• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
हम फिर आगे बढने लगे ।

सफर था कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था ।

और फिर तकरीबन एक घंटे चलने के बाद हम जिस स्थान पर पहुंचे तो सामने चढाई थी ।

बायी तरफ पहाडियों थीं । पहाडियों पर जगह-जगह छोटे-बडे पत्थर बिखेरे हुए थे ।

पत्थरों का कब्रिस्तान-सा लग-रहा था वह ।

"अब किधर चलना है?" मैंने पूछा ।

"हमें चढाई चढकर दूसरी तरफ पहुंचना है । उसके बाद आगे का सफर होगा ।"

" चलो !"

हम चढाई चढने लगे ।

चढाई खडी थी ।

हमें एक-एक पैर जमाकर रखना पड़ रहा था । जरा-सी चूक हमारी मौत का सबब बन सकती थी ।

"मैंने कहा था ना मेडम कि रास्ता छोटा अवश्य है , लेकिन जोखिम भरा है ।" क्लाइव ने कहा ।

" तुम चलते रहो ।"

" मै रुका कहां हू। चल ही तो रहा हु ।" क्लाइव ने अपनी बात इस अंदाज में कही, थी कि मैं मुस्कुराये बगैर नहीं रह सकी ।

चढाई चढने में हमें आधे घण्टे से ऊपर का वक्त लगा था ।

कई बार तो हम फिसलते-फिसलते बचे थे । हम ऊपर पहुंचे ।

कुछ देर तक समतल जगह थी । उसके बाद ढलान था ।

चढाई चढने के कारण हमारी सांसें फूल गई थीं और हम यूं हांफ रहे थे मानो अभी-अभी भीलों लम्बी रेस लगाकर आये हों ।

क्लाइव एक चट्टान से पीठ सटाकर बैठ गया ।

"थक गये क्या?" मैंने पूछा ।

"इ. . इतनी ऊचाई चढकर आया हू।" वह अपनी ऊखडती हुई सांसों पर नियंत्रण करता हुआ बोला-" थकान तो होगी । "

मैं भी पत्थर से टिककर अपनी उखडी सांसों पर काबू करने लगी ।

"अ. . . आप भी थोडी देर बेठ जाइये। उसके बाद जागे चलेंगे ।" वह पुन: बोल उठा ।

मैं क्लाइव की बगल में चट्टान से पीठ सटाकर बैठ गई ।

"अभी तो मंजिल दूर है ।" क्लाइव धीरे से बोला ।

" तुम बार-बार मंजिल का रोना क्यों रोने लगते हो? मजिलं कितनी दूर सही, उसे तय तो करना ही पड़ेगा ।"

" 'मैँ रोना नहीं रो रहा । आपको बता रहा हूं ।"

" तुम बता तो चुके हो कितनी बार बताओगे बैसे ऐसा लगता है कि इस से जाने पर तुम खुश नहीं हो ।"

"ये बात नहीं मैडम ।।"

" यही बात है । तुम्हारे चेहरे के भाव साफ बता रहे हैं । तुम्हारे चेहरे पर कुढ़न और झुझलाहट के भाव स्पष्ट दिखाई दे रहे है । ये रास्ता भी तुम ही ने चुना था । अगर ये रास्ता इतना ही मुसीबतों से भरा था, किसी दूसरे रास्ते का चुनाव करते ।"

क्लाइव ने होंठ मीच लिये ।

"यहा तो दूर-दूर तक किसी इन्सान की परछाईं तक नजर नहीं आ रही है ।" सहसा वातावरण में एक स्वर उभरा----"मुझे नहीं लगता कि वे लोग इस तरफ आये हौं ।"

"वे इसी तरफ आ सकते हैं और क्रिस तरफ जायेंगे?" मेरे कानों से दूसरा स्वर टकराया । मैं चौंकी ।

वे आवाजें चट्टानों के पीछे से आई थीं । आवाजें सुनकर मुझे अंदाजा लगाते देर नहीं लगी कि बातें करने वाले सेनिक हैं । पट्ठे हमें तलाश करते हुए यहां तक आ धमके थे ।

मुसीबत पर मुसीबत ।

एक क्षण बगैर एक अटके से उठी ओर मैंने पलटकर चट्टान के दूसरी तरफ देखा । मेरा अंदाजा ठीक निकला था । दूसरी तरफ पांच सेनिक खड़े थे । वे चट्टान के नीचे खड़े आपस में बातें कर रहे थे । दूर तक खाली समतल जगह थीं ।

" सैनिक ।" क्लाइव उठकर खड़ा होता हुआ बोला ।

"हां !"

" लगता है कि ये हरामजादे हमारा पीछा छोड़ने वाले नहीं हैं ।"

क्लाइव ने अपना वाक्य पूरा किया ही था कि उनमें से एक सैनिक बोल उठा "अब क्या किया जाये?"

" हम लोगों को चट्टानों के पीछे जाकर देखना चाहिये । हो सकता है कि रीमा भारती चढाई चढकर उपर पहुची हो ।" दूसरे ने कहा ।

" अब सोच क्या रही हो मेडम?" क्लाइव फुसफुसाया---" इन पाचों को ऊपर पहुचा देते हैं ।"

" पाचो को उपर तो पहुचाना ही है, लेकिन गोलियां चलाना हमारे हक में ठीक नहीं होगा ,

क्योंकि आसपास दूसरे सेनिक भी हमेँ तलाश कर रहे होगे । गोलियों की आवाज सुनकर वे इसी तरफ भागेंगे । वो स्थिति हमारे लिये ठीक नही-रहेगी । इन्हें रास्ते से हटाने का कोई दूसरा रास्ता सोचना पडेगा ।"

"इन हालात में दूसरा कौन-सा रास्ता हो सकता है?" उसने आश्चर्य भरे स्वर में पूछा ।

" जरा सोचने दो ।"

मैं सोचने लगी ।

मेरी निगाहें सामने एक बड़े से पत्थर पर स्थिर होकृर रह गई । दूसरे क्षण मेरी आंखें चमक उठी ।

"इस पत्थर को नीचे लुढ़काने में मेरी मदद करो ।" मैं गन कंघे पर लटकाकर उस पत्थर पर दोनों हाथ रख़कर बोली ।

"इ. . .इस पत्थर को लुढकाने से क्या होगा?" चकराये-से क्लाइव ने पूछा ।

. , . "ये पत्थर ही उन सैनिकों की मौत का कारण बनेगा । बस इस पत्थर को नीचे की तरफ ढलान पर लुढ़काने की देर है ।"

क्लाइव. ने आगे कोई सवाल नहीं काया, ।

वह पत्थर नीचे लुढ़काने में मदद करने लगा ।

पत्थर काफी भारी था । हमने पत्थर लुढ़काने में अपनी .समूची ताकत लगा दी थी । आखिर हम पत्थर तुढ़काने में कामयाब हो गये । पत्थर अपने साथ धूल और मिट्टी के कण उडाता हुआ तेजी से नीचे की तरफ़ लुढ़कता चला गया ।

सेनिक वार्तालाप में व्यस्त थे । वे उस वक्त चोंकं जब पत्थर मौत बना उनके सिर पर पहुंच चुका था । उनके पास संभलने का वक्त ही नहीं था । पत्थर सैनिकों को अपनी चपेट में लेता चला गया । पांचों सैनिक उस पत्थर के नीचे दबे पड़े थे । कुछ पलों तक वे 'हाथ पटकते नजर आये, फिर उनके हाथों में हरकत नहीं हुई ।

पांचो लाशों में तब्दील हो चुके थे । तभी!-

'तढ़. . .तढ़. ..रेट. . .रेट. . . ।'

अभी मेरी निगाहें पत्थर की चपेट में आ आये सैनिकों पर थी कि बायीं ओर की चट्टानों की तरफ से गोलियां बरसने लगी । मैं एक क्षण का सौवां हिस्सा गंवाये बगैर जमीन पर बैठ गई ।

क्लाइव भी कम फुर्तीला नहीं निकला था ।

उसने मेरा अनुसरण किया था ।

गोलियों हमारे ऊपर से गुजर गई । हम दोनों चट्टानों की ओट में होकर जवाबी कार्यवाही में लग गए ।

"तुम लोग चारों तरफ से धिर चुके हो ।" सहसा वातावरण में एक कर्कश स्वर गूंजा-"तुम्हारी खैरियत इसी में है कि हथियार फेंककर अपने आपको हमारे हवाले कर दो, वरना बहुत बुरी मौत मारे जाओगेगे ।" . .

हालांकि उस चेतावनी का हम पर जरा भी प्रभाव नहीं पड़ा ।

किन्तु खतरा कभी भी हम लोगों के सिर पर पहुंच सकता था । मेरा मस्तिष्क तेजी से काम का रहा था ।

मैंने अपने आसपास का मुआयना क्रिया और इस नतीजे पर पहुंचीं कि वे हम लोगों तक आसानी से नहीं पहुच सकते थे । फिर भी उन सैनिकों का जिन्दा बचे रहना हमारे लिए घातक सिद्ध हो सकता था ।

"क्लाइब ! एक पल कुछ सोचकर मैं फुसफुसाईं ।

"यस मैडम !"

"जब तक हम चट्टान के पीछे छिपे सैनिकों को खत्म नहीं कर देते, तब तक हम यहां से हिल भी नहीं सकते । तुम अपना ध्यान रखना । अगर कोई भी सैनिक अपने आसपास नजर आये, वो बचना नहीं चाहिये । मैं उन से निबटती हु ।"

"मैं भी आपके साथ चलता हू।"

"तुम मेरे साथ नहीं चलोगे । तुम्हें यहां रहना ज़रूरी है । अगर हम दोनों साथ गये तो पीछे से सैनिक हम पर हल्ला बोल सकते हैं ।-तुम यहाँ रहोगे तो तुम उन्हें सम्भाल तो लोगे ।"

" मै समझ गया । आप जाइये मैडम!" मैं सोच चुकी थी कि मुझे क्या करना है? "

=====

=====
 
मैं मुह के बल जमीन पर लेटी क्रोहनियों की मदद से सामने वाली चट्टान की तरफ सरक रही थी । . . मेरे एक हाथ में गन थी ।

वे क्षण बड़े ही खतरनाक थे ।

अगर सैनिकों की निगाहें मेरे ऊपर पड़ जातीं तो वे मुझे सम्भलने का मौका भी देने वाले नहीं थे, लेकिन इस वक्त मेरे पास रिस्क. लेने के अलावा अन्य कोई रास्ता भी तो नहीं था । पथरीली ओर उघड-खाबड़ जमीन पर रेंगने के कारण मेरी क्रोहनियां और घुटने छिलने लगे थे । मगर मुझे इस सबकी परवाह कहां थी ।

मेरा तो अब एक ही मकसद था । उन सैनिकों का खात्मा ।

कुछ पलो बाद मैं उनके सिरों पर पहुच चुकी थी ओर उन्हें भनक नहीं लगी थी । इस वक्त मैं एक चट्टान पर सीने के बल लेटी थी ।

मैं उन लोगों को साफ-साफ़ देख रही थी ।

वे गिनती में पांच थे ।

एक कैप्टन और चार सैनिक ।

"सर । रीमा भारती और क्लाइव को अपने कब्जे में करने के लिये क्या ये बेहत्तर नहीं होगा कि उन्हें पीछे से घेरकर गिरफ्तार कर लिया जाये ।" एक सेनिक बोला । .

"गिरफ्तार करने की क्या जरूरत है?" जबाब दूसरे सैनिक ने दिया-"उन्हें गोलियों से भून डालो अगर रीमा मारती जिन्दा बचीं रही तो अभी और न जाने कितने सैनिकों और औफिसरों की लाशें बिछा देगी ।"

"नहीं ।" कमाण्डर कठोर लहजे में बोला-"उसे मारने की बात दिमाग में भी मत लाना । रीमा भारती के साथ-साथ हमें क्लाइव को भी जिन्दा गिरफ्तार करना है । हमें क्लाइव से सर एडलॉफ के बारे में उगलवाना है कि वो कहां छिपा हुआ है ? ये जानकारी हासिल होने के बाद उन्हें कुत्तों की मौत मारा जायेगा ।"

मेरे होठों पर जहरीली मुस्कान नाच उठी ।

उन पांचों की जिन्दगी क्री उल्टी गिनती शुरु हो चुकी थी । वे क्या जानते थे कि मौत उनके सिर पर पहुंच है ।

"तो फिर उन दोनों को पीछे से घेर लिया जाए सर ।" तीसरे सैनिक ने पूछा ।

"ल. . . लेकिन उन्हें पीछे से घेरना तो जरा मुश्किल होगा ।" पहला जल्दी से का उठा ।

"क्यों?"

