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सन्नी
विक्की ने छोड़ा हुआ कैमरा उठाते हुए मैंने आगे बढ़कर रेकॉर्डिंग शुरू कर दी। लक्ष्मी आंटी अपनी आखरी virginity खोने के बाद वैसे ही bed पर पड़ी गहरी सांसे ले रही थी। मेरी मेहनत का नतीजा अब एक गाढ़े cream के जैसे उसके बंद न हो रहे छेद से छलक आया था।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पिछे से पकड़ कर कुंडली मार दी। लक्ष्मी आंटी के दहिने पैर को अपने घुटनों पर ले, विक्की की उंगलियां लक्ष्मी आंटी की चूत कि पंखुड़ियों को फैलाकर उनके उपर छिपे हुए दाने को छेड़ने लगी। लक्ष्मी आंटी को हम दोनों ने ठंडा होने का मौका दिया ही नहीं था। कुछ ही पलों में लक्ष्मी आंटी आहें भरने लगी। लक्ष्मी आंटी ने अपने आप कमर हिलाना शुरू कर दिया तो विक्की ने मेरा गाढ़ा cream अपने लौड़े पर उठाया। लक्ष्मी आंटी ने विक्की का सुपारा अपनी गांड़ के छेद में घुसता पाया तो उन्हहह… की एक मजेदार आह भरी।
विक्की अब रूकने वाला नहीं था। उसने अपने मूसल को पूरी तरह लक्ष्मी आंटी की गांड़ में पेल दिया। लक्ष्मी आंटी की गांड़ और फट गई और लक्ष्मी आंटी तड़पकर कराहने लगी। विक्की ने अपना लौड़ा सुपाड़े तक लक्ष्मी आंटी की गांड़ में से बाहर खींच लिया और फिर से जम कर ठोक दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपने भविष्य को समझते हुए विक्की का साथ देने लगी। विक्की को मेरे cream से काफी मदत मिली। विक्की के तेज वार बिना ज्यादा छिले लक्ष्मी आंटी की गांड़ फैला रहे थे और लक्ष्मी आंटी की गांड़ के चारों ओर सफेद गुलाबी झाग जमा हो गया था। लक्ष्मी आंटी भी अपनी कमर को आगे पीछे कर विक्की का पूरा लौड़ा अपनी गांड़ में ले रही थी। 5 मिनट तक ऐसे ही लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारने के बाद जब विक्की ने अपना लौड़ा बाहर खिंच लिया। लक्ष्मी आंटी ने किसी बच्चे से lollypop खिंच लिए जाने पर कि जाने वाले आवाज से विरोध किया।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर उठाया कि लक्ष्मी आंटी की गांड़ छत की ओर इशारा करती दिख रही थी। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथों से कुत्तों के जैसे खड़े न होकर उलटा अपनी गांड़ के छेद को चौड़ा करके विक्की को बुलावा दिया। लक्ष्मी आंटी के इस बुलावे को नजर अंदाज करना हम दोनों के लिए मुमकिन नहीं था।
विक्की ने अपना सुपाड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ में पेल दिया तो आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ मरवाना शुरु कर दिया।
विक्की भी उसे पूरा मज़ा लेकर चोदने लगा। लक्ष्मी आंटी की आहों से पूरा घर गूंज उठा। इसी pose में लक्ष्मी आंटी न जाने कितनी बार झड़ गई पर विक्की ने बिना रूके उसकी गीली गांड़ मारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इन दिनों के कारनामे देख मैं फिर से खड़ा होने लगा। लक्ष्मी आंटी को इस तरह से 10 मिनट तक पेलने के बाद विक्की ने अपना लौड़ा जड़ तक लक्ष्मी आंटी की गांड़ में दबा दिया। लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर उसे अपने शरीर के ऊपर लिटा दिया। अब लक्ष्मी आंटी को खुली छूट थी कि वह उठ कर भागे या फिर अपनी गांड़ में दबे मूसल को प्यार करे।
