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वो लाल बॅग वाली

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मयूर ने डाइनिंग रूम मैं कदम रखा, उस भव्य बड़े हॉल में एक बड़ी सी टेबल लगी थी जिसके आसपास लगभग 40 कुर्सिया करीने से सजी थी, हर कुर्सी के आगे टेबल पर सोने के कांटे और चम्मच उलटी रखी हुए थी, उसने अंदाज लगाया टेबल पर पड़े सारे बर्तन खालिस चांदी के थे, दीवारों पर आलिशान नक्काशी की हुई थी, और छत पर आलीशान झूमर लगा था, कुल जमा किसी महाराज का डाइनिंग रूम लग रहा था |

सामने सिट पर एक 60 साल का बुजुर्ग बैठा था, उसकी आखे लाल, बाल सफेद, पर चेहरे पर अजीब सी सख्ती थी, जो उसने पहले भी देखी थी, उसे रागिनी का फत्थर की तरह सख्त चेहरा याद आ गया, वो मलिक था, छोटे कद का, लेकिन कसरती बदन का मालिक मालिक |

वो आगे बढ़ा और उसने मलिक का अभिवादन किया, जवाब में मलिक ने भी अपना सर अभिवादन में हिलाया और अपने पास की कुर्सी पर बैठने का इशारा किया |

तुरंत वेटर ने लंच सर्व करना शुरू किया, सेंटर चेयर पे मलिक और उसके पास वाली कुर्सी पर मयूर और रागिनी आमने सामने बैठे थे |

तुम यहाँ अपने शहर से इतनी दूर केवल मुझसे मिलने तो आये नही हो, क्या इरादा है तुम्हारा – मलिक ने अपनी भारी आवाज में मयूर की और देखते हुए पूछा, वो आवाज किसी को भी डर से झुरझुरी लेने पर मजबूर कर सकती थी, पर मयूर डरने वालो में से नही था |

मैं मोना से शादी करने आया हूँ – मयूर ने जैसे किसी नेता की तरह घोषणा की |

मोना के मुंह में खाना अटक गया, वो खांसने लगी |

जब वो संयत हुए तो मलिक ने पूछा – और मोना ?

मोना का चेहरा अनिश्चय की स्थिति बता रहा था – वो दो सेकंड चुप रही मानो अपने प्रेमी के जीवन और मृत्यु के बीच में से किसी एक का चुनाव कर रही हो, उसे अपने चिंता नही थी, वो मयूर के लिए चिंतित थी, पर उसके दिमाग ने दिल की सुनना सिख लिया था, उसने अपना सर सकारात्मक ढंग से ऊपर निचे हिलाया और बोली – हाँ हम दोनों एक दुसरे के साथ रहना चाहते है |

मलिक के चेहरे पर उलझन के भाव साफ दिखाई दे रहे थे, उसने मोना के लिए जॉय का सिलेक्शन किया था, वो उनकी लाइन का आदमी था, उसके धंधे को समझता भी था, और वो ही उसकी लडकी को प्रोटेक्शन भी दे सकता था, इसके अलावा उसने कुछ सोचा भी नही था, अपने दुश्मनों से अपनी बेटी की सुरक्षा ही उसकी प्रमुखता थी |

रागिनी का दिल जोरो से धड़क रहा था, वो एकटक मलिक की और देख रही थी, बगावती तो वो भी थी, उसने अपने पिता की इच्छा के खिलाफ जीवन में पहली बार कोई काम किया था, पर उसको चिंता मयूर की थी |

मालिक ने कुछ देर सोचने के बाद अपना निर्णय सुनाया – ठीक है अगर तुम मोना से शादी करना चाहते हो तो तुमको साबित करना होगा की तुम उसके लायक हो, अगर तुमने साबित कर दिया तो मोना तुम्हारी, और अगर फ़ैल हो गये तो तुम्हारी जिन्दगी हमारी, हम तुमको जिन्दा नही छोड़ेंगे |

अब उलझन के भाव मयूर के चेहरे पर थे, उसके मुंह से बस एक ही लफ्ज फूटा – कैसे ?

तुमको मेरा धंधा सीखना होगा, यहाँ रहकर, तुमको हम मैं से एक बनना होगा और तुम तो जानते ही हो हमारा धंधा क्या है, दुनिया में जो भी काम गैर कानूनी है वो सब हम करते है, हमारी दुनिया में लोग आते अपनी मर्जी से है, पर जाते अपनी मर्जी से नही है, एक बार इस दुनिया में कदम रखने के बाद वापस जाने के सारे रास्ते बंद हो जाते है |

मयूर रागिनी उर्फ़ मोना के प्यार में पागल था, उसने बिना कुछ सोचे कहाँ – मुझे मंजूर है |

मालिक ने कहा – क्राइम, मनी एंड पॉवर की दुनिया में तुम्हारा स्वागत है, तुम आज से हमारे लिए काम करोगे, तुमको पता है में तुमसे बहुत इम्प्रेस हूँ जिस तरह से तुम मोना को ढूंढते हुए यहाँ तक आ पहुचे, निडर, निर्भीक, साहसी हमारे धंधे में ऐसे ही लोगी की जरूरत होती है, जो अपनी जान पे खेलने में हिचकिचाते नही है |

मोना के हाथ में सोने का काँटा था जिससे वो खेल रही थी – वही हुआ जिसका मुझे डर था – उसने मन ही मन सोचा |

लंच खतम होने तक सारी बाते फाइनल हो चुकी थी – तुम जॉय के साथ हमारे धंधे को समझोगे, तुमको वो जो काम देगा बेझिझक पूरा करना है, अगर नहीं कर पाए तो तुम हमारे किसी लायक नही |

उसने सहमती से सर हिलाया |

मलिक ने जॉय को बुलवाया – ये आज से अपने साथ काम करेगा, इसको काम समझाना और अपने कम के लायक बनाना है, ये तुम्हारी जिम्मेदारी है – उसने भारी और गंभीर आवाज में कहा |

जॉय ने मयूर की घुर कर देखा, और मन ही मन सोचा – इस बच्चे की मौत मेरे हाथो लिखी होगी मैंने सोचा नही था, और वो सोचने लगा – इसको कैसे मरना है, समुद्र में मछलियों के आगे डालकर, या गोली मारकर, या हाथ पैर तोड़कर, उसका अपराधिक दिमाग हमेशा नए नये आइडियाज सोचता रहता था, क़त्ल करने के, और पिछले कुछ दिनों से उसने वो किया नही था, उसको लाल लाल इंसानी खून को बहता हुआ देखने की तीव्रतम तलब लगी, और उसने मलिक की बेटी मोना की तरफ देखा – साली अपने साथ एक आशिक भी ले आई, में क्या मर गया था, एक बार इस अपराध की दुनिया पे मेरा कब्जा हो जाये फिर इसकी भी खैर नहीं |

अगले कुछ दिन रागिनी और उसने टापू पे घूमते, नारियल के पेड़ पर चढ़कर नारियल तोड़ने और, स्पीड बोट से समुद्र की सैर में बिता दिए, तुमको इस आर्गेनाईजेशन में शामिल नही होना था, तुम इसके बारे में कुछ नही जानते हो, वो क्या काम करते है, किस तरह के काम करते है, मैं शुरू से तुमसे बोल रही थी इस दलदल से दूर रहो, समुद्र के किनारे तेजी से आ कर लौट रही लहरों के बीच दोनों नंगे पैर हाथ में हाथ थामे घूम रहे थे |

मयूर ने पूछा – क्या काम करते है ये लोग ?

