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निर्मला अपनी कामुकता भरी हरकत की वजह से एकदम रंडी पन के एहसास से भरी जा रही थी क्योंकि इस समय वह अपने बेटे के लंड को किसी स्टिक की तरह पकड़ कर सीढ़ियां चल रही थी और शुभम को भी अपनी मां की इस हरकत पर पूरी तरह से उत्तेजना की आगोश में शमाता हुआ महसूस कर रहा था शीतल बार-बार पीछे की तरफ नजरें करके सीढ़ियां चढ़ते हुए मां बेटों की हरकत को देख रही थी और मन ही मन खुश भी हो रही थी छोटे-छोटे ड्रेस में शीतल और निर्मला सीढ़ियां चढ़ते हुए बेहद खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी शुभम तो अपनी प्यासी नजरों से दोनों की मदमस्त बड़ी बड़ी गांड के दर्शन करके धन्य हो रहा था,,,।
इस समय तीनों को देखकर ऐसा ही लग रहा था कि जैसे किसी पोर्न मूवी की शूटिंग चल रही हो बेहद अद्भुत और मादकता से भरा हुआ नजारा था,,,। सामान्य जीवन में एक औरत और आदमी के लिए शायद ही यह दृश्य देखने को मिले, लगभग इस तरह का दृश्य सामान्य जीवन में एकदम दुर्लभ ही था,, एक जवान लड़के के हाथों में दो दो गदराई जवानी अंगड़ाई ले रही हो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है शुभम की किस्मत वाकई में बड़ी तेज थी क्योंकि जब से जवान होना शुरू हुआ था तब से लेकर अब तक वह ना जाने कितनी रसीली बुर का स्वाद ले चुका था और तो और जवान गदराई औरत अपने आप ही उसकी झोली में आकर गिर जाती थी,,,,
निर्मला अपने बेटे के लंड को पकड़कर सीढ़ियां चढ़ते हुए उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली,,,।
आज देखना है कि हम दोनों की गरम जवानी का रस तू अपने मोटे लंड से नीचोड़ता है या हम दोनों की रसीली बुर तेरे लंड के छक्के छुड़ा देगी,,,
मुझ को चैलेंज मत करना मम्मी मुझे अपने मोटे लंड पर पूरा विश्वास है एक बार जब तुम दोनों की बुर में घुसेगा ना तो तुम दोनों की बुर का भोसड़ा बना देगा,,,,
यह तो वक्त ही बताएगा मेरे राजा (शीतल शुभम की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली)
मुझे भी उस वक्त का बेसब्री से इंतजार है (ऐसा कहते हुए शुभम अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर जोर से चपत लगाते हुए) तुम दोनों रंडियों की बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरी हालत खराब हो रही है मुझसे रहा नहीं जा रहा है जल्दी चलो बेडरूम में,,,,।
मादरचोद इतनी जल्दी भी क्या है अभी तो पूरी रात पड़ी है (निर्मला भी अपने बेटे को गंदी गाली देते हुए बोली।)
रात तो पूरी पड़ी है भोंसड़ी की लेकिन तेरे भोसड़े ने मेरे लंड की हालत खराब कर दी है इसलिए कह रहा हूं चल जल्दी से बेडरूम में मुझे अपने लंड को तेरी बुर में डालकर चोदना है,,,,।
निर्मला तेरा बेटा तो एकदम से उतावला हो गया भोसड़ी का पता नहीं पूरी रात टिक पाएगा कि नहीं,,,,
साली रंडी तुम दोनों को एक साथ चोदुगा ना फिर भी रात कम पड़ जाएगी तुम दोनों ही थक कर सो जाओगे लेकिन मेरा लंड वैसा का वैसा टन टन आकर खड़ा रहेगा,,,,
देखना कहीं ऐसा ना हो जाए कि जो गरजता है बरसता नहीं नहीं तो तू ही थक कर बिस्तर पर पड़ा रहेगा और हम दोनों तेरे लंड को खड़ा करने में पूरी रात गवा देंगे,,,।
तेरी बुर में कुछ ज्यादा ही आग लगी है साली तेरी बुर को सबसे पहले ठंडा करूंगा,,,।
( तीनों के ऊपर मत मस्त जवानी और बियर का सुरूर छाया हुआ था जिसकी वजह से तीनों एक दूसरे को गंदी गंदी गालियां देते हुए बातें कर रहे थे और इस तरह की बातें करने में उन्हें बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह तीनों इस तरह की बातें करके काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहे थे देखते ही देखते कमरा दिया गया शीतल कमरा खोल कर उन दोनों का स्वागत की निर्मला अभी भी अपने बेटे का लंड को पकड़ कर लगभग खींचते हुए कमरे में ले गई,,,।
धीरे से मादरचोद कहीं टूट गया ना तो दोनों अपनी बुर मसलते रह जाना,,,,
तेरी टूटे हुए लंड से भी चुदने में मजा आएगा,,,,( आंख मारते हुए निर्मला अपने बेटे से बोली तो शुभम अपनी मां का हाथ पकड़कर अपनी तरफ एकदम से खींचकर उसे अपनी बाहों में ले लिया और बोला,,,।)
साली मादरचोद तेरी जवानी कुछ ज्यादा ही शोर मचा रही है (और इतना कहते हुए शुभम तुरंत अपने होंठ को अपनी मां के होंठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया.... निर्मला भी अपनी बेटी के लंड को पकड़े पकड़े काफी गरमा गई थी वह भी कसके अपनी बाहों में अपने बेटे को भरते हुए उसका साथ देने लगी शुभम का लंड उसकी जांघों के बीच रगड़ खा रहा था जिससे निर्मला को अद्भुत सुख का अनुभव हो रहा था,,,। शीतल भी कहां पीछे रहने वाली थी वह अपने हाथों से ही अपने छोटे से ड्रेस को निकाल फेंकी देश के अंदर उसने ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए उसकी नंगी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह इधर-उधर हिलने डुलने लगी,, पर वह तुरंत शुभम के पीछे उसकी पीठ से चिपक गई शुभम को शीतल की बड़ी-बड़ी चूचियां का एहसास उसका स्पर्श अपनी पीठ पर होते ही वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबने लगा शीतल जानबूझकर अपनी चूचियों को उसकी पीठ पर रगड़ रही थी हालांकि यह एहसास शुभम को थोड़ा कम लग रहा था इसलिए वह अपने हाथ से अपनी शर्ट के बटन खोलने लगा और देखते ही देखते वह भी पूरी तरह से नंगा हो गया उसकी नंगी पीठ पर अपनी नंगी चूचियों को रगड़ कर शीतल बेहद उत्तेजित हुए जा रही थी,,,, निर्मला अपने बेटे के होठों का रस पीते हुए विकास नीचे की तरफ ले जाकर उसके लंड को पकड़ लिया और अपनी टांगों के बीच अपनी बुर वाली जगह पर उसके लंड के सुपाड़े को रगड़ना शुरू कर दी,,,,