" चट्टानों के दोनों तरफ काफी नीची समतल जगह है और वे दोनो ऊंचाई पर हैं । अगर हम उनकी निगाहों में आ गये तो वे हमें फौरन शूट कर देगे और हमारे सामने चट्टानों के उस पार ढलान है । उस ढलान पर चढना हमारे लिये आसान काम नहीं होगा ।"

"चढना आसान नहीं है तो मुश्किल भी नहीं है ।" कैप्टन आदेश पूर्ण लहजे में बोला-"दिस इज माई आँर्डर ।"

"ओ० के० सर ।"

अगर मैं चाहती तो अब तक उनकी लाशें बिछा चुकी होती, लेकिन मैं चाहती थी कि उन्हें ये मालूम होना चाहिये कि वे जिस रीमा भारती को-गिरफ्तझर करने कीं फिराक में हैं । वे उसी के हाथों मर रहे हैं ।

सैनिकों ने घूमना चाहा ।

" तभी में बोली-"तकलीफ करने की जरूरत नहीं है दोस्तों! तुम लोग जिस रीमा भारती को गिरफ्तार करना चाहते हो, वो तो कब की मौत बनी तुम्हारे सिर पर खडी है, अगर तुम लोगों में हिम्मत है तो मुझे गिरफ्तार कर के दिखाओ, ।"

उन पांचो को बिजली जैसा' शॉक लगा ।

पलक झपकते ही उनके चेहरे ऊपर की तरफ उठते चले गये ।

कैप्टन के होठों से सरसराता स्वर निकला--" . .तुम?"

जवाब में मैंने हत्का-सा कहकहा लगाया ।

"देख क्या रहे हो?" कैप्टन चीखा--" 'पोजीशन लो, वरना . हमारी मौत निश्चित है ।"

परन्तु इससे पहले कि वे अपने ब्रचाव में कुछ कर पाते, मैंने दांत पर दांत्त जमाकर अपनी गन का मुंह खोल दिया ।

"तड़. . .तड़. . .रेट. . .रेट. . . ।"

असंख्य गोलियों सनसनाती . उनके जिसमें में धंसीं और वे कई कई फूट उछलने के बाद जमीन पर गिरकर ठण्डे हो गये ।

पाचों को जहन्मुम का रास्ता दिखाने के बाद मैंने घूमकर चारों तरफ का मुआयना किया ।

मैं देख लेना चलती थी कि आसपास ‘ और सैनिक तो नही हैं ।

किन्तु फिलडाल दूर दूरतक मुझे कोई सैनिक नजर नहीं आया था ।

पूर्णतया संतुष्ट मैं पलटकर चट्टान से नीचे उतरने लगी ।

कुछ पलों बाद मैं क्लाइव के पास पहुंच चुकी थी ।

. "चलो क्लाइव ।" इससे पहले कि क्लाइव मुझसे कुछ पूछता । मैं बोल उठी-" उन्हें टिकाने लगा दिया है ।"

"ये जंग का अन्त नहीं है मैडम । अभी तो हमें न जाने और कितने सैनिकों को -ठिकाने लगाना होगा ।" वह ठण्डी सांस के साथ पलटकर आगे बढता हुआ बोला ।

मैं खामोशी के साथ क्लाइव के पीले चल पडी ।

पहली बार मैं एक ऐसे मिशन पर काम कर रही थी, जहाँ मेरे लिये कदम-कदम पर मौत बिछी थी ।

====

====

सफर जारी था ।

इस वक्त हम खुली और समतल जगह से गुजर रहे थे । हमें दूर तक का नजारा साफ दिखाई दे रहा था । उस खुली जगह में कहीं-कहीं घनी झाड्रिया और वृक्ष तो अवश्य दिखाई दे रहे थे ।

लेकिन किसी इन्सानं की परछाई तक नजर नहीं आ रहीँ थी ।

हमारे चलने की रफ्तार तेज थी ।

हमारी सतर्कता में बाल बराबर भी फ़र्क नहीं आया था ।

"अरे !" क्लाइव बोल उठा-"'ये बैग किसका है?"

"ब्रैग कहां है ?"

"वो देखिये !" क्लाइव ने करीब ही झाडियों की तरफ संकेत क्रिया ।

मैंने झाडियों की तरफ़ देखा ।

वहां खाकी रंग का बडा-सा बैग पड़ा था ।

"ये तो सैनिकों का बैग लगता है ।" मैंने कहा-"उठाकर लाओ, देखते हैं कि उसमें क्या है?"

क्लाइव बेग उठा लाया ।

फिर उसने ब्रैग खोलकर देखा, उसमें रम की दो बोतलों के अलावा कुछ हथगोले तथा कपड़े मौजूद थे ।

"ये बैग यहां -कैसे आया मेडम?" वह बैग बन्द करता हुआ घबराया-सा बोला ।

" साफ-सी बात है कि सेनिक झाडियों के करीब सुस्ताने के … लिये बैठे होंगे और उनमें से कोई अपना बैग भूल गया होगा ।"

"इसका मतलब है कि सैनिक उस तरफ़ हैं, जिस तरफ से हम लोग आ रहे हैं।"

"ये जरूरी तो नहीं है कि वे उस तरफ गये हों । ये भी तो हो सकता है कि सेनिक हमारी तलाश में इस तरफ गये हों । जिस तरफ हम जा रहे हैं ।" मैंने उत्तर दिया ।

"यानि फिर सैनिकों से हमारा टकराव होने वाला है । " वह लम्बी सांस छोड़कर बोला ।

"उम्मीद तो है ।"

क्लाइव ने चुप्पी साध ली ।

"जो होगा देखा जायेगा आगे बढो ।"

"आप थक तो नहीं गई मैडम् ।" क्लाइव ने मेरी तरफ देखा । "

" नहीँ ।"

" अगर आप थकावट महसूस कर रहीं हों तो कहीं बैठकर एक-दो पैग लगा लें । आपकी सारी थकान चुटकी बजाते ही गायब हो जायेगी । इस वक्त रम टॉनिक जैसा काम करेगी !"

मुझे लेशमात्र को थकावट नहीं थी । न जाने कितनी बार मिशन के दौरान भी लम्बा सफर तय कर पचुकी थी । हां, 'शराब की ' आवश्यकता अवश्य महसूस कर रही .थी ।

"क्या ख्याल है मैडम? अगर आप-एक दो पैग लेगी तो मै भी पानी बनी पीकर तरोताजा हो जाऊँगा ।।

" मैं समझ गई थी कि क्लाइव थकान महसूस कर रहा है और वह रम की जरूरत महसूस कर रहा था । ये बात जुदा थी कि वह मुझसे खुलकर नहीं कह पा रहा था । मैं उसकी इच्छा को दबाता नहीं चाहती थी । अत: मैंने कहा-"ठीक है, किसी जगह बैठ तो ।"

… "उन झाडियों के पीछे बैठ लेते हैं ।" वह झाडियों की तरफ बढता हुआ बोला-" मेरी निगाहों में उससे अच्छी जगह दूसरी नहीं हो सकती ।"

मैं उसकै पीछे चल पडी।

मैं चलती हुई आने वाली परिस्थितियों पर गम्भीरता से सोच रही थी, वो बडी ही खतरनाक हो सकती थी । क्योंकि हम लोग अपने पीछे सैनिकों की दर्जनों लाशें छोड़कर आ रहे थे । सेनिक हमें तलाश कर रहे थे । अपने साथियों की लाशें देखकर उन्हें पता चल जाना था कि हम इसी इलाके में मौजूद थे ।

हम झाडियों के पीछे पहुंच गये । यहाँ मखमली घास की चादर-सी बिछी हुई थी ।

"बैठिये मैडम !"

मैंने तीक्ष्य दृष्टि से आसपास का जायजा लिया । मुझे कहीं कोई खतरा नजर नहीं आया था । संतुष्ट होकर मै घास पर गई ।

क्लाइव मुझसे थोड़ा हटकर बैठ गया । उसने बैग खोलकर रम की बोतल निकालकर घास पर रख दीं, फिर बैग टटोलने लगा । उसने प्लास्टिक का एक गिलास तथा पानी की बोतल निकाल ली-'"लो, काम बन गया । जिस सेनिक का ये वेग है । यह कोई पियक्कड़ लगता है । पट्ठे ने पानी की बोतल और गिलास कपडों के नीचे रखा हुआ था ।"

"तुम्हारे लिये तो अच्छा ही हुआ, वरना पानी और गिलास के बिना दिक्कत आ सकती थी!"

वह खामोशी के साथ पैग बनाने लगा ।

पीने का सिलसिला शुरू हुआ ।

कुछ ही देर में तीन लार्ज पेग हमारे गले से नीचे उतर चुके थे । हम खाली पेट थे । अत: उसने फौरन अपना असर दिखाना शुरु कर दिया था । जब क्लाइव चौथा पैग बनाने लगा तो मैंने कहा-"मुझे और मत देना ।"

" क्यों ?"

"ऐसी परिस्थितियों में में ज्यादा नहीं पीती ।"

"मैं अपने लिये तो एक पेग बना लूं।"

"उतना पीना`क्लाइब जितनी पचा सको । इस वक्त हमारे सामेन इंच इंच पर मौत बिछी है किसी भी क्षण ख़तरा आ सकता है । इसलिये अपने होशो-हवास में रहना ।"

क्लाइव सहमति में सिर हिलाकर रह गया ।

हां एक पल कुछ सोचकर मैं उठकर खडी हुई और झाडियों के उस पार झांका, मैं तसल्ली कर लेना चाहती थी कि अभी कोई खतरा तो नहीं टपका हे? मुझे कोई खतरा नजर नहीं आया था ।

सहसा मैं पीडा बिलबिला उठी ।मेरे जिस्म में पीड़ा क्री तेज लहर दौडती चली गई थी ।

मेरी पिण्डती में किसी जहरीले जीव ने काट लिया लगता था ।

मैंने हड़बड़ाकर नीचे देखा ।

मेरे होठों से सिसकारी -सी निकल गई । मेरे दायें पैर के करीब छः फुट लम्बा सांप कुण्डली मारे बैठा था । यह अपना बित्ता-सा फन फैलाये था । उसकी छोटी-छोटी चमकीली आँखे मेरे ऊपर जमी हुई थी ।

"क.. .क्या हुआ मेडम?" मेरी चीख सुनकर क्लाइव बोला ।

"स.. सांप !"

"कहा है सांप?"

' मैंने ऊंगली से सांप की तरफ इशारा क्रिया और फिर जैसे ही उसने मेरी ऊंगली का पीछा क्रिया तो क्लाइव के होठों से चीख ही निकल गई थी ।

"ओह माई गॉड ।"

मेरा सारा नशा कपूर हो चुका था और मैं बुरी तरह से लड़खड़ायी थी ।

"'म.. .मुझे सांप ने काट लिया क्लाइव ।" मैं बडी मुश्किल से बोल पाई---" आह ।"

क्लाइव उठकर मेरी तरफ झपटा ।

वो काले नाग अभी भी मुझे घूर रहा था । बो इस अदाज में अपनी जीभ लपलपां रहा था, मानो एक बार फिर हमलावर होने का इरादा रखता हो । इस समय उसकी यही मंशा थी, क्योंकी वो एकबार जोर से फुफ्फररा था ।

तभी ।

क्लाइव के हाथ में दबी गन गरज उठी ।

सांप के फन के चिथड़े उठ गये ।
 
क्लाइव ने गन कन्धे पर टागी और मुझे उठाकर कंघे पर लादकर एक तरफ झपटा ।

मेरा पीड़ा से बुरा हाल था । मेरी आखें बन्द होती जा रहीं थी । ऐसा लग रहा था जैसे मुझे जोरों की नींद आ रहीं हो ।

क्लाइव ने मुझे करीब ही पड्री पत्थर की एक व्रड्री सी शिला पर लिटाकर पूछा-"आपक्रो सांप ने कहां काटा?"

