• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery मस्त पड़ोसन (पड़ोसन को दुल्हन बनाया )

मेरे होँठों को अपने होँठों से चिपका कर डॉली मुझे एक अत्यंत प्रगाढ़ चुम्बन देना चाहती थी। मैंने भी अपने होँठों को डॉली के होँठों से चिपका कर मैं डॉली के होंठ और उसकी जीभ को चाटने और चूसने लगा।

मेरी छाती में डॉली की मदमस्त चूँचियाँ की निप्पलें कोंच रहीं थीं। कुछ देर बाद मैं अपने होँठ डॉली के स्तनोँ पर रख दिए और उनको एक के बाद एक बारी से चूसने लगा। डॉली के स्तन भी उत्तेजना से फुले हुए थे और मेरे होँठों में जाते हुए ही उनमें अजीब सी हलचल मैं महसूस करने लगा। स्त्रियों के स्तन स्त्रियों के सम्भोग में बड़ा महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। कहते हैं की अगर आप स्त्रियों के स्तनोँ को दक्षता से सेहलाओ तो स्त्रियां चुदवाने के लिए मजबूर हो जातीं हैं।

मेरा लण्ड डॉली की सख्त चूत में जकड़ा हुआ था। डॉली ने मेरी कमर और कूल्हे को पीछे से अपने बाहुपाश में इतनी ताकत से खिंच कर अपने बदन से जकड़ा दिया था की उसके कारण मेरा पूरा का पूरा लण्ड डॉली की चूत में जा घुसा था। मुझे मेरे लण्ड की सतह के ऊपर डॉली की चूत की सुरंग में हो रही तेज कम्पन महसूस हो रही थी। डॉली कई बार तगड़े लण्ड से चुद चुकी थी। पर फिर भी मेरे लण्ड से चुदने से डॉली को इतनी उत्तेजना होगी थी की उसकी चूत में उत्तेजना के मारे ऐसी कम्पन होगी यह मैंने सोचा भी नहीं था।

डॉली की चुदाई करते हुए मैं मेरी बीबी ज्योति की चुदाई की उसके साथ तुलना करने लगा। हालांकि मुझसे ज्योति पहले शुरुआत में काफी उग्रता और उत्तेजना से चुदवाती थी, पर शादी के कुछ सालों बाद वह गर्मजोशी नहीं रही थी। आखिर में तो मुझे उसे गरम करने के लिए सेठी साहब की कोई ना कोई कहानी बनानी पड़ती थी जिससे वह उत्तेजित हो कर चुदाई में रेस्पॉन्ड करती थी।

पर मैंने कभी ज्योति की चूत में जैसे डॉली की चूत में स्पंदन हो रहे थे वैसे स्पंदन कभी भी अनुभव नहीं किये। शायद गैर मर्दों से चुदवाते हुए औरतों को कुछ अधिक ही उत्तेजना होती होगी जिसके कारण उनकी चूत में ऐसे स्पंदन हो रहे होंगे। या फिर डॉली मुझसे चुदवा कर ज्योति से शायद ज्यादा ही एन्जॉय कर रही होगी।

हो सकता है अगर ज्योति सेठी साहब से चुदवाने के लिए राजी हो गयी तो ज्योति भी सेठी साहब से चुदवाते हुए अपनी चूत में ऐसे स्पंदन महसूस कर रही हो। वैसे मुझे यकीन था की जिस तरह से मैंने ज्योति को बार बार सेठी साहब की बात कर सेठी साहब से चुदवाने के लिए मानसिक रूपसे तैयार किया था, ज्योति अपने मायके में सेठी साहब से जरूर चुदवायेगी।

मुझे यह भी यकीन था की सेठी साहब ज्योति पर इतने फ़िदा हो गए थे की वह ज्योति को चोदे बगैर नहीं छोड़ेंगे। पर फिर भी मुझे चिंता थी की कहीं ज्योति लाज शर्म की वही घिसी पीटी पुरानी बात कर सेठी साहब का मुड़ ऑफ ना करदे। मैंने तो डॉली को चोदने का रास्ता बना लिया था पर ज्योति को भी सेठी साहब से चुदवाना जरुरी था। मैंने तय किया की अगले दिन मैं फ़ोन कर पता करूंगा की रात को सेठी साहब से ज्योति की चुदाई हुई की नहीं।

मेरा खड़ा हुआ सख्त लण्ड डॉली की रसीली चूत में अंदर बाहर जाता हुआ कमरे में “पिचक पिचक” की आवाजें पैदा कर रहा था। साथ साथ में मेरे डॉली को जोरदार धक्के मारने से कई बार डॉली “ओह….. आह….. ” इत्यादि सिसकारियां निकाल रही थीं।

मुझे मेरे लण्ड में एक अनूठा सुरूर महसूस ह रहा था। डॉली की चूत टाइट होते हुए भी रसीली और चिकना थी। डॉली की चूँचियाँ इतनी गोरी और लाल थीं की हाथ लगाने में भी डर लगता था की कहीं हाथ में लाल गुलाबी रंग ना लग जाए। जैसे जैसे मैं चोदते हुए डॉली को धक्के पेल रहा था, डॉली का पूरा बदन हिल जाता था और साथ में उसकी गोरी गुलाबी फूली हुई चूँचियाँ पूरी निप्पलों के साथ ऐसे हिलतीं थीं जैसे बारिस के समय हवाके तेज झोंके से पेड़ हिलते हों।

मुझे डॉली को चोदने का ऐसा बढ़िया मौक़ा मिला था की मैं रुकने वाला नहीं था। डॉली को चोदते हुए डॉली का पूरा नंगा इतना खूबसूरत बदन देखते हुए मैं नहीं थक रहा था। डॉली की गोरी चिट्टी चूत में मेरा तगड़ा चिकना लण्ड अंदर बाहर होते हुए देखने का मजा ही कुछ और था।

कई बार डॉली अचानक ही सिसकारी लगा कर बोल उठती, “राज चोदो मुझे, फ़क मी, तुम बहुत अच्छा चोद रहे हो।” बगैरह बगैरह। काफी देर तक डॉली को चोदने के बाद एक बार डॉली बोल पड़ी, “अच्छा स्टैमिना है राज आपका। मानना पडेगा। आप सेठी साहब से कम नहीं हो। आप सेठी साहब को अच्छी खासी टककर दे सकते हो।” तब मुझे लगा की शायद डॉली कुछ थकने लगी थी।

सब से ज्यादा उत्तेजना मुझे डॉली की उड़ती हुई चूँचियों को देख कर होती थी। जैसे ही मैं डॉली की चूत में अपना लण्ड पेलता और एक धक्का मारता तब डॉली की फूली भरी हुई मदमस्त चूँचियाँ फ़ैल कर हवा में उड़ने लगतीं। जो स्तन स्थिर होते हुए इतने भरे हुए सख्त और सुआकार दीखते थे वह धक्के से फ़ैल जाने के कारण एक अजीब सा आकार बनाते हुए वापस वही सख्त गोलाई और भरी हुई स्थिति में वापस आ जाते थे।

चुदाई की उत्तेजना के मारे डॉली की चूँचियों की निप्पलें फूल कर कोई गुम्बज के शिखर के समान डॉली के स्तनोँ पर अपना वर्चस्व स्थापित कर डटी हुई दिखती थीं।

उन कभी उड़ते तो कभी ठहरे हुए फुले हुए स्तनोँ को अपने हाथों में लेकर मसलना और निप्पलों को इतना दबाना की डॉली के मुंह से दबी हुई सिसकारी निकल जाए उसका मजा ही कुछ और था। मैं झुक कर जब भी मौक़ा मिलता डॉली की कोई एक चूँची की निप्पल को मुंह में ले लेता और जैसे ही दांतों से काटने लगता डॉली चिल्लाती, “राज दर्द हो रहा है। बस करो।”
 
पर अब करीब पंद्रह बीस मिनट की चुदाई के बाद डॉली के चेहरे पर थकान का भाव देख कर मैं थम गया। मुझे भी सर पर पसीना आ रहा था। मैंने झुक कर डॉली के होँठ से अपने होँठ चिपका कर डॉली को एक गहरा चुम्बन किया। डॉली भी मेरे होँठों को चूसती हुई मेरी जीभ को अपने मुंह में ले कर मेरी लार चूस कर निगलने लगी। काफी समय के बाद इतना उत्तेजक और लंबा चुम्बन मैं कर रहा था।

डॉली ने अपनी बाँहें फैलायीं और मैं डॉली की बाँहों में डॉली के बगल में लेट गया। डॉली पलट कर मेरी आँखों में आँखें डालकर बोली, “कैसा रहा? अच्छा लगा मेरे साथ?”

मैंने डॉली की नाक से अपनीं नाक रगड़ते हुए कहा, “डॉली जी, अभी तो पिक्चर बाकी है। मुझे इतना अच्छा लगा की अब सेठी साहब का चांस नहीं लगेगा। मैं तुम्हें छोडूंगा ही नहीं। सेठी साहब को ज्योति के पास भेज दूंगा। अब तुम आसानी स मुझसे पिंड छुड़ा नहीं पाओगी।”

डॉली ने भी मुस्कुराते हुए कहा, ” कौन साली पिंड छुड़ाना चाहती है? मैं तो चाहती हूँ की तुम मुझसे ऐसे ही चिपके रहो। सेठी साहब अगर ज्योति से चिपक कर रहते हैं तो फिर तो हमारी बल्ले बल्ले। पर अगर सेठी साहब नाराज हो गए तो तुम सम्हालना उनको।”

मैंने पट से जवाब दिया, “मैं क्यों सम्हालूं? ज्योति सम्हालेगी उनको।”

मेरी बात सुन कर ज्योति मुस्कुरायी और बोली, “अरे वाह रे मेरे ज्योति के हस्बैंड! एक ही रात में तुम तो बिलकुल पलट गए! पर यह तो पता करो की तुम्हारी बीबी और मेरे पति की सेटिंग हुई भी की नहीं? कहीं ऐसा तो नहीं की हम यहां बैठे बैठे उनके मिलन के सपने देख रहे हों और वहाँ वह दोनों के बीच कुछ हुआ ही ना हो? वह रात को अपने अपने बेड में सो रहे हों।”

मैंने कहा, “कैसे पता करें? अगर ज्योति सेठी साहब के साथ है तो इस समय उसे फ़ोन करना ठीक नहीं होगा। कहीं वह भड़क नहीं जाए। हाँ एक काम कर सकता हूँ। मैं सालेजी को फ़ोन कर पूछता हूँ की ज्योति और सेठी साहब पहुँच तो गये ना ठीकठाक। उनकी बातों से पता चल जाएगा।”

डॉली ने मेरी बात से सहमति जताई और मैंने मेरे साले साहब को रात के करीब ग्यारह बजे फ़ोन लगाया। कुछ देर घंटी बजने के बाद फ़ोन साले साहब की पत्नी अंजू ने उठाया। डॉली सुन सके इस लिए मैंने फ़ोन को स्पीकर फ़ोन पर लगाया था।”

फ़ोन के दूसरे छोर से जब अंजू की आवाज सुनी तो मैंने पूछा, “कौन अंजुजी हैं?”