आहहहहह,,, सुभम,,,,, ऊफफफ,,,,,,
अंदर लेने का मन कर रहा है ना मम्मी,,,
हारे बहुत मन कर रहा है कि तेरा लंड मेरी बुर की गहराई में अंदर तक जाकर छू जाए,,,,,,
ऐसा ही होगा मम्मी,,,,( ऐसा कहने के साथ ही शुभम अपनी मां के छोटे से ड्रेस पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा और उसकी मां अपने बेटे का साथ देते हुए अपने दोनों हाथ ऊपर की तरफ उठा दी शुभम ने तुरंत अपनी मां के छोटे से ड्रेस को निकाल कर नीचे फर्श पर फेंक दिया,,, निर्मला ब्रा पेंटी दोनों पहनी हुई थी,,, लेकिन इतनी जल्दी सुबह मैं अपनी मां के बदन पर से उसकी आखरी वस्त्र को उतारना नहीं चाहता था इसलिए वह अपनी मां को एक बार फिर से अपनी बाहों में लेकर उसे चूमने लगा,,,, शुभम की कामुक हरकतों की वजह से निर्मला की सिसकारी छूट रही थी और शीतल अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को अपने दोनों हाथ में लेकर उसे शुभम की नंगी पीठ पर रगड़ रही थी शीतल संपूर्ण रूप से एकदम नंगी थी,,, छोटे से ड्रेस के अंदर उसने पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि बेडरूम में चल कर उसे उतारना ही है इसलिए पहले से ही वह पैंटी को उतार फेंकी थी,,,
बेडरूम का माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था,,, बेडरूम के अंदर की खिड़कियों के पर्दे लगे हुए नहीं थे लेकिन खिड़की के शीशे बंद थे,,,, लेकिन ऊंचाई पर होने की वजह से किसी से देखे जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था इसलिए तीनों निश्चिंत थे,,,, बेडरूम के बीचो बीच किंग साइज का बेड लगा हुआ था जिस पर तीनों आराम से सो सकते थे और जिस दिन आए थे वह तीनों इसी बेड पर सोए भी थे,,,
ओहह,,, शुभम मेरे राजा मुझसे रहा नहीं जा रहा है मुझसे प्यार करें मुझे अपनी बाहों में ले ले मेरे रस निचोड़ दे औहहह शुभम,,,, मेरे राजा,,,,।
ऐसा ही होगा मेरी रानी तो बिल्कुल भी चिंता मत करो आज की रात में तुझे ऐसा सुख दूंगा तु जिंदगी भर याद रखेगी,,,
( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी मां के कंधों को पकड़कर इतनी जोर से दूसरी तरफ घुमाया की पलभर में ही निर्मला की पीठ शुभम की तरफ हो गई लेकिन निर्मला गिरते-गिरते बची थी तब तक शुभम उसे अपनी बाहों में लेकर अपने बदन से सदा लिया था,,,, पर ऐसा करने की वजह से निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड शुभम के लंड से एकदम से टकरा गई थी,,,, और सुबह में उत्तेजित होता हुआ तुरंत अपनी दोनों हथेलियों को नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बड़ी-बड़ी जनों को पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया जिससे उसकी बड़ी बड़ी गांड एकदम से सट गई और शुभम का लंड उसकी गांड की बीच की दरार से छटक ते हुए सीधा नीचे की तरफ आ गया जहां से उसका सुपाड़ा निर्मला की बुर से स्पर्श होने लगी,,,,
ओहहहह, मां,,,,,,,( शुभम के लंड का सुपाड़ा निर्मला की बुर से स्पर्श होते ही निर्मला के मुख से आह निकल गई,,,। शुभम पागलों की तरह ब्रा के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया,,, मीठे-मीठे दर्द के कारण निर्मला का पूरा बदन कसमसा रहा था और वह हल्की-हल्की सिसकारियां ले रही थी,,,, दोनों मां बेटों की कामुक हरकतों को देखकर शीतल भी पूरी तरह से मस्ती में आ गई थी,,, और वह शुभम के पीछे ही धीरे-धीरे उसके पीठ को चूमते हुए नीचे की तरफ बैठने लगी शीतल की आंखों के सामने शुभम की गांड थी और से देखते हैं शीतल अपने होठों को उसकी गांड पर रखकर चूमना शुरु कर दी यह शुभम के लिए पहला मौका था जब कोई औरत उसके नितंबों को अपने होठों से चूम रही थी,,, जिसकी वजह से शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और अपनी पूरी उत्तेजना अपनी मां की बड़ी-बड़ी सूचियों पर उतारने लगा,,,, शीतल अपने होठों से अपना कमाल दिखा रही थी और शुभम अपनी मां की चूचियों को दबा दबा कर उस का रस निकालने में लगा था लगातार दर्द के मारे निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी निकल रही थी और शुभम उसकी नंगी पीठ को चूमते हुए अपने दांतो से उसकी ब्रा की पट्टी को पकड़ कर खींच दिया,,,, देखते ही देखते निर्मला के ब्रा का हुक खुल गया और उसकी खरबूजे जैसी भरपूर चूचियां बुरा की कैद से आजाद हो गई ब्रा जैसे ही उनकी चुचियों पर से ढीली हुई शुभम एक पल भी गंवाए बिना अपनी मां की ब्रा को उसकी गोरी गोरी बाहों में से निकाल फेंका और उसकी नंगी चूचियों को दशहरी आम की तरह अपने हाथों में पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और लगातार अपने लंड की ठोकर उसके नितंबों के बीचो-बीच मार रहा था,,,
शीतल पागलों की तरह अपने दोनों हाथों में शुभम की गांड को पकड़कर दबाने के साथ-साथ उसके ऊपर अपने होठों का चुंबन छोड़ रही थी,,,, शीतल मदहोश होते हुए उसके नितंबों को हथेली में दबोच ते हुए अपना हाथ उसकी दोनों टांगों के बीच से आगे की तरफ ले गई तो तुरंत उसके हाथ में शुभम का टनटनाता हुआ लंड आ गया,,, फिर क्या था शीतल को तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई,,,, शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी वह किसी पॉर्न मूवी का सीन दोहराते हुए शुभम को इशारों में ही अपनी दोनों टांगों को फैलाने के लिए खुली और शुभम भी अपने दोनों टांगों को फैला लिया और देखते ही देखते शीतल उसकी दोनों टांगों के बीच से निकलते हुए बैठे-बैठे ही शुभम के लंड से खेलते हुए उसे अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,,,
