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Adultery बुरी फसी नौकरानी लक्ष्मी

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29

सन्नी

मंगलवार को हमें selection mock test करना था और उसके बाद हम दोनों टेस्ट के result देखने का बहाना बना कर लक्ष्मी आंटी से मिलना टाल रहे थे। हमें नहीं पता था कि लक्ष्मी आंटी की इज्जत लूटने के बाद अब यहां पर हम क्या करें और कैसे करें। साफ सफाई करते हुए जब लक्ष्मी आंटी विक्की के कमरे में गई तो लक्ष्मी आंटी ने विक्की को कोई पहचान नहीं दी। विक्की भाग कर मेरे कमरे में आ गया। मेरे साथ भी यही हुआ कि लक्ष्मी आंटी ने मुझे पहचान नहीं दी और मैं उस से आंख नहीं मिला पाया। लक्ष्मी आंटी खाना बनाने के बाद चली गई। हम दोनों गुमसुम सोचते रहे की लक्ष्मी आंटी के साथ हम दोनों ने जो किया उसका अंजाम हमें कब और कैसे भुगतना पड़ेगा। बाकी का दिन वैसे मायूसी में ही बीता।

बुधवार सुबह जब लक्ष्मी आंटी विक्की के घर आई तो विक्की दुम दबाकर भाग मेरे कमरे में आ गया। हम दोनों लक्ष्मी आंटी को भुला नहीं पाए थे, तो हमने दूर से लक्ष्मी आंटी को देखने के लिए विक्की के pc camera को चला दिया। थोड़ी देर बाद लक्ष्मी आंटी विक्की के कमरे में आई और उसने सीधे विक्की कि अलमारी में से विक्की का वॉलेट निकाला। विक्की के वॉलेट में से 500 लेकर अपनी ब्रा में रख दिए और वॉलेट वहीं टेबल पर छोड़ दिया।

हम दोनों हैरान रह गए। क्या लक्ष्मी आंटी अब हम दोनों से बिना रोक टोक चोरी करेगी? उसने तो वॉलेट छुपाने की कोशिश भी नहीं कि थी। क्या पप्पू लक्ष्मी को फिर से परेशान कर रहा है कि उसे दोबारा चोरी करनी पड़ी?

लक्ष्मी आंटी के उपर आने तक हम दोनों ने अपनी बात कर ली थी और लक्ष्मी आंटी के लिए तयार थे। लक्ष्मी आंटी के अंदर आते ही हमने उसे मेरे कमरे में बुलाकर बेड पर बैठने को कहा। लक्ष्मी आंटी हिचकिचाते हुए बैठ गई तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी को बताया कि हम जानते हैं कि उसने फिर से चोरी कि है। लक्ष्मी आंटी ने मना करने की कोशिश की पर उसके मना करने में उसकी आवाज साथ नहीं दे रही थी।

"लक्ष्मी आंटी, तुम ने हमें जो सिखाया है उसे तो हम कभी भुला नहीं पाएंगे। लेकिन हम दोनों ने तुम्हारे साथ को किया वो एक गुनाह है और तुम्हारा हक्क बनता है हम से जो चाहो मांग लो। हम मना नहीं करेंगे लेकिन ऐसे चोरी करके अपने आप को सजा मत दो।"

विक्की ने मेरा साथ देते हुए कहा, "हां लक्ष्मी आंटी, अगर तुम्हे कुछ चाहिए तो मांग कर तो देखो। ऐसे चोरी करना तुमरे मन को ही खाएगा।"

लक्ष्मी आंटी ने गुस्से से 500 कि नोट निकाल कर विक्की के जेब में डाल कर कहा,

"सच में दे सकते हो जो मांग लूं? आप दोनों तो मुझसे आंख नहीं मिला रहे हो। जो चाहिए दोगे?"

हम दोनों ने सर हिलाकर हां कहा तो लक्ष्मी आंटी ने अपने पर्स में से एक चमकती पट्टी हम पर फेंकते हुए कहा, "इसका इसतेमाल मुझे सिखाओ तो मैं मानूं।"

विक्की ने लक्ष्मी आंटी ने फेंकी पट्टी उठकर देखी। पान मसाला के चमकीले पैकेट की लडी दुकान से लाई गई हो ऐसे लग रहा था। इस से पहले कि मैं अपने आप को लक्ष्मी आंटी को पन मसाला के बारे में पूछ कर बेइज्जत करता विक्की ने पट्टी घुमाई।

लक्ष्मी आंटी ने हमें 4' कामसूत्र कॉन्डम' के पैकेट थमाए थे।

लक्ष्मी आंटी अचानक अपनी हिम्मत खो कर बैठ गई।

लक्ष्मी आंटी बोली, "बाबू, मैं एक बस्ती में रहती हूं जहां किसी को भनक भी लग गई की मेरा पैर फिसला है तो मुझे नौच खाएंगे और पप्पुजि तो मुझे मार डालेंगे। आप दोनों ने मुझे जवानी की खुशी सिखाई है। मैं आप को आप के रास्तों से नहीं रोकुंगी। आप बड़े कॉलेज में जाओगे, खूबसूरत और स्टाइलिश लड़कियों से दोस्ती करोगे। मेरी जिंदगी यहीं पर पप्पुजी के साथ है और मैं अपनी हैसियत से उपर नहीं देखती। पत्नी तो मैं 4 साल से थी सुहागन आप दोनों ने बनाया है।बस अगले 15 दिन या जितने भी दिन आप दोनों मुझे दे पाएं, आप मुझे सुहागन की जिंदगी दीजिए। बस इतना ही चाहिए।"

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में भर लिया और उसने हमारे कंधों पर सर रखकर अपने डर और दर्द से सहारा ले लिया।

मैंने लक्ष्मी आंटी के कानों में कहा, "लक्ष्मी आंटी, ये कैसे पहनते हैं? हमने कभी किया नहीं।"

लक्ष्मी आंटी ने आधे हंसते और आधे रोते हुए कहा, "हां, मैं तो इसे रोज लगती हूं ना। बुद्दू कहीं के!!"

हम सब हंस पड़े और फिर हम ने कंप्यूटर पर वीडियो देखे कि कंडोम कैसे पहनते हैं? लक्ष्मी आंटी ने हमारे कपड़े उतारे और हमने उसके। जल्द ही हम दोनों बेड पर नंगे लेट गए और लक्ष्मी आंटी ने हमारे लौड़े चूसकर और कड़े कर दिए। पहले कौन इसका फैसला सिक्का उछाल कर किया और मैं जीता। लक्ष्मी आंटी ने अपने नाजुक हाथों से मेरे लंबे लौड़े पर कंडोम पहनाया।

कंडोम से ढका लौड़ा कुछ अलग लग था था पर लक्ष्मी आंटी ने इस बात पर गौर करने का मौका नहीं दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपने पैरों को फैला कर अपने प्यार के खजाने में मुझे खींच लिया। लक्ष्मी आंटी की गरमी ने मुझे घेर लिया और लक्ष्मी आंटी ने अपनी कमर हिलाकर चूधना चालू कर दिया। लक्ष्मी आंटी सुबह से इस पल के इंतजार में थी और उसने कुछ ही धक्कों में अपना पानी छोड़ दिया। मैंने लक्ष्मी आंटी की कमर पर पकड़ बनाते हुए उसकी कुटाई चालू रखी। लक्ष्मी आंटी पसीने से लथपथ हो गई और उसने झड़ने कि लडी लगा दी। मैं लक्ष्मी आंटी की गरमी को ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसकी बहती चूत की गर्मी में झड गया। लक्ष्मी आंटी बगल में लेट कर हांफने लगी और मैंने गुब्बारे जैसा फूला हुआ कंडोम निकाल कर कचरे के डिब्बे में डाल दिया।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी से कंडोम लगवा लिया था। अब लक्ष्मी आंटी की चूचियां दबाते हुए विक्की ने अपना मूसल लक्ष्मी आंटी की चूत में ठूंस दिया। लक्ष्मी आंटी की अाहों का मजा लेते हुए विक्की ने लक्ष्मी आंटी को चोदना शुरू किया। विक्की भी तो 2 दिन का भूका था और बिना रुके उसने लक्ष्मी आंटी की गीली सड़क पर तेज गाड़ी दौड़ाई। लक्ष्मी आंटी तो सातवे आसमान को छूने से अपनी यौन किलकारियों से विक्की को उकसा रही थी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ कर उसे चोदते हुए उसके कानों को चूमा। विक्की जल्द ही लक्ष्मी आंटी को चिपक कर उसकी चूत में अपना कंडोम भरने लगा।

लक्ष्मी आंटी ने इशारे से मुझे बुलाया और दोनों के सर पर हाथ फेरते हुए कहा, "बाबू मैं आप दोनों की गुलाम बन गई हूं। मेरे साथ जो चाहो कर लो, जब चाहो कर लो। बस मुझे भुला नहीं देना।"

