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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--16
गतांक से आगे ...........
मैंने उसके होंठों को छोड़ा और अपनी उंगली उसके मुंह में दे दी। सोनल ने मेरी उंगली पर लगा सारा रस चाट लिया और मिठाई के डिब्बे को साइड में रख दिया और अपनी उंगली मेरे मुंह में दे दी। हमने एकदूसरे की उंगलियों को चाटकर साफ किया और हमारे लब फिर से एक दूसरे में गुम हो गये।
सोनल मेरे उपर वाले होंठ को चुसने लगी और में उसके नीचे वाले होंठ को। मुझे तो पहले से ही शुकन्तला ने गरम किया हुआ था, मैंने अपने हाथ उसके बूब्स पर रख दिये। सोनल भी कहां पीछे रहने वालों में थी, उसने अपना हाथ मेरी शॉर्ट के अंदर डाला और अंडरवियर के उपर से ही मेरे लिंग को पकड़ लिया। मेरे मुंह से एक सिसकारी निकली जो हमारे होठों के चुम्बन में ही कहीं गुम हो गई। मैंने सोनल के निप्पल को (जो कि तनकर कड़क हो गये थे) अपनी उंगलियों के बीच में लिया और मसलने लगा। सोनल मचलने लगी और उसने अपना दूसरा हाथ मेरे सिर पर रख दिया और मेरे बालों को सहलाने लगी। मैंने उसके कमीज को पकड़ा और उपर उठाने लगा। पिछे से वो सोनल के नीचे दबा हुआ था, इसलिए उपर नहीं उठ पा रहा था। मेरी उलझन समझ कर उसने अपने कुल्हों केा थोड़ा सा उपर उठाया और मैंने सूट को उसके मम्मों से उपर कर दिया और ब्रा के उपर से ही उसके मम्मों को सहलाने लगा। जब मुझे ब्रा के उपर से जयादा मजा नहीं आया तो मैं अपने हाथ पीछे ले गया और उसकी ब्रा के हुक खोल दिये। मैंने उसकी ब्रा को भी सूट के साथ उपर पहुंचा दिया। अब सोनल के नंगे बूब्स मेरे हाथों में थे। उसके बूब्स सख्त हो चुके थे और उसके निप्पल एकदम कडक। मैंने अपने दोनों हाथों से उसके दोनों बूब्स को मसलना शुरू कर दिया। सोनल की सिसकारी मेरी मुंह में ही घुट रही थी।
मैंने सोनल के दोनों होठों को अपेन होठों के बीच लिया और चुसने लगा। ऐसे चूसते हुए ही मैंने अपनी जीभ उसके होठों के बीच डाल दी जिसे सोनल चूसने लगी। मुझे किस करने में बहुत ही मजा आ रहा था। रसगुल्ले की मिठास से मजा दुगुना हो गया था।
मैंने मिठाई के डिब्बे को उठाकर थोड़ा दूर रख दिया और धीरे धीरे सोनल को बेड पर लिटाते हुए खुद भी उसके उपर लेट गया।
तभी नीचे से आंटी की आवाज सुनाई दी: सोनल बेटी, पूनम आई हुई है, मिलने।
 
आंटी की आवाज के बाद हमें सीढ़ियों में कदमों की आवाज सुनाई दी। मैं जल्दी से सोनल के उपर से उठ गया और सोनल से जल्दी में उसकी ब्रा के हुक नहीं लग पा रहे थे। मैंने अपने हाथ पीछे किये और हुक लगाने लगा, पर लग ही नहीं पा रहे थे।
तभी दरवाजा खुला, देखा तो दरवाजे पर पूनम थी। मैं अभी भी सोनल के हुक लगाने की कोशिश कर रहा था।
पूनम: ओह, तो ये बात हैं, मैं तो तुझे बधाई देने आई थी, मुझे क्या बता अभी कोई और तुझे बधाई दे रहा है।
मैंने सोनल का हुक लगाया और उसके सूट को नीचे कर दिया।
सोनल: पूनम की बच्ची! तू भी ना, कबाब में हड्डी बनने के लिए आ जाती है।
और सोनल झंझलाते हुए बेड पर से उठी और पूनम के साथ नीचे चली गई। मैंने टाइम देखा, अभी 3 ही बजे थे। मैंने सोचा थोड़ा और सो लेता हूं, पर नींद नहीं आई तो मैंने लेपटॉप पर मूवी लगा ली और मूवी देखने लगा।
तभी मुझे धयान आया कि ऑफिस के कम्प्यूटर से मैंने वो एमएमएस तो डिलीट किया ही नहीं।
फिर सोचा कोई नहीं, कल जाकर डिलीट कर दूंगा, अब कौन देखेगा। बॉस तो बाहर गये हुए हैं और अपना धयान मूवी देखने में लगा दिया।
 
मूवी खत्म होने के बाद मैंने लैपटॉप को ऑफ किया। टाइम देखा तो छः बजने वाले थे। मैं बाहर छत पर आ गया और टहलने लगा। ठण्डी हवा चल रही थी तो मैंने सोचा क्यों न पार्क में चला जाए। और मैं रूम का दरवाजा बंद करके नीचे आ गया पार्क में जाने के लिए। सोनल कहीं जाने के लिए अपनी स्कूटी निकाल रही थी।
मैं: कहां की तैयारी हो रही है?
