से समझ चूका था की बूढ़े को गिलास पे गिलास दारू लगेगी, उसको टुन्न करना है | ये उसका 6 पेग था, महंगी दारू अपना कमाल दिखा रही थी – उसने कहा, वो जहा रहता है तुम वहाँ किसी भी तरीके से नही पहुच सकते, मैंने क्या बोला – बुढा बहकते हुए बोला – बिना उसकी मर्जी के कोई भी वहाँ तक नही जा सकता है, तुम भी नहीं, में भी नही, कोई नहीं |

उसे झुंझलाहट हो आई, आखिर ये सीधे से बता क्यों नही देता, रागिनी कहा रहती है |

बुढा मयूर के कान के पास आ के धीरे से फुसफुसाया – यहाँ कोंकों बीच है जहाँ से 10 नोट साउथ में एक छोटा टापू है, वहाँ पर बोट से ही जाया जा सकता है, मलिक वही रहता है, उसके फंटूस लोग हथियारबंद हमेशा चारो और निगरानी रखते है, अगर कोई आस पास दिखाई भी दे जाता है तो उसको बेहोश करके मालिक के सामने पेश किया जाता है, और अगर वो अपने टापू के आसपास होने का सही कारण नही दे पता है तो उसे मार का टापू पे मगरमच्छ के तलाब में डाल दिया जाता है |

वहा जाने का कोई सेफ रास्ता ?

बूढ़े ने ऊपर की और इशारा किया – पहले ऊपर जाओ और आत्मा बन जाओ फिर उस टापू पे आसानी से पहुचा जा सकता है |

मयूर ने खाने का इशारा किया और बूढ़े का एक पेग और लाने का इशारा किया, बुढा 8 पेग याने आधी बोतल डकार चूका था और लडखडाती जुबान में बडबडा रहा था |

खाना लगते ही बुढा उसपर टूट पड़ा – तुमको मालूम है पिने के बाद मुझे बहुत भूख लगती है |

मयूर ने कोई जवाब नही दिया, उसका दिमाग सोच रहा था, कैसे वो रागिनी उर्फ़ मोना तक पहुचे |

अगर आप मुझे वहाँ तक पहुचा दो तो में आपको मुहमांगी कीमत देने को तैयार हूँ |

बुढा शराब के नशे में जोश में आ गया था, उसके दिल में से मलिक का डर खतम हो गया था, किसी जमाने में उसका भी नाम चलता था, मालिक उसके सामने ही देखते देखते अंडरवर्ल्ड डॉन बन गया था |

वो अगर मुझे बुलाएगा तो ही जाऊंगा, पुराना यार है मेरा, हम दोनों साथ में ही बीच पे खाली बोतलें उठा उठा कर कबाड़ी को बेचा करते थे, एक दिन उसको पुलिस ने पकड़ लिया, और पीछे से किसी ने उसकी बाप का मर्डर कर दिया, जब वो बाहर आया तो उसने अपने बाप के हत्यारे के पुरे परिवार को उनके ही घर में आग लगा का जिन्दा जला दिया, तब से सब उससे खौफ खाने लगे और वो यहाँ का बेताज बादशाह बन गया, बोनी, रोनी दोनों उसके साथ ही काम करते थे, पर बाद में उनमे पैसे को लेकर झगड़ा हो गया और मलिक दोनों की जान का दुश्मन बन गया, मलिक और उसकी बेटी को जान का बहुत खतरा है, वो फुल प्रोटेक्शन में रहते है, उनके पास आटोमेटिक गन्स है, मेने सुना है वो एक बार ट्रिगर दबाने पे 16 गोलिया फायर करती है, इन्सान का बचना नामुमकिन है |

मयूर बहुत ध्यान से सुन रहा था, उसने फिर दोहराया – कोई तो रास्ता होगा उन तक पहुचने का ?

बुढा नशे में था पर आउट नही हुआ था – तो तुम कल वापिस अपने शहर नही जा रहे हो तुम मालिक की लडकी से मिले बिना नही जाओगे और वही तुम्हारा राम नाम सत्य हो जाएगा, भगवान की कसम मेरा नाम इस सबमे मत घसीटना, इस उम्र में मैं बेमौत नही मरना चाहता हूँ

कसम से मेरी जान चली जाएगी पर आपका नाम नही लूँगा, आप मुझे वहाँ तक जाने का रास्ता बताइए ?