जब साले साहब की बीबी अंजू ने सूना की मैं बोल रहा हूँ तो फ़ौरन बोल पड़ी, “जी जीजा सा। मैं अंजू बोल रही हूँ। आपके साले साहब अभी वाशरूम में हैं। तब तक हम से ही बात कर लो जी! आपने तो हमारी ननद सा को आपके दोस्त के साथ भेज दिया! यह बात समझ में आयी को नी।

पर चिंता करना मति। जैसे की आपने कहा था इस वक्त हमारी ननद सा आपके दोस्त सेठी साहब के साथ ऊपर की मंजिल में सलामत है। मैंने उन दोनों की सलामती और प्राइवेसी का पूरा इंतजाम कर दिया है। मैंने आपके दोस्त के लिए ड्रिंक का तो इन्तिजाम किया ही है पर रात को अगर नींद ना आये और जरुरत पड़े तो ननद सा सेठी साहब को चाय पिला सके उसके लिए सेठी साहब के कमरे में चाय का सामान भी रख दिया है।”

अंजू की बात सुन कर डॉली की आँखें चौड़ी हो गयीं। वह चौंक कर बोल उठी, “राजजी, आपके साले की बीबी तो कमाल है! बड़ी तीखी नजर और समझ है उसकी! वह तो आपकी चाल को भांप गयी लगती है!”

डॉली को ध्यान नहीं रहा की फ़ोन को स्पीकर फ़ोन पर लगाने से उसकी हलकी सी आवाज भी अंजू को उस तरफ सुनाई पड़ रही थी।

डॉली की आवाज सुन कर अंजू बोल पड़ी, “डॉली जी, नमस्कार! मैं राजजी के साले साहब की पत्नी अंजू बोल रही हूँ। आप और जीजा जी इस समय साथ में है यह जान कर बहुत अच्छा लगा। अब मैं कुछ कुछ समझने लगी हूँ की आखिर यह सब माजरा क्या है। अब तक मैं समझी को नी की जीजा जी ने ननद जी को अकेली आपके पति सेठी साहब के साथ कैसे भेज दिया?

पर आपकी आवाज सुन कर अब सब ठीक समझ में आया। आप और जीजाजी निश्चिन्त रहें की तीन दिन तक ननद सा और सेठी साहब को यहां कोई आंच नहीं आने दूंगी। और वहाँ आप भी हमारे जीजाजी के साथ निश्चिन्त रहें। यह सारी कहानी हम तीनों के बीच में ही रहेगी। जीजाजी को कहना की यहां आपके साले साहब को या किसी और को ज़रा भी भनक नहीं लगने दूंगी की माजरा क्या है।

पर डॉली जी, एक बात तो माननी पड़ेगी की आपके पति हैं बड़े हैंडसम। ननद सा वाकई खुश हो जाएंगी। और वैसे डॉली जी, हमारे जीजा जी भी कुछ कम नहीं। आल धी बेस्ट डॉली जी।”

मैंने फ़ौरन फ़ोन काट दिया। यह तो बड़ी गड़बड़ हो गयी! अंजू ने हमारी सारी प्लानिंग को भाँप लिया था। मरे चेहरे पर चिंता के छाये हुए बादल देख कर डॉली हँस पड़ी और बोली, “अरे चिंता क्यों कर रहे हो? अंजू ने भले ही आप की प्लांनिंग को भाँप लिया हो पर उसने यह भी कहा ना की वह किसी को इसके बारे कुछ भी बताएगी नहीं।

जब वह सामने चल कर खुल्लमखुल्ला कह रही है तो निश्चिन्त हो जाओ। और फिर अगर मान भी लो की वह सब कुछ बोल देती भी है तो क्या होगा? जब हम चारों राजी तो क्या करेगा क़ाज़ी? अब रंग में भंग मत करो। अभी हमारा काम पूरा नहीं हुआ।”

यह कह कर डॉली बिना कोई चिंता के मेरे ऊपर मरे बदन को अपनी नंगी करारी टाँगों के बीच में ले कर मेरे ऊपर सवार हो गयी और अपनी चूत को मेरे लण्ड के करीब लाकर मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत की पंखुड़ियों के केंद्र बिंदु पर सटा दिया।
 
डॉली अब मुझे चोदने के लिए तैयार हो गयी। डॉली के मस्त स्तन डॉली की उस मुद्रा में भी थोड़ा सा भी झुके और लटके बिना फुले भरे हुए अपनी निप्पलों के सख्त शिखर को अपनी चोटी में रखे हुए उन्नत, अल्लड़ और उच्छृंखल से अपनी उद्दंडता दिखा रहे थे।

मैंने मेरे लण्ड को डॉली की चूत में सेट करते हुए ऊपर की और एक धक्का दिया। डॉली के बदन के वजन से और चिकनाहट से लथपथ मेरा लण्ड डॉली की चूत में जैसे मक्खन के ब्लॉक में छुरी घुस जाती है ऐसे पूरा का पूरा अंदर घुस गया।

डॉली की आँखों के मटकने से मैं समझ गया की उसे भी मेरे लण्ड के उसकी बच्चेदानी तक घुस जाने से एक रोमांचक भाव जरूर महसूस हुआ होगा। डॉली की चूत की वही कम्पन तब मैंने कहीं ज्यादा महसूस की। डॉली की चूत की त्वचा बार बार मेरे लण्ड को जकड रखे हुए इतनी तेजी से फड़फड़ा रही थी की मुझे यह महसूस होने लगा जैसे डॉली मुझे चोदते हुए बारबार झड़ रही हो।

मेरे ऊपर सवार हुई डॉली जैसे जैसे मुझे और ज्यादा से ज्यादा फुर्ती से चोदती रही उसकी चूत के अंदर का कम्पन मेरे लण्ड को अपने अंदर खिंच कर मेरे लण्ड के वीर्य की एक एक बूँद जैसे चूसना चाहती हो ऐसा मुझे महसूस होता रहा। हालांकि डॉली मुझे चोद रही थी पर चोदते हुए वह बार बार काफी गर्म जोशीसे मुझे कह रही थी, “राज, और चोदो, और जोर से चोदो मुझे। फ़क मी हार्ड। बहुत अच्छा लग रहा है। तुम बहुत अच्छा चोद रहे हो।”

डॉली की नन्हीं सी फ्रेम में इतनी जबरदस्त एनर्जी होगी यह मैंने नहीं सोचा था। जैसे ही मेरा लण्ड उसकी चूत में घुसाथा वह मुझ पर पूरी आक्रमकता से टूट पड़ीथी। उसके सर पर पता नहीं कैसा जनून सवार हो गया था। जैसे किसी इंसान के सर पर भूत सवार होता है ऐसे ही डॉली के बिखरे हुए बाल उसके खूबसूरत चेहरे पर हर तरफ फैले हुए थे। हवा में उड़ रहे बिखरे हुए बालों को कभी मैं तो कभी डॉली संवारते और एक जूथ सा बना कर उन्हें अपनी जगह रख देते, किन्तु शीघ्र ही वह फिर से बिखर जाते और फिर से वही सब। मुझे चोदते हुए डॉली अपनी गाँड़ क्या अपना पूरा बदन जब ऊपर नीचे करती तो उसकी चूँचियाँ भी चारों तरफ फ़ैल जातीं। मैं उनको अपने हाथोँ में पकड़ कर सेहला कर सम्हालता रहता तो कभी डॉली को मेरे बदन से सटा कर उनको चूसता, चूमता और कभी कभी उनकी निप्पलों को काटता भी। मैं वाकई में अपने आप को बड़ा ही भाग्य शाली मान रहा था की इतनी सुन्दर औरत मुझे इतने प्यार से चोद रही थी जो मेरे लिए एक ख्वाब के समान था।

मुझे चोदते हुए डॉली तो पता नहीं कितनी बार झड़ चुकी होगी पर तब मैं भी अपने आप को रोक नहीं पा रहा था। मैं जानता था की डॉली तहे दिल से मेरे वीर्य की एक एक बून्द अपनी चूत में भर देना चाहती थी। पर मेरा वीर्य जब बाहर निकलने वाला था तब एक भद्र पुरुष की तरह मेरा कर्तव्य था की मैं अपनी प्रियतमा को पूछूं की क्या वह मेरा वीर्य अपनी चूत की गहराइयों में समा देना चाहती थी।

मेरा पूरा बदन सख्त होने लगा। मैं झड़ने के कगार पर था। मरे शारीरिक अंदाज से डॉली समझ गयी की मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने भी डॉली के चोदने की फुर्ती को कुछ कम करने का संकेत जरूर दिया होगा। स्त्रियां कामक्रीड़ा में शायद पुरुष से कहीं ज्यादाही संवेदनशील होतीं हैं। वह हमारे बदन के सुरते हाल से ही समझ जातीं हैं की हमारे दिमाग में और बदन में उस समय क्या चल रहा है। डॉली तो बड़ी ही ज्यादा संवेदनशील और अक्लमंद औरत थी। उसे समझने में देर नहीं लगी की मैं झड़ने वाला हूँ और शायद इस असमंजस में हूँ की अपना वीर्य डॉली की चूत में खाली करूँ या नहीं।

डॉली ने अपने चोदने की फुर्ती को और तेज करते हुए कहा, “राजजी, मैं आपके बच्चे को अपने गर्भ में रखना चाहती हूँ। मैंने यह बात ज्योति को भी कह दी थी। मुझे तुमसे बच्चा चाहिए। मैंने आप से भी पहले से ही यह शर्त रखी थी। प्लीज़ मुझे निराश मत करना। मुझे अपना सारा वीर्य देदो। मुझे गर्भवती बनाओ। मुझे बच्चा चाहिए। मैं माँ बनना चाहती हूँ” यह कह कर डॉली मेरे बदन पर चढ़ी हुई मुझे फुर्ती से चोदते हुए फफक फफक कर रोने लगी।

उस समय मैं इतना अजीबोगरीब महसूस कर रहा था की आज मैं उस समय के मेरे मन के भाव का वर्णन करने में असमर्थ हूँ। एक इतनी सेक्सी, खूबसूरत चुदवाने के लिए बड़ी ही बेताब चुदक्क्ड़ औरत मुझे पूरी शिद्द्त से चोदते हुए रोते रोते कह रही थी की मैं उसको माँ बनाऊं। अक्सर औरतें किसी दूसरे मर्द से चुदवा तो लेती हैं पर उसके गर्भ से माँ बनाना नहीं चाहतीं। पर यहां तो उलटा ही था। डॉली की आँखों में आंसूं देख कर मुझे बुरा लगा।