मैं लक्ष्मी आंटी को प्यार के गहराई की बात कहने लगा कि मेरे पेट से बड़ी आवाज आई।

लक्ष्मी आंटी ने चौंक कर देखा और हंसते हुए बोली, "गांव में बड़ी औरतें कहती थी कि मर्द की औरत से दो ही चीजें चाहिए और उसमें भी वो एक में ही मेहनत करेगा। रुको मैं जल्दी से खाना बनाती हूं।"

लक्ष्मी आंटी खाना बनाने के लिए किचन में चली गई तो विक्की ने अपना कंडोम भी जल्दी से कचरे के डिब्बे में डाल दिया। हम दोनों लक्ष्मी आंटी को मदद करने गए।

खाना खाने के बाद लक्ष्मी आंटी ने घर की साफ सफाई की तो हम दोनों ने बरतन मांजे और सुखाए। हमारी चुस्त मदद देख लक्ष्मी आंटी ने मेरा इरादा पूछा तो हमने बाकी 2 पैकेट के इस्तमाल का सुझाव दिया। लक्ष्मी आंटी शर्माकर हां बोली ही थी कि हम उस उठाकर मेरे बेड पर ले गए।

विक्की ने कंडोम लगाया और लक्ष्मी आंटी के गांड़ में घुसाने लगा। कंडोम पर लगी चिकनाहट से कुछ आराम मिला और विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ फैला कर अपने लौड़े को गहराई तक पेल दिया। लक्ष्मी आंटी अपने पेट के बल लेट कर पैर फैलाए गांड़ मरवाने लगी तो विक्की लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ के मज़े लेते हुए उसे चोदने लगा। लक्ष्मी आंटी ने गांड़ मरवाते हुए अपनी उंगलियों से अपनी चूत को सहलाते हुए मज़ा लिया और 10 मिनट की तेज रफ्तार चुधाई के बाद दोनों झड गए।

मैंने लक्ष्मी आंटी की खुली गांड़ में अपना कंडोम में लिपटा लौड़ा डालने के लिए बेकरार था। लक्ष्मी आंटी के बगल में लेट कर मैंने उसे अपने बदन पर खींच लिया। अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की खुली गांड़ में पेलते हुए मैंने लक्ष्मी आंटी को एक ओर लिटा दिया और उसका दूसरा पैर अपनी कमर पर पकड़ लिया। एक हाथ लक्ष्मी आंटी के सर के नीचे से होते हुए उसकी गोल मटोल चूचियों को दबाने लगा। लक्ष्मी आंटी अब आसानी से अपने एक हाथ की 2 उंगलियों को अपनी चूत में अंदर बाहर करते हुए दूसरे हाथ से अपनी चूत के दाने को सहला रही थी।

लक्ष्मी आंटी अपनी गरमी में झड़ने लगी। 10 मिनट बाद जब मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ के अंदर अपना कंडोम भरा तो वह थक कर सो गई। लक्ष्मी आंटी ने आधे घंटे बाद हम दोनों को गले लगाते हुए चूमा और कल का वादा ले कर चली गई।

शाम को 6 बजे पापा ने कहा कि मम्मियां हम दोनों को कॉलेज के लिए तयार करने बाहर ले जा रही हैं तो हमें भी जाना पड़ा।
 
बिजनेस का उसूल है कि अगर सब कुछ ठीक दिखते हुए गलत लग रहा है, तो दाल में काला है। 6.30 बजे मै सन्नी के कमरे में गया। सबूत मुझे कचरे के डिब्बे में आसानी से मिल गया। पहला धक्का कुछ कम था जो थोड़ी देर में दूसरा लग गया। मेरे पांव कांपने लगे और पसीने छूट गए। मुझे सोचना था और जल्द ही कुछ करना था। मैंने ऑफिस में कॉल किया।

"पवन, कल की सारी मीटिंग रद्द कर दो। हमें बात करनी चाहिए।"

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अश्वेत

गुरुवार सुबह खबर आ गई की रिजल्ट लग गए हैं। दोनों बच्चों को अच्छे नंबर आए थे और सब खुश थे। पवन तो मानो उड़ रहा था।

पवन ने आते ही कहा, "दिल पर से बड़ा बोझ उतर गया!! दोनों को उनके पसंद के कॉलेज में कोर्स मिल जाएंगे। मैंने वहां हमारे दोस्त से बात कर ली है और कॉलेज के बाहर ही एक अच्छा फ्लैट मिल जाएगा। खाने और सफाई के लिए किसी को रख दिया तो बच्चे आराम से पढ़ाई के लेंगे। तू क्यों मुंह फुलाए बैठा है?"

"बच्चे कॉलेज जाएंगे अगर मुसीबत टली तो…"

पवन ने चौंक कर कहा, "क्या बकवास कर रहे हो? कैसी मुसीबत?"

"देख गुस्सा मत होना और पूरी बात सुनने के बाद बोलना।

जब दोनों ने कहा कि वह फार्महाउस में 3 दिन रहेंगे तो मैं सोच में पड़ गया। दोनों के कोई दोस्त नहीं, कोई पसंदीदा लड़की नहीं। मुझे शक था कि दोनों कहीं Gay तो नहीं? मेरे ही सुझाव पर हम ने लक्ष्मी को भेजा। सोमवार को जब बच्चे लौटे तो मुझे उनके हाव भाव में ठीक नहीं लगा। कल मैंने सन्नी का बेडरूम चेक किया तो वहां मुझे इस्तमाल किए कंडोम मिले।"

पवन ने टोकते हुए कहा, "अरे बच्चे बड़े हो रहे हैं। Try करके देख रहे होंगे।"

"4 कंडोम एक साथ? इसका मतलब दोनों ने दो दो बार किया।"

पवन ने सर पकड़ कर कहा, "Gay होना कोई जुर्म नहीं। बस हमारी बीवियों को समझाना पड़ेगा।"

"बात इतनी आसान नहीं। Gay होते तो मैं ये मीटिंग नहीं बुलाता। 2 बोतल लाता और हम दोनों मस्त दुनिया को गालियां देते। मैंने सन्नी का वीडियो कैमरा देखा। सिर्फ पहले 10-15 मिनट देख कर मेरे पसीने छूट गए।"

पवन ने डरते हुए पूछा, "क्या हुआ है?"

"दोनों ने हमें उल्लू बनाया और हमारे जरिए लक्ष्मी को ले गए। फार्महाउस में जाते ही दोनों ने माली को छुट्टी दे दी और गवाह मिटा दिए।"

पवन, "मतलब?"

"दोनों ने लक्ष्मी का बलात्कार किया और उसका वीडियो भी बनाया!!!"

पवन, "नहीं, ये बिल्कुल गलत है। ये अभी बच्चे हैं। बस 18 के…

हे भगवान!! दोनों जेल जाएंगे!!

हमें लक्ष्मी को पकड़ना होगा। उसका मुंह बंद करना होगा।"

"पवन, मेरी बात सुन। वहां जो कुछ भी हुआ पर अब लक्ष्मी उन्हें साथ दे रही है। जब वो घर पहुंचे तो लक्ष्मी हल्ला मचा सकती थी पर उसने अपने पैसे लिए और चली गई। कल दोनों ने दो दो कंडोम इस्तमाल किए और घर में सिर्फ लक्ष्मी आई थी। हमारा problem तो कोई और है, पप्पू!!!

तुझे राज याद है?"

पवन ने सोच कर कहा, "हां, वो जो मिस कॉलेज के चंगुल में ऐसा फंसा कि उसके पास होने तक खुद फैल हुआ और बाद में खुदकुशी कर ली।"

"सोचो अगर हमारे बच्चों के पास पहले से ही कोई ऐसी हो जो उन्हें शादी के जाल में न फांसते हुए वो सारे मज़े दे जिनका लालच दिखाकर मिस कॉलेज लड़कियां अपना काम करवाती हैं?"

