S
StoryPublisher
Guest
नैना और पारो की गांड मारी
नैना काफ़ी देर चोदती रही मुझको… और जब उस का मन भर गया तो उसने मुझको कुछ इस तरीके से चोदा कि मेरा फव्वारा छूट गया.फिर हम एक दूसरे के बाहों में ही सो गए.
अगले दिन सोनू, छवि और उनकी सहेलियाँ अपने घर चली गई. कॉलेज से वापस आने पर नैना ने बताया कि गाँव से फ़ोन पर निर्मल से बात हुई थी, वो कह रही है कि फुलवा के घर में भी लड़का हुआ है. बधाई हो आपको बहुत सी, फिर पिता बन गए आप!यह कहते हुए वो मुझको चिड़ा रही थी.मैं बोला- चलो अच्छा हुआ, उसको भी बच्चे की आवश्यकता थी.
अगले दिन जब मैं कॉलेज पहुंचा तो मेरे एक खास मित्र ने सूचना दी कि कालेज की ड्रामा क्लब अपने मेंबर्स को 3 दिन के ट्रिप पर ले जा रही है, यह ट्रिप नैनीताल इत्यादि सुन्दर स्थलों की सैर करवाएगा, प्रत्येक छात्र और छात्रा को 100 रूपए देने होंगे.सारे छात्र कालेज द्वारा एक बस में ले जाए जाएंगे, खाने-पीने और रहने का बंदोबस्त भी कालेज ही करेगा, जो जाना चाहेंगे उनको नाम जल्दी लिखवाना पड़ेगा और पैसे भी शीघ्र ही देने होंगे.
शाम को घर आकर मैंने गाँव फ़ोन किया और पूछा तो मम्मी बोली- ज़रूर जाओ और पैसे की ज़रूरत हो तो फ़ोन कर देना, मैं बैंक में डलवा दूँगी.मैंने कहा- ठीक है.
अगले दिन मैंने अपना नाम लिखवा दिया और पैसे भी दे दिए, नैना ने मेरे जाने की तैयारी भी शुरू कर दी.उस रात मैंने नैना और पारो को खूब चोदा. पारो बेचारी कुछ कम चुदी थी तो उसकी चुदाई पर ख़ास ध्यान दिया.
नैना बोली- छोटे मालिक, क्या आपका दिल कभी गांड चोदने का नहीं करता?मैं बोला- गांड चोदने के बारे में कभी सोचा नहीं. क्यों तुम्हारा दिल है गांड मरवाने का?नैना बोली- मैंने भी कभी गांड मरवाई नहीं न, तो कभी कभी इच्छा करती है कि गांड चुदाई का भी मज़ा लेना चाहये न! क्यों पारो, तुम्हारा दिल नहीं करता क्या?पारो बोली- करता तो है लेकिन फिर मन में भय आ जाता है कि कहीं दर्द न हो बहुत?नैना बोली- देखो पारो, जब तक करके नहीं देखते, तब तक कुछ भी डर नहीं, चलो छोटे मालिक.
मैं भी तयार हो गया.नैना उठी और नंगी ही रसोई में चली गई और देसी घी थोड़ा सा कटोरी में ले आई. फिर उसने अपनी और पारो की गांड के ऊपर और अंदर देसी घी काफी सारा लगा दिया और कुछ देसी घी उसने मेरे लौड़े पर भी लगा दिया.अब हम तीनों का बदन देसी घी से महक रहा था.
पहले बिस्तर पर नैना घोड़ी बनी और पारो मेरे और नैना के बीच में मदद करने के लिए बैठ गई.
मैं जैसे ही अपने खड़े लंड का निशाना साधने लगा, पारो ने घी से चुपड़ी नैना की गांड पर मेरा लौड़ा रख दिया, फिर वो बोली- धीरे से लंड का मुंह अंदर जाने दो.मैंने भी हल्का सा धक्का मारा और लंड का थोड़ा सा हिस्सा गांड के अंदर चल गया.नैना थोड़ी से बिदकी लेकिन फिर संयत होकर शांत होकर घोड़ी बनी रही..
पारो ने मुझको और धक्का मारने का सिगनल दिया और मैंने ज़रा और लंड अंदर धकेल दिया. मुझको ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड एक बड़ी टाइट पाइप के अंदर जा रहा था.
इस तरह धीरे धीरे नैना की गांड में मेरा सारा लौड़ा समा गया. लंड की जो हालत थी वो ब्यान नहीं की जा सकती क्योंकि गांड की बहुत ज्यादा पकड़ होती है और लंड बेचारा यह महसूस कर रहा था जैसे उसको एक बहुत ही तंग जेल की सलाखों में बंद कर दिया गया.
