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वो लाल बॅग वाली

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मून मून होटल शहर के बाहर एक बड़े फार्म हाउस के बीच में बना हुआ पुराने ज़माने का स्ट्रक्चर था जिसे रंग रोगन कर रहने लायक कमरों में तब्दील कर दिया गया था, होटल तक पहुचने के लिए मेन रोड से लगभग आधा किलोमीटर अंदर प्राइवेट रोड पे जाना पड़ता था, और अन्दर जाने वाले हर वाहन को होटल की पर्सनल सिक्यूरिटी चेक पोस्ट से हो कर गुजरना पड़ता था |

होटल के गेट पे पहुचते ही तन्यल सिक्यूरिटी गार्ड पर गुराया – जल्दी से बैरिएर खोल और गाडी को आगे जाने दे |

सिक्यूरिटी गार्ड रजिस्टर लेकर जीप के पास गया और बोला – इंट्री कर दो सर नौकरी का सवाल है |

तेरी तो – पुलिस की इंट्री मांग रहा है, साले नाटक बंद कर और दरवाजा खोल |

सिक्यूरिटी गार्ड तेजी से अपने केबिन में अन्दर गया, और उसी समय होटल की बिजली बंद हो गई |

गार्ड ने कहा – सर बिना लाइट के ये गेट नही खुल सकता, जब तक होटल का जनरेटर चालू नही हो जाता आपको यही रुकना पड़ेगा |

लगता है पुलिस का डर खत्म हो गया है लोगो में – तन्यल ने सोचा और जीप में बैठा बैठा बैचेनी से लाइट के आने का इंतजार करने लगा |

लगभग 10 मिनिट ऐसे ही गुजर गये और तभी उसके दिमाग में ख्याल आया, वो जीप से उतरा और सिक्यूरिटी गार्ड के केबिन में गया, - साले तूने अंदर फ़ोन लगा कर बोल दिया की बाहर पुलिस आई है |

नही साहब यहाँ कोई फ़ोन नहीं है न मेरे पास मोबाइल है आप चाहो तो चेक कर लो |

तो फिर दरवाजा क्यों नही खोल रहा ? जल्दी खोल

तभी लाइट आ गयी और वो जीप में बैठा, अभी जीप थोड़ी दूर ही पहुच पाई थी की सामने से एक बड़ा टेम्पो तेजी से उनकी और आते हुए दिखाई दीया, रास्ता संकरा था और दोनों गाड़िया एक साथ नही क्रॉस हो सकती थी, तन्यल के मुंह से कराह निकल गई, वो जल्दी से जल्दी उन दोनों तक पहुच कर उनको अरेस्ट करना चाहता था, पर एक के बाद एक रूकावटे सामने आती जा रही थी, रात लगभग 8 बजे से शुरू हुआ ये चूहे बिल्ली का खेल थमने का नाम ही नही ले रहा था |

उसने टेम्पो वाले से चिल्ला कर कहा – कहा घुसा चला आ रहा है, गाड़ी पीछे ले बेवकूफ |

टेम्पो वाला भी गुस्से से चिल्लाया – मैं नहीं तुम घुस रहे हो, और तमीज से बात कर, मेरी पहुच बहुत ऊपर तक है |

है भगवान – तन्यल ने मन ही मन कहा, - कल रात से आज सुबह तक उसकी जितनी इज्जत खराब हुई थी इतनी तो उसके पूरी पुलिसिया जीवन में नहीं हुई थी, वो गुस्से से जीप से उतरा और गाड़ी की ड्राइविंग सीट पे पहुचा – बता तेरी गाड़ी मैं क्या है, जल्दी खोल दरवाजा |

और अगर न खोलू तो क्या कर लोगे ?

साले तेरी सारी नेतागिरी थाने की खूंटी पे टांग के रात भर तेरी खाल उधेड़ दूंगा जल्दी खोल गाड़ी मैं कौन है |

ठीक है साहेब नाराज क्यों होते हो देख लो पूरी गाड़ी – और उसने दरवाजा खोल दिया

तन्यल ने टेम्पो में नजर डाली, सीट के निचे देखा, पूरा लोडिंग टेम्पो खाली पड़ा था, अब उसका गुस्सा और भी बढ़ गया, जल्दी पीछे ले नही तो यही चमड़ी उधेड़ दूंगा |

टेम्पो वाले ने कहा मेरी गाड़ी में रिवर्स गियर नही है |

तेरी तो – तन्यल चिल्लाया और अपनी जीप के ड्राईवर को जीप पीछे लेने का इशारा किया जीप पीछे हुई और टेम्पो आगे बढ़ा इस पूरी प्रक्रिया में 15 मिनिट और गुजर गये |

जब तक रास्ता साफ हुआ और तन्यल रिसेप्शन पर पहुचा उसका सब्र का बांध टूट चूका था, आधे किलोमीटर की दुरी तय करने के उसके पुरे 30 मिनिट लग गये थे और मेले से यहाँ तक की 8 किलोमीटर की दुरी तय करने में पूरी रात लग गई थी उसने रिसेप्शन पर बैठे आदमी को देखा और जोर पूछा – क्या यहाँ पर कल रात को कोई लड़का और लडकी आये थे दोनों सैलानी थे, लोकल रेगुलर नही |

कल दो तीन कपल आये तो थे पर वो तो कुछ ही घंटो में रूम खाली कर के चले गये |

क्या उनमे से कोई लाल हैण्ड बेग वाली लडकी थी ? चल बता तेरा रजिस्टर |

अब रिसेप्शनिस्ट समझ चूका था की झूठ बोलने का कोई फायदा नही आज साहब उन दोनों को पकड़ने की कसम ले कर आये है उसने जवाब दिया – हा सर वो 308 रूम मैं है |
 
तन्यल ने उसको घुरा और तेजी से दो दी सीढिया लांघता हुआ ऊपर की और बढ़ा, उसने तीसरे माले पर पहुच कर ही साँस ली और 308 नम्बर कमरे के सामने पहुचा और दरवाजे को जोर से ठोकर मारी, दरवाजा आसानी से खुल गया, उसने अन्दर देखा कमरा पूरी तरह खाली था |

उसने पुरे कमरे का मुआवना किया और मन ही मन कहा – गये 5 लाख़ हाथ से !

उसने वायरलेस निकाला और फिर चिल्लाया – मून मून होटल के आसपास जितने भी जवान जोड़े सड़क पर दिखाई दे उनको रोक कर गिरफ्तार करो खास करके एक लडकी जिसने लाल हैण्ड बेग अपने गले में टांग रखा है आल पुलिस पार्टी अलर्ट |

मून मून होटल का मालिक एक चालक व्यापारी था, उसने शहर के बाहर फालतू पड़ी इस प्रॉपर्टी से पैसे कमाने का घटिया रास्ता निकला था, उसने पुलिस की रेड पड़ने की स्थिति मैं बचने का एक नायब रास्ता ढूढ़ लिया था, जैसे ही पुलिस की जीप होटल के आधा किलोमीटर बाहर मेन गेट पर पहुची, वहा बैठे सिक्यूरिटी गार्ड ने अन्दर होटल के कमरों मैं लगा सायरन बजा दिया, और अन्दर पूरा होटल अलर्ट हो गया, फिर सामने से आता टेम्पो और उसमे रिवर्स गियर नही होना सब केवल पुलिस को रोके रखने का प्लान था, ताकि अन्दर सभी वेश्याओ और जोड़ो को बाहर सुरक्षित निकाला जा सके |

दिन भर की थकान के बाद मयूर की सुरक्षित और आरामदायक बांहों में रागिनी बच्चों की तरह निश्चिन्त सो रही थी, उसकी नींद खुली तब सायरन की आवाज पुरे कमरे मैं गूंज रही थी, उस समय सुबह के 5 बज रहे थे, और सायरन काफी देर से बज रहा था, कोई जोर जोर से दरवाजा भड़क रहा था, वो आवाज बहुत डरावनी थी, उसने मयूर को उठाया, मयूर ने आवाज को फ़ौरन पहचान लिया, वो अपने दोस्तों के साथ इस होटल मैं पहले भी आ चूका था, उसने रागिनी से कहा – पुलिस की रेड | जल्दी सामान समेटो और भागो यहाँ से |

रागिनी ने कहा – हमारे पास जो भी सामान है सब खुल्ला पड़ा है और एक शरारती मुस्कान उसके चेहरे पर उभर आई |

जब वो बाहर निकले तब तक निश्चित ही देर हो चुकी थी, क्योकि मयूर ने नोटिस किया की उस समय कोरिडोर में कोई भी नहीं था सिवाय उनके, सारे कमरे पहले ही खाली हो चुके थे, वास्तव मैं ये बिलकुल सही था जब उनकी नींद खुली तब तन्यल होटल के रिसेप्शन पर खड़ा था |

जब वो रूम से बाहर निकले तब तक तन्यल सीढिया चढ़ रहा था, उन दोनों को अगर भागना था तो एक मात्र रास्ता वो सीढिया ही थी जिनसे निचे उतर कर वो पीछे के रास्ते से जंगलो में जा सकते थे, और उस एक मात्र रास्ते से तन्यल ऊपर आ रहा था और बहुत सम्भावना थी की उन दोनों की भिडंत तन्यल सो हो जाये |