कोई रास्ता नहीं है, केवल मलिक चाहे तब ही कोई उस टापू पे कदम रख सकता है, उसकी मर्जी के बिना नही |

मयूर ने फिर 500 का नोट अपने पॉकेट से निकला और बूढ़े को पकड़ा दिया, अब शायद हम कभी नही मिलेगे |

बूढ़े ने नोट झपटा और नशे में बोला – मलिक को मेरा सलाम बोलना |

और आपका नाम क्या है ? – मयूर ने पूछा

जाने दो मत बोलना, तुम मेरा नाम इसमें मत घसीटो – उसने एक झुरझुरी लेते हुए कहा – बेमौत मरना कौन चाहता है |

एक बात और – उस टापू तक सप्लाई ले कर कौन जाता है, खाने पिने का सामान और दूसरी जरूरत की चीजे ?

उनकी अपनी स्पीड और क्रुईस बोट्स है, सबपर लाला अक्षर से एम लिखा है, पर तुम उन में छुप कर वहा तक जाने की मत सोचो ये नामुमकिन है |

उसने कोंकों बीच की सुनहरी रेत पर कदम रखा, समुद्र का पानी साफ और नीला था, जो किनारे तक आ कर वापिस लौट रहा था, सूरज आसमान में आग के गोले की तरह चमक रहा था, किनारे पर कई तरह की छोटी बड़ी रंग बिरंगी बोट्स खड़ी थी, कुछ पर झंडे लहरा रहे थे, फिशिंग, स्पीड, क्रूस बोट डॉक से बंधी पड़ी थी, मछुआरे समुद्र में अपनी किस्मत आजमाने निकल रहे थे, कुछ अपनी बोट को ठीक कर रहे थे |

वो बीच के सामने बने एक बार में जा कर बैठ गया और वेटर को बियर का आर्डर किया, वहा उस समय एक भी बोट ऐसी नही थी जिसपर लाल कलर से ऍम लिखा हो, लगभग दोपहर के 3 बजे एक आलिशान बोट बीच पे लगी, डॉक पे पहले से तैयार सप्लाई वेन में से दो संदूक उतारे गये, बोट पे खड़े दो बॉडी बिल्डर ने दोनों संदूको को अच्छी तरह से चेक किया और ओके का इशारा किया, संदूक बोट पे चढ़ा दिए गये, और कुछ ही मिनटों में बोट समुद्र में वापिस अपनी मंजिल की और बढ़ गई, मयूर ने देखा बोट के चारो और कैमरे लगे थे, कोई चाह कर भी समुद्र के रस्ते बोट में घुसकर छुप नही सकता था |

उसने जोर कि साँस ली – अपनी सिक्यूरिटी को लेकर मालिक फॅमिली बहुत ज्यादा ही सतर्क है

उसे रागिनी की याद सता रही थी और वो ज्यादा देर नही रुक सकता था, उसके दिमाग में एक तरकीब आई, और वो अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ |

धीरे धीरे चलते वो एक स्पीड बोट वाले के पास पहुचा और बोला – मुझे 10 नोट साउथ तक जाना है, कितने पैसे लोगे |

वो तो मालिक का टापू है – उसने संदेह की नजरो से मयूर को देखते हुए पूछा – क्या काम है वहाँ तुम्हे ?

मुझे मलिक से मिलना है, पेरसनल काम है ?

अगर मलिक को तुमसे मिलना होगा तो वो यहाँ तक बोट भेज देंगे तुमको लेने के लिए, अगर बिना इजाजत उस टापू के आस पास भी फटके तो मौत के मुंह में जाओगे |

तुम पैसे बोलो ?

जान नही देनी मुझे, अपना काम करो – कहते हुए बोट वाले ने अपनी बोट आगे बढ़ा दी |

मयूर ने यही प्रस्ताव वहाँ खड़े हर मछुआरे, और बोट के मालिक से पूछा और सभी ने एक ही जवाब दिया – मरना है क्या, बिना इजाजत उस तरफ मुंह करके भी मत सोना रात को |

तक़रीबन एक घंटा लगा उसे जब बीच पर एक भी बोट ऐसी नही बची जिसके मालिक से उसने बात नही की हो, और मालिक के टापू तक जाने का अपना इरादा नही बताया हो वो थक कर मायूस सा मुंह बना कर वापिस किनारे पर बार में आ कर बैठ गया |

