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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

सोनल: किसका फोन था।
मैं: अपूर्वा का था, वो कह रही थी कि लेने आना है क्या। (मैंने स्कुूटी चला दी)
सोनल: हाव स्वीट! बहुत धयान रखती है तुम्हारा। मुझे तो लगता है कि उसके और तुम्हारे बीच में कुछ चल रहा है, पर तुम बता नहीं रहे हो।
मैं: हम बहत अच्छे दोस्त हैं, उससे ज्यादा कुछ नहीं है।
सोनल: अच्छा जी, फिर ठीक है। (और मुझसे सटकर बैठ गई)
उसके बूब्स को अपनी कमर में दबते महसूस करके मेरे शरीर में सिहरन सी दौड़ गई। मैं भी मजे लेने के लिए थोड़ा पीछे हो गया। सोनल ने अपने हाथ मेरे पेट पर रख दिये और मेरे कंधे पर सिर रखकर बैठ गई। तभी मुझे उसके हाथों में कुछ हरकत महसूस हुई। धीरे धीरे उसके हाथ मेरे पेट पर हरकत करने लगे थे। उसकी उंगलिया मेरी शर्ट के उपर से ही मेरे पेट पर थिरक रही थी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। उसने अपनी एक अंगली को मेरे पेट पर सहलाते हुए थोड़ा नीचे की तरफ कर दिया जो मेरी नाभि से नीचे आ गई। उसकी वो उंगली मेरी बेल्ट को टच हो रही थी। मैंने शॉर्ट शर्ट पहनी हुई थी। उसने अपनी उस उंगली से मेरी शर्ट को थोडा सा उपर उठाया और मेरी जींस के किनारों के साथ मेरे पेट पर अपनी उंगली घुमाने लगी। मेरे शरीर में बहुत ज्यादा सिहरन हो रही थी और मेरा पप्पू तो पहले से ही अंडरवियर के अंदर धमाचौकड़ी मचा रहा था।
तभी अचानक सोनल ने अपनी एक उंगली मेरी जींस के थोड़ा सा अंदर कर दी और मेरी बनियान को खींच कर जींस से बाहर निकाल दिया और अपनी उंगली वापिस जींस के किनारों के साथ साथ मेरे पेट पर फिराने लगी। उसकी उंगली को अपने नंगे पेट पर महसूस करके मेरे शरीर ने एक झटका लिया और मेरे पूरे शरीर में करंट सा दौड़ गया।
मेरा दांया हाथ अपने आप उसके हाथ के उपर आया और उसके हाथ को पकड़ लिया। मुझपर हल्की हल्की मदहोशी छाने लगी थी। मैंने उसका हाथ पकड़ कर वहां से हटाकर वापिस अपने पेट पर रख दिया और अपना हाथ वापिस हैंडल पर ले गया क्योंकि स्कूटी की स्पीड कम हो गई थी।
मैं: सोनल यार! आराम से बैठों ना, खामखां एक्सीडेंट हो जायेगा।
सोनल: एक्सीडेंट क्यों हो जायेगा, अपना धयान सामने रखों।
मैं: अब इस तरह की हरकत करोगी तो सामने धयान कैसे रहेगा।
सोनल: क्यों मैंने क्या किया। मैं तो बस थोड़ी छेडछाड कर रही हूं।
मैं: तुम थोड़ी छेडछाड कर रही हो, पर मुझे प्रॉब्लम तो ज्यादा हो रही है।
सोनल: अच्छा तो जी जनाब को थोड़ी सी छेडछाड में ज्यादा प्रॉब्लम हो रही है।
सोनल: वैसे मुझे तो बहुत मजा आ रहा है तुम्हें छेडते हुए।
मैं: मैं कोई लड़की थोडे ही हूं जो मुझे छेडने में तुम्हें मजा आ रहा है।
सोनल: तो मैंने कब कहा कि लड़की हो।
सोनल: अब लड़कियों को छेडने में तो लड़को को मजा आता है। लड़किया कों तो लड़कों को छेडने में मजा आयेगा ना।
मैं: हे भगवान! कैसा कलयुग आ गया है, अब तो लड़कियां लड़कों को छेडती हैं। लड़कों की इज्जत सलामत ही नहीं रही अब तो।
सोनल: हा हा हा, बहुत छेड लिया लडको नें लडकियों को, अब हम लडकों से सारा बदला लेकर रहेंगी।
मैं: एक कहावत है कि चाहे आलू चाकू पर गिरे या चाकू आलू पर गिरे, कटना तो आलू को ही है।
सोनल: अच्छा! तो इसका इस बात से क्या मतलब हुआ।
मैं: मैं तो तुम्हें इंटेलीजेंट समझता था, तुम्हें इतना भी समझ में नहीं आया।
सोनल: अब ज्यादा पतलून मत उतारो, समझाओं मुझे।
मैं: अब लडके लडकियों को छेडे या लडकिया लडकों को छेडे, मजा तो लडकों को ही आना है।
सोनल: ऐसा नहीं है, लडकियों को भी मजा आता है छेडने में।
मैं: वो तो छिडवाने में भी आता होगा।
सोनल: नहीं आता।
 
और सोनल ने अपना हाथ फिर से मेरी शर्ट और बनियान को हटाकर मेरे पेट पर रख दिया और अपनी एक उंगली मेरी नाथि में डालकर मसाज देने लगी।
सोनल की उंगली ने जैसे ही मेरी नाभि में टच किया, मेरे मुंह से आह निकल गई।
सोनल: बड़ा मजा आ रहा है छिडवाने में।
मैं: बस पूछो मत, मन तो कर रहा है कि यहीं कहीं साइड में स्कूटी खडी कर दूं और तुम ऐसे ही छेडती रहो।
सोनल: चुपचाप ड्राइव करते रहो।
थोड़ी ही देर में हम बापू नगर पहुंच गये और मैंने स्कूटी को अपने बॉस के घर की तरफ घुमा दिया और घर के बाहर जाकर स्कूटी रोक दी। सोनल नीचे उतरी और मैं भी स्टैंड लगाकर नीचे उतर गया।
मैं: ओके मेरा डेस्टिनेशन आ गया, सफर को इतना मजेदार बनाने के लिए थेंक्स।
मेरी बात सुनकर सोनल थोडा शरमा गई और अपनी नजरे नीचे झुका ली। तभी मुझे पीछे से अपूर्वा भी अपनी स्कूटी पर आती हुई दिखाई दी।
मैं (सोनल की तरफ देखते हुए): लो, अपूर्वा भी आ गई।
मेरी बात सुनकर सोनल ने पीछे देखा।
सोनल: ये है अपूर्वा, ओह माई गोड ये तो बहुत सुंदर है। मुझे नहीं लगता कि तुम्हारे बीच कुछ नहीं होगा। जरूर तुम्हारे बीच में कुछ तो होगा ही।
इतने में अपूर्वा भी हमारे पास पहुंच गई। अपूर्वा ने अपना हेलमेट उतारा और स्कूटी की सीट के नीचे रख दिया और हमारे पास आकर खड़ी हो गई।
सोनल: हाय अपूर्वा!
