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अनेक गैलरियों से गुजरते हुए एक लिफ्ट से पहुचे । लिफ्ट से उनका सफ़र ऊपर के लिए नहीं था बल्कि नीचे के लिए था । विजय-विकास को समझते देर न लगी-कंकरीट का यह गिलास जितना जमीन के ऊपर नजर जाता है, अगर उतना नहीं तो कम से कम आधा जमीन के अंदर जरूर है ।
लिफ्ट में सफर करते वक्त विजय ने पूछा----“चले तो हम जा रहे है प्यारे, लेकिन पता तो लगे, हम जा कहाँ रहे हैं?”
"भाई जी के बेडरूम में ।"
“वहां क्यों?"
"मेरो डूयूटी मेडम को वहां पहुचाना है ।"
"उसके बाद !"
"वापस चले जाना है ।"
"चाहे हम ना चाहें ?"
जैक चुप रहा !
जैक चुप रहा ।
लिपट रुक चुकी थी !
उसके खुलते ही वे बाहर निकले । सामने गैलरी थी । एक बार फिर से कई गैलरियां पार करके एक कमरे में पहुचे । उन्होंने नोट किया था---- बेसमेंट में गार्ड्स काफी कम थे ।
जिस कमरे में जैक उन्हें ले आया था उसे कमरा न कहकर किसी 'शेख' का 'हरम' कहा जाए तो ज्यादा मुनासिब होगा । दीवारों पर लड़कियों की. . लडकियों की नहीं बल्कि अपने-जपने जमाने की टोप हीरोइनों की फोटो लगी हुई थी । वे सब शायद वे थी जो इस 'हरम' में आ चुकी थी ।
जैक ए.सी. के स्विच बोर्ड की तरफ़ बढा।
उसे आन किया ।
और पलक झपक्टो ही विजय-विकास के पैरों तले से जमीन खिसक गई ।
वे उस कमरे के नीचे मौजूद दूसरे कमरे के फर्श पर जा गिरे ।
जैक ने केवल क्षण भर के लिए स्विच को आन करके वापस आफ कर दिया था । फ़र्श का वह हिस्सा जहां से विजय-विकास नीचेे गिरे ' थे, दो किवाडों की तरफ झूलता हुआ पुन: फर्श नजर आने लगा । नजमा के चेहरे पर आश्चर्य के भाव थिरक रहे थे ।
"बेवकूफ ।" उसकी तरफ पलटते हुए जैक के होंठों पर मुस्कान थी-"समझ रहे थे मैं मरने के डर से इन्हें अपने साथ यहां तक ले आया हूं !"
"तो क्या तुमने पहले ही सोच लिया था इन्हें, यहाँ लाकर. . . ।"
"सोच न लिया होता तो इतने आराम से यहां तक न ले जाता । इन्हें क्या पता---' भाई जी को यह पता लग जाए कि उनका कोई सिपहसालार केवल अपनी जान बचाने के लिए दुश्मन को हेववार्टर में घुसा लाया है तो वे ऐसी मौत देते हैं जिसे देखकर, मौत भी थर्रा उठती है । मैंने तो सफारी में इनका नाम सुनते ही सोच लिया था…जितनी खुशी भाई जी को इन्हें अपने कैद खाने में पाकर होगी उतनी खुशी उन्हें शायद पहले कभी नहीं मिली होगी ।"
नजमा चुप रहीं !
"हुह । विजय-विकास बडा नाम सुना था इनका !” कामयाबी के नशे में चूर जैक कहता चला गया'-…"सुना था-सारे संसार के मुजरिम इन से कांपते हैं !!
"हुह । विजय-विकास बडा नाम सुना था इनका !” कामयाबी के नशे में चूर जैक कहता चला गया'-…"सुना था-सारे संसार के मुजरिम इन से कांपते हैं !! मैंने तो सोचा भी नहीं था ये इतने मूर्ख होंगे । कम से कम सोचा तो होता इन्होनें ---- भाई जी का खास सिपहसालार इतनी सुरक्षा व्यवस्थाओं के बावजूद बगेर कोई विरोध किए क्यों अंदर घुसा चला जा रहा है?"