हर वो कम जो गैर क़ानूनी है, ड्रग्स, हथियार, हत्या, लूट, डकैती, चाइल्ड ट्राफिकिंग तुम अपराध का नाम बोलो और उनके हाथ उसमे भी गहरे तक धसे मिलेंगे, अभी भी वक़्त है में कहती हूँ निकल जाओ |

में यहाँ से तुमको लिए बिना नहीं जा सकता, तुम्हारे बिना जीना अब मुमकिन नही है, देखेंगे जो होगा – मयूर ने कहा

दूर खड़ा जॉय उन दोनों को हाथ में हाथ डाले बीच पे चहलकदमी करते देख रहा था – इस पहाड़ी लडके का अब कुछ करना ही होगा |

अजीब उलझन थी, न वो न रागिनी चाहती थी कि वो इस घृणित आर्गेनाईजेशन में शामिल हो उसने सोचा और अपना ध्यान दूर से आती एक बोट पर पड़ा, जिसकी हेडलाइट बार बार जलबुझ रही थी मानो कोई संकेत कर रही हो |

ऐसी बोट मयूर ने पहले भी कई बार इसी टापू पे देखी थी जो अपनी हेडलाइट को संकेत करके बीच पे लगती थी और उसमे से कुछ संदूक खाली होते थे, कुछ ही देर में अनलोडिंग के बाद वो वापिस समुद्र में गायब हो जाती थी जिधर से आई थी, पिछले दस दिनों से वो इस आवागमन का अभ्यस्त हो चुका था, दोनों ने बोट पर ध्यान नही दिया, उस समय शाम के 7 बजे थे, और दिन का उजाला हल्के अँधेरे के आगोश में जा रहा था , दोनों अपनी बातो में व्यस्त थे, तभी एक सर्राट की आवाज के साथ कुछ चीज मयूर के कान के पास से गुजरी और वो चौक गया, उसने पीछे मुड कर देखा पर वहां कुछ नही था, उसने अपने पास बैठी रागिनी की और देखा पर वो वहां नही थी, उसने ऊपर देखा रागिनी अपनी पिस्तौल हाथ में लिए थी उसके आगे खड़ी थी और उसका निशाना था वो बोट जो कुछ ही देर पहले टापू के बीच पे आ कर लगी थी |

जॉय टापू पर अपने लाइट हाउस जैसे ऊँचे टावर पर बैठा था तभी उसे गोलियों की अंधाधुंध फायरिंग की आवाज सुनाई दी, उसने बाहर देखा गोलिया बोट में से चल रही थी, और उसने बीच पर रागिनी और मयूर दिखाई दिए, उसने देखा रागिनी मयूर के आगे ढाल बनके खड़ी थी, बोट में से चल रही गोलिया उनको ही निशान बना रही थी, वो चिल्लाया कोई जल्दी से सारी स्पॉट लाइट्स बंद कर दो, और कुछ ही सेकंड में पुरे बीच पर अँधेरा छा गया, अब बीच पे कोई उनको आसानी से देख नही सकता था, वो दोनों बीच की रेत पर मुंह के बल लेट गये और धीरे धीरे रेंगने लगे |
 
लाइट जाने से अँधेरा हो गया और बोट में से अंधाधुंध गोलिया चला रहे शूटर्स को भी मजबूरन बोट से निचे उतरना पड़ा, बीच की रेत पर, घने अँधेरे में कुल छः परछाईंया रेंग रही थी, दो वो दोनों जो किसी भी तरह से सुरक्षित विला में पहुच जाना चाहते थे, और चार शूटर जो अपने हाथ में घातक हथियार लिए उनका शिकार करने के लिए यहाँ तक आ पहुचे थे, चारो में से एक फुसफुसाया – सब अलग अलग हो जाओ और चारो तरफ से इनको घेर लो, ध्यान रहे लडकी को नही मारना है, हमारा शिकार सिर्फ लड़का है |

वो दोनों जान हथेली पर रख कर बालू रेत में धीरे धीरे रेंग रहे थे, उनको मालूम था, अगर वो एक मिनिट के लिए भी अपने पांव पर खड़े हुए तो गोलिया उनको छलनी कर देगी, रागिनी ने नोटिस किया सारी गोलिया मयूर को टारगेट कर के ही चलाई जा रही थी, उसने हिम्मत का काम किया और चलती गोलियों के बीच में सीधी खड़ी हो गई, अँधेरे में वो एक साये की तरह लग रही थी, चारो ने रागिनी को खड़े देखा, और उन्होंने अपनी बंदूक का फायर रोक लिया, उनको स्पष्ट आर्डर था किसी भी सूरत में लडकी को गोली नही लगनी चाहिए |

चारो और सन्नाटा छा गया, रागिनी खड़ी हो कर अपने हाथ में पिस्तौल लिए पीछे आ रहे चारो बन्दुकबाजो की टोह लेने की कोशिश कर रही थी, पर पीछे सन्नाटा था, कोई हलचल नही, इस बात से बेखबर की वो चारो अब चारो और बिखर चुके है, उनको घेरने के लिए ताकि केवल मयूर को मार सके, अगर उन दोनों को मरना होता तो वो ये काम कब का कर चुके होते |

जॉय अपने कण्ट्रोल रूम में बैठा, बचैनी से सांसे ले रहा था, उसे अब डर सताने लगा था, अगर इन चारो ने अपना काम ठीक तरीके से नही किया और पकड़े गये तो मलिक को पता लगने में देर नही लगेगी की उसने ही मयूर को मारने के लिए इनको ये काम सौपा था, वो स्थिति का पता लगाने के लिए बैचेन हो रहा था, पर अँधेरा इंतना अधिक था की उसे बाहर बीच पर कुछ भी दिखाई नही दे रहा था, उसने कुछ देर सोचा और बीच पर लगे बड़े बड़े फोकस लाइट्स के बटन को चालू करने का निश्चय किया, ताकि वो पता कर सके की आखिर उन सबकी लोकेशन क्या है, और वो कर क्या रहे है ? उसने अपने आदमी को कहा बीच की लाइट चालु करो और जैसे ही में बोलू फ़ौरन वापिस बंद कर देना |

वो बाहर आया और टावर की सुरक्षित ओट में खड़ा हो गया जहाँ से वो पीछे के पुरे बीच का नजारा ले सकता था, उसने इशारा किया और उसके आदमी ने लाइट का बटन दबा दिया, एक तेज चमचमाती पिली रौशनी से पूरा बीच नहा गया, उसने एक बार अपनी आँख मिची और देखा, रागिनी बीच के बीचो बीच एक रेत के छोटे से टीले के पास खड़ी है, और वो लड़का मयूर निचे जमीन पर मुंह के बल लेटा है |

रागिनी अँधेरे में अनिश्चय की स्थिति में खड़ी थी उसने मयूर को अपने पांव पर खड़े होने का मना कर रखा था, उसके हिसाब से आसपास ही कंही पर एक छोटा रेत का टीला होना चाहिए जो उसे धुप्प अँधेरे में दिखाई नही दे रहा है, तभी उसकी आँख चोंधिया गई और पूरा बीच चमचमाती रौशनी में नहा गया, उसने फ़ौरन पीछे देखा, वहा सिर्फ एक ही बन्दुक बाज था, बाकि कहा गये उसने जल्दी से दाए देखा उसे एक बन्दुक्बाज अपने दाए, दूसरा बाए, और तीसरा सामने से अपनी और बढ़ते हुए दिखाई दिया, हम चारो और से घिर चुके है मयूर, चारो तरफ से मौत हमारी तरफ बढ़ रही है - रागिनी ने कहा |

जब बीच पर रौशनी आई तब मयूर जमीन पर रेत में ओंधे मुंह पड़ा था, उसका मुंह अपनी सीधे हाथ की कोहनी पर बाई तरफ था, उसने रौशनी आते ही देखा, उनकी बाई तरफ से एक बिलकुल उसकी ही कद काठी का काला जवान लड़का हाथ में आटोमेटिक स्टेनगन लिए उनकी और बढ़ रहा है |

जॉय ने टावर से सबकी लोकेशन पता की और अपने आदमी को लाइट बंद करने का इशारा किया, वो काम बड़े बड़े करता था, लेकिन मलिक से बहुत डरता था, और आज जीवन में पहली बार उसने अपने बॉस से गद्दारी की थी, और बॉस के मेहमान को मारने के लिए किराये के आदमी बुलवाए थे, उसका प्लान फूल प्रूफ था, वो मयूर को मरवा के किसी छोटे मोटे गुंडे को बली का बकरा बनाना चाहता था, पर ऐन वक्त पर रागिनी मयूर की ढाल बन गई, और वो पहली गन फायर में बच निकला, अभी भी वो चारो और से घिरे है, चारो में से कोई तो उसको मार ही देगा और फिर पूरी आर्गेनाईजेशन उसके हाथ से कोई नही छीन सकता है, उसने संतोष की साँस ली फिर उसका मन डर से भर गया, अगर इन चारो में से कोई जिन्दा बच गया और मलिक को पता चल गया की ये हमला उसकी ही खुराफात है तो वो उसको नारियल के पेड़ पे जिन्दा टांग देगा |