सोनल: बस इधर ही जा रही हूं, बाजार तक। आप कहां चल दिए। अच्छा, सुनो, मैंने आज पार्टी रखी है तो खाना मत बनाना।
मैं: वॉव पार्टी, फिर क्यों खाना बनाउंगा।
सोनल अपनी स्कूटी निकालकर बाजार चली गई और मैं पार्क के लिए चल दिया।
जैसे ही मैं पार्क में घुसा सामने से वहीं लड़की (अरे वहीं यार जो पार्क में अपने कॉर्टून डॉगी के साथ आती है) आती हुई दिखाई दी।
मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कराया और वो भी मेरी तरफ देखकर मुस्कराई और उसका डॉगी मेरी तरफ देखकर भोंका।
डॉगी के भोंकते ही वो खिलखिलाकर हंस पड़ी।
मैं: इस तेरे डॉगी को मेरे से क्या प्रॉब्लम है (और मैं उसके पास जाकर खड़ा हो गया, उसका डॉगी मेरे चारों तरफ चक्कर लगाने लगा)।
लड़की: वो तो अब इसी से पूछना पड़ेगा।
मैं: हाय! मेरा नाम समीर है।
लड़की: हाय! मेरा नाम मोनी है।
मैं: ओह, नाईस नेम, मोनी-सोनी।
मोनी (हंसते हुए): सोनी मेरी बउ़ी बहन का नाम है।
मैं: ओह तो सोनी-मोनी दोनों ही हैं (और हंसने लगा)।
मोनी भी हंसने लगी। उसका डॉगी मेरे चारों तरफ घूम घूमकर मुझे सूंघ रहा था, पता नहीं क्या ढूंढने की कोशिश कर रहा था।
मोनी: कल नहीं आये पार्क में।
मैं: अरे यार! वो थोड़ा काम हो गया था। (अब आप तो जानते ही हैं, क्या काम हो गया था, सोनल की बच्ची ने छोउ़ा ही नहीं)
मैं: अंकल आंटी कैसे हैं?
मोनी (थोड़ा आश्चर्य से): अंकल-आंटी? तुम जानते हो।
मैं: अरे वो कल सुबह ही तो मिले थे, तुम उनको बुलाने आई थी।
मोनी: अरे हां। मम्मी-पापा ठीक हैं। वैसे कल क्या बातें हो रही थी आपकी और पापा की।
मैं: कुछ नहीं, बस ऐसे ही कैजुअल बातें, जो अब आपके और मेरे बीच हो रही हैं।
उसका डॉगी मेरे जूतों को चाटने लगा।
मैं: चलें!
मोनी (आश्चर्य से): कहा?
मैं: अरे मेरा मतलब जॉगिंग करें।
मोनी: ओह!!! हां, क्यों नहीं।
और हमने जॉगिंग स्टार्ट कर दी। उसका डॉगी बार बार मेरे आगे आ जाता था, जिससे मैं थोड़ा पीछे रह हो जाता।
पीछे से उसके कातिल मस्त कुल्हें दौड़ते हुए तेजी से उपर नीचे हो रहे थे और बहुत दिलकश लग रहे थे।
मैंने मोनी की तरफ देखा, वो बार बार मेरी तरफ ही देख रही थी और हंस रही थी। वो हंसती हुई बहुत ही प्यारी लग रही थी, उसके गुलाबी होंठों से झांकते मोती की तरह चमकते सफेद दांत उसकी सुंदरता में कई चांद लगा रहे थे।
मैं: क्यों हंस रही हो।
मोनी: बस ऐसे ही। आपको पता है, हंसने से खून बढ़ता है।
मैं: अच्छा जी! मुझे तो मालूम ही नहीं था। फिर तो मैं भी हंसता हूं (और अपने दांत निकालकर हंसने लगा)।
मोनी (मेरी खीज निकालते हुए): हें हें हें,,,, ऐसे भी कोई हंसता है, कितना बनावटी लग रहा है।
मैं: तो और कैसे हंसू।
मोनी: मेरे कहने का मतलब है कि खुशी में जो हंसी आती है उससे, बनावटी से नहीं।
मैं: अब खुशी तो कहां से लाउं, मोनी से काम नहीं चलेगा क्या।
मोनी (मेरे कंधे पर मुक्का मारते हुए): नहीं चलेगा, खुशी ही चाहियेगी।
थोडी देर और जॉगिग करने के बाद वो चली गई और अपने घर आ गया।
 
घर पर कुछ चहल-पहल बढ़ गई थी, चार पांच स्कूटी नीचे खड़ी हुई थी। मैं उपर अपने रूम में आ गया।
साढ़े आठ बजे सोनल मेरे रूम में आई। मैं पानी पीने के लिए खड़ा ही हुआ था। सोनल ने आते ही मेरे होठों पर एक पप्पी दी और मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी।
सोनल: कितने पसीने आये हुए हैं। जल्दी से नहाकर नीचे आ जाओ, मेरी दोस्त भी आ गई हैं, फिर पार्टी शुरू करते हैं।
मैं: ओके! माई पार्टी गर्ल। अभी आता हूं। (और उसके रसीले होंठों पर अपने होंठ रख दिये)।
मैं बहुत ही प्यार से उसके होंठों का रस पी रहा था। मैंने अपने हाथ उसकी कमर में ले जाकर उसके कुल्हों पर रख दिए और उन्हें मसलने लगा। थोउ़ी देर बाद मैंने अपने हाथ उसकी कमर में रखें और उसके भिंच लिया। उसके बूब्स मेरी छाती में दबकर पिचक गये। मैं अपने हाथ नीचे ले गया और अपना हाथ सोनल की जींस के अंदर डालने की कोशिश करने लगा।
सोनल ने मेरा हाथ पकउ़ लिया और जींस के उपर से ही अपने कुल्हों पर रख दिया। हमारे लब लगातार एक दूसरे के लबों का रस चूसने में मशरूफ थे। सोनल की गर्म सांसे मुझे अपने चेहरे पर महसूस हो रही थी। जल्दी ही हमारी सांसे उखड़ने लगी और हम दोनों अलग हो गये।

