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थोड़ी देर बाद उसने दरवाजा खोला और बाहर खड़े मयूर को अन्दर आने का इशारा किया |
सामने कुर्सी पर सफेद नेता की यूनिफार्म में एक 40 साल का आदमी बैठा था उसने मयूर को गौर से देखा और कहा – तुम रामदयाल जी को धुंध रहे हो ?
मयूर ने हा में सर हिलाया |
सुने कहा – तुम कोई रिश्तेदार हो उनके ?
नही मयूर ने न में सर हिलाया और बोला – मुझे उनकी लडकी से काम है, उसने मुझे यहाँ मिलने बुलाया था |
उसने अपना वजन अपनी कुर्सी के पीछे डाल दिया और गौर से मयूर को देखने लगा – कितने दिन पहले बुलाया था ?
मयूर ने कहा – लगभग 3 दिन पहले |
उसने मयूर को देखा और कहा – सीधे बाये जाओ और तीन गली छोड़ कर फिर बाये मुड़ जाना उस गली में तुमको 144 नम्बर मिल जायेगा, वापिस मेरे पास आना तुमसे कुछ बात करनी है |
मयूर उठा और सकरी गलियों में से होता हुआ नेताजी की बताई गली में पहुचा और अपनी साइकिल में आयल दे रहे एक आदमी से पूछा – इधर 144 नम्बर मकान कौन सा है |
उसने अपने कच्चे बने मकान की तरफ इशारा कर के कहा - ये 140 न. है, आगे 144 |
मयूर उसके मकान से आगे बढ़ा तीसरे मकान पर लिखा था – 143, सिनेमा रोड, और वो आगे बढ़ा, और उसने देखा वो एक खाली पड़े छोटे से प्लाट के सामने खड़ा था अगले मकान पर 145 लिखा था |
वो वापिस गया और उसने पूछा – ये 144 तो प्लाट है |
हा ये रामदयाल जी का प्लाट है – अब वो इस दुनिया मैं नही रहे |
और उनकी लडकी – रागिनी मयूर ने पूछा ,
उसने जवाब दिया दोनों बाप बेटी की मौत 3 साल पहले एक एक्सीडेंट में हो गई, तब से इस प्लाट का कोई मालिक नही है, और इसपर शराब माफिया का कब्जा है |
मयूर झोपड़ पट्टी की सकरी गलियों में से मेंन रोड पर आया और एक टैक्सी में बैठा और बोला – एअरपोर्ट
वही हुआ जिसका मुझे डर था – रागिन – रागिनी का असली नाम नही है, उसने तीन साल पहले मरी एक लडकी की आई डी यूज़ की और गायब हो गई, उसका कही कोई फोटो भी नहीं है, आखिर में उसको ढूंढू तो कहा ? – वाकई में एक पहेली थी ये नकली रागिनी |
अपनी जिद्द का पक्का मयूर आसानी से हार मानने वाला नहीं था, और ये तो फिर दिल का मामला था, वो अपनी मर्जी से मुझे छोड़ कर नहीं गई है, रही होगी उसकी कोई मज़बूरी, और फिर उसकी आखो के सामने रागिनी का डरा हुआ चेहरा आ गया, और उसका निश्चय पक्का हो गया की कुछ भी हो वो उसे ढूढ़ कर ही रहेगा |
अगले दिन वो मसूरी डिलाइट रेस्तरा मैं पहुचा जहा उसने और रागिनी ने साथ में हेर्बेल टी और फ्रूट सलाद का नाश्ता किया था, जिसका मालिक उसको अच्छी तरह से जनता था, मयूर को देखते ही बोला – आओ मेरे दोस्त आजकल तो बहुत हैडलाइन बना रहे हो न्यूज़ पेपर में ?
मयूर ने कहा – नहीं ऐसा कुछ नही है, पुलिस को कुछ कनफूसन हो गया था, बाद में उन्होंने अपनी गलती मान ली |
कहो आज हम जैसे लोगो की कैसे याद आ गई ?
