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Adultery एक अधूरी प्यास- 2

शुभम भी कसरत करते हुए रुचि को देख लिया था कि वह छत पर आई हुई है और यह देख कर मन ही मन प्रसन्न हो रहा था,, और तो और रूचि के बारे में ही सोचते हुए उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी जिसकी वजह से उसके अंडरवियर में धीरे-धीरे तंबू का आकार बढ़ने लगा था,, एक बार और उसी के साथ संभोग कर चुका शुभम उसके सामने बिल्कुल भी शर्म लिहाज की परवाह न करते हुए उसी तरह से कसरत करता रहा,, वह पांच-पांच किलो के डंबल को बारी-बारी से दोनों हाथों से उठा रहा,,था,, जिससे उसके हाथों की मसल्स बेहद लुभावनी लग रही थी,,, रुचि तो उसको देखती ही रह गई उसका कसरत ही बदन रुचि के तन बदन में आग लगा रहा था,, कहां उसके पति का मरियल सा शरीर जिसकी बाहों में जाने के बाद उसे कभी भी एहसास नहीं हुआ कि वह किसी मर्द की बांहों में, शरीर जिसकी बाहों में जाने के बाद उसे कभी भी एहसास नहीं हुआ कि वह किसी मर्द की बांहों में है,,,, और शुभम की बाहों में आने के बाद से उसे लगने लगा था कि वाकई में उसकी बांहों में जाने के बाद ऐसा लगता है कि कोई मर्दाना ताकत से भरा हुआ बेहद ताकतवर मर्द उसे अपनी बाहों में भर कर भींच रहा है ,,, वह एहसास ही रुचि को पूरी तरह से उत्तेजना से भर दे रहा था,,

रुचि जब छत पर पहुंची थी तब शुभम के अंडरवियर में उसका बना हुआ तंबू सामान्य स्थिति में था लेकिन रुचि को अपनी आंखों के सामने पाकर आपस में उत्तेजना का जोश भर रहा था जिससे देखते ही देखते उसके अंडरवियर का तंबू तनने लगा और देखते ही देखते वह अपनी पुरी औकात में आ गया,,, रुचि भी शुभम के बदन में आए इस बदलाव को अच्छी तरह से देख कर समझ रही थी कि उसके आने के बाद ही उसका लंड खड़ा हुआ है और यह एहसास उसके तन बदन को झकझोर कर रख दिया,, पल भर में ही उसके बदन में मादकता की गर्मी बढ़ने लगी,,,, बदन में छा रही उत्तेजना रुचि को पल-पल चुदवासी बनाती जा रही थी,,, आज दिन भर में ना जाने कितनी बार उसकी पेंटी गिरी हुई थी वह भी सिर्फ शुभम के बारे में सोच कर,, यहां तो उसकी आंखों के सामने खुद शुभम नंग धडंग हालत में खड़ा होकर कसरत कर रहा था रुचि को इस बात का डर था कि कहीं इस बार वह उसे मात्र देखकर ही ना झड़ जाए,,,,, रुचि के बदन में पूरी तरह से चुदास की लहर दौड़ रही थी जिसकी वजह से वह लंबी लंबी सांसे ले रही थी,,,, वह रस्सी पर सुखते हुए कपड़ों की ओट में सिर्फ अपना चेहरा निकालकर उसे देख रही थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी जिसे शुभम देखकर उत्तेजना का अनुभव कर रहा,,,,

रह रह कर रुचि को उसकी सास वाला नजारा याद आज आ रहा था क्योंकि वह जिस जगह पर खड़ी थी उसी जगह पर उसकी सास छुपकर शुभम से चुदवा रही थी,,,,, उस पल को याद करके रुचि की इच्छा बलवंत वे जा रही थी कि वह भी इसी जगह पर उसकी सास की तरह झुककर शुभम से चुदवाए,,,, यह ख्याल मन में आते ही उत्तेजना के मारे रुचि की फूली हुई कचोरी जैसी बुर फुलने पीचकने लगी थी ,,,। उसकी गहरी चलती सांसों के साथ-साथ उसके ब्लाउज में के दोनों कबूतर ऊपर नीचे हो कर ऐसा लग रहा था मानो कि वह शुभम के हाथों में आने के लिए खुद ही हामी भर रहे हो ,,,

दूसरी तरफ शुभम उत्तेजना से बढ़ता चला जा रहा था वह उसी तरह से पाच पाच किलो के डंबल को ऊपर नीचे करके अपनी कसरती बदन का प्रदर्शन कर रहा था,,, यह बात से हम अच्छी तरह से जानता था कि एक औरत को मर्द का गठीला बदन चौड़ी छाती बेहद पसंद होती है ,,, इतना तो शुभम अच्छी तरह से जानता था कि रुचि उसके प्रति पूरी तरह से आकर्षित हो चुकी है और उस दिन तूफानी बारिश में झोपड़ी के अंदर जो कुछ भी हुआ था वह अचानक हुआ था शुभम उसकी बहुत ही अच्छे से चुदाई करना चाहता,,था,,, और यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि उसका पति उसे अच्छी तरह से चोद नहीं पाता,, है,, तभी तो उस दिन के पानी बारिश में वह बिना किसी विरोध के उससे चुदवाई थी और वह भी पूरी नंगी होकर,, एक औरत इस तरह से गैर मर्द से तभी शारीरिक संबंध बनाती है जब घर में उसका पति उसे ठीक तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता हो,,,, रुचि के इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए शुभम इस समय उसे उकसाने के लिए जानबूझकर अपना दूसरा डंबल नीचे जमीन पर रख दिया था और उसी हाथ से बार-बार रुचि की आंखों के सामने ही अपने पेंट में बने तंबू को हाथ लगाकर उसे दबा दे रहा,,था जिसको देखकर रुचि के मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ रही थी,,, रुचि पलक झपकाए बिना उस नजारे का आनंद लेते हुए रस्सी पर से सूखे हुए कपड़े को एक-एक करके उतारने लगी,,,,, अपनी तरफ मादक निगाहों से देखता हुआ पाकर शुभम रुचि से बोला,,

क्या देख रही हो भाभी,,,

वही जो तू दिखा रहा है,,,( रुचि भी उसके सवाल का जवाब खुले शब्दों में देते हुए बोली,,)

मैं तो कुछ भी नहीं दिखा रहा हूं (शुभम उसी तरह से एक हाथ से डंबल को ऊपर नीचे करते हुए बोला)

यह तो मुझे पता ही है कि तू क्या दिखा रहा है और क्या नहीं दिखा रहा है,,( रुचि रस्सी पर से कपड़े उतारते उतारते रस्सी को हाथ से पकड़ कर खड़ी होते हुए बोली)

अब क्या करूं भाभी आंखों के सामने इतनी खूबसूरत औरत खड़ी होगी तो वह तो खड़ा होगा ही,,,

जरूरी तो नहीं किसी भी खूबसूरत औरत को देखकर खड़ा कर लो,,,

भाभी जी ऐसी वैसी औरत को देखकर ये नहीं खड़ा होता यह तो सिर्फ आपको देखकर ही खड़ा हुआ है,,

अच्छा मैं कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लगती हूं क्या तुझको जो मुझको देखकर तूने अपना खड़ा कर लिया है,,( रुचि उसी तरह से रस्सी को पकड़े हुए ही बोली,,,)

भाभी जी यह सब को नहीं जानता आपको तो पहचानता है और वह भी अच्छी तरह से,,,

( शुभम के कहने का मतलब रुचि अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए उसकी बात सुन कर मुस्कुरा दी,,)

आखिरी मुझको क्यों पहचानता है,,,?

क्योंकि भाभी जी इसने आप की गहराई को नाप लिया है,,

( शुभम उसी तरह से अपनी चौड़ी छाती और अंडर वियर में बने तंबू की नुमाइश करते हुए डम डम तो ऊपर नीचे करके वह बोला,,)

हाय,,,,, ज्यादा गहरी लगी क्या तुझको,,,( लंबी आहें भरते हुए रूचि बोलीं,,)

ठीक से देख नहीं पाया,,, भाभी जी,,,,

अकेली हूं घर पर ठीक से देखना है तो आजा कमरे में तुझे अच्छे से दिखा दूंगी,,,

( इस तरह की गरमा गरम बातें करके रुचि कि तन बदन में आग लग रही थी और रुचि के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर शुभम की हालत खराब होती जा रही थी उसके अंडरवियर में उसका तंबू बड़ा होता चला जा रहा,,था,,,)

हाय मेरी भाभी,,, भगवान तेरी जैसी भाभी सबको दे,,( इतना कहकर शुभम डंबल को नीचे जमीन पर रख दिया और फिर रुची की तरफ आगे बढ़ने लगा,,, यह देखकर रुचि के तन बदन में गुदगुदी होने लगी,, वजह से जैसे आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे रुचि के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी, शुभम पूरी तरह से जोश में आ गया था।,,, जैसे जैसे वह अपनी टांगों को आगे बढ़ा रहा था वैसे वैसे उसके अंडर वियर में बना तंबू हील रहा था और उसका हीलना देखकर रुचि का पूरा वजूद डगमगा रहा था,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखने लगा था,, देखते ही देखते शुभम उसके बेहद करीब पहुंच गया,, बार-बार और रोजी उसके अंडर वियर में बने तंबू को देख ले रही थी क्योंकि रुचि जैसी प्यासी औरत के लिए शुभम के अंडरवियर के अंदर का सामान ही सबसे बड़ा खजाना था,, जिसे वह अपने दोनों हाथों से लूटना चाहती थी,, अपने अरमान और धड़कते दिल पर काबू करते हुए रुचि ठंडे लहजे में बोलीली,,)

मेरी जैसी भाभी क्यों,,?

क्योंकि तुम्हारी जैसी भाभी ही अपने देवर को कुछ भी दिखा सकती हो और कुछ भी दे भी सकती है,,,( शुभम रुचि के बेहद करीब पहुंच कर लंबी-लंबी सांसे लेते हुए बोला,, वह अपनी गहरी सांसो से रुचि को इस बात का अहसास दिलाना चाहता था कि वह पूरी तरह से कामाग्नि के जोर में चल रहा था वह पूरी तरह से चुदवासा हो गया है,,, और उसे जो चाहिए वह सिर्फ रुचि ही दे सकती है,,,

रुचि भी उसकी हालत को देखकर समझ गई थी कि अब कुछ भी हो सकता है जिसके लिए वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी,, शुभम की बात का जवाब देते हुए रूचि बोली,,,)

मेरे पास तो ऐसा कुछ भी नहीं जो मैं तुझे दे सकूं या दिखा सकूं,, ( शुभम को अपने बेहद करीब पाकर रुचि का बदन कसमसा रहा था उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,)

तुम्हारे पास सब कुछ है भाभी मैं जानता हूं साड़ी के अंदर छुपा कर रखी हो,,, ऐसा खजाना जिसे देखने के लिए दुनिया का हर मर्द तड़पता है,, जिसे पाने के लिए हर कोई मचलता है,,,

तू मचल रहा है,,?

हां भाभी मैं तो कब से मचल रहा हूं तड़प रहा हूं तुम्हें छत पर देखते ही मेरा लंड खड़ा होने लगा था ,,(यह सब कहते हुए तुरंत अपनी अंडरवियर में तने हुए तंबू पर हाथ रखते हुए.. जिससे रुचि का ध्यान उसी तरफ चला गया और उसकी हरकत को देखकर रुचि का भी मन,, मचलने लगा, रुचि के तन बदन में आग लगने लगी,,, वह गहरी सांसे लेते हुए शुभम के तंबू को देख कर बोली,,,)

देखना चाहेगा मेरे खजाने को,,,,( रुचि एकदम मादक स्वर में बोलीं,,)

कौन बेवकूफ होगा जो नहीं देखना चाहेगा,,(शुभम उसी तरह से अंडर वियर के ऊपर से ही अपने लंड को मसलते हुए बोला शुभम की ये हरकत प्यास से भरी हुई रूचि के बदन में आग लगा देने वाली थी,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था और यही हाल शुभम का भी था,, )

तू देखना चाहेगा,, अगर देखना हो तो मेरे कमरे में आना होगा,,(रुचि का मन तो बहुत कर रहा था इसी समय अपनी साड़ी उठाकर उसने रसीली बुर दिखाने की,, लेकिन वह शुभम को इसी बहाने अपने कमरे में बुलाना चाहती थी जहां पर वह इत्मीनान से उसे अपना एक-एक अंग खोल कर दिखा सके और उसे प्यार करने,,दे,,, लेकिन शुभम को इस समय साबर बिल्कुल भी नहीं था उसकी आंखों के सामने उसके पास में जवानी से भरपूर एक प्यासी औरत खड़ी थी जो अपनी रसीली बुर को दिखाने के लिए तैयार थी और ऐसे में शुभम इस मौके को जाने नहीं देना चाहता था ऐसे तो वह उसके कमरे में भी जाकर सब कुछ देख सकता था लेकिन उसे अभी देखना था और अपनी वह इस लालच को दबा नहीं पाया और बोला,,)

नहीं भाभी मुझे अभी देखना है मैं कमरे में आकर तो कभी भी देख लुंगा लेकिन मेरी इच्छा इसी समय तुम्हारी रसीली बुर को देखने कि कर रही है,,,( सुभम ने एकदम साफ शब्दों में बोल दिया,,)

नहीं यहां नहीं कोई देख लिया तो,,,(रुचि जानबूझकर शंका जताते हुए बोली और इस बात कि उसे खबर थी की छत पर कोई आने वाला नहीं है फिर भी वह अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रही थी कि शुभम उसके साथ उसके कमरे में चले,,)

कोई नहीं देखेगा भाभी यहां छत पर कोई नहीं आता इस समय इस शहर की सबसे सुरक्षित जगह है जहां पर कोई नहीं,, आता,,, बस एक बार मुझे अपनी बुर के दर्शन करा दो मेरा जीवन धन्य हो जाएगा,,( शुभम एकदम गिडगिडाते हुए स्वर में बोला,,, शुभम इस तरह से व्यवहार कर रहा था कि जैसे वह रूचि की बुर को देखा ही ना हो जबकि वह उसकी बुर में अपना पूरा लंड डालकर उसकी जमकर चुदाई कर चुका था,,, लेकिन मर्द की हमेशा से यही आदत रहती है कि वह औरत के अंग को चाहे जितनी बार भी देख ले लेकिन उसका मन नहीं भरता,, और यही कारण था की वह रुची से उसकी बुर दिखाने के लिए मिन्नतें कर रहा था,,, और यह देखकर रुचि अंदर ही अंदर प्रसन्नता के साथ-साथ उत्तेजित भी हुए जा रही थी,,,,, रुचि नखरा दिखाते हुए बोली,,,)

नहीं नहीं मैं यहां नहीं दिखा सकती यहां कोई देख लिया तो मेरी इज्जत खराब हो जाएगी,,

क्या भाभी नखरा कर रही है यहां कोई नहीं देखने वाला मेरा विश्वास करो,,(यह कहते हुए शुभम का मन तो हो रहा था कि उसे उसके सास वाली बात सब बता दे कि वह उसकी सास की वहीं पर सुधार किया था और कोई भी नहीं देख पाया था,, लेकिन यह वाली बात बताना उचित नहीं समझा इसलिए कुछ बोला नहीं,,)

कैसे विश्वास करूं शुभम देख रहे हो खुली छत हैं और अपने चारों तरफ भी छत ही छत हैं कोई देख लिया तो,,,

मेरा विश्वास करो भाभी कोई नहीं देखेगा अगर नहीं दिखाओगी तो मैं खुद ही तुम्हारी साड़ी उठाकर देख लूंगा,,,,

अरे वाह इतनी जबरदस्ती,,,,(रुचि अपनी आंखों को नचाते हुए बोली,,,)

नहीं दिखाओगी तो मुझे तो जबरदस्ती करना ही पड़ेगा भाभी,,, इतना नखरा जो कर रही हो,,,

मैं कहां नखरा कर रही हूं,,

नखरा ही तो कर रही हो भाभी उस दिन तूफानी बारिश में कैसे सब कुछ खोल कर मेरे हवाले कर दी थी और वहां तो तुम बिना कुछ बोले एकदम नंगी हो गई,,थी,, और देख रही हो मेरी हालत ( अपने हाथ से अपने अंडरवियर को नीचे खींच कर अपने खड़े लंड को दिखाते हुए,,,) कितनी खराब होती जा रही है,,

हालत खराब हो रही है या हालत रंगीन होती जा रही है,,

मैं कुछ नहीं जानता भाभी दिखाना है तो दिखा वरना मैं जा रहा हूं,,,(इतना कहकर वह जानबूझकर सिर्फ दिखावे के लिए जाने को हुआ तो रुचि तुरंत उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोली,)

नाराज क्यों हो रहा है रे दिखा रही हुं ना,,,, लेकिन कोई आ ना जाए,,

यहां कौन आएगा भाभी तुम्हारी सास तो है नहीं,,,

लेकिन तेरी मम्मी तो है ना अगर वह आ गई तो,,

नहीं आएगी मेरा भरोसा करो,,,

( शुभम उसे विश्वास दिलाते हुए बोला और रुचि अपने मन में सोच रही थी अगर आप ही जावे तो भी उसका दिल शुभम को अपनी बुर दिखाने को कर रहा था इसलिए अपने आप को रोक नहीं पाए और बोली,,,)

देख सुगंध तुझ पर विश्वास करके मैं तुझे यहां पर दिखा रही,,हु,,(इतना कहते हुए वह अपने चारों तरफ देखकर तसल्ली कर लेना चाहती थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है,, और इतना कहने के साथ ही वह अपने दोनों हाथ को अपनी साड़ी पर रखकर उसे धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खींचने लगी,,)

