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मयूर ने डाइनिंग रूम मैं कदम रखा, उस भव्य बड़े हॉल में एक बड़ी सी टेबल लगी थी जिसके आसपास लगभग 40 कुर्सिया करीने से सजी थी, हर कुर्सी के आगे टेबल पर सोने के कांटे और चम्मच उलटी रखी हुए थी, उसने अंदाज लगाया टेबल पर पड़े सारे बर्तन खालिस चांदी के थे, दीवारों पर आलिशान नक्काशी की हुई थी, और छत पर आलीशान झूमर लगा था, कुल जमा किसी महाराज का डाइनिंग रूम लग रहा था |
सामने सिट पर एक 60 साल का बुजुर्ग बैठा था, उसकी आखे लाल, बाल सफेद, पर चेहरे पर अजीब सी सख्ती थी, जो उसने पहले भी देखी थी, उसे रागिनी का फत्थर की तरह सख्त चेहरा याद आ गया, वो मलिक था, छोटे कद का, लेकिन कसरती बदन का मालिक मालिक |
वो आगे बढ़ा और उसने मलिक का अभिवादन किया, जवाब में मलिक ने भी अपना सर अभिवादन में हिलाया और अपने पास की कुर्सी पर बैठने का इशारा किया |
तुरंत वेटर ने लंच सर्व करना शुरू किया, सेंटर चेयर पे मलिक और उसके पास वाली कुर्सी पर मयूर और रागिनी आमने सामने बैठे थे |
तुम यहाँ अपने शहर से इतनी दूर केवल मुझसे मिलने तो आये नही हो, क्या इरादा है तुम्हारा – मलिक ने अपनी भारी आवाज में मयूर की और देखते हुए पूछा, वो आवाज किसी को भी डर से झुरझुरी लेने पर मजबूर कर सकती थी, पर मयूर डरने वालो में से नही था |
मैं मोना से शादी करने आया हूँ – मयूर ने जैसे किसी नेता की तरह घोषणा की |
मोना के मुंह में खाना अटक गया, वो खांसने लगी |
जब वो संयत हुए तो मलिक ने पूछा – और मोना ?
मोना का चेहरा अनिश्चय की स्थिति बता रहा था – वो दो सेकंड चुप रही मानो अपने प्रेमी के जीवन और मृत्यु के बीच में से किसी एक का चुनाव कर रही हो, उसे अपने चिंता नही थी, वो मयूर के लिए चिंतित थी, पर उसके दिमाग ने दिल की सुनना सिख लिया था, उसने अपना सर सकारात्मक ढंग से ऊपर निचे हिलाया और बोली – हाँ हम दोनों एक दुसरे के साथ रहना चाहते है |
मलिक के चेहरे पर उलझन के भाव साफ दिखाई दे रहे थे, उसने मोना के लिए जॉय का सिलेक्शन किया था, वो उनकी लाइन का आदमी था, उसके धंधे को समझता भी था, और वो ही उसकी लडकी को प्रोटेक्शन भी दे सकता था, इसके अलावा उसने कुछ सोचा भी नही था, अपने दुश्मनों से अपनी बेटी की सुरक्षा ही उसकी प्रमुखता थी |
रागिनी का दिल जोरो से धड़क रहा था, वो एकटक मलिक की और देख रही थी, बगावती तो वो भी थी, उसने अपने पिता की इच्छा के खिलाफ जीवन में पहली बार कोई काम किया था, पर उसको चिंता मयूर की थी |
मालिक ने कुछ देर सोचने के बाद अपना निर्णय सुनाया – ठीक है अगर तुम मोना से शादी करना चाहते हो तो तुमको साबित करना होगा की तुम उसके लायक हो, अगर तुमने साबित कर दिया तो मोना तुम्हारी, और अगर फ़ैल हो गये तो तुम्हारी जिन्दगी हमारी, हम तुमको जिन्दा नही छोड़ेंगे |
अब उलझन के भाव मयूर के चेहरे पर थे, उसके मुंह से बस एक ही लफ्ज फूटा – कैसे ?