मयूर जब निचे उतरने की सीढियों के मुहाने पर पहुचा और उसने तन्यल को ऊपर चढ़ते देखा तो उसका दिल धक् से रह गया उसने देखा वो बहुत तेजी से दो दो सीढिया चढ़कर ऊपर आ रहे थे, उसने इधर उधर नजर डाली और उसे सीढियों के पास वाश रूम दिखाई दिया उसने रागिनी का हाथ पकड़ा और वो दोनों वाश रूम में घुस गये, तन्यल ऊपर आया और सीधा रूम नो.. 308 पे गया, मयूर ने वाशरूम का दरवाजा खोल कर देखा, तन्यल और उसके साथ आये पुलिस वाले रूम के अन्दर जा चुके थे, उसने रागिनी का हाथ थाम रखा था फ़ौरन बाहर निकलने के लिए दरवाजा खोला वो बाहर निकलने ही वाले थे कि तभी उनके रूम में घुसे पुलिस वालो में से एक बाहर आया, और वाश रूम की तरफ बढ़ा, उनका दिल फिर तेजी से धडकने लगा, धीरे धीरे उसके जूतों की आवाज उनके करीब आ रही थी, किसी भी सेकंड उनका सामना उस पुलिस वाले से हो सकता था, पुलिस वाला वाश रूम तक आया, और उसने वाशरूम के दरवाजे का नकुचा पकड़ कर निचे की और दबाया, मयूर तैयार था, तभी पुलिस वाले ने देखा, जिस वाशरूम में वो जा रहा था, उसके ऊपर एक लेडीज स्टीकर लगा था, उसने नकुचा छोड़ दिया और उसके बिलकुल पास में एक और दरवाजे का नकुचा खोला जिसपर जेंट्स का स्टीकर लगा था, खोला और अन्दर चला गया

दोनों ने वाशरूम के दरवाजे पर लगे कांच में से सबकुछ देखा, मयूर ने रागिनि का हाथ पकड़ा और फुर्ती से बाहर निकला, एक एक सेकंड कीमती था, ज्यादा देर वहा रुकना ठीक नही था, उनको रिस्क लेकर जल्दी से जल्दी बाहर निकलना था- वो तेजी से सीढियों से निचे उतरे तभी तन्यल भी बाहर आया, पर कुछ सेकंड के फासले से वो उन दोनों को नही देख सका, दोनों पीछे के दरवाजे से बाहर निकल कर होटल की दिवार के सहारे खड़े हो गये, उन्होंने देखा पीछे एक मैदान था जिसके बाद जंगल, तभी उन्हें तन्यल की आवाज सुनाई दी मून मून होटल के आसपास जितने भी जवान जोड़े सड़क पर दिखाई दे उनको रोक कर गिरफ्तार करो खास करके एक लडकी जिसने लाल हैण्ड बेग अपने गले में टांग रखा है आल पुलिस पार्टी अलर्ट |

उन दोनों ने एक दुसरे की और देखा और तेजी से मैदान मैं दौड़ लगा दी, तन्यल पीछे के दरवाजे की और बढ़ा और उसने बाहर देखा, पर उसे वह कोई नहीं दिखाई दिया, दोनों मैदान पार कर जंगली झाड़ियो के पीछे छुप चुके थे |

तन्यल गुस्से से आग बबूला हो रहा था, वो जितना पांच लाख के पास जाता था उतना ही वो उससे दूर होते जाते थे, वो होटल के रिसेप्शनिस्ट पर गुराया – जल्दी से तेरे सीसीटीवी फुटेज में उन दोनों के फोटो निकाल और मुझे दे, वर्ना आज तेरी खैर नहीं |

रिसेप्शनिस्ट उन दोनों लड़का लडकी को याद कर के सोच रहा था – जरुर उन्होंने किसी का मर्डर किया होगा या बैंक लूटी होगी तभी इंस्पेक्टर इतना उतावला हो रहा है |

उसने सीसीटीवी फुटेज कंप्यूटर में लिया और एक प्रिंट तन्यल को दी |

तन्यल ने प्रिंट देखा और चौक गया फुटेज में लड़का तो साफ दिख रहा था पर लडकी ने अपना मुंह लाल हैण्ड बेग से ढक रखा था – उसके मुंह से सिटी निकल गई, - लडकी को मालूम था यहाँ सीसीटीवी लगा है और बड़ी सफाई से उसने अपना फोटो नही आने दिया, ये कौन हो सकती है ?

झाड़ियो के पीछे एक पेड़ की ओट में मयूर रागिनी की गोद मैं लेटा था, उसने कहा – जब तक बाहर रोड पर चहल पहल नही हो जाती हम यहाँ से नहीं निकल सकते, पकड़े जायेंगे, अभी पाच – छे घंटे ये झाडिया ही अपनी होटल और ये झाडिया ही अपना घर है |

रागिनी ने मयूर के बालो में हाथ फिराते हुए बोला – मयूर कैसे भी करके हमे दिल्ली पहुचना है वहा ये पुलिस वाला हमारा कुछ नही बिगाड़ सकता है |

तन्यल ने उन दोनों का प्रिंटआउट अपने पास खड़े सिपाही को दिया और कहा – इसकी 1000 फोटो कॉपी करवाओ और शहर के हर कोने मैं इन दोनों के पोस्टर लगवा दो |

झाड़ियो के पीछे बैठे बैठे रागिनी एक टक मयूर को ही देख रही थी उसने सोचा – मैंने तुमको किस मुसीबत में फसा दिया मयूर, मेरे साथ साथ तुम्हारी भी जान पर बन आई है |

ऐसे ही बैठे बैठे दिन के 11 बज गये. होटल के बाहर वाली रोड पे ट्रैफिक बढ़ रहा था, मयूर ने रागिनी से कहा – ये सही समय है हमे यहाँ से निकल चलना चाहिए, हम स्टेशन जायेंगे और वहा से दिल्ली कि ट्रेन पकड़ लेंगे, पर हमे अलग अलग जाना होगा क्योकि पुलिस हम दोनों को साथ मैं तलाश रही है, अगर हम अलग अलग जायेंगे तो किसी को शक नही होगा, रागिनी ने सहमती से सर हिलाया और बोली – मैं रेलवे स्टेशन पहुच कर तुम्हारा इंतजार टिगिट खिड़की के पास करूंगी तुम वही आ जाना |

मयूर रेलवे स्टेशन पर सबसे पहले पहुचा पर वहा पुलिस वाले मुस्तेदी से गेट पे खड़े थे, उसने मुख्य गेट से अन्दर जाने की बजाय मॉल गोदाम से ही अन्दर जाना उचित समझा, वो धीरे धीरे करते मॉल गोदाम को पार कर स्टेशन के अन्दर प्लेटफार्म पे गया और फिर वहा से टिगिट खिड़की तक पहुचा, उसने अपनी जेब से पैसे निकले और उसका दिल धक् से रह गया – टिगिट खिड़की के बाहर एक थम्बे पर उसका साफ और रागिनी का लाल हैण्ड बेग से ढका फोटो लगा था, उसके मुंह से एक आह निकल गई और पहली बार उसके चेहरे पर झुंझलाहट के भाव उभरे, पुलिस बड़ी तेजी से उसके आगे आगे चल रही थी, उसको फोटो देखते, देख एक और लडके ने फोटो देखा और फिर मयूर की और देखा उसका चेहरा आश्चर्य से सफेद हो गया |

मयूर को अपने पहचाने जाने का अहसास हो गया था वो तेजी से बाहर की और बढ़ा, उसको पहचानने वाले ने इधर उधर देखा और पास खड़े पुलिस वाले के पास जाकर उसकी दिशा में इशारा किया |

मयूर स्टेशन से बाहर निकला और उसे अपने फैसले पर पछतावा होने लगा कि क्यों उसने रागिनी को अपने से अलग किया, अब वो उसे कैसे ढूंढेंगा ?

रागिनी टैक्सी से उतरी और सीधी स्टेशन के अन्दर टीगीट खिड़की पर पहुची और उसकी नजर खम्बे पर लगे मयूर और उसके पोस्टर पर पड़ी, और उसका चेहरा भय से पिला पड़ गया |

वो बाहर आई और उसने चारो तरफ नजर दौड़ाई, मयूर उसे दूर - दूर तक नही दिखाई पड़ रहा था |

उधर अपना फोटो स्टेशन में लगा देखने के बाद मयूर स्टेशन के सामने एक घटिया से रेस्तरां में कार्नर की टेबल पर लगभग छुप कर बैठ गया, उसने वेटर से एक प्लेट पोहा और चाय लाने का कहा, तभी उसकी नजर रागिनी पर पड़ी वो एक ऑटो से उतरी और तेज कदमो से चलती हुई, स्टेशन के गेट के अंदर दाखिल हो गई – वो जरुर टिगिट खिड़की के पास मेरा इंतजार करेगी पर अन्दर जाना उसके लिए खतरे से खाली नही होगा - उसने सोचा – अजीब मुसीबत है, अब क्या करू, कंही पुलिस रागिनी को पकड़ न ले |

तभी रेस्तरा में एक गरीब सा दिखने वाला लड़का आया और उसने तुड़ा मुड़ा 10 का नोट निकाल कर रेस्तरा वाले से कहा – एक प्लेट पोहा,

शायद ये लड़का स्टेशन पर ही रहता है – और उसके दिमाग में एक तरकीब सूझी

उसने लडके के पास जा कर पचास रूपये का नोट बढ़ाते हुए कहा – क्या मेरा एक काम करोगो ?

नोट देखते ही लडके के चेहरे पर चमक आ गई – क्या ? उसने पूछा

स्टेशन में टिगिट खिड़की के पास एक मेडम खड़ी होगी जिनके हाथ में लाल पर्स है, उनको बोलना मैं उनका इंतजार यहाँ कर रहा हूँ, जब तुम ये काम करके वापस आओगे तो तुम्हे ऐसा ही पचास का एक और नोट दूंगा |

लडके ने सहमती से सर हिलाया, पचास का नोट जेब में डाला और तेजी से रोड पार करके स्टेशन के गेट मैं दाखिल हुआ |
 
तन्यल ने उसको घुरा और तेजी से दो दी सीढिया लांघता हुआ ऊपर की और बढ़ा, उसने तीसरे माले पर पहुच कर ही साँस ली और 308 नम्बर कमरे के सामने पहुचा और दरवाजे को जोर से ठोकर मारी, दरवाजा आसानी से खुल गया, उसने अन्दर देखा कमरा पूरी तरह खाली था |

उसने पुरे कमरे का मुआवना किया और मन ही मन कहा – गये 5 लाख़ हाथ से !

