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Adultery दिव्या का सफ़र

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रेणुका राजेश के शरीर से जल्द ही अंतिम कपड़ा भी उतार फेकती है। और उसके लंड को अपने हाथ में ले कर उसे हिलाने लगती है।

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राजेश को तड़पता देख रेणुका की चाहतें पर स्माइल आ जाती है। वह बार बार अपना हाथ रोक कर राजेश को और तड़पाती है।

राजेश: अपना हाथ मत रोको, प्लीज़।

रेणुका: क्यों ज्यादा जल्दी है क्या तुम्हें? ऐसे तो दिव्या को अपने लिए कोई और देखना पड़ेगा।

राजेश: ऐसा कभी नहीं हो सकता। वह बहुत शरीफ है।

रेणुका: शरीफ है पर क्या वह ऐसा मजा दे पाती है तुम्हें।

राजेश कुछ कहे बिना तड़पता रहता है तो रेणुका अपना हाथ रोक लेती है।

रेणुका: बोलो ना राजेश।

राजेश: नहीं। उसने कभी इस तरह ये सब किया ही नहीं।

रेणुका: कल जो तुमने मेरे साथ किया, तुम्हें डर था कि मुझे पता चला कि वो तुम थे फिर भी तुमने वो सब क्यों किया।

राजेश: मैं बस नशे में खुद पर कंट्रोल नहीं कर सका।

रेणुका लंड को थोड़ा तेज हिलाने लगती है तो राजेश उसके हाथ में ही झड़ जाता है।

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रेणुका गुस्सा होने की जगह हंस पड़ती है और अपने हाथों को उसके बदन से साफ़ करती है।

रेणुका: सही ही कहते हैं अंकल तुम्हारे बारे में।

राजेश: क्या कहते हैं?

रेणुका: यही कि किसी दिन तुम्हारी वजह से दिव्या किसी और से चुद जाएगी। हहहहा।

राजेश: ऐसा कभी भी नहीं हो सकता। पर तुम नाराज नहीं हो मुझसे।

रेणुका: नहीं, धीरे-धीरे तुम सीख जाओगे कि किसी औरत को कैसे खुश करना है। कुछ लोग चाय या कुछ और लेते हैं।

राजेश: नहीं मैं अब चलता हूँ, कुछ देर में दिव्या भी आने वाली होगी।

रेणुका: ठीक है, चले जाओ।

राजेश कपड़े पहनने लगता है तभी मेन गेट खुलने की आवाज़ आती है। राजेश को संभालने का भी टाइम नहीं मिलता कि कर्नल उसके सामने खड़ा होता है।

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कर्नल को देख रेणुका बेड से खड़ी होकर बिना कुछ कहे चली जाती है।

लाला: मेरी गैर हाजिरी में तुम ये सब क्या कर रहे हो यहाँ। ये क्या कोई रंडीखाना है?

कर्नल को गुस्से में देख कर राजेश को तो जैसे सांप सूंघ जाता है तभी कर्नल थोड़ा और कड़क आवाज़ में फिर से सवाल दोहराता है।
 
राजेश दिव्या से माफी मांगता है और उसे मनाने की कोशिश करता है। उसे समझाता है कि अभी घर बदलना पॉसिबल नहीं पर जब भी पॉसिबल हुआ तो दिव्या की बात मान लेगा। दिव्या राजेश की बात समझ, उसे अपनी बाहों में भर लेती है। राजेश भी उसे कस के हग करता है और उसके होंठों को चूमने की कोशिश करता है लेकिन दिव्या उसे रोकती है कि उसे कपड़े बदलने हैं।

दिव्या मिरर के आगे खड़े होकर कपड़े बदलने की सोचती है तभी राजेश उसके बालों में लगी पिन को खोल देता है। जिससे उसके काले घने बाल नीचे उसके बदन पर झूल जाते हैं।