आहहहहहहह,,,, गजब अद्भुत अतुल्य बेहद मादकता से भरा नजारा कमरे के बीचो बीच दर्शाया जा रहा था अगर कोई इस नजारे को देख ले तो उसे यही लगे कि पोर्न मूवी की शूटिंग चल रही है,,,,। शीतल और निर्मला दोनों किसी से कम नहीं थी दोनों अपने बेटे पर पूरी तरह से छाने की कोशिश कर रही थी,,, शीतल के सर के ऊपर ही निर्मला की बड़ी बड़ी गांड थी और शीतल अपनी लालच को रोक नहीं पाई और अपना दोनों हाथ ऊपर की तरफ करके दोनों हाथों से निर्मला की बड़ी-बड़ी गांव को पकड़ ली जो कि लाल रंग की पैंटी में लिपटी हुई थी,,,, शीतल का इस तरह से अपनी बड़ी बड़ी गांड का दबाना निर्मला को बेहद आनंदित कर जा रहा था,,,। निर्मला दोनों तरफ से मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी,,,। शीतल रह-रहकर शुभम के पूरे समूचे लंड को अपने गले तक उतार कर कुछ सेकंड तक उसे अपने मुंह में लेकर वापस ऊगल दे रही थी,,,,
शुभम भी आनंद के सागर में गोते लगा रहा था उसके दोनों हाथों में उसकी मां की दशहरी आम थी जिसे दबा दबा कर आनंद की परिभाषा को इशारों में ही प्रकाशित कर रहा था और नीचे से अपनी कमर को हिलाता हुआ शीतल के मुंह को चोद कर संभोग सुख की तृप्ति का एहसास शीतल को दिला रहा था,,,, लगभग लगभग 3 नंगी हो चुके थे केवल शीतल के बदन पर ही मात्र छोटी सी पेंटी लिपटी हुई थी,,, तीनों को इस समय शिमला की कातिल ठंडी का अहसास तक नहीं हो रहा था वह तीनों वातावरण के विरुद्ध अपनी ही मस्ती में खोए हुए थे वातावरण की कातिल ठंडी निर्मला और शीतल की गर्म जवानी के आगे पिघलती हुई नजर आ रही थी,,,,
लगातार निर्मला के मुख्य कर्म से इस कार्यों की आवाज फूट रही थी जो कि पूरे कमरे को मादकता का एहसास दिला रही थी साथ ही शीतल का इस तरह से पोर्न एक्ट्रेस की तरह लंड चूसना नहले पर दहला साबित हो रहा था,,,, उसके दोनों हाथों में निर्मला की भारी-भरकम नितंबों का भार था जिसे वह अपनी हथेली में संभाले हुए दबा रही थी,,,
कैसा लग रहा है मम्मी,,,
बहुत मजा आ रहा है बेटा ऐसा लग रहा है स्वर्ग का सुख मिल रहा है सच शीतल नहीं आना कर हम दोनों को स्वर्ग का अनुभव करा दी बहुत मजा आ रहा है ऐसे ही दबाते रे,,,आहहहहहहह,,,आहहहहरहहह,,,
और तुझे कैसा लग रहा है शीतल रानी,,,,( ऐसा कहते हुए शुभम अपनी कमर आगे पीछे करके शीतल के मुंह को चोद रहा था शीतल अगर बोलना भी चाहे तो भी नहीं बोल सकती थी लेकिन यह बात शुभम भी अच्छी तरह से जानता था कि भले वह बोले या ना बोले उसे भी जन्नत का मजा मिल रहा था,,,।
मजा तीनों को आ रहा था शिमला में आकर शीतल और निर्मला के अंदर का रंडी पन बाहर आ रहा था, तभी तो शुभम की दोनों टांगों के बीच में आकर शीतल शुभम के मोटे तगड़े लंड को लॉलीपॉप की तरह अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी और साथ ही निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड को अपनी हथेली से दबा दबा कर उसे लाल टमाटर की तरह कर दी थी,,,, शुभम पागलों की तरह अपनी मां के दशहरी आम को दबा रहा था काफी देर तक दबाने की वजह से निर्मला की गोरी गोरी चुचीयां एकदम लाल टमाटर की तरह हो गई थी,,,, और उसके मुख से लगातार गर्म सिसकारी फूट रही थी,,,, शीतल के तन बदन में होते हैं ना इतना ज्यादा जोर मार रहा था कि उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसकी बुर में चीटियां रेंग रही थी वह एक हाथ से निर्मला की बड़ी बड़ी गांड को दबा रही थी और दूसरे हाथ से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को मसल रही थी और साथ ही अपने मुंह में शुभम के मुंसल को लेकर उस का आनंद उठा रही थी,,,, शीतल से रहा नहीं गया तो वह दोनों हाथों का सहारा लेकर निर्मला के बदन से उसका आखिरी वस्त्र उसकी चड्डी भी उतारने लगी जिसमें निर्मला पूरा सहयोग दे रही थी देखते ही देखते शीतल नहीं मिला की चड्डी उतार कर उसे भी पूरी तरह से नंगी कर दी,,,,
निर्मला की गांड पूरी तरह से नंगी होने के साथ ही,,, शीतल निर्मला की दोनों जांघों को पकड़ कर उसे फैलाने का इशारा की निर्मला भी उसका इशारा समझते हुए हल्के से अपनी दोनों टांगों को फैला दी जिससे टांगों के बीच की वह पतली दरार शीतल को एकदम साफ नजर आने लगी,,,, शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी जिंदगी में उसने जो अब तक नहीं की थी उसे करने का इरादा वह अपने मन में बना ली थी इसलिए शुभम के लंड को मुंह में डालकर चूसते हुए ही शीतल अपना एक हाथ निर्मला की दोनों टांगों के बीच ले जाकर हल्के से उसकी बीच की दरार को स्पर्श करने लगी शीतल की उंगली को अपनी बुर के पर महसूस करते ही शीतल पूरी तरह से उत्तेजित हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था किसी पर क्या करने वाली है और यही कश्मकश में शीतल अपनी बीच वाली उंगली को निर्मला की बुर में प्रवेश करा दी निर्मला की बुर पहले से ही काफी गीली हो चुकी थी जिसकी वजह से शीतल को अपनी उंगली डालने में जरा भी दिक्कत पेश नहीं आई लगभग लगभग शीतल ने अपनी आधी उंगली सीतल की बुर में डाल दी थी,,,,, और आधी उंगली बुर के अंदर जाते हैं निर्मला के मुंह से आह निकल गई और मुंह से आह निकलने के साथ ही निर्मला खुद अपने दोनों हाथों को शुभम के हाथों पर रखकर जोर से अपनी चूची को दबा दी,,,, यह निर्मला की तरफ से अपने तन बदन में हो रही हलचल को दबाने की कोशिश थी लेकिन जवानी की आग बुझने की जगह और ज्यादा भड़क जाती है और यही शीतल और निर्मला दोनों के साथ हो रहा था शीतल अपनी आधी ओवली निर्मला की बुर में डालकर भी संतुष्ट नहीं हुई तो अपनी दूसरी उंगली को उसकी बुर में डाल दी,,,,
आहहहहहहह,,, रे रंडी क्या कर रही है भोसड़ा चोदी,,,,आहहहहह,,, उंगली से ही मेरी बुर चोदने का इरादा है क्या तेरा,,,,?
