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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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निर्मला मैडम से उनके नंबर कुछ ज़्यादा ही थे और वो उम्र के हिसाब से 27-28 साल के आस पास रही थी, उनके नयन नक्श काफी तीखे थे हालांकि चेहरे का रंग कुछ गंदमी सा था.

मैं बोला- मैडम, अब क्या हुक्म है मेरे लिए?निर्मला मैडम बोली- उषा मैडम के साथ पहले करो क्यूंकि इसके पति ने इसको छोड़ रखा है और कई सालों से इनको कोई अच्छा साथी नहीं मिला. मैं चाहती हूँ कि इतने सालों से जो कमी यह महसूस कर रही थी, उसे कुछ हद तक तुम पूरी करने की कोशिश करो.

मैं बोला- जैसे आप कहें, उषा मैडम को प्रसन्न करके मुझको बड़ी प्रसन्नता होगी लेकिन यह स्थान क्या इस काम के लिए उचित है?निर्मला मैडम बोली- हाँ यह तो है, लेकिन आज तुम न उषा मैडम को अपनी चुदाई का नमूना पेश कर दो और वापस पहुँच कर हम फिर प्रोग्राम बनायेंगे.यह कह कर मैडम मुझको लेकर उषा मैडम के पास पहुँची और मेरे को और उषा को खुद एक टाइट जफ़्फ़ी में बाँध लिया.अब मैंने पहले उषा को और फिर निर्मला के लबों पर गर्म चुम्मी कर दी.

निर्मला मैडम ने उषा को मेरे पास धक्केल दिया और खुद अपने पलंग की तरफ जाने लगी लेकिन मैंने उनका हाथ पकड़ कर रोक दिया और इशारा किया कि वो भी उषा के साथ उनके चूतड़ों आदि को हाथ फेर कर तैयार करे!

निर्मला ने वैसा ही करना शुरू किया, वो उनके चूतड़ों को सहलाने लगी और मैं उषा के मुम्मों को चूमने लगा. एक ऊँगली उनकी चूत के अंदर डाल कर उनकी भग को छेड़ने लगा और महसूस किया कि वो बेहद पनिया रही थी.

उषा ने भी अपन हाथ मेरे तने हुए लौड़े पर रख कर उसके साथ खेलना शुरू कर दिया था.मैं नीचे घुटनों के बल बैठ गया और अपने दोनों हाथों से उषा के चूतड़ों को पकड़ कर उसकी चूत को अपने मुंह के साथ जोड़ दिया और अपनी जीभ से उसकी चूत के लबों को और भग को चूसने लगा.

उषा के साथ शायद कभी किसी ने ऐसा नहीं किया था तो भड़के हुए घोड़े के समान उछल पड़ी और मेरे मुंह को हटाने लगी लेकिन मैं भी उनके चूतड़ों को मज़बूती से पकड़ कर बैठा था, उनकी चूत में भग को चूसता रहा.

अब मैं उठा और उषा को अपने हाथों में उठा कर उनके मुम्मों को चूसता हुआ सारे कमरे में घूमता रहा.उषा बार बार अपना सर इधर से उधर कर रही थी लेकिन मैं भी उनको छोड़ने वाला नहीं था.

अब मैंने उनको बेड में लिटा दिया और जल्दी से उनकी खुली हुई टांगों में बैठ कर अपना लौड़ा उनकी गीली चूत के मुँह पर रख कर थोड़ा ऊपर नीचे किया और फिर एक धक्के में लंड उस की चूत में घुसेड़ दिया.उफ्फ… क्या टाइट चूत थी! लगता था कि उनकी चुदाई काफी समय से नहीं हुई थी.

टाइट चूत का आनन्द लेते हुए मैंने धक्काशाही बहुत ही धीरे धीरे शुरू की. लंड को पूरा निकाल कर सिर्फ शिश्न का मुंह ज़रा सा अंदर रहने दिया और फिर एक हल्का धक्का मार के लंड को फिर से पूरा अंदर डाल दिया.यह सिलसिला कुछ देर चलते रहने दिया और फिर जब उषा मैडम की आँखें आनन्द से बंद हो गई तो मैंने अपनी चुदाई की स्पीड धीरे धीरे से बढ़ानी शुरू कर दी.

उधर निर्मला मैडम भी उषा के उरोजों को चूस रही थी और वो हाथों से निर्मला मैडम के सर को अपने चूचों के साथ कस कर जोड़ रही थी.अब उषा भी नीचे से हर धक्के का जवाब कमर उठा कर दे रही थी.

जब मैंने महसूस किया कि मैडम अब छूटने की कगार पर हैं तो मैं अपने दोनों हाथ उषा के चूतड़ों के नीचे रख कर फुल स्पीड से धक्के मारने लगा और उषा फुसफ़ुसाहट में बोल रही थी- मार दो साली को… बहुत तंग करती है यह हलखनखोर… फाड़ दो इसको… चीर दो इसको!मैंने धक्के मारते हुए निर्मला मैडम की तरफ देखा और उन्होंने अपना अंगूठा उठा कर यह इशारा किया कि बहुत ही अच्छा कर रहा हूँ और लगा रहूँ इसी तरह!

मैंने अब पूरी ताकत से तेज़ धक्के चलाने जारी रखे और जब उषा मैडम का शरीर ज़ोर से अकड़ा और फिर एकदम मुझको कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उनकी चूत खुलना बंद होना शुरू हो गई तो मैंने अपने धक्के रोक दिए.

जब कुछ मिनटों में वो ढीली पड़ कर लेट गई तो मैंने अपना लौड़ा उनकी चूत में से निकाला जो उषा मैडम के रस में पूरा भीगा हुआ था और जो उनके साथ में लेटी हुए निर्मला मैडम की चूत में डालने के लिए तैयार था लेकिन वो तो खुद ही घोड़ी बनी हुई थी तो मैं उठ कर उनके पीछे घुटनों के बल बैठ कर लंड राज को उनकी चूत के मुंह पर रख कर इंतज़ार करने लगा कि निर्मला मैडम सिग्नल करे तो मैं अपनी गाड़ी स्टार्ट करूँ.

कुछ क्षण जब मैं ऐसे ही बैठा रहा तो निर्मला मैडम ने पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा और अपने चूतड़ों को हिला कर सिग्नल दिया कि शुरू कर दूँ!सिग्नल मिलते ही मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा और अपना गीला लंड निर्मला मैडम की चूत में घुसेड़ दिया.मैडम की गीली चूत में गीला लंड क्या गया, वो तो भड़क उठी और गर्म हुई घोड़ी की तरह हिनहिनाने लगी. मैंने भी आलखन से चोदना शुरू किया पहले धीरे और फिर तेज़ कभी पूरा बाहर और कभी पूरा अंदर.
 
लंड के शिश्न को चूत के मुंह पर रख कर चूत को रगड़ना ही बहुत ही आनन्द दायक है दोनों के लिए तो मैंने वही कार्यक्रम दोहराना शुरू कर दिया.उधर देखा उषा जी भी अधखुली आँखों से यह सारा काण्ड देख रही थी और उनका एक हाथ अपने मम्मों पर था और दूसरा अपनी चूत पर था और मैंने भी हाथ आगे बढ़ा कर उषा जी की चूत को छुआ तो फिर गर्म हो रही थी.लेकिन मैंने अपना ध्यान निर्मला मैडम की तरफ केंद्रित करते हुए तेज़ और स्लो धक्के मारने लगा.हर धक्के का जवाब मैडम भी दे रही थी.