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शुभम को यह लग रहा था कि उसके कहने पर रुचि उसे अपनी रसीली बुर दिखाने के लिए तैयार हो गई है लेकिन हकीकत यही थी कि भले ही शुभम उसे दिखाने के लिए बोल रहा था लेकिन वह पहले से यही चाहती थी कि वह शुभम को अपनी रसीली चिकनी बुर दिखा कर एक बार फिर उसे अपनी जवानी की मदहोशी में मदहोश कर देगी,, और इसी लिए ही संध्या के समय, खुली छत पर रुचि अपनी को दिखाने के लिए तैयार हो गई, थी,,।

धीरे-धीरे शाम ढल रही थी आसमान में पंछियों का झुंड वापस अपने घोसले की तरफ वापस उड़ता चला जा रहा था,,,, मंद मंद शीतल हवा बह रही थी, जिसकी ठंडक का एहसास रुचि की मादकता भरी गर्म जवानी को छूकर पसीने की बूंद बन कर उसके बदन से टपक रही थी,,,, दोनों पूरी तरह से निश्चिंत थे क्योंकि उन दोनों की छत बाकी सबके छत से काफी ऊंची थी,, दोनों के तन बदन में उत्तेजना की लहर अपना असर दिखा रही थी दोनों की सांसे गहरी चल रही थी। शुभम काफी उत्साहित और उत्सुक नजर आ रहा था रुचि की बुर के दर्शन करने के लिए इसलिए तो वह लगातार अपने अंडर वियर में बने तंबू को मसल रहा था,,

तेज चलती सांसो के साथ रुची धीरे-धीरे अपनी साड़ी को अपनी उंगलियों के सहारे से ऊपर की तरफ खींच रही थी और जैसे जैसे साड़ी उसकी टांगों को नंगी करते हुए ऊपर जा रही थी वैसे वैसे शुभम का दिल और तेजी से धड़क रहा था,,,,, सुभम ये बात अच्छी तरह से जानता था कि भले ही वह रुची की जमकर चुदाई कर चुका था लेकिन सही ढंग से ठीक तरह से उसकी बुर को अपनी आंखों से नजर भर कर देखा नहीं था,,,, इसलिए वह रुचि के उस बेहतरीन अंग को देखना चाहता था जिसमें वह पहले से ही अपने लंड को डालकर उसकी चुदाई कर चुका,,था,,,

शुभम यह जानते हुए कि छत पर कोई आने वाला नहीं है फिर भी इधर उधर देख ले रहा था और वापस उसकी नजर रुचि की टांगों के बीच चिपक सी जा रही थी,,, देखते ही देखते रुची ने अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दी,,,

उसके बाद जो नजारा शुभम की आंखों के सामने नजर आया उसे देखते ही उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,, उसके जिस्म में जैसे कि सांस आना बंद हो गई हो,, उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया,,, आखिरकार वो कर भी क्या सकता था नजारा ही कुछ ऐसा था कि शुभम क्या दुनिया का कोई भी मर्द देखता तो वह दंग रह जाता,,

रुचि पहले से ही तैयारी करके छत पर आई थी, क्योंकि उसने साड़ी के नीचे पेंटी नहीं पहनी हुई थी,,, जिसकी वजह से साड़ी के उठते ही,, जैसे ही शुभम की नजर रुचि की नंगी बुर पर गई वह सारा माजरा समझ,, गया,, और पल भर में ही उसका लंड इतना अत्यधिक कड़क हो गया कि मानो कोई लोहे की छड़ हो,,,

सुभम की आंखों के सामने रूचि की रसीली गुलाबी पत्तियों के अंदर कैद बुर थी,, और वह भी काफी फुली हुई थी,, एकदम कचोरी की तरह,,,, ऊसपर बालों का नामों निशान नहीं था,, ऐसा लग रहा था मानो कि अभी अभी उसने महंगी वीट क्रीम लगाकर साफ करके आई हो,,, शादीशुदा औरत होने के बावजूद भी उसकी बुर अभी भी केवल एक पतली लकीर की शक्ल में ही नजर आ रही थी,, जिससे साफ जाहिर हो रहा था कि रुची की बुर में अब तक शुभम के मोटे लंड की सेवा उसके पति का पतला ही लंड घुसा है इसीलिए तो वह बराबर खुल नहीं पाई है,, वरना अभी तक उसकी गुलाबी पत्ती बुर के बाहर झांक रही होती,,,, लेकिन यह शुभम के लिए बेहद खुशी की बात थी कि उसे एक बार फिर से रसीली कसी हुई बुर चोदने को मिलने वाली थी,, हालांकि सुभम एक बार रुची की बुर का आनंद ले चुका था लेकिन अब सुभम रुचि की इत्मीनान से लेना चाहता था,,

इसलिए तो रुचि की नंगी बुर देखकर शुभम एकदम काम भावना से भर गया,,,, यही हाल रूचि का भी हो रहा था वह भी उत्तेजना से भरने लगी थी इस तरह से अपनी साड़ी उठाकर शुभम को बोल दिखाने की वजह से उसके तन बदन में आग लग रही थी और वह अपनी काम भावना को दबा नहीं पा रही थी जिसकी वजह से उसकी बुर में से उसका मदन रस अमृत की बूंद बन कर बुर की दरार से बाहर निकलकर टपकने को हुआ ही था कि उस पर नजर पड़ते ही शुभम अपना हाथ आगे बढ़ाकर उस पर अपनी उंगलियां रखकर हल्कै से दबा दिया जिससे रुचि के मुंह से सिसकारी निकल गई और शुभम बोला,,

यह क्या दिखा दी भाभी तुमने तो मुझे जन्नत का द्वार दिखा दी और ऐसा कहते हुए हल्के हल्के अपनी उंगली को उसकी पूरी हुई बुर पर रगड़ना शुरू कर दिया जिससे रुचि पूरी तरह से गरमाने लगी,,

ससससहहहह,,,,आहहहहहहह,,, शुभम देखा तो है तुने और डाला भी है,,,,( इतना कहने के साथ ही आनंद की अनुभूति करके उसकी आंखें अपने आप बंद हो गई और उसके मुंह से सिसकारी की आवाज आने लगी क्योंकि उसके बोलते ही शुभम ने अपनी एक उंगली धीरे से उसकी बुर की दरार के अंदर सरका दिया,,,)

ससससहहहहह,,,आहहहहह,,,, सुभम,,ऊहहहहहहह,,,,

( रुचि की गरम सिसकारी की आवाज सुनकर शुभम समझ गया कि बहुत गर्म हो गई है,,, वह उसी तरह से अपनी एक उंगली को उसके घर के अंदर बाहर करता रहा रुचि पूरी तरह से कामोत्तेजना में डूबती चली जा रही थी उससे अपने बदन की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसलिए वह अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर शुभम के अंडरवियर को नीचे करके उसके खड़े लंड को हाथ में लेकर जोर-जोर से हीलाना शुरू कर दी,, एक प्यासी औरत के लिए किसी मर्द के लंड को अपने हाथ में लेना है उसकी कामोत्तेजना की परिभाषा को दर्शा देता है,, यह उस औरत की तरफ से मौन स्वीकृति होती है कि वह चुदाई के लिए किसी भी हद तक जा सकती है कुछ भी कर सकती है,,, और शुभम की रुचि की इस मानसिक विकृति को स्वीकार करके अपनी उंगली को जोर-जोर से उसके घर के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया उससे दुगना आनंद ले रहा था एक तरफ तो वह रुची की बुर से खेल रहा था और दूसरी तरफ रुचि खुद उसके लंड से खेल रही थी जो कि इस समय अपनी औकात में आ चुका, था,,,,,

रुचि शुभम कै लंड की गर्माहट को अपनी हथेली में महसूस करके पूरी तरह से पिघलने लगी,,, जिंदगी में पहली बार वह किसी गैर मर्द के लंड को अपने हाथ में ले रही थी और वह भी ऐसा वैसा मत बनाइए खास दम दमदार मर्दाना ताकत और जोश से भरा हुआ था जिसे औरत अपनी बुर में लेने के बाद सारी दुनिया को भूल जाती है और बस उसी के आनंद में खो जाती है ,,, इसीलिए तो रुचि दिल दुनिया से बेखबर होकर संध्या के समय अपने ही छत पर, शुभम के द्वारा उंगली चौदन का मजा लेते हुए उसके लंड को हिला रही थी,,

रुची को आज शुभम के मोटे तगड़े लंबी को अपने हाथ से मुठीयाने में इतना आनंद की अनुभूति हो रही थी कि आज तक उसे अपने पति का छोटा लंड पकड़ने में भी उस आनंद का अहसास तक नहीं हुआ था,, वह जोर-जोर से शुभम के लंड को हिला रही थी,, और शुभम लगातार अपनी एक उंगली से रूचि की बुर को चोद रहा था जिससे रुचि एकदम मस्त हुए जा रही थी,,,

साड़ी की ओट में दोनों एक दूसरे के अंगों से खेल रहे,,थे,, रुचि को मोटे लंड की आवश्यकता अत्यधिक हो रही थी, क्योंकि उसकी गर्म सिसकारी की आवाज पूरे छत पर गूंज रही थी लेकिन उससे साड़ियों को सुनने वाला केवल शुभम ही था जो कि उसकी इस गरम सिसकारियों की आवाज को सुनकर जोश से भरा जा रहा था,,

ससससहहहह,,, आहहहहह,,, शुभम मेरे राजा तूने तो मुझे पागल कर दिया रे,, मेरी बुर में खुजली हो रही है,, और तेरी उंगली से खुजली जाने वाली नहीं है,,, उंगली निकालकर अपना मोटा लंड डाल दे रे ,,,,

( रुचि कि ईस तरह की मादक बातों को शुभम सुन तो जरूर रहा था लेकिन जवाब नहीं दे रहा था वह लगातार अपनी उंगली को उसके बुर के अंदर बाहर करके उसे चोद रहा था उसमें से चप्प,,, चप्प,,, की आवाज आ रही थी जिसे सुनकर उसका लंड और ज्यादा टाइट हो रहा,, बहुत ज्यादा रुचि को तड़पाना चाहता था इसलिए वह एक उंगली के साथ-साथ अपनी दूसरी उंगली भी उसकी बुर की गुलाबी छेद में ठेल दिया,,, जैसे ही उसकी दूसरी उंगली रुचि की बुर के अंदर गई रुचि के मुंह से आह निकल गई,, लेकिन दर्द के साथ-साथ उसे आनंद की भी अनुभूति हो रही थी वह आंखें बंद करके गरम सिसकारी लिए जा रही थी और रह रह कर अपनी कमर को गोल-गोल घुमाते हुए शुभम की उंगली पर अपनी गोलाकार गांड को नचा रही थी,,,,

धीरे-धीरे अंधेरा बढ़ता जा रहा था शुभम को भी काफी देर हो गई थी छत पर आए,, और शुभम ने काफी अत्यधिक उत्तेजना के बवंडर में रुचि को झकझोर के रख दिया था,, क्योंकि अब उसकी सांसे और ज्यादा तेज और गहरी चल रही थी मौके की नजाकत को समझते हुए शुभम अब उसकी बुर में लंड डालना ही उचित समझ रहा था,, और जैसे ही सुगम अपनी उंगली को उसकी बुर से बाहर निकालकर अपना मोटे लंड का सुपाड़ा उसकी गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियों पर स्पर्श कराया तो उसका पूरा शरीर उत्तेजना के मारे झनझना गया,,,, और जब तक वह अपनी आंखें खोल कर अपनी टांगों के बीच के इस नजारे को देख पाती तब तक शुभम फुर्ती दिखाते हुए अपने लंड के सुपाड़े को उसकी बुर के अंदर सरका दिया था,,, दोनों बिल्कुल सीधे-सीधे खड़े थे ऐसे नहीं शुभम अपने लिए जगह नहीं बना पा रहा था कि उसके घर के अंदर वह पूरा लंड डाल सके,, इसलिए उचित पोजीशन बनाने हेतु वह रुचि की मोटी मोटी जागो को उसके घुटनों से पकड़ कर उसे हल्के से उठा लिया जिससे शुभम के लिए उसकी पुर के अंदर अपना मोटा लंड डालने की जगह अच्छी तरीके से बन गई,, अब सुभम रुची की बुर के अंदर अपना पूरा समूचा लंड डालकर उसकी चुदाई कर सकता था और देखते ही देखते शुभम अपने मोटे तगड़े लंड को धीरे-धीरे करके उसकी बुर की गहराई में डाल दिया,,,, जैसे-जैसे शुभम का मोटा लंड रुचि की बुर के अंदर दस्ता जा रहा था वैसे वैसे रुचि के चेहरे का हाव भाव बदलते जा रहा था कभी उसपे पीड़ा के भाव नजर आते तो कभी आनंद की लालिमा छा जाती थी,,,,

सुदामापुरी औकात में आ चुका था उसके ऊपर रुचि को चोदने का जोश पूरी तरह से सवार हो चुका था इसलिए अपना पूरा लंड बुर में डालकर चोदना शुरु कर दिया था और सहारे के लिए अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर उसके गोल गोल गांड को अपनी हथेली में पकड़ कर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था,, रुची को तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि सुभम ऊसे इस तरह से खड़े खड़े चोदेगा वह तो सोची थी कि उसकी सास वाला दृश्य फिर से पुनरावर्तन होगा,,,, शुभम उसकी भी झुका कर पीछे से लेगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ शुभम खड़े-खड़े उसके ले रहा था और रुचि को इसमें बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी,,,,

दोनों के बीच किसी भी प्रकार का वार्तालाप और संवाद नहीं हो रहा था शुभम रुचि की खूबसूरती में मस्त होकर उसके गुलाबी होठों को चूसते हुए अपनी कमर हिला रहा था,,,

रुचि अपनी टांगों के बीच के नजारे को देखकर अंदर ही अंदर मचल उठ रही थी क्योंकि उसे केवल एक मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर के अंदर बाहर होता नजर आ रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था ईतना मोटा लंड उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद में चला गया,,,,

शुभम जोर-जोर से उसकी गोल गोल गांड को अपनी हथेली में भरकर दबाते हुए धक्के पर धक्के पेल रहा था,,, रुचि एकदम मस्त हुए जा रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि शुभम इस तरह से भी उसे संतुष्ट कर सकता है उसकी गर्म सांसे शुभम के चेहरे पर पड रही थी,,, शुभम अपनी धक्कों की रफ़्तार को बढ़ाता जा रहा था,,, रुचि को महसूस होने लगा कि उसका पानी निकलने वाला है उसकी सांसे गहरी चलने लगी,, रुचि शुभम को कसकर अपनी बाहों में दबोचे हुए थे और शुभम उसकी गांड को जोर से दबाते हुए अपने धक्के लगा रहा,,था,,,

दोनों की सांसे तेज चल रही थी,, शुभम को इस बात का अहसास हो गया कि रुचि के साथ-साथ वह भी एक दम चरम सुख के करीब पहुंचता जा रहा है इसलिए वह,, रुचि को उसके गोल गोल नितंबों के सहारे पकड़कर जोर-जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,, हर धक्के के साथ गुरु जी की आंगन जा रही थी क्योंकि जिस तरह से वह धक्के लगा रहा था और उसी को ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे वह अपने लंड को उसकी बुर की गहराई में गाड़ देगा,,,

शुभम का लंड उसे दर्द जरूर दे रहा था लेकिन मजा भी बहुत दे रहा था इस बात की संतुष्टि उसे अपने मन में थी और इसीलिए तो वह शुभम से चुदवाने का पूरा आनंद लूट रही थी,, शुभम धकाधक अपना लंड पएल रहा था,,,

को देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ गए,, शुभम अपना पूरा गर्म लगा उसकी बुर के अंदर ऊड़ैल दिया,,, झड़ने के बाद रुचि खुद उसे उसी स्थिति में लगभग 1 मिनट तक यूं ही पकड़े रहे ताकि उसकी लंड का आखिरी बूंद तक उसकी बुर के अंदर निचोड़ लें,,,,

वासना का तूफान थम चुका था रुची अपने वस्त्र को दुरुस्त करके रस्सी पर से सूखे कपड़े उतार कर नीचे चली गई और शुभम भी अपने काम में व्यस्त हो गया,,

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रुचि एक दम मस्त हो चुकी थी,,, वह सूखे हुए कपड़े को व्यवस्थित करके उसे अलमारी में रख रही थी,, उसकी सांसों की गति अभी भी तेज चल रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह अकेले ही कुछ मिनट पहले ही अपने बदन की प्यास बुझा कर आई है,, अभी तक उसकी बुर की गहराई में शुभम के मोटे लंड का एहसास बना हुआ था,,, उसे पहली बार महसूस हुआ था कि एक मर्द के लंड से निकली हुई पानी की पिचकारी औरत को कितना सुख और संतुष्टि प्रदान करती है वरना तो उसके पति के लंड से कब पानी निकल जाता था उसे पता तक नहीं चलता था,, शुभम के लंड से निकली हुई तेज धार वाली पिचकारी उसे अपने बच्चेदानी पर साफ महसूस हुई थी और उसकी पिचकारी की धार को अपनी बच्चेदानी पर महसूस करते ही रुचि एकदम मस्त हो गई थी उसका पूरा बदन एक अजीब से सुख की अनुभूति में नहाने लगा था इसीलिए तो वह शुभम को और कस के अपनी बाहों में जकड़ ली थी ताकि उसके लंड से आखिरी बूंद तक उसकी बुर की गहराई में उतर,,जाए,,, उसे पूरा यकीन था कि शुभम से चुदवा कर वह जरूर मां बन जाएगी,,, पर इस बात की भी खुशी उसे थी कि उसका बच्चा भी शुभम की तरह खूबसूरत गठीले बदन वाला अच्छे नैन -नक्श वाला होगा,,, यही सब सोचते हुए वह एक-एक करके सारे कपड़ों की अलमारी में रख रही थी,, वह मन में यह बात भी सोच रही थी कि वह दो बार शुभम से जबरदस्त चुदाई का मज़ा ले चुकी थी,,लेकिन एकदम इत्मीनान से अभी तक शुभम से चुदाई नहीं करवा पाई थी जिसका उसे रंज था और वह अपनी इस कमी को पूरा करना चाहती थी,,,,,