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राजेश पीछे उसकी गर्दन पर किस करता है तो दिव्या मचल उठती है और पलट के राजेश को फिर से हग करती है। दिव्या अपने होंठों को राजेश के होंठों की ओर बढ़ा देती है और उसे चूमना शुरू कर देती है। दिव्या को मनीष ने वैसे ही काफी गरम कर दिया था लेकिन वो उसने अपने ऊपर कण्ट्रोल कर रखा था लेकिन उसके पति की हरकतों से उसके सब्र का बाँध टूट गया और वो राजेश के होंठों को इस तरह चूमने लगी जैसे जन्मों की प्यासी हो।

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राजेश भी इससे उत्तेजित हो उठता है पर दिव्या को थोड़ा रोक कर उसे कहता है।

राजेश: क्या बात है, कल तो बड़ा नाराज थी और आज लग रहा है जैसे खा जाओगी मुझे।

दिव्या शर्मा जाती है पर रुकती नहीं है। राजेश भी दिव्या को किस करते हुए उसके बदन को चूमता हुआ नीचे की ओर बढ़ने लगता है, जैसे ही राजेश का मुँह उसकी चूत के पास पहुँचता है तो उसपर किस करने से दिव्या कांप उठती है और आहें भरने लगती है।

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लेकिन राजेश के वापस उपर उठने से वो थोड़ा निराश होती है। दिव्या राजेश को किस करते हुए पीछे बेड की और ले जाती है, राजेश के लिए ये सब नया सा था क्योंकि दिव्या कभी खुलकर सेक्स को इनिशिएट नहीं करती थी। राजेश जैसे ही बेड पर गिरता है, दिव्या उसपर सवार हो जाती है।

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दोनों बिस्तर पर एक दुसरे के बदन को दबाने लगते हैं। राजेश चाहता था की दिव्या भी उसका लंड चूसे जैसे रेणुका से चूसा था लेकिन वो ये बात बोल नहीं पाता है। जब दिव्या राजेश का लंड अपने मुंह में नहीं लेती तो वो दिव्या के कपडे उतारने लगता है पर आज वो ज्यादा जल्दी में नहीं था। आज वो दिव्या के बदन से जी भरकर खेलना चाहता था पर आज दिव्या के लिए रुकना मुश्किल हो रहा था। दिव्या राजेश के ऊपर चढ़ जाती है और अपनी चूत उसके लंड से रगड़ने लगती है।

राजेश अभी दिव्या की चूत में लंड डालने से बच रहा था क्योंकि वो जानता था की अगर उसने एक बार चूत में लंड डाला तो वो ज्यादा देर टिक नहीं पायेगा पर उसको कुछ न करता देख दिव्या खुद ही उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत में डाल लेती है।

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दिव्या राजेश के लंड पर कूदना शुरू कर देती है और ऐसा करने से राजेश मस्ती से तड़प उठता है। वो दिव्या को रोकना चाहता है पर इस समय दिव्या को रोकना मुश्किल था और कुछ ही सेकंड में राजेश का लंड झटके खाकर झड जाता है। दिव्या अभी भी नहीं रूकती लेकिन राजेश का लंड ढीला पड़ कर उसकी चूत से बाहर निकल आता है। इतनी कम देर की चुदाई अब दिव्या के लिए नाकाफी थी फिर भी वो राजेश के बगल में लेटते हुए एक झूठी स्माइल देती है।

दिव्या और राजेश कुछ देर बेड पर लेटे रहते हैं और फिर राजेश सो जाता है। दिव्या मन मार कर उठती है और घर के कामों में लग जाती है। शाम को राजेश सो कर उठता है तो दिव्या से पूछ कर कर्नल के फ्लैट पर चला जाता है। राजेश को उम्मीद थी कि दिव्या उसे वहाँ जाने से रोकेगी पर आज दिव्या के ना रोकने से वो थोड़ा सरप्राइज भी होता है और खुश भी कि दिव्या ने उसे रोका नहीं। लेकिन आज राजेश का वहाँ जाने का कारण कर्नल से मिलना नहीं था बल्कि रेणुका की कशिश थी।
 