उनके चूतड़ों को हल्की हल्की हाथों से थाप देनी शुरू कर दी और धीरे धीरे अपनी स्पीड तेज़ करने लगा और अंदर बाहर होते हुए अपने और उन के अंगों को देख कर आनंदित होने लगा.निर्मला मैडम की चूत से अब क्रीम जैसा रस निकलना शुरू हो गया जो रंग में क्रीम जैसा सफ़ेद और गाढ़ा था और यह देख कर मैंने अपनी स्पीड और भी तेज़ कर दी और मैडम की चूत से निकलती फच फ़च आवाज़ बड़ी मधुर लगने लगी.

इस आवाज़ को सुनते ही मैं समझ गया कि निर्मला मैडम ‘यह जा और वो जा…’ होने वाली है तो अब अपने जंगली घोड़े को बेलगाम छोड़ कर घोड़े और घोड़ी की लड़ाई देखने लगा.निर्मला मैडम भी आज कुछ ज्यादा कामातुर हो रही थी, वो ज़ोर से हुंकार भरते हुए मुझ को लेकर नीचे लेट गई.जैसे वो नीचे लेटी, मैंने उषा मैडम को गांड पर थपकी दी और उनको भी घोड़ी बनने का इशारा किया और उनके घोड़ी बनते ही निर्मला द्वारा क्रीमी लंड को उषा मैडम के अंदर डाल दिया.

इसी तरह प्यार से उषा मैडम को दोबारा चोदने के बाद मैं थोड़ा थक गया था तो मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए और दोनों मैडम को एक कस कर जफ़्फ़ी डाली और लबों पर चुम्मी करके मैं चलने के लिए तैयार हो गया.

निर्मला मैडम नंगी ही कमरे के दरवाज़े तक आई और मैंने बाहर देख कर कि मैदान साफ़ है चुपके से बाहर निकल गया.अपने कमरे में जाने के बजाए मैंने अपने ग्रुप की लड़कियों के कमरे का दरवाज़ा खटखटा दिया तो नेहा ने जल्दी ही दरवाज़ा खोल दिया और मैं अंदर गया तो बाकी की तीनों लड़कियाँ नंगी ही बैठी हुई थी और मेरे लंड का इंतज़ार कर रही थी.

तीनों उठी और मुझको घेर लिया और एक साथ बोली- सतीश, इतनी देर कर दी तुमने? हम तो खाली बैठी थी तो हम सबने एक एक बार ऊँगली और किसिंग वगैरह से अपना काम चला लिया.पूनम बोली- क्या हुआ था सतीश? बड़ी देर लग गई दोस्तों में?

मैं बोला- दोस्तों के साथ भी बना कर रखनी पड़ती है ना, गपशप में इतना टाइम निकल गया पता ही नहीं चला और फिर वहाँ थोड़ी सी बियर भी पीनी पड़ी.नेहा बोली- क्यों लड़कियो, आज कुछ करने का मूड है या फिर आगरा में ही कर लेंगी हम सब?डॉली बोली- मेरा तो एक बार कर दो सतीश प्लीज, मैंने पहली बार तुम्हारे साथ सेक्स किया है ना!

मैं बोला- क्यों लड़कियों क्या मर्ज़ी है?सब बोली- प्लीज सतीश, तुम थके लग रहे हो तो तुम डॉली का काम कर दो, हम कल अपनी बारी ले लेंगी.मैं बोला- ठीक है, सिर्फ डॉली का काम आज करते हैं, बाकी सबके साथ कल करेंगे. क्यों पूनम कुछ पीने को है क्या?पूनम बोली- हाँ, कुछ कोका कोला की बोतलें मंगवा के रखी थी होटल में, तुम्हारी बचा कर रखी है, यह लो तुम्हारी बोतल.

बोतल पी कर मैं अटैच्ड बाथरूम में चला गया क्योंकि मुझको डर था कहीं प्रोफेसरों की चूत की खुशबू इन लड़कियों को मेरे लंड से न आ जाए! मैंने अपने लंड को अच्छी तरह से धोया और मुँह हाथ धोकर बाहर आ गया.

चार जवान लड़कियों को नंगी देखकर मेरा लौड़ा फिर से टन्ना टन्न खड़ा हो गया और वो चार लड़कियाँ दौड़ कर आई और मुझ पर टूट पड़ी.मतलब कोई लंड को पकड़ रही तो कोई मेरी छाती के निप्पल को किस कर रही थी और किसी ने मेरी गांड में ऊँगली डाल रखी थी.बारी बारी से सबने मेरे खड़े लंड को चूमना शुरू किया और फिर मेरे गोल चूतड़ों को भूखे शेर की तरह चाटने लगी.

अब नेहा ने कहा- रात बहुत हो रही है, सतीश को डॉली की चूत की चुदाई करने दो, यारो कल हम भी चुद जाएँगी इस सरकारी सांड से!

अब मैं पलंग पर बैठ गया और डॉली को अपने पास बुला लिया और सब लड़कियों को कहा कि वे इसको गर्म करें और डॉली की जांघों पर और चूतड़ों पर खूब चूमना शुरू करें.डॉली को पलंग पर अपने पास बिठा लिया और उसको कहा- आज मैं तुमको बैठ कर चोदूंगा.

उसकी टांगों को खोल कर मैंने अपनी कमर के चारों ओर फैला लिया और उसकी सफाचट चूत को अपने लंड के ठीक सामने ले आया.जैसे ही हम दोनों की पोजीशन ठीक हुई, मैंने उसके चूतड़ों को हाथों से उठा लिया और अपने लंड को डॉली की चूत में गृह प्रवेश करवा दिया, उसके लाल होटों को चूमते हुए और उसके मुम्मों को अपनी छाती से लगाते हुए मैंने डॉली से कहा कि अब वो मेरे को चोदे.

उसने भी झट अपने बाज़ू मेरे गले में डाल दिए और धीरे धीरे आगे पीछे होने लगी जैसे मेरे लंड पर बैठ कर झूला झूलने लगी.बाकि लड़कियों ने यह पोजीशन पहले कभी नहीं देखी थी, सब ध्यान मग्न हो कर डॉली की चुदाई को देख रही थी कि कैसे डॉली झूले में झूलते हुए मुझको चोद रही थी और इस नए सेक्स स्टाइल से कैसे दोनों के शरीर के सारे अंग एकदम साथ जुड़े हुए थे.

अब नेहा और जस्सी ने डॉली के चूतड़ों को अपने हाथ में ले लिया और पूनम ने डॉली के मुम्मे अपने कब्ज़े में कर लिए. यानि चारों लड़कियां चुदाई में शामिल हो गई और उनकी मिली जुली हरकत से डॉली बहुत ही जल्दी छूटने के सुहाने मोड़ पर पहुँच गई थी.

पूनम के डॉली के मम्मों की छेड़छाड़ से वो जल्दी ही अपने को रोक ना सकी और इस बार बड़े ही ज़ोरदार झटके के साथ चूत में से पानी का सैलाब उमड़ पड़ा.वो तो नेहा चौकन्नी थी, उसने झट उसकी चूत के नीचे एक तौलिया रख दिया और बेड की चादर खराब होने से बच गई.

अब डॉली तो मेरे से चिपक कर बैठ गई थी और मुझको छोड़ ही नहीं रही थी, नेहा ने ज़ोर से कहा- वो मैडम इधर आ रही है, जल्दी करो.तब कहीं डॉली ने मुझको छोड़ा और वो उठ कर बाथरूम में घुस गई.सब लड़कियाँ ज़ोर से हंस पड़ी.

फिर मैं कपड़े पहन कर जल्दी से अपने रूम में आ गया और आते ही कपड़ों समेत ही बिस्तर में लेट गया और बड़ी ही गहरी नींद में सो गया.दो औरतों और एक जवान लड़की को चोदना कोई खाला जी का खेल नहीं है, यह मुझको उस दिन महसूस हुआ.

कहानी जारी रहेगी.
 
