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Adultery एक कायर भाई

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रो मत बेटा...... थोड़ा धीरे से काम ले.... देखी इन लोग जो भी करना है वह तो करेंगे ही.. तू अपना धीरज बनाए रखना.. कुछ भी ऐसी हरकत मत करना कि तुम्हें ,रूपाली और मेरी मुन्नी को कुछ भी नुकसान पहुंचे.... तुम्हारी दीदी भी समझदार है......... कैसे भी हालत हो जाए तुम डटे रहना.... अपनी दीदी पर भरोसा रखना... सब कुछ तुम्हारे हाथ में है ..... हमारे खानदान की इज्जत तुम्हारे हाथ में....

जीजू तो लगभग रो रहे थे बोलते हुए...... वह भी मजबूर थे मैं भी मजबूर और सबसे ज्यादा मजबूर मेरी रूपाली दीदी थी..

जीजू का फोन कट होने के बाद मैं चुपचाप जमीन पर बैठ गया मुन्नी को अपनी गोद में लेकर.... जुनेद मेरी तरफ देखकर कुटिल मुस्कान दे रहा था.... मैंने अपना सर झुका लिया था... मेरी रूपाली दीदी मेरी तरफ देख रही थी बड़ी आज से कि मेरा भाई कुछ करेगा मेरे लिए... और एक बदनसीब भाई जो कुछ भी करने की हालत में नहीं था चुपचाप दीदी की गांड का बाजा बजते हुए देख रहा था..... खूब चोदा उसने मेरी दीदी की गांड को ..तकरीबन 10 मिनट तो पागल की तरह झटके मार रहा था..... आखिर उसका भी लोड़ा थक गया और उसने मेरी दीदी की गांड मैं अपना माल भर दिया और मेरी .दीदी की पीठ पर लेट के जैसे बेहोश हो गया...

मेरी दीदी की गांड में असलम का लौड़ा फंसा हुआ था... झड़ने के बाद भी..... असलम में मेरी दीदी की गांड से बाहर निकाल लिया अपना लण्ड... पर जुनैद ने मेरी रूपाली दीदी को राहत लेने का मौका नहीं दिया.. उसका लण्ड पहले से बड़ा खड़ा और तैयार था बिना देर किए उसने मअपना लौड़ा पेल दिया मेरे रूपाली दीदी की क गांड में...... जिस गांड में असलम के लण्ड की मलाई भरी हुई थी पहले से ही..... उसने भी मेरी रूपाली दीदी की गांड को इतनी बेरहमी से ही मारा जितना असलम ने मारा था..
 
तकरीबन 10 मिनट तक मेरी रूपाली दीदी की गांड में जुनैद भी अपना लंड बरसाया... उसका तरीका भी असलम की तरह ही जालिम वाला था पर वह इतनी गालियां नहीं दे रहा था.. बल्कि वह मदहोश लग रहा है... मेरी दीदी अभी भी घोड़ी बनी हुई थी और उनके हाथ अभी भी पीछे बंधे हुए थे.... मेरी दीदी का प्रतिरोध अब बिल्कुल भी नहीं था.... प्रतिरोध करने का कुछ फायदा भी नहीं था.... उनकी और हमारी इज्जत जो बर्बाद होनी थी वह तो हो चुकी थी... उनकी आंखें बंद थी और हर झटके के साथ उनका पूरा शरीर आगे पीछे हो रहा था और चूचीयां हिल रही थी....

मदहोशी के आलम में जुनैद मेरी रूपाली दीदी के ऊपर सवार होकर उनकी गर्दन को चाटे जा रहा था और अपनी मनमर्जी से उनकी गांड में धक्के मारे जा रहा था....

आईईईईइ स्स्सीईईईईइ में मर गई .... ऊउईईईइ माँ... प्लीज मेरे हाथ खोल दो... बहुत दर्द हो रहा है... अचानक दीदी ने पीछे मुड़ के बड़ी मुश्किल से अपने मुंह से आवाज निकाली.... दीदी का चेहरा ठीक जुनैद के चेहरे के सामने था....