तुमको मेरा धंधा सीखना होगा, यहाँ रहकर, तुमको हम मैं से एक बनना होगा और तुम तो जानते ही हो हमारा धंधा क्या है, दुनिया में जो भी काम गैर कानूनी है वो सब हम करते है, हमारी दुनिया में लोग आते अपनी मर्जी से है, पर जाते अपनी मर्जी से नही है, एक बार इस दुनिया में कदम रखने के बाद वापस जाने के सारे रास्ते बंद हो जाते है |
मयूर रागिनी उर्फ़ मोना के प्यार में पागल था, उसने बिना कुछ सोचे कहाँ – मुझे मंजूर है |
मालिक ने कहा – क्राइम, मनी एंड पॉवर की दुनिया में तुम्हारा स्वागत है, तुम आज से हमारे लिए काम करोगे, तुमको पता है में तुमसे बहुत इम्प्रेस हूँ जिस तरह से तुम मोना को ढूंढते हुए यहाँ तक आ पहुचे, निडर, निर्भीक, साहसी हमारे धंधे में ऐसे ही लोगी की जरूरत होती है, जो अपनी जान पे खेलने में हिचकिचाते नही है |
मोना के हाथ में सोने का काँटा था जिससे वो खेल रही थी – वही हुआ जिसका मुझे डर था – उसने मन ही मन सोचा |
लंच खतम होने तक सारी बाते फाइनल हो चुकी थी – तुम जॉय के साथ हमारे धंधे को समझोगे, तुमको वो जो काम देगा बेझिझक पूरा करना है, अगर नहीं कर पाए तो तुम हमारे किसी लायक नही |
उसने सहमती से सर हिलाया |
मलिक ने जॉय को बुलवाया – ये आज से अपने साथ काम करेगा, इसको काम समझाना और अपने कम के लायक बनाना है, ये तुम्हारी जिम्मेदारी है – उसने भारी और गंभीर आवाज में कहा |
जॉय ने मयूर की घुर कर देखा, और मन ही मन सोचा – इस बच्चे की मौत मेरे हाथो लिखी होगी मैंने सोचा नही था, और वो सोचने लगा – इसको कैसे मरना है, समुद्र में मछलियों के आगे डालकर, या गोली मारकर, या हाथ पैर तोड़कर, उसका अपराधिक दिमाग हमेशा नए नये आइडियाज सोचता रहता था, क़त्ल करने के, और पिछले कुछ दिनों से उसने वो किया नही था, उसको लाल लाल इंसानी खून को बहता हुआ देखने की तीव्रतम तलब लगी, और उसने मलिक की बेटी मोना की तरफ देखा – साली अपने साथ एक आशिक भी ले आई, में क्या मर गया था, एक बार इस अपराध की दुनिया पे मेरा कब्जा हो जाये फिर इसकी भी खैर नहीं |
अगले कुछ दिन रागिनी और उसने टापू पे घूमते, नारियल के पेड़ पर चढ़कर नारियल तोड़ने और, स्पीड बोट से समुद्र की सैर में बिता दिए, तुमको इस आर्गेनाईजेशन में शामिल नही होना था, तुम इसके बारे में कुछ नही जानते हो, वो क्या काम करते है, किस तरह के काम करते है, मैं शुरू से तुमसे बोल रही थी इस दलदल से दूर रहो, समुद्र के किनारे तेजी से आ कर लौट रही लहरों के बीच दोनों नंगे पैर हाथ में हाथ थामे घूम रहे थे |
मयूर ने पूछा – क्या काम करते है ये लोग ?