अपूर्वा (थोड़ी असमंझस के भाव अपने चेहरे पर लोते हुए): हाय!
अपूर्वा के चेहरे पर थोड़ी असमंझस देखते हुए मैंने कहा: अपूर्वा, ये हैं सोनल।
अपूर्वा: ओह, तो ये हैं सोनल जी, वाव आप तो बहुत खूबसूरत हैं।
सोनल: पर आपसे ज्यादा नहीं। आप तो सच में एक दम परी लग रही हैं।
अपूर्वा ने व्हाइट कमीजऔर चूडीदार सलवार पहन रखी थी। वाकई में अपूर्वा इस ड्रेस में एकदम परी की तरह बहुत ही प्यारी लग रही थी।
अपूर्वा: अरे ये तो आपका बडपन है, नहीं तो आप मुझसे ज्यादा खूबसूरत हैं।
मैं: सच अपूर्वा, तुम एकदम परी की तरह बहुत ही प्यारी लग रही हो।
मेरी बात सुनकर अपूर्वा का चेहरा एकदम लाल हो गया और उसने अपना चेहरा नीचे झुका लिया।
सोनल अपूर्वा की तरफ ही देखे जा रही थी। उसकी नजरे अपूर्वा पर से ही हट ही नहीं रही थी।
मैंने सोनल को छेड़ते हुए कहा: क्या हुआ, लगता है पसंद आ गई अपूर्वा जी आपको। कहीं शादी करने का मूड तो नहीं बन गया है, अपूर्वा के साथ।
सोनल: बकवास मत करो! मैं कोई लेस्बो नहीं हूं, जो किसी लड़की से शादी करूंगी, पर हां अगर मैं लड़का होती तो तुरंत अपूर्वा से शादी कर लेती। सच में बहुत ही प्यारी है, एकदम गुड़िया के जैसी। (और सोनल ने अपूर्वा के गालों को हाथों से सहलाते हुए उसके गालों पर एक चुटकी काट ली।)
अपूर्वा के मुंह से हल्की चीख निकल गई।
मैं: अरे यार! गुडिया भी कह रही हो और उपर से काट भी रही हो। थोडा तो रहम करो।
सोनल: अच्छा जी! ब्हुत दया आ रही है।
मैं: आये क्यों, ना देखों, मेरी प्यारी सी दोस्त के गाल पे कैसा लाल निशान कर दिया।
सोनल: हां, हां, प्यारी सी दोस्त। मैं सब समझती हूं, प्यारी सी दोस्त का मतलब।
सोनल की बात सुनकर अपूर्वा का चेहरा फिर से लाल हो गया, और उसने अपने नजरे वापिस से नीचे झुका ली।
मैं: ओके, अब चलो नहीं तो कॉलेज के लिए लेट हो जाओगी।
सोनल: अच्छा मुझे भगाना चाहते हो, यहां से। मैं कभी कॉलेज लेट नहीं होती। अभी कॉलेज के लिये टाइम ही टाइम है। मैं तो प्यारी सी परी से बढिया तरह से मिलकर जाउंगी।
सोनल: हाय मेरी प्यारी सी गुडिया, चल ना कहीं रेस्टोरेंंट में चलते हैं थोड़ी देर के लिए, वहां खूब गप्पे लड़ायेंगे।
तभी बॉस की गाड़ी हमारे पास आकर रूकी।
अपूर्वा: लो, हो गई छूट्टी, अब तो सीधा ऑफिस में ही घुसना पड़ेगा।
अपूर्वा की बात सुनकर मैं हंस दिया।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--7
गतांक से आगे ...........
सोनल: हंस लो, हंस लो, शाम को देखूंगी घर आकर।
मैं (सोनल की चिड़ाते हुए): क्यों अभी क्या आंखों पर पट्टी बंधी हैं।
तभी बॉस गाड़ी से बाहर आ गये।
मैंने और अपूर्वा ने बॉस को गुड मॉर्निग की और सोनल ने भी गुड मॉर्निग सर कहा।
बॉस: गुड मॉर्निग। ये कौन अपूर्वा की सिस्टर है क्या।
अपूर्वा: नहीं बॉस, वो समीर की फ्रेंड है।
बॉस: ओह! मैंने सोचा कि अपूर्वा की सिस्टम होगी।
सोनल (बहुत धीरे से ताकि बॉस का ना सुनाई दे): काश! होती तो मजा आ जाता।
बॉस: ओके, आओ अब बाहर ही खड़े रहोगे।
मैं: ओके बॉस, अभी आते हैं।
मैं: बाये सोनू जानू, अब तो यहां से भागना ही पडेगा।
सोनल: हां, अब तो यहां से फूट लेती हूं, (और वो अपूर्वा के पास आई और उसके गले लग गई)।
अपूर्वा ने भी उसे अच्छी तरह से हग किया और फिर सोनल मुझे बाय बोलकर अपनी स्कूटी स्टार्ट करके चल दी।
मैं और अपूर्वा अंदर आ गये, बॉस पहले ही अंदर आ चुके थे। हम अंदर आकर सीधे ऑफिस में आ गये और अपने-अपने सिस्टम ऑन कर लिये।
मैं (अपूर्वा की तरफ देखते हुए): सॉरी!
अपूर्वा: किसलिए!