हाय मेरी जान को दर्द हो रहा है? चला खोल देता हूं तेरे हाथ... साली तू नखरे दिखा रही थी इसलिए तो तेरे हाथ बांधने पड़े थे... वरना हम बड़े प्यार से लेते हैं... मेरी छम्मक छल्लो... पहले मुझे चुम्मा तो दे देना.... जुनैद ने बड़े कामुक अंदाज में कहाा और मेरी दीदी के होठों को अपने होठों में लेकर चूसने लगा... उसने अपनी जुबान मेरी दीदी के मुंह में ठेल दी... मजबूरी में उसकी जुबान को चूसने लगी थी मेरी दीदी... दीदी ने भी अपनी जीभ बाहर निकाल लि... फिर दोनों की जुबान आपस में लड़ने लगी.... जब चुंबन का दौर खत्म हुआ ...मेरी दीदी की आंखें लाल हो चुकी थी.... जुनैद को बहुत ज्यादा जोश आ गया था... एक हाथ से उसने मेरी दीदी को अपनी बाहों में जकड़ लिया दूसरे हाथ से उसने मेरी दीदी की चुत को रगड़ने लगा, यहां तक कि उसने अपनी दो उंगलियां मेरी दीदी की चुत मे घुसा दी और अंदर-बाहर करने लगा... उसका मोटा मुसल तो पहले से ही मेरी दीदी की गांड में अंदर बाहर हो रहा था....
 
उईइइइइइइइइइ माँ , प्लीज लगता है ,माँ ओह्ह आह बहोत जोर से नहीईईईई बहोत दर्द उईईईईईई माँ ........ मेरी रूपाली दीदी की कामुक सिसकियां और उनके मुंह से निकल रही अजीबोगरीब आवाज सारा माहौल बयां कर रही थी... मेरे मन में अब कोई भी संदेह नहीं रह गया था कि कहीं ना कहीं मेरी दीदी भी आनंद ले रही हैं जुनैद की हरकतों का..... जुनैद भी समझ चुका था... जुनैद ने अपनी दोनों उंगलियां मेरी दीदी की चुत से बाहर निकाल कर मुझे दिखाई.. जो मेरी दीदी की चुतरस सब बिल्कुल गिरी हुई पड़ी थी... जुनैद ने आंखों आंखों में मेरी तरफ देखते हुए कहा.... साले तेरी बहन की चुत अब लौड़ा मांग रही है....

साले तेरी दीदी की चुत का भोसड़ा बनाऊंगा एक बार फिर .... तू चुपचाप देख और मजे ले.... ज्यादा नाटक किया तो तेरी भी गांड मार लूंगा.... शर्म से मेरी नजरें झुक गई फिर से....

पर उसने मुझ पर और ज्यादा ध्यान नहीं दिया बल्कि उसने मेरी रूपाली दीदी की गांड में से अपना लोड़ा निकाल लिया....

जुनैद ने एक बार फिर से मेरी दीदी को नीचे जमीन पर सूखी घास पर पटक दिया.... उसने मेरी दीदी की दोनों टांगें उठा कर अपने कंधे पर रख ली.... फिर उसने मेरी दीदी की चुत पर अपना मोटा मुसल टिका दिया.... एक जबरदस्त झटके के साथ ही उसका मोटा लौड़ा मेरी दीदी की चुत को रगड़ता पूरा का पूरा जड़ तक अंदर समा चुका था...