पवन ने मेरा विचार आगे लेते हुए कहा, "पप्पू को हटाना पड़ेगा। लक्ष्मी और बच्चों को नहीं बताएंगे कि उनकी चोरी पकड़ी गई है। खेलने दो उन्हें, हम भी ऐसे खेल खेलने को तरसे थे। पप्पू को पता चला तो उस से बच्चों को डर है। MBS!!! वो हमारी मदद करेगा!! दुबई फोन लगा। 15 दिन में पप्पू का problem solve।"

"मोहम्मद बिन सलीम के लिए हम ने कई काम किए हैं। उसने कई बार मदद का वादा किया है पर तुम्हें यकीन है कि हमारा हाथ नहीं दिखेगा। पकड़े गए बात सीधे घर तक आएगी।"

पवन ने सोच कर कहा, "तू डर मत। ये काम MBS तो रोज करवाता है। देख पप्पू कोई बड़ा आदमी नहीं। उसके लिए ज्यादा से ज्यादा 1 या 2 लाख का खर्चा होगा। बच्चों के लिए अगर घर ले सकते हैं तो ये खर्चा तो furniture से भी कम है।"

मैं कल ही इस नतीजे पर पहुंचा था पर पवन से सुन कर राहत मिली।

मैंने दुबई के पर्सनल लाइन पर फोन लगाया और कहा, "भाई! एक आदमी को… खाड़ी के उस पार भेजना है। जल्दी…"

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विक्की

परसों शाम को हम दोनों को मम्मियां एक बढ़िया salon में ले गई और हमारे बालों को कॉलेज के लिए स्टाइलिश लुक दिया। श्वेता मम्मी ने कहा कि उनके बच्चों को कोई घोंचू नहीं बुलाएगी। मम्मी ने हंसते हुए कहा कि उसने पापा को पहली बार देख कर यही कहा था पर अब उनका बच्चा कॉलेज जायेगा।

हंसी मजाक के साथ हमारे लिए नए कपड़े, बैग और बाकी समान लिया गया। घर पहुंचते ही खाना खाने बैठ गए और लक्ष्मी आंटी के हाथ का खाना उसकी याद दिला गया। सन्नी की हालत कुछ अलग नहीं थी तो हमें तसल्ली थी कि कोई हमारी बात समझ सकता है।

कल सुबह सबके जाने के बाद हम दोनों बाइक सवार होकर शहर के दूसरे कोने पहुंचे। वहां हम ने कंडोम का variety pack खरीद लिया और लक्ष्मी आंटी से मिलने लौट आए।

लक्ष्मी आंटी ने हमारे नए रूप को सराहा और हमें गले लगाते हुए कहा कि अब हम कॉलेज की नकचढ़ी लड़कियों को पटाने के लिए तयार हैं। कल दोपहर लक्ष्मी आंटी ने पहले अपना पूरा काम निपटा दिया और मेरे कमरे में सन्नी को बुला लिया।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू, कल मैं गुस्से में थी और मैंने बिना सोचे कंडोम खरीद लिए। आज मेरे पास वो नहीं है।

मैंने भी बाद में सोचा और आप ने सही कहा था। आप कॉलेज जाओगे तो मैं भी यहां कॉलेज जाऊंगी। जब तक आप लौटोगे मैं भी अपने बच्चे को बड़ा बनाने के काबिल हो जाऊंगी। हमारा बच्चा भी बड़े कॉलेज में जाएगा।

उफ्फ… मैं भी किस बात पर अटक गई। मेरा मतलब है कि आप दोनों आज सिर्फ मेरी गांड़ मारो। ठीक है?"

कमिने तो हम हैं ही। तो हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को नंगा करके अपने लौड़े बारी बारी उसकी गांड़ में चलाए। लक्ष्मी आंटी ने मज़े लेते हुए अपनी कमर उठकर पूरे जोश से अपनी गांड़ को हमारे लौड़े की भेट चढ़ा दी। लक्ष्मी आंटी को हम नहीं छोड़ते पर पप्पू के घर आने का वक्त हो गया और लक्ष्मी आंटी को जाना पड़ा। लड़खड़ाते कदमों से चलती लक्ष्मी आंटी को हमने बताया की आज हम दोनों ने कंडोम का बड़ा पैकेट खरीद लिया है।

लक्ष्मी आंटी ने बदले से भरी नजर से देखते हुए कहा, "मैं कल सुबह जल्दी आउंगी। आप दोनों शैतानों से मुझे हिसाब बराबर करना है।"

आज सुबह पापा मम्मी के जाने के बाद मैंने और सन्नी ने घर की साफ सफाई कर ली ताकि लक्ष्मी आंटी को हिसाब बराबर करने के लिए ज्यादा वक्त मिले। लक्ष्मी आंटी भी वादे के मुताबिक जल्दी आ गई और हमारी मदद से कुछ ही देर में काम पूरा हो गया।

लक्ष्मी आंटी मेरे बेडरूम में किसी रानी की तरह दाखिल हुई तो हम दोनों उसके आदेश का इंतजार करने लगे। लक्ष्मी आंटी ने पैकेट अपने हाथों में लिया और अलग अलग तरह के कंडोम का मतलब पूछने लगी।

लक्ष्मी आंटी ने हमें कपड़े उतारने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने मुझे पान मसाला कंडोम पहनाया, तो सन्नी को केला कंडोम पहनाया। लक्ष्मी आंटी ने हमें बेड के किनारे बिठाया और खुद हमारे कदमों में बैठ कर हमारे लौड़े चूसने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अच्छे से चूसा और चिढ़ाया पर झडने से पहले रुक गई।

लक्ष्मी आंटी बोली, "इन दोनों का स्वाद उतर गया है। कुछ और लगाते हैं।"

लक्ष्मी आंटी ने फिर मुझे स्ट्रॉबेरी पहनाया और सन्नी को आम पहनाया। लक्ष्मी आंटी ने अपने होंठ और हाथों से हम दोनों को सुख के कगार पर खड़ा कर गिरने से रोक रखा था।

"लक्ष्मी आंटी, अब और मत तड़पाओ। छूट जाने दो ना।"

लक्ष्मी आंटी ने कड़े स्वर में कहा, "दुबारा अपनी लक्ष्मी आंटी से कुछ छिपाओगे?"

हम दोनों ने सर हिलाकर ना कहा तो लक्ष्मी आंटी ने अपने होंठ मेरे लौड़े पर रख कर चूसा। मेरा रस कंडोम के अंदर भर रहा था कि लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को भी झड़ा दिया। हम दोनों बेड पर लेट गए तो लक्ष्मी आंटी ने अपने कपड़े उतार फेंके और हम दोनों से कहा,

"चलो उठो!! बताओ ये long lasting कितनी देर तक काम करता है?"

हम दोनों ने कहा कि हम नहीं जानते तो लक्ष्मी आंटी ने 2 पैकेट खोलकर कहा, "पता लगाना चाहते हो?"

नेकी और पूछ पूछ?

हम दोनों कंडोम पहन कर लेट गए। लक्ष्मी आंटी ने अपने घुटनों को मेरी कमर के दोनों तरफ रखते हुए अपनी चूत के मुंह पर मेरा सुपाड़ा रखा। मेरी आंखों में देखते हुए लक्ष्मी आंटी ने कहा,

"खबरदार अगर जरा भी हिले डुले। चुप चाप पड़े रहो।"

लक्ष्मी आंटी के इशारे पर सन्नी ने पीछे से लक्ष्मी आंटी की गांड़ पर अपना लौड़ा लगाया। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथ के इशारे से उसे भी रोक दिया। हम दोनों के सुपाड़े लक्ष्मी आंटी के गरमी से भरे खजाने के दरवाजों पर दस्तक देकर खड़े थे।

लक्ष्मी आंटी ने एक गहरी सांस लेते हुए मेरी आंखों में देखा और बैठ गई।

मां… अन्हह… हां… आह…

लक्ष्मी आंटी ने अपने दोनों छेद हमारे लौड़ों से भर दिए और अब गहराई में उनके एहसास का मज़ा लेते हुए बैठ गई।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "पता है, इन कंडोम पर बने छोटे छोटे नक्काशी से मेरे अंदर तक आप दोनों के लौड़े कुछ अलग ही मजा देते हैं। उफ्फ… काश कि यह पल यहीं रुक जाए। मुझे प्यार करो बाबू। मुझे चोदो बाबू! मुझे फ़ाड़ दो!!!"

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को पकड़ लिया। मैंने लक्ष्मी आंटी का झूलते मस्त गोले पकड़ लिए तो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ लिए। लक्ष्मी आंटी ने हमें अभी चूसा था और उपर से long lasting condom पहनाया था। वक़्त तो लगना था। 10 मिनट लक्ष्मी आंटी को चोदने के बाद सन्नी थकने लगा और मैं उसकी जगह लेने के लिए तयार था।

सन्नी ने अपने बदन से लक्ष्मी आंटी को हम दोनों के बीच दबा दिया। बिना अपनी ताल बदले लक्ष्मी आंटी के साथ हम ने पलटी मारी। अब सन्नी पीठ पर लेटे हुए लक्ष्मी आंटी की गांड़ मार रहा था और लक्ष्मी आंटी अपने पैरों से अपनी कमर उठकर मुझसे अपनी चूत मरवा रही थी।

लक्ष्मी आंटी ने मेरी आंखों में देखते हुए अपनी कमर हिलाई और हम दोनों से एक साथ चुधाते हुए झड़ने लगी। सन्नी और मैंने भी ठान ली थी कि long lasting condom पहनाया है तो उसमें ही झड़ेंगे। 10 मिनट और लक्ष्मी आंटी झडते हुए जम कर चुधी। लक्ष्मी आंटी कभी मेरा नाम लेती, तो कभी सन्नी का पर चीखती रही। आखिर में सन्नी ने लक्ष्मी आंटी का नाम लेते हुए अपनी तोप चला दी। लक्ष्मी आंटी सन्नी के बदन पर लेट गई और मैं उसकी चूत को चोदता रहा। 1 मिनट बाद मैंने भी कंडोम भर दिया और लक्ष्मी आंटी की चूचियों को चूमते हुए सुस्ताया।

लक्ष्मी आंटी ने मेरे बालों में उंगलियां घुसा कर मेरे गाल को चूमते हुए कहा, "आप दोनों बड़े वो हो। ऐसे लगा जैसे… पप्पुजी!!"