सोनल: ओके!!!!! अबबबब मैं चलतीीीी हहहहूं, तैयारररररर होकररर जल्दी नीचे आ जाओ।
और ये कहकर सोनल नीचे चली गई। मैं नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया।
नहाकर मैं नीचे चला गया। सोनल की सभी दोस्त एक से बढ़कर एक थी। मेरे अन्दर आते ही सोनल मेरे पास आई और मेरी कमर में हाथ डालकर अपनी सभी दोस्तों से मेरा परिचय करवाया। पांचों की पांचों मदमस्त हुस्न की मालिक थी। जब मैंने उनसे हाथ मिलाया तो उनके नरम और मुलायम हाथों को छूते ही मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। आंटी शायद किचन में कुछ तैयार कर रही थी।
सोनल ऐसा बिहेव कर रही थी कि जैसे मैं उसका बॉयफ्रेंड हूं। तभी किचन से किसी ने सोनल को आवाज लगाई और सोनल 'अभी आती हूं' कहकर किचन में चली गई। शायद आंटी ने बुलाया होगा।
मैं सोफे पर बैठ गया। सोनल की दोस्त कंचन भी मेरे पास ही आकर सौफे पर मुझसे सट कर बैठ गई।
उसके बैठते ही सोनल की दो दोस्त रूपाली और तान्या भी उसी सोफे पर आकर बैठ गई। तान्या मेरे दूसरी तरफ मुझसे सटकर बैठी थी, जबकि रूपाली कंचन के पास बैठ गई। बाकि की दो दोस्त निशा और प्रिया साथ वाले सोफे पर बैठ गई।
हम सभी आपस में बातें करने लगे। कंचन बातों ही बातों में बार बार अपना हाथ मेरी जांघों पर रख रही थी। उसकी इस हरकत से मेरी जींस टाइट होने लगी थी। कंचन ने एक जोक मारा और मेरी जांघों पर अपना एक हाथ कसकर रख दिया और दूसरे हाथ को तान्या की तरफ ले जाकर उसके हाथ से ताली मारी।
जोक कुछ अटपटा सा था, मेरी कुछ समझ में नहीं आया कि क्या निष्कर्ष निकला, पर सभी हंस रहे थे तो मैं हंस दिया (गधे वाले सिचुएशन से बचने के लिए, आप लोगों को तो पता ही होगा, गधे की कहानी, चलो जिसको नहीं पता है, वो पढ़ लें, बता देता हूं, एक बार जंगल में सभा लगी हुई थी, कि शेर ने एक जोक सुनाया, जोक इतना फाउू था कि सारे जानवर हंस हंसकर लोट पोट हो रहे थे, पर गधा आराम से खड़ा था और उन सभी को आश्चर्य से देख रहा था। अगले दिन बंदर ने देखा कि गधा हंस हंसकर लोट पोट हो रहा है, और पेट को पकड़कर जोर जोर से हंसा जा रहा है। बंदर ने पूछा भाई क्या, हुआ इतने क्यों हंस रहे हो। गधे ने कहा कि वो कल वाला जोक मुझे अब समझ में आया है।)।
तभी सोनल एक टरे में कुछ सॉफट डरिंक ले आई और हम सभी को दिये और खुद भी एक लेकर बैठ गई। मैंने डरिंक पिया तो मुझे उसमें कुछ अजीब सी स्मैल आया और स्वाद भी कुछ अलग ही था।
तभी अंदर से काम वाली और डरिंक और स्नैक्स लेकर आई और टेबल पर रखकर वापिस चली गई। सोनल की सभी दोस्त गटागट डरिंक पी गई और दूसरा गिलास उठा लिया। मेरा तो अभी पहला ही आधा हुआ था। मैंने स्नैक्स लेने के लिए टेबल की तरफ देखा तो टेबल पर तो टेबल ही थी, सारे स्नैक्स खत्म हो चुके थे।
सोनल और उसकी दोस्त आपस में बातें कर रही थी और जोर जोर से हंस रही थी, वो बातों में मारवाड़ी का यूज कर रही थी, जिससे मुझे उनकी बातें पूरी समझ में नहीं आ रही थी और मैं चुपचाप बैठकर डरिंक पी रहा था। तान्या ने भी अपना डरिंक खत्म किया और डरिंक उठाने के लिए मेरी जांघों पर एक हाथ रखकर आगे को होकर दूसरा गिलास उठा लिया।
मैंने सोनल से पूछा कि ये कौन सा डरिंक है तो सोनल ने कहा कि कोक है।
मैं: पर कोक का स्वाद तो ऐसा नहीं होता।
मेरी बात सुनकर सोनल की सभी दोस्त हंस पडी और मुझे खा जाने वाली नजरों से देखने लगी।
सभी इस दूसरे डरिंक को धीरे धीरे छोटे छोट सिप लेकर पी रही थी। आखिरकार मैंने भी आधे बचे गिलास को एक घूंट में ही पी लिया।
सोनल अपनी जगह से उठी और टेबल पर से एक गिलास उठाया और मेरे पास आकर खड़ी हो गई और गिलास मेरे सामने कर दिया। मैंने सोनल के चेहरे की तरफ देखा, उसकी आंखें थोड़ी लाल हो गई थी।
मैं: नहीं, मुझे इसका टैस्ट अच्छा नहीं लग रहा, मैं और नहीं लूूंगा।
सोनल: ये अच्छा है, इसे पियो, पीने के बाद तो फिर और भी मांगोगे।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--17
गतांक से आगे ...........