शुभम अपनी मां के द्वारा ऊठाई गई हद की दीवार को लांघ कर एक बार और रुचि के साथ संभोग सुख भोग चुका,, था,,, और उसमें उसे अद्भुत आनंद की अनुभूति हुई थी,,, आखिर उसे मजा क्यों नहीं आता एक खूबसूरत नव जवान औरत जो उसे चोदने को मिल रही थी,,

निर्मला रसोई घर में खाना बना रही थी और ना जाने क्यों शुभम को औरत की जरूरत ज्यादा पड़ रही थी,, और वह भी तब जब परीक्षा सर पर आन पड़ी थी,,, और उसकी मां ने उसे सख्त हिदायत दी थी कि जब तक परीक्षा खत्म नहीं हो जाती तब तक बिल्कुल भी चुदाई नहीं होगी,,, लेकिन शुभम से रहा नहीं जा रहा था बार-बार उसका लंड खड़ा हो जा रहा था और वह भी तब जब वह किचन में पानी पीने या किसी काम से चला जाता तब तक उसकी मां की रसोई बनाते समय हिलती हुई गांड देख कर बार-बार उसका लंड खड़ा होने लगा था जिससे उसे परेशानी महसूस हो रही थी,,

जबकि वह अपनी मां के खूबसूरत बदन के हर एक अंग से खेल चुका था,, लेकिन आदमी का मन कभी भी देख सकता है कभी भी उसी चीज को पाने की इच्छा बार-बार होने लगती है जिस चीज पर उसका पूरा अधिकार होता है और वह जब चाहे उस चीज से अपने मन को तसल्ली दे सकता है और वही शुभम के साथ भी हो रहा था,, रातो दीन वो जिस औरत के खूबसूरत बदन के साथ जब चाहे तब खेलता था ,, और परीक्षा के दौरान उसी खूबसूरत बदन को स्पर्श तक ना कर सकने की सख्त हिदायत के कारण शुभम का मन बार-बार उसी की तरफ लालायित हुआ जा रहा था और यही कारण था कि वह किचन में फ्रिज के पास खड़ा होकर पानी की बोतल से पानी पीते हुए अपनी मां की हिलती हुई गांड को देखकर उत्तेजना से भरता चला जा रहा था,,,,, निर्मला यह सब से अनजान रोटी को सेंड करने में लगी हुई थी उसे यह कहा पता था कि उसकी पीठ पीछे उसका बेटा उसकी बड़ी-बड़ी हिलती हुई गांड को देखकर अपनी आंख सेंक रहा था,,,। इसमें शुभम की नजरों का दोष बिल्कुल भी नहीं था नजारा ही कुछ बेहद उन्माद से भरा हो तो इंसान आखिर क्या करें,, निर्मला को ईस अवस्था में वास्तव में देख पाना भी मर्दों के लिए किस्मत की बात होती है क्योंकि जिस तरह से वह रोटी को बेलते हुए उसे तवे पर रखकर सेंक रही थी उस वजह से उसके बदन में हल्की सी ऊन्मादक थीरकन होती थी और यह सब थीरकन ज्यादातर उसकी कमर के नीचे वाले घेराव पर अधिक होती,

और उसकी वजह से कसी हुई साड़ि में उसकी बड़ी बड़ी गांड पानी भरे गुब्बारे की तरह लहर मारती थी,,, जिसे देखकर अच्छे अच्छों का पानी निकल जाए,, इसलिए तो किचन में खड़े होकर वह अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को हीलता हुआ देखकर अपनी आंख सेंकता हुआ वासना के समुंदर में डूबता चला जा रहा था,,,,

वह जब इत्मीनान से पानी पीते हुए अपने पेजामे में खड़े लंड को बार-बार अपने हाथों से दबाने की कोशिश कर रहा था तभी निर्मला की नजर पीछे गई और शुभम को अपने पीछे खड़े होकर पानी पीता देखकर वह वापस रोटी बनाते हुए बोली

तू अभी तक यही खड़ा है गया क्यो नहीं,,,,

कैसे जाऊं जब आंखों के सामने इतनी खूबसूरत औरत खड़ी हो तो बाहर कहां मन लगता है,,

( अपने बेटे की बातें सुनकर वह शुभम की तरफ देखे बिना ही मंद मंद मुस्कुरा रही थी और कुछ देर बाद पीछे घूम कर अपने बेटे की तरफ आंख तर्राते हुए बोली)

पता है ना तुझे मैंने तुझे क्या बोली हुं,, जब तक परीक्षा खत्म ना हो जाए तब तक यह सब बिल्कुल बंद,,(इतना कहकर वह वापस रोटी तवे पर पकाने लगी,, लेकिन वह तवे पर रोटी नहीं बल्कि शुभम के अरमानों को पका रही थी निर्मला की बड़ी-बड़ी मटकती गांड देखकर शुभम के मन में किस तरह की हलचल हो रही थी वह शायद निर्मला को मालूम नहीं था,, और वह उसका अंदाजा भी नहीं लगा पा रही थी इसीलिए तो वह बेफिक्र होकर उसी तरह से रसोई बनाने में मशगूल हो गई,,, और शुभम का दिल कर रहा था कि वह पीछे से जाकर अपनी मां की साड़ी उठाकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर के अंदर डाल दे,,, लेकिन परीक्षा तक यह मुमकिन नहीं था फिर भी शुभम सोचा की कोशिश करने में क्या जाता है वैसे भी उसकी मां प्यासी औरत है हो सकता है उसका मन बदल जाए,,,,

इसलिए वह अपना लंड पजामे के ऊपर से मसलते हुए अपनी मां की तरह आगे बढ़ने लगा जो कि इस समय भी अपनी मस्ती में रोटी पकाने में लगी हुई थी,, वैसे भी शुभम ने अपनी मां के साथ अपने घर के अंदर हर जगह पर उस की चुदाई करके उस वातावरण का मजा ले चुका था और सबसे ज्यादा मजा उसे किचन के अंदर ही आता था जब मैं खाना बना रही होती है,, किचन के अंदर वह कुछ ज्यादा ही उत्तेजना महसूस करता था ऐसा उसके साथ हमेशा से होता रहा है जब वह अपनी मां के साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाता था फिर भी वह जब कभी भी रसोई घर में आता था और अपनी मां को खाना बनाते देखता था तो ना जाने क्यों उसके मन में उसे चोदने की भावना होने लगती थी लेकिन वह कभी अपने मन में भी इस तरह के ख्याल नहीं आने देता था,, यह सब कुछ समय का केवल आकर्षण भर था लेकिन अब तो वह सारी हदों को पार करके अपनी मां के साथ ना जाने कितनी बार शारीरिक सुख का मजा ले चुका है,,

बस कुछ दिनों की ही बात थी परीक्षा खत्म होने के बाद उसकी मां उसे उसे चोदने के लिए कभी भी इनकार नहीं करती,, लेकिन फिर भी निर्मला की खूबसूरती और उसका आकर्षण ईतना अत्यधिक था कि कितनी बार भी उसे चोदो मन नहीं भरता, एक तरह से कह सकते हैं कि निर्मला हाड मास की बनी हुई वह बोरी थी जिसके अंदर जवानी ठुंस ठुंस के भरी हुई थी,,, ना तो जवानी खत्म हो रही थी और ना ही उससे मिलने वाला मजा,, शुभम अपनी मां की मदमस्त जवानी का पूरी तरह से गुलाम बन चुका था, और दुनिया का कोई भी मर्द गुलाम बनना क्यों नहीं चाहेगा जब उसे गुलामी के एवज में इतनी मदमस्त औरत और उसकी जवानी दोनों भागने को मिल रही हो तो कोई भी इंसान ऐसी औरतों का गुलाम बनना पसंद करेगा,,,, क्योंकि दुनिया में धन सुख से तनसुख जरा भी कम नहीं है,,, दोनों के ही समय-समय पर जरूरत होती रहती है,,, और इस समय शुभम के लिए तन का सुख बेहद जरूरी था उसके बदन में मीठा मीठा दर्द हो रहा था और यह दर्द तब तक होता रहता जब तक कि वह निर्मला की खूबसूरत बदन को अपनी बाहों में भरकर अपने कठोर अंग को उसके नाजुक अंग में उतार नहीं देता,,

अपनी मां के सामने शुभम अब किसी भी प्रकार का परदा करना जरूरी नहीं समझता था इसलिए एक झटके में ही वो अपने पजामे को उतारकर कमर के नीचे एकदम नंगा हो गया,, हवा में उसका लंड ऊपर नीचे होकर लहरा रहा था,, देखते ही देखते पीछे से जाकर वह अपनी मां को बाहों में भर लिया और अपने खड़े लंड को उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी बड़ी बड़ी गांड की दरार के बीचो-बीच धंसाना शुरू कर दिया,,

आहहहहह,,, क्या कर रहा है रे ,,,,(जैसे ही शुभम का खड़ा लंड निर्मला को अपनी मां की गांड के बीचो बीच दरार के अंदर महसूस हुआ वह चौक उठी,,,)

शुभम तुझे ना बोली हु ना कि जब तक परीक्षा खत्म नहीं हो जाता है ऐसा कुछ भी नहीं होगा,,( ऐसा कहते हुए वह शुभम को हटाने की कोशिश करने लगी ,,,लेकिन शुभम उसे कस के अपनी बाहों में दबोचे हुए उसकी गोरी गोरी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया,, शुभम यह बात अच्छी तरह से जानता था कि औरतों को उसके गर्दन और कान के नीचे वाले भाग पर चुंबन बहुत ही जल्दी उन्हें कामभावना से भर देता है,,, और वह बहुत ही जल्दी चुदवाती होकर जुड़वाने के लिए तैयार हो जाती है इसलिए सुबह भी अपनी मां को छुड़वाने के लिए तैयार करने के लिए उसकी गर्दन के साथ-साथ उसके कान के नीचे वाले भाग पर चुंबनों की बौछार करने लगा था और साथ ही अपने खड़े लंड को साड़ी के ऊपर से ही अपनी मां की गांड की दरार पर रगड़ रहा था और उसे धंसा रहा था, शुभम की यह हरकत पलभर में ही निर्मला के इरादे को बदल कर रख दी,,, अपनी गर्दन और कान के नीचे के नाजुक अंग पर शुभम के जबरदस्त चुंबनों की बौछार को महसूस करके निर्मला भी एकदम से चुदवासी हो गई,, उसके मुंह से सब दिन ही नहीं कर रहे थे वह उसी तरह से खड़ी रह गई तवे पर रोटी जलने लगी थी लेकिन इस बात की फिक्र उसे बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि जिस तरह की हरकत शुभम ने उसके साथ किया था उस से वह एक दम मस्त हो चुकी थी,, अपनी मां की तरफ से किसी भी प्रकार का विरोध होता ना देखकर शुभम अपने दोनों हाथ को धीरे से उसकी कसी हुई ब्लाउज पर रखकर उसे हल्के हल्के से दबाने लगा ऐसा लग रहा था कि मानो वह ब्लाउज में कैद दोनों कबूतरों को दाना खिला कर उन्हें बहलाने की कोशिश कर रहा,,हो,,

धीरे-धीरे हाथों की हरकत और शुभम के लंड की बगावत को वह अपने बदन पर महसूस करके वह शुभम के रंग में रंगने लगी,,, निर्मला के लिए यह परीक्षा की घड़ी थी,, अपने बेटे की कामुक हरकतों की वजह से वह अपने आप को कमजोर होता महसूस कर रही थी,, और दूसरी तरफ शुभम जोकि अपनी मां को एकदम शांत देखकर उसे लगने लगा कि उसकी मां से इंकार नहीं करेगी और वह अपनी हरकतों को जारी रखते हुए धीरे-धीरे अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा,, क्योंकि वह यह बात अच्छी तरह से जानता था एक बार साड़ी कमर तक उठ जाने के बाद अगर वह अपना लंड उसकी मां की बुर में डाल दिया तो उसकी मां उसे कभी मना नहीं कर पाएगी क्योंकि जिस तरह से सुकून की कमजोरी उसकी मां की बड़ी बड़ी गांड थी उसी तरह से निर्मला की भी कमजोरी उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंड था,,
 
शुभम के सांसो की गति तेज होने लगी शुभम को यकीन नहीं हो रहा था कितनी जल्दी उसकी मां कमजोर पड़ जाएगी,, शुभम की उत्सुकता और खुशी बढ़ती जा रही थी उसे लगने लगा कि अब उसका लंड उसकी मां की बुर के अंदर समझ लो घुसा,ही घुसा,,, वह लगातार अपनी मां के ब्लाउज में कैद दोनों कबूतरों से खेल रहा था,, खेल क्या रहा था उनसे गुटूर गू कर रहा,, था,,, निर्मला को इस बात का एहसास था कि उसका बेटा धीरे-धीरे करके उसकी साड़ी को ऊपर कमर तक उठा देगा,,, वह उसे रोकना चाहती थी लेकिन रोक नहीं पा रही थी,, शुभम की हरकतों की वजह से कमजोर पड़ती चली जा रही थी उत्तेजना के मारे उसके दोनों पैर थरथरा रहे थे,, सुभम के साथ जब भी वह शारीरिक संसर्ग बनाती तब तब उसे नया एहसास होता था,,, आज तक ऐसा कभी भी नहीं हुआ कि निर्मला को अपने बेटे के साथ संबंध बनाने में कोई परेशानी या दिक्कत आई हो या उसे ऊस संबंध से बोरिंग महसूस हुआ हो,,

शुभम के साथ उसे हमेशा से संबंध बनाने में ताजगी और आनंददायक ही महसूस होता था,,, इसीलिए तो ना चाहते हुए भी किचन में शुभम की हरकतों की वजह से वह पूरी तरह से गरमाने लगी,, सुभम अपनी हरकतों को जारी रखे हुआ था,, उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूख रहा था क्यों किया वह इस समय धीरे-धीरे अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया था,,,, साड़ी के ऊपर नहीं उठा पाया क्योंकि उसे ना जाने क्यों अपनी मां की चुचियों से खेलने का ज्यादा इच्छा हो रहा था इसलिए वह साड़ी को छोड़कर अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलकर अगले ही पल अपने मां के दोनों फड़ फडाते हुए कबूतर को ब्लाउज की कैद से आजाद कर दिया और उन्हें अपनी हथेली में लेकर जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया सुबह का समय था इसलिए निर्मला भी आज ब्रा नहीं पहनी थी,, अपनी मां की नंगी चूचियों को अपनी हथेली में पाकर शुभम इतना उत्साहित हो रहा था कि मानव जैसे उसे दुनिया का सबसे बेहतरीन फल मिल गया हो,, और वैसे भी औरत की चूची दुनिया में किसी भी स्वादिष्ट फल से कहीं ज्यादा कीमती और अनमोल होती है,,,

शुभम का मोटा तगड़ा लंड निर्मला की साड़ी के ऊपर से ही उसकी मद मस्त गांड पर रगड़ खाते-खाते इतना ज्यादा कड़क हो गया था कि मानो ऐसा लग रहा था कि लंड ना होकर एक लोहे की छड़ हो,,

निर्मला भी अपनी नरम नरम गांड पर अपने बेटे के कड़क लंड का स्पर्श पाकर एकदम मस्त होने लगी थी ना चाहते हुए भी उसके मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फुटने लगी थी,,, शुभम पागलों की तरह अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों को अपनी हथेली में भर-भर कर उसे दबा रहा था और हल्के हल्के अपनी कमर को गोल-गोल घुमाते हुए अपनी मां की मदमस्त गांड पर अपने लंड को रगड़ रहा था,,, अब सुभम के बर्दाश्त के बाहर था क्योंकि उत्तेजना के मारे निर्मला भी अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेलते हुए गोल गोल अपने बेटे के लंड पर घुमा रही थी,,,,।

निर्मला की हरकत शुभम के लिए अपनी मां की तरफ से हरी झंडी का इशारा था,,, शुभम अपनी मां की चूचियों पर से अपना हाथ हटाकर धीरे-धीरे अपनी मां की साड़ी को ऊपर उठाना शुरू कर दिया और देखते-देखते अपनी मां की साड़ी को कमर तक ऊपर उठा दिया,, उसका आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब उसने यह देखा कि उसकी मां ने पेंटी पहनी नहीं थी उसे लगने लगा कि शायद उसकी मां नखरा कर रही थी उसे भी चुदवाने की आग लगी हुई थी,,, इसलिए वह आव देखा ना ताव अपने लंड को उसकी गांड की दरार के बीचो-बीच रख करें बिना देखे ही निर्मला की बुर के गुलाबी छेद में डालने की कोशिश करने लगा,, दूसरी तरफ निर्मला की हालत खराब होती जा रही थी,, वह भी अपने बेटे से चुदवाने के लिए अपने बदन की जरूरत के आगे घुटने टेक दी थी,, वह भी जल्द से जल्द अपने बेटे को अपनी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद में ले लेना चाहती थी लेकिन तभी उसे इस बात का अहसास हुआ कि वह जो कर रही है वो गलत कर रही हैंं,,, क्योंकि उसके बेटे की परीक्षा शुरू होने वाली है अगर वह आज उसे चोदने देगी उसके बदन की गर्मी के आगे घुटने टेक देगी तब वह भी परीक्षा के दौरान भी उससे चुदाई का मजा तो लूट लेगी,,, लेकिन परीक्षा के दरमियान उसके बेटे का मन पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लगेगा और ऐसे में अगर वह फेल हो गया तो एक टीचर का लड़का होने के नाते कितनी बदनामी होगी,, और ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी,,, वह सब सोच ही रही थी कि तभी शुभम के लंड का मोटा सुपाड़ा गुलाबी बुर के गुलाबी छेद को ढूंढता हुआ धीरे धीरे अंदर की तरफ सरकना शुरू ही किया था कि तभी निर्मला अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपनी बेटे के लंड को कस के पकड़ लिया और उसकी आंखों में देखते हुए उसे बाहर की तरफ करके अपनी साड़ी को नीचे गिरा दी,, शुभम को समझ में नहीं आया कि उसकी मां ये क्या कर रही है जबकि वह भी पूरी तरह से तैयार हो गई थी चुदवाने के लिए,, इसलिए वह आश्चर्य से अपनी मां से बोला ,,