राजेश वहाँ काफी देर रुकता है पर आज रेणुका कहीं नजर नहीं आती। कर्नल भी उसकी नजरों को पहचानता है पर जान के उसे तरसने देता है। राजेश एक बार फिर से कर्नल से कहता है की वो दिव्या वाली बात जाने दे लेकिन कर्नल सख्त लहजे में उसे बोल देता है की अगर राजेश दिव्या को उसे नंगा नहीं दिखायेगा तो अंजाम बुरा होगा। राजेश मायूस होकर लौटने लगता है तो कर्नल उसे ड्रिंक के लिए रोकता है और कहता है की वो दिव्या को नंगा देखने के बदले उसे रेणुका के साथ चुदाई करने देगा।

वही दूसरी और दिव्या अब भी बेड में तड़प रही थी, उसकी आग शांत होने का नाम ही नहीं ले रही थी। कई बार उसके मन में आता है कि क्यों न सलमान के साथ एक बार और चुदाई कर ले, आखिर कितनी बार वो उसका बदन रौंद चुका है पर वो बार-बार अपने मन को दूसरी और ले जाने की कोशिश करती है।

राजेश को आज कर्नल के पास जाने से ना रोकने की एक वजह ये भी थी कि वो इस दुविधा में फंसी थी कि राजेश के जाने के बाद उसे मनीष से ऑनलाइन बात करने का अपना प्रॉमिस पूरा करने का चांस मिल जाएगा।

लेकिन कहीं राजेश बीच में ही आ गया तो क्या होगा, इस डर से वो ऑनलाइन नहीं आती।

कुछ देर बाद राजेश भी निराश होकर वापस लौट आता है और समझ जाता है की अब उसके पास कोई चारा नहीं है। कर्नल ने उसे आज भी नशे में धुत्ते होने के बाद ही छोड़ा था।

दिव्या को डिनर भी अकेले ही करना पड़ता है। दिव्या को उम्मीद थी कि रात में राजेश एक बार और ट्राई करेगा पर राजेश तो सीधा बेड पर बेसुध सा पड़ जाता है। दिव्या भी बेड पर आ जाती है और राजेश से चिपक कर लेट जाती है, दिव्या को राजेश के शरीर पर हाथ फिराने से राजेश भी रिस्पॉन्ड करने लगता है पर वो अपने होश में नहीं है। वो दिव्या को अपनी बाहों में भर लेता है। दिव्या तो पहले ही गरम थी, उसे लगता है कि आज तो एक ही दिन में उसे राजेश के साथ दो बार चुदाई का सुख मिलने वाला है। दिव्या राजेश के होंठों को अपने होंठों में दबा चूसना शुरू कर देती है।

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राजेश भी आधे नशे में डूबा दिव्या से खेलना शुरू कर देता है पर खुद ज्यादा कुछ नहीं कर पाता, कुछ ही पलों में दिव्या उसकी टीशर्ट उतार देती है पर राजेश तो वक्त के साथ अपने होश से खोने लगता है। दिव्या पागलों की तरह राजेश के बदन को चूमने लगती है पर उसे राजेश में कोई हलचल महसूस नहीं होती।

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राजेश दिव्या को रुकने के लिए कहता है, बोलता है कि वह थका हुआ है अभी पर दिव्या को तो अपनी आग बुझानी थी, दिव्या काफी देर तक राजेश के साथ कोशिश करती है पर राजेश तो खर्राटे मारने लगा था।

दिव्या गुस्से में बेड पर पड़ी रहती है। रात का एक एक पल उसे कांटे की तरह चुभ रहा था, लेटे लेटे घड़ी में २ बज गए पर उसकी आँखों में नींद का नामो निशान नहीं था।

उसे मनीष का ख्याल आता है पर सोचती है कि अब तक तो वो भी सो चुका होगा, ऊपर से पति भी वही है तो सोचना बेकार है पर ज्यादा देर वो खुद को रोक नहीं पाती।

दिव्या राजेश को सोता देख दूसरे कमरे में चली जाती है और अपना लैपटॉप ऑन कर ऑनलाइन आती है। उसके दिल की धड़कन डर की वजह से काफी तेज दौड़ रही थी पर उसकी आग उसे पीछे हटने नहीं दे रही थी।