...उईइइइइइइइइइ माँ , प्लीज ैमाँ ओह्ह आह नहीईईईई
 
खुद कामदेव आकर समा गए थे जुनैद के अंदर..... तकरीबन 15 मिनट तक उसने मेरी रूपाली दीदी को कामशास्त्र के सारे पाठ से परिचय करवाया...... उसने मेरी दीदी दीदी को लगभग हर आसन में चोदा..... कभी मेरी दीदी की दोनों टांगे उसके कंधों पर थी और उनकी चूचियां उसकी हाथों की मजबूत पकड़ में.... कभी मेरी दीदी की एक टांग उसके कंधे पर और दीदी की चूची उतनी ही बेरहमी से दबाई जा रही थी... उसने मेरी रूपाली दीदी को कभी घोड़ी बनाया तो कभी कुत्तिया... उसने मेरी दीदी को करवट लिटा के उनकी एक टांग हवा में उठा के पीछे से चोदा... फिर उनको दोहरी करके भी चोदा.. सच तो यह है कि उसके "लण्ड" ने मेरी रूपाली दीदी के आगे वाले छेद का कचुंबर निकाल दिया था.... पर मेरे लिए सबसे आश्चर्य की बात यह थी कि मेरी दीदी भी उसका पूरा सहयोग दे रही थी... एक काम पीड़ित स्त्री की तरह मेरी दीदी सिसकियां ले रही थी... बल्कि सच कहूं तो उन्हें बेहद आनंद आ रहा था... मेरी दीदी भूल चुकी थी कि वह किस अवस्था में.... अपने यौन सुख के उन्माद में मेरी दीदी को यह भी याद नहीं रहा कि उनका भाई उनके सामने बैठा हुआ सब कुछ देख रहा है.... ना जाने कितनी बार मेरी दीदी झड़ चुकी थी.... झड़ते समय उनके मुंह से ऐसी आवाज निकलती थी कि मैं समझ जा रहा था कि मेरी दीदी झड़ रही है.... सच तो यह है कि मैं भी झड़ने की कगार पर था... अपनी सगी सुहागन दीदी की "चुदाई एक गैर मर्द से देखते हुए.... आखिरी समय में मेरी रूपाली दीदी जुनैद के बदन से बिल्कुल चिपकी हुई थी.. उनकी दोनों टांगे जुनैद के कमर से लिपटी हुई थी.. जुनैद का लंबा मोटा लण्ड मेरी दीदी की कोख में अंदर बाहर बड़ी तेजी से हो रहा था... और उसका चेहरा मेरी दीदी की चूचियों के बीच में धंसा हुआ था... मेरी दीदी की कामुक चीखे और सिसकियां... ऊपर से जुनैद की हुंकार भरी आवाज सुनके मुझे समझने में देर नहीं लगी अब समय आ गया है.... जुनैद ने अपने लण्ड का माल मेरी दीदी की कोख में फिर भर दिया.... मेरी दीदी की बच्चेदानी जुनैद के लोड़े की मलाई से भर गई... कुछ देर तक दोनों कांपते रहे... दोनों पसीने से भीग चुके थे... मेरी रूपाली दीदी के चेहरे पर संतुष्टि थी.... ऐसा लग रहा था जैसे अभी अभी उनके पति ने यानी मेरे जीजू ने मेरी दीदी को भरपूर यौन सुख दिया हो.....
 
दीदी के चेहरे पर कोई भी ग्लानि के बाद दिखाई नहीं दे रहे थे... उनकी आंखें आधी खुली आधी बंद थी.... कामुकता की कठिन अग्नि में जलने के बाद मेरी दीदी का चेहरा शांत लग रहा था.... जुनैद के लण्ड ने मेरी दीदी को भरपूर सुख दिया था... और मेरी घरेलू संस्कारी रूपाली दीदी बिना किसी संकोच के आनंद उठा रही थी.... जुनैद अभी भी अपने आधे खड़े लण्ड से मेरी दीदी को चोदे जा रहा था..... माल गिराने के बाद भी उसका मुसल शांत नहीं हो रहा था... शायद यह मेरी रूपाली दीदी कि हुस्न का ही कमाल रहा होगा... झड़ने के बावजूद भी हार नहीं मान रहा था जुनैद.... बीच-बीच में मेरी दीदी भी चूतड़ उठा उठा के उसको सहयोग दे रही थी.... और ज्यादा से ज्यादा योन सुख लेने का प्रयास कर रही थी... कुछ ही देर में जुनैद मेरी रूपाली दीदी के ऊपर लाश की तरह लेट गया.... उसका लोड़ा मेरी दीदी की योनि के भीतर घुसा हुआ था पर उसके लोड़े में जान बची नहीं थी.... मेरी दीदी की योनि ने उसका सारा रस निचोड़ लिया था..

अचानक जंगल में ऑटो की आवाज सुनाई दी.... और मेरी फट गई..