मैं: वो मेरे लिए तुम्हें सुबह सब काम जल्दी जल्दी करने पड़े, और फिर भी मैं किसी और के साथ ही आ गया।
अपूर्वा: अब ज्यादा सेंटी होने की जरूरत नहीं है। पर मुझे गुस्सा तो बहुत आया, कि मैं तो सुबह से परेशान हो रही हूं और जनाब हैं कि एक फोन भी नहीं किया।
मैं (कान पकड़ते हुए): सॉरी यार!
अपूर्वा मेरे पास आई और मेरे हाथों को मेरे कानों पर से हटाकर दोनों हाथों पर एक एक चूमी ली और कहा -
अपूर्वा: इट्स ओके यार! चलता है।
मैं: वैसे आज तुम एकदम कमाल की लग रही है। मन कर रहा है तुम्हें बाहों में भरकर चूम लूं।
मेरी बात सुनकर अपूर्वा शरमा गई और अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमाकर मंद मंद मुस्कराने लगी।
मैंने अपूर्वा के चेहरे को अपने हाथों में थामा और उसके फोरहेड (माथे) पर अपेन होठों की एक प्यारी सी चूमी दी। अपूर्वा की आंखे बंद थी और वो मंद मंद मुस्करा रही थी।
तभी बॉस बाहर से फोन पर बाते करते हुए आते हुए सुनाई दिए, मैं अपनी चेयर पर आकर बैठ गया और अपूर्वा अपनी चेयर पर जाकर बैठ गई।
बॉस अंदर आते हुए: समीर! वो जो यूनिवर्सिटी का प्रोजेक्ट चल रहा है, उसके लिए वो सोनिया जी आयेंगी, वो यूनिवर्सिटी में मैंनेजमेंट में हैं, वो उस प्रोजेक्ट के बारे में कुछ समझायेंगी, वो समझ लेना उनसे। मैं बैंक जा रहा हूं, आज पैसे जमा करवा हीं दूंगा अगर कुछ समझौता हुआ तो।
और अपूर्वा तुम वो (ये कहते हुए बॉस अपूर्वा की तरफ घूम गये) मिश्रा एंड संस का जो बिलिंग सॉफ्रटवेयर तैयार करना है, उसकी रूपरेखा तैयार कर लेना, फिर ऑफिस चलते ही, अपनी टीम के साथ उस पर जुट जाना, वो जल्दी ही पूरा करके देना है।
अपूर्वा: ओके बॉस!
 
बॉस: खूबसूरत लग रही है ये ड्रेस तुम पर, एकदम परी के जैसी लग रही हो।
अपूर्वा: थेंक्स बॉस!
बॉस ये कहकर बाहर चले गए और हम अपने-अपने कामों में लग गए।
मैं बार बार अपूर्वा को देख रहा था, पर वो तो अपने काम में इतनी मग्न हो गई थी कि जैसे यहां पर और कोई है ही नहीं।
मुझे बाहर से किसी के कदमों की आहट सुनाई दी तो मैं भी अपने काम में लग गया। तभी मैंम अंदर दाखिल हुई और हमें गुड मॉर्निग कहा।
गुड मॉनिंग मैम, मैंने और अपूर्वा ने एक साथ कहा।
मैम की नजर मुझपर ही थी और वो मेरे पास आकर खड़ी हो गई। उन्होंने अपनी जांघों को मेरे कंधे से सटा दिया और मेरे बालों में हाथ फिराने लगी।
अब धीरे धीरे मुझे भी समझ में आने लगा था कि मैम मुझसे कुछ चाहती है, पर फिर भी मैं अपना काम करता रहा और मैंने मैम की तरफ ज्यादा धयान नहीं दिया। थोडी देर बाद मैम अपूर्वा की तरफ गई और अपूर्वा को देखकर बोली:
मैम: वॉव अपूर्वा ! आज तो तुम एकदम परी लग रही हो।
मैम की बात सुनकर अपूर्वा शरमा गई।
मैम (अपूर्वा को शरमाते देखकर): सच कह रही हूं। बहुत ही खूबसूरत लग रही हो।
अपूर्वा: मैं आज सुबह से ही जो भी मुझे देख रहा है, वो ही सीधा यही कहता है कि एकदम परी लग रही हो। अब मैं इतनी भी सुंदर नहीं हूं।
मैम: किसने कह दिया तुम्हें कि तुम सुंदर नहीं हो।
मैम: समीर, क्या अपूर्वा सुंदर नहीं है।
मैं: मैम, अब इसको इतनी बार तो बता चुका हूं कि तुम बहुत ही ज्यादा सुंदर हो, पर ये मानती ही नहीं है। और मैम इसे पता तो है कि ये बहुत सुंदर है, पर ये हमारे मजे लेने के लिये कह रही है।
मेरी बात सुनकर हम तीनों हंस दिये।
मैम: ठीक है, मैं चाय लेकर आती हूं। (ये कहकर मैम बाहर चली गई)।
थोड़ी देर बाद मैम चाय लेकर आ गई और दो कप में मुझे और अपूर्वा को दी और एक कप खुद लेकर वहीं चेयर पर बैठ गई।
मैं और अपूर्वा मैम की तरफ ही मुंह करके बैठे थे।
मैम: समीर, घर पे कौन कौन है, तुम्हारे।
मैं: मैम यहां पर तो अकेला ही रहता हूं।
मैम: क्या। फिर घरवाले कहां रहते हैं।
मैं: गांव में।
मैम: तुम यहा के रहने वाले नहीं हो क्या?