मनीष भी ऑनलाइन ही था, तो दिव्या उसे मैसेज कर ही देती है पर काफी देर तक वहाँ से रिप्लाई न आने से वो समझ जाती है कि शायद मनीष सो चुका होगा। दिव्या फिर भी लॉगआउट करने से पहले उसे कई बार मैसेज करती है पर दूसरी तरफ से कोई रिप्लाई नहीं आता, आखिर दिव्या लॉगआउट कर देती है। लेकिन उसके लॉगआउट करते ही उसके फोन की रिंग बज जाती है। स्क्रीन पर मनीष का नाम देख वो अंदर से काफी खुश हो जाती है। दिव्या कॉल रिसीव करके झूठा गुस्सा दिखाती है।
 
दिव्या: मैंने मना किया था ना कि मुझे कॉल मत करना कभी।

मनीष: वो मैडम आपके मैसेज अभी देखे मैंने तो लगा शायद कुछ जरूरी है। बताइये क्या हुआ।

दिव्या: तुमने ही तो कहा था कि रात में जरूर ऑनलाइन आना।

मनीष: हाँ लेकिन मुझे लगा था कि अपने पति की वजह से आप आएँगी नहीं। अभी कहाँ हैं आपके हस्बैंड?

दिव्या: दूसरे कमरे में सो रहे हैं।

मनीष: क्या मैडम आपके होते हुए वो कैसे सो सकते हैं, वैसे थैंक्स मैडम, मेरे लिए आने के लिए।

दिव्या: मैं ज्यादा बात नहीं कर सकती, हस्बैंड ने सुन लिया तो दिक्कत हो जाएगी।

मनीष: ठीक है मैडम ऑनलाइन आ जाओ फिर।

दिव्या: नहीं मनीष, अब काफी टाइम हो गया, फिर कभी बात करते हैं।

मनीष: प्लीज़ मैडम, आ भी जाओ, आपकी आवाज़ सुन कर तो आपको देखे बिना रहा नहीं जाएगा।

दिव्या सोचती हैं, वो भी मनीष से बात करना चाहती हैं पर डर भी रही हैं। वो मनीष को कुछ देर वेट करने को कहती हैं जिससे वो अपने पति को देख कर सुनिश्चित हो सके। राजेश को बेसुध देखते ही दिव्या वापस आ जाती हैं और ऑनलाइन लॉगिन करती हैं। दिव्या को ऑनलाइन आए देर नहीं होती कि आज वो बिना कुछ कहे ही अपना कैम ऑन कर देती हैं और कैम को एडजस्ट करती हैं, दिव्या को सामने इस तरह देख मनीष का भी मुंह फटा रह जाता है।

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दिव्या ने ब्लाउज के बटन पहले ही खोल रखे थे जिसकी वजह से उसके मम्मे बाहर आने को बेताब थे। मनीष ये बात अच्छी तरह से समझ जाता है कि दिव्या क्यों उससे बात करने के लिए इतनी बेसब्र हो रही थी। आज तो मनीष को दिव्या को गरम करने की कोई जरूरत भी नहीं थी। पर मनीष भी एक नंबर का कमीना था, वो जानकर दिव्या से इधर-उधर की बातें करने लगता है, दिव्या से अब रहा नहीं जा रहा वो किसी भी तरह मनीष का कैमरा भी ओपन करवाना चाहती है पर उसे समझ नहीं आता कि ये बात बोले कैसे।

बड़ा सोच समझ कर दिव्या मनीष से पूछती है - अभी क्या कर रहे हो तुम मनीष?