"ब. . .बायीं पिण्डली पर. . . आह. . . ।" मेरे होठों से फ़सा र्फसा सा स्वर निकला-"ल. . लगता है कि जहर मेरे जिस्म में त. . .तेजी से फ़. . . फैलता जा. . . रहा है, . . म. . . मैं. . न. . . हीं. . .ब. . . बचूंगी ।"

"आपको कुछ नहीं होगा मैडम । आप चिंता मत कीजिये ।" कहकर वह एक तरफ भागा ।

कुछ पलों बाद वह वापस लोटकर आया । उसकै हाथ में हरे रंग की तेजी- अजीब सी घास थी ।

वह मेरे करीब बैठ गया । उसने मेरी पैन्ट का दायां पोंहचा ऊपर सरका दिया । मेरी गोरी पिण्डली चमक उठी ।

यहीं सर्प के दांतों के नन्हे-नन्हें घाव थे । क्लाइव ने तुरन्त वहां होठ रखकर जहर चूंस-चूस कर थूकना आरम्भ कर दिया । इस काम में उसे तीन-चार मिनट लगे ।

तदुपरान्त क्लगइव ने घास को दांतों से चबाकर बारीक करके उस जगह पर रखकर ऊपर से अपना रुमाल बांध दिया । मेरीआँखे वन्द होती जा रही थी ।

"सोओं नहीं मेडम!" क्लाइव ने मेरा कन्धा पकढ़कर झिझोंड़ा-"आपक्रो कुछ नहीं होगा ।"

मेंने सुन रखा था कि यदि क्रिसी को सांप डंस ले तो उसे जागते रहना चाहिये । सोने से इंसान के जिस्म में जहर तेजी से फैलता है । मैं अपनी तरफ से जागते रहने की पूरी कोशिश कर रही थी, मगर उस घडी नींद पर तो मानो मेरा नियंत्रण ही नहीं रह गया था । मगर फिर एक चमत्कार हुआ ।

धीरे-धीरे मेरी पीड़ा कम होती गई थी । नींद भी गायब हो गई थी ।

घास ने रामबाण का काम किंया था ।

" अब आप कैसा महसूस कर रही हैं मैंडम?" कुछ देर बाद क्लाइव ने पूछा ।

"मेरी सारी पीड़ा गायब हो गई है और नींद न जाने कहां गई ? घास ने तो कमाल ही कर दिया ।" मैंने उठकर बैठते हुए कहा ।

"इस घास को आप सांप के जहर की सबसे बडी और अचूक काट कह सकती हैं । जो काम बढिया-से बढिया दवा नहीं कर सकती, वो ये घास कर देती है । "

========

"तुमने मेरी जान बचाई है क्लाइव । तुम्हारे अहसान का बदला मैं जरूर काऊगी ।"

" आप पर कोई अहसास नहीं दिया है मैडम! अपना फर्ज अदा किया है । आप तो पहले ही अपनी जान जोखिम मे डालकर मेरा साथ दे रही हैं । एक ऐसा काम कर रही हैं, जिसके लिये इस मुल्क की जनता आपको कभी नहीं भुला सकेगी ।"

मैं खामोश रही ।

" अगर आपकी तबीयत ठीक हो गई तो आगे का सफ़र शुरु करे ।"

" यस ।"

क्लाइव उठकर आगे बढ़ गया ।

मैंने उसका अनुसरण किया ।

क्लाइव ने घास पर रखा सामान उठाकर बैग में रखा और जैसे दूसरे कंघे पर लटका लिया । मैंने घास पर पडी अपनी गन उठा ली । मैंने देखा, क्लाइव ने वेग में से रम की बोतल निकाली । बोतल लगभग आधी थी ।

उसने बोतल मुंह से लगाई और जितनी पी सकता था पीकर बाकी बची मेरी तरफ बढा दी । मैंने बगैर कुछ कहे बोतल मुंह से लगाई, फिर खाली करके एक तरफ उछालती हुई बोली…"चलो ।"

हमने आगे कदम बढा दिये । . ,

वो उबाऊ, खतरनाक और लम्बा सफर फिर शुरु हो चुका था।

====

====

न्यू

इस वक्त हम जिस रास्ते से गुजर रहे थे, वो दलदल सें भरा रास्ता था । कहीं सूखी समतल जमीन थी तो कहीं दलदली । जगह-जगह लम्बी-लम्बी घास उगी हुई थ्री । उस घड़ी हमारी जरा सी भी असावधानी हमेँ सीधे मौत के मुंह में पहुचा सकती थी ।

क्लाइव आगे था ।

और मैं पीछे ।

अचानक ।

वातावरण में कुतों के भौंकने की आवाज गूंजती चली गई ।

मैं चौंकी ।

मेरे कदमों में ब्रेक लग गये । क्लाइव के पांव भी जमीन से चिपककर रह गये थे । वह गर्दन मोड़कर मेरी तरफ देखता हुआ बोले-आप

शिकारी कुत्तों की आवाज सुन रही हो न मैडम?"

=====÷===

"हां और वे शिकारी हमारी सूघ लेते घूम रहे हैं । सैनिक आसानी से हमारा पीछा छोड़ने वाले नहीं हैं । हमारी तलाश में शिकारी कुत्ते भी छोड़ दिये हैं, अगर कुत्तों ने हमें तलाश कर लिया तो वे हमें चीर फाड़कर रख देंगे ।"

"अब क्या करे ?"

"हमें अपनी रफ्तार बढानी होगी । साथ ही सावधानी भी बरतनी होगी ।" मैंने कहा ।

हम तेजी से आगे बढ़ने लगे ।

मगर फिर भी कुत्तों की आवाजें लगातार हमारे करीब आती जा रही थीं । क्रिसी इन्सान से तो आसानी से निबटा जा सकता था, मगर ये कुत्ते. ?

बहरहाल अब जो भी होगा, देखा जायेगा ।

"अपने चलने की स्पीड बनाये रखो क्लाइव ।" मैंने कहा ।

वह चुप रहा ।

"थक गये लगते हो?" मैं पुन: बोल उठी--- "लाओ, गन और बैग मुझे दे दो है"

" क्यों ?"

" तुम्हारा बोझ हल्का हो जायेगा, । वेसे मुझे एक पैग रम की ज़रूरत है ।"

उसने बैग थमाते हुए फीकी -सी मुस्कान के साथ कहा--" ये नहीं कहतीं कि आपको रम पीनी है ।"

मैंने भी धीमी मुस्कान के साथ बैग खोलकर उसमें से बोतल बरामद की और अनसील्ड करके मुंह से लगा लिया है मैंने जल्दी जल्दी लम्बे घूट भरकर और बोतल वापस रखकर बैग कंधे पर लटका लिया ।

उसी क्षण ।

पता नहीं कैसे अचानक क्लाइव का पैर फिसल गया और वह करीब ही दलदल में जा गिरा ।

मुझे जोरों का झटका लगा ।

मुसीबत पर मुसीबत ।

एक तो कुत्तों के भौंकने की आवाज़ करीब आती जा रहीं थी । ऊपर से क्लाइव का दलदल में गिरना.. ओर अब आलम ये था कि वो जितना भी हाथ-पांव मार रहा था । दलदल में नीचे की तरफ धंसता जा रहा था । क्लाइव दलदल से निकलने के लिये अपनी पूरी ताकत लगा रहा था, लेकिन कामयाब नहीं हो पा रहा था ।

" म. . . मुझे दलदल से बाहर निकाली मैडम !" क्लाइव चीखा ।

'घबराओ मत क्लाइव । मैं तुम्हें निकालने के लिये कुछ करती हु ।!

अब तक वह घुटनों से उपर तक दलदल में धंस चुका था ।

गनीमत इस बात ही थी कि जिस जगह बह दलदल में था । उसके करीब सूखी पथरीली जमीन थी । पलक झपकते ही मैंने गऩ और बैग कंधे से उतारकर जमीन . पर फेका और बला की फुर्ती से मुंह के बल जमीन पर लेट गई, फिर अपना हाथ क्लाइव की तरफ बढाती हुई बोली -"जल्दी से मेरा हाथ थाम लो क्लाइव !"

क्लाइव ने झुककर अपना हाथ मेरे हाथ की तरफ़ बढाया, लेकिन हमारे हाथों के बीच में काफी फासला रह गया था ।

अब तक क्लाइव जांघों तक धंस चुका था ।

उसके चेहरे का रंग उड़ चुका था।

आँखों में खौफ की परछाइयां नाच रहीं थी ।

"मेरा हाथ थामने की कोशिश करों । हिम्मत से काम लो, अगर तुम थोडी कोशिश करोगे तो निश्चित रूप से मेरा हाथ थामने में कामयाब हो जाओगे ।"

क्लाइव अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश कर रहा था, किन्तु उसकी हर कोशिश नाकामयाब हो रही थी ।

इधर मेरा प्रयास जारी था । मैंने अपने दूसरे हाथ की हथेली मजबूती के साथ जमीन पर टिका और थोडा आगे की तरफ सरक गई । अब मेरे बढे हुए हाथ की उंगलियां क्लाइव की उंगलियों को छुने लगी थीं।

"थोडी और कोशिश करों क्लाइव । एक बार मेरा हाथ थाम लो । मैं तुम्हें दलदल से बाहर खींच लूंगी ।"

क्लाइव ने मानो पूरी त्तत्कत लगाकर कोशिश की ।

इधर मेरा प्रयास जारी था । मेरा ओर आगे सरकना मेरे लिये खतरनाक हो सकता था ।

मैं दलदल में गिर सकती थी ।

और काफी प्रयास करने के बाद आखिर कामयाबी मिल हों गई थी क्लाइव ने मजबूती के साथ मेरा हाथ थाम लिया था ।

कुत्तों के भौंकने की आवाजें पुन: मेरे कानों से टकराईं । मुझे ऐसा लगा जैसे वो आबाज ऐन मेरे सिर के पीछे से आई हो ।

मैंने उन आवाजों की तरफ ध्यान ही नहीं दिया । इस वक्त मेरी पूरी तवब्जो क्लाइव की तरफ थी । मुझे किसी भी कीमत पर उसे दलदल से निकालना था । मैं अपनी समूची ताकत बटोरकर उसे अपनी तरफ खींचने लगी ।

कुत्तों के भौंकने की तेज आवाजें बराबर वातावरण में गूंज रही थी ।

" इस बार मैंने आवाज की दिशा में देखा । मेरी जान सूख गई।

दलदल से उस पार तीन कद्दावर कुत्ते खड़े थे । उनका आकार आम कुत्तों से तीन गुणा अधिक रहा होगा । उनके खुले मुंह से जीभ बाहर लटक रही थी । नुकीले दांत साफ नजर आ रहे थे ओर वे सुखं सुर्ख आंखों से मुझे ही घूर रहे थे ।

उनके देखने का अंदाज बता रहा था कि वे किसी-भी क्षण मेरे ऊपर जम्प लगा सकते थे ।

मेरा दिमाग घूमकर रह गया । मैं समझ नहीं पाई कि क्या करू ?

मैं पहले क्लाइव को दलदल से बाहर निकालूं अथवा उन कुतों से निबटू जो साक्षात् मौत बने मुझे घूर रहे थे । क्लाइव का हाथ छोड़ने का सवाल ही नहीं था । कठिन मेहनत के बावजूद उसका हाथ मेरे हाथ में आया था ।

अगर मैंने उसका हाथ छोड़ दिया तो वह शर्तिया दलदल में समा जायेगा ।

वे क्षण बड़े ही तनावपूर्ण थे ।

मेरी निगाहें कुतों पर जमी हुई थीं और मैं क्लाइव को अपनी तरफ खींच रहीँ थी । मैंने कुत्तों का इरादा भांपकर एक हाथ से अपने करीब पड़ी गन उठा ली थी ।

इस क्षण मुझ जैसी युवती भी हिलकर रह गई थी ।

सहसा!