मैं: नहीं मैम, मैं हरियाणा का रहने वाला हूं, रोहतक से।
मैम: ओह, तो ये बात है (और मैम कुछ सोचने लगी)।
मैम: यहां पर कहां रहते हो।
मैं: मालवीय नगर में।
मैम: हूं, बढ़िया एरिया है, एकदम शांत, साफ-सुथरा। तुम्हारे सर को कहती रहती हूं कि उधर ही ले लो एक घर, पर सुनते ही नहीं हैं।
अपूर्वा: मैम बापू नगर भी बढ़िया एरिया ही है, एकदम साथ सुथरा, और शहर की सभी लोकेशन पे फिट बैठता है।
मैम: वो तो है, पर यहां पर शोर बहुत ज्यादा रहता है।
अपूर्वा ने चाय खत्म की और बाथरूम चली गई।
अपूर्वा के जाते ही मैम ने अपनी चेयर मेरे पास की और मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी जांघों पर रखकर उपर से अपना हाथ रख दिया। मैम की इस हरकत से मैं बैचेन हो गया। अपूर्वा किसी भी वक्त वापिस आ सकती थी।
मैम: समीर, मैं तुम्हें कैसे लगती हूं।
मैं: मैम आप बहुत अच्छी हैं।
मैम: मेरा मतलब सुंदर लगती हूं या नहीं।
मैं: हां, मैम आप बहुत सुंदर हो। (मैंने अपने हाथ को वापिस खींचना चाहा, पर मैम ने मेरे हाथ को अपने हाथ से कसकर पकड़ लिया)।
मैम: जब मैं तुम्हें सुंदर लगती हूं तो फिर हाथ क्यों छुड़ा रहे हो।
मैं: नहीं मैम, मेरे कहने का मतलब वो नहीं था, आप सुंदर हो, पर आप मेरी मैम हो।
मैम: तो क्या हुआ, मैम ही तो हूं, कोई मां थोड़े ही हूं।
मैं: मैम, प्लीज हाथ छोडों, अपूर्वा ने देख लिया तो प्रोब्लम हो जायेगी।
मैम: ओह! तो बच्चू अपूर्वा से चक्कर चल रहा है तेरा। (और मैम ने अपना दूसरा हाथ मेरे गालों पर रख दिया।

तभी बाथरूम से फलश के चलने की आवाज आई। मैम वापिस मुझसे दूर होकर बैठ गई और अपनी चाय खत्म की। मेरी चाय भी खत्म हो चुकी थी। मैंने खाली कप मैम को पकड़ा दिया। मैम ने मेरा हाथ पकड़ लिया, तभी बाथरूम का दरवाजा खुला तो मैम ने मेरा हाथ छोड़कर कप मुझसे ले लिया। और वापिस वहीं पर आराम से बैठ गई। अपूर्वा वापिस आकर अपनी चेयर पर बैठ गई। मैम थोड़ी देर में कप उठाकर बाहर चली गई। मैं और अपूर्वा अपने काम में बिजी हो गए।
लगभग 2 बजे के आसपास सोनिया मैम आ गई। सोनिया मैम कोई 40-45 साल की औरत थी, उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी। उनका रंग भी थोड़ा सांवला था, पर नयन नक्श काफी तीखे थे। साड़ी में से उनका बाहर को निकला हुआ पेट झलक रहा था। पेट बाहर को निकला होने के कारण उनके बूब्स का सही साइज मालूम नहीं हो पा रहा था। सोनिया मैम आकर चेयर पर बैठ गई। मैम (बॉस की वाइफ) हमारे लिए चाय बना लाई।
 
सोनिया मैम: सर जी नहीं हैं क्या?
अपूर्वा: वो किसी काम से बैंक गये हुए हैं, समीर जी को प्रोजेक्ट के बारे में समझने को कह गये हैं।
सोनिया मैम (मेरी तरफ मुखातिब होते हुए): आप हैं समीर जी।
मैं: जी सोनिया मैम जी।
सोनिया मैम (चाय पीते हुए): ओके, पहले चाय खत्म करते हैं, फिर काम के बारे में बातें करते हैं।
मैं: ओके मैम।
और फिर हम सभी चाय पीने लग गए। मैम चाय देकर वापिस चली गई थी।
चाय पीने के बाद सोनिया मैम में प्रोजेक्ट के बारे में इंस्टरक्शन दिये और एक घण्टे बाद चली गई।
4 बजे के आसपास बॉस भी बैंक से आ गये।
ळमने बॉस से पूछा कि क्या हुआ तो बॉस ने कहा कि अभी कुछ टाइम लग रहा है, वो नेगोसियेट करने में आना कानी कर रहे हैं, तो हो सकता है 4-5 दिन और लग जाये। बॉस की बात सुनकर अपूर्वा का चेहरा मुरझा गया।
मैं: कोई बात नहीं बॉस, आराम से मामला सुलझाओ। जितने कम में हो सके मामला सैट करना।
बॉस: कोशिश तो यही है कि कम से कम देने पड़े।
बॉस: अच्छा वो सोनिया मैडम आई थी क्या।
मैं: हां बॉस वो अभी एक घण्टा पहले ही गई हैं।
बॉस: सब अच्छी तरह से समझ लिया ना। ये सरकारी आदमी ऐसे ही होते हैं, बाद में कहने लगेगे कि हमने तो आपको समझा दिया था क्या करना है, अब आप ने काम नहीं किया।
बॉस: खामखां में टेंडर कैंसिल कर देंगे।
मैं: नहीं बॉस, बढ़िया तरह समझ लिया। कोई दिक्कत नहीं आयेगी।
बॉस बाहर चले गये। साढ़े चार बजे मैंने अपूर्वा को कहा कि मैं अपनी बाइक में पंक्चर लगवा लेता हूं, तब तक तुम अकेली बैठी काम करो। और मैं बाइक में पंक्चर लगवाने चला गया।
पंक्चर वाला पास में ही था कोई 100-150 मीटर पर। मैंने वहां पर पंक्चर लगवाया, तब तक पांच बज गये थे। पंक्चर लगवाकर मैं वापिस ऑफिस आ गया। अपूर्वा अपनी स्कूटी निकाल ही रही थी। मैं अंदर से अपना हेलमेट उठा कर लाया और बॉस को गुड इवनिंग बोलकर बाहर आ गया।
अपूर्वा बाहर अपनी स्कूटी को स्टैंड लगा कर उस पर बैठी थी।
मैं: चलना नहीं क्या, तुम तो ऐसे बैठ गई जैसे किसी का इंतजार चल रहा हो।
अपूर्वा: हां जी, आपका ही इंतजार हो रहा था।
मैं: ओहो, स्टैंड लगाकर।
अपूर्वा: आज कहीं घूमने चले।
मैं: अब।
अपूर्वा: और क्या, पांच ही तो बजे हैं, कुछ देर पार्क में बैठते हैं ना।
मैं: और तुम्हारी मम्मी की डांट कौन खायेगा फिर।
अपूर्वा: कुछ नहीं, कह दूंगी कि फ्रेंड के साथ घूमने चली गई थी।
मैं: अच्छा जी, चलो तो।
और हम नेहरू गार्डन में आ गये। हमने गाड़ियां गार्डन के बाहर पार्क की और अंदर की तरफ चल दिये। अचानक अपूर्वा ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
(अरे मेरा मतलब ये नहीं है कि बांह को पकड़ लिया, जैसे लड़का लड़की हाथ में हाथ डालकर घूमते हैं, वैसे मेरे हाथों की उंगलियों में अपने हाथों की उंगलियां फंसा ली, आप भी कुछ भी सोच लेते हैं)।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--8
गतांक से आगे ...........
