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रेणुका के हाथ अपने बदन पर फिरते ही दिव्या के निप्पल एक दम कड़क हो जाते हैं जिसे देख कर रेणुका के चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान आ जाती है.
रेणुका: अब मैं यहाँ अकेली नहीं हूँ जो तड़प रही है.
दिव्या हलकी आवाज में रेणुका को रुकने के लिए बोलती है लेकिन रेणुका दिव्या के एक निप्पल को अपनी जीभ से सहलाने लगती है.
रेणुका के ऐसा करने से दिव्या की सिसकी निकल जाती है.
रेणुका दिव्या की निप्पल पर अपनी जीभ से बार बार सर्किल बनाने लगती है. जल्द ही वो दिव्या की दूसरी निप्पल को अपने मुंह में लेकर हल्का हल्का काटने लगती है तो दिव्या एक मीठे दर्द से मदहोश हो जाती है. दिव्या रेणुका को रोकने को कोशिश करती है लेकिन उसका विरोध इतना कमजोर था की मानो वो खुद चाहती हो की रेणुका न रुके.
रेणुका जानती थी की अब दिव्या उसे बिलकुल नहीं रोकेगी तो वो अपना टॉप उतार कर दिव्या के बदन पर झुक जाती है और अपने हाथ को दिव्या के पेट से रगड़ते हुए उसकी पेंटी में डाल देती है.
हाथ चूत पर जाते ही दिव्या जल बिन मछली की तरह तड़पने लगती है. रेणुका दिव्या की चूत को अपनी उँगलियों से रगड़ते हुए उसके बालों में हाथ डाल कर उसका मुंह अपने मम्मों की तरह ले आती है.
दिव्या समझ जाती है की रेणुका क्या चाहती है और वो रेणुका के मम्मों को चाटना शुरू कर देती है. कुछ देर दिव्या की चूत रगड़ने के बाद रेणुका बेड पर बैठ कर अपने बाकी के कपडे उतारने लगती है. ऐसा करते हुए वो लगातार दिव्या की तरफ देखती रहती है पर दिव्या उससे नज़रे मिलाने की जगह अपनी आँख बंद कर लेती है. अपने कपडे उतारने के बाद रेणुका एक एक करके दिव्या के कपडे भी उसके बदन से खींच लेती है.
रेणुका: अब मैं यहाँ अकेली नहीं हूँ जो तड़प रही है.
दिव्या हलकी आवाज में रेणुका को रुकने के लिए बोलती है लेकिन रेणुका दिव्या के एक निप्पल को अपनी जीभ से सहलाने लगती है.
रेणुका के ऐसा करने से दिव्या की सिसकी निकल जाती है.
रेणुका दिव्या की निप्पल पर अपनी जीभ से बार बार सर्किल बनाने लगती है. जल्द ही वो दिव्या की दूसरी निप्पल को अपने मुंह में लेकर हल्का हल्का काटने लगती है तो दिव्या एक मीठे दर्द से मदहोश हो जाती है. दिव्या रेणुका को रोकने को कोशिश करती है लेकिन उसका विरोध इतना कमजोर था की मानो वो खुद चाहती हो की रेणुका न रुके.
रेणुका जानती थी की अब दिव्या उसे बिलकुल नहीं रोकेगी तो वो अपना टॉप उतार कर दिव्या के बदन पर झुक जाती है और अपने हाथ को दिव्या के पेट से रगड़ते हुए उसकी पेंटी में डाल देती है.
हाथ चूत पर जाते ही दिव्या जल बिन मछली की तरह तड़पने लगती है. रेणुका दिव्या की चूत को अपनी उँगलियों से रगड़ते हुए उसके बालों में हाथ डाल कर उसका मुंह अपने मम्मों की तरह ले आती है.
दिव्या समझ जाती है की रेणुका क्या चाहती है और वो रेणुका के मम्मों को चाटना शुरू कर देती है. कुछ देर दिव्या की चूत रगड़ने के बाद रेणुका बेड पर बैठ कर अपने बाकी के कपडे उतारने लगती है. ऐसा करते हुए वो लगातार दिव्या की तरफ देखती रहती है पर दिव्या उससे नज़रे मिलाने की जगह अपनी आँख बंद कर लेती है. अपने कपडे उतारने के बाद रेणुका एक एक करके दिव्या के कपडे भी उसके बदन से खींच लेती है.