दिल्ली से आगरा की बस में

दो औरतों और एक जवान लड़की को चोदना कोई खाला जी का खेल नहीं है यह मुझको उस दिन महसूस हुआ.इसी कारण सुबह मेरी नींद टाइम पर नहीं खुली और मुझको पूनम ने ही आकर जगाया और जल्दी से मैं मुंह हाथ धोकर चलने के लिए तैयार हो गया.पूनम ने ही मेरा बिखरा सामान बक्से में डाला और जल्दी से हम दोनों होटल के रेस्तराँ में पहुँच गए जहाँ सब नाश्ता कर रहे थे.नाश्ता खत्म करने के बाद हम सब बस में बैठने के लिए चल पड़े.

क्यूंकि मैं फिर रेनू के साथ सबको बस में बैठाने में लगा था तो सबसे आखिर में बस में चढ़ा और इसी कारण मुझको लास्ट की सीट मिली.वो 2 वाली सीट थी, जब मैं वहाँ बैठा तो मेरे साथ वाली सीट पर एक लड़की बैठी हुई थी.मैंने उसकी तरफ कोई खास ध्यान नहीं दिया और उस खाली सीट पर बैठ गया.आगे बैठी हुई मेरे ग्रुप की लड़कियाँ मेरी तरफ देख रहीं थी और इशारे कर रहीं थी कि मैं उनकी सीट पर आ जाऊँ लेकिन मैंने मना कर दिया.

बस जब शहर के बाहर निकल गई तो मैंने साथ वाली लड़की की तरफ देखा. लड़की का रंग सांवला था लेकिन नयन नक्श गज़ब के थे और शरीर भी काफी भरा पूरा था.वो भी अपनी आँखों की कोर से मुझको देख रही थी.मैंने उसको हेलो किया और उसने भी बड़ी सुरीली आवाज़ में मुझको जवाब दिया.

मैं बोला- मेरा नाम सतीश है और आपका नाम क्या है?लड़की बोली- मेरा नाम जेनी है, मैं इंटर के दूसरे साल में हूँ, आप कौन सी क्लास में हैं?मैं बोला- मैं इंटर के फर्स्ट ईयर में हूँ लेकिन मैंने आपको कभी कॉलेज में पहले देखा नहीं?जेनी बोली- मैं कुछ दिन पहले ही कॉलेज में आई हूँ, उससे पहले मैं अल्मोड़ा में पढ़ती थी.मैं बोला- आपसे मिल कर बड़ी ख़ुशी हुई.

बातों के दौरान दो बार उसका हाथ मेरी जांघों पर लगा और एक बार मेरे हाथ से भी टकराया.मैं रात को देर से सोया था, थोड़ी नींद लग रही थी, मैं आँखें बंद कर के बैठ गया लेकिन 5-10 मिन्ट में मुझको ऐसा लगा कि कोई हाथ मेरी जांघों के ऊपर आ गया है और धीरे धीरे वो मेरी जांघों पर रेंग रहा है.हल्के से आँख खोल कर देखा कि तो जेनी ने अपने ऊपर एक हल्की सी शाल कर रखी और उसका थोड़ा हिस्सा मेरी जांघों पर भी आ रहा था.वहीं से शायद उसका हाथ मेरी जांघों पर चल रहा था.

मैंने भी उसकी तरफ देखा तो वो एक प्यारी सी मुस्कान बिखेर रही थी लेकिन उसने अपना हाथ नहीं हटाया था.मैं भी उसकी मर्ज़ी समझ गया था और बस एक नज़र डाली सब ऊंघ रहे थे सो मैंने भी सब क्लियर देख कर अपना हाथ उसकी गोद में शाल के नीचे रख दिया और उसने भी अपना दायाँ हाथ मेरे हाथ के ऊपर रख दिया.

उसका बायाँ हाथ मेरे पैंट के ऊपर से मेरे लौड़े पर पड़ा था और उसको हल्के से सहला रहा था और अब मैंने भी अपना हाथ उसकी साड़ी के ऊपर से उसके चूत पर रख दिया था.जेनी ने अपने बाएं हाथ से मेरी पैंट खोलने की कोशिश करने लगी थी और मैंने उसकी मदद के लिए खुद ही पैंट की ज़िप खोल दी और अपना खड़ा लौड़ा बाहर निकाल दिया ताकि जेनी को कोई दिक्क्त न हो.

जेनी ने जैसे ही मेरे खड़े लौड़े पर हाथ रखा तो उसको एक झटका लगा और उसने झट से हाथ हटाने की कोशिश की लेकिन मेरे हाथ ने उसको रोक दिया और मेरा दायाँ हाथ उसकी साड़ी को ऊपर करने की कोशिश करने लगा और फिर जेनी ने स्वयं ही अपनी साड़ी का एक कोना ऊपर कर दिया और मेरे हाथ को अपनी चूत पर रख दिया.

बालों से भरी हुई चूत पर इस तरह हाथ रखने से मुझको भी एक अजीब सी झनझनाहट हुई लेकिन मैंने भी हिम्मत करके हाथ को चूत पर रखे रखा और उधर वह मेरे लौड़े को अब अपने हाथ में लेकर उसके साथ खेलने लगी.

जब मैंने ऊँगली जेनी की चूत के अंदर डालने की कोशिश की तो वो अंदर नहीं जा पा रही थी क्यूंकि उसकी चूत उसके चूतड़ों के नीचे आ रही थी और इसी कारण वहाँ ऊँगली नहीं जा पा रही थी तब जेनी ने मेरी हेल्प के लिए अपने चूतड़ों को सीट में आगे की तरफ खिसका लिया.

मैंने जैसे ही जेनी की चूत में ऊँगली डाली वहाँ मुझको काफी गीलापन मिला.जेनी भी अब बेधड़क मेरे लंड को ऊपर नीचे करके मुठी मारने की कोशिश कर रही थी जिसका उसको काफी आनन्द आ रहा था और मुझको भी कोई कम मज़ा नहीं आ रहा था.

थोड़ी देर कोशिश करने के बाद जेनी ने मेरे कान में कहा- सतीश, क्या मैं तुम्हारे लंड को चूस सकती हूँ?मैं बोला- मुझको कोई ऐतराज़ नहीं लेकिन तुम अपना देख लो कोई देख न ले तुमको?वो बोली- तुम अपनी सीट में आगे हो जाना न सो किसी को दिखाई नहीं देगा.मैं बोला- ठीक है कोशिश कर देखो.

वो धीरे से सीट के नीचे की तरफ बढ़ी और मैं भी थोड़ा उसकी तरफ मुड़ गया और उसने अपनी शाल अपने सर पर कर ली और मेरे और अपने को पूरा ढक लिया.मैंने भी फुसफुसा कर कहा- ठीक है, शुरू हो जाओ.उसने नीचे पहुँच कर मेरे लौड़े को मुंह में ले लिया और उसको आहिस्ता से लपालप चूसने लगी.

उसको बहुत ही आनंद आ रहा था लेकिन मुझको ज़्यादा फरक नहीं पड़ रहा था लेकिन मेरे हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके मुम्मों के साथ खेल रहे थे.अच्छे सॉलिड मुम्मे थे और ब्लाउज के बाहर से ही बड़े सुंदर लग रहे थे, जेनी ने थोड़ी देर लंड को चूसने के बाद पूछा कि और या बस मैंने उसको इशारा किया कि बस करो और ऊपर आ जाओ.

जब वो ऊपर सीट पर बैठ गई तो मैंने उसकी साड़ी को उसके घुटनों के ऊपर कर दिया और उसकी चूत में उसकी भग को आलखन से मसलने लगा, बायाँ हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर रख कर उनको छेड़ने लगा..