एक कुत्ता मुंह से खौफ़नाक गुर्राहट निकालता हुआ मेरे ऊपर छलाग लगा गया ।

तभी ।

मैंने गन कन्धे से लगाकर लीवर खींच दिया । ‘तड़. . .तड़. . .रेट. .रेट. . .

गन से दर्जनभर गोलियां निकलकर हाथ में लहराते कुत्ते पर झपर्टी ।

निशाना अचूक था ।

गोलियों कुत्ते के जिस्म में धंसी ओर वह दिल दहला देने वाली गुर्राहट के साथ दलदल में गिरा और भीतर समाता चला गया ।

कुत्ते की कब्र दलदल में बन चुकी थी ।

क्लाइव की निगाहें भी कुत्तों पर जमी थीं ।

"न जाने किस नस्ल के आदमखोर कुत्ते है मैडम।" क्लाइव ने कहा---"मुझे जल्दी निकालिये । मुझे लगता है कि वे दोनों भी आप पर झपट पड़ने बाले हैं । आपको चीर-फाड़ कर रख देंगे ।

"तुम फिक्र मत करों क्लाइव ।"मैं उसे बदस्तूर अपनी तरफ खींचती हुई बोली--"' इन्होंने मुझ पर झपटने की गलती की तो इनका भी पहले कुत्ते जैसा परिणाम होगा ।"

मेरी निगाहें क्षण भर के लिये भी उन पर से नहीं हटी थीं । मैं जानती थी वे कुत्ते किसी भी सेकण्ड मेरे ऊपर जम्प लगा सकते थे । अब तक मैं क्लाइव को काफी हद तक दलदल से बाहर तक खींच लेने में कामयाब हो चुकी थी, लेकिन मैंने उसका हाथ नहीं छोडा था । वह फिर दलदल में धंस सकता था ।

" फिर भी सावधानी बरतर्नी जरूरी है मैडम ! वे अपने साथी का हाल देखकर आप पर गुस्सा खाये हुए हैं ।"

मैंने कोई जवाब नहीं दिया ।

सहसा दोनों कुत्ते तीर की तरह मेरी तरफ झपटे ।

मैंने गन सीधी की तो हढ़बड़ाहट में क्लाइव का हाथ मेरे हाथ से छूट गया ।

मै सन्न रह गई ।

'उधर कुत्ते मेरे काफी करीब आ चुके थे । वे किसी भी क्षण मुझे दबोच सकते थे । उधर क्लाइव फिर दलदल में धंसा जा रहा था ।

मेरे मेहरबान दोस्त जानते हैं कि कैसी भी विषम परिस्थितियों क्यों न हों, में अपना धैर्य नहीं छोड़ती । उल्टा मेरी हिम्मत और हौंसला कई गुणा बढ जाता है ।
 
इस समय भी ऐसा ही हुआ था । क्षण भर के लिये मेरा ध्यान कुत्तो पर से हटा और बिजली जैसी गति से मैंने दोबारा क्लाइव का हाथ थाम लिया, फिर मैंने कुत्तों की तरफ देखा ।

वे एकदम मेरे करीब आचुके थे ।

बस ।

मेरी गन गरज उठी ।

'तड़. .तड़. . .रेट. . .रेट. . . ।'

उनमें से एक कुता अपना गोलियों से छलनी जिस्म लिये पीछे की तरफ़ उलट गया । दूसरा कुता बड़ा ही फुर्तीला निकला था ।

वह दूसरी तरफ जाय लगा गया था ।

इस बीच मैं क्लऱइव को दलदल से बाहर खींच चुकी थी ।

वह सूखी पथरीली जमीन पर पड़ा लम्बी-लम्बी सांसें ले रहा था ।

आखिर उसे मौत के मुंह से बचा तिया था ।

तभी कुत्ता भयानक अंदाज में भौंकता हुआ दोबारा मेरे ऊपर झपटा ।

जवाब में मेरी गन से निकली गोलियों उस पर झपटीं । उसके जिन्दा बचने का सवाल ही नहीं था ।

तीसरा कुता भी देर हो गया था ।

मैंने छुटकारे की सांस ली ।

"क्लाइव ।" मैंने कहा ।

"यस मैडम ।"

"इन कुत्तों के पीछे सैनिक भी अवश्य होंगे ।" मैं एक झटके से उठकर खडी होती हुईं बोली-- "उन्होंने गोलियों चलने की आवाज सुन ली होंगी । इससे पहले कि वे यहां पहुंचे, हमें जल्दी से कहीँ छिप जाना चाहिये !"

"ओ०के० ।" कहने के साथ ही क्लाइव एक झटके से-उठकर खडा हो गया । उसने झपटकर पास पडी अपनी गन उठा ली ।

सहसा भारी बूटों क्रो आवाज वातावरण में गूंजती चली गई ।

"आपने ठीक कहा था मैडम ।" क्लाइव बोल उठा--" आवाज सैनिकों के बूटों की है, वे इसी तरफ आ रहे हैं ।"

इस बीच मैं छिपने की जगह देख चुकी थी । करीब ही कई. विशाल पेड़ आपस में सिर जोडे खडे थे । उन पेडों के तनों के पीछे छिपने से अच्छी दूसरी जगह और नहीं भी सकती थी ।

मैंने वेग कंघे पर लटकाया और फिर पेडों की तरफ दौड लगाती हुई बोली…"आओ क्लाइव्र?"

क्लाइव मेरे पीछे भागा ।

शीघ्र ही हम एक पेड़ के विशाल तने के पीछे छिपे खडे थे ।

निगाहें उसी तरफ थीं, जिस तरफ से बूटों की आवाजें आ रहो ।

हमें ज्यादा इन्तजार नहीं करना पड़ा था ।

सामने से तीन सेनिक भागते दिखाई दिये । उन्होंने अपने हाथों में कुत्तों की जंजीरें थाम रखी थी ।

उनकी निगाहें चारों तरफ रही थीं ।

" यहां तो कोई दिखाई नहीँ दे रहा है ।" एक बोला ।

"जरूर वे आसपास कहीं छिपे होंगे ।" दूसरे ने कहा…"उन्हें तलाश करो ।"

अब वे दलदल के करीब पहुचे ।

"ल. . . लेकिन न तो कुत्ते ही दिखाई दे रहे हैं और न ही उनके भौंकने की आवाज ही सुनाई दे रहीं है ।" पहले वाला सैनिक चकराया-सा बोला ।

. "व....वो देखी ।" दूसरे सैनिकों ने कुतों की लाशों की तरफ संकेत क्रिया--"कुत्तों की लाशें पडी है ।"

"तो वे गोलियां कुत्तों पर चलाई गई थीं ।" दूसरे ने कहा…"उन दोनों की हालत भी कुत्तों जैसी ही कर दो ।"

"उनकी हालत तो ऐसी कर देगे, लेकिन वे मिले तब ना ।" तीसरा बोला-"वे किसी ऐसी जगह छिपे हुए हैं, जहाँ हमारी निगाहें नहीं जा सकतीं ।"

"ये जरूरी तो नहीं है कि वे कहीं छिपे हुए हों ये भी तो हो सकता है कि वे आगे निकल गये हों ।"

"ये देखो कीचड से बने पेरों के निशान ।" पहले ने कहा--- " वे सामने वाले पेडों की तरफ गये हैं । निशान बता रहे हैं ।"

वे निशान क्लाइव के बूटों के थे ।

"जरूर उनमें से एक दलदलल में फस गया था । ये निशान उसी के बूटों के हैं । आओ, इन निशानो के पीछे चलते हैं ।"

तीनों पेडों की तरफ बढे । उन्हें क्या मालूम था कि हम उनके लिये मौत बने एक पेड़ के तने के पीछे छिपे खंड़े हें । मैं उन्हे कुछ करने का मौका नहीं देने चाहती थी । मैं फुर्ती से तने के पीछे से निकलकर उनके सामने आ गई ।

".व .वो रही ।" उनकी निगाहें मुझ पर पडी तो एंक ठिठकता हुआ बोला ।

"देखते क्या हो?" दूसरा अपना हाथ कंधे पर लटकी गन की तरफ बढाता हुआ बोला--"भून डालो ।"

किन्तु इससे पहले कि वे कोई हरकत कर पाते वातावरण में गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी ।

"त्तड़.. .तढ़. . .रेट. . .रेट... . ये गोलियां क्लाइव की गन से निक्ली थीं । उन्हट्रे गर दबाने का मौका ही नहीं मिला था ।

सैनिकों की हौंलनाक चीखो से वातावरण का कलेजा थर्रा उठा था ।

तीनों गोलियों खाकर कटे पेड़ की तरह धड़ाम् से नीचे गिरे और ठण्डे हो गये । मैंने गर्दन मोड़कर पीछे देखा ।

पीछे हाथों में गन सम्भाले क्लाइव खड़ा था । पत्थर की तरह कठोर पढ़ गये चेहरे पर कहर नाच रहा था । आखों से मानो अंगारे बरस रहे थे और जबड़े एक-दूसरे पर जमकर सख्ती से फसे हुए ये । वह सैनिकों की लाशों को घूर रहा था ।

इन सैनिकों की लाशों को भी छलनी करने का इरादा रखते हो क्या ?" मैंने उसके चेहरे पर निगाहें टिकाते हुए पूछा !!

" इरादा तो यहीँ है ।"

"गोलियों बेकार करने से क्या फायदा?" मैंने कहा… " हमारे ' पास तो गोलियों की वेसे ही कमी है ।"

क्लाइव ने गन अपने कंघे पर लटकाई ओर पलटता हुआ बोला-"आइये मेडम ।"

मैं उसके पीछे चल पड्री ।

=====

=====

सहसा हमारे कदमों में ब्रेक लग गये ।

वजह ।

एक उफनती नदीं ने हमारा रास्ता रोक लिया था 1 उस नदीं का स्वच्छ पानी तेजी से वह रहा था । उसके बीच-बीच मेँ पेढ़-पौघे ओर छोटी-बडी चट्टानें दिखाई रही थीं ।

नदी पर पुल नहीं था ।

हम नदी के किनारे ख़ड़े थे । किनारों के दोनों और जगह-जगह धनी झाड्रियां मौजूद थीं ।

"नदी अधिक गहरी तो नहीं है ।" मैंने पूछा ।

"लगती तो नहीं है ।"

"पार कर लोगे?"

" "क्यों नहीं:; ?" क्लाइव ने उत्तर दिया--"अगर तैरने की ज़रूरत' पडी तो मैं तेर भी सकता हू। मैं एक अच्छा तैराक हूं।"

"पहले अपना लिया ठीक कऱ लो । उसके बाद नदी पार करेंगे । तुम्हारे कपड़े जिस्म क्रीचड में लथपथ हैं । पहले नहा तो । उसके बाद वेग से कपड़े निकाल पहन तो । सारी थकान दूर हो जायेगी ।"

"आपका कहना ठीक है ।" उसने कहा…"क्या आप भी नहाएंगी?"

"इरादा तो है ।"

. "फिर तो मुझे झाडियों के उस पार चट्टान के पीछे जाकर नहाना पड़ेगा ।"

"क्यों?"