उसने अपना काम कर दिया था, अब उसे इंतजार करना था, यही उसका प्लान था, जिसका एक चरण पूरा हो चूका था, वो शाम 6 बजे तक अपने प्लान के दुसरे चरण के शुरू होने का इंतजार करता रहा, पर अभी तक उसे ऐसे कोई आसार नही दिख रहे थे |

अँधेरा गहरा गया था और रात के 8 बज चुके थे, उसे लगा उसका प्लान शायद फ़ैल हो गया है, उसे कोई और रास्ता अपनाना पड़ेगा तभी डॉक पर एक तेज रौशनी में नहाया हुआ जहाज आ कर लगा और उसकी हेड लाइट से बीच का वो हिस्सा नहा गया, उस बोट पर लिखा था ऍम |

मयूर तन का बैठ गया, लगता है उसका प्लान सफल हो गया है, वो काफी देर से इसी बोट का इंतजार कर रहा था, रागिनी से उसे आज ही मिलना था, चाहे कुछ भी हो जाये – उसने मन ही मन निश्चय कर रखा था |

उसने देखा बोट में से चार गुंडे जैसे दिखने वाले आदमी निकले, सभी ने सलीके से जीन्स और टी शर्ट पहन रखी थी, बीच पर उतरे, तभी एक साया बोट के पास से निकला और उन चारो तक पहुचा, कुछ सेकंड की बात के बाद साये ने अपनी ऊँगली उस बार की और बढाई जहा मयूर बैठा था |

चारो तेज कदम चलते हुए बार में घुसे और चारो और देखा – बार के मालिक का चेहरा भय से पिला पड़ गया, चारो ने मयूर को देखा और उसकी और बढ़े, उनमे से एक धीमी आवाज में बोला – तो तू है वो जो चुपके से टापू पे जाने की कोशिश कर रहा था ?

मयूर ने कहा – हाँ में ही हूँ मुझे मालिक साहब से कुछ काम है |

क्या काम है, मलिक साहब से, और तेरा नाम क्या है ?

मेरा नाम मयूर है और में मोना का फ्रेंड हूँ |

गुंडा जिसका नाम जॉय था, आश्चर्य से बोला – तू और मोना का दोस्त, ऐसा कैसे हो सकता है, तो तू मोना से मिलने यहाँ तक आया है, और वो हसने लगा, उसने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और फोन पे बोला – एक नीली आखो वाला जवान लड़का है, अपना नाम मयूर बता रहा है, आपसे मिलना चाहता है, अपने आपको मोना का दोस्त बता रहा है |

दूसरी तरफ से मलिक ने लाइन पर कहा – मयूर, और रागिनी जो उसके साथ डिनर कर रही थी की तरफ देखा |
 
रागिनी ने चौक कर सर उठाया और मलिक की तरफ देखा – रागिनी ने कहा – मयूर कौन ?

मलिक ने कहा – एक लड़का पोर्ट पर टापू तक आने की कोशिश कर रहा था, वहा के बोट वाले ने जॉय को इन्फॉर्म किया और वो अपने आदमियों को लेकर उसको पकड़ने गया था, मजे की बात ये है की वो लड़का बोल रहा है की वो तुम्हारा दोस्त है |

मयूर – ये वही लड़का है जिसने मसूरी में मुझे रोनी मोनी से बचाया था, प्लीज डैडी ही इस अ नईस गाए, उससे अच्छा व्यव्हार करना मेरी खातिर – रागिनी

तुम जानती हो हमारी दुनिया अलग है, हमारी मजबूरी है, हम बाहर की दुनिया से कोई वास्ता नही रख सकते, तुम मेरी इकलोती सन्तान हो इसलिए में उसे अल्लो कर रहा हूँ, तुम उसको जल्दी से जल्दी यहाँ से जाने का बोल देना, आज सुबह में क्रोकोडाइल पोंड पे गया था, वहा के मगरमच्छ मुझे बहुत हसरत से देख रहे थे, बहुत दिनों से मैंने उनको खाना नही दिया |

रागिनी उसका मतलब समझ गई – उसने मेरी जान बचाई है डैड, में उसको समझा दूंगी वो फिर कभी नही आएगा यहाँ |