रागिनी बीच पर बड़ी हिम्मत से मयूर की ढाल बन कर खड़ी थी, धुप्प अँधेरा बढ़ता ही जा रहा था, उसने अंदाज लगाया उसके दाए बाए दोनों और रेत में रेंग रहे बन्दुकबाज एकदम सिध में उनकी और बढ़ रहे थे, उसने धीमी आवाज में मयूर से कहा जल्दी से खड़े हो कर रेत के टीले के पीछे हो जाओ, वो फुर्ती से उठा, उसके उठते ही रागिनी जमीन पर गिर गई, और उसने अपनी पिस्तौल से अपनी दाई और से आ रहे गुंडे की दिशा में एक साथ ताबड़तोड़ तीन फायर किये, और वो भी मयूर के पास टीले के पीछे खिसक गई, अपने ऊपर फायर होते देख दाए वाले बंदूकबाज की जान पे बन आई, वो जॉय का दिया आर्डर भूल गया, गुस्से और जान जाने का डर दोनों उसपर बराबरी से हावी हो रहा था, उसने अपनी स्टेनगन सीधी की और सामने रागिनी की दिशा में फायर खोल दिया, पर रागिनी और मयूर दोनों पहले ही वह से हटकर टीले की ओट ले चुके थे, ताबड़तोड़ चली गोलियों में से एक बाई और से आ रहे बंदूकधारी के पांव पे लगी, उसके मुंह से जोर की चीख निकली और दर्द से उसका दिमाग सुन्न पड़ गया, उसको जो सुझाई दिया वो ये की अपनी और आ रही गोलियों की दिशा में फायर करके उस बंदूकधारी को मार दो जिसकी बंदूक की गोलिया उसे निशाना बना रही है, उसने भी अपनी बन्दुक सीधी की और दी और अपने बिल्कुल सामने दाई तरफ से आ रहे बंदूकधारी पर अपनी स्टेनगन से फायर खोल दिया, दोनों तरफ से अंधाधुंध गोलिया चलने लगी और कुछ ही देर में दोनों ने एक दुसरे को गोलिया मार कर अपनी अपनी अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली |

टीले की ओट में बैठे उन दोनों ने क्रॉस फायरिंग देखि और उनको अंदाज लग गया की चार में से दो तो गये, अब बचे दो जो उनके आमने सामने थे |

रागिनी ने फिर अपने आगे से आ रहे बंदूकधारी को देखने की कोशिश की पर उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, उसने ऊपर वाले का नाम लिया और आगे वाले की दिशा में अपनी बन्दुक से दो फायर किये |

आगे से आ रहा शूटर उस समय हशीश के जोरदार नशे में था, उसे धुप्प अँधेरे में कुछ समझ नही आ रहा था, उसके साथियों की बन्दूको की आवाज ने उसे डरा कर रख दिया था, उसने अँधेरे में देखने की कोशिश की, थोड़ी देर पहले जहा रागिनी खड़ी थी वह कोई दिखाई नहीं पड़ रहा था और उसकी तरफ गोलिया चल रही थी, उसने जवाब देने का निश्चय किया और अपनी बन्दुक का फायर अपने सामने खोल दिया, स्टेनगुण से तेज रफ्तार से गोलिया निकली और पुरे बीच पर चारो और बरसने लगी, एक गोली उसके सामने, रागिनी के पीछे से आ रहे उसके बॉस के माथे में जा लगी और वो एक चीख के साथ वही ढेर हो गया |

रागिनी ने टापू की रेत पर चार लाइन बनाई और उसमे से तीन लाइन काट दी |

जॉय के लिए अब अपने आप पर काबू रख पाना मुश्किल हो रहा था, उसने अपनी बंदूक उठाई और टावर के सबसे उपरी छज्जे पर जा कर खड़ा हो गया, बाहर गोलियों की आवाज चल रही थी, वक्त गुजरता जा रहा था, किसी भी वक्त मालिक वहा आ कर उसके हाथो से चार्ज ले सकता था, फिर वो कुछ नही कर पायेगा उसने सोचा और अपने आदमी को लाइट चालू करने का इशारा किया |

एक झटके के साथ फिर से पूरा बीच चमचमाती पिली रोशिनी में नहा गया, जॉय ने देखा, रागिनी और मयूर टीले के पीछे सुरक्षित थे, फिर उसने बीच पर नजर डाली और उसकी आँखे आश्चर्य से फट गई, चारो शूटर में से तीन बिलकुल एक दुसरे के आमने सामने मरे पड़े थे, उनके शरीर में कई गोलिया लगी थी, फिर उसने चोथे को देखा, जो जिन्दा था और अपनी आखे मिचमिचा रहा था, तभी उसकी नजर मलिक पर पड़ी, जो इस बुढ़ापे में भी काफी चुस्त दुरुस्त लग रहा था, उसके हाथ में उसका फ़ोन था, उसने देखा टावर पर अब तमाशा देख रहे उनके बीस से पच्चीस आदमी अपनी अपनी पोजीशन ले चुके थे, जॉय के मन में भय की लहर दौड़ पड़ी, उसने सोचा अगर चौथा शूटर मालिक के हाथ जिन्दा लग गया तो उसकी भी लग जाएगी | उसने अपनी बन्दुक सीधी की और निशाना बीच में मुंह के बल ओंधे पड़े चोथे शूटर की और साधा, वो उसके निशाने पर आया और उसने ट्रिगर दबा दिया, एक गोली, गोली की रफ़्तार से निकली और चोथे शूटर के माथे में धंस गई, उसकी खोपड़ी से खून की धार बह निकली और उसका मुंह एक तरफ लुढ़क गया |

रागिनी ने बीच पर बनाई अपनी चार लाइन में से चौथी लाइन भी काट दी, और मयूर के गले लग गई, हम बाल बाल बच गये |

मलिक और उसके आदमी तेजी से बीच पर चारो और दौड़ रहे थे, अब तक वो इसलिए चुप थे क्योकि जॉय ने उनको एक्शन में आने का मना किया था, पर अब जब खुद उनका बॉस मालिक आर्डर दे रहा था, तो वो पूरी एक्शन में थे, उन्होंने उन दोनों को कवर किया और मालिक की विला की और सुरक्षित बढ़ चले |

मालिक चिल्ला रहा था – किसकी इतनी हिम्मत जो हमारे टापू पर आकर गोलीबारी कर रहा था, मुझे जल्दी से जल्दी बताओ ये किनके आदमी है, किसने इनको यहाँ तक भेजा था |

तब तक जॉय भी टावर से उतर कर बीच पर मालिक के पास आ चूका था, उसने एक आदमी को कहा जल्दी से बीच पर खड़ी बोट जिसमे ये चारो यहाँ तक आये थे की तलाशी लो, कोई और तो नही है, कोई कागज, बोट के मालिक की निशानी जल्दी से जल्दी पता करो

फिर वो एक एक करके चारो के पास गया और उनके मुह गौर से देखने लगा उसने अपने मोबाइल में चोर के फोटो खिचे और मालिक की और देखकर गर्व से घोषणा की – ये चारो तो बटला के आदमी है, मैं जनता हूँ इन्हें |

बटला कौन – मलिक ने जॉय से पूछा – किसको आत्म हत्या का शौक चढ़ा है जो हमारे ऊपर अटैक करवा रहा है ?

हारबर का छोटा मोटा गुंडा था, अभी एक फिशिंग बोट ली है, और स्मगलिंग के धंधे में अपना हाथ अजमा रहा है, लगता है नाम कमाने के लिए और अपनी धमक जमाने के लिए सीधा हम पर ही अटैक कर रहा है |

जो भी हो वो कल शाम का ढलता हुआ सूरज नही देखना चाहिए – मलिक गुस्से से गुर्राया |

अगर आप कहे तो मयूर को भी साथ में ले कर जाता हु, इस बटला का टीगीट इसके हाथो से ही कटवा देते है, इसको वैसे भी अपने आप को प्रूव करना है की ये हमारी आर्गेनाईजेशन के लायक भी है या नहीं, वैसे भी आगे पीछे सब काम इसे ही देखना है |

मलिक को जॉय की बात जम गई, ठीक है ये काम मयूर से ही करवाओ, इसको पिस्तौल दो और घोडा दबाना सिखा दो, बाकि सब ये कर लेगा |

आप चिंता मत करे में सब देख लूँगा – जॉय ने मलिक को कहा और मन ही मन सोचा एक बार तो बच गया, अब नही बच पायेगा, बच्चू, चला था मोनिका से शादी करने |

