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Guest
ससससहहहह ,,,,आहहहहह,,,,, भाभी और जोर जोर से दबाओ तुम्हारा इस तरह से लंड दबाना अच्छा लग रहा है,,,,
( इतना सुनते ही रुचि और जोर जोर से दबाना शुरू कर दी जिससे शुभम को मजा आने लगा और काफी उत्तेजना का एहसास होने लगा वह जितनी जोर से पजामे के ऊपर से उसके लंड को दबा रही थी शुभम इतनी जोर लगाते हुए उसकी चूची को दबा रहा था,,,,, लेकिन रूसी की हालत खराब होती जा रही थी क्योंकि उसे अपनी हथेली के अंदर शुभम का लंड को ज्यादा यह मोटा महसूस हो रहा था और जिसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए वह मचल रही थी इसलिए वह बोली,)
सुभम मुझसे रहा नहीं जा रहा है तो कुछ कर,,,,,,
( शुभम समझ गया कि रुचि अब उसका लंड अपनी बुर में लेने के लिए पूरी तरह से तैयार है लेकिन शुभम हाथ में आया मौका इतनी जल्दी हाथ में आया मौका खत्म नहीं करना चाहता था इसलिए वाह चूची पर से हाथ हटाते हुए बोला,,,)
मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है भाभी में भी तुम्हारी बुर देखने के लिए तड़प रहा हूं ,,,(और इतना कहने के साथ ही वह झोपड़ी के अंदर इधर-उधर देखने लगा तभी उसे घास का ढेर सारा गठ्ठर नजर आया और वह उसे लाकर वहीं पर बिछा दिया ताकि रुचि को उस पर लिटाने में कोई दिक्कत ना हो,,, शुभम को यह करते देखकर रुची इतना तो समझ गई थी कि वह क्या करने वाला है इसलिए बिना कुछ बोले वहीं खड़ी रही तो शुभम उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ लाया और उसे धीरे से उस घास के ढेर पर लिटा दिया,,, रुचि की सांसो की गति बहुत तेज चल रही थी उसका बदन कसमसा रहा था वह आराम से घास के ढेर पर लेट गई,,,, बाहर तूफानी बारिश को देखते हुए रुचि इतना तो समझ गई थी कि वाकई में ऐसी तूफानी बारिश में अब वहां कोई आने वाला नहीं था और वैसे भी धीरे-धीरे अंधेरा होना शुरू हो गया था लेकिन अभी भी सब कुछ नजर आ रहा था,,, धीरे-धीरे शुभम रुचि की साड़ी को ऊपर उठाने लगा जैसे जैसे साड़ी ऊपर की तरह ऊठ रही थी वैसे वैसे रुची का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह जानती थी अगले पल क्या होने वाला है और देखते-देखते सुभम रुची की साड़ी को उसकी कमर तक उठा दिया और कमर तक साड़ी के उठते ही उसकी लाल रंग की पैंटी नजर आने लगी और उसकी पानी में भीग चुकी है लाल रंग की पैंटी को देखकर शुभम का लंड एक बार फिर से रुची की मदमस्त कर देने वाली जवानी को सलामी देते हुए ऊपर-नीचे हुआ,,
दोनों की सांसो की गति बड़ी तेजी से चल रही थी,,, दोनों एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे दोनों की आंखों में खुमारी साफ नजर आ रही थी दोनों को इस बात का ज्ञान अच्छी तरह से था कि इसके आगे क्या होने वाला है और क्या करना चाहिए इसलिए शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर धीरे से रुची की लाल रंग की पैंटी को पकड़ लिया और उसे धीरे-धीरे नीचे खींचने लगा कि तभी रुचि उसका सहयोग देते हुए अपनी गोल गोल गांड को ऊपर की तरफ उठा ली जिससे शुभम को उसकी पैंटी उतारने में किसी भी प्रकार की दिक्कत ना आए और देखते ही देखते शुभम उसकी पैंटी को उतार कर उसी घास के ढेर में फेंक दिया शुभम की आंखों के सामने रूचि अब एकदम नंगी थी केवल उसके बदन पर उसकी साड़ी थी जो कि वह भी कमर तक उठी हुई थी,,,,