मैंने अपूर्वा की तरफ देखा, उसका चेहरा नीचे था और वो मंद मंद मुस्करा रही थी।
पार्क में सभी मनचलों की नजरें हमें (मतलब अपूर्वा को) ही घूर रही थी। अपूर्वा ने अपना हाथ मेरे हाथ में पूरी तरह डालते हुए अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और हम इसी तरह पार्क में टहलने लगे। नेहरू पार्क में बच्चों के मनोरंजन के लिए ट्रेन चलती है, जिसमें 10 रूप्ये की टिकट लगती है।
अपूर्वा: चलो ना ट्रेन में सवारी करते हैं।
मैं: अरे वो बच्चों की ट्रेन है।
अपूर्वा: वो देखो, वो अंकल आंटी भी तो बैठे हैं, चलो ना।
मैं: ओके। (और हम ट्रेन की टिकट लेकर ट्रेन में बैठ गये)
हमारे सामने दो पति-पत्नी बैठे थे (ऐसा मुझे लगा कि वो पति-पत्नी ही होने चाहिए, बाकी तो पता नहीं थे भी या नहीं)।
तभी ट्रेन ने सीटी दी और चल पड़ी। ट्रेन चलते ही, पत्नी ने अपना सिर पति के कंधों पर रख लिया और अपना एक हाथ उसकी कमर के पीछे से पेट पर कस लिया। पति पहले तो थोड़ा झिझका हमारे सामने बैठे होने की वजह से, पर फिर उसने भी अपना एक हाथ पिछे से ले जाकर अपनी पत्नी की जांघों पर रख दिया।
अपूर्वा मेरे हाथ को अपने हाथों में लेकर बैठी थी और हमारे हाथों को अपनी जांघों पर रखा हुआ था और अपने दूसरे हाथ से मेरे हाथ को सहला रही थी। तभी ट्रेन अचानक रूक गई, हमने देखा कि फाटक खुली हुई थी और कुछ बच्चे उसे पार कर रहे थे। बच्चों के फाटक पार करने पर फाटक बंद कर दी गई और ट्रेन वापिस चल पड़ी। अपूर्वा ने भी अपना सर मेरे कंधों पर रख दिया। ट्रेन सीटी बजाते हुए अपना सफर तय कर रही थी।
अपूर्वा के इस तरह बिहेव करने पर मुझे आश्चर्य भी हो रहा था, परन्तु खुशी भी बहुत हो रही थी, क्योंकि वो थी ही इतनी प्यारी की कोई भी उसके साथ को मचल उठे और मुझे तो वो बिन मांगे ही मिल रहा था।
परन्तु कहते हैं ना कि बिन मांगी चीज की ज्यादा कद्र नहीं होती, तो मैं भी अपूर्वा के इस बिहेवियर को केवल अच्छे दोस्त के रूप में ही देख रहा था। मेरे मन में उसके लिए कोई गंदे विचार नहीं थे।
मैंने अपना दूसरा हाथ अपूर्वा के हाथ के उपर रख दिया जो मेरे पहले हाथ को सहला रहा था। अपूर्वा ने एक बार अपना सिर उठाकर मेरी तरफ देखा, पर मैं अपने हाथों की तरफ ही देख रहा था, तो अपूर्वा ने वापिस अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया।
 
थोड़ी देर में ट्रेन वापिस उसी स्टेशन पर आकर रूक गई, जहां से हम बैठे थे। मैंने धीरे से अपूर्वा के कान में कहा, स्टेशन आ गया, चलो अब उतरना है।
अपूर्वा मेरे हाथ को वैसे ही अपने हाथ में लिए हुए उठ गई और हम ट्रेन से बाहर आ गये ।हम पार्क में टहलते हुए फांउटेन के पास जाकर बैठ गये। फाउंटेन के कारण वहां का वातावरण काफी सुहाना था और भीनी भीनी खूशबू के साथ ठंडा ठंडा महसूस हो रहा था। वहां पर बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। अपूर्वा मेरे हाथ को खींचते हुए वहीं पर बैठ गई और उसके साथ मैं भी वहीं पर घास पर बैठ गया।

बैठते ही अपूर्वा ने अपना सिर वापिस मेरे कंधे पर रख दिया।
अपूर्वा: मैं कल नहीं आ पाउंगी।
मैं: क्यों?
अपूर्वा: वो मम्मी के साथ दौसा जाना है।
मैं: क्यों, लड़का देखने जा रही हैं क्या तेरे लिए।
अपूर्वा: आप भी ना! वो मेरी मौसी जी रहती हैं, वहां पर उनकी लड़की की सगाई है, तो उसमें जा रहे हैं। दो बाद आउंगी।
मैं: तो तुमने बॉस से छुट्टी के लिए तो कहा ही नहीं।
अपूर्वा: कह दिया, जब आप बाइक में पंक्चर लगवाने गए थे, तब कह दिया था।
मैं: ये आप-आप क्या लगा रखा है, मैं तुम्हें तुम कह रहा हूं, और तुम हो कि आप आप लगा रखा है।
अपूर्वा: मुझे आपको तुम कहना अच्छा नहीं लगता, मैं तो आप ही कहूंगी।
तभी अपूर्वा का फोन बजने लगा। अपूर्वा ने कॉल रीसीव की।
अपूर्वा: थोड़ी देर में आ रही मम्मी (और हतना कहकर फोन रख दिया)।
मैं: क्या कह रही थी, आंटी।
अपूर्वा: पूछ रही थी अभी तक आई क्यों नही?