मैंने कहा, “मेरे मन की बात आप कैसे जान लेती हैं? खैर मैं बिलकुल नहीं रोकूंगा। अपना सारा वीर्य आपके अंदर उंडेल दूंगा पर प्लीज़ आप आंसूं मत बहाओ। मैं आपको बच्चा दूंगा। आप शान्त हो जाओ।”

मेरी बात सुनकर डॉली के चेहरे पर मुस्कान लौट आयी। वह बोली, “सच में? मुझे तुम माँ बनाओगे? तुम जब कहोगे मैं तुमसे चुदवाउंगी। पर मुझे एक बच्चा दे दो।”

यह कह कर डॉली मुझ पर लेट गयी और मेरा सारा वीर्य अपने अंदर लेते हुए वह मरे होंठों से अपने होँठ चिपका कर मुझे पागल की तरह चूमने लगी। एक औरत में माँ बनने की कितनी जबरदस्त इच्छा होती है यह मैंने पहली बार इतने सटीक तरीके से देखा।”

उस समय मैं मेरे वीर्य का फव्वारा रोक नहीं पा रहा था और रोकने वाला भी नहीं था। डॉली की चूत की चमड़ी ने मेरे लण्ड को इतनी सख्ती से जकड़ा हुआ था और डॉली की जबरदस्त चुदाई के कारण मैं वैसे भी अपने वीर्य को रोक नहीं पा रहा था। बिजली के कड़ाके से होते हुए धमाके की तरह मेरे लण्ड से मेरे गरम गरम वीर्य का जबरदस्त फव्वारा छूटा और डॉली ने उसे जरूर अपनी चूत की सुरंगों में लावा सा गरमागरम प्रवाही बहता हुआ महसूस किया होगा।
 
मैं और डॉली उसी पोज़िशन में काफी देर तक पड़े रहे। डॉली मुझे होँठों पर चूमती रही। कुछ देर बाद इस डर से की कहीं मेरा वीर्य बाहर नहीं गिर जाए, डॉली ने मुझे अपने ऊपर चढ़ा दिया और मेरा लण्ड अपनी चूत में रखे हुए वह मेरे नीचे लेट गयी ताकि मेरे वीर्य की एक बून्द भी उसकी चूत में से बाहर ना निकले। मैं डॉली की इस इच्छा का सम्मान करता था। मेरे डॉली को चोद पाने में डॉली की इस इच्छा का बड़ा योगदान था यह मैं भलीभाँती जानता था। वरना पता नहीं इतनी खूबसूरत औरत मिलना कोई सपने के साकार होने से कम नहीं था।

काफी देर के बाद मैं डॉली के बगल में जा कर लेट गया। जैसे ही मेरी आँखें गहराने लगीं की डॉली ने मुझे झकझोरते हुए कहा, “अभी तो रात का खाना और खाने के बाद पूरी रात का खेल बाकी है। अभी से कहाँ सोने का प्लान कर रहे हो? चलो उठो।”

मैं थका हुआ था और कुछ देर विश्राम करना चाहता था। मैंने डॉली से कहा, “मैं कुछ देर विश्राम करना चाहता हूँ।” डॉली ने जब देखा की मैं वाकई में थका हुआ था तो मेरे बदन पर एक सरसरी नजर फेंक मुस्कुराती हुई उठ खड़ी हुई और बोली, “ठीक है, कुछ देर विश्राम कर लो, तब तक मैं टेबल पर खाना गरम कर लगाती हूँ।”

मैं वहीँ फर्श पर बिछाये हुए गद्दे पर ही ढेर हो गया। पता नहीं कितना समय मैं सोया हुआ होऊंगा पर काफी देर बाद जब मुझे महसूस हुआ की डॉली मुझे झकझोर कर जगा रही है तब मैंने आँखें खोल कर देखा तो मेरी प्रियतमा नाइटी पहन कर सजी हुई मुझे खाने के टेबल पर आने के लिए कह रही थी। मैंने उठ कर डॉली ने रखा हुआ सेठी साहब का कुर्ता पजामा पहना। हम ने फुर्ती से खाना खाया और डॉली ने बनायी हुई गरम कॉफ़ी पी। सारा टेबल चन्द मिनटों में साफ़ कर मेरी रात की रानी आयी और मेरा हाथ थाम कर मुझे पकड़ कर अपने बैडरूम में ले गयी।

हम जैसे ही बैडरूम में पहुंचे डॉली ने मेरे पाजामे के नाडा खोल कर उसे उतार कर मेरे ढीले लण्ड को अपनी उँगलियों में लिया और उसे ले कर प्यार से सहलाते हुए बोली, “आज रात तो यहीं गुजारेंगे ना राज साहब?”

मैंने डॉली को अपनी बाँहों में भर कर कहा, “ऐसी खूबसूरत अप्सरा अगर इस तरह प्यार से बुलाये तो कौन साला अपने घर जाएगा? पर मोहतरमा अब आगे क्या प्रोग्राम है?”

डॉली ने अपने हाथ में मेरे लण्ड को सेहला कर उसे सख्त करते हुए कहा, “इसे अब अपनी जवानी में आ जाने दो। फिर तुम इसे तैयार करो।” यह कह कर डॉली ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी जाँघों के बीच में रख दिया।

मैंने डॉली के गाउन की झिप खोल कर गाउन को नीचे उतार कर डॉली को ऊपर से नंगी कर दिया। डॉली ने गाउन के अंदर और कुछ नहीं पहन रखा था। डॉली के अल्लड़ मस्त स्तनोँ को अपने हाथों में मसलते हुए मैंने डॉली के बदन से पूरा गाउन निकाल दिया। मत्स्यगंधा जल मछली सी अत्यंत खूबसूरत नंगी डॉली अपने कपडे उतरते ही लाज से शर्माती हुई नजरें झुका कर मेरी छाती पर अपना सर रख कर आगे मैं क्या करता हूँ उसका इंतजार करने लगी। मुझसे करीब एक घंटे चुदवाने के बाद भी जब इस औरत को मैंने दुबारा नंगी किया तो लाज शर्म से वह पानी पानी हो रही थी। यही हमारी भारतीय महिलाओं की खूबसूरती है। लज्जा उनका आभूषण है।

मैंने अपना कुर्ता निकालते हुए डॉली को अपनी गोद में बिठा दिया। मेरा लण्ड सख्त हो चुका था। मैं डॉली की चूँचियों को सहलाते हुए और उसकी निप्पलों को उँगलियों में पिचकते हुए अपने घुटनों पर बैठ खड़ा हुआ और डॉली को भी अपने घुटनों पर आधा खड़ा करने लगा। डॉली समझ गयी की मैं उसे घोड़ी बना कर पीछे से चोदना चाहता था। डॉली ने थोड़ा आतंकित नज़रों से मुझे देखा। शायद उसे लगा की कहीं मैं उसकी गाँड़ मारना तो नहीं चाह रहा था?

पर वह कुछ नहीं बोली और अपनी गाँड़ मेरी और कर घोड़ी की पोजीशन में हो गयी। मैंने फ़ौरन डॉली के पीछे उसकी मस्त गुलाबी गोरी चिट्टी, बड़े ही कामुक घुमाव वाली भरी हुई गाँड़ पर एक सख्त चपेट मारी। मेरी चपेट उतनी तेज नहीं थी पर शायद डॉली को ऐसी चपेट की अपेक्षा नहीं थी।

डॉली के मुंह से सिसकारी निकल गयी। उसने घूम कर पीछे देख कर कुछ मुस्कुराते हुए कुछ कटाक्ष से और कुछ असहायता भरे स्वर में कहा, “क्या करते हो?” और चुपचाप वैसे ही घोड़ी की पोजीशन में बनी रही। शायद वह अपने मन में असमंजस में थी की अब मैं क्या करूंगा? उसकी गाँड़ मारूंगा या पीछे से उसकी चूत चोदूंगा।

.....................................................
 
मैंने डॉली की गाँड़ पर अपनी हथेली फिराते हुए उसकी गाँड़ के गालों को दबाकर उनसे खेलते हुए उसकी गांड के बीच की दरार में उंगली डाली। डॉली की गाँड़ सेठी साहब कई बार मार चुके होंगे। इसके कारण वह उतनी टाइट नहीं थी जितनी की ज्योति की थी। डॉली ने पीछे मुड़कर देखा और बोली, “उसमें डालोगे क्या? उसको छोडो यार आगे डालो। मैं बेसब्री से इंतजार कर रही हूँ।”

मैंने बिना बोले पीछे से मेरा लण्ड डॉली की चूत की पंखुड़ियों में सेट किया। डॉली ने फिर एक बार पीछे मुड़कर देखा और और अपनी उँगलियों को बारबार अपने मुंह में डाल कर अपनी लार से मेरे लण्ड को और अपनी चूत की पंखुड़ियों को चिकना किया। फिर थोड़ा पीछे हट कर मेरे लण्ड को अपनी चूत पर थोड़ा दबाव डलवा कर मुझे मेरे लण्ड को उसकी चूत में अंदर घुसाने का संकेत दिया।

मेरा लण्ड तो तना हुआ डॉली की चूत में घुसने के लिए बेताब था ही। मैंने एक जोरदार धक्का मार कर मेरा लण्ड डॉली की चूत में घुसेड़ दिया। शायद चिकनाहट कम थी या डॉली की चूत मेरे लण्ड को अंदर लेने के लिए तैयार नहीं थी, पर डॉली के मुंह से दर्द के मारे हलकी सी चीख निकल पड़ी।

मैं थम गया। डॉली ने अपनी गाँड़ से पीछे की और धक्का मार कर मुझे निर्देश दिया की मैं बिना रुके डॉली की चुदाई जारी रखूं। मैंने मेरी रानी की आज्ञा का पालन करते हुए पीछे से डॉली की चूतमें मेरे लण्ड को पेलना शुरू किया।

मैं यहां यह कुबूल करता हूँ की मुझे मेरी प्रेमिका को पिछसे चोदना बहुत पसंद है। जब मैं चोदते हुए मेरी प्रेमिका की सुन्दर नशीली गाँड़ देखता हूँ तो मुझ में और जोश भर जाता है। और एक नशीला दृश्य होता है माशूका की चूँचियों का झूल कर चुदवाते हुए हिंडोले की तरह झूलते हुए देखना। जो चूँचियाँ सख्ती से गुरुत्वाकर्षाण के नियम को तोड़कर भी अपना आकार बना कर रखती हैं, वह पीछे से चुदवाते हुए सख्त तेज तगड़े धक्के पेलने के कारण लटकते हुए हिंडोले की तरह झूलने लगतीं हैं। उनको पीछे से पकड़ कर दबाना, मसलना, उनकी निप्पलों को जोर से पिचकाने का मजा ही कुछ और है।