साली कुत्तिया मेरा बस चले तो मैं खुद तेरी बुर में घुस जाऊं कितनी लाजवाब बुर है तेरी, तभी तो तेरा बेटा तेरे पीछे लट्टू बन कर घूमता है,,,, ना तू अपनी टांग खोल कर अपने बेटे को अपने बुर दिखाई होती और नआ यह दिन देखने को होता,,,,( शीतल शुभम के लड़के को अपने मुंह में से निकाल कर अपने दोनों उंगली को निर्मला की बुर में पेलते हुए बोली,,,, और मुंह में से लंड बाहर आते ही शुभम अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसके सुपारी को अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड की गहरी गहराई में ऊपर से नीचे तक रगड़ना शुरु कर दिया,,,,।
आहहहहहहह,,,,आहहहहह,,,,, शुभम मुझसे रहा नहीं जा रहा है अपने लंड को मेरी बुर में डाल दे मेरी बुर में आग लगी हुई है,,,,( निर्मला मदहोश होते हुए गरम सिसकारी लेकर अपने बेटे से बोली,,,, निर्मला की बातें सुनकर इसी तरह से रहा नहीं गया और वह शुभम के लड्डू को पकड़कर निर्मला की बुर पर उसके गर्म सुपाड़े को रखकर,, शुभम को बोली,,,।)
डाल दे शुभम अपनी मां की बुर में पूरा लंड,,,,
( निर्मला तो अपनी बेटे के लंड के सुपाड़े को अपनी बुर पर महसूस करते ही पूरी तरह से सुलग उठी,,, वह जल्द से जल्द अपने बेटे के लंड को अपनी बुर के अंदर गहराई में महसूस करना चाहती थी लेकिन शीतल की बात सुनकर और उसकी हरकत को देखते हुए शुभम बोला,,,।)
इतनी जल्दी नहीं डालूंगा मेरी रानी तेरी बुर में अभी तो तेरे बदन से खेलना है,,, चल आजा बिस्तर पर,,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी दोनों भुजाओं में अपनी मां की मांसल कमर को दबोच ते हुए उसे अपनी गोद में उठा लिया और नरम नरम बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया,,,
आहहहहहहह,,,,, धीरे से शुभम,,,,,( निर्मला अपने आप को संभालते हुए बोली और शुभम की ताकत को देखकर शीतल मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, निर्मला पीठ के बल लेटी हुई थी उसकी दोनों चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह इधर-उधर लहरा रहे थे जिसे देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था,,,, शुभम को साफ नजर आ रहा था कि इस तन मर्दन के कारण उसकी मां की दोनों चूचियां टमाटर की तरह लाल हो गई थी,,,, शुभम मन में यह सोच कर मुस्कुरा रहा था कि वह काफी देर से अपनी मां की चूचियों पर मेहनत कर रहा था जिसका फल उसे मिल रहा था,,,,। तीनों संपूर्ण रुप से एकदम नंगे थे,,,, शीतल शुभम के करीब खड़ी थी,,, पर वह गहरी गहरी सांसे लेते हुए निर्मला के नंगे बदन को देख रही थी,,,। शीतल को गहरी सांसे लेते हुए देखकर शुभम अपनी मां की आंखों के सामने ही शीतल का हांथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा,,, और उसे अपनी बांहों में भरते हुए उसकी खरबूजे जैसी चुचियों को हाथ में लेकर दबाते हुए अपने होंठ को उसके होंठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, इस दृश्य को देखकर निर्मला के मन में किसी भी प्रकार का एतराज नहीं था क्योंकि शिमला में आकर उसके सोचने का ढंग भी बदल चुका था वह भी पूरी तरह से मजे लेने के मूड में थी और इस बात से खुश थी कि उसके बेटे की वजह से उसकी सहेली को चुदाई का भरपूर सुख मिल रहा है जिसके लिए वह बरसों से तड़प रही थी,,,। तभी तो अपने बेटे को इस तरह से शीतल के खूबसूरत बदन से खेलते हुए देख कर उसे खुशी मिल रही थी और उत्तेजना के मारे शीतल अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर शुभम के लंड को पकड़ कर हिलाने लगी और यह देखकर निर्मला अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी हथेली से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को मसलने लगी,,,, कुछ देर तक सीता के लाल-लाल होठों का रसपान करने के बाद शुभम अपना हाथ शीतल की दोनों टांगों के बीच ले जाकर उसकी बुर को स्पर्श करते हुए बोला,,,,,
अब देखना मैं अपनी मां को कैसे तृप्त करता हूं कैसे इसकी जवानी की आग बुझाता हूं,,,,।
( इतना कहने के साथ ही शुभम बिस्तर पर अपनी मां की तरफ आगे बढ़ा और देखते ही देखते उसकी दोनों टांगों को फैलाते हुए बोला,,,।)
अपनी टांगों को तो खोल दो मेरी रानी फिर देख यह तेरा राजा बेटा क्या करता है,,,,,।
इस समय तीनों को देखकर ऐसा ही लग रहा था कि जैसे किसी पोर्न मूवी की शूटिंग चल रही हो बेहद अद्भुत और मादकता से भरा हुआ नजारा था,,,। सामान्य जीवन में एक औरत और आदमी के लिए शायद ही यह दृश्य देखने को मिले, लगभग इस तरह का दृश्य सामान्य जीवन में एकदम दुर्लभ ही था,, एक जवान लड़के के हाथों में दो दो गदराई जवानी अंगड़ाई ले रही हो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है शुभम की किस्मत वाकई में बड़ी तेज थी क्योंकि जब से जवान होना शुरू हुआ था तब से लेकर अब तक वह ना जाने कितनी रसीली बुर का स्वाद ले चुका था और तो और जवान गदराई औरत अपने आप ही उसकी झोली में आकर गिर जाती थी,,,,
निर्मला अपने बेटे के लंड को पकड़कर सीढ़ियां चढ़ते हुए उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली,,,।