उसने वायरलेस निकाला और फिर चिल्लाया – मून मून होटल के आसपास जितने भी जवान जोड़े सड़क पर दिखाई दे उनको रोक कर गिरफ्तार करो खास करके एक लडकी जिसने लाल हैण्ड बेग अपने गले में टांग रखा है आल पुलिस पार्टी अलर्ट |

मून मून होटल का मालिक एक चालक व्यापारी था, उसने शहर के बाहर फालतू पड़ी इस प्रॉपर्टी से पैसे कमाने का घटिया रास्ता निकला था, उसने पुलिस की रेड पड़ने की स्थिति मैं बचने का एक नायब रास्ता ढूढ़ लिया था, जैसे ही पुलिस की जीप होटल के आधा किलोमीटर बाहर मेन गेट पर पहुची, वहा बैठे सिक्यूरिटी गार्ड ने अन्दर होटल के कमरों मैं लगा सायरन बजा दिया, और अन्दर पूरा होटल अलर्ट हो गया, फिर सामने से आता टेम्पो और उसमे रिवर्स गियर नही होना सब केवल पुलिस को रोके रखने का प्लान था, ताकि अन्दर सभी वेश्याओ और जोड़ो को बाहर सुरक्षित निकाला जा सके |

दिन भर की थकान के बाद मयूर की सुरक्षित और आरामदायक बांहों में रागिनी बच्चों की तरह निश्चिन्त सो रही थी, उसकी नींद खुली तब सायरन की आवाज पुरे कमरे मैं गूंज रही थी, उस समय सुबह के 5 बज रहे थे, और सायरन काफी देर से बज रहा था, कोई जोर जोर से दरवाजा भड़क रहा था, वो आवाज बहुत डरावनी थी, उसने मयूर को उठाया, मयूर ने आवाज को फ़ौरन पहचान लिया, वो अपने दोस्तों के साथ इस होटल मैं पहले भी आ चूका था, उसने रागिनी से कहा – पुलिस की रेड | जल्दी सामान समेटो और भागो यहाँ से |

रागिनी ने कहा – हमारे पास जो भी सामान है सब खुल्ला पड़ा है और एक शरारती मुस्कान उसके चेहरे पर उभर आई |

जब वो बाहर निकले तब तक निश्चित ही देर हो चुकी थी, क्योकि मयूर ने नोटिस किया की उस समय कोरिडोर में कोई भी नहीं था सिवाय उनके, सारे कमरे पहले ही खाली हो चुके थे, वास्तव मैं ये बिलकुल सही था जब उनकी नींद खुली तब तन्यल होटल के रिसेप्शन पर खड़ा था |

जब वो रूम से बाहर निकले तब तक तन्यल सीढिया चढ़ रहा था, उन दोनों को अगर भागना था तो एक मात्र रास्ता वो सीढिया ही थी जिनसे निचे उतर कर वो पीछे के रास्ते से जंगलो में जा सकते थे, और उस एक मात्र रास्ते से तन्यल ऊपर आ रहा था और बहुत सम्भावना थी की उन दोनों की भिडंत तन्यल सो हो जाये |

मयूर जब निचे उतरने की सीढियों के मुहाने पर पहुचा और उसने तन्यल को ऊपर चढ़ते देखा तो उसका दिल धक् से रह गया उसने देखा वो बहुत तेजी से दो दो सीढिया चढ़कर ऊपर आ रहे थे, उसने इधर उधर नजर डाली और उसे सीढियों के पास वाश रूम दिखाई दिया उसने रागिनी का हाथ पकड़ा और वो दोनों वाश रूम में घुस गये, तन्यल ऊपर आया और सीधा रूम नो.. 308 पे गया, मयूर ने वाशरूम का दरवाजा खोल कर देखा, तन्यल और उसके साथ आये पुलिस वाले रूम के अन्दर जा चुके थे, उसने रागिनी का हाथ थाम रखा था फ़ौरन बाहर निकलने के लिए दरवाजा खोला वो बाहर निकलने ही वाले थे कि तभी उनके रूम में घुसे पुलिस वालो में से एक बाहर आया, और वाश रूम की तरफ बढ़ा, उनका दिल फिर तेजी से धडकने लगा, धीरे धीरे उसके जूतों की आवाज उनके करीब आ रही थी, किसी भी सेकंड उनका सामना उस पुलिस वाले से हो सकता था, पुलिस वाला वाश रूम तक आया, और उसने वाशरूम के दरवाजे का नकुचा पकड़ कर निचे की और दबाया, मयूर तैयार था, तभी पुलिस वाले ने देखा, जिस वाशरूम में वो जा रहा था, उसके ऊपर एक लेडीज स्टीकर लगा था, उसने नकुचा छोड़ दिया और उसके बिलकुल पास में एक और दरवाजे का नकुचा खोला जिसपर जेंट्स का स्टीकर लगा था, खोला और अन्दर चला गया

दोनों ने वाशरूम के दरवाजे पर लगे कांच में से सबकुछ देखा, मयूर ने रागिनि का हाथ पकड़ा और फुर्ती से बाहर निकला, एक एक सेकंड कीमती था, ज्यादा देर वहा रुकना ठीक नही था, उनको रिस्क लेकर जल्दी से जल्दी बाहर निकलना था- वो तेजी से सीढियों से निचे उतरे तभी तन्यल भी बाहर आया, पर कुछ सेकंड के फासले से वो उन दोनों को नही देख सका, दोनों पीछे के दरवाजे से बाहर निकल कर होटल की दिवार के सहारे खड़े हो गये, उन्होंने देखा पीछे एक मैदान था जिसके बाद जंगल, तभी उन्हें तन्यल की आवाज सुनाई दी मून मून होटल के आसपास जितने भी जवान जोड़े सड़क पर दिखाई दे उनको रोक कर गिरफ्तार करो खास करके एक लडकी जिसने लाल हैण्ड बेग अपने गले में टांग रखा है आल पुलिस पार्टी अलर्ट |

उन दोनों ने एक दुसरे की और देखा और तेजी से मैदान मैं दौड़ लगा दी, तन्यल पीछे के दरवाजे की और बढ़ा और उसने बाहर देखा, पर उसे वह कोई नहीं दिखाई दिया, दोनों मैदान पार कर जंगली झाड़ियो के पीछे छुप चुके थे |

तन्यल गुस्से से आग बबूला हो रहा था, वो जितना पांच लाख के पास जाता था उतना ही वो उससे दूर होते जाते थे, वो होटल के रिसेप्शनिस्ट पर गुराया – जल्दी से तेरे सीसीटीवी फुटेज में उन दोनों के फोटो निकाल और मुझे दे, वर्ना आज तेरी खैर नहीं |

रिसेप्शनिस्ट उन दोनों लड़का लडकी को याद कर के सोच रहा था – जरुर उन्होंने किसी का मर्डर किया होगा या बैंक लूटी होगी तभी इंस्पेक्टर इतना उतावला हो रहा है |

उसने सीसीटीवी फुटेज कंप्यूटर में लिया और एक प्रिंट तन्यल को दी |

तन्यल ने प्रिंट देखा और चौक गया फुटेज में लड़का तो साफ दिख रहा था पर लडकी ने अपना मुंह लाल हैण्ड बेग से ढक रखा था – उसके मुंह से सिटी निकल गई, - लडकी को मालूम था यहाँ सीसीटीवी लगा है और बड़ी सफाई से उसने अपना फोटो नही आने दिया, ये कौन हो सकती है ?

झाड़ियो के पीछे एक पेड़ की ओट में मयूर रागिनी की गोद मैं लेटा था, उसने कहा – जब तक बाहर रोड पर चहल पहल नही हो जाती हम यहाँ से नहीं निकल सकते, पकड़े जायेंगे, अभी पाच – छे घंटे ये झाडिया ही अपनी होटल और ये झाडिया ही अपना घर है |

रागिनी ने मयूर के बालो में हाथ फिराते हुए बोला – मयूर कैसे भी करके हमे दिल्ली पहुचना है वहा ये पुलिस वाला हमारा कुछ नही बिगाड़ सकता है |

तन्यल ने उन दोनों का प्रिंटआउट अपने पास खड़े सिपाही को दिया और कहा – इसकी 1000 फोटो कॉपी करवाओ और शहर के हर कोने मैं इन दोनों के पोस्टर लगवा दो |

झाड़ियो के पीछे बैठे बैठे रागिनी एक टक मयूर को ही देख रही थी उसने सोचा – मैंने तुमको किस मुसीबत में फसा दिया मयूर, मेरे साथ साथ तुम्हारी भी जान पर बन आई है |

ऐसे ही बैठे बैठे दिन के 11 बज गये. होटल के बाहर वाली रोड पे ट्रैफिक बढ़ रहा था, मयूर ने रागिनी से कहा – ये सही समय है हमे यहाँ से निकल चलना चाहिए, हम स्टेशन जायेंगे और वहा से दिल्ली कि ट्रेन पकड़ लेंगे, पर हमे अलग अलग जाना होगा क्योकि पुलिस हम दोनों को साथ मैं तलाश रही है, अगर हम अलग अलग जायेंगे तो किसी को शक नही होगा, रागिनी ने सहमती से सर हिलाया और बोली – मैं रेलवे स्टेशन पहुच कर तुम्हारा इंतजार टिगिट खिड़की के पास करूंगी तुम वही आ जाना |