लक्ष्मी आंटी के हाथ पैर ठंडे पड़ गए। मैंने मुड़कर देखा तो दरवाजे में एक हट्टा कट्टा आदमी खड़ा था। मैं लक्ष्मी आंटी के नंगे बदन को अपने नीचे छुपाने लगा तो उसने कहा,

"कपड़े पहन कर बाहर आ जाओ। मैं खाना परोसता हूं।"

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सन्नी

मैंने और विक्की ने कपड़े पहन लिए पर लक्ष्मी आंटी अपने बदन से कपड़े लगाए डर कर बैठी रही। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को हिम्मत दी और उसे कपड़े पहनाकर बाहर ले आए। पप्पू डायनिंग टेबल पर बैठा था और उसकी तेज नजरें हम पर गड़ी हुई थी।

"इस में लक्ष्मी आंटी की कोई गलती नहीं है। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी का बलात्कार किया है।"

पप्पू ने एक सर्द मुस्कान के साथ कहा, "बिल्कुल!! मैं 20 मिनट से लक्ष्मी की यही चीखें तो सुन रहा था। लक्ष्मी ने मुझे देखने से पहले 10 मिनट तक मैं दरवाजे में खड़ा था। मुझे सब पप्पू बुलाते हैं इसका मतलब ये नहीं कि मैं पप्पू हूं। चलो तीनों मेरे सामने बैठो। आज मैं एक कहानी सुनाऊंगा।"

हम लक्ष्मी आंटी को हमारे बीच बिठाकर पप्पू की बात सुनने लगे।

पप्पू बोला, "मेरा नाम प्रतीक है पर बचपन से सब पप्पू बुलाते हैं। कम उम्र में ही मैंने अपने काम में हुनर को दिखाया और अचानक मेरे पास काम आने लगे। पर ये किसी से देखा नहीं गया। उसने एक रात मेरे पेट में चाकू से वार करने की कोशिश की। मैंने बचते हुए उसका हाथ हिलाया और चाकू नीचे लग गया। डॉक्टर अच्छा आदमी था। उसने जो हो सके वो बचाया पर उसने अकेले में मुझे बताया कि मैं कभी शादी ना करूं। मेरा लौड़ा अब किसी औरत के काम का नहीं। शादी की जिद घरवालों ने पकड़ ली तो मैं शराबी, जुआरी और नशेड़ी बन गया। आखिर ऐसे इंसान को कोई अपनी बेटी क्यों देगा?

फिर लक्ष्मी आई। अपना राझ छुपाने के लिए एक सुंदर और अच्छी लड़की की जिंदगी मुझे बरबाद करनी पड़ी। मैं शराबी, जुआरी और नशेड़ी बन कर लक्ष्मी को बहुत सताया करता पर लक्ष्मी पूरी पतिव्रता नारी निकली। पहले एक साल इसने मुझे सुधारने की कोशिश की, फिर एक साल संभालने की कोशिश की और आगे मुझे झेलती रही। जो सुख मैं लक्ष्मी को नहीं दे सकता वो उसे मिले इसके मेरे पास 2 रास्ते थे। 1 मैं बस्ती के किसी आदमी को बुलाता पर फिर वो लक्ष्मी की इज्जत नहीं करता, उसके बारे में बाहर बोलता, उसे अपने दोस्तों में बांटता और मैं भी अपना राझ नहीं छुपा पता। 2 कोई बड़ी उम्र का अमीर आदमी लक्ष्मी की जवानी पर लट्टू हो जाए और लक्ष्मी को अपना बनाए, तो वो अपनी इज्जत के लिए लक्ष्मी की इज्जत बचाता। इसी लिए मैंने लक्ष्मी को पवन साहब और अश्वेत साहब के पास काम करने भेजा। सोचा कि दोनों अब भी जवान है तो कोई अपनी बीवी से किसी दिन लड़ कर लक्ष्मी को आजमा सकता है। 4 साल तक कुछ नहीं हुआ और मै शरीफों की शराफत को कोसने लगा।

पर पिछले एक हफ़्ते में सब बदल गया। पिछले हफ़्ते जब मैंने लक्ष्मी के पैसे चुराए तो बिजली कट गई और लक्ष्मी गुस्सा हो कर गई। अगले दिन शाम को बिजली लौट आई थी पर लक्ष्मी बहुत डरी हुई थी। उसने बताया कि 3 दिन बाहर जा कर खाना बनाने की लिए उसे 1500 मिलने वाले हैं। ये तो डरने की बात नहीं थी। मैं समझ गया कि किसी साहब ने लक्ष्मी को फंसा लिया है।

लक्ष्मी के जाने के बाद मैंने ताक झांक कर देखा तो पता चला दोनों साहब अपनी बीवियों के साथ है। मुझे लगा कि मैं गलत था पर लक्ष्मी लौटी तो उसके तेवर बदले हुए थे। उसने मेरा बहुत अच्छा खयाल रखना शुरू किया। लक्ष्मी गुनगुना रही थी। मैं समझ गया कि कोई ऐसा है जो लक्ष्मी को चाबी दे रहा है। लक्ष्मी की बैग में एक satin में बना नाइट गाउन मिला जो उसने कहा कि उसने खरीदा था पर कैसे? पैसे तो उसके पास नहीं थे। सोमवार को उसने गाउन को प्यार से अपने बक्से में रख दिया। Satin गाउन पति के लिए होता है या फिर प्रेमी के लिए। पति के लिए पहना नहीं तो बचा कोन? मंगलवार को लक्ष्मी उदास लौटी और satin dress पहनकर सो गई। बुधवार को मैंने देखा कि लक्ष्मी ने कंडोम खरीद कर अपने पर्स में रखें। कोई कुंवारी कंडोम ले कर काम पर जाए तो उसका आशिक वहीं होगा। तब मुझे आप दोनों याद आए। बच्चे अब जवान हो गए हैं। सोचा की आप दोनों में से किसी ने लक्ष्मी को जवानी का मजा दिलाया होगा। कल मैंने आप दोनों के बारे में सारी बातें जान ली तो पता चला कि आप दोनों तो कुछ ही दिनों में दूसरे शहर के कॉलेज जाओगे। मुझे बहुत बुरा लगा कि मेरी प्यारी दोस्त लक्ष्मी का दिल टूटेगा। सोचने लगा कि जिस कॉलेज में आप जाओगे उस शहर में मैं भी लक्ष्मी के साथ रहने आ जाऊं। लेकिन होनी को ये बात भी मंजूर नहीं।

कल शाम को Gulf across seas job में से मुझे कॉल आया। अच्छे तनखा के साथ मुझे 4 साल का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। अब लक्ष्मी को मुझे परेशान करने की जरूरत नहीं पर किसी को लक्ष्मी के साथ होना चाहिए। सोचो क्या करें?"

"गल्फ में शराब, जुआ और नशा तीनों को बहुत ज्यादा सजा है। रह पाओगे?"

प्रतीक ने जोर से हंसते हुए कहा, "अब तक समझे नहीं? मैं अपने उपर शराब उड़ाकर घर लौटता हूं। मैं ना शराब पीता हूं और ना नशा करता हूं। जुआ खेलने के नाम पर बाहर जा कर काम करता हूं। कितने हट्टे कट्टे नशेड़ी शराबियों को जानते हो? मेरी पूरी तनख़ा और लक्ष्मी से चुराया एक एक पैसा मैंने बचाया है, संभाल कर रखा है।"

प्रतीक टेबल से उठकर हमारी ओर आया तो मैंने उस से लक्ष्मी आंटी को बचाने की तयारी कर ली। प्रतीक लक्ष्मी आंटी के पैरों में बैठ गया तो लक्ष्मी आंटी ने उसे उठाने की कोशिश की। प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी के हाथ अपने हाथों में पकड़ कर कहा,

"लक्ष्मी, मैंने तुम्हें धोका दिया है, बहुत ज्यादा सताया है। पर शादी के दिन हम पहली बार मिले और मैं तुम्हारी मासूमियत देख तुम्हें कैसे बताता की खोट तुम में नहीं मुझ में है। पिछले 4 सालों में तुम मेरी दोस्त बनी ये जानते हुए कि मैं तुम्हारा फायदा उठा रहा था। अपने मन से ये बात निकाल दो के तुम मुझ से धोका कर रही हो। मैं तुम्हें यकीन दिलाता हूं कि मैं चाहता हूं कि तुम्हे वो सारी खुशियां मिले जो मैं तुम्हें देने के काबिल नहीं।"

लक्ष्मी आंटी ने रोते हुए प्रतीक के सर को अपनी बाहों में भर कर अपने दिल पर बना धोखे का बोझ उतार दिया। प्रतीक ने मुझे और विक्की को देखते हुए कहा,

"बाबू, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि लक्ष्मी को एक से ज्यादा प्रेमी मिलेंगे पर मैं लक्ष्मी को अपमानित होने नहीं दूंगा। आप दोनों लक्ष्मी के साथ सुख बांटो तो मुझे शिकायत का कोई हक़ नहीं पर लक्ष्मी को आप दोनों से आपकी प्रमिका का सम्मान भी मिलना चाहिए। मैं जाने से पहले लक्ष्मी का अच्छा इंतजाम करके जाऊंगा पर मुझे खुशी होगी अगर आप दोनों भी लक्ष्मी पर नजर रखें। समझे?"