पर लक्ष्मी आंटी ने चाव से अपनी गांड़ मरवाते हुए आहें भरी। मैं इस पूरे खेल को record करते हुए लक्ष्मी आंटी की कामुकता को कैद कर रहा था। 5 मिनट तक लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ मरवाते हुए विक्की को ऐसे निचोड़ा की विक्की ने करहाते हुए लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना रस छोड़ा। लक्ष्मी आंटी भी अपनी गांड़ में विक्की का पूरा लौड़ा लेकर उस पर पड़ी थी।
कुदरत किसके काबू में होती है? पकक… की आवाज से विक्की का लौड़ा बाहर निकाला और लक्ष्मी आंटी की गांड़ में से वीर्य की पिचकारी छूट नीचे चादर पर गिरी। लक्ष्मी आंटी बगल में लेट गई तो विक्की ने उठकर लक्ष्मी आंटी की गांड़ पर एक छोटा थप्पड़ जड़ा दिया। जैसे विक्की बेड से उतरा तो लक्ष्मी आंटी को कुछ होश आया।
“तो लक्ष्मी आंटी, कैसे लगा तेरे यारों का प्यार? तू तो ऐसे झड़ रही थी कि हमें लगा तेरा झडना रुकेगा ही नहीं।”
लक्ष्मी आंटी “अगर तुम मिठाई खाओ या कोई और तुम्हारे मुंह में मिठाई ठूस दे फिर भी मिठाई मीठी ही होती है। काश मैं तुम दोनों का भी वही हाल कर पाती जो तुम दोनों ने मेरा किया है।”
विक्की “लक्ष्मी आंटी, शुक्र मना की माली चाचा को पहले ही भगा दिया है वरना अभी वह और गांड़ फाड़ रहा होता।”
लक्ष्मी आंटी “हां हां, हंस लो। सारे मर्द एक जैसे होते हैं। एक बेबस लड़की मिली तो शिकारी कुत्तों की तरह टूट पड़ते हैं।”
“ठीक है लक्ष्मी आंटी। इस बार तुम्हें भी एक मौका मिलेगा। कल रात के कपड़े हमारे लिए यादगार निशानियां हैं। आज के कपड़े बाहर निकाल कर रखे हैं। क्यों ना तुम वोह पेहन के नीचे आ जाती? तुम्हें मौका कैसे देना हैं वह सोचेंगे।”
सुबह के 6 बज गए थे तो हम दोनों नीचे चाय बनाने चले गए। लक्ष्मी आंटी ने bed पर रखे कपड़े देखे।
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सन्नी
विक्की ने छोड़ा हुआ कैमरा उठाते हुए मैंने आगे बढ़कर रेकॉर्डिंग शुरू कर दी। लक्ष्मी आंटी अपनी आखरी virginity खोने के बाद वैसे ही bed पर पड़ी गहरी सांसे ले रही थी। मेरी मेहनत का नतीजा अब एक गाढ़े cream के जैसे उसके बंद न हो रहे छेद से छलक आया था।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पिछे से पकड़ कर कुंडली मार दी। लक्ष्मी आंटी के दहिने पैर को अपने घुटनों पर ले, विक्की की उंगलियां लक्ष्मी आंटी की चूत कि पंखुड़ियों को फैलाकर उनके उपर छिपे हुए दाने को छेड़ने लगी। लक्ष्मी आंटी को हम दोनों ने ठंडा होने का मौका दिया ही नहीं था। कुछ ही पलों में लक्ष्मी आंटी आहें भरने लगी। लक्ष्मी आंटी ने अपने आप कमर हिलाना शुरू कर दिया तो विक्की ने मेरा गाढ़ा cream अपने लौड़े पर उठाया। लक्ष्मी आंटी ने विक्की का सुपारा अपनी गांड़ के छेद में घुसता पाया तो उन्हहह… की एक मजेदार आह भरी।
विक्की अब रूकने वाला नहीं था। उसने अपने मूसल को पूरी तरह लक्ष्मी आंटी की गांड़ में पेल दिया। लक्ष्मी आंटी की गांड़ और फट गई और लक्ष्मी आंटी तड़पकर कराहने लगी। विक्की ने अपना लौड़ा सुपाड़े तक लक्ष्मी आंटी की गांड़ में से बाहर खींच लिया और फिर से जम कर ठोक दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपने भविष्य को समझते हुए विक्की का साथ देने लगी। विक्की को मेरे cream से काफी मदत मिली। विक्की के तेज वार बिना ज्यादा छिले लक्ष्मी आंटी की गांड़ फैला रहे थे और लक्ष्मी आंटी की गांड़ के चारों ओर सफेद गुलाबी झाग जमा हो गया था। लक्ष्मी आंटी भी अपनी कमर को आगे पीछे कर विक्की का पूरा लौड़ा अपनी गांड़ में ले रही थी। 