मयूर रेलवे स्टेशन पर सबसे पहले पहुचा पर वहा पुलिस वाले मुस्तेदी से गेट पे खड़े थे, उसने मुख्य गेट से अन्दर जाने की बजाय मॉल गोदाम से ही अन्दर जाना उचित समझा, वो धीरे धीरे करते मॉल गोदाम को पार कर स्टेशन के अन्दर प्लेटफार्म पे गया और फिर वहा से टिगिट खिड़की तक पहुचा, उसने अपनी जेब से पैसे निकले और उसका दिल धक् से रह गया – टिगिट खिड़की के बाहर एक थम्बे पर उसका साफ और रागिनी का लाल हैण्ड बेग से ढका फोटो लगा था, उसके मुंह से एक आह निकल गई और पहली बार उसके चेहरे पर झुंझलाहट के भाव उभरे, पुलिस बड़ी तेजी से उसके आगे आगे चल रही थी, उसको फोटो देखते, देख एक और लडके ने फोटो देखा और फिर मयूर की और देखा उसका चेहरा आश्चर्य से सफेद हो गया |

मयूर को अपने पहचाने जाने का अहसास हो गया था वो तेजी से बाहर की और बढ़ा, उसको पहचानने वाले ने इधर उधर देखा और पास खड़े पुलिस वाले के पास जाकर उसकी दिशा में इशारा किया |

मयूर स्टेशन से बाहर निकला और उसे अपने फैसले पर पछतावा होने लगा कि क्यों उसने रागिनी को अपने से अलग किया, अब वो उसे कैसे ढूंढेंगा ?

रागिनी टैक्सी से उतरी और सीधी स्टेशन के अन्दर टीगीट खिड़की पर पहुची और उसकी नजर खम्बे पर लगे मयूर और उसके पोस्टर पर पड़ी, और उसका चेहरा भय से पिला पड़ गया |
 
वो बाहर आई और उसने चारो तरफ नजर दौड़ाई, मयूर उसे दूर - दूर तक नही दिखाई पड़ रहा था |

उधर अपना फोटो स्टेशन में लगा देखने के बाद मयूर स्टेशन के सामने एक घटिया से रेस्तरां में कार्नर की टेबल पर लगभग छुप कर बैठ गया, उसने वेटर से एक प्लेट पोहा और चाय लाने का कहा, तभी उसकी नजर रागिनी पर पड़ी वो एक ऑटो से उतरी और तेज कदमो से चलती हुई, स्टेशन के गेट के अंदर दाखिल हो गई – वो जरुर टिगिट खिड़की के पास मेरा इंतजार करेगी पर अन्दर जाना उसके लिए खतरे से खाली नही होगा - उसने सोचा – अजीब मुसीबत है, अब क्या करू, कंही पुलिस रागिनी को पकड़ न ले |

तभी रेस्तरा में एक गरीब सा दिखने वाला लड़का आया और उसने तुड़ा मुड़ा 10 का नोट निकाल कर रेस्तरा वाले से कहा – एक प्लेट पोहा,

शायद ये लड़का स्टेशन पर ही रहता है – और उसके दिमाग में एक तरकीब सूझी

उसने लडके के पास जा कर पचास रूपये का नोट बढ़ाते हुए कहा – क्या मेरा एक काम करोगो ?

नोट देखते ही लडके के चेहरे पर चमक आ गई – क्या ? उसने पूछा

स्टेशन में टिगिट खिड़की के पास एक मेडम खड़ी होगी जिनके हाथ में लाल पर्स है, उनको बोलना मैं उनका इंतजार यहाँ कर रहा हूँ, जब तुम ये काम करके वापस आओगे तो तुम्हे ऐसा ही पचास का एक और नोट दूंगा |

लडके ने सहमती से सर हिलाया, पचास का नोट जेब में डाला और तेजी से रोड पार करके स्टेशन के गेट मैं दाखिल हुआ |

रागिनी ने अपनी बेग से ढकी फोटो और मयूर की पूरी फोटो देखी, और वो टिगिट खिड़की के पीछे लगी लम्बी लाइन के पीछे भीड़ में छुप कर खड़ी हो गई, उसको पक्का मालूम था, मयूर यंहा जरुर आएगा |

टिगिट खिड़की के पास एक पुलिस वाले की आखे मेटल डिटेक्टर की तरह हर आने जाने वाले का गौर से मुआयना कर रही थी, लड़का पुलिस वाले के सामने से टिगिट खिड़की तक पहुचा जिस पर उसने कोई ध्यान नही दिया |

छोटा लड़का जिसे स्टेशन पर सब छोटू के नाम से बुलाते थे एक अनाथ लड़का था, जिसका कोई नहीं था, उसने कुछ देर आसपास लाल बेग वाली मेडम को तलाशा पर वो उसे नहीं दिखाई दी, अगर उसने उन अंकल का मेसेज मेडम तक नही पहुचाया तो सौ रूपये कमाने का चांस उसके हाथ से जा सकता था, उसने कुछ देर इंतजार किया लेकिन मेडम नहीं दिखाई दी, वो वापिस जाने के लिए मुड़ा, उसके दिमाग में पचास रूपये लेकर भागने का विचार आया, पर उसका जमीर इसकी इजाजत नही दे रहा था |

उसकी नजर पुलिस वाले पर पड़ी, और उसने सोचा – इन पुलिस वाले अंकल ने जरुर किसी लाल बेग वाली मेडम को देखा होगा- और उसने पुलिस वाले के पास जा कर पूछा – क्या आपने यहाँ लाल बेग वाली किसी लडकी को देखा है ?

कमाल है ? पुलिस वाले ने सोचा जिस लाल बेग वाली लड़की को पूरा डिपार्टमेंट ढूंढ रहा है, उसको ये छोटा सा लड़का भी ढूंढ रहा है – उसने पूछा – क्यों ढूंढ रहे हो उसको ?

और लडके ने मयूर के बारे में उसे बताया, पुलिसवाला लडके को लेकर स्टेशन के गेट के बाहर आया लडके ने उसको रेस्तरां की तरफ इशारा किया जहा मयूर बैठा था, उसने वायरलेस उठाया और कुछ बोलता हुआ तेजी से रेस्तरा की और बढ़ गया |

मयूर ने जेसे ही लडके को स्टेशन के अन्दर जाते देखा उसने सावधानी बरतते हुए अपनी पोजीशन बदली और रेस्तरा के पास पड़ी कुछ अतिक्रमण की गुमटियों में से एक के पीछे चला गया, वहा से वो स्टेशन के गेट पर आसानी से नजर रख सकता था |

मयूर ने पुलिस वाले के साथ उस लडके को स्टेशन के गेट से बाहर आते देखा और उसने देखा लडके ने उस रेस्तरा की तरफ इशारा किया था जिधर थोड़ी देर पहले वो बैठा था |

जैसे ही पुलिस वाले रेस्तरा में घुसे, वो गुमटी को ओट में से निकला और उसने देखा की जिस गुमटी की ओट में वो खड़ा था वो एक हेयर सेलून था, उस समय हेयर कट करने की उस दुकान मैं कोई नहीं था, उसने अपनी दाढ़ी पर हाथ फिराया जो कुछ हद तक बढ़ गई थी, वो तुरंत हेयर सेलून के अन्दर घुसा और खाली पड़ी सेलून की कुर्सी पर बैठा गया, दुकानदार से उसने कहा – शेविंग करना है |

दुकानदार ने उसे एक कला चोंगा पहनाया ताकि उसके कपड़ो पर बाल न लगे, मयूर ने देखा सेलून में जिस कांच के सामने वो बैठ कर दाढ़ी बनवा रह था उसमे से पीछे मैंन रोड सहित स्टेशन का गेट साफ दिखाई पड़ता था, अगर रागिनी उस गेट से जाएगी तो उसे दिखाई देगी

दुकानदार ने ब्रश से उसके चेहरे पर क्रीम लगाया और उसका चेहरा सफेद झाग से ढक गया, तभी एक पुलिस वाला वहां आया उसने अन्दर झांक कर देखा और मयूर को गौर से देखा, मयूर का दिल तेजी से धड़क रहा था पर उसके चेहरे पर लगे साबुन से पुलिसवाला उसे पहचान नही पाया और आगे निकल गया |

टिगिट खिड़की पर टिगिट लेने वालो की लाइन के पीछे खड़ी रागिनी की नजर गेट पे खड़े पुलिस वाले पर थी, उसने पुलिस वाले को एक लडके से बात करते देखा फिर पुलिस जवान को तेजी से बाहर जाते देखा, उसने अनुमान लगाया मयूर ने शायद उनका पोस्टर पहले ही देख लिया हो और वो बाहर कही उसका इंतजार कर रहा हो, वो बाहर निकली और गेट के पास उसे वो छोटा लड़का दिखाई दिया |

लडके ने लाल बेग वाली मेडम को देखा और बोला – क्या आप उन लम्बे गौरे, नीली आखो वाले अंकल जी को ढूंढ रही हो ?

