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Adultery बुरी फसी नौकरानी लक्ष्मी

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46

सन्नी

लक्ष्मी आंटी की चुलबुली जवानी तो खुद कामदेव को बलात्कारी बना देती, मैं तो सिर्फ जवान था। जिस तरह लक्ष्मी आंटी ने न केवल हमारे पैसे बचाए बल्कि रात को दो कमरों के बीच छुपना भी नहीं पड़ेगा।

कमरे का दरवाज़ा बंद होते ही लक्ष्मी आंटी ने नटखट मुस्कान देते हुए कहा,

"कैसी रही?"

मैंने लक्ष्मी आंटी को सीधे अपनी बाहों में लेते हुए बेड पर पटक दिया और उसके ऊपर लेट गया। लक्ष्मी आंटी ने तुरंत अपने हाथ मेरे गले में डाल कर मुझे अपनी ओर खींचा। लक्ष्मी आंटी के होटों को चूमते ही दिमाग के बाकी हिस्सों ने काम करना बन्द कर दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी नाज़ुक उंगलियों से मेरे बाल पकड़ लिए तो मैंने लक्ष्मी आंटी की लेगिंग्स को खींच कर उतारने लगा। लक्ष्मी आंटी ने पिछले एक साल में elastic band वाली लेगिंग्स पहनना जरूरी समझा था क्योंकि हम दोनों उसकी कई सलवार के नाड़े तोड़ चुके थे। लक्ष्मी आंटी की लेगिंग्स और पैंटी को नीचे घुटनों तक उतार कर मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर को भी अपने घुटनों तक उतारा।

मेरा तपा लौड़ा लक्ष्मी आंटी की पनियाई बुर से टकराया तो लक्ष्मी आंटी सिहर उठी। मैंने लक्ष्मी आंटी की गीली बुर में एक जोर का धक्का दिया और अपना पूरा झंडा गाड़ दिया।

लक्ष्मी आंटी, "मां… आह… हां… सन्नी बाबू… शैतान… चोदो…"

लक्ष्मी आंटी को आज सुबह से चोदा नहीं था और मैं बहुत उतावला हो गया था। मैंने लक्ष्मी आंटी के कंधों को पकड़ा और उसके गाल को चूम कर उसके कानों में अपनी खुशी बताते हुए अपनी हवस की आग को बुझाने में जुट गया। लक्ष्मी आंटी भी शायद सुबह से चुदाने के लिए उतावली थी और उसके बाहों ने मुझे जकड़ लिया और वह झडने लगी।

लक्ष्मी आंटी की चूत में बढ़े गरमी, कसाव और रस की अनुभूति ने मुझे चरम सुख के पार कर दिया और अपना गाढ़ा घोल लक्ष्मी आंटी की सुनी कोख में भर कर मैं निढाल हो गया।

अब मेरा दिमाग काम करने लगा और मुझे विक्की की याद आई। मै लक्ष्मी आंटी के उपर से हट गया और देखा तो विक्की बगल में sofa bed पर बैठा अपना सामान मल रहा है। मेरे हटते ही विक्की उठा और हमारी ओर बढ़ा।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी के घुटनों को लेगिंग्स के साथ पकड़ कर लक्ष्मी आंटी को बेड से आधा नीचे खींचा। लक्ष्मी आंटी की गीली बुर अब बेड के किनारे पर लग हमारे रस टपका रही थी। मैंने बेड पर ठीक से बैठते हुए विक्की की मुद्रा को देखा।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी के घुटनों में फंसी लेगिंग्स और पैंटी को अपने गले के पीछे फंसाकर उठाया तो लेगिंग्स थोड़ी और उतरी पर साथ ही लक्ष्मी आंटी की गेंद भी बेड से उठ गई।

लक्ष्मी आंटी ने सुस्ताई मादक मुस्कान से विक्की का स्वागत किया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गीली बुर के छेद पर अपना मोटा लौड़ा रगड़ कर उसके टोपे को मेरे गाढ़े वीर्य से पोत लेते हुए मेरा वीर्य लक्ष्मी आंटी की खुली चूत में फिर से भरा।

लक्ष्मी आंटी की भरी हुई चूत अब ऐसे उठी थी कि वह बिना छलके मेरा वीर्य संजो कर रही थी। विक्की के पंजों ने लक्ष्मी आंटी के गोल मटोल गांड़ के गोलों को कस कर पकड़ लिया और उनके बीच में छिपे हुए छेद को चौड़ा किया। विक्की का इरादा पहचान कर लक्ष्मी आंटी ने कहा,

"रुक जाओ विक्की बाबू! आप का बहुत मोटा… आ… आह… हा… हा… उन्ह…"

विक्की बोल पड़ा, "अरे लक्ष्मी आंटी, सन्नी से चुदा चुदा कर मुझे तडपाने के बाद मैंने आसानी से छोड़ दिया तो मुझ पर शक करना बनता है। अब तक तो समझ लेना चाहिए था कि तेरा दूसरा आशिक हमेशा बेरेहम होता है।"

विक्की ने मेरे वीर्य से चिकना अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ से सुपाड़े की गीली चोंच तक बाहर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी को एक हवस भरी कातिलाना मुस्कान देते हुए विक्की ने लक्ष्मी आंटी की खुली गांड़ एक धक्के में पूरी तरह पेल दी। लक्ष्मी आंटी ने अगर पिछले एक साल में हम दोनों से कुछ सीखा था तो वो था कि जब भी गांड़ मारी जाए तो उसका मज़ा उठाया जाए।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी के घुटनों को अपने गले में लटका कर उसकी गांड़ फैला कर मारी। लक्ष्मी आंटी ने भी उसे साथ देते हुए अपनी गांड़ से विक्की के लौड़े को निचोड़ते हुए अपनी लंबी उंगलियों से अपनी चूत पर रखे यौन सुख के मणि को सहलाते हुए अपनी काम ज्योति को भड़काकर विक्की के बदन में आग लगा दी। विक्की बेचारा सुबह से भूका, मेरे कारण पहले से तपा लौड़ा रगड़ बैठा कितनी देर लक्ष्मी आंटी की अनुभवी प्रेम क्रीड़ा को सेहेता?

विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ को एक गहरे धक्के से पेलते हुए अपनी काम अग्नि समर्पित कर दी। विक्की पीछे सरक कर सोफ़ा बेड पर मेरे बगल में बैठ गया और हम दोनों लक्ष्मी आंटी का अद्भुत रूप निहारते रहे।

लक्ष्मी आंटी के पैर सलवार में बंधे हुए थे पर घुटने फैल कर लक्ष्मी आंटी की खुली चूत और गांड़ में से बहती हमारी गंगा जमुना की धाराओं का संगम होते दिखा रहे थे।

लक्ष्मी आंटी ने उठकर अपने कपड़े उतारे और satin की camisole और शॉर्ट्स पहन कर सोफे पर बैठ गई।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू वो मैनेजर यहां तांक झांक करने के लिए उतावला हो रहा होगा। जल्दी से खाना मंगवा लो और बताती हूं वैसा करो।"

मैनेजर खुद खाना ले आया तब मैं और विक्की बेड पर बैठ कर वीडियो game खेल रहे थे तो लक्ष्मी आंटी सोफ़ा बेड पर बैठ अपना एक पैर बेड के हाथ पर रख पैरों में nail polish लगा रही थी। Camisole में जैसे तैसे सिमटती चूचियां घुटने से दब कर विद्रोह कर बाहर आने की कोशिश कर रही थीं। शॉर्ट्स पहने होने के कारण लक्ष्मी आंटी की मनमोहक काया का बिना अश्लीलता के दर्शन हो रहा था। लक्ष्मी आंटी गाना गुनगुना रही थी,

"aai main to aai nazaro ke

anjane ek jahan se

layi main to layi bahaaro ke

afsaane bhi waha se

na na mujhe chhuna na door rakhna

pari hun main

aye koi meri panaho le jaye ye nazare

dekhe koi meri nigaaho me pahchane ye ishaare

na na mujhe chhuna na door hi rakhna

pari hun main

pari hun main, mujhe na chhuna

pari hun main…"