हर वो कम जो गैर क़ानूनी है, ड्रग्स, हथियार, हत्या, लूट, डकैती, चाइल्ड ट्राफिकिंग तुम अपराध का नाम बोलो और उनके हाथ उसमे भी गहरे तक धसे मिलेंगे, अभी भी वक़्त है में कहती हूँ निकल जाओ |
में यहाँ से तुमको लिए बिना नहीं जा सकता, तुम्हारे बिना जीना अब मुमकिन नही है, देखेंगे जो होगा – मयूर ने कहा
दूर खड़ा जॉय उन दोनों को हाथ में हाथ डाले बीच पे चहलकदमी करते देख रहा था – इस पहाड़ी लडके का अब कुछ करना ही होगा |
अजीब उलझन थी, न वो न रागिनी चाहती थी कि वो इस घृणित आर्गेनाईजेशन में शामिल हो उसने सोचा और अपना ध्यान दूर से आती एक बोट पर पड़ा, जिसकी हेडलाइट बार बार जलबुझ रही थी मानो कोई संकेत कर रही हो |
ऐसी बोट मयूर ने पहले भी कई बार इसी टापू पे देखी थी जो अपनी हेडलाइट को संकेत करके बीच पे लगती थी और उसमे से कुछ संदूक खाली होते थे, कुछ ही देर में अनलोडिंग के बाद वो वापिस समुद्र में गायब हो जाती थी जिधर से आई थी, पिछले दस दिनों से वो इस आवागमन का अभ्यस्त हो चुका था, दोनों ने बोट पर ध्यान नही दिया, उस समय शाम के 7 बजे थे, और दिन का उजाला हल्के अँधेरे के आगोश में जा रहा था , दोनों अपनी बातो में व्यस्त थे, तभी एक सर्राट की आवाज के साथ कुछ चीज मयूर के कान के पास से गुजरी और वो चौक गया, उसने पीछे मुड कर देखा पर वहां कुछ नही था, उसने अपने पास बैठी रागिनी की और देखा पर वो वहां नही थी, उसने ऊपर देखा रागिनी अपनी पिस्तौल हाथ में लिए थी उसके आगे खड़ी थी और उसका निशाना था वो बोट जो कुछ ही देर पहले टापू के बीच पे आ कर लगी थी |
जॉय टापू पर अपने लाइट हाउस जैसे ऊँचे टावर पर बैठा था तभी उसे गोलियों की अंधाधुंध फायरिंग की आवाज सुनाई दी, उसने बाहर देखा गोलिया बोट में से चल रही थी, और उसने बीच पर रागिनी और मयूर दिखाई दिए, उसने देखा रागिनी मयूर के आगे ढाल बनके खड़ी थी, बोट में से चल रही गोलिया उनको ही निशान बना रही थी, वो चिल्लाया कोई जल्दी से सारी स्पॉट लाइट्स बंद कर दो, और कुछ ही सेकंड में पुरे बीच पर अँधेरा छा गया, अब बीच पे कोई उनको आसानी से देख नही सकता था, वो दोनों बीच की रेत पर मुंह के बल लेट गये और धीरे धीरे रेंगने लगे |
सामने सिट पर एक 60 साल का बुजुर्ग बैठा था, उसकी आखे लाल, बाल सफेद, पर चेहरे पर अजीब सी सख्ती थी, जो उसने पहले भी देखी थी, उसे रागिनी का फत्थर की तरह सख्त चेहरा याद आ गया, वो मलिक था, छोटे कद का, लेकिन कसरती बदन का मालिक मालिक |
वो आगे बढ़ा और उसने मलिक का अभिवादन किया, जवाब में मलिक ने भी अपना सर अभिवादन में हिलाया और अपने पास की कुर्सी पर बैठने का इशारा किया |
तुरंत वेटर ने लंच सर्व करना शुरू किया, सेंटर चेयर पे मलिक और उसके पास वाली कुर्सी पर मयूर और रागिनी आमने सामने बैठे थे |
तुम यहाँ अपने शहर से इतनी दूर केवल मुझसे मिलने तो आये नही हो, क्या इरादा है तुम्हारा – मलिक ने अपनी भारी आवाज में मयूर की और देखते हुए पूछा, वो आवाज किसी को भी डर से झुरझुरी लेने पर मजबूर कर सकती थी, पर मयूर डरने वालो में से नही था |
मैं मोना से शादी करने आया हूँ – मयूर ने जैसे किसी नेता की तरह घोषणा की |
मोना के मुंह में खाना अटक गया, वो खांसने लगी |
जब वो संयत हुए तो मलिक ने पूछा – और मोना ?