जॉय का प्लान बहुत प्लेन और सिंपल था, असल में उसी ने बेकसूर बटला की फिशिंग बोट किराये पर ली थी, उस बोट से मयूर पे हमला करवाया, हमला नाकाम रहा और सारा इल्जाम बटला पर डाल दिया, उसकी मौत के बाद ये प्रश्न खतम हो जायेगा की आइलैंड पर हमला किसने करवाया, जब मयूर बटला को मरेगा तो जॉय के आदमी मयूर को मार देंगे और मलिक को बता दिया जायेगा की क्रॉस फायरिंग में मयूर बटला के हाथो मारा गया |

रागिनी का मन भारी हो रहा था, पर अब वो कुछ नही कर सकती थी, मयूर या तो बटला को मार कर हत्यारा बने, या उसे और आर्गेनाईजेशन को छोड़ कर वापिस चला जाये, उसके भाग्य में क्रिमिनल पति ही लिखा है, वो मयूर को कुछ नही होने देगी, उसने मन ही मन निश्चय किया |

अगले दिन सूरज की पहली किरण के साथ ही जॉय ने मयूर के रूम पे दस्तक दी, मयूर ने दरवाजा खोला और जॉय ने कहा – ये रिवाल्वर अपने पास रखो, जब में बोलू तुमको गोली चला कर बटला को मारना है, अगर नही मार पाए तो तुम यहाँ रहने का अधिकार खो दोगे, और मोनिका को भी, सीधे अपने घर जाना, कोई अच्छी लडकी देखकर शादी कर लेना और मोनिका को हमेशा के लिए भूल जाना |

मयूर ने उसके हाथ से पिस्तौल ली और उसका निशाना जॉय की तरफ किया, उसका चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था, जॉय के चेहरे पर डर के भाव उभरे वो बोला – जब वक्त आये तब पिस्तौल तानना मेरे ऊपर निशाना लगाने की जरूरत नही है |

मयूर कुछ नही बोला, जॉय उसको पहली ही नजर में नही जमा था – चलाना कब है ? – उसने जॉय से पूछा |

एक घटे बाद हम यहाँ से निकलेंगे तब तक तुम तैयार हो जाओ |

जॉय के जाते ही रागिनी मयूर के रूम में आई और उसने कहा – में चाहती हु तुम हत्या नही करो, में तुम्हे शुरू से इस दलदल से दूर रखना चाहती थी, इसीलिए डेल्ही में तुम्हे अकेला छोड़ कर आ गई थी, और उसने एक पैकेट मयूर को दिया – इसको अपनी सुरक्षा के लिए रख लो |
 
लगभग एक घंटे बाद वो अपने मिशन पर निकल पड़े, मयूर ने काला चश्मा, ब्लैक टाउसर और अपना ट्रेडमार्क लिनन का सफेद शर्ट पहना था, वो हमेशा की तरह डैशिंग लग रहा था, उसका चेहरा सख्त था, कुछ भी हो जाये वो रागिनी को नही छोड़ सकता था |

जॉय कोई गाना गुनगुना रहा था, उसके चेहरे पे मस्ती के भाव थे, बस कुछ देर और और ये जो उसके और मोना के बीच में बाधा आ आई है, दूर हो जायेगी – उसने सोचा और मस्ती से झुमने लगा

वो हमको कहा मिलेगा – यहाँ से आधा किलीमीटर दूर एक छोटा सा वीरान बीच है, वहा एक खंडहर है जहा कोई नही जाता, वो हमे वही मिलेगा अपने आदमियों ने पक्की खबर निकाली है, वो अभी वही है |

उसके अलावा और कितने आदमी होंगे उसके ?

कुछ पक्का नही पर 1 घंटा पहले तो वो और उसका क्रुईस ड्राईवर दोनों ही थे, उम्मीद है वो दोनों ही हो अगर और भी हुए तो चिंता मत करो उनको में देख लूँगा, तुम बस बटला को मारना |

मयूर ने अपना पिस्टल चेक किया और संतुष्टि की साँस ली, उसने फिल्मो में देखा था, इस तरह की मुठभेड़ में कई बार जान जाने के खतरा रहता था |

उन्होंने बीच से कुछ दुरी पर अपना पानी का जहाज छोड़ दिया, और एक छोटी रबर की बोट पे सवार हो गये, धीरे धीरे बिना आवाज किये रबर बोट किनारे की और बढ़ चली, वो एक पेड़ की ओट में किनारे पर उतरे और धीरे धीरे सतर्क कदमो से बीच पे एक छोटे पहाड़ पे बने खंडहरनुमा महल की और बढ़ चले, शायद वो पुर्तगालियो ने बनवाया था, अब वह कोई नही रहता था, कभी कभी ड्रग्स की डील हो जाया करती थी, इसके अलावा वो हिस्सा सुनसान ही रहता था |

वो दोनों खंडहर में पीछे से घुसे और जॉय धीरे धीरे मेन हॉल की तरफ बढने लगे, हॉल के दरवाजे से मयूर ने अन्दर झांक कर देखा, वहाँ एक आदमी चोकड़ी की धोती पहने लेटा था, ये तो कोई मछुआरा लगता है, मयूर ने सोचा, तभी जॉय उसके कान में फुसफुसाया, ये ही बटला है, इसको गोली मार दो |

उसका गंजा सर मयूर की तरफ था, और वो अपने एक पांव के ऊपर दूसरा पांव चढ़ा कर आराम से लेटा था , मयूर ने हाथ सीधा किया और उसके गंजे सर की तरफ निशाना किया, और ट्रिगर पर उसकी उंगलिया कसा गई, दो सेकंड और आधा मिनिट बित गया पर उसकी उंगलिया जवाब दे गई, लगा उनमे जोर नहीं है, हाथ कंपकपा गये, कुछ सेकंड ऐसे ही खड़े रहने के बाद उसे अपनी माँ का चेहरा याद आया, फिर रागिनी का, और उसे अपनी भूल का अहसास हुआ, अपने प्यार को पाने के लिए वो किसी का हत्यारा कैसे बन सकता है ?

अपने पीछे हलचल सुनकर बटला का ध्यान टूट गया और वो तेजी से उठा उसने अपने सामने जॉय को खड़ा पाया और बोला – आ गये सर आप, मेरी बोट कहा है, उसे मुझे दुसरे को किराये पर देनी है |

मयूर ने सुना और समझ गया माजरा क्या है, बोट बटला से जॉय ने किराये पर ली थी, उसने जॉय की तरफ देखा वो एकटक बटला को देख रहा था, उसने कहा – मिल जाएगी तेरी बोट जल्दी क्यों कर रहा है, तेरी बोट में कल चार मर्डर हो गये है |

बटला समझ नही पाया – जॉय भाई, मेरे छोटे छोटे बच्चे है, मेरी एक ही बोट है, जो मैंने बहुत मेहनत से एक एक पैसा जोड़कर खरीदी है, मेरी बोट और उसका किराया जल्दी दे दो मुझे वो दुसरे मछुआरे को किराये पर देना है |

तभी मयूर ने देखा – जॉय का हाथ उठा और उसने अपनी गन सीधी करके एक फायर किया, गोली सीधी बटला की छाती पर लगी और वो वही ढेर हो गया |

जॉय बटला को गोली मारने के बाद धीरे धीरे उसकी लाश तक गया और एक और फायर उसकी छाती में किया, फिर झुककर देखा और संतुष्टि की कि उसका शिकार वाकई में मर चूका है, उसने मन ही मन सोचा – तेरा जिन्दा रहना मेरी मौत का सीधा पैगाम था, और अब ये मयूर भी सब जान चूका है, इसको भी टपकाना जरूरी है, अभी और इसी वक़्त और उसका हाथ उठा |

मयूर ने देखा – जॉय का हाथ उठा और आखरी द्रश्य जो उसने देखा वो उसकी पिस्तौल थी जिसका निशान उसकी छाती की तरफ था, पिस्तौल ने दो फायर किये और गोली उसकी छाती में समा गई, उसके सिने में डर का तूफान उठा और वो जमीन पर गिर गया |

दूर कही पुलिस बोट के सायरन की आवाज आ रही थी, जॉय ने आवाज सुनी और तेजी से खंडहर से बाहर निकल गया |