ऑटो वाला सुरेश वापस आ चुका था.... और वह बेहद नजदीक था..

जुनेद मेरी रूपाली दीदी के नंगे बदन के ऊपर से उतरने को बिल्कुल तैयार नहीं था.. बल्कि वह तो बिल्कुल होश में नहीं था.... फिर भी इतने कम होश में भी जुनैद मेरी रूपाली दीदी की चूचियों को पिए जा रहा था... बारी-बारी से दोनों निप्पल्स अपने मुंह में लेकर.... मेरी दीदी एक दुधारू गाय की तरह दूध दे रही थी और जुनैद पिए जा रहा था... उसका मोटा लंबा मुसल लण्ड झड़ने के बाद आधा हो गया था और खुद ब खुद मेरी दीदी की योनि से बाहर निकल गया... पर वह अभी भी मेरी दीदी के ऊपर सवार था.... जंगल के सन्नाटे में ऑटो की आवाज साफ सुनाई दे रही थी और वह बिल्कुल पास आ चुकी थी. ऑटो झोपड़ी के बिल्कुल पास आकर बंद हो गई... यानी सुरेश पहुंच चुका था... और मेरी गांड भी फट गई... मुझे लगने लगा कि सुरेश अब मेरी रूपाली दीदी को इस हालत में देखेगा... वह भी इतना नीच... एक सड़क का ऑटो वाला... मेरा खड़ा हुआ लोड़ा भी बैठ गया... दोस्तों अगर मैं आप लोगों से सच बोलूं जो कि बेहद शर्मिंदगी की बात है.... मेरा लण्ड भी खड़ा हो गया था मेरी रूपाली दीदी की ठुकाई देखकर ... बिना हाथ लगाए ही मैं झड़ने की कगार पर पहुंच चुका था... पर ऑटोवाले सुरेश को झोपड़ी के अंदर आने का अंदेशा पाकर मेरा लण्ड मुरझा गया.... एक बार फिर मैं बहुत ग्लानि में समा गया..

जुनैद भाई मैं हाथ जोड़ता हूं प्लीज अब मेरी दीदी को छोड़ दो... ऑटो वाला सुरेश भैया आ चुका है... प्लीज हमारी इज्जत कम से कम हो उसके सामने तो रख लो.... अपना पूरा साहस जोड़कर मैंने जुनैद से विनती की और असलम की तरफ भी देखा जो अपने लण्ड को हिला रहा था मेरी दीदी को घूरते हुए... उसका एक बार फिर से पूरा खड़ा हो गया था.... क्या फिर से मेरी दीदी को चोदने वाला था वह? मैं लगभग रो रहा था असलम की तरफ देखते हुए..
 
मेरी करुणा से भरी हुई विनती सुन के दोनों को मुझ पर और मेरी दीदी पर दया आ गई..

आह बहनचोद.... तेरी रूपाली दीदी की चूत कमाल की है बहन के लोड़े.... साली रंडी ने मेरे लोड़े का तेल निकाल दिया ..इसकी मां को चोदूं.... साली बहुत बड़ी रंडी है तेरी दीदी... यार अंशुल.... मेरी दीदी की सवारी करने के बाद उठ कर खड़ा हो गया था जुनैद... बोलते हुए बिल्कुल ही नग्न अवस्था में वह मेरी तरफ बढ़ा चला आ रहा था.... मेरी नजर उसकी टांगों के बीच झूलते हुए उसके मुसल पर थी जो अब बिल्कुल ढीला पड़ चुका था... उसका बिल्कुल ढीला पड़ चुका लण्ड मेरे खड़े लण्ड की तुलना में दोगुना लंबा और मोटा दिख रहा था.. जुनैद बिल्कुल मेरे पास आकर खड़ा हो गया..... वह बिल्कुल नंगा ही था..