फिर भी मैंने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये.पारो लगातार नैना को देख रही थी और जब उसने देखा कि नैना को मज़ा आने लगा है तो उसने मुझको इशारा किया और मैंने धक्कों की स्पीड तेज़ कर दी.
अब मैंने महसूस किया कि मेरे लंड को नैना की गांड, जैसे गाय का दूध दोहते है, वैसे खुल और बंद हो रही थी, इस कारण मुझको बहुत ही आनन्द आ रहा था और मैं थोड़े समय में ही एक ज़ोरदार धक्के के बाद छूट गया.लेकिन मैंने लंड को निकाला नहीं और उसको वैसे ही सख्त हालत में गांड के अंदर ही पड़ा रहने दिया.
इधर पारो नैना की चूत को और उसके भग को मसल रहे थी जिससे नैना का मज़ा बहुत अधिक बढ़ गया था, वो अब गांड को खुद ही आगे पीछे करने लगी और मैंने अपने धक्के रोक दिए और नैना की गांड चुदाई का आनन्द लेने लगा.
थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि नैना की गांड एक बार फिर खुल बंद हो रही है.मैंने उससे पूछा- क्यों नैना, एक बार और छूटा तेरा?उसने हाँ में सर हिला दिया.तब मैंने कहा- और चोदूँ या फिर बस?नैना बोली- बस छोटे मालिक, बहुत हो गया.
मैं फ़ौरन घोड़ी से नीचे उतर गया.
तब पारो नैना की तौलिये से सफाई करने लगी. थोड़ी देर आलखन करने के बाद मैंने पारो को इशारा किया कि आ जाओ मैदान में!
वो कुछ हिचकचा रही थी. यह देख कर मैंने कहा- पारो, अगर नहीं इच्छा, तो रहने दो, फिर कभी सही!पारो बोली- नहीं छोटे मालिक, ऐसी बात नहीं है. मैं सोच रही थी कि आप थोड़ा आलखन कर लेते तो ठीक होता न!मैं बोला- नहीं नहीं, मैं बिल्कुल नहीं थका हूँ. अगर गांड मरवाने की इच्छा है तो आ जाओ. नहीं तो मैं तुम्हारी चूत ही ले लेता हूँ. बोलो जल्दी?पारो बोली- आ जाओ छोटे मालिक, आज गांड मरवाई का भी मज़ा ले लेती हूँ.
नैना उठी और उसने फिर से देसी घी मेरे लंड पर लगा दिया और कॅाफ़ी सारा पारो की गांड में डाल दिया.पारो बिस्तर में घोड़ी बन गई तो मैं उसके पीछे खड़ा हुआ और नैना ने मेरा लंड पारो की गांड पर रख दिया और बोली- मारो धक्का हल्का सा!
मैंने भी हल्का सा धक्का मारा और लंड बहुत सा अंदर चला गया, पारो ज़रा भी नहीं हिली और जल्दी ही पूरा लंड अंदर ले गई.
पारो की गांड मुझको कुछ कम टाइट लगी.फिर मैंने लंड की स्पीड धीरे धीरे तेज़ कर दी.थोड़ी देर बाद मुझको लगा कि पारो को गांड में बड़ा मज़ा आ रहा है, वो बाकायदा लंड का जवाब हर बार गांड को को मेरे लंड की जड़ तक लाकर देती थी.अब मैंने तेज़ी से उसकी गांड में अपना लंड पेलना शुरू कर दिया और मुझको लगा कि उसकी चूत से भी पानी टपकना शुरू हो रहा है.हाथ लगाया तो वाकयी उसकी चूत से बड़ा ही गाढ़ा रस निकल रहा था.
मैंने उसकी भग को रगड़ना शुरू कर दिया और ऊपर से गांड में धक्के भी तेज़ कर दिए थे.कोई 10-12 धक्के इसी तरह ज़ोर से मारे तो पारो का शरीर काम्पने लगा और उसकी गांड अंदर से बंद और खुलना शुरू हो गई.
पारो हल्के से बोली- बस करो छोटे मालिक, मेरा पानी दो बार छूट चुका है गांड मरवाते हुए… उफ़्फ़, बड़ी ही मज़ेदार चुदाई है गांड की भी, मज़ा आ गया नैना.
मैं फिर दोनों के बीच में लेटा था.और इस तरह हम तीनों नंगे ही एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए.