"आप जो यहाँ नहाएंगी ।"

" अजीब' आदमी हो तुम ?" मैंने कहा --" तुम तो लडकियों की तरह शरमा रहे हो, जबकि शरमाना तो मुझे चाहिए । लेकिन मैं शरमा नहीं रही हूँ । मुझे तुम्हारे सामने नहाने में जरा भी हिचकिचाहट नहीं होगी । जल्दी से कपड़े उतारकर नहाओ ।"

क्लाइव ने कीचड में सने कपड़े उतार दिये ।

अब यह सिर्फ अण्डरवियर में था ।

वह नदी में उतरकर नहाने लगा ।

मैं भी नहाने के मूड में थी । अत मैंने कंधे से गन और बैग उतारकर किनारे पर रख दिया, फिर एक-एक करके अपने कपड़े उतारने लगी । क्लाइव नहाने मे व्यस्त था । पलभर बाद ही क्लाइव के सामने मेरा निर्वस्त्र जिस्म था ।

मखमली.. -हाह्मकारी जिस्म । जिसकी सिर्फ एक झलक ही किसी को दीवाना वना देने के लिये काफी होती है ।

मेरे यौवन क्लश किसी भी बालिग मर्द को नन्हा-सा बच्चा बनने पर मजबूर कर देते हैं । मेने होठों पर दिलकश मुस्कान सजाये क्लाइव की तरफ देखा । किन्तु अगले ही पल मैं हैरत में रह गई । क्योंकि मेंने क्लाइव के चेहरे पर क्रिसी तरह का ऐसा कोई भाव नहीं देखा था, जिससे लगता कि मेरे नग्न सौन्दर्य का उस पर कोई विशेष प्रभाव पड़ा है ।

न जाने किस मिट्टी का वना हुआ था कमबख्त ।

वह इत्मीनान से नहा रहा था, उसने तो अपनी निगाहें भी मेरी तरफ़ से हटा ली थीं ।

इस वक्त मेरा अचूक हथियार मैदाने-जंग में था ।

जिससे आज तक कोई नहीं बच सका ।

अगर एक बार कोई मेरा निर्वस्त्र जिस्म देख ले तो मुझे हासिल करने के लिये पागल हो उठे, लेकिन , क्लाइव पर तो किसी भी तरह का असर नहीं हुआ था ।

"क्लाइव ।" मैंने जानबूझ का उसे पुकारा ।

"यस मैडम.:" वह बोला तो जरुर, क्रिन्तु उसने मेरी तरफ देखना गवारा नहीं किया था ।

"तुम किस मिट्टी के बने हुएं हो क्लाइव डियर !" मैंने क्लाइव को कुरेदा ।

" जिस मिट्टी की आप बनी हुई हैं ।"

"गलत कह रहे हो तुम अगर तुम उस मिट्टी के बने हुए होते, जिसकी मैं बनी हु, तो तुम मुझे निर्वस्त्र देखकर तुम्हारे ऊपर अवश्य असर पडता । मुझे तो ऐसा लगता है कि तुम्हें बनाने में ऊपर वाले ने किसी दूसरो मिट्टी का इस्तेमाल क्रिया है ।"

"आप जल्दी से नहा लीजिये मेडम ।" वह बोला---हमेँ आगे का सफर शुरू करना है ।"

उसी क्षण! !

छपाक् ।

मैं नदीं में जम्प लगा गई थी ।

ठण्डे पानी से मेरे जिस्म को राहत पहुची । मैं पानी में डुबकी लगाकर किसी मछली की तरह दूर निकल गई । "

मैंने पानी से बाहर सिर निकाला । मेरे करीब ही अब तक क्लाइव भी वहां पहुच चुका था ।

मैं क्लाइव के साथ नदी में काफी समय तक तैरती रही व ठंडक का आनन्द लेती रहीं । फिर नदी से बाहर निकल आई और . क़पड़े पहनने लगी । क्लाइव ने बैग खोलकर सेनिक के कपड़े निकाले और पहन लिये । कपड़े उसके जिस्म पर इस तरह फिट जाये थे । जैसे -उसीके नाप बनाये गये हों, .।

तब तक मैं भी कपड़े पहन चुकी थी । हमने गन कन्धों पर लटकाई और नदी में उतरकर आगे बढने लगे । हमने आधी नदीं तो आराम से पार का ली, लेकिन आधी पार करना कठिन लगने लगा था । हम बहीं कठिनाई से चल पा

रहे थे । क्योंकि पानी का तीव्र बहाव बार-वार हमारे कदमों को उखाड़ देता था ।

हम मुश्किल से नदी पार करके दूसरे किनारे पर पहुचे ।

====

====

हमारा आगे बढ़ना जारी था ।

"अभी हमें कितना और चलना पडेगा क्लाइव ।" अचानक मैंने पूछा ।

" सामने वाले इस जंगल कों पार करने के बाद हमारी मंजिल आ जायेगी ।" बह बोला ।

"जंगल कितना लम्बा है?"

" इस बारे में मैं निश्चयपूर्वक कुछ नहीं कह सकता ।"

मैंने आगे कुछ नहीं कहा ।

कुछ देर बाद हम जंगल में दाखिल हौं गये थे ।

जंगल घना था । पेडों की सघनता ने वातावरण को और भी डराचंना तथा रहस्यमय बना दिया था । हमारे बूटों से दबकर जमीन पर बिखेरे सूखे पत्ते अजीब-सी आवाज पैदा कर रहे थे ।

कहींन्कहीं तो जंगल इतना घना था कि दिन में भी अंधेरी रात जैसा आभास होने लगंता था । किसी किसी पेड़ के तने पर तो विशालकाय अजगर लिपटे हुए थे । इसलिये हमें बडी सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा था । बीच बीच में जंगली जानवरों की भयानक आवाजें वातावरण को थर्राकर रख देती थीं ।

दूसरी तरफ जंगल था कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था । यह तो सुरसा के मुंह की तरह फैलता ही जा रहा था ।

कई घन्टे चलने के बाद जंगल का सिलसिला खत्म हुआ । हमने जंगल से बाहर निकलने की जल्दबाजी नहीं की थी । हो सकता था कि जंगल के उस पार कोई खतरा हो ।

मैंने तनिक चेहरा निकालकर दूसरी तरफ़ देखा । सामने दूर तक खुली ऊबड़-खाबड़ जगह थी ।

जगह-जगह ऊचे-नीचे मिट्टी के टीले नजर आ रहे थे । कहीं-कहीं घनी झाडियों थीं ।

कहीं-कहीं छोटे-मोटे पेड़ खड़े थे । किन्तु फिलहाल मुझे कोई खतरा नजर नहीं आया धा । .

"सब कुछ ठीक है मैंडम ।" क्लाइव ने पूछा ।

"फिलहाल तो सब ठीक ही लग रहा है । किसी तरह का खतरा नजर नहीं आ रहा।"

"तो फिर बाहर निकलो ।"

हम जंगल से बाहर निकलकर आगे बढ़ने लगे । क्लाइव इधर-उधर देखता हुआ आगे बढ़ रहा था । ऐसा लग रहा था, जैसे बह कुछ तलाश कर रहा हो । मैंने उसे टोकना उचित नहीं समझा था । उसके देखने का अंदाज बता रहा था कि मंजिल करीब है ।

तकरीबन तीस मिनट तक पुन: आगे बढने का सिलसिला चलता रहा । तत्पश्चात् क्लाइव के पैरों में ब्रेक लगे थे ।

मैं भी रुक गई थी ।

उस जगह एक दूटा फूटा मकान बना हुआ था, जो पूरी तरह है उज़ड़ा हुआ नजर आरहा था ।

मकान के सामने जमीन के ऊपर सूखी घास और पतियों फैली थीं । क्लाइव ने एक सतर्क निगाह चहुं ओर घुमाई, फिर नीचे घास और सूखी पतियों एक तरफ हटाने लगा ।

देखते-ही-देखते वहां लकडी का एक चकोर तख्ता नजर आने लगा । क्लाइव ने तो तख्ता ढवकन की तरह ऊपर उठा दिया ।

तख्ते के नीचे उसी अनुपात का एक चकोर गड्डा था । वहां से एक रास्ता नीचे चला गया था । रास्ता तंग था । उसमें एक समय में एक आदमी ही कठिनाई ते गुजर सकता था ।

क्लाइव गड्डे से उतर गया, फिर उसृ तंग रास्ते में आगे जड़ता हुआ बोला--"

"आईये मेडम "

मैं गड्डे में उतरकर उसका अनुसरण करने लगी ।

अब मेरी समझ में आ गया था कि सर एडलॉफ यहीं छिपा हुआ है ।

वाकई उसने अपने छिपने के लिये एक सुरक्षित जगह चुनी थी । उस जगह क्रो देखकर कोई सोच भी नहीं सकता था कि उसके भीतर कोई छिपा भी हो सकता है ।

मैं खामोशी के साथ क्लाइव के पीछे चलती रही । मैंने उससे कुछ भी पूछने की जरूरत नहीं समझी थी ।
 
अब तो रास्ता एक सुरंग का रूप ले चुका था। सुरंग में हल्का-सा प्रकाश फैला हुआ था, जो सामने की तरफ से आ रहा था ।

जैसे-जैसे हम आगे बढ रहे थे बैसे-ड़ेसे प्रकाश तीव्र होता जा रहा था ।

वो सब मुझे बड़ा ही रहस्यमय-सा लगा था । उस सुरंग का अंत एक कमरे में हुआ ।

मै आश्चर्यचकित रह गई ।

वो आठ गुणा आठ का एक कमरा था । उसे जमीन को भीतर से काटकर बनाया गया था ।

मेरी निगाहें उस कमरे में चकराती चली गई ।

कमरे की सामने वाली दीवार से पीठ सटाये एक शख्स बैठा हुआ था । उसके जिस्म पर मैंले-कुचेले कपड़े थे । सिर के घने बाल गन्दे और धूल से अटे पड़े थे ।

उसकी धनी दाढी उसके सीने तक लटकी हुई थी । उसके चेहरे पर-गम्भीरता फैली हुई थी और आंखों मे वीरानी स्पष्ट दिखाई दे रही थी ।

उस शख्स की बगल में गनं रखी थी ।

मैंने उस शख्स को तुरन्त पहचान था । वह राष्ट्रपति सर एडलाफ था ।

हालांकि आज से पहले मैने उसे कभी नहीं देखा था । परन्तु कई बार उसकी अखबारों में तस्वीर देखी थी । इसलिये मुझे उसे पहचानने में कोई दिक्कत पेश नहीं आई थी ।

कमरे के एक कोने में खाने-पीने का सामान इत्यादि रखा हुआ वा । दायीं तरफ लम्बी दीवार में एग्जॉस्ट फेन लगा हुआ था । जिसके चलने की धीमी-धीमी आवाज वातावरण को बेहद रहस्यमय बना रही र्थी ।

एग्जॉस्ट फेन के नीचे कच्ची ज़मीन पर बैट्री और कई उपकरण रखे हुए थे । बैट्री की मदद से ही फेन चल रहा था और वो प्रकाश भी बैट्री से उत्पन्न हो रहा था ।

वो सब कुछ भांपने में मुझे चन्द सैकिण्ड. का वक्त लगा था ।

हमें देखकर उछल पड़ा सर एडलॉफ़ । वह आश्चर्य और अविश्वास अरी निगाहों से क्लाइव को देखता रह, गया ।

कद्दाचित् उसे इस बात की उम्मीद नहीं रही होगी कि क्लाइवं यहीं पहुच जायेगा ।

ये भी साफ था कि वह क्लाइव से परिचित था ।

"क क्लाइव तुम ?"

"तो आपने मुझे पहचान लिया सर ।" क्लाइव बोला ।

"भला मैं सबसे बड़े समर्थक और देश के सपूत को कैसे नहीं पहचानूंगा?"

"मुझे यहां देखकर आपको आश्चर्य हो रहा होगा?"

"जाहिर है ।" एड्रलाफ मुस्कराया-सा बोला--"ल. .लेक्रिन तुम यहां तक पहुचे कैसे? तुम्हें यहां का रास्ता किसने बताया?"

"मुझे इस जगह का पता डगलस ने बताया था ।" उसने उत्तर दिया-"क्योंकि वहीँ एक इकलौता शख्स था, जो ये जानता था कि , आप यहां छिपे हुए हैं ।"

"थ. .था से तुम्हारा मतलब क्या है क्लाइव !" एडलॉंफ के होठों से कांपता-सा स्वर निकला ।

प्रत्युत्तर में क्लाइव ने चुप्पी साध ली ।

कदाचित् यह डगलस की मौत की खबर सुनाने का हौंसला नहीं जुटा पा रहा था ।

"जवाब दो क्लाइव । तुम मखामोश क्यों हो?"

""व. .वो अब इस दुनिया में नहीं है सर ।"

" व......व्हाॅट !"