पप्पू हमारी नज़रों के सामने प्रतीक बन गया। प्रतीक ने हमारे साथ खाना खाया और लक्ष्मी आंटी अपनी मर्जी से प्रतीक के साथ अपने घर चली गई। आज उन दोनों को पिछले 4 सालों की काफी बातें करनी थीं। मैं और सन्नी सोच में पड़ गए थे कि लक्ष्मी आंटी को प्रतीक के साथ जाने देना सही था या गलत? प्रतीक अगर अब भी पप्पू हुआ तो घर जाकर लक्ष्मी आंटी के साथ कुछ कर सकता है और रोकें तो कैसे?
 
शाम को मम्मियों को पापाओं ने बताया कि कॉलेज के बाहर ही एक अच्छा फ्लैट मिल गया है और हम दोनों के खाने और सफाई का इंतजाम हो जाए तो अगले 4 साल हमें कोई कमी नहीं होगी। समीरा मम्मी ने कहा कि वह लक्ष्मी आंटी से पूछेगी अगर उसके पहचान कि कोई लड़की या औरत अच्छे तनख़ा के लिए हमारे साथ रहने को तैयार हो जाए। जब पापा ने कहा कि पराई औरत पर विश्वास नहीं कर सकते तो मम्मी ने लक्ष्मी आंटी को शराबी विक्की से दूर करने की बात की।

हम दोनों मेरे कमरे में बैठ कर बड़ों की बातें कंप्यूटर पर सुन रहे थे। मम्मी ने लक्ष्मी आंटी से सुबह बात करने की ठान ली और हमारे मन में लड्डू फ़ूटने लगे।

शनिवार को सब बड़ों ने छुट्टी ली थी ताकि लक्ष्मी आंटी से सीधी बात की जाए। लेकिन लक्ष्मी आंटी के साथ प्रतीक भी आया। प्रतीक को देख मम्मियां चौंक गई तो पापा एक दूसरे की ओर देखने लगे। प्रतीक ने बताया कि उसे दुबई के बिजनेसमैन MBS, मोहम्मद बिन सलीम ने अपनी कंपनी में नौकरी दी है। अच्छी तनखवाह के कारण लक्ष्मी आंटी को अब काम करने की जरूरत नहीं पर लक्ष्मी आंटी को अकेले छोड़ना प्रतीक के मन को नहीं भाता।

पापा ने प्रतीक को पासपोर्ट, विसा और टिकट के लिए एक लाख की मदद देने का वादा किया। प्रतीक ने कहा कि कल वह अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा जुआ जीता है और अब उसे पैसों की कमी नहीं। जब पवन अंकल ने फिर भी मदद करनी चाही तो प्रतीक ने कहा कि उसे लक्ष्मी का बस्ती में अकेले रहने से डर लगता है।

समीरा मम्मी ने मौके का फ़ायदा उठाया और कहा कि बच्चों को दूसरे शहर में खाना बनाने और सफाई के लिए कोई चाहिए होगा। अगर प्रतीक को ऐतराज नहीं है तो लक्ष्मी आंटी उनके साथ वहीं रह सकती है। प्रतीक तुरंत मान गया और सब अपनी अपनी वजह से खुश हो गए।

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सन्नी

अगले 10 दिन मानो पर लगाकर उड़ गए। पप्पू यानी प्रतीक के कागजात तैयार हो गए तो उसकी भी तैयारी हो गई। हम दोनों का कॉलेज selection final हो गया तो मम्मियां छुट्टी ले कर अपने बच्चों के साथ ज्यादा वक्त बिताना चाहती थी। लक्ष्मी आंटी रविवार को एक नई औरत को लेकर आई जो घर के सारे काम करेंगी। इसका नाम गंगा मासी था और वह किसी भी तरह से दादी से कम नहीं थी। मैंने पापा को पवन अंकल से कहते सुना कि बच्चे बंगाली मिठाई खा गए और हमें तो सुखा डिब्बा भी नसीब नहीं हुआ।

मंगलवार को दोनों पप्पा हमें ले कर मुंबई आ गए। Admission करवाने के बाद हम सब नए फ्लैट को देखने गए। टैक्स के लिए फ्लैट कंपनी के नाम पर था और बिल्कुल खाली था। पवन अंकल ने कहा कि 10 दिन में अंदर हमारे लिए एक अच्छा डबल बेड और वॉर्डरोब लगा होगा। पढ़ाई और बैठने के लिए हॉल में समान लगा दिया जाएगा। कमरा 1BHK है तो साफ सफाई के लिए ज्यादा नहीं है।

मैंने भोलेपन से कहा, "पर लक्ष्मी आंटी का क्या?"

दोनों पापा ने एक दूसरे की ओर देखा और उन्होंने हमारे कान पकड़ कर मोड़ दिए।

पापा ने हमें डांटते हुए कहा, "हम तुम्हारे बाप हैं!! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई लक्ष्मी आंटी के साथ ऐसा करने की। 4 साल से वो हमारे भी सामने खड़ी थी। नौकर ऐसा करे तो वह जेल जाता है और मालिक ऐसा बरताव करे तो नौकर उसका गला काट देता है। लक्ष्मी आंटी नाजाने क्यों तुम दोनों का साथ दे रही है। पर उसके साथ के कारण हमने पप्पू को नौकरी के बहाने दूर भगाया। हम नहीं जानना चाहते कि यहां क्या होता है और कैसे। बस इतना याद रखो कि ये चार साल वापस नहीं आएंगे। दिल लगाकर पधो और लक्ष्मी आंटी का खयाल रखना। जानते हो मर्द को 21 से पहले शादी क्यों मना है? क्यूंकि शादी के बाद उसे अपने साथ अपनी बीवी की भी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। लक्ष्मी आंटी से कोई शिकायत आए तो हम उस वापस बुला लेंगे और तुम दोनों अपना हाल खुद संभालो। समझे?"

पवन अंकल ने कहा, "लक्ष्मी आंटी को हम ने कंपनी में नौकरी पर रखा है। उसे हेल्थ इंश्योरेंस भी मिलेगा जिसमें मैटरनिटी की अनुमति है। गलती से भी उसका इसतेमाल मत करना!!! औरत को रिझाया है तो आटे दाल का भाव जान लो। दुबारा गडबड की तो शायद उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।"

ये बताने की जरूरत नहीं की हम दोनों की अकल ठिकाने आ गई थी। एजेंसी को चाबी दे कर हम सब लौट आए। मम्मियों ने हमारा ऐसे स्वागत किया की हम जंग से लौटे हो। पापा ने गुस्सा थुंक दिया और हमारे कॉलेज और कमरे के बारे में सब बताने लगे।

प्रतीक के जाने की तारीख आते हुए हम सब में दोस्ती हो गई। प्रतीक को हम दोनों से 2 दिन पहले जाना था। मैं, विक्की और लक्ष्मी आंटी उसे एयरपोर्ट पर छोड़ने गए तो लक्ष्मी आंटी रो पड़ी। प्रतीक ने उसे गले लगाते हुए उसके कान में कुछ कहा तो लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर हां कहा। उन्हें देख कर कोई भी उनके बीच के प्यार को महसूस कर सकता था। प्रतीक ने कहा कि उसने पापा से बात कर ली थी और लक्ष्मी आंटी आगे जा कर कमरा ठीक कर देगी।

प्रतीक का हवाई जहाज सुबह 10 बजे उड़ गया और लक्ष्मी आंटी ने शाम की ट्रेन पकड़ ली। अगले 2 दिन पॅकिंग और नसीहत में उड़ गए। जाने के दिन मम्मियां चिड़चिड़ी हो गई थी और दोनों पापा अकसर उनसे दूर भागते नजर आ रहे थे। आखिर में दोनों मम्मियों ने रोना शुरू किया और हमें गले लगाते हुए अपना खयाल रखने को कहा। सुबह की फ्लाइट से हम दोनों मुंबई पहुंचे तो थके हुए थे और लक्ष्मी आंटी को पकड़ने के लिए बेताब थे। कमरे का दरवाजा खटखटाया तो लक्ष्मी आंटी ने अंदर आने को कहा।

लक्ष्मी आंटी ने अपने चेहरे पर कुछ हरा लेप लगाया था और उसके बालों को एक जालीदार टोपी में ढका हुआ था। हाथों और पैरों में अजीब प्लास्टिक के मोजे थे। Satin dress छोड़कर लक्ष्मी आंटी को पहचानना मुश्किल था।