मोना का चेहरा अनिश्चय की स्थिति बता रहा था – वो दो सेकंड चुप रही मानो अपने प्रेमी के जीवन और मृत्यु के बीच में से किसी एक का चुनाव कर रही हो, उसे अपने चिंता नही थी, वो मयूर के लिए चिंतित थी, पर उसके दिमाग ने दिल की सुनना सिख लिया था, उसने अपना सर सकारात्मक ढंग से ऊपर निचे हिलाया और बोली – हाँ हम दोनों एक दुसरे के साथ रहना चाहते है |
मलिक के चेहरे पर उलझन के भाव साफ दिखाई दे रहे थे, उसने मोना के लिए जॉय का सिलेक्शन किया था, वो उनकी लाइन का आदमी था, उसके धंधे को समझता भी था, और वो ही उसकी लडकी को प्रोटेक्शन भी दे सकता था, इसके अलावा उसने कुछ सोचा भी नही था, अपने दुश्मनों से अपनी बेटी की सुरक्षा ही उसकी प्रमुखता थी |
रागिनी का दिल जोरो से धड़क रहा था, वो एकटक मलिक की और देख रही थी, बगावती तो वो भी थी, उसने अपने पिता की इच्छा के खिलाफ जीवन में पहली बार कोई काम किया था, पर उसको चिंता मयूर की थी |
मालिक ने कुछ देर सोचने के बाद अपना निर्णय सुनाया – ठीक है अगर तुम मोना से शादी करना चाहते हो तो तुमको साबित करना होगा की तुम उसके लायक हो, अगर तुमने साबित कर दिया तो मोना तुम्हारी, और अगर फ़ैल हो गये तो तुम्हारी जिन्दगी हमारी, हम तुमको जिन्दा नही छोड़ेंगे |
अब उलझन के भाव मयूर के चेहरे पर थे, उसके मुंह से बस एक ही लफ्ज फूटा – कैसे ?
तुमको मेरा धंधा सीखना होगा, यहाँ रहकर, तुमको हम मैं से एक बनना होगा और तुम तो जानते ही हो हमारा धंधा क्या है, दुनिया में जो भी काम गैर कानूनी है वो सब हम करते है, हमारी दुनिया में लोग आते अपनी मर्जी से है, पर जाते अपनी मर्जी से नही है, एक बार इस दुनिया में कदम रखने के बाद वापस जाने के सारे रास्ते बंद हो जाते है |
मयूर रागिनी उर्फ़ मोना के प्यार में पागल था, उसने बिना कुछ सोचे कहाँ – मुझे मंजूर है |
मालिक ने कहा – क्राइम, मनी एंड पॉवर की दुनिया में तुम्हारा स्वागत है, तुम आज से हमारे लिए काम करोगे, तुमको पता है में तुमसे बहुत इम्प्रेस हूँ जिस तरह से तुम मोना को ढूंढते हुए यहाँ तक आ पहुचे, निडर, निर्भीक, साहसी हमारे धंधे में ऐसे ही लोगी की जरूरत होती है, जो अपनी जान पे खेलने में हिचकिचाते नही है |
मोना के हाथ में सोने का काँटा था जिससे वो खेल रही थी – वही हुआ जिसका मुझे डर था – उसने मन ही मन सोचा |
लंच खतम होने तक सारी बाते फाइनल हो चुकी थी – तुम जॉय के साथ हमारे धंधे को समझोगे, तुमको वो जो काम देगा बेझिझक पूरा करना है, अगर नहीं कर पाए तो तुम हमारे किसी लायक नही |
उसने सहमती से सर हिलाया |
मलिक ने जॉय को बुलवाया – ये आज से अपने साथ काम करेगा, इसको काम समझाना और अपने कम के लायक बनाना है, ये तुम्हारी जिम्मेदारी है – उसने भारी और गंभीर आवाज में कहा |
जॉय ने मयूर की घुर कर देखा, और मन ही मन सोचा – इस बच्चे की मौत मेरे हाथो लिखी होगी मैंने सोचा नही था, और वो सोचने लगा – इसको कैसे मरना है, समुद्र में मछलियों के आगे डालकर, या गोली मारकर, या हाथ पैर तोड़कर, उसका अपराधिक दिमाग हमेशा नए नये आइडियाज सोचता रहता था, क़त्ल करने के, और पिछले कुछ दिनों से उसने वो किया नही था, उसको लाल लाल इंसानी खून को बहता हुआ देखने की तीव्रतम तलब लगी, और उसने मलिक की बेटी मोना की तरफ देखा – साली अपने साथ एक आशिक भी ले आई, में क्या मर गया था, एक बार इस अपराध की दुनिया पे मेरा कब्जा हो जाये फिर इसकी भी खैर नहीं |
अगले कुछ दिन रागिनी और उसने टापू पे घूमते, नारियल के पेड़ पर चढ़कर नारियल तोड़ने और, स्पीड बोट से समुद्र की सैर में बिता दिए, तुमको इस आर्गेनाईजेशन में शामिल नही होना था, तुम इसके बारे में कुछ नही जानते हो, वो क्या काम करते है, किस तरह के काम करते है, मैं शुरू से तुमसे बोल रही थी इस दलदल से दूर रहो, समुद्र के किनारे तेजी से आ कर लौट रही लहरों के बीच दोनों नंगे पैर हाथ में हाथ थामे घूम रहे थे |
मयूर ने पूछा – क्या काम करते है ये लोग ?