मैं: तो अब हमें चलना चाहिए।
अपूर्वा: क्यों, कोई इंतजार कर रही है घर पर।
मैं: हम तो अलहड़ बंदे हैं, हमारा कोई इंतजार नहीं करता।
अपूर्वा: तो फिर थोड़ी देर और बैठते हैं ना।
अब अपूर्वा का एक हाथ मेरी सातल पर हल्के हल्के घूम रहा था (अरे यार वो मुझे गरम नहीं कर रही थी, वो तो बस ऐसे ही बैठे हुए प्यार से सहला रही थी, आप लोग भी ना कुछ भी सोचने लग जाते है)।
मुझे अपूर्वा की गर्म सांसे अपने गालो पर महसूस हो रही थी क्योंकि उसने अपना सर मेरे कंधे पर जो रखा हुआ था।
मैंने अपने चेहरे को थोड़ा था अपूर्वा की तरफ घुमाया तो उसके होंठ मेरे गालों पर टच होने लगे। मैंने कुछ देर अपने चेहरे को वैसे ही रखा तो अपूर्वा ने मेरे गालों पर हल्के से एक किस कर दी।
तभी मेरा फोन बज उठा, मुझे थोडा सा घूसा आया, पर फिर फोन में से आती हुई आवाज ने बताया कि मोम का फोन है तो मेरा गुस्सा गायब हो गया (मेरे पास नोकिया 5230 है, जिसमें कॉल आने पर नम्बर जिस नाम से सेव होता है, रिंग के साथ वो नाम भी बोलते हैं।)
मैंने फोन उठाया।
मैं: हाय मॉम!
मॉम: मैं अभी मरी नहीं हूं, जो हाय हाय कर रहा है।
मैं: ओह मॉम, आप भी ना।
मॉम: कैसा है मेरा बेटा, कहीं कमजोर तो नहीं हो गया, कितनी मरी मरी आवाज आ रही है, कुछ खाता भी है या नहीं।
मैं: मॉम मैं बिल्कुल ठीक हूं, आप खामखां परेशान होती हैं।
मॉम: हां, मुझे ही पता है, कैसा ठीक है। जब भी आता है, इतना पतला होके आता है।
मॉम: अच्छा, वो तेरे शादी के लिए रिश्ता आया हुआ है, तु 2 दिन के लिए घर आजा। बता कब आ रहा है, ताकि मैं उनको टाइम बता दूं कि कब आना है, तेरे को देखने के लिए।
मॉम: लड़की मैंने देख ली है, एकदम सुशील और खूबसुरत है, तेरे से ज्यादा पढ़ी लिखी भी है। और मुझे पंसद भी है।
(दोस्तों मैं किन्हीं कारणों से केवल आठवीं तक ही पढ़ा हूं।) अब आप सोचोगे कि आठवीं पढा लिखा सॉफ्रटवेयर इंजीनियर कैसे बन गया, अब तक फेंकता आ रहा था कि सॉफ्रटवेयर इंजीनियर हूं, अब खुल गई ना पोल।
पर मैं आपको बता दूं कि आठवीं में मेरे मार्क 92 प्रतिशत थे। वो तो किन्हीं कारणों से आगे पढ़ा नहीं। पर बाद में कम्प्यूटर सीख लिया और फिर तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। मैं आठवीं पढा हूं, इसलिए इतनी छोटी सी कम्पनी में काम करता हूं, क्योंकि बडी कम्पनी के लिए कम से कम ग्रेजुएट तो होना ही चाहिए।
 
मैं: फिर तो हो गई शादी, जब उसे पता चलेगा कि मैं आठवीं पढा हूं तो वो खुद ही मना कर देगी।
मॉम: ऐसे कैसे कर देगी, क्या हुआ आठवीं पढ़ा है तो कम्प्यूटर इंजीनियर है मेरा बेटा।
मेरे मुंह से शादी की बात सुनकर मुझे अपूर्वा के चेहरे पर थोड़ी चिंता के भाव दिखाई दिए। मैंने फोन की तरफ इशारा करते हुए अपूर्वा से कहा कि मॉम है, मेरी शादी की बात कर रही है। अपूर्वा थो़ड़ी फिकी मुस्कान मुस्करा दी और मैं वापिस फोन पर बात करने लगा।
मैं: जब उसे पता चलेगा ना कि लड़का आठवीं ही पढा हुआ है तो फिर आप चाहे इंजीनियर क्या पायलेट भी बताते रहना, वो यकीन ही नहीं करेगी।
मॉम: बस तुम घर आ जाओ मुझे कुछ नहीं मालूम, और जल्दी से बताना कि कब आ रहे हो।
मैं: क्या, फायदा मॉम, खामखां दो दिन के पैसे भी जायेंगे, और उनकी जो आवभगत होगी, वो भी बेकार जायेगी, मैं पहले ही कह रहा हूं।
मॉम: ज्यादा दादा मत बन, और जल्दी से घर आ जा।
मैं: ओके! मॉम मैं ऑफिस में बात करके बताता हूं, कब छृट्टी मिलेगी।
मॉम: जल्दी आना है, कहीं बहाने बनाने शुरू कर दे।
मैं: ओके मॉम! जल्दी ही आ जाउंगा।
मॉम: ओके बाये बेटा, और ठीक से खाना टाइम पे खा लेना, अगर अबकी बार फिर से कमजोर होके आया तो मारूंगी बहुत तुझे।
मैं: ओके मॉम बाये। (ऑर फोन कट हो गया।)
अपूर्वा: क्या हुआ, किसकी शादी हो रही है।
उसके चेहरे और आवाज से लग वो थोड़ा परेशान लग रही थी।
मैं: अरे, किसी की नहीं, वो मॉम कह रही थी कि मेरे लिये रिश्ता आया है। इसलिए घर बुला रही हैं।
अपूर्वा: तो, कब जा रहे हो। आपके मन में तो लड्डू फूट रहे होंगे शादी के।
अपूर्वा की आंखें कुछ नम सी हो गई थी, और आवाज भारी भारी हो गई थी।
मैं: अरे अभी से किसको शादी करनी है, वहां जाकर मना कर दूंगा। मॉम का भी शौक पूरा हो जायेगा, लड़की देखने का, बस।
मेरी बात सुनकर अपूर्वा मुस्करा दी।
अपूर्वा: ओके! तो अब चले, काफी टाइम हो गया।