मनीष: आपसे बाते कर रहा हूँ मैम। इयरफ़ोन यूज़ करो न मैम।

दिव्या: नहीं आज नहीं, मेरे पति सो रहे हैं।

मनीष: करो ना मैडम, धीरे-धीरे बात करना। अब आपकी आवाज़ सुने बिना मजा नहीं आता।

दिव्या इयरफ़ोन लगा लेती है।

दिव्या: हम्म, वो तो पता है। आज भी कुछ उल्टा सिद्धा ही कर रहे होंगे।

मनीष: खुल के बताओ ना मैडम क्या जानना चाहती हो।

दिव्या: तुम्हारा कैमरा आज ख़राब है क्या।

मनीष: नहीं तो मैडम, लेकिन आपने ऐसा क्यों पूछा।

दिव्या: कुछ नहीं, आज बस तुमने ऑन नहीं किया तो पूछ लिया।

मनीष: आप देखना चाहती हो तो मैं ओपन करूँ क्या।

दिव्या: नहीं रहने दो, तुम तो हमेशा ही नंगे ही रहते हो।

मनीष: नहीं मैडम, मैंने तो कपड़े पहने हुए हैं।

दिव्या: ऐसा तो हो नहीं सकता, मैं जानती हूँ तुम्हें। तुम रहने दो।

मनीष: ठीक है मैडम। वैसे आपका मन करे तो मैं आपके लिए नंगा हो सकता हूँ।
 
मनीष जानकर दिव्या को और तरसाना चाहता है, पर उसे भी डर है कहीं ये खेल उल्टा न पड़ जाए, वहीं दिव्या को भी समझ नहीं आ रहा कि कैसे डायरेक्टली मनीष से कहें अपने दिल की बात। दिव्या जानकर बहाने से अपना पल्लू गिरा देती है, जिससे उसके मम्मे जो पहले ही ब्लाउज के बटन खुले होने की वजह से बाहर को झांक रहे थे, वो मनीष के सामने आ जाते हैं। दिव्या के चेहरे पर हवस साफ़ देखी जा सकती थी।

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दिव्या पल्लू को गिरा चुकी थी पर अपने मम्मों को वो अपने हाथो से छुपाने की कोशिश कर रही थी। दिव्या के मम्मो की गोलाई और निप्पल की हलकी झलक से ही मनीष का लंड आसमान को सलामी देने लगा था। लेकिन वो दिखा ऐसे रहा था की जैसे उसने कुछ देखा ही न हो।

मनीष: मैम मुझे आपसे एक बात पूछनी थी।

(दिव्या को लगता है कि मनीष अब फस गया है)

दिव्या - हाँ पूछो मनीष।

मनीष: मैम आप आज इतनी रात को जागी कैसे हो।

दिव्या - तुमने ही फ़ोर्स किया था बात करने के लिए, अब तुम ही पूछ रहे हो।

मनीष: आप कितनी बात मानती हो ना मेरी। आप चाहो तो सो जाओ मैम। आपको सुबह उठना भी होगा।

दिव्या - वैसे नींद नहीं आ रही है मुझे पर लगता है आज तुम्हें नींद आ रही है। तुम सो जाओ मैं चलती हूँ।

मनीष: नहीं मैम मैं तो आपके लिए ही कह रहा था।

दिव्या समझ नहीं पती कि आज मनीष इतना सीधा क्यों बन रहा है। अखिर वो ही बात को थोड़ा दूसरी तरफ ले जाने की कोशिश करती है।

दिव्या - तुम सच में न्यूड तो नहीं हो न मनीष।

मनीष: नहीं मैम सिर्फ़ बॉक्सर में हूँ।

दिव्या - मुझे सच में तुम पर यकीन नहीं हो रहा। अपना कैम ऑन करना।

मनीष: आप कहती हो तो ज़रूर मैम।

मनीष कैम ऑन कर के दिव्या के सामने खड़ा हो जाता है, मनीष के लंड की शेप उसके बॉक्सर में साफ़ चमक रही थी।

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मनीष उसे छुपाने की कोशिश भी नहीं करता, मनीष का लंड देख के दिव्या के मन में हलचल तेज हो चुकी थी।
 