आज देखना है कि हम दोनों की गरम जवानी का रस तू अपने मोटे लंड से नीचोड़ता है या हम दोनों की रसीली बुर तेरे लंड के छक्के छुड़ा देगी,,,
मुझ को चैलेंज मत करना मम्मी मुझे अपने मोटे लंड पर पूरा विश्वास है एक बार जब तुम दोनों की बुर में घुसेगा ना तो तुम दोनों की बुर का भोसड़ा बना देगा,,,,
यह तो वक्त ही बताएगा मेरे राजा (शीतल शुभम की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली)
मुझे भी उस वक्त का बेसब्री से इंतजार है (ऐसा कहते हुए शुभम अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर जोर से चपत लगाते हुए) तुम दोनों रंडियों की बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरी हालत खराब हो रही है मुझसे रहा नहीं जा रहा है जल्दी चलो बेडरूम में,,,,।
मादरचोद इतनी जल्दी भी क्या है अभी तो पूरी रात पड़ी है (निर्मला भी अपने बेटे को गंदी गाली देते हुए बोली।)
रात तो पूरी पड़ी है भोंसड़ी की लेकिन तेरे भोसड़े ने मेरे लंड की हालत खराब कर दी है इसलिए कह रहा हूं चल जल्दी से बेडरूम में मुझे अपने लंड को तेरी बुर में डालकर चोदना है,,,,।
निर्मला तेरा बेटा तो एकदम से उतावला हो गया भोसड़ी का पता नहीं पूरी रात टिक पाएगा कि नहीं,,,,
साली रंडी तुम दोनों को एक साथ चोदुगा ना फिर भी रात कम पड़ जाएगी तुम दोनों ही थक कर सो जाओगे लेकिन मेरा लंड वैसा का वैसा टन टन आकर खड़ा रहेगा,,,,
देखना कहीं ऐसा ना हो जाए कि जो गरजता है बरसता नहीं नहीं तो तू ही थक कर बिस्तर पर पड़ा रहेगा और हम दोनों तेरे लंड को खड़ा करने में पूरी रात गवा देंगे,,,।
तेरी बुर में कुछ ज्यादा ही आग लगी है साली तेरी बुर को सबसे पहले ठंडा करूंगा,,,।
( तीनों के ऊपर मत मस्त जवानी और बियर का सुरूर छाया हुआ था जिसकी वजह से तीनों एक दूसरे को गंदी गंदी गालियां देते हुए बातें कर रहे थे और इस तरह की बातें करने में उन्हें बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह तीनों इस तरह की बातें करके काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहे थे देखते ही देखते कमरा दिया गया शीतल कमरा खोल कर उन दोनों का स्वागत की निर्मला अभी भी अपने बेटे का लंड को पकड़ कर लगभग खींचते हुए कमरे में ले गई,,,।
धीरे से मादरचोद कहीं टूट गया ना तो दोनों अपनी बुर मसलते रह जाना,,,,
तेरी टूटे हुए लंड से भी चुदने में मजा आएगा,,,,( आंख मारते हुए निर्मला अपने बेटे से बोली तो शुभम अपनी मां का हाथ पकड़कर अपनी तरफ एकदम से खींचकर उसे अपनी बाहों में ले लिया और बोला,,,।)
साली मादरचोद तेरी जवानी कुछ ज्यादा ही शोर मचा रही है (और इतना कहते हुए शुभम तुरंत अपने होंठ को अपनी मां के होंठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया.... निर्मला भी अपनी बेटी के लंड को पकड़े पकड़े काफी गरमा गई थी वह भी कसके अपनी बाहों में अपने बेटे को भरते हुए उसका साथ देने लगी शुभम का लंड उसकी जांघों के बीच रगड़ खा रहा था जिससे निर्मला को अद्भुत सुख का अनुभव हो रहा था,,,। शीतल भी कहां पीछे रहने वाली थी वह अपने हाथों से ही अपने छोटे से ड्रेस को निकाल फेंकी देश के अंदर उसने ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए उसकी नंगी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह इधर-उधर हिलने डुलने लगी,, पर वह तुरंत शुभम के पीछे उसकी पीठ से चिपक गई शुभम को शीतल की बड़ी-बड़ी चूचियां का एहसास उसका स्पर्श अपनी पीठ पर होते ही वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबने लगा शीतल जानबूझकर अपनी चूचियों को उसकी पीठ पर रगड़ रही थी हालांकि यह एहसास शुभम को थोड़ा कम लग रहा था इसलिए वह अपने हाथ से अपनी शर्ट के बटन खोलने लगा और देखते ही देखते वह भी पूरी तरह से नंगा हो गया उसकी नंगी पीठ पर अपनी नंगी चूचियों को रगड़ कर शीतल बेहद उत्तेजित हुए जा रही थी,,,, निर्मला अपने बेटे के होठों का रस पीते हुए विकास नीचे की तरफ ले जाकर उसके लंड को पकड़ लिया और अपनी टांगों के बीच अपनी बुर वाली जगह पर उसके लंड के सुपाड़े को रगड़ना शुरू कर दी,,,,
आहहहहह,,, सुभम,,,,, ऊफफफ,,,,,,
अंदर लेने का मन कर रहा है ना मम्मी,,,
हारे बहुत मन कर रहा है कि तेरा लंड मेरी बुर की गहराई में अंदर तक जाकर छू जाए,,,,,,
ऐसा ही होगा मम्मी,,,,( ऐसा कहने के साथ ही शुभम अपनी मां के छोटे से ड्रेस पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा और उसकी मां अपने बेटे का साथ देते हुए अपने दोनों हाथ ऊपर की तरफ उठा दी शुभम ने तुरंत अपनी मां के छोटे से ड्रेस को निकाल कर नीचे फर्श पर फेंक दिया,,, निर्मला ब्रा पेंटी दोनों पहनी हुई थी,,, लेकिन इतनी जल्दी सुबह मैं अपनी मां के बदन पर से उसकी आखरी वस्त्र को उतारना नहीं चाहता था इसलिए वह अपनी मां को एक बार फिर से अपनी बाहों में लेकर उसे चूमने लगा,,,, शुभम की कामुक हरकतों की वजह से निर्मला की सिसकारी छूट रही थी और शीतल अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को अपने दोनों हाथ में लेकर उसे शुभम की नंगी पीठ पर रगड़ रही थी शीतल संपूर्ण रूप से एकदम नंगी थी,,, छोटे से ड्रेस के अंदर उसने पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि बेडरूम में चल कर उसे उतारना ही है इसलिए पहले से ही वह पैंटी को उतार फेंकी थी,,,
