सोनल: किसका फोन था।
मैं: अपूर्वा का था, वो कह रही थी कि लेने आना है क्या। (मैंने स्कुूटी चला दी)
सोनल: हाव स्वीट! बहुत धयान रखती है तुम्हारा। मुझे तो लगता है कि उसके और तुम्हारे बीच में कुछ चल रहा है, पर तुम बता नहीं रहे हो।
मैं: हम बहत अच्छे दोस्त हैं, उससे ज्यादा कुछ नहीं है।
सोनल: अच्छा जी, फिर ठीक है। (और मुझसे सटकर बैठ गई)
उसके बूब्स को अपनी कमर में दबते महसूस करके मेरे शरीर में सिहरन सी दौड़ गई। मैं भी मजे लेने के लिए थोड़ा पीछे हो गया। सोनल ने अपने हाथ मेरे पेट पर रख दिये और मेरे कंधे पर सिर रखकर बैठ गई। तभी मुझे उसके हाथों में कुछ हरकत महसूस हुई। धीरे धीरे उसके हाथ मेरे पेट पर हरकत करने लगे थे। उसकी उंगलिया मेरी शर्ट के उपर से ही मेरे पेट पर थिरक रही थी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। उसने अपनी एक अंगली को मेरे पेट पर सहलाते हुए थोड़ा नीचे की तरफ कर दिया जो मेरी नाभि से नीचे आ गई। उसकी वो उंगली मेरी बेल्ट को टच हो रही थी। मैंने शॉर्ट शर्ट पहनी हुई थी। उसने अपनी उस उंगली से मेरी शर्ट को थोडा सा उपर उठाया और मेरी जींस के किनारों के साथ मेरे पेट पर अपनी उंगली घुमाने लगी। मेरे शरीर में बहुत ज्यादा सिहरन हो रही थी और मेरा पप्पू तो पहले से ही अंडरवियर के अंदर धमाचौकड़ी मचा रहा था।
तभी अचानक सोनल ने अपनी एक उंगली मेरी जींस के थोड़ा सा अंदर कर दी और मेरी बनियान को खींच कर जींस से बाहर निकाल दिया और अपनी उंगली वापिस जींस के किनारों के साथ साथ मेरे पेट पर फिराने लगी। उसकी उंगली को अपने नंगे पेट पर महसूस करके मेरे शरीर ने एक झटका लिया और मेरे पूरे शरीर में करंट सा दौड़ गया।
मेरा दांया हाथ अपने आप उसके हाथ के उपर आया और उसके हाथ को पकड़ लिया। मुझपर हल्की हल्की मदहोशी छाने लगी थी। मैंने उसका हाथ पकड़ कर वहां से हटाकर वापिस अपने पेट पर रख दिया और अपना हाथ वापिस हैंडल पर ले गया क्योंकि स्कूटी की स्पीड कम हो गई थी।
मैं: सोनल यार! आराम से बैठों ना, खामखां एक्सीडेंट हो जायेगा।
सोनल: एक्सीडेंट क्यों हो जायेगा, अपना धयान सामने रखों।
मैं: अब इस तरह की हरकत करोगी तो सामने धयान कैसे रहेगा।
सोनल: क्यों मैंने क्या किया। मैं तो बस थोड़ी छेडछाड कर रही हूं।
मैं: तुम थोड़ी छेडछाड कर रही हो, पर मुझे प्रॉब्लम तो ज्यादा हो रही है।
सोनल: अच्छा तो जी जनाब को थोड़ी सी छेडछाड में ज्यादा प्रॉब्लम हो रही है।
सोनल: वैसे मुझे तो बहुत मजा आ रहा है तुम्हें छेडते हुए।
मैं: मैं कोई लड़की थोडे ही हूं जो मुझे छेडने में तुम्हें मजा आ रहा है।
सोनल: तो मैंने कब कहा कि लड़की हो।
सोनल: अब लड़कियों को छेडने में तो लड़को को मजा आता है। लड़किया कों तो लड़कों को छेडने में मजा आयेगा ना।
मैं: हे भगवान! कैसा कलयुग आ गया है, अब तो लड़कियां लड़कों को छेडती हैं। लड़कों की इज्जत सलामत ही नहीं रही अब तो।
सोनल: हा हा हा, बहुत छेड लिया लडको नें लडकियों को, अब हम लडकों से सारा बदला लेकर रहेंगी।
मैं: एक कहावत है कि चाहे आलू चाकू पर गिरे या चाकू आलू पर गिरे, कटना तो आलू को ही है।
सोनल: अच्छा! तो इसका इस बात से क्या मतलब हुआ।
मैं: मैं तो तुम्हें इंटेलीजेंट समझता था, तुम्हें इतना भी समझ में नहीं आया।
सोनल: अब ज्यादा पतलून मत उतारो, समझाओं मुझे।
मैं: अब लडके लडकियों को छेडे या लडकिया लडकों को छेडे, मजा तो लडकों को ही आना है।
सोनल: ऐसा नहीं है, लडकियों को भी मजा आता है छेडने में।
मैं: वो तो छिडवाने में भी आता होगा।
