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19
शनिवार शाम 6 बजे
सन्नी
लक्ष्मी आंटी के नखरे हमें ज्यादा नहीं झेलने पड़े। नाश्ता करने के बाद Kitchen में ही लक्ष्मी आंटी ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए उसे छुटकारा दिलाने की गुहार लगाई।
मैंने बड़े नखरे दिखा कर उसे हमारी कसम याद दिलाई। लक्ष्मी आंटी तड़प रही थी और मैंने उसे अपना लौड़ा दिखाया तो लक्ष्मी आंटी भूकी शेरनी की तरह लपक कर उसे निगल गई। जब मेरा लौड़ा चिकनाहट से भर गया तो मैंने लक्ष्मी आंटी को kitchen के मेज पर एक पैर रख कर लेटने को कहा। Chastity belt के पिछवाड़े में बनी खाली जगह से लक्ष्मी आंटी की भुरी आंख दिख रही थी।
मैंने अपना चिकना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ में दबाया तो लक्ष्मी आंटी ने एक प्यारी सी आह… के साथ मेरा डंडा अपनाया। हालांकि लक्ष्मी आंटी ने 6 बार गांड़ मरवाई थी फिर भी वह अब तक गांड़ मारने की आदि नहीं हुई थी। लक्ष्मी आंटी हमारी जिद के लिए गांड़ मराती थी। विक्की ने आगे से झुक कर लक्ष्मी आंटी को चूमना शुरू किया तो मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ फैलाकर पेलना जारी रखा। लक्ष्मी आंटी की चूत कि गहराइयों में बजता viब्राtor बीच के पतले मांस के परदे से मेरे लौड़े को मालिश कर रहा था। Viब्राtor की झुनझुनाहट ने लक्ष्मी आंटी को पहले से गरम कर रखा था और अब मेरे मूसल ने साथ साथ लक्ष्मी आंटी के पिछवाड़े को बजाकर उसे शरीर सुख की चोटी से धकेल दिया। लक्ष्मी आंटी झडने लगी पर मैं रुका नहीं। लक्ष्मी आंटी के बदन में होता लौड़ा-viब्राtor घर्षण उसे कामोत्तेजना के अधर में लटकाए झूला रहा था। लक्ष्मी आंटी विक्की का लौड़ा चूसते हुए अपना बदन झटक रही थी, कांप रही थी, मुंह से लार टपकाती आंखे घुमाकर अकड़ते हुए झड रही थी।
अचानक विक्की ने अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी के मुंह में से बाहर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी ने लगभग रोते हुए हाथ बढ़ाकर उसे पकड़े रखने की कोशिश की पर नाकाम हुई।
तकरीबन 15 मिनट की बेरहम कुटाई के बाद मैंने अपना लौड़ा जड़ तक लक्ष्मी आंटी की गांड़ में पेल दिया और उसके आंत को अपने रस से रंग दिया। मैंने ' प्क्क' की आवाज से लक्ष्मी आंटी की गांड़ में से अपनी तलवार निकाली तो लक्ष्मी आंटी ने कराहकर अपने आखिरकार थमे चरमसुख से सांस ली।
अफसोस की लक्ष्मी आंटी को इतनी ही राहत मिलनी थी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के मुंह में झडने के डर से अपना लौड़ा बाहर निकाला था और अब अपनी बारी लेने को आतुर होकर वह आगे बढ़ा। लक्ष्मी आंटी में इतनी भी ताकत नहीं बची थी कि वह विक्की का विरोध करती। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को घुमाकर लक्ष्मी आंटी को पीठ के बल लिटा दिया। फिर विक्की ने लक्ष्मी आंटी के अब खुले और मेरे रस से भरे छेद में अपना खूंटा ठूस दिया।