यह क्या कर रही हो मम्मी पूरा डालने तो दो,,

पूरा क्या तुझे में 1 इंच भी डालने नहीं दूंगी,,,( इतना कहकर वह शुभम के लंड को अपने हाथ से छोड़ दी,, लंड को छोड़ते हैं निर्मला की नजर उस पर पड़ी तो ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बुरी तरह से हांफ रहा हो ऐसा जान पड रहा था कि जैसे किसी के चेहरे पर से ऑक्सीजन का मास्क हटा दो तो कैसे उसकी सांस फूलने लगती है उसी तरह से शुभम के लंड का भी यही हाल था एक पल के लिए तो उसका मन हुआ कि एक बार अपने हाथ से ही पकड़ कर उसे अपनी बुर का रास्ता दिखाते हुए उसे एक बार फिर से अपनी बुर के अंदर ले ले लेकिन फिर अपना मन कठोर कर के वह बोली,)

सुबह में क्या कर रहा है तू,, तेरी परीक्षा शुरू होने वाली और तेरा ध्यान इन सब पर है अरे हमेशा से चुदाई करता आ रहा है कुछ दिन पढ़ाई कर ले मैं नहीं चाहती कि टीचर का लड़का होने के बावजूद तू फेल हो,,( शुभम के मोटे तगड़े हिलते हुए लंड से अपनी नजर हटाते हुए बोली क्योंकि वह जानती थी कि अगर वह उसके लंड को निहारती रही तो उसका मन फिर से उसे अपनी बुर के अंदर लेने को करने लगेगा,,)

लेकिन मम्मी,,,,( सुभम ईससे ज्यादा कुछ बोलता उससे पहले ही निर्मला उसे चुप कराते हुए बोली,,)

मैं कुछ नहीं सुनना चाहती जब तक परीक्षा खत्म नहीं हो जाती तब तक यह सब बिल्कुल बंद,,,( इतना कहकर वह रसोई घर से बाहर निकल गई,, और शुभम अपनी मां को अपनी गांड मटका कर जाते हुए देखता रह गया, वह कभी अपने खाली लगने की तरह तो कभी अपनी मां की गांड की तरफ देख रहा था उसके सपनों पर पानी फिर गया था ऐसा लग रहा था कि जैसे नींद से उठाने के लिए उसके ऊपर कोई एक बाल्टी ठंडा पानी डाल दिया हो,, जब उसका मन थोड़ा शांत हुआ तो उसे इस बात का अहसास हुआ कि उसकी मां जो कह रही थी सच कह रही थी अगर वास्तव में है फेल हो गया तो बड़ी बदनामी होगी इसलिए अभी अपना सारा ध्यान पढ़ाई में लगा दिया और कुछ दिन बाद उसकी परीक्षा भी शुरू हो,, गई,, शुभम की परीक्षा अच्छी जाने लगी उसके पेपर बहुत अच्छे जा रहे थे वह अच्छी तरह से पेपर लिख कर घर आ रहा था,,, दूसरी तरफ रुचि की हालत खराब होती जा रहीं थी उसे अब सुबह शाम शुभम के लंड की लत लग गई थी,,, क्योंकि शुभम जानता था कि उसके पास इतना समय बिल्कुल भी नहीं था कि वह रुचि के पीछे 3,,,,4 घंटे बिता कर उसकी इत्मीनान से और जमकर चुदाई कर सके,,, लेकिन संध्या के समय छत पर चोरी चोरी रुचि की चुदाई जारी थी शुभम एक भी दिन खाली नहीं जाने दे रहा था वह रोज रुची की छत पर चुदाई करता था क्योंकि वह जानता था कि परीक्षा के दौरान एक यही सही जगह थी जहां पर वह अपने तन की प्यास बुझा सकता था,, रुचि को अब ईसमें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी क्योंकि सुभम ने उसे सब कुछ बता दिया था,, रुचि भी नहीं चाहती थी कि शुभम किसी भी परीक्षा में फेल हो वह उसे उत्तीर्ण होता देखना चाहती थी भले ही वह पढ़ाई के मामले में हो या चुदाई के,,

धीरे-धीरे शुभम की परीक्षा खत्म हो गई लेकिन अभी तक सरला घर वापस नहीं आई थी क्योंकि रुची ने उसे फोन करके सब कुछ बता दी थी इसलिए दस 15 दिन और रुकना चाहती थी ताकि रुचि शुभम सिंह चुदाई करवा कर अपने पांव भारी करवा ले और इसी में रुचि दिन-रात लगी हुई थी,,

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बहु तुझे शादी की सालगिरह की ढेर सारी बधाई,, भगवान करे तु हमेशा खुश रहे और जल्द ही तेरी गोद हरी हो जाए,,

ओहह,, मम्मी जी बहुत-बहुत धन्यवाद मुझे तो याद ही नहीं था अच्छा हुआ आपने फोन करके मुझे याद दिला,,दीया,, क्या करूं मम्मी अपने दुखों से इतना दुखी हो गई हो कि इन सब का मुझे ध्यान ही नहीं रहा,,,( आज रूचि की शादी की सालगिरह की और सरला उसे उसकी शादी की सालगिरह की बधाई देते हुए फोन की थी जिसे रुचि अभी अभी नहा कर अपने बदन पर केवल टावल लपेटकर बाहर आई ही थी कि, मोबाइल की घंटी बज उठी और वह मोबाइल स्क्रीन पर अपनी सासू मां का नंबर देख कर उसे रिसीव कर ली,,)

तू इतना दुखी मत हुआ कर बहू यह तो किस्मत का लेखा है भला कौन मिटा सकता है,,, और वैसे भी तो भगवान एक दरवाजा बंद करता है तो दूसरा खोल भी तो देता है,,

हां मम्मी आप सही कह रही हैं,,,( रुचि उसी तरह से टावल लपेटे हुए ही फोन पर बात करते हुए अपने कमरे में चली, गई,,, और कमरे में प्रवेश करते ही अपने बदन पर से उस टावल को भी निकाल कर फर्श पर फेंक दी और पूरी नंगी हो गई,, और उसी तरह से अपने बेड पर बैठ कर इत्मीनान से अपनी सास से बात करने लगी क्योंकि उसे इतना तो मालूम ही था कि उसके घर में उसके सिवा कोई नहीं है इसलिए कपड़े पहने या ना पहने कोई फर्क पड़ने वाला नहीं था,, पर वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,)

मम्मी जी आपको वहां अच्छा तो लग रहा है ना,, मेरी वजह से आपको इतनी तकलीफ झेलनी पड़ रही है जिसके लिए मैं शर्मिंदा हूं,,,

नहीं नहीं बहू ऐसा बिल्कुल भी नहीं है,,,, मैं यहां बिल्कुल ठीक हूं,, तू बता तेरा कैसा चल रहा है शुभम तुझे चोदता तो है ना,,( चुदाई वाली बात मुंह से निकलते ही सरला एकदम से अंदर ही अंदर तड़प उठी अब वह अपनी बहू से कैसे कह दें कि उसे शुभम से चुदवाने की बहुत इच्छा हो रही है उसका लंड अपनी बुर में लेकर मस्त होने की इच्छा हो रही है,,)

हां मम्मी शुभम तो मेरी रोज चुदाई करता है,,

तो क्या तेरा जी मचलता है कि नहीं उल्टी जैसा कुछ महसूस होता है या खट्टा खाने को,,,,

नहीं मम्मी ऐसा तो अभी कुछ भी नहीं होता है सब कुछ सामान्य ही है,,,

बहु जब वो तेरी चुदाई करके अपना पानी निकलता है तो तेरी बुर के अंदर पूरा पानी डालता है या लंड बाहर निकाल लेता है,,,,

नहीं मम्मी मैं जब तक उसके लंड का पूरा पानी अपनी बुर के अंदर नीचोड़ नहीं लेती तब तक उसके लंड को छोड़ती नहीं हूं,,,,( इस तरह की गंदी बातें करके रुची के तन बदन में फिर से आग लगने लगी थी,, वह अपनी टांगे फैलाकर अपनी हथेली से हल्के हल्के अपनी बुर के गुलाबी पत्तियों को मसलते हुए अपनी सास से बात करना जारी रखी)

हां बहु ठीक है ऐसा ही करना उसके लंड से निकला पानी ही तेरी गोद का भर सकती है,,, वही तेरी और मेरी दोनों की उम्मीद है इसे जाया मत होने,,देना,,,( रुचि के साथ-साथ इस तरह की बातें करके सरला की भी हालत खराब होती जा रही थी एक तो वैसे ही काफी दिन हो चुके थे अपनी बुर के अंदर शुभम के मोटे तगड़े लंड की चौड़ाई और उसकी रगड़ को महसूस किए हुए जिससे सरला एकदम से चुदवासी हो गई थी और वह बिस्तर पर थोड़ा पीछे की तरफ से होकर अपनी साड़ी को अपनी कमर तक खींचकर ऊपर कर दी और अपनी नंगी बुर पर वह भी रुचि की तरह अपनी हथेली को जोर जोर से मसलने, लगी,,)

आप बिल्कुल भी चिंता मत करो मम्मी मैं सब कुछ संभाल लूंगी,,, बस इस बात का ख्याल रखना मम्मी की इस बारे में किसी को कानों कान खबर नहीं होनी चाहिए वरना मेरे साथ साथ पूरे परिवार की बदनामी हो जाएगी,,,,(रुचि अपनी हथेली से अपनी बुर को रगडते हुए बोली,,)

बहु तु पागल हो गई है क्या इस बारे में सिर्फ मुझे मालूम है और एक तुझे तीसरे किसी को भी नहीं मालूम है हां शुभम को इस बारे में कभी भनक भी नहीं लगने देना कि तू ऊससे चुदवा कर मां बनना चाहती है वरना भविष्य में मुसीबत हो जाएगी,,,,( मां बनने वाली बात से सरला के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और वह अभी तक बुर को हथेली से मसल रही थी जिसमें वह अपनी दो उंगली को एक साथ अपनी बुर के अंदर डालकर उसे अंदर-बाहर करने लगी,)

नहीं मम्मी जी मेरी तरफ से किसी भी प्रकार की चूक नहीं होगी मैं शुभम को यह भनक तक नहीं लगने दे रही हु कि मैं उससे सिर्फ मां बनने के लिए चुदाई करवा रही हुं,,, बस उसे ही एहसास करा रही हूं कि मुझे मजा लेना है,,

हां बहु ऐसा ही करना,,,,( ऐसा कहते हुए सरला अपनी दोनों मिली को जोर-जोर से अपनी बुर के अंदर बाहर करते हुए बोली जिसकी वजह से उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी की आवाज उसके मुंह से फूट पड़ी,) ससहहह,,,,आहहहह,,,

क्या हुआ मम्मी दर्द हो रहा है क्या,,,?

हमारे इधर सीढ़ियां कुछ ज्यादा ही उतरना चढ़ना पड़ता है ना इसलिए घुटनों में दर्द हो रहा है,,( अपनी मस्ती भरी आवाज को दर्द का नाम लेकर बात को सरला छुपा ले गई,,)

मैं होती तो आपके घुटनों में मालिश कर देती जिससे आपको आपको राहत मिल जाती,,

तू बहुत अच्छी है बहू जो मेरा इतना ख्याल रखती है,,

अच्छी तो आपने मम्मी जी जिसने मुझे इस तरह के कदम उठाने के लिए अपनी तरफ से खुली छूट दे दी हो,

यह सब किस्मत का खेल है बहु इसमें मेरा हाथ कुछ भी नहीं है मैं एक औरत होने के नाते औरत की तकलीफ को समझ सकती हूं,, जैसे एक औरत होने के नाते तूने मेरी तकलीफ को समझकर शुभम वाली बात को अपने दिल से निकाल दी,,,, और तेरी तो अभी शुरुआत है तेरी तो अभी जवानी के दिन है खेलने खाने के दिन है ऐसे में मेरा बेटा तुझे कोई खुशी नहीं देता था इसमें मेरी ही गलती है मैं तो तेरी खुशी में शामिल होना चाहती हूं तेरी दुख को दूर करने के लिए तुझे इस तरह की खुली छूट दी हूं,,,, तो बिल्कुल भी चिंता मत कर शुभम से जमकर चुदवा।,,,

जैसा आप कह रही है वैसा ही हो रहा है मम्मी,,( रुचि अपनी बुर को मसलते हुए बोली,,,)

( सास बहू दोनों को इस तरह की बातें करने में बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी दोनों के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी दोनों एकदम पूरी तरह से गर्मा रही थी दोनों को इस समय मोटे तगड़े लंड की आवश्यकता जान पड़ रही थी,,, किस्मत का अजीब खेल था एक साथ अपनी ही बहू को दूसरे मर्द के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहती है और उसकी बहू भी दुनियादारी को भूलकर गैर मर्द जो कि एक नौजवान छोकरा ही था उसके साथ चुदाई का भरपूर आनंद लेती है सिर्फ और सिर्फ मजे लेने के लिए और अपनी सूनी गोद को हरी करने के लिए,,, सरला के लिए यह मजबूरी कहें या उसकी जरूरत है वह दोनों के बीच में फंसी हुई थी क्योंकि वह अपनी बहू के द्वारा गैर छोकरे के साथ चुदाई करवाते हुए पकड़ा चुकी थी और अपनी इस गलती को छुपाने के लिए वह उस लड़के से अपने बहु के साथ शारीरिक संबंध बनवा चुकी थी,, और दोनों जिस तरह से बातें कर रहे थे लगता ही नहीं था कि दोनों रिश्ते में सास और बहू है ऐसा लग रहा था कि दोनों सहेलियां है,,, कुछ भी हो इसमें दोनों का फायदा था एक तरफ रूचि थी जो अपने पति से शारीरिक रूप से संतुष्ट नहीं थी और मेडिकल रिपोर्ट के बाद से तो वह आसा ही छोड़ दी थी कि वह कभी मां बन पाएगी,, लेकिन शुभम से मिलने के बाद से उसकी उम्मीद बढ़ चुकी थी और उसकी आशाओं को नए पर लग चुके थे वह शुभम से शारीरिक संबंध बनाकर शारीरिक रूप से पूरी तरह से संतुष्ट भी हो रही थी और उसके द्वारा वह मां भी बन सकती थी और दूसरी तरफ सरला थे जो कि उम्रदराज औरत होने के बावजूद भी शुभम के आकर्षण में कुछ इस तरह से बंध गई कि वह उसके साथ शारीरिक संबंध बना लिया और उसके साथ रोज चुदाई का आनंद लेने लगी थी और ऐसे में उसकी चोरी पकडे जाने पर अपनी बहू को भी इस खेल में शामिल कर ली जो कि अपनी चोरी पकड़े जाने के बाद रुचि से सरला यह बात कह कर उससे से शारीरिक संबंध बनाने को बोली थी जबकि रुचि खुद ही पहले से ही शुभम से चुदाई का आनंद ले चुकी थी,,, इसमें सास बहू दोनों का फायदा था दोनों किसी न किसी तरीके से अपना उल्लू सीधा करना चाहते थे मेडिकल रिपोर्ट वाली बात तो बस एक बहाना था अपने तरीके से मजा लेने के लिए,, खैर जो भी हो दोनों को मजा आ रहा था तभी तो फोन पर इस तरह की बातें करके दोनों मस्त हुए जा रहे थे सरला अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए चटकारा प्राप्त करने के लिए बोली,,)

वह मुझे समझ में नहीं आ रहा है की शुरुआत कैसे हुई मतलब कि तू इस तरह की औरत तो है नहीं कि सामने से चलकर उसे बोलेगी कि तू से चुदवाना चाहती हैं तो यह शुरुआत कैसे हुई,,( सरना अपनी दोनों उंगलियों को अपनी बुर के अंदर बाहर करते हुए बोली,, और रुचि भी अपनी बात को नमक मिर्च लगाते हुए अपने साथ के आगे उसे पेश करते हुए बोली,,)

मम्मी जी मुझे बहुत डर लग रहा था मैं जानती थी कि मैं ऐसा कुछ भी नहीं कर पाऊंगी लेकिन फिर भी आप जैसा कह रही थी वैसा करना बहुत जरूरी था इसलिए मैं थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए छत पर चली गई और सूखे हुए कपड़े रस्सी पर से उतारने लगी वहीं पर सुभम कसरत कर रहा था किसी न किसी बहाने उसे बातें करते हुए में कपड़े गिरा कर उसे उठाने के लिए नीचे झुकी,, झुकने से पहले ही में अपने ब्लाउज के बटन को खोल कर रखी थी जिससे मेरी शादी चूचियां बाहर कुछ अलग गई और उसे देखकर वह पूरा जोश में आ गया और वह मुझे छत पर ही पकड़ लिया,,, और उसके बाद उसने जो किया मैं इनकार नहीं कर पाई,,,

सही सही बताना बहू उसका लंड तुझे कैसा लगा,,,? ( सरला बातों ही बातों में चटकारे लेते हुए बोली.. अपनी बुर को मसलते हुए रुचि भी इस बात से एकदम से गर्मा गई और वह अपने बिस्तर पर से उठ कर किचन की तरफ जाने लगी,,,)