मैंने अनमने मन से गिलास पकड़ लिया। सोनल ने तान्या के कंधे पर हाथ रखे और मेरी और तान्या की सातलों पर बैठ गई। सोनल के ऐसे बैठने से तान्या थोड़ा साइड में हो गई और सोनल मुझसे सटकर तान्या की जगह पर बैठ गई और मेरे गले में अपना एक हाथ डाल दिया।
मैंने जैसे ही एक घूंट भरने के लिए गिलास को अपने चेहरे के पास किया उसमें से तीखी स्मैल आई। मैंने सोनल की तरफ देखा।
सोनल: पी जाओ मेरे जानू, फिर देखना क्या मजा आता है।
और उसकी सभी दोस्त हंसने लगी।
कंचन (मेरी जांघों पर हाथ फिराते हुए): हम भी पी रही हैं लड़की होकर, और तुम लड़के होकर नहीं पी पा रहे हो।
अब बात इज्जत की थी। मैंने गिलास को अपने होठों से लगाया और एक ही घूंट में आधा कर दिया। अबकी बार तो स्वाद बहुत ज्यादा कड़वा था। मुझे कुछ अजीब सा महसूस होने लगा था और मेरा सिर घूम रहा था।
मैंने सोनल की तरफ देखा, वो अपना गिलास खाली कर चुकी थी।
सोनल: कुछ नहीं, बस थोड़ी सी बीयर मिलाई थी कोक में, ज्यादा कुछ नहीं है।
सबके गिलास खाली हो चुके थे। सोनल उठी और म्यूजिक सिस्टम ऑन कर दिया और वापिस आकर मेरे पास बैठ गई। मैंने भी गिलास को दोबारा से अपने लबों से लगाया और पूरा का पूरा खाली कर दिया।
सोनल ने कामवाली को आवाज लगाई कि डरिंक खत्म हो गया है। तभी मुझे याद आया कि आंटी भी तो किचन में ही है।
मैंने सोनल की तरफ सवालिया नजरों से देखते हुए किचन की आंटी अपनी उंगली करते हुए कहा 'आंटी'।
मेरी बात सुनकर सोनल बोली, आज मम्मी घर पर नहीं है, 11-12 बजे तक आयेंगी, वो मंदिर में कीर्तन चल रहा है, वहां गई है।
मेरी समझ में सब आ गया कि आंटी यहां पर है नहीं, तो आज तो खूब बीयर चल रही हैं, इसकी कोई सहेली आते वक्त लेकर आ गई होगी।
 
तभी काम वाली एक टरे में और गिलास लेकर आई, अबकि बार वो साथ में प्लेट में कुछ व्हाईट डिश भी लेकर आई थी।
सोनल ने एक गिलास उठाया और मेरे सामने कर दिया। मुझे सुरूर बनना शुरू हो गया था। पहले कभी बीयर पी नहीं थी तो एक गिलास में ही कुछ ज्यादा नशा हो गया था। काम वाली जब टरे रखने के लिए झुकी तो उसकी कमीज गले पर से नीचे लटक गई, जिससे उसके मम्मे थोड़ा बाहर को निकल आये। उसने दुप्पटा नहीं पहना हुआ था, शायद किचन में उतार कर रख दिया होगा।
मैंने गिलास की तरफ देखा तो मेरी नजर सीधी कामवाली पर पड़ी जो टरे में से गिलास टेबल पर रखी टरे में रख रही थी। मेरी नजर उसकी लटकती चूचियों पर जम गई। सोनल ने मेरे सामने चुटकी बजाई।
सोनल: कहां खो गये जनाब! यहां पर उससे खूबसूरत जवान लड़कियां बैठी हैं।
कामवाली सामान रखकर वापिस चली गई।
मैं सोनल की बात सुनकर झेंप गया और अपनी नजरें नीचे करके मुस्कराने लगा।
सोनल ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा और मुझे हिलाने लगी। मैंने उपर देखा तो उसने मेरे सामने गिलास कर रखा था। सोनल का हाथ एक जगह नहीं ठहर पा रहा था, शायद उसे नशा हो चुका था। मैंने गिलास को पकड़ने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया तो मेरा हाथ गिलास के पास से होता हुआ गुजर गया। मुझे दो दो गिलास नजर आने लगे थे। मैंने फिर से अपने हाथ को गिलास की तरफ बढ़ाया तो मेरा हाथ गिलास से टकरा गया जिससे गिलास में से डरिंक छलक कर मेरे और सोनल के उपर गिर गया।
मैंने सॉरी कहते हुए गिलास को पकड़ लिया। मैंने सामने बैठी सोनल की दोस्तों की तरफ देखा, तो वो सभी मुझे और सोनल को ही घूर रही थी और आपस में कुछ खुसूर फुसूर कर रही थी।
मेरी नजर
प्रिया (सोनल से): सोनल! एक मिनट आना।
सोनल: क्या हुआ।
प्रिया: आओ तो।
सोनल उठकर प्रिया के पास चली गई। निशा ने उसका हाथ पकड़कर सोफे पर खींच लिया और वो उनके पास बैठ गई। वो दोनों उसके कान में खूसूर फूसूर करने लगी।