क्या देख रहा है बहन के लोड़े रंडी के भाई.... साले बहन चोद.. मेरा लण्ड देख रहा है गांडु..... देख मां के लोड़े... इसी लण्ड से तेरी रूपाली दीदी की बच्चेदानी में दो बार मलाई भर दिया.... एक बार फिर तु मामा बनेगा मेरे लोड़े की मलाई से बहन चोद.... जुनैद ने अपने ढीले पड़ चुके लण्ड को मेरे सामने लहरा दिया.... शर्म के मारे मैं जमीन में गड़ा जा रहा था.... मैं कुछ भी बोल नहीं पा रहा था.... मेरी रूपाली दीदी जमीन पर बिखरी पड़ी थी बिल्कुल नग्न ... उनकी दोनों टांगे फैली हुई थी और जुनैद का गाढ़ा सफेद वीर्य मेरी दीदी की चूत से टपक रहा था... मेरी दीदी को कुछ भी होश नहीं था..

दीदी ...दीदी.... सुरेश आ चुका है...... मैंने बड़ी हिम्मत करके लगभग चीखते हुए कहा.... मेरी आवाज सुनकर दीदी तो जैसे स्वर्ग लोक से धरती पर आ गई.. दीदी उठकर खड़ी हो गई..... जुनैद ने पुराना तोलिया लपेट लिया अपनी कमर में.... नशे में धुत असलम अपने हाथ में अपने पूरी तरह खड़े लोड़े को पकड़ के मेरी रूपाली दीदी पर आक्रमण करने के लिए पूरी तरह तैयार था..... तभी अचानक झोपड़ी के दरवाजे पर सुरेश प्रकट हुआ.. मेरी रूपाली दीदी झोपड़ी के बीचो-बीच बिल्कुल नंगी खड़ी थी उनकी चूत से जुनैद का वीर्य टपक रहा था और चूची से दूध....

मेरी दीदी को देखकर तो सुरेश को जैसे लकवा मार गया. वह आंखें फाड़ फाड़ कर मेरी दीदी को घूर रहा था.... मेरी दीदी का भरपूर जोबन अपनी नग्न अवस्था में उसकी आंखों के सामने था... शर्म के मारे मेरी दीदी का बुरा हाल हो गया था... एक हाथ से दीदी अपनी चुत को छुपा रही थी और दूसरे हाथ से दीदी अपने दोनों चूचियों को ढकने का प्रयास कर रही थी... जो नाकाफी था... सुरेश अपने हाथों में दो पैकेट लेकर एकटक मेरी रूपाली दीदी के नंगे बदन को निहार रहा था...
 
क्या देख रहा है बहन चोद... बड़ी जल्दी आ गया .. इधर आओ मेरे पास.. जुनैद ने सुरेश को कहां.... सुरेश चुपचाप जुनैद के पास गया और पैकेट से शराब की बोतल और चकना निकाल कर उसके सामने रखने लगा... पर उसकी निगाहें मेरी रूपाली तेरी दीदी पर ही थी... शायद मन ही मन वह भी मेरी रूपाली दीदी को अपने लण्ड पर बिठाने के सपने देख रहा था.... जमीन पर पड़ी हुई साड़ी और फटी हुई चोली को उठाकर मेरी दीदी अपने बदन को छुपाने का प्रयास करने लगी... साड़ी को जैसे-तैसे अपने बदन पर लपेट के दीदी झोपड़ी के कोने में जाकर खड़ी हो गई. उन्होंने अपना मुंह दूसरी तरफ कर रखा था... मेरी दीदी शायद रो रही थी... एक संस्कारी सुहागन औरत के लिए यह सब कुछ बहुत ज्यादा हो चुका था.... मैं भी मन ही मन रो रहा था... पर मुझे लगने लगा था कि अब सारा खेल खत्म हो चुका है... शायद यह लोग अब हमें जाने देंगे... पर मेरा सोचना बहुत गलत था...

जुनैद भाई.... लगता है आप दोनों ने मैडम को खूब ठोका है... वैसे आज तक इतनी चिकनी माल मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखी... सच बोल रहा हूं जुनैद भाई... इस मेम साहब को देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो गया था... बड़ी मुश्किल से मैंने कंट्रोल किया... इनको याद कर कर के रास्ते में दो बार मुट्ठ मार चुका... फिर भी लण्ड है कि मानता नहीं... जुनैद भाई मुझे भी एक मौका दे दो प्लीज.... सारी जिंदगी आप का गुलाम बनके रहूंगा... ऐसी माल को चोदना सब के नसीब में नहीं मिलता जुनैद भाई... बस एक बार प्लीज बस एक बार.... मेरी दीदी को चोदने के लिए सुरेश जुनैद के आगे गिड़गिड़ा रहा था.....