आप सच कह रही थी मम्मी मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि एक मर्द का लंड ऐसा हो सकता है मैं तो आपके बेटे के छोटे से लंड से चूदवाकर कर सच में मजा नहीं ले पा रही थी,,,,( ऐसा कहते हुए रुचि रसोई घर में जाकर फ्रीज खोल कर उसमें से एक मोटा तगड़ा बैगन निकाल ली,, और अपनी एक टांग उठा कर उसे टेबल पर रख कर अपनी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद में उस बैगन को डालकर अंदर-बाहर करने लगी,,, लेकिन बड़ी मुश्किल से अपने मुंह से निकल रही सिसकारी पर कंट्रोल किए हुए थी अपनी बहू की बात सुनकर सरला बोली,,।)

मैं कहती थी ना बहू कि उसके लंड में अजीब सा आकर्षण है एक बार औरत अगर उसके लंड को अपनी बुर में ले ले तो वह उसकी दीवानी हो जाए।

हां मम्मी जी आप बिल्कुल सही कह रही हो जो तुम्हारे साथ हुआ उसमें आपकी कोई गलती नहीं,,,( वह उसी तरह से उस बैगन को अपनी दूर के अंदर बाहर करते हुए बोली अपनी बहू की बात सुनकर सरला को अंदर ही अंदर बहुत राहत महसूस हो रही थी।)

अच्छा एक बात बता दिन में कितनी बार तेरी चुदाई करता है,,,

कहां,, मम्मी उसकी परीक्षा चल रही थी तो कहां पर हर रोज चुदाई करता था,, शाम के वक्त ही जब कसरत करने के लिए छत पर आता था तभी उसे मौका मिलता था और तभी मेरी चुदाई करता था,,

लेकिन अब तो उसकी परीक्षा खत्म हो गई है ना,,,

हां तो अब करेगा,,,

बहु तुझे तो मजा आ जाता होगा जब वह अपना मोटा लंड तेरी बुर में डालकर जोर जोर से धक्के लगाता होगा,,,

मम्मी पूछो मत आप तो अच्छी तरह से जानती है कि एक बार जब अपना लंड बुर में डाल देता है तो इतनी जोर जोर से धक्के लगाता है कि मानो कोई मशीन चल रही हो रुकता ही नहीं,,,( शुभम की मर्दानगी के बारे में बताते हुए रुचि इतनी मस्त हो गई थी कि उस बैगन को अपनी बुर की गहराई में जोर-जोर से डालते हुए अंदर बाहर कर रही थी,,)

लेकिन कुछ भी हो मजा आ जाता है ना,,,,

हां मम्मी बहुत मजा आ जाता है,,,

बस ऐसे ही अपने काम में लगे रहे और जल्दी से जल्दी मुझे दादी बनने का सुख दिला,,,, हमें रखती हूं बहु अपना ख्याल रखना,,,, (इतना कहते हुए सरला फोन कट कर दी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि वह जब झड़े तो उसके मुंह से निकलने वाली गर्म सिसकारी की आवाज उसकी बहू को सुनाई दे क्योंकि वह जल्द से जल्द झड़ने वाली थी और इसलिए वह फोन कट करके जोर जोर से अपनी उंगली को अपनी बुर के अंदर-बाहर करने लगी,,, और यही हाल रुचि का भी था जैसे ही फोन कट हुआ मोबाइल को टेबल पर रख कर वह उस बैगन को जोर-जोर से अपनी बुर के अंदर बाहर करने लगी और देखते ही देखते वह बड़ी मस्ती के साथ झड़ गई। वासना का तूफान शांत होते ही उसे अपनी स्थिति का भान हुआ तो वह शर्मा कर मंद मंद मुस्कुराने लगी क्योंकि वह नहाने के बाद से अब तक पूरी तरह से नंगी ही अपने घर में इधर से उधर घूम रही थी आज उसकी शादी का सालगिरह था और वह अपनी इस सालगिरह को अच्छी तरह से मनाना चाहती थी क्योंकि शादी के बाद से अपनी सालगिरह मना नहीं पाई थी क्योंकि सालगिरह के दिन उसका पति घर पर कभी नहीं होता था लेकिन आज वह अपनी शादी की सालगिरह को शुभम के साथ मनाना चाहती थी और वह भी उसके साथ जमकर चुदाई का आनंद ले कर यह ख्याल मन में आते ही वह मंद मंद मुस्कुराने लगी और अपने घर का काम करने के लिए किचन से बाहर चली गई।

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रुचि आज बहुत खुश नजर आ रही थी ,,,,आज उसकी शादी की सालगिरह थी ऐसे में उसके परिवार का एक सदस्य भी घर पर नहीं था लेकिन उसे कोई दुख नहीं था इस बात का क्योंकि आज कि वह शादी की सालगिरह शुभम के साथ मनाना चाहती थी,,,, इसलिए वह तैयार होकर बाजार के लिए निकल गई उसे कुछ सामान खरीदना था ,,ताकि आज अपनी सालगिरह पर कुछ नया कर सकें ।

दोपहर के 1:00 बज रहे थे धूप काफी थी जिससे रुचि को भी गर्मी का एहसास हो रहा था ऐसे में वह बाजार में घर का सामान खरीद रही थी,,, आज वह शुभम को खाने पर बुलाना चाहती थी जिसके लिए उसने पूरी तैयारी करते हुए पनीर हरी मटर कुछ कोल्ड ड्रिंक्स वगैरा-वगैरा खरीद चुकी थी,,, वह खरीदी कर चुकी थी गर्मी की वजह से उसका पूरा बदन पसीने से तरबतर हो चुका था। लेकिन फिर भी उसे इस बात का कोई गम नहीं था क्योंकि आज शादी के बाद पहली बार वह इस तरह से खुले में अकेले बाजार घूमने निकली थी। पर शादी के बाद औरत की जिंदगी कितनी बदल जाती है यह बात वह अच्छी तरह से जानती थी।

इसलिए वह कुछ दिन की आजादी का भरपूर फायदा उठाना चाहती थी इसलिए तो पसीने से तरबतर होने के बावजूद भी वह खुश नजर आ रहे थे उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी जो कि हर मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी पीली साड़ी में उसका गोरा बदन और भी ज्यादा खिल उठ रहा था,,,

उसके दोनों हाथों में सामान से भरे हुए थैले थे जिसकी वजह से वह कुछ तन कर चल रही थी और इस वजह से उसके दोनों कबूतर कुछ ज्यादा ही बाहर की तरफ निकल कर फड़फड़ाते हुए नजर आ रहे थे,,, मर्दों के लिए तो इसी पल का जैसे बेसब्री से इंतजार होता है और जिस तरह से चल रही थी उसके ब्लाउज में से उसके निप्पल कुछ ज्यादा ही भाले की तरह निकली हुई थी ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी उसकी निप्पल ब्लाउज फाड़ कर बाहर आ जाएगी और यह बात रुचि भी अच्छी तरह से समझ रही थी क्योंकि बार-बार उसका ध्यान अपनी दोनों चुचियों पर चला जा रहा था लेकिन फिर भी वह इस बात से बेहद असहज थी पर वह सामान्य तौर पर ही अपने कदम आगे आगे बढ़ाते हुए आगे बढ़ रही थीं,,,

थैले का वजन कुछ ज्यादा था जिससे उससे उठाया नहीं जा रहा था,,, और वचन उठा कर चलने की वजह से बार-बार उसकी कमर लचका जा रही है उसके पीछे चल रहे मर्दों की नजर उसकी गोल गोल गांड पर टिकी हुई थी जो कि उसके कदम बढ़ाने के लय के साथ ही उसकी गांड कुछ ज्यादा ही मटक रही थी,,,, उसके गोल गोल नितंबों को देखकर हर मर्द की आह निकल जा रही थी क्योंकि रुचि के बदन में अभी जवानी की शुरुआत हुई थी उसका बदल का हर एक अंग धीरे-धीरे विकसित हो रहा था,,, वजनदार थैला उठाकर चलने में उसे थोड़ी बहुत परेशानी तो हो ही रही थी लेकिन फिर भी वह आज की पार्टी जो कि सिर्फ वह शुभम को देना चाहती थी उस वजह से काफी उत्साहित भी थी,,,,

वह फुटपाथ पर अकेले पैदल चली जा रही थी कि तभी उसे सामने से मोटरसाइकिल पर आता हुआ शुभम दिखाई दिया उस पर नजर पड़ते ही रुचि के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगी और वह तुरंत चिल्लाकर उसे आवाज दी,,,

शुभम,,,,,,वो,,,,,, शुभम,,,,,

( अपना नाम सुनते ही शुभम इधर-उधर देखने लगा तो तभी उसे सामने रोड के दूसरी छोर पर रुचि दिखाई दी जिसके हाथों में बड़े-बड़े दो थेले थे वह देख कर समझ गया कि वह खरीदी करने आई है और उसे देखकर वह काफी खुश भी नजर आ रहा था वह तुरंत अपनी मोटरसाइकिल उसकी तरफ मोड़ दिया और तुरंत उसके पास जाकर बाइक खड़ा करता हुआ बोला,,,)

क्या बात है भाभी आज बड़ी शॉपिंग करने निकली हो,,,,

क्यों मैं शॉपिंग करने नहीं आ सकती क्या ,,,,

नहीं ऐसी बात नहीं है,,,आ सकती हो लेकिन इतनी दोपहर में कितनी धूप लग रही है और आप को देखो पूरे पसीने से भीग गई हो,,(, ऐसा कहते हुए शुभम की नजर सीधे उसके ब्लाउज पर गई जो कि पसीने से भीगी होने की वजह से उसकी चॉकलेटी रंग की निप्पल हल्की-हल्की नजर आ रही थी और उस पर नजर पड़ते ही वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

क्या बात है भाभी आज बाजार से बहुत ही अच्छे किस्म की चॉकलेट खरीदी हो लगता है,,,,

चॉकलेट ,,,,नहीं तो मैंने कोई चॉकलेट नहीं खरीदी हुं,,,( शुभम की बात सुनकर रूचि आश्चर्य से बोली ,,,)

लेकिन मुझे तो दिखाई दे रही है भाभी ,,,,,

लेकिन मैंने तो कोई भी चॉकलेट नहीं खरीदी हुं ,,,तो तुम्हें कैसे दिखाई दे रही है,,,

तुम्हारी ब्लाउज में,,,,,( शुभम एकदम बेशर्म की तरह बोला और शुभम की बात सुनकर उसकी नजर सीधे अपने ब्लाउज के ऊपर गई तो उसे अपनी स्थिति का आभास हुआ और वह शर्मा गई,,,)

धत्,,,, तू बड़ा बेशर्म है,,,,,

अच्छा मैं देख लिया तो बेशर्म हूं और तुम दिखा रही हो तो,,,

तो मैं जानबूझकर थोड़ी दिखा रही हु ये तो पसीने की वजह से ऐसा हो गया है ,,,,

चलो जैसे भी हुआ है लेकिन मैं तो बहुत ही स्वादिष्ट चॉकलेट,,,,

इसका स्वाद लेना है तो आ जाना घर पर आज मेरी शादी की सालगिरह है,,,,( रुचि शरमाते हुए बोली,,)

क्या बात है भाभी आज आपकी शादी की सालगिरह है लेकिन सालगिरह तो अपने पति के साथ मनाते हैं मुझे क्यों बुला रही हो,,,

तेरे काम भी तो सब पति वाले ही है ,,,

कौन से काम भाभी जी चुदाई वाले,,,,

थोड़ा शर्म तो कर कोई आते-जाते सुन लेगा तो क्या सोचेगा मेरे बारे में,,,( रुचि इधर उधर देख कर बोली )

कोई नहीं सुनेगा भाभी,,,

अच्छा ये बता शाम को खाने पर आएगा कि नहीं मैंने तेरे लिए ही शाम को छोटी सी पार्टी रखी हुं वह भी सिर्फ तेरे लिए ही इसलिए लिए खरीदी करने आई हुं,,,,

सच भाभी सिर्फ मेरे लिए ही,,,,,

हा रे सिर्फ तेरे लिए ही ,,,,

तब तो बहुत मजा आएगा भाभी सिर्फ मैं और तुम बहुत मजा आएगा,,,,,

तभी तो तुझे बुला रही हूं आएगा ना ,,,,

जरूर आऊंगा भाभी लेकिन मम्मी ,,,,(थोड़ा सोचने के बाद) कोई बात नहीं मैं जरूर आऊंगा आप बुलाओ और मैं ना आऊं ऐसा हो नहीं सकता लेकिन मुझे तुम्हारी यह चॉकलेट (चूची की तरफ इशारा करते हुए) खिलानी पड़ेगी ,,,,

जरूर खा लेना यह सब तेरा ही तो है (रुचि मुस्कुराते हुए बोली )अब चल मुझे जल्दी से अपनी गाड़ी पर बैठा कर घर पर छोड़ दे बहुत तेज धूप लग रही है,,,

अभी लो भाभी( इतना कहकर शुभम अपनी मोटरसाइकिल को घुमा लिया और रुची दोनों थैले को मोटरसाइकिल में टांग कर अपनी मदमस्त गोलाकार गांड को मोटरसाइकिल की सीट पर रखकर बैठ गई और एक हाथ उसके कंधे पर रख ली ऐसा लग रहा था कि जैसे वह उसका पति हो ,,,,वो बहुत खुश नजर आ रही थी शुभम भी मोटरसाइकिल की एक्सीलेटर देकर मोटरसाइकिल को आगे बढ़ा दिया उसके मन में उत्सुकता बढ़ती जा रही थी वह शाम का इंतजार करने लगा था रुचि का घर आ गया रुची को वही उतार कर अपने घर चला गया,,,।
 
शुभम का समय आज काटे नहीं कट रहा था वक्त की सुई बहुत ही धीरे-धीरे गुजर रही थी बार-बार उसकी नजर दीवार से लगी हुई घड़ी पर चली जा रही थी जिसमें अभी भी काफी समय था,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था और उसके मन में रुचि के घर जाने की उत्सुकता कुछ ज्यादा ही बढ़ती जा रही थी क्योंकि उसे मालूम था कि वह सिर्फ खाने के लिए ही नहीं बुलाई है ,,,,बल्कि एक औरत के साथ मर्द का जो काम होता है वही करवाने के लिए बुलाई है,,, वैसे भी अब उसके पास समय ही समय था लेकिन एक छोटी सी समस्या उसके सामने थी कि वह अपनी मां से कैसे इजाजत मांगेगा घर से बाहर जाने के लिए क्योंकि उसकी मां रात को घर से बाहर जाने की इजाजत कभी नहीं देती थी,,,, इसलिए उसके मन में एक युक्ति सूझी और वहां अपनी मां के पास गया जो कि रसोई घर में खाना बना रही थी धीरे-धीरे करके शाम ढल चुकी थी,,,, वह पीछे से जाकर अपनी मां को बाहों में भर लिया और उसके कान में धीरे से बोला।

आई लव यू मम्मी तुम बहुत अच्छी हो ,,,,,

आज यह मस्का किस लिए,,,( निर्मला उसी तरह से आटा गुंथते हुए बोली,,)

मस्का कहां लगा रहा हूं मम्मी मैं तो सच कह रहा हूं आप बहुत अच्छे हो,,,,

बेटा मैं तेरी मां हूं अच्छी तरह से जानती हूं कि तुम मुझे मस्का लगा रहा है जरूर कुछ काम निकालना है,,,

क्या बात है मम्मी आप तो सब कुछ जानती हो मम्मी आपसे एक काम था क्या काम था बोल,,,

अरे वाह मम्मी आपके सब कुछ जानती हो तो मम्मी ने एक बात बोलूं,,,

बोल,,,,

क्या ना मम्मी मेरे दोस्त लोग ना अच्छे से परीक्षा खत्म हो गई ना इसके लिए एक छोटी सी पार्टी रखे थे मतलब कि उस का जन्मदिन भी है और वह,,,, मैं तो जाने वाला नहीं,,,,, था लेकिन उसकी मम्मी पापा ,,,,,ही मुझे खासतौर पर बुलाए हैं इसलिए मुझे,,,,,, अगर आप कहो तो मैं चला जाऊं,,,,( शुभम अपनी मां से डरते डरते हक लाते हुए बोला कि को अच्छी तरह से जानता था उसकी मां ज्यादातर उसे घर से बाहर और वह भी रात के समय जाने नहीं देती थी,,,)

शुभम तू तो जानता है कि मैं तुझे रात के वक्त कहीं नहीं जाने देती लेकिन फिर भी तो कह रहा है तो आज मैं तुझे जाने की इजाजत दे देती हूं लेकिन जल्दी आ जाना,,,

( शुभम कोई ऐसी उम्मीद अपनी मां से बिल्कुल भी नहीं थी वह यही सोच रहा था कि उसकी मां घर से बाहर जाने की इजाजत उसे नहीं देगी लेकिन जैसे ही वह उसे जाने की इजाजत थी वह अपने आप को रोक नहीं पाया और अपनी मां के गले से लग गया वह काफी खुश था और वह जल्दी से जा कर तैयार होने लगा,,,, घड़ी में 8:00 का समय हो रहा था वह काफी उत्साहित हो रहा था क्योंकि अब समय आ गया था उसके घर जाने के लिए इसलिए वह घर से बाहर जाने के लिए निकला तो उसकी मां उसे रोकते हुए बोली,,,)

तू अपने दोस्त के घर जाएगा कैसे बाइक लेकर जा रहा है,,,

नहीं मम्मी बाइक लेकर मैं नहीं जा रहा हूं आगे रास्ते से मेरा दोस्त अपनी गाड़ी पर मुझे ले जाएगा,,,