लक्ष्मी आंटी ने डांटते हुए कहा, "ऑफो, अब ऐसे ही खड़े मत रहो!! आप दोनों के कॉलेज से चिट्ठी आई है कि आज 12 बजे सब को मिलना है। यहां से आप के जहाज को चक्कर काटते देख मेरी जान गले में आ गई। अब पहले ही दिन देर से जाओगे क्या? चलो बाथरूम में घुस जाओ तब तक मैं आप दोनों के कपड़े रख देती हूं। चिट्ठी में लिखा था कि प्रोग्राम देर तक चलेगा तो सीधे खाने पर मिलेंगे।"

मैं और विक्की एक साथ नहाने लगे तो बड़ा अजीब लगा। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को तौलिए दिए। लक्ष्मी आंटी को हम ने अंदर खींच लेते इस से पहले ही वो भाग गई। बाहर आ गए तो लक्ष्मी आंटी ने हमारे कॉलेज के कपड़े पहनने के लिए तयार रखे थे और साथ में खाना भी लगाया था। लक्ष्मी आंटी के अंदर शायद कोई मिलिट्री का अफसर या कोई मम्मी आ गई थी जो हम दोनों को वक़्त पर तयार कर भेज रही थी। मुंह पर लगे लेप और हाथ पर लगे प्लास्टिक मोजे को दिखाते हुए लक्ष्मी आंटी ने हमारे साथ खाने से मना कर दिया।

उलझे हुए विचार और भारी लौड़े से हम दोनों भी कॉलेज गए। कॉलेज के गेट से अंदर जाते हुए विक्की बोल पड़ा,

"सन्नी, अगले 4 साल ऐसे ही बीते तो…"

"शुभ शुभ बोल विक्की। शुभ शुभ बोल।"

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विक्की

कॉलेज की अगर ये शुरुवात थी तो अगले 4 साल जालिम होंगे ये बताने की जरूरत नहीं थी। बड़ी बड़ी हस्तियां हमें सिखाने के लिए आयेंगी और हमें परखेंगी। कॉलेज के अधिकतर लोग स्कूल से सीधे आए लग रहे थे और कुछ हसीनाओं ने हम से बात की। शायद पापा कि डांट या प्रतीक को दिया वादा या लक्ष्मी आंटी की लुभावनी छवि, किसी न किसी वजह से हम इनके हुस्न से बाहर निकल आए।

शाम के 7 बजे थोड़े डर और थोड़ी उत्तेजना से हम दोनों ने दरवाजा खटखटाया। जवाब न मिलने पर चाबी से दरवाजा खोला। पूरे घर में अंधेरा था और मेज पर एक मोमबत्ती के नीचे चिट्ठी रखी थी।

"नहाकर वापस यहां आओ। मैं आप दोनों का इंतजार कर रही हूं। आप दोनों की

लक्ष्मी आंटी"

हम दोनों ने बाथरूम की ओर दौड़ लगाई और बिना कुछ सोचे नहा कर साफ हो गए। हम दोनों ने दाढ़ी बनाई। दोनों के तौलिए अंदर ही रखे हुए थे तो उन्हें पहनकर हम वापस बाहर आए।

कमरे में एक और मोमबत्ती जल रही थी और मेज पर एक नई चिट्ठी थी।

"मेज के नीचे रखे हुए कपड़े पहन कर रोशनी के साथ आओ।

लक्ष्मी आंटी"

कमरे में अब दो मोमबत्तियां थी। एक मेज पर तो दूसरी बेडरूम के दरवाजे में। हमने लक्ष्मी आंटी की तयारी कि कदर करते हुए नीचे से कपड़े निकाले। दो जोड़ी कुर्ता और पजामा देख हम ने जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए। मैंने मेज पर रखी मोमबत्ती उठाई तो सन्नी ने आगे बढ़ कर बेडरूम के दरवाजे में रखी मोमबत्ती उठाई।

हम दोनों ने बेडरूम में देखा तो वहां पूरा अंधेरा था। हम दोनों अंदर गए तो अलग अलग जगह पर मोमबत्तियां लगी हुई थी। हमें लक्ष्मी आंटी की आवाज सुनाई दी,

"बाहर से अंदर तक उजाला कर दो पर जो मेरी ओर देखेगा वह कल सुबह तक सिर्फ देखेगा।"

लक्ष्मी आंटी की बात मान कर, हम दोनों ने सारी मोमबत्तियां जलाई। आखरी मोमबत्तीयां बेड किनारे बनी मेजों पर रखी थी। मोमबत्ती जलाने पर वहां हमें दूध का एक एक प्याला मिला जिसके नीचे एक और चिट्ठी थी।

"दूध ले कर बेड पर आ जाओ।"

हम दोनों को पता था कि लक्ष्मी आंटी ने क्या किया है पर फिर भी लक्ष्मी आंटी को देख दिल की धड़कन बढ़ गई। लक्ष्मी आंटी दुल्हन का जोड़ा पहने बेड के बीच में बैठी थी। लक्ष्मी आंटी ने सर से घूंघट में अपना चेहरा छिपाया था। लक्ष्मी आंटी के मेहंदी से रंगे हाथों से उसके घुटनों को घेरा था। पायल में बंधे हुए मेहंदी लगे पांव अपनी हिचकिचाहट में कांपती उंगलियों को गद्दे पर दबा रहे थे। हम दोनों लक्ष्मी आंटी के दोनों तरफ बैठ गए।

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के घूंघट को हाथ लगाया तो लक्ष्मी आंटी ने हमारे हाथ पकड़ लिए।

लक्ष्मी आंटी ने चिढ़ाते हुए कहा, "ऐसे नहीं होता बाबू!! पहले मुंह दिखाई कि कीमत चुकानी पड़ेगी। बोलो क्या दोगे आप दोनों?"

ये तो हम ने सोचा ही नहीं था। खड़े लौड़े के सिवा हमारे पास देने लायक कुछ नहीं था।

सन्नी ने दिमाग लगाया और कहा, "रामायण के भगवान राम के तरह हम तुम्हें वचन देते हैं कि…"

लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के होटों पर मेहेंदी लगी उंगली रख कर उसे रोक दिया। लक्ष्मी आंटी बोली,

"बाबू, वादा ऐसा करो जो निभा पाओ। क्यों न आप दोनों मुझे कैकई की तरह 2 वचन दो?"

हम दोनों को लक्ष्मी आंटी पर विश्वास था और हम दोनों ने हां कहा।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "आप मुझे वचन देते हो के जब तक हम साथ हैं आप किसी और लड़की के प्यार में नहीं पड़ेंगे। मेरे साथ धोका नहीं करेंगे। यहां सिर्फ पढ़ाई करोगे और बाकी मुझ पर छोड़ दोगे। मंजूर है?"

हम दोनों ने खुशी खुशी हां कहा।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी दूसरी शर्त कही, "बाबू आप दोनों अब मुझे दूसरा वादा करो कि आप दोनों मुझे किसी और के साथ बांटोगे नहीं। अब आप दोनों बड़े शहर के कॉलेज के लड़के हो गए हो और शहरी लोगों से डर लगता है बाबू।"

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी से वादा किया कि हम उसके प्यार को उसके खिलाफ इस्तमाल नहीं करेंगे। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में भर लिया और लक्ष्मी आंटी ने हमारे बीच में बैठ कर हमारे सर पर हाथ रखा। हम पीछे हो गए और लक्ष्मी आंटी का घूंघट उठने लगे। लक्ष्मी आंटी के सर से घूंघट उतर गया और लक्ष्मी आंटी के अवर्णनीय रूप ने हमें मोह लिया।

नई नवेली दुल्हन की तरह सजी हुई लक्ष्मी आंटी को हम दोनों आंखे फाड़कर देखते रह गए। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को देख कहा,

"बाबू, ऐसे क्या देख रहे हो? मैंने भी आप दोनों के लिए कुछ किया है। अभी दिखाऊं?"