मनीष: बस मैडम देख लिया ना, मैंने झूठ नहीं कहा।

मनीष अपनी बात दोहराता है तो दिव्या का ध्यान उस पर जाता है।

मनीष: कहाँ खो गई थी मैडम।

दिव्या - कहीं नहीं। बस ऐसे ही सुनाई नहीं दिया।

मनीष: अब तो यकीन हो गया ना मैडम मैं आपसे झूठ नहीं कहता।

दिव्या - हाँ, हो गया यकीन।

मनीष अब अपनी चेयर पर बैठ जाता है पर बैठते हुए अपने लंड को इस तरह एडजस्ट करता है कि वह उसके इनर के साइड से एक नाग की तरह फन फैलाएं दिखता है। दिव्या की नज़रें बार-बार मनीष के लंड की ओर ही जाती हैं और ये बात मनीष भी जानता है पर आज उसे दिव्या को इस तरह तडपाने में कुछ ज्यादा ही मज़ा आ रहा था। वहीं मनीष के खुलकर बेशर्म न होने से दिव्या और तड़प रही थी। मनीष से बात करते हुए वह चाह कर भी अपनी नज़र को उसके लंड की ओर जाने से रोक नहीं पा रही थी। वो किसी तरह भी टॉपिक सेक्स की तरफ ले जाना चाहती थी।

दिव्या: तुम अभी तक सोए क्यों नहीं थे।

मनीष: बस मैडम नींद नहीं आ रही थी।

दिव्या: क्यों ऐसा हुआ आज। क्या आज भी अपनी बहन के कमरे में गए थे क्या।

मनीष: हाँ, गया था लेकिन मैडम इस सब में आपकी गलती है।

दिव्या: मेरी गलती कैसे है।

मनीष: आपकी वजह से मेरी सोच अपनी बहन के लिए बदल गई है। स्कूल में आप तड़पाती हो और घर में मेरी बहन।

दिव्या: वो कैसे तडपाती है तुमको?

मनीष: बस अब उसे देख कर मन करता है की कुछ कर ही डालूँ। कितनी बार सोते समय उसकी चुन्ची और चूत को छू चूका हूँ पर पता नहीं उसको ये सब पता है या नहीं।

दिव्या: छुआ है तो उसे तो पता ही होगा ना।

मनीष: पता नहीं। वह सोती रहती है। लेकिन डर लगता है कि कहीं जाग न जाए। तुमसे चैट करने से पहले मैं उसके कमरे में ही था।

दिव्या: तभी तुम रिप्लाई नहीं कर रहे थे मुझे।

मनीष: हाँ मैडम।

दिव्या: तुम क्या कर रहे थे वहाँ।

मनीष: मैडम उसे सोते हुए थोड़ा छेड़ने का चांस मिल जाता है।

दिव्या: छेड़ने का चांस मतलब।

मनीष दिव्या को एक फोटो भेजता है।

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दिव्या: ये क्या है मनीष, इस तरह से तो वो जाग गई होगी।

मनीष: यही तो नहीं पता।

दिव्या: पर तुम्हें डर नहीं लगा।

मनीष: डर तो बहुत लगा मैडम लेकिन कंट्रोल नहीं कर पाया। ऊपर से उसके मम्मे एकदम मखमली से है।

दिव्या: तुम्हें ये सब नहीं करना चाहिए था।

मनीष: ये सब तो आप ही ने करवाया ना।

दिव्या: हम्म, हुआ तो मेरी ही वजह से है। पर इसमें तुम फस गए तो घर में मुँह नहीं दिखा पाओगे।

मनीष: आप नहीं जानती मैं, मैडम, आपके मेरी लाइफ में आने के बाद मैं कितना तड़पता हूँ। आपकी लाइफ कितनी सही है। हस्बैंड है आपके साथ, जब चाहो तब जो मर्जी करो। आपकी तो खूब चुदाई हो रही होगी आजकल।

दिव्या ये सुन थोड़ा मायूस हो जाती है। मनीष भी उसके लटका चेहरे को देख समझ जाता है की राजेश कुछ कर नहीं रहा।
 
मनीष जानबूझ कर दुबारा पूछता है।

मनीष: क्या हुआ मैडम आप उदास क्यों लग रही हो।

दिव्या: कुछ नहीं।

मनीष: कुछ तो है मैम, मुझे नहीं बताओगे।

दिव्या: मुझे लगता है मेरे पति को मुझमें इंट्रेस्ट ही नहीं है।

मनीष: अब मैम इतनी रात में भी साड़ी पहन कर रहोगी तो इंट्रेस्ट रहेगा भी कैसे। मैं तो खुद आपको टोकने वाला था कि इतनी रात में कौन साड़ी पहनता है।