कोई बात नहीं आराम से जाना,,,,

हां मम्मी में आराम से जाऊंगा,,,( ईतना कहकर वो घर से बाहर निकल गया और सब से नजरें बचाते हुए खास करके अपनी मां से वह तुरंत सरला के घर गया और बेल बजा दिया,,, रुचि अच्छी तरह से जानती थी कि उसके घर पर इस समय केवल शुभम ही आने वाला है इसलिए वह पहले से ही सारी तैयारी करके रखी हुई थी जैसे ही बेल बजी वह तुरंत दरवाजा खोल दी और जैसे ही दरवाजा खुला शुभम अंदर का नजारा देखकर एकदम दंग रह गया उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,, लाल रंग की ट्रांसपेरेंट गाउन और वह भी इतनी छोटी जैसे कि किसी छोटी लड़की की ड्रेस हो उसकी जांघों तक आ रही थी और उसमें से उसकी लाल रंग की पैंटी और ब्रा सब कुछ नजर आ रहा था गोरे रंग पर यह कलर जानलेवा साबित हो रहा था,,,, शुभम यह नजारा देखा तो देखता ही रह गया उसका गला सूखने लगा उत्तेजना के मारे उसका पूरा शरीर गनगना गया,,,,, शुभम की नजरें उसके गोरे बदन पर ऊपर से नीचे चारों तरफ घूम रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था वह होश में बिल्कुल भी नहीं था ऐसा लग रहा था मानो उसके जिस्म में सांस आना बंद हो गई हो,,,, शुभम की हालत देखकर रुचि मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रही थी उसके होठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी और वह शुभम से बोली,,,,।

इस तरह से दरवाजे पर खड़ा रहेगा या अंदर भी आएगा,,,

(रुची की आवाज सुनकर शुभम की तंद्रा भंग हुई तो वह हड़बड़ा कर कमरे में दाखिल हुआ,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह रुचि से नहीं बल्कि किसी स्वर्ग की अप्सरा से मिलने आया हो रूचि तो पहले से ही खूबसूरत थी लेकिन आज कयामत लग रही थी शुभम को ऐसा लग रहा था कि कहीं वह अपने हुस्न के खंजर से उसके दिल के चित्र लेना कर दे,,,,)
 
भाभी आज तो आप एकदम कयामत लग रही हो कहीं जान लेने का इरादा तो नहीं है,,,

अगर मैं तेरी जान ले लूंगी तो मेरा सपना कौन पूरा करेगा,,,

कैसा सपना भाभी,,,,,

मेरा मतलब है कि मेरी प्यास कौन बुझाएगा,,,,

मैं हूं ना भाभी तुम्हारा दास तुम्हारा गुलाम,,, सब कुछ ,,,

(इतना कहने के साथ ही शुभम आगे बढ़ कर उसे अपनी बाहों में भर लिया और तुरंत उसके लाल-लाल होठों को अपने होंठों में भर कर चूसना शुरू कर दिया,,, रुचि भी इसी पल का इंतजार बड़ी बेसब्री से कर रही थी इसलिए वह भी पागलों की तरह शुभम का साथ देते हुए उसको होठों को मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी शुभम के हाथ बड़ी तेजी से रूचि के संपूर्ण बदन पर घूम रहे थे,,, जहां भी हाथ घुमा रहा था बड़ी शक्ति के साथ उस हिस्से को अपनी हथेली में दबा ले रहा था कभी दोनों हाथों से उसके नितंबों को दबा देता तो कभी उसकी पीठ को मसल देता तो कभी दोनों हाथ आगे की तरफ लाकर उसके दोनों कबूतरों को जोर से दबा देता,,, शुभम जिस तरह से पागलों की तरह उसके बदन के साथ सख्ती से पेश आ रहा था उसमें रुचि को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसके मुंह से सिसकारी के साथ-साथ दर्द भरी कराहने की आवाज भी आ रही थी,,, दोनों पागलों की तरह एक दूसरे के जिस्म से खेल रहे थे खास करके उन अंगों से जिनकी उन्हें सख्त जरूरत थी शुभम अपना एक हाथ उसकी लाल रंग की पैंटी में डाल कर उसके कोमल अंग को सहला रहा था तो रुचि अपने हाथ को उसके पेंट में डालकर उसके कठोर अंग से खेल रही थी,,, दोनों की उनमादक सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थीं जिसे उन दोनों के सिवा तीसरा कोई भी सुनने वाला नहीं था,,,, लाल रंग की ट्रांसपेरेंट शार्ट गाउन में रुचि के खूबसूरत बदन को देख कर शुभम का पारा एकदम बढ़ने लगा उसकी उत्तेजना परम शिखर पर विराजमान हो गई देखते ही देखते शुभम उसके बदन से एक-एक करके उसके छोटे-छोटे वस्त्रों को उतारना शुरू कर दिया कोई यही काम रुचि भी शुभम के साथ कर रही थी और देखते ही देखते दोनों अगले ही पल एकदम नंगे होकर उनके वस्त्र नीचे जमीन पर पड़े हुए थे शुभम का लंड पूरी औकात में आकर एकदम खड़ा होकर ऐसा लग रहा था मानो वह रुची की बुर को घमासान युद्ध के लिए ललकार रहा हो। और इसमें रुचि की पूर्व भी कुछ कम नहीं थे उसके मुखारविंद का तेज देखकर ऐसा ही लग रहा था कि जैसे वह अपने मुंह से आग उगल रही हो क्योंकि रक्त का संचार उसकी बुर के फुले हुए भाग पर इतनी अधिक तेजी से हो रहा था कि उसमें से गर्माहट भरी आंच निकल रही थी जोकि शुभम अपने मोटे तगड़े लंड पर साफ महसूस कर पा रहा था,,,,

दोनों किसी से कम नहीं थे दोनों को देखकर ऐसा ही लग रहा था कि जैसे दोनों के बीच घमासान युद्ध होने वाला है,,,,

शुभम एकदम उतावला हो चुका था सब्र का बांध अब टूटने लगा था वह आगे जल्द ही बढ़ना चाहता था इसलिए तो वह तुरंत रुचि की चूची को अपने मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया था जिससे रुचि के मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फूट पड़ी हालांकि रुचि का भी मन बहुत हो रहा था शुभम के मोटे लंड को अपनी बुर में रहने के लिए लेकिन वह अपने आप पर सब्र किए हुए थी वह चुद वाना तो चाहती थी लेकिन इससे पहले जी भर कर एक दूसरे के अंगों से मजा ले लेना चाहती थी क्योंकि आज तक उसने नहीं ली थी,,,, शुभम पागलों की तरह रुचि की कभी दाईं चूची तो कभी बाय चूची दोनों को मुंह में भरकर बराबर उसका सेवन कर रहा था,,,, सच पूछो तो रुचि को इसमें स्वर्ग सा आनंद मिल रहा था इस तरह से उसके पति ने कभी भी उसकी चूची को मुंह में भर कर जी भर के नहीं पिया,,, इसलिए तो रोज ही इतनी मस्त हो गई थी कि वह दोनों हाथ की उंगलियों को शुभम के बालों में डालकर उसे जोर से भींचते हुए उसे अपनी चूची पर दबा के उसे पीने के लिए उकसा रही थी,,,।

ले शुभम और पी,,, पूरा मुंह में भरकर पी,,,,पूरा रस निचोड़ डाल दबा दबा कर के,,,, बहुत मस्त चूसता है रे तू,, ससहहहह,,,,,आहहहहहहह,,, पागल कर दिया रे तूने मुझे इस तरह से तो मेरे पति ने कभी नहीं चुसा मेरी चूची को,,,

सही कह रही हो भाभी भैया ने तुम्हारी चूची के साथ-साथ तुम्हारे जिस्म पर कभी भी ज्यादा ध्यान नहीं दिए हैं तभी तो मेरा ध्यान तुम पर चला गया है अब देखो मैं तुम्हें कैसे एक मस्त औरत बना देता हूं,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम फिर से रुचि की चुचियों पर टूट पड़ा,,, शुभम की कामुक हरकतों की वजह से रूचि एकदम मस्त में जा रही थी उसकी गरम सिसकारियां पूरे घर में गूंज रही थी वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी इसलिए तो वह एक हाथ नीचे की तरफ लाकर सुभम के खड़े लंड को पकड़ कर उसे मुठियाना शुरू कर दी थी,,,

ससससहहहह,,,,,आहहहहहहह,, बहुत मोटा लंड है तेरा सुबह बहुत मजा आता है जब तू अपने लंड को मेरी बुर में डालकर चोदता है मुझे तो यकीन ही नहीं होता की किसी मर्द का लंड कितना मोटा और लंबा होता है,,,

क्यों भाभी भैया का ऐसा नहीं है क्या ,,,,,

हरामी भैया का ऐसा होता तो मैं तेरे पास आती क्या ,,,,तेरे से आधा भी नहीं है तभी तो मैं पागलों की तरह तेरे पीछे घूमती रहती हूं,,, ( बातों ही बातों में रुचि अपना दुखड़ा सुनाते हुए बोली और यह बात सुनकर शुभम को एक बार फिर से अपनी मर्दानगी पर गर्व होने लगा,,,)

बिल्कुल भी चिंता मत करो भाभी मुझे तो ऐसा लगता है कि मेरा लंड आपकी बुर के लिए ही बना है तभी तो देखो तुम्हारी बुर देख कर केसा खड़ा हो गया है,,,( ऐसा कहते हैं मैं शुभम जोर से रूचि की गोल गोल गांड पर चपत लगा दिया,,, जिससे रुचि की आह निकल गई।)

आहहहह,,, क्या कर रहा है लगती है,,,,

लेकिन मजा भी तो आता है ना मेरी रानी ,,,,,

मजा तो आता है लेकिन दर्द भी तो किया ना ऐसे मत चपत लगाया कर ,,,,

अच्छा यह मोटा लंड जब तुम्हारी बुर में जाता है तो कैसे चिल्लाती हो जोर-जोर से,,,, लेकिन मजा भी तो लेती हो,,

( ऐसा कहते हुए शुभम फिर से दो चार चपत एक साथ उसकी गांड पर लगा दिया और देखते-देखते उसकी गोरी गांड एकदम लाल हो और सूची बस हहहहहह करके रह गई यह हकीकत है कि शुभम के चपत लगाने पर पुरवा भी उसकी गांड पर उसे भी आनंद दे रहा था वह एकदम काम विभोर हो चुकी थी,,,,,। उसका भी सब्र का बांध टूटता हुआ नजर आ रहा था क्योंकि शुभम की हरकतें उसके खूबसूरत जिस्म के साथ लगातार जारी थी वो कभी चूचियों से खेल रहा था और ऊपर से उसे मुंह में लेकर भीगी रहा था लेकिन उसकी हथेलियां उसके खूबसूरत बदन पर चारों तरफ घूम रही थी खास करके उसकी टांगों के बीच की उस पतली दरार पर जिस में आग लगी हुई थी बार-बार वह उसे अपनी उंगली से छेड़ दे रहा था जिससे रुचि एकदम मदहोश हो जा रही थी और उसे भी अपने घर के अंदर उसके मोटे लंड को लेने की आवश्यकता जान पड़ रही थी,,,,।

जबरदस्त मादकता से भरा हुआ नजारा रुचि के घर में नजर आ रहा था अपनी शादी की सालगिरह को अपने पति के साथ ना मना कर वह अपने पड़ोस के जवान लड़के के साथ मना रही थी और वह भी पूरी तरह से नंगी होकर पड़ोस का लड़का शुभम भी पूरी तरह से नग्न अवस्था में पड़ोस की भाभी के साथ उसके जिस्म के साथ खेल रहा था,,, जिसमें उसकी सास का पूरी तरह से खुली छूट थी। और उसी खुद ही छूट का फायदा उठाते हुए रुचि एक जवान लड़की के साथ नग्न अवस्था में उसके अंग से खेल रही थी और उसे भी अपने अंग से खेलने की पूरी इजाजत दे दी थी।

रुचि बार-बार लगातार शुभम के मोटे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर हिला रही थी तो कभी उसे मुठिया रही थी शुभम भी रुची की नरम नरम ऊंगली और उसकी हथेली का आनंद लेते हुए उसकी चूची को पी रहा था,,,, तकरीबन आधे घंटे से शुभम उसकी दोनों चूचियों को ही पी रहा था देखते ही देखते उसे दबा दबा कर पीकर उसे लाल टमाटर की तरह कर दिया था,,, रुचि भी शुभम के हौसले को देखकर हैरान थी क्योंकि वह आधे घंटे से बारी बारी से उसकी दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पी रहा था और साथ ही उसके खूबसूरत नंगे जिस्म से खेल भी रहा था और साथ ही वह खुद उसके खड़े लंड को जोर जोर से हिला रही थी लेकिन अब तक मजाल था कि उसका लंड पानी फेंका हो,,, उसकी इसी मर्दाना ताकत की तो वह पूरी तरह से कायल हो चुकी थी इसलिए तो आज अपनी शादी की सालगिरह पर उसे अपने घर पर बुलाकर उसकी जवानी के रस को पूरी तरह से नीचोड़ कर अपने आप को तृप्त करना चाहती थी,,,

दोनों किसी से कम नहीं थे एक मर्दाना जो से भरा हुआ था तो एक मदहोश कर देने वाली जवानी से भरपूर थी,, दोनों का नशा अलग अलग था लेकिन मजा एक ही था,, शुभम का लंड का बगावत के मूड में था वह अपने लिए जगह ढूंढ रहा था,,, उसी से अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी वह कसके रुचि को अपनी बांहों में भर लिया जिससे उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी टांगों के बीच के उस पतली दरार पर ठोकर मारने लगा,,,, शुभम की ईस हरकत की वजह से रुचि की हालत खराब होने लगी,,, बार-बार शुभम के मोटे लंड काम आता छुपाना उसकी बुर के मुख्य द्वार पर रगड़ खा जा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई दरवाजे पर दस्तक दे रहा हो लेकिन यह दस्तक इतनी तेज थी कि मानो दरवाजे को तोड़कर अंदर वह शक्स अंदर आ जाएगा,,,

और यही डर रुचि को भी सता रहा था उसे इस बात का डर था कि कहीं,, लंड की जबरदस्त ठोकर रूपी दस्तक से मजबूर होकर वह अपनी बुर का दरवाजा ना खोल दे और शुभम भी अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रहा था अपने लंड को उसकी बुर में डालने के लिए क्यों किया वह अपने हाथ से अपने लंड को पकड़ कर रूचि की बुर पर उसे बराबर रगड़ रहा था जिसका मतलब साफ था कि अब वह उसकी बुर में डालने वाला है,, लेकिन रुची इतनी जल्दी उसे अपने बुर के अंदर नहीं लेना चाहती थी अभी तो पूरी रात बाकी थी और वह पूरा मजा लेना चाहती थी,,, इसलिए अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर शुभम के लंड को पकड़कर उसे दूर करते हुए बोली,,,,

इतनी भी जल्दी क्या है मेरे राजा अभी तो पूरी रात बाकी है,,,

जैसी आपकी मर्जी रानी साहिबा मैं तो आपका गुलाम हूं जैसा आप कहें वैसा ही होगा,,,( शुभम लगभग हफ्ते हुए रुचि से बोला इतना कहकर वह अपने कपड़े पहनने ही वाला था कि रुचि उसे रोकते हुए बोली,,,)

ऐसे ही रहने दो घर में मेरे और तुम्हारे सिवा तीसरा कोई भी नहीं है इसलिए कपड़ा पहनना जरूरी नहीं है आज मैं और तुम सारी रात नंगे ही रहेंगे तूम यहीं बैठो मैं खाना लेकर आती हूं,,, ( इतना कहकर रुचि रसोई घर की तरफ जाने लगी और सुबह ललचाए आंखों से उसकी मटकती हुई गांड को देखता रह गया और अपने लंड को एक हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,)

हाय मेरी रानी क्या मस्त गांड है रे तेरी ,,,,(और इतना कहकर वह कुर्सी पर बैठ गया एकदम नंगा रुचि के कहे अनुसार अब दोनों के बीच किसी भी प्रकार का पर्दा नहीं था )

.............................
 
शुभम कहते दोनों हाथ में लड्डू था वह बहुत खुश और उत्तेजित नजर आ रहा था रुचि के कहे अनुसार वह एकदम नंगा होकर कुर्सी पर बैठा हुआ था,,,, उसके लिए यह बिल्कुल नया अनुभव था रुचि को अपनी गांड मटका के जाते हुए देख कर उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई थी,,, शुभम को इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो रहा था कि बिना कपड़ों में रुचि एकदम क़यामत लग रही थी उसका गोरा रंग और उसके खूबसूरत अंग को देखकर उसके मुंह के साथ उसके लंड में भी पानी आ रहा था,,,

जो कि अभी भी पूरी औकात में था अगर रुचि ने उसे अंतिम क्षण में रोका ना होता तो अब तक उसका पूरा लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा होता,,

थोड़ी ही देर में रूचि संपूर्ण नग्नावस्था में रसोई घर में से खाना लेकर आ गई और उसे डाइनिंग टेबल पर रख कर परोसने लगी,, शुभम परोसे गए स्वादिष्ट भोजन को तो कम लेकिन रूची के खूबसूरत बदन पर लटके हुए उसके दोनों दशहरी आम को देख रहा था जो कि अभी पूरी तरह से पके भी नहीं थे,, रुचि की चूची का भूगोल संपूर्ण रूप से एकदम व्यवस्थित था सुगठित शरीर के हिसाब से एकदम सुडोल एकदम गोलाकार स्थिति में और वह भी तनी हुई ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी को ललकार रही हो कि हिम्मत हो तो इसे छू कर दिखाओ,,,,

दोनों ने खाना खाना शुरु कर दिया था पनीर की सब्जी के साथ नरम नरम पूरी साथ में मीठी खीर जो कि यह सब शुभम को बहुत ही स्वादिष्ट लगती थी,, दोनों डाइनिंग टेबल पर आमने सामने बैठे हुए थे,,, दोनों एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखते हुए स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले रहे थे,,, लेकिन शुभम भाई यूं ही स्वादिष्ट भोजन का आनंद बड़े चाव से दे रहा था लेकिन उसका सारा ध्यान नरम गरम पूरी से ज्यादा रुचि गोलाकार चुचियो पर थी,,,

क्यों शुभम खाना अच्छा तो बना है ना,,,

हां हां भाभी क्यों नहीं आपके हाथों से खाना अच्छा ही बनेगा लेकिन सही कहु तो भाभी इस समय मेरा खाने में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा है ,,,,,

ऐसा क्यों ,,,,,,?

