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Adultery एक रात ऐसी भी

‘अब्बा’ का रिकार्ड बजता रहा ।

रिकार्ड पूरा बज चुकने के बाद अपने आप खामोश हो गया ।

वे दोनों सोफे पर लेटे रहे । सोफे पर इतनी जगह नहीं थी कि वे दोनों सहूलियत से उस पर लेट पाते, लेकिन अपनी असुविधाजनक स्थिति से उन दोनों में से किसी को भी कोई शिकायत नहीं थी । कामिनी का सिर राज के कन्धे पर टिका हुआ था और उसकी आंखें बन्द थी ।

राज बहुत सन्तुष्ट था । सहवास का आज जैसा मुकम्मल आनन्द उसे पहले कभी हासिल नहीं हुआ था । कामिनी के आज के व्यवहार में एक पत्नी जैसी निष्ठा के साथ-साथ एक नगर वधू जैसी चंचल मादकता भी थी । आज उसने सिर्फ एक पत्नी वाला फर्ज ही नहीं निभाया था, आज उसने एक फर्माबरदार बीवी की तरह अपने आपको सिर्फ अपने पति के हवाले ही नहीं कर दिया था, आज उसने जो कुछ किया था, उसे राज कोई नाम नहीं दे पा रहा था, लेकिन वह उसके लिए एक ऐसा अहसास था, जिससे वह पहले कभी दो-चार नहीं हुआ था, जिसके अस्तित्व तक को वह नहीं पहचानता था ।
 
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