तेरी बहन का भोंसड़ा साले मादरजात अपनी औकात में रह... साले भूल गया बहन के लोड़े... तेरी पायल दीदी हमारी रंडी है बहन चोद... और तू हमारा नौकर... ऐसी माल चोदने की तेरी औकात नहीं है... वैसे भी रूपाली सिर्फ हमारी रंडी है... यह असलम बोल रहा था... जो नशे की हालत में बिल्कुल नंगा खड़ा था हाथ मैं अपना मुसल जैसा काला मोटा लण्ड पकड़ के... उसे किसी बात की परवाह नहीं थी सिवाय मेरी रूपाली दीदी के हुस्न को भोगने के... उसकी निगाहें भी मेरी दीदी पर टिकी हुई थी.... असलम की गालियां सुन के सुरेश खिसिया सा गया... और चुप हो गया.... फिर से मेरे जीजू का फोन आने लगा.. मैंने फोन उठा लिया... जीजू मुझसे पूछने लगे कि क्या हो रहा है वहां पर.... मैं उनको कुछ भी जवाब देने की हालत में नहीं था... सब कुछ ठीक है जीजू सब कुछ ठीक है... मैं हड़बड़ाते हुए बोल रहा था... मेरी हालत समझ रहे थे शायद मेरे जीजू... उन्होंने मुझसे कहा कि असलम या जुनैद से मेरी बात कराओ..

असलम भाई मेरे जीजू आपसे बात करना चाहते हैं... मैंने असलम की तरफ देखते हुए कहा.. जो मेरी दीदी को फिर से दोबारा चोदने की पूरी तैयारी करके खड़ा था.. पहली बार तो उसने मेरी बात सुनी नहीं जब दोबारा मैंने उससे कहा तब उसका ध्यान मेरी तरफ़ आया..
 
हां बहन के लोड़े.. क्या हुआ तेरे जीजू के गांड में क्या खुजली हो रही है मादरजात..... असलम गुस्सा हो मुझसे बोला...

प्लीज असलम भाई एक बार मेरे जीजू से बात कर लो... मैंने डरते हुए कहा..

चल ठीक है बहन चोद फोन दे मुझे... असलम ने कहा.. मैंने असलम को फोन थमा दिया..

बोल बहन के लोड़े .... तेरी मां का भोसड़ा... असलम ने गुस्से में मेरे जीजू को गाली दी... फोन के दूसरी तरफ मेरे जीजू पता नहीं क्या बोल रहे थे मुझे सुनाई नहीं दे रहा था पर असलम सिर्फ हां हूं मैं जवाब दे रहा था..... और दूसरे हाथ से अपने लोड़े को सहला रहा था मेरी रूपाली दीदी को देखते हुए.......

चल ठीक है मादरजात..... मुझे तो लगा था कि पुलिस को लेकर आता होगा तु... पर तू सही आदमी.... तेरी बीवी सही सलामत घर पहुंच जाएगी... पर हम लोग इसकी जी भर के लेंगे उसके पहले... तेरा साला चुटिया है इसके बस का कुछ नहीं है... चल ठीक है मैं तेरी बात रूपाली से करवाता हूं.... असलम फोन पर मेरे जीजू को बोल रहा ..

एक हाथ में फोन और दूसरे हाथ से अपने मोटे मुसल जैसे लण्ड को हिलाते हुए असलम मेरी रूपाली दीदी की तरफ बढ़ने लगा.. मेरी दीदी झोपड़ी के दूसरे कोने में खड़ी थी. उनकी पीठ हमारी तरफ थी... फटी हुई साड़ी से दीदी ने अपनी गांड को तो ढक रखा था पर उनकी नंगी पीठ और नंगी टांगे दिख रही थी... असलम मेरी दीदी के बिल्कुल पास जाकर खड़ा हो गया. वह लगभग मेरी दीदी से चिपक गया.. उसका लण्ड मेरी सुहागन दीदी की गांड पर टिका हुआ था... मेरी दीदी फिर मचलने लगी उसके लण्ड को अपनी गांड पर महसूस करते हुए.. मेरी दीदी सिहर उठी थी... असलम का लण्ड मेरी दीदी की गांड पर झटके देने लगा.. वैसे तो मेरी दीदी की गांड साड़ी में लिपटी हुई थी.. पर असलम का मोटा लण्ड मेरी दीदी की साड़ी को फाड़ के उनकी गांड में घुसने को तैयार था....