हर वो कम जो गैर क़ानूनी है, ड्रग्स, हथियार, हत्या, लूट, डकैती, चाइल्ड ट्राफिकिंग तुम अपराध का नाम बोलो और उनके हाथ उसमे भी गहरे तक धसे मिलेंगे, अभी भी वक़्त है में कहती हूँ निकल जाओ |
में यहाँ से तुमको लिए बिना नहीं जा सकता, तुम्हारे बिना जीना अब मुमकिन नही है, देखेंगे जो होगा – मयूर ने कहा
दूर खड़ा जॉय उन दोनों को हाथ में हाथ डाले बीच पे चहलकदमी करते देख रहा था – इस पहाड़ी लडके का अब कुछ करना ही होगा |
अजीब उलझन थी, न वो न रागिनी चाहती थी कि वो इस घृणित आर्गेनाईजेशन में शामिल हो उसने सोचा और अपना ध्यान दूर से आती एक बोट पर पड़ा, जिसकी हेडलाइट बार बार जलबुझ रही थी मानो कोई संकेत कर रही हो |
ऐसी बोट मयूर ने पहले भी कई बार इसी टापू पे देखी थी जो अपनी हेडलाइट को संकेत करके बीच पे लगती थी और उसमे से कुछ संदूक खाली होते थे, कुछ ही देर में अनलोडिंग के बाद वो वापिस समुद्र में गायब हो जाती थी जिधर से आई थी, पिछले दस दिनों से वो इस आवागमन का अभ्यस्त हो चुका था, दोनों ने बोट पर ध्यान नही दिया, उस समय शाम के 7 बजे थे, और दिन का उजाला हल्के अँधेरे के आगोश में जा रहा था , दोनों अपनी बातो में व्यस्त थे, तभी एक सर्राट की आवाज के साथ कुछ चीज मयूर के कान के पास से गुजरी और वो चौक गया, उसने पीछे मुड कर देखा पर वहां कुछ नही था, उसने अपने पास बैठी रागिनी की और देखा पर वो वहां नही थी, उसने ऊपर देखा रागिनी अपनी पिस्तौल हाथ में लिए थी उसके आगे खड़ी थी और उसका निशाना था वो बोट जो कुछ ही देर पहले टापू के बीच पे आ कर लगी थी |
जॉय टापू पर अपने लाइट हाउस जैसे ऊँचे टावर पर बैठा था तभी उसे गोलियों की अंधाधुंध फायरिंग की आवाज सुनाई दी, उसने बाहर देखा गोलिया बोट में से चल रही थी, और उसने बीच पर रागिनी और मयूर दिखाई दिए, उसने देखा रागिनी मयूर के आगे ढाल बनके खड़ी थी, बोट में से चल रही गोलिया उनको ही निशान बना रही थी, वो चिल्लाया कोई जल्दी से सारी स्पॉट लाइट्स बंद कर दो, और कुछ ही सेकंड में पुरे बीच पर अँधेरा छा गया, अब बीच पे कोई उनको आसानी से देख नही सकता था, वो दोनों बीच की रेत पर मुंह के बल लेट गये और धीरे धीरे रेंगने लगे |