भग और मुम्मों के साथ खेल में उसकी जांघें मेरे हाथ को अपने बीच में दबाने और खोलने लगी, थोड़ी देर और भग मसली तो जेनी एक कंपकंपी के साथ झड़ गई और मैंने झट से अपना रुमाल उसको दिया, उसने वो अपनी चूत के ऊपर रख लिया जिससे उसकी चूत का गीलापन उसकी साड़ी तक नहीं पहंच पाया और सारा का सारा रुमाल में समा गया.

मैंने अपना रुमाल वापस माँगा तो जेनी कहने लगी कि वो आगरा में इसको धोकर वापस दे देगी लेकिन मैंने कहा- नहीं, तुम मुझको ऐसा ही दे दो, इसमें समाई तुम्हारी चूत की खुशबू मुझको सूंघनी है और धरोहर के रूप में रखनी है.उसने हँसते हुए कहा- यह लो अपना रुमाल… लेकिन तुम एक बहुत ही स्वीट लड़के हो.मैंने भी जवाब में कहा- जेनी, तुम भी एक बहुत ही आकर्षक लड़की हो. अच्छा यह बताओ, क्या तुम आगरा में हमारे ग्रुप में शामिल होना चाहोगी?

फिर मैंने उसको अपने छोटे से ग्रुप के बारे में बताया और कहा कि हम सब बड़े उन्मुक्त तरीके से रहते हैं और खूब सेक्स भी करते हैं मिल कर.जेनी हैरानी से बोली- रियल सेक्स भी करते हो तुम लोग? मुझको विश्वास नहीं होता.मैं बोला- अगर तुम भी उन्मुक्त व्यवहार के पक्ष में हो तो हम तुम को अपने ग्रुप में शामिल कर सकते हैं लेकिन सेक्स ज़रूर करना पड़ेगा. बोलो तैयार हो?

जेनी पहले तो कुछ झिझकी फिर मान गई और बोली- सेक्स किसके साथ करना पड़ेगा?मैं बोला- पुरुष सिर्फ मैं हूँ, बाकी सब लड़कियाँ हैं तो कभी मेरे साथ और कभी आपस में! बोलो चलेगा?जेनी बोली- चलेगा अगर तुम्हारे साथ सेक्स करना है तो दौड़ेगा.

फिर हम दोनों आँखें बंद कर के थोड़ी देर के लिए झपकी लेने लगे.

कहानी जारी रहेगी.
 
कमेंट करने के लिये आप सब भाइयो का बहुत धन्यवाद
 
आगरा में एक रात

हम 4 घंटे में आगरा के उस होटल में पहुँच गए जहाँ हम सबको ठहरना था.अब फिर मुझको और रेनू को कमरे बांटने का काम सौंप दिया गया. हम दोनों ने फिर से कमरे वैसे ही बांटे जैसे दिल्ली में और इस बार भी एक लड़का अपने रिश्तेदारों के घर रहने चला गया मैडम से पूछ कर!वो कमरा फिर से मैंने अपने नाम कर दिया.

नहा धोकर सब आगरा घूमने के लिए तैयार हो गए और फिर बस में बैठ कर हम निकल पड़े. सब दर्शनीय स्थानों को देखने के बाद हम शाम को होटल लौटे.सब बहुत ही थके हुए थे और अपने कमरों में जाकर आलखन करने लगे.

मैं अकेला ही था अपने कमरे में तो थोड़ी देर के लिए लेट गया लेकिन थोड़ी बाद दरवाज़ा खटका और जब खोला तो पूनम खड़ी थी.मैंने कहा- अंदर आ जाओ!जैसे ही वो अन्दर आई, मैंने उसको बाहों में भर लिया और ताबड़ तोड़ उसके लबों पर चुम्मियों की बौछार कर दी.मैं भूखे शेर की तरह उसके मुम्मों को ब्लाउज के बाहर से ही चूमने लगा और उसके चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से ही सहलाने लगा और उसका हाथ अपने लौड़े पर रख दिया और आँखों ही आँखों में उससे पूछा- हो जाए कुछ?उस ने भी सर हिला कर अपनी रज़ामंदी दे दी.

अब मैंने अपनी पैंट के बटन खोल कर लंड को बाहर निकाल कर उसके हाथों में रख दिया और खुद उसकी सिल्क की साड़ी को ऊपर उठा कर उसको बेड पर हाथों के बल झुकने के लिए कहा.जैसे ही पूनम उस पोजीशन में आई, मैंने अपने अकड़े हुए लंड को चूत के निशाने पर बिठा कर ज़ोर का धक्का मारा और लंड फच की आवाज़ से अंदर चला गया.

अब मैं थोड़ा पीछे हटा और उसकी गोरे चूतड़ों को हाथ से सहलाता हुआ लंड घिसाई में लग गया क्यूंकि मैंने पूनम को 2-3 दिन से नहीं चोदा था तो मेरा लौड़ा और मैं स्वयं उसको बहुत मिस कर रहे थे.अब लंड महाशय को भी जानी पहचानी चूत में बहुत आनन्द आने लगा और वो भी बड़े प्रेम से धक्के मारने लगा लेकिन मुझको भी ज़रा डर था कि कोई आ न जाए और हमारे पवित्र काम में विघ्न न डाले सो मैं तेज़ धक्केशाही में लग गया.

पूनम भी 2 दिन से चुदाई की भूखी थी, वो भी जल्दी ही चरम सीमा पर पहुँचने वाली हो गई थी और मेरे तेज़ धक्कों का जवाब वो अपने चूतड़ों को आगे पीछे करके देने लगी.हम चुदाई में इतने मस्त थे कि हम दोनों ने देखा ही नहीं कब नेहा दरवाज़ा खोल कर अंदर आ गई थी और वो मेरे तेज़ी से दौड़ते चूतड़ों को हल्के से हाथ लगाने लगी थी.पहले तो मैं चौंका कि यह कौन अंदर आ गया है और डर के मारे मेरी सांस ऊपर नीचे होने लगी लेकिन जब मुझको महसूस हुआ कि वो नेहा ही है तो मैंने कुछ राहत की सांस ली और पूनम की चुदाई जारी रखी.लेकिन पूनम को अभी भी मालूम नहीं हुआ था कि कमरे में कोई आ गया है.

मैंने नेहा को चुप रहने का इशारा किया और चुदाई की स्पीड और तेज़ कर दी और जल्दी ही मुझको लगा कि पूनम कुछ देर में छूटने वाली है. फिर जब मैंने कुछ बड़े ही तेज़ और गहरे धक्के मारे तो पूनम का शरीर एक प्यारी से झनझनाहट के बाद एकदम ढीला पड़ गया और वो पलंग पर पसर गई.मैंने लंड पूनम की चूत से निकाला तो उसको नेहा जो मेरे पीछे खड़ी थी उसके हाथ में दे दिया.

मैंने नेहा को एक ज़ोर से जफ़्फ़ी मारी और उसको होटों पर गर्म चुम्मी की और पूछा- अभी करवाना है या बाद में?वो बोली- अभी नहीं, मैं बहुत थक चुकी हूँ रात को देखेंगे. लेकिन अभी थोड़ी किसिंग और हग्गिंग कर लेते हैं.फिर हम दोनों एक दूसरे को बड़ी हॉट किसिंग और जफ़्फ़ी मारते रहे और साथ में एक दूसरे के अंगों से भी खेलते रहे.

जब पूनम थोड़ी संयत हुई तो नेहा उसको लेकर जाने लगी तो मैंने उसको बताया कि आती बार बस में जेनी नाम की लड़की मिली थी जो मेरे साथ वाली सीट पर बैठी थी और वो भी हमारे ग्रुप में शामिल होना चाहती है, मैंने उसको कहा कि आज रात को बाकी साथियों से पूछ कर उसको भी ले लेते हैं अपने ग्रुप में! क्यों नेहा?