जब उसकी आँख खुली वो हॉस्पिटल के रूम में था, वो कितनी देर डर के मारे बेहोश पड़ा था उसे खुद को याद नही था, पर उस समय सूरज ढाल रहा था, उसने खिड़की में से देखा, वो लगभग 2 घंटे बेहोश पड़ा रहा था, उसने अपने शरीर की और देखा, हॉस्पिटल के पलंग पर वो सीधा लेटा था, और उसे ग्लूकोस की बोतल चढ़ी हुई थी, उसे पूरा वाकया याद आ गया, उसे दो गोली लगी थी, जॉय ने जिस फुर्ती से उसे गोलिया मारी थी, उसे बचने का चांस ही नहीं मिला था |

उसे याद आया – जब वो बटला को मारने के लिए जाने की तेयारी कर रहा था, जॉय के जाने के बाद रागिनी उसके कमरे में आई थी, उसने उसे एक पैकेट दिया और बोली – इसमें बुलेट प्रूफ जैकेट है, इसे जरुर पहन लेना, ये मैंने स्वीडन से खरीदा था, पर मेरे किसी काम में नहीं आया, तुम एक हत्या करने जा रहे हो, इसे पहन के जाना, और हो सके तो अपने हाथ खून में मत रंगना, उसने बिना कुछ बोले वो जैकेट अपने शर्ट के अंदर पहन लिया और बोला – अब इसके अलावा और कोई रास्ता नही है |

बुलेट प्रूफ जैकेट ने उसकी जान बचा दी थी, या यु कहो रागिनी ने उसकी जान बचा दी थी, उसे तुरंत यहाँ से निकल जाना चाहिए – उसने सोचा, अगर पुलिस कस्टडी में चला गया तो फिर भागना मुश्किल होगा |

उसने दरवाजा खोला और देखा – बाहर एक पुलिस वाला बैठा अपनी ड्यूटी कर रहा था |

उसने दरवाजा बंद किया और रूम से अटेच बाथरूम में घुसा ऊपर एक रोशनदान था, उसने इत्मिनान से रोशनदान की खिड़की पर लगी लौहे की फ्रेम देखी, वो स्क्रू से टिकी थी, वो वापिस रूम में आया, रूम में उसे एक स्टील की चम्मच अलमारी में पड़ी मिली, उसने चम्मच के पीछे के पकड़ने वाले भाग से धीरे धीरे लौहे की फ्रेम के तीन स्क्रू खोल लिए, और कुछ सोचकर बाथरूम दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया |

चोथा स्क्रू अभी आधा ही खुला था कि उसे बाहर रूम का दरवाजा खुलने की आवाज आई, उसने तेजी से स्क्रू को खोला और जोर से खिड़की को धक्का दिया, खिड़की उसके हाथ में आ गई, तभी उसे एक महिला की तेज आवाज सुनाई दी - वो कहा गया ?

उसने अपनी और रोशनदान की दुरी नापी और अपनी भुजाओ के बल पर रोशनदान के खुले रास्ते की मुंडेर पकड़कर लटक गया, धीरे धीरे उसने अपना सर रोशनदान की और बढ़ाया, उसे बाथरूम के दरवाजे का नकुचा खोले जाने की आवाज सुनाई दी, फिर किसी ने कहा दरवाजा अन्दर से बंद है, कुर्सी लाओ और तोड़ दो इसको, इतनी देर में उसका सर रोशनदान से बाहर आ चूका था, उसने थोडा जोर लगाया और एक झटके में वो रोशनदान से बाहर पीछे छोटी सी गली में कूद गया,

वो हॉस्पिटल की सीमा के अन्दर था, और बाहर जाने की लिए उसे मुख्य दरवाजे तक जाना था, वो तेजी से दोड़ता हुआ हॉस्पिटल के पीछे की गली से बाहर गलियारे तक आया, और धीरे धीरे निचे मुंह करके चलने लगा कुछ ही देर में वो हॉस्पिटल के मुख्य गेट की तरफ बढ़ रहा था, तभी उसने देखा गेट के पास एक पुलिस वेंन खड़ी थी, उसमे से चार पुलिस वाले उतरे और उनमे से दो गेट के दोनों और खड़े हो गये, और दो उसकी दिशा में बढ़ रहे थे, उन्हें पता चल चूका है की में भाग गया हूँ – उसने सोचा, दोनों पुलिस वाले उसी की तरफ आ रहे थे, अगर उनका आमना सामना हो गया तो उसका पकड़ा जाना निश्चित था |

तभी उसकी नजर गलियारे के पास एक साइकिल पर पड़ी जिसके दोनों और दूध की टंकिया लगी हुई थी, दूध वाला अपनी साइकिल को खुली ही छोड़ गया था, उसने आव देखा न ताव साइकिल उठाई और उस पर बैठ कर पुलिस वालो के सामने से होता हुआ, मुख्य गेट पार करके हॉस्पिटल के बाहर आ गया, पुलिस वालो ने उसे दूधवाला समझा, और उसकी तरफ ध्यान नही दिया |

उसने थोड़ी दूर जा कर साइकिल एक दीवाल के सहारे खड़ी कर दी, कुछ देर पैदल चला फिर एक टैक्सी को रुकने का इशारा किया और उसमे बैठ कर बोला – एअरपोर्ट

उसे अपनी गलती का अहसास हो गया था, वो अपने प्यार के लिए किसी की जान नही ले सकता था, उसी दिन रात 8 बजे उसकी फ्लाइट दून एअरपोर्ट पर उतरी और कुछ ही घंटो में वो अपनी पुरानी दुनिया में था, वही सुहानी दुनिया, पर रागिनी के बगैर |
 
पार्ट 3

समन्था ने फ़ोन रखा और इत्मिनान से न्यूज़ पेपर पढने लगी, उसे पूरा विश्वास था, उसका जवान लड़का मयूर फ्रेडरिक कभी एक क्रिमिनल नही बनेगा, उसने मयूर की हर गतिविधि पे नजर रखने और मुसीबत के समय उसे बचाने के लिए आदमी उसके पीछे छोड़ रखे थे, और उनके अनुसार मयूर दून आने वाले जहाज में बैठ चूका था, और कुछ ही घंटो में मसूरी होगा, उसने वेटर को बुलाया और कहा – मयूर का रूम रेडी करवाओ |

बादलो को पीछे छोड़ता हवाई जहाज और उसकी खिड़की से बाहर झाकते हुए, उसका मन नही लग रहा था, बार बार रागिनी की सूरत उसकी आँखों के सामने घूम रही थी, वो खुद नही चाहती थी की वो क्रिमिनल बने, आखिर कैसे वो किसी की जान ले सकता है, वो भी उसकी जिसका कोई कुसूर नही हो, पर एक बात तो निश्चित थी की उसका मन डूबा जा रहा था, मानो वो अपने जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई हार गया हो, उसके जीवन का कोई मकसद नही बचा था |

एक जिन्दा लाश की तरह वो अपने होटल पहुचा और वेटर को बोला – मेरे कमरे में एक ब्लैक एंड ब्लो की पूरी बोतल रखवा दो, और मुझे कोई डिस्टर्ब नही करने चाहिए ध्यान रहे |

कमरे में उसने सारी बत्तिया बुझा दी और पलंग पर सीधा पड़ गया, उसकी आँखों से टप टप आंसू निकल रहे थे, दरवाजे पर थपथपाहट हुई और वो चिल्लाया – कौन है ?

वेटर – बाहर से आवाज आई |

बोतल बाहर रख दो और तुम जाओ – उसने कहा – जब वेटर चला गया उसने दरवाजा खोला, दारू की ट्रे उठाई और दरवाजे पर डू नोट डिस्टर्ब का टैग लगा दिया |

वो सुबह तक पिता रहा, इस बीच कई बार वेटर उसको खाने का पूछने आया पर उसने चिल्ला कर हर बार एक ही जवाब दिया - चले जाओ, यहाँ से |

समन्था मयूर की माँ जो उसकी एक एक हरकत पे नजर रख रही थी, ने सोचा – एक दो दिन के बाद सब ठीक हो जायेगा और वो लडकी को भूल जायेगा |

मयूर को आये लगभग एक हफ्ता हो चूका था पर वो अपने कमरे से बाहर नही निकला था, कमरे से आ रही थी तो बस खाली वाइन बोतले, अब समन्था को चिंता होने लगी, दोपहर में वो ऑफिस में बैठी हिसाब चेक कर रही थी, उसे कुछ बातचीत सुनाई दी, उसके होटल के दो कर्मचारी बात कर रहे थे – देवदास और वो जोर जोर से हंसने लगे, उसे बस इतना ही सुनाई दिया, पर वो अच्छी तरह से समझ गई की मयूर की ही बात की जा रही है |