रागिनी की साँस अन्दर की अन्दर ही रह गयी उसने हां में सर ऊपर निचे किया |

लडके ने रेस्तरा के डायरेक्शन में इशारा किया और कहा – पुलिस भी उन अंकलजी को ढूंढते गई है, उनसे मुझे पचास रूपये लेने है |

रागिनी ने अपने पर्स में से 100 का नोट निकला और कहा – हिसाब बराबर

वो बाहर निकली

कटिंग कि दूकान पर अपनी दाढ़ी बनवाते हुए, अपनी कुर्सी के सामने की और लगे कांच में से मयूर गेट पर नजर रखे हुए था, उसने देखा रागिनी बाहर निकली और रेस्तरा की और बढ़ रही है, वो पुलिस वालो के पास में से निकली पर किसी ने उसकी और ध्यान नही दिया क्योकि वो तो अब किसी नीली आखो वाले आदमी को ढूंढ रहे थे |

उस समय तक मयूर की दाढ़ी आधी बन चुकी थी, उसने अपने सामने लगे कांच में से देखा धीरे धीरे चलते रागिनी कटिंग की दुकान के सामने से गुजरी, उसके चेहरे पर उदासी साफ झलक रही थी, उसने फ़ौरन एक कपड़ा उठाया अपने चेहरे से साबुन पोछा और दुकानदार द्वारा पहनाया लबादा उतारा और एक निश्चित दुरी बनाते हुए रागिनी के पीछे पीछे चलने लगा |

इस अनजान शहर में अब उसका कोई नही है – रागिनी का मन गमगीन हो रहा था – उसकी आँखे मयूर को चारो और तलाश कर रही थी, धीरे धीरे चलते चलते वो स्टेशन से थोड़ी दूर निकल गयी, और एक सुनसान गली में मुड़ गई, उसे मयूर से अलग नही होना था – उसके चेरे पर पछतावा और उदासी के मिले जुले भाव थे, क्या पता वो अभी कहाँ होगा, वो अपनी धुन में सुनसान गली में चली जा रही थी, तभी उसे लगा कोई उसका पिछा कर रहा है, उसने मुड़ कर देखा उसके बिलकुल पीछे मयूर खड़ा था, उसे देखते ही उसकी आँखों में ख़ुशी के आंसू झलक पड़े और वो दौड़ कर मयूर के गले लग गई, दोनों कुछ देर तक इसी तरह एक दुसरे से चिपके रहे फिर रागिनी ने मयूर के गालो पर हाथ फेरा और पूछा – ये कौन सी फैशन है आधी दाढ़ी की – और वो दोनों खिलखिला कर हस पड़े |

वापस मिलने की ख़ुशी में वो भूल गये थे की उनके पीछे पुलिस और गुंडे पड़े है, उनका ध्यान टुटा और रागिनी ने कहा – कैसे भी कर के हमको दिल्ली पहुचना है |

मयूर ने कहा – चिंता मत करो रागिनी, जब वापिस मिल गये है तो दिल्ली दूर नही है |
 
वो वापिस स्टेशन की तरफ आये और टैक्सी स्टैंड की और बढ़े जहा एक टैक्सी वाला अपनी टैक्सी को पानी से साफ कर रहा था, उसने उन दोनों को देखा और बोला – कहा चलना है ?

उन्होंने कहा – दिल्ली,

टैक्सी वाले ने दोनों को गौर से देखा और बोला जल्दी गाड़ी में बैठो – और दरवाजा खोल दिया |

दोनों फ़ौरन टैक्सी में सवार हुए और टैक्सी शहरी ट्रैफिक पीछे छोडती हुई दिल्ली जाने वाले पहाड़ी रास्ते पर आ गई |

टैक्सी ड्राईवर ने ट्रैफिक निकलते ही टैक्सी एक तरफ रोकी और पीछे बैठे दोनों को देखकर कहा – दिल्ली तक जाने के पुरे 50,000 लगेगे, यहाँ तक तुमको ले आया हु आगे तुम्हारी मर्जी |

मयूर का मन संशय से भर गया – इतने ज्यादा क्यों ?

टैक्सी वाले ने बोला – तुम दोनों ने किया क्या है, पूरी पुलिस फ़ोर्स तुमको ऐसे ढूंढ रही है जैसे तुम इस देश के सबसे बड़े क्रिमिनल हो |

वही हुआ जिसका डर था – मयूर ने कहा – पर तुमने हमको पहचाना कैसे ?

हमको स्पष्ट आर्डर मिले है – एक लाल स्लिंग बेग वाली लडकी और नीली आखो वाला लड़का जहाँ कही भी मिले फ़ौरन पुलिस को इत्तिला करो, मैंने तुमको यहाँ तक ला कर कितना बड़ा खतरा मोल लिया है, तुम सोच भी नही सकते, तुमने ऐसा किया क्या है, घर से भाग कर आये हो ?

रागिनी बोली – तुमको जितने पैसे चाहिए, ले लेना हमको जल्दी से जल्दी दिल्ली तक पहुचा दो

ड्राईवर ने अक्सिलेटर पर पैर मारा और गाड़ी दिल्ली के रास्तें की और ढलान उतरने लगी |

तन्यल को कुछ देर के लिए नींद आ गयी थी, वो रात भर का जगा हुआ था, उसने उठते ही अपने डिप्टी से पूरा घटनाक्रम समझा और सोचा – बहुत चालक है, वो पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन का उपयोग यहाँ से भागने में नही करेंगे, वो सीधा टैक्सी स्टैंड पहुचा और पार्किंग की पर्ची काटने वाले के पास जाकर बोला – क्या यहाँ से सुबह कोई टैक्सी हायर हुई है ?

यहाँ से तो रोज बहुत सारी टैक्सी हायर होती है साहब आप किसकी बात कर रहे हो ?

फिर मजाक तन्यल ने सोचा यहाँ हमारी नींद हराम हो रही है और इसे पता ही नही है की हम किसको ढूंढ रहे है, उसने कहा – एक लड़का और एक लडकी जिसके हाथ में लाल स्लिंग बेग है जो उसके कंधे पर लटका है |

टैक्सी यूनियन की पर्ची काटने वाले को ध्यान आया – हा साहब एक गाडी, लगभग 1 घंटा पहले गई है, जिसमे एक कपल गया है, लड़का हीरो जैसा और लडकी तो अब क्या बोलू साब, मेरा ध्यान उसी पर था, और उसके हाथ में लाल बेग भी था ! पर अब तक वो गाड़ी टोल भी क्रॉस कर गई होगी |

तन्यल ने गाडी का नम्बर लिया और टोल पर फ़ोन किया, सुनो 2000 नो. की टैक्सी जैसे ही तुम्हारे टोल पर आये उसे रोकने की कोशिश करना और सावधानी से उनके पास पिस्तौल है |

टोल नाके पर बैठे लडके ने कहा ये गाडी यहाँ खड़ी है, और विंडो से अपनी पर्ची कटवा रही है, क्या करना है ?

तन्यल ने बोला – उस गाड़ी को रोको बेवकूफ, वो आगे नही जाने पाए टोल के गेट को बंद रखो

मयूर ने जैसे ही पचास का नोट टोल विंडो में बढ़ाया उसने मयूर से कहा – मेरे पास खुल्ले पैसे नही है

खुल्ले की चिंता मत कर तू जल्दी दरवाजा खोल – उसने टोल पर्ची काटने वाले से कहा |

टोल वाले लडके ने अपनी मशीन में टोल नाके के टोल वसूल होने का बटन दबाया और उसके प्रिंटर में से पर्ची निकली, उसने पर्ची फाड़ी और मयूर के हाथ में दी, बटन दबते ही टोल का दरवाजा खुला और गाड़ी आगे बढ़ी, तभी गेट के पास खड़ा लड़का जो टोल के लेंड लाइन नम्बर पे किसी से बात कर रहा था ने ड्राईवर को रुकने का इशारा किया |

मयूर ने उसको अपनी और बढ़ते देखा, और ड्राईवर से बोला, जल्दी गाड़ी निकालो और गाड़ी राकेट की तरह टोल का गेट पार करते हुए हाईवे पर दौड़ने लगी |

मयूर ने रागिनी से कहा – तुमको पता है पुलिस तुमको किस नाम से जानती है ?

रागिनी ने न में सर हिलाया और पूछा- क्या ?

लाल स्लिंग बेग वाली लडकी – और दोनों खिलखिला फीकी हंसी हंसने लगे, अन्दर ही अन्दर दोनों जानते थे की पुलिस उनके पीछे अब हाथ धो के पड़ चुकी है |

उनके टोल नाके से आगे निकलने की सुचना मिलते ही तन्यल ने टोल नाके के पास खड़ी पुलिस की जीप की लोकेशन पता की और उसको आर्डर किया की वो जल्दी से जल्दी उस सफेद कार टैक्सी को पीछे जाकर उन दोनों को पकड़े |

मयूर को खतरे का अहसास हो गया था, तो पुलिस को पता चल चूका है की हम इस टैक्सी में है, उसने ड्राईवर से पूछा अगला टोल नाका कितनी दूर है उसने जवाब दिया – लगभग 60 किलो मीटर दूर उसने कहा - ठीक है |

तन्यल अपनी जिन्दगी में कभी इतना नही भागता, अगर वो उसके थाने की सीमा से पार हो गये थे तो उसकी ड्यूटी खतम पर नोटों की गद्दिया उसको भागने पर मजबूर कर रही थी उसने सोचा – ये पैसा तो मैं पूरी मेहनत से ही कमा रही हूँ, दोनों खूब दुड्वा रहे है मुझको, और उसने ड्राईवर को डेल्ही रोड पर गाड़ी लेने को कहा |

उसने अगले टोल नाके पर फ़ोन किया और सफेद टैक्सी का नम्बर देते हुए वहां तैनात सुरक्षा कर्मियों को हिदायत दी की जैसे ही ये गाडी टोल पर आये इसको रोक कर रखना और हा लड़की के पास पिस्तौल है, जरा सावधानी से काम लेना |

कुछ देर बाद उसके पास टोल नाके से फ़ोन आया – सर हमने उस गाड़ी को रोक लिया है |

उसने कहा में कुछ ही देर में वह पहुच रहा हूँ तुम उनको जाने मत देना |

भागता दौड़ता तन्यल दुसरे न. के टोल नाके तक पहुचा, उसने अपने होल्स्टर से पिस्तौल निकली और कार के पास गया, अन्दर केवल टैक्सी ड्राईवर बैठा था जो तन्यल को खौफ की नजरो से देख रहा था, सिट के पीछे पड़ा था लाल स्लिंग बेग, जिसमे से कुछ चिल्लर निकलकर सीट पर बिखरी पड़ी थी |

तन्यल उसपर चिल्लाया – वो दोनों कहा है ?