नेहा बोली- ठीक है सतीश, अगर तुम पांच गायों को हरा कर सकते हो तो हमें क्या ऐतराज़ हो सकता है. मिला देना उसको, बाकी बातें हम उससे कर लेंगे.मैं बोला- रुको तुम दोनों, वो मेरे साथ वाले कमरे में ही है मैं उसको बुला लाता हूँ.

मैंने साथ वाला कमरा खटखटाया और जेनी ने ही दरवाज़ा खोला और मुझको देख कर बोली- आओ सतीश.मैंने कहा- ज़रा मेरे कमरे में आओगी? ग्रुप की हेड आई है, अगर तुम चाहो तो उससे बात कर लो.जेनी बोली- ठीक है.

वो मेरे साथ चल पड़ी और मेरे कमरे में उसकी मुलाकात नेहा और पूनम से करवा दी.मैं होटल के रेस्टोरेंट में गया और 6 कप चाय का आर्डर दे आया.

जब चाय आई तो मैंने पूनम से कहा कि वो बाकी लड़कियों को भी बुला ले, सब मिल कर चाय पिएंगे.
 
शाम के 7 बजे थे सो सब अपनी थकावट मिटाने की कोशिश में थे, चाय को देख कर सब बड़ी खुश हुईं.फिर हमने साथ लाये हुए बिस्कुट और केक्स खाए और गर्म चाय पी जिसके बाद सब में थोड़ी चुस्ती आ गई.जेनी को भी सबकी रज़ामंदी से हमारे ग्रुप में शामिल कर लिया गया.

नेहा ने कहा- आज चुदाई का प्रोग्राम कैसे बनाया जाए? कैसे कुछ नयापन लाया जाए?सब लड़कियाँ सोचने लगी फिर जस्सी बोली- क्यों न हम सब फैंसी ड्रेस पहन कर आएँ और सतीश जिसको पहचान लेगा उसी के साथ वो करेगा. क्यूँ कैसा है यह?नेहा और डॉली बोली- हमको यह नहीं भूलना चाहिए कि हम सब एक होटल में जहाँ हमारे साथ दूसरे स्टूडेंट्स भी हैं और प्रोफेसर्स भी हैं. जो हम करें उसमें कम से कम शोर होना चाहिए और किसी का ख्वामखाह में ध्यान अपनी और आकर्षित नहीं करना चाहिए.

मैं बोला- शाबाश डॉली और जस्सी, तुम दोनों बिल्कुल ठीक कह रही हो. हमको चुपचाप काम करना चाहिए और इसलिए हमको कोई ऐसी हरकत नहीं करनी है जिससे बाकी विद्यार्थी डिस्टर्ब हों. मैं सोचता हूँ हम अपने अपने कमरे में ही रहें और एक एक करके तुम सब मेरे कमरे में आ जाना और सरकारी सांड की पूँछ हिला कर अपना काम करवा लेना.सब बोली- यह ठीक है.

मैं बोला- यह ग्रुप सेक्स हम सब लखनऊ में मेरी कोठी में भी कर सकते हैं जहाँ जैसे हम चाहें वैसे ही करने में हम को कोई नहीं रोक सकता.सब लड़कियों ने हाँ में सर हिला दिया.

मैं फिर बोला- आज बारी बारी से तुम मेरा देह शोषण करना और नेहा की ड्यूटी लगाई जायेगी कि वो ‘हर लड़की ने कितने धक्के मेरे ऊपर बैठ कर मुझको!’ मारे इसका रिकॉर्ड रखती जाएगी. आज सबसे पहले बारी होगी जेनी की जो ग्रुप में नई है. ठीक?सबने ज़ोर से कहा- यस सर!

खाना खाने के बाद हम में से कुछ ताजमहल को चांदनी रात में देखने के लिए चले गए और बाकी सब अपने कमरों में आ गए.हमारे ग्रुप में से कोई भी ताजमहल नहीं गया रात को!होटल के हाल में तरह तरह की गेम्स रखी थी, सब उन को खेलने लगे और कुछ होटल के लॉन में घूमने लगे.मैं और पूनम होटल के लॉन में बेंच पर बैठ कर बातें करने लगे.

वहाँ एक अँगरेज़ जोड़ा भी बैठा था और वो खूब एक दूसरे को किसिंग और जफ़्फ़ी डाल रहे थे और अंग्रेज़ का एक हाथ उसकी साथी की स्कर्ट के अंदर गया हुआ था.यह मैंने पूनम को बताया और यह खुले आम होते देख कर दंग रह गई.तब मैंने पूछा- क्या चूत में यह देख कर कुछ हरकत हुई?

वो बोली- हो तो रही है लेकिन तुमने आज दिन को मेरी खुजली काफी मिटा दी थी. सच्ची सतीश, तुम एक दो दिन मुझको नहीं चोदते तो मैं एकदम अधूरी महसूस करती हूँ.मैं बोला- यही हाल मेरा होता है यार पूनम, तुम जब देती हो न तो दिल खोल कर देती हो, और ऐसा लगता है कि हम दोनों एक दूसरे के पति पत्नी हैं.

फिर हम दोनों मेरे कमरे में आ गए और वहाँ पहुँच कर मैंने पूनम को फिर से पकड़ लिया और उसके होटों पर चुम्बन करने लगा.थोड़ी देर में नेहा और बाकी सब भी वहाँ आ गए.सब लड़कियों ने अपनी नाईट ड्रेस पहनी हुई थी, वो वहाँ आकर बारी बारी से मुझको किस करने लगी.मैंने भी जेनी को उसके लबों पर एक ज़ोरदार किस की और उसके सारे शरीर पर हाथ फेरने लगा. खासतौर से उसके मुम्मों को उन्मुक्त करने की कोशिश करने लगा और इस काम में मुझको जस्सी भी मदद कर रही थी और डॉली जेनी के चूतड़ों पर हाथ फेर रही थी.

नेहा ने आगे बढ़ कर उसकी नाईट ड्रेस को उसके सर के ऊपर से उतार दिया और सब लड़कियाँ इस नई लड़की के शरीर के गठन देख कर हैरान हो रही थी.रंग सांवला ज़रूर था और शरीर का रंग भी थोड़ा मटमैला था लेकिन शरीर के हर अंग की बनावट देख कर सब लड़कियों विस्मित हो रही थी.सबसे पहले नेहा ने उसको लबों पर किस की और यह देख कर सब लड़कियाँ भी उसके शरीर को छूने लगी, उसके गोल और उन्नत उरोजों के साथ खेलने और उनको चूमने लगी.

यह देख कर मैंने भी अपने कपड़ों की तरफ देखा और जस्सी ने झट आगे बढ़ कर उनको उतारना शुरू कर दिया.जब मेरे लौड़ा पैंट की गिरफ़्त से आज़ाद हुआ तो उसका मुंह सिर्फ जेनी की तरफ ही था.मैंने नेहा की तरफ देखा और उसने हामी में सर हिला दिया और फिर मैंने जेनी को अपनी बाहों में भर लिया उसके गर्म गर्म होटों पर एक बहुत ही गहरी चुम्मी जड़ दी.

मैंने जेनी को अपनी बाँहों में उठा लिया, उसको लेकर मैं बिस्तर पर आ गया.नेहा ने बाकी लड़कियों को इशारा किया और वो एक दूसरी के साथ शुरू हो गईं.मैंने जेनी को लिटा दिया और उसके मुम्मों को चूसने लगा और उसके गले के नीचे भी चूमना शुरू कर दिया.जस्सी जेनी की चूत के साथ खेल रही थी और डॉली जस्सी के मम्मों को चूस रही थी और उधर डॉली और नेहा आपस में लगी हुई थी.
 