मैनेजर ने हमारे लिए खाना परोसा तो लक्ष्मी आंटी हाथ धोने भागी।

मैनेजर (दबी आवाज में), "मैं समझ सकता हूं कि आप दोनों पर क्या गुजर रही होगी। मैं होता तो नजदीक के बार से शराब ला कर थोड़ी खुद पिता बाकी सब (बाथरूम की ओर देखते हुए) दूसरों को पिलाता। सुबह सर पकड़ कर सब शराब के नाम बोल देता। अफसोस मैं ऐसा करने की सलाह नहीं दे सकता।"

"बात हमारे घर तक की है और इसीलिए हमें ये अफसोस नजाने कब से है।"

मैनेजर अफसोस का भाव चेहरे पर रख चला गया और लक्ष्मी आंटी के बाहर आते ही हम सब कमरे का दरवाजा बंद करके हंसने लगे।

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विक्की

खाना खाने के बाद हम ने plates भिजवा दिए और वहीं नीचे टहलने लगे। मैनेजर को आंखे दिखाकर लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों के बीच में आते हुए हमारे हाथ पकड़ लिए और हम सब बाहर गए।

"लक्ष्मी आंटी, उस मैनेजर को इतना भी मत डांटो। बेचारा अपना काम कर रहा है।"

लक्ष्मी आंटी, "बाबू आप दोनों को बड़ी बड़ी बातें समझ आती हैं पर मैं इंसान पहचानती हूं। ये कामिना आप को 3 कमरे लेने पर मजबुर करता और मालिक को 1 कमर दिखाकर बीच में खुद मलाई खाता। अगर मेरे साथ आप दोनों में से एक का नाम लिखवाते, तो जरूर बाद में फोन कर के ब्लैकमेल करने की कोशिश जरूर करता।"

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाते हुए कहा, "तो लक्ष्मी आंटी, आज रात को चुप चाप सो जाना पड़ेगा?"

लक्ष्मी आंटी ने नटखट मुस्कान देते हुए कहा, "बस आप दोनों मुझे इतना तंग मत करना की मेरी चीख निकल आए।"

हम सब ने हंसते हुए वापस होटल को रस्ता पकड़ा। मैंने होटल मैनेजर से बात की और सुबह जल्दी नाश्ता तयार रखने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने मेरी बात सुन कर पूछा,

"बाबू, यहां तो छुट्टी पर आए हैं। तो आप को जल्दी क्यों उठना है? सो जाओ 1 दिन आराम से!"

"अरे लक्ष्मी आंटी, कल सुबह से बहुत बड़ा प्लान तैयार किया है। शाम होने तक पूरा हो जाए तो भी काफी।"

लक्ष्मी आंटी ने झूठे गुस्से में कहा, "आप प्लान मुझ से छुपाकर मुझे परेशान कर रहे हो।" और अपनी कमर मटकाती हुई कमरे में चली गई। तीन जोड़ी मर्दानी आंखें फिर मिली तो सन्नी ने बड़े भारी मन से कहा,

"चल हम भी सो जाते हैं। कल बहुत घूमना है।"

हम दोनों कमरे में दाखिल हुए तो लक्ष्मी आंटी बेड के बीच में सर तक चादर ओढ़े लेटी हुई थी। सन्नी ने दरवाजा बंद करके लॉक किया और बेड कि ओर बढ़ा।

लक्ष्मी आंटी ने हमें रोकते हुए कहा, "रुको! ये हमारे लिए नया बेड है। इसके साथ अच्छी यादें बनाना हमारा फ़र्ज़ बनता है।"

मुझे शक हुए और मैंने लक्ष्मी आंटी के पैरों पर से चादर को नीचे खींचा।

लक्ष्मी आंटी के बाल तकिए पर फैले हुए थे तो लक्ष्मी आंटी की आंखे शरारत से चमक रही थी। लक्ष्मी आंटी के कंधे खुले थे और उन पर camisole के पट्टे नहीं थे। चादर और नीचे खींचने पर लक्ष्मी आंटी के नंगी चूचियों पर जडी लाल बेरियों के ललचाते दर्शन हुए। लक्ष्मी आंटी ने मेरे सर पर अपना camisole फेंका और अपनी बाहों को खोल कर अपने खूबसूरत बदन को दिखाया। सन्नी ने मेरे हाथ में से चादर को खींच लिया और तेजी से नीचे खींचने लगा। लक्ष्मी आंटी के कसे हुए पेट के बीच में बने नाभि के कुंवे की गहराई साफ झलक रही थी। लक्ष्मी आंटी का बदन चादर के नीचे से खुलता गया और उसकी साफ गुप्तांग को पैरों के बीच दबाकर छुपाया देख हमारी हवस की आग और भड़क उठी। तभी लक्ष्मी आंटी ने अपने पैरों को फैला कर घुटनों को मोड़ते हुए उठाया।

लक्ष्मी आंटी की बुर बुरी तरह से पनिया रही थी और उसके चादर पर टपकते काम उत्तजना के आंसू हमसे देखे नहीं गए। लक्ष्मी आंटी के इस चाल का मतलब समझते हुए हम दोनों ने अपने कपड़े उतार फेंके और लक्ष्मी आंटी पर कूद पड़े।

सन्नी, "लक्ष्मी आंटी, चाहे जो हो जाए पर चिल्लाना मत।"

अपना ही इशारा खुद को मिलने से लक्ष्मी आंटी चौंक गई। सन्नी ने अपने घुटनों को लक्ष्मी आंटी के फैले हाथों पर ऐसे रख दिया कि लक्ष्मी आंटी अपने हाथ बिना किसी तकलीफ के रख सकती थी और कोहनी से मोड़ सकती थी पर हाथ मिटा नहीं पाती। सन्नी का लंबा भाला लक्ष्मी आंटी के होठों को चूम रहा था तो लक्ष्मी आंटी ने अपनी जीभ से सन्नी के सुपाड़े को चाटते हुए अपनी होठों को सुपाड़े के ऊपर लगी खुली त्वचा पर लगाते हुए चूमने लगी। सन्नी ने बेड के सिरहाने को पकड़ बिना आवाज किए लक्ष्मी आंटी के अत्याचार को सहना शुरू किया।

अपने मित्र को बचाने के परम कर्तव्य के कारण मैंने लक्ष्मी आंटी के पैरों के बीच जा कर उसके पैर अपने कंधों पर रख दिए। मेरी नाक में लक्ष्मी आंटी की जवानी की मादक खुशबू चलने लगी तो लक्ष्मी आंटी को अपनी हार का अंदाजा हो गया। लक्ष्मी आंटी ने मुझे रोकने के लिए अपने पैरों को बन्द करने की कोशिश की पर मेरा सर बीच में पकड़ा गया और वह अपने हाथों से सन्नी को हटाने की कोशिश करने लगी।

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ लिए और उसे अपने लौड़े को ज्यादा गहराई तक चूसने से रोका। मैंने अपनी जीभ से थुंकी की एक बूंद को लक्ष्मी आंटी के यौन मणि पर टपका दिया और फिर अपनी जीभ की नोक से उस बूंद को मणि पर मालिश करने के लिए इसतेमाल करने लगा। लक्ष्मी आंटी की बुर में सैलाब उमड़ पड़ा और काम रस की धारा बह उठी। लक्ष्मी आंटी ने अपनी पूरी उत्तेजना को सन्नी के सुपाड़े पर लगाया तो वह बेचारा कराहने लगा। मैंने अपने दोस्त को मिलती यातना को वापस देने की ठान ली और

लक्ष्मी आंटी के यौन मणि ने उत्तेजित हो कर त्वचा से बना अपना घर छोड़ दिया था और बाहर आ कर मेरी जीभ के हमले का सामना कर रहा था। मैंने अपने होठों को उस मणि के इर्द गिर्द बनी त्वचा पर रखते हुए जोर दिया और मणि को ज्यादा बाहर निकाला। अब अपने होटों को उस त्वचा से लगाकर अपनी जीभ से मणि को छेड़ते हुए चूमने लगा।

चूमने से मणि की उत्तेजना बढ़ी और होठों से मणि का पूरा आकार मेरे जीभ की पहुंच में था। लक्ष्मी आंटी की उत्तेजना ऐसे बढ़ी की उसका शरीर कांपने लगा और लक्ष्मी आंटी की चूत में से फव्वारे फुट पड़े। लक्ष्मी आंटी की चीखें सन्नी के सुपाड़े से होती हुई उसके अंडकोष तक पहुंची।

सन्नी बुदबुदाने लगा, "विक्की की गांड़! काले भैंसे की गोबर लगी गांड़! मोटे बूढ़े प्रोफेसर राव की ढीली पतलून!…"

सन्नी ने बड़े संयम से अपने स्खलन को रोका और लक्ष्मी आंटी बेड पर बेहोश हो गई। मैंने सन्नी की मदद करते हुए अपनी जगह उसे दे दी। लक्ष्मी आंटी की आज खैर नहीं थी!!