"ये सच है सर ।"

. सर एडलॉंफ अविश्वास भरी निगाहों से क्लाइव को देखता रह गया । उन दोनों के बीच वार्तालाप ही ऐसा चल रहा था कि एडलॉंफ क्लाइव से मेरे बारे में पूछना ही भूल गया था ।

मैंने सर एडलॉंफ के चेहरे पर पीडा की असंख्य रेखाएं कांपती देखों । आँखों में दर्द की परछाइयां नृत्य कर उठी थीं । जाहिर है, डगलस की मौत ने जैसे उसे गहरा आघात पहुंचाया था ।

" क्र.. कैसे मर गया डगलस !" कई पलो बाद सर एंडलाँफ़ के होठों से कामता-सा स्वर निकला ।

"पहले आप हमें बैठने की इजाजत दीजिये सर ।" क्लाइव ने लम्बी सर्द सांस छोडी… उसके बाद मैं आपको सब कुछ बताता हू ।"

" ओह. बैठो !"

हम सर एडलॉंफ के सामने बैठ गये ।

सर एडलाॅफ की सवालिया निगाहें क्लगइव के चेहरे पर जमी हुई थी ।

"सैनिक आपको गिरफ्तार करना चाहते थे, लेकिन आप भागकर इस सुरक्षित जगह में आकर छिप गये । इस समय भी आपकों तलाश करने के लिये सैनिक एड्री चोटी का पसीना एक कर रहे हैं । सेना के आफिसरों की नींदें उडी हुई हैं । आपको देश के चप्पे-चप्पे पर तलाश किया जा रहा है, लेकिन वे आपको तलाश करने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं । न जाने कैसे सेना के प्रमुख मार्शल को पता चल गया कि आपका पता-टिकाना सिर्फ डगलस जानता है ।' अत: उसे गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया और उसका मुंह खुलवाने के लिये यातनायेँ दी जाने लगी, लेकिन उसने अपना मुंह नहीं खोला ।" क्लाइव बताता चला गया-"हम लोगों को आपकी चिंता सताये जा रहीँ थी । हम नहीं जानते थे कि आप कहां छिपे हुए हैं । इतना हमें जरूर मालूम था कि आपके बारे में सिर्फ डगलस जानता है । हमेँ.न सिर्फ डगलस के बारे में जानना था कि उसे किस जेल में रखा गया हे,बल्कि उसे जेल से छूडाना भी था । फिर उससे आपके बारे में जानकारी हासिल करके आप तक पहुंचना था । आखिर उसे जेल से छुडा लिया गया । उसी समय सेना प्रमुख

मार्शल को हमने अपने कब्जे में करलिया था ।"

और फिर क्लाइव एड़लॉफ को आगे की पूरी दास्तान सुनाता चला गया । . .

क्लाइव जैसे ही खामोश हुआ, एडलॉफ कह उठा-"डगलस जैसे इंसान की मौत का मुझे हमेशा दुख रहेगा क्लाइव ।"

. "डगलस जैसे लोगों की मौत पर गम नहीं क्रिया जाता सर ।" एकाएक मैं बोल उठी------ "ऐसे लोग कभी नहीं मरते । वो हमेशा जिन्दा रहते हैं । डगलस भी इस देश के लोगों के दिलों में हमेशा जिन्दा रहगा ।"

सर एडलॉंफ ने मेरी तरफ देखा ।

"ये एक अटल सच है सर !" मैं पुन: बोल उठी-' " मुझे डगलस जैसे लोगों पर हमेशा गर्व होता है, जिसने अपने मुल्क और आपकी खातिर अपना बलिदान दे दिया । उस पर यातनाओं के पहाड़ तोड़े गये, लेकिन उसने अपना मुंह नहीं खोला । ऐसे शहीदों की मौत पर अफसोस नहीँ क्रिया जाता ।"

अव सर एइलॉफ का ध्यान मेरी तरफ गया---"'कौन हो तुम !"

"मेरा यहां तक पहुंचना इनकी वजह से ही सम्भव हो सका है सर ।" मेरे जवाब देने से पहले ही क्लाइव बोल उठा-"हमारे हौंसले तो पस्त हो चुके थे । कुछ सूज ही नहीं-रहा था ।

॥॥॥॥॥॥

आपके समर्थकों को या तो गिरफ्तार करके जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जा रहा था अथवा उन्हें चुन-चुनकर बेरहमी से मौत बांटी जा रही थी । इनकी वजह से ही डगलस को जेल से छुडाना सम्भव हो सका और इन्होंने ही हमें एक बहुत बडी कामयाबी दिलवाई है ।"

"क. . .कोंन'-सी कामयाबी ?"

"इन्होंने उस विशाल पेड़ की ज़ड़े काट दी जो हमारे लिए खतरा पैदा कर रहा था । जब पेड़ की जडें काट दी जाती हैं तो पेड़ गिर जाता है सर !" क्लाइव ने जवाब दिया--' "मेरा तात्पर्य मार्शल की मौत से है ।"

" लेकिन मुझे ये तो बताओ कि हमारी ये हमदर्द है कौन?

" सर एडलॉंफ ने सवाल क्रिया ।

"ये मिस रीमा भारती हैं ।"

"कौन रीमा भारती?"

"भारत की सबसे महत्वपूर्ण जासूसी संस्था आई एस सी की नम्बर वन एजेन्ट रीमा भारती ।"

सर एडलॉफ को मानो करण्ट लगा ।

वह अपलक मुझे देखता रह गया ।

" त. , ,तुम वहीं रीमा भारती हो जिसे मां भारती की शरारती ,उंद्दण्ड किन्तु लाडली बेटी कहा जाता है ।"

"जी हा" । मैँ वहीँ रीमा भारती हूँ सर एडलॉफ!" मैं तनिक सर नवाकर बोली ।

"मैंने तुम्हारा वहुत नाम सुना है वेटी । अन्तर्राप्टीय अखबारों में अक्सर तुम्हारे कारनामों के बारे में पढता रहा हूँ । देशद्रोहियों, गद्दारों और मुजरिमों के लिये साक्षात् मौत हो। तुमने हेमेशा जुल्म के खिलाफ जेहाद की है और जुल्म को खत्म के लिये अपनी जान की बाजी भी लगा देती हो । आज़ तुम्हें अपने सामने देखकर मुझे इतनी खुशी हो रही है कि मैं बयान नहीं कर सकता, लेकिन मेरे लिये हैरानी की बात है कि तुम मडलैण्ड में कैसे ?"

"मेरे विभाग ने मुझे एक मिशन के तहत मडलैण्ड भेजा था । ओर मेरा मिशन था डगलस को सही-सलामत जेल से बाहर निकालना और आपकी हर सम्भावित मदद करना । आपको किसी ऐसी जगह पहुचाना,जहां आप पूरी तरह से सुरक्षित रह सकें ।" मैंने बताया----"और इस मामले में मेरे विभाग को इसलिंये हस्तक्षेप करना पडा, क्योंकि डगलस आई एस सी का स्थानीय एजेन्ट था

और आप हमेशा भारत को अपना 'सच्चा दोस्त मानते रहे हैं और आप समय-समय पर हमारे मुल्क की किसी ना -किसी रूप.में मदद

करते रहे है ।-सर एडलाॅफ । बहरहाल ये बतांइये किं मुझे आपको कहां पहुंचाना है ? वैसे वो सुरक्षित जगह कौन-सी हो सकती है, इस बात का फैसला आपको या फिर क्लाइव को करना है ।"

इससे पहले कि सर एडलॉंफ कुछ'कह पाता क्लाइव बोल उठा----"' 'वो सुरक्षित जगह मेरी निगाहों में है सर । मैं आपको वहीं लेकर चलूगा, लेकिन उससे पहले मुझे एक शख्स से सम्पर्क करना होगा ।"

"उससे भी समपर्क कर लेना, लेकिन ये तो बताओं वो सुरक्षित जगह कौन-सी है?" सर एडलॉंफ ने पूछा ।

"शायद आप हमारे पडोसी देश को भूल गये हैं, जो आपका बहुत बड़ा मित्र है और आपको राजनेतिक शरण देने में सक्षम है । तथा कोई उसकी तरफ टेढी नजरों से देख भी नहीं सकेगा ।"

सर एड़लाॅफ का चेहरा चमक उठा ।

फिर उसने क्लाइव से पूछा----"मुल्क के हालात कैसे हैं?"

"हालात तो ठीक नहीं हैं सर ! जनता पर अत्याचार हो रहा है । निर्दोष लोगों की सरेआम हत्या की जा रही है । आपके समर्थकों से जेले भर चुकी हैं ।" क्लाइव ने बताया----" हां मार्शल की हत्या के बाद हालात तेजी से बदल सकते हैं । मार्शंलं की मौत की खबर सैना और सेना के आफिसरों को हिलाकर रख देगी । मुझे उम्मीद है कि अब जल्दी ही सेना के पैर उखड जायेंगे ।"

"जल्दी ही आपके मुल्क में अमन-चेन लौट आयेगा एडलॉंफ " मैं बीच में ही बोल उठी…" इतिहास गवाह है कि सत्य की जीत होती है और वो वक्त दूर नहीं ज़ब आप वापस गरीमा हांसिल कर लेंगे ।"

"और अगर ऐसा हुआ तो उसका सारा श्रेय तुम्हें दिया जाएगा रीमा ।" सर एडलॉफ बोले ।

मैं खामोश रही ।

"अब आपका अगला कदम क्या है रीमा ।" क्लाइव ने पूछा ।

"तुम जानते हो क्लाइव कि सैनिक हमारी जान के पीछे हाथ धोकर पडे हुए हैं । अगर उन्हें इस बारे में भनक लग गई कि हम यहीं मौजूद है , तीनों में से कोई भी जिन्दा नहीं बचेगा। अगर हमें यहां घेर लिया गया तो हमारी हालत चूहेदानी में फंसे चूहे जैसी होकर रह जायेगी । इसलिये हमें तुरन्त यहां से निकल जाना चाहिये । कहीं ऐसा न हो कि हमारी... ।"

' धडाम् धड़ाम् . . ।'

अभी मेरा वाक्य पुरा भी नहीं हुआ था कि बाहर धमाकों की आवाज गूंजने लगी ।

धमाके इतने जबरदस्त थे कि हमें अपने कानों के परदे फटते हुए…से महसूस होने लगे थे ।

धरती मानो कांप उठी थे ।

हम अवाक् से एक-दूसरे की तरफ देखते रह गये ।

कुछ क्षणों के लिये हमारे मध्य तनावपूर्ण सन्नाटे ने पांव पसार दिये थे ।

फिर उस सन्नाटे को भंग कंरने का श्रेय. सर एडलॉंफ को हासिल हुआ-"य. . .ये धमाके कैसे हैं रीमा?"

"लगता है कि हम लोग धिर गये हैं ।" मैंने कहा ।

सर एडलॉंफ को जोरों का झटका लगा ।

"ल-लेकिन सेनिक यहां कैसे पहुंच गये?" एक पल बाद क्लाइव किसी तरह से कहने में कामयाब हुआ-"'हम लोगों ने तो यहां तक पहुंचने में पूरी सावधानी बरती थी । एक क्षण के लिये भी हम असावधान नहीं हुए थे ।"

मैं क्या जवाब देती?

"तुम लोगों को चारों तरफ से घेर लिया गया है । हमें मालूम है कि तुम कहां छिपे हुए हो?" एकाएक वातावरण में चेतावनी भरा स्वर गूंजा-"अगर तुम लोग अपनी सलामती चाहते हो तो बाहर . निकल आओ । वरना इसी जगह तुम्हारी कब्र बना दी जायेगी ।"

"तुमने ठीक कहा था रीमा बेटी ।" सर एडलॉंफ बोला--"आखिर खतरा आ ही गया । यहां से भाग निकलने का दूसरा कोई रास्ता भी तो नहीँ है । मेरे साथ-साथ तुम लोगों को भी गिरफ्तार का लिया जायेगा । उसके बाद मेरा क्या अंजाम होगा ? मुझे बताने की ज़रूरत नहीं ।"

" घबराने की जरुरत-नहीं है सर एडलॉंफ ।" मैंने कहा--" मेरे होते हुए अपने कोई गिरफ्तार नहीं कर सकता ।"

इधर मेरा वाक्य पूरा हुआ । उधर वातावरण में पुन: वही स्वर गूंजा-"मैं तुम्हे आखिरी बार कह. रहा हू रीमा की क्लाइव और सर एडलॉंफ को लेकर बाहर आ जाओ, वरना सैनिक इस बंकर पर बम बरसाने शुरु कर देगें ।

मैं चौंकी । मैं समझ नहीं पाई मुझे मेरे नाम से पुकारने बाला कौन महानुभाव है?