मैंने जेनी की गोल और गुदाज़ जांघों को खोला और उनके बीच बैठ गया, लंड को जेनी की चूत के ऊपर रख कर धीरे धीरे उसको अंदर धकेलने लगा. जब वो पूरा अंदर चला गया तो मैं जेनी की टाइट चूत में लंड को धीरे से अंदर बाहर करने लगा.जेनी की चूत एकदम गीली हो चुकी थी और वो सुबह वाली चूत से दोगुना गीली और लचकीली थी.

मेरा लंड एक बिगड़े हुए घोड़े के समान चुदाई में लगा था और बगैर किसी की परवाह किये धक्के पे धक्के मार रहा था. जेनी एक बार छूट चुकी थी और दूसरी बार भी छूटने की कगार पर थी. वो नीचे से बराबर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी लेकिन जब मैंने फुल स्पीड धक्कों की रेलगाड़ी चलाई तो उसके धक्के थम गए और सिर्फ मेरे लंड का अंदर बाहर होना ही दिख रहा था, पूनम मेरे चूतड़ों को दबा दबा कर पूरा अंदर जाने का इशारा कर रही थी.

कुछ और धक्कों के बाद ही जेनी की दोनों टांगें मेरी कमर के इर्दगिर्द फ़ैल गई थी और मुझको अपने गिरफ्त में जकड़ लिया था.जेनी का जब दुबारा छूटा तो वो एकदम से कांप उठी और बड़ी देर तक उसका शरीर कंपकंपी करता रहा.

अब मैं पलंग पर लेट गया और नेहा को इशारा किया कि वो सब बारी बारी मेरा चोदन करने के लिए तैयार हो जाएँ.जेनी की हॉट चुदाई के बाद सारी लड़कियाँ चुदने के लिए बहुत ही अधिक उतावली हो रहीं थी, सबसे पहले डॉली उतरी मैदान में और पूनम और जस्सी उसको तैयार करने में लग गई, एक उसके मुम्मों को चूसने में लग गई और दूसरी उसके चूतड़ों के साथ खेलने लगी.

जब वो काफी गीली हो गई तो उसको मेरे ऊपर बिठा दिया दोनों ने मिल कर.मैंने नेहा को इशारा किया कि वो सब कपड़े पहन कर बैठें ताकि अगर मैडम चेकिंग पर आती है तो उसको सब नार्मल मिले और मेरे बैग से ताश का पैकेट भी निकाल लें और उसको खेलने के लिए तैयार रहें.

इधर डॉली मेरे ऊपर बैठ कर ऊपर से धक्के मारने लगी लेकिन उसकी कोशिश नाकाम हो रही थी क्यूंकि उसने पहले कभी ऐसे किया नहीं था तो मैंने उसकी मदद करने के लिए नीचे से खुद ही अपना चोदन शुरू कर दिया यानि ज़्यादा धक्के मैंने नीचे से मारने लगा.थोड़ी देर में डॉली ऊपर से चुदाई को समझ गई और वो अब अपने आप मुझको चोदने लगी और मैं भी नीचे से तेज़ धक्के मारने लगा था.

साथ ही मैं उसकी चूत में ऊँगली, उसकी भग को रगड़ने लगा था और इस दोतरफा अटैक को डॉली जो वैसे भी कॅाफ़ी गर्म हो चुकी थी ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर सकी और जल्दी ही स्खलित हो कर मेरे ऊपर ही लेट गई.

थोड़ी देर विश्राम के बाद मैं उठा और अपने कपड़े पहन कर बैठ गया और लड़कियों को कहा- नीचे एक चादर बिछा लो, हम सब बैठ कर ताश खेलते हैं.नेहा ने सवालिया नज़र से मुझको देखा तो मैंने उसको बताया- मुझको ऐसा लगता है आज शायद मैडम कमरों की चेकिंग के लिए आ जाएँ तो तैयार रहना चाहिए. मुझको एक दो कमरे खुलने और बंद होने की आवाज़ आई थी तो एहितयात के तौर पर हम ऐसा कर लेते हैं और बाद में चुदाई प्रोग्राम फिर शुरू कर देंगे.

मैंने कहा- ताश खेलने के साथ हम बातें भी करते जाते हैं. तो चलो यह बताओ कि सबसे पहले सेक्स किस के साथ और कब किया अगर आपको कोई ऐतराज़ न हो तो? जेनी तुम सबसे पहले बताओ.जेनी बोली- सबसे पहले मेरे साथ एक दूर के एक कजिन ने सेक्स किया. वो ऐसे हुआ कि मेरा कजिन बॉम्बे से अल्मोड़ा घूमने आया हुआ था और हमारे घर ही ठहरा हुआ था, देखने में काफी हैंडसम और तेज़ तरार लड़का लग रहा था लेकिन मुझ पर रोज़ ही लाइन मारता था और मैं उसको अक्सर ज़्यादा भाव नहीं देती थी. लेकिन एक दिन जब मैं बाथरूम में नहाने गई तो मुझसे बाथरूम का दरवाज़ा लॉक करना छूट गया और जब मैं शरीर में साबुन लगा रही थी वो दरवाज़ा खोल कर अंदर आ गया और मुझको अपनी बाहों में उठा कर बेड रूम में ले आया. इससे पहले मैं सम्भल पाती, वो मेरे ऊपर चढ़ बैठा और मेरी कौमार्य की झिल्ली तोड़ कर मुझको चोद डाला साले ने!यह कह कर वो उदास हो गई लेकिन हम सबने उसको तसल्ली दी कि यह तो होना ही था एक दिन!

इतने में मेरे कमरे का दरवाज़ा खटका और मैंने फ़ौरन उठ कर दरवाज़ा खोल दिया तो बाहर दोनों मैडम खड़ी थी.मैंने कहा- आइये मैडम जी!दोनों धड़धड़ाती हुई कमरे में आ गई और लड़कियों और मुझको देख कर हंस पड़ी और बोली- यह चांडाल चोकड़ी क्या कर रही है?मैं बोला- कुछ नहीं, ताश खेल रहे थे और और गपशप मार रहे थे.निर्मल मैडम बोली- कहीं जुआ तो नहीं खेल रहे थे तुम सब?मैं बोला- यस मैडम, जुआ तो चल रहा है, जो हारेगा या फिर हारेगी उसको एक एक कोका कोला की बोतल देनी होगी हम सबको!मैंने टेबल पर पड़ी 10-12 बोतलों की तरफ इशारा कर दिया.
 
दोनों मैडम बोतलों को देख कर हंसने लगी.मैंने कहा- क्यों मैडम जी, एक एक कोकाकोला हो जाए दोनों के लिए?दोनों मैडम हंस पड़ी और वापस जाते हुए बोली- वेरी गुड सतीश, तुम एक अच्छे लीडर और दोस्त भी हो! कैरी ऑन!

मैं उनको दरवाज़े तक छोड़ कर दरवाज़ा बंद कर के वापस वहीं बैठ गया और मेरे साथ बैठी पूनम को मैंने एक गहरी जफी मारी और उसके होटों को चूम लिया और बोला- पून्नो, बाल बाल बचे आज तो! नहीं तो हम सब की बेइज़्ज़ती हो जाती. चलो आओ चुदाई करें.

यह सुन कर सब लड़कियाँ खूब हंस पड़ी और मैंने अब जस्सी को घेर लिया और कहा- ड्रेस मत उतारो, वैसे ही तुम्हारी ले लेते हैं, ले लूँ क्या तुम्हारी?जस्सी भी बनती हुई बोली- क्या लेना चाहते हो मेरी सतीश राजा?मैं भी शरारत के लहजे में बोला- वही जो तुम आगे चल कर अपने हसबंड को दोगी, उसमें से थोड़ी सी मुझको दे दो ना प्लीज?