खूबसूरत परी जैसी डॉली की चूत में बिना थके मैं मेरा लण्ड काफी देर तक पेलता रहा। शायद डॉली भी बहुत ज्यादा एन्जॉय कर रही होगी, क्यूंकि कई बार बीच में ही चुदवाते हुए वह झड़ रही थी। जब वह झड़ती थी तब उसके मुंह से हलकी सी सिसकारी या “उँह….” जैसी आवाज निकल जाती थी। अगर मैं थम जाता तो डॉली मुझे चुदाई जारी रखने के लिए कहती।

चोदते हुए मुझे डॉली की चूत में लण्ड अंदर बाहर होते हुए देख बड़ी ही अजीब सी फीलिंग होती थी। मैं ऐसी खूबसूरत औरत को चोदने का मौक़ा पाकर अपने आप को बड़ा ही भाग्यशाली समझ रहा था। डॉली एक बड़ी ही संवेदनशील प्रेमिका थी। सेठी साहब बड़े भाग्यशाली थे की उन्हें ऐसी खूबसूरत, समझदार और संवेदनशील बीबी मिली।

जो भी पति मेरी कहानी पढ़ रहे हैं उनको अनुरोध है की अपनी बीबी को भी दूसरे मर्दों से चुदवाने का मौका दें, बल्कि उनको दूसरे मन पसंद मर्दों से चुदवाने के लिए प्रोत्साहित करें। कई बार बीबियाँ किसी दूसरे से चुदवाने के लिए मना कर देतीं हैं। इससे निराश मत होइए। अपनी कोशिश जारी रखिये। जब पत्नी को यह यकीन हो जाएगा की वाकई में आपको आपत्ति नहीं है और आपको जलन नहीं होगी तो बीबियाँ भी मान सकती हैं।

साथ में मेरा पत्नियों से भी अनुरोध है की अगर आपके पति आपको दूसरे मर्दों से चुदवाने के लिए कहते हैं तो आप इनसे लड़ाई झगड़ा ना करें। अक्सर जो पति अपनी पत्नियों से प्यार करते हैं वह अपनी पत्नी को कैसे ज्यादा से ज्यादा सुःख दे सकें उसकी चिंता में रहते हैं। वह चाहते हैं की उनकी पत्नी भी बाहर के दूसरे मर्द से चुदवा कर उसकी जो उत्तेजना और आनंद है उसे अनुभव करें। जो युगल इस तरह एक दूसरे को सपोर्ट करते हैं वह वाकई में बड़े सुखी होते हैं।

कई बार पति चाहते हैं की उनकी पत्नी किसी और मर्द से उनके सामने ही चुदवाये। इस बात में भी पत्नियों को आश्चर्य करने की कोई आवश्यकता नहीं है। अक्सर जो पति पत्नियों को बेतहाशा प्यार करते हैं वह ऐसा करना चाहते हैं। पत्नी और पति दोनों मिलकर साथ में बैठ तय करें की पत्नी किस से इस तरह चुदवाये।

पत्नियों को भी चाहिए की पति को भी किसी दूसरी औरत को चोदने की इजाजत दे।जो पति अपनी पत्नियों को दूसरे मर्द से अपने सामने चुदवाना चाहते हैं उन्हें नामर्द समझने की गलती ना करें। वह पति चाहते हैं की उनकी पत्नी दूसरे मर्दों से चुदवाते हुए जो आनंद और जो उत्तेजना महसूस करती है उसमें वह भी भागिदार बनें और पत्नी की ख़ुशी से वह भी खुश हों।

डॉली को चोदते हुए कई बार मेर मन किया की एक बार तो मैं मेरा लण्ड डॉली की इतनी खूबसूरत गाँड़ में पेलकर देखूं तो सही की कैसा फील होता है। पता नहीं कैसे पर डॉली को इसकी भनक लगी होगी, क्यूंकि मुझसे चुदवाते हुए एक बार मौक़ा मिलते ही डॉली ने पीछे मुड़कर मेरी और देख कर कहा, “मेरी गाँड़ मारने का मन तो नहीं कर रहा? मैं जरूर मौक़ा दूंगी। पर मैं चाहती हूँ की पहले आप अपना सारा माल मेरे गर्भाशय में डालकर मुझे गर्भवती बनादो। इसके बाद आप को जो करना है करो। मैं नहीं रोकूंगी।”

डॉली की मजबूरी और उसके मन की वेदना मैं समझने लगा था। अक्सर हम मर्द स्त्रियों के मन के भाव नहीं समझ पाते हैं। ज्यादातर स्त्रियों में या यूँ कहिये की लगभग सारी स्त्रियों में ही भगवान ने माँ का जो भाव स्थापित किया है जिसके कारण यह सारी दुनिया चल रही है, वह अद्भुत है। सबसे पहले माँ बनने का और माँ बनने के बाद अपने बच्चे की जी जान से रक्षा और लालन पालन करने का जो भाव है वह मात्र स्त्रियां ही महसूस कर सकती हैं।

डॉली को पीछे से चोदते हुए मैं बहुत ज्यादा देर टिक नहीं पाया। हालांकि मैं अपने आप को झड़ने से रोक सकता था। पर डॉली की वीर्य को पाने की प्रबल इच्छा देख मैंने अपने आप को नहीं रोका। दूसरे डॉली की इतनी सेक्सी गाँड़ देख कर ही मेरे लण्ड में पता नहीं क्या हो जाता था।

मेरी चुदाई के कारण डॉली तो कई बार झड़ी, पर मैं टिका रहा था। आखिर में करीब दस या पंद्रह मिनट चोदने के बाद मैं झड़ने के कगार पर पहुंचा तब मैं डॉली की खूबसूरत गाँड़ के गालों को जोर से दबाते हुए बोला, “डॉली मैं झड़ने वाला हूँ। मैं तुम्हार अंदर मेरा सारा माल छोड़ता हूँ।”

यह कह कर मैंने उस रात दूसरी बार डॉली की चूत में मेरे वीर्य का गरमागरम फव्वारा छोड़ा। मैं डॉली की चूँचियाँ दोनों हाथों में पकड़ कर डॉली की चूत में पीछे से लण्ड डाले हुए वैसे ही खड़ा रहा जब तक मेरे वीर्य की आखिरी बून्द डॉली की चूतमें ना चली जाए। डॉली भी वैसे ही घोड़ी बनकर मेरे वीर्य को स्वीकार करके शायद अपने इष्ट को प्रार्थना कर रही होगी की वह मेरे वीर्य से गर्भवती हो।

कुछ समय के पश्चात मैं और डॉली थकान से त्रस्त हो कर पलंग पर लुढ़क पड़े। डॉली काफी थकी हुई थी। नंगे बदन पर कपड़ा भी ढकने की उसमें ताकत नहीं थी। मैंने डॉली को पलंग पर ठीक से सुलाया और मैं डॉली से लिपट कर उसकी गोरी गाँड़ से मेरा ढीला पड़ा हुआ लण्ड सटा कर सो गया।

पता नहीं कितने बजे होंगे। खिड़की के घने परदे के पीछे से सूरज की किरणों का आभास हो रहा था। उसी समय मेरे फ़ोन पर मैसेज आने का नोटिफिकेशन सूना। मैंने व्हाट्सप्प खोला तो ज्योति का डराने वाला मैसेज आया हुआ था जिसे पढ़कर मेरे पाँव तले से जमीन खिसक गयी।

ज्योति ने लिखा था। “प्यारे राज, मैं जानती हूँ इस समय शायद तुम बिजी होंगे या थके हुए होंगे। (ज्योति भी जानती थी की उसके निकलते ही मैं डॉली को पकड़ लूंगा, नहीं छोडूंगा) पता नहीं कैसे मेरी भाभी को हमारे राज़ का अंदेशा हो गया है।

कल रात को भाभी ने मुझे मुन्ने को सुलाकर सेठी साहब के कमरे में जाने के लिए बारबार आग्रह किया और कहा की मैं बेशक पूरी रात सेठी साहब के साथ रहूं और खूब एन्जॉय करूँ। बल्कि मैं जब आनाकानी कर रही थी तब उन्होंने मुझे धक्के मार कर भेजा और कहा की अगर मैं नहीं गयी तो वह खुद रातभर सेठी साहब के साथ सोयेगी, तो मेरे भाई को भी पता चल जाएगा। मैं बहुत डरी हुई हूँ की कहीं भाई को पता चल गया तो मेरी मट्टी पलित हो जायेगी।”
 
मैं मैसेज पढ़ कर कुछ देर सुन्न सा सोचता रहा फिर मैंने ज्योति को मैसेज किया, “डार्लिंग, चिंता मत करो। चिंता करने से कुछ नहीं होगा। तुम इस समय काफी थकी हुई होगी। चिंता की कोई बात नहीं है। अभी तुम कुछ देर विश्राम करो। सुबह उठ कर शान्ति से रोज की तरह ही वर्तन करना। देखो भाभी क्या कहती है। घबड़ाने की कोई जरुरत नहीं। मुझे लगता है भाभी सिर्फ हमारी परिस्थिति का मजा ले रही है। वह भाई को यह सब नहीं कहेगी। तुम निश्चिन्त रह कर सब काम सामान्य तरीके से करो। जैसे ही कुछ विशेष बात हो मुझे मैसेज करना या बात करना।”

डॉली पलंग पर गहरी नींद सो रही थी। मैं उठा और तैयार होने लगा। सुबह दूधवाला, अखबार वाला, कामवाली यह सब आने लगते हैं। अगर उन्होंने सेठी साहब की अनुपस्थिति में मुझे इस घर में देख लिया तो मेरी कहानी सारी कॉलोनी में फ़ैल जायेगी। मैंने डॉली को उठा कर कपडे पहन कर फिर सोने को कहा। मने कहा की कहीं दूध वाला, कामवाली बगैरह आ ना जाएँ।

डॉली ने कहा की उसने कामवाली को तीन दिन की छुट्टी दे रखी थी, दूध डॉली ने पिछले दिन ही ले रखा था। अखबार वाला तो बाहर अखबार डालकर चला जाता था, तो उसे कोई चिंता नहीं थी। यह कह कर जब वह सोने लगी तो मैंने उसे कहा की मैंने यह सब इंतजाम नहीं किया था सो मुझे जाना पड़ेगा। यह कह कर मैं अपने फ्लैट में जा पहुंचा और ज्योति के मेसेज या फ़ोन का इंतजार करने लगा।

लगभग पूरी रात जागने के बाद भी ज्योति का मेसेज पढ़ कर मेरी नींद हवा हो चुकी थी। मुझसे अब और इंतजार नहीं हो रहा था। पर सुबह दूध वाला, काम वाली सब के आते जाते रहने के कारण मैं ज्योति से बात नहीं कर पाया। मैंने करीब साढ़े आठ ज्योति को फ़ोन मिलाया। पर फ़ोन ज्योति ने नहीं ज्योति की भाभी अंजू ने उठाया।