हम दोनों बस सर हिलाकर हां कर पाए। लक्ष्मी आंटी ने तकिए के नीचे से कुछ निकाल कर हमें दिया। मोमबत्तियों के उजाले में, लक्ष्मी आंटी के रूप से चोंधियाई आंखों को वह चीज पहचानने में थोड़ी दिक्कत हुई । वह गर्भनिरोधक गोलियों का चौकोनी पैकेट था जिस में से 6 गोलियों खाई गई थी।

सन्नी के दिमाग की बत्ती जली तो उसने लक्ष्मी आंटी की ओर देखा। लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर मुस्कुराते हुए अपने मेहंदी लगे हाथ को आगे कर दिया। सन्नी ने एक गोली लक्ष्मी आंटी के हाथ में रख दी और लक्ष्मी आंटी ने हमारी नज़रों में देखते हुए उसे निगल लिया। मैंने होश में आ कर दूध का ग्लास लक्ष्मी आंटी को दिया और उसने शरमाते हुए आधे से थोड़ा कम पी लिया। सन्नी ने भी लक्ष्मी आंटी को अपना ग्लास दिया तो उसके ग्लास को भी जूठा कर लक्ष्मी आंटी ने लौटाया। आगे की बात समझकर हम दोनों ने बाकी दूध गटक लिया और ग्लास मेजों पर रख दिए।

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सन्नी

आज शाम को कॉलेज की कई हसीनाओं ने शरमाते हुए हम से बात की थी पर लक्ष्मी आंटी को देख उन्हें याद करना भी मुश्किल था। घूंघट बना दुपट्टा उतरने के बाद लेहेंगे चोली में बैठी लक्ष्मी आंटी पर झपट पड़ने से हम दोनों ने खुद को रोका। मैंने लक्ष्मी आंटी के पैरों के उंगलियों को सहलाकर चूमते हुए उसके पायल को अपनी जीभ से बजाया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के बालों में सजे मांग टिक्के को चूमकर हटाया तो उसके नीचे लक्ष्मी आंटी की मांग में सिंदूर भरा हुआ था।

हमें याद आया की लक्ष्मी आंटी प्रतीक कि बीवी है। लेकिन प्रतीक कि अनुमति याद करते हुए सोचा कि बीवी किसी की हो तो भी हम दोनों की सुहागन है। मैंने इंच इंच करके लक्ष्मी आंटी के लेहेंज को मोड़ते हुए उसके सुडौल पैरों को उजागर किया। मोमबत्तियों के उजाले में लक्ष्मी आंटी की काया सोने की तरह चमक रही थी। विक्की ने मांग टिक्के से मिलती बालियों को चूमते हुए लक्ष्मी आंटी की उत्तेजना से बन्द होती आंखों को चूमा। लक्ष्मी आंटी के घुटनों को चूमकर मैंने फैलाया तो लक्ष्मी आंटी बेड पर लेट गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के गले को चूमते हुए उसकी चोली के गले में जाते मंगलसूत्र को भी चूमा।

प्रतीक कि अनुमति से उसे धोका देने की बात से लक्ष्मी आंटी के बदन में उत्तेजना से लहर दौड़ गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पेट के बल लिटा दिया और उसके पीठ पर लगी चोली की गांठ को अपने दातों से खोलने लगा। मैंने मौके का फायदा उठाकर लक्ष्मी आंटी के घुटनों के पीछे का हिस्सा चूमा। लक्ष्मी आंटी ने सर उठाकर उत्तेजना से आह भरी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की चोली खोली और पीठ चूमते हुए कंधे पर से चोली का कपड़ा सरकाकर उतारने लगा। मैंने लक्ष्मी आंटी की मांसल जांघों को चूमते हुए उसकी गोल मटोल गांड़ को छिपाते पैंटी के किनारे चूमे।

लक्ष्मी आंटी ने उत्तेनापूर्ण नजरों से हमें देख कर कहा, "बाबू अब और मत तड़पाओ। मेरा बदन जल रहा है। इस आग को अपने प्यार से बुझाओ।"

मैंने लक्ष्मी आंटी के लहंगे का नाड़ा खींच लिया तो लक्ष्मी आंटी ने अपनी कमर उठकर उसे उतारने में मेरी मदद की। लहंगा घुटनों तक उतार दिया तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पलट दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथ और पैर उठाए और हम दोनों ने लहंगा चोली उतार फेंका। लक्ष्मी आंटी ने सेक्सी लाल ब्रा और पैंटी कि जोड़ी पहनी थी। मैंने लक्ष्मी आंटी की जांघों को चूमते हुए खोला। लक्ष्मी आंटी की गीली पैंटी से आती उसकी यौन खुशबू ने मुझे बुलाया। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूत को उस पैंटी में से चूमना और चूसना शुरू किया।

लक्ष्मी आंटी से अब और इंतजार नहीं हुआ और उसने अपनी पैंटी उतार फेंकते हुए अपनी जांघों को फैलकर मुझे जगह दी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की ब्रा उतारी और लक्ष्मी आंटी के रसीले फलों को चूसने लगा। लक्ष्मी आंटी ने एक हाथ से विक्की के बालों को सहलाते हुए दूसरे हाथ से मेरे बाल पकड़ कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी की चूत को मेरा कुर्ता पजामा में बन्द लौड़ा रगड़ रहा था। लक्ष्मी आंटी ने विक्की के सर को अपने स्तन पर दबाते हुए मेरे पजामे का नाड़ा तोड दिया।

लक्ष्मी आंटी ने मेरी आंखों में देख कर सिर्फ 1 शब्द कहा, "चोदो!!"

मैंने पल दो पल में अपने सारे कपड़े उतार फेंके और लक्ष्मी आंटी के बदन पर लेट गया। लक्ष्मी आंटी ने अपने पैरों से मेरी कमर पकड़ ली और मुझे अपनी धधकती गरमी में खींच लिया। मेरा लौड़ा लक्ष्मी आंटी चूत की गहराई नापने अंदर गया तो लक्ष्मी आंटी ने विक्की के सर को पकड़ कर उसे चूमते हुए उसके होंठों से अपनी चीखें दबाई।

लक्ष्मी आंटी ने विक्की का भी नाड़ा तोड दिया और उसके लौड़े को हिलाने लगी। मैंने लक्ष्मी आंटी की लाल बरियों को चूमते, चूसते हुए अपनी रफ़्तार बढ़ा दी तो लक्ष्मी आंटी ने अपना बदन अकड़ते हुए मुझे अंदर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी के खजाने में से यौन रस की नदी फुट कर बहने लगी और लक्ष्मी आंटी ने झडते हुए अपना बदन ढीला छोड़ दिया। मैं झडने के करीब था पर मैंने विक्की को आंख मारी और वह समझ गया।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी की पकड़ से खुद को छुड़ाकर अपने कपड़े उतार दिए। विक्की जल्द ही मेरे पास आ गया और मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला। लक्ष्मी आंटी ने बस पल भर के लिए विरोध किया था कि विक्की ने मेरी जगह ले ली।

"विक्की बाबू!!", लक्ष्मी आंटी ने पुकारते हुए अपने दूसरे प्रेमी को आलिंगन में भर लिया। विक्की ने तेज धक्कों से लक्ष्मी आंटी को चोदना चालू रखा और लक्ष्मी आंटी ने तप कर दुबारा अपना पानी छोड़ दिया। विक्की लक्ष्मी आंटी को बाहों में भर कर चूमते हुए चोद रहा था और मुझे डर था कि वह अपने आप को रोक नहीं पायेगा। विक्की के तेज धक्कों से लक्ष्मी आंटी ने लगातार दूसरी बार पानी छोड़ा तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी को घोड़ी बनाया। विक्की ने मुझे आंख मारी और मैंने विक्की कि जगह ले ली।

"बाबू! आप दोनों क्या कर रहे हो! उन्हहह… मुझे भर दो ना… मैं आपके प्यार की प्यासी हूं।", लक्ष्मी आंटी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।

लक्ष्मी आंटी को मैंने पैर फैलाकर घुटनों पर खड़ा किया और अपने लौड़े को एक झटके में पूरा पेल दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपने होठों को दातों में पकड़ कर अपनी चीख निगल ली। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की हालत का मजा लेते हुए उसके नीचे सरक गया और लक्ष्मी आंटी के झूलते मम्मों को अपने हाथों में पकड़ कर उन मम्मों की लाल बेरियों को चूसने लगा।

लक्ष्मी आंटी ने बात करने की सारी कोशिशों को भूल कर अपने बदन को छूट दी।

"हनहह…हम्ममम… अन्ह… आंह… आईआईइश… आह… अम्म्म… मां… अंहह… हां… हा हा हा…", करते हुए लक्ष्मी आंटी लगातार झडती रही।

दूसरी बार लक्ष्मी आंटी की गरमी में से बाहर निकल पाना मुझसे नहीं हुआ और मैंने लक्ष्मी आंटी की कमर पकड़ कर उसे अपने लौड़े पर खींच कर दबाया।

"अहहह… आंटी… आह… हुँहह…" करते हुए मैंने अपना गाढ़ा घोल लक्ष्मी आंटी को भेंट चढ़ा दिया।

विक्की मेरे लिए तयार था और मेरा लौड़ा बाहर निकलते ही विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पीठ पर लिटाकर उसकी गांड़ के नीचे एक तकिया रख दिया। लक्ष्मी आंटी की गांड़ उठ गई और मेरा रस लक्ष्मी आंटी के अंदर जमा रहा। विक्की ने अब अपने लौड़े को लक्ष्मी आंटी की चूत में उतार कर लक्ष्मी आंटी के बदन पर लेट गया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को चोदना शुरू किया तो लक्ष्मी आंटी ने उसे अपने पैरों से जकड़ लिया। विक्की के तेज धक्के अब लंबे नहीं थे पर हर धक्के से ऐसा आवाज आता जैसे भरी बाल्टी में लोटा गिरने से होता है। लक्ष्मी आंटी ने अपनी कामुक आवाज से उसका साथ दिया और विक्की ने अपनी ताल पकड़ ली।

"पुच्च… अन्ह… चुपक… पुच्च… आह… चूपाक… पुच्च… हां…"

इस संगीतमय कामक्रीड़ा को कोई ज्यादा भोग नहीं पता और विक्की जल्द ही लक्ष्मी आंटी को पुकारते हुए उस से चिपक गया।

लक्ष्मी आंटी अपनी टांगे फैला कर बेड पर लेटी छत देख रही थी और हम दोनों उसकी बगल में लेट कर उसके कंगन, बाली और पायल के साथ खेल रहे थे।

लक्ष्मी आंटी ने पूछा, "बाबू, मैं ये मंगलसूत्र उतार कर रख दूं? पहले मैंने इसे गिरवी रखा था और प्रतिकजी ने इसे छुड़ाकर छिपा दिया था। पर शायद अब ये आप दोनों को पसंद नहीं आए।"

"जानू, ये मंगलसूत्र निशानी है प्रतीक ने हम दोनों पर तुम्हे खुश रखने की दी हुई जिम्मेदारी कि। इसे कभी नहीं निकालना।"

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू आप दोनों मेरी बात मान लीजिए कि मै आप दोनों को बाबू ही कहूंगी और आप दोनों मुझे लक्ष्मी आंटी कहोगे। इस से किसी और के सामने हमारा भेद नहीं खुलेगा। ठीक है?"