हाय मेरी जान.. रूपाली... गांडू बड़वा पति तुझसे बात करना चाहता है तेरा... बात कर इससे.... असलम ने मेरी दीदी के गर्दन को चूमते हुए कहा... उसने मेरी दीदी के हाथ में फोन थमा दिया...

हेलो...... मेरी दीदी ने फोन पर कहा... उनकी आवाज थरथर आ रही थी.... मेरी दीदी बेहद डरी हुई थी.... फोन के दूसरी तरफ कुछ समझा रहे थे उनको मेरे जीजू... मेरी दीदी चुपचाप उनकी बातें सुन रही थी.

मेरी दीदी की आंखों में आंसू थे... वह रोते सीसकते हुए फोन पर बातें सुन रही थी मेरे जीजू की.... असलम ने मेरी दीदी की साड़ी को पकड़कर खींचना शुरू कर दिया था.. मेरी रूपाली दीदी भले ही संस्कारी और पतिव्रता हो... पर वह महाभारत की द्रौपदी तो थी नहीं कि भगवान कृष्ण उनकी रक्षा में आए और उनकी साड़ी को अनंत कर दे.... कुछ ही क्षणों में मेरी दीदी की साड़ी उनके बदन से अलग हो गई.. साड़ी को लपेट की मेरे मुंह की तरफ फेंका असलम ने... मेरा चेहरा ढक गया दीदी की साड़ी से.... सुरेश ने मेरे चेहरे से मेरी दीदी की साड़ी को उठा लिया और उसे सूंघने लगा... नंगी हो गई थी एक बार फिर 3 खूंखार मर्दों के सामने मेरी रूपाली दीदी...

असलम ने मेरी दीदी का सर पकड़ के उनको नीचे बिठा दिया और उनकी चूचियों पर अपना लण्ड सटा दिया... एक हाथ से उसने मेरी दीदी की दाईं चूची को पकड़ा और अपने लण्ड का मोटा सुपाड़ा मेरी दीदी के निपल्स पर रगड़ने लगा.. मेरी दीदी की चुचियों से निकलता हुआ दूध असलम के लण्ड को गीला करने लगा......

बहुत बात कर ली तूने बहन की लोड़ी.. चल फोन रख अब... मेरे लण्ड को अपनी चुचियों के बीच में ले मुझे अब तेरी चूची चोदनी है.. असलम ने मेरी दीदी को कहा.... मेरी दीदी ने मेरी तरफ कातर निगाहों से देखा... वह तुमसे बात करना चाहते है अंशुल... दीदी ने मेरी तरफ देखते हुए जब कहा मेरी शेट्टी पिट्टी गुम हो गई... मैं दीदी के पास गया और उनके हाथ से फोन ले लिया.. मैं उनसे अलग कुछ कदम के फासले पर खड़ा हो गया..
 
फोन तो मैंने ले लिया पर मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं क्या बात करूं अपने जीजू से.... बार-बार पूछ रहे थे वहां क्या हो रहा है मेरे जीजू... मैं उन्हें समझाने की कोशिश कर रहा था कि यहां सब ठीक है... हालांकि यह सच बिल्कुल नहीं था...

मुन्नी कैसी है.... जीजू ने पूछा....

ठीक है ...सो गई है जीजू.... मैंने लड़खड़ाते हुए जवाब दिया..

और तुम्हारी रूपाली दीदी कैसी है... बोलते बोलते लगभग रो रहे थे मेरे जीजाजी...