अंजू ने फ़ोन उठाते ही हँसी मजाक के लहजे में पूछा, “जीजू सा, प्रणाम! ननद सा से बात किये बगैर चैन नहीं पड़ता क्या आपको? ननदसा अभी बाथरूम में है। जीजू, एक बात तो माननी पड़ेगी। आपके और दीदी के बीच में जो अंडरस्टैंडिंग है उसका जवाब नहीं। आप यहां की बिलकुल फ़िक्र मत करना। मैं हूँ ना। सब सम्हाल लुंगी।

सुबह दीदी काफी देर से उठी है। लगता है दीदी की तबियत थोड़ी ठीक नहीं। चिंता की कोई बात नहीं। दीदी एक्चुअली तो बहुत ज्यादा थकी हुई हैं। पूरी रात बेचारी सो नहीं पायी। उनको पूरी रात मच्छरों ने या पता नहीं खटमलों ने काटा और परेशान किया।

वैसे हमारे यहां अभी एक भी मच्छर या खटमल नहीं है, पर पता नहीं शायद कहीं से कोई एक मच्छर या खटमल ने दीदी की नींद हराम कर दी है। दीदी का खून कुछ ज्यादा ही मीठा होगा। दीदी के बदन पर कई जगह लाल लाल निशान हैं। कुछ तो ऐसी जगह हैं की किसीको दिखा नहीं सकते। गरमी के कारण शायद रात में दीदी ने कपडे निकाल दिए होंगे। वैसे उनके और सेठी साहब के कमरे में तो ए.सी. लगा हुआ है और बढ़िया काम कर भी रहा है।

खैर, मैं अभी ननदसा को नीचे नहीं जाने दूंगी। पापा या मम्मी ने ननदसा को अगर इस हाल में देख लिया और बदन के निशान देखे तो वह कुछ और सोचेंगे। मैं सब को कह दूंगी की ननदसा की तबियत थोड़ी ठीक नहीं है। मुन्ना सेठी साहब के साथ नीचे खेलने गया है।

सेठी साहब नाश्ता करके अपने काम पर जयपुर के लिए निकल चुके हैं। वह भी थके हुए दिख रहे थे। शायद वह भी रात भर सो को नी पाए। उनको भी रात भर मच्छरों ने परेशान किया लगता है। रात को वापस आएंगे। दीदी के भाई आज दफ्तर के काम से तीन दिन के लिए बाहर गए हैं। जीजू, आप ननदसा की बिलकुल चिंता मत करना, मैं सब सम्हाल लुंगी। यहां सब कुछ ठीक है। दीदी बाथरूम से निकलेगी तो आपसे बात करेगी।”

यह सब कह कर अंजू ने फ़ोन रख दिया। अंजू की इतनी बात से मैं समझ गया की अंजू ने सब कुछ भाँप लिया था और फिर भी वह किसी को कुछ नहीं बताएगी। अंजू यह भी समझ गयी थी की इस सारे तामझाम में मैं और ज्योति मिल कर सब कुछ एक दूसरे की सहमति से कर रहे थे। क्यूंकि वरना अंजू मुझसे इतनी ऐसे बात नहीं करती। यह बात मेरी समझ में नहीं आ रही थी। पर एक बात अच्छी थी की सिचुएशन नियंत्रण में थी।

कुछ ही देर में ज्योति का फ़ोन आया। ज्योति कुछ घबड़ायी हुई थी। ज्योति ने कहा, “अंजू भाभी बड़ी शरारती और शातिर है। वह सेठी साहब और मेरे बीच की बात भाँप गयी है। उसने मुझे नीचे पापा और मम्मी के पास जाने से मना किया है। वैसे उसकी बात भी ठीक है।

मैं उस हालात में नहीं की मैं नीचे जा सकूँ। अब मैं आपको क्या बताऊँ? आप तो आप के दोस्त सेठी साहब का नेचर जानते हो। भाभी ने आपको सब कुछ बता ही दिया है। पर वैसे चिंता की कोई बात नहीं। मुझे लगता है भाभी मजे ले रही है वह किसी से कुछ कहेगी नहीं। मैं भाभी को सम्हाल लुंगी। लगता है भाभी सेठी साहब से बड़ी इम्प्रेस हुई है। रात को मुझे धमकी दे रही थी की अगर मैं सेठी साहब के पास नहीं गयी तो खुद चली जायेगी। पता नहीं सेठी साहब के पास क्या जादू है की हर लड़की उनके पास जाना चाहती है।”

मैंने ज्योति से मजाक में कहा, “हाँ भाई, ऐसा क्यों नहीं कहती की सेठी साहब की पर्सनालिटी ही कुछ ऐसी है की लडकियां उनसे इतनी इम्प्रेस्सेड हो जाती हैं की जो लड़की सेठी साहब से मिलती है वह उनसे चुदवाना चाहती है?”

ज्योति ने कुछ रिलैक्स्ड होते हुए कहा, “लगता है तुम्हें सेठी साहब से जलन हो रही है।”

मैंने कहा, “वह तो होगी ही। अरे मेरी खूबसूरत कमसिन बीबी को ही जिन्होंने वश में कर लिया हो उनसे जलन नहीं होगी क्या?”

ज्योति ने कटाक्ष का जवाब कटाक्ष में देते हुए कहा, “अच्छा? बड़ी तत्वचिंतन की बात करने लगे हो! मेरा मुंह मत खुलवाओ। तुमने जो उनकी देवलोक की अप्सरा जैसी खूबसूरत बीबी को अपने नीचे पूरी रात दबा के रखा उसका क्या?”

मैंने ज्योति की बात को काटते हुए कहा, “अरे हम कहाँ बेकार में झगड़ने लगे। यहां बात तो तुम्हारी अंजू भाभी को सेट करने की है, और हम आपस में ही लड़ने लग गए।”

अचानक मेरे दिमाग में बत्ती हुई। मैंने ज्योति को कहा, “अगर तुम्हारी भाभी सेठी साहब से बहुत इम्प्रेस हुई है और सेठी साहब से रातको मिलने के लिए भी तैयार हो गयी थी तो तुम क्यों ना उसे आधी रात को चुपचाप अकेले सेठी साहब के कमरे में ले जा कर उसे सेठी साहब से मिला दो और ऐसा कुछ जुगाड़ करो की सांप भी मरे और लाठी भी ना टूटे?” मैं जैसे तैसे अंजू को मामला शांत करना चाहता था।
 
मेरी बात सुनकर कुछ झुंझलाती हुई ज्योति बोली, “क्या बकते हो? मैं भाभी को सेठी साहब से रात को मिलाऊँ? भाभी तो वैसे ही उनसे मिलने के लिए बड़ी बेताब है। वह तो फ़ौरन तैयार हो जायेगी। भाभी बड़ी बेशरम, शरारती और शातिर है। अगर मैंने सेठी साहब से उसे रात को मिला दिया तो समझो हो गया काम तमाम। अगर मैंने ऐसा कुछ किया तो भाभी का कोई भरोसा नहीं। वह तो सारे कपडे निकाल कर सेठी साहब से लिपट ही जायेगी। इतना झंझट कम है की एक और झंझट पैदा करूँ? मतलब? तुम कहना क्या चाहते हो?”

मैंने बड़ी ही शांति से कहा, “थोड़ा ठंडे दिमाग से सोचो। अगर अंजू भाभी सेठी साहब से इतनी ज्यादा इम्प्रेस्सेड है और रात को वह उनके कमरे में जाने के लिए भी तैयार हो जाती है और जैसे तुम कह रही हो की वह तो अपने कपडे निकाल कर सेठी साहब से भी लिपट सकती है तो मतलब की तुम्हारी भाभी सब तरह से तैयार है। तुम समझ गयी ना मैं क्या कहना चाहता हूँ? तुम्हारे भाई कहीं टूर पर गए हैं।

वह है नहीं तो उन्हें कुछ भी पता चलेगा नहीं। तो तुम्हारी अंजू भाभी को अगर तुम सेठी साहब से रातमें मिला देती हो, तो जो होता है होने दो। भाभी भी खुश, सेठी साहब भी खुश, तुम्हारे भाई को भी पता नहीं चलेगा और उसमें हमारा क्या जाता है? अब हम तुम को ऐसी जलन से ऊपर उठ जाना चाहिए।

अंजू भाभी खुश होंगी और चुप रहेगी। वैसे भी अंजू भाभी तुम्हारे और सेठी साहब के बारे में जान ही गयी है। तो तुम भाभी को भी सेठी साहब से अच्छी तरह से मिला दो। तुम सोचो और जैसे ठीक लगे करना। यह तो मेरे दिमाग में एक बात आयी तो मैंने बतायी। बाकी आप भी सोचो की भाभी को कैसे शांत किया जाए।”

सामने से ज्योति का कोई जवाब नहीं आया। शायद वह मेरी बात को ध्यान से सुन कर उसके बारे में गंभीरता से सोच रही थी। कुछ देर बाद ज्योति ने अकुलाते हुए कहा, “पता नहीं यह भाभी बीच में कहाँ से आ टपकी? खैर, आपने कहा इसके बारे में मैं सोचती हूँ। अभी तो मेरा दिमाग बिलकुल काम नहीं कर रहा। मैं बाद में फ़ोन करती हूँ।” ज्योति ने यह कह कर फ़ोन काट दिया।

मैं ज्योति की उलझन समझ सकता था। एक तो जिंदगी में पहली बार मेरी बीबी किसी गैर मर्द से चुदवा रही थी ऊपर से कहते हैं ना की “प्रथम ग्राशे मक्षिका” (खाना खाने बैठे और पहले ही निवाले में मछली दिखी तो कैसा हाल होगा?) वैसे पहले ही अनुभव में ज्योति को भाभी की शरारत का सामना करना पड़ रहा था तो ज्योति का झल्लाना स्वाभाविक था। पर कहते हैं ना की फूलों के साथ साथ काँटों को भी स्वीकार करना पड़ता है। मैंने अपना काम कर दिया था। अब क्या मेरी बीबी मेरे आइडिया पर अमल करेगी? अगर करेगी तो देखना यह था की ज्योति मेरे आइडिया को अमली जामा कैसे पहनाती है।

अब मेरा ध्यान ज्योति इस नयी चुनौती का कैसे सामना करती है उस पर था।

प्यारे पाठकगण चलिए हम भी देखते हैं ज्योति कैसे इस चुनौती का सामना करती है उसे ज्योति से ही क्यों ना सुनें?
 