मेरी आंखों के सामने ईतनी खूबसूरत औरत एकदम नंगी बैठी हो तो उसे देखकर कहीं किसी का मन खाने में लगेगा,,,,

तो कहां लगेगा,,,,

तुम्हारी गोल-गोल चुचियों में तुम्हारे नंगे बदन में तुम्हारे गोरे-गोरे मदमस्त कर देने वाली गांड पे और तुम्हारी रसीली बुर में,,,,

ससससहहहह,,,, कितना गंदा बोलता है तू,,,,,

जिसे तुम गंदा कह रही हो भाभी ,,, मेरे लिए तो अमृतवाणी है,,,,

बातें बहुत बनाता है तू,,,,, चल खाने का मजा ले ले इसके बाद तो तुझे इसका भी मजा मिल ही जाएगा (अपनी चूचियों की तरफ इशारा करते हुए,,,)

क्या करूं भाभी मन को तो मना लूं लेकिन यह साला नहीं मानता ना (अपने हाथ से अपने लंड को हिलाते हुए)

क्या अभी तक वो शांत नहीं हुआ,,, अभी तक खड़ा है क्या,,,?

हां भाभी ईतनी आसानी से यह शांत होने वाला नहीं है,,,,

मैं जानती हूं कैसे शांत होगा जब तक यह मेरी बुर में जाएगा नहीं तब तक शांत नहीं होने वाला,,,,

लगता तो ऐसा ही है भाभी जल्दी से मेरे पर ऊपकार कर दो और इसे अपनी बुर में ले लो,,,,

अरे थोड़ा तो सब्र किया कर आज की रात तुझे जी भर के प्यार करना है थोड़ा सब्र करेगा तभी तो सब्र का फल मीठा होगा,,,,

तुम कह रही हो तो शांत हु वरना अब तक ईसी डायनिंग टेबल पर पटक कर तुम्हारी बुर में डाल दिया होता,,,,

हहहह,,,, औरत के साथ कभी भी जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए सारा मजा किरकिरा हो जाता है औरत अगर अपनी मर्जी से देखना तभी उसकी लेने में आनंद ही आनंद आता है ,,,,(रुचि यह बात मुस्कुरा कर बोली।)

मे ये बात अच्छी तरह से जानता हूं भाभी तभी तो शांत हूं वरना आप जैसी खूबसूरत औरत और वह भी आंखों के सामने नंगी हो तो भला कौन मर्द अपने आपको रोक पाएगा,,,,,

तेरे में इतना सब्र है तभी तो औरत को तू मस्त कर देता है वरना अभी तक ना जाने कब से तेरा पानी निकल गया होता है और तू बिस्तर पर लंबा लेट गया होता,,,

( इस तरह की बातों के साथ दोनों ने अपना खाना समाप्त कर लिया दोनों इस तरह की गरमा गरम बातें करके एक दूसरे को काफी गर्म कर चुके थे शुभम तो पहले से ही अपने खड़े लंड को लेकर परेशान था उसका लंड था कि बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था वह बार-बार उसे बैठाने के लिए उसे पकड़कर नीचे कर देता लेकिन वह फिर से अपना मुंह उठाकर ऊपर हो जाता है ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे रुचि की बुर को देखने की कोशिश कर रहा हो,,, दोनों के बदन में सुरूर चढ़ चुका था शुभम जब खाकर कुर्सी पर से खड़ा हुआ तो उसके खड़े होने के साथ ही उसका मोटा खड़ा लैंड लहराने लगा और सीधा डायनिंग टेबल पर ऐसे बीछ गया मानो उसे आराम से उस पर रखा गया है जिसे देखते हैं उसकी मर्दाना ताकत के अधीन होकर रुचि की बुर से मदन रस की दो बूंद नीचे जमीन पर चु गई,,, जो कि रुचि की तरफ से इशारा था कि अब वह पूरी तरह से तैयार हो चुकी है उसके लंड को अपनी बुर में लेने के लिए,,,, रुची अभी भी कुर्सी पर बैठी हुई थी और सुभम उसकी तरफ देखते हुए अपने लंड को डायनिंग टेबल पर पटकते हुए बोला,,,

अब कुछ होगा भाभी कि नहीं,,,,,

( शुभम की हरकत देखकर रुचि पूरी तरह से मदहोश होने लगी उसके मुख से उसके मोटे तगड़े करने को देख कर ही गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,)

ससससहहहह,,,,,आहहहहह,, अब तो बहुत कुछ होगा मेरे राजा,,,,,, मैं अपने कमरे में जा रही हूं लेकिन तू 15 मिनट बाद आना ,,,,,

लेकिन क्यों भाभी मुझसे रहा नहीं जा रहा है ,,,,,

तभी तो कह रही हूं 15 मिनट बाद आना तुझे सरप्राइस देना है ,,,,,।

सरप्राइस कैसा सरप्राइस ,,,,,

अगर अभी बता दूंगी तो सरप्राइज का मतलब क्या रह जाएगा,,, इसलिए जैसा मैं कहती हूं वैसा ही कर,,,,( इतना कहकर वह कुर्सी पर से उठ कर खड़ी हो गई और मादक अदा बिखेरते हुए सीढ़ियां चढ़ने लगी शुभम वही डाइनिंग टेबल की करीब खड़ा रुचि की मदमस्त अदाओं को देखकर मस्त हुआ जा रहा था जैसे जैसे रुचि सीढ़ियों पर अपने पैर रखने की वजह से उसकी गोल गोल गांड अद्भुत लचक के साथ इधर-उधर मटक रही थी जिसे देखकर शुभम का हौसला कमजोर होता नजर आ रहा था उसे इस बात का डर सता रहा था कि कहीं रुचि के सीढ़ियां चढ़ते चढ़ते उसका पानी ना निकल जाए,,,, लेकिन फिर भी वह अपने आप को संभाल ले गया और उसकी आंखों के सामने अपनी मादक अदाओं का जाल बिछाते हुए रुचि अपने कमरे में चली गई यह उसके लिए एक अद्भुत एहसास था पूरे घर में हर एक कोने में संपूर्ण रूप से नंगी होकर घूमना यह अनुभव उसके लिए पहला था जिसमें उसे काफी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था जैसे-जैसे वह सीढ़ियों पर चढ़ रही थी उसे मालूम था कि उसकी गोलाकार गांड पर शुभम की नजर होगी और इस बात का एहसास ही उसे उत्तेजित किए जा रहा था,,,। कमरे में पहुंचते-पहुंचते रुचि काफी गर्म हो चुकी थी उसकी बुर से मदन रस की धार चु रही थी,,,,

जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे शुभम की दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी वह बार-बार अपने लंड को हाथ में लेकर उसे हिलाते हुए अपने समय को व्यतीत करने की कोशिश कर रहा था और देखते-देखते तकरीबन 20 मिनट गुजर गए अब उससे रहा नहीं जा रहा था वह भी उसी तरह से नंगा ही सीढ़ियां चढ़ने लगा,,,

अब वह कमरे के बाहर खड़ा था अब तक उसे इतना तो पता ही चल गया था कि रुचि का कमरा कौन सा है,, दरवाजा बंद था लेकिन लोग बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि अंदर की रोशनी बाहर तक आ रही थी इससे साफ जाहिर था कि रुचि कमरे के दरवाजे को खुला छोड़ रखी थी शुभम की दिल की धड़कन बड़ी तेजी से बढ़ रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि ना जाने कैसा सरप्राइस रोजी देने वाली है,,, क्योंकि यहां आने के बाद सब कुछ उसके लिए सरप्राइस ही था,,, क्योंकि कपड़े उतार कर एकदम नंगा रहने का आईडिया भी उसी का था जिसमें उन दोनों को काफी आनंद की अनुभूति हुई थी,,, अब क्या होने वाला है कमरे में कैसा सरप्राइस है इस बारे में शुभम को बिल्कुल भी पता नहीं था और इसी बारे में सोच सोच कर परेशान हुआ जा रहा था और साथ ही उत्तेजित भी क्योंकि इतना तो जानता था कि जो कुछ भी होगा उसके फायदे का ही होगा इसलिए वह धड़कते दिल के साथ दरवाजे पर हाथ रख कर उसे अंदर की तरफ हल्के से ठेलने लगा और दरवाजा खुद ब खुद खुलता चला गया,,, पूरा कमरा ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में नहाया हुआ था,,,

तभी शुभम की नजर बिस्तर पर गई और सामने का नज़ारा देखकर उसकी आंखें चौंधिया गई वह दंग रह गया,,,

...............................
 
शुभम हैरान था उसकी आंखों के सामने नजारा ही कुछ ऐसा था वह दरवाजे पर ही एकदम ठिठक कर खड़ा रह गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें पूरे कमरे में ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी फैली हुई थी पूरा कमरा फूलों की खुशबू से महक उठा था,,, शुभम को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि वह दरवाजे पर एकदम नंगा खड़ा था और सामने बिस्तर पर रुचि एकदम दुल्हन की तरह सज धज कर बैठी थी और पूरा बिस्तर फूलों से सजाया हुआ था मानो किसी की सुहागरात हो,,,

शुभम की नजर कमरे में चारों तरफ घूम रही थी वह हक्का-बक्का रह गया था बिस्तर पर सज धज कर दुल्हन की तरह बैठी हुई रूचि बहुत ही खूबसूरत परी की तरह लग रही थी,,, शुभम समझ नहीं पा रहा था कि रुचि है सब क्या कर रही है कुछ देर पहले कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई थी और खुद भी उसे नंगा रहने के लिए ही बोली थी लेकिन यहां कमरे में आकर वह खुद तैयार होकर लाल साड़ी पहनकर एकदम दुल्हन की तरह सज धज कर बैठी थी और वह इस समय एकदम नंगा ही था,,, शुभम को कुछ समझ में नहीं आ रहा था फिर भी वह कमरे में प्रवेश कर के दरवाजे को बंद कर दिया हालांकि यह जरूरी नहीं था लेकिन फिर भी तसल्ली के लिए वह दरवाजे को लॉक कर दिया और धीरे धीरे चलते हुए बिस्तर के करीब आने लगा रुचि उसे तिरछी नजरों से चोरी छिपे देख रही थी जो कि चलते चले उसका लंड ऊपर नीचे हिल रहा था जिसे देखकर रुचि के मुंह के साथ-साथ उसकी रसीली बुर में भी पानी का सैलाब उठने लगा,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था मन में तूफान उठा रहे थे वह अपने जज्बातों पर काबू किए हुए बैठे थे माहौल पूरी तरह से मादकता से भरा हुआ था आज उसकी शादी की सालगिरह थी और ऐसे में वह शुभम को पाकर बहुत खुश थी और यही उसके लिए सरप्राइस था कि वह आज की रात उसकी दुल्हन बनी हुई थी और उसे पत्नी की तरह सुख देना चाहती थी या यूं समझ लो कि आज वह एक रात के लिए उसकी पत्नी थी और उसका बिस्तर सुहागरात का सेज बना हुआ था,,, हालांकि वह रोज की चुदाई जरूर करता था लेकिन आज की रात दोनों के लिए कुछ खास थी जो कि शुभम को समझ में नहीं आ रहा था इसलिए वह रुचि के बेहद करीब आकर खड़ा हो गया और रुचि से बोला,,,

यह सब क्या है भाभी आप एकदम दुल्हन की तरह सज कर बैठी हो और बिस्तर को ऐसे सजा दी हो कि जैसे आज आप की सुहागरात हो,,,,

सुहागरात ही समझो शुभम वैसे भी तुम मेरी चुदाई करने के लिए कमरे में आए हो लेकिन आज की रात कुछ खास है मैं चाहती हूं कि तुम आज की रात मुझे आशिक बनकर नहीं बल्कि मेरा पति बनकर मेरी चुदाई करो और मैं आज की रात तुम्हारी दुल्हन हूं,,,

यह क्या कह रही हो भाभी,,,( शुभम आश्चर्य से बोला )

मैं ठीक कह रही हूं शुभम और तुम मुझे भाभी नहीं मेरा नाम लेकर बुलाओ रुचि कहो,,,, मेरा नाम लेकर बुलाओ ऐसा बर्ताव करो जैसा कि एक पति पहली रात को अपनी पत्नी के साथ करता है,,,

( रुचि की बात सुनकर शुभम के तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठने लगा सूची की बात उसे अच्छी लग रही थी और वैसे भी कौन नहीं चाहेगा रुचि जैसी पत्नी को पाना भले ही वह समय उसकी पत्नी नहीं थी लेकिन फिर भी जिस तरह से रुचि उसे कह रही थी उससे उसे इस बात का अहसास होने लगा कि इस समय वह उसकी पत्नी ही है ऐसा एहसास उसके लंड के तनाव को 10 गुना बढ़ा दिया,,, शुभम भी उत्साहित होता हुआ बोला ,,,)

क्या तुम सच कह रही हो भाभी ,,,

भाभी,,,, नहीं रुचि,,,,,

हां रुचि मेरी जान क्या तुम सच कह रही हो,,,

हां मैं सच कह रही हूं,,,, शुभम तुम नहीं जानते एक औरत के लिए उसकी जिंदगी की पहली रात उसकी सुहागरात कितनी खास होती है जिस तरह से दूसरी लड़कियां इस रात के लिए सपने देखते हैं सपने संजो कर रखी है मैंने भी ऐसे ही सपने से जो कर रखी थी की सुहागरात के दिन मेरा पति मुझसे बहुत प्यार करेगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ,,

क्यों,,,

क्योंकि मेरा पति मेरे सपनों का राजकुमार बिल्कुल भी नहीं था वह पहली रात को ही मेरे सपने को चकनाचूर कर दिया उसे तो औरत से कैसे बात करना चाहिए कैसे रिझाना चाहिए यह सब बिल्कुल भी नहीं आता,,,

मुझे तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता भाभी,,,( शुभम के मुंह से भाभी शब्द सुनकर उसे आंख दिखाई तो तुरंत शुभम अपनी बात को पलट दिया,,,) सॉरी ,,,,,सॉरी रुचि,,,,

अगर ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता तो आज की रात तुम मेरे कमरे में नहीं होते समझे,,,, उसे तो एक औरत को कैसे चोदा जाता है यह बिल्कुल भी नहीं पता था,,,

यह क्या कह रही हो रुचि भला एक मर्द को औरत को कैसे चोदा जाता है यह भी नहीं आता मुझे तो नहीं लगता,,,

हां शुभम मैं भी तो इसी बात से हैरान थी उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था तुझे पता है सुहागरात की रात को वह अपना लंड मेरी बुर में डाल ही नहीं पाया उसे समझ में नहीं आता था कि डाला कैसे जाता है,,,

फिर उसने सुहागरात कैसे मनाई,,,,

कहां मनाया जैसे अपने लंड को मेरी बुर से सटाया साले का पानी ही निकल गया और उसके बाद वो खड़ा ही नहीं हुआ मैं तकिए को अपनी बाहों में लेकर सो गई तब से लेकर आज तक मुझे उस रात को लेकर बहुत ही दुख होता है लेकिन मैं आज उस कमी को पूरा कर लेना चाहती हूं मैं चाहती हूं कि तुम मुझे पत्नी की तरह प्यार कर जिस तरह से पति सुहागरात को अपनी पत्नी को चोदकर त्रप्त कर देता है उसी तरह से तू भी मेरे साथ आज प्यार कर सुहागरात मना ले मेरे साथ,,,,,

तो देर किस बात की है रुचि मेरी जान शुरुआत इसी से कर लो ,,,,(अपने लंड को पकड़ कर उसके चेहरे के सामने हिलाते हुए बोला और रुचि शुभम का इशारा समझ गई वैसे भी उसके खड़े लंड को बार-बार देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था वह उसको मुंह में लेना चाहती थी इसलिए वह भी तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसके लंड को लपक ली और उसे अपने होठों से लगाकर उसके सुपाड़े को रगड़ने लगी,,,)

ससससहहहह,,,,आहहहहह,,,,,ऊमममममम,,,,( रुचि को बहुत मजा आ रहा था रुचि उसके पूरे लंड को अपने गुलाबी होठों पर रगड़ रही थी हालांकि वह अभी तक अपने मुंह में उसे लिए नहीं थी लेकिन फिर भी उसे लंड की गर्माहट को अपने होठों पर महसूस करके इतना ज्यादा मजा आ रहा था कि पूछो मत और पूरी तरह से मस्त हो गई थी शुभम भी उसके लाल-लाल होठों पर अपने लंड का स्पर्श कराकर मस्त हुए जा रहा था वैसे भी रुचि घूंघट में कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही थी सिर्फ उसका चेहरा और वो भी खास करके उसके होंठ ही नजर आ रहे थे जिस पर पूरी तरह से वह लंड रगड़ रही थी,,,, लंड को रगड़ने के साथ-साथ वहां अपने मुंह से कर्म संस्कारी की आवाज भी छोड़ रही थी जिससे शुभम को बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था लेकिन इतने से रूचि का काम कहां होने वाला था देखते ही देखते वह अपने गुलाबी होठों को खोलकर शुभम के लंड के मोटे सुपाड़े को अंदर ले ली और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दी,,, शुभम के मोटे तगड़े लंड की गर्माहट उसे बेचेन और चुद वासी बना रही थी,,,, जैसे-जैसे रुचि शुभम के मोटे लंड को धीरे धीरे इंच इंच करके अंदर ले रही थी वैसे वैसे मानो शुभम हवा में उड़ रहा हो उसे स्वर्ग का सुख महसूस हो रहा था,,