मैंने टेबल पर देखा तो डिश की प्लेट आधी से ज्यादा खत्म हो चुकी थी। मैंने मन ही मन में सोचा ये कब खत्म हो गई। तभी कंचन ने एक चम्मच से थोड़ी सी डिश ली और खा ली।
ओह, तो इसने खत्म की है।
मैंने भी एक चम्मच से डिश उठाई और खा ली। ओह तेरे की ये तो अंडे की भुर्जी है। मैंने पहले भी खाई थी पर ज्यादा नहीं इसलिए देखने भर से पहचान न पाया।
निशा ने सोनल के कान में कुछ कहा तो सोनल एकदम से झल्ला पड़ी।
सोनल: दिमाग तो ठीक है तुम्हारा।
प्रिया ने सोनल को दिखाते हुए मेरी तरफ हाथ से ईशारा किया तो सोनल शांत हो गई और फिर अपना मुंह उनके पास लेजाकर खुसूर फूसूर करने लगी।
मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। मैंने कंचन की तरफ देखा तो वो मेरी तरफ देखकर मुस्करा रही थी। फिर मैंने तान्या की तरफ देखा तो वो भी मेरी तरफ देखकर मुस्करा रही थी। मैंने उनपर से धयान हटाया और गिलास को अपने लबों पर लगाया एक छोटा सा सिप लिया।
तभी मुझे मेरे लिंग पर कोई हाथ महसूस हुआ। मैंने नीचे देखा तो तान्या का हाथ मेरी जींस के उपर से ही मेरी जांघों पर मेरे लिंग वाली जगह पर था। कंचन का हाथ भी मेरी जांघों के अंदर की साइड में था। वो अपनी उंगलियों को धीरे धीरे हरकत दे रही थी। मैंने सोनल की तरफ देखा, वो अभी भी निशा और प्रिया से खुसूर फूसूर कर रही थी। मैंने तान्या का हाथ पकड़ा और साइड में कर दिया और फिर कंचन का हाथ भी पकड़कर साइड में कर दिया।
तान्या बिल्कुल मुझसे सटकर बैठ गई और एक हाथ मेरी कमर में डालकर सहलाने लगी और दूसरा हाथ फिर से मेरी जांघों पर रखकर सहलाने लगी। उसकी चूचियों मेरे हाथ पर दबी हुई थी।
मेरे शरीर में चिंटिंया सी रेंगने लगी। मुझपर बीयर का असर धीरे धीरे बढ रहा था। कंचन ने फिर से अपना हाथ मेरी जांघों पर रख दिया पर कोई हरकत नहीं की।
धीरे धीरे मेरा लिंग अपने पूरे जोश में आ रहा था। उनकी हरकतों के कारण वो एकदम अकड़ कर जींस में दर्द करने लगा। मुझे अब बैठने में थोड़ी प्रॉब्लम हो रही थी। मैंने अपने हाथ से उसे एडजस्ट करने की कोशिश की पर कोई फायदा नहीं हुआ, मेरा लिंग और ज्यादा दर्द करने लगा। मेरी स्थिति को भांपकर तान्या और कंचन हंस पड़ी।
 
तभी सोनल अपनी जगह से उठी और किचन में चली गई।
निशा और प्रिया भी सोफे पर से खड़ी हो गई। मैंने गिलास को खाली किया और टेबल पर रखने के लिए झुका तो खुद को संभाल न सका और मेरा सिर टेबल पर जाकर लगा। टेबल पर रखे सारे गिलास गिर गये और सारी बीयर टेबल पर बिखर गई।
तान्या से जल्दी से मेरे कंघों को पकड़कर मुझे उठाने लगी। आवाज सुनकर सोनल बाहर आई, वो बाहर का नजारा देखकर हैरान रह गई।
सोनल: ओह, तो जनाब ने लगता है पहली बार पी है, जो इतनी जल्दी लुढक गये।
और सभी सहेलियां हंसने लगी। मैं थोड़ा झेंप गया।
थोड़ी देर में कामवाली बाहर आई और टेबल को उठा ले गई। सोनल ने दूसरी टेबल लाकर वहां पर रख दी।
सोनल रसोई में जाने लगी तो प्रिया ने पिछे से आवाज लगाई।
प्रिया: यार यहां पर गर्मी लग रही है, चलो उपर चलते हैं।
मैं: मुझे तो नहीं लग रही, और उपर कौनसा ए-सी- लगा है।
सोनल: हां, ये सही है, उपर खुली हवा में बैठकर पीते हैं।
कंचन और तान्या ने खड़े होते हुए मेरे एक एक गाल को अपने हाथों से मसल दिया। मैंने आह करते हुए उनके हाथों को अपने गालों से हटाया और खड़ा होने लगा।
जैसे ही मैं खड़ा हुआ, एकदम से मेरा सिर चकराया और मैं वापिस सोफे पर बैठ गया।
सभी लड़कियां मेरी तरफ देखकर खिलखिलाकर हंसने लगी।

तान्या: लो, जनाब तो फेल हो गये इतने में ही। फिल्म तो शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई।