सब लड़कियाँ जस्सी के पीछे पड़ गई और हंस कर कहने लगी- दे दो ना ज़ालिम जस्सी, जो सतीश मांग रहा है, नहीं तो हम दे देंगी अपनी उसको!जस्सी ने मुंह बनाते हुए अपनी ड्रेस को ऊपर किया और पलंग के ऊपर झुक गई और मैंने उसके पीछे खड़ा होकर अपने खड़े लंड को उसकी चूत में डाल दिया और शुरू में धीरे और फिर तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा.उसके चूतड़ों पर हलकी हल्की थपकी मारते हुए मैंने उसको चरम सीमा पर पहुंचा दिया और जब वो झड़ी तो मैंने उसको कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसकी कम्कम्पी महसूस करने लगा.

उसके बाद नेहा का नंबर लगा और उसको भी उसी पोजीशन में मैंने प्यार से और पूरे अख्तयार से ज़ोरदार चोदा.

जब वो घुड़सवार भी गिर गई तो बारी पूनम की आई और वो कहने लगी- मैं तो घोड़ी चोदन पोजीशन में चुदवाऊँगी.भला मुझको क्या ऐतराज़ हो सकता था, वो फ़ौरन बेड पर घोड़ी बन गई और बाकी लड़कियाँ मुझको दूल्हे के रूप में सजाने की कोशिश करने लगी और जस्सी की नकली चोटी को मेरे माथे में बाँध कर वो बाकायदा नकली बैंड बजाती हुए मुझको घोड़ी तक ले गई लेकिन तब तक घोड़ी खुद हंसी के मारे लोटपोट हो रही थी तो कहाँ और कौन सी घोड़ी पर चढ़ना है, यह भी समझ नहीं आ रहा था.

वहाँ एक पुरानी माला पड़ी थी, जेनी ने उसको मेरे खड़े लंड के ऊपर डाल दी और क्यूंकि घोड़ी अभी भी हंस रही थी, तो वो सब मुझको पकड़ कर कमरे का एक और चक्कर लगाने लगी.जब वापस पहुँचे तो घोड़ी नार्मल हो चुकी थी, 4 लड़कियों ने मुझको उसके ऊपर बैठाने की कोशिश की लेकिन मैंने कहा- मैं खुद बैठ जाऊँगा, अब मेरी सुहागरात शुरू हो रही है, सब मेहमान घर जाएँ.

पूनम की सवारी करते हुए मैंने दो बार गिरने का नाटक किया और फिर लंड को चूत के मुंह पर रख कर ज़ोर का धक्का मार और जस्सी के मुंह से आवाज़ निकली- मार डाला साले ने उफ्फ्फ मेरी माँ!मैं भी मज़ाक में बोला- अगर दर्द हो रहा हो तो निकाल लूँ क्या?

अब नेहा को कहा- धक्कों की गिनती करती जाओ ताकि पूनम की डिग्री में यह स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाए कि- यह छात्रा 101 नंबरों से पास हुई.तब सब लड़कियाँ धीरे धीरे धक्कों की गिनती बोलती रही और जब मेरी स्पीड बहुत तेज़ हो गई तो धक्कों की गिनती कर पाना मुश्किल हो गया और जस्सी अब पूनम के चूतड़ों पर ज़ोर ज़ोर से हाथों की थपकी भी मार रही थी.थोड़ी देर में 110 की गिनती के बाद पूनम धराशयी हो गई और उसकी चूत ने अपनी हार मान ली.

इस तरह आगरा की वो रात समाप्त हुई और अगले दिन का प्रोग्राम केवल आगरा शहर घूमने का था तो जल्दी उठने की कोई बंदिश नहीं थी.मैं लड़कियों को उनके कमरों में छोड़ कर वापस आकर गहरी नींद में सो गया.

कहानी जारी रहेगी
 
ट्रेन में शमा और रूबी की चूत चुदाई

इस तरह आगरा की वो रात समाप्त हुई और अगले दिन का प्रोग्राम केवल आगरा शहर घूमने का था तो जल्दी उठने की कोई बंदिश नहीं थी. मैं लड़कियों को उनके कमरों में छोड़ कर वापस आकर गहरी नींद में सो गया.

अगले दिन नाश्ता करके हम सब अलग अलग आगरा शहर घूमने के लिए निकल गए लेकिन हमारा ग्रुप एक साथ था, हम सब टैक्सी करके शहर के खास खास बाज़ारों में घूमने चल दिए.

जेनी मुझसे बहुत खुश थी और बार बार वो मेरे पास आने की कोशिश कर रही थी और जब भी अवसर मिलता वो मेरे पास आ जाती और अपने मुम्मों को मेरे बाज़ू के साथ स्पर्श करवा देती और यह मुझ को बहुत ही अच्छा लगता था.मैं भी कोई मौका नहीं छोड़ता उसके चूतड़ों को हाथ लगाने में और उसकी रेशमी साड़ी पर मेरा हाथ उसके गोल गोल नितम्बों पर फिसल जाता था.यह खेल बहुत ही चुपचाप चल रहा था.

सब लड़कियाँ एक चूड़ी वाले की दूकान पर जा कर रुक गई और चूड़ियाँ पसंद करने में लग गई, मैं जेनी के पीछे खड़ा होकर उसको चूड़ियों के रंगों के बारे में बता रहा था और हर बार मेरा लौड़ा जेनी के चूतड़ों में जाकर लगता था चाहे वो जाने या फिर अनजाने में ही हो लेकिन मैंने महसूस किया कि जेनी को यह अच्छा लग रहा था.

कुछ लड़कियाँ साड़ी की दूकान पर जाकर खड़ी हो गई और नए ढंग की साड़ियाँ देखने लगी लेकिन पूनम बेचारी पीछे पीछे ही खड़ी रहती थी क्यूंकि मुझको लगता था कि उसके पास शायद पैसे नहीं थे.मैं उसके पास गया और उसके कान में कहा- पूनम महारानी, जो पसंद हो वो खरीद लो, पैसों की फ़िक्र ना करो मैं हूँ ना?वो बोली- वो तो ठीक है, लेकिन तुमको तो चुकाने पड़ेंगे ना, आज नहीं तो कल, इसलिए जिस वस्तु के पैसे पास ना हों, उसकी कभी ना इच्छा करो, यह मेरी माँ ने मेरे कान में डाल रखा है. तो सतीश राजा, तुम बेफिक्र रहो, हमको जब ज़रूरत होगी तो ज़रूर मांग लेंगे.

मैं बोला- अच्छा तो ठीक है, तुम यहाँ से मेरी होने वाली दुल्हन के लिए तो साड़ी पसंद कर सकती हो न?पूनम बोली- तुम्हारी होने वाली दुल्हन? कौन है? कहाँ है? बताओ तो सही?मैं उसके कान फिर बोला- मम्मी जी ने चुन रखी है! तुम मेरा कहा मान कर उसके लिए एक सुंदर सी साड़ी चुन लो जो तुमको पसंद हो!तब पूनम ने एक बहुत ही सुंदर साड़ी पसंद कर ली और मैंने उसके पैसे चुका दिए.

अभी थोड़ी दूर आगे गए होंगे कि दो अपने ही कॉलेज की लड़कियाँ भी मिल गई, उन्होंने मुझको घेर लिया, कहने लगी- सतीश यार तुम तो आजकल कॉलेज में छाए हुए हो और लड़कियों में ख़ास तौर पर बहुत पॉपुलर हो रहे हैगो.मैं भी बोला- यह कैसे कह रहे हैगो? कौन सी लड़की के साथ में बहुत ही पॉपुलर हो रिया हैगो?