आगे की कहानी ज्योति की जुबानी

रात की चाय पिने के बाद सेठी साहब ने मुझे फिर अपनी बाँहों में उठा कर पलंग पर लिटाया और खुद मेरी टांगें अपने कंधे पर रख कर फिर उसके बाद उस रात उन्होंने मुझे ऐसे चोदा ऐसे चोदा की बिना रुके और बिना रेस्ट किये रेलवे के स्टीम इंजन की तरह मैं लगभग आधे घंटे तक सख्ती से उनके नीचे लेटी हुई चुदती रही, चुदती रही।

मैं मेरी चूत में कुछ अजीब सी तीखी फीलिंग महसूस कर रही थी। वह दर्द था या उत्तेजक नशा यह कहना मुश्किल था। पर पूरी चुदाई के दरम्यान इतना जबरदस्त उत्तेजक नशा मेरे दिमाग पर छाया हुआ था की मैं उस आधे घंटे में कम से कम छे सात बार झड़ गयी और बार बार मैं चुदवाते हुए सेठी साहब से और जोर से चोदने के लिए कहती रही। जो रहम और दया सेठी साहब ने पहली चुदाई में दिखाई थी वह गायब थी।

हाँ वह बार बार झुक कर मुझे कभी होँठों पर तो कभी गाल पर तो कभी मेरे स्तनों पर चूमते, चूसते और काटते रहते और मुझे “ज्योति तुम बहुत अच्छे से चुदाई करवाती हो। तुम्हें चोदने में जो मजा आता है किसी के साथ भी नहीं आया आज तक।” यह सब कहते रहते थे।

आधे घंटे की नॉनस्टॉप चुदाई के बाद मुझे लगा की अगर सेठी साहब को मैंने नहीं रोका तो कहीं मैं बेहोश ना हो जाऊं। मैंने बड़ी ही धीमी आवाज में सेठी साहब से वाशरूम जाने का इशारा किया। सेठी साहब रुक गए और लण्ड निकाल कर मुझे जब खडा किया तब मुझे पता चला की मेरी टांगें लड़खड़ा रहीं थीं। सेठी साहब का लण्ड मैंने देखा तो वह तो वैसे का वैसे कोई चमड़े का बड़ा पाइप हो ऐसे उनकी टांगों के बीच पहले जितनी ही सख्ती से खड़ा ही था। मैं जैसे तैसे वाशरूम गयी और वाशरूम में ही फर्श पर लुढ़क पड़ी। कुछ देर वाशरूम में फर्श पर पड़े रहने के बाद मैं खड़ी हुई।

मैंने सेठी साहब से पूरी रात वह जैसे चाहें मुझे चोदना चाहें चोदे, यह वचन दिया था इस लिए मैं अब पीछे नहीं हट सकती थी। मुझे लगता था की सेठी साहब की भी कहीं ना कहीं कोई लिमिट तो होगी ही जब वह भी थक जाएंगे। मुझे उसी का इंतजार करना पड़ेगा। तब मुझे डॉली जी की हालत समझ में आ रही थी।

मैं वाशरूम से धीरे से उठ कर चलती हुई वापस सेठी साहब के कमरे में पहुंची। मैंने मेरी चाल में कृत्रिम फुर्ती लायी जिससे सेठी साहब को यह ना लगे की मैं थक गयी थी। मैं पलंग पर पहुंच कर सेठी साहब के गले लिपट पड़ी। मैंने सेठी साहब के होँठों से अपने होँठ चिपकाते हुए कहा, “सेठी साहब जो सुख और आनंद मुझे आज रात में आपसे मिला है, मैंने जिंदगी में सोचा भी नहीं था की सेक्स में ऐसा सुःख मिल सकता है।”

सेठी साहब ने मेरी आँखों में आँखें डालकर पूछा, “ज्योति सच सच बताना मेरी चुदाई से तुम्हें दर्द या कष्ट तो नहीं हो रहा?”

हालांकि मुझे मेरी चूत में कुछ दर्द सा महसूस हो रहा था पर उससे अधिक उस दर्द में मुझे इतनी उत्तेजना और मादकता महसूस हो रही थी की उसे दर्द कहना बेमानी होगी। मैंने सेठी साहब की आँखों में उतने ही आत्मविश्वास से आँखें डाल कर कहा, सेठी साहब मुझे दर्द नहीं आनंद और उत्तेजना का अतिरेक हो रहा है।

अब मुझे समझ में आ रहा है की क्यों आपके पीछे लडकियां हाथ धो कर पड़ी रहतीं हैं। मेरी भाभी भी आप को देख कर आप पर फ़िदा हो गयी है। शायद वह हमारे बारे में समझ गयी है। वह मुझसे आपकी बड़ी तारीफ़ कर रही थी। वह मुझे कह रही थी की मैं बड़ी लकी हूँ। उसके कहने का मतलब था आप इतने मजबूत और मरदाना हैं। मुझे उसकी बातों और नज़रों से ऐसा लगा की काश उसे अगर मौक़ा मिला तो वह आपको छोड़ेगी नहीं।”

मेरी बात सुन कर सेठी साहब हँस पड़े और बोले, “तुम्हारी भाभी तो बड़ी खूबसूरत है। तुम्हारे भैया बड़े ही लकी हैं की उन्हें तुम्हारी भाभी जैसी बीबी मिली हैं। तुम्हारे भैया भी बड़े तगड़े दीखते हैं। भाभी भैया से खुश नहीं है क्या?”

मैंने कहा, “सेठी साहब मेरी और भाभी की अच्छी जमती है। वह मुझसे बड़ी खुली हुई है। वह मुझसे सारी बातें खुल्लमखुल्ला कहती हैं। यहां तक की मेरा भाई उसे कैसे चोदता है वह भी मुझे कह देती है। पहले तो भाई इतना बिजी रहता है की उसे भाभी के लिए समय ही नहीं है।

दुसरा यह की भाभी तो यहां तक कह रही थी की आप इतने हैंडसम हो की अच्छी से अच्छी लडकियां आपके सामने नंगी हो जाएँ। मैंने उन्हें हंसी मजाक में पूछा की भाभी आप भी सेठी साहब के सामने नंगी हो जाओगी? तो वह बेशरम सी बोली की अगर तुम्हें एतराज नहीं हो तो वह हो जायेगी। मतलब सेठी साहब वह आपके और मेरे बीच की अंडरस्टैंडिंग के बारे में सब कुछ समझ गयी है।”

मेरी बात सुनकर सेठी साहब की आँखों और चेहरे पर चिंता के बादल छा गए। उन्होंने मुझे बाँहों में ले कर कहा, “यह तो गड़बड़ हो गयी। मेर्री वजह से तुम्हारी बदनामी हो यह मैं नहीं चाहता। अब क्या करें?”

मैंने कहा, “सेठी साहब आज आपको मुझे रात भर चोदना है। अभी तो आधी रात ही हुई है। सेठी साहब कहीं ऐसा तो नहीं की मेरी भाभी की बात सुनकर आप उसी के बारे में सोचने लग गए हैं और आपका मुझ में इंटरेस्ट कम हो गया है?”

सेठी साहब ने मेरी और तीखी नज़रों से देखा और बोले, “क्या बात करती हो? वह खूबसूरत है, ठीक है। वैसे तो मुझे कोई और सिचुएशन में मिली होती तो उन्हें चोदने में ख़ुशी होती। पर वह आपकी भाभी है और मैं यहां कुछ काम से आया हूँ। मेरे कारण आपकी बदनामी हो यह मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं सुबह ही यहां से चला जाऊंगा जिससे बात आगे ना बढे।”

मैंने सेठी साहब का हाथ थाम कर कहा, “सेठी साहब जल्द बाजी मत कीजिये। आप अगर यहां से जाएंगे तो उलटा असर भी हो सकता है। भाभी नाराज हो जाएंगी। वह शायद आपसे अकेले में मिलना चाहती हैं। वह कुछ मजाकिया है। आपसे हंसी मजाक कर सकती है। आप उसे मिल लीजिये। हो सकता है यह प्रॉब्लम वहीँ सुलझ जाए।”

मैंने इतना कह कर फ़ौरन अपना गाउन निकाल फेंका और सेठी साहब के सामने नंगी हो गयी। मैंने कहा, “अब मेरी भाभी को नहीं मुझे देखिये।”

सेठी साहब ने मुझे घोड़ी बनाते हुए कहा, “तुम्हारी भाभी जब आएगी तब देखेंगे। अभी तो मैं तुम्हारी गाँड़ देख रहा हूँ। तुम्हारी गाँड़ बड़ी तगड़ी और गोरी चिट्टी है। मैं तुम्हें पीछे से तुम्हारी गाँड़ देखता हुआ तुम्हें चोदुँगा। डरो मत, मैं तुम्हारी गाँड़ नहीं मारूंगा।” यह कह कर सेठी साहब ने मेरी नीचे की और लटकी हुई चूँचियों को अपनी हथेली में लेकर खूब प्यार से जोरसे दबाया और उन्हें मसलने लगे।

फिर दो तीन धक्के मार कर उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत में पेल दिया। मेरी चूत में मुझे एक तेज सी टीस महसूस हुई। पर उसके बाद सेठी साहब के फौलादी बदन में जकड़ी हुई मैं उनके लण्ड का तगड़ा मार मेरी चूत में झेलती रही। मेरी गाँड़ पर बार बार कुछ सख्ती से सेठी साहब जब चपेट मारते तो मेरी गाँड़ लाल हो जाती होगी। उस दर्द में भी मुझे बड़ी ही उत्तेजना महसूस हो रही थी।

सेठी साहब ने मुझे उसी घोड़ी पोज़ में फिर ४५ मिनट से ज्यादा तक चोदा होगा। वह अपना लण्ड पेलते ही गए, पेलते ही गए। मुझे समझ में नहीं आता की कैसे सेठी साहब का लण्ड इतना चोदते हुए छील नहीं जाता होगा क्या? और इस बार तो इतना तगड़ा और इतना सख्ती से चोद रहे थे वह की मैं बार बारझडती ही रही और वह बिना रुके पीछे से लण्ड पेलते रहे। मुझे जिंदगी में मेरे पति ने कभी इस तरह नहीं चोदा। मेरी जिंदगी एक अद्भुत दौर से गुजर रही थी।

सेठी साहब ने करीब ४५ मिनट के बाद फिर मुझे विश्राम का मौक़ा दिया। मैंने सेठी साहब के लिए फिर चाय बनायी। उसके बाद सेठी साहब तीसरी बार मेरे ऊपर सवार हुए और उन्होंने मुझे ऊपर चढ़ कर बड़े प्यार से एक के बाद एक तगड़े धक्के मार कर पर उतनी जल्द बाजी से नहीं पर धीरे धीरे चोदा।

उनके एक धक्के में मैं पूरा हिल जाती। उस बार सेठी साहब अपना वीर्य मेरी चूत में उंडेलना चाहते थे। मेरे झड़ने की तो कोई गिनती ही नहीं रही थी। आखिर में रात के करीब तीन बजे सेठी साहब के लण्ड से जबरदस्त गरम फव्वारा निकला और मेरी चूत के सारी सुरंग को भर दिया। नीचे लेटी हुई मैंने सेठी साहब का सारा वीर्य अपनी चूत में भर लिया था।