विक्की और मैं लक्ष्मी आंटी की इस बात में छिपी सच्चाई को स्वीकार कर मान गए। थोड़ी देर सुस्ताने के बाद हमारे लौड़े फिर से बढ़ने लगे। लक्ष्मी आंटी ने हमारा इरादा पहचानते हुए कहा, "अब क्या 1/2 ग्लास दूध पीकर पिलाकर पूरी रात गुजारनी है? चलो खाना तयार है। (शर्माकर) बाकी का काम खाना खाने के बाद करेंगे।"

लक्ष्मी आंटी का शर्माना हमारा दिल जीत गया और हम लक्ष्मी आंटी के पीछे पीछे गए। खाने में लक्ष्मी आंटी की दिन भर की मेहनत दिख रहा थी और हम दोनों खाने पर टूट पड़े। खाना खाने के बाद विक्की बड़े नटखट अंदाज में बोला,

"लक्ष्मी आंटी, कल कॉलेज को छुट्टी है। हमें किताबें खरीदने और शहर देखने को कहा है। तो जल्दी सोने की जरूरत नहीं। चाहें तो पूरी रात जाग सकते हैं।"

लक्ष्मी आंटी का चेहरा शर्म से लाल हो गया और उसके होंठों से, "हे राम…" निकल गया।

लक्ष्मी आंटी सोने से पहले ही बेसुध हो गई पर हम दोनों सबेरे 3 तक हर तरह अपनी सुहागरात मनाते रहे।

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35

विक्की

थक कर चूर होकर मानो आंखें बंद की ही थी कि फोन की घंटी ने उठाया। मैंने एक आंख खोल कर देखा तो दीवार पर घड़ी सुबह के 8 बता रही थी। सन्नी भी मेरी तरह बिल्कुल नंगा बेड पर लेट कर देख रहा था। बेड के बीच में बने दाग के सिवा लक्ष्मी आंटी की कोई निशानी नहीं थी।

लक्ष्मी आंटी की आवाज के पीछे गया तो लक्ष्मी आंटी को मेरे फोन पर बात करते हुए पाया।

लक्ष्मी आंटी बोल रही थी, "… और वहां कोई दिक्कत तो नहीं? सुना है पाकिस्तानी लोग भी आप के साथ काम करेंगे। जरा संभलकर रहिए। खाना अच्छा है ना?…

आह हा हा… मुझे तो कभी नहीं बताया कि मेरी रोटियां ऐसी होती हैं।…

एम्म… हम्म…

नहीं!! मुझे शर्म आती है!!…

नहीं!!!!…

छाहह…

हां किया…

नहीं ना!!…

ठीक है, बाबा! बताती हूं। आप ने जैसे बताया था उस से भी बेहतर हुआ। सुबह दोनों बाबू हवाई जहाज से आए तो उन्हें कॉलेज में तुरन्त जाना पड़ा और हमारी तयारी कि भनक तक नहीं लगी। शाम को दोनों थक कर लौटे…

नहीं! इतने भी थके नहीं थे!!…

हां। तो जैसे आप ने बताया था वैसे तयारी कर के मैं छुप गई और दोनों को नहाने भेजा। उन्हें पता था कि आगे क्या होगा पर ये नहीं कि कैसे। हां दोनों ने मुझे आधा आधा दूध पिलाया।… आप तो शराब में नहाकर आए थे!! डर के मारे मैंने खाना नहीं खाया था और दूध रात में मैंने पी लिया था।… हां… गोलियां देख कर दोनों की आंखे चमक उठी।…

बड़ी मुश्किल से उठी हूं। दोनों बाबू मुझे झड़ा कर अदला बदली कर लेते। इस से मुझ बेचारी को न जाने कब तक…

हां…

चलने में तकलीफ हो रही है। अंदर से जैसे कोई नदी बह रही थी!!…

हां!! बहुत ज्यादा मजा आया!!… उफ्फ…

आप सच में खुश हो?…

मेरे इकलौते दोस्त हो आप!! मैं आप को नहीं खो सकती!…

ठीक है। अब दोनों के लिए नाश्ता बनाकर उन्हें उठाऊंगी।…

नहीं। कल बाबुओं को कॉलेज जाना है। हम कल शाम को बात करें?… ठीक है। मैं उन्हें बता दूंगी। अपना खयाल रखना… "

लक्ष्मी आंटी ने फोन रखा और किचन से चाय का ट्रे लेकर आई। हम दोनों को हॉल में बैठा देख शर्माकर मुस्कुराते हुए बोली,

"प्रतीक जी आप दोनों को बधाई दे रहे थे और उन्होंने कहा कि आप दोनों पर उन्हें भरोसा है। चलो अब मुंह धो कर जल्दी आ जाओ। नाश्ता अभी लग जायेगा।"

लक्ष्मी आंटी को पता भी नहीं था कि उसके रूप का हम पर क्या असर हो रहा था। हम दोनों ने अपने पैरों को खींच कर बाथरूम में गए। मुंह धोकर बाहर आते हुए मेरी नजर किचन में गई तो वहां एक बिस्तर लगा हुआ था।

"लक्ष्मी आंटी, ये बिस्तर किस के लिए बिछाया है?"

लक्ष्मी आंटी ने हमें नाश्ता परोसते हुए कहा, "वो मेरा बिस्तर है। प्रतीक जी ने जाने से पहले कुछ बातें बताई थी और उसमें से एक बात यह है। भले हम अपने आप को कितना ही छुपा लें पर घर में कोई न कोई आयेगा ही। अगर मेरा बिस्तर अलग लगा दिखे तो शक हो सकता है पर सबूत नहीं मिलता। समझते हो ना बात को।"

मैंने और सन्नी ने सर हिलाकर हां कहा और मन ही मन प्रतीक को हम सब के बारे में इतना सोचने के लिए धन्यवाद करने लगे। लक्ष्मी आंटी को हम ने अपने साथ नाश्ता करने पर मजबूर किया और उसे अपने हाथों से खिलाया। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को पकड़कर चोदने की कोशिश की पर लक्ष्मी आंटी ने हमें रोक दिया।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू आप दोनों को आज कि छुट्टी अपनी माशूका के बाहों में सोने के लिए नहीं मिली। चलो नहा धो कर खरीददारी करने निकलो। किताबें ख़तम हो गई तो लक्ष्मी आंटी से सजा मिलेगी!! समझे?"

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाते हुए पूछा, "लक्ष्मी आंटी तुम हमें पिटोगी? हमारे खुले पिछवाड़े पर पट्टी से मारोगी? या 2 दिन सुखी रोटी और पानी पर रखोगी?"

लक्ष्मी आंटी ने शर्माते हुए अपनी दो उंगलियों को फैलाया और कहा, "जब तक आप दोनों की सारी किताबें न मिलें…" लक्ष्मी आंटी ने अपनी दोनों उंगलियों को एक दूसरे पर चढ़ा दिया।

"हाय रे जालिम!! ये कैसी सजा हैं!! पहले अफीम चखा दी और अब ऐसी कीमत मांगते हो!!"

लक्ष्मी आंटी ने हंसते हुए अपनी उंगली मेरे नाक पर लगाकर कहा, "विक्की बाबू नौटंकी कोई आप से सीखे!! चलो निकलो!! और हां घर में कुछ चीजें चाहिए उन्हें भी लाइए, नहीं तो हफ़्ते भर सिर्फ दाल चावल पर गुजारा करना पड़ेगा।"

पापा की शादी, औरत और आटे दाल की बात अचानक मेरे दिमाग में घूम गई और मैं नहाने चला गया। सन्नी अब भी लक्ष्मी आंटी को छेड़ते हुए उसे हंसा रहा था।

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