मलिक ने दुनिया देखी थी, पर प्यार नाम का शब्द उसके शब्दकोष में नही था, उसने कहा – यही बेहतर होगा, उसने तुम्हारी जान बचाई, ये उसका अहसान है मुझपर, इसीलिए में उसकी जान बख्श रहा हूँ |

और वो उठकर अपने कमरे में सोने चला गया |

उस समय रात के 10 बजने आये थे, जो लडकी मयूर से रागिनी के नाम से मिली थी उसका असली नाम मोना था, बेसब्री से बीच पर मयूर के आने का इन्तजार कर रही थी, लाख प्रयासों के बाद भी उसके जज्बात काबू में नही आ रहे थे, एक तरफ उसके पिता की विरासत थी, जिसमे वो प्रिंसेस थी, पर घुटी हुई, दूसरी तरफ मयूर था जो उसका प्यार था, उसने जीवन में किसी और को इतना अधिक नही चाहा था, जितना मयूर को चाहा था, और उसने साबित भी कर दिया था, की वो पूरी तरह से उसके योग्य है, कैसे तेसे कर के उसने उसको खोज ही लिया था |

बोट धीरे धीरे पानी में रास्ता बनती हुई, बीच पे जा पहुची और सबसे पहले जॉय उतरा और मोना को देख कर सावधान की मुद्रा में खड़ा हो गया, फिर उसे मयूर सीढियों पर दिखाई दिया, वही टाउसर और सफेद शर्ट में चेहरे पर नीली आँखे और वही चिर परिचित मुस्कान लिए एकटक उसे ही देख रहा था |

उसने जॉय की तरफ देखा और वापिस जाने का इशारा किया, उसका चेहरा फत्थर की तरह सख्त था, आखिर उसके पिता की सारी विरासत उसे ही सम्भालनी थी – जॉय ने उसका संकेत देखा और अनमन से वहाँ से हट कर बीच के पीछे बनी झोपड़ियो की और चला गया, रह गये मयूर और मोना अकेले –

क्या नाम से बुलाऊ तुम्हे रागिनी, मोना, चमेली या अभी और रहस्य बाकि है |

उसने अपने को संयत करने का प्रयास करते हुए कहा – मुझे यहाँ सब मोना के नाम से जानते है, फिर वो चुप हो गई दोनों एक दुसरे को एकटक देख रहे थे – फिर वही उलझन और फिर यही नीली आँखे ही जीतेगी और वो दौड़ कर मयूर की बांहों में समां गई |

बीच पर समुद्र की लहरों को लेकर जो ठंडी हवाए चल रही थी वो थोड़ी और तेज चल रही थी, दोनों एक दुसरे से लिपटे लिपटे बीच के बीचो बीच खड़े थे, फिर एक दुसरे के हाथ में हाथ लिए चिपके मलिक के महल के पास से होते हुए महल के पीछे चले गये, बालू रेत में दो प्रेमियों के कदमो के निशान बनते जा रहे थे |

तो तुम मुझे ढूंढते हुए यहाँ तक आ पहुचे |

तुम्हे क्या लगा की तुम मुझे इतनी आसानी से छोड़ कर गायब हो जाओगी, और में तुमको भूल जाऊंगा – बीच पर मलिक के महल के पीछे दोनों अँधेरे में परछाई बनकर रेत के टीले पर बैठे एक दुसरे से गिले शिकवे दूर कर रहे थे |

तुम यहाँ तक आये ही क्यों, मैंने पहले ही कहा था ये दुनिया तुम्हारी नहीं है, मुझे ही भोगने दो इस नरक को, तुमको मालूम है, यहाँ मैं चैन से साँस भी नहीं ले सकती |

तो चलो यहाँ से दूर चलते है जहाँ हमे कोई नही पहचानता हो – मयूर ने उससे और चिपकते हुए कहा |

कही नही जा पाएंगे, तुमको मालूम है पहले भी क्या हुआ था, जब मैं तुम्हारे शहर आई थी, मुझे वो सब फिर नही दोहराना, तुम आखिर अपनी दुनिया में वापिस क्यों नही चले जाते, तुमको मालूम है अगर बिना सिक्यूरिटी के मैंने एक कदम भी इस आइसलैंड से बाहर निकाला तो मेरी बॉडी के टुकडे होना निश्चित है, और वो उससे और चिपक का बैठ गई – अगर हमारे दुश्मनों को तुम्हारे और मेरे रिश्ते के बारे में पता चल गया तो वो तुम्हे भी जिन्दा नही छोड़ेंगे |