मैंने तान्या की बात सुनकर उपर तान्या की तरफ देखा।
मैं: कौन सी फिल्म, अब फिल्म भी देखोगी, इतनी देर तो हो गई है, आंटी भी आने वाली होगी।
सोनल: तभी तो उपर चल रहे हैं, ताकि मम्मी को कुछ पता ना चले।
सोनल मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़कर मुझे उठाया और मेरे हाथ को अपने सिर के पीछे से अपने दूसरे कंधे पर रखकर पकड़ लिया।
कंचन ने मौके का फायदा उठाया और मेरे दूसरी तरफ आकर मेरे दूसरे हाथ को उसी तरह कर लिया। कंचन ने अपना दूसरा हाथ मेरी कमर पर रख दिया।
वो उपर जाने लगी। मैंने अपना हाथ उन दोनों से छुड़ाया और अपना बैंलेस बनाने की कोशिश करने लगा। मैं आश्चर्य चकित था कि अभी बैठा था तो ज्यादा कुछ नशा ही नहीं हुआ था, एकदम खड़ा होते ही इतना नशा कैसे हो गया। मैंने अपना हाथ अपनी जांघों पर रखकर लिंग को थोड़ा एडजस्ट करने की कोशिश करने लगा।
निशा, प्रिया और कंचन सीढ़ियों में पहुंच चुकी थी। सोनल और तान्या मेरे पास ही खड़ी थी। मुझे ऐसे परेशान देखकर सोनल ने तान्या को कहा कि तुम चलो, मैं अभी आती हूं।
तान्या: कोई बात नहीं, साथ में ही चलते हैं।
सोनल मेरे पास आई और मेरी जींस के अंदर अपना हाथ डालने की कोशिश करने लगी, पर बैल्ट की वजह से नहीं गया।
सोनल ने तान्या की तरफ देखा तो तान्या खड़ी खड़ी मुस्करा रही थी।
सोनल ने मेरी बेल्ट खोली और सोफे पर रख दी। फिर मेरी जींस का बटन खोला और चेंज को भी खोल दिया। वो मेरे सामने खड़ी थी, जिससे तान्या को कुछ ना दिखे। पर तान्या हमारे साइड में आकर खडी हो गई। सोनल ने उसकी तरफ देखा।
तान्या: मैं क्या इसको खा जाउंगी, जो ऐसे देख रही है।
सोनल मुस्कराई और मेरी जींस के अंदर हाथ डालकर अंडरवियर के अंदर मेरे लिंग को उपर की तरफ कर दिया। मुझे अब थोड़ी राहत महसूस हुई।
सोनल (मेरी आंखों में देखते हुए): अब ठीक है।
मैंने अपने हाथ सोनल के चेहरे पर रखे और उसके होठों पर एक पप्पी दे दी।
मैं: अंअंअअ हां,,,,,, अअअअब ठीक है मेरी जाजाजाजाजाजाजननननननन।
बोलते हुए मेरी आवाज लड़खड़ा रही थी।
मैंने अपना हाथ सोनल की कमर में रख दिया और हम उपर की तरफ चल दिये।
 
तान्या हमारे पीछे पीछे आ रही थी। आधी सीढ़ीयों में आकर मुझे मेरी कमर में एक हाथ महसूस हुआ।
मैंने पीछे देखा तो तान्या ने अपना हाथ मेरी कमर में रखकर हमारे पीछे पीछे आ रही थी। मुझे पीछे देखता देख सोनल ने भी पीछे देखा और मुस्करा कर मेरी तरफ देखने लगी।
जैसे ही हम उपर आये, हवा का ठंडा झोंका हमसे टकराया और मेरा सुरूर और भी बढ़ गया।
मैंने अपना हाथ सोनल की कमर में से हटाया और छत पर टहलने लगा।
थोड़ी ही देर में कामवाली कुर्सिया और टेबल ले आई और रखकर नीचे चली गई।
सभी लड़कियां कुर्सियों पर बैठ गई, मैं पूनम की छत की तरफ टहलते हुए आ गया। उधर छत पर कोई नहीं था।
फिर मैं वापिस सबकी तरफ आया और सोनल के पास जाकर खड़ा हो गया।
मैं: तुमने पूनम को नहीं बुलाया पार्टी में।
सोनल: मैंने तो बुलाया था, वो उसके मामा जी के स्कूटर का कार के साथ एक्सीडेंट हो गया तो वो अपनी मम्मी पापा के साथ हॉस्पीटल में गई है, इसलिए वो आई नहीं।
मेरा नशा कुछ ढीला सा हो गया था, शायद मेरे शरीर ने एडजस्ट कर लिया था।
मैं सोनल के पास खाली पड़ी कुर्सी पर बैठ गया। मेरे दूसरी साइड में निशा बैठी थी। मेरे बैठते ही निशा का हाथ सीधा मेरी जांघों के बीच आकर मेरे लिंग पर टिक गया और उसने अपनी मुट्ठी में मेरे लिंग को भर लिया। मेरे मुंह से आह निकल गई। मैंने तुरंत सोनल की तरफ देखा।
सोनल: क्या हुआ?
मैं: कुछ नहीं, ठंडी हवा का झोंका मस्त लग रहा है।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--18
गतांक से आगे ...........