“विक्की बाबू…” लक्ष्मी आंटी ने पुकारा और उसके लौड़े को अपने पिछले छेद में निगल गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के दोनो पैर अपने कंधो पर रख दिए और झटकेदार ठुकाई करने लगा। लक्ष्मी आंटी ने मेज को अपनी गांड़ के दोनों तरफ से पकड़ लिया जिस से विक्की को अपने झटके देने में सहूलियत मिली। मैं मेज के दूसरी ओर से लक्ष्मी आंटी के हिचकोले खाते दूधिया गुब्बारों को देख कर ललचाया। मैंने झुक कर लक्ष्मी आंटी की चूची पर जड़े तंग बेरी को अपने होठों से पकड़ा और दुसरी चूची को पकड़ कर दबाने लगा।
अबकी बार लक्ष्मी आंटी का मुंह खुला था तो उसने असंबद्ध आवाजें निकाल कर अपनी उत्तेजना दिखाई। लक्ष्मी आंटी अब न तो कोई लड़की थी न ही औरत, वह केवल प्रणय सुख में झूलती और उसे झेलती एक मादा थी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ को अच्छे से फैलाकर पेला और 15 मिनट स्वर्ग घुमाकर ही लक्ष्मी आंटी की गांड़ में झड़ गया।
जब हम दोनों पीछे हो कर अपनी मेहनत के असर का निरीक्षण करने लगे। लक्ष्मी आंटी के दोनों पैर अंदर से गीले थे। चूत में से बहता रस देखा तब पाया कि मेज के नीचे लक्ष्मी आंटी के रसों से डबरा बना है। लक्ष्मी आंटी मेज पर निढाल होकर पड़ी थी। लक्ष्मी आंटी की खुली गांड़ में से हमारा गाढ़ा घोल अब टपक कर नीचे बने डबरे को सामूहिक रूप दे रहा था। लगातार आधे घंटे तक झडने से लक्ष्मी आंटी पस्त हो गई थी लेकिन अब भी लक्ष्मी आंटी की चूत में झुनझुनाता viब्राtor अपना दम तोड़ने से कोसों दूर था।
“बेचारी लक्ष्मी आंटी!!!”
Score Card शनिवार शाम 6 बजे तक
लक्ष्मी आंटी--मुंह------चूत------गांड
विक्की---------5---------6-------4
सन्नी------------5---------6-------4
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शनिवार शाम 6 बजे
सन्नी
लक्ष्मी आंटी के नखरे हमें ज्यादा नहीं झेलने पड़े। नाश्ता करने के बाद Kitchen में ही लक्ष्मी आंटी ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए उसे छुटकारा दिलाने की गुहार लगाई।
मैंने बड़े नखरे दिखा कर उसे हमारी कसम याद दिलाई। लक्ष्मी आंटी तड़प रही थी और मैंने उसे अपना लौड़ा दिखाया तो लक्ष्मी आंटी भूकी शेरनी की तरह लपक कर उसे निगल गई। जब मेरा लौड़ा चिकनाहट से भर गया तो मैंने लक्ष्मी आंटी को kitchen के मेज पर एक पैर रख कर लेटने को कहा। Chastity belt के पिछवाड़े में बनी खाली जगह से लक्ष्मी आंटी की भुरी आंख दिख रही थी।
मैंने अपना चिकना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ में दबाया तो लक्ष्मी आंटी ने एक प्यारी सी आह… के साथ मेरा डंडा अपनाया। हालांकि लक्ष्मी आंटी ने 6 बार गांड़ मरवाई थी फिर भी वह अब तक गांड़ मारने की आदि नहीं हुई थी। लक्ष्मी आंटी हमारी जिद के लिए गांड़ मराती थी। विक्की ने आगे से झुक कर लक्ष्मी आंटी को चूमना शुरू किया तो मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ फैलाकर पेलना जारी रखा। लक्ष्मी आंटी की चूत कि गहराइयों में बजता viब्राtor बीच के पतले मांस के परदे से मेरे लौड़े को मालिश कर रहा था। Viब्राtor की झुनझुनाहट ने लक्ष्मी आंटी को पहले से गरम कर रखा था और अब मेरे मूसल ने साथ साथ लक्ष्मी आंटी के पिछवाड़े को बजाकर उसे शरीर सुख की चोटी से धकेल दिया। लक्ष्मी आंटी झडने लगी पर मैं रुका नहीं। लक्ष्मी आंटी के बदन में होता लौड़ा-viब्राtor घर्षण उसे कामोत्तेजना के अधर में लटकाए झूला रहा था। लक्ष्मी आंटी विक्की का लौड़ा चूसते हुए अपना बदन झटक रही थी, कांप रही थी, मुंह से लार टपकाती आंखे घुमाकर अकड़ते हुए झड रही थी।