उसने अपना सेल उठाया और इंग्लैंड में अपने कजिन को फ़ोन किया, फिर अपनी माँ को, फिर अपने कुछ कॉलेज के दोस्तों को और फिर उसने एयरलाइन्स टिगिट बुकिंग को फ़ोन किया और अपना इंग्लैंड का टिगिट बुक किया |

फिर उसने अपने स्टाफ को बुलाया और कहा – मैं कुछ दिनों के लिए अपनी माँ और फॅमिली से मिलने इंग्लैंड जा रही हूँ, कुछ अर्जेंट काम है, पीछे से आपको पुरे होटल की और मयूर की जिम्मेदारी खुद ही निभानी है |

होटल का स्टाफ बहुत पुराना और वफादार था, उन्होंने कहा – आप इत्मिनान रखिये, हम पूरी ईमानदारी से मयूर बाबा और होटल दोनों का पूरा ख्याल रखेंगे |

संतोष हो जाने के बाद वो मयूर के कमरे में गई, उस समय वो नशे में धुत्त बिस्तर पे पड़ा था, उसने उसके सर पे हाथ फेरा और कहा – मयूर उठो |

मयूर ने अपनी आखे खोली और कहा – सोने दो माँ, मुझे नींद आ रही है |

ये तुमने अपना क्या हॉल बना रखा है ? तुम उस लडकी को भूल क्यों नही जाते ?

अगर उसको भूलना इतना आसान होता तो में कभी का भूल चूका होता |

सुनो नैनी की तबियत खराब है, में कुछ दिनों के लिए इंग्लैंड जा रही हूँ, क्या तुम अपना ख्याल रख लोगे |

पहले डेड, फिर रागिनी और अब तुम भी मुझे छोड़ कर जा रही हो – उसकी आखो में एक छोटे बच्चे जैसे मासूमियत थी – क्या जाना जरूरी है |

समन्था ने अपने दिल पर पत्थर रख कर कहा – अगर जरूरी नही होता तो में तुम्हे अकेला छोड़कर कभी नही जाती, तुम ड्रिंक बंद करो और होटल सम्भालो, और मुझे पूरा विश्वास है तुम मेरा कहा नही टालोगो |

कब जा रही हो आप – उसके चेहरे की मासूमियत से समन्था का मन फिर पिघलने लगा |

पर उसने अपना मन मजबूत करते हुए कहा – कल सुबह 6 बजे मेरी डेल्ही से फ्लाइट है, आज शाम को ही डेल्ही के लिए निकलना पड़ेगा |

डेल्ही का नाम सुनते ही उसे फिर रागिनी की याद आ गई, वही से वो भी उसे छोड़कर चली गई थी और अब माँ भी वही से ही उड़ जाएगी |

और वो एक तरफ लुढ़क गया |

अपनी आखो में आसू लिए समन्था उसके कमरे में से बाहर निकली और अपना सामान पैक करने लगी |

उसकी माँ को गये आज एक महिना हो गया था, और वो अभी तक अपने डिप्रेशन से बाहर नही निकला था, पर एक सुधार जरुर आया था, वो अब अपने रूम से किसी तरह लडखडाते हुए होटल के ऑफिस तक पहुच जाता था, और दिन भर का हिसाब किताब देखकर शाम को वापिस अपने कमरे में चला जाता था, स्टाफ के लाख समझाने का उसपर कोई असर नही हुआ था |

समन्था ने होटल फ़ोन लगा कर जब उसकी स्थिति जानने की कोशिश की तो मेनेजर ने बताया – परसों मैंने उसे नही पिने की सलाह दी थी, बदले में उसने मुझ पर शराब का गिलास फेंक दिया और बोला – आज के बाद मेरे रूम में मत आना |

ठीक है अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा – समन्था ने कहा |

उस दिन मयूर सुबह ही बाहर निकला, रोज की तरह उसके पांव लडखडा रहे थे, उसकी बोटल खत्म हो गई थी और वो जोर से चिल्लाया – भूरिया कहा मर गया, मेरी बोतल खतम हो गई है, कहा रखी है सारी ?

लेकिन उसे होटल का वेटर भूरिया कही दिखाई नही दिया – सोया पड़ा होगा कही हरामखोर, और वो भीम को देखते देखते होटल के मेन गेट तक आया, उसे लगा शायद भूरिया बाहर मिल जायेगा, पर वो वहाँ नही था, तभी पेपर वाला लड़का आया और उसने होटल के चार पाच न्यूज़ पेपर जमीन पर फेके और निकल गया, वो पेपर पढने के मूड में नही था, उसे क्या लेना देना था दुनिया से, जब रागिनी उसकी दुनिया में नही थी |

उसने एक बार अखबारों की तरफ देखा और उसकी आखे फटी की फटी रह गई, वो एक इंग्लिश अख़बार था, और फेकने के कारण उसके आगे के कुछ पन्ने पलट गये थे और अन्दर आधे खुले पेज में से एक फोटो झांक रहा था, ये ही तो फोटो वो सब जगह ढूंढ रहा था कुछ दिनों पहले, वो रागिनी का फोटो था, उसके निचे कुछ लिखा था, उसने झपट कर पेपर उठाया और पढने की कोशिश करने लगा, नशे की अधिकता में उसे कुछ समझ नही आ रहा था, वो पेपर को हाथ में लिए लिए वाशरूम में घुसा, अपना मुंह ठंडे पानी से धोया, आँखे अब कुछ साफ देखने लगी थी उसने पढ़ा – गोवा के खतरनाक डॉन मालिक की 24 वर्षीय लडकी मोना की मौत एक बोट हादसे में इंग्लैंड के ग्रिम्गाँव के पास बहने वाली जेम्स नदी में डूबने से हो गई है |

उसे विश्वास नही हुआ, उसने कई बार अपनी पलके झपकी, और कई बार उस खबर को पढ़ा, पर अख़बार हर बात उसे यही बात बोल रहा था की – गोवा के खतरनाक डॉन, मोना की मौत बोट हादसे में डूबने से हो गई है |

उसे विश्वास नही हुआ, वो रिसेप्शन के पास पड़े एक सोफे पर धम्म से गिर पड़ा, उसका नशा पूरी तरह से हवा हो चूका था, तभी मेनेजर ने होटल में एंट्री की और उसने उसका चेहरा देखा – बिलकुल पिला, सुनी आखे, उसने पूछा – मयूर क्या हुआ, तुम्हारी तबियत तो ठीक है |

उसके मुंह से बोल नही फुट रहे थे, उसने पेपर बुजुर्ग मेनेजर के आगे कर दिया और लडखडाता हुआ बोला – रा रागी नि ....

मेनेजर ने फोटो देखा, न्यूज़ पढ़ी और एक जोर की साँस ली |

उसने समन्था को फ़ोन किया |

आज वो ऑफिस में बैठने की स्थिति में भी नही था, उसे वो बारिश याद आ गई जब वो और रागिनी पहली बार मिले थे, फिर पहला डिनर जो उन दोनों ने साथ में किया था, फिर वो मेला जहा पुलिस रात भर उनके पीछे दौडती रही थी, एक एक करके सारे सिन उसके दिमाग में किसी पिक्चर की तरह चल रहे थे, फिर उसे बटला दिखाई दिया मानो बोल रहा हो, मुझे मत मारो और उसने एक जोर की झुरझुरी ली, अपना गिलास खाली किया और एक तरफ लुढ़क गया

सपने मैं उसे वही सब दिखाई दे रहा था, फिर उसे कोमल दिखाई दी, उसकी बचपन की सहेली, वो गुलाबी सूट में बाहे फैलाये उसे बुला रही थी, पर उसने अपना मुंह दूसरी और फेर लिया, और नशे में बुदबुदाया – रागिनी तुम मुझे छोड़ कर नही जा सकती |

ये पिक्चर उसके दिमाग में दो दिन तक चलती रही और वो पूरी तरह डिप्रेशन में आ गया था, उसने अपने आप से कहा – अब जी कर क्या करना है, रागिनी में तुम्हारे पास आ रहा हूँ, जहा तुम्हारा कोई दुश्मन नही होगा, न कोई तुमको मारना चाहता होगा न कोई हमको अलग करना चाहता होगा |

होटल के मेनेजर ने समन्था को फ़ोन किया – मेडम आप कुछ करिये नही तो शायद आप बाबा को जीवन में कभी नही देख पायेगी |