बेडरूम का माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था,,, बेडरूम के अंदर की खिड़कियों के पर्दे लगे हुए नहीं थे लेकिन खिड़की के शीशे बंद थे,,,, लेकिन ऊंचाई पर होने की वजह से किसी से देखे जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था इसलिए तीनों निश्चिंत थे,,,, बेडरूम के बीचो बीच किंग साइज का बेड लगा हुआ था जिस पर तीनों आराम से सो सकते थे और जिस दिन आए थे वह तीनों इसी बेड पर सोए भी थे,,,
ओहह,,, शुभम मेरे राजा मुझसे रहा नहीं जा रहा है मुझसे प्यार करें मुझे अपनी बाहों में ले ले मेरे रस निचोड़ दे औहहह शुभम,,,, मेरे राजा,,,,।
ऐसा ही होगा मेरी रानी तो बिल्कुल भी चिंता मत करो आज की रात में तुझे ऐसा सुख दूंगा तु जिंदगी भर याद रखेगी,,,
( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी मां के कंधों को पकड़कर इतनी जोर से दूसरी तरफ घुमाया की पलभर में ही निर्मला की पीठ शुभम की तरफ हो गई लेकिन निर्मला गिरते-गिरते बची थी तब तक शुभम उसे अपनी बाहों में लेकर अपने बदन से सदा लिया था,,,, पर ऐसा करने की वजह से निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड शुभम के लंड से एकदम से टकरा गई थी,,,, और सुबह में उत्तेजित होता हुआ तुरंत अपनी दोनों हथेलियों को नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बड़ी-बड़ी जनों को पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया जिससे उसकी बड़ी बड़ी गांड एकदम से सट गई और शुभम का लंड उसकी गांड की बीच की दरार से छटक ते हुए सीधा नीचे की तरफ आ गया जहां से उसका सुपाड़ा निर्मला की बुर से स्पर्श होने लगी,,,,
ओहहहह, मां,,,,,,,( शुभम के लंड का सुपाड़ा निर्मला की बुर से स्पर्श होते ही निर्मला के मुख से आह निकल गई,,,। शुभम पागलों की तरह ब्रा के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया,,, मीठे-मीठे दर्द के कारण निर्मला का पूरा बदन कसमसा रहा था और वह हल्की-हल्की सिसकारियां ले रही थी,,,, दोनों मां बेटों की कामुक हरकतों को देखकर शीतल भी पूरी तरह से मस्ती में आ गई थी,,, और वह शुभम के पीछे ही धीरे-धीरे उसके पीठ को चूमते हुए नीचे की तरफ बैठने लगी शीतल की आंखों के सामने शुभम की गांड थी और से देखते हैं शीतल अपने होठों को उसकी गांड पर रखकर चूमना शुरु कर दी यह शुभम के लिए पहला मौका था जब कोई औरत उसके नितंबों को अपने होठों से चूम रही थी,,, जिसकी वजह से शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और अपनी पूरी उत्तेजना अपनी मां की बड़ी-बड़ी सूचियों पर उतारने लगा,,,, शीतल अपने होठों से अपना कमाल दिखा रही थी और शुभम अपनी मां की चूचियों को दबा दबा कर उस का रस निकालने में लगा था लगातार दर्द के मारे निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी निकल रही थी और शुभम उसकी नंगी पीठ को चूमते हुए अपने दांतो से उसकी ब्रा की पट्टी को पकड़ कर खींच दिया,,,, देखते ही देखते निर्मला के ब्रा का हुक खुल गया और उसकी खरबूजे जैसी भरपूर चूचियां बुरा की कैद से आजाद हो गई ब्रा जैसे ही उनकी चुचियों पर से ढीली हुई शुभम एक पल भी गंवाए बिना अपनी मां की ब्रा को उसकी गोरी गोरी बाहों में से निकाल फेंका और उसकी नंगी चूचियों को दशहरी आम की तरह अपने हाथों में पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और लगातार अपने लंड की ठोकर उसके नितंबों के बीचो-बीच मार रहा था,,,
शीतल पागलों की तरह अपने दोनों हाथों में शुभम की गांड को पकड़कर दबाने के साथ-साथ उसके ऊपर अपने होठों का चुंबन छोड़ रही थी,,,, शीतल मदहोश होते हुए उसके नितंबों को हथेली में दबोच ते हुए अपना हाथ उसकी दोनों टांगों के बीच से आगे की तरफ ले गई तो तुरंत उसके हाथ में शुभम का टनटनाता हुआ लंड आ गया,,, फिर क्या था शीतल को तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई,,,, शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी वह किसी पॉर्न मूवी का सीन दोहराते हुए शुभम को इशारों में ही अपनी दोनों टांगों को फैलाने के लिए खुली और शुभम भी अपने दोनों टांगों को फैला लिया और देखते ही देखते शीतल उसकी दोनों टांगों के बीच से निकलते हुए बैठे-बैठे ही शुभम के लंड से खेलते हुए उसे अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,,,
आहहहहहहह,,,, गजब अद्भुत अतुल्य बेहद मादकता से भरा नजारा कमरे के बीचो बीच दर्शाया जा रहा था अगर कोई इस नजारे को देख ले तो उसे यही लगे कि पोर्न मूवी की शूटिंग चल रही है,,,,। शीतल और निर्मला दोनों किसी से कम नहीं थी दोनों अपने बेटे पर पूरी तरह से छाने की कोशिश कर रही थी,,, शीतल के सर के ऊपर ही निर्मला की बड़ी बड़ी गांड थी और शीतल अपनी लालच को रोक नहीं पाई और अपना दोनों हाथ ऊपर की तरफ करके दोनों हाथों से निर्मला की बड़ी-बड़ी गांव को पकड़ ली जो कि लाल रंग की पैंटी में लिपटी हुई थी,,,, शीतल का इस तरह से अपनी बड़ी बड़ी गांड का दबाना निर्मला को बेहद आनंदित कर जा रहा था,,,। निर्मला दोनों तरफ से मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी,,,। शीतल रह-रहकर शुभम के पूरे समूचे लंड को अपने गले तक उतार कर कुछ सेकंड तक उसे अपने मुंह में लेकर वापस ऊगल दे रही थी,,,,