टैक्सी ड्राईवर ने कहा – सर वो तो 10 किलोमीटर पहले ही गाड़ी से उतर गये |

दोनों कुछ देर तक एक दुसरे को देखते रहे, फिर तन्यल मुड़ा और पहाड़ी रस्ते पर निचे देखने लगा, यहाँ से उसके थाने सीमा समाप्त होती है, वो आगे कुछ नही कर सकता |
 
मयूर ने गाड़ी 10 किलोमीटर पहले ही रुकवा ली थी वो जनता था तन्यल अगले टोल पर फ़ोन करेगा, टैक्सी से उतरकर रागिनी से बोला – हमको कुछ दूर पैदल ही चलना पड़ेगा, ये सड़क पहाड़ का चक्कर लगा कर वापिस वहा निचे आती है, - उसने निचे जाती घुमावदार सड़क की और इशारा किया अगर हम इस पगडंडी से चलेंगे तो हमको पुरे पहाड़ का चक्कर नही लगाना पड़ेगा और हम जल्दी पहुच जायेंगे, और पुलिस भी हमको उस कार मैं ही ढूंडती रहेगी |

वो पहाड़ से सीधे पगडण्डी उतरे और वापिस हाईवे पर आ गये, दो मिनिट वही खड़े रहे और उनको एक वॉल्वो बस आती हुई दिखाई दी, रागिनी ने अपने हाथ से रुकने का इशारा बस को किया |

बस के ड्राईवर को बस बीचे में रोकने की इजाजत नही थी, पर एक शहरी लडकी को इस जंगल में देख कर उसमे मदद का भाव जागा और उसने बस रोक दी, दोनों दौड़ कर उस बस में चढ़ गये, पीछे रह गया तन्यल और उसके सामने टैक्सी ड्राईवर, उसकी कहानी सुनने के बाद तन्यल ने उसको कहा – आज के बाद मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना |

रात 8 बजे बस दिल्ली बस स्टैंड पे पहुची, मयूर ने सोचा अच्छे समय पहुच गये, अगर तन्यल ने अपना जाल यहाँ तक नही डाला होगा तो अभी भीड़ में गुम होना बहुत आसान होगा |

मयूर ने रागिनी को कहा – दिल्ली दिलवालों की है देखते है ये हमारे साथ कैसा सुलूक करती है पहले हमको कुछ चीजे खरीदनी है और वो स्टैंड के सामने एक बड़ी दुकान में गये और वहा से एक ब्लू कलर का नया ट्राली बेग खरीदा |

रागिनी ने पूछा – इस बेग की क्या जरूरत है ?

बेग से हम पर किसी भी होटल वाले को शक नही होगा |

जीनियस – रागिनी हंसते हुए बोली |

उन्होंने बेग में रखने के लिए कुछ कपड़े खरीदे, रागिनी ने एक दूकान से एक मंगल सूत्र खरीदा और अपने गले में डाल लिया |

खुद ही दुल्हन बन जाओ – मयूर ने कहा

डोंट वोर्री जब तुम्हारा मन हो, बैंड, बाजा, बारात लेकर आना और एक बार और मुझे पहना देना

दोनों टैक्सी में बैठे और रेलवे स्टेशन के सामने एक सकरी गली में स्थित एक थ्री स्टार होटल के रिसेप्शन पर पहुचे और एक रूम किराये पर लिया, वो होटल शहर के बीच और विदेशी लोगो की पसंदीदा जगह थी, वो अपने रूम में पहुचे और रूम अन्दर से लॉक कर लिया |

सुबह लगभग 8 बजे मयूर की नींद खुली, और उसने देखा की रागिनी बिस्तर पर नही है, उसने सोचा बाथरूम में होगी, और वो फिर सो गया, थकान की वजह से वो दिन चढने तक सोता रहा, लगभग 11 बजे उसकी नींद फिर खुली और रागिनी फिर उसके पास नही थी, वो उठा और चारो और देखा, रूम पूरी तरह खाली था |

उसकी नजर दरवाजे पर गई और वो अन्दर से खुल्ला था, कहा गई वो – उसने सोचा और उठ खड़ा हुआ |

और उसको टी टेबल के ऊपर एक कागज पे लिखा नोट पड़ा दिखा – मयूर मुझे माफ़ करना मैंने तुम्हारी जान संकट में डाल दी, मैं तुमको छोड़ कर जा रही हूँ, मुझे भूल जाना, यही हम दोनों के लिए अच्छा रहेगा बाय |

वो रिसेप्शन पे गया और पूछा – मेरे साथ जो मेडम थी, उनको देखा तुमने ? मयूर के चेहरे पर अधीरता थी |

वो तो सुबह 8 बजे ही ब्लू बेग ले कर चली गयी |
 
वो वापिस रूम मैं आया और रागिनी को मोबाइल लगाने के लिए अपना मोबाइल ओन किया जो उसने मेले वाले कांड के बाद से ऑफ कर रखा था | मोबाइल ओन हुआ और अविश्वास से उसकी आँखे मोबाइल की स्क्रीन पर जम गई, उसने देखा मोबाइल पूरी तरह से खाली था, रागिनी की एक मात्र पिक्चर सहित सारी पिक्चर मोबाइल में नहीं थी, न कोई कांटेक्ट नम्बर, न कोई विडियो पूरी तरह से ब्लेंक मोबाइल |

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और उसका ध्यान टुटा उसने दरवाजा खोला – सामने तन्यल खड़ा था |

वो दोनों एक दुसरे को देख रहे थे |

पुलिस स्टेशन में तन्यल पाचवी बार मयूर से पूछ रहा था –

वो लडकी कौन थी, कहा से आई थी ?

मुझे नही मालूम |

उसके हाथ में पिस्तौल कहा से आई थी ?

मुझे नही मालूम |

वो दोनों गुंडे कौन थे, वो उस लडकी को क्यों मारना चाहते थे ?

मुझे नहीं मालूम |

तुमने पुलिस से भागने में उसकी मदद क्यों की ?

क्योकि में उस लडकी से प्यार करता हूँ |

बकवास मत करो – तन्यल गुराया – तुम नही जानते हो तुम किस मुसीबत मैं हो, अगर मेरी खोपड़ी बिगड़ गई तो तुमसे तोते की तरह सब उगलवा लूँगा, उस लडकी को बचा कर तुमको कुछ नही मिलने वाला है, अगर तुमने पुलिस की मदद की तो मैं तुमको सरकारी गवाह बना कर बरी करवा दूंगा |

मयूर ने बैचेनी से पहलू बदला और कहा – जो सवाल आप पूछ रहे है उनका जवाब मुझे भी नही मालूम मैं खुद विचित्र स्थिति मैं फसा हु |

तन्यल ने कहा – तुमको मालूम है, मैंने हर उस जगह पर तलाश करवाया जहा तुम दोनों गये थे, पर किसी भी जगह उस लडकी का एक भी फोटो नही है, न कोई उसे जनता है न कोई पता ठिकाना किसी को मालूम है, बाय गॉड मैंने अपनी जिन्दगी मैं ऐसा केस नही देखा, वो दोनों गुंडे भी गायब है, लडकी भी, पिस्तौल भी, कोई फोटो भी नहीं आश्चर्य !

मयूर ने कहा – उसने मुझे उसके बारे मैं कुछ नही बताया, आप मुझे जाने दीजिये, मैं केवल उस लडकी की मदद कर रहा था |

ऐसा नही हो सकता – तुम जितना भोला दिखने का प्रयास कर रहे हो वास्तव मैं हो नहीं, लगता है मुझे थर्ड डिग्री इस्तमाल करनी ही पड़ेगी – उसका चेहरा अब गुस्से से लाल हो रहा था |

वो उठा और उसने सिपाही को इशारा किया – सिपाही ने मयूर के कंधे पर हाथ रखा और कहा – चल

मयूर समझ गया अब क्या होने वाला है, उसने सिपाही का हाथ झटका और कहा – आप लोग मेरे साथ ऐसा बर्ताव नही कर सकते, मुझे एक फ़ोन कॉल करना है, और कानून मुझे एक फ़ोन कॉल करने की इजाजत देता है, मुझे अपने एडवोकेट को बुलाना है |

जवाब में जवान हंसा पर बोला कुछ नही |

जैसे ही मयूर ने जवान का हाथ अपने कंधे से झटका तन्यल की त्योरिया चढ़ गई, फिर बेइज्जती, ये लड़का मेरे थाने मैं ऐसे व्यवहार कर रहा है जैसे कोई फिल्म स्टार हो, उसने पास पड़ा डंडा उठाया और मयूर की तरफ बढ़ा |

मयूर ने अपनी सांसे रोक रखी थी उसे मालूम था अब ये मानेगा नही, तभी थाने के फ़ोन की घंटी बजी, दीवान जी ने फ़ोन उठाया, तब तक तन्यल डंडा लेकर मयूर के पास पहुच चूका था, दीवानजी ने कहा - सर कमिश्नर साहेब का फ़ोन है |

तन्यल – दूसरी तरफ से कमिश्नर की भारी भरकम आवाज गूंज उठी

जी सर – तन्यल सावधान की मुद्रा में आते हुए बोला |

तुमने आज सुबह एक लडके को अरेस्ट किया है, क्या नाम है उसका मयूर

जी सर – वो लड़का और उस लडकी ने ......