अचानक विक्की ने अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी के मुंह में से बाहर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी ने लगभग रोते हुए हाथ बढ़ाकर उसे पकड़े रखने की कोशिश की पर नाकाम हुई।
तकरीबन 15 मिनट की बेरहम कुटाई के बाद मैंने अपना लौड़ा जड़ तक लक्ष्मी आंटी की गांड़ में पेल दिया और उसके आंत को अपने रस से रंग दिया। मैंने ' प्क्क' की आवाज से लक्ष्मी आंटी की गांड़ में से अपनी तलवार निकाली तो लक्ष्मी आंटी ने कराहकर अपने आखिरकार थमे चरमसुख से सांस ली।
अफसोस की लक्ष्मी आंटी को इतनी ही राहत मिलनी थी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के मुंह में झडने के डर से अपना लौड़ा बाहर निकाला था और अब अपनी बारी लेने को आतुर होकर वह आगे बढ़ा। लक्ष्मी आंटी में इतनी भी ताकत नहीं बची थी कि वह विक्की का विरोध करती। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को घुमाकर लक्ष्मी आंटी को पीठ के बल लिटा दिया। फिर विक्की ने लक्ष्मी आंटी के अब खुले और मेरे रस से भरे छेद में अपना खूंटा ठूस दिया।
“विक्की बाबू…” लक्ष्मी आंटी ने पुकारा और उसके लौड़े को अपने पिछले छेद में निगल गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के दोनो पैर अपने कंधो पर रख दिए और झटकेदार ठुकाई करने लगा। लक्ष्मी आंटी ने मेज को अपनी गांड़ के दोनों तरफ से पकड़ लिया जिस से विक्की को अपने झटके देने में सहूलियत मिली। मैं मेज के दूसरी ओर से लक्ष्मी आंटी के हिचकोले खाते दूधिया गुब्बारों को देख कर ललचाया। मैंने झुक कर लक्ष्मी आंटी की चूची पर जड़े तंग बेरी को अपने होठों से पकड़ा और दुसरी चूची को पकड़ कर दबाने लगा।
अबकी बार लक्ष्मी आंटी का मुंह खुला था तो उसने असंबद्ध आवाजें निकाल कर अपनी उत्तेजना दिखाई। लक्ष्मी आंटी अब न तो कोई लड़की थी न ही औरत, वह केवल प्रणय सुख में झूलती और उसे झेलती एक मादा थी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ को अच्छे से फैलाकर पेला और 15 मिनट स्वर्ग घुमाकर ही लक्ष्मी आंटी की गांड़ में झड़ गया।
जब हम दोनों पीछे हो कर अपनी मेहनत के असर का निरीक्षण करने लगे। लक्ष्मी आंटी के दोनों पैर अंदर से गीले थे। चूत में से बहता रस देखा तब पाया कि मेज के नीचे लक्ष्मी आंटी के रसों से डबरा बना है। लक्ष्मी आंटी मेज पर निढाल होकर पड़ी थी। लक्ष्मी आंटी की खुली गांड़ में से हमारा गाढ़ा घोल अब टपक कर नीचे बने डबरे को सामूहिक रूप दे रहा था। लगातार आधे घंटे तक झडने से लक्ष्मी आंटी पस्त हो गई थी लेकिन अब भी लक्ष्मी आंटी की चूत में झुनझुनाता viब्राtor अपना दम तोड़ने से कोसों दूर था।
“बेचारी लक्ष्मी आंटी!!!”
Score Card शनिवार शाम 6 बजे तक
लक्ष्मी आंटी--मुंह------चूत------गांड
विक्की---------5---------6-------4
सन्नी------------5---------6-------4
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