शुभम भी आनंद के सागर में गोते लगा रहा था उसके दोनों हाथों में उसकी मां की दशहरी आम थी जिसे दबा दबा कर आनंद की परिभाषा को इशारों में ही प्रकाशित कर रहा था और नीचे से अपनी कमर को हिलाता हुआ शीतल के मुंह को चोद कर संभोग सुख की तृप्ति का एहसास शीतल को दिला रहा था,,,, लगभग लगभग 3 नंगी हो चुके थे केवल शीतल के बदन पर ही मात्र छोटी सी पेंटी लिपटी हुई थी,,, तीनों को इस समय शिमला की कातिल ठंडी का अहसास तक नहीं हो रहा था वह तीनों वातावरण के विरुद्ध अपनी ही मस्ती में खोए हुए थे वातावरण की कातिल ठंडी निर्मला और शीतल की गर्म जवानी के आगे पिघलती हुई नजर आ रही थी,,,,
लगातार निर्मला के मुख्य कर्म से इस कार्यों की आवाज फूट रही थी जो कि पूरे कमरे को मादकता का एहसास दिला रही थी साथ ही शीतल का इस तरह से पोर्न एक्ट्रेस की तरह लंड चूसना नहले पर दहला साबित हो रहा था,,,, उसके दोनों हाथों में निर्मला की भारी-भरकम नितंबों का भार था जिसे वह अपनी हथेली में संभाले हुए दबा रही थी,,,
कैसा लग रहा है मम्मी,,,
बहुत मजा आ रहा है बेटा ऐसा लग रहा है स्वर्ग का सुख मिल रहा है सच शीतल नहीं आना कर हम दोनों को स्वर्ग का अनुभव करा दी बहुत मजा आ रहा है ऐसे ही दबाते रे,,,आहहहहहहह,,,आहहहहरहहह,,,
और तुझे कैसा लग रहा है शीतल रानी,,,,( ऐसा कहते हुए शुभम अपनी कमर आगे पीछे करके शीतल के मुंह को चोद रहा था शीतल अगर बोलना भी चाहे तो भी नहीं बोल सकती थी लेकिन यह बात शुभम भी अच्छी तरह से जानता था कि भले वह बोले या ना बोले उसे भी जन्नत का मजा मिल रहा था,,,।
मजा तीनों को आ रहा था शिमला में आकर शीतल और निर्मला के अंदर का रंडी पन बाहर आ रहा था, तभी तो शुभम की दोनों टांगों के बीच में आकर शीतल शुभम के मोटे तगड़े लंड को लॉलीपॉप की तरह अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी और साथ ही निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड को अपनी हथेली से दबा दबा कर उसे लाल टमाटर की तरह कर दी थी,,,, शुभम पागलों की तरह अपनी मां के दशहरी आम को दबा रहा था काफी देर तक दबाने की वजह से निर्मला की गोरी गोरी चुचीयां एकदम लाल टमाटर की तरह हो गई थी,,,, और उसके मुख से लगातार गर्म सिसकारी फूट रही थी,,,, शीतल के तन बदन में होते हैं ना इतना ज्यादा जोर मार रहा था कि उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसकी बुर में चीटियां रेंग रही थी वह एक हाथ से निर्मला की बड़ी बड़ी गांड को दबा रही थी और दूसरे हाथ से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को मसल रही थी और साथ ही अपने मुंह में शुभम के मुंसल को लेकर उस का आनंद उठा रही थी,,,, शीतल से रहा नहीं गया तो वह दोनों हाथों का सहारा लेकर निर्मला के बदन से उसका आखिरी वस्त्र उसकी चड्डी भी उतारने लगी जिसमें निर्मला पूरा सहयोग दे रही थी देखते ही देखते शीतल नहीं मिला की चड्डी उतार कर उसे भी पूरी तरह से नंगी कर दी,,,,
निर्मला की गांड पूरी तरह से नंगी होने के साथ ही,,, शीतल निर्मला की दोनों जांघों को पकड़ कर उसे फैलाने का इशारा की निर्मला भी उसका इशारा समझते हुए हल्के से अपनी दोनों टांगों को फैला दी जिससे टांगों के बीच की वह पतली दरार शीतल को एकदम साफ नजर आने लगी,,,, शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी जिंदगी में उसने जो अब तक नहीं की थी उसे करने का इरादा वह अपने मन में बना ली थी इसलिए शुभम के लंड को मुंह में डालकर चूसते हुए ही शीतल अपना एक हाथ निर्मला की दोनों टांगों के बीच ले जाकर हल्के से उसकी बीच की दरार को स्पर्श करने लगी शीतल की उंगली को अपनी बुर के पर महसूस करते ही शीतल पूरी तरह से उत्तेजित हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था किसी पर क्या करने वाली है और यही कश्मकश में शीतल अपनी बीच वाली उंगली को निर्मला की बुर में प्रवेश करा दी निर्मला की बुर पहले से ही काफी गीली हो चुकी थी जिसकी वजह से शीतल को अपनी उंगली डालने में जरा भी दिक्कत पेश नहीं आई लगभग लगभग शीतल ने अपनी आधी उंगली सीतल की बुर में डाल दी थी,,,,, और आधी उंगली बुर के अंदर जाते हैं निर्मला के मुंह से आह निकल गई और मुंह से आह निकलने के साथ ही निर्मला खुद अपने दोनों हाथों को शुभम के हाथों पर रखकर जोर से अपनी चूची को दबा दी,,,, यह निर्मला की तरफ से अपने तन बदन में हो रही हलचल को दबाने की कोशिश थी लेकिन जवानी की आग बुझने की जगह और ज्यादा भड़क जाती है और यही शीतल और निर्मला दोनों के साथ हो रहा था शीतल अपनी आधी ओवली निर्मला की बुर में डालकर भी संतुष्ट नहीं हुई तो अपनी दूसरी उंगली को उसकी बुर में डाल दी,,,,
आहहहहहहह,,, रे रंडी क्या कर रही है भोसड़ा चोदी,,,,आहहहहह,,, उंगली से ही मेरी बुर चोदने का इरादा है क्या तेरा,,,,?