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सन्नी

मैंने विक्की के साथ 2 बार जगह बदली और लक्ष्मी आंटी से कभी चुसाया तो कभी चूसकर चाटा। जब दूसरी बार मेरा लौड़ा बड़ी मुश्किल से रोक कर लक्ष्मी आंटी के रसीले होंठों से दूर किया तो और सेह पाना ना मुमकिन था। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के मुंह में अपना मूसल ढ़क्कन की तरह लगा दिया और मैंने लक्ष्मी आंटी के बाएं मम्मे को दबाते हुए उस पर जड़ी बेरी को अपने होठों में कस कर पकड़ लिया।

लक्ष्मी आंटी चुध चूध कर बेसुध हो गई थी। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूची को चूसा तो वह बस "ऊंह!" कर पड़ी रही। मैंने लक्ष्मी आंटी की बहती यौन गंगोत्री को उसके भक्त की चोंच से स्पर्श किया तो लक्ष्मी आंटी को कुछ होश आया। मेरे सुपाड़े ने बिना किसी तकलीफ के एक साफ धक्के में अपने आप को लक्ष्मी आंटी की गहराई में गाड़ दिया।

लक्ष्मी आंटी, "अंह… हां… आंह… "

मैंने अपने लौड़े को सुपाड़े तक बाहर खींच लिया और 1 पल के लिए वैसे ही रुक गया। लक्ष्मी आंटी ने सिसकते हुए अपनी कमर उठाते हुए अपनी टांगों से मुझे पकड़ने की कोशिश की।

लक्ष्मी आंटी, "अन्ह… उम्म… उम्… "

मेरे धीरज की हालत धागे से टंगे पर्वत की तरह थी और धागा तो टूटना था। मैंने लक्ष्मी आंटी की गीली चूत के मज़े लेने के लिए अपने लौड़े को खुली छूट दे दी। लक्ष्मी आंटी के दूधिया गोले मेरे हर धक्के से हिचकोले खा रहे थे। लक्ष्मी आंटी ने अपनी पूरी ताकत से विक्की का लौड़ा चूसना शुरू किया। मैंने लक्ष्मी आंटी के यौन कूंवे से उड़ते गरम पानी के फव्वारों की मधुरता में खुद को भुलाकर उससे एक हो गया। लक्ष्मी आंटी अब तेज झड़ते हुए मानो एक बहुत लंबे स्खलन की शिकार हो गई। लक्ष्मी आंटी की झडती चूत में मेरा लौड़ा ऐसे निचोड़ लिया गया कि मैं अपनी एक एक बूंद उसकी कोख में उड़ेलकर ही रुका।

विक्की ने मुझे रुकने के बाद सुस्ताने का मौका नहीं दिया। मैंने अपने लौड़े को बाहर खींच लेते ही विक्की ने लक्ष्मी आंटी के अंदर मेरी जगह ले ली। लक्ष्मी आंटी को झडने से कोई राहत नहीं मिले यह जैसे विक्की ने ठान लिया था।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी की तेज रफ्तार से ठुकाई करते हुए उसकी कोख में मेरा वीर्य पेल कर भर दिया। बचा कुचा जो रस अंदर रह नहीं पाया वह झाग बन कर लक्ष्मी आंटी की गीली चूत की शोभा बढ़ाने लगा। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को कस कर पकड़ लिया और अपने लौड़े को जड़ तक घुसा दिया।

लक्ष्मी आंटी की आहें विक्की की आह में मिल गई और दोनों ढेर हो गए। रात के 10 बजने से पहले ही हम सब थक कर चूर होकर एक दूसरे की बाहों में सो गए।

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विक्की

मैनेजर ने तय समय पर सुबह 5 बजे फोन कर हमें उठाया। मैंने सन्नी को उठाया पर लक्ष्मी आंटी पहले ही उठ चुकी थी और टॉयलेट की बत्ती जल रही थी।

"नशेड़ी को नशा और लक्ष्मी आंटी को पढ़ाई से दूर रखना मुश्किल है।"

लक्ष्मी आंटी ने मुस्कुरा कर अपनी कॉपी बन्द करके कहा, "टीचर ने कहा है कि अगर मैं जल्दी से सब सीख लूं तो एक साल में मेरी डिग्री पूरी हो जाएगी। कल रात आप दोनों ने मुझे ऐसे थका दिया कि सुबह जल्दी आंख खुली। मैं आप दोनों को सोने को मिले इस लिए यहां बैठ गई।"

सन्नी ने मुंह धोते हुए कहा, "हमने बताया वैसे लक्ष्मी आंटी ने कोई कपड़े नहीं लिए पर अपनी कॉपी लेना नहीं भूली।"

हम दोनों ने वहीं अपने कपड़े उतारे और शॉवर में नहाने लगे।

लक्ष्मी आंटी, "वो सब छोड़ो। बाबू आप दोनों इतनी जल्दी क्यों उठ गए? अभी तो सूरज भी नहीं उगा!"

"यही सही वक़्त है यहां से निकलने का। मैनेजर ने चाय और नाश्ता तयार किया है। बेड पर तुम्हारे लिए नए कपड़े रखे हैं। जल्दी से निकलना है, तो कपड़े पहन कर नीचे आ जाओ।"

इतना कह कर हम चकराई लक्ष्मी आंटी को छोड़ बाहर आ गए और कपड़े पहन कर बैग भर दी। लक्ष्मी आंटी नहाकर बाहर आने से पहले ही हम सामान गाड़ी में रखने ले जा चुके थे।

लक्ष्मी आंटी ने लाउंज में अपने कदम रखने की खबर हमें मैनेजर के चेहरे से हुई। मैनेजर ने झट से अपने हाथ में से चाय का tray मेज पर रखा और सूखे गले के लिए पानी गटक लिया।

लक्ष्मी आंटी हमारे पीछे से इठलाते हुए आई और हमें पीछे से एक साथ गले लगते हुए कहा,

"पता नहीं था कि कल रात मैं इतना थक गई थी। ऐसे सोई की अब नींद खुली। मैनेजर साहब आप का होटल मुझे बहुत पसंद आया। आप दोनों ये मत समझो कि मैं गांव से हूं तो गंवार हूं। मैं खूब जानती हूं कि बेड पर क्या बू आ रही थी। अगर मेरे होते हुए ऐसा दोबारा किया तो आप दोनों की शिकायत कर दूंगी।"

हम सब नाश्ता कर के जल्द ही गाड़ी में बैठ गए और गाड़ी निकल पड़ी। लक्ष्मी आंटी किसी बच्ची की तरह उतावली हो रही थी कि हम सब कहां जा रहे हैं? इतनी जल्दी से क्यों निकले? कब तक पहुंचेंगे? आधे घंटे बाद हम ने अपनी गाड़ी एक गांव की ओर मोडी और गाड़ी खुली जगह पर पार्क की। लक्ष्मी आंटी ने गाड़ी से बाहर दौड़ कर इर्द गिर्द देखा।

लक्ष्मी आंटी, "यहां पर कुछ नहीं दिख रहा! बस ये गांव का मंदिर और वो पहाड़।"

"अगर मैं ये कहूं कि इस मंदिर में मांगी हर बात मिल जाती है तो?"

लक्ष्मी आंटी, "बाबू आप दोनों के हाथ लगने के बाद मेरी सारी इच्छाएं पूरी हो गई है। और ज्यादा मांग कर लालची क्यों बनूं?"