बकवास मत करो जो बोलता हु पहले उसे ध्यान से सुनो – मयूर सर से फ़ौरन माफ़ी मांगो और इज्जत के साथ उन्हें उनके घर तक छोड़ कर आओ |

आश्चर्य में पड़े तन्यल ने मयूर की दिशा मैं देखा – और बोला सर उसने मुझ पर हमला किया है – उसने सोचा था कोई लोकल नेता का प्रेशर होगा तभी कमिश्नर साहब इस लडके को छोड़ने का बोल रहे है |

तन्यल तुम मुर्ख हो क्या तुम्हारे पास उस लडके के खिलाफ कोई सबूत है, न तुम लडकी को पकड़ सके, न पिस्तौल जब्त कर सके, और तो और वो दोनों गुंडे भी भाग गये, तुम्हारे पास उन मेडम का एक फोटो भी नही है, क्या साबित करोगो कोर्ट में, तुम्हारी कहानी को मनघडनत बोलकर वकील तुम्हारी मजाक उड़ायेंगे |
 
तन्यल तुम मुर्ख हो क्या तुम्हारे पास उस लडके के खिलाफ कोई सबूत है, न तुम लडकी को पकड़ सके, न पिस्तौल जब्त कर सके, और तो और वो दोनों गुंडे भी भाग गये, तुम्हारे पास उन मेडम का एक फोटो भी नही है, क्या साबित करोगो कोर्ट में, तुम्हारी कहानी को मनघडनत बोलकर वकील तुम्हारी मजाक उड़ायेंगे |

तन्यल ने एक सेकंड सोचा और अनमन से बोला – ठीक है सर, मैं उसको छोड़ता हु |

और सुनो, मेरे ऊपर बहुत ऊपर से प्रेशर है, तुम्हारा ट्रांसफर लेह कर दिया गया है, अभी एक घंटे के अन्दर तुम्हे रिलीव आर्डर मिल जायेंगे, तुम आज अभी अपने डिप्टी को थाने का चार्ज दे दो |

तन्यल के पांव के निचे से जमीन खिसक गई, उसने कल्पना में अपने आप को लेह की बर्फीली हवाओ मैं एक थाने पर बैठा पाया जहा दूर दूर तक इन्सान का नामो निशान नही था |

उसने धीरे से रिसीवर वापस रखा और मयूर के पास आया कुछ देर उसको देखता रहा |

मयूर ने समझा वो फिर वही सवाल पूछेगा जो पिछले एक घंटे से पूछ रहा था उसने कहा – में आपको बता चूका हु मुझे नही मालूम वो लडकी कौन थी |

तन्यल ने उसकी और बड़ी दयनीय नजर से देखा और पूछा – भाई तुम कौन हो, मुझे माफ़ कर दो |

उधर दूर कही समुद्र के किनारे एक आलीशान रिसोर्ट मैं स्विमिंग सूट पहने एक लडकी अपने हाथ में लेमन कॉकटेल के गिलास का सिप कर रही थी, समुद्र की लहरें उसके पांव को छु कर जा रही थी, उसकी आखे बंद थी, वो कुछ सोच रही थी, तभी उसके पास रखे फ़ोन की घंटी बजी उसने फ़ोन उठाया और दूसरी तरफ से आवाज गूंजी – आपका आर्डर पूरा हो गया है मेडम, उस थाने के इन्चार्जे का ट्रान्सफर दूर लेह कर दिया गया है और वो लड़का भी आजाद हो गया है, अब उसको कोई परेशान नही करेगा |

उसने बोला – ठीक है और फ़ोन रख दिया

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भाग 2

वो कौन थी ? कहा से आई थी ? और उसे अकेला छोड़कर कहा गायब हो गई थी ? वो गुंडे उसको क्यों मारना चाहते थे ?

क्या वो उन गुंडों के हाथ लग गई थी ? नहीं – अपने अँधेरे कमरे की खिड़की में से रोड पर देखते हुए मयूर ने सोचा – अगर वो गुंडे उसे ले जाते तो वो नोट नहीं छोडती, नोट छोड़ने का मतलब ही ये है की वो अपनी इच्छा से गई है

उसके हाथ में वो लाल बेग था जो वो थाने से ले आया था, तन्यल के अब वो किसी काम का नही था, उसने अपनी रिपोर्ट में कुछ इस तरह लिखा – मेले में झूले का केबिन गिरने से अफरा तफरी मची थी तभी मेरी नजर बाहर खड़ी एक लडकी पर गई, जिसके हाथ में रिवाल्वर थी, हमने उस लडकी को पकड़ने की रात भर कोशिश की पर वो नही मिली, असल में वो पुलिस से भाग ही नही रही थी, उसके हाथ में जो रिवाल्वर थी वो एक खिलौना पिस्तौल थी जो उसने मेले की एक दुकान से खरीदी थी, जो की गलत फहमी के कारण असली पिस्तौल समझ ली गई, अतः अब आगे इस ताफ्दिश को बढ़ाने का कोई फायेदा नहीं है |

एक फाइल तो निपट गई, उसके और रागिनी के खिलाफ अब पुलिस थाने में कोई केस नही था, और न ही पुलिस उन्हें तलाश कर रही थी, पर क्या मुझे रागिनी की तलाश करनी चाहिए– बैचेनी से उसने करवट ली और कुर्सी के पीछे सर टिका दिया, रागिनी तुम कहा हो |

बिना कुछ खाए पिए वो कुर्सी पर ही सो गया |

रात भर हो रही बारिश के बाद सुबह मौसम साफ था और हलकी धुप भी निकली गई थी, पर उसको अपने सवालों के जवाब नहीं मिल पाए थे |

क्या उसको उन सवालों के जवाब ढूंढने चाहिए ? – पर उसमे बहुत खतरा था – वो खतरों से नही डरता – उसने फिर सोचा और निश्चय किया – आखिर वो कौन थी, उसकी क्या मजबूरी थी जो वो मुझे इस तरह छोड़ कर चली गई, वो भी मुझे नहीं छोड़ना चाहती थी पर उसकी मजबूरी क्या थी ?

उसने बिस्तर छोड़ा करीने से शेव किया और शावर लिया, उसने चेहरे में देखा – उसे दो नीली आँखे और एक चार्मिंग चेहरा दिखाई दिया, ब्लू जींस और वाइट शर्ट पे क्लोंज का स्प्रे कर के वो घर से निकला अपनी महबूबा रागिनी की तलाश में क्या पता ये उसका असली नाम है या ये भी उसी की तरह नकली है – मुस्कुराते हुए उसने सोचा – फ़िलहाल उसके जीवन में एक ही लक्ष्य है नकली की असलियत पता करना |

उसकी गाड़ी यूनिवर्सल गर्ल्स हॉस्टल के बाहर जा कर रुकी, वो सीधे कदमो से चलता हुआ वार्डन के ऑफिस में पहुचा, उसने देखा वार्डन पिछले दिन वाली लडकी के साथ बैठी थी, उसने स्किन कलर की साड़ी पहनी थी जो उसकी नाभि दर्शा रही थी |

उसने सीधे वार्डन की आँखों में आँखे डाली और मुस्कुराते हुए बोला – हेल्लो

वार्डन ने सहमती से सर हिलाया, प्रश्न वाचक नजर से उसकी और देखा |

मैं रागिनी के बारे में पता करने आया हूँ, क्या आप मुझे बता सकती है वो इस समय कहा मिलेगी – उसने दूसरी बार वार्डन की आखो में आखे डाल कर अपना जादू चलाने की नाकाम कोशिश की पर वो उसमे कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रही थी |

हम किसी अजनबी को अपने हॉस्टल की लडकियों की जानकारी नही देते सॉरी – और वो अपने काम में लग गई |

एक्चुली – उसने मुझसे कुछ रूपये उधार लिए थे – और एकाएक गायब हो गई, वो कहा की रहने वाली थी बस इतना जानना था ?

वार्डन ने मुस्करा कर कहा – सो सेड आपने बिना पता ठिकाना पूछे ही रूपये उधार दे दिए, अगली बार किसी लडकी को रूपये दो तो उसका पता पहले पूछ लेना |

वो निराश हो गया – इसे मुझमे कोई दिलचस्पी नही है, इतनी आसानी से बात बनने वाली नहीं है उसने कहा – ट्राय टू अंडरस्टैंड – मेरा उससे मिलना बहुत जरूरी है |

देखो मिस्टर – वार्डन ने सख्त होते हुए बोला – ये हॉस्टल के रूल के खिलाफ है और में रूल नही तोड़ सकती |

ओके थैंक्यू – बोलते हुए वो मुड़ा और तभी उसकी नजर वार्डन के पास बैठी लडकी पर पड़ी, और उसने उसकी आखो में आखे डाली, लडकी मुस्कुराई और उसके चेहरे पर भी एक कातिल मुस्कान उभर आई, दोनों मैं आखो में बात हुई – आशा की किरण उसने सोचा - मयूर ने अपना कार्ड लडकी की और बढाते हुए कहा अगर वो आये तो उसको ये कार्ड दे दीजियेगा |

लडकी ने कार्ड लिया और धीरे से दराज में डाल दिया |

हॉस्टल के दरवाजे पर जा कर मयूर ने मुड़ कर देखा लडकी एक टक उसे ही देखे जा रही थी, मछली कांटे में फंस चुकी थी, रागिनी तुम्हारे लिए मुझे किसी लडकी की भावनाओ से खेलना पड़ेगा – उसके मन से एक आह निकली |

उसने घर जा कर अपने मोबाइल की बेटरी फुल चार्ज की और साउंड फुल किया, उसे डर था कही हॉस्टल वाली लडकी उसको फ़ोन लगाये और वो चुक न जाये, पूरा एक दिन निकल गया लेकिन लडकी ने फ़ोन नही लगाया, अगले दिन सुबह उसके मोबाइल की घंटी बजी और उसने फुर्ती से मोबाइल उठाया – मयूर – किसी लडकी की खनकती हुए आवाज सुनाई दी |

यस मयूर और तुम हॉस्टल वाली लडकी बोल रही हो ऍम आई राईट ,

यस – हाउ आर यू –

बस तुम्हारे ही फ़ोन का इंतजार कर रहा था बेबी – मयूर ने अपना जाल डाला

दूसरी तरफ से ही ही की आवाज सुनाई दी – वो तुम्हारा कार्ड वार्डन ने रद्दी में डाल दिया था, मैंने बड़ी मुश्किल से ढूढा उसे |

थैंक्यू बेब्स – आज शाम क्या कर रही हो – उसने अपना जाल पूरी तरह से डाला

कुछ खास नही तुम्हारा क्या प्रोग्राम है ?