दिव्या: वह तो मैंने चैट करने से पहले पहनी थी। उससे पहले तो नाइटी में थी।

मनीष: ये तो गलत बात है ना मैं, मुझे भी दिखाओ कैसी लगती हो नाइटी में।

दिव्या: मुझे शर्म नहीं आएगी क्या।

मनीष: क्या मैम। सब कुछ तो देखा है मैंने। जानती हैं कि मेरी फेवरेट जगह कौन सी है।

दिव्या: कौन सी?

मनीष: आपकी गांड। वही से तो आपका और मेरा प्यार शुरू हुआ था ना।

दिव्या: चुप। मैं कोई प्यार व्यार नहीं करती तुम्हें।

मनीष: प्यार नहीं करती तो अपनी गांड क्यों मसली थी मेरे लंड पर।

दिव्या चुप हो जाती है कि अब क्या कहें।

मनीष: एक बात पूछूं मैं मैम।

दिव्या: हम्म्म बोलो।

मनीष: आज बाथरूम में आपका मन नहीं हुआ मेरा लंड बाहर निकलने का।

दिव्या को कुछ ना बोलता देख मनीष अपना प्रश्न दोहराते हुए अपने लंड को मसलता है। दिव्या की नजर भी वही जा रही थी बार बार। दिव्या मनीष के लंड से नजर हटाये बिना कहती है

दिव्या: मुझसे मत पूछो कुछ।

मनीष: क्यों ना पूछूं, जवाब तो मुझे पता है पर आपसे सुनना चाहता हूँ।

दिव्या: मुझे नहीं पता।

मनीष: और अभी, अभी भी आपका मन नहीं है कि मैं अपना लंड बाहर निकालूं जिससे आपको इसे ऐसे नज़रे चुरा कर ना देखना पड़े।

मनीष ऐसा कह कर अपने को एक झटका सा देता है।

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मनीष: बोलो न मैम। निकालूं इसे बाहर। आपका मन है ना इसे खुल कर देखने का।

दिव्या कापती सी आवाज़ में ना कहती है।
 
मनीष: आपने प्रॉमिस किया था आप मुझसे झूठ नहीं कहोगे।

दिव्या एक गहरी साँस लेती है: हाँ चाहती हूँ मैं।

मनीष: तो शर्मा क्यों रही थी जब से।

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मनीष: अब खुश हों मैम।

मनीष लंड को आजाद करते हुए पूछता है। कुछ पलों के लिए दिव्या अपनी नज़र लंड से हटा ही नहीं पाती। मनीष भी ये देख के काफी जोश में आ जाता है और दिव्या को खड़े होने का आदेश सा दे देता है।

दिव्या: क्यों खड़ी होने को बोल रहे हो।

मनीष: थोड़ा फ्री होकर बैठो अब सिर्फ ब्रा पेंटी में।

दिव्या: नहीं आज नहीं, मेरे हस्बैंड हैं दूसरे कमरे में।

मनीष: बहुत देर से तरसा रही हो आधे अधूरे मम्मे दिखा के। अब बहाने मत बनाओ। उतारो जल्दी।

दिव्या: समझो ना मनीष।

मनीष: काश मैं वहां होता तो तुम्हारी झिझक एक पल में मिटा देता।

दिव्या: क्या करते तुम मेरे साथ।

मनीष अपने लंड को हिलाते हुए: सबसे पहले तो जी भर के तुम्हारी चौड़ी गांड पर अपना लंड रगड़ता।

दिव्या: फिर।

मनीष: फिर तुम्हें नंगी कर के तुम्हारी चूत में अपनी उंगली डाल के उसे खूब चाटता।

दिव्या: उसके बाद।

दिव्या गहरी साँस लेते हुए अपने हाथों को जांघ तक ले जाते हुए रुक जाती है।

मनीष: रुको मत मैम, सहला लो अपनी चूत, मेरी ही तरह आप भी तड़प रही हो न।

मनीष: चलो अब नखरे न करो मैडम और जल्दी से ब्रा पेंटी में आ जाओ।

दिव्या: सब तो देखा है ना तुमने।

मनीष: आज गांड देखूंगा तुम्हारी। तुम चाहती हो ना मैं लंड रगड़ूं फिर से तुम्हारी गांड पर।