शुभम अपनी आंखों से रूचि की नंगी बुर को साफ-साफ देख पा रहा था उसे साफ साफ दिखाई दे रहा था कि रुचि की बुर एकदम चिकनी थी ऐसा लग रहा था कि मानो आज ही उसने क्रीम लगाकर उसे साफ की हो यह देख कर उसके मुंह में पानी आ गया और बिना कुछ बोले सीधा अपने प्यासे होंठों को उसकी बुर पर रखकर उसे चाटना शुरु कर दिया,,
रुचि शुभम के द्वारा इस तरह के हमले के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी इसलिए शुभम की इस हरकत की वजह से उसके पूरे बदन में जैसे कि करंट लग गया हो उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,, वह पागलों की तरह एकाएक पूरी तरह से काम उत्तेजित होकर अपनी कमर को ऊपर उठा दी और शुभम भी फुर्ती दिखाते हुए उसके कमर को अपने दोनों हाथों से थामकर अपनी जीभ कोउसके गुलाबी बुर की गहराई में उतार कर चाटना शुरू कर दिया,,
उत्तेजना के मारे रुचि का गला सूख रहा था वो पागलों की तरह अपना सर दाएं बाएं पटक रही थी उसे इतना ज्यादा मजा आ रहा था कि इस तरह का मजा उसने अपनी जिंदगी में कभी भी नहीं प्राप्त की थी,,, अपने दोनों हाथों को शुभम के सर पर रख कर और जोर जोर से अपनी बुर पर दबा रही थी और जितना वह उसे दबा रही थी सुबह इतनी तेजी से उसकी बुर को चाट रहा था,,,, शुभम की जीभ के कमाल के आगे रुचि ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए और गर्म सिसकारी देते हुए एक बार बड़ी तेजी से पानी छोड़ दी,, ,, शुभम एक बार रुचि को झाड़ चुका था और अब उसकी बारी थी इसलिए वह अपनी पेंट उतार कर पूरा नंगा हो गया रुचि की आंखों के सामने शुभम का मोटा तगड़ा नंगा लंड लहरा रहा था जिसे देखकर उत्तेजना के मारे रुचि की बुर फुलने पीचकने लगी,,,, शुभम एक हाथ में अपना लंड पकड़ कर
धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा रुचि शादीशुदा होने के नाते इतना तो समझ ही गई थी कि शुभम के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बिना किसी दिक्कत के जिस तरह से शुभम ने अपने मोटे लंड को उसके मुंह में डालना चाहा उसी तरह से रूचि मुंह खोल कर उसके लंड का स्वागत करते हुए उसे अपने मुंह में लेकर तुरंत लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरु कर दी लंड इतना ज्यादा मोटा था कि उसका मुंह में पूरा भर चुका था और उसका मुंह जीरो की शेप में हो गया था,, जिंदगी में पहली बार उसे मोटा लंड चूसने में मजा आ रहा था वरना अपने पति के छोटे लंड को मुंह में लेकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस तरह से लंड चूसे,,,
शुभम रुचि के सूज भुज के द्वारा जिस तरह से वह उसका लंड चूस रही थी उससे वह काफी प्रभावित हो गया और जल्द ही अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करने लगा इसलिए उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि कहीं उसका लंड उसके मुंह में ही पानी ना छोड़ दिया इसलिए तुरंत उसके मुंह में से अपना लंड वापस खींच लिया,,,,