क्या तुमको लगता है मैं इतनी आसानी से मरने वाला हूँ, और में मर जाऊंगा तो मेरी होटल कौन सम्भालेगा, उसके लिए दो नन्हे मुन्ने बच्चो की जरूरत होगी जो तुम मुझे दोगी |

तुम जैसा तो एक ही सौ के बराबर है, कहा से कहा आ गये तुम मेरे लिए, मैंने तो कभी सपने भी नही सोचा था की तुम मुझे ढूंढते हुए यहाँ तक आ जाओगे, मेरे आइसलैंड तक, कमाल है मिस्टर मयूर फ्रेडरिक तुम्हारा जवाब नही |

अभी तुमने मेरा कमाल देखा कहा है, कमाल तो जब होगा जब में तुम्हारे डैडी से तुम्हारा हाथ मंगुगा, शादी के लिए |

देखो मयूर बेबी अभी रात भी है अँधेरा भी तुमको जो चाहिए मुझसे मांग लो, अगर तुमने मेरे डैडी से कुछ भी माँगा तो तुमको बदले में बन्दुक से चली गोली भी मिल सकती है |

बेबी ये तो कल सुबह देखेंगे, दोनों में से कुछ भी चलेगा, या तो तुम या बन्दुक की गोली |

आर यू सीरियस – तुम कल डैडी से मुझे मांगने वाले हो, मुझे बहुत डर लग रहा है |

क्यों तुम मुझे नही चाहती हो क्या |

बहुत ज्यादा, में तुम्हारे लिए ही डर रही हूँ अगर गुस्से में डैडी ने कुछ ऐसा वैसा कर दिया तो में अपने आप को कभी माफ़ नही कर पाऊँगी |

तुम क्या समझती हो में यहा रोनी मोनी का बेंड बजा के समंदर पार करके घुमने आया हूँ, नो बेबी में तुम्हे लेने आया हूँ और ले कर ही जाऊंगा |

चलो अन्दर चलो, में तुम्हे तुम्हारा रूम दिखाती हूँ |

दूर अपनी बीच हट में बैठा जॉय, जो मालिक का दाया हाथ था, उन दोनों के काफी देर से वाच कर रहा था, उसका प्लान था की मालिक की लडकी से शादी करके वो पुरे धंधे का बेताज बादशाह बन जाये, इतने साल वो इसी आस में मलिक का हर हुक्म बजा रहा था की एक दिन वो इस सब का मालिक बन जायेगा, उसने अपना नाम भी सोच रखा था, मलिक के बाद मालिक, फिर सब कुछ उसका, पर इस लडके ने आकर उसका सारा प्लान चौपट कर दिया था, लगता है, उसे अब इस लडके को भी ठिकाने लगाना पड़ेगा |

उसकी आँख दोपहर की 12 बजे खुली और उसे रागिनी उर्फ़ मोना के साथ बितायी रात की मीठी याद आ गई, वो उठा, और फ्रेश होने बाथरूम में पहुच गया, वो बाहर आया, और बिस्तर के सिरहाने रखा फ़ोन बजने लगा, उसने रिसीवर उठाया और फिर वही दिलकश, खनकती हुए आवाज सुनाई दी – उठ गये, तुमने ब्रेकफास्ट स्किप कर दिया, कोई बात नहीं, डैडी और मैं तुमको ठीक 1 बजे लंच पर मिलेंगे निचे आ जाना |

वो कुछ जवाब देता उससे पहले ही फोन कट गया और डायल टोन सुनाई देने लगी |

उसके जीवन का एक उसूल था, वो कभी किसी काम में देर नही करता था, आज मुझे मलिक से बात करनी ही है, चाहे कुछ भी हो जाये |

वो ठीक 1 बजे निचे गया, और वहाँ खड़े खानसामा ने उसे डाइनिंग रूम का रास्ता दिखाया, वैसे भी उसने अपने जीवन में दुनिया के कई बड़े बड़े माफिया सरगनाओ की खिदमत की थी, पर ये लड़का उसके लिए पहेली था, ये सूरत से भले घर का लड़का दीखता है, इसका यहाँ होने का क्या मकसद हो सकता है ? – खानसामा सोच रहा था
 
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