मुझे समझ में नहीं आया की इस तरह कोई आदमी कैसे चोद सकता है। फारिग होते होते रात के तीन बज गए। सेठी साहब से फारिग हो कर मैं बाथरूम में से हो कर अपने कमरे में रात के लगभग तीन बजे पहुंची।

हालांकि मैं बहुत ज्यादा थक चुकी हुई थी पर मेरी भाभी की बातों ने मेरी नींद हराम कर रक्खी थी। मेरे लिए यह जरुरी था की मैं मेरे पति राज को इसके बारे में पूरी जानकारी दूँ। मैंने सोने की काफी कोशिश की और शायद कुछ देर सोई भी सही पर सपने में भी मेरी भाभी मुझे डराती धमकाती दिखाई पड़ रही थी की वह मेरे और सेठी साहब के संबंधों के बारे में सब को बता देगी।

ऐसे में ढंग की निंद आने का तो सवाल ही नहीं था। मैंने काफी सोच कर सुबह करीब छे बजे मेरे पति को पिछले दिन भाभी से हुई बातचीत के बारे में लिख कर एक लंबा सा व्हाट्सप्प सन्देश भेजा।
 
मुझे अच्छा खासा आइडिया था की मेरे पति रात भर डॉली जी की बाँहों में ही होंगे और उस समय हमारे घर में वापस आकर बिंदास सो रहे होंगे। पर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ जब राज का फ़ौरन जवाब आ गया। जिससे मुझे कुछ ढाढस जरूर मिला। पर जब फ़ौरन जवाब आया तो मुझे मन में थोड़ी शंका भी हुई की ऐसा तो नहीं हुआ की कहीं यहां मैं उनकी पत्नी रात भर सेठी साहब से तगड़ी चुद रही हूँ और उधर मेरे पति को डॉली जी ने बिना घास डाले भगा तो नहीं दिया?

औरतों का दिमाग भगवान ने कैसा बनाया है! अगर मेरा पति किसी औरत को चोदे तो भी शिकायत और अगर कोई औरत मेरे पति को बिना चोदे रिजेक्ट करके भगा दे तो भी शिकायत! पर मेरा दिमाग उस समय यह सब सोचने या पूछने की स्थिति में नहीं था।

मुझ से सारी बात जानने के बाद राज ने मेरे मेसेज के जवाब में लिखा वह पढ़ कर और मेरे पति से आश्वासन पाकर मुझे कुछ सकुन मिला और मैं बिस्तरे पर लेट गयी। जैसे ही मैं लेटी की फ़ौरन मेरी आँख लग गयी। मैं काफी देर तक सोती रही।

रात भर के जागने और परिश्रम से मैं थकी हुई थी। मुझे उठने में काफी देर हो गयी। जब मेरी आँख खुली तो सूरज तेज रौशनी डाले आसमान में काफी ऊपर चढ़ा हुआ था। जब मैं उठी तो सुबह के करीब ८ तो बजे ही होंगें। मुन्ना भाभी और मोहल्ले के बच्चों के साथ खेलने के लिए सुबह उठ कर जा चुका था।

रात भर जो सेठी साहब ने मेरी तगड़ी चुदाई की थी तो दूसरे दिन मेरा बुरा हाल तो होने वाला ही था। सिर्फ तगड़ी चुदाई ही हुई होती तो भी चल जाता। पर मैंने जब उठ कर आईने में देखा तो मेरी हवा ही निकल गयी। सेठी साहब ने मुझे कई जगह पर इतना चूमा, चूसा और काटा था उसके जो निशान सेठी साहब के दांतों ने और होँठों ने मेरे बदन पर कई जगह छोड़ रक्खे थे वह हमारी रात की चुदाई के सुबूत बन कर दुश्मन की तरह मेरे बदन पर चुगली खाते दिख रहे थे। ऐसे हालात में मैं कैसे बाहर निकलती?

हड़बड़ा कर मैं जब सेठी साहब के कमरे में गयी तो देखा की सेठी साहब अपना कमरा एकदम साफसूफ कर सारे कपडे सामान सलीके से सजा कर निकल चुके थे। मैंने खिड़की से झांका तो सेठी साहब की कार जा चुकी थी।

मेरी भाभी से हुई रात की बात मुझे बड़ी ही खटक रही थी। जो मुझे सरल सी राह लग रही थी उसमें मुझे बदनामी के कांटें दिखाई रहे थे। मेरा मेरे पति राज से बात करना बहुत जरुरी था। राज ने कहा था की वह जरूर कोई न कोई हल ढूंढ निकालेगा। मुझे मेरे पति पर पुर भरोसा था की वह जरूर इसे सुलझा देंगे। मेरे पति ने कहा था की वह फ़ोन करेंगे।

मैं नहा कर तैयार होने के लिए बाथरूम में गयी। मैं नहा कर तौलिया पहन कर बाहर निकल ही रही थी की मुझे भाभी की दस्तक बाथरूम के दरवाजे पर सुनाई दी। भाभी ने बताया की वह चाय नाश्ता ले कर आयी थीं। मैंने बिना सोचे समझे हड़बड़ाहट में जब आधा दरवाजा खोला तो भाभी ने मेरे बदन का हाल देखा और उनकी आँखें चौंधियाँ सी गयीं। मैंने फटाफट दरवाजा बंद किया और दरवाजे के पीछे से ही मैंने भाभी को बताया की मैं तैयार हो रही हूँ।

भाभी ने कहा वह बैठ कर मेरे बाहर आने का इंतजार करेगी। उसी समय मैंने बाथरूम के अंदर से मेरे कमरे में रखे हुए मेरे फ़ोन की घंटी बजती हुई सुनी। शायद राज का फ़ोन था। मैं अपना फ़ोन टेबल पर छोड़ नहाने आयी थी। मुझे फ़ोन पर बात करते हुए भाभी की आवाज सुनाई दी। बाथरूम के अंदर से भाभी की मेरे पति से क्या बात हुई वह मैं नहीं सुन पायी।

मैं नहा कर बाथरूम से बाहर निकली और अपने भीगे बाल सूखा रही थी तब भाभी ने मुझे नीचे से ऊपर तक अच्छी तरह से देखा। भाभी की पैनी नजर देख कर मेरी तो जान ही निकल गयी। मेरा हाल ऐसा था की काटो तो खून ना निकले। मेरे बदन (गाल, छाती, बाँहें इत्यादि) पर काफी निशान ऐसे थे जो कपड़ों में भी छिपाए नहीं जा सकते थे। खैर, भाभी सब कुछ देख कर शरारती लहजे में मुस्कुरायी पर कुछ ना बोली।

भाभी ने मुझे कहा की जीजू (राज) का फ़ोन आया था। भाभी ने कहा की जीजू चाहते थे की मैं उनको फ़ोन करूँ। जब मैंने पूछा की क्या बात हुई तब भाभी ने कहा की जब मैं जीजू से बात करुँगी तो वह सब बता देंगे। मैं भाभी के शरारती स्वभाव को जानती थी। मुझे भाभी के बोलने के अंदाज से ही समझ में आ गया था की भाभी ने जरूर मेरा सेठी साहब के साथ हुए कारनामे के बारेमें अच्छा खासा विवरण दे दिया होगा।

भाभी यह कह कर चली गयी की वह कुछ देर के बाद आएगी और सारे बर्तन ले जायेगी। मैंने नाश्ता कर चाय पीकर राज से बात करने के लिए फ़ोन मिलाया। मेरा शक बिलकुल सही निकला। अंजू भाभी ने राज को मेरे बारे में जो कुछ भी उनके मन में था वह सब बता दिया था। कहीं ना कहीं भाभी को आइडिया था की राज भी इस कौभान्ड में शामिल था। इस लिए वह मेरे पति से सारी बातें इशारों इशारों में बताने से ना हिचकिचाई।

अब समस्या यह थी की इस अंजू भाभी से कैसे निपटा जाए ताकि सेठी साहब और मेरी बदनामी ना हो। मेरे पति राज से बात हो गयी तो फिर मेरे सामने अब एक और नयी चुनौती खड़ी हो गयी थी। राज ने जो आइडिया दिया वह मेरी समझ में ठीक से नहीं आ रहा था। पर मुझे सारी बातों को शान्ति और गंभीरता से सोचना पड़ेगा और तय करना होगा की क्या किया जाए।

राज की यह बात तो सही थी की अंजू भाभी को सेट करना बहुत जरुरी था। वैसे तो भाभी सेट ही लग रही थी पर मुझे यह पक्का करना था की किसी भी हाल में आगे चलके वह हमारा राज़ किसी से उगल ना दे। और उसके लिए भाभी को मुझे हमारे पक्ष में लाना जरुरी था। मैंने तय किया की मैं भाभी को प्यार से मना कर पटा कर देखूंगी की उनके मन में क्या है और उनको कैसे सम्हाला जा सकता है। मेरे पति राज की बात मुझे ठीक लगी।

एक बात तो पक्की थी। भाभी से बात छिपाने की कोशिश करना बेवकूफी होगी। वह सब अच्छी तरह से समझ गयी थी। ऊपर से मेरे बदन पर निशान देखकर अब शक की कोई गुंजाइश ही नहीं बची थी।
 
कुछ देर बाद जब अंजू भाभी वापस आयी तब मैंने बड़े प्यार से उन्हें मेरे बाजू में बिठा कर उनका हाथ मेरे हाथों में थाम कर कहा, “भाभी, आप बड़ी ही समझदार और संवेदनशील हैं। आपने फ़ौरन सेठी साहब और हमारे संबंधों की बारीकियों को समझ लिया है। पर अब मैं क्या करूँ मुझे चिंता हो रही है। इस हाल में मैं कैसे नीचे जाऊं? कहीं भैया या मम्मी पापा को शक हो गया तो?”

मुझे लगा की मेरे साफसाफ ईमानदारी से बात करने का भाभी पर अच्छा खासा असर हुआ। भाभी अब गंभीर हो गयी और मेरा हाथ थाम कर अंजू भाभी एकदम धीमी आवाज में जैसे मेरे कान में फुसफुसा कर बोली, “ननदसा, आप चिंता कोनी करो। मैं हूँ ना। देखिये, आप मेरी ननद हैं। अब मैं आपसे कुबूल करती हूँ की हम दोनों एक ही डाल के पंछी हैं। हम एक दूसरे की बात किसी से क्यों करेंगे? मैं आपसे वादा करती हूँ की मैं चुप रहूंगी। ना मैंने कुछ देखा, ना मैंने कुछ सुना।”

फिर मेरे बदन पर हुए निशानों पर नजर मार कर बोली, “और जहां तक आपके इन निशानों को देखने का सवाल है, आप चिंता कोनी करो। मैं इन पर कुछ लेप लगा दूंगी दोपहर तक सब गायब हो जाएगा। तब तक मैंने सांस ससुरजी को बोल दिया है की ननदसा की तबियत थोड़ी ढीली है। शाम तक ठीक हो जाएगी। आपके भाईसा उनकी कंपनी के काम से दो दिन के लिए टूर पर गए हैं।”

फिर मेरी मेरी आँखों में आँखें डालकर मेरी दाढ़ी की ठुड्डी पकड़ कर उसे हिलाती हुई भाभी बोली, “पर दीदी एक बात कहनी पड़ेगी। सेठी साहब का जवाब नहीं। मेरी ननद जैसी सुंदरी अप्सरा को भी वश में कर लिया उन्होंने। खैर सेठी साहब भी तो कुछ कम नहीं। आखिर मेरी ननदसा कोई ऐसे वैसे से थोड़े ही पटेगी?”