5 मिनट तक ऐसे ही लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारने के बाद जब विक्की ने अपना लौड़ा बाहर खिंच लिया। लक्ष्मी आंटी ने किसी बच्चे से lollypop खिंच लिए जाने पर कि जाने वाले आवाज से विरोध किया।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर उठाया कि लक्ष्मी आंटी की गांड़ छत की ओर इशारा करती दिख रही थी। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथों से कुत्तों के जैसे खड़े न होकर उलटा अपनी गांड़ के छेद को चौड़ा करके विक्की को बुलावा दिया। लक्ष्मी आंटी के इस बुलावे को नजर अंदाज करना हम दोनों के लिए मुमकिन नहीं था।
विक्की ने अपना सुपाड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ में पेल दिया तो आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ मरवाना शुरु कर दिया।
विक्की भी उसे पूरा मज़ा लेकर चोदने लगा। लक्ष्मी आंटी की आहों से पूरा घर गूंज उठा। इसी pose में लक्ष्मी आंटी न जाने कितनी बार झड़ गई पर विक्की ने बिना रूके उसकी गीली गांड़ मारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इन दिनों के कारनामे देख मैं फिर से खड़ा होने लगा। लक्ष्मी आंटी को इस तरह से 10 मिनट तक पेलने के बाद विक्की ने अपना लौड़ा जड़ तक लक्ष्मी आंटी की गांड़ में दबा दिया। लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर उसे अपने शरीर के ऊपर लिटा दिया। अब लक्ष्मी आंटी को खुली छूट थी कि वह उठ कर भागे या फिर अपनी गांड़ में दबे मूसल को प्यार करे।
पर लक्ष्मी आंटी ने चाव से अपनी गांड़ मरवाते हुए आहें भरी। मैं इस पूरे खेल को record करते हुए लक्ष्मी आंटी की कामुकता को कैद कर रहा था। 5 मिनट तक लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ मरवाते हुए विक्की को ऐसे निचोड़ा की विक्की ने करहाते हुए लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना रस छोड़ा। लक्ष्मी आंटी भी अपनी गांड़ में विक्की का पूरा लौड़ा लेकर उस पर पड़ी थी।
कुदरत किसके काबू में होती है? पकक… की आवाज से विक्की का लौड़ा बाहर निकाला और लक्ष्मी आंटी की गांड़ में से वीर्य की पिचकारी छूट नीचे चादर पर गिरी। लक्ष्मी आंटी बगल में लेट गई तो विक्की ने उठकर लक्ष्मी आंटी की गांड़ पर एक छोटा थप्पड़ जड़ा दिया। जैसे विक्की बेड से उतरा तो लक्ष्मी आंटी को कुछ होश आया।
“तो लक्ष्मी आंटी, कैसे लगा तेरे यारों का प्यार? तू तो ऐसे झड़ रही थी कि हमें लगा तेरा झडना रुकेगा ही नहीं।”
लक्ष्मी आंटी “अगर तुम मिठाई खाओ या कोई और तुम्हारे मुंह में मिठाई ठूस दे फिर भी मिठाई मीठी ही होती है। काश मैं तुम दोनों का भी वही हाल कर पाती जो तुम दोनों ने मेरा किया है।”
विक्की “लक्ष्मी आंटी, शुक्र मना की माली चाचा को पहले ही भगा दिया है वरना अभी वह और गांड़ फाड़ रहा होता।”
लक्ष्मी आंटी “हां हां, हंस लो। सारे मर्द एक जैसे होते हैं। एक बेबस लड़की मिली तो शिकारी कुत्तों की तरह टूट पड़ते हैं।”
“ठीक है लक्ष्मी आंटी। इस बार तुम्हें भी एक मौका मिलेगा। कल रात के कपड़े हमारे लिए यादगार निशानियां हैं। आज के कपड़े बाहर निकाल कर रखे हैं। क्यों ना तुम वोह पेहन के नीचे आ जाती? तुम्हें मौका कैसे देना हैं वह सोचेंगे।”
सुबह के 6 बज गए थे तो हम दोनों नीचे चाय बनाने चले गए। लक्ष्मी आंटी ने bed पर रखे कपड़े देखे।
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