जिस पल के लिए रुचि को बड़ी बेसब्री से इंतजार था वह बना चुका था घास के ढेर पर घुटने के बल बैठकर रुचि की टांगों को फैला था हुआ शुभम अपने लिए जगह बना रहा था,, शुभम अपने मोटे तगड़े लंड को हाथ में लेकर धीरे-धीरे रुचि की गीली दूर के ऊपर सटा कर धीरे धीरे अंदर करने लगा,,, शुभम को इस बात का एहसास हो गया कि रुचि की बुर जीतनी खुलनी चाहिए थी अभी उतनी खुली नहीं है वह काफी कसी हुई थी,,, इसलिए मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा और देखते ही देखते उसे कामयाबी मिलने लगी और वह अपना आधा लंड गुरुजी की बुर में डाल चुका था लेकिन इस मशक्कत में रुचि को काफी दर्द भी हो रहा था लेकिन वह अपने इस दर्द को अपने दांतों तले दबा आए हुए थी। क्योंकि इसी दर्द के लिए तो वह तड़प रही थी जो कि इस तरह का दर्द उसके पति के द्वारा संभोग करने में कभी भी उसे प्राप्त नहीं हुआ धीरे-धीरे हिम्मत दिखाते हुए रुचि शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई तक अंदर ले ली,,,, हालांकि अभी भी रुचि को काफी दर्द हो रहा था लेकिन उसे पता था कि इसके आगे आनंद ही आनंद है इसलिए वह आने वाले पल का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी,,,, कहते हैं सब्र का फल बहुत मीठा होता है देखते ही देखते रुचि को भी इस बात का एहसास होने लगा क्योंकि शुभम शुरू शुरू में धीरे-धीरे उसकी कमर थाम कर अपने कमर हिला रहा था लेकिन थोड़ी ही देर बाद जब लगने लगा कि रुचि को दर्द काम और मजा आने लगा है तब वह अपनी स्पीड बढ़ा,,दीया,,, देखते ही देखते शुभम की कमर तेज रफ्तार में आगे पीछे होने लगी वह रुचि की दोनों चूचियों को अपने हाथों में थाम कर अपनी कमर हिला कर धक्के देने लगा,, तूफानी बारिश में बादलों की गड़गड़ाहट के बीच रुचि की सिसकारी भरी आवाज और उसकी चीख झोपड़ी के माहौल को पूरी तरह से मादक बना रही थी,,, रुचि पूरी तरह से खुल चुकी थी वह अपनी दोनों टांगों को ऊपर उठा कर शुभम की कमर पर लपेट ली और ऊसे ऊकसाने लगी जोर जोर से धक्के लगाने के लिए,,
( इतना सुनते ही रुचि और जोर जोर से दबाना शुरू कर दी जिससे शुभम को मजा आने लगा और काफी उत्तेजना का एहसास होने लगा वह जितनी जोर से पजामे के ऊपर से उसके लंड को दबा रही थी शुभम इतनी जोर लगाते हुए उसकी चूची को दबा रहा था,,,,, लेकिन रूसी की हालत खराब होती जा रही थी क्योंकि उसे अपनी हथेली के अंदर शुभम का लंड को ज्यादा यह मोटा महसूस हो रहा था और जिसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए वह मचल रही थी इसलिए वह बोली,)
सुभम मुझसे रहा नहीं जा रहा है तो कुछ कर,,,,,,
( शुभम समझ गया कि रुचि अब उसका लंड अपनी बुर में लेने के लिए पूरी तरह से तैयार है लेकिन शुभम हाथ में आया मौका इतनी जल्दी हाथ में आया मौका खत्म नहीं करना चाहता था इसलिए वाह चूची पर से हाथ हटाते हुए बोला,,,)
मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है भाभी में भी तुम्हारी बुर देखने के लिए तड़प रहा हूं ,,,(और इतना कहने के साथ ही वह झोपड़ी के अंदर इधर-उधर देखने लगा तभी उसे घास का ढेर सारा गठ्ठर नजर आया और वह उसे लाकर वहीं पर बिछा दिया ताकि रुचि को उस पर लिटाने में कोई दिक्कत ना हो,,, शुभम को यह करते देखकर रुची इतना तो समझ गई थी कि वह क्या करने वाला है इसलिए बिना कुछ बोले वहीं खड़ी रही तो शुभम उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ लाया और उसे धीरे से उस घास के ढेर पर लिटा दिया,,, रुचि की सांसो की गति बहुत तेज चल रही थी उसका बदन कसमसा रहा था वह आराम से घास के ढेर पर लेट गई,,,, बाहर तूफानी बारिश