मैंने जब भाभी से यह सूना की “हम पंछी एक डालके।” तब मेरी जान में जान आयी। इसका मतलब तो यह हुआ की मेरी भाभी की भी कहीं ना कहीं किसी ना किसी से सेटिंग थी। अगर मैं इन सब बातों को भाभी ने सेठी साहब की तारीफ़ की उससे जोड़ कर देखूं तो एक बात साफ़ हो गयी की इसका मतलब बहभी मुझे सेठी साहब के बारे में कुछ ना कुछ इशारा कर रही थी। अचानक मेरे दिमाग की बत्ती जल उठी। बापरे! मेरे पति बिलकुल ठीक कह रहे थे। भाभी सेठी साहब से काफी इम्प्रेस्सेड हो चुकी थी और मुझे बिना कहे कुछ इशारा कर रही थी। मुझे समझना पडेगा की वह क्या कहना चाह रही थी।

यहां मैं पाठकगण को एक जरुरी बात कहना चाहता हूँ। हमारे रिश्तों में कई बार ऐसा होता है की हम जो कहना चाहते हैं वह कह नहीं पाते। अगर वह बात हमें खाये जाती है तो हम उसे इशारों इशारों में कहने की कोशिश करते हैं। जैसे कोई लड़की अगर अपने प्रेमी से चुदना चाहती है तो वह पहले तो यह उम्मीद रखेगी की उसे कुछ कहना या करना ना पड़े और प्रेमी ही पहल करे। पर अगर प्रेमी भोंदू हो तो प्रेमिका उसे कुछ ना कुछ इशारा करेगी। या तो वह अपने आपको एक्सपोज़ करने की कोशिश करेगी, क्लीवेज दिखाएगी, अपने कूल्हे टेढ़े मेढ़े करेगी या ऐसा कुछ करके इशारा करेगी की वह चुदासी है।

मुझे भी मेरी भाभी क्या इशारा कर रही थी वह समझना होगा। मैंने तय किया की मैं एक दाँव खेलूंगी। हो सकता है मेरा तीर निशाने पर लग जाए। मैंने भाभी से बड़े ही प्यार से कहा, “भाभी जब आपने इतना खुल कर बात कह ही दी है तो मैं एक बात कहूं? आप बुरा तो नहीं मानोगे?”

भाभी ने मेरी और कुछ शंका भरी नजर से देखा और बोली, “नहीं ननदसा, बोलो ना, क्या बात है?”

मैंने कहा, “भाभी आप कह रही थी ना की आप सेठी साहब से बड़ी इम्प्रेस्सेड हैं? अरे मैं क्या बताऊं? आपसे सेठी साहब और भी ज्यादा इम्प्रेस्सेड हैं। वह तो कल आपकी आवभगत, आपकी फिटनेस और आपकी सुंदरता की बड़ी तारीफ़ कर रहे थे। वह कह रहे थे की मेरा भाई बड़े ही तक़दीर वाला है की उन्हें आप जैसी सुशिल, सुन्दर और गुणवान पत्नी मिली। चूँकि घर में वह आपसे खुल कर बात नहीं कर सकते, तो क्या आप आज कुछ ना कुछ बहाना कर के रात को यहां मेरे कमरे में ऊपर आ सकते हो? हम लोग साथ में बैठ कर कुछ गपशप मारेंगे।”

मेरी बात सुनते ही भाभी उछल पड़ी। उनके चेहरे की मुस्कान मुझे बता रही थी की मेरा तीर निशाने पर लगा था। भाभी ने कहा, “ननदसा, उसकी चिंता आप मति करो। मैंने सांस को बोला है की आपकी तबियत ठीक नहीं है। मैं रात को घर ठीकठाक करके आपके पास आ जाउंगी। मैं सांस ससुर को कह दूंगी की मुझे आपका ध्यान रखना पडेगा। आपके भाई टूर पर गए हैं। चिंता की कोई बात ही नहीं है। आप जहां जाना है जाओ। मुन्ने का ध्यान मैं रखूंगी।”

फिर कुछ दबी हुई आवाज में भाभी ने कहा, “पर ननदसा मैं आप दोनों के बीच में रंग में भंग नहीं करना चाहती। कबाब में हड्डी नहीं बनना चाहती। मैं जानती हूँ कितने पापड़ बेल कर आप दोनों ने यहां आने का प्रोग्राम बनाया होगा।”

मैंने मेरी भाभी को बाँहों में भर लिया। अब मेरे सर से सारी चिंता छूमंतर हो चुकी थी। मैंने भाभी को बड़ा प्यार जताते हुए कहा, “भाभी, आप रंग में भंग थोड़े ही करोगे? आप के आने से आप तो हमारे रंग में और भी रंग भर दोगे। और भाभी सच कहूं? मैं आपका बहुत बड़ा शुक्रिया करती हूँ की आपने मेरी बात मान ली। सेठी साहब तो यह सुनकर बड़े ही खुश होंगे। भाभी, मैंने कभी सोचा भी नहीं था की मेरी भाभी इतनी रंगीली होगी।”

भाभी ने भी मेरी बात का सटीक जवाब देते हुए कहा, “ननदसा, सोचा तो मैंने भी नहीं था की मेरी ननदसा भी ऐसी रंगीली होगी। चलो देर आये दुरस्त आये। पर ननदसा, यह बात हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए। तुम्हारे भाई को कानो कान कोई खबर ना हो।”

मेरे मुंह से हँसी फूट पड़ी। मैंने बड़े ही शरारती लहजे में कहा, “भाभी क्या बात करते हो? बेईमानी के धंधे में सब बड़े ईमानदार होते हैं। ना आप कुछ बोलोगे ना हम।” मैंने मेरी जीभ पर अपनी उँगलियों से पट्टी लगाने का इशारा कर बात वहीँ ख़त्म की।

मैंने राज को फ़ौरन मेसेज भेजा, “आपकी मेरे लिए बतायी गयी कड़वी दवाई भाभी पर काम कर गयी। अब हमें भाभी रात भर झेलना है। पर मिशन सफल हुआ। भाभी भी कार्यक्रम में शामिल होगी। अब कोई दिक्क्त नहीं।”

मेरे पति ने जवाब में लिखा, “चलो जो हुआ अच्छा हुआ। आखिर तुम्हारा टेंशन तो टला। अब तुम्हारा थ्रीसम का सपना भी पूरा हो जाएगा।”

मैंने एक मेसेज सेठी साहब को भी भेजा। लिखा, “मुबारक हो। कहते हैं, देने वाला जब भी देता देता छप्पर फाड़ के। अब तुम्हारे रंगमहल में मेरी भाभी भी शामिल होने को तैयार हो गयी है।”

सेठी साहब का फ़ौरन जवाब आया, “इस के लिए मैं जिम्मेवार नहीं हूँ। अगर तुम कहती हो तो ठीक है। एक से दो भली।”

मैंने सेठी साहब को जवाब में गुस्से वाली इमोजी भेजी।

अब भाभी और मेरे बीच आत्मीयता और सुहार्दमय सम्बन्ध स्थापित हो चुका था। भाभी ने मेरे गाल, हाथ, गले और छाती के दीखते हुए निशानों पर चन्दन का लेप लगाया। मैंने जब उन्हें मेरी स्तनोँ , चूत और जाँघों पर भी लेप लगाने को कहा तो वह हँस पड़ी और बोली, “रहने दो उन्हें ननदसा। उन्हें कौन देखेगा? रात को यह निशान अपने प्रियतम को दिखाना। वह अपनी मर्दानगी पर खुश होंगे और उनके हाथों से ही लेप लगवा लेना। यातो वह लेप लगाएंगे या तो वह उन्हें और बढ़ा देंगे।”

मैंने भी हँस कर मजाकिया अंदाज में एक हल्का सा नकली घूँसा भाभी को मारा, हालांकि अंदर से तो भाभी पर मैं गुस्से की आग में धधक रही थी। रात में मेरे और सेठी साहब के बीच के प्रोग्राम में भाभी ने बड़ी सेंध मार दी थी। पर कहते हैं ना की मरता क्या ना करता?

भाभी ने सारा प्रोग्राम बड़ी ही दक्षता से सेट कर दिया था। दोपहर को एक रैपिड कोरोना किट मंगवा कर भाभी ने सबको यह कह दिया की मेरा टेस्ट नेगेटिव आया है। पर मेरी तबियत ढीली होने के कारण भाभी रात भर मेरा ध्यान रखने के लिए मेरे साथ सोयेगी। रात में भाभी ने मेरे मुन्ने को अपने मुन्ने के साथ अपने कमरे में सुला दिया। मैंने दिन भर काफी आराम किया और सोई। भाभी ने मेरा खाना भी मेरे कमरे में पहुंचा दिया था।

सेठी साहब अपना काम निपटा कर जयपुर से करीब आठ बजे घर पहुंचे। उनका बेसब्री से इंतजार हो रहा था। नहाकर फ्रेश होने के बाद सेठी साहब करीब नौ बजे डिनर टेबल पर आये तब मैं भी खाना खा कर तैयार हो रही थी। वह रात कुछ अजीब सी होने वाली थी।

भाभी के कारनामों के बावजूद भी पता नहीं क्यों और कैसे मेरे मन में भाभी के लिए बड़े अजीबोगरीब भाव उमड़ रहे थे। एक तरफ मुझे भाभी पर मेरी सेठी साहब के साथ रति क्रीड़ा की योजना में सेंध मारने के लिए बड़ा ही गुस्सा आ रहा था। पर दूसरी तरफ मुझे भाभी पर अजीब तरह का प्यार भी था की मेरे प्रियतम को वह भी पसंद करती हैं।

औरत का दिल बड़ा ही संवेदानशील होता है। वह आसानी से पिघल जाता है। भाभी के सौहार्दपूर्ण व्यवहार से मेरे मन में उनके प्रति कड़वाहट तो थी ही पर साथ साथ में प्यार का अंकुर भी पनप रहा था। आखिर भाभी भी तो एक औरत है। सेठी साहब जैसे वीर्यवान पुरुष के प्रति आकर्षित होती है तो उसका क्या दोष? मैं भी तो भाभी की तरह ही एक प्रेमाकांक्षी औरत ही हूँ। मैंने भी तो विवाहोतर प्रेम किया था सेठी साहब से और चुदवाया।
 
Back
Top