कहानी जारी रहेगी.
नैना काफ़ी देर चोदती रही मुझको… और जब उस का मन भर गया तो उसने मुझको कुछ इस तरीके से चोदा कि मेरा फव्वारा छूट गया.फिर हम एक दूसरे के बाहों में ही सो गए.
अगले दिन सोनू, छवि और उनकी सहेलियाँ अपने घर चली गई. कॉलेज से वापस आने पर नैना ने बताया कि गाँव से फ़ोन पर निर्मल से बात हुई थी, वो कह रही है कि फुलवा के घर में भी लड़का हुआ है. बधाई हो आपको बहुत सी, फिर पिता बन गए आप!यह कहते हुए वो मुझको चिड़ा रही थी.मैं बोला- चलो अच्छा हुआ, उसको भी बच्चे की आवश्यकता थी.
अगले दिन जब मैं कॉलेज पहुंचा तो मेरे एक खास मित्र ने सूचना दी कि कालेज की ड्रामा क्लब अपने मेंबर्स को 3 दिन के ट्रिप पर ले जा रही है, यह ट्रिप नैनीताल इत्यादि सुन्दर स्थलों की सैर करवाएगा, प्रत्येक छात्र और छात्रा को 100 रूपए देने होंगे.सारे छात्र कालेज द्वारा एक बस में ले जाए जाएंगे, खाने-पीने और रहने का बंदोबस्त भी कालेज ही करेगा, जो जाना चाहेंगे उनको नाम जल्दी लिखवाना पड़ेगा और पैसे भी शीघ्र ही देने होंगे.
शाम को घर आकर मैंने गाँव फ़ोन किया और पूछा तो मम्मी बोली- ज़रूर जाओ और पैसे की ज़रूरत हो तो फ़ोन कर देना, मैं बैंक में डलवा दूँगी.मैंने कहा- ठीक है.
अगले दिन मैंने अपना नाम लिखवा दिया और पैसे भी दे दिए, नैना ने मेरे जाने की तैयारी भी शुरू कर दी.उस रात मैंने नैना और पारो को खूब चोदा. पारो बेचारी कुछ कम चुदी थी तो उसकी चुदाई पर ख़ास ध्यान दिया.
नैना बोली- छोटे मालिक, क्या आपका दिल कभी गांड चोदने का नहीं करता?मैं बोला- गांड चोदने के बारे में कभी सोचा नहीं. क्यों तुम्हारा दिल है गांड मरवाने का?नैना बोली- मैंने भी कभी गांड मरवाई नहीं न, तो कभी कभी इच्छा करती है कि गांड चुदाई का भी मज़ा लेना चाहये न! क्यों पारो, तुम्हारा दिल नहीं करता क्या?पारो बोली- करता तो है लेकिन फिर मन में भय आ जाता है कि कहीं दर्द न हो बहुत?नैना बोली- देखो पारो, जब तक करके नहीं देखते, तब तक कुछ भी डर नहीं, चलो छोटे मालिक.
मैं भी तयार हो गया.नैना उठी और नंगी ही रसोई में चली गई और देसी घी थोड़ा सा कटोरी में ले आई. फिर उसने अपनी और पारो की गांड के ऊपर और अंदर देसी घी काफी सारा लगा दिया और कुछ देसी घी उसने मेरे लौड़े पर भी लगा दिया.अब हम तीनों का बदन देसी घी से महक रहा था.
पहले बिस्तर पर नैना घोड़ी बनी और पारो मेरे और नैना के बीच में मदद करने के लिए बैठ गई.
मैं जैसे ही अपने खड़े लंड का निशाना साधने लगा, पारो ने घी से चुपड़ी नैना की गांड पर मेरा लौड़ा रख दिया, फिर वो बोली- धीरे से लंड का मुंह अंदर जाने दो.मैंने भी हल्का सा धक्का मारा और लंड का थोड़ा सा हिस्सा गांड के अंदर चल गया.नैना थोड़ी से बिदकी लेकिन फिर संयत होकर शांत होकर घोड़ी बनी रही..
पारो ने मुझको और धक्का मारने का सिगनल दिया और मैंने ज़रा और लंड अंदर धकेल दिया. मुझको ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड एक बड़ी टाइट पाइप के अंदर जा रहा था.
इस तरह धीरे धीरे नैना की गांड में मेरा सारा लौड़ा समा गया. लंड की जो हालत थी वो ब्यान नहीं की जा सकती क्योंकि गांड की बहुत ज्यादा पकड़ होती है और लंड बेचारा यह महसूस कर रहा था जैसे उसको एक बहुत ही तंग जेल की सलाखों में बंद कर दिया गया.