पहले वाली लड़की बोली- अच्छी नक़ल लगा लेते हो सतीश… लेकिन मुख्य बात को टालो नहीं, कभी हमारे साथ भी तो पॉपुलर होकर देखो ना यार?मैं बोला- सच कह रही हो तुम? अगर यह सच है तो आज रात में ट्रेन में पॉपुलर हो जाते हैं तुम्हारे साथ भी! आप दोनों ने अपना नाम तो बताया ही नहीं? बताओ बिना नाम के कैसे पॉपुलर हो जा रहे हैगो?

मेरी नकलबाज़ी से दोनों लड़कियाँ हंस पड़ी और बोली- मेरा नाम रूबी है और इसका नाम शमा है और हम दोनों तुम्हारे ही कॉलेज में इंटर के दूसरे साल में हैं.मैं बोला- ठीक है, आज रात को ट्रेन में अपनी पॉपुलैरिटी का टेस्ट कर लेते हैं, क्यों?दोनों ने हंस कर कहा- ठीक है… लेकिन यह तो तुमने बताया नहीं कि इस टेस्ट में क्या करना होता है?मैं बोला- हम सब इस टेस्ट में एक दूसरे को कहानी और जोक्स सुनाते हैं और खूब हँसते खेलते हैं, बस यही होता है पॉपुलैरिटी टेस्ट.

दोनों के चेहरे लटक गए उदासी में और फिर रूबी बोली- लेकिन मैंने तो सुना था कि आपके साथ बहुत कुछ होता है?मैं अब मज़े लेने लगा था, मैंने बिल्कुल अनजान बनते हुए कहा- मेरे साथ बहुत कुछ क्या होता है? यह नहीं बताया गया था आप सब को?रूबी बोली- यही मौज मस्ती!!मैं बोला- अच्छा मौज मस्ती? हाँ वो तो बहुत होता है हमारे साथ हम सब मिल कर खूब मौज मस्ती करते हैं जैसे कल कि रात ही हम 4-5 लड़के लड़कियों ने मिल कर छुपन छुपाई खेली थी फिर ‘आई स्पाई’ जैसी गेम भी खेली थी. आप खेलना चाहोगी हमारे साथ ये गेम्स?

रूबी मेरे को घूर कर देखने लगी, शायद उसको शक हो गया था कि मैं उसके साथ मज़ाक कर रहा था.तब शमा बोल पड़ी- हमने तो यह सुना है कि आप सब मिल कर सेक्स जैसी गेम्स भी खेलते हो?
 
अब मैं गंभीर हो गया और बोला- मैं नहीं जानता, यह सब तुम को कहाँ से पता चला है लेकिन अगर आप के मन में सेक्स जैसी किसी गेम को खेलने की इच्छा है तो साफ़ साफ़ कहिये न, यूं घुमा फिरा कर कहने में क्या फायदा?तब रूबी बोली- आप का मतलब है कि आप सेक्स करने के लिए तैयार हैं?मैं बोला- आप अगर तैयार हैं तो मैं भी तैयार हूँ और वैसे भी आप जैसी सुन्दर कन्याओं को देख कर सब को हो जाये प्यार तब भला कौन कर सकता है इंकार? अब बोलिए आप की क्या मर्ज़ी है?

शमा बोली- आपने तो सुना ही होगा कि ‘शमा तो जलती है हर रंग में सहर होने तक…’मैं बोला- आपका मतलब है कि आप रात से ले कर सुबह तक जलना चाहती है मेरे साथ?शमा ने चैलेंज भरी आवाज़ में कहा- क्या आप पूरी रात से लेकर सुबह तक शमा जला सकते हैं?मैं बोला- आप आज़मा कर तो देखिये, ज़रा करके तो देखिये और हमसे करवा कर तो देखिये? बोलिए क्या इरादा है? जल्दी कीजिये मेरे साथ आई 5-5 शमाएँ इधर ही आने वाली हैं.

रूबी ने उधर देखा जिधर पूनम, नेहा, जेनी, जस्सी और डॉली दूकान पर साड़ी देख रही थी.रूबी और शमा दोनों बोली एक साथ- हम तैयार हैं, बोलो क्या करना होगा?मैं बोला- मैं आप दोनों को एक 2 सीट वाला केबिन दिलवा दूंगा अगर आप आज रात ही शमा जलाना चाहती हों तो, नहीं तो लखनऊ जाकर देख लेंगे कब और कहाँ?

शमा बोली- ठीक है, मैं शमा तो आज रात ही अपनी शमा जलाना चाहती हूँ और तुम रूबी कब और कहाँ बोलो?रूबी बोली- जब शमा जलेगी तो भँवरे तो आएंगे ही, एक आधा मेरे हिस्से भी आ जाए तो बहुत अच्छा है. मेरी भी हाँ है आज रात को शमा के साथ जलने की!

मैं बोला- आज रात को 11-12 के बीच में प्रोग्राम रख लेते हैं अगर दोनों शमा जलने के लिए तैयार हों तो!दोनों एक साथ बोली- तैयार हैं मेरे मालिक, मेरे आका.मैं बोला- फिर मिलते हैं होटल में!यह कह कर मैं पूनम के पास खड़ा हो गया और कुछ ही मिनटों में उसने कह दिया- सतीश, निकालो 200 रूपए तुम्हारी होने वाली बीवी की दूसरी साड़ी खरीदी है.मैंने झट सो उसको 200 रूपए दे दिए और बाकी सब लकड़ियों ने भी कुछ न कुछ खरीदा था, सब लड़कियाँ ख़ुशी ख़ुशी से वापसी के लिए तैयार हो गई.

होटल में लंच करके मैं तो बहुत ही गहरी नींद में सो गया और फिर शाम को उठा तो स्टेशन जाने की तैयारी शुरू हो गई और हम सब 8 बजे आगरा स्टेशन पर पहुँच गये और ट्रेन तो खड़ी थी, उसमें सामान भी रखवा दिया.

जैसा कि आते समय केबिन बांटे थे, वैसे ही अब भी बाँट दिए लेकिन इस बार रूबी और शमा को एक अलग केबिन दे दिया था जो बिल्कुल मेरे साथ वाला केबिन था और बाकी लड़कियों को भी इसी तरह एडजस्ट कर दिया.मेरा दो सीट वाला केबिन सिर्फ मेरे अकेले के ही पास था क्योंकि एक लड़का जो अपने दादा दादी को मिलने गया था वो वापस नहीं जा सका क्यूंकि वो बीमार हो गया था.

मैं अपनी फ्रेंड्स को मिलने गया और पूछा- क्या प्रोग्राम है?तो सबने कहा कि वो बहुत थक चुकी हैं, आज रात का कोई प्रोग्राम नहीं है.थोड़ी देर मैं उनके पास बैठ कर अपने केबिन की तरफ वापस जाने लगा तो पूनम ने उठ कर मुझ को एक टाइट जफ़्फ़ी मार दी और मेरे होटों पर एक गर्म और जलती हुई किस कर दी, मैं भी उसको गोल गुदाज़ नितम्बों को थोड़ा मसलने लगा और फिर उसके मोटे मुम्मों की गर्मी महसूस करने लगा.तब नेहा बोली- बस करो पूनम अब बाकी घर जा कर लेना.

अब जाने के लिए तैयार हुआ तो जेनी ने घेर लिया और फिर सब बारी बारी से मुझको चूमने और जफ़्फ़ी डालने लगी.वहाँ से निकला तो शमा और रूबी के केबिन में भी गया. दोनों ने सलवर सूट पहन रखा था, उन दोनों ने भी मुझ को घेर लिया और खूब चूमाचाटा और बाहों में भींचा, मैंने महसूस किया कि शमा ज़्यादा खूबसूरत थी, रूबी उससे थोड़ी कम थी.शमा के मुम्मे और नितम्ब मोटे और उभरे हुए थे, शमा ज़्यादा सेक्सी और फ्रैंक थी और रूबी ज़रा सोच समझ कर बात करने वाली थी.
 
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