में भी आज शाम को फ्री हु सोच रहा हु मेरिन ली होटल में डिनर करने चले तो कैसा रहेगा ?

डेट विल बी फाइन – शाम को मिलते है 8 बजे मेरिन ली होटल में – लडकी ने जवाब दिया

बाय सी यू और उसने फ़ोन कट कर दिया |

जैसे ही छोटा काटा 8 पर पहुचा मयूर मेरिन ली होटल के रेस्तरा में था |

वेटर ने उसको तुरंत पहचान लिए और एक टेबल की और इशारा किया |
 
वो एक बड़ा सा हॉल था जिसमे लकड़ी की कश्मीरी नक्काशी वाला फर्नीचर सजा हुआ था, हर टेबल के दोनों और बड़े बड़े मोटे गद्दे वाले सोफे लगे थे, उसने देखा मिस हॉस्टल पहले से ही वहां बैठी उसका इंतजार कर रही थी, उसके मुंह से एक सिटी निकल गयी |

मयूर ने लडकी को देखा और अपनी आखे उसकी आखो में डालते हुए अपनी भारी आवाज में कहाँ – हेल्लो बेबी, मुझे ज्यादा देर तो नही हुई ?

नही मैं ही जल्दी आ गई थी – बैचेन थी तुमसे मिलने को उसने मन ही मन कहा

आई ऍम सॉरी बेब – मैं तुमको यूज़ कर रहा हु पर और कोई रास्ता भी नहीं है – मयूर ने अपराध भाव से सोचा |

तो मिला तुमको उसका पता ?

मयूर ने अपने चेहरे पर कातिल मुस्कान लाते हुए कहाँ कहा – जाने दो उसको तुम अपनी बात करो, और उसने मेनू उठाया और वेटर को इशारा किया |

वेटर जानता था उसका स्थाई ग्राहक क्या आर्डर करेगा – क्रीम टोमेटो सूप, फिंगर चिप्स, बटर पनीर, ग्रीन सलाद, और वेज बिरियानी

लडकी ने सारी डीसेस देखी और कहा – तुमने मुझे क्या भैंस समझा है जो इतना सब खा जाउंगी - और हसने लगी |

दोनों ने चुपचाप अपना खाना खाया और खाना खत्म होने के बाद लडकी बोली – तुमने इतना लजीज खाना रिश्वत में खिलाया है तो तुम्हारी मदद तो करनी ही पड़ेगी, कल डेढ़ बजे हॉस्टल में आ जाना, उस समय वार्डन मेडम के लंच का समय होता है, तुम्हारे सामने ही रजिस्टर खोल कर रागिनी का पता दे दूंगी, उसका सारा समान परसों ही दो लोग आ कर ले गये थे और वार्डन बहुत खुश है क्योकि उन दोनों ने जमा 6 महीने का किराया भी वापिस नहीं माँगा था |

मयूर उसको अवाक् सा देख रहा था – उसने कहा मैंने तो तुम्हारा नाम भी नहीं पूछा, लेकिन थैंक यू वैरी मच तुम्हारी हेल्प के लिए, मैं तुम्हारे जज्बातों से नहीं खेलना चाहता था, तुमने मुझे बचा लिया |

मैंने तुम्हारी आखो में उसके लिए मोहब्बत पढ़ ली है मयूर, तुम पहले उसको ढूंढ लो अगर वो ना मिले तो मेरा नाम मोहिनी है |

अजीब सयोंग है रागिनी और मोहिनी – उसने सोचा

और एक बार फिर उसे थैंक्स बोला |

दोनों कार में बेठे और बस स्टैंड के सामने से गुजरे वहाँ पुलिस जीप में वो पुलिस वाले बैठे थे जिन्होंने उस रात मयूर का पिछा किया था, उन्होंने जैसे ही एक नई लडकी को उसके साथ देखा उन्होंने अपनी नजरे फ़ौरन निचे कर ली - ये फिर रात भर दुड्वायेगा और सुबह ट्रान्सफर करवा देगा |

अगले दिन मयूर एक बजकर पैतीस मिनिट पर हॉस्टल में पहुचा मोहिनी ने तुरंत रजिस्टर निकला और एक पन्ना खोल कर मयूर के आगे कर दिया – उसने देखा पता लिखा था

रागिनी रामदयाल शर्मा, 144, सिनेमा रोड, मुंबई, एक मोबाइल नो. भी लिखा था |

उसने दोनों अपने दिमाग में लिख लिए, अब वो ये दोनों कभी नहीं भूल सकता था |

उसने मोहिनी को थैंक यू कहा और पूछा - क्या तुम्हारे पास उसका कोई फोटो है ?

एक मिनिट लडकी ने कहा – उसके एडमिशन फार्म में जरुर उसका फोटो होगा |

उसने एक फाइल खोली जिसपर लिखा था एडमिशन फार्म |

उसने कुछ फार्म पलटे और उसमें से एक फार्म खीच कर निकल लिया, उसपर लिखा था – रागिनी शर्मा, 144, सिनेमा रोड, मुंबई

उन दोनों ने अविश्वास से देखा – फार्म पे से फोटो गायब था, किसी ने फोटो को खीच कर निकाल लिया था जिस कारण फोटो चिपकाने की जगह से कागज फट गया था |

क्या ये वार्डन मेडम का काम है ? उसने मोहिनी से पूछा

नही में दावे के साथ कह सकती हूँ ये वार्डन मेडम का काम नहीं है |

क्या यहाँ कोई सीसीटीवी कैमरा है ?

नहीं अभी तक इसकी यहाँ कोई जरूरत नहीं पड़ी |

उसके होठ गोल हुए और एक अजीब सी आवाज निकल पड़ी |

वो अपने घर पहुचा, सामान जमाया, अपना लैपटॉप निकल कर मुंबई की फ्लाइट का एक टीगीट बुक किया और अपनी माँ से बोला मैं मुंबई जा रहा हूँ |

उसकी माँ ने कुछ बोलने के लिए मुंह खोला और फिर कुछ सोच कर चुप हो गई |

दोपहर के 4 बजे वो मुंबई एअरपोर्ट से बाहर निकला, सीधी टैक्सी पकड़ी और बोला 144, सिनेमा रोड चलो |

टैक्सी मुंबई की बड़ी बड़ी इमारतो, मल्टीप्लेक्स, शोरूम्स को पीछे छोडती हुई एक जगह जा कर रुकी और ड्राईवर ने सामने इशारा करते हुए कहा – साहब ये पूरी रोड सिनेमा रोड है, इसके अन्दर कही 144 नम्बर होगा जो आपको ढूँढना पड़ेगा |

मयूर ने उसकी दिखाई ऊँगली की दिशा में देखा – सामने कई छोटी छोटी झोपडिया बनी थी, वो मुंबई का स्लम एरिया था, जिनको झोपड़ पट्टी बोलते है |

वो एक छोटी सी गली में घुसा और उसने एक छोटी सी किराना दुकान वाले से पूछा – रामदयाल शर्मा, 144 मकान नम्बर कहा आएगा ?

दुकानदार ने कहा – इस पुरे इलाके किसी भी मकान का कोई नम्बर नही है, हर गली में कई गलिया है, और कई इलाके के अपने अपने नाम है, यहाँ कम से कम 50 ऐसे मकान होंगे जिनके नम्बर 144 होंगे |

वो आगे बढ़ा, एक गली में से निकल कर दूसरी गली, दूसरी से तीसरी, उनसे जुडी कई सकरी गलिया कई बार घूम कर वही आ गया जहाँ वो अभी घूम कर निकला था |

उसने कई जगह लोगो को पूछा – रामदयाल शर्मा, 144, सिनेमा रोड ?

सबने अनभिज्ञता से अपने कंधे उचका दिये, कुछ ने इधर उधर इशारा किया |

वो थक कर एक चाय की छोटी सी गुमटी के पास पड़ी छोटी सी टेबल पर बैठ गया |

तभी एक बेवडा सा दिखने वाला आदमी आया और उसने पूछा – किसे ढूंढ रहे हो ?

मयूर ने पता दोहरा दिया, और आशाभरी नजरो से उस शराब के नशे में झूम रहे आदमी को देखा |

आओ मेरे साथ – उसने कहा और एक गली में घुस गया, मयूर भी उसके पीछे पीछे हो लिया कुछ छोटी बड़ी गलिया पार करने के बाद वो आदमी उसको एक दुकान नुमा ऑफिस के बाहर ले गया और बोला – ये यहाँ के कोर्पोरेटर का ऑफिस है, इनको सब मालूम है कौन कहा रहता है, मुझे 100 रूपये दो, तो तुम्हारी बात करवाता हु उनसे |

मयूर ने उसको 100 का नोट दिया और वो ऑफिस के अन्दर घुस गया |
 
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