मेरा मन तो कर रहा था कि ऐसे ही अपूर्वा के साथ बैठा रहूं, पता नहीं क्यों पर मैं उससे दूर नहीं होना चाहता था।
मैं अपमने मन से उठ खड़ा हुआ और मेरे साथ अपूर्वा भी खड़ी हो गई। हम वापिस पार्क से बाहर आ गये।
मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की और अपूर्वा को बायें बोला। अपूर्वा मेरे पास आई और अपना हाथ आगे बढ़ा दिया। मैंने उसके हाथ को थामकर हैंड सेक किया और अपूर्वा ने मेरे माथे पर प्यारी सी किस की और बाये कहकर अपनी स्कूटी स्टार्ट की औरएक दूसरे को बाये बोलकर अपने अपने घर के लिए चल दिये।

घर पहुंचकर मैंने बाइक को खड़ा किया और उपर आ गया। हल्का हल्का अंधेरा हो गया था।
उपर आते ही मेरे कानों में, गुस्से भरी आवाज पड़ी, अभी तक कहां थे, कब से वेट कर रही हूं।
मैंने आवाज की तरफ देखा तो सोनल खड़ी थी। उसने अपने दोनों हाथ अपनी कमर पर रखे हुए थे और अपनी बड़ी बड़ी आंखें मेरी तरफ निकालती हुई मुझसे पूछ रही थी।
सोनल: कहां थे अब तक, मैं आधे घण्टे से यहां वेट कर रही हूं। और अपना मोबाइल नम्बर दो। नम्बर होता तो फोन करके ही पूछ लेती।
मैं: अरे तो नम्बर तो आंटी से ले लेती, आंटी के पास तो मेरा नम्बर है ही।
सोनल: (अपने मोबाइल को छेड़ती हुई) चलो अब जल्दी से अपना नम्बर बोलो।
मैने सोनल को अपना नम्बर बताया और उसने एक मिस कॉल मेरे नम्बर पर दी कन्फर्म करने के लिए।
मैंने भी उसका नम्बर अपने मोबाइल में सेव कर लिया।
मैं: कोई खास काम था।
सोनल: (गुस्सा होते हुए) हां, बहुत खास काम है, पहले अंदर चलो तब बताती हूं।
मैं: ओके।
मैं लॉक खोलकर अंदर आ गया। सोनल भी मेरे पीछे पीछे अंदर आ गई। मैंने फ्रिज में से पानी पीया और सोनल को पानी के लिए पूछा।
सोनल: नहीं मुझे पानी नहीं, आज मुझे कुछ और पीना है।
मैं: और क्या पीओगी, बताओ, अभी हाजिर करते हैं।
सोनल: मैं अपने आप ले लूंगी, आप इधर आकर बैठ जाओं।
सोनल के इस तरह के व्यवहार से मैं थोडा विचलित था।
वो मेरे बैठ पर बैठी थी। मैं भी बैठ पर जाकर बैठ गया और अपने शूज उतारकर आराम से बैड पर लेट गया।
सोनल ने मेरी तरफ देखा और फिर वो भी कोहनियों के बल लेट गई। उसके आधे पैर बैड से बाहर थे तो उसने अपने पैरों को गुटनों से मोड कर उपर उठा लिया।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--9
गतांक से आगे ...........
उसने पजामी और टी-शर्ट पहन रखी थी। उसके कोहनियों के बल लेटने से मुझे उसके बूब्स के बीच की गहराई साफ दिखाई देने लगी। एक बार तो मेरी नजर उधर ही अटक गई, और मेरे पप्पू ने पेंट के अंदर अंगडाई लेनी शुरू कर दी। परन्तु फिर मैंने अपनी नजर हटाकर उसके चेहरे पर जमा दी। वो मुझे ही देख रही थी।
मैं: अब बोलो क्या जरूरी काम था।
उसके चेहरे पर हल्का हल्का गुलाबीपन झलक रहा था और उसकी आंखों में हल्के हल्के लाल डोरे दिखाई दे रहे थे।
सोनल: समीर, अगर मैं तुमसे कुछ पूछूं तो, तुम बुरा तो नहीं मानोगे।
मैं: अरे, मैं क्यों बुरा मानूंगा, हां अगर ऐसी बात हुई जो मैं नहीं बता सकता तो फिर नहीं बताउंगा। और अगर मैं नहीं बताउंगा तो बुरा तो तुम मनोगी फिर।
मेरी बात सुनकर सोनल ने अपने हाथ जोकि अब तक उसकी थोड़ियों को संभाले हुए थे को मेरी सातलों से सटाते हुए थोड़ा आगे कर दिये। वो इस तरह से लेटी थी कि मेरी और उसकी शेप थोड़े टेढे टी (इंग्लिश अक्षर) के समान थी।
सोनल ने अपना एक हाथ मेरे पेट पर रख दिया और मेरी शर्ट के बटन से खेलने लगी।
उसकी उस हरकत से मुझे सुबह वाली घटना याद आ गई, जब मैं उसकी स्कूटी पर ऑफिस गया था।
सोनल का हाथ मेरी शर्ट के बीच की जगह से मेरी बनियान को उपर खींचने लगा।
मैं: तुम्हें मेरे पेट और बनियान से क्या दुश्मनी है, इसको ठीक से रहने ही नहीं देती, सुबह ऑफिस जाते समय भी ऐसे ही।
सोनल ने अपने दूसरे हाथ की उंगली अपने हाेंठों पर रखते हुए कहा: श श्श्श्शााश्सससससस।
मैं उसकी इस हरकत से हैरान रह गया।
सोनल ने मेरी शर्ट का नीचे का एक बटन खोल दिया और शर्ट को साइड में करके मेरी बनियान को उपर कर दिया और मेरी नाभि पर अपनी उंगली फिराने लगी। (बचपन से कसरत करने के कारण मेरे शरीर पर सिर, चेहरे और जांघो को छोड़कर और कहीं बाल नहीं हैं, एकदम चिकना बदन है)।