धीरे-धीरे करके शुभम अपने हाथों से रुचि के घूंघट को हटा दिया वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी मानो सचमुच की दुल्हन हो,,,, शुभम को अब साफ नजर आ रहा था कि उसका मोटा लंड पूरी तरह से उसके लाल-लाल होठों के बीच में जाकर उसके गले को गीला कर दे रहा था,,,

अभी तक रुचि जी भर के शुभम के लंड को मुंह में लेकर उसका स्वाद नहीं चख पाई थी इसलिए आज वह अपनी कमी को पूरा कर लेना चाहती थी आज वह किसी लॉलीपॉप की तरह शुभम के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी उसका कसैला स्वाद उसे बेहद मधुर लग रहा था,,,

गजब का नजारा बना हुआ था रुचि अपने कमरे में अपने ही पड़ोस के नौजवान लड़के को लेकर दुल्हन की तरह सज कर बैठी हुई थी और उसके खड़े लंड को अपने मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी,,, शुभम एकदम मतवाला हो गया था उसके मुंह से भी गरम सिसकारी की आवाज आने लगी थी क्योंकि रूचि ईतने सरीके से इतने बेहतरीन अंदाज में उसके लंड को चूस रही थी कि उसे डर था कि कहीं उसका पानी उसके मुंह में ही ना निकल जाए,,, ना चाहते हुए भी खुद ब खुद उसकी कमर आगे पीछे होने लगी वह इस तरह से रुचि के मुंह को ही चोदना शुरू कर दिया था,,,, रुचि अपनी रेशमी बालों को हेयर बैंड से बांधी हुई थी जिसे शुभम खींचकर निकाल दिया और उसके रेशमी बालों को एकदम खुला छोड़ दिया जिसमें वह काफी खूबसूरत और हसीन लगने लगी थी अब शुभम उसके रेशमी बालों को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर अपनी कमर को हिलाता हुआ उसके मुंह को चोदना शुरू कर दिया,,, लंड की मोटाई इतनी अधिक थी कि उसके छोटे से मुंह में बराबर घुस नहीं रहा था जिसकी वजह से रुचि को अपना मुंह कुछ ज्यादा ही खोलना पड़ रहा था,, रुचि के मुंह से घुटी घुटी सी आवाज आ रही थी लेकिन फिर भी वह अपने कदम पीछे लेने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी वह मैदान में बराबर डटी हुई थी,,, लेकिन इस बार शुभम अपने पैर पीछे ले लिया क्योंकि वह जानता था कि कुछ देर अगर वो इसी तरह से उसके मुंह में लंड पेलता रहा तो उसका पानी निकल जाएगा,,,,

लेकिन जैसे ही रुचि के मुंह में से शुभम का मोटा तगड़ा लंड बाहर निकला वो एकदम से छटपटा गई,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई उसके हाथों से उसकी पसंदीदा चीज छीन लिया हो,,, वह दोबारा शुभम कैलेंडर खोल आप अपना चाहती थी लेकिन शुभम जानता था कि इस बार उसके हाथ में लंड आ गया तो वह फिर से मुंह में लेकर से चूसना शुरु कर देगी इसीलिए तुरंत फुर्ती दिखाते हुए वह नीचे झुका और उसके लाल-लाल होठों को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, दोनों इस कदर उस बेहतरीन चुंबन के सुख में खो गए कि दोनों के मुंह से केवल उमममम,,,,ऊमममममम,,,की आवाज आ रही थी,,।

शुभम रुचि के गले में अपनी बाहें डालकर उसे धीरे-धीरे बिस्तर पर लेट आने लगा देखते ही देखते वह कुछ देर में रुचि के ऊपर था और उसके लाल-लाल होठों को चूसता हुआ ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया था जिससे रुचि के मुंह में से मस्ती भरी घुटी घुटी सी चीख निकल रही थी,,,,

ऊऊऊमममम,,,ऊमममममम,,,( इस तरह की गर्माहट भरी आवाज निकालने के साथ ही रुचि शुभम को अपनी बाहों में भर ली और उसकी नंगी पीठ पर अपनी हथेली को घुमाते हुए धीरे-धीरे अपनी हथेली को नीचे ले जाने लगी और कुछ ही देर बाद शुभम के नितंबों को अपनी हथेली में भरकर उसे दबाते हुए उसका दबाव अपनी टांगों के बीच बढ़ाने लगी जिससे साड़ी के ऊपर सही शुभम के मोटे तगड़े लंड की चुभन उसे अपनी बुर के ऊपर होने लगी यह एहसास उसे अंदर तक एकदम से उत्तेजना से भर दिया वह पागलों की तरह शुभम के नितंबों को अपनी हथेली में भर-भर कर नोचना शुरु कर दी,,, रुचि की हरकत की वजह से शुभम एकदम बदहवास हो गया मदहोशी उसके तन बदन को मजबूर करने लगी कि वह और ज्यादा ताकत लगाकर रुचि के बदन से खेले और इसीलिए वह रुचि के ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी दोनों चूचियों को जोर-जोर से दबाता हुआ उसके ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया,,,

पूरे कमरे में दोनों की गरम सिसकारियां गूंज रही थी । जैसे-जैसे ब्लाउज का बटन खुलता जा रहा था वैसे वैसे रुची की गर्म सिसकारियों की आवाज और तेज होती जा रही थी वह जोर-जोर से शुभम के नितंबों को अपनी टांगों के बीच में दबा रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह कपड़े के ऊपर से ही शुभम से चुदवा लेना चाहती हो,,,, देखते ही देखते शुभम सुहागरात की शुरुआत करते हुए रुचि के ब्लाउज का बटन खोल कर उसे उसके बदन से अलग कर दिया लेकिन अभी भी इसके नारंगीयो तक पहुंचने में उसकी ब्रा अड़चन रूप बन रही थी। जिसे शुभम अपने दोनों हाथ रूचि की पीठ की तरफ ले जाकर अपने दोनों हाथों से उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और देखते ही देखते उसके बदन से उसकी लाल रंग की ब्रा भी अलग हो गई,,,, रुचि की कसी हुई दोनों नारंगीयों को देखकर शुभम की आंखों में चमक आ गई उसके तन बदन में मदहोशी छाने लगी वह एकदम बदहवास हो गया,,, शुभम की आंखों में खुमारी छाने लगी,,,

वह बैठ गया रुचि उसी तरह से पीठ के बल लेटी रही उसकी आंखों में शर्म की हया नजर आ रही थी क्योंकि वह आज शुभम के सामने एक दुल्हन के रूप में आई थी,,, इसलिए सुहागरात की पहली रात को दुल्हन का इस तरह से शर्माना जायज होता है,,,, वो पागलों की तरह लंबी लंबी आहें भरते हुए रुचि की चूची को देख रहा था जो कि बेहद खूबसूरत लग रही थी उसे इस तरह से अपनी चूची को निहारते हुए देखकर रूचि बोली,,,

ऐसे क्या देख रहा है जैसे कि पहले कभी देखा ही नहीं है,,,

देखा तो हूं रुची मेरी जान लेकिन आज की बात कुछ और है आज तुम मेरी दुल्हन और मैं तुम्हारा दूल्हा आज हमारी सुहागरात है,,, आज जी भर के तुम्हारी चूची से खेलूंगा,,,

तो खेलो इंकार किसने किया है,,,,

आज इंकार भी करोगी तो भी मैं मानने वाला नहीं हूं,,,

( इतना सुनकर रुचि खुद अपनी दोनों चूची को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर शुभम की तरफ बढ़ाते हुए बोली,,,)

मैं भला इंकार क्यों करूंगी मैं तो खुद ही अपनी चूची को तेरे सामने परोस रही हूं कि घर पर इन से प्यार कर उनसे खेल इन्हें मुंह में भर कर के मस्त कर दे मुझे,,( रुचि एकदम मदहोश होकर शुभम से मादक स्वर में बोल रही थी उसकी बातों में विनती थी वह एक तरह से उसके बदन से खेलने के लिए शुभम से विनती कर रही थी उसे मना रही थी कि वह उसके बदन से खेले उसे मस्त कर दें भला इस आमंत्रण शुभम कैसे इंकार कर सकता था रुचि की बात सुनते ही वह रुचि की दोनों चुचियों पर टूट पड़ा,,, वो जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया और उसे मुंह में भर कर पीना शुरु कर दिया ऐसा लग रहा था कि जैसे अब दोबारा उसे रुचि की चूची पीने को नहीं मिलेगी,,, एक बार फिर से कमरे में रुचि की गर्म सिसकारियो की आवाज गूंजने लगी,,, अब शुभम कहां रुकने वाला था उसके हाथों में तो जैसे दो लड्डू आ गए थे और वह जन्म का भूखा हो इस तरह से उसे खाना शुरू कर दिया था,,,, वह बारी-बारी से रुचि की दोनों चुचियों का स्वाद ले रहा था उत्तेजना के मारे रुचि की चूची की निप्पल ईतनी कड़क हो गई थी कि मानो छोटी सी कैडबरी चॉकलेट हो,,, जिसका चॉकलेटी स्वाद लेकर सुभम अपनी जवानी को मदहोश कर रहा था,,,

,,,,सससससस,,,, आहहहहहहह,,,,,शुभम,,,,,ं ऐसे ही पी,,, मेरे राजा,,,,, मेरी चूची को पूरा मुंह में भर भर कर पी ,,,,मस्त कर दे तू इन्हें,,, ऊफफफ,,,,,, सुभम,,,,आहहहहह,,,( रुचि मस्ती की गरम सिसकारियां ले रही थी तभी तो हम उसके निप्पल को दांतों से काट लिया जिससे उसके मुंह से आह निकल गई)

क्या करता है रे,,,,

तुम्हारी चॉकलेट का स्वाद ले रहा हूं,,,,

पागल तू चॉकलेट के पीछे पड़ा है नीचे रसमलाई छलक रही है उसे कौन चाटेगा,,,,( रुचि शुभम से एकदम मादक स्वर में बोली,,,)

मैं हीं चाटुंगा मेरी रानी तेरी कटोरी खोल खोल कर चाटुंगा बस थोड़ा सा सब्र कर मेरी जान,,,

ससससहहहह,,,,,,, शुभम मेरे राजा मुझसे जरा भी सब्र नहीं होता मेरी टांगों के बीच में आग लगी हुई है जल्दी से अपना फुआरा मार कर उसे ठंडा कर,,,,,

( रुचि पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी वह पूरी चुदवासी हो चुकी थी उसे अपनी बुर के अंदर सुभम के मोटे लंड को लेने की बहुत जल्दी पड़ी थी,,, लेकिन शुभम को रुचि की दोनों नारंगी ओ में कुछ ज्यादा ही साथ मिलने लगा था वह जोर-जोर से उसकी चूची को दबाता हुआ मुंह में भरकर पी रहा था उसकी प्यास बुझ नहीं रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था वह गुरु जी की बातों को अनसुना करके लगातार उसकी चूची पर ही डटा रहा देखते ही देखते उसकी चूची एकदम लाल टमाटर की तरह हो गई। लेकिन इस दौरान वह अपने खड़े लंड को बराबर उसकी पूर्व के ऊपर दबा रहा था साड़ी के ऊपर से भी रुचि को ऐसा एहसास हो रहा था कि शुभम का एकदम खड़ा कड़क लंड साड़ी फाड़ कर उसकी बुर में ना घुस जाए क्योंकि उसके लंड की चुभन किसी भाले की नोक की तरह ही महसूस हो रही थी,,

आखिरकार सुबह रुचि की चूची को मन भर के खेलने के बाद वहां से हटा और सीधे रुचि की लाल रंग की दुल्हन वाली साड़ी को उतारना शुरू कर दिया देखते ही देखते हुए उसके बदन पर से उसकी लाल रंग की साड़ी को उतार कर नीचे फर्श पर फेंक दिया,,,,, रुचि की सांसो की गति तेज होती जा रही थी वह प्यासी नजरों से सुमन की हरकतों को देख रही थी और इसी दौरान उसकी नजर बार बार उसकी खड़े लंड पर चली जा रही थी जो कि बेहद भयानक सपने में आ चुका था शुभम का लंड पूरी औकात में था,, आज रूचि शुभम के लंड को नजर भर कर देख रही थी तब उसे ऐसा एहसास हुआ कि इतना मोटा लंड उसकी बुर के लिए शायद कुछ ज्यादा ही मोटा है जबकि वह रोज उसी लंड से चुदाई करवा रही थी,,,

शुभम की आंखों के सामने रूचि केवल पेटीकोट में ही थी जिस की डोरी को वह अपनी नाजुक उंगलियों में लेकर इधर-उधर घुमा रही थी जो कि शुभम के लिए इशारा था कि वह उसे भी उतारने के लिए बोल रही हैं,,, और शुभम भी रुचि का इशारा समझ कर अपने हाथ से उसके पेटीकोट की दूरी को खींच कर खोल दिया और उसे अपने हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ खींचने लगा जो कि रुचि की गोलाकार नितंबों के बाहर के नीचे दबे होने की वजह से निकल नहीं रही थी और तभी रुचि ने अपनी गोल-गोल गांड को कमर से हल्के से ऊपर उठाकर उसकी मदद करते हुए उसे पेटीकोट निकालने में उसकी मदद की शुभम भी जैसे ही रुचि ने अपनी गांड को ऊपर उठाई वह तुरंत उसकी पेटीकोट को खींच कर नीचे कर दिया,,,

लाल रंग की पैंटी में ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में रुचि की खूबसूरत जवानी और ज्यादा आग उगल रही थी,,, वह तो सुमन था कि अपनी गर्म लावा को बाहर आने से रोक रखा था दूसरा कोई होता तो इतने से ही पानी फेंक दिया होता,,,, शुभम की निगाहें रुचि की दोनों टांगों के बीच के उस स्थान पर टिकी हुई थी जहां पर लाल रंग की पैंटी का आगे वाला हिस्सा हल्का सा उठा हुआ था जिससे साफ पता चल रहा था कि रुचि पूरी तरह से मस्त हो चुकी है उत्तेजना से भर चुकी है और उसकी बुर कचोरी की तरह फुल कर अपना असर दिखा रही है,,, शुभम भी उसकी पूरी हुई बुर का असर भी असर नहीं होने देना चाहता था इसलिए अगले ही पल वह पैंटी को भी उतारने लगा और रुचि उसी तरह से अपनी गांड उठा कर पेंटी को भी निकलवाने में उसकी मदद की,,,, क्षण भर में ही शुभम की आंखों के सामने रूचि एकदम नंगी हो गई दोनों इस समय बिस्तर पर एकदम नंगे थे सुहागरात मनाने के लिए वाकई में इस समय शुभम रुचि का पति ही लग रहा था,,,

कमरे का वातावरण अब एकदम गर्म हो चुका था माहौल बदल चुका था,,, खूबसूरत मदहोश कर देने वाली जवानी से भरपूर रुचि बिस्तर पर एकदम नंगी लेटी हुई थी और वहीं पास में मर्दाना ताकत से भरा हुआ नौजवान लड़का अपने खड़े लंड को हाथ में हिलाते हुए रुचि की मदहोश कर देने वाली जवानी का रस पी रहा था,,,,

निर्मला अपने कमरे में बिस्तर पर लेट कर करवटें बदल रही थी उसे भी ईस समय शुभम की जरूरत थी लेकिन वह समझ रही थी कि उसका बेटा उसके दोस्त के घर पार्टी में गया था लेकिन उसे कहा मालूम था कि दो कदम की दूरी पर उसका बेटा उसके पड़ोस की बहू की मदहोश जवानी से खेल रहा है,,,

रात के 11:00 बज रहे थे ऐसे में रुचि अपने कमरे में पड़ोस के लड़के से अपनी जवानी लूटवा रही थी वह बिस्तर पर पीठ के बल लेटकर अपनी टांगों को फैला कर अपनी गुलाबी बुर की गुलाबी पतियों को अपनी हथेली से रगड़ रही थी या एक तरह से शुभम को उकसा रही थी उसकी बुर से खेलने के लिए,,,, रुचि की हरकत देखकर शुभम की हालत खराब हुए जा रही थी उसकी आंखों के सामने जवानी से भरपूर मदद कर देने वाली जवानी से भरी हुई औरतों की नंगी लेटी थी और वह अपने लंड को हाथ से पकड़ कर हिला रहा था ऐसे में कोई दूसरा मर्द होता तो अब तक उसकी बुर में डाल दिया होता लेकिन शुभम की यही खास बात है कि उसने सब्र कूट कूट कर भरा हुआ था वह औरत को तब तक उसकी बुर में नहीं डालता था जब तक औरत एकदम गरम होकर उसे अपनी बुर में डालने के लिए ना बोले,,,,

शुभम पूरी तरह से तैयार था रुचि की रसीली बुर से खेलने के लिए उसकी रसमलाई को अपनी जीभ से चाट कर उसका स्वाद लेने के लिए इसलिए वह अपनी जगह को उसकी दोनों टांगों के बीच में बनाते हुए अपने हाथों से उसकी दोनों जांघों को पकड़कर हल्के से फैला दिया,, जिससे उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर हल्का सा खुल गई ऐसा उसकी हल्की सी खुली हुई बुर ऐसी लग रही थी मम्मी जैसे थोड़ी सी खिड़की खुली हो और उसमें से वह उसे अंदर आने के लिए बुला रही है,,,, मदमस्त बुरे देखकर शुभम के मुंह में पानी आ गया अब वह ज्यादा देर अपने आप को रोक नहीं पाया और दोनों टांगों के बीच अपना मुंह डाल दिया उसकी फुली हुई कचोरी जैसी बुर पर जैसे ही शुभम की जीभ का स्पर्श हुआ रुचि पूरी तरह से गनगना गई एक दम मस्त हो गई हल्कै से अपनी कमर को उठाकर अपने दोनों हाथों को शुभम के सर पर रख कर उसे अपनी बुर पर दबा दी,,,,

सहहहहहह,,,आहहहहहहह,,, शुभम ,,,,,
 
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