सोनल मुस्कराने लगी और दूसरी सहेलियों से बात करने लगी। निशा धीरे धीरे मेरे लिंग को जींस के उपर से ही सहला रही थी। अचानक उसने मेरी जीप को खोला दिया और अपना हाथ अंदर डाल दिया। मैंने झट से सोनल की तरफ देखा कि कहीं उसने तो नहीं देख लिया और उसका हाथ बाहर निकाल दिया और उसे डराने वाली नजरों से देखने लगा। पर वो डरने की बजाय मुस्कराये जा रही थी। उसने मेरी जीप के उपर अपना हाथ रखा और एक उंगली को अंदर घुसा कर अंडरवियर के उपर से ही मेरे लिंग के साथ छेड़खानी करने लगी। उसने मेरे अंडरवियर की साइड में से अपनी उंगली को अंदर किया और अंडरवियर को एक साइड में सरकाने की कोशिश करने लगी। फिर उसने अपनी दूसरी उंगली भी अंदर कर दी और अंडरवियर को पकड़कर साइड में कर दिया जिससे मेरा लिंग अंडरवियर से बाहर आ गया और जींस के अंदर फुंफकारने लगा। निशा ने अपनी दो उंगलियों से मेरा लिंग को पकड़ लिया। उसकी कोमल उंगलियों का स्पर्श होते ही मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।

तभी कामवाली खाना ले आई और टेबल पर रख दिया। निशा का हाथ अभी भी मेरी जींस के अंदर मेरे लिंग को सहला रहा था। मेरा धयान कामवाली की तरफ ही था कि कहीं उसकी नजर ना पड़ जाए। मैंने उसके हाथ को छुपाने के लिए अपना हाथ उसके उपर रख दिया। तभी काम वाली की नजर हमपर पड़ी और शायद वो समझ गई कि निशा का हाथ कहां है, क्योंकि उसने शर्माते हुए अपनी नजरें दूसरी तरफ कर ली। शर्माते हुए उसके गाल एकदम लाल हो गये।
कामवाली ने सभी के लिए प्लेटों में खाना परोसा और साइड में खड़ी हो गई। निशा लगातार मेरे लिंग को सहला रही थी, जिससे मुझसे सहन करना मुश्किल हो गया था। वो अपनी उंगलियों का ऐसा जादू चला रही थी कि बस मेरा जूस निकलने ही वाला था। मैंने एक झटके से उसका हाथ बाहर निकाला और खड़ा हो गया। परन्तु यहीं एक गड़बड़ भी हो गई। निशा के हाथ के साथ-साथ मेरा लिंग भी जींस से बाहर आ गया और मेरे खड़े होने से सबके सामने झटके खाने लगा। मेरा लिंग एकदम तनकर पेट की तरफ झटके खा रहा था, लिंग की मुंडी पर प्रिकम की बूंदे चमक रही थी।
मेरे खड़े होने से सबने मेरी तरफ देखा और सबका हाथ उनके मुंह पर चला गया। मेरे मस्त मोटे लिंग को देखकर सभी आंखें में चमक आ गई। मैंने सबकी तरफ देखा, तो सभी आंखें ललचाई नजरों से मेरे लिंग को घूर रही थी। सबके चेहरे एकदम लाल हो गये थे। मैंने कामवाली की तरफ देखा तो उसने अपना सिर नीचे झुका रखा था, पर मेरे लिंग को देखने का लालच नहीं छोड़ पा रही थी और बार बार नजरें उठाकर मेरे लिंग को देख रही थी। सबकी नजरों का पीछा करते हुए जब मेरी नजर अपने जींस से बाहर फुंफकारते लिंग पर गई तो मैं शरम से लाल हो गया। मैंने तुरंत अपना हाथ आगे लाकर लिंग को छुपाने की कोशिश करने लगा और निशा की तरफ खा जाने वाली नजरों से देखा। निशा बैठी बैठी हंस रही थी।
मैंने जल्दी से अपना चेहरा दूसरी तरफ किया और लिंग को वापिस जींस में डालने की कोशिश करने लगा, पर कुछ तो नशे के कारण और कुछ लिंग के तने हुए होने के कारण अंदर जा ही नहीं रहा था। मैंने जींस का हुक खोला और जल्दी से लिंग को अंदर करके वापिस हुक बंद किया। मैंने वापिस मुडकर सबकी तरफ देखा और बाथरूम की तरफ चलने लगा। पर मुझे चक्कर सा आया और लड़खड़ा कर गिरने ही वाला था कि निशा के कंधे पर हाथ पड़ गया। कुछ देर निशा का सहारा लेकर खड़ा रहा और फिर थोड़ा नॉर्मल महसूस करने पर बाथरूम की तरफ चल दिया। चलते हुए मेरे पैर लड़खड़ा रहे थे। मुझे धरती घूमती हुई दिख रही थी। ऐसा लग रहा था कि मेरा पैर उबड़ खाबड़ जमीन पर पड़ रहा है। जैसे तैसे करके मैं बाथरूम में पहुंचा। मैंने जींस को घुटनों तक निकाल दिया और बाथरूम करने लगा। जैसे जैसे मैं बाथरूम करता जा रहा था, नशा और भी बढ़ रहा था। मैंने एक हाथ दीवार पर टिका दिया। बाहर से सभी के हंसने की आवाज आ रही थी। अभी मैं बाथरूम करके अपनी जींस उपर करने के लिए झुका ही था कि बाथरूम का दरवाजा खुल गया। मैनें दरवाजे की तरफ देखा तो निशा खड़ी थी। मैंने उसे घूर कर देखा।
 