साली कुत्तिया मेरा बस चले तो मैं खुद तेरी बुर में घुस जाऊं कितनी लाजवाब बुर है तेरी, तभी तो तेरा बेटा तेरे पीछे लट्टू बन कर घूमता है,,,, ना तू अपनी टांग खोल कर अपने बेटे को अपने बुर दिखाई होती और नआ यह दिन देखने को होता,,,,( शीतल शुभम के लड़के को अपने मुंह में से निकाल कर अपने दोनों उंगली को निर्मला की बुर में पेलते हुए बोली,,,, और मुंह में से लंड बाहर आते ही शुभम अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसके सुपारी को अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड की गहरी गहराई में ऊपर से नीचे तक रगड़ना शुरु कर दिया,,,,।
आहहहहहहह,,,,आहहहहह,,,,, शुभम मुझसे रहा नहीं जा रहा है अपने लंड को मेरी बुर में डाल दे मेरी बुर में आग लगी हुई है,,,,( निर्मला मदहोश होते हुए गरम सिसकारी लेकर अपने बेटे से बोली,,,, निर्मला की बातें सुनकर इसी तरह से रहा नहीं गया और वह शुभम के लड्डू को पकड़कर निर्मला की बुर पर उसके गर्म सुपाड़े को रखकर,, शुभम को बोली,,,।)
डाल दे शुभम अपनी मां की बुर में पूरा लंड,,,,
( निर्मला तो अपनी बेटे के लंड के सुपाड़े को अपनी बुर पर महसूस करते ही पूरी तरह से सुलग उठी,,, वह जल्द से जल्द अपने बेटे के लंड को अपनी बुर के अंदर गहराई में महसूस करना चाहती थी लेकिन शीतल की बात सुनकर और उसकी हरकत को देखते हुए शुभम बोला,,,।)
इतनी जल्दी नहीं डालूंगा मेरी रानी तेरी बुर में अभी तो तेरे बदन से खेलना है,,, चल आजा बिस्तर पर,,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी दोनों भुजाओं में अपनी मां की मांसल कमर को दबोच ते हुए उसे अपनी गोद में उठा लिया और नरम नरम बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया,,,
आहहहहहहह,,,,, धीरे से शुभम,,,,,( निर्मला अपने आप को संभालते हुए बोली और शुभम की ताकत को देखकर शीतल मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, निर्मला पीठ के बल लेटी हुई थी उसकी दोनों चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह इधर-उधर लहरा रहे थे जिसे देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था,,,, शुभम को साफ नजर आ रहा था कि इस तन मर्दन के कारण उसकी मां की दोनों चूचियां टमाटर की तरह लाल हो गई थी,,,, शुभम मन में यह सोच कर मुस्कुरा रहा था कि वह काफी देर से अपनी मां की चूचियों पर मेहनत कर रहा था जिसका फल उसे मिल रहा था,,,,। तीनों संपूर्ण रुप से एकदम नंगे थे,,,, शीतल शुभम के करीब खड़ी थी,,, पर वह गहरी गहरी सांसे लेते हुए निर्मला के नंगे बदन को देख रही थी,,,। शीतल को गहरी सांसे लेते हुए देखकर शुभम अपनी मां की आंखों के सामने ही शीतल का हांथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा,,, और उसे अपनी बांहों में भरते हुए उसकी खरबूजे जैसी चुचियों को हाथ में लेकर दबाते हुए अपने होंठ को उसके होंठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, इस दृश्य को देखकर निर्मला के मन में किसी भी प्रकार का एतराज नहीं था क्योंकि शिमला में आकर उसके सोचने का ढंग भी बदल चुका था वह भी पूरी तरह से मजे लेने के मूड में थी और इस बात से खुश थी कि उसके बेटे की वजह से उसकी सहेली को चुदाई का भरपूर सुख मिल रहा है जिसके लिए वह बरसों से तड़प रही थी,,,। तभी तो अपने बेटे को इस तरह से शीतल के खूबसूरत बदन से खेलते हुए देख कर उसे खुशी मिल रही थी और उत्तेजना के मारे शीतल अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर शुभम के लंड को पकड़ कर हिलाने लगी और यह देखकर निर्मला अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी हथेली से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को मसलने लगी,,,, कुछ देर तक सीता के लाल-लाल होठों का रसपान करने के बाद शुभम अपना हाथ शीतल की दोनों टांगों के बीच ले जाकर उसकी बुर को स्पर्श करते हुए बोला,,,,,
अब देखना मैं अपनी मां को कैसे तृप्त करता हूं कैसे इसकी जवानी की आग बुझाता हूं,,,,।
( इतना कहने के साथ ही शुभम बिस्तर पर अपनी मां की तरफ आगे बढ़ा और देखते ही देखते उसकी दोनों टांगों को फैलाते हुए बोला,,,।)
अपनी टांगों को तो खोल दो मेरी रानी फिर देख यह तेरा राजा बेटा क्या करता है,,,,,।