सोनल के इस तरह उंगली फिराने से मुझे गुदगुदी महसूस हो रही थी और मैं अपने हाथ से उसके हाथ को हटा रहा था, पर वो बार बार वापिस अपना हाथ मेरे पेट पर रखकर मेरी नाथि पर अपनी उंगली फिराने लग जाती। उसकी इन हरकतों से मेरे शरीर में सिहरन दौड़ रही थी। सोनल की आंखें एकदम से लाल नजर आ रही थी और उसकी गरम सांसे मुझे अपने पेट पर महसूस हो रही थी। फिर उसने अपनी उंगली को थोड़ा नीचे करते हुए मेरे पेट पर नाभि से नीचे वाले भाग पर फिराने लग गई।
मैं: सोनल, क्या कर रही हो, गुदगुदी हो रही है, मान जाओ ना।
 
पर वो मेरी बात सुन ही नहीं रही थी। अब सोनल अपनी उंगली मेरी जींस के किनारों के साथ साथ फिरा रही थी। उसकी इस हरकत से मेरे पप्पू ने हरकत करनी शुरू कर दी थी। धीरे धीरे मेरा पप्पू अपना सिर उठाने लग गया था।
सोनल धीरे धीरे अपनी उंगली को मेरी जींस के किनारों के साथ साथ मेरे पेट पर घुमा रही थी और मेरे पूरे शरीर में सिहरन दौड़ रही थी। मेरा पेट हल्के हल्के उछल रहा था।
मैंने सोनल की तरफ देखा तो वो मंद मंद मुस्करा रही थी। उसने मेरी तरफ देखा और आंख मार दी। मैं भी मुस्करा दिया।
तभी वो अपनी उंगली को मेरी जींस के थोड़ा सा अंदर करते हुए फिराने लगी, अब उसकी उंगली मेरे सेंसेटिव पार्ट (लिंग के उभर वाला उभरा हुआ भाग) पर टच हो रही थी। उसकी इस हरकत से मेरा पप्पू एक दम से चौक्कना होते हुए तन कर खड़ा हो गया।
मैं घबरा रहा था कि कहीं सोनल को ना पता चल जाये मेरे मन में गंदे ख्याल आ रहे हैं।
मैंने अपना सिर थोड़ा सा उपर उठाकर देखा तो मेरी पेंट में थोड़ा सा उभार बन गया था, जिससे साफ पता चल रहा था कि मेरा पप्पू सतर्क हो चुका है। पेंट के उपर से हलके हलके झटके साफ महसूस हो रहे थे।
तभी अचानक सोनल अपनी जगह से उठी और मेरी टांगो के बीच में आकर उसी तरह से लेट गई। अब फर्क सिर्फ इतना था कि उसके बूब्स मेरी जांघों पर दबे हुए थे, जिन्हें मेरा पप्पू पूरी तरह से महसूस कर रहा था और ज्यादा तेज झटके खाने लगा था, मानों कह रहा हो कि मुझे बाहर निकालो, अंदर मेरा दम घूट रहा है।
सोनल ने अपनी दोनों कोहनियों मेरे पेट के दोनों तरफ रख दी और अपना चेहरा मेरी छाती पर रखकर लेट गई।
उसकी इस हरकत से तो मैं एकदम हैरान हो गया, और थोड़ा घबरा भी गया कि ये क्या कर रही है।
मैं: सोनल ये क्या कर रही हो, उठो। मुझे प्रोब्लम हो रही है।
सोनल ने अपना सिर मेरी छाती पर से उठाते हुए असमझस से भावों के साथ मेरी आंखों में देखने लगी। मैंने चेहरे के इशारे से उससे पूछा क्या चाहती है? तो वो मुस्करा दी और अपना चेहरा वापिस मेरी छाती पर रख लिया।
मेरा लिंग बहुत ज्यादा कठोर हो गया था, परन्तु उसे फेलने के लिए ज्यादा जगह न मिलने के कारण दर्द कर रहा था।
मैं: ओके बाबा! अब उठो, मुझे कपड़े चेंज करने दो। इन कपड़ों में मुझे प्रोब्लम हो रही है।
सोनल: ऊंहूंहूहूहू!
मैं: क्या ऊंहूूहूूहूह।
सोनल ने अपना चेहरा उपर उठाया और मेरी तरफ देखते हुए, मैं अपने आप चेंज कर दूंगी, आप बस लेटे रहो। मुझे आपके उपर लेटकर बहुत सुखद अहसास हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि मैं बस हमेशा ऐसे ही आपके साथ लेटी रहूं।
मैं: ये क्या पागल पन है सोनल! आंटी को पता चल गया तो प्रॉब्लम हो जायेगी।
सोनल: नहीं पता चलेगा।
मैं: अरे चलेगा क्यों नहीं।
सोनल: अब जबरदस्ती बताओगे क्या। कह दिया ना कि नहीं पता चलेगा।
और अपने हाथों को मेरे सिर पर रखकर मेरे बालों को सहलाने लगी।
अब वो कुछ उपर हो गई थी जिससे उसके बूब्स मेरे पेट में चुभ रहे थे। उसके निप्पल एकदम तनकर कड़े हो गये थे।
मुझपर भी मदहोशी छोने लगी थी। और मेरी सांसे तेज होने लगी थी। मेरा लिंग जींस को फाडने को आ गया था। मुझे बहुत दर्द हो रहा था।
मैं: एकबार उठो मुझे बहुत प्रॉब्लम हो रही है। (और मैंने उसे पकड़कर साइड में लुढका दिया)।
वो दूसरी तरफ लुढकर आराम से लेट गई और मुझे देखने लगी।
मैं: अपना चेहरा दूसरी तरफ करो।
सोनल: क्यों?
मैं: मैंने कहा ना कि करो।
सोनल: ओके!
और उसने मेरी शर्ट को पकड़ लिया और अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया। शायद उसे डर था कि कहीं मैं उसका चेहरा दूसरी तरफ करवा कर भाग ना जाउं।
मैंने जल्दी से बैठ कर जींस की जीप खोली और अपने पप्पू को अंडरवियर के अंदर एडजेस्ट किया।
मैं: प्लीज छोड़ो ना, मैं कपड़े चेंज कर लेता हूं।
मेरा इतना कहते ही उसने मुझे दूसरे हाथ से भी पकड़कर वापिस बैड पर गिरा दिया।
मैं (थोड़ा गुस्सा होते हुए): छोड़ो मुझे, क्या बदतमीजी है ये।
 
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