निशा: ऐसे क्या देख रहे हो, कोई रेप करने नहीं आई मैं तुम्हारा, हाथ धोने आई हूं।
और मेरे पीछे से निकल कर वॉशबेसिन की तरफ बढ़ गई। मेरे पिछे से निकलते हुए उसने मेरे कुल्हें पर चुटकी काट ली। मेरे मुंह से आउउउउ की आवाज निकली।
मैंने जल्दी से अपनी जींस को उपर किया और हुक लगाकर बाहर आ गया। बाथरूम करने के बाद मेरा नशा बढ़ गया था, पर अब मैं खुद पर कंट्रोल भी कर पा रहा था। मैं चलते हुए चेयर तक आया और बैठ गया। मेरे पीछे पीछे निशा भी आ गई और अपनी चेयर पर बैठ गई। सभी ने खाना खाना शुरू किया।
ज्यादा बीयर पीने के कारण सभी ने थोड़ा थोड़ा ही खाया और खाना खाकर सभी लड़किया उठ गई और छत पर इधर उधर टहलने लगी। कामवाली बर्तन उठाने लगी। मैं भी उठकर मुंडेर के पास आकर खड़ा हो गया। कामवाली बर्तन लेकर चली गई।
मुंडेर के पास खड़े हुए मुझे लग रहा था कि मैं बस अभी नीेचे गिरने वाला हूं। मैं मुंडेर से पीछे हट गया। सभी लड़किया एक साथ ही खड़ी थी और हाथ मिला रही थी। शायद जाने की तैयारी थी।
मैं सभी के पास गया।
मैं: अरे ये क्या, चलने की तैयारी। अभी तो पूरी रात बाकी है यार, अभी से कहां चल दी। (और निशा के कुल्हों एक चपत लगा दी।
कंचन: अरे यार, घर से बार बार कॉल आ रही है, और लेट हुए तो डांट सुननी पड़ेगी, फिर कभी मिलते हैं स्वीटू (और मेरे गालों को पकड़कर भींच दिया)।
मैंने उसके हाथ को एक तरफ कर दिया। सभी लड़कियां बायें कहते हुए नीचे जाने लगी। सोनल भी उनके साथ नीचे चली गई।
मैं आकर चेयर पर बैठ गया। थोड़ी देर में सोनल उपर आ गई। उसके साथ तान्या भी थी।
मैंने सोनल को देखते हुए तान्या की तरफ हाथ से इशारा करते हुए कहा: इसके घर से फोन नहीं आ रहे क्या?
तान्या: अब मैं पीकर घर जाउंगी तो मेरी अच्छी वाली धुनाई हो जायेगी, इसलिए आज मैं सोनल के पास ही सोउंगी, मैंने आंटी से फोन करवा दिया है।
मैं: वॉव, दो-दो। मजा आयेगा।
मेरी बात सुनकर सोनल मेरी तरफ देखकर आंखें निकालने लगी।
मैं: क्यों, क्या हुआ? कुछ प्रोग्राम नहीं है क्या?
मैं तान्या के पास गया और उसके बाहों में भरते हुए उठा लिया, पर नशे के कारण लडखडा गया और उसे वापिस नीचे उतार दिया।
अब मुझपर नशा अच्छी तरह से हावी हो गया था।
मैं (नशे में): आज तो तान्या और मैं, और साथ में सोनलललललललललल, मजे करेंगगगगगगगगगगगगगगेेेेे (और तान्या के गालों को पकड़ कर मसलने लगा। तान्या के मुंह से आह निकली और वो मेरे हाथ को हटाने लगी, पर मैंने फिर से उसके दूसरे गाल को पकड़ लिया और सोनल की तरफ देखते हुए,
मैं: तुम और तान्या, तान्या और तुम,,,, और साथ में मैं भी,,,,,।
अभी मैंने इतना ही कहा था कि सोनल मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़कर रूम में ले आई। मैंने तान्या का हाथ पकड़ लिया था, जिससे वो भी हमारे साथ साथ रूम में खींची चली आई।
सोनल ने मुझे बैड पर बैठा कर पिछे को धक्का दे दिया और मैं बेड पर लुढक गया। सोनल ने मेरे जूते निकाले और मेरे पैरो को भी बैड पर कर दिया। मैं फिर से उठ बैठा पर सोनल ने वापिस से मुझे धक्का दे दिया और एक बार तान्या की तरफ देखकर बैड पर बैठकर मेरे उपर आ गई और मेरे होंठों पर उंगली फेरते हुए धीमी आवाज में कहा।
सोनल: सो जाओ माई स्वीटू, मैं रात को आउंगी।
सोनल की बात सुनकर मैं जोर से बोला: और तान्या भी।
सोनल ने मेरे मुंह पर अपनी उंगली रखकर सीइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ करते हुए कहा 'सो जाओ'।
मैंने अपनी आंखें बंद कर ली और सोनल उठकर चली गई। दरवाजा बंद होने की आवाज सुनकर मैंने आंखें खोली, तो वो दोनों जा चुकी थी।
आंखें बंद करते ही मुझे सबकुछ घूमता हुआ महसूस हो रहा था, इसलिए मैं आंखें बंद नहीं कर पा रहा था। आंखें बंद करते ही ऐसा लग रहा था कि कोई मेरे बेड को उलट रहा है।
नींद के कारण मेरी आंखें बंद होती पर मैं फिर से खोल लेता। जब सोया नहीं गया तो मैं उठकर बाहर आ गया और छत पर टहलते हुए गाना गाने लगा।
 
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