मैं भला इस सवाल का क्या जवाब देता... शायद जीजू को भी अंदाजा था कि मेरी दीदी के साथ क्या हो रहा होगा ... एक बार फिर असलम में मेरी रूपाली दीदी को नीचे जमीन पर पटक दिया था और उनकी छाती पर बैठ गया था.... उसने मेरी दीदी की दोनों बड़ी बड़ी चूची अपने दोनों हाथों में जकड़ के रखी थी और अपना काला खूब मोटा , लंबा तना बौराया , बेसबरा लालची लण्ड मेरी दीदी की चूचियों की घाटी के बीचोबीच डाल दिया था... और आगे पीछे कर रहा था... उसका मोटा सुपाड़ा मेरी दीदी के गुलाबी होठों तक पहुंच रहा था... दीदी का मंगलसूत्र उसके कठोर लण्ड पर टिका हुआ था.. ना सिर्फ वह मेरी दीदी की चूचियों को चोद रहा था बल्कि अपना सुपाड़ा भी मेरी दीदी के होठों पर रगड़ रहा था... मेरी रूपाली दीदी मेरी तरफ कातर निगाहों से देख रही थी... मैं जीजू से बात तो कर रहा था पर मेरी निगाहें रूपाली दीदी पर टिकी हुई थी..... उस झोपड़ी में मौजूद हर मर्द की निगाहें मेरी रूपाली दीदी पर ही टिकी हुई थी... खासकर सुरेश की... उसके मुंह से तो लार टपक रही थी.. उसका लण्ड बेकाबू हो चुका था... उसके पैंट में टेंट बन गया था.

मेरे जीजू मुझे फोन भी समझा रहे थे कि धीरज से काम लो... संभालो खुद को मुन्नी को और अपनी दीदी को भी हौसला दो... इस समय में तुम्हें हिम्मत से काम लेना होगा... यह गुंडे तुम लोग को वहां आसानी से निकलने नहीं देंगे.... तुम बाकी टेंशन मत लो.. मैंने तुम्हारी मम्मी और प्रियंका दीदी को समझा दिया है कि तुम और रूपाली मेरे दोस्त के यहां रुके हुए हैं.. रास्ते में गाड़ी खराब हो गई थी.... समझ गए ना.... अब मैं फोन रखता हूं मैं थोड़ी देर बाद फिर फोन करूंगा.... जीजू ने कहा...

ठीक है जीजू.... उनकी बातें सुनकर मुझे भी थोड़ी हिम्मत आई.. उन्होंने फोन काट दिया....

सुरेश मुझे दारू की बोतल दे.... असलम ने सुरेश की तरफ सुरेश ने दारू की एक बोतल उठाई और धीरे-धीरे असलम के पास पहुंचा...... असलम ने दारू की बोतल उसके हाथ से ले ली....

साले बहन के लोड़े बोतल खोल के दे.. असलम में सुरेश को गुस्से में कहा...

सुरेश ने असलम की गाली का बुरा नहीं माना बल्कि उसके चेहरे पर तो एक कुटिल मुस्कान थी.... सूखी घास पर नंगी पड़ी मेरी रूपाली दीदी और उनकी छाती पर बैठकर उनकी चूचियों को चोद रहा असलम... इतना कामुक नजारा ठीक उसकी आंखों के सामने था.... भला ऐसा मौका वह क्यों बेकार जाने देता... दारू की बोतल खोलने में उसने काफी समय लगाया.. और इसी बीच में मेरी दीदी का भरपूर नजारा उसने ले लिया बिल्कुल पास से...... मेरी दीदी की चिकनी गुलाबी योनि को वह देखे जा रहा था... साले के मुंह से लार टपक रही थी. मेरी संस्कारी रूपाली दीदी की टांगे खुली हुई थी... गोरी गोरी टांगों के बीच उनकी सुहागन मासूम चुत, जिसे जुनैद ने चोद चोद के परखच्चे उड़ा दिए थे, बिल्कुल भोसड़ा बना दिया था... बिल्कुल खुली लग रही थी मेरी दीदी की चुत... और जुनैद के लोड़े की मलाई अभी भी टपक रही थी मेरी दीदी के स्वर्गद्वार से....... सुरेश ने असलम को बोतल खोल के थमा दी.
 
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