अब वहां से निकलना जरूरी हो गया था ।

सबसे बडी बात तो ये थी कि मुझे सर एडलॉंफ को सुरक्षित बाहर निकालना था ।

======

======
 
"अब क्या करें?" क्लाइव ने पूछा ।

"हमारे सामने बाहर निकलने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है । अगर हमने बाहर निकलने में देरी की तो सैनिक बम बरसाने शुरु कर देगे ।" मैंने गन उठाई और एक झटके से उठ खडी हुई--"आगे-आगे मैं चलती हूँ । तुम सर एडलाफ़ को लेकर मेरे पीछे आओ । बाहर के हालातों को देखने के बाद ही हम अपना अगला कदम निर्धारित करेंगे ।।

" ओ०के० ।"

"मेरे पास कुछ विस्फोटक सामग्री है ।" बोला सर एडलाॅफ ने - " अगर तुम कहो तो मैं तुम्हारे हवाले कर दूं । वक्त पडने . पर हथगोले तो हमारे काम आ ही सकते हैं ।"

"ठीक है ।"

"धड़ाम.. .धड़ाम्... . . . !"

तभी बाहर धमाके गूजने लगे ।

" आओ ।" मैंने आगे बढते हुए कहा अब हम लोगों का यहां ज्यादा देर रुकना खतरे से खाली नहीं से ।"

क्लाइव और सर एडलॉंफ मेरे पीछे हो लिये ।

=====

=====

हम बाहर निकले ।

बाहर का दृश्य कलेजा लरजां देने बाला था ।

उस खुली जगह में चारों तरफ सशस्त्र सैनिक फैले नजर आ रहे थे । उनमें कई सेना के आफिसर भी थे ।

सेना के कई ट्रक और जीपों के अलावा एक विशाल टैंक भी शान से सिर उठाये खडा था ।

सेना पूरी तैयारी के साथ यहां पहुची लगती थी ।

मेरी घूमती हुई निगाहें सामने खड़े आर्मी के एक आफिसर पर स्थिर होकर रह गई । हुलिये के आधार पर मैंने उसे तुरन्त पहचान लिया था । वह विल्सन था । उसका हुलिया मुझे कैप्टन हिलकाक ने बताया था ।

"हाल्ट ।" विल्सन कठोर स्वर में बोला ।

मेरे पेरों में तुरन्त ब्रेक लग गये ।

मैंने गर्दन मोड़कर पीछे देखा, क्लाइव और सर एडलाँक मेरे पीछे थोड़े फासले पर ठिठक चुके थे ।

" गन फेंक दो रीमा?" वह पुन पूर्ववत् लहजे में बोल उठा-" और हाथ ऊपर उठा लो ।" मैंने तुरन्त गन एक ओर फैककर बिना किसी हीँल हुज्जत के हाथ ऊपर उठा दिये, फिर में मुस्कुराकर बोली--" एकं लड़की को अपने कब्जे में करने के लिये इतना लाव-लश्कर लाने की क्या जरूरत थी मिस्टर विल्सन ।"

वह चौका । कदाचित् उसने तो सोचा भी नहीं होगा कि मैं उसके नाम से वाकिफ हूंगी ।

"मेरी 'तुमसे पहली हैं मुलाकात है ।" वह चकराया सा बोला-"इसकं बावजूद तुम मेरा नाम कैसे जानती हो?"

"कैप्टन हिलकाक ने मुझे तुम्हारा हुलिया बताया था । उस हुलिये-कै आधार पर ही मैंने तुम्हें पहचाना है ।"

"मेरे नाम के अलावा मेरे बारे में और काया जानती हो?"

"कुछ नहीं, अगर तुममें कोई खास बात हो तो खुद ही बता दो ।"

"रीमा भारती ! मैँ वो शिकारी हूं अगर एक बार शिकार मेरे आमने आ जाये तो मेरे हाथों से बच नहीं सकता । माना कि तुम एक दिमागदार और खतरनाक किस्म की लड़की हो । तुमने बड़े-बड़े अपराधियों के छक्के छूड़ाकर रख दिये ।। मगर एक बात का ध्यान रखो कि इस समय तुम्हारा पाला एक ऐसे शख्स से पड़ा है, जो अपने दुश्मन को सिर्फ मौत बांटता है ।"

"अच्छा " मैं व्यंग से मुस्कुराई ।

"हां ।" वह मुझे अंगारे बरसाती आँखों से घूरता हुआ गुर्राया---- "एक बात सुनो । तुमने मार्शल साहब की हत्या करके अपनी जिन्दगी की आखिरी गलती की है । तुम्हें ऐसी मौत मिलने बाली है, जिसे सुनने के बाद तुम्हारी रूह तक कांप उठेगी ।"

"मैं तुमसे ये नहीं पूछूगी कि वो मोत कैसी होगी?" मैंने इत्मीनान से कहा…" हां, इतना जरूर बता दो कि तुम यहां कैसे नजर आ रहे हो?"

"जरूर बताऊंगा ।, सुनो, क्लाइव इत्यादि के साथ जेल से फरार होने से लेकर जोंगे को खाई में ढकेलने ओर इस सुरंग में दाखिल होने तक तुम हर पल मेरी निगाहों में रही हो, अगर मैं चाहता तो किसी भी क्षण तुम दोनों को खत्म कर सकता था, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि मैं जानता था कि तुम सर एडलॉंफ तक जरूर पहुंचोगी और मेरा मकसद भी सर एडलाॅफ तक पहुंचना था । तुम मेरे सैनिकों की लाशें बिछाती रहीं । उन्हें बेरहमी की मोतं मारती, रही और मैं खामोशी के साथ सब कुछ देखता रहा । अब जबकि सर एदृलॉफ मेरे सामने हैं, मेरा मकसद पूरा हो गया है ।"

मैं अपनी आदत के विपरीत खामोश खड्री रहीं ।

=========

"तुमने मेरी एक बहुत बडी प्रॉब्लम सॉल्व कर दी है रीमा । तुम्हारी वजह से ही में सर एडलॉफ तक पहुचने में कामयाब हो सका हू। तुम जो कर सकती थी, वो कर चुकी हो , लेकिन अब तुम कुछ नहीं कर सकोगी, क्योंकि कुछ देर बाद तुम इस दुनिया को अलविदा

कर जाओगी । इसे मैं तुम्हारी बदनसीबी ही कहूंगा, जो तुम अपने मुल्क से दूर मरोगी । तुम्हें अपनी धरती की मिट्टी भी नसीब नहीं ।"

"अगर तुम्हारा यही फैसला है तो सैनिकों से कहो कि मुझे गोलियों से भून डालें ।" मैं निर्भीक स्वर में बोली ।

" वो मौत तो तुम्हारे लिये आसान मौत होगी रीमा । मैं तो तुम्हें एक ऐसी दर्दनाक मौत मारना चाहता हूँ कि आइन्दा तुम जैसा कोई भी जासूस इस धरती पर कदम रखते हुए थर्राये। तुम क्या समझ रही थी कि सर एडलॉंफ़ को यहां से निकाल ले जाने में कामयाब हो जाओगी ।"

"तुम कह चुके विल्सन ।" अब मैं अपने असली रूप में आई--" अगर और कुछ कहना हो तो कह सकते हो ।"

"मुझे जो कहना था, मैं कह चुका ।"

"अब तुम मेरी भी एक बात सुन लो । मैंने जो इरादा, लेकर . इस देश की धरती पर कदम रखा है, उसे पूरा करने से मुझे कोई नहीं रोक सकता । तुम भी नहीं विल्सन. . .तुम भी नहीं ।"

"तुम ख्वाब अच्छे देख लेती हो ।"

"रीमा भारती अभी ऐसे ख्वाब नहीं देखती । जिन्हें वो पूरा न कर सकती हो । वो जो कहती है, करके दिखाती है । अपने हर मिशन के पीछे मेरा एक ही मकसद होता है कामयाबी ।"

"लेकिन इस वार तुम्हें कामयाबी नहीं मिलेगी रीमा ।" वह बोला-" तुम देख ही चुकी हो कि तुम्हारे चारों तरफ मौत खडी है । तुम्हारी एक गलत हरकत तुम्हें और सर एडलॉफ को-मौत के मुंह में पहुंचा सकती है । अगर तुम्हारे दिमाग में कोई खुराफात हो तो बेहतर यही होगा कि उसे वक्त रहते उपने दिमाग से निकाल देना ।"

मैंने खामोश रहकर विल्सन के दायें-बायें खडे सशस्त्र सैनिकों को क्षण भर के लिये देखा । फिर मैंने अपनी निगाहे विल्सन के चेहरे पर स्थिर कर दीं । मैं निर्णय ले चुकी थी कि मुझे क्या करना है !"

"तुम लोग देख क्या रहे हो क्या विल्सन सैनिकों को सम्बोधित करता हुआ बोला-"सर एडलॉफ और क्लाइव को गिरफ्तार कर लो ।"

कई सेनिक उनकी तरफ झपटे । तभी मैं हरकत कर गई । वहाँ बिजली सी कोंधी ।

मैंने चील की तरह झपट्टा मारकर विल्सन के दायीं तरफ खड़े सैनिक के हाथ से गन झपटकर उसकी नाल विल्सन की कनपटी से सटा दीं ।

क्षण भर में सब कुछ हो गया था । वहां मौजूद सेनिक और आफिसर सन्नाटे में रह गये ।

"रुक जाओ ।" मेरे होठों से मादा भेडिये जैसी गुराहट निकली--"' तुममें से क्रिसी ने भी एक कदम भी आगे बढाया तो मैं तुम्हारे इस आफिसर का भेजा उड़ाकर रख दूगी ।'”

सर एडलाफ की तरफ बढ रहे सैनिक फ्रिज होकर रह गये ।

अब बाजी मेरे हाथ मे थी

॥॥॥॥

॥॥॥॥

"अगर तुम समझती हो कि मुझे गन से कवर करके तुम सर एडलाफ को निकाल ले जाने में कामयाब हो जाओगी तो गलत समझ रही हो ।" विल्सन दांत पीसता हुआ बोला---" 'तुम्हारे' लिये ये पूरा इलाका मौत का पिंजरा बन चुका है । अगर मैं यहां न पहुंचता तो मुमकिन था कि तुम अपने इरादे में कामयाब हो जाती, मगर अब ये संम्वभ नहीं है । अब तुम न केवल सर एडलॉफ क्रो मरे हवाले करोगी, बल्कि मुझसे अपनी, जिन्दगी की भीख भी मांगोगी ।”

"तुम क्या समझ रहे हो कि मैं तुम्हारी गीदढ़ भभकी से डर जाऊंगी । मैं न सिर्फ सर एडलाफ को अपने साथ लेकर जाऊंगी, , बल्कि यादगार के तौर पर कुछ लाशें भी छोड़ जाऊंगी, जिनमें एक ताश तुम्हारी भी हो सकती है विल्सन ।" . .

"तुम लोग मेरी जान की परवाह मत करो ।" विल्सन सैनिकों से सम्बोधित होकर आदेश भरे स्वर में बोला----"उन दोनों को गिरफ्तार कर लो ।" कई सेनिक उनकी तरफ़ झपटे ।

"तड़.. .तड़.. रेट.. ....रेट !"

गोलियों कीं तढ़तड़ाहट के बीच सैनिकों की दर्दनाक चीखें उभरीं । साथ ही वे जमीन पर ढेर होते चले गये । विल्सन सन्नाटे में रह गया । सैनिकों के चेहरों के रंग उड़ गये । अभी विल्सन सन्नाटे से उभरा भी नहीं था कि मैंने एक हथगोला हवा में तैरता हुआ ट्रक की तरफ बढता देखा ।

अगले क्षण ।

धड़ाम !