फिर भी मैंने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये.पारो लगातार नैना को देख रही थी और जब उसने देखा कि नैना को मज़ा आने लगा है तो उसने मुझको इशारा किया और मैंने धक्कों की स्पीड तेज़ कर दी.
अब मैंने महसूस किया कि मेरे लंड को नैना की गांड, जैसे गाय का दूध दोहते है, वैसे खुल और बंद हो रही थी, इस कारण मुझको बहुत ही आनन्द आ रहा था और मैं थोड़े समय में ही एक ज़ोरदार धक्के के बाद छूट गया.लेकिन मैंने लंड को निकाला नहीं और उसको वैसे ही सख्त हालत में गांड के अंदर ही पड़ा रहने दिया.
इधर पारो नैना की चूत को और उसके भग को मसल रहे थी जिससे नैना का मज़ा बहुत अधिक बढ़ गया था, वो अब गांड को खुद ही आगे पीछे करने लगी और मैंने अपने धक्के रोक दिए और नैना की गांड चुदाई का आनन्द लेने लगा.
थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि नैना की गांड एक बार फिर खुल बंद हो रही है.मैंने उससे पूछा- क्यों नैना, एक बार और छूटा तेरा?उसने हाँ में सर हिला दिया.तब मैंने कहा- और चोदूँ या फिर बस?नैना बोली- बस छोटे मालिक, बहुत हो गया.
मैं फ़ौरन घोड़ी से नीचे उतर गया.
तब पारो नैना की तौलिये से सफाई करने लगी. थोड़ी देर आलखन करने के बाद मैंने पारो को इशारा किया कि आ जाओ मैदान में!
वो कुछ हिचकचा रही थी. यह देख कर मैंने कहा- पारो, अगर नहीं इच्छा, तो रहने दो, फिर कभी सही!पारो बोली- नहीं छोटे मालिक, ऐसी बात नहीं है. मैं सोच रही थी कि आप थोड़ा आलखन कर लेते तो ठीक होता न!मैं बोला- नहीं नहीं, मैं बिल्कुल नहीं थका हूँ. अगर गांड मरवाने की इच्छा है तो आ जाओ. नहीं तो मैं तुम्हारी चूत ही ले लेता हूँ. बोलो जल्दी?पारो बोली- आ जाओ छोटे मालिक, आज गांड मरवाई का भी मज़ा ले लेती हूँ.
नैना उठी और उसने फिर से देसी घी मेरे लंड पर लगा दिया और कॅाफ़ी सारा पारो की गांड में डाल दिया.पारो बिस्तर में घोड़ी बन गई तो मैं उसके पीछे खड़ा हुआ और नैना ने मेरा लंड पारो की गांड पर रख दिया और बोली- मारो धक्का हल्का सा!
मैंने भी हल्का सा धक्का मारा और लंड बहुत सा अंदर चला गया, पारो ज़रा भी नहीं हिली और जल्दी ही पूरा लंड अंदर ले गई.
पारो की गांड मुझको कुछ कम टाइट लगी.फिर मैंने लंड की स्पीड धीरे धीरे तेज़ कर दी.थोड़ी देर बाद मुझको लगा कि पारो को गांड में बड़ा मज़ा आ रहा है, वो बाकायदा लंड का जवाब हर बार गांड को को मेरे लंड की जड़ तक लाकर देती थी.अब मैंने तेज़ी से उसकी गांड में अपना लंड पेलना शुरू कर दिया और मुझको लगा कि उसकी चूत से भी पानी टपकना शुरू हो रहा है.हाथ लगाया तो वाकयी उसकी चूत से बड़ा ही गाढ़ा रस निकल रहा था.
मैंने उसकी भग को रगड़ना शुरू कर दिया और ऊपर से गांड में धक्के भी तेज़ कर दिए थे.कोई 10-12 धक्के इसी तरह ज़ोर से मारे तो पारो का शरीर काम्पने लगा और उसकी गांड अंदर से बंद और खुलना शुरू हो गई.
पारो हल्के से बोली- बस करो छोटे मालिक, मेरा पानी दो बार छूट चुका है गांड मरवाते हुए… उफ़्फ़, बड़ी ही मज़ेदार चुदाई है गांड की भी, मज़ा आ गया नैना.
मैं फिर दोनों के बीच में लेटा था.और इस तरह हम तीनों नंगे ही एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए.
कहानी जारी रहेगी.