समन्था ने कहा – तुम चिंता मत करो वो ठीक हो जायेगा, में कुछ करती हूँ |

सुबह के 8 बजे थे और उसके सेल की घंटी काफी देर से बज रही थी, रात को वो पूरी बोटेल पी चूका था, और उसने दो दिन से कुछ खाया भी नहीं था – इस तरह तो मैं मर जाऊंगा, उसने सोचा – पर अब जी के भी क्या करुगा |

फ़ोन की घंटी का बंद होने का कोई प्लान नही था, वो खीज उठा और उसने फ़ोन उठाया और बोला – हेल्लो

मेरा फ़ोन क्यों नही उठा रहे हो – दूसरी तरफ से एक आवाज आई |

आवाज सुनते ही उसके मस्तिष्क के सारे तार झन्ना गये, ये तो उसकी आवाज है, उसकी रागिनी की |

उसने बड़ी मुश्किल से कहा – रा रा रा गिनी – उत्तेजना चरम पर थी, उसे कुछ समझ नही आ रहा था वो क्या बोले |

उसकी लडखडाती आवाज सुनकर दूसरी तरफ से वो जोर से हंसी और बोली – सुना है मेरे बिना देवदास बन गये हो, दाढ़ी बढ़ गई है, कम से कम आधी दाढ़ी ही रख लेते पूरी रखने की क्या जरूरत ही |

फिर उसका दिमाग सन्ना गया – आधी दाढ़ी के बारे में या तो वो जनता था या रागिनी, मतलब रागिनी जिन्दा है |

वो अपने बिस्तर पे उठ बैठा और उसने कहा – रागिनी तुम जिन्दा हो |

और नही तो क्या तुम्हारे बिना में मर सकती हु क्या, जियेंगे तो साथ मरेंगे तो साथ |

तुम कहा हो – उसने अधीरता से पूछा

तुम फ़ौरन अपने मामा के यहाँ इंग्लैंड आ जाओ और लो मोम से बात करो |

दूसरी तरफ से समन्था की आवाज सुनाई पड़ी – मयूर

यस मोम, ये क्या है, रागिनी तुम्हारे साथ है ? ये कैसे हो सकता है ?
 
बेटा तुम्हारी माँ जब तुमसे भी आधी उम्र की थी तब तक उसने पूरी दुनिया घूम ली थी, तुम मुझे समझते क्या हो, कि में तुम्हे ऐसे ही मर जाने दूंगी ? नहीं माय सन, तुम फ़ौरन ड्रिंक करना बंद करो, मैंने मेनेजर के पास तुम्हारी आज शाम की फ्लाइट के टिगिट रखवाए है, तुम रागिनी के जिन्दा होने के बारे में बिना किसी को कुछ भी बताये तुरंत इंग्लेंड आ जाओ, बाकि बाते बाद में करते है |

मयूर का मन मयूर नाच उठा, उसने फ़ौरन शेव किया, गर्म पानी से कई दिनों के बाद नहाया, अब उसकी शराब की सुस्ती थोड़ी कम हो गई थी, रागिनी जिन्दा है, और इंग्लैंड में है, उसको जैसे तीनो जहाँ की खुशिया मिल गई |

तभी दरवाजे पे थपथपाहट हुई, उसने अपने कमरे का गेट खोला, सामने वेटर खड़ा था, शराब की बोटेल ले कर, उसके चेहरे पे मुस्कुराहट उभर आई – ये ले जाओ और एक गिलास निम्बू का पानी ले कर आओ, बहुत हेंग ओवर हो रहा है |

वेटर ने उसे आश्चर्य से देखा और कहा – यस सर – और पलट कर बाहर आ गया, उसने शिफ्ट इंचार्ज से कहा – छोटे मालिक में कुछ चेंज आ गया है, आज निम्बू पानी मांग रहे है |

तो दो जल्दी ले जाकर – क्या पता कब फिर उनका मन दारू का हो जाये |

लगभग दो घंटे में वो अपने हैंगओवर से छुटकारा पा चूका था, उसने अपना पासपोर्ट, पेपर्स, और सारे सामान जमाये और मेनेजर के पास पहुचा, उसने मयूर में चेंज देखा और मुस्कुराया –गुड मोरिंग बाबा – और उसने एक लिफाफा मयूर के हाथ में थमा दिया |

उसने खोल कर देखा, उसमे इंग्लेंड की फ्लाइट के टिगिट थे, ये टिगिट नहीं उसके और रागिनी के पुन मिलन के लायसेंस थे, जो उसकी माँ ने उसको दिए थे |

वो बाहर निकला और नियत समय पर डेल्ही एअरपोर्ट पहुचा, भगवान करे अब सब ठीक हो उनसे मन ही मन कहा, उसकी और रागिनी की प्रेम कहानी कई खतरनाक मोड़ देख चुकी थी, वो अब और नही बर्दाश्त कर सकता |

फिर उसके दिमाग में सवाल घुमने लगे – मोम और रागिनी साथ कैसे, रागिनी तो मर चुकी थी, फिर जिन्दा कैसे, और वो उसे वहा क्यों बुला रहे थे ?

फ्लाइट ने इंग्लेंड एअरपोर्ट पर लैंड किया और वो बाहर आया, उसके साथ एक उसी की उम्र की लडकी भी जो बगल वाली सीट पर बैठी थी, साथ में चल रही थी, वो पूरी रात उसके पास ही बैठी थी पर उसने नजर उठा कर भी नहीं देखा था, अब जब वो साथ ही चल रही थी तो उसने गौर से देखा वो रागिनी जैसी ही दिख रही थी, पर वो रागिनी नहीं थी |

गेट पर लगभग 45 साल का लम्बी छोड़ी कद काठी, रुवाबदार चेहरे वाला व्यक्ति तख्ती लिए खड़ा था – मयूर फ्रेडरिक

मयूर ने तुरंत उसको पहचान लिया वो उसकी मोम के रिश्ते के भाई यानि कजिन थे, उसने कई बार उनसे फ़ोन पर और सोशल मीडिया पर बात की थी, कई बार जब वो इंग्लेड अपनी नानी का पास आया था तो उनसे मिला था |

वो उनके पास गया और बोला – अंकल हाउ आर यू |

उसके मामा के चेहरे पर ख़ुशी की लहर दौड़ गई, उन्होंने अपने हाथ में पकड़ी तख्ती छोड़ी और मयूर को गले लगा लिया, दोनों कुछ देर तक एक दुसरे के गले लगते रहे – अब तुम यही रहने आ गये हो तो मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है – उसके मामा सेमुअल फ्रेडरिक ने कहा – तुम्हारी मदर और तुम्हारे अलावा मेरा इस दुनिया में अब और कौन है |

हमेशा के लिए यही ? मयूर ने मन ही मन सोचा, मोम क्या खिचड़ी पका रही है, मुझे बिलकुल भी समझ नही आ रहा है |

अब सब ठीक हो जायेगा मयूर, तुम बिलकुल चिंता मत करो मैंने और तुम्हारी माँ ने सब सेट कर दिया है |

क्या सेट कर दिया है ? कैसे सेट कर दिया है ?

– मयूर ने अपने आप से पूछा

इंग्लेंड की चमकदार सडको को पार करते हुए वो अपनी माँ के गाँव ग्रिम्गाँव पहुचे, उसकी माँ इसी गाँव में पैदा हुई थी, इंग्लेंड के उस गाँव में उनकी लम्बी चौड़ी खेती थी, और उसकी नानी के पिता एक जमींदार थे |

एक बार जब वो अपनी नैनी के घर आया था तो उन्होंने उसे बताया – जहाँ तक तुम्हारी नजर जाये हमारी जमीन है, जो तुमको ही सम्भालनी है |

मयूर उस समय बहुत छोटा था, और आज भी इतना बड़ा नही हुआ था, गाड़ी फार्म हाउस के बाहर पहुचकर नैनी के घर के बाहर रुकी और वो उतरा, उसने देखा, नैनी, माँ और रागिनी, उसके जीवन में तीन ओरते उसके स्वागत में उस पुराने हवेलीनुमा लेकिन मजबूत मकान के बाहर खड़ी मुस्कुरा रही थी |

वो एक बच्चे की तरह उन तीनों से बारी बारी गले लगा, उसके चेहरे की ख़ुशी साफ झलक रही थी |

तुम तो डूब कर ऊपर चली गई थी, यहाँ कैसे आ गई ? – उसने रागिनी का हाथ अपने हाथ में पकड़े पकड़े पूछा |