मुझे तुम्हारे रेस्तरा के 4 तारीख शाम के सीसीटीवी फुटेज देखने है – मयूर ने उसकी टेबल के सामने पड़ी स्क्रीन की और इशारा करते हुए कहा |
वो फ़ौरन राजी हो गया, उसने 4 तारीख लिखी सीडी निकली और कंप्यूटर के ड्राइव में डाली |
कुछ देर फॉरवर्ड के बाद उसका और रागिनी की रेस्तरा में एंट्री वाला सीन आया |
और उसने अविश्वास से देखा कैमरे के सामने रागिनी ने अपना लाल पर्स अपने मुंह के आगे कर रखा था और उसकी सब आशाओ पे पानी फिर गया, उसको अपना दिल डूबता हुआ महसूस किया |
चालाकी की भी हद्द होती है, हर जगह उसने अपना चेहरा अपने लाल बेग से ढँक रखा था, इस प्रकार की सावधानी तो कोई क्रिमिनल ही करता है |
और उसने एक भी जगह कोई क्लू नही छोड़ा था – आखिर वो छुप किससे रही थी ?
वो भारी कदमो से अपने घर की और लौट रहा था, मॉल रोड पे कुछ पर्यटक चहलकदमी कर रहे थे, वो वहा रखी एक खाली बेंच पर बैठ गया तभी उसकी नजर सामने बैठे एक स्केच आर्टिस्ट पर गई, जो कुछ रूपये लेकर लोगो के पोर्टेड बनाता था, वो वह बहुत महशूर था, और स्केच आर्ट मैं उसका बहुत नाम था, उसको एक ख्याल आया और वो स्केच आर्टिस्ट के पास गया –
क्या तुम बिना देखे भी किसी का स्केच बना सकते हो, गोपाल ?
उसने कहा – हेल्लो मयूर – हा बोलो किसका बनाना है ?
में बोलता हूँ तुम बनाना चालू करो –
वो एक लडकी है, उसका चेहरा अंडाकार है, उसकी नाक छोटी, आँखे काली और वो दुनिया की सबसे खूबसूरत लडकी है |
स्केच बनाने वाले ने उसका मुंह देखा और आखरी बात पे ध्यान दिया बिना अपना काम जारी रखा, मयूर के बताये अनुसार उसकी कलम एक सफेद कागज पे तेजी से चल रही थी |
कुछ घंटे गुजर गये – आर्टिस्ट उससे सवाल पूछता जा रहा था और स्केच बनता जा रहा था |
सामने कुर्सी पर सफेद नेता की यूनिफार्म में एक 40 साल का आदमी बैठा था उसने मयूर को गौर से देखा और कहा – तुम रामदयाल जी को धुंध रहे हो ?
मयूर ने हा में सर हिलाया |
सुने कहा – तुम कोई रिश्तेदार हो उनके ?
नही मयूर ने न में सर हिलाया और बोला – मुझे उनकी लडकी से काम है, उसने मुझे यहाँ मिलने बुलाया था |
उसने अपना वजन अपनी कुर्सी के पीछे डाल दिया और गौर से मयूर को देखने लगा – कितने दिन पहले बुलाया था ?
मयूर ने कहा – लगभग 3 दिन पहले |
उसने मयूर को देखा और कहा – सीधे बाये जाओ और तीन गली छोड़ कर फिर बाये मुड़ जाना उस गली में तुमको 144 नम्बर मिल जायेगा, वापिस मेरे पास आना तुमसे कुछ बात करनी है |
मयूर उठा और सकरी गलियों में से होता हुआ नेताजी की बताई गली में पहुचा और अपनी साइकिल में आयल दे रहे एक आदमी से पूछा – इधर 144 नम्बर मकान कौन सा है |
उसने अपने कच्चे बने मकान की तरफ इशारा कर के कहा - ये 140 न. है, आगे 144 |
मयूर उसके मकान से आगे बढ़ा तीसरे मकान पर लिखा था – 143, सिनेमा रोड, और वो आगे बढ़ा, और उसने देखा वो एक खाली पड़े छोटे से प्लाट के सामने खड़ा था अगले मकान पर 145 लिखा था |
वो वापिस गया और उसने पूछा – ये 144 तो प्लाट है |
हा ये रामदयाल जी का प्लाट है – अब वो इस दुनिया मैं नही रहे |
और उनकी लडकी – रागिनी मयूर ने पूछा ,