दिव्या: हाँ। चाहती हूँ।

मनीष: उतारो फिर जल्दी।
 
दिव्या बैठे हुए ही अपना ब्लाउज और पेटीकोट उतार देती है। मनीष उसे अब खड़ा होकर अपनी गांड दिखाने को कहता है तो वो स्क्रीन के सामने खड़ी हो जाती है।

मनीष: कम ऑन मैडम, एक टांग चेयर पर रख कर अपनी गांड को सहलाओ जैसे कि मेरा हाथ हो तुम्हारी गांड पर।

दिव्या: दिव्या अब विरोध करना छोड़ चुकी थी। अपनी हवस में वो मनीष के इशारों पर नाचने लगी थी।

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मनीष भी अपना लंड हिलाना शुरू कर चुका था।

मनीष: अब बताओ मैम,पहले क्या उतारोगी, ब्रा ये पेंटी।

दिव्या: मनीष,तुम ये सब किसी को बताओगे नहीं ना।

मनीष: आज तक बताया है क्या मैंने,चलो ना अब उतारो जल्दी।

दिव्या मनीष की तरफ कमर करके अपनी ब्रा का हुक खोलने लगती है पर मनीष का ध्यान उसकी गांड से हट ही नहीं रहा था।

मनीष: मैम,प्लीज जो भी करो,अपनी गांड मटकाते हुए करना।

दिव्या की पेंटी उसकी बड़ी गांड के बीच में कहीं धस चुकी थी।

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दिव्या अपनी ब्रा को ओपन कर चुकी थी पर मनीष अभी भी उसकी गांड को ही निहारे जा रहा था। वह जल्द से जल्द उसे पूरा नंगा कर देना चाहता था। मनीष दिव्या को घूम कर स्क्रीन के पास आने को कहता है तो दिव्या उसकी तरफ मुँह करके स्क्रीन की ओर आती है।

मनीष: ऐसे नहीं मैम, अपने मम्मो को मेरे लिए मसलो जरा।

दिव्या बिना देर किए अपने मम्मे मसलती हुई स्क्रीन के पास आ जाती है।

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मनीष झट से स्क्रीन को किस करता है जैसे सच में दिव्या के मम्मे उसके सामने हो।

मनीष: वाह मैम, चलो अब अपनी गांड भी दिखाओ मुझे।

दिव्या तो इस वक्त एक कठपुतली की तरह मनीष के इशारों पर नाच रही थी, जिसका यकीन खुद मनीष को भी नहीं हो रहा था।

दिव्या मनीष की तरफ अपनी गांड करके मटकते हुए अपनी पेंटी नीचे करने लगती है।

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दिव्या का शरीर इतना गरम हो चुका था कि उसे एयर कंडीशनर में भी पसीने आने लगे थे। वहीं मनीष का भी इस सब से बुरा हाल हो चुका था। दिव्या को अपनी हर बात इतनी आसानी से मानते देख मनीष दिव्या को आज हर दायरे से बाहर निकालना चाहता था।

मनीष: चलो मैम अब जरा बेड पर लेट कर अपनी गांड थोड़ी सी उठाओ।

दिव्या: मनीष मुझे बहुत शर्म आ रही है।

मनीष: अब नखरे मत करना मैम प्लीज़। देखो मेरा कितना बुरा हाल हो रहा है।

मनीष दिव्या का ध्यान अपने लंड की तरफ खींचता है, जिसे अब वह हर कपड़े से आजाद कर चुका था।

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दिव्या मनीष के लंड की तरफ देखती है और अगले ही पल बेड पर लेट कर अपनी गांड ऊपर उठा लेती है.

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दिव्या की गांड एकदम बेदाग़ थी.
 
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