पहले डिनर कर लो फिर तुम्हारे सब सवालों के जवाब तुम्हे मिल जायेंगे – उसकी मोम ने हस्ते हुए कहा |

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ठण्ड का मौसम था और इंग्लैंड के उस शांत और प्राकृतिक रूप से संपन्न छोटे से गाँव ग्रिम्गाँव के उस सबसे बड़े हवेलीनुमा मकान में वो सभी एक अलाव के पास बैठे थे |

अच्छा हुआ तुम सभी यहाँ आ गये, अब मुझे अकेले नही मरना पड़ेगा – उसकी नानी जिसके बोलने से अब उनके चेहरे की झुरिया भी हिलने लगी थी, ने धीमी मगर खुशनुमा आवाज में कहा |

तो क्या अब हम सब यही रहेंगे ? – मयूर ने कुछ देर से पसरे सन्नाटे को तोड़ते हुए पूछा

हां – हमने सब बंदोबस्त कर दिया है |

लेकिन रागिनी तो मर चुकी थी मैंने उसका फोटो अख़बार में देखा है |

उसकी माँ मुस्कुराते हुए बोली – वो सब मेरा ही रचा नाटक था, जब मैंने देखा की तुम वाकई में रागिनी के बिना नही रह सकते, और उसके बिना मर जाओगे तो, मैंने इससे संपर्क किया, जब तुम इसके टापू पर रहने गये थे तब मैंने तुम्हारे पीछे अपने आदमी लगा दिए थे, उन्ही से मुझे इसके बारे में सब पता चल चूका था, की ये कहा रहती है, इसके पिता क्या करते है और उनका बिज़नस क्या है |

सारी बाते समझने के बाद मेरे दो लक्ष्य थे, एक तुमको और रागिनी को मिलवाना और दूसरा रागिनी के दुश्मनों का सफाया करना ताकि तुम दोनों चैन से अपना जीवन बसर कर सको | मैंने जबपता किया तो मुझे यकीन हो गया की इसका पुराना जीवन इसका पिछा छोड़ने वाला नही है, बहुत विचार के बाद में इस नतीजे पर पहुची की अगर रागिनी को आतंक और अपराध की उस दुनिया से छुटकारा दिला कर अपनी दुनिया में लाना है तो मुझे कुछ ऐसा करना पड़ेगा जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे, इसलिए मैंने और तुम्हारे मामा ने मिलकर एक प्लान बनाया |

जब प्लान बन गया तो हमने रागिनी से संपर्क किया और हमारा प्लान सुनने के बाद वो फ़ौरन हमारा साथ देने को राजी हो गई |

प्लान के अनुसार रागिनी ने अपने पिता से इंग्लेंड घुमने की अनुमति मांगी – कहते कहते समन्था रुक गई और रागिनी ने बोलना चालू किया |

इंग्लेंड ही क्यों ? – जब मेरे पिता ने पूछा तो मैंने कहा की मैंने एक किताब में वहाँ की सुन्दरता के बारे में पढ़ रखा है, इसलिए में इंग्लैंड घुमने जाना चाहती हु, मयूर के जाने के बाद मैं भी उदास रहने लगी थी, इसलिए मेरे पिता ने तुरंत सहमती दे दी और में अपनी कुछ सहेलियों को लेकर इंग्लेंड घुमने आ गई, पर यहाँ डेड ने मेरे साथ कुछ बॉडीगार्ड भी भेजे थे |

वो रुकी और समन्था ने अपनी विजय गाथा गानी शुरू की – प्लान के अनुसार रागिनी इंग्लेंड आ गई और इसने अपनी सहेलियों को जेम्स नदी में बोटिंग के लिए मना लिया, वहा इसने अकेले तैरने का निश्चय किया और उस तेज बहाव वालीं नदी में थोड़ी देर तेरने लगी, तभी तुम्हारे अंकल ने नदी के डेम का एक गेट खोल दिया और पानी की धारा तेज हो गई, रागिनी धारा के साथ बह गई, और नदी के मोड़ पर खड़ी हमारी बोट मैं लगे जाल में आकर रुक गई और तुम्हारी नानी और मैंने उसे अपनी बोट में चढ़ा लिया और किनारे से सीधे यहाँ आ गये |

उधर रागिनी को बहता देखकर उसकी सहेलियों और साथ आये बोट वाले और बॉडीगार्ड ने शोर मचाया, फिर उसे नदी में ढूंडने की कोशिश की पर वो कही नहीं मिली, पुलिस को बुलाया गया, पर वो भी उसे नही ढूंड पाई, ये मान लिया गया की वो नदी में बहते हुए दूर निकल गई होगी और जंगली जानवरों ने उसको अपना भोजन बना लिया होगा |

रागिनी ने एक जोर की झुरझुरी ली – और सब हंसने लगे

मतलब रागिनी दुनिया और अपने दुश्मनों की नजर में मर चुकी है, अब आगे क्या ?

अब आगे तुम और रागिनी दोनों हमेशा के लिए यही बस जाओगे, चुकी तुम मेरे बेटे हो और में इंग्लेंड की नागरिक हूँ, तुम्हारा जन्म भी यही हुआ है इसलिए तुम्हारे पास दोहरी नागरिकता है, और अब जब तुम रागिनी से शादी करोगो तो वो भी यही की नागरिक बन जाएगी और तुम दोनों यहाँ मेरी और नानी की सारी जमीन जायदाद संभालोगे |

पर रागिनी तो कानून की नजर में मर चुकी है ?

कानून की नजर में मोना मरी है, मालिक की बेटी, रागिनी नही, जो नकली पेपर इसने जुर्म की दुनिया से भागने के लिए बनवाए थे वो अब हमारे काम मैं आयेंगे |

तुम्हे याद है एक लडकी तुम्हारे साथ में तुम्हारी बगल वाली सीट पर बैठ कर यहाँ तक आई है, वो लडकी तुम्हारी पत्नी है |

क्या मयूर ने सकपका कर कहा – पर मैंने तो उसे ठीक से देखा तक नही, और में उससे शादी कैसे कर सकता हु ? मैं तो रागिनी से शादी करूंगा |सब खिलखिला कर हंस पड़े |

मतलब वो लडकी रागिनी के नकली पासपोर्ट पर यहाँ तक आई है, कानून की नजर में तुम दोनों यहाँ तक साथ आये हो, और कल हमको इमिग्रेंट ऑफिस जाकर मोना को रागिनी, के नाम से तुम्हारी बीवी के रूप में इंग्लेंड की नागरिकता दिलवानी है, इसके बाद तुम हमेशा के लिए यही रह जाओगे |

इंग्लेंड में उसके अंकल और नानी के परिचय की बदौलत रागिनी को बहुत जल्दी नागरिकता मिल गई |

अब वो दोनों एक थे, यहाँ उन्हें पहचानने वाला कोई नहीं था, उसकी मोम ने कहा, मैं कुछ दिन इंडिया में रह कर सारा कारोबार समेट कर यहाँ आ जाउंगी, उसके बाद हम सब साथ में ही रहेंगे |

रागिनी शाम के समय अपने इंग्लेड के हवेलीनुमा घर में पलंग पर लेटी फोटो का एल्बम पलट रही थी, आज उसको और मयूर को इंग्लैंड आये 10 साल से अधिक गुजर चुके थे, उसने एक एक कर एल्बम के पन्ने पलटे – एक फोटो में वो और मयूर दूल्हा - दुल्हन की ड्रेस में चर्च में थे – में आपको अब दूल्हा दुल्हन घोषित करता हु – फादर ने इंग्लिश में कहा, और मयूर ने उसे बांहों में भर कर किस किया, उसे शर्म आई पर ये तो इंग्लैंड का ट्रेडिशन है, मयूर ने बाद में कहा |

उसने कुछ पेज और पलटे – ये हॉस्पिटल में उनके दो जुडवा बच्चो के जन्मे के समय थे, मयूर उनके दोनों नवजात बच्चो के साथ ख़ुशी से दोहरा होकर फोटो पे फोटो खीचा रहा था |

फिर उसे मसूरी की याद आई और उसने सोचा – जीवन के कई यादगार लम्हों के फोटो नही होते है पर वो होते बहुत महत्वपूर्ण है – जैसे उसकी और मयूर की पहली मुलाकात |

और वो फिर मीठी यादो में खो गई |

समाप्त
 
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