“मान गई जैक, काफी होशियारी से काम लिया तुमने ।"
"बस यह बात इसी ढंग से भाई जी के सामने कह देना ।'
"मततब?"
"उन्हें बता देना दुनिया की मानी हुई हस्तियों को मैंने कितनी समझदारी और धैर्य के साथ लाकर उनके कैदखाने में फंसाया है । उसके मुंह से यह सुनते ही वह मेरी तरक्की कर देगे ।"
“ज़रूर कहूंगी । बहरहाल, तुमने काम तो तरक्की के लायक किया है मगर वे हैं कहां ?'"
"अभी बुलाता हूं।” कहने के साथ उसने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और एक. . केवल एक बटन पुश करके कान से लगा लिया ।
नजमा समझ सकती थी वह आबू सलेम से बात करना चाहता है !
करने दे या नहीं?
नजमा फैसला नहीं कर पा रही थी ।
चकरघिन्नी की तरह घूम रहा था उसका दिमाग ।
चाहती तो जैक पर तत्काल हमला करके उसे अपने काबू में कर सकती थी ! रिवॉल्वर भी था उसके पास । कवर कर सकती थी । एक ही वार में बेहोश तक कर सकती थी क्योंकि उसकी तरफ़ से जैक पूरी तरह लापरवाह था । भला सोच भी कैसे सकता था यह कि 'संगीता’ उस पर हमला कर सकती है ।
परंतु ।
वह निश्चय नहीं कर पा रही थी कि वर्तमान हालात का ज्यादा से ज्यादा फायदा कैसे उठा सकती है?
जैक और आबू सलेम का सम्पर्क स्थापित हो गया । उनमे बातें होने लगी । नजमा ने वे सभी बाते सुनी ।
अंत में, मोबाइल का स्विच आफ करते वक्त जैक वेइंतेहा खुश था । बोला…"वही बात हुई । विजय-विकास के बोरे में सुनकर भाई जी की बांछें खिल गई । मुझे लगता हे…मेरे इस कारनामे से खुश होकर अव वे मुझे नम्बर टू बना देगे । मेडम, आपको लाने का यह काम मेरे लिए वहुत ही मुबारक साबित हुआ !
बस यूं कहा जा सकता है कि अचानक मेरे हाथ इतनी बड़ी सफलता लग गई !
नजमा ने अपने मतलब का सबाल किया ---" क्या वे आ रहें हैं ?"
"हां !"
" है कहां ?"
"मैनें पूछा नहीं ! क्या पता इतनी बड़ी इमारत में कहां होंगे !"
इसीलिये .......बस इसीलिये जैक को आबू सलेम से बात करने दी थी उसने ! उसके दिमाग में यही समस्या थी कि इतनी वड़ी इमारत में आबू सलेम को कहां ढूढंते फिरेगें ? बेहतर है वह खुद ही यहां आ जाये और ......... जैक वता रहा था --- वह आरहा है ! अपना अगला स्टेप निर्धारित करने हेतु यह जानना जरूरी था उसे जहां आने में कितनी देर लगेगी ! वही पूछा उसने ----" मेरा मतलब था ---- वे कितनी देर में यहां पहुंच जाएगें !"
"एक से दस मिनट के बीच !" मारे खुशी क जैके झूम रहा था ---" वे इमारत में कहीं भी हो ! वहां से दस मिनट से ज्यादा नहीं लगेंगें !"
जैक अभी भी उसकी तरफ से पुरी तरह से लापरवाह था !
चाहती तो इस वक्त उसे अपने काबू में कर सकती थी !
मगर नहीं !
दिमाग ने कहा ---" ये ठीक नहीं होगा !"
आबू सलेम जल्दी आगया तो सारे पासे एक ही झटके में उलट जाएंगें !!
वही हुआ !