वातावरण में जबरदस्त धमाका हुआ ।

और फिर विस्फोट पर विस्फोट लगे । हथगोला ट्रक में गिरकर फटा था

निश्चित रूप से उस में विस्फोटक पदार्थ भरा हुआ था । ट्रक के आसपास खड़े सैनिकों के जिस्म के चीथड़े उड़ गये । वातावरण में हौलनरक चीखें गूंज रहीं थीं ।

विल्सन के होश उड़ गये ।

मैं जानती थी कि हथगोला फेकने वाला सर एडलाॅफ था ।

" तुम लोग अपने साथियों का अंजाम देख चुकें हो ।" मैंने चेतावनी भरे स्वर में चीखकर कहा---"अगर तुममें से किसी ने भी गलत हरकत की तो अपनी मौत के खुद जिम्मेदार होगे !"

सैनिकों को मानो काट मार गया ।

धड़ाम् ।

मेरे करीब ही एक और विस्फोट हुआ था । अगले क्षण वातावरण में धुआं… …ही… …धुआं फैल गया । ये विस्फोट भी सर एडलाफ -ने ही क्रिया था ।

मुझे मौका मिल गया था । मैं फुर्ती से पलटी ओर सर एडलाफ का हाथ थामकर करीब ही खड़े टैंक की तरफ़ भागती हुई चीखी… "मेरे साथ जाओं क्लाइव ।"

क्लाइव हमारे पीछे भागा ।

"वे भाग रहे हैं ।"' चीखा विल्सन-"तीनों को" छलनी कर दो !"

वरतरवरण बेशुमार गोलियों की तढ़तड़ाहट से गूंज उठा । किंतु हमारा भाग्य ही अच्छा था कि गोलियों हमें छू तक नहीं पाई थीं । इससे पहले कि धुआं छटता, मैं टैंक को अपने कब्जे में कर चुकी थी । साथ ही मैंने वहां पर मौजूद सैनिकों का नाम शहीदों की लिस्ट में दर्ज करां दिया था ।

"तुम सर एडलाफ के साथ टैंक में जाओ क्लाइव ।"' मैंने धीमे स्वर में कहा--""सर एडलॉफ को सम्भालने का काम तुम्हारा है ।"

धुआं धीरे-धीरे छटने लगा था ।

क्लाइव टेंक के उपर पहुच चुका था और यह सर एडलाफ के साथ उसके भीतर चला गया था । इधर मैंने टैंक का तोप वाला सेक्सन सम्भाल लिया था ।

धुआ छंटा और उसी क्षण गोलियों की बाढ़ टैंक की तरफ़ झपटी, लेकिन भला मामूली गोलियां इस्पात के उस हाथी का क्या बिगाढ़ सकती थी?

तभी मैने अपना काम शुरु कर दिया 1 टैंक पर लगी गन से गोला निकलकर सैनिको के करीब जाकर फटा जो टैंक की तरफ बढ़ रहे थे ।

धड़ाम् ।
 
दूसरे क्षण वातावरण में आग का बवण्डर-सा उठा । उनके बीच मैंने दर्जन भर सैनिकों के चीश्वड़े उड़ते देखै ।

अव धुआं पुरी… तरह से छंट चुका था ।

सामने की तरफ सैनिकों का जमाव बढता जा रहा था ।

मैंने न सिर्फ टेक स्टार्ट करके उस तरफ़ बढा दिया, बल्कि तोप का लीवर भी खींच दिया । टैंक की गन से एक और गोला निकलकर .सैनिकों की तरफ झपटा ।

सैनिकों ने गोले को अपनी तरफ आते देख लिया था । वे अपनी जान बनाने के लिये इधर-उधर भागे, मगर बहुत देर हो चुकीं थी ।

गोला सैनिकों के करीब गिरकर भयानक विस्फोट के साथ फटा ।

उनमें से अधिकांश सैनिकों के शरीर के चिथड़े उड़ गये ।

उस घडी मै तो मानो कहर बन चुकी थी । इस बार मेरे पीछे से गोलियों की बौछार आई ।

'तड़.. .तड़.. ...रेट .रेट... हालाकि उन लोगों के पास टैंक का कोई विकल्प नहीं था, मगर फिर भी वे पागलों की तरह गोलियों बरसा रहे थे ।

उसी क्षण ।

धड़ाम् ।

मैंने गर्दन को मोड़कर पीछे देखा, पीछे सैनिकों के जिस्मो के चिथड़े उड़ते दिखाई दिये।"

मुझे समझते देर नहीं लगी कि ये कारनामा , क्लाइव अथवा सर एडलाफ के अलावा और किसी का नहीं है ! अचानक मैं चौंकी ।

मेरे दायी तरफ़ से एक टैंक मस्त हाथी की तरह इधर ही बढा आ रहा था । उस टेक पर गन सम्भाले विल्सन सवार था । एक क्षण गंवाये बगैर मैंने अपने टेंक का रुख उस टेंक की तरफ कर दिया ।

वे क्षण बड़े ही खतरनाक थे ।

सामने से आ रहा वो टैंक मेरे टैंक से टकरा सकता था ।

अतः एक क्षण का सौवां हिस्सा भी व्यर्थ किये बगैर मैंने तोप का लीवर खींच दिया । इससे पहले कि सामने वाला टैंक अपने बचाव में कुछ कर पाता, तोप से निकला गोला टेंक पर गिरकर फटा ।

'धड़ाम्. . . !'

गगनभेदी धमाका हुआ और टैंक आग के शोलों के बीच धिर गया । शोलों के बीच मैंने विल्सन को जलते देखा, उसके होठों से हौंलनाक चीखे निकलकर वातावरण को दहलाने लगी थीं ।

टैंक धू-धूकरके जल उठा था।

में इकलौती सैनिकों पर भारी पढ़ रही थी ।

सैनिकों के पांव .उखंड़ गये थे । बचे हुए सेनिक अपनी जान बचाने के लिये इधर-उधर भागने लगे, लेकिन किसी को भी भाग निकलने का मौका नहीं मिला था । . कुछ ही देर में एक भी सैनिक जिन्दा नहीं बचा था ।

वहां सैनिकों की लाशें और मांस के लोधड़े दूर-दूर तक फैले नजर आ रहे थे ।

वहां मरघट जैसा दृश्य उत्पन्न हो गया था । वातावरण में मांस जलने की चिढ़ांध फैली हुई थी ।

मैं जानती थी कि और सैनिक कभी भी यहाँ टपक सकते थे ।

इसलिये हमारा यहां एक पल रूकना-खतरनाक-साबित हो सकता था ।

"अब हमें वक्त बरबाद नहीं करना से सर एडलॉंफ’ । यहाँ हुए धमाकों की आवाजें दूर दूर तक सुनी जा चुकी होगी । सैनिक किसी भी वक्त यहाँ पहुंच सकते हैं । यहां से भागो ।" मैंने कहा ।

अगले क्षण हम धड़ाधढ़ टेंक से नीचे कूद गये ।

"आप मेरे साथ आओ मैडम ।" क्लाइव, सर एडलॉफ़ का हाथ थामकर सामने की तरफ़ भागा ।

मैं उनके पीछे भाग खडी हुई । रास्ते में क्लाइव ने एक मृत सैनिक का जमीन पर पड़ा वायरलेस उठा लिया था और भागते-भागते हीँ उस पर किसी से सम्पर्क स्थापित करने लगा था । मुझे समझते देर नहीं लगी थी कि यह अपने किसी मददगार से मदद मांग रहा है ।

॥॥॥॥

॥॥॥॥

तकरीबन डेढ घंटे -बाद हम समुद्र के किनारे पर पहुंच कर रुके ।

यहां पहले से ही एक मोटरबोट खडी थी । उसकी ड्रायविंग सीट पर एक तीस वत्तीस वर्षीय शख्स मौजूद था ।

लगातार डेढ घंटे तक भागते रहने के कारण हमारे जिस्म पसीने से भीग चुके थे । सीना लुहार की धौंकनी बना हुआ-था ।

"मैं तुम्हारा मैसेज मिलने के फौरन बाद मोटरबोट लेकर यहां के लिये रवाना हो गया था क्लाइव ।" बोट की ड्रायविंग' सीट पर बैठा शख्स बोल उठा-" मुझे पहुंचने में देर तो नहीं हुई ।"

"नहीं । तुम ठीक वक्त पर पहुँचे हो ।" कहने के बाद क्लाइव ने मुझे बताया कि वो बोट सर .एडलॉफ को सुरक्षित नेवरात ले जाने आई थी ।

"अब देर मत करो क्लाइव ।" मैंने कहा- " बोट में बैठो । अब सर एडलॉफ़ की सुरक्षा की जिम्मेदारी तुम्हारी है ।"

"तुम भी हमारे साथ चलो रीमा ।" सर एडलाॅफ ने बोला ।

"आप और क्लाइव ही इस बोट में जायेंगे, क्योंकि मेरे चीफ ने जो खाम मुझे सौंपा था, वो मैंने पूरा कर दिया । मेरा आपके साथ जाने का कोई अर्थ ही नहीं है । अब मैं अपने प्यारे वतन बापस लौटूगी ।"

"तुमने मेरी जो मदद की है । उसके लिये मैं जिन्दगी भर में तुम्हारा अहसानमंद रहूंगा । मडलैण्ड देश में अगर दोबारा अमन'चेन कायम हुआ तो उसका श्रेय तुम्हें ही जायेगा । इस मुल्क की जनता तुम्हारी कृतज्ञ रहेगी बेटी ।" सर एडलॉफ़ बोला-" ये बूढा सर एडलॉंफ़ भारत मां की लाडली वेटी को सलाम करता है !"

सर एडलॉफ़ ने मेरा माथा चूमा और फिर पलटकर क्लाइव के साथ बोट में सवार हो गये ।

अगले क्षण बोट का इंजन जाग उठा और फिर समुद्र को सीना चीरती हुई तेजी से आगे बढती चली गई ।

अब मेरे यहां रुकने का कोई काम नहीं रह गया था । अत्त: मैंने एक तरफ कदम बढ़ा दिये । मुझे मालूम था कि मुझ अकेली को उस देश से निकलने में कोई दिक्कत पेश नहीं आने वाली थी । और यही हुआ, तीसरे दिन मैं वापस मुम्बई में थी ।

॥॥॥॥

॥॥॥॥

एक महीना तेजी से गुजर गया ।

इस बीच मैं एक और खतरनाक मिशन पर काम कर चुकी थी !

कल ही विदेश से बापस लौटी थी ।

आज सुबह का अखबार मेरे सामने था ।

मैं अपने फ्लैट के ड्राइंग रूम में सोफे में धंसी कॉफी के घूट भर रही थी । कॉफी का अन्तिम घूंट भरने के बाद मेरी दुष्टि अखबार की सुर्खियों पर चकराने लगी है ।

अचानक मेरी दृष्टि अखबार में प्रकाशित एक खबर की सुखों पर टिक गई थी ।।

मडलैण्ड के राष्ट्रपति सर एडलॉफ ने पुन: सत्ता सम्भाली ।

नीचे विस्तृत' रूप से खबर छपी थी । . . .

मेरी निगाहें खबर पर चकराती चली गई ।

संक्षेप में समाचार इस प्रकार था कि मडलैण्ड में जिस बुरी तरह मानवाधिकार का हनन हो रहा था और निर्दोष लोगों का खून बहाया जा रहा था । उसके मद्देनजर यु एन ओ को वहां दखल देना पड़ा था और अन्तत यूनाइटेडनेशन सयूक्त फौजो ने मडलैण्ड पहुंचकर वहां पर जबरन घुस आई विदेशी सेना को खदेड दिया था न सिर्फ यहां के तानाशाह बने कठपुतले राष्ट्रपति को पद से बेदखल कर दिया था बल्कि पूर्व राष्ट्रपति एडलाफ को बापस वुलाकंर सत्ता उन्हें सोंप दी गई थी ।

अब मडलैण्ड में पूर्ण अमन चैन कायम हो चुका था ।

समाचार पढकर मेरे होठों पर संतोष भरी मुस्कान बिखरती चली गई थी ।

सही मायने मैं मेरा मिशन तो अब पूरा हुआ था ।

।। समाप्त ।।
 
Back
Top