को देखते हुए रुचि इतना तो समझ गई थी कि वाकई में ऐसी तूफानी बारिश में अब वहां कोई आने वाला नहीं था और वैसे भी धीरे-धीरे अंधेरा होना शुरू हो गया था लेकिन अभी भी सब कुछ नजर आ रहा था,,, धीरे-धीरे शुभम रुचि की साड़ी को ऊपर उठाने लगा जैसे जैसे साड़ी ऊपर की तरह ऊठ रही थी वैसे वैसे रुची का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह जानती थी अगले पल क्या होने वाला है और देखते-देखते सुभम रुची की साड़ी को उसकी कमर तक उठा दिया और कमर तक साड़ी के उठते ही उसकी लाल रंग की पैंटी नजर आने लगी और उसकी पानी में भीग चुकी है लाल रंग की पैंटी को देखकर शुभम का लंड एक बार फिर से रुची की मदमस्त कर देने वाली जवानी को सलामी देते हुए ऊपर-नीचे हुआ,,
दोनों की सांसो की गति बड़ी तेजी से चल रही थी,,, दोनों एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे दोनों की आंखों में खुमारी साफ नजर आ रही थी दोनों को इस बात का ज्ञान अच्छी तरह से था कि इसके आगे क्या होने वाला है और क्या करना चाहिए इसलिए शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर धीरे से रुची की लाल रंग की पैंटी को पकड़ लिया और उसे धीरे-धीरे नीचे खींचने लगा कि तभी रुचि उसका सहयोग देते हुए अपनी गोल गोल गांड को ऊपर की तरफ उठा ली जिससे शुभम को उसकी पैंटी उतारने में किसी भी प्रकार की दिक्कत ना आए और देखते ही देखते शुभम उसकी पैंटी को उतार कर उसी घास के ढेर में फेंक दिया शुभम की आंखों के सामने रूचि अब एकदम नंगी थी केवल उसके बदन पर उसकी साड़ी थी जो कि वह भी कमर तक उठी हुई थी,,,,
शुभम अपनी आंखों से रूचि की नंगी बुर को साफ-साफ देख पा रहा था उसे साफ साफ दिखाई दे रहा था कि रुचि की बुर एकदम चिकनी थी ऐसा लग रहा था कि मानो आज ही उसने क्रीम लगाकर उसे साफ की हो यह देख कर उसके मुंह में पानी आ गया और बिना कुछ बोले सीधा अपने प्यासे होंठों को उसकी बुर पर रखकर उसे चाटना शुरु कर दिया,,
रुचि शुभम के द्वारा इस तरह के हमले के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी इसलिए शुभम की इस हरकत की वजह से उसके पूरे बदन में जैसे कि करंट लग गया हो उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,, वह पागलों की तरह एकाएक पूरी तरह से काम उत्तेजित होकर अपनी कमर को ऊपर उठा दी और शुभम भी फुर्ती दिखाते हुए उसके कमर को अपने दोनों हाथों से थामकर अपनी जीभ कोउसके गुलाबी बुर की गहराई में उतार कर चाटना शुरू कर दिया,,
उत्तेजना के मारे रुचि का गला सूख रहा था वो पागलों की तरह अपना सर दाएं बाएं पटक रही थी उसे इतना ज्यादा मजा आ रहा था कि इस तरह का मजा उसने अपनी जिंदगी में कभी भी नहीं प्राप्त की थी,,, अपने दोनों हाथों को शुभम के सर पर रख कर और जोर जोर से अपनी बुर पर दबा रही थी और जितना वह उसे दबा रही थी सुबह इतनी तेजी से उसकी बुर को चाट रहा था,,,, शुभम की जीभ के कमाल के आगे रुचि ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए और गर्म सिसकारी देते हुए एक बार बड़ी तेजी से पानी छोड़ दी,, ,, शुभम एक बार रुचि को झाड़ चुका था और अब उसकी बारी थी इसलिए वह अपनी पेंट उतार कर पूरा नंगा हो गया रुचि की आंखों के सामने शुभम का मोटा तगड़ा नंगा लंड लहरा रहा था जिसे देखकर उत्तेजना के मारे रुचि की बुर फुलने पीचकने लगी,,,, शुभम एक हाथ में अपना लंड पकड़ कर
धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा रुचि शादीशुदा होने के नाते इतना तो समझ ही गई थी कि शुभम के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बिना किसी दिक्कत के जिस तरह से शुभम ने अपने मोटे लंड को उसके मुंह में डालना चाहा उसी तरह से रूचि मुंह खोल कर उसके लंड का स्वागत करते हुए उसे अपने मुंह में लेकर तुरंत लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरु कर दी लंड इतना ज्यादा मोटा था कि उसका मुंह में पूरा भर चुका था और उसका मुंह जीरो की शेप में हो गया था,, जिंदगी में पहली बार उसे मोटा लंड चूसने में मजा आ रहा था वरना अपने पति के छोटे लंड को मुंह में लेकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस तरह से लंड चूसे,,,
शुभम रुचि के सूज भुज के द्वारा जिस तरह से वह उसका लंड चूस रही थी उससे वह काफी प्रभावित हो गया और जल्द ही अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करने लगा इसलिए उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि कहीं उसका लंड उसके मुंह में ही पानी ना छोड़ दिया इसलिए तुरंत उसके मुंह में से अपना लंड वापस खींच लिया,,,,
जिस पल के लिए रुचि को बड़ी बेसब्री से इंतजार था वह बना चुका था घास के ढेर पर घुटने के बल बैठकर रुचि की टांगों को फैला था हुआ शुभम अपने लिए जगह बना रहा था,, शुभम अपने मोटे तगड़े लंड को हाथ में लेकर धीरे-धीरे रुचि की गीली दूर के ऊपर सटा कर धीरे धीरे अंदर करने लगा,,, शुभम को इस बात का एहसास हो गया कि रुचि की बुर जीतनी खुलनी चाहिए थी अभी उतनी खुली नहीं है वह काफी कसी हुई थी,,, इसलिए मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा और देखते ही देखते उसे कामयाबी मिलने लगी और वह अपना आधा लंड गुरुजी की बुर में डाल चुका था लेकिन इस मशक्कत में रुचि को काफी दर्द भी हो रहा था लेकिन वह अपने इस दर्द को अपने दांतों तले दबा आए हुए थी। क्योंकि इसी दर्द के लिए तो वह तड़प रही थी जो कि इस तरह का दर्द उसके पति के द्वारा संभोग करने में कभी भी उसे प्राप्त नहीं हुआ धीरे-धीरे हिम्मत दिखाते हुए रुचि शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई तक अंदर ले ली,,,, हालांकि अभी भी रुचि को काफी दर्द हो रहा था लेकिन उसे पता था कि इसके आगे आनंद ही आनंद है इसलिए वह आने वाले पल का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी,,,, कहते हैं सब्र का फल बहुत मीठा होता है देखते ही देखते रुचि को भी इस बात का एहसास होने लगा क्योंकि शुभम शुरू शुरू में धीरे-धीरे उसकी कमर थाम कर अपने कमर हिला रहा था लेकिन थोड़ी ही देर बाद जब लगने लगा कि रुचि को दर्द काम और मजा आने लगा है तब वह अपनी स्पीड बढ़ा,,दीया,,, देखते ही देखते शुभम की कमर तेज रफ्तार में आगे पीछे होने लगी वह रुचि की दोनों चूचियों को अपने हाथों में थाम कर अपनी कमर हिला कर धक्के देने लगा,, तूफानी बारिश में बादलों की गड़गड़ाहट के बीच रुचि की सिसकारी भरी आवाज और उसकी चीख झोपड़ी के माहौल को पूरी तरह से मादक बना रही थी,,, रुचि पूरी तरह से खुल चुकी थी वह अपनी दोनों टांगों को ऊपर उठा कर शुभम की कमर पर लपेट ली और ऊसे ऊकसाने लगी जोर जोर से धक्के लगाने के लिए,,