सोनल: नहीं आता।
मैं: अपूर्वा का था, वो कह रही थी कि लेने आना है क्या। (मैंने स्कुूटी चला दी)
सोनल: हाव स्वीट! बहुत धयान रखती है तुम्हारा। मुझे तो लगता है कि उसके और तुम्हारे बीच में कुछ चल रहा है, पर तुम बता नहीं रहे हो।
मैं: हम बहत अच्छे दोस्त हैं, उससे ज्यादा कुछ नहीं है।
सोनल: अच्छा जी, फिर ठीक है। (और मुझसे सटकर बैठ गई)
उसके बूब्स को अपनी कमर में दबते महसूस करके मेरे शरीर में सिहरन सी दौड़ गई। मैं भी मजे लेने के लिए थोड़ा पीछे हो गया। सोनल ने अपने हाथ मेरे पेट पर रख दिये और मेरे कंधे पर सिर रखकर बैठ गई। तभी मुझे उसके हाथों में कुछ हरकत महसूस हुई। धीरे धीरे उसके हाथ मेरे पेट पर हरकत करने लगे थे। उसकी उंगलिया मेरी शर्ट के उपर से ही मेरे पेट पर थिरक रही थी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। उसने अपनी एक अंगली को मेरे पेट पर सहलाते हुए थोड़ा नीचे की तरफ कर दिया जो मेरी नाभि से नीचे आ गई। उसकी वो उंगली मेरी बेल्ट को टच हो रही थी। मैंने शॉर्ट शर्ट पहनी हुई थी। उसने अपनी उस उंगली से मेरी शर्ट को थोडा सा उपर उठाया और मेरी जींस के किनारों के साथ मेरे पेट पर अपनी उंगली घुमाने लगी। मेरे शरीर में बहुत ज्यादा सिहरन हो रही थी और मेरा पप्पू तो पहले से ही अंडरवियर के अंदर धमाचौकड़ी मचा रहा था।
तभी अचानक सोनल ने अपनी एक उंगली मेरी जींस के थोड़ा सा अंदर कर दी और मेरी बनियान को खींच कर जींस से बाहर निकाल दिया और अपनी उंगली वापिस जींस के किनारों के साथ साथ मेरे पेट पर फिराने लगी। उसकी उंगली को अपने नंगे पेट पर महसूस करके मेरे शरीर ने एक झटका लिया और मेरे पूरे शरीर में करंट सा दौड़ गया।
मेरा दांया हाथ अपने आप उसके हाथ के उपर आया और उसके हाथ को पकड़ लिया। मुझपर हल्की हल्की मदहोशी छाने लगी थी। मैंने उसका हाथ पकड़ कर वहां से हटाकर वापिस अपने पेट पर रख दिया और अपना हाथ वापिस हैंडल पर ले गया क्योंकि स्कूटी की स्पीड कम हो गई थी।
मैं: सोनल यार! आराम से बैठों ना, खामखां एक्सीडेंट हो जायेगा।
सोनल: एक्सीडेंट क्यों हो जायेगा, अपना धयान सामने रखों।
मैं: अब इस तरह की हरकत करोगी तो सामने धयान कैसे रहेगा।
सोनल: क्यों मैंने क्या किया। मैं तो बस थोड़ी छेडछाड कर रही हूं।
मैं: तुम थोड़ी छेडछाड कर रही हो, पर मुझे प्रॉब्लम तो ज्यादा हो रही है।
सोनल: अच्छा तो जी जनाब को थोड़ी सी छेडछाड में ज्यादा प्रॉब्लम हो रही है।
सोनल: वैसे मुझे तो बहुत मजा आ रहा है तुम्हें छेडते हुए।
मैं: मैं कोई लड़की थोडे ही हूं जो मुझे छेडने में तुम्हें मजा आ रहा है।
सोनल: तो मैंने कब कहा कि लड़की हो।
सोनल: अब लड़कियों को छेडने में तो लड़को को मजा आता है। लड़किया कों तो लड़कों को छेडने में मजा आयेगा ना।
मैं: हे भगवान! कैसा कलयुग आ गया है, अब तो लड़कियां लड़कों को छेडती हैं। लड़कों की इज्जत सलामत ही नहीं रही अब तो।
सोनल: हा हा हा, बहुत छेड लिया लडको नें लडकियों को, अब हम लडकों से सारा बदला लेकर रहेंगी।
मैं: एक कहावत है कि चाहे आलू चाकू पर गिरे या चाकू आलू पर गिरे, कटना तो आलू को ही है।
सोनल: अच्छा! तो इसका इस बात से क्या मतलब हुआ।
मैं: मैं तो तुम्हें इंटेलीजेंट समझता था, तुम्हें इतना भी समझ में नहीं आया।
सोनल: अब ज्यादा पतलून मत उतारो, समझाओं मुझे।
मैं: अब लडके लडकियों को छेडे या लडकिया लडकों को छेडे, मजा तो लडकों को ही आना है।
सोनल: ऐसा नहीं है, लडकियों को भी मजा आता है छेडने में।
मैं: वो तो छिडवाने में भी आता होगा।
सोनल: नहीं आता।