सन्नी, "हाय लक्ष्मी आंटी! ऐसा कह कर तो तुमने हमें धर्म संकट में डाल दिया! ऐसे इंसान को क्या दें किसके पास सब कुछ है।"

"लक्ष्मी आंटी, कपड़ों से तो समझ गई होगी कि मंदिर नहीं जाने वाले। तो चलो सूरज बढ़ने से पहले पहाड़ चधते हैं।"

पहाड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां बनी हुई थी और हम सब खेल खेल में चढ़ने लगे। थोड़ी ही देर में लक्ष्मी आंटी ने साबित कर दिया कि वह अब भी किसी पहाड़ी घोड़ी की तरह अपनी लंबी टांगों से कोई भी चढ़ाई पार कर सकती है। लेकिन हम दोनों शहरी अड़ियल टट्टू निकले जो रोज दिन में तीन बार लक्ष्मी आंटी की चढ़ाई कर झंडा गाड़ने के बाद भी आधे रास्ते में हांफने लगे।

लक्ष्मी आंटी, "हा! हा! हा! बड़े आए मुझे चौंकाने वाले! लगता है कि आप दोनों का पासा उल्टा पड़ गया! वैसे ये किला है ना? इसका नाम क्या है? ये इतना सुनसान क्यों है? यहां कोई आता जाता नहीं क्या?"

"हुफ… बताता हूं लक्ष्मी आंटी, बताता हूं। इस किले का नाम लोहगड है और यह एक जाना माना tourist spot है। पर आज गुरुवार की सुबह लोग बहुत कम आयेंगे। शनिवार रविवार को यहां भीड़ होती है। हम लगभग पहुंच गए हैं। उपर बैठ कर बात करते हैं।"

लक्ष्मी आंटी, "जो पहले पहुंचा वो राजा!!"

लक्ष्मी आंटी अपनी लंबी टांगों से सीढियों को पार करते हुए भाग गई।

सन्नी, "तुझे लगता है यहां हमें कोई पकड़ेगा?"

"पता लगाने का एक ही तरीका है। जो पहले पहुंचा वो राजा!!"

हम दोनों लक्ष्मी आंटी के पीछे भागने लगे।

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सन्नी

लक्ष्मी आंटी ने अपनी लंबी टांगों के लुभावने दर्शन करते हुए किले की रानी का पद जीता तो हम दोनों एक साथ पहुंचने के कारण राजा न बनते हुए सिपहसालार बने। किले के विशाल दरवाजे के अंदर एक छोटा सा नया कमरा बना था जहां से हमें टिकट लेनी पड़ी। रानी साहिबा ने बड़े शान से हम तीनों की टिकट खरीदी और हम अंदर गए।

लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों के हाथों में अपने हाथ डाले और हम सब किला देखने लगे। लोहगड़ देखने का सही मौसम सर्दी या बरसात का होता है उसमें भी हम गुरुवार की सुबह वहां पहुंचे थे। पूरा किला मानो अतीत की स्मृतियां केवल हमारे लिए दिखा रहा था। सुबह होटल से नाश्ता करके निकले थे इसलिए हम सुबह 6 बजे लोहगढ़ के नीचे पहुंचे थे। उपर चढ ने में और 1 घंटा लगा तो हम सब किले में 7 के थोड़ी देर बाद पहुंचे। सूरज अभी उगा था और किले की सरद हवाओं में सूरज की किरणों की गरमी एक सुखद अनुभव था। किले के चार बड़े दरवाजे पार कर अंदर घूमने लगे। धान के पुराने गोदाम के आगे एक दर्गा बना था और आगे कुछ कमरे थे जिसमें लोग रहा करते होंगे।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू, आप को लगता है कि यहां लोग रहते थे?"

सन्नी, "हमारे घर अगर 300 साल बन्द रहें तो ऐसे ही दिखेंगे। जो चुराने लायक था वो अंग्रेज ले गए और जो बचा वो वक़्त खा गया।"

लक्ष्मी आंटी, "मैं आज इस किले की रानी हूं और आप दोनों मेरे सिपाही। याद है ना?"

हम दोनों ने अपने सर हिलाकर हां कहा।

लक्ष्मी आंटी, "मुझे भूक लगी है और आप दोनों अभी मेरे लिए इंतजाम करोगे।"

"लक्ष्मी आंटी! यहां पर कुछ खाने को नहीं मिलता। खाने को अब नीचे जाने के बाद मिलेगा। पानी पियोगी?"

लक्ष्मी आंटी ने मुंह फुलाकर कहा, "आप दोनों को तो कुछ समझ में नहीं आता।"

लक्ष्मी आंटी ने हमारे पीछे देखा और हमें खींच कर एक कमरे में ले गई। अंदर अंधेरा था और जमीन भी काफी मैली थी। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को दरवाजे के बगल में खड़ा कर दिया और हमारे सामने घुटनों पर बैठ गई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से हमारे लौड़े पैंट के ऊपर से सहलाते हुए हमारी चैन खोली और हमारे लौड़े बाहर निकले। आगे क्या होगा यह जानकर हम दोनों चुप चाप खड़े हो गए।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों को मुठ्ठी में मोड़ कर हमें हिलाने लगी और हम दोनों बड़ी मुश्किल से अपनी आहें दबाकर लक्ष्मी आंटी की मुठ मारने का मजा उठाने लगे। लक्ष्मी आंटी ने हमारे सुपाड़े को बारी बारी चूमकर उस गीला किया और उस पर आयी रस की पारदर्शी बूंद को चाट लिया। हम दोनों को उत्तेजना असेहनिय होने लगी थी कि लक्ष्मी आंटी अचानक उठकर बाहर भाग गई।

हम दोनों ने जैसे तैसे अपनी पैंट बन्द की और उसके पीछे भागने लगे। लक्ष्मी आंटी कुछ ही कदम दरवाजे के बाहर टिकिट बेचने वाले से टकराई थी और अब उसके पीछे छुप कर खड़ी थी। टिकट बेचने वाला हमारी ओर संदेह से देख रहा था।

"देखो साहब, यही है वो दो लोग जो मेरा पीछा कर रहे हैं। पकड़ो इन्हें!!", लक्ष्मी आंटी ने पीछे से कहा।

"लक्ष्मी आंटी! ये अच्छी बात नहीं! उस कमरे में हमें डराकर यहां हमारी शिकायत करना। चलो इन्हें सच बताओ!"

लक्ष्मी आंटी ने चिढ़ाते हुए कहा, "हां, मैंने आप दोनों को परेशान किया तो क्या? आप दोनों मेरा पीछा करते हुए बाहर आए हो!"

टिकट बेचने वाले आदमी ने सब को डांटते हुए कहा कि हमें यहां कोई बचकाने खेल नहीं करने चाहिए और संभलकर रहना चाहिए। हमने हां कहा तो एक बार और डांट कर वह वापस अपनी जगह पर चला गया।

लक्ष्मी आंटी, "मैंने कहा था कि मैं इंसान को पहचानती हूं। अगर हम मस्ती करते पकड़े नहीं जाते तो ये हमारे पीछे पीछे आता रहता। चलो अब हमें कोई तंग नहीं करेगा।"

कभी कभी लक्ष्मी आंटी से डर लगता है।

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विक्की

लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों के हाथों में अपने हाथ रख कर घूमना चालू रखा और जल्द ही हम वहां के महादेव मंदिर पहुंचे। हम सब ने वहां नमस्कार किया और आगे घूमने लगे। लोहगढ़ का किला जंग के हिसाब से बना था तो कई पानी की तालाब भी बने थे।

जैसे सूरज की गर्मी बढ़ने लगी तालाब के किनारे पर हम सब बैठ गए। लक्ष्मी आंटी ने तालाब के पानी से अपनी लंबी टांगों को धोते हुए कहा,

"पता नहीं, आप दोनों इतने कपड़े पहन कर इतनी गरमी कैसे सेह पाते हो? मेरा तो पूरा बदन जल रहा है।"

मैंने और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पानी में जाते ही बात कर ली थी। मैंने लक्ष्मी आंटी को तालाब की सीढियों पर मेरे पैरों के बीच में बैठने का इशारा किया। लक्ष्मी आंटी मेरे पैरों के बीच मेरी छांव में बैठी और मैंने उसके सर को पकड़ कर उसे चूमने लगा। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैरों के बीच जा कर उस की पैंट उतार दी।

लक्ष्मी आंटी ने हमें रोकने की कोशिश की पर मुंह बन्द होने के कारण कुछ बोल नहीं पाई। सन्नी ने पैंट को लक्ष्मी आंटी के घुटनों तक उतार कर उसके पैर उठाए। अब लक्ष्मी आंटी की गीली चूत और कसी हुई गांड़ सन्नी की जीभ का हमला झेलने के लिए सामने थी। मैं और सन्नी पिछले साल में लक्ष्मी आंटी की सारी कमजोरियां सीख चुके थे और अब सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की हर रग रग को चूम चाट कर छेडा। लक्ष्मी आंटी यूं खुले में होते प्रणय से डर गई थी पर साथी ही उत्तेजित भी थी। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को चूम चाट कर उत्तेजना के शिखर पर पहुंचने पर अपनी जीभ को उसकी गरम योनि में भर दिया। लक्ष्मी आंटी ने मेरे सर को खींच कर मुझे चूमते हुए सन्नी को अपना पानी पिलाया।

जब पूरा पानी पी कर सन्नी उठा तो लक्ष्मी आंटी ने थक कर मेरे सीने पर अपने आप को छोड़ दिया। पर लक्ष्मी आंटी को इतनी सी सजा मिले यह कहां का न्याय होता? सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर मेरी जगह ले ली और उसकी जगह पर मैं बैठ गया। लक्ष्मी आंटी ने बस हलके स्वर में "कोई आ जाएगा।" की शिकायत की और मुझे अपने पैर खोल कर जगह दे दी। मैंने लक्ष्मी आंटी के यौन मणि को चूमते हुए उसकी चूत में अपनी दो उंगलियां डाल दी। लक्ष्मी आंटी चिहक के अपनी कमर उठाते हुए मेरा साथ देने लगी। मैंने पूरी तेजी से अपनी उंगलियों को आगे पीछे करते हुए लक्ष्मी आंटी को उत्तेजना में बनाए रखा पर झडने नहीं दिया। उत्तेजना वश लक्ष्मी आंटी का बदन अकड़ने लगा और वह कराहते हुए बोल पड़ी,

"बाबू ऐसे ना तड़पाओ! छुड़ा दो मुझे! झड़ा दो मुझे!…"

लक्ष्मी आंटी की हालत मुझसे देखी नहीं गई। खास कर इतनी उत्तेजना मैं झेल नहीं पाया और मैंने अपनी उंगलियों को लक्ष्मी आंटी की चूत में से निकाल कर उसकी गांड़ में भरते हुए अपनी जीभ को उसकी चूत में डाल कर हिलाने लगा।

लक्ष्मी आंटी की सहनशीलता का बांध टूटा और वह झड गई। लक्ष्मी आंटी के रस से मेरी जीभ ही नहीं बल्कि मेरा पूरा चेहरा भीग गया और मैंने उसके रस को तब तक पिया जब तक उसका बदन अकड़ना बन्द नहीं हुआ।

सुसताई लक्ष्मी आंटी को सन्नी ने चिढ़ाते हुए कहा, "क्यों लक्ष्मी आंटी? इतने में थक गई? अभी एक खास जगह देखनी बाकी है।"

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52

सन्नी

लक्ष्मी आंटी ने जैसे तैसे अपने आप को संभाला और हम सब लड़खड़ाते कदमों से आगे निकल पड़े। लक्ष्मी आंटी के पैर झडने से नरम हो गए थे तो हमारे पैरों के बीच लोहे के गरम डंडे ने घर बना लिया था।

थोड़ी दूर जाते ही लक्ष्मी आंटी ने डर से एक गहरी सांस ली।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू, ऐसी जगह पर भी लोग जाते हैं? अगर पैर फिसला तो?"

सामने एक पट्टी लगी थी जिस पर लिखा था "विंचू कट्टा"

एक पतली पगडंडी किले में से निकल कर आगे लंबे पतले पहाड़ की चोटी पर के जा रही थी। ये पहाड़ की बाहर निकली लकीर नक्शे में किसी बिच्छू की पूंछ लग रही होगी। लक्ष्मी आंटी को ऊंचाई से डर लगना कोई बड़ी बात नहीं थी और इस लिए हम दोनों ने उसका हाथ पकड़ कर आगे बढ़े।

दोनों ओर गहरी खाई और ठीक सीधे दूरी पर लगा झंडा। यह दृश्य जितना अनोखा था उतना ही डरावना। एक एक कदम आगे बढ़कर हम आगे बढ़े। आगे रस्ता चौड़ा हो गया तो हम सब ने चैन की सांस ली। आगे रास्ते में एक छोटा तालाब जैसा अवशेष था उस पार कर के हम झंडे तक पहुंचे।

दूर दूर तक हवा की आवाज के सिवा कुछ नहीं था। किनारे पर बनी दीवार से नीचे गांव के घर किसी खिलौने की तरह दिख रहे थे। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को अपनी बाहों में भर लिया और हम दोनों को चूमा। भूखे शेरों को सहलाने की गलती का अंजाम लक्ष्मी आंटी को तुरंत पता चला।

मैंने लक्ष्मी आंटी को उठाकर झंडे के नीचे बने चबूतरे के नीचे लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया। लक्ष्मी आंटी ने "सन्नी बाबू!!" कर के मुझे रोकना चाहा पर अब रुकना मुमकिन नहीं था। मैंने लक्ष्मी आंटी की शॉर्ट्स को घुटनों के नीचे तक उतार कर उसके पैर फैलाए। अपनी पैंट की ज़िप खोल कर अपने गरम लोहे को आजाद किया।

लक्ष्मी आंटी ने ऐतराज़ में कहा, "कोई आ जाएगा… आ… हा… आह…"

लक्ष्मी आंटी के टॉप ऊपर सरका कर मैंने उसके मम्मे दबोच लिए और तेज रफ्तार से चोदने लगा।

लक्ष्मी आंटी ने मेरी पाशविक हवस से बचने के लिए विक्की की ओर देखते हुए पुकारा, "विक्की बाबू!! हा… बचाओ मुझे!! आ… कोई देख लेगा!! आह…"

विक्की ने कहा, "सन्नी अगर किसी ने देख लिया तो बेहती गंगा में हाथ धो लेगा। हमें यहां ज्यादा वक़्त नहीं लगाना चाहिए।"

विक्की की बात समझ कर मैंने पलट कर लक्ष्मी आंटी को अपने ऊपर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी की एड़ियां शॉट्स में जकड़ कर मेरे घुटनों के बीच थी तो उसके घुटने मेरे दोनों ओर थे। लक्ष्मी आंटी ने उठने की कोशिश की तो मैंने उसे खींच कर चूमते हुए नीचे किया।

लक्ष्मी आंटी, "सन्नी बाबू, बाद में जो चाहे कर लो पर कोई आ गया आ!… आह… विक्की बाबू!!…"

लक्ष्मी आंटी की चीख दूर की पहाड़ियों तक गूंज उठी और हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को जोर जोर से पेलना शुरू किया। अब लक्ष्मी आंटी ने अपने होंठ दबाकर चुधने लगी पर उसकी आहें फिर भी निकल रही थीं।

"ऊंह… अम्म… हा… हनः… आह…"

सुबह से भूखे आदमखोर बाघ अपने शिकार पर झपटे तो क्या होना था। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूचियां दबोच कर उन्हें मसलते हुए पीने लगा तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गरदन पकड़ कर उसके कानों को चूमते हुए उसकी गांड़ में धमाचौकड़ी मचाने लगा।

लक्ष्मी आंटी अभी अभी झडकर जैसे तैसे अपनी सांसों को काबू में कर पाई थी पर अब उसका बांध फिर टूटने लगा। पर्वत के किनारे, सीधी गहरी खाई को देखते हुए मौत का डर होता है। साथ ही कभी भी किसी के भी हाथों पकड़े जाने का डर। इन सब के बीच चुधाई की जिंदगी की खुशी दिलाने वाला एहसास। ये सब मिलकर ऐसा उत्तेजक बनता है कि लक्ष्मी आंटी के गले से पतली चीख निकल पड़ी और उसकी चूत और गांड़ ने हम दोनों के लौड़ों को कस कर पकड़ कर निचोड़ लिया। हमारे लौड़ों ने तोप की तरह अपना गरम लोहा लक्ष्मी आंटी की गरमी में भर दिया और हम सब वहीं थक कर गिर गए।

"बुरे बाबू!! बारी बारी लेते तो क्या होता? उफ्फ अब मैं सीढ़ियों से नहीं उतरूंगी। आप दोनों मुझे नीचे ले चलो।", लक्ष्मी आंटी ने आदेश दिया।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी के गले को पीछे से चूमते हुए कहा, "अरे लक्ष्मी आंटी, ऐसा मज़ा आने के बाद हम दोनों तो सीढ़ियों के उपर भी ले जाएं।"

पकड़े जाने के डर से हम तीनों ने अपने कपड़े ठीक किए और वापस जाने के लिए निकले। सुबह के 11 बज रहे थे और महादेव मंदिर के करीब हमें कुछ और सैलानी दिखे। शायद हमारे चेहरे से कुछ समझ आ रहा था कि लड़के लक्ष्मी आंटी को घुर रहे थे और लड़कियां आंखे फाड़ कर हमें देख रही थीं।

जब हम टिकट घर पहुंचे तो हमें देख टिकिट बेचने वाला हमें देखता रहा। हवस का नशा उतरने के बाद अब धीरे धीरे समझ आने लगा कि लोगों को पता कैसे चल रहा था। मेरी और लक्ष्मी आंटी के पीठ और घुटनों पर मिट्टी लगी थी तो विक्की के सिर्फ घुटनों पर मिट्टी थी। बालों की हालत, आंखों में चमक, लक्ष्मी आंटी के चेहरे पर लाली और हम सब के चेहरे की मुस्कान कुछ छुपाने के लिए नहीं थी। विक्की ने हंसना शुरु किया और हम दोनों उसके साथ मिल गए। मैंने विक्की का बैग पकड़ा और उसने ' रानी साहिबा' लक्ष्मी आंटी को अपनी पीठ पर उठा लिया। आधे रास्ते में विक्की से उसका हसीन बोझ छीन लेने के बाद जब मैं गाड़ी के पास पहुंचा तो लक्ष्मी आंटी ने शर्म से अपना मुंह छुपा लिया था। लक्ष्मी आंटी की इस मासूम अदाने हम दोनों को छू लिया। ऐसे लग रहा था कि लक्ष्मी आंटी को यहीं बीच बाजार चोद दें पर हमें आगे जाना था।

लक्ष्मी आंटी पीछे बैठी और हम सब वहां से गाड़ी में बाहर निकले।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू आप दोनों तो हद कर दी!! अब तो आप दोनों के साथ मैं भीड़ की जगह कभी नहीं जाऊंगी।"

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53

विक्की

थक कर चूर चूर लक्ष्मी आंटी अपना सर पीछे रख कर पड़ी रही और हम गाड़ी अपने अगले पड़ाव तक ले गए। आधे घंटे बाद हम ने अपनी गाड़ी रोकी और नीचे उतरने लगे।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी आंखे खोली और पूछा,

"हम इतनी जल्दी वापस आ गए? (बाहर झांक कर) बाबू, हम कहां आए हैं? ये सब क्या है?"

"हमारी प्यारी लक्ष्मी आंटी, ये camping ground है और आज हम सब यहां रहेंगे।"

"बाबू आप दोनों को यूं खुले में करने से डर नहीं लगता? किसने देख लिया तो मैं बरबाद हो जाऊंगी।", लक्ष्मी आंटी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।

सन्नी, " लक्ष्मी आंटी तुम हमारे लिए कोई खिलौना नहीं जो हम औरों से बांटे। हमारी प्रेमिका सिर्फ हमारी रहेगी। ये जगह एक कैंपिंग साइट है और लोग यहां होटल की तरह ही रहते हैं। यहां खाना पानी तो है ही पर बिजली भी है। चलो दिखता हूं।"

लक्ष्मी आंटी को हम ने पूरे इलाके का मुआयना करने दिया। पावना तालाब के किनारे पर बना ये कैंप शहरी सुख सुविधाओं से लैस पर्यावरण का सुरक्षित आनंद लेने के लिए बना था। यहां शनिवार रविवार को भीड़ होती है पर गुरुवार को सब खाली था।

हम सब अपनी जगह पर लौट आए तब तक वहां कैंप के लोगों ने एक तंबू लगा दिया था और साथ ही बाहर सेंकने के लिए अलाव की व्यवस्था भी की थी। कैंप मैनेजर ने खाना परोसा था जो हम सब ने चट कर दिया। कैंप मैनेजर ने शाम को चाय लाने का वादा किया और चला गया।

सुबह की सैर या बाद में की गई खुले में चुदाई पता नहीं पर हम सब अब शांति का अनुभव कर रहे थे। गरमी के मौसम में दोपहर की धूप से बचने के लिए हम सब तंबू में पंखे के सामने बैठ कर गप्पे लडा रहे थे कि प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को कॉल किया।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी खुशी का पिटारा खोल कर प्रतीक को बताया कि हम सब सैर करने आए हैं और बड़े अरसे के बाद उसे यूं खुले आसमान को देखने की खुशी मिली है।

लक्ष्मी आंटी की बातें सुनकर प्रतीक ने उसे विश्वास दिलाया कि वह लक्ष्मी आंटी की खुशी में ही खुश है। प्रतीक ने आगे बताया कि MBS को उसका बनाया काम बहुत पसंद आया है और उसने प्रतीक को अपने खास गिरोह में शामिल कर लिया है। प्रतीक ने कहा कि और भी अच्छी बातें हो सकती हैं पर वह होने के बाद ही पता चलेगा।

लक्ष्मी आंटी ने अपने पति के खुशी में खुशी मान कर फोन रखा। मै और सन्नी कुछ देर बाद पास में रखी नाव में सवार होकर तालाब की सैर के लिए निकले। हमें पता था कि लक्ष्मी आंटी अपनी पढ़ाई के लिए उतावली हो रही थी। तालाब के बीच जा कर हम दोनों ने मछली पकड़ने के लिए पानी में कांटा डाला। खाली दिमाग शैतान का घर होता है तो हम उस शैतान का पूरा इसतेमाल करने का ठान चुके थे।

बातों बातों में हमारे दिमाग में एक कंपनी बनाने की कल्पना बनी। सूरज जमीन की ओर निकला तब तक हमारे हाथों में खाली कांटे और दिल में नए सपने थे। वापस लौट कर देखा तो चाय और नाश्ता लाया गया था। हमने लक्ष्मी आंटी को अपनी कल्पना बताई तो लक्ष्मी आंटी ने उसमें कई खामियां निकलते हुए उन्हें ठीक करने की सलाह भी दी।

सूरज ढलते हुए पहाड़ों की चोटियों के बीच समाने लगा और हम तीनों तालाब के बीच में नाव में बैठकर ये नजारा देख रहे थे। कोई अनजान ताकत हमें बता रही थी कि हमारी जिंदगी फिर से बदलने वाली है।

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54

सन्नी

अगर कोई छुप कर हमारी निगरानी कर रहा था कि लक्ष्मी आंटी के साथ हम दोनों कुछ करते हुए पकड़े जाएं तो उसे रात तक सिर्फ 3 दोस्त खेलते और हंसते हुए नजर आते। रात का खाना परोसा जाना था कि लक्ष्मी आंटी टॉयलेट की ओर गई। बस तभी प्रतीक ने मुझे message किया की उसका कॉल लक्ष्मी आंटी से छुप कर लिया जाए। इस प्रकार से उलझन में पड़ा था कि उसका कॉल आया। प्रतीक ने मुझे और विक्की को बताया कि MBS के लिए काम करते हुए उसे एक बड़ा आदमी मिला जिसने उसे एक खास शर्त पर बड़ी मदद करने का वादा किया है। शर्त और मदद दोनों बातों के बारे में सुनकर मैं समझ गया कि सच में हम सब की जिंदगी बदलने वाली है।

विक्की की आंखों में भी इस बात का असर दिख रहा था। हम दोनों ने प्रतीक से वादा किया कि हम दोनों उसकी हर संभव मदद करने के लिए तयार हैं। लक्ष्मी आंटी ने इठलाते हुए टेबल पर रखा खाना उठाया पर हमारे गंभीर चेहरे देख कर रुक गई।

लक्ष्मी आंटी ने पूछा, "क्या हुआ बाबू? आप दोनों मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो?"

"कुछ नहीं, लक्ष्मी आंटी। हम दोनों बस ये सोच रहे थे कि पढ़ाई करना तो हमारी इच्छा थी जो हम दोनों की पूरी हो रही है। पर तुम तो मां बनना चाहती थी और हम दोनों ने तुम्हें अपनी इच्छा में खींच लिया।"

लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों के बीच में बैठ कर, "बाबू आप दोनों ने तो मुझे नई दुनिया दिखाई है। अगर मैं पहले मां बनती तो अपने बच्चे को क्या अलग जिंदगी देती? अब मैं अपना सपना साकार कर के अपने बच्चे को अच्छी तरह बढ़ाऊंगी। क्या ये कम है?"

हम सब ने अलाव जलाकर खाना खाया और बहुत जल्दी ही सोने चले गए। हम दोनों के मुरझाए चेहरे को देखकर लक्ष्मी आंटी ने मामला अपने हाथ में लिया। लक्ष्मी आंटी ने टेंट में रखे गद्दे पर हम दोनों को लिटाकर हमारी पैंट उतारी। हमारे तने हुए लौड़े टेंट की छत की ओर बढ़े देख लक्ष्मी आंटी मुस्कुराई।

लक्ष्मी आंटी, "चाहे जितना मुंह फुलाकर बैठो आप दोनों की चाबी मैं अच्छे से जानती हूं।"

लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से हमारे लौड़े को सहलाते हुए अपनी जीभ से बारी बारी चाटना शुरू किया। लक्ष्मी आंटी को कोई जल्दी नहीं थी और वह हम दोनों को तड़पा तड़पा कर मज़े ले रही थी। हमारे लौड़े जब लोहे की लाल छड बन गए तब लक्ष्मी आंटी ने एक गहरी सांस लेकर पूछा,

"अब बताओ, एक एक करके आओगे या एक साथ? अपना माल मेरे मुंह में डाल कर उसे जाया मत करना।"

लक्ष्मी आंटी की बात से मेरी आंखे खुली और मैंने उसे पीठ के बल लिटाकर उसके पैरों के बीच की गंगा को पीते हुए अपनी जीभ से उपर बने मोती सहलाने लगा। लक्ष्मी आंटी अब उत्तेजना से भर कर कसमसाने लगी। लक्ष्मी आंटी की बहती चूत में मैंने दो उंगलियां डाल कर उसकी योनी को अंदर से सहलाते हुए लक्ष्मी शरीर सुख के शिखर तक पहुंचाया। इस दौरान विक्की लक्ष्मी आंटी के मम्मों को निचोड़ कर चूमते हुए उस पर जड़ी बेरीयों को दांत लगाकर उत्तेजित कर रहा था।

लक्ष्मी आंटी ने गिड़गिड़ाते हुए, "बाबू… आह… मत तड़पा… ओ… मुझे अपने आईं… लौड़े दो… चोदो…!!!"

मेरी उंगलियों को लक्ष्मी आंटी की तंग गली में पकड़ा गया और लक्ष्मी आंटी ने सिसकियां भर कर मेरी जीभ पर अपना रस उड़ेल दिया। लक्ष्मी आंटी झड कर निढाल हो गई तो मैंने विक्की के साथ अपनी जगह बदल ली।

ढीली पड़ी लक्ष्मी आंटी पर विक्की ने बेरहमी से हमला किया और अपनी उंगलियों से लक्ष्मी आंटी की चूत के रस लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ के पोतने लगा। लक्ष्मी आंटी कुछ सुध लेने से पहले ही दूसरे हाथ की उंगलियों ने चूत में अपनी जगह बना ली और लक्ष्मी आंटी फिर से सिहरने लगी। लक्ष्मी आंटी की चूचियों पर उभरे हुए लाल मेवे को अपने दातों और होंठों से चूसते हुए अपनी उत्तेजना मैंने लक्ष्मी आंटी पर न्योछावर कर दी। लक्ष्मी आंटी को इस तरह लगातार झडने की आदत पड़ चुकी थी और उसके बदन में थरथराहट से लक्ष्मी आंटी की चीख निकल गई।

लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला कर विक्की ने उन्हें लक्ष्मी आंटी के कंधों से लगाया। मैंने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए उसके बालों में से हाथ फेरे और विक्की ने धीरे धीरे अपना सामान लक्ष्मी आंटी की कुप्पी में भर दिया।

प्यासे को पानी मिले वैसे लक्ष्मी आंटी ने विक्की के लौड़े को लेते हुए मुझे चूमा। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को लंबे और धीरे धक्का देते हुए उसे चरम सुख की ओर ले गया। इस तरह प्यार से कि गई चूधाई से लक्ष्मी आंटी लगातार झडती रही पर विक्की ने अपना संयम नहीं खोया।

लक्ष्मी आंटी की तालीम में हम दोनों बहुत सीख चुके थे और आज हमारी गुरु दक्षिणा थी। लक्ष्मी आंटी को चोदते हुए जब विक्की को अपना नियंत्रण छूटता लगा तो मैंने उसकी जगह ले ली। लक्ष्मी आंटी की योनि गीली आग की तरह धुं धूं कर जल रही थी और मेरा लौड़ा इस हवन में जलकर उस आग को बढ़ा रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अब गिड़गिड़ाना छोड़ दिया था।

"हंह… हुम्मम… आनः… आह… हाः… ऊंह… उम्म्म… उम्मम… हा… हा… हा… हा…ह!!", की पुकार के साथ लक्ष्मी आंटी तो बस काम उत्तेजना में जलता हुआ देह था।

लक्ष्मी आंटी की गरम गहराइयों में अपनी शिक्षा से मिले हुनर को साबित करने के बाद मैंने अपने लौड़े के जड़ पर अपना उबलता हुआ वीर्य महसूस कर अपना लौड़ा बाहर खींच लिया। विक्की अब अपनी बेसबरी पर काबू पाने में सफल हो गया था और उसने मेरी जगह ले ली।

लक्ष्मी आंटी ने हमारी जगह बदलने का फायदा उठाकर विक्की को अपने पैरों से जकड़ लिया। विक्की भी अब ज्यादा रुक नहीं पता पर फिर भी उसने बड़ी हिम्मत से लक्ष्मी आंटी का पानी दो बार निकालने के बाद ही कराहते हुए अपना रस लक्ष्मी आंटी की कोख में उड़ेलकर लक्ष्मी आंटी को चूमने लगा।

लक्ष्मी आंटी की आंखों में थकान से आंसू थे और उसने विक्की को अपनी बाहों में भर कर मानो उसकी ताकत महसूस कि। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की बाहों में से बाहर निकलते हुए मुझे जगह दी तो लक्ष्मी आंटी ने विरोध किया।

लक्ष्मी आंटी, "मैं थक गई हूं सन्नी बाबू। कल सुबह आप जितना चाहे प्यार कर लो। छिल जाऊंगी अब और प्यार मिला तो। सन्नी बाबू आह… आ… हा… हा… उन्हहह… आहा… आ!"

मैंने लक्ष्मी आंटी की चूत के अंदर सन्नी के वीर्य को अपने लौड़े से मथते हुए अपना हथियार जड़ तक भर दिया। लक्ष्मी आंटी के माथे को चूमते हुए उसकी भौं में जमे पसीने के अपने होठों पर लगाया। लक्ष्मी आंटी की योनि रसों की टंकी बन कर बह रही थी और मैंने अपने लौड़े को बाहर निकाल कर तेज धक्का दिया।

"मां… आह… सन्नी बाबू… पेलो… चोदो… लूटो मुझे… हां… हां… अन्ह… आंहा… और… और… और…", लक्ष्मी आंटी ने आहें चीखें बन गई और पूरा तालाब हमारे यौन मिलन के संगीत में डूब गया। लक्ष्मी आंटी के कान कि बाली को अपने होठों में दबा मैंने लक्ष्मी आंटी को तेज रफ्तार लंबे धक्कों से पेलना शुरू किया। लक्ष्मी आंटी फिर से शब्द भूल कर जानवरों की तरह चिल्लाते हुए अपनी हवस का पिटारा खोल मेरा लौड़ा अपनी योनि से निचोड़ने लगी। अगर झडता तो गुरु दक्षिणा अधूरी रह जाती इसी लिए मैंने ताबड़तोड़ ठुकाई के बीच भी अपने नियंत्रण के कच्चे धागे को थामे रखा।

लक्ष्मी आंटी ने घायल शेरनी की तरह अपने नाखून मेरे पिछवाड़े में धंसा ते हुए अपनी कमर को उठाया। लक्ष्मी आंटी के दातों ने अब मेरा कंधा दबोच कर मेरी त्वचा फाड़ दी थी।

दर्द का भी अपना मज़ा होता है।

लक्ष्मी आंटी की दूसरी चीख ने मेरा बांध तोड़ा और मैंने लक्ष्मी आंटी को अपनी गरमी का पूरा मज़ा दिया। लक्ष्मी आंटी ने मुझे अपनी बाहों में भर कर रोना शुरू किया दिया।

"क्या हुआ लक्ष्मी आंटी? दर्द हुए? छिल गया? तकलीफ हुई?"

लक्ष्मी आंटी ने बस मेरे गले में अपना मुंह छुपा कर मुझे पकड़े रखा। कुछ समय बाद लक्ष्मी आंटी ने मुझे थोड़ा छोडा पर सिर्फ विक्की को अपने साथ लेने के लिए। आगे शब्द बेकार थे और सांसे सच्चाई बयां कर रही थीं। हम सब अपने अपने विचारों में डूब कर सो गए।

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55

विक्की

तालाब के किनारे पर सबेरे सर्दी होती है और रजाई में लक्ष्मी आंटी की गरमी और भी लुभावनी लगती है।

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की चूची को चूमते हुए उसे चूसना शुरू कर दिया और अपना हाथ उसके पैरों को फैला गीली गरमी के उपर बने मोती को रगड़ने लगा। मैंने दूसरे मम्मे को अपने होठों से पकड़ते हुए अपनी जीभ से चूची को छेड़ते हुए चूमने लगा और अपनी उंगली को लक्ष्मी आंटी की गरमी में भर दिया। लक्ष्मी आंटी तिलमिलाकर उठी और आहें भरते हुए हमारे बाल पकड़ कर अपने भरे हुए मम्मों पर दबाने लगी।

लक्ष्मी आंटी की आग बुझाना उतनी ही हमारी जिम्मेदारी थी जितनी उस आग को जलाना हमारा फ़र्ज़ बनता था। लक्ष्मी आंटी का बदन थरथाया और लक्ष्मी आंटी की चीख निकल गई। लक्ष्मी आंटी ने झडने के बाद हमारे सर को बाल पकड़ कर उठाया और कहा,

"क्या हो गया है आप दोनों को? कल रात को आप दोनों ने कुछ कम परेशान किया था जो ऐसे उठाया? कोई देख या सुन लेगा तो?"

"अरे लक्ष्मी आंटी, आज यहां कोई नहीं होगा। यहां सिर्फ शनिवार रविवार को चहल पहल होती है। आज तो नाश्ता भी देर से आयेगा।"

लक्ष्मी आंटी को विश्वास नहीं हो रहा था तो मैंने तंबू के परदे खोल दिए और नंगा ही बाहर टहलने लगा। जहां तक नजर जाए इंसान का कोई पता नहीं था। सन्नी भी बाहर खड़ा था और अपने इर्द गिर्द देख रहा था।

कुछ समय बाद टॉयलेट में से flush के आवाज के साथ लक्ष्मी आंटी बाहर आई। लक्ष्मी आंटी ने अब भी पतला satin gown पहन रखा था। बाहर भोर का हलका उजाला सुबह की याद दिला रहा था।

लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों की ओर देखते हुए एक पल में पहचान लिया के हमारा विचार क्या है और तंबू में छुपने भागी। हम दोनों ने लपक कर लक्ष्मी आंटी को दबोच लिया। मैंने लक्ष्मी आंटी को अपने कंधे पर रख लिया और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी का gown उतार फेंका। लक्ष्मी आंटी ने हलकी चीख से अपने बदन को ढकने की कोशिश की पर मैंने लक्ष्मी आंटी को तालाब किनारे रखे गद्दे पर पटक दिया।

लक्ष्मी आंटीने "आह… विक्की बाबू!!!" चिल्ला पड़ी की सन्नी ने उसके मुंह में अपना मूसल ठूंस दिया। आदत से मजबुर लक्ष्मी आंटी की तुरंत सन्नी के लौड़े को पूरा निगलकर चुस्कियां लेते हुए चूसने लगी। मैंने लक्ष्मी आंटी की भट्टी में अपना लोहा पेल दिया और तेज रफ्तार से चोदने लगा। लक्ष्मी आंटी एक हाथ से सन्नी को पकड़ा था तो दूसरे से अपने यौवन के दाने के साथ खेलने लगी। मैंने लक्ष्मी आंटी के दोनों गोले मेरे हाथों में लेकर उन्हें मसलते हुए लक्ष्मी आंटी को तेज धक्कों से चोदता रहा। लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के लौड़े पर अपनी चीख को दबाकर झडते हुए मेरे लौड़े को कस कर निचोड़ा।

लक्ष्मी आंटी की उत्तेनापूर्ण चुदाई के कारण कम दोनों जैसे तैसे अपने आप को संभाल पाए। और सहना मुश्किल होगा यह जानकर मैंने लक्ष्मी आंटी के उपर लेट कर पलटी मारी। अब लक्ष्मी आंटी ने मेरी सवारी करते हुए सन्नी को चूसने के लिए हाथ बढ़ाया। सन्नी के दिमाग में कुछ और ही था। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ को अपने पंजों से खोल कर अपने गरम लोहे के छड़ को लक्ष्मी आंटी के संकरी गली के मुहाने पर रखा। लक्ष्मी आंटी मुझे अपनी चूची खिलाते हुए चीखी,

"सन्नी बाबू! मेरी गांड़ मरो सन्नी बाबू!! भर दो अपनी लक्ष्मी को!! आह… मां… हा… हा… हा…"

लक्ष्मी आंटी के मम्मो को पकड़कर उन पर उभरी चूचियों को दबा कर चूसते हुए मैं लक्ष्मी आंटी को उत्तेजना के साथ ही आधार भी दे रहा था। लक्ष्मी आंटी तो अपनी सुध बुध छोड़ कर शरीर सुख के सागर में गोते लगाने में व्यस्त थी। लक्ष्मी आंटी अपनी छाती को मुझ पर दबाकर अपनी कमर हिलाते हुए हम दोनों प्रेमियों का पूरा मज़ा ले रही थी। सन्नी के लौड़े की रगड़न चूत और गांड़ के पतले परदे से मेरे लौड़े को और भी मज़ा दे रही थी।

अब सुबह से सुलगता वीर्य हमारे गोटों को गरमाते हुए दोबारा लक्ष्मी आंटी की गरमी में मिलने दौड़ा तो मैंने उसे नहीं रोका। सन्नी के तेज रफ्तार झटके बता रहे थे कि अब वह भी अपना रस उड़ेलने को बेताब है। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उत्तेजना की हदें पार करते हुए झडने की लड़ी लगा दी। सन्नी के लौड़े से वीर्य की पहली पिचकारी से मेरा भी रस छूट गया और लक्ष्मी आंटी के दोनों तरफ गरमी भर गई। लक्ष्मी आंटी ने सर उठाकर उगते सूरज को हमारे रस की गरमी का गीत सुनाकर मेरे ऊपर लेट गई।

कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद लक्ष्मी आंटी ने कहा, "अगर किसीने कहा होता की सूरज का स्वागत ऐसे भी हो सकता है तो मैंने उसे पागल कहा होता। आप दोनों बहुत बुरे हो। आप मुझे बिगड़ दोगे।"

"अरे लक्ष्मी आंटी, अगर अब तक बिगड़ी नहीं हो तो यही हमारी नाकामयाबी होगी!"

हम सब ने हंसी मजाक में कपड़े पहन लिए और वापस तालाब किनारे बैठे की नाश्ता ले कर कैंप के लोग आ गए। नाश्ता करके मैं और सन्नी trekking करने गए तो लक्ष्मी आंटी ने सुबह की अधूरी पढ़ाई पूरी करना जरूरी समझ कर आने से मना कर दिया।

Trekking में आगे बढ़ने के बाद मैंने सन्नी से कहा, "लक्ष्मी आंटी के बारे में प्रतीक ने जो तय किया है उस बारे में सोच रहा हूं। हम प्रतीक की मदद कर लक्ष्मी आंटी को मुसीबत में न डाल दें।"

सन्नी, "जिंदगी कुछ ऐसी ही है मेरे दोस्त। किसने सोचा था कि हम दोनों किसी के साथ बलात्कार करेंगे?"

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