उसने जवाब दिया दोनों बाप बेटी की मौत 3 साल पहले एक एक्सीडेंट में हो गई, तब से इस प्लाट का कोई मालिक नही है, और इसपर शराब माफिया का कब्जा है |
मयूर झोपड़ पट्टी की सकरी गलियों में से मेंन रोड पर आया और एक टैक्सी में बैठा और बोला – एअरपोर्ट
वही हुआ जिसका मुझे डर था – रागिन – रागिनी का असली नाम नही है, उसने तीन साल पहले मरी एक लडकी की आई डी यूज़ की और गायब हो गई, उसका कही कोई फोटो भी नहीं है, आखिर में उसको ढूंढू तो कहा ? – वाकई में एक पहेली थी ये नकली रागिनी |
अपनी जिद्द का पक्का मयूर आसानी से हार मानने वाला नहीं था, और ये तो फिर दिल का मामला था, वो अपनी मर्जी से मुझे छोड़ कर नहीं गई है, रही होगी उसकी कोई मज़बूरी, और फिर उसकी आखो के सामने रागिनी का डरा हुआ चेहरा आ गया, और उसका निश्चय पक्का हो गया की कुछ भी हो वो उसे ढूढ़ कर ही रहेगा |
अगले दिन वो मसूरी डिलाइट रेस्तरा मैं पहुचा जहा उसने और रागिनी ने साथ में हेर्बेल टी और फ्रूट सलाद का नाश्ता किया था, जिसका मालिक उसको अच्छी तरह से जनता था, मयूर को देखते ही बोला – आओ मेरे दोस्त आजकल तो बहुत हैडलाइन बना रहे हो न्यूज़ पेपर में ?
मयूर ने कहा – नहीं ऐसा कुछ नही है, पुलिस को कुछ कनफूसन हो गया था, बाद में उन्होंने अपनी गलती मान ली |
कहो आज हम जैसे लोगो की कैसे याद आ गई ?
मुझे तुम्हारे रेस्तरा के 4 तारीख शाम के सीसीटीवी फुटेज देखने है – मयूर ने उसकी टेबल के सामने पड़ी स्क्रीन की और इशारा करते हुए कहा |
वो फ़ौरन राजी हो गया, उसने 4 तारीख लिखी सीडी निकली और कंप्यूटर के ड्राइव में डाली |
कुछ देर फॉरवर्ड के बाद उसका और रागिनी की रेस्तरा में एंट्री वाला सीन आया |
और उसने अविश्वास से देखा कैमरे के सामने रागिनी ने अपना लाल पर्स अपने मुंह के आगे कर रखा था और उसकी सब आशाओ पे पानी फिर गया, उसको अपना दिल डूबता हुआ महसूस किया |
चालाकी की भी हद्द होती है, हर जगह उसने अपना चेहरा अपने लाल बेग से ढँक रखा था, इस प्रकार की सावधानी तो कोई क्रिमिनल ही करता है |
और उसने एक भी जगह कोई क्लू नही छोड़ा था – आखिर वो छुप किससे रही थी ?
वो भारी कदमो से अपने घर की और लौट रहा था, मॉल रोड पे कुछ पर्यटक चहलकदमी कर रहे थे, वो वहा रखी एक खाली बेंच पर बैठ गया तभी उसकी नजर सामने बैठे एक स्केच आर्टिस्ट पर गई, जो कुछ रूपये लेकर लोगो के पोर्टेड बनाता था, वो वह बहुत महशूर था, और स्केच आर्ट मैं उसका बहुत नाम था, उसको एक ख्याल आया और वो स्केच आर्टिस्ट के पास गया –
क्या तुम बिना देखे भी किसी का स्केच बना सकते हो, गोपाल ?
उसने कहा – हेल्लो मयूर – हा बोलो किसका बनाना है ?
में बोलता हूँ तुम बनाना चालू करो –
वो एक लडकी है, उसका चेहरा अंडाकार है, उसकी नाक छोटी, आँखे काली और वो दुनिया की सबसे खूबसूरत लडकी है |
स्केच बनाने वाले ने उसका मुंह देखा और आखरी बात पे ध्यान दिया बिना अपना काम जारी रखा, मयूर के बताये अनुसार उसकी कलम एक सफेद कागज पे तेजी से चल रही थी |
कुछ घंटे गुजर गये – आर्टिस्ट उससे सवाल